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भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है आम

रायपुर आम केवल एक फल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादों को बडे रूप में विकसित करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए।  राज्यपाल  रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने की। राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व में आम उत्पादन में अग्रणी है और देश में एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय आमों की विशेषताओें का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां और महोत्सव देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादकों को एक-दूसरे की उन्नत खेती पद्धतियों, नई किस्मों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की बहुत संभावनाएं है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के व्यापक अवसर मौजूद है। मैंगों टूरिज्म की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं है। राज्यपाल ने कहा कि आम उत्पादन के साथ-साथ इसके वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को मिलकर कार्य करना चाहिए।  डेका ने कहा कि हमारे जीवन को ईको फैंडली बनाना आज की आवश्यकता है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना होगा। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि आम फलों का राजा है। आम की पत्तियों और लकड़ियों का भी हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। हमारे घरों में मांगलिक कार्य होने पर हम आम की पत्तियों से तोरण बनाते है एवं आम की सूखी लकड़ियों का उपयोग हवन एवं पूजा में करते है। इस महोत्सव में 250 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए है। मुख्यमंत्री  साय ने प्रदेशवासियोें को इस महोत्सव का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। प्रदर्शनी मे बेर के आकार से लेकर बीजापुर के हाथीझुल जैसे बड़े किस्मों के आम भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधामंत्री  नरेन्द्र मोदी के मंशानुरूप किसानों की आय दुगुनी करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और आम की खेती भी इस संकल्प को पूरा करने के लिए सहायक सिद्ध होगी। आम महोत्सव के उद्घाटन पश्चात राज्यपाल  डेका और मुख्यमंत्री  साय ने आम उत्पादकों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी में आम के विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया ।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष  चंद्रहास चंद्राकर, छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष  सुरेश चंद्रवंशी एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, निदेशक अनुसंधान सेवाएं डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी सहित अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपति, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, किसान एवं बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल ही जीवन का मुख्य आधार है और हमारी पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित और संवर्धित करना हमारा परम सामाजिक और पर्यावरणीय कर्तव्य है। इसी पावन उद्देश्य के साथ राज्य में शुरू किया गया 'जल गंगा संवर्धन अभियान' आज केवल एक शासकीय कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के सहयोग से एक पवित्र जन-आंदोलन का रूप ले चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण और पुनर्जीवन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुआ है, जिसके अंतर्गत अब तक रिकॉर्ड 2 लाख से अधिक जल संरचनाओं का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश जल सहेजने के इस पुनीत कार्य में पूरे देश में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। 6 हजार 330 करोड़ रुपये की राशि से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य हुए पूरे जल गंगा संवर्धन अभियान-2026 के तहत राज्य में कुल 3,67,777 कार्यों का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें से 2,00,844 महत्वपूर्ण संरचनाओं का निर्माण और जीर्णोद्धार पूरा किया जा चुका है, जबकि 1,51,093 कार्य तीव्र गति से प्रगति पर हैं। इस विशाल अभियान को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से क्रियान्वित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा कुल 10,644.02 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से अब तक 6,330.81 करोड़ रुपये (लगभग 59.5%) की राशि का उपयोग किया गया है, जो विकास की वास्तविक गति को दर्शाती है। कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में हुई जल क्रांति ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जल आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए रिकॉर्ड 57,794 खेत तालाब और 91,838 डग वेल रिचार्ज (कुआं पुनर्भरण) संरचनाओं का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। इसके अतिरिक्त, पारंपरिक और नए जल स्रोतों को सहेजने के उद्देश्य से 29,906 जल संरक्षण एवं पुनर्भरण संरचनाओं तथा 126 भव्य 'अमृत सरोवरों' का कार्य शत्-प्रतिशत् पूरा किया जा चुका है। सिंचाई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 1,152 विशेष सिंचाई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और पुरानी जल संरचनाओं के पुनर्जीवन के लिए 2,721 मरम्मत एवं रखरखाव संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है। जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत सामाजिक, पर्यावरणीय और शैक्षणिक स्तर पर भी विशेष प्रयास किए गए हैं। वाटरशेड प्रबंधन के तहत 4,822 कार्यों को पूर्ण किया गया है, जिससे भूमिगत जल स्तर में व्यापक सुधार होगा। वहीं, स्कूलों में स्वच्छता और शुद्ध पेयजल सुनिश्चित करने के लिए 'WoW मोबाइल ऐप' के माध्यम से 5,275 पानी की टंकियों की सफाई का कार्य संपन्न कराया गया है। इसके अलावा, 'जल संसद जल बंधन 2.0' (JSJB 2.0) पहल के तहत 21.23 लाख से अधिक कार्यों का सफल पंजीकरण किया गया है, जिसमें समय पर कार्य पूर्ण करने की उत्कृष्ट दर 91.3% दर्ज की गई है। देश के लिए मिसाल बनेगा मध्यप्रदेश का जल प्रबंधन मॉडल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय प्रदेश की जागरूक जनता, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समर्पित प्रशासनिक अमले को देते हुए कहा कि मध्यप्रदेश का यह सशक्त जल प्रबंधन मॉडल पूरे देश के लिए एक नई और अनुकरणीय दिशा तय करेगा। आने वाली पीढ़ियों को जल संकट से बचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और मध्यप्रदेश इस दिशा में निरंतर नवाचार करता रहेगा।  

योगी सरकार के प्रयास रंग लाए, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई गिरावट

योगी सरकार के प्रयासों का असर, पांच साल तक के बच्चों की मृत्यु दर में आई कमी एसआरएस की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मौत के आंकड़ों के सुधार कंगारू मदर केयर, सीपैप मशीन, मिल्क बैंक व नियमित टीकाकरण बने बड़े सहायक आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को प्रशिक्षण करने का भी मिला फायदा लखनऊ  योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश में नवजात से पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी आई है। आंकड़ों में आया यह सुधार हजारों बच्चों के सुरक्षित जीवन, लाखों परिवारों की उम्मीदों और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर बढ़ते विश्वास की कहानी दर्शाता है। साथ ही जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने की चुनौती भी पेश करता है।  नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई सेंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) की ताजा रिपोर्ट में नवजात से लेकर पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। वर्ष 2023 की तुलना में 2024 में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 26 से 25, शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 37 से 35 और पांच साल तक उम्र वाले बच्चों की मृत्युदर 42 से 41 रह गई है। यह सर्वे प्रति 1000 बच्चों के हिसाब से किया गया है।      बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी पर उत्तर प्रदेश का उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होना, जहाँ बच्चों की मृत्यु दर में सभी आयु वर्गों में कमी आई है, सबके सामूहिक समर्पण, अथक परिश्रम और जमीनी स्तर पर निरंतर किए गए प्रयासों का प्रमाण है। यह रुझान उत्साहजनक हैं तो हमें यह भी याद दिलाते हैं कि नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में कमी की रफ़्तार अभी भी उम्मीद से धीमी है और जन्म के तुरंत बाद होने वाली मृत्यु दर में खास बदलाव नहीं आया है। इससे साफ़ पता चलता है कि बच्चों की मृत्यु दर में कमी का अगला चरण प्रसव, डिलीवरी और जीवन के पहले 48 घंटों के दौरान दी जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर बहुत ज़्यादा निर्भर करेगा। स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की बाल रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ शालिनी त्रिपाठी के अनुसार प्रदेश में स्वास्थ्य केंद्रों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के अपग्रेड होने से एनएमआर व आईएमआर में कमी आई है। बीते तीन-चार सालों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर से लेकर जिला महिला अस्पताल के डाक्टरों व स्टाफ नर्स को लगातार प्रशिक्षित किया गया है। इसके अलावा नवजात को सांस लेने में दिक्कत होने पर लगाई जाने वाली सीपैप मशीन, कंगारू मदर केयर, मिल्क बैंक, निःशुल्क दवाओं व नियमित टीकाकरण भी शिशुओं की मृत्यु दर कम करने में सहायक साबित हुए हैं। इसके अलावा अस्पतालों में शुरू हुए मदर न्यूबार्न केयर यूनिट (एमएनसीयू), जिसमें प्रसव के बाद मां-बच्चे को एक साथ वार्ड में ठहराया जाता है, से भी बड़ा लाभ हो रहा है।  रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने से जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मिली मजबूती वीरांगना अवंती बाई महिला अस्पताल की स्टाफ नर्स डेजी रानी ने बताया कि नर्सों को नवजात शिशु की देखभाल पर नियमित रूप से साप्ताहिक वर्चुअल लर्निंग सेशन और समय-समय पर आमने-सामने रिफ्रेशर ट्रेनिंग दी जा रही है। इन ट्रेनिंग से उन्हें नवजात शिशु के खतरे के लक्षणों को पहचानने, समय पर रेफरल प्रोटोकॉल का पालन करने और जन्म के समय पुनर्जीवन प्रक्रियाओं को मजबूत करने में काफी मदद मिली है। वीरांगना अवंती बाई अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सलमान ने बताया कि बहुत से बच्चों की मौत संक्रमण व अस्वच्छता के कारण भी हो जाती थी। अब अस्पतालों में स्वच्छता व बच्चों को संक्रमण से बचाने के लिए भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्टाफ को प्रशिक्षित किया जाता है कि शिशु के पास आने से पहले डाक्टर, नर्स के हाथ साफ हों, प्रसूता का डिलिवरी क्षेत्र साफ हो, बच्चे को लपेटने वाला कपड़ा साफ हो, बच्चे की नाल काटने वाला उपकरण व नाल में बांधी जाने वाली क्लिप स्वच्छ हो। अस्पतालों में स्वच्छता व संक्रमण कम होना भी शिशु मृत्यु दर कम होने की एक वजह है।

शिक्षकों के लिए खुशखबरी! SC ने बढ़ाई TET क्वालिफाई करने की डेडलाइन

 नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों के लिए टीईटी की पात्रता हासिल करने की समय सीमा को एक साल बढ़ा दिया है। शीर्ष अदालत ने कार्यरत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए अब 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है। पहले यह डेडलाइन 31 अगस्त 2027 थी। कोर्ट ने यह फैसला कई पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया है। हालांकि अदालत ने उन याचिकाओं को फिर से खारिज कर दिया है जिसमें 2009 से पहले नियुक्त हुए सभी टीचर्स को अनिवार्य टीईटी के दायरे से बाहर रखने की मांग की गई थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने स्पष्ट कहा कि देश में काम कर रहे सभी टीचरों को 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। ऐसे में टीईटी अनिवार्यता मामले में देश के लाखों शिक्षकों की नौकरी पर खतरा अभी भी कायम है। कुछ दिन पहले देश की सबसे बड़ी अदालत ने राहत की मांग कर रहे शिक्षकों को दो टूक कहा था कि वे स्वार्थी न बनें और केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में ही न सोचें, बल्कि उन बच्चों के बारे में भी विचार करें जिन्हें क्वालिटी वाली एजुकेशन की आवश्यकता है। अदालत ने यह कड़ी टिप्पणी तब की जब वह मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों तथा पश्चिम बंगाल व केरल के शिक्षक संघों द्वारा दायर की गई कईं टीईटी अनिवार्यता विरोधी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में सितंबर 2025 के सर्वोच्छ न्यायालय के उस फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसमें देशभर के गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले कार्यरत शिक्षकों को दो वर्षों के भीतर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने का निर्देश दिया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने इन पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। क्या है पूरा मामला आपको बता दें कि टीचरों को नौकरी में बने रहने या प्रमोशन पाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य करने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से देश भर के हजारों प्राइमरी शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। यूपी, झारखंड, एमपी व राजस्थान समेत देश के विभिन्न राज्यों में ऐसे लाखों शिक्षक हैं जो बगैर टीईटी पास किए वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अब इन टीचरों को 3 साल ( सितंबर 2025 कोर्ट के फैसले की तिथि से ) में टीईटी पास करना ही होगा वरना या तो इन्हें इस्तीफा देना होगा या फिर इन्हें जबरन रिटायर कर दिया जाएगा। यानी इन्हें 31 अगस्त 2028 तक टीईटी पास करना ही होगा। इस कड़े फैसले से सिर्फ उन्हें छूट मिलेगी जिनकी नौकरी 5 साल की बची है। लेकिन इन्हें भी अगर प्रमोशन चाहिए तो टीईटी पास करना ही पड़ेगा। सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ तमिलनाडु, यूपी, मध्य प्रदेश समेत कई राज्य पुनर्विचार याचिका दायर कर चुके हैं। स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे कुछ दिन पहले सुनावाई के दौरान तमिलनाडु ने तर्क दिया था कि इस फैसले से अकेले उस राज्य में लगभग चार लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। राज्य ने यह भी कहा था कि यदि इसे जमीनी स्तर पर लागू किया गया, तो राज्य को शिक्षकों के बिना कक्षाएं चलानी पड़ेंगी। स्कूल टीचरों से खाली हो जाएंगे। द हिन्दू की एक रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति दिपांकर दत्ता ने कहा, 'बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009) बच्चों के लिए बनाया गया है। केवल अपनी नौकरी की सुरक्षा के बारे में सोचकर मतलबी मत बनिए और यह मत कहिए कि मुझे केवल अदालत से अपनी नौकरी की सुरक्षा के आदेश चाहिए और मैं बच्चों के बारे में नहीं सोचूंगा।'वे न्यायमूर्ति मनमोहन के साथ गठित पीठ की अध्यक्षता कर रहे थे और समीक्षा याचिकाकर्ताओं पर जवाब दे रहे थे। जस्टिस दत्ता ने याद दिलाई टीईटी वाली धारा जस्टिस दत्ता ने शिक्षा का अधिकार 2009 अधिनियम की धारा 23(2) का जिक्र किया था, जिसमें प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी और शिक्षक शिक्षा संस्थानों की अपर्याप्तता के मामलों में शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्य योग्यता हासिल करने के लिए पांच वर्ष का समय दिया गया है। इसके बाद न्यायाधीश ने धारा 23(2) के दूसरे प्रावधान की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसे 2017 में अधिनियम में संशोधन के माध्यम से जोड़ा गया था। इसमें 31 मार्च 2015 तक नियुक्त या कार्यरत उन शिक्षकों को अतिरिक्त राहत दी गई थी, जिनके पास न्यूनतम आवश्यक शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। उन्हें यह योग्यता प्राप्त करने के लिए चार वर्ष का अतिरिक्त समय दिया गया था।

छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम

किसानों की समृद्धि और आत्मनिर्भरता हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता: मंत्री रामविचार नेताम छत्तीसगढ़ नवा अंजोर विजन 2047: धान की अपेक्षा फसल विविधीकरण और डिजिटल खेती पर दे रहें हैं जोर: मंत्री रामविचार नेताम दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि: मंत्री रामविचार नेताम ठोस रसायनिक उर्वरक के विकल्प के रूप में नैनो यूरिया-डीएपी को दे रहे हैं बढ़ावा नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कृषि सम्मेलन में शामिल हुए मंत्री रामविचार नेताम रायपुर धान के कटोरे के रूप में विख्यात छत्तीसगढ़ अब परंपरागत धान की खेती से आगे बढ़कर फसल विविधीकरण, डिजिटल तकनीक और पर्यावरण अनुकूल स्थायी कृषि के एक नए युग में अग्रसर हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा लागू किए गए ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के तहत किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए चौतरफा रणनीति पर काम शुरू हो गया है। केन्द्रीय कृषि विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में नई दिल्ली में आयोजित इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में कृषि मंत्री राम विचार नेताम और कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने आज इस आशय की जानकारी दी।          कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में राज्य की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का कृषि ढांचा अब एक बड़े बदलाव की ओर है। हमारी सरकार ‘‘नवा अंजोर विज़न 2047’’ के जरिए राज्य के लगभग 40 लाख किसान परिवारों, जिनमें 82 प्रतिशत लघु एवं सीमांत जिसमें 31 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति के किसान शामिल हैं, के आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दलहन उत्पादन में वर्ष 2025-26 के दौरान दर्ज की गई 76 प्रतिशत की अभूतपूर्व वृद्धि और तिलहन के रकबे में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक की बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि हमारा किसान अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। वहीं खरीफ 2026 में हम अरहर, उड़द और मूंग के लिए क्लस्टर आधारित रणनीति लागू कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य हर हाथ को काम और हर खेत को सही समय पर गुणवत्तायुक्त बीज और संतुलित खाद उपलब्ध कराना है।              राज्य में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन और रणनीतिक तैयारियों पर प्रकाश डालते हुए छत्तीसगढ़ शासन के कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि कृषि तकनीक, बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक प्रबंधन से खेती की तस्वीर बदल रही है। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि खरीफ 2026 के लिए हमारी तैयारियां पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीक-आधारित हैं। राज्य के किसानों को कृषि विश्वविद्यालयों की वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर ही उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। सीमांत किसानों को जहां एकमुश्त उर्वरक दिया जा रहा है, वहीं यूरिया की कालाबाजारी और अत्यधिक खपत को रोकने के लिए लघु व बड़े किसानों को 20 से 25 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार में यूरिया देने की व्यवस्था की गई है। हम डीएपी के विकल्प के रूप में नैनो डीएपी, एसएसपी और एनपीके कॉम्प्लेक्स को तेजी से बढ़ावा दे रहे हैं। इसके अलावा, एग्रीस्टैक, डिजिटल क्रॉप सर्वे और एकीकृत किसान पोर्टल के माध्यम से पूरी खरीद और सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी बना दिया गया है।           कृषि उत्पादन आयुक्त परदेशी ने बताया कि छत्तीसगढ़ वर्ष 2025-26 में दलहन उत्पादन में रिकॉर्ड 76 प्रतिशत की वृद्धि करते हुए उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इसके साथ ही तिलहन मिशन और राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन-तिलहन के तहत सरसों, मूंगफली और सोयाबीन के बीज वितरण से तिलहनी फसलों के क्षेत्र में 28 हजार हेक्टेयर से अधिक का विस्तार हुआ है। वहीं क्लस्टर विकास, बागवानी के क्षेत्र में फल, सब्जी और मसाला फसलों के लिए क्लस्टर आधारित विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित किया गया है। टिकाऊ और जलवायु अनुकूल खेती के तहत् 23,050 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती का विस्तार किया जा चुका है, जिसमें 461 क्लस्टर्स और 922 कृषि सखियों की मदद ली जा रही है। सॉइल हेल्थ के तहत् वर्ष 2025-26 में 2.81 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए। साथ ही, नई पीढ़ी को कृषि से जोड़ने के लिए राज्य के 126 पीएम स्कूलों में मिट्टी परीक्षण प्रयोगशालाएं (सॉइल टेस्टिंग लैब्स) स्थापित की जा चुकी हैं।             स्मार्ट इरिगेशन के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप‘ के तहत सूक्ष्म सिंचाई और लागत कम करने के लिए ड्रोन तकनीक व ‘इंटीग्रेटेड फार्मिंग सिस्टम’ (फसल + पशुपालन + मत्स्य + केंटकी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएम किसान और पीएम फसल बीमा योजना के डेटा को इंटीग्रेट करके जून से जुलाई 2026 तक विशेष केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) अभियान चलाया जाना प्रस्तावित है। वहीं पीएम आशा योजना के अंतर्गत दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर शत-प्रतिशत खरीदी सुनिश्चित करने की तैयारी है।                    कृषि मंत्री नेताम ने सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार ने राष्ट्रीय मंच के माध्यम से केंद्र सरकार के समक्ष कृषि विकास की गति को और तेज करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रस्ताव और अपेक्षाएं भी रखी हैं। इनमें छत्तीसगढ़ धान प्रधान राज्य होने के कारण, फसल विविधीकरण को गति देने के लिए केंद्र से एक पृथक प्रोत्साहन नीति की मांग की गई है। साथ ही प्राकृतिक उत्पादों का एमएसपी प्राकृतिक और जैविक खेती के उत्पादों के लिए अलग से न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने की व्यवस्था की जाए।            मंत्री नेताम ने सम्मेलन में सप्लाई प्लान और खाद सब्सिडी उर्वरकों की समय पर उपलब्धता के लिए माहवार सप्लाई प्लान के अनुसार खाद प्रदाय की मांग के साथ ही डीएपी की आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में एनपीके की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को छोटे किसानों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष अनुदान का प्रावधान किया जाए। वहीं उर्वरकों की अत्यधिक खपत और बर्बादी को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार उर्वरकों की 25 किलोग्राम की छोटी बोरी तैयार की जानी अपेक्षित है। साथ ही राज्य के आदिवासी बाहुल्य और वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए विशेष कृषि विकास पैकेज तथा डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तकनीकी व आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता प्रदान की जाए।                  इस अवसर पर संचालक कृषि राहुल … Read more

मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात

माफिया अब खुली जीप में पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकताः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मऊ को दी 392 करोड़ की 114 परियोजनाओं की सौगात  धार्मिक आयोजन में व्यवधान डालने वाले की रावण व कंस जैसी दुर्गति तयः मुख्यमंत्री  मुख्यमंत्री ने कहा, माफिया के सामने नाक रगड़ती थी सपा सरकार, देखकर छूटता था पसीना सीएम योगी ने जन प्रतिनिधियों की मांग पर घोसी चीनी मिल के विस्तारीकरण के लिए मांगा प्रस्ताव  मऊ/लखनऊ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ की धरती से माफिया को फिर खुली चुनौती दी। उन्होंने दो टूक कहा कि अब किसी माफिया व गुंडे में दुस्साहस नहीं है कि त्योहारों में उपद्रव कर दे। यदि किसी ने रामलीला, यज्ञ-कथा, जन्माष्टमी, रामनवमी, शिवरात्रि, रक्षाबंधन आदि धार्मिक आयोजनों में व्यवधान डाला तो उसकी रावण व कंस जैसी दुर्गति तय है। किसी ने बेटी व व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाई तो उसका इंतजार यमराज ही करेंगे। अब कोई माफिया खुली जीप में चलकर पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकता। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ के गांधी मैदान में 392 करोड़ से अधिक लागत वाली 114 परियोजनाओं का लोकार्पण/शिलान्यास किया। मुख्यमंत्री ने मऊ को क्रांतिधरा बताते हुए साहित्यकार श्याम नारायण पांडेय, समाज सुधारक स्वामी सहजानंद सरस्वती, मऊ को नई पहचान दिलाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री कल्पनाथ राय की स्मृतियों को नमन किया। उन्होंने पूर्व राज्यपाल फागू चौहान का भी जिक्र किया और भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया।   अच्छी सरकारी देती है विकास, गलत लोग चुनने पर लगती है सुरक्षा में सेंध  मुख्यमंत्री ने कहा कि अच्छी सरकार विकास लेकर आती है। यह विकास बिना भेदभाव नागरिकों के जीवन स्तर को उठाने का माध्यम होता है। सड़क या पुल जाति पूछकर नहीं चलने देते, स्वास्थ्य केंद्र जाति पूछकर उपचार और बाढ़ सुरक्षा के कार्य जाति पूछकर बचाव नहीं करते। जब अच्छे लोग चुने जाते हैं तो अच्छी सरकार आती है। जब गलत लोग चुने जाते हैं तो सुरक्षा में सेंध लगती है, जन विकास में लगने वाले पैसे में डकैती और बेटी-व्यापारी की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, और युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा होता है।  धार्मिक आयोजनों में व्यवधान पैदा किया जाता था मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश का यही हाल था। जिन लोगों की आयु 30-35 वर्ष से ऊपर है, वे भूले नहीं होंगे कि 21 वर्ष पहले 2005 में भरत-मिलाप कार्यक्रम पर दंगा कर मऊ को जलाने का प्रयास हुआ था। सत्ता के संरक्षण में माफिया रामलीला आयोजन में व्यवधान पैदा कर निर्दोष हिंदुओं का कत्लेआम कर रहे थे। माफिया को देखकर सपा का पसीना छूटता था, इनके मुंह से आवाज नहीं निकलती थी। माफिया के सामने नतमस्तक व नाक रगड़ने वाली सरकार मौन थी और यहां की सुरक्षा खतरे में थी। अराजकता का तांडव था। जनता यदि चंदा जुटाकर रामलीला, रामनवमी, यज्ञ, जन्माष्टमी, शिवरात्रि का आयोजन करती थी तो उसमें व्यवधान पैदा किया जाता था। शोहदे बेटियों का अपहरण करते थे, व्यापारी सूर्यास्त से पहले प्रतिष्ठान बंद करने को मजबूर थे। गरीब, युवा, नारी व किसान का उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लगता है  सीएम योगी ने कहा कि 2014 में जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में देश की बागडोर सौंपी तो सभी ने 12 वर्ष में बदलते भारत को देखा। मोदी जी कहते हैं कि हमारे लिए केवल चार जातियां (गरीब, युवा, नारी व किसान) हैं। इनका उत्थान हो जाए तो देश दौड़ने लग जाएगा और भारत दुनिया की बड़ी ताकत बन जाएगा। उन्होंने दिल्ली में योजनाएं बनाईं, भाजपा शासित राज्यों ने इसे लागू भी किया, लेकिन 2014 से 2017 तक सपा सरकार ने यूपी में उन योजनाओं को लागू नहीं होने दिया। सपा ने गरीबों के लिए शौचालय, आवास, राशन, सड़क नहीं बनने दी।  चार बार सरकार के बावजूद सपा शासन में गरीबों को नहीं मिलीं सुविधाएं  सीएम ने कहा कि आज प्रदेश में 65 लाख गरीबों को आवास, पौने तीन करोड़ गरीबों के घरों में शौचालय, 16 करोड़ गरीबों को निःशुल्क राशन मिल रहा है। उपदेश देने वाले सपाइयों से पूछिए कि चार बार शासन करने के बाद भी उन्होंने और लगभग 50 वर्ष तक शासन करने वाली कांग्रेस ने यह कार्य क्यों नहीं किया। कांग्रेस-सपा सरकार में उनके गुंडे गरीब का राशन खा जाते थे और गरीब टकटकी लगाकर देखता था। 24 घंटे के भीतर मिलती है 5 लाख की सहायता  सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत व मुख्यमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई है। किसान परिवार या बटाईदार यदि आपदा की चपेट में आ जाता है तो मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत 24 घंटे के अंदर जनप्रतिनिधि पांच लाख रुपये की सहायता राशि उसके घर जाकर देते हैं।  बिना रुके, झुके, थके चल रहे विकास अभियान सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश में विकास अभियान बिना रुके, बिना झुके, बिना डिगे, बिना थके चल रहे हैं। हर गरीब के लिए आवास, पानी, सड़क, पुल, बाढ़ से बचाव आदि के प्रयास हो रहे हैं। सड़कें, पर्यटन केंद्र संवर रहे हैं, पुल-पुलिया बन रही हैं। बिजली परियोजनाएं तैयार हो रही हैं। सुरक्षा का माहौल है, नौजवान के लिए नौकरी-रोजगार, बेटी के स्वावलंबन, अन्नदाता किसान के सम्मान के लिए योजनाएं चल रही हैं। विकास का पैसा विकास में और गरीब का पैसा गरीब के पास जा रहा है। सीएम ने नागरिकों से कहा कि वर्तमान को सजाने व संवारने का दायित्व आपके ऊपर है। आपने डबल इंजन सरकार को जिताने में योगदान दिया तो पीएम मोदी के नेतृत्व, मार्गदर्शन में सरकार सफल हुई और इसका श्रेय आपको जाता है।  सीएम ने बताई एक-एक वोट की ताकत सीएम योगी ने एक-एक वोट की ताकत बताई और कहा कि जब किसी देवस्थल का पुनरुद्धार व अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होता है तो इसका पुण्य भी आपके खाते में जाता है। आपका एक वोट 500 वर्ष की गुलामी के कलंक को धोकर राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम का निर्माण करता है तो बेटी-व्यापारी की सुरक्षा, माफिया को मिट्टी में मिलाकर कर्फ्यू, उपद्रव मुक्त प्रदेश बनाने में योगदान देता है। विकास की यात्रा अनवरत आगे बढ़नी … Read more

सीएम योगी बोले- मातृभूमि के प्रति समर्पण ही असली राष्ट्रभक्ति

जन्मभूमि के ऋण से मुक्त होना ही सच्ची देशभक्ति: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मऊ जिले के गांव ताजोपुर में ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का किया उद्घाटन सीएम बोले: गांव आत्मनिर्भर बनेंगे तभी विकसित भारत का सपना होगा साकार ताजोपुर मॉडल को मुख्यमंत्री ने बताया राष्ट्र निर्माण, ग्रामीण स्वावलंबन और “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” की जीवंत मिसाल एक समय पहचान के संकट से जूझने वाला मऊ आज इन संस्थानों की वजह से नई पहचान प्राप्त कर रहा है: मुख्यमंत्री मऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को मऊ जिले के गांव ताजोपुर स्थित ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जन्मभूमि के ऋण से मुक्त होना ही सच्ची देशभक्ति है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह ने भारतीय सेना में 35 वर्षों तक सेवा देने और देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करने के बाद अपनी जन्मभूमि लौटकर जो कार्य किया है, वह केवल संस्थान निर्माण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना और विभिन्न संस्थानों में वर्षों सेवा देने के बाद ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह का अपने गांव लौटकर वहां अस्पताल, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज, आईटीआई और सैनिक पब्लिक स्कूल जैसे संस्थानों की स्थापना करना पूरे देश के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यह वही भाव है, जिसे हमारे शास्त्रों में “जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी” कहा गया है। जन्मभूमि और मातृभूमि से बड़ा कुछ नहीं हो सकता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि लंका विजय के बाद जब लक्ष्मण ने स्वर्णमयी लंका की समृद्धि की चर्चा की थी, तब भगवान श्रीराम ने कहा था, “अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते। जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।” मुख्यमंत्री ने कहा कि यही भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन है। चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, उसकी जन्मभूमि और मातृभूमि से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह ने इसी आदर्श को अपने जीवन में उतारा है। भारतीय सेना के आर्मी मेडिकल कोर में वर्षों तक सेवा देने के बाद उन्होंने अपनी जन्मभूमि ताजोपुर लौटने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव लौटकर उन्होंने जिस प्रकार स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के केंद्र खड़े किए हैं, वह ग्रामीण भारत के लिए विकास का आदर्श मॉडल है। अस्पताल ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा केंद्र मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका ब्रिगेडियर पी.एन. सिंह से संबंध लगभग 15-16 वर्ष पुराना है। तभी से वे उनके समाजसेवा और राष्ट्रसेवा से जुड़े कार्यों के बारे में सुनते रहे हैं और आज उन्होंने अपनी आंखों से इसे देखा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ताजोपुर में स्थापित ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल केवल एक अस्पताल नहीं है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा केंद्र है। इसी प्रकार सैनिक नर्सिंग कॉलेज के माध्यम से एएनएम, जीएनएम, पोस्ट बेसिक बीएससी और बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कराई जा रही है। फार्मेसी कॉलेज के माध्यम से डी.फार्मा और बी.फार्मा की शिक्षा दी जा रही है, जबकि आईटीआई के जरिए युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जा रहा है। सैनिक पब्लिक स्कूल क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये संस्थान केवल भवन नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण आत्मनिर्भरता के मजबूत स्तंभ हैं। यहां रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं, स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में शिक्षा और रोजगार मिल रहा है और बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका इन संस्थानों से जुड़ रही है। उन्होंने कहा कि एक समय पहचान के संकट से जूझने वाला मऊ आज इन संस्थानों की वजह से नई पहचान प्राप्त कर रहा है। सभी को लेने होंगे "पंच प्रण" मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान दिए गए “पंच प्रण” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से आह्वान किया था कि जब भारत आजादी के 100 वर्ष पूरे करे, तब वह विकसित राष्ट्र के रूप में विश्व के सामने खड़ा हो। इसके लिए हर भारतीय को पांच प्रण लेने होंगे। पहला प्रण हमारी विरासत पर गर्व करने का है। हम राम, कृष्ण, महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी महाराज, गुरु गोविंद सिंह, रानी लक्ष्मीबाई जैसे महानायकों के वंशज हैं। हमें उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना चाहिए। दूसरा प्रण गुलामी की मानसिकता को पूरी तरह समाप्त करने का है। हमें हर उस सोच और प्रवृत्ति को त्यागना होगा, जिसमें विदेशी मानसिकता या गुलामी की गंध हो। तीसरा प्रण “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” है। जातिवाद, क्षेत्रवाद और छुआछूत जैसी बुराइयों ने देश को कमजोर किया। समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ खड़े होना हर भारतीय का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने चौथे प्रण के रूप में सैनिकों और सुरक्षा बलों के सम्मान की बात कही। उन्होंने कहा कि जब देश का सैनिक सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर माइनस तापमान में खड़ा रहता है, जब राजस्थान के रेगिस्तान में 50 डिग्री तापमान में सीमा की रक्षा करता है और जब पुलिसकर्मी दिन-रात अपराधियों से लड़ते हैं, तभी हम चैन से सो पाते हैं। इसलिए हर भारतीय के मन में सैनिकों और सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पांचवां प्रण नागरिक कर्तव्यों का पालन करना है। हर व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का भी ईमानदारी से पालन करना चाहिए। विकसित भारत का सपना गांवों के विकास से ही साकार होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का सपना गांवों के विकास से ही साकार होगा। प्रदेश विकसित तभी होंगे, जब जनपद विकसित होंगे और जनपद तभी विकसित होंगे, जब ताजोपुर जैसे गांव आत्मनिर्भर बनेंगे। उन्होंने कहा कि ग्रामीण सैनिक हॉस्पिटल, सैनिक पब्लिक स्कूल, नर्सिंग कॉलेज, फार्मेसी कॉलेज और आईटीआई जैसे संस्थान आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ब्रिगेडियर डॉ. पी.एन. सिंह पिछले डेढ़ दशक से “चरैवेति-चरैवेति” के मंत्र के साथ लगातार राष्ट्र निर्माण और समाज सेवा में जुटे हुए हैं। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि सच्ची देशभक्ति अपनी जन्मभूमि और समाज के लिए काम करने से सिद्ध होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे सभी प्रयासों के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस प्रकार के उत्कृष्ट … Read more

Twisha Sharma Case: कोर्ट ने गिरिबाला-सamarth को भेजा CBI रिमांड पर, अब खुलेंगे आखिरी घंटों के राज

भोपाल  एक्ट्रेस-मॉडल ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई ने उसकी सास रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह और पति समर्थ को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया। जांच एजेंसी के वकील ने दोनों की 5-5 दिन की रिमांड मांगी। इस पर आरोपी पक्ष के वकील ने कोई आपत्ति जाहिर नहीं की। जिसके बाद स्पेशल कोर्ट की जज शोभना भलावे ने सीबीआई रिमांड को मंजूरी दे दी। बता दें कि ट्विशा का पति समर्थ सिंह पहले से ही 7 दिन की सीबीआई रिमांड पर था। शुक्रवार को ये रिमांड खत्म होने पर उसे कोर्ट में पेश किया गया। सूत्रों के मुताबिक, रिमांड के दौरान सीबीआई दोनों आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करेगी। समर्थ ने फरारी कहां और किसके साथ काटी, इसको लेकर भी सवाल-जवाब होंगे। सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, अब जांच के लिए टनल व्यू इन्वेस्टिगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। एजेंसी ट्विशा के आखिरी घंटों का वर्चुअल रीक्रिएशन तैयार कर रही है, ताकि घटना से पहले और बाद की हर गतिविधि को मिनट-टू-मिनट समझा जा सके। अदालत में पेशी, 5 दिन की रिमांड मंजूर सीबीआई ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को 5 दिन की रिमांड पर भेज दिया गया. कोर्ट में सुनवाई के दौरान गिरिबाला और समर्थ शांत मुद्रा में नजर आए।  वकीलों ने रिमांड का विरोध नहीं किया गिरिबाला सिंह के वकीलों ने सीबीआई की रिमांड का विरोध नहीं किया, बल्कि यह कहा कि एसआईटी के पास जो भी सबूत हैं, उन्हें सुरक्षित तरीके से सीबीआई को सौंपा जाए. इस पर सीबीआई ने बताया कि उन्हें सभी आवश्यक दस्तावेज मिल चुके है।  कोर्ट में हुई बहस, CBI ने रोका दखल सुनवाई के दौरान कटघरे में खड़े गिरिबाला सिंह की सीबीआई अधिकारियों से बहस भी हुई. अधिकारी ने उन्हें वकीलों से अधिक बोलने और मामले से इतर विषय उठाने से रोका, जिससे कुछ देर के लिए अदालत का माहौल गर्म हो गया।  घटना के दिन के हालात पर होगी पूछताछ सीबीआई अब घटना के दिन की परिस्थितियों को लेकर अहम सवाल करेगी. इसमें यह जानने की कोशिश होगी कि कटारा हिल्स स्थित घर में उस समय कौन-कौन मौजूद था और अंदर क्या घटनाक्रम हुआ था।  शादी के 5 महीने बाद मौत पर सवाल जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि यदि सब कुछ सामान्य था, तो शादी के महज 5 महीने बाद ऐसी स्थिति कैसे बनी कि ट्विशा शर्मा की मौत हो गई. साथ ही परिवार के भीतर चल रहे विवादों और उत्पीड़न के आरोपों की भी पड़ताल की जाएगी।  सबूतों और पुलिस जांच पर संदेह सीबीआई पुलिस जांच के दौरान हुई कथित गड़बड़ियों पर भी सवाल उठाएगी. जैसे- मौत की सूचना देने में देरी क्यों हुई, शव को नीचे लाकर CPR देने का फैसला किसने लिया और पुलिस रिकॉर्ड में लंबाई जैसी जानकारी गलत कैसे दर्ज हुई।  40 मिनट की घटनाओं पर फोकस जांच का सबसे अहम हिस्सा वह 40 मिनट का समय है, जब ट्विशा जिम एरिया में गईं और फिर उनकी मौत हुई. सीबीआई यह जानने की कोशिश करेगी कि उस दौरान क्या हुआ और किन परिस्थितियों में उन्हें नीचे लाया गया।  वायरल वीडियो पर भी सवाल जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि केवल छत से नीचे लाने का वीडियो ही क्यों वायरल हुआ, उसके पहले या बाद का कोई फुटेज क्यों सामने नहीं आया. इससे सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका भी जताई जा रही है।  समर्थ सिंह की भूमिका भी जांच के घेरे में सीबीआई समर्थ सिंह की भूमिका की भी गहराई से जांच करेगी. उनके बयानों में विरोधाभास, फरार रहने के दौरान मदद और पूरे घटनाक्रम में उनकी संलिप्तता की जांच की जाएगी।  परिजनों के आरोपों की पड़ताल ट्विशा शर्मा के परिजनों द्वारा लगाए गए आरोप भी जांच में अहम होंगे. इनमें कथित उत्पीड़न, जबरन गर्भपात और चरित्र पर सवाल उठाने जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।  जांच में खुल सकती हैं नई परतें सीबीआई की इस पूछताछ से मामले के कई अनछुए पहलुओं से पर्दा उठने की संभावना है. अब सबकी नजर 2 जून तक की रिमांड अवधि पर टिकी है, जहां से इस हाई-प्रोफाइल केस में अहम खुलासे हो सकते हैं। 

पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाया जाए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

तकनीक, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल दक्षता से लैस रहे यूपी पुलिस: मुख्यमंत्री पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाया जाए: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ देश में iGOT प्रशिक्षण पूर्णता में यूपी पुलिस अव्वल, 59 लाख से अधिक कोर्स पूर्ण जनसंवाद, व्यवहार और तकनीकी दक्षता पर विशेष फोकस के साथ बदलेगी पुलिस ट्रेनिंग व्यवस्था ड्रोन, साइबर फॉरेंसिक और सिम्युलेटर आधारित प्रशिक्षण से सशक्त होगी यूपी पुलिस लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कहा कि बदलते समय में पुलिसिंग केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है। आधुनिक तकनीक, संवेदनशील व्यवहार, संवाद कौशल, साइबर अपराधों की समझ और फॉरेंसिक दक्षता प्रभावी पुलिसिंग की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने निर्देश दिए कि पुलिस प्रशिक्षण व्यवस्था को पूरी तरह परिणामोन्मुख, व्यवहारिक, तकनीक आधारित और समयानुकूल बनाया जाए, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस दक्षता, अनुशासन, संवेदनशीलता और जनविश्वास के मानकों पर देश की सर्वश्रेष्ठ पुलिस बल के रूप में स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण व्यवस्था में गुणवत्ता, एकरूपता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए। प्रशिक्षण संस्थानों में आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग हो तथा प्रशिक्षण का नियमित मूल्यांकन किया जाए। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों को केवल कानून लागू करने तक सीमित न रखते हुए उन्हें संवाद कौशल, मानवीय व्यवहार और तनावपूर्ण परिस्थितियों में संतुलित निर्णय लेने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। बैठक में बताया गया कि पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय के अंतर्गत पुलिस अकादमी मुरादाबाद, 11 प्रशिक्षण संस्थान, 6 पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, 2 आर्म्ड पुलिस ट्रेनिंग संस्थान तथा 62 अस्थायी एवं 31 स्थायी रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर संचालित हैं। 112 RTC पर एक साथ प्रशिक्षण प्रारंभ कर अंतिम परीक्षाओं को शुचितापूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराया गया तथा एक साथ परीक्षा परिणाम घोषित किए गए। प्रशिक्षण क्षमता को 18 हजार से बढ़ाकर 60,244 तक किया गया है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का उच्चीकरण किया गया है तथा बाह्य विषयों में आवधिक मानक निर्धारित कर गुणवत्ता सुनिश्चित की गई है। यूपी पुलिस ट्रेनिंग पोर्टल के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री प्रशिक्षकों एवं प्रशिक्षुओं को उपलब्ध कराई जा रही है और 5,000 विशेषज्ञ प्रशिक्षक तैयार किए गए हैं। बैठक में बताया गया कि मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत iGOT पोर्टल पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। 27 मई 2026 तक 3,90,799 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं तथा 59,02,703 कोर्स पूर्ण किए जा चुके हैं। 20 मार्च 2026 को उत्तर प्रदेश पुलिस की 149 इकाइयों का iGOT पोर्टल पर सृजन कराया गया, जिससे जनपद, वाहिनी और इकाई स्तर पर प्रशिक्षण का प्रभावी पर्यवेक्षण संभव हुआ है। बैठक में बताया गया कि 2 अप्रैल से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित साधना सप्ताह में उत्तर प्रदेश पुलिस ने देश की समस्त राज्य पुलिस एवं केंद्रीय पुलिस बलों में प्रथम स्थान प्राप्त किया। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग ने अकेले 28 लाख से अधिक कोर्स पूर्ण किए, जो कई राज्यों के समस्त विभागों के संयुक्त प्रदर्शन से भी अधिक रहा। इस अवधि में 2,61,032 कर्मियों ने 2 घंटे से अधिक तथा 2,16,724 कर्मियों ने 4 घंटे से अधिक का लर्निंग समय पूरा किया। 2,45,645 कर्मियों ने AI कोर्स भी पूर्ण किए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि रोल आधारित ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रमों को तेजी से विकसित किया जाए। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के साथ हुए एमओयू के तहत नवंबर 2025 में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 34 पुलिस उपाधीक्षकों को ‘एमए इन पुलिस साइंस एंड स्ट्रैटेजिक मैनेजमेंट’ की डिग्री प्रदान की गई। वहीं मई 2026 में पुलिस अकादमी मुरादाबाद में प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले 47 उपनिरीक्षकों को ‘पीजी डिप्लोमा इन पुलिस एंड सिक्योरिटी मैनेजमेंट’ प्रदान किया गया। बैठक में आगामी प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 4,253 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस, 15,131 आरक्षी पीएसी/सशस्त्र पुलिस, 2,282 महिला पीएसी आरक्षी, 10,469 आरक्षी नागरिक पुलिस तथा 1,341 यूपीएसएसएफ आरक्षियों सहित बड़ी संख्या में कार्मिकों का आधारभूत प्रशिक्षण प्रस्तावित है। इसके साथ ही 4,500 उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस एवं प्लाटून कमांडरों के प्रस्तावित प्रशिक्षण के लिए विस्तृत तैयारियां की जा रही हैं। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में संशोधित कर 11 संवेदनशीलता मॉड्यूल जोड़े गए हैं। ATS, STF, NDRF, SDRF, RAF, यूपी-112, विमेन पावरलाइन, चाइल्डलाइन, BDS और फायर सर्विसेज जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों द्वारा ऑपरेशनल मॉक ड्रिल और कैप्सूल कोर्स संचालित किए जाएंगे। बैठक में बताया गया कि प्रशिक्षण में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जा रहा है। इसके तहत ड्रोन प्रशिक्षण, साइबर फॉरेंसिक लैब, फॉरेंसिक लैब, ड्राइविंग सिम्युलेटर और फायरिंग सिम्युलेटर जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। स्मार्ट क्लासरूम के माध्यम से अतिथि विशेषज्ञों द्वारा ऑनलाइन प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों का व्यवहार ही पुलिस की वास्तविक पहचान बनाता है। बैठक में बताया गया कि जनता से दुर्व्यवहार की शिकायत वाले 5,816 पुलिसकर्मियों को चिन्हित कर उनके लिए संवाद कौशल एवं सौम्य व्यवहार का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई द्वारा 3 से 5 फरवरी 2026 तक 37 पुलिसकर्मियों को Behaviour, Operational Soft Skills एवं Caselets का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के प्रभाव का आकलन करने के लिए इम्पैक्ट असेसमेंट व्यवस्था लागू की गई है, जिसमें महिला सम्मान, संवाद क्षमता, आत्मनियंत्रण, तनाव प्रबंधन, टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील व्यवहार जैसे 18 प्रमुख बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस अकादमी मुरादाबाद में मालदीव पुलिस सेवा के उपनिरीक्षकों को प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव भारत सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित इस प्रस्ताव को गृह मंत्रालय के माध्यम से विचारार्थ भेजा गया है। मुख्यमंत्री जी ने इसे भारत और पड़ोसी देशों के बीच आंतरिक सुरक्षा सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रशिक्षण प्रणाली में निरंतर नवाचार, जवाबदेही और आधुनिकता सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्तर प्रदेश पुलिस हर चुनौती का सामना अधिक दक्षता, संवेदनशीलता और प्रोफेशनल क्षमता के साथ कर सके।

चुनावी नतीजों के बाद एक्शन मोड में पंजाब सरकार, कल होगी CM मान की अहम बैठक

चंडीगढ़ जाब में निकाय चुनावों के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने शनिवार को मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद यह सरकार की पहली कैबिनेट बैठक होगी, जिस पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजरें टिकी हुई हैं। जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार मंत्रिमंडल की बैठक 30 मई को दोपहर 12 बजे मुख्यमंत्री आवास, सेक्टर-2, चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री भगवंत मान करेंगे। बैठक को लेकर सभी मंत्रियों को उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़े प्रस्तावों, प्रशासनिक मामलों और जनहित से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की जा सकती है। हालांकि बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन चुनावी परिणामों के बाद होने वाली इस बैठक को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिणामों के बाद अहम है बैठक निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के बेहतरीन प्रदर्शन के बाद यह बैठक सरकार की आगामी रणनीति तय करने के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि सरकार विकास कार्यों, प्रशासनिक सुधारों और विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा भी कर सकती है। बैठक के लिए मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार बैठक मुख्यमंत्री आवास में होगी और इसमें मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों की मौजूदगी अपेक्षित है। एजेंडा अभी स्प्ष्ट नहीं किया राजनीतिक जानकारों का मानना है कि निकाय चुनावों के बाद होने वाली इस पहली कैबिनेट बैठक से सरकार के अगले कदमों और प्राथमिकताओं की दिशा स्पष्ट हो सकती है। हालांकि अभी तक इस बैठक का एजेंडा साफ नहीं किया गा है। अब सभी की नजरें बैठक में लिए जाने वाले संभावित फैसलों पर टिकी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि निकाय चुनावों के नतीजे आने के तुरंत बाद बुलाई गई इस बैठक को सरकार की आगामी प्रशासनिक और राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।