samacharsecretary.com

11 से 13 सितंबर तक ट्रेनों के संचालन में बड़ा बदलाव, 120 ट्रेनें प्रभावित; कई कैंसिल और डायवर्ट

 नई दिल्ली अगर आप 11 से 13 सितंबर के बीच ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक कर लें. दिल्ली डिवीजन से गुजरने वाली करीब 120 ट्रेनों के शेड्यूल में बदलाव किया गया है. इनमें कई ट्रेनें कैंसिल रहेंगी, कुछ के रूट बदले गए हैं, जबकि कई ट्रेनों को रीशेड्यूल, रेगुलेट या उनके शुरुआती और आखिरी स्टेशन में बदलाव किया गया है. इसका असर राजधानी, तेजस राजधानी, वंदे भारत, पूर्वा एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनों समेत कई EMU सेवाओं पर भी पड़ेगा।  क्यों बदला गया ट्रेनों का शेड्यूल? नॉर्दर्न रेलवे ने ऑपरेशनल कारणों से 11 से 13 सितंबर तक ट्रेनों के संचालन में बदलाव किया है. इसके लिए रेलवे ने अलग ट्रेन हैंडलिंग प्लान जारी किया है. रेलवे के मुताबिक इस अवधि में कुछ ट्रेनों को कैंसिल और डायवर्ट किया गया है. इसके अलावा कुछ ट्रेनों को शॉर्ट टर्मिनेट, शॉर्ट ओरिजिनेट और रीशेड्यूल किया जाएगा. कुछ ट्रेनों के टर्मिनल भी बदले गए हैं।  11 सितंबर को किन ट्रेनों पर असर? 11 सितंबर को कई प्रमुख राजधानी ट्रेनें डायवर्ट रूट से चलेंगी. इनमें नई दिल्ली-रांची राजधानी, नई दिल्ली-डिब्रूगढ़ राजधानी, नई दिल्ली-सियालदह राजधानी, नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी और नई दिल्ली-भुवनेश्वर राजधानी शामिल हैं. इसके अलावा संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस, हजरत निजामुद्दीन-गाजियाबाद EMU और गाजियाबाद-मथुरा जंक्शन EMU के रूट में भी बदलाव किया गया है. इस दिन पलवल-शकूरबस्ती, गाजियाबाद-नई दिल्ली, नई दिल्ली-पलवल लेडीज और दिल्ली जंक्शन-शामली EMU कैंसिल रहेंगी।  12 सितंबर को कौन सी ट्रेनें प्रभावित 12 सितंबर को भी कई EMU सेवाएं प्रभावित रहेंगी. गाजियाबाद-नई दिल्ली, नई दिल्ली-गाजियाबाद और नई दिल्ली-पलवल लेडीज EMU समेत कई लोकल ट्रेनें कैंसिल रहेंगी. फरीदाबाद में RLDA के काम के चलते पलवल-शकूरबस्ती EMU भी कैंसिल रहेगी. इस दिन गोमती, श्रमजीवी, नई दिल्ली-सियालदह राजधानी, नई दिल्ली-हावड़ा राजधानी, वैशाली और मगध एक्सप्रेस डायवर्ट रूट से चलेंगी. वहीं एक वंदे भारत ट्रेन को 35 मिनट रेगुलेट किया जाएगा।  कई ट्रेनों के समय में भी बदलाव हुआ 11 सितंबर को कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों के रवाना होने के समय में बदलाव किया गया है. नई दिल्ली-हैदराबाद एक्सप्रेस और ग्रैंड ट्रंक एक्सप्रेस 120 मिनट रीशेड्यूल रहेंगी, जबकि पश्चिम एक्सप्रेस 90 मिनट देरी से चलेगी. 12 सितंबर को तेजस राजधानी, भुवनेश्वर तेजस राजधानी, राजेंद्र नगर टर्मिनल तेजस राजधानी और तमिलनाडु एक्सप्रेस को देरी से रवाना किया जाएगा. इसके अलावा हरियाणा एक्सप्रेस नई दिल्ली से चलेगी. नई दिल्ली-अलीगढ़ EMU गाजियाबाद से चलेगी, जबकि 64582 और 64557 MEMU के टर्मिनल में भी बदलाव किया गया है।  13 सितंबर को भी कई ट्रेनें हैं कैंसिल 13 सितंबर को भी दिल्ली डिवीजन में ट्रेन संचालन प्रभावित रहेगा. इस दिन पलवल-गाजियाबाद, गाजियाबाद-दिल्ली जंक्शन, साहिबाबाद-दिल्ली जंक्शन, गाजियाबाद-शकूरबस्ती और नई दिल्ली-गाजियाबाद EMU कैंसिल रहेंगी. इसके अलावा शिवगंगा एक्सप्रेस, सहारनपुर-दिल्ली जंक्शन पैसेंजर, मेरठ कैंट-श्रीगंगानगर स्पेशल, मथुरा जंक्शन-गाजियाबाद EMU और पलवल-गाजियाबाद EMU डायवर्ट रूट से चलेंगी।  कुछ ट्रेनों के स्टार्ट-टर्मिनेट स्टॉप बदले 13 सितंबर को कुछ ट्रेनों को उनके तय स्टेशन की जगह दूसरे स्टेशन पर समाप्त किया जाएगा. मथुरा जंक्शन-नई दिल्ली EMU पलवल पर खत्म होगी. वहीं पलवल-नई दिल्ली EMU हजरत निजामुद्दीन पर समाप्त होगी. इसी तरह बुलंदशहर-तिलक ब्रिज MEMU दिल्ली शाहदरा पर ही समाप्त होगी।  यात्रियों को क्या करना चाहिए? अगर आप इन तीन दिनों में दिल्ली डिवीजन से सफर करने वाले हैं तो सिर्फ टिकट देखकर स्टेशन के लिए न निकलें. अपनी ट्रेन का नंबर, रूट, रवाना होने का समय और शुरुआती/आखिरी स्टेशन जरूर चेक करें. खास तौर पर नई दिल्ली, दिल्ली जंक्शन, गाजियाबाद, साहिबाबाद, पलवल, दिल्ली शाहदरा और हजरत निजामुद्दीन से जुड़ी ट्रेनों के यात्रियों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए।  ट्रेन का ताजा स्टेटस चेक करने के लिए NTES का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा रेलवे की हेल्पलाइन 139 पर कॉल करके भी जानकारी ली जा सकती है. नॉर्दर्न रेलवे का यह ऑपरेशनल प्लान 11 सितंबर से 13 सितंबर 2026 तक लागू रहेगा. हालांकि, इस दौरान अगर कोई और बदलाव होता है तो रेलवे की ओर से नया अपडेट जारी किया जा सकता है. इसलिए सफर से पहले ट्रेन का ताजा स्टेटस चेक करना सबसे बेहतर रहेगा।    ये रही पूरी लिस्ट 📅 11.09.2026 ✖ रद्द ट्रेनें   64015 (पलवल–SSB EMU) – रद्द। लिंक ट्रेन 64910 पलवल से शॉर्ट ओरिजिनेट होगी 64429 (GZB–NDLS EMU) – रद्द। लिंक ट्रेन 64110 ग़ाज़ियाबाद से शॉर्ट ओरिजिनेट होगी 64433 (GZB–NDLS EMU) – रद्द। लिंक ट्रेन 64114 ग़ाज़ियाबाद से शॉर्ट ओरिजिनेट होगी 64492 (NDLS–पलवल लेडीज़ EMU) – रद्द। लिंक ट्रेन 64491 भी रद्द 64491 (दिल्ली जं–शामली EMU) – रद्द ⇄ डायवर्टेड ट्रेनें 64419 (NZM–GZB EMU) – निज़ामुद्दीन–तिलक ब्रिज–BPNL–साहिबाबाद मार्ग से 20840 (NDLS–RNC राजधानी) – NDLS–दिल्ली जं–साहिबाबाद मार्ग से 12424 (राजधानी, NDLS–डिब्रूगढ़) – NDLS–दिल्ली जं–साहिबाबाद मार्ग से 12314 (NDLS–सियालदह राजधानी) – NDLS–दिल्ली जं–साहिबाबाद मार्ग से 12306 (NDLS–हावड़ा राजधानी) – NDLS–दिल्ली जं–साहिबाबाद मार्ग से 22812 (NDLS–भुवनेश्वर राजधानी) – NDLS–दिल्ली जं–साहिबाबाद मार्ग से 64904 (GZB–मथुरा EMU) – साहिबाबाद–तिलक ब्रिज–निज़ामुद्दीन मार्ग से 12394 (सम्पूर्ण क्रांति एक्सप्रेस) – NDLS–दिल्ली जं–साहिबाबाद मार्ग से ↪ शॉर्ट ओरिजिनेट/टर्मिनेट 15307 (हरियाणा एक्सप्रेस) – तिलक ब्रिज से शॉर्ट ओरिजिनेट (NDLS के बजाय) 64110 (NDLS–अलीगढ़ EMU) – ग़ाज़ियाबाद से शॉर्ट ओरिजिनेट 64568 (तिलक ब्रिज–बुलंदशहर MEMU) – दिल्ली शाहदरा से शॉर्ट ओरिजिनेट 64567 (बुलंदशहर–तिलक ब्रिज MEMU) – दिल्ली शाहदरा पर शॉर्ट टर्मिनेट 🕑 पुनर्निर्धारित/विलंबित प्रस्थान 12724 (NDLS–हैदराबाद) – 120 मिनट पुनर्निर्धारित 12616 (NDLS–चेन्नई GT एक्सप्रेस) – 120 मिनट पुनर्निर्धारित 12926 (पश्चिम एक्सप्रेस) – 90 मिनट पुनर्निर्धारित 15304 (इंटरसिटी एक्सप्रेस, NDLS–कासगंज) – 75 मिनट पुनर्निर्धारित 12952 (तेजस राजधानी) – 50 मिनट विलंबित प्रस्थान 12310 (NDLS–राजेंद्र नगर तेजस राज) – 50 मिनट विलंबित प्रस्थान 64441 (GZB–NDLS EMU) – 20 मिनट विलंबित प्रस्थान 12382 (NDLS–हावड़ा पूर्वा एक्सप्रेस) – 35 मिनट विलंबित प्रस्थान 14212 (AGC इंटरसिटी एक्सप्रेस) – 20 मिनट विलंबित प्रस्थान ⚙ नियंत्रित (रेगुलेट)   64471 (GZB–पानीपत MEMU) – साहिबाबाद पर 20 मिनट नियंत्रित 📅 12.09.2026 ✖ रद्द ट्रेनें 64425 (GZB–NDLS EMU) – रद्द 64432 (NDLS–GZB EMU) – रद्द 64013 (पलवल–SSB EMU) – फरीदाबाद में RLDA कार्य के कारण पहले से रद्द 64015 (पलवल–SSB EMU) – पहले से रद्द 64429 (GZB–NDLS EMU) – रद्द, लिंक 64110 शॉर्ट ओरिजिनेट 64433 (GZB–NDLS EMU) – रद्द, लिंक 64114 शॉर्ट ओरिजिनेट 64441 (GZB–NDLS EMU) – रद्द, लिंक 64410 भी रद्द रहेगी 64492 (NDLS–पलवल लेडीज़ EMU) – रद्द, लिंक 64491 भी रद्द 64410 (NDLS–GZB EMU) – रद्द 64443 (GZB–दिल्ली जं EMU) … Read more

एक मठ के पते से जारी हुए 40 पासपोर्ट, फर्जी दस्तावेजों से विदेश यात्रा का शक; STF की जांच तेज

भोपाल  भोपाल में सामने आए संदिग्ध फर्जी पासपोर्ट रैकेट की जांच अब सिर्फ फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों तक सीमित नहीं है। मध्यप्रदेश एसटीएफ इस बात की पड़ताल कर रही है कि अन्ना नगर स्थित एक मठ के पते का इस्तेमाल कर करीब 40 लोगों ने भारतीय पासपोर्ट कैसे हासिल कर लिए। जांच में यह तथ्य सामने आने के बाद सरकारी रिकॉर्ड और पासपोर्ट आवेदन की वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। एसटीएफ करीब 70 पासपोर्ट की जांच कर रही है। इनमें से बड़ी संख्या में पासपोर्ट 2021-22 में जारी हुए थे। जांच एजेंसियां अब संबंधित पासपोर्ट धारकों के वास्तविक पते, पहचान और दस्तावेजों का मिलान कर रही हैं। इसके लिए टीमों को मध्यप्रदेश के साथ असम और अन्य स्थानों पर भी भेजा गया है।  जांच का अहम पहलू यह है कि आवेदकों के पते और पहचान की फील्ड वेरिफिकेशन पुलिसकर्मियों ने किस आधार पर की। अधिकारियों को शुरुआती जांच में वेरिफिकेशन प्रक्रिया में गड़बड़ियों के संकेत मिले हैं। अब यह देखा जा रहा है कि क्या संबंधित अधिकारी वास्तव में मौके पर गए थे या दस्तावेजों के आधार पर ही सत्यापन कर दिया गया। एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि फर्जी पते और पहचान से जुड़े दस्तावेज तैयार कराने में नगर निकाय या अन्य सरकारी कर्मचारियों की क्या भूमिका रही। यदि किसी सरकारी रिकॉर्ड या प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल पासपोर्ट हासिल करने के लिए हुआ है तो उसकी पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि कुछ पासपोर्ट धारकों के विदेश जाने के रिकॉर्ड भी मिले हैं। जांच में कंबोडिया, स्पेन, थाईलैंड और इंडोनेशिया से जुड़े ट्रैवल ट्रेल सामने आए हैं। अब एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी है कि इन पासपोर्ट का इस्तेमाल सिर्फ भारतीय पहचान बनाने के लिए किया गया था या इसके पीछे विदेश जाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित किसी बड़े नेटवर्क की भूमिका थी। एसटीएफ ने पहले ही फर्जी दस्तावेजों के जरिए भारतीय पते और पहचान तैयार कर पासपोर्ट बनवाने वाले नेटवर्क के खिलाफ मामला दर्ज किया था। अब तक दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच आगे बढ़ने के साथ करीब 100 लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई जा रही है। 

भारत की 7.8% GDP ग्रोथ पर IMF का बड़ा बयान, कहा- बेहतर डेटा से आर्थिक अनुमान होंगे और मजबूत

 वॉशिंगटन/नई दिल्ली भारत की GDP ग्रोथ और उसके आंकड़ों को लेकर चल रही बहस के बीच अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने नए आर्थिक आंकड़ों और उन्हें तैयार करने के तरीके को लेकर सकारात्मक टिप्पणी की है. IMF के मुताबिक भारत अब भी दुनिया की ग्रोथ के लिए प्रमुख इंजन बना हुआ है. इस प्रमुख वैश्विक संगठन का कहना है कि अपडेट किए गए इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) सीरीज आगे भारत की GDP ग्रोथ के अनुमान को और बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।  नए IIP और PPI से क्या बदलेगा? वहीं, IMF ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की रियल GDP ग्रोथ को उम्मीदों से बेहतर बताया है. वॉशिंगटन में हुई प्रेस ब्रीफिंग के दौरान IMF की कम्युनिकेशंस डिपार्टमेंट डायरेक्टर जूली कोजैक ने भारत के ताजा GDP आंकड़ों पर बात की. उन्होंने कहा कि नवीनतम GDP रिलीज में इंडेक्स ऑफ इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन (IIP) का नया इंडेक्स और प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की नई सीरीज शामिल की गई है. उनके मुताबिक, ये दोनों नई सीरीज भारत के GDP अनुमानों को बेहतर बनाने में मदद करेंगी. यानी आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों को मापने और GDP का अनुमान लगाने के लिए ज्यादा अपडेटेड डेटा उपलब्ध होगा।  IMF ने डेटा क्वालिटी पर क्या कहा? जूली कोजैक ने भारत के मैक्रोइकोनॉमिक डेटा सिस्टम को आधुनिक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि भारतीय अधिकारियों को स्टैटिस्टिकल फ्रेमवर्क और डेटा क्वालिटी को और मजबूत करने की दिशा में इसी तरह आगे बढ़ना चाहिए. IMF की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत के आर्थिक आंकड़ों की गुणवत्ता और GDP की गणना को लेकर कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ नेताओं ने सवाल खड़े किए हैं. वहीं, सरकार का कहना है कि नए डेटा सेट और बदले हुए डेटा सिस्टम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़े अनुमानों को ज्यादा मजबूत बनाने की कोशिश की जा रही है।  7.8% GDP ग्रोथ पर IMF क्या बोला IMF ने भारत की आर्थिक ग्रोथ के ताजा आंकड़ों को उम्मीद से बेहतर बताया. कोजैक के मुताबिक, भारत की रियल GDP पहली तिमाही में 7.8% बढ़ी, जो IMF स्टाफ की उम्मीद और दूसरी रेटिंग एजेंसियों के अनुमान से ज्यादा रही. उन्होंने कहा कि इस ग्रोथ को सर्विसेज और एक्सपोर्ट से मजबूती मिली. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एनर्जी प्राइस में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की घरेलू इकोनॉमी की मजबूती इस आंकड़े में दिखाई देती है।  MOSPI के आंकड़ों में क्या आया है सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MOSPI) ने 31 अगस्त को FY 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के GDP आंकड़े जारी किए थे. इसके मुताबिक पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह 6.9% थी. इस दौरान मजबूत कैपिटल एक्सपेंडिचर, कंस्ट्रक्शन और सर्विस सेक्टर ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया. स्थिर कीमतों यानी 2022-23 के बेस ईयर पर रियल GDP ₹81.36 लाख करोड़ रही. FY 2025-26 की पहली तिमाही में यह ₹75.46 लाख करोड़ थी. वहीं मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल GDP 10.3% बढ़कर ₹88.27 लाख करोड़ हो गई. एक साल पहले यह करीब ₹80 लाख करोड़ थी।  ग्रॉस वैल्यू एडेड में भी मजबूत ग्रोथ GDP के साथ ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी GVA के आंकड़ों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली. पहली तिमाही में रियल GVA 8.2% बढ़कर ₹73.82 लाख करोड़ रही. वहीं नॉमिनल GVA 11.5% बढ़कर ₹80.53 लाख करोड़ पहुंच गई. इससे संकेत मिलता है कि सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन और दूसरे प्रमुख सेक्टरों में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई थीं. GDP किसी देश की इकोनॉमी की सबसे अहम तस्वीरों में से एक होती है. इसलिए इसे तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले आंकड़ों की क्वालिटी भी बेहद महत्वपूर्ण होती है। 

भोपाल मेट्रो के आसपास 500 मीटर दायरे में बदलेंगे विकास के नियम, TOD रीसिविंग एरिया के प्रस्ताव पर सुनवाई

भोपाल   भोपाल विकास योजना 2005 के अंतर्गत मेट्रो रेल परियोजना के दोनों ओर 500-500 मीटर के दायरे को प्राप्ति क्षेत्र घोषित किया जा रहा है। इस प्रस्ताव पर शुक्रवार को टीएंडसीपी में सुनवाई होगी। इससे मेट्रो कॉरिडोर के आसपास के निर्माण और विकास अधिकारों पर बड़ा असर पड़ेगा। आपत्तियों का निराकरण कर इसी माह में रीसिविंग एरिया को लेकर मास्टर प्लान में बदलाव का – नोटिफिकेशन जारी होगा। भोपाल सिटीजन फोरम के संयोजक सुरेंद्र तिवारी ने आपत्ति लगाई हुई है। शुक्रवार को वे व अन्य इस पर अपनी बात रखेंगे। मध्य प्रदेश हस्तांतरणीय विकास अधिकार यानी टीओडी नियम, 2018 के तहत रीसिविंग एरिया तय किया जा रहा है। इससे 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' बढ़ेगा। इस तरह होगा लाभ -वर्टिकल डेवलपमेंट होगा। अभी 1:25 एफएआर है, अतिरिक्त खरीदी से ये तीन से पांच गुना तक हो जाएगा। अतिरिक्त मंजिलें बना सकेंगे। -मेट्रो स्टेशन के 500 मीटर के भीतर घनी आबादी और कमर्शियल हब बनने से लोग निजी वाहनों की जगह मेट्रो का उपयोग अधिक करेंगे, जिससे मुख्य सड़कों पर यातायात का दबाव कम होगा। -इस क्षेत्र में प्लॉट और प्रॉपर्टीज की रीसेल व व्यावसायिक वैल्यू में तेज इजाफा होगा, जिससे स्थानीय भू-स्वामियों को आर्थिक फायदा होगा। मेट्रो से 500 में संसि 50 सीटर वाया जा रहा है। इसके लिए आपत्तियों पर सुनवाई होगी। शहरी विकास के लिए शासन की पॉलिसी है। उसके तहत ही प्रक्रिया की जा रही है।- कौशलेंद्र विक्रमसिंह, आयुक्त सह संचालक टीएंडसीपी ये नुकसान भी संभावित -पहले से सीवरेज, पेयजल, ड्रेनेज और बिजली नेटवर्क को अपग्रेड नहीं किया गया, तो हाईराइज बिल्डिंग्स बनने से बुनियादी सुविधाओं का संकट खड़ा हो जाएगा। -भले ही लोग लंबी दूरी के लिए मेट्रो लें, लेकिन 500 मीटर के दायरे की आंतरिक सड़कों और गलियों में गाडियों की संख्या और पार्किंग की कमी से भारी जाम लगेगा। -1-2 मंजिला पुराने रिहायशी मकानों के ठीक बगल में बहुमंजिला इमारतें बनने से धूप, वेंटिलेशन और प्राइवेसी प्रभावित होगी। -घने निर्माण से हरियाली कम होगी और 'कंक्रीट हीट आइलैंड' का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे तापमान बढ़ेगा। -मेट्रो कॉरिडोर के आसपास जमीनें और घर बहुत महंगे हो जाएंगे, जिससे मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग के लिए क्षेत्र में रहना या कारोबार करना नामुमकिन सा हो जाएगा। 

रायपुर में सफाई को लेकर सख्ती, गंदगी फैलाने वालों पर 50 हजार तक का जुर्माना

रायपुर. राजधानी रायपुर में सड़क, खाली जगह, नाली और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वाले सावधान हो जाएं क्योंकि अब उनपर नगर निगम की पैनी नजर रहेगी। नगर निगम 70 वार्डों में करीब 160 CCTV कैमरे लगाने की तैयारी कर रहा है। नगर निगम के उपायुक्त जसदेव सिंह बाबरा ने बताया कि CCTV कैमरे लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है। पहले चरण में करीब 160 कैमरे लगाए जाएंगे। डिमांड के हिसाब से कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके लिए करीब एक करोड़ रुपये के तीन साल के ठेके की प्रक्रिया जारी है। ठेके में कैमरों का ऑपरेशन, मेंटेनेंस और कंट्रोल रूम का संचालन भी शामिल रहेगा। कचरा फेंकने वालों पर होगी कार्रवाई – नगर निगम ने ऐसे स्थानों को चिन्हित किया है, जहां अक्सर लोग खुले में कचरा फेंकते हैं। इन्हीं स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। कैमरों की निगरानी के जरिए सड़क, खाली जगहों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के नियमों के तहत अलग-अलग प्रकार के कचरा उल्लंघन पर 50 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। इन मामलों में लगेगा जुर्माना – डायपर, सैनिटरी पैड और विशेष देखभाल वाले कचरे को गलत तरीके से फेंकने पर पहली बार 100 रुपये और दूसरी बार 200 रुपये जुर्माना। घर के बगीचे से निकलने वाले पत्ते, घास आदि कचरे का निगम के निर्देश के अनुसार निपटान नहीं करने पर पहली बार 500 और दूसरी बार 750 रुपये। गली, खुले स्थान, घर के बाहर, नाली, तालाब या नदी में कचरा फेंकने, जलाने या जमीन में गाड़ने पर पहली बार 500 और दूसरी बार 750 रुपये। कचरा एकत्रित करने वाली एजेंसी या ठेकेदार द्वारा कचरा जलाने पर पहली बार 25 हजार और दूसरी बार 50 हजार रुपये। 100 से अधिक लोगों के कार्यक्रम या समारोह के लिए कम से कम तीन दिन पहले नगर निगम को सूचना नहीं देने पर पहली बार 2 हजार और दूसरी बार 3 हजार रुपये। रेहड़ी-ठेला संचालकों द्वारा गीला और सूखा कचरा अलग-अलग नहीं देने या खुले में फेंकने पर पहली बार 200 और दूसरी बार 400 रुपये। 5,000 वर्गमीटर से बड़े गेटेड सोसायटी, संस्थान या BWG द्वारा खुले में कचरा फेंकने पर पहली बार 20 हजार और दूसरी बार 30 हजार रुपये। होटल और रेस्टोरेंट द्वारा खुले में कचरा फेंकने पर पहली बार 2 हजार और दूसरी बार 3 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। किसी अन्य खुले स्थान में उपर्युक्त मात्रा से अधिक होने पर पहली बार में 5,000 और फिर दूसरी बार में 10,000 का जुर्माना।

पंजाब में बिजली संकट ने बढ़ाई मुश्किलें, कोयला खत्म होने से 2 प्राइवेट और 1 सरकारी थर्मल यूनिट बंद

लुधियाना पंजाब में कोयले की कमी के कारण बिजली संकट पैदा हो गया है। बिजली जनरेशन सीधे-सीधे थर्मल प्लांटों पर निर्भर है और कोई भी थर्मल प्लांट पूरी क्षमता के हिसाब से बिजली उत्पादन नहीं कर रहा है। नतीजा यह है कि सूबे में बिजली संकट बना हुआ है।  देर रात से राजपुरा थर्मल प्लांट का भी एक यूनिट बंद है। देर रात से अभी तक दो प्राइवेट प्लांटों के एक-एक यूनिट और एक सरकारी प्लांट के एक यूनिट में बिजली उत्पादन नहीं हो रहा है। पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड बिजली उत्पादन कम होने के कारण केंद्रीय पूल से ज्यादा बिजली खरीद रहा है, लेकिन डिमांड ज्यादा होने के कारण लोगों को बिजली कटों से जूझना पड़ रहा है। पंजाब के बिजली मंत्री ने चार दिन पहले कहा था कि पंजाब के थर्मल प्लांटों के पास कोयला नहीं बचा है। अगर उन्हें कोयले की सप्लाई नहीं मिलती है तो पंजाब में बिजली संकट पैदा हो जाएगा। पीएसपीसीएल के अफसरों की मानें तो कोयले की सप्लाई तो आ रही है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में नहीं है, जिससे जनरेशन प्रभावित हो रही है। पंजाब में बिजली डिमांड, जनरेशन की स्थिति को जानिए…     डिमांड 14,195 मेगावाट पहुंचीः गुरुवार रात 12 बजे पंजाब में बिजली की डिमांड 11,655 मेगावाट थी। शुक्रवार सुबह 8:30 बजे यह बढ़कर 14,195 मेगावाट हो गई। दिन में डिमांड 16,500 मेगावाट से ज्यादा चल रही है। रात से सुबह तक जनरेशन करीब 4,000 मेगावाट रही, जबकि करीब 7,100 मेगावाट बिजली केंद्रीय पूल से खरीदी गई।     थर्मल के 3 यूनिट बंदः राजपुरा और तलवंडी साबो प्राइवेट थर्मल प्लांट का एक-एक यूनिट बंद रहा। सुबह तक प्राइवेट प्लांटों से करीब 1,700 मेगावाट बिजली बनी। सरकारी प्लांटों में भी रोपड़ और गोइंदवाल का एक-एक यूनिट बंद रहा। गोइंदवाल का यूनिट बाद में चालू किया गया।     बिजली कटों से पब्लिक परेशान: बिजली उत्पादन में कमी के कारण पंजाब के लोगों को बिजली कटों से जूझना पड़ रहा है। बिजली कट रात में ज्यादा लग रहे हैं। दरअसल, दिन में करीब 400 मेगावाट बिजली सौर ऊर्जा से भी तैयार हो रही है, जो रात में शून्य हो जाती है। सोलर प्रोजेक्ट से रात में बिजली नहीं बन रही पंजाब में सोलर प्रोजेक्ट्स के जरिए दोपहर के समय 385 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। जबकि, 17 मेगावाट बिजली का उत्पादन अन्य सोर्स से हो रहा है। रात के समय सोलर प्रोजेक्ट से बिजली का उत्पादन नहीं हो रहा है, जिसकी वजह से रात के समय बिजली संकट ज्यादा गहरा रहा है। केंद्रीय पूल से बड़ी मात्रा में बिजली खरीद पंजाब में इन दिनों बिजली की डिमांड 16,000 मेगावाट के पार चल रही है। एक तरफ बिजली की डिमांड बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ उत्पादन में कमी आ रही है। डिमांड और उत्पादन के गैप को कम करने के लिए पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) केंद्रीय पूल से बिजली ले रही है। आज पीएसपीसीएल केंद्रीय पूल से करीब 11,770 मेगावाट बिजली खरीद रही है। पीएसपीसीएल को केंद्रीय पूल से महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। बिजली कट लग रहे हैं। आगे स्थिति और खराब हुई तो लोगों को गर्मी में बिजली के लंबे कटों का सामना करना पड़ेगा।  

पाकिस्तान में 104 सिख श्रद्धालुओं को एयरपोर्ट पर रोका, वीजा होने के बाद भी 12 घंटे से इंतजार

अमृतसर  पाकिस्तान में मौजूद सिख श्रद्धालुओं के साथ एक बार फिर अजीबोगरीब व्यवहार का मामला सामने आया है। भारत स्थित ऐतिहासिक गुरुधामों के दर्शन के लिए आ रहे 104 पाकिस्तानी सिख श्रद्धालुओं के एक जत्थे को फैसलाबाद एयरपोर्ट पर पिछले 12 घंटे से अधिक समय से रोककर रखा गया है। भारत के इस्लामाबाद स्थित उच्चायोग द्वारा वैध वीजा जारी किए जाने के बावजूद, पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के इमीग्रेशन अधिकारियों ने श्रद्धालुओं को फ्लाइट में सवार होने से रोक दिया। वाघा बॉर्डर से रोका तो खरीदी महंगी हवाई टिकटें श्रद्धालुओं के अनुसार, वे शुरुआत में वाघा-अटारी जमीनी सीमा के रास्ते भारत जाने की योजना बना रहे थे, लेकिन पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें सड़क मार्ग से जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद मजबूर होकर उन्होंने भारी-भरकम खर्च उठाकर हवाई यात्रा का विकल्प चुना और महंगी फ्लाइट टिकटें बुक कराईं। समय पर फैसलाबाद एयरपोर्ट पहुंचने के बाद इमीग्रेशन अफसरों ने यह कहकर अड़ंगा लगा दिया कि उनके पास पाकिस्तान सरकार, गृह विभाग और विदेश विभाग की विशेष एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) नहीं है। पूरी रात एयरपोर्ट पर बैठकर गुरुवाणी पाठ करते रहे श्रद्धालु इमीग्रेशन क्लीयरेंस न मिलने के कारण यात्रियों को रात 10 बजे से लेकर अगली सुबह तक एयरपोर्ट लाउंज में ही जागते हुए काटना पड़ा। अधिकारियों के इस अप्रत्याशित रवैये से आहत होकर श्रद्धालु वहीं फर्श पर बैठकर कीर्तन और गुरुवाणी का पाठ करने लगे। श्रद्धालुओं ने आक्रोश जताते हुए कहा कि अगर कोई अतिरिक्त एनओसी अनिवार्य थी, तो उन्हें टिकट बुकिंग के समय क्यों नहीं बताया गया? अचानक फ्लाइट छूटने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ा है। हाथ में वीजा थामे युवाओं ने पूछा- धार्मिक यात्रा पर यह राजनीति क्यों? एयरपोर्ट पर फंसे एक सिख युवक ने कैमरे के सामने अपना भारतीय वीजा दिखाते हुए पाकिस्तानी तंत्र पर तीखे सवाल खड़े किए। उसने कहा कि जब दोनों देशों के नियमों के तहत वीजा जारी हो चुका है, तो ऐन वक्त पर एनओसी का नया नियम थोपना सीधे-सीधे परेशान करने की मंशा को दर्शाता है। श्रद्धालुओं ने अपील की कि दोनों देशों के राजनीतिक मतभेदों से धार्मिक यात्राओं और आस्था को पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए। गोल्डन टेंपल और हेमकुंड साहिब दर्शन का था कार्यक्रम इस 104 सदस्यीय जत्थे का मुख्य उद्देश्य अमृतसर स्थित सचखंड श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल), उत्तराखंड स्थित श्री हेमकुंड साहिब, दिल्ली के ऐतिहासिक गुरुद्वारों और पंजाब के प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करना था। कई महीनों की तैयारी और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ऐन मौके पर इस तरह रोके जाने से सिख समुदाय में गहरा रोष व्याप्त है। श्री अकाल तख्त और एसजीपीसी से दखल की गुहार परेशानी में घिरे श्रद्धालुओं ने भारत के शीर्ष सिख नेतृत्व से तत्काल दखल देने की अपील की है। उन्होंने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (DSGMC) के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका से आग्रह किया है कि वे इस गंभीर मामले को उच्च स्तर पर उठाएं ताकि पाकिस्तानी अधिकारियों की मनमानी खत्म हो सके और जत्था भारत पहुंच सके।

बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल से कामकाज प्रभावित, 5 दिन काम की मांग तेज

भोपाल / नईदिल्ली  SBI, PNB और यूनियन बैंक सहित देशभर के सरकारी और कुछ निजी बैंक आज से लगातार तीन दिन बंद रहेंगे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने 2 साल से अटकी 5-डे वर्किंग की मांग को लेकर शुक्रवार को एक दिन की हड़ताल का ऐलान किया है। इसके बाद 12 सितंबर को महीने का दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार होने के कारण बैंक शाखाएं बंद रहेंगी। अगर सरकार और बैंक मैनेजमेंट ने मांगें नहीं मानीं, तो 26 अक्टूबर से देशभर के बैंकों में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो जाएगी। बैंकों ने अपने ग्राहकों से कहा है कि हड़ताल की वजह से ब्रांच स्तर की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। हालांकि, इस दौरान UPI, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी। 5-डे बैंकिंग पर 2 साल से अटकी मंजूरी UFBU का कहना है कि 8 मार्च 2024 को इंडियन बैंक्स एसोसिएशन यानी IBA के साथ 12वें द्विपक्षीय समझौते और 9वें जॉइंट नोट पर हस्ताक्षर हुए थे। इसमें 5-डे बैंकिंग लागू करने पर सहमति बनी थी। इसके तहत कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक रोज 40 मिनट ज्यादा काम करेंगे। IBA ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर केंद्र सरकार के पास भेजा था, लेकिन दो साल से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी वित्त मंत्रालय से इसे मंजूरी नहीं मिली है। क्या है 5-डे बैंकिंग प्रस्ताव?     वर्तमान में बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है।     नए प्रस्ताव के लागू होने पर हर शनिवार को छुट्टी रहेगी।     इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज का समय 40 मिनट प्रतिदिन बढ़ जाएगा। नई PLI स्कीम पर विवाद: सीनियर अफसरों को फायदा, निचले स्टाफ से भेदभाव यूनियनों ने वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाएं विभाग द्वारा जारी नई PLI गाइडलाइंस का विरोध किया है। यूनियनों का आरोप है कि यह स्कीम भेदभावपूर्ण है:     स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारी: व्यक्तिगत प्रदर्शन के आधार पर 365 दिनों तक के बेसिक पे के बराबर PLI मिलेगा।     वर्कमेन और स्केल I से III के कर्मचारी: इन्हें अधिकतम सिर्फ 15 दिनों का बेसिक पे + डीए ही मिलेगा। UFBU का तर्क है कि PLI पूरी तरह बैंक के ओवरऑल प्रदर्शन पर आधारित होना चाहिए और स्केल VII तक के सभी कर्मचारियों को एक समान दिनों का इंसेंटिव मिलना चाहिए। यह नया नियम IBA और यूनियनों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन है। दिल्ली हाईकोर्ट और श्रम आयुक्त के पास पहुंचा मामला PLI स्कीम को लेकर विवाद अब मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष सुलह प्रक्रिया के तहत लंबित है। इसके अलावा इस मामले को दिल्ली हाईकोर्ट में भी चुनौती दी गई है। यूनियनों ने मांग की है कि द्विपक्षीय बातचीत के जरिए इंसेंटिव स्कीम में संशोधन किया जाए। पेंशन अपडेशन और OPS की भी मांग     हड़ताल के मुख्य कारणों के अलावा बैंक यूनियनों ने कई पुरानी मांगों को भी फिर उठाया है:     सभी पेंशनभोगियों के लिए पेंशन अपडेशन और सुधार।     सभी रिटायर कर्मचारियों के लिए एक समान महंगाई भत्ता फार्मूला।     NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को ऑल्ड पेंशन स्कीम में स्विच करने का विकल्प। शुक्रवार की हड़ताल के बाद शनिवार-रविवार की छुट्टी 11 सितंबर को शुक्रवार है। इसके बाद 12 सितंबर शनिवार और 13 सितंबर रविवार है। ऐसे में कई जगह बैंकिंग सेवाओं पर असर लगातार तीन दिन तक रह सकता है। कुछ राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी की छुट्टी भी है। ऐसे में वहां कुछ ग्राहकों के लिए बैंक से जुड़ा काम चार दिन तक अटक सकता है। यानी जिस ग्राहक को शाखा में जाकर कोई जरूरी काम करना है, उसके लिए यह सामान्य तीन दिन की छुट्टी से ज्यादा बड़ी परेशानी बन सकती है। किन कामों पर सबसे ज्यादा असर? हड़ताल का सीधा असर बैंक शाखाओं में होने वाले काम पर पड़ सकता है। खासकर, कैश जमा करना, कैश निकालना, चेक से जुड़े काम या शाखा में दस्तावेज जमा करना। बैंक अधिकारियों या कर्मचारियों से आमने-सामने होने वाले काम। हालांकि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं अलग तरीके से चलती हैं। इसलिए UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग को शाखा की हड़ताल के बराबर नहीं समझना चाहिए। फिर भी किसी खास सेवा के लिए बैंक की अपनी व्यवस्था या तकनीकी स्थिति अलग हो सकती है। SBI ने ग्राहकों को क्या बताया? देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक SBI ने ग्राहकों को हड़ताल के संभावित असर को लेकर जानकारी दी है। बैंक ने कहा है कि शाखाओं और कार्यालयों का सामान्य कामकाज बनाए रखने के लिए जरूरी इंतजाम किए गए हैं, लेकिन हड़ताल के कारण काम प्रभावित हो सकता है। यानी SBI की शाखाएं पूरी तरह बंद होंगी ही, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन कर्मचारियों की भागीदारी के हिसाब से कामकाज प्रभावित हो सकता है। बैंक कर्मचारी क्यों कर रहे हैं हड़ताल? बैंक यूनियनों की सबसे प्रमुख मांग 5 डे वर्किंग की है। अभी बैंकिंग क्षेत्र में सभी कार्यदिवसों की व्यवस्था पांच दिन वाली नहीं है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से शनिवार और रविवार की छुट्टी के साथ सोमवार से शुक्रवार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस मुद्दे पर काफी समय से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक ठोस समाधान नहीं निकला।

उत्सव के रूप में मनाएं स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और सेवा से संकल्प अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उत्सव के रूप में मनाया जाये स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान और सेवा से संकल्प अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश में चलाए जाएंगे दो अभियान स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान से प्रदेश के 50 लाख लोगों को मिलेगा लाभ सेवा से संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर को शाम 7 बजे से पूरे प्रदेश में जलाये जायेंगे 58 लाख दीपक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में बैठक कर दोनों अभियान के सुचारू संचालन के दिये निर्देश सबकी हो सहभागिता, जनप्रतिनिधियों और आमजन को जोड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में दो महत्वपूर्ण अभियानों का शुभारंभ किया जायेगा। प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना को जन-जन तक पहुंचाने और सेवा से संकल्प अभियान के रूप में जनसेवा को नये संकल्प के साथ पूरा करने के लिए यह अभियान संचालित किए जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को उनकी सम्पत्ति की नि:शुल्क रजिस्ट्री कर राजस्व विभाग के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराये जायेंगे। वहीं, सेवा से संकल्प अभियान के तहत पहले दिन 17 सितम्बर को शाम 7 बजे पूरे प्रदेश में एक साथ 58 लाख आशीर्वाद के दीपक जलाएं जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह आमजन को सुविधा सम्पन्न बनाने और जनसेवा का बड़ा अभियान है। सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में पूरी तैयारी के साथ दोनों ही अभियान को उत्सव के रूप में आयोजित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए जनप्रतिनिधिगण, समाज और आमजन को इनसे जोड़ा जाए। जन-जन तक अभियान की जानकारी पहुंचायें, इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। अधिकाधिक युवाओं को अभियान से जोड़ने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ यादव गुरुवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि वे इन दोनों अभियान के लिए अगले दो दिन में माइक्रो प्लानिंग पूर्ण कर लें। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करें। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी, जोनल अधिकारी और सेक्टर अधिकारी भी नियुक्त किए जाएं। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई रमेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स ने वीसी के जरिए सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि स्वामित्व अधिकार निष्पादन अभिलेख, पंजीयन अभियान के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर लक्षित भूमि स्वामियों के अधिकार अभिलेखों का राज्य सरकार नि:शुल्क पंजीयन (रजिस्ट्री) कराने के अभियान का शुभारंभ करने जा रही है। इस अभियान में  प्रदेश भर के 41 हजार 568 गांवों के 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे किया जा चुका है और 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर, अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी के दौरान पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चुने गए जिले – आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोक नगर और रायसेन के कलेक्टरों से स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली।  कलेक्टरों ने बताया कि स्वामित्व योजना से संबंधित मोबाइल ऐप यूजर फ्रेंडली है। पटवारियों की ट्रेनिंग भी तेजी करवाई जा रही है। भू-अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री से गाँवों में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।   हितग्राहियों को निष्पक्षता और परदर्शिता के साथ दिलाएं लाभ बताया गया यह अभियान तीन चरणों में 17 सितम्बर से प्रारंभ होकर 3 अक्टूबर तक संचालित किया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण तेजी से पूरा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना का लाभ हितग्राहियों को पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ समय-सीमा में सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक निष्पादन अधिकारी को प्रतिदिन 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि राजस्व विभाग के अधिकारी ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर प्रत्येक गुरूवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए  शिविर लगाएं और प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री स्वामित्व योजना के अंतर्गत निष्पादित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए किए वे स्वामित्व अभिलेख अभियान की बेहतर प्लानिंग और शैड्यूलिंग कर प्रति दिन प्रगति रिपोर्ट तैयार कर सबमिट करें। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि किसी प्रकार की समस्या आने पर मुख्यमंत्री सहायता हेल्प लॉइन पर सम्पर्क करें। बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी होंगे और पंजीयन अधिकारी के रूप में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं अन्य को जिम्मेदारी सौंपी  गई है। सेवा संकल्प अभियान- भोपाल में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस पर एक माह तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ 17 सितम्बर को राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगा। इस कार्यक्रम में सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित मध्यप्रदेश बनाने का संकल्प जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। एक माह तक प्रदेश भर में जन सेवा के विभिन्न प्रकल्प संचालित किए जाएंगे एवं जन सहभगिता से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक हितग्राहियों को सुनिश्चित किया जाएगा। 17 सितम्बर की शाम प्रदेश भर में जलेंगे 58 लाख दीपक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अभियान के अंतर्गत कुल 13 गतिविधियां संचालित की जाएंगी। जनसंकल्प अभियान की शुरूआत 'आशीर्वाद का दीपक' कार्यक्रम के साथ होगी। इस दिन शाम 7 बजे एक साथ प्रदेश भर के लाभार्थी परिवारों और चयनित 10 से अधिक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातत्विक महत्व के स्थानों पर 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया कि दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के लिए वे अपने जिले के पुरातात्विक स्थानों को चिन्हित करें। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारी … Read more

सिंगरौली बनेगा माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट, खनिज संपदा के बेहतर इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

सिंगरौली को बनायें माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट – मुख्यमंत्री डॉ. यादव खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग से प्रदेश के विकास को मिले नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की खनिज साधन द्वारा प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक और खनिज संपदा की दृष्टि से समृद्ध प्रदेश है। खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और पर्यावरण-सम्मत तरीके से उपयोग प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नयी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि खनिज नीतियों का उद्देश्य राजस्व वृद्धि के साथ-साथ रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए और राज्य सरकार यही सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में खनिज साधन विभाग की बैठक में विभागीय गतिविधियों और प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी सहित खनिज साधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की खनिज संपदा प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण पूंजी है। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ ऐसे हो कि प्रदेश को राजस्व मिले, निवेश को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित नीति के संबंध में कहा कि जिला खनिज निधि (डीएमएफ राशि) का समुचित उपयोग करते हुए खनिज संसाधनों से सम्पन्न सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन,  पर्यावरण,  सड़क सुविधाओं और वाटरशेड के मामले में माडल डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभ का अधिकाधिक हिस्सा जनहित के कार्यों में लगाया जाये। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर मध्यप्रदेश को खनिज क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में खनिज साधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 का अनुमोदन कर प्रदेश के नागरिकों के हित में नीति का कारगर अमल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव, खनिज साधन विवेक पोरवाल ने पालिसी प्रेजेंटेशन में बताया कि विभिन्न प्रयासों के जरिए राज्य में खनिज संसाधनों से राजस्व आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित खनिज नीति में वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक खनिज संसाधनों से राजस्व आय 13720 करोड़ रुपए तक और वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे 30000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 के अंत तक ही सालाना खनिज राजस्व लक्ष्य से भी अधिक (106 प्रतिशत) राजस्व आय प्राप्त कर ली गई है। प्रदेश के दस जिलों क्रमशः सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल,  कटनी, बालाघाट, सतना,  जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल से सर्वाधिक खनिज आय मिलती है। जारी वित्त वर्ष में जुलाई 2026 के अंत तक इन दस जिलों में 3147.10 करोड़ रुपए डीएमएफ निधि उपलब्ध है। इसमें सर्वाधिक योगदान सिंगरौली जिले का है। सभी 55 जिलों को मिलाकर यह डीएमएफ निधि 3574.53 करोड़ रुपए है।