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उत्सव के रूप में मनाएं स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन और सेवा से संकल्प अभियान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

उत्सव के रूप में मनाया जाये स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान और सेवा से संकल्प अभियान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक प्रदेश में चलाए जाएंगे दो अभियान स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान से प्रदेश के 50 लाख लोगों को मिलेगा लाभ सेवा से संकल्प अभियान के तहत 17 सितम्बर को शाम 7 बजे से पूरे प्रदेश में जलाये जायेंगे 58 लाख दीपक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में बैठक कर दोनों अभियान के सुचारू संचालन के दिये निर्देश सबकी हो सहभागिता, जनप्रतिनिधियों और आमजन को जोड़ें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर प्रदेश में दो महत्वपूर्ण अभियानों का शुभारंभ किया जायेगा। प्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना को जन-जन तक पहुंचाने और सेवा से संकल्प अभियान के रूप में जनसेवा को नये संकल्प के साथ पूरा करने के लिए यह अभियान संचालित किए जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन अभियान से प्रदेश के 50 लाख से अधिक ग्रामीण आबादी को उनकी सम्पत्ति की नि:शुल्क रजिस्ट्री कर राजस्व विभाग के माध्यम से दस्तावेज उपलब्ध कराये जायेंगे। वहीं, सेवा से संकल्प अभियान के तहत पहले दिन 17 सितम्बर को शाम 7 बजे पूरे प्रदेश में एक साथ 58 लाख आशीर्वाद के दीपक जलाएं जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह आमजन को सुविधा सम्पन्न बनाने और जनसेवा का बड़ा अभियान है। सभी कलेक्टर्स अपने-अपने जिलों में पूरी तैयारी के साथ दोनों ही अभियान को उत्सव के रूप में आयोजित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अभियान की सफलता के लिए जनप्रतिनिधिगण, समाज और आमजन को इनसे जोड़ा जाए। जन-जन तक अभियान की जानकारी पहुंचायें, इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये। अधिकाधिक युवाओं को अभियान से जोड़ने का प्रयास करें। मुख्यमंत्री डॉ यादव गुरुवार को मंत्रालय से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश के सभी कमिश्नर्स और कलेक्टर्स को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स से कहा कि वे इन दोनों अभियान के लिए अगले दो दिन में माइक्रो प्लानिंग पूर्ण कर लें। जिले में स्वामित्व अभियान का नेतृत्व कलेक्टर स्वयं करें। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी, जोनल अधिकारी और सेक्टर अधिकारी भी नियुक्त किए जाएं। बैठक में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई रमेश कुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में प्रदेश के सभी कमिश्नर्स एवं कलेक्टर्स ने वीसी के जरिए सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि स्वामित्व अधिकार निष्पादन अभिलेख, पंजीयन अभियान के अंतर्गत प्रदेश स्तर पर लक्षित भूमि स्वामियों के अधिकार अभिलेखों का राज्य सरकार नि:शुल्क पंजीयन (रजिस्ट्री) कराने के अभियान का शुभारंभ करने जा रही है। इस अभियान में  प्रदेश भर के 41 हजार 568 गांवों के 68 लाख 47 हजार प्लॉट का सर्वे किया जा चुका है और 50 लाख से अधिक हितग्राहियों के नाम पर नि:शुल्क रजिस्ट्री कराई जाएगी। रजिस्ट्री के लिए पंचायत उपकर, अतिरिक्त स्टाम्प ड्यूटी छूट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वीसी के दौरान पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चुने गए जिले – आगर-मालवा, बड़वानी, हरदा, अशोक नगर और रायसेन के कलेक्टरों से स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन की जानकारी ली।  कलेक्टरों ने बताया कि स्वामित्व योजना से संबंधित मोबाइल ऐप यूजर फ्रेंडली है। पटवारियों की ट्रेनिंग भी तेजी करवाई जा रही है। भू-अभिलेखों की नि:शुल्क रजिस्ट्री से गाँवों में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है।   हितग्राहियों को निष्पक्षता और परदर्शिता के साथ दिलाएं लाभ बताया गया यह अभियान तीन चरणों में 17 सितम्बर से प्रारंभ होकर 3 अक्टूबर तक संचालित किया जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों का प्रशिक्षण तेजी से पूरा किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वामित्व योजना का लाभ हितग्राहियों को पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ समय-सीमा में सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक निष्पादन अधिकारी को प्रतिदिन 40 रजिस्ट्री करने का लक्ष्य मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कहा कि राजस्व विभाग के अधिकारी ग्राम पंचायत स्तर पर सरपंच, सचिव, पटवारी और रोजगार सहायक मिलकर प्रत्येक गुरूवार, शुक्रवार और शनिवार को नि:शुल्क रजिस्ट्री के लिए  शिविर लगाएं और प्रतिदिन कम से कम 30 से 40 रजिस्ट्री स्वामित्व योजना के अंतर्गत निष्पादित करने का लक्ष्य रखें। उन्होंने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए किए वे स्वामित्व अभिलेख अभियान की बेहतर प्लानिंग और शैड्यूलिंग कर प्रति दिन प्रगति रिपोर्ट तैयार कर सबमिट करें। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि किसी प्रकार की समस्या आने पर मुख्यमंत्री सहायता हेल्प लॉइन पर सम्पर्क करें। बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन में पंचायत स्तर पर पटवारी निष्पादन अधिकारी होंगे और पंजीयन अधिकारी के रूप में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं अन्य को जिम्मेदारी सौंपी  गई है। सेवा संकल्प अभियान- भोपाल में होगा राज्य स्तरीय कार्यक्रम प्रधानमंत्री मोदी के जन्म दिवस पर एक माह तक चलने वाले सेवा संकल्प अभियान का शुभारंभ 17 सितम्बर को राजधानी भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के साथ होगा। इस कार्यक्रम में सभी जिलों के कलेक्टर और हितग्राही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ेंगे। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश सरकार ने विकसित भारत के निर्माण के लिए विकसित मध्यप्रदेश बनाने का संकल्प जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। एक माह तक प्रदेश भर में जन सेवा के विभिन्न प्रकल्प संचालित किए जाएंगे एवं जन सहभगिता से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक हितग्राहियों को सुनिश्चित किया जाएगा। 17 सितम्बर की शाम प्रदेश भर में जलेंगे 58 लाख दीपक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि अभियान के अंतर्गत कुल 13 गतिविधियां संचालित की जाएंगी। जनसंकल्प अभियान की शुरूआत 'आशीर्वाद का दीपक' कार्यक्रम के साथ होगी। इस दिन शाम 7 बजे एक साथ प्रदेश भर के लाभार्थी परिवारों और चयनित 10 से अधिक प्रसिद्ध ऐतिहासिक और पुरातत्विक महत्व के स्थानों पर 58 लाख से अधिक दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिला कलेक्टरों को निर्देशित किया कि दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम के लिए वे अपने जिले के पुरातात्विक स्थानों को चिन्हित करें। अपर मुख्य सचिव शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि आशीर्वाद का दीया कार्यक्रम में प्रभारी अधिकारी … Read more

सिंगरौली बनेगा माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट, खनिज संपदा के बेहतर इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव का जोर

सिंगरौली को बनायें माइनिंग का मॉडल डिस्ट्रिक्ट – मुख्यमंत्री डॉ. यादव खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग से प्रदेश के विकास को मिले नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की खनिज साधन द्वारा प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक और खनिज संपदा की दृष्टि से समृद्ध प्रदेश है। खनिज संसाधनों का वैज्ञानिक, पारदर्शी और पर्यावरण-सम्मत तरीके से उपयोग प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नयी गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि खनिज नीतियों का उद्देश्य राजस्व वृद्धि के साथ-साथ रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के अवसरों का विस्तार करना होना चाहिए और राज्य सरकार यही सुनिश्चित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में खनिज साधन विभाग की बैठक में विभागीय गतिविधियों और प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 की समीक्षा की। बैठक में मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी सहित खनिज साधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी  उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश की खनिज संपदा प्रदेश के विकास की महत्वपूर्ण पूंजी है। इन प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग पारदर्शिता और पर्यावरणीय संतुलन के साथ ऐसे हो कि प्रदेश को राजस्व मिले, निवेश को प्रोत्साहन मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नये अवसर सृजित हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित नीति के संबंध में कहा कि जिला खनिज निधि (डीएमएफ राशि) का समुचित उपयोग करते हुए खनिज संसाधनों से सम्पन्न सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन,  पर्यावरण,  सड़क सुविधाओं और वाटरशेड के मामले में माडल डिस्ट्रिक्ट के रूप में विकसित किया जाये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खनिज संसाधनों से प्राप्त होने वाले लाभ का अधिकाधिक हिस्सा जनहित के कार्यों में लगाया जाये। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर मध्यप्रदेश को खनिज क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में खनिज साधन से संबंधित विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026 का अनुमोदन कर प्रदेश के नागरिकों के हित में नीति का कारगर अमल सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव, खनिज साधन विवेक पोरवाल ने पालिसी प्रेजेंटेशन में बताया कि विभिन्न प्रयासों के जरिए राज्य में खनिज संसाधनों से राजस्व आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित खनिज नीति में वित्त वर्ष 2026-27 के अंत तक खनिज संसाधनों से राजस्व आय 13720 करोड़ रुपए तक और वित्त वर्ष 2030-31 के अंत तक इसे 30000 करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 में अगस्त 2026 के अंत तक ही सालाना खनिज राजस्व लक्ष्य से भी अधिक (106 प्रतिशत) राजस्व आय प्राप्त कर ली गई है। प्रदेश के दस जिलों क्रमशः सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल,  कटनी, बालाघाट, सतना,  जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल से सर्वाधिक खनिज आय मिलती है। जारी वित्त वर्ष में जुलाई 2026 के अंत तक इन दस जिलों में 3147.10 करोड़ रुपए डीएमएफ निधि उपलब्ध है। इसमें सर्वाधिक योगदान सिंगरौली जिले का है। सभी 55 जिलों को मिलाकर यह डीएमएफ निधि 3574.53 करोड़ रुपए है।  

मार्केट क्रैश से मचा हड़कंप, धड़ाम हुए ये शेयर; निवेशकों को लगा 5 लाख करोड़ का झटका

मुंबई  भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखी जा रही है. निफ्टी 230 अंक या 1 फीसदी टूटकर 23,255 पर कारोबार कर रहा है. जबकि BSE सेंसेक्‍स 0.87 फीसदी या 637 अंक टूटकर 74,265.32 पर आ चुका है. सभी इंडेक्‍स में दबाव दिखाई दे रहा है. खासकर मेटल सेक्‍टर में ज्‍यादा बिकवाली दिख रही है।  बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से सिर्फ 8 शेयर ही मामूली तेजी पर कारोबार कर रहे हैं, जबकि बाकी 22 शेयर भारी गिरावट पर हैं. बजाज फाइनेंस, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा स्‍टील शेयर 2 फीसदी से ज्‍यादा टूट चुके हैं. वहीं एलटी, एचडीएफसी बैंक और रिलायंस जैसे हैवीवेट शेयरों में भी गिरावट है।  शेयर बाजार में भारी दबाव के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. बीएसई मार्केट कैप 483 लाख करोड़ रुपये से 5 लाख करोड़ रुपये घटकर 478 लाख करोड़ रुपये पर आ चुका है. इसके अलावा, बीएसई के 120 शेयरों में आज लोअर सर्किट लगा है. 70 शेयर अपर सर्किट पर कामकाज कर रहे हैं. 117 शेयर 52 वीक के निचले स्‍तर पर हैं और 68 शेयर 52 वीक के हाई पर हैं. 3,365 शेयरों में से 809 शेयर तेजी पर कामकाज कर रहे थे और 2,376 शेयरों में गिरावट रही, जबकि 180 शेयर अनचेंज थे।  मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनाव गहराने और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड के 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से 11 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी तबाही देखने को मिली। कमजोर वैश्विक संकेतों के चलते दलाल स्ट्रीट की शुरुआत गैप-डाउन हुई और बाजार खुलते ही बिकवाली का भारी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 708.23 अंक यानी 0.95% की भारी गिरावट के साथ 74,194.36 पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 259.70 अंक टूटकर 23,218.10 के स्तर पर फिसल गया। बाजार में मंदी का माहौल इतना तगड़ा रहा कि लगभग 1,824 शेयरों में बिकवाली रही, जबकि केवल 692 शेयर ही हरे निशान में टिक पाए। क्रूड में लगी आग से ONGC चमका, IT शेयरों ने भी दी राहत कच्चे तेल की कीमतों में आए तेज उछाल का सीधा फायदा तेल कंपनी ONGC को मिला। निफ्टी हीटमैप के मुताबिक, चौतरफा मंदी के बीच भी ONGC का शेयर 1.85% की तेजी के साथ ₹241.67 के स्तर पर ट्रेड कर रहा है।     टॉप गेनर स्टॉक्स: ONGC के अलावा टेक महिंद्रा (+1.26%), इन्फोसिस (+0.84%), टीसीएस (+0.83%), विप्रो (+0.34%), पावरग्रिड (+0.33%), आईटीसी (+0.31%) और एचसीएल टेक (+0.18%) हरे निशान में कारोबार करते दिखे। आईटी सेक्टर अकेला ऐसा सेक्टर रहा जिसने बाजार को थोड़ा सहारा दिया।     टॉप लूजर स्टॉक्स: दूसरी ओर, हिंडाल्को (-3.90%) और टाटा स्टील (-2.49%) में सबसे ज्यादा बिकवाली रही। इनके अलावा बजाज फाइनेंस (-2.22%), जेएसडब्ल्यू स्टील (-2.01%), बजाज फिनसर्व (-1.85%), श्रीराम फाइनेंस (-1.83%), आयशर मोटर्स (-1.79%) और अडानी एंटरप्राइजेज (-1.74%) के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। मेटल, ऑटो और बैंकिंग सेक्टर 3% तक टूटे सेक्टोरल फ्रंट पर आईटी सेक्टर को छोड़कर सभी इंडेक्स लाल निशान में डूब गए। मेटल, ऑटो, बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर्स में 1% से लेकर 3% तक की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। क्‍यों आई मार्केट में इतनी भारी गिरावट?      शेयर बाजार में भारी गिरावट का सबसे खास वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल है, जिसकी कीमत अब ग्‍लोबल मार्केट में 108 डॉलर प्रति बैरल हो चुका है।      अमेरिका में महंगाई के मजबूत आंकड़े आए हैं, जिससे फेडरल बैंक द्वारा ब्‍याज दरों में बढ़ोतरी की उम्‍मीद और भी मजबूत हो चुकी है।       विदेशी निवेशकों ने जबरदस्‍त बिकवाली की है. 10 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने 438 करोड़ रुपये के भारतीय शेयर बेचे. हालांकि, घरेलू निवेशकों ने 1,026 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे हैं।  इन शेयरों में भारी दबाव हिंदुस्‍तान कॉपर 4 फीसदी टूटकर 508 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहा है. हिंदुस्‍तान जिंक के शेयरों में भी 4 फीसदी की गिरावट है. लोधा डेवलपर्स के शेयर भी 5 फीसदी टूटे हैं. कोचीन शिपयार्ड 6 फीसदी, गोदरेज प्रॉपर्टीज 6 फीसदी और एनएसीएल के शेयरों में भी 4 फीसदी की गिरावट है. डिक्‍सन टेक के शेयर भी 3 फीसदी से ज्‍यादा टूटे हैं और मुथूट फाइनेंस के शेयरों में भी करीब 4 फीसदी की गिरावट देखी जा रही है। 

महाराष्ट्र के नांदेड़ में दर्दनाक हादसा, ट्रक और टाटा मैजिक की भिड़ंत में 9 की गई जान

नांदेड़ महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक बड़ा सड़क हादसा हुआ है. एक तेज रफ्तार ट्रक और टाटा मैजिक की भिड़ंत में 9 लोगों की मौत हो गई है. इसके अलावा तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए है. घायलों को सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. कुछ घायलों की हालत नाजुक होने के कारण मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. जानकारी के अनुसार यह भीषण हादसा शाम करीब 6:30 बजे नांदेड़-भोकर हाईवे पर वाकद गांव के पास सीताखंडी इलाके में हुआ.  भोकर से नांदेड़ की दिशा में जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रही टाटा मैजिक यात्री वैन को जोरदार टक्कर मार दी।  टक्कर इतनी भयानक थी कि टाटा मैजिक वैन के परखच्चे उड़ गए और वह छिटककर सड़क के किनारे जा गिरी. वैन में कुल 12 यात्री सवार थे, हादसे के वक्त दोनों वाहनों की रफ्तार काफी तेज थी. घायलों को सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है. कुछ घायलों की हालत नाजुक होने के कारण मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.  मिली जानकारी के अनुसार, यह भीषण हादसा शाम करीब 6:30 बजे नांदेड़-भोकर हाईवे पर वाकद गांव के पास सीताखंडी इलाके में हुआ।  जोरदार टक्कर की वजह से 9 यात्रियों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया और सड़क पर क्षत-विक्षत शव बिखर गए. हादसे की तेज आवाज सुनकर स्थानीय ग्रामीण तुरंत मौके पर दौड़े और पुलिस व एंबुलेंस को घटना की सूचना दी. इसके अलावा 3 घायलों को आनन-फानन में भोकर और नांदेड़ के सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. वैन को टक्कर मारने के बाद ट्रक का अगला हिस्सा भी पूरी तरह पिचक गया. इसके चलते ट्रक ड्राइवर केबिन के अंदर ही फंस गया. पुलिस और बचाव दल उसे बाहर निकालने की लंबी कोशिश चली. वैन में सफर कर रहे सभी लोग स्थानीय निवासी बताए जा रहे हैं. फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि इस हादसे में गलती किसकी थी।   

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- ‘हनुमान अंश’ में दिखती है आस्था और भक्ति की अद्भुत शक्ति

हनुमान अंश’ फिल्म आस्था, संस्कृति और भक्ति की शक्ति का देती है संदेश : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देखी हनुमान अंश फीचर फिल्म भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार की शाम कोलार स्थित एक निजी प्लाजा में बहुचर्चित फीचर फिल्म ‘हनुमान अंश’ के प्रदर्शन में सहभागिता करते हुए फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इसकी विषय-वस्तु, प्रस्तुति और कलाकारों के अभिनय की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नीब करौली बाबा के जीवन चरित्र पर केंद्रित ‘हनुमान अंश’ फिल्म हमारी आस्था, आध्यात्मिक परंपरा और भगवान हनुमान की भक्ति के मार्ग को समझने का एक माध्यम है। भक्ति से समाज सुधार की शक्ति पाने की पटकथा वाली इस फिल्म ने हम सबके आराध्य भगवान हनुमान की आराधना और सेवा की भावना को अत्यंत प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि नीब करौली बाबा के जीवन पर केंद्रित इस फिल्म से हमें एकात्म मानववाद और सर्वहारा वर्ग के कल्याण की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने फिल्म में नीब करौली बाबा की भूमिका निभाने वाले कलाकार शोभिनव सत्या के अभिनय की विशेष प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि शोभिनव सत्या ने नीब करौली बाबा के चरित्र का सिर्फ़ अभिनय ही नहीं किया, बल्कि उसे खुद जीकर जीवंत कर दिया है। उनके अभिनय में बाबा के व्यक्तित्व की सहजता, भक्ति और आध्यात्मिक भावनाओं की गहरी अनुभूति दिखाई देती है। उन्होंने सचमुच कमाल ही कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं में संतों का जीवन समाज को सदैव प्रेरणा देता रहा है। ऐसे विषयों पर बनने वाली फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कारों और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों से ‘हनुमान अंश’ फिल्म देखने का आह्वान करते हुए कहा कि अपने धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक परम्पराओं में आस्था रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। यह फिल्म भक्ति के साथ ही हमें अपने जीवन में सेवा, समर्पण, परोपकार और सबके प्रति सद्भावना रखने की अभिप्रेरणा देती है। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, मप्र राज्य वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन के अध्यक्ष संजय नगाईच, एमपी हाऊसिंग बोर्ड के चेयरमैन कोमल जैन, महापौर श्रीमती मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति सहित अन्य जनप्रतिनिधि, निजी प्लाजा के आनर एवं बड़ी संख्या में दर्शकगण उपस्थित थे।  

CM विष्णुदेव साय ने सपरिवार देखी ‘हनुमान अंश’, राज्यपाल रमेन डेका और डॉ. रमन सिंह भी रहे मौजूद

राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने सपरिवार देखी फिल्म ‘हनुमान अंश’ मुख्यमंत्री साय ने फिल्म ‘हनुमान अंश’ को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा की भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है : मुख्यमंत्री साय नीम करौली बाबा का जीवन मानव सेवा, प्रेम और भक्ति का प्रेरणादायी उदाहरण : मुख्यमंत्री भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत पर आधारित फिल्में नई पीढ़ी को अपने संस्कारों और मूल्यों से जोड़ने का सशक्त माध्यम मंत्रिपरिषद के सदस्य एवं निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्ष भी रहे उपस्थित रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित जोरा मॉल के सिनेमाघर में सपरिवार फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी सपरिवार उपस्थित रहे। मंत्रिपरिषद के सदस्य तथा विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षों ने भी फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद मुख्यमंत्री साय ने ‘हनुमान अंश’ को छत्तीसगढ़ में टैक्स फ्री करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा से समाज को परिचित कराने वाली ऐसी प्रेरणादायी फिल्में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचनी चाहिए। फिल्म को टैक्स फ्री किए जाने से प्रदेश के अधिकाधिक दर्शकों, विशेषकर युवाओं को भारत की समृद्ध संत परंपरा और उसके जीवन मूल्यों को जानने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत की संत परंपरा ने सदैव समाज को सत्य, सेवा, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाया है। संतों ने अपने जीवन और आचरण के माध्यम से समाज को मानवता और लोककल्याण का संदेश दिया है। नीम करौली बाबा का जीवन भी इसी महान परंपरा का प्रेरणादायी उदाहरण है। उनका जीवन हमें यह सीख देता है कि मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि नीम करौली बाबा ने अत्यंत सरल शब्दों और सहज जीवन के माध्यम से प्रेम, सेवा और भक्ति का संदेश दिया। उनके विचारों में मानवता और सभी के प्रति समान भाव सर्वोपरि रहा। उनका यह संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है और समाज को सकारात्मक दिशा देने की सामर्थ्य रखता है। मुख्यमंत्री साय ने फिल्म के निर्माताओं, निर्देशक, कलाकारों एवं पूरी टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज तक विचार, संस्कार और प्रेरणा पहुंचाने का भी प्रभावी माध्यम है। भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और संत परंपरा पर आधारित सकारात्मक फिल्में नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परंपराओं और मानवीय मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी हजारों वर्षों पुरानी परंपराओं और जीवन मूल्यों में निहित है। सेवा, करुणा, सद्भाव और मानव कल्याण जैसे मूल्यों को आगे बढ़ाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्में इन मूल्यों को सरल और प्रभावी रूप में समाज तक पहुंचाने का सराहनीय प्रयास हैं। उल्लेखनीय है कि फिल्म ‘हनुमान अंश’ नीम करौली बाबा के जीवन, आध्यात्मिक यात्रा और उनके सेवा एवं भक्ति के संदेश पर आधारित है।  इस अवसर पर मंत्रिपरिषद के सदस्य, विभिन्न निगम-मंडल-आयोगों के अध्यक्षगण सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

यात्री परिवहन के विस्तार पर मंथन, इंदौर में विजन समिट से निवेश और उद्योग को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

इंदौर  मध्य प्रदेश सरकार ने वर्ष 2005 में घाटे का हवाला देकर सड़क परिवहन निगम (सपनि) को बंद कर दिया था। पत्रिका ने सड़क परिवहन निगम के बंद होने से प्रदेश में बिगड़ी परिवहन व्यवस्था को उजागर किया था। सरकार के सामने वे सभी तथ्य लेकर आए, जिसने सफर की मुश्किलें बढ़ाईं। इसके बाद मोहन सरकार ने सरकारी लोक परिवहन सेवा को शुरू करने ऐलान किया और अब क्रियान्वयन की ओर बढ़ी है। यानी अब मध्य प्रदेश में जल्द ही सरकारी बस परिवाहन सेवा शुरु होगी। आपको बता दें कि, राज्य सरकार प्रदेश के नागरिकों को स्मार्ट, सुरक्षित, सुगम और पर्यावरण-अनुकूल लोक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम लेने जा रही है। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा यात्री परिवहन विजन समिट-2026 आयोजित की जाएगी। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 11 और 12 सितंबर को आयोजित होने समिट में प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के साथ-साथ निवेश, रोजगार और उद्योग के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर मंथन होगा। इसमें पूरे देश से आने वाले परिवहन विशेषज्ञ, निजी बस ऑपरेटर, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और नीति-निर्माता प्रदेश की यात्री परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विचार-विमर्श करेंगे। विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यात्री परिवहन का रोडमैप तैयार करने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश की 75 फीसदी ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को बेहतर किया जाएगा। मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड अंतर्गत 'मोबिलिटी विज़न 2030' का लक्ष्य प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक परिवहन नेटवर्क का विस्तार करना है। इसके अंतर्गत प्रदेश में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे रोजाना 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प होगा। इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से समिट में स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। मौजूदा समय में 96 पीएम ई-बसें और 120 इंटरसिटी बसें प्रदेश में संचालित हैं। इसके साथ आगामी 6 महीनों में 486 पीएम ई-बसें और 34 इंटरसिटी बसें जोड़ी जाएंगी, जबकि वर्ष 2027 तक यह संख्या बढ़ाकर 1,100 करने का लक्ष्य है। प्रदेश में 100 बसों की क्षमता वाले आधुनिक चार्जिंग डिपो और सोलर इंफ्रॉस्ट्रक्चर भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे सालाना 70,000 टन से अधिक कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आएगी। यात्री सुरक्षा, स्मार्ट तकनीक और 24×7 निगरानी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत संचालित होने वाली सभी बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए होगी। इसके लिए मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इन सेंटरों से बसों के संचालन, लोकेशन, टाइमिंग एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही, सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम, ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी।

2027 चुनाव के लिए BJP का बड़ा प्लान, 125 मौजूदा विधायकों पर संकट; 2024 के नतीजों से लिया सबक

लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब छह महीने से भी कम वक्त बचा है. इस चुनाव में 10 साल से सत्तारूढ़ योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के सामने हैट्रिक लगाने की चुनौती है. भाजपा ने स्थानीय विधायकों के कामकाज और लोकप्रियता का सर्वे कराते हुए जनता का मूड भांपने की कोशिश की है. 2024 के लोकसभा चुनाव से लगे झटके से सबक लेकर भाजपा ने 403 विधानसभा सीटों पर एक गोपनीय और बहुस्तरीय आंतरिक सर्वे कराया है. इस सर्वे रिपोर्ट ने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।  भाजपा का आंतरिक सर्वे सूत्रों की मानें तो इस सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, यूपी में करीब 125 से 128 मौजूदा विधायकों के खिलाफ उनके ही क्षेत्रों में जबर्दस्त एंटी इनकंबेंसी है. सीधे तौर पर कहें तो करीब भाजपा में 128 सीटों पर मौजूदा विधायकों के टिकट काटा या बदला जा  सकता है. पश्चिम यूपी से लेकर पूरब तक मंत्रियों से लेकर दिग्गज विधायकों तक के नाम इस रेड लिस्ट में शामिल हैं. भाजपा यूपी को अपने संगठन के लिहाज से 6 क्षेत्रों में बांटती है. ऐसे में कहां किस क्षेत्र से कितने टिकट कट सकते हैं, ये आंकड़ा चौंकाने वाला है. यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है।      पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में 23-25 टिकट कटने के आसार     ब्रज क्षेत्र कुल 65 सीटों में 24-26 टिकट कटने की संभावना     अवध क्षेत्र में कुल 82 सीट में 26-28 टिकट कटने का संकेत     कानपुर क्षेत्र की कुल 52 सीट में 22-24 कटने के कयास     काशी क्षेत्र में कुल 72 सीट में 19-21 का पत्ता कट सकता है     गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18-22 टिकट कटने की संभावना यूपी में भाजपा की हैट्रिक की चुनौती भाजपा यूपी में हैट्रिक लगाने को पूरी ताकत झोंक रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले एक-डेढ़ महीने में ही राज्य के ज्यादातर जिलों का दौरा कर विकास परियोजनाओं की झड़ी लगा दी है.2022 की जीत की बात करें तो 1985 के बाद यूपी में यह पहला मौका था जब किसी मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी ने लगातार दूसरी बार पूरे बहुमत के साथ सत्ता में वापसी की थी. वहीं सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित है. अखिलेश यादव जहां पीडीए के सामाजिक समीकरणों पर ध्यान केंद्रित किए हैं, वहीं कांग्रेस दलित-मुस्लिम वोटों को एकजुट करके अपना जनाधार बढ़ाने में जुटी है।  2022 विधानसभा चुनाव में किसको कितनी सीटें भारतीय जनता पार्टी (BJP)- 255 अपना दल (सोनेलाल)-1 2 निषाद पार्टी (NISHAD)- 06 एनडीए (NDA)-  273 कुल सीटें 403: बहुमत 202 गठबंधन में सीटों का बंटवारा भी चुनौती उत्तर प्रदेश में मोदी-योगी लहर को कायम रखते हुए भाजपा को अकेले 41.29% वोट मिले थे. भाजपा का पिछले चुनाव में अपना दल सोनेलाल, निषाद पार्टी जैसे दलों के साथ गठबंधन रहा है. अब एनडीए के खेमे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से राष्ट्रीय लोकदल शामिल है. एनडीए का सपा-कांग्रेस गठबंधन से मुख्य मुकाबला होना तय है. मायावती की बहुजन समाज पार्टी, आजाद समाज पार्टी, एआईएमआईएम जैसे दल भी ताल ठोकने को तैयार हैं। 

बच्चों के अपहरण की जांच में एकरूपता की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से जवाब तलब किया

नई दिल्ली बच्चों के गुम होने, अपहरण और उन्हें जबरन ले जाने के मामलों की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पूरे देश में ऐसी घटनाओं की जांच के लिए एक जैसी व्यवस्था बनाने की मांग की गई है। इसके साथ ही जांच को तय समयसीमा में पूरा करने, विशेष जांच प्रक्रिया अपनाने और मामलों की जल्द सुनवाई के लिए समर्पित अदालतें बनाने की मांग की गई है। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या किया? मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में केंद्र और राज्यों से जवाब मांगा है। इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय, कानून एवं न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और विधि आयोग को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता की मुख्य मांग क्या? यह जनहित याचिका अधिवक्ता और याचिकाकर्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखिल की है। इसे अधिवक्ता-ऑन-रिकॉर्ड अश्वनी कुमार दुबे के जरिए सुप्रीम कोर्ट में पेश किया गया। याचिका में मांग की गई है कि बच्चों के अपहरण और उन्हें जबरन ले जाने के मामलों की जांच के लिए पूरे देश में एक समान व्यवस्था हो। इसमें खास तौर पर समयबद्ध जांच और विशेष जांच प्रक्रिया की मांग रखी गई है।  ​समर्पित अदालतें बनाने की पैरवी याचिका में केवल जांच तक ही बात सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि त्वरित न्याय के लिए समर्पित विशेष अदालतें गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि जब तक बच्चों के खिलाफ होने वाले इन अपराधों के लिए अलग से विशेष अदालतें नहीं होंगी, तब तक पीड़ितों को त्वरित न्याय मिलना कठिन होगा और दोषियों में कानून का डर कायम नहीं हो सकेगा। ​मौजूदा व्यवस्था की खामियों पर उठाये सवाल सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में यह रेखांकित किया गया है कि वर्तमान समय में राज्यों के बीच जांच एजेंसियों के समन्वय और सूचना साझा करने में काफी ढिलाई देखने को मिलती है। कई मामलों में पुलिस की धीमी और असंवेदनशील कार्रवाई के कारण अपहृत बच्चों को सही समय पर सुरक्षित वापस नहीं लाया जा पाता। याचिका में कहा गया है कि अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए बच्चों का अपहरण कर उन्हें बाल मजदूरी या मानव तस्करी में धकेल दिया जाता है, जिसके लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय तंत्र की सख्त जरूरत है। ​सुप्रीम कोर्ट का रुख और आगे की कार्रवाई सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका में उठाए गए बिंदुओं को गंभीर मानते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। राज्यों और केंद्र सरकार की ओर से दाखिल होने वाले जवाबों के बाद सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर आगे की सुनवाई करेगा और बच्चों की सुरक्षा के लिए दिशानिर्देश तय कर सकता है। याचिका में ये प्रमुख मांगें रखी गई हैं:-     बच्चों के अपहरण और जबरन ले जाने के मामलों की जांच के लिए देशभर में एक समान व्यवस्था हो।     जांच को तय समयसीमा में पूरा करने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया लागू की जाए।     ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष और समर्पित जांच प्रक्रिया तैयार की जाए।     मामलों की सुनवाई तेजी से पूरी करने के लिए समर्पित अदालतों की व्यवस्था हो। याचिका में मौजूदा व्यवस्था को लेकर क्या कहा गया? याचिका में लापता, अपहृत और जबरन ले जाए गए बच्चों से जुड़े मामलों को संभालने में व्यवस्था की खामियों का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की है, जिससे ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां तेजी से और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई कर सकें। याचिका का जोर इस बात पर है कि बच्चों से जुड़े इन मामलों में जांच और कार्रवाई के लिए एक समान और समन्वित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। याचिका में कहा गया है कि बच्चों के गुम होने, अपहरण या उन्हें जबरन ले जाने के मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई तेज और आपस में समन्वित होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से दखल देने की मांग की है। फिलहाल अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। केंद्र, राज्यों और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब के बाद मामले में आगे की कार्रवाई होगी। 

Instagram-Facebook पर नाबालिगों की एंट्री होगी बंद? बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर SC ने केंद्र से पूछा सवाल

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें मांग की गई है कि 18 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए. याचिका में सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षा उपायों की भी मांग की गई है, जिसमें माता-पिता या लीगल गार्जियन की सहमति जरूरी होनी चाहिए.  याचिकामें कहा गया है कि मेटा और दूसरी सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों के अकाउंट बनाने की आयुसीमा 13 साल तय की है, जो अमेरिकी कानून के मुताबिक है।  याचिका में क्या कहा गया है? NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की फाइल की गई याचिका में कहा गया है कि फेसबुक और स्नैपचैट (इंडिया) जैसे प्लेटफॉर्म यूजर्स को 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की इजाजत देते हैं, जबकि भारतीय कानून 18 साल से कम उम्र के लोगों को नाबालिग मानता है.  याचिका में इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) रूल्स, 2021 में बदलाव करने या खास गाइडलाइंस बनाने के निर्देश देने की मांग की गई है. जिससे ये सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना 18 साल से कम उम्र के बच्चे के साथ सोशल मीडिया कॉन्ट्रैक्ट न कर सके, या ये कॉन्टेक्ट माता-पिता या अभिभावक के वेरिफिकेशन/e-KYC के अधीन होनी चाहिए।  बच्चों को सीधे एक्सेस देने पर सवाल याचिका में ये भी मांग की गई है कि ऐसी गाइडलाइंस बनाई जाएं जो ये जरूरी करें कि जहां भी किसी नाबालिग को डिजिटल प्लेटफॉर्म एक्सेस करने या इस्तेमाल करने की इजाजत हो, तो ऐसा एक्सेस कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त तरीके से हो, जिसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक शामिल हों. इसमें भी माता-पिता या अभिभावक का वेरिफिकेशन/e-KYC शामिल हो, जो सर्विस के नेचर और रिस्क के हिसाब से हो।  याचिका में कहा गया है कि बच्चों का डिजिटल प्लेटफॉर्म तक खुद से एक्सेस उन्हें ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, ट्रैफिकिंग, बिहेवियरल प्रोफाइलिंग, पर्सनल डेटा का गलत इस्तेमाल, साइबरबुलिंग और उम्र के हिसाब से गलत कंटेंट जैसे रिस्क के खतरे में डालता है।