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सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! 13 दिन में चांदी ₹27 हजार सस्ती, गोल्ड रेट भी लुढ़का

 नई दिल्ली सोना-चांदी फिर सस्ता (Gold-Silver Cheaper) हुआ है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मंगलवार को दोनों कीमती धातुओं के दाम में खुलते ही तेज गिरावट देखने को मिली. चांदी का भाव तो अचानक 4400 रुपये प्रति किलो से ज्यादा कम हो गया. सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के बाद अचानक आए तेज उछाल के बाद से अब तक 1 Kg Silver Price 27,000 रुपये से ज्यादा गिर चुका है. वहीं ताजा गिरावट के बाद अब अपने हाई से चांदी अब 1.85 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती मिल रही है. सोना भी चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए टूटा है।  13 दिन में 27000 रुपये टूटी चांदी  सरकार ने कीमती धातुओं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का ऐलान किया था, तो बीते 13 मई को अचानक चांदी का भाव एमसीएक्स पर (MCS Silver Price) 3 लाख रुपये के पार निकल गया था. लेकिन इसके बाद ये एक-दो दिन को छोड़ दें, तो बिखरी ही है. तब से अब तक 13 दिनों में इसका भाव 3,00,238 रुपये से टूटकर ताजा गिरावट के साथ 2,72,265 रुपये पर आ गया है और इस हिसाब से देखें तो Silver 27,973 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।  गौरतलब है कि बीते कारोबारी दिन सोमवार को दिनभर के कारोबार के बाद 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली वायदा चांदी 2,76,716 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी और मंगलवार को खुलते ही ये 4,451 रुपये सस्ती हो गई. वहीं इसके हाई लेवल से तुलना करें, तो जनवरी में रिकॉर्ड तेजी के साथ चांदी 4,57,328 रुपये प्रति किलो के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंची थी और यहां से अब 1,85,063 रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है।  Gold हाई से अब इतना सस्ता  न सिर्फ चांदी का भाव टूटा है, बल्कि वायादा सोना भी मंगलवार को फिसला है. एमसीएक्स पर कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही 5 जून की एक्सपायरी वाला 24 Karat Gold अपने पिछले बंद 1,59,081 रुपये की तुलना में गिरकर 1,58,100 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर आ गया. इस गिरावट के साथ 10 ग्राम सोने का भाव अब अपने हाई लेवल 2,02,984 रुपये से 44,884 रुपये प्रति 10 ग्राम कम हो चुका है।  चांदी की तरह सोना भी इंपोर्ट ड्यूटी हाईक के बाद तेज रफ्तार से भागता हुआ नजर आया था. 13 मई को ये 1,62,186 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गया था, लेकिन अब इसकी कीमत यहां से 4,086 रुपये प्रति 10 ग्राम तक गिर चुकी है।  मई में अब तक कैसा रहा हाल?  वायदा कारोबार में मई महीने में सोना-चांदी की कीमतों में आए उतार-चढ़ाव पर नजर डालें, तो ये महंगे हुए हैं. जहां बीते महीने के आखिरी दिन यानी 30 अप्रैल को 1 किलो चांदी की कीमत 2,44,456 रुपये प्रति किलो थी और ताजा भाव से तुलना करें, तो ये करीब 27 हजार रुपये से ज्यादा बढ़ चुकी है. वहीं सोना इस दौरान 1,51,111 रुपये प्रति 10 ग्राम से 7 हजार रुपये से अधिक महंगा हुआ है। 

विकास खंडों में लगने वाली साप्ताहिक चौपालों के साथ किसान मेला का भी हो आयोजन: मुख्यमंत्री

खरीफ-2026 की तैयारी समय से पूरी करें, किसानों को हर जरूरी संसाधन उपलब्ध हो: मुख्यमंत्री विकास खंडों में लगने वाली साप्ताहिक चौपालों के साथ किसान मेला का भी हो आयोजन: मुख्यमंत्री दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को बढ़ावा देने के निर्देश यूपी आईटीएस की तर्ज पर कृषि विभाग भी आयोजित करे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी खरीफ-2026 में 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य 2.29 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी पीएम किसान और फसल बीमा योजनाओं का लाभ समय से दिलाने के निर्देश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कृषि विभाग की विभिन्न प्रस्तावित कार्ययोजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि खरीफ-2026 की सभी तैयारियां समय से पूरी कर ली जाएं तथा किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और तकनीकी सहायता समय पर उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हुए किसानों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियों को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न की खेती को प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सूखा संभावित क्षेत्रों के लिए अग्रिम कार्ययोजना तैयार रखी जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर किसानों को वैकल्पिक फसलों के बीज उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो की तर्ज पर कृषि विभाग को भी अपनी विशेषताओं की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी लगानी चाहिए। बैठक में बताया गया कि खरीफ-2026 में 110.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल और 302.62 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। धान उत्पादन का लक्ष्य 224.25 लाख मीट्रिक टन रखा गया है, जबकि बाजरा, मक्का, अरहर और मूंगफली के उत्पादन में वृद्धि का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में बताया गया कि खरीफ-2026 के लिए 2.29 लाख क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 24 मई 2026 तक 1.26 लाख क्विंटल बीज उपलब्ध कराया जा चुका है। धान के लिए 80 हजार क्विंटल बीज वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को समय-समय पर कृषि संबंधी तकनीकी सलाह उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया, दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य माध्यमों से किसानों तक जानकारी पहुंचाई जाए। साथ ही कम अवधि और सूखा सहनशील प्रजातियों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा आगामी जून माह से सभी विकास खंडों में चौपाल लगाई जाएगी। इन चौपालों के साथ ही किसान मेला भी लगाई जाए। किसानों को हर योजना का लाभ मिले और उन्हें प्रगतिशील खेती से जोड़े जाने का प्रयास हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विभाग के अंतर्गत सभी विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों, मंडियों, वेयरहाउस आदि के आस-पास साफ-सफाई होनी चाहिए आवश्यकतानुसार इनकी रंगाई कराई जाए। इन केंद्रों तक पहुंचने के लिए अच्छी कनेक्टिविटी होनी चाहिए। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के लगभग 18 से 20 जनपद सूखे की दृष्टि से संवेदनशील हैं। धान एवं मूंगफली के लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दलहन, तिलहन और श्रीअन्न फसलों के अतिरिक्त बीजों की व्यवस्था की जा रही है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ में प्रस्तावित सीड पार्क को प्रारम्भ करने की दिशा में तेजी के निर्दश दिए। उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि जमाखोरी, कालाबाजारी और उर्वरकों के डायवर्जन पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाए। उन्होंने संतुलित उर्वरक उपयोग और जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। बैठक में बताया गया कि 24 मई 2026 तक प्रदेश में 36.44 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहे तथा 28.26 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध स्थिति में हैं। उर्वरक प्रवर्तन अभियान के तहत 4025 छापे डाले गए, 81 लाइसेंस निलंबित किए गए तथा 9 एफआईआर दर्ज कराई गईं।  मुख्यमंत्री ने कृषि योजनाओं में डिजिटल तकनीक के उपयोग को और बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी और सरल तरीके से उपलब्ध कराया जाए। बैठक में बताया गया कि एग्रीस्टैक योजनांतर्गत 24 मई 2026 तक 2.29 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूरी की जा चुकी है। किसान पोर्टल और मोबाइल ऐप के माध्यम से भी पंजीकरण कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक खेती और श्रीअन्न उत्पादन को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि बुंदेलखंड सहित जल संकट वाले क्षेत्रों में ऐसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। बैठक में बताया गया कि बुंदेलखंड के सभी विकासखंडों में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में 23,500 हेक्टेयर क्षेत्र में रसायन मुक्त खेती की गई तथा 21,934 किसानों को प्रशिक्षण दिया गया।  मुख्यमंत्री ने मक्का उत्पादन को बढ़ावा देने तथा उससे जुड़े उद्योगों के साथ समन्वय मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को तकनीकी सहयोग, प्रशिक्षण और विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2026-27 में मक्का क्षेत्रफल 11.39 लाख हेक्टेयर रहने का अनुमान है तथा वर्ष 2027-28 तक 32.84 लाख मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।   मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए कहा कि पात्र किसानों को योजनाओं का लाभ समय से उपलब्ध कराया जाए तथा बीमा दावों के निस्तारण में तेजी लाई जाए। बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत अब तक प्रदेश के किसानों को 99,032 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि वितरित की जा चुकी है। वहीं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2016-17 से वर्ष 2025-26 तक 80.61 लाख किसानों को 6454.57 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति प्रदान की गई है। कृषि उत्पादों के निर्यात पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल मानकों का ध्यान रखते हुए उत्पाद को तैयार कराया जाए। वहीं मंडी समिति की योजनाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडी समितियों को किसानों के हित में आधुनिक, पारदर्शी और सुविधायुक्त बनाया जाए, कृषि विपणन व्यवस्था को और मजबूत करें।

PM मोदी के 12 साल पूरे, वित्त मंत्री ओपी चौधरी बोले- सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का बेमिसाल दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के 12 वर्ष पूर्ण होने पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी शुभकामनाएं सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण का बेमिसाल रायपुर  छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद पर ऐतिहासिक 12 वर्ष पूर्ण होने पर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि 26 मई 2014 से शुरू हुआ यह 12 वर्षों का कार्यकाल देश के इतिहास में सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण के संकल्प का जीवंत प्रतीक रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने अंत्योदय के लक्ष्य को साकार किया है। योजनाओं से आया क्रांतिकारी व्यापक बदलाव          चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं ने समाज के हर वर्ग को सशक्त बनाया है। जनधन योजना, आयुष्मान भारत और प्रधानमंत्री आवास योजना ने गरीबों, किसानों और माताओं-बहनों के जीवन को गरिमापूर्ण बनाया है। डिजिटल इंडिया अभियान ने युवाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोले हैं और देश में अभूतपूर्व पारदर्शिता सुनिश्चित की है। नव-निर्माण और सबका साथ, सबका विकास         वित्त मंत्री ने आगे कहा कि यह कालखंड देश के नव-निर्माण और “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की प्रतिबद्धता को सशक्त रूप से आगे बढ़ाने वाला रहा है। इन 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक पटल पर विकास, सुशासन, डिजिटल परिवर्तन और जनकल्याण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अद्वितीय राष्ट्र-समर्पण, निरंतर जनता-सेवा और सुशासन के लिए उनका हार्दिक अभिनंदन करते हुए उनके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना की।

75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री

जेलों को सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाए: मुख्यमंत्री केवल पेशेवर अपराधी, माफिया को जेलों में रखने की जरूरत, छोटे अपराधों में ओपन जेल की परिकल्पना उपयोगी 75 वर्ष से अधिक आयु, असाध्य रोगियों, बच्चों संग महिला बंदियों व जमानत राशि न जमा कर पाने वाले कैदियों की सूची तैयार करें: मुख्यमंत्री ‘ओपन जेल’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए: मुख्यमंत्री प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 हुई सात नए कारागार शुरू, छह निर्माणाधीन; बंदी क्षमता में लगातार बढ़ोतरी 6200 सीसीटीवी, ड्रोन कैमरे और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मजबूत हुई जेल सुरक्षा व्यवस्था ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ से बंदियों को मिल रहा कौशल और रोजगार का अवसर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने  कारागार विभाग की समीक्षा करते हुए कहा कि जेलों को केवल बंदी रखने का स्थान नहीं, बल्कि सुधार, पुनर्वास और कौशल विकास का प्रभावी केंद्र बनाया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश की सभी कारागारों में सुरक्षा व्यवस्था, बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, प्रशिक्षण, तकनीकी सुदृढ़ीकरण और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक तकनीक, पारदर्शी व्यवस्था और सुधारात्मक गतिविधियों के माध्यम से कारागारों को नई पहचान दी जाए। बैठक में बताया गया कि विभिन्न प्रक्रियाओं के माध्यम से बंदियों की समयपूर्व रिहाई की व्यवस्था को गति दी गई है। वर्ष 2012 से 2016 के बीच 273 बंदियों को समयपूर्व रिहाई मिली थी, जबकि वर्ष 2017 से 2021 के बीच यह संख्या बढ़कर 2882 और वर्ष 2022 से 2026 के बीच 3846 हो गई। जुर्माना जमा कर रिहा होने वाले बंदियों की संख्या भी वर्ष 2012-16 के 2823 की तुलना में वर्ष 2017-2026 के दौरान बढ़कर 6231 हो गई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 75 वर्ष से अधिक उम्र के कैदियों, असाध्य रोगों से ग्रस्त कैदियों, बच्चों के साथ जेल में बंद महिला कैदियों और जमानत राशि जमा न कर पाने के अभाव में जेल में बंद कैदियों की सूची तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने 'ओपन जेल' की परिकल्पना को विशेष महत्व देते हुए इसे साकार रूप में लाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जेल केवल पेशेवर अपराधी और माफिया के लिए होनी चाहिए। छोटे अपराधों के लिए 'ओपन जेल' उपयोगी होगी।  मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि जेलों में ओवरक्राउडिंग कम करने के लिए निर्माणाधीन परियोजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। उन्होंने नए कारागारों और बैरकों के निर्माण कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों में क्षमता 58,400 थी जबकि बंदियों की संख्या 96,383 थी और ओवरक्राउडिंग दर 1.77 थी। वर्तमान में प्रदेश में 77 कारागार संचालित हैं, जिनकी कुल क्षमता 77,673 है तथा बंदियों की संख्या 79,782 है। ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 रह गई है।  बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से अब तक चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा, प्रयागराज, श्रावस्ती और बरेली समेत सात नए कारागार संचालित किए गए हैं, जिससे 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है। इसके अतिरिक्त अमेठी, महोबा, हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में छह नए कारागारों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिनकी कुल क्षमता 6,156 होगी। कई प्रस्तावित जेलों के लिए भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने बहुमंजिला करागारों के निर्माण को प्राथमिकता देने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में सुरक्षा से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2017 से 2026 के बीच प्रदेश की जेलों में 6200 सीसीटीवी कैमरे, 24 बैगेज स्कैनर, 30 ड्रोन कैमरे, 84 डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर, 195 बॉडी वार्न कैमरे और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित किए गए हैं। सभी जेल बैरकों में सीसीटीवी कैमरे तथा मेनवॉल पर वायर फेंसिंग कराई गई है। न्यायालयों में पेशी के लिए 83 वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इकाइयां स्थापित हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारागारों में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और उत्पादन गतिविधियों को और बढ़ाया जाए। उन्होंने कहा कि सुधारात्मक प्रयासों से बंदियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। बैठक में बताया गया कि लखनऊ, आगरा, नैनी, बरेली, वाराणसी, फतेहगढ़, गोरखपुर, उन्नाव और अन्य कारागारों में सिलाई, दरी, कम्बल, फिनायल, काष्ठ कला, मसाला, प्रिंटिंग, हैंडीक्राफ्ट, रेडीमेड गारमेंट, एलईडी बल्ब, पॉटरी, कार्पेट और विभिन्न हस्तशिल्प उद्योग संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश की 37 जेलों में ‘वन जेल वन प्रोडक्ट’ आधारित इकाइयां संचालित हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जेलों में बंदियों के स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और सकारात्मक वातावरण के लिए योग, खेलकूद, कृषि और गौसंवर्धन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए। बैठक में बताया गया कि वर्तमान में प्रदेश की 17 जेलों में गौशालाएं संचालित हैं, जहां कुल 1265 गोवंश संरक्षित हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि जेलों की कृषि भूमि वर्ष 2020 में 584.51 एकड़ से बढ़कर वर्तमान में 624.14 एकड़ हो गई है। कृषि फार्मों में सब्जी और आलू उत्पादन 81,270 क्विंटल से बढ़कर 86,720 क्विंटल तक पहुंच गया है।   बैठक में बताया गया कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 3647 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रचलित है। वर्ष 2017 से अब तक 4055 नियुक्तियां दी गई हैं तथा विभिन्न पदों पर कुल 2868 पदोन्नतियां प्रदान की गई हैं। मुख्यमंत्री ने रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।

नार्थ-साउथ कॉरिडोर से बदलेगी यूपी की सड़क तस्वीर, योगी सरकार देगी कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

स्पेशल  योगी सरकार नार्थ-साउथ कॉरिडोर से सड़क कनेक्टिविटी को देगी नई रफ्तार – नेपाल बॉर्डर से बुंदेलखंड तक मजबूत होगा सड़क नेटवर्क, नए कॉरिडोर से व्यापार, पर्यटन और कृषि क्षेत्र को मिलेगा बड़ा लाभ  – योगी सरकार की बड़ी पहल, दक्षिण भारत की ओर तक बनेगा हाई स्पीड संपर्क मार्ग – पूर्वांचल, बुंदेलखंड और तराई क्षेत्रों के बीच आसान आवागमन का बनेगा नया नेटवर्क  लखनऊ योगी सरकार प्रदेश में सड़क और कनेक्टिविटी नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। इसी के तहत योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय राजमार्ग और क्षेत्रीय संपर्क मार्गों के विस्तार के साथ अब प्रदेश में “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” की महत्वाकांक्षी योजना को आगे बढ़ाने जा रही है। इसका उद्देश्य नेपाल बॉर्डर से लेकर दक्षिण भारत की ओर तक बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करना है, जिससे प्रदेश के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिल सके। उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क किया जाएगा विकसित  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर के विकसित होने से प्रदेश के औद्योगिक, कृषि और पर्यटन क्षेत्रों को बड़ा लाभ मिलेगा। नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और किसानों को अपने उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी होगी। साथ ही धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी पहले की तुलना में अधिक सुगम होगी। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान में प्रदेश में अधिकांश राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे पूर्व से पश्चिम दिशा में विकसित हैं। ऐसे में उत्तर प्रदेश के संतुलित विकास को ध्यान में रखते हुए अब उत्तर से दक्षिण दिशा में मजबूत सड़क संपर्क विकसित करने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके तहत नेपाल बॉर्डर से जुड़े जिलों को प्रयागराज, चित्रकूट और बुंदेलखंड क्षेत्र के माध्यम से देश के अन्य राज्यों जैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना से जोड़ने की तैयारी है। कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को किया जाएगा विकसित “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत कई महत्वपूर्ण मार्गों के चौड़ीकरण, सुदृढ़ीकरण और नव निर्माण की कार्य योजना बनाई गयी है। वहीं चार प्रमुख नार्थ-साउथ कॉरिडोर चिह्नित किए गए हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 1531 किलोमीटर है। इनमें से 1232.60 किलोमीटर हिस्सा पहले से एक्सप्रेस-वे अथवा राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ा हुआ है, जबकि शेष मार्गों को विकसित करने की योजना बनाई गयी है। पहले कॉरिडोर के रूप में कुशीनगर-देवरिया-नोएडा-गाजीपुर-जमानिया मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी कुल लंबाई 220 किलोमीटर है। इसमें 53.25 किलोमीटर लंबाई को स्वीकृति मिल चुकी है और लगभग 464 करोड़ रुपये की लागत से निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। वहीं दूसरा महत्वपूर्ण कॉरिडोर पीपरी (इंडिया-नेपाल बॉर्डर) से बांसी, सिद्धार्थनगर होते हुए प्रयागराज तक प्रस्तावित है। इसकी कुल लंबाई 295 किलोमीटर है। इस परियोजना के तहत कई नए मार्ग प्रस्तावित हैं जिनसे पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क बेहतर होगा।  मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने की बनाई परियोजना  “नार्थ-साउथ कॉरिडोर” योजना के तहत तीसरे कॉरिडोर में लखीमपुर-सीतापुर-लखनऊ-नवाबगंज-बांदा मार्ग को शामिल किया गया है, जिसकी लंबाई 502 किलोमीटर है। इसके अतिरिक्त चौथे कॉरिडोर के रूप में मुरादाबाद, शाहजहांपुर, उरई और हमीरपुर को जोड़ने वाली 514 किलोमीटर लंबी परियोजना है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि प्रदेश की मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सबसे जरूरी आधार है। यही कारण है कि योगी सरकार एक्सप्रेस-वे, रिंग रोड, फ्लाईओवर, एयरपोर्ट और नई सड़क परियोजनाओं पर बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसी परियोजनाएं पहले ही उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल रही हैं। अब नार्थ-साउथ कॉरिडोर के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ जिलों को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

‘अपनापन’ पुस्तक के लोकार्पण कार्यक्रम में पहुंचे CM विष्णुदेव साय

‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े अनुभवों और सार्वजनिक जीवन की आत्मीय यात्रा पर आधारित है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी शुभकामनाएं, कहा – जनसेवा के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा बनते हैं रायपुर /नई दिल्ली मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पुस्तक ‘अपनापन’ के विमोचन समारोह में शामिल हुए। यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ चौहान के सार्वजनिक जीवन, आत्मीय संबंधों और कार्य अनुभवों पर आधारित है, जिसमें नेतृत्व, जनसेवा और व्यक्तिगत संवेदनाओं को प्रेरक एवं भावनात्मक शैली में प्रस्तुत किया गया है।  कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिवराज सिंह चौहान को पुस्तक के प्रकाशन पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन के अनुभवों को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना एक प्रेरणादायी पहल है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास जनप्रतिनिधियों के अनुभवों, कार्यशैली और जनसेवा के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में जनसेवा, सुशासन और संवेदनशील नेतृत्व की नई कार्यसंस्कृति विकसित हुई है। इस पृष्ठभूमि में सार्वजनिक जीवन के अनुभवों पर आधारित यह पुस्तक निश्चित रूप से पाठकों को प्रेरित करेगी तथा नेतृत्व और समाजसेवा के विभिन्न आयामों को समझने का अवसर प्रदान करेगी। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रीगण, देश के विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधि और अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

ट्विशा केस में बड़ा एक्शन, CBI आज करेगी समर्थ से पूछताछ; चैट और कॉल डिटेल्स जांच के दायरे में

भोपाल  ट्विशा शर्मा की मौत मामले में अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने केस दर्ज कर लिया है और आगे की जांच करेगी. सीबीआई ने ट्विशा के पति समर्थ और सास के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इससे पहले सोमवार (25 मई) को एजेंसी ने जांच का जिम्मा संभालने और आवश्यक दस्तावेज और सबूत जुटाने के लिए भोपाल में एक स्पेशल क्राइम यूनिट भेजी।  मुलाकात के बाद, सीबीआई ने प्रक्रिया के अनुसार, भोपाल पुलिस की एफआईआर को पुनः दर्ज किया, जिसमें समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह को आरोपी बनाया गया था।  सीबीआई के हाथ में आई जांच, नई टीम गठित ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने औपचारिक रूप से जांच शुरू कर दी है. भोपाल के कटारा हिल्स थाने में पहले दर्ज एफआईआर को एजेंसी ने री-रजिस्टर किया है. इस मामले की जांच दिल्ली में पदस्थ एसपी राजबीर सिंह के नेतृत्व में की जाएगी, वहीं डीएसपी निशु कुशवाहा को जांच अधिकारी (आईओ) नियुक्त किया गया है. सीबीआई टीम अब पूरे मामले की नई सिरे से पड़ताल करेगी।  आज समर्थ सिंह की कस्टडी लेगी CBI सूत्रों के अनुसार, सीबीआई बुधवार को मुख्य आरोपी समर्थ सिंह को कस्टडी में लेकर पूछताछ शुरू कर सकती है. एजेंसी डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर उससे गहन पूछताछ करेगी. सीबीआई की नजर व्हाट्सएप चैट्स, कॉल डिटेल्स और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर है, जिनके जरिए घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने की कोशिश की जाएगी।  12 मई को हुई थी संदिग्ध मौत यह मामला भोपाल के कटारा हिल्स इलाके का है, जहां 12 मई 2026 की रात करीब 10:20 बजे ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की सूचना पुलिस को मिली थी. शुरुआती जांच में सामने आया कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने से हुई. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटेमॉर्टम हैंगिंग' यानी जीवित अवस्था में फांसी की पुष्टि हुई, लेकिन शरीर पर चोटों के निशान मिलने से मामला और संदिग्ध हो गया।  गिरिबाला सिंह का आरोप, ट्विशा को ड्रग्स की लत थी ट्विशा (33) का शव 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में उनके ससुराल में फंदे से लटका मिला था. उनके परिवार ने ससुराल वालों पर दहेज उत्पीड़न और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है. वहीं, ट्विशा के ससुराल वालों ने दावा किया कि उसे मादक पदार्थों की लत थी।  दहेज और प्रताड़ना के गंभीर आरोप मृतका के परिजनों ने पति समर्थ सिंह और सास गिरीबाला सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिकायत में कहा गया है कि शादी के बाद से ही ट्विशा को दहेज के लिए परेशान किया जाता था. बताया गया कि शादी के दौरान करीब 2 लाख रुपए का दबाव डालकर लेन-देन कराया गया और इसके बाद भी लगातार अतिरिक्त रकम की मांग की जाती रही. इसके अलावा, ट्विशा के साथ मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप भी सामने आए हैं।  गर्भपात कराने का भी आरोप एफआईआर के अनुसार, अप्रैल 2026 में ट्विशा गर्भवती थी. परिजनों का आरोप है कि पति और सास ने उसके चरित्र पर सवाल उठाते हुए दबाव बनाकर गर्भपात करवाया. यह आरोप मामले को और गंभीर बना रहे हैं, जिस पर सीबीआई विशेष रूप से जांच कर रही है।  इन कानूनी धाराओं में दर्ज हुआ मामला सीबीआई ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 80(2), 85 और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत प्रकरण दर्ज किया है. मध्यप्रदेश सरकार की सहमति के बाद केंद्र सरकार ने 25 मई को अधिसूचना जारी कर सीबीआई को जांच का अधिकार सौंपा था।  डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्य होंगे अहम सीबीआई अब इस मामले में डिजिटल सबूतों की गहराई से जांच करेगी. व्हाट्सएप चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों के आधार पर घटनाक्रम को पुनर्निर्माण किया जाएगा. इसके साथ ही पोस्टमार्टम में मिले चोटों के निशान और उनके कारणों का भी विश्लेषण किया जाएगा।  परिवार को निष्पक्ष जांच की उम्मीद सीबीआई की एंट्री के बाद परिजनों को अब निष्पक्ष और सटीक जांच की उम्मीद जगी है. यह मामला न सिर्फ एक संदिग्ध मौत बल्कि दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों को भी उजागर करता है. आने वाले दिनों में आरोपी से पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में कई अहम खुलासे होने की संभावना है।  चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सोमवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वह सुनिश्चित करेगी कि इस मामले की जांच निष्पक्ष, स्वतंत्र और पूर्वाग्रह रहित हो।  पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया है. प्राथमिकी में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी सास एवं पूर्व जिला न्यायाधीश गिरिबाला सिंह को नामजद किया गया है।  दोनों परिवारों को सलाह- मीडिया से बात न करें पीठ ने कहा, ‘‘हम पीड़ित परिवार के सदस्यों के साथ-साथ आरोपियों के परिवार के सदस्यों से भी कहना चाहेंगे कि वे सार्वजनिक रूप से या मीडिया मंचों पर बयान देने के बजाय जांच एजेंसी के समक्ष अपनी बात दर्ज कराएं, ताकि जारी जांच पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और कोई पूर्वाग्रह नहीं हो। 

खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर बनेगा आस्था और विकास का नया केंद्र, मंत्री सारंग का बड़ा बयान

आस्था, संस्कृति और विकास का संगम बनेगा खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर : मंत्री सारंग लगभग 100 करोड़ की लागत से तेजी से आकार ले रहा खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर मंत्री विश्वास सारंग ने दिए तय समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश भोपाल  राजधानी भोपाल के प्राचीनतम और श्रद्धा के प्रमुख केंद्र खेड़ापति हनुमान मंदिर परिसर में निर्माणाधीन खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर के निर्माणाधीन कार्यों का सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लेते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया कि कॉरिडोर का निर्माण चरणबद्ध तरीके से तय समय सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को शीघ्र बेहतर एवं आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। आस्था और विरासत को मिलेगा भव्य स्वरूप मंत्री सारंग ने कहा कि छोला स्थित खेड़ापति हनुमान मंदिर भोपाल की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र है। सदियों से यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। इसी विरासत को संरक्षित करते हुए “विरासत भी और विकास भी” की भावना के साथ खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना भोपाल की सांस्कृतिक धरोहर को भव्य स्वरूप प्रदान करेगी और आने वाले समय में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनेगी। निर्माण कार्य समय सीमा में पूर्ण करने के निर्देश निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने लोक निर्माण विभाग एवं नगर निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में श्रद्धालुओं, स्थानीय रहवासियों एवं व्यापारियों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यों के क्रियान्वयन में न्यूनतम विस्थापन सुनिश्चित किया जाए तथा यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं। 100 करोड़ की लागत से विकसित होगा हनुमान लोक मंत्री सारंग ने बताया कि लगभग 100 करोड़ रुपए की लागत से विकसित हो रहे खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर को महाकाल लोक की तर्ज पर आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। करीब 21 एकड़ क्षेत्र में विकसित होने वाली इस परियोजना में मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के साथ श्रद्धालुओं के लिए सुगम दर्शन व्यवस्था, भव्य कॉरिडोर, दर्शक दीर्घा, सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए अधोसंरचना, पार्किंग और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। नागर शैली में होगा मंदिर परिसर का विकास मंत्री सारंग ने बताया कि मंदिर परिसर के विकास कार्यों में राजस्थान के व्हाइट मार्बल का उपयोग करते हुए प्राचीन नागर शैली की वास्तुकला को विशेष रूप से शामिल किया जा रहा है। मंदिर परिसर में सुंदरकांड की झलक दर्शाने वाला भव्य और गरिमामयी कॉरिडोर तैयार किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त होगा। दशहरा मैदान में विकसित होंगी आधुनिक सुविधाएं मंत्री सारंग ने कहा कि दशहरा मैदान के खुले स्वरूप को संरक्षित रखते हुए वहां दर्शक दीर्घा, विशाल मंच, रावण दहन स्थल एवं सार्वजनिक आयोजनों के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा रही है। साथ ही परिसर के चारों ओर 15 मीटर चौड़ी कांक्रीट सड़क का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के आवागमन में सुविधा होगी। रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित मंत्री सारंग ने बताया कि परियोजना के अंतर्गत दर्शक दीर्घा के नीचे 100 से अधिक दुकानों का निर्माण भी प्रस्तावित है, जिससे क्षेत्र के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। दुकानें एवं अन्य सुविधाएं आधुनिक व्यवस्थाओं से युक्त होंगी। भोपाल की नई पहचान बनेगा हनुमान लोक मंत्री सारंग ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न किया जाए तथा सभी आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूर्ण की जाएं। उन्होंने कहा कि खेड़ापति हनुमान लोक कॉरिडोर भोपाल की आस्था, संस्कृति और विकास का प्रतीक बनेगा तथा आने वाले समय में यह परियोजना शहर की नई पहचान के रूप में स्थापित होगी।  

WHO की चेतावनी के बाद रायपुर एयरपोर्ट सतर्क, बाहर से आने वाले हर यात्री की हो रही स्क्रीनिंग

रायपुर   इबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर बढ़ती चिंता के बीच छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी कर दिया गया है. स्वास्थ्य विभाग ने बाहरी राज्यों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की अनिवार्य जांच शुरू कर दी है. अभी तक भारत में इबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें एहतियाती तौर पर पूरी तरह सतर्क हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर एयरपोर्ट और अन्य प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।  रायपुर एयरपोर्ट पर सख्ती, यात्रियों की जांच अनिवार्य इबोला संक्रमण की आशंका को देखते हुए छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने रायपुर एयरपोर्ट पर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं. एयरपोर्ट पर आने वाले यात्रियों की स्वास्थ्य जांच अनिवार्य कर दी गई है. इसके लिए एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति भी की जा रही है, जो स्क्रीनिंग, निगरानी और आपातकालीन व्यवस्था का समन्वय करेगा. संदिग्ध लक्षण वाले यात्रियों की तुरंत पहचान कर उन्हें आइसोलेशन और चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।  देशभर में निगरानी तेज, केंद्र सरकार अलर्ट मोड में इबोला के खतरे को लेकर केंद्र सरकार भी सतर्क है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल भारत में इबोला का एक भी मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया है. देश के सभी एयरपोर्ट, बंदरगाह और सीमावर्ती क्षेत्रों पर स्क्रीनिंग और निगरानी बढ़ा दी गई है. एनसीडीसी, आईसीएमआर और अन्य एजेंसियों को ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस के लिए लगातार तैयार रहने को कहा गया है।  WHO के अलर्ट के बाद बढ़ी सतर्कता विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने हाल ही में अफ्रीका के कांगो और युगांडा में फैले इबोला प्रकोप को ‘पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' घोषित किया है. इस प्रकोप के बाद दुनिया भर के देशों ने निगरानी बढ़ा दी है. भारत में भी इसी के चलते एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच को अनिवार्य किया गया है।  SOP और एडवाइजरी जारी, राज्यों को निर्देश स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें स्क्रीनिंग, क्वारंटाइन, इलाज, लैब जांच और संक्रमण रोकथाम से जुड़े प्रोटोकॉल शामिल हैं. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में बुखार या अन्य लक्षणों पर विशेष नजर रखने और तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।  क्या है इबोला और कितनी है गंभीरता इबोला एक खतरनाक वायरल रोग है, जिसमें मृत्यु दर काफी अधिक होती है. यह संक्रमित व्यक्ति या जानवर के खून और शारीरिक तरल पदार्थ के संपर्क से फैलता है. इसके लक्षणों में तेज बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, उल्टी, दस्त और गंभीर मामलों में रक्तस्राव शामिल हैं. इस बीमारी का ऊष्मायन काल 2 से 21 दिनों तक हो सकता है।  फिलहाल भारत सुरक्षित, लेकिन सतर्कता जरूरी स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि भारत में अभी तक इबोला का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है. हालांकि वैश्विक यात्रा और संक्रमण के खतरे को देखते हुए सरकार कोई जोखिम नहीं लेना चाहती. रायपुर समेत देशभर के एयरपोर्ट पर बढ़ाई गई निगरानी और सख्ती इसी दिशा में उठाया गया एहतियाती कदम है, ताकि समय रहते किसी भी खतरे को टाला जा सके। 

गंगा दशहरा पर CM डॉ. यादव ने किया श्रमदान, देवी सागर तालाब सफाई अभियान में लिया हिस्सा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गंगा दशहरा पर देवी सागर तालाब में किया श्रमदान धार के ऐतिहासिक देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का हुआ शुभारंभ  धार  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धार जिले के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व के देवी सागर तालाब के गहरीकरण कार्य का शुभारंभ कर स्वयं श्रमदान भी किया। जल संरक्षण और जल स्रोतों के संवर्धन को लेकर राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के तहत गंगा दशहरा के अवसर पर हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देवी तालाब में विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया तथा श्रमदान कर जल बचाने में जन-सहभागिता का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से जुड़ा एक सामाजिक अभियान है। प्रदेशभर में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने नागरिकों से जल बचाने और पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने में सहभागिता निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर, नगरीय विकास एवं आवास तथा धार जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व मंत्री राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, विधायिका श्रीमती नीना विक्रम वर्मा, विधायक कालू सिंह ठाकुर सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गंगा दशहरा उत्सव प्रदेशभर में एक साथ मनाया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में जल स्रोतों का पूजन किया गया तथा गंगा कलश यात्राएं भी निकाली गईं। कार्यक्रमों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का संदेश दिया गया। धार के देवीसागर तालाब का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व देवी सागर तालाब धार के ऐतिहासिक साढ़े बारह तालाबों में से एक प्रमुख जल संरचना है। ऐतिहासिक जल प्रबंधन धार के परमार राजाओं और बाद में पवार शासकों ने जल संरक्षण की अद्भूत तकनीकों का विकास किया था। यह बरसों से धार नगर को जलापूर्ति की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। धार नगर के साढ़े बारह तालाब कुशल इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। देवी सागर तालाब के संरक्षण के लिए नगरीय निकाय द्वारा प्रतिवर्ष जन जागृति अभियान चलाकर सामाजिक संगठनों के सहयोग से तालाब की निरंतर सफाई कराई जाती है। इस तालाब की निर्माण योजना ऐसी थी कि अन्य ऊपरी तालाबों का अतिरिक्त पानी बहकर इस झील में आता था, जो शहर की जलापूर्ति हमेशा बनाए रखने में सहायक है। इस तालाब के किनारे ऊँची पहाड़ी पर स्थित गढ़ कालिका माता मंदिर देश भर के श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण आस्था का केंद्र है। शांत और सुरम्य वातावरण के कारण यह स्थान स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण स्थल है।