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क्या दतिया में BJP की बड़ी रणनीति तैयार? नरोत्तम मिश्रा की मुलाकात ने बढ़ाई सियासी चर्चाएं

भोपाल/दतिया  मध्यप्रदेश की राजनीति में दतिया विधानसभा सीट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के अयोग्य घोषित होने के बाद यहां उपचुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पत्र के बाद दतिया कलेक्टर ने निर्वाचन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी बीच प्रदेश की सियासत में उस समय नई हलचल पैदा हो गई, जब दतिया से पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर से मुलाकात की। मुलाकात की तस्वीर खुद विधानसभा अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर साझा की और लिखा — “पूर्व मंत्री, मध्यप्रदेश शासन डॉ. नरोत्तम मिश्रा जी ने आज विधानसभा में सौजन्य भेंट की…” हालांकि इसे औपचारिक मुलाकात बताया गया, लेकिन दतिया उपचुनाव की संभावनाओं के बीच इस भेंट के कई राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा दतिया सीट को प्रतिष्ठा का चुनाव मानकर रणनीति तैयार कर रही है। दरअसल, दतिया वही सीट है जहां पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कड़े मुकाबले में हराया था। मिश्रा लंबे समय तक इस क्षेत्र की राजनीति का मजबूत चेहरा रहे हैं और उनकी हार को भाजपा के लिए बड़ा झटका माना गया था। अब जब अदालत के फैसले के बाद सीट खाली हुई है, तो भाजपा इसे वापसी के मौके के तौर पर देख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह भाजपा और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की सीधी लड़ाई बन सकता है। खासकर नरोत्तम मिश्रा और राजेंद्र भारती के बीच लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता इस चुनाव को और दिलचस्प बना रही है। फिलहाल सभी की नजर चुनाव आयोग की घोषणा और भाजपा-कांग्रेस की रणनीति पर टिकी हुई है। दतिया का सियासी रण एक बार फिर गर्माने लगा है। पारदर्शिता पर प्रशासन का विशेष फोकस प्रशासन की ओर से चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों ने राजनीतिक दलों से कहा है कि वे 18 मई तक अपने अधिकृत प्रतिनिधियों की सूची, फोटो और पहचान पत्र उपलब्ध कराएं ताकि मशीनों की जांच प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। जानकारी के अनुसार दतिया विधानसभा क्षेत्र के 291 मतदान केंद्रों के लिए उपयोग होने वाली ईवीएम और वीवीपैट मशीनों की तकनीकी जांच की जाएगी। इस दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे ताकि प्रक्रिया पर सभी की निगरानी बनी रहे। दतिया सीट का राजनीतिक महत्व फिर बढ़ा दतिया विधानसभा सीट लंबे समय से प्रदेश की सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल सीटों में गिनी जाती रही है। इस क्षेत्र की राजनीति केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर प्रदेश की व्यापक राजनीति पर भी दिखाई देता है। यहां कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच वर्षों से सीधा मुकाबला देखने को मिलता रहा है। यही वजह है कि उपचुनाव की हलचल शुरू होते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। राजेंद्र भारती और नरोत्तम मिश्रा की प्रतिद्वंद्विता रही चर्चा में दतिया की राजनीति में कांग्रेस नेता राजेंद्र भारती और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बीच मुकाबला हमेशा सुर्खियों में रहा है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में राजेंद्र भारती ने नरोत्तम मिश्रा को पराजित कर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। इस हार ने प्रदेश की राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी क्योंकि नरोत्तम मिश्रा को भाजपा का प्रभावशाली चेहरा माना जाता रहा है। अब भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद एक बार फिर यह सीट सियासी प्रतिष्ठा का केंद्र बनती दिखाई दे रही है। उपचुनाव में दोनों दलों की प्रतिष्ठा दांव पर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दतिया का आगामी उपचुनाव केवल एक सीट का चुनाव नहीं होगा, बल्कि यह दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदल सकता है। कांग्रेस जहां पिछली जीत को बरकरार रखने की चुनौती के साथ मैदान में उतरेगी, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने के लिए पूरी ताकत झोंक सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में दतिया में चुनावी सभाओं, रणनीतिक बैठकों और राजनीतिक बयानबाजी का दौर और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। जनता की नजरें अब राजनीतिक रणनीतियों पर उपचुनाव की तैयारियों के बीच दतिया की जनता भी अब राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए है। स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और क्षेत्रीय समीकरणों का असर चुनावी परिणामों पर कितना पड़ेगा, यह आने वाला समय तय करेगा। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर चुनावी मशीनरी सक्रिय हो चुकी है और राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारी शुरू कर दी है। ऐसे में दतिया का यह उपचुनाव प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर नई हलचल पैदा करता दिखाई दे रहा है। दोनों के लिए प्रतिष्ठा की सीट है दतिया एमपी के बड़े नेताओं की भी निगाह एमपी की दतिया सीट क्यों लगी है, इसका कारण यह हाईप्रोफाइल सीट है। इस सीट पर राजेंद्र भारती कांग्रेस की तरफ से चुनाव लड़ते आ रहे हैं और भाजपा की तरफ से नरोत्तम मिश्रा चुनाव लड़ते आ रहे हैं। दोनों ही व्यक्तियों के लिए यह सीट प्रतिष्ठा से भी जुड़ी है। कभी नरोत्तम मिश्रा जब भाजपा की ओर से विधायक थे तो राजेंद्र भारती की शिकायतों के बाद उन्हें भी अयोग्य घोषित कराने का मामला कोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद राजेंद्र भारती कांग्रेस के विधायक बने तो वे एक सहकारी बैंक के एफडी घोटाले में फंस गए। इन्हें सजा हो गई और राजेंद्र भारती को अयोग्य घोषित कर दिया। अब वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसके लिए राजेंद्र भारती ने भाजपा नेता पर साजिशन फंसाने के आरोप लगाए थे। नरोत्तम ने कहा था- मैं लौटकर आउंगा 2023 में राजेंद्र भारती को 88977 वोट मिले थे, जबकि नरोत्तम मिश्रा को 81235 वोट मिले थे। अपने प्रमुख प्रतिद्वंद्वी से चुनाव हारने के बाद नरोत्तम मिश्रा काफी निराश हो गए थे। कुछ ही दिनों में उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने शायराना अंदाज में कहा था कि मैं लौटकर आउंगा, यह वादा रहा। जब राजेंद्र … Read more

क्या आने वाला है नया ऑयल क्राइसिस? तेजी से खत्म हो रहे भंडार ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन

 नई दिल्ली ईरान जंग के कारण होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी से दुनिया में तेल खत्म होने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है. तीन महीने पहले तक यह संभावना बेहद कम लग रही थी, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. होर्मुज स्ट्रेट लगभग पूरी तरह बंद रहने के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की भारी कमी का खतरा बढ़ता जा रहा है।  विश्लेषकों को अब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं है. इसके बजाय उनका कहना है कि युद्ध लंबे समय तक चल सकता है जिससे एनर्जी सप्लाई लंबे समय तक बाधित रह सकती है. उनके अनुसार, तेल आपूर्ति की तस्वीर बिल्कुल अच्छी नहीं दिख रही।  डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर की रिपोर्ट के मुताबिक, 28 फरवरी से 8 मई तक मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति में कुल 78.2 करोड़ बैरल की कमी आ चुकी थी और इस महीने के अंत तक यह आंकड़ा 1 अरब बैरल तक पहुंच सकता है।  दैनिक उत्पादन के हिसाब से भी हालात गंभीर हैं. सऊदी अरब रोजाना 30 लाख बैरल से ज्यादा तेल उत्पादन गंवा रहा है. इराक का तेल उत्पादन 28.8 लाख बैरल प्रतिदिन कम हो गया है, जबकि ईरान का उत्पादन 16.9 लाख बैरल प्रतिदिन घटा है. कुवैत में भी रोजाना 17.5 लाख बैरल की गिरावट दर्ज की गई है।  तेल उत्पादन घटा, दुनिया रिजर्व रखे तेल पर चल रही इतने बड़े स्तर पर तेल उत्पादन बंद होने के बाद दुनिया पहले से निकाले गए तेल के भंडार को इस्तेमाल कर रही है. अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) पहले कह चुकी थी कि दुनिया के तेल भंडार रिकॉर्ड स्तर पर हैं और इसी वजह से बाजार में भारी अतिरिक्त सप्लाई की संभावना थी. लेकिन यह अनुमान युद्ध शुरू होने से पहले का था. अब IEA चेतावनी दे रही है कि इस साल तेल की मांग सप्लाई से ज्यादा हो जाएगी।  'द ऑयल प्राइस' की रिपोर्ट के मुताबिक, IEA की ताजा मासिक रिपोर्ट के अनुसार, इस साल वैश्विक तेल आपूर्ति में रोजाना करीब 39 लाख बैरल की गिरावट आ सकती है. हालांकि, यह आंकड़ा भी मध्य पूर्व में मौजूदा वास्तविक नुकसान से काफी कम है. एजेंसी का अनुमान है कि मध्य पूर्व में आपूर्ति में 1.05 करोड़ बैरल प्रतिदिन की कमी हो चुकी है. दूसरी ओर, मांग में सिर्फ 4.2 लाख बैरल प्रतिदिन की गिरावट आने का अनुमान है।  अटलांटिक काउंसिल के ग्लोबल एनर्जी सेंटर की वरिष्ठ फेलो एलेन वाल्ड ने वॉल स्ट्रीट जर्नल से कहा, 'खपत को एक सीमा तक ही कम किया जा सकता है. जब भंडार खत्म होंगे तो वे सचमुच खत्म हो जाएंगे. एक वक्त आएगा जब तेल की मांग और सप्लाई के बीच बड़ी खाई पैदा होगी और बाजार बुरी तरह हिल जाएगा. कीमतें तेजी से ऊपर जाएंगी।  सऊदी अरामको के सीईओ ने भी दी है वॉर्निंग यह चेतावनी अरामको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमीन नासिर के बयान से भी मेल खाती है. उन्होंने कहा था कि दुनिया में जमीन पर मौजूद ईंधन भंडार रिकॉर्ड गति से घट रहे हैं. उनके मुताबिक, जमीन पर मौजूद तेल भंडार इस समय बाजार के लिए 'एकमात्र सुरक्षा कवच' हैं, लेकिन अब वे भी तेजी से कम हो रहे हैं।  जमीन पर मौजूद तेल भंडार का मतलब उस तेल से होता है जो पहले ही जमीन से निकाल लिया गया है और बाद में इस्तेमाल के लिए बड़े टैंकरों, स्टोरेज फैसिलिटीज या रिजर्व में रखा गया हो. इस तेल को जरूरत की स्थिति, जैसे युद्ध, सप्लाई रुकना या कीमतें बढ़ना, में इस्तेमाल किया जाता है।  जेपी मॉर्गन के कमोडिटी विश्लेषकों ने भी चेतावनी दी है कि अगले महीने तक विकसित देशों में व्यावसायिक तेल भंडार 'ऑपरेशनल तनाव' के स्तर तक पहुंच सकते हैं. इसका मतलब है कि तेल आपूर्ति में आई कमी को संभालना और मुश्किल हो जाएगा।  तेल की कमी इतनी होगी कि होर्मुज खोलना ही होगा जेपी मॉर्गन की वैश्विक कमोडिटी रणनीति प्रमुख नताशा कानेवा ने कहा, 'हमारा निष्कर्ष है कि किसी न किसी तरह जून में होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलना ही होगा.' उनके अनुसार, दुनिया तेल संकट से तभी बच सकती है जब युद्ध खत्म हो. अगर ऐसा नहीं हुआ तो अगला चरण सिर्फ कच्चे तेल की कीमतों में उछाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रिफाइनिंग और अंतिम उपभोक्ता तक ईंधन पहुंचाने का संकट बन सकता है।  अमीन नासिर ने यह भी कहा कि बाजार में तेल भंडार की उपलब्धता को बढ़ा-चढ़ाकर आंका जा रहा है. उन्होंने बताया कि स्टोरेज में मौजूद सारा तेल वास्तव में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं होता. उसका बड़ा हिस्सा पाइपलाइन, न्यूनतम टैंक स्तर और अन्य परिचालन जरूरतों में फंसा रहता है. उन्होंने कहा, 'यूरोप और अमेरिका में स्टोरेज से रोजाना अधिकतम 20 लाख बैरल तेल ही निकाला जा सकता है।  केप्लर के अनुसार, फिलहाल भंडार से तेल निकासी सीमित स्तर पर है. मार्च के आखिर से अब तक जमीन पर मौजूद भंडार से करीब 6 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है. इसके बावजूद अभी करीब 3 अरब बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, हालांकि उसमें से कितना वास्तव में उपलब्ध है, यह साफ नहीं है।  कमजोर होता दुनिया का सुरक्षा कवच विश्लेषकों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व में आपूर्ति संकट लंबा खिंचता है तो भंडार तेजी से घटेंगे और उन्हें दोबारा भरने के लिए पर्याप्त नई सप्लाई उपलब्ध नहीं होगी. यानी युद्ध जितना लंबा चलेगा, दुनिया का सुरक्षा कवच उतना कमजोर होता जाएगा।  हालांकि, कुछ राहत की खबर भी है. वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, बाजार अब इस स्थिति का आदी होने लगा है. भंडार से तेल निकालने की वजह से तत्काल घबराहट कम हुई है और अब बाजार कमी को मैनेज करना सीख रहा है जिसका मतलब है कि तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।  कैपिटल इकोनॉमिक्स के कमोडिटी अर्थशास्त्री हमाद हुसैन ने कहा, 'तेल कार्गो की तत्काल खरीद की होड़ अब कम हो गई है. लेकिन हम तेजी से भंडार खाली कर रहे हैं और इसका सीधा असर कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में दिखाई देगा। 

वैश्विक तनाव का पंजाब पर असर, कच्चा माल महंगा होने से अमृतसर में ठप पड़ रही मशरूम खेती

अमृतसर  ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव तथा होर्मुज में बाधा का असर अब पंजाब के मशरूम उद्योग पर भी साफ दिखने लगा है। हर वर्ष मई में शुरू होने वाली मिल्की मशरूम की खेती इस बार संकट में है। उर्वरक, कंपोस्ट और ईंधन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी से अधिकांश उत्पादकों ने खेती शुरू ही नहीं की। हालात यह हैं कि अमृतसर जिले के जंडियाला गुरु, मानांवाला, वेरका और अजनाला जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में केवल 20 प्रतिशत किसानों ने ही इस बार मशरूम उत्पादन का जोखिम उठाया है। मशरूम उत्पादक जागीर सिंह का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं। इसका सीधा असर नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों, कंपोस्ट और परिवहन लागत पर पड़ा है। उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़े पिछले कुछ सप्ताह में उर्वरक एवं कंपोस्ट के दाम तीन गुना तक बढ़ चुके हैं। जिन किसानों को पहले एक ट्राली कंपोस्ट 12 से 15 हजार रुपये में मिल जाती थी, उन्हें अब इसके लिए 35 से 40 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। उधर, जंडियाला गुरु के मशरूम उत्पादक सरबजीत सिंह का कहना है कि मिल्की मशरूम की खेती नियंत्रित वातावरण पर निर्भर करती है। इसमें तापमान, नमी और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए लगातार बिजली की आवश्यकता होती है, लेकिन डीजल और बिजली की लागत बढ़ने से उत्पादन खर्च अत्यधिक बढ़ गया है। उस पर प्लास्टिक पैकेजिंग और परिवहन भी महंगा हो चुका है। ऐसे में छोटे उत्पादकों के लिए लागत निकालना मुश्किल हो गया है। होर्मुज मार्ग प्रभावित होने से मानांवाला क्षेत्र में उर्वरकों की सप्लाई प्रभावित हुई है। कई कंपनियों ने समय पर माल पहुंचाने में असमर्थता जताई है, जबकि कुछ ने सीधे दाम बढ़ा दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो आने वाले महीनों में मशरूम उत्पादन और घट सकता है। उल्लेखनीय है कि अमृतसर से उत्पादित मशरूम देश सहित विदेश में भी भेजा जाता है। अमृतसर का जलवायु मशरूम उत्पादन के लिए अनुकूल है। यही कारण है कि अमृतसर स्थित खालसा कालेज में मशरूम उत्पादन के लिए एक वर्षीय डिप्लोमा भी शुरू किया गया है। मांग के मुकाबले उत्पादन बेहद कम रहेगा इस बार इस बार मांग के मुकाबले उत्पादन कम होगा। पंजाब में होटल इंडस्ट्री, रेस्टोरेंट, फास्ट फूड कारोबार और घरों में मशरूम की मांग अधिक है। वेजीटेरियन लोगों के लिए मशरूम पहली पसंद है। खासकर मिल्की व बटन मशरूम की मांग गर्मियों में अधिक रहती है। लेकिन इस बार उत्पादन कम होने से बाजार में भारी कमी देखने को मिल रही है। आने वाले दिनों में मशरूम के दाम में 30 से 50 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। पहले स्थानीय स्तर पर पर्याप्त उत्पादन होने से आपूर्ति सामान्य बनी रहती थी, लेकिन इस बार कई यूनिट बंद पड़े हैं। जिन किसानों ने उत्पादन शुरू भी किया है, वे सीमित मात्रा में मशरूम तैयार कर रहे हैं ताकि नुकसान का जोखिम कम रहे। मशरूम उद्योग पूरी तरह आयात आधारित कच्चे माल पर निर्भर नहीं है, लेकिन उर्वरक, रसायन और ईंधन की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ता है। निकट भविष्य में उपभोक्ताओं को महंगे मशरूम खरीदने पड़ सकते हैं। होटल और कैटरिंग व्यवसाय में यदि आपूर्ति कम रही तो मेन्यू की लागत बढ़ाना मजबूरी बन जाएगी। वास्तविक स्थिति यह है कि अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर अब आम लोगों की थाली तक पहुंचने लगा है। कभी सस्ती और पौष्टिक मानी जाने वाली मशरूम जल्द ही उपभोक्ता की पहुंच से दूर होने की संभावना है।  

ईरान की अर्थव्यवस्था पर महाघात! महंगाई ने तोड़ी कमर, दुनिया में मची हलचल

तेहरान  अमेरिका के साथ ईरान के सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार है, होर्मुज को लेकर घमासान जारी है और इसके साथ ही तेल-गैस को लेकर दुनिया की टेंशन भी हाई बनी हुई है. लेकिन एक ओर जहां मिडिल ईस्ट युद्ध ने अमेरिका में तेल की कीमतों में इजाफा किया है, तो वहीं तेल पर निर्भर खुद ईरान की इकोनॉमी को भी तगड़ा झटका लगा है. वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक, दुनिया के सबसे ज्यादा महंगाई दर वाले देशों की लिस्ट में ईरान वेनेजुएला के बाद दूसरे नंबर पर आ गया है।  तमाम मीडिया रिपोर्ट्स में भी आंकड़ों के साथ बीते कुछ दिनों में ईरान की गंभीर स्थिति को दर्शाया गया है कि युद्ध के बीच आसमान छूती महंगाई में ईरान के लोगों की खाद्य सुरक्षा पर बड़ा संकट आ गया है. अब दुनिया में महंगाई से सबसे ज्यादा त्रस्त देशों की लिस्ट में भी ईरान ऊपर चढ़ता जा रहा है।  वेनेजुएला के बाद ईरान का नंबर वर्ल्ड ऑफ स्टेटिस्टिक्स के सोशल मीडिया पोस्ट पर नजर डालें, तो ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई दर वेनेजुएला में 612% है और इसके बाद अर्जेंटीना के बजाय अब ईरान का नाम शामिल है, जहां सालाना महंगाई दर 50% हो चुकी है।  बीते सप्ताह आई एक रिपोर्ट में ईरान में महंगाई की मार की तस्वीर पेश करते हुए कहा गया था कि Iran Inflation की रफ्तार हालिया कुछ समय में सबसे ज्यादा रही है और ये लगातार ईरानियों को गरीब बना रही है. तेहरान की एक निवासी के हवाले से अल जजीरा की रिपोर्ट में कहा गया कि हम अब उन कुछ चीजों को खरीदने का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं, जो कुछ महीने पहले तक खरीद सकते थे. इसके पीछे वजह है कि युद्धग्रस्त ईरान में खासतौर पर खाद्य महंगाई (Iran Food Inflation) में आए उछाल के कारण लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरत के सामनों पर खर्च हो रहा है।  इसमें आंकड़े देते हुए बताया गया था कि वनस्पति तेल की कीमतों में सबसे अधिक 350% से ज्यादा, आयातित चावल की कीमतों में 200%, ईरानी चावल की कीमतों में 175% प्रतिशत और चिकन की कीमतों में 190%  की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  इन 10 देशों में महंगाई का कोहराम दुनिया के तमाम देशों में सालाना महंगाई दर के आंकड़ों पर नजर डालें, तो जिन देशों में महंगाई सबसे ज्यादा कोहराम मचा रही है, उनकी टॉप-10 लिस्ट में पहले नंबर पर वेनेजुएला, जबकि दूसरे नंबर पर ईरान का नाम है. वहीं अन्य देशों की बात करें, तो अर्जेंटीना (32.4%), तुर्किए (32.37%), लेबनान (17.3%), नाइजीरिया (15.69%), इजिप्ट (14.9%), पाकिस्तान (10.9%), कजाखिस्तान (10.6%) और बांग्लादेश (9.05%) शामिल हैं। 

आज दवा संकट नहीं! हड़ताल के बावजूद इन जगहों पर खुली रहेंगी मेडिकल सुविधाएं और दवा दुकानें

भोपाल  मध्य प्रदेश में आज  यानी 20 मई को दवा दुकानों की हड़ताल रहेगी। भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में यह बंद बुलाया है। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि जिले के सभी रिटेल और थोक दवा व्यवसायी इस बंद का समर्थन करेंगे और 20 मई को अपनी दुकानें बंद रखेंगे। एसोसिएशन का कहना है कि यह मुद्दा सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ा है। घर-घर पहुंच रही ऑनलाइन दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी स्पष्ट सिस्टम नहीं है, जो गंभीर चिंता का विषय है। अस्पतालों के मेडिकल बंद से मुक्त एसोसिएशन के अध्यक्ष धाकड़ ने बताया कि ऑनलाइन दवा व्यापार की आड़ में नकली, एक्सपायरी एवं गलत दवाओं के वितरण की संभावनाएं बढ़ रही हैं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ सकती है। उन्होंने भोपाल की जनता से इस बंद के कारण होने वाली असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है तथा नागरिकों से अपील की है कि वे 20 मई से पूर्व ही अपनी नियमित उपयोग की आवश्यक दवाओं का संग्रह कर लें। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पतालों के अंदर संचालित मेडिकल स्टोर्स को इस बंद से मुक्त रखा गया है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट व ड्रगिस्ट और मध्य प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर सभी प्राइवेट मेडिकल दुकानें  आज बंद रहेंगी । हड़ताल की वजह से मरीजों को जरूरी दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ सकता है, ऐसे में एक दिन पहले पर्याप्त डोज लेकर रख सकते हैं। दवा बाजार की हड़ताल में यहां मिलेगी दवाइयां इस हड़ताल में इमरजेंसी के लिए प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की मेडिकल खुली रहेंगी। प्रदेशभर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर भी दवाइयां मिलेंगी। जयारोग्य अस्पताल, जिला अस्पताल, प्राइवेट अस्पतालों की मेडिकल दुकानों को हड़ताल से दूर रखा गया है। देशभर में ऑनलाइन और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवा बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने 20 मई को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि इस दौरान दिल्ली में करीब 15 हजार और देशभर में लगभग 7 से 8 लाख मेडिकल स्टोर बंद रह सकते हैं। हालांकि, आपातकालीन दवा सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। कारोबार हो रहा प्रभावित केंद्रीय औषधि मानक संगठन नियंत्रण (CDSCO) के सूत्रों का कहना है कि कई राज्य स्तरीय रिटेल फार्मेसी एसोसिएशनों ने इस हड़ताल से दूरी बना ली है और दवाओं की उपलब्धता सामान्य बनाए रखने का भरोसा दिया है। दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस (RDCA) के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और तेज डिलीवरी देकर छोटे मेडिकल स्टोर्स के कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। दवा दुकानों की हड़ताल से कौन-कौन बाहर? हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि इस हड़ताल का असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि कई राज्य स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने इसका समर्थन नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, सभी बड़े फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और AMRIT फार्मेसी स्टोर मंगलवार को खुले रहेंगे।  सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, केरल, छत्तीसगढ़, सिक्किम और लद्दाख समेत कई राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने लिखित रूप से भरोसा दिया है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे और दवाओं की सप्लाई सामान्य बनी रहेगी।  ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर बिक रही नकली दवाएं कोरोना काल में अधिसूचना जीआरएस 220 ई के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, जिसे तुरंत वापस ली जाए। अवैध रूप से ई-कॉर्पोरेट्स द्वारा बाजार में कब्जा किया जा रहा है। यह मूल्य निर्धारण में मनमानी कर रहे हैं, जिसे रोका जाना चाहिए। ऑनलाइन फार्मेसियों और प्लेटफार्मों पर मिलावटी या नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इन्होंने हड़ताल से बनाई दूरी कई केमिस्ट असोसिएशन की ओर से 20 मई को प्रस्तावित भारत बंद और हड़ताल को लेकर दवा कारोबारियों के संगठन ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन (AICDF) ने खुद को इससे अलग कर लिया है। संगठन ने कहा कि इस बंद का समर्थन नहीं करेंगे। दावा है कि इससे अव्यवस्था बढ़ेगी और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। AICDF के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता ने बताया कि बंद बुलाने वाले ने संगठनों का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा से ज्यादा बाजार में दबाव बनाना प्रतीत होता है।  

मध्यप्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन और स्मार्ट गवर्नेंस को मिलेगी गति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई आधारित समाधानों के उपयोग पर 20 मई, बुधवार को भोपाल में गूगल के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय रणनीतिक चर्चा करेंगे। साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल एवं सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर भी मीटिंग में विचार किया जाएगा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के समन्वय से आयोजित यह बैठक मध्यप्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन, स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीक आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर)  आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स)  मदन ओबेरॉय सहित सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई एवं डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मौजूदगी में होने वाली इस बैठक में सिंहस्थ -2028 के तकनीक आधारित प्रबंधन, स्मार्ट भीड़ प्रबंधन, एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग,डेटा आधारित निगरानी, अधिक प्रभावी नागरिक सेवा विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित रोग पहचान और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, कृषि में किसानों को डिजिटल सेवाओं की बेहतर पहुंच और शिक्षा क्षेत्र में एआई आधारित शिक्षण और कौशल विकास पर भी विचार किया जाएगा। बैठक में एआई स्किलिंग, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्ट-अप इको सिस्टम और पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। यह बैठक मध्यप्रदेश और गूगल के मध्य दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने और प्रदेश को नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक आधारित विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगी।  

दवा विक्रेताओं की हड़ताल का असर, 20 मई को MP में नहीं मिलेंगी दवाएं, निजी मेडिकल स्टोर्स बंद रहेंगे

भोपाल  ऑनलाइन दवा व्यापार और केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में 'मध्य प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन' के आह्वान पर 20 मई को पूरे प्रदेश सहित राजधानी भोपाल के सभी निजी मेडिकल स्टोर्स बंद रहेंगे। भोपाल केमिस्ट संघ के अध्यक्ष जितेंद्र धाकड़ ने बताया कि दवा विक्रेता सुबह 10 बजे दवा बाजार में एकत्रित होंगे और सुबह 11 बजे कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे। ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के उल्लंघन का आरोप एसोसिएशन का आरोप है कि ऑनलाइन दवा व्यापार ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का खुला उल्लंघन है। बिना फार्मासिस्ट की निगरानी के दवाओं की होम डिलीवरी से नकली और एक्सपायरी दवाओं का खतरा बढ़ रहा है। साथ ही ई-फार्मेसी कंपनियों की लागत से कम कीमत पर दवा बेचने की नीति (प्रेडेटरी प्राइसिंग) से पारंपरिक छोटे और मध्यम दवा व्यवसायियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है। मरीजों की सुविधा के लिए खुले रहेंगे जन औषधि केंद्र दवा बाजार बंद रहने के दौरान मरीजों की सुविधा के लिए खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने वैकल्पिक इंतजाम किए हैं। हड़ताल के दौरान सभी सरकारी अस्पतालों, सिविल अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों की फार्मेसी और प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खुले रहेंगे। इसके अलावा निजी अस्पतालों के अंदर स्थित मेडिकल स्टोर्स को भी बंद से मुक्त रखा गया है, ताकि भर्ती और आपातकालीन मरीजों को परेशान न होना पड़े।  

यूपी में 1900 किलोमीटर से अधिक हुआ एक्सप्रेसवे नेटवर्क

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज देश में इंफ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास का सबसे बड़ा उदाहरण बनकर उभरा है। कभी पिछड़ेपन और विकास की धीमी रफ्तार के लिए पहचाने जाने वाला यूपी आज एक्सप्रेसवे स्टेट के रूप में नई पहचान बना चुका है। गत 9 वर्षों में यूपी में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क 1900 किलोमीटर से अधिक हो गया है। यह आर्थिक बदलाव की नई कहानी को दर्शा रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश की तस्वीर बदल दी है। गाजीपुर से दिल्ली तक का सफर अब लगभग 10 घंटे में सिमट गया है। मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेसवे ने यात्रा समय को लगभग आधा कर दिया है। एक्सप्रेसवे के किनारे बन रहे औद्योगिक पार्क व क्लस्टर योगी सरकार ने खुद को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि एक्सप्रेसवे के साथ औद्योगिक विकास का मजबूत मॉडल तैयार किया है। सरकार सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड के ट्रिपल-एस मॉडल के तहत एक्सप्रेसवे के किनारे विभिन्न औद्योगिक पार्क और क्लस्टर विकसित कर रही है, जो आने वाले समय में प्रदेश में औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखेंगे, जिससे लाखों नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे आज डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की रीढ़ बन चुका है। झांसी और चित्रकूट जैसे क्षेत्रों में रक्षा उत्पादन इकाइयों की स्थापना से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। वहीं वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना को भी इन एक्सप्रेसवे का बड़ा लाभ मिला है। कन्नौज का इत्र, कानपुर का चर्म उद्योग और पूर्वांचल के हस्तशिल्प अब तेज़ परिवहन व्यवस्था के जरिए राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। गांव से शहर तक पहुंचा विकास का लाभ योगी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि यह मानी जा रही है कि एक्सप्रेसवे का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहा। संपर्क मार्गों और ग्रामीण सड़कों के जरिए छोटे कस्बों और गांवों को भी इससे जोड़ा गया है। किसान अब अपने कृषि और दुग्ध उत्पाद कम समय में शहरों तक पहुंचा पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। प्रदेश का सकल घरेलू उत्पाद करीब 36 लाख करोड़ रुपये हो गया है। लगभग 50 लाख करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव यूपी को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करने की दिशा में मजबूत आधार तैयार कर रहे हैं।

सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) 196 व वाणिज्य कर अधिकारी पद पर 142 को मिला नियुक्ति पत्र 72 युवा बने खंड विकास अधिकारी

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सोमवार को बड़े पैमाने पर नियुक्ति पत्र वितरित किए गये। उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश सम्मिलित राज्य/प्रवर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2024 के अंतर्गत सोमवार को 21 विभागों में विभिन्न पदों पर चयनित 932 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिले। इसमें सर्वाधिक (258 युवा) नायब तहसीलदार बने। 196 सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर) तथा 142 युवाओं को वाणिज्य कर अधिकारी पद पर नियुक्ति मिली। 72 युवा खंड विकास अधिकारी बने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों लोकभवन में नियुक्ति पत्र पाकर नवचयनितों के चेहरे खिल उठे। यूपी में हुई नई नियुक्ति 👉 उप जिलाधिकारी- 37 👉 पुलिस उपाधीक्षक- 17  👉 सहायक आयुक्त (वाणिज्य कर)- 196  👉 सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी- 16  👉 कोषाधिकारी/लेखाधिकारी- 22 👉 जिला कमांडेंट होमगार्ड्स- 02 👉 कारागार अधीक्षक- 01 👉 सहायक आयुक्त (उद्योग)- 18  👉 कार्य अधिकारी- 23 👉 खंड विकास अधिकारी- 72 👉 जिला समाज कल्याण अधिकारी- 09 👉 जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी- 01 👉 जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी- 05 👉 वाणिज्य कर अधिकारी- 142 👉 जिला खाद्य विपणन अधिकारी-02 👉 नायब तहसीलदार- 258  👉 उप कारापाल- 60 👉 जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी- 04 👉 उप निबंधक- 40 👉 उप्र कृषि सेवा समूह ‘ख’ सेक्शन-सी, श्रेणी-2, सांख्यिकी अधिकारी-03 👉 सहायक नियंत्रक विधिक माप विज्ञान श्रेणी 2 – 01 👉 व्यवस्थापक, राज्य संपत्ति विभाग-02 👉 सहायक निदेशक, उद्योग (हथकरघा)-01 सीएम योगी के हाथों इन्हें मिला नियुक्ति पत्र  👉 नेहा पांचाल (डिप्टी कलेक्टर)- नई दिल्ली 👉 आकृति शुक्ला (पुलिस उपाधीक्षक)- प्रयागराज  👉 निधि नागर (सहायक आयुक्त, राज्यकर)- गौतमबुद्ध नगर 👉 निहारिका राय (राज्य कर अधिकारी)- शाहजहांपुर 👉 महेश विक्रम श्रीवास्तव (खंड विकास अधिकारी) मीरजापुर 👉 श्रुति शुक्ला (जिला कमांडेंट होमगार्ड) बलरामपुर  👉 पार्थ सारथी- (उपनिबंधक)- बिजनौर  👉 आशीष सिंह- (जिला खाद्य विपणन अधिकारी) लखनऊ 👉 अविनाश सागर- (सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी)- अयोध्या 👉 प्रिया शर्मा- (जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी)- बाराबंकी 👉 राहुल पांडेय- (जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी)- बलिया  👉 गरिमा सिंह- (जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी)- कानपुर नगर 👉 गगन आनंद वर्मा- (लेखाधिकारी/कोषाधिकारी)- गोरखपुर  👉 प्रियंका नायक- (जिला समाज कल्याण अधिकारी)-गोरखपुर 👉 विकास चंद्र पांडेय- (सहायक आयुक्त उद्योग)- सोनभद्र 👉 साहिबा बानो- (नायब तहसीलदार)- रायबरेली 👉 प्रियंका- (उप्र कृषि सेवा समूह ‘ख’) अधिकारी-मेरठ 👉 नीलेश कुमार सिंह- (सहायक नियंत्रक विधिक माप)- बस्ती 👉 सत्यम सिंह यादव- (उप कारापाल)- कौशांबी  👉 अंकित कुमार- (कार्य अधिकारी, पंचायती राज)- अमरोहा  👉 पूजा मिश्रा- (कार्य अधिकारी, पंचायती राज)- मैनपुरी [20:43, 19/5/2026] +91 97924 14403: योगी सरकार की बड़ी पहल, कौशल प्रशिक्षण में दिव्यांगजनों को 5% आरक्षण, एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को प्राथमिकता हर प्रशिक्षण बैच में 5% सीटें दिव्यांगजनों के लिए अनिवार्य रूप से आरक्षित एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण में मिलेगी विशेष प्राथमिकता दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 के प्रावधानों का प्रभावी अनुपालन, सभी जिलों में डीपीएमयू  को दिए गए निर्देश लखनऊ: 18 मई। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा समाज के वंचित एवं विशेष जरूरत वाले वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। योगी सरकार की इस पहल के तहत प्रदेश में संचालित सभी अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के प्रत्येक बैच में दिव्यांगजनों के लिए 5 प्रतिशत सीटें अनिवार्य रूप से आरक्षित की गई हैं। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया  कि भारत सरकार के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के अनुरूप एसिड अटैक पीड़ितों को दिव्यांगजन की श्रेणी में शामिल किए जाने के दृष्टिगत उन्हें कौशल प्रशिक्षण में विशेष प्राथमिकता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई एसिड अटैक पीड़ित महिला प्रशिक्षण प्राप्त करने की इच्छुक एवं पात्र है, तो उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पंजीकृत किया जाना सुनिश्चित किया जाए। कौशल विकास केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान लौटाने का सशक्त जरिया है। उन्होंने कहा कि मिशन का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण एवं रोजगार के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में समान अवसर एवं नई पहचान मिल सके। मिशन निदेशक पुलकित खरे की पहल पर प्रदेश के सभी जनपदों की जिला कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों (डीपीएमयू) को निर्देशित किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में गठित होने वाले प्रशिक्षण बैचों में आरक्षित सीटों पर पात्र लाभार्थियों का चयन सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए महिला कल्याण तथा बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जनपदवार एसिड अटैक पीड़ित महिलाओं का विवरण तैयार कर अधिक से अधिक पात्र लाभार्थियों को इस योजना से जोड़ा जा सके। उन्होंने सभी संबंधित विभागों एवं अधिकारियों से निर्देशों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का आह्वान किया, ताकि अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाएं इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने सम्पूर्ण देश के नक्सलमुक्त होने के ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन एवं आभार प्रकट किया

रायपुर   केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी सहित इन सदस्य राज्यों और केन्द्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। यह बैठक केन्द्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत अंतर-राज्य परिषद सचिवालय द्वारा छत्तीसगढ़ सरकार की मेज़बानी में आयोजित की गई। बैठक को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह ने कहा कि यह बहुत हर्ष का विषय है कि यह बैठक बस्तर में आयोजित की जा रही है और इससे पहले ही आज पूरा बस्तर नक्सल मुक्त हो गया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि आज भारत के नक्सल मुक्त होने का संपूर्ण श्रेय हमारे सुरक्षाबलों के जवानों के परिश्रम और बहादुरी को जाता है। हमारी एजेंसियों ने बहुत सटीकता के साथ इनपुट एकत्र किए, सभी राज्यों के पुलिसबलों और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPFs) के साथ मिलकर हर इनपुट पर सटीक कार्रवाई करने से संबंधित समयबद्ध निर्णय किए। इसके साथ ही Whole of the Government Approach के साथ सभी राज्य सरकारों और केन्द्र सरकार के सभी विभागों ने नक्सलमुक्त हुए क्षेत्रों में विकास को पहुंचाने का काम किया।  अमित शाह ने कहा कि हमारी लड़ाई समाप्त नहीं हुई है क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्र लगभग पांच दशक से विकास की दौड़ में पिछड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब तक इन क्षेत्रों को विकास के मामले में देश के बाकी क्षेत्रों के समकक्ष नहीं ले आते, तब तक हमारी लड़ाई समाप्त नहीं होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने पूरे देश के नक्सल मुक्त होने के अवसर पर देश के प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी का हार्दिक अभिनंदन किया। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार को नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में जो भी चीजें चाहिए थीं, उन्होंने भारत सरकार के गृह मंत्रालय के साथ समन्वय कर उन्हें प्राप्त किया और जहां नेतृत्व की जरूरत थी, वहां मुख्यमंत्री जी और उपमुख्यमंत्री जी ने नेतृत्व भी प्रदान किया और इसी का परिणाम है कि आज बस्तर नक्सल मुक्त हो चुका है।  अमित शाह ने कहा कि राज्यों के बीच के और राज्यों और केन्द्र के बीच के सभी विवादित मुद्दे समाप्त कर हम आज एक अच्छे वातावरण में यह बैठक कर रहे हैं।  शाह ने कहा कि आज की बैठक में सभी एजेंडा विकास की मॉनिटरिंग से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हमारा संघीय ढांचा मजबूत हुआ है और क्षेत्रीय परिषद की बैठकें निरंतर हो रही हैं, जिसके परिणामस्वरूप बहुत बड़े भूभाग में चार राज्यों के बीच और चार राज्यों का केन्द्र के साथ कोई विवाद ही नहीं बचा है, यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि मध्य क्षेत्रीय परिषद में छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड राज्य हैं। उत्तर के हिमालय क्षेत्र से लेकर गंगा-यमुना के मैदानी भूभाग से लेकर मध्य भारत के पठारी, वन समृद्ध और खनिज समृद्ध क्षेत्र इस क्षेत्र में आते हैं, जो निश्चित रूप से देश के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। उन्होने कहा कि यह क्षेत्र हमें देश के अनाज के भंडारों को भरने में बड़ी मदद करता है। इस क्षेत्र के समृद्ध खनिज भंडार से देश के विकास को गति मिलती है और इसी क्षेत्र की समृद्ध विरासत और संस्कृति ने देश को आगे बढ़ाने में मदद की है। इसी क्षेत्र में देश के आस्था के सभी केंद्र करीब-करीब एक ही जगह पर आए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ लगभग सात राज्यों को जोड़ता है और इस दृष्टि से पूरे मध्य क्षेत्र का बहुत महत्व है। गृह मंत्री ने कहा कि आज यह पूरा क्षेत्र ना केवल नक्सल मुक्त हुआ है, बल्कि विवादों से भी मुक्त हुआ है, जो हम सबके लिए बहुत हर्ष का विषय है।  अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में क्षेत्रीय परिषद बैठकों का एक मजबूत और जीवंत तंत्र बना है – हमने इसे निर्णायक, निरंतर और परिणामदायी बनाया है। 2004 से 2014 के 10 वर्षों में क्षेत्रीय परिषद की मात्र 11 बैठकें हुई थीं, जो 2014 से 2026 के बीच बढ़कर 32 हो गई हैं। पहले 10 वर्षों में स्टैंडिंग कमेटी की 14 बैठकें हुई थीं, जो इस अवधि में ढाई गुना बढ़कर 35 हुई हैं। उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 में मात्र 569 मुद्दों पर चर्चा हुई थी, जबकि 2014 से 2026 में 1729 मुद्दों पर चर्चा हुई है, और उनमें से लगभग 80% मुद्दों का सफल निराकरण भी कर लिया गया है। लंबित मुद्दों में से अधिकांश मॉनिटरिंग से संबंधित हैं, जिनमें किसी भी प्रकार का विवाद शेष नहीं है। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि जल जीवन मिशन -2 पर हमें अभी से फोकस करना चाहिए और हर घर में नल से जल पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण और समाज कल्याण बहुत संवेदनशील मुद्दे हैं। गृह मंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों और सभी मुख्य सचिवों से आह्वान किया कि कुपोषण के खिलाफ भारत सरकार की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ें। शिक्षा के क्षेत्र में स्कूल ड्रॉपआउट दर और स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए भी और अधिक कार्य हों। वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार इस विकसित क्षेत्र को पूर्ण विकसित बनाने में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।  अमित शाह ने कहा कि शहरी नियोजन, जन स्वास्थ्य, वित्तीय समावेशन और बिजली सुधार के चारों क्षेत्र में भी और अधिक गति से कार्य करें। गृह मंत्री ने अपील की कि हमारा कम से कम 50% ध्यान ग्रामीण विकास और व्यक्ति को मजबूत बनाने वाली योजनाओं पर रहना चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि हर 5 किलोमीटर के दायरे में बैंक की सुविधा उपलब्ध होना बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि हमारी सभी योजनाएं Direct Benefit Transfer (DBT) आधारित हैं, इसीलिए सभी राज्यों को इस दिशा में ठोस प्रयास करने की आवश्यकता है। केन्द्रीय गृह मंत्री  अमित शाह ने कहा कि POCSO और बलात्कार के मामलों में अगर समय से DNA जांच हो जाए तो इनमें दोषसिद्धि की दर शत-प्रतिशत हो सकती है।  शाह ने कहा कि … Read more