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भारत-बेल्जियम की बढ़ी डिफेंस पार्टनरशिप, अंडरवाटर रोबोट से Zorawar टैंक तक मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों की पूरी टोली लेकर आया है जो भारत को सुपर-एडवांस टेक ऑफर कर सकते हैं. अपने स्वदेशी जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला किलर 3105 टरेट हो या प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (जो Mach 2+ की सुपरसोनिक स्पीड से वार करते हैं), सब टेबल पर है. समंदर के नीचे माइन्स का सफाया करने वाले अंडरवाटर रोबोट्स से लेकर हर साल 10 करोड़ एम्युनिशन राउंड्स बनाने का मास्टरप्लान तक. बेल्जियम भारत को मेक इन इंडिया के तहत सब ऑफर करने को तैयार है. बॉस, यह टेक ट्रांसफर हुआ तो भारत डिफेंस वर्ल्ड में सिर्फ खरीदार नहीं, सीधा बॉस बनकर उभरेगा. चलिए हम आपको बेल्जियम के टॉप हथियारों के बारे में विस्‍तार में बताते हैं।  कौन से वेपन्स बेल्जियम भारत को देने जा रहा? 1. जोरावर टैंक का ‘हेड’ (John Cockerill 3105 Turret) सीन क्या है: जोरावर भारत का वो हल्का टैंक है जो चीन बॉर्डर पर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों की बजाएगा।  • पावर: बेल्जियम इस टैंक का मुख्य सिर (टरेट) बना रहा है. इसमें 105mm की तोप है जो 4 किमी दूर से ही टारगेट उड़ा देती है. भारी नहीं है, इसलिए पहाड़ों पर मक्खन की तरह चलेगा।  2. 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (Thales Rocket) • सीन क्या है: ये वो रॉकेट है जो अपने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में फिट होगा. • पावर: साउंड की स्पीड से भी 2 गुना तेज (Mach 2+) भागता है. 9 किमी तक की रेंज में सटीक लेजर निशाना लगाता है. 2027 तक ये पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ बनने लगेगा।  3. पानी के अंदर माइन ढूंढने वाला रोबोट (Exail Mine Sweeper) • सीन क्या है: इंडियन नेवी के लिए स्पेशल अंडरवाटर रोबोटिक टूलबॉक्स. • पावर: समंदर में 300 मीटर नीचे जाकर दुश्मनों की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को खुद ही ढूंढेगा और डिफ्यूज कर देगा।  4. 10 करोड़ राउंड एम्युनिशन फैक्ट्री (New Lachaussée): • सीन क्या है: गोलियों की कोई कमी नहीं होने वाली. • पावर: बेल्जियम कंपनी भारत में एक ऐसा प्लांट लगा रही है जो हर साल 10 करोड़ धांसू गोलियां/गोला-बारूद बनाएगा।    वेपन / टेक पार्टनर कंपनी क्या है खास बात? असली काम कहाँ आएगा? 3105 टैंक टरेट John Cockerill 105mm तोप, 4 किमी रेंज, लाइटवेट जोरावर टैंक (चीन सीमा पर तैनाती) 70mm लेजर रॉकेट Thales Belgium स्पीड: Mach 2+, 9 किमी रेंज प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए अंडरवाटर रोबोट्स Exail Robotics 300m गहराई में माइन्स ढूंढेगा इंडियन नेवी के जहाजों हेतु एम्युनिशन फैक्ट्री New Lachaussée 10 करोड़ राउंड्स/साल आर्मी के लिए गोलियों का बैकअप बॉटम लाइन 1. नो मोर इंपोर्ट: भारत अब सिर्फ बाहर से हथियार खरीदेगा नहीं बल्कि बेल्जियम के साथ मिलकर खुद बनाएगा. 2. चीन-पाक हैरान: पहाड़ों पर जोरावर टैंक और हवा में प्रचंड हेलीकॉप्टर के नए रॉकेट दुश्मनों का गेम बजाने के लिए काफी हैं. 3. फ्यूचर एक्सपोर्ट: आने वाले टाइम में भारत इन हथियारों को दूसरे देशों को बेचकर खुद मोटा पैसा छापेगा. सवाल-जवाब 1. इस भारत-बेल्जियम बातचीत के सबसे बड़ा हाइलाइट क्या है? 10 MoUs जिससे भारत में ही रॉकेट, टैंक के टरेट, रोबोट्स और गोला-बारूद की डायरेक्ट मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना है. 2. जोरावर टैंक में बेल्जियम क्या अलग कर रहा है? बेल्जियम जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला हल्का और सुपर-अकाउंटेबल ‘टरेट’ (तोप वाला हिस्सा) दे रहा है जो पहाड़ों पर तबाही मचाएगा. 3. बेल्जियम वाले रॉकेट्स भारत में कब तक बन सकते हैं? अगर सबकुछ फाइनल हुआ था थैलेस बेल्जियम और कल्याणी ग्रुप मिलकर 2027 की शुरुआत तक भारत में 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट बना सकते है. 4. इंडियन नेवी को इस डील से क्या फायदे मिल सकते है? नेवी को पानी के अंदर काम करने वाले हाई-टेक अंडरवाटर रोबोट्स मिल सकते हैं, जो समंदर में छिपे माइन्स और खतरों को चुटकी में खत्म कर देंगे. 5. क्या भारत में गोलियों की नई फैक्ट्री भी लग सकती है? हाँ भाई! बेल्जियम की कंपनी भारत में सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने वाली एक विशाल फैक्ट्री सेटअप कर रही है.      

भोपाल में रहवासी इलाकों के कारोबार पर सख्ती, 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलों पर BJP मंत्री का बड़ा बयान, कहा- अभी महाराष्ट्र में ही जरूरत

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे अब केंद्र की राजनीति में आ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर ना तो फडणवीस और ना ही भाजपा की शीर्ष लीडरशिप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस बीच महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री और BJP नेता पंकजा मुंडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में शामिल होने की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फडणवीस इस समय महाराष्ट्र में जहां हैं, वहीं उनकी जरूरत है। पंकजा मुंडे ने कोल्हापुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसा फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या पीएम मोदी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता। ‘फडणवीस प्रभावशाली और मजबूत नेता’  रिपोर्ट के मुताबिक, पंकजा मुंडे ने फडणवीस की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक प्रभावशाली और अकादमिक रूप से मजबूत नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले करीब ढाई दशक से फडणवीस के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ प्रार्थना कर सकती हूं कि वह वर्तमान पद से आगे बढ़ें। हालांकि, अभी उन्हें वहीं जरूरत है, जहां वह हैं।” पंकजा का यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस हालिया दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी फडणवीस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं। क्या दावा कर बैठे संजय राउत? संजय राउत ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जिसके तहत महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राष्ट्रीय राजधानी बुलाकर उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद सौंपने की कोशिश की जा रही है। राउत ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि 'भगवा परिवार' दिल्ली के बाहर के किसी प्रमुख नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की तैयारी कर रहा है और इस अहम पद के लिए फडणवीस सबसे आगे चल रहे हैं। राउत के मुताबिक आरएसएस और पार्टी से जुड़ी अन्य अहम शख्सियतें फडणवीस को दिल्ली लाने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला करते हुए संजय राउत ने दावा किया कि इतिहास गवाह है कि कोई भी पूर्व गृह मंत्री कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही अमित शाह शीर्ष पद पाने की बड़ी महत्वाकांक्षा रखते हों, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया है। मनोज जरांगे की मांगों पर भी बोलीं पंकजा पंकजा मुंडे ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के जारी अनशन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों को पूरा करने के लिए प्रयास कर रही है। जरांगे की मांग है कि जिन मराठाओं के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उन्हें जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। इसके अलावा, वह कोल्हापुर, सतारा और मुंबई गजेटियर में मौजूद प्रावधानों को लागू कर मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। पंकजा मुंडे ने बताया कि सरकार ने जरांगे से बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। बाद में पंकजा मुंडे ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इसमें पंचगंगा नदी में प्रदूषण से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।

मुख्यमंत्री की उपस्थिति में आरयूएमएसएल और एडीबी के मध्य हुआ एमओयू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि हमारा मध्यप्रदेश ग्रीन स्टेट तो है ही, अब ग्रीन और क्लीन एनर्जी सेक्टर (नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा क्षेत्र) में भी एक नई उम्मीद और नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश में ग्रीन एनर्जी की असीम संभावनाएं हैं। हम इन्हीं संभावनाओं को चरणबद्ध तरीके से एक्सप्लोर कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में ट्रांजेक्शन एडवाईजरी सर्विसेस एग्रीमेंट (टीएएसए) के तहत मध्यप्रदेश में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग अंतर्गत तीन महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स के लिए रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड (आरयूएमएसएल) और एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के बीच एमओयू के बाद ये बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने एशियन डेवलपमेंट बैंक एवं रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को इन महत्वपूर्ण समझौते के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह समझौता मध्यप्रदेश में स्वच्छ, विश्वसनीय एवं किफायती ऊर्जा के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने विगत वर्षों में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नवाचार, बड़ी परियोजनाओं तथा प्रतिस्पर्धी एवं पारदर्शी निविदा प्रक्रियाओं के माध्यम से देश में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा लक्ष्य केवल नवकरणीय ऊर्जा की क्षमता ही बढ़ाना नहीं है, बल्कि ऐसी ऊर्जा व्यवस्था विकसित करना है जो विश्वसनीय, किफायती, सतत और 24×7 उपलब्ध हो तथा प्रदेश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा कर सके। इसी दिशा में आरयूएमएसएल और एडीबी के मध्य ट्रांजेक्शन एडवायजरी सर्विसेस एग्रीमेंट संबंधी एमओयू एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि एडीबी द्वारा आरयूएमएसएल को तीन नवकरणीय ऊर्जा प्राजेक्टस के लिए निःशुल्क ट्रांजेक्शन एडवाईजरी सर्विसेस उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि इस सहयोग का उद्देश्य बैंकेबल और सस्टेनेबल बिजनेस ट्रांसजेक्शन स्ट्रक्चर्स तैयार करना है, जिससे मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालीन निवेश को बढ़ावा मिले। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह परियोजनाएं हमारी भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनेंगी। इससे ग्रिड स्टेबिलिटी, नवकरणीय ऊर्जा इंटीग्रेशन तथा पीक डिमांड मैनेजमेंट को भी मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में उपलब्ध सौर एवं पवन ऊर्जा की विशाल संभावनाओं के साथ ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टोरेज कैपिसिटी के विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास है कि नवकरणीय ऊर्जा को केवल बिजली उत्पादन के स्रोत के रूप में न देखकर इसे औद्योगिक विकास, ग्रीन इन्वेस्मेंट, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास के इंजन के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में स्थापित होने वाले तीनों प्रोजेक्ट्स में तकनीकी सहयोग और वित्तीय सहायता देने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक का आभार व्यक्त करते हुए रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग की इस क्रांतिकारी पहल के लिए सराहना की। एमओयू टीएएसए के तहत मध्यप्रदेश में तीन प्रोजेक्ट्स के लिए बड़ी तैयारी की जा रही है। इसमें "पीएम सूर्य सरोवर'' योजना के तहत फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट के साथ रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को 278 मेगावाट के ओंकारेश्वर फ़ेज़ के लिए समझौता ज्ञापन हुआ। रीवा अल्ट्रा मेगा सोलर लिमिटेड को फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट को विकसित करने का लंबा अनुभव है। यह भारत के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट्स में से एक है। ओंकारेश्वर में ही 300 मेगावाट के लिए अतिरिक्त जलाशय क्षेत्र और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध है। इस 600 मेगावाट प्रोजेक्ट के लिए पहले ही सर्वे, प्री-फ़िजिबिलिटी और डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट का अध्ययन किया जा चुका हैं। पीएम सूर्य सरोवर योजना में 2 घंटे के को-लोकेटेड एनर्जी स्टोरेज सिस्टम वाले फ्लोटिंग सोलर पीवी के लिए 1 करोड़ रुपये प्रति मेगावाट की सेंट्रल फाइनेंशियल असिस्टेंस देने का प्रावधान है। एमओयू कार्यक्रम में नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव, एमडी म.प्र. ऊर्जा विकास निगम श्री अमित तोमर सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण, एशियन डेवलपमेंट बैंक तथा आरयूएमएसएल के वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित थे।  

दुग्ध समितियों से किसानों की आय बढ़ाने के होंगे प्रयास, प्रत्येक नगर पंचायत में बनेगा गीता भवन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कैलारस शुगर फैक्ट्री को पुनः प्रारंभ कराया जाएगा। इससे क्षेत्र के किसानों को अपनी उपज का बेहतर लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। मुरैना में दुग्ध समितियों के माध्यम से दुग्ध संग्रहण को बढ़ावा देकर किसानों की आय में वृद्धि के प्रयास किए जाएंगे। मुरैना सहित जिले की प्रत्येक नगर पंचायत में गीता भवन का निर्माण कराया जाएगा। इन भवनों में नागरिकों को अध्ययन करने का अवसर मिलेगा। जिले के एक विकासखंड में वृंदावन भवन भी बनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को कृषि उपज मंडी परिसर मुरैना में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को सीहोर से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बलराम कृषि महोत्सव और कृषि प्रदर्शनी के माध्यम से किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों के प्रति प्रेरित करने की बात कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुरैना जिला गेहूं, धान, तिलहन और दलहन के उत्पादन में अग्रणी रहा है। किसान गेहूं की खेती को बढ़ावा दें। खेती के लिए दिन में 10 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रदेश को देश में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। भविष्य में 30 लाख लोगों को सोलर पंप उपलब्ध कराने की योजना है। इससे किसानों को सिंचाई के साथ विद्युत व्यय में भी लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान दूध डेयरी को आय का अतिरिक्त साधन बनाएं और गाय पालन को बढ़ावा दें। प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। किसान कल्याण वर्ष के अंतर्गत किसानों के हित में विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण की सुविधा दी जा रही है। खरीफ एवं रबी फसलों के लिए ऋण चुकाने की अवधि 6-6 माह निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर अब एक वर्ष कर दिया गया है। अब किसान जिस दिन ऋण लेगा, उस दिनांक से एक वर्ष की अवधि में ऋण चुका सकेगा। इससे किसानों को बार-बार बैंक की लाइन में लगने की आवश्यकता नहीं होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के हितों के लिए प्रदेश सरकार निरंतर कार्य कर रही है। किसानों को उन्नत बाजरा एवं सरसों के बीज उपलब्ध कराए गए हैं। प्रदेश में ढाई करोड़ किसानों को सब्सिडी पर बीज उपलब्ध कराया गया है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को उन्नत कृषि तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज और बेहतर कृषि सुविधाएं उपलब्ध कराकर उनकी आय में वृद्धि की जाए। किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना ने कहा कि मध्यप्रदेश देश के अग्रणी कृषि उत्पादक राज्यों में अपनी मजबूत पहचान बना चुका है। गेहूं, सोयाबीन, चना, दलहन-तिलहन तथा उद्यानिकी के क्षेत्र में प्रदेश के किसान निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। यह उपलब्धि किसानों की मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के ज्ञान और सरकार की किसान हितैषी नीतियों का परिणाम है। कृषि मंत्री  कंषाना ने कहा कि सरकार का लक्ष्य अधिक उत्पादन, अधिक उत्पादकता, बेहतर गुणवत्ता, कम लागत, बेहतर मूल्य और किसान की अधिक आय सुनिश्चित करना है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती तथा दलहन-तिलहन मिशन जैसी योजनाओं से किसानों को निरंतर लाभान्वित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि को डिजिटल तकनीक से जोड़ा जा रहा है। ई-विकास प्रणाली के माध्यम से उर्वरक वितरण में भी पारदर्शिता लाई गई है। 1 अप्रैल 2026 से प्रदेश के सभी जिलों में उर्वरक वितरण इसी प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। इससे अनावश्यक कतारों, कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर प्रभावी नियंत्रण में सहायता मिल रही है। कृषि मंत्री  कंषाना ने इस अवसर पर प्रगतिशील किसानों सर्व राममोहन मीणा, गिर्राज आदिवासी, उदय राठौर, अरविंद सिंह गुर्जर, बालबिहारी शर्मा, राकेश शर्मा, संजय शर्मा, रामबाबू सिंह, कौशलकिशोर एवं बृजेन्द्र को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। मेधावी विद्यार्थियों हर्ष कुशवाह, रिचा तोमर, शिवेन्द्र यादव, अमन शर्मा, रागिनी देवी, हर्षित वशिष्ठ, कृतिका सिकरवार, धर्मेन्द्र धाकड़, रियान खान एवं कु. सोनम को भी स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में समाजसेवी  कमलेश कुशवाह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। मुरैना-श्योपुर सांसद  शिवमंगल सिंह तोमर ने किसानों से जैविक खाद अपनाने का आह्वान किया। रासायनिक खाद का संतुलित उपयोग करने से भूमि की उर्वरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने किसानों से आवश्यकता के अनुसार ही खाद, बीज एवं पानी का उपयोग करने की अपील की। सांसद  तोमर ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा निरंतर बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नदियों को जोड़ने की योजनाओं से किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर महापौर मती शारदा सोलंकी, कलेक्टर  लोकेश कुमार जांगिड़, पुलिस अधीक्षक  धर्मराज मीणा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत  कमलेश कुमार भार्गव, अपर कलेक्टर  अश्विनी कुमार रावत, संयुक्त संचालक कृषि, उप संचालक कृषि मुरैना सहित बड़ी संख्या में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए कृषकगण उपस्थित रहे।  

जनहित के कार्यों को मिलेगी प्राथमिकता, मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में योजनाओं की प्रगति परखी

रायपुर : जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने ओड़गी में विकास कार्यों की समीक्षा की अधिकारियों को योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता के दिए निर्देश रायपुर महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज सूरजपुर जिला के ओड़गी के जनपद पंचायत सभाकक्ष में आयोजित विकासखंड स्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में शामिल होकर क्षेत्र में संचालित विभिन्न योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागवार योजनाओं और कार्यों की जानकारी लेते हुए अधिकारियों को जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने तथा शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समयबद्ध रूप से पहुंचाने के निर्देश दिए। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को जमीनी स्तर पर योजनाओं एवं विकास कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा आमजन से जुड़ी समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ प्राथमिकता से निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और जनसुविधाओं के विस्तार के लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और विकास कार्यों का वास्तविक लाभ आमजन को मिले, इसके लिए अधिकारी पूरी जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करें। समीक्षा बैठक में क्षेत्र में संचालित विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति, हितग्राहीमूलक योजनाओं के क्रियान्वयन तथा विभागीय योजनाओं की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को लंबित कार्यों में गति लाने और जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती इन्द्रमणि पैकरा सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधिगण एवं संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

दक्षिण भारत में बुलेट ट्रेन का मेगा प्लान, बेंगलुरु-हैदराबाद-चेन्नई समेत 20+ शहर होंगे कनेक्ट

बेंगलुरु मुंबई, हैदराबाद की तरह बेंगलुरु भी बुलेट ट्रेन का बड़ा हब बनेगा. बेंगलुरु से निकलने वाले ये हाईस्पीड रेल कॉरिडोर साउथ इंडिया के तीन राज्यों आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु के बड़े शहरों को हाई स्पीड रेल कनेक्टिविटी देंगे. नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन (NHSRCL) मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के बाद अन्य रूट की डीपीआर, अलाइनमेंट की औपचारिकताएं पूरी करने में जुटा है. अभी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन रूट पर काम चल रहा है. इसके अलावा दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन और दिल्ली-वाराणसी-सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन रूट पर भी मंथन चल रहा है।  चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर चेन्नई-बेंगलुरु-मैसूरु दक्षिण भारत का सबसे अहम बुलेट ट्रेन रूट है, जो तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक को जोड़ता है. 463 किलोमीटर के कॉरिडोर में चेन्नई से बेंगलुरु 306 किमी और बेंगलुरु से मैसूरु 157 किमी का रूट है. इससे बेंगलुरु से चेन्नई का सफर 5–6 घंटे के बजाय सिर्फ सवा घंटे का रह जाएगा. बेंगलुरु से मैसूरु का सफर 2 घंटे से घटकर लगभग 30-45 मिनट रह जाएगी. ये कॉरिडोर बेंगलुरु-चेन्नई एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा. इसमें चेन्नई सेंट्रल, पूनमल्ली, चित्तूर (आंध्र प्रदेश), कोलार, कोडिहल्ली, व्हाइटफील्ड, बयप्पनहल्ली (बेंगलुरु), इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी, कैंगेरी, मांड्या और मैसूरु स्टेशन हो सकते हैं।  हैदराबाद-बेंगलुरु हाईस्पीड रेल कॉरिडोर यह भारत के दो सबसे बड़े आईटी हब बेंगलुरु और हैदराबाद को जोड़ेगा. 610 किमी के इस रूट पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेंगी. अभी ट्रेन से 10 से 12 घंटे का सफर घटकर सिर्फ 2.5 घंटे रह जाएगा. ये रूट तेलंगाना, आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके और उत्तरी कर्नाटक से होकर जाएगा. हैदराबाद (शमशाबाद एयरपोर्ट), महबूबनगर, करनूल, अनंतपुर, चिकबल्लापुर और बेंगलुरु का कैंपेगौड़ा एयरपोर्ट इसका स्टेशन प्रस्तावित है।  बेंगलुरु-मुंबई हाईस्पीड रेल कॉरिडोर  बेंगलुरु को सीधे पुणे और मुंबई से भी जोड़े जाने की तैयारी है. ये 850 से 900 किलोमीटर लंबा रूट होगा. अभी रेल से 18–20 घंटे का सफर लगता है तो 4 से 5 घंटे रह जाएगा. कर्नाटक, महाराष्ट्र और गोवा सीमा से सटे इलाके इसके दायरे में आएंगे. बेंगलुरु, तुमकुरु, दावणगेरे, हुबली-धारवाड़, बेलगावी, कोल्हापुर, पुणे और मुंबई भी बुलेट ट्रेन के स्टेशन होंगे।  DPR और अलाइनमेंट पर काम ये हाईस्पीड कॉरिडोर जापान की शिंकानसेन बुलेट ट्रेन टेक्नोलॉजी और स्टैंडर्ड गेज पर बनाए जाएंगे. NHSRCL इन बुलेट ट्रेन रूट के लिए  LiDAR सर्वे, अलाइनमेंट ड्राफ्टिंग और ट्रैफिक से जुड़े अध्ययन कर रहा है.घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्रों जैसे बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद शमशाबाद में सुरंगें और बाकी मैदानी भागों में एलिवेटेड वायडक्ट बनाए जाएंगे। 

केंद्रीय वस्त्र मंत्री गिरिराज सिंह से नई दिल्ली में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने की मुलाकात

नई दिल्ली  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय वस्त्र मंत्री  गिरिराज सिंह से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार, निवेश और रोजगार की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की नई औद्योगिक विकास नीति में टेक्सटाइल सेक्टर को दिए गए विशेष प्रोत्साहनों तथा इस क्षेत्र में आ रहे निवेश की जानकारी दी। दोनों नेताओं के बीच छत्तीसगढ़ को मध्य भारत के प्रमुख टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में विकसित करने तथा आधुनिक तकनीक, डिजाइन और नवाचार को राज्य के पारंपरिक वस्त्र कौशल से जोड़ने को लेकर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल सेक्टर के विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। राज्य सरकार ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में टेक्सटाइल सेक्टर को थ्रस्ट सेक्टर के रूप में शामिल किया है। इसके अंतर्गत इस क्षेत्र में निवेश करने वाले उद्यमियों के लिए आकर्षक प्रोत्साहन एवं अनुदान का प्रावधान किया गया है। इन प्रावधानों के परिणामस्वरूप टेक्सटाइल क्षेत्र में निवेशकों की रुचि तेजी से बढ़ी है और प्रदेश में नई इकाइयों की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार की औद्योगिक नीति का प्रमुख उद्देश्य निवेश के साथ स्थानीय युवाओं के लिए अधिक से अधिक रोजगार सृजित करना है। इसी दृष्टि से एक हजार से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली औद्योगिक इकाइयों के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। टेक्सटाइल और अपैरल उद्योग श्रम आधारित होने के कारण बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध कराने की क्षमता रखता है। नई नीति के इन प्रावधानों से छत्तीसगढ़ टेक्सटाइल निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य के रूप में तेजी से उभर रहा है। नवा रायपुर में आकार ले रहा टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग इको-सिस्टम मुख्यमंत्री  साय ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि नवा रायपुर अटल नगर में टेक्सटाइल क्षेत्र की नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना को गति मिल रही है। राज्य सरकार का प्रयास है कि यहां केवल उत्पादन इकाइयां ही स्थापित न हों, बल्कि टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र का एक समग्र इको-सिस्टम विकसित हो, जिसमें डिजाइन, उत्पादन, कौशल विकास, आधुनिक तकनीक और बाजार की सुविधाएं एक-दूसरे से जुड़ी हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग की विशेषता यह है कि अपेक्षाकृत बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के साथ इसमें महिलाओं और युवाओं के लिए भी व्यापक अवसर उपलब्ध होते हैं। इस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और सहायक उद्योगों तथा स्थानीय उद्यमिता को भी प्रोत्साहन मिलेगा। छत्तीसगढ़ की परंपरा और आधुनिक फैशन टेक्नोलॉजी का होगा संगम बैठक में मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध वस्त्र एवं हस्तशिल्प परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश का कोसा सिल्क देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। विशेष रूप से चांपा और आसपास के क्षेत्रों की कोसा परंपरा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और आर्थिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि इस पारंपरिक कौशल को आधुनिक डिजाइन, तकनीक, ब्रांडिंग और व्यापक बाजार से जोड़कर नई ऊंचाई दी जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े आधुनिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। साथ ही स्थानीय बुनकरों, शिल्पकारों और उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) की स्थापना इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं को फैशन डिजाइन, टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी और इससे जुड़े आधुनिक क्षेत्रों में उच्च स्तरीय शिक्षा एवं प्रशिक्षण के अवसर मिलेंगे। साथ ही स्थानीय बुनकरों, शिल्पकारों और उद्यमियों को डिजाइन एवं तकनीकी नवाचार का लाभ मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। NIFT जैसे राष्ट्रीय स्तर के संस्थान और नई टेक्सटाइल इकाइयों के बीच समन्वय से राज्य में डिजाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक मजबूत वैल्यू चेन विकसित करने में मदद मिलेगी। इससे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वस्त्र कला को आधुनिक बाजार की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पादों और डिजाइनों से जोड़ने का अवसर मिलेगा। सेंट्रल इंडिया के बड़े टेक्सटाइल हब के रूप में उभरने की क्षमता केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार की दिशा में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत के साथ वैश्विक स्तर पर भी टेक्सटाइल एवं अपैरल क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के लिए उपलब्ध संसाधन, राज्य सरकार की निवेश-अनुकूल नीति और रोजगार आधारित प्रोत्साहन इसे इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य बना सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल यूनिट्स के विस्तार से छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की संभावना है। राज्य जिस प्रकार इस क्षेत्र को प्राथमिकता देकर आगे बढ़ रहा है, उससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ सेंट्रल इंडिया के एक प्रमुख टेक्सटाइल हब के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर सकता है। तकनीक और नवाचार में केंद्र देगा सहयोग श्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ में टेक्सटाइल उद्योग के विस्तार के लिए हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने विशेष रूप से आधुनिक तकनीक, नवाचार, कौशल विकास और टेक्सटाइल सेक्टर में नई संभावनाओं के विस्तार के लिए केंद्र और राज्य के बीच समन्वय पर जोर दिया। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टेक्सटाइल उद्योग तेजी से बदल रहा है और आधुनिक तकनीक तथा नवाचार इसकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता के महत्वपूर्ण आधार हैं। केंद्र सरकार इस दिशा में छत्तीसगढ़ के प्रयासों को आवश्यक सहयोग प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ में ऐसा टेक्सटाइल इको-सिस्टम विकसित करना है, जिसमें निवेश और रोजगार के साथ स्थानीय कौशल, पारंपरिक वस्त्र कला, आधुनिक डिजाइन और तकनीक का समन्वय हो। नई औद्योगिक नीति के प्रोत्साहन, नवा रायपुर में विकसित हो रहे औद्योगिक वातावरण और NIFT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के माध्यम से छत्तीसगढ़ आने वाले वर्षों में टेक्सटाइल और अपैरल मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में देश के प्रमुख केंद्रों में अपनी जगह बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

इंदौर में 23-24 अक्टूबर को होगी “एमपी सेमीकंडक्टर समिट 2026”

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने 'इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0' के माध्यम से देश को इस क्षेत्र में सशक्त बनाने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री  मोदी के इस संकल्प को साकार करने में मध्यप्रदेश अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सेमीकंडक्टर, डेटा सेंटर जैसे आधुनिक विज्ञान के अनेक प्रकल्पों पर बेहतरीन काम हो रहा है। इस क्षेत्र में प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार अग्रसर है। एक दौर वो था, जब चिप निर्माण के दिशा में कोई सोचता भी नहीं था। अब मध्यप्रदेश ने इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए ठोस निर्णय लिए हैं।मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आगामी 23-24 अक्टूबर को इंदौर में होने वाली एमपी सेमीकंडक्टर समिट-2026 के कैम्पेन पोस्टर के विमोचन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला, जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष डॉ. मोहन नागर, प्रमुख सचिव विज्ञान प्रौद्योगिकी  एम. सेल्वेन्द्रम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार अगले महीने 23-24 अक्टूबर को इंदौर में "मध्यप्रदेश सेमीकंडक्टर समिट 2026" का आयोजन करने जा रही है। मुख्यमंत्री ने इस ग्लोबल समिट में शामिल हो जा रहे सभी निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और नीति-निर्धारकों का मध्यप्रदेश की धरती पर स्वागत करते हुए उन्हें आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी देश-प्रदेशवासियों से एकजुट होकर सेमीकंडक्टर निर्माण में आत्मनिर्भर होने के स्वप्न को साकार करने और विज़न 2047 के समृद्ध मध्यप्रदेश एवं विकसित भारत की यात्रा में सहभागी होने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने बीते ढाई वर्ष में सभी क्षेत्रों में उद्योग और व्यापार अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए 25 नई नीतियां लागू की हैं। इनसे सरलीकृत, पारदर्शी और वचनबद्धता के साथ कार्य करने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला, बेरोजगारी दर को न्यूनतम स्तर पर लाने वाला तथा देश-विदेश के निवेशकों का दिल और विश्वास जीतने वाला राज्य बन गया है।  

जानापाव की पावन धरती से भगवान कृष्ण को मिला था सुदर्शन चक्र

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि जानापाव वह गौरवशाली धरती है, जहां भगवान कृष्ण ने महर्षि परशुराम से सुदर्शन चक्र प्राप्त किया था। यह पवित्र और गौरवशाली स्थान है। महर्षि परशुराम की जन्मस्थली और साढ़े सात नदियों के उद्गम वाले इस पावन स्थल पर जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान कृष्ण का स्मरण करना सभी का सौभाग्य है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर जिले के जानापाव में महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किए जाने वाले भगवान  परशुराम लोक एवं भगवान कृष्ण लोक के भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण को महर्षि परशुराम द्वारा प्रदान किया गया सुदर्शन चक्र उनके जीवन में धर्म और सत्य की रक्षा का महत्वपूर्ण अस्त्र बना। भगवान कृष्ण ने अपने जीवन में सत्य, धर्म, पराक्रम और पुरुषार्थ का संदेश दिया। शिशुपाल प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने अपनी बुआ को दिए वचन के अनुसार शिशुपाल की सौ गलतियों तक क्षमा किया और इसके बाद धर्म की रक्षा के लिए उसका अंत किया। 5000 वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास को सामने लाएगी सरकार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का भगवान कृष्ण और भगवान राम से गहरा संबंध रहा है। सरकार इस लगभग 5000 वर्ष पुराने गौरवशाली इतिहास को फिर से सामने लाने के लिए कार्य कर रही है। भगवान कृष्ण ने मध्यप्रदेश में जहाँ-जहाँ अपने चरण रखे, उन सभी स्थलों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसी प्रकार भगवान राम के चरण जहाँ-जहाँ पड़े, उन स्थलों को भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चित्रकूट धाम, जानापाव, राम के वनगमन से जुड़े आश्रम और अन्य पौराणिक स्थलों के साथ भगवान कृष्ण से जुड़े स्थलों को भी विकसित करने की योजना है। भगवान कृष्ण के मध्यप्रदेश से संबंध को दर्शाने वाले स्थलों में रुक्मिणी हरण से जुड़े क्षेत्र तथा धार जिले में हुए युद्ध से संबंधित स्थानों को भी विकसित कर उनके गौरवशाली इतिहास को जीवंत किया जाएगा।  महाकाल लोक की तर्ज पर 17 करोड़ रूपये से विकसित होगा परशुराम लोक और कृष्ण लोक मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश में बड़ा परिवर्तन आया है। महाकाल लोक के विकास के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी दिशा में जानापाव को भी देश के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र और आध्यात्मिक चेतना पीठ के रूप में विकसित किया जा रहा है। महाकाल लोक की तर्ज पर लगभग 17 करोड़ रुपये की लागत से ‘परशुराम लोक’ एवं ‘कृष्ण लोक’ का निर्माण किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत यज्ञ कुंड का पुनर्विकास, भव्य ऑडिटोरियम, ध्यान कुटीर, हर्बल गार्डन, लैंडस्केपिंग, बहुउद्देशीय भवन तथा जनसुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुविधा के लिए पहाड़ी पर रोपवे निर्माण भी कार्य योजना में शामिल है। धर्म, सत्य और पराक्रम का संदेश देते हैं भगवान कृष्ण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण ने गोपाल के रूप में गायों का पालन करते हुए वन-वन विचरण किया और सामान्य जीवन से लेकर महाभारत के विराट प्रसंग तक मानव जीवन को अनेक संदेश दिए। उन्होंने गीता के माध्यम से दुनिया को कर्म, धर्म और कर्तव्य का मार्ग दिखाया। भगवान कृष्ण का जीवन सिखाता है कि जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में सत्य और धर्म के लिए खड़े रहना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे पवित्र स्थलों का विकास केवल पर्यटन की दृष्टि से नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को सनातन संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने के लिए भी आवश्यक है। जानापाव में विकसित होने वाला ‘परशुराम लोक’ एवं ‘कृष्ण लोक’ इसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में भगवान कृष्ण की लीलाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी गईं। दही हांडी कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जानापाव स्थित मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मती रीना सतीश मालवीय, सांसद सु कविता पाटीदार, विधायक सु उषा ठाकुर,  श्रवण चावड़ा सहित अन्य अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।