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कैबिनेट स्वीकृति :स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले

प्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए 30,055 करोड़ रूपये की कैबिनेट स्वीकृति स्थानान्तरण नीति वर्ष-2026 का अनुमोदन: 1 जून से 15 जून तक हो सकेंगे तबादले किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित योजनाओं के लिए 156 करोड़ रूपये की स्वीकृति लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रूपये की स्वीकृति श्रमिक कल्याण की विभिन्न योजनाओं के लिए 1779.07 करोड़ रूपये की स्वीकृति अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के लिए 373 करोड़ 38 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के विकास और जन-कल्याण को गति देने के लिए कुल 30,055 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृतियां दी गई। मंत्रि-परिषद ने राज्य के कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति -2026 को भी मंजूरी दी है। राज्य के विभिन्न वर्गों के हित में कई बड़े निर्णय लिए गए। इसमें वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजनों की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रुपये के साथ ही विभिन्न आपदाओं में किसानों को संबल देने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11,608.47 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके साथ ही श्रमिक कल्याण की योजनाओं के लिए 1,779.07 करोड़ रुपये, सिवनी और देवास की समूह जल प्रदाय योजनाओं के लिए 593 करोड़ 24 लाख रुपये, अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के संचालन के लिए 373 करोड़ 38 लाख रुपये, लोक सेवा गारंटी अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए 360 करोड़ रुपये तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से संबंधित शौर्य दल और चाइल्ड हेल्पलाइन योजनाओं के लिए 156 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026 का अनुमोदन मंत्रि-परिषद ने "राज्य एवं जिला स्तर पर अधिकारियों/कर्मचारियों की स्थानान्तरण नीति वर्ष 2026" का अनुमोदन किया है। स्वीकृति अनुसार इस वर्ष 01 जून 2026 से 15 जून 2026 तक की अवधि के लिये स्थानांतरण से प्रतिबंध शिथिल किया जायेगा। नीति में लिपिकीय त्रुटि सुधार, स्पष्टीकरण अथवा अन्य संशोधन करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को अधिकृत किया गया है। पद एवं संवर्ग संख्या के आधार पर अधिकतम स्थानांतरण की संख्या का निर्धारण स्थानांतरण नीति में स्पष्ट किया गया है। पति-पत्नी को एक स्थान पर पदस्थ किये जाने तथा स्वयं की गंभीर बीमारियों के प्रकरण में स्थानांतरण को विभागों के निर्धारित प्रतिशत या संख्या के अतिरिक्त रखा गया है। जिला एवं राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के भीतर स्थानांतरण प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से किया जायेगा। सभी विभागों के विभागाध्यक्ष तथा शासकीय उपक्रमों एवं संस्थाओं में पदस्थ प्रथम श्रेणी के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों का स्थानांतरण समन्वय में मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद किया जायेगा। किसानों के हक में बड़ा फैसला: प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 11,608.47 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने किसानों को फसल हानि या क्षति होने पर वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का आगामी 05 वर्षों (वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31) तक निरंतर क्रियान्वयन के लिए 11 हजार 608.47 करोड़ रूपये की वित्तीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार पात्र कृषकों को प्रति कृषक प्रत्येक मौसम में न्यूनतम दावा राशि 1,000 रूपये का भुगतान करने के लिए दावा राशि और राशि 1000 के अंतर की राशि का भुगतान राज्य शासन द्वारा वहन किया जायेगा। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया है। वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15,184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग अंतर्गत वृद्धजनों, कल्याणी महिलाओं और दिव्यांगजन की पेंशन योजना के लिए 15 हजार 184.42 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एन.एस.ए.पी.) योजना अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 2,123 करोड़ 42 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाली 40 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी महिलाओं को पात्रतानुसार प्रतिमाह 600 रूपये पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। राज्य शासन की समग्र सामाजिक सुरक्षा योजना अन्तर्गत समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना को 1 अप्रैल 2026 से आगामी 05 वर्षों तक निरंतर संचालन के लिए 13,061 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। योजना अंतर्गत 60 वर्ष से अधिक आयु के निराश्रित वृद्ध, 18 वर्ष से अधिक आयु की कल्याणी (विधवा) महिलाएं एवं 06 वर्ष से अधिक आयु के दिव्यांग जिनकी निशक्तता 40 प्रतिशत या उससे अधिक है एवं 50 वर्ष या अधिक आयु की अविवाहिता को योजना के अंतर्गत पात्रतानुसार 600 रूपये प्रतिमाह पेंशन राशि का भुगतान किया जाता है। सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा सिवनी की बंडोल और देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के लिए कुल 593 करोड़ 24 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सिवनी की बंडोल समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 232 करोड़ 57 लाख रूपये के स्थान पर पुनरीक्षित योजना लागत राशि 266 करोड़ 17 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। देवास की नेमावर समूह जल प्रदाय योजना की मूल स्वीकृत लागत राशि 237 करोड़ रूपये के स्थान पर 327 करोड़ 07 लाख रूपये की पुनरीक्षित प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। बंडोल समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 04 ग्रामों एवं 30 बसाहटों को तथा नेमावर समूह जल प्रदाय योजना के क्रियान्वयन में 21 ग्रामों और 11 छूटी हुई बसाहटों को अतिरिक्त रूप से सम्मिलित करने के साथ ही जल जीवन मिशन की गाइडलाइन अनुसार ग्रामीण परिवारों को क्रियाशील घरेलू नल कनेक्शन से जोड़ने करने के लिए जल … Read more

‘गद्दार’ टिप्पणी पर गरमाई राजनीति, राहुल गांधी के बयान से BJP नेताओं में नाराजगी

 नई दिल्ली लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. राहुल के बयान पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया।  राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली के धुलवारी गांव में वीरा पासी की मूर्ति का अनावरण किया. इस दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल ने कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंभी अमित शाह की बात करेंगे तो उनसे आप उसने खुलकर कहिएगा कि आपका प्रधानमंत्री गद्दार है. आपका गृह मंत्री गद्दार है, आपका संगठन गद्दार है, आपने हिंदुस्तान को बेचने को काम किया.  आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया।  पीएम मोदी और अमित शाह पर राहुल का हमला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर तीखी टिप्पणी की है. इस तीखी टिप्पणी पर पलटवार करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अराजकतावादी मानसिकता का प्रतीक बताया।  राहुल गांधी ने बुधवार को रायबरेली में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा, जब ये आरएसएस कार्यकर्ता आपके सामने आएंगे तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह की बात करेंगे, तब आपको उनके मुंह पर कहना होगा कि आपके प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और संगठन (भाजपा) गद्दार हैं, आपने हमारे देश को बेचने का काम किया है. आपने संविधान पर हमला करने का काम किया है. आपने अंबेडकर पर हमला किया. आपने गांधी जी पर आक्रमण किया है, ये बातें आप उनसे खुलकर कह दीजिए।  राहुल गांधी के बयान पर नितिन नवीन का पलटवार राहुल के इस बयान पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीखा पलटवार किया है. उन्होंने राहुल गांधी के बयान को भारतीय राजनीति की शुचिता और आपसी सम्मान के खिलाफ बताया. उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही हार की निराशा अब राहुल के स्वभाव और चरित्र में साफ दिखने लगी है।  नितिन नवीन ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति के 'राहू'  हैं जो देश के माहौल को गंदा कर रहे हैं.  उन्होंने कांग्रेस के इतिहास पर सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल गांधी के पूर्वजों ने हमेशा देश की जमीन को गिरवी रखने का काम किया और कभी सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ाया. उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूरी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी रहती थी, जबकि मोदी सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है. आज प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आतंकवाद पर पूर्ण लगाम लगी है और सेना स्वाभिमान से काम कर रही है।  राहुल गांधी चुनावी हार के हताश-नितिन नवीन बीजेपी अध्यक्ष ने राहुल से सवाल करते हुए कहा कि  क्या देश की जमीन सुरक्षित रखना और नक्सलवाद खत्म करना गद्दारी है?. राहुल गांधी आपके पूर्वजों ने इस देश की जमीन को हमेशा गिरवी रखने का काम किया, कभी हमारे सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने का काम नहीं किया, लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस देश की जमीन भी सुरक्षित हुई है और देश की जमीन भी मजबूत हुई है. आपके शासन काल में देश की पूरी तरह से अखंड हो गई।  बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने भी इस बयान की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस तरह के बयान देकर राजनीतिक विरोधियों से नहीं, बल्कि सीधे भारतीय राज्य और लोकतंत्र से लड़ रहे हैं. भंडारी के अनुसार, ऐसी भाषा केवल पाकिस्तान या उसके द्वारा समर्थित आतंकवादी ही बोल सकते हैं। राहुल गांधी के इस कृत्य से साफ होता है कि वे देश के सभी 140 करोड़ नागरिकों का अपमान कर रहे हैं। 

पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते ही आम आदमी पर डबल मार, एक्सपर्ट बोले- अब और बढ़ेगी महंगाई

भोपाल  पांच दिन के अंदर पेट्रोल-डीजल की कीमतें 4 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गईं। इसके बाद ट्रांसपोर्टर्स ने मध्य प्रदेश में माल भाड़ा बढ़ाने के संकेत दिए हैं। आने वाले दिनों में माल भाड़ा 5 से 10 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते पहले ही दूध, खाना और LPG महंगे हो चुके हैं। अब भाड़े में बढ़ोतरी से आम आदमी का बजट गड़बड़ाना तय है। भोपाल के बड़े ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि सरकार की नीतियों के चलते ट्रांसपोर्ट सेक्टर पहले ही ऑक्सीजन पर है। अब डीजल के रेट तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे कारोबार प्रभावित हो सकता है। उदाहरण के तौर पर यदि भोपाल से इंदौर के बीच का भाड़ा 10 हजार रुपए है तो यह बढ़कर 11 हजार रुपए हो सकता है। एमपी में 8 से 10 लाख ट्रक चलते हैं, जो ऑल इंडिया परमिट वाले होते हैं, यानी ये पूरे देश में कहीं भी माल लाने-ले जाने का काम करते हैं। माल भाड़ा बढ़ा तो महंगा होगा सामान ट्रक व लोडिंग वाहनों से पूरे प्रदेश में किराना, सोयाबीन, कपास, गेहूं, सीमेंट, चूना पत्थर, दवाएं, ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान, सोलर पैनल, खाद आदि की सप्लाई की जाती है। माल भाड़ा बढ़ने से इन सामानों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। ट्रांसपोर्ट कारोबारी कमल पंजवानी ने बताया कि भाड़ा बढ़ने का असर आखिरकार जनता पर ही होगा। खाना महंगा, होटल और रेस्टॉरेंट में 10 से 15% तक बढ़ोतरी भोपाल होटल एवं रेस्टॉरेंट संघ के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली बताते हैं कि होटल इंडस्ट्री पहले ही LPG संकट से जूझ रही है। 2 महीने के अंदर कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 50 प्रतिशत तक बढ़ गए। अब यह करीब 3 हजार रुपए में मिल रहा है। LPG संकट के बाद भोपाल में भोजन 10 से 15 प्रतिशत तक महंगा हो गया है। दूध के रेट 2 रुपए प्रति लीटर तक बढ़े हैं। इस वजह से पनीर और दही भी महंगे हो गए, जिसका असर सीधे खाने के मेन्यू पर पड़ा है। किचन से जुड़ा सामान महंगा हो चुका किराना कारोबारी विवेक साहू कहते हैं कि ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद बाजार में रोजमर्रा की जरूरत के सामान की कीमतें बढ़ी हैं। इससे जनता के बजट पर असर पड़ा है। माल भाड़ा बढ़ता है तो तय है कि कीमतें और भी बढ़ जाएंगी। टैक्सी संगठन की बैठक अगले सप्ताह ऑल इंडिया टैक्सी यूनियन कल्याण समिति संपूर्ण भारत के राष्ट्रीय सचिव नफीस उद्दीन ने बताया कि संगठन और टैक्सी चालकों के बीच बातचीत का दौर चल रहा है। अगले एक सप्ताह में बड़ी बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें 10 से 20 प्रतिशत तक किराया बढ़ाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। बैठक के बाद ही तय होगा कि किराया कितना बढ़ाया जाए। पंपों की स्टॉक लीमिट तय पेट्रोल पंप संचालकों के मुताबिक, एचपीसीएल में 300 लीटर, बीपीसीएल व इंडियन ऑयल में एक बार में 200 लीटर से ज्यादा डीजल भरते ही मशीन लॉक हो जाएगी। बता दें ​कि बस और ट्रक का डीजल टैंक 150 से 600 लीटर के बीच होता है। तेल कंपनियां ऐसी कैपिंग से इनकार किया है। एचपीसीएल के सीजीएम अश्विन के सिन्हा व इंडियन ऑयल के सीजीएम नवनीत मेहता ने ने कहा कि ऐसी कोई कैपिंग नहीं की है।

छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव, दुर्ग और बिलासपुर में कमिश्नरेट सिस्टम की तैयारी

दुर्ग. छत्तीसगढ़ में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार ने बड़ा संकेत दिया है. राजधानी रायपुर के बाद अब बिलासपुर और दुर्ग में भी पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली लागू करने की तैयारी है. राज्य के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने भिलाई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान इसकी घोषणा की. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन शहरों में बढ़ती आबादी, शहरी विस्तार और अपराध नियंत्रण की जरूरत होगी, वहां चरणबद्ध तरीके से यह व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार इसे शहरी पुलिसिंग को आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम मान रही है. गृहमंत्री ने कहा कि कमिश्नरेट प्रणाली लागू होने से पुलिस को अधिक प्रशासनिक और कार्यकारी अधिकार मिलेंगे. इससे अपराध पर त्वरित नियंत्रण, निर्णय प्रक्रिया में तेजी और जवाबदेही तय करने में सुविधा होगी. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार इस मॉडल को जरूरत के आधार पर अन्य शहरों में भी विस्तार दे सकती है. हालांकि लागू करने की समयसीमा पर उन्होंने कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की, लेकिन इसे प्राथमिकता में शामिल बताया. कमिश्नरेट प्रणाली क्या है कमिश्नरेट प्रणाली में पुलिस आयुक्त को दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कई कार्यकारी अधिकार मिलते हैं. वर्तमान पारंपरिक व्यवस्था में ये अधिकार जिला दंडाधिकारी के पास होते हैं. नई प्रणाली में मजिस्ट्रियल शक्तियां पुलिस आयुक्त को हस्तांतरित हो जाती हैं, जिससे धारा 144 लागू करने, लाइसेंस जारी करने और भीड़ नियंत्रण जैसे फैसले तेजी से लिए जा सकते हैं. बड़े और तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इसे प्रभावी मॉडल माना जाता है. रायपुर के बाद दो बड़े शहर राजधानी रायपुर में पहले ही कमिश्नरेट प्रणाली लागू की जा चुकी है. अब बिलासपुर और दुर्ग को भी इसमें शामिल करने की घोषणा की गई है. बिलासपुर न्यायिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है, जबकि दुर्ग और भिलाई औद्योगिक क्षेत्र के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं. इन शहरों में बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को देख सरकार ने यह निर्णय लिया है. पुलिस को मिलेंगे अतिरिक्त अधिकार गृहमंत्री के मुताबिक इस प्रणाली से पुलिस को कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में स्वतंत्र और त्वरित निर्णय लेने का अधिकार मिलेगा. अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक प्रबंधन और संगठित अपराध पर निगरानी में मजबूती आएगी. आम नागरिकों को भी शिकायतों के समाधान में तेजी का लाभ मिलेगा. इससे प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की उम्मीद है.

जनसुविधाओं से समृद्ध होगा शहर, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी बोले- विकास कार्य लगातार जारी

शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने लगातार किए जा रहे कार्य : वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी वित्त मंत्री ने रायगढ़ नगर निगम क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं शिलान्यास सामुदायिक भवन, बाल उद्यान और नाली निर्माण से बढ़ेंगी नागरिक सुविधाएं अधोसंरचना विकास, पर्यावरण संरक्षण और युवाओं के लिए आधुनिक सुविधाओं पर विशेष जोर रायपुर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने नगर पालिक निगम रायगढ़ क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं शिलान्यास करते हुए कहा कि रायगढ़ शहर को सुव्यवस्थित, आधुनिक और जनसुविधाओं से समृद्ध बनाने के उद्देश्य से लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शहर के विकास में अधोसंरचना विस्तार, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक सुविधाओं और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण वित्त मंत्री चौधरी ने नगर निगम के वार्ड क्रमांक 28 में विधायक निधि से लगभग 20 लाख रुपये की लागत से निर्मित साहू समाज सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भवन सामाजिक गतिविधियों, बैठकों, सांस्कृतिक आयोजनों और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र होते हैं। ऐसे भवन समाज के लोगों को सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराते हैं और सामाजिक समन्वय को मजबूत करते हैं। इस अवसर पर चौधरी ने कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले साहू समाज के छात्र-छात्राओं को सम्मानित कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। श्रीराम कॉलोनी में बाल उद्यान का जीर्णोद्धार वार्ड क्रमांक 21, श्रीराम कॉलोनी में अधोसंरचना विकास एवं पर्यावरण उपकर निधि से लगभग 46 लाख रुपये की लागत से बाल उद्यान जीर्णोद्धार कार्य का शिलान्यास किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत लैंडस्केपिंग, पौधरोपण, मुख्य द्वार, बाउंड्रीवाल, विद्युतीकरण, बच्चों के खेल उपकरण, बैठने की व्यवस्था सहित अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वित्त मंत्री ने कहा कि इस उद्यान के विकसित होने से बच्चों, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थल मिलेगा तथा शहर के हरित क्षेत्र में वृद्धि होगी। नाली निर्माण से सुदृढ़ होगी जल निकासी व्यवस्था रायगढ़ स्टेडियम के पीछे से श्रीराम कॉलोनी मोड़ तक लगभग 37.88 लाख रुपये की लागत से 580 मीटर लंबी नाली निर्माण कार्य का शिलान्यास भी किया गया। इस निर्माण से क्षेत्र की जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा और बरसात के दौरान होने वाली समस्याओं में कमी आएगी। चौधरी ने कहा कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में जल निकासी संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं। रायगढ़ में तेजी से आगे बढ़ रहे विकास और सौंदर्यीकरण के कार्य वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि रायगढ़ में सड़क, पुल, केलो नदी तट विकास, तालाब सौंदर्यीकरण, उद्यान निर्माण और ऑक्सीजन जोन जैसी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तेजी से कार्य चल रहा है। इतवारी बाजार क्षेत्र को ऑक्सीजन जोन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिलेगा। उन्होंने बताया कि निर्माणाधीन नालंदा परिसर युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का आधुनिक अध्ययन केंद्र बनेगा, जहां पुस्तकालय, अध्ययन कक्ष और मार्गदर्शन की सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बिजली बिल समाधान एवं सौर ऊर्जा योजनाओं की जानकारी कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना की जानकारी देते हुए कहा कि इसके माध्यम से उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिलों में राहत मिल रही है। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से योजना का लाभ लेने की अपील की। उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए दी जा रही सब्सिडी की जानकारी भी दी और नागरिकों से योजना से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में नगर निगम महापौर जीवर्धन चौहान, सभापति डिग्री लाल साहू, जनप्रतिनिधिगण, समाज के पदाधिकारी, अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

ट्विशा केस में पुलिस की चूक कहाँ हुई? बहन के आरोपों ने जांच पर खड़े किए नए सवाल

भोपाल  भोपाल में अपनी ससुराल में मृत पाई गई ट्विशा की बहन ने कहा है कि वह सुसाइड कर ही नहीं सकती। उसे साइकोलॉजिकली ब्रेकडाउन किया गया है। उसको सबसे डिसकनेक्ट किया गया। उसे मनोवैज्ञानिक रूप से इतना तोड़ा कि उसे सबसे अलग कर दिया। हमारी बहन सुसाइड कर ही नहीं सकती एक टीवी चैनल से बातचीत में ट्विशा की फुफेरी बहन नैना ने बताया कि वे दोनों अलग-अलग शहर में रहती हैं। हमलोग बचपन से दोस्त हैं। शादी के बाद हम बात नहीं कर पाते थे। उसका पति क्रिमिनल लॉयर है। इसकी पढ़ाई में साइको एनालिसिस होता है। इसने और इसकी मां ने मेरी बहन को पहले साइकोलॉजिकली ब्रेकडाउन किया और उसके बाद इसकी हत्या की है। यह प्री-मेडिकेटेड मर्डर है। यह एक दिन में किया गया काम नहीं है। हमारी बहन सुसाइड कर ही नहीं सकती। उसका कनेक्शन सिर्फ मां से था। इसकी लास्ट में जो मां से बात हुई है, उसमें लगा है कि कोई एकदम से रूम में आया है। इसके बाद कॉल कट गया और इसके बाद सब कुछ हुआ। इसकी सीडीआर निकलवानी चाहिए। भोपाल पुलिस कमिश्नर ने माना, ट्विशा मामले में हुई पुलिस से चूक ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं. शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि जिस बेल्ट से ट्विशा शर्मा ने कथित तौर पर फांसी लगाई थी, उसे समय पर पोस्टमार्टम टेबल तक नहीं पहुंचाया गया. अब भोपाल पुलिस कमिश्‍नर संजय कुमार ने इस लापरवाही को स्वीकार किया है।  'पुलिस से हुई है चूक' 'जिस बेल्‍ट से ट्विशा शर्मा ने फांसी लगाई, वो उस दिन भोपाल एम्स नहीं पहुंचा…' इस सवाल पर पुलिस कमिश्‍नर संजय कुमार ने  कहा, 'हम इसे अपनी टीम की लापरवाही मानते हैं. हालांकि इससे जांच पर कई असर नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा कि बेल्ट को एफएसएल टीम द्वारा जब्त कर ली गई थी, लेकिन इसे लापरवाही भी कह सकते हैं कि पोस्टमार्टम से पहले उसे अस्पताल नहीं भेजा गया. हालांकि बाद में इसे भोपाल एम्स भेजा गया और इसकी रिपोर्ट भी आ गई है।  भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने कहा कि इस बेल्ट को बाद में अस्पताल भेजकर रिपोर्ट ले ली गई है, इसलिए मुख्य जांच पर इसका कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस चूक की अलग से जांच की जाएगी।  'गिरिबाला सिंह ने इसे दावे को पुलिस कमिश्नर ने किया खारिज' भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के मुताबिक, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अब तक मिले सबूतों से साफ होता है कि यह हत्या नहीं बल्कि खुदकुशी का मामला है. उनका कहना है कि ट्विशा की मौत फांसी लगाने के कारण हुई है।  ट्विशा की सास व रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने दावा किया था कि ट्विशा को गांजे की लत थी और ग्लैमर इंडस्ट्री में जाने के बाद उसके परिवार ने उसे छोड़ दिया था. हालांकि पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी भी तरह के नशीले पदार्थ या ड्रग्स के सेवन की बात सामने नहीं आई है और न ही पुलिस जांच में ऐसा कोई सबूत मिला है।  भोपाल पुलिस कमिश्‍नर ने बताया, 'पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नशीले पदार्थों के सेवन का कोई जिक्र नहीं है. ट्विशा कोई ड्रग्‍स नहीं ले रही थी… हमारी जांच में भी ट्विशा द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन के दावों से संबंधित कोई जानकारी नहीं मिली है।  नहीं पता था कि बुरी तरह फंस चुकी है ट्विशा की बहन नैना ने बताया कि मैंने उसकी सारी दोस्तों से बात की, वह किसी के कनेक्शन में नहीं थी। उसने अपनी मां से कहा था कि 15 को नोएडा लौटने के बाद वह मुझसे बात करेगी। हमें बताया जा रहा था कि सब कुछ नॉर्मल है। लेकिन, हमें नहीं पता था कि वह इतनी बुरी तरह फंस चुकी है। वह इतनी बोल्ड थी कि मुझे एनर्जी देती थी। वो हमारे घर की सबसे सुंदर, बोल्ड और बिंदास लड़की थी। इस इंसान ने हमलोगों से क्या छीना है, उसे नहीं पता। हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था इस बीच ट्विशा के पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी के साथ कई तरह का दुर्व्यवहार किया जा रहा था। ससुराल वाले उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। दहेज के लिए उसका उत्पीड़न किया जा रहा था। हमें उसे उस घर में नहीं छोड़ना चाहिए था। पिता ने इसके लिए सामाजिक दबाव को जिम्मेदार ठहराया। पिता ने कहा कि हमारी परंपरा की सबसे बड़ी बदकिस्मती यह है कि हर मध्यम-वर्गीय परिवार चाहता है कि शादी सफल हो। सामाजिक दबाव इतना ज्यादा होता है कि कोई भी कभी यह सोचता ही नहीं कि शादी को टूट जाने देना चाहिए। तलाक के बारे में बात कर रही थी पिता ने कहा कि वह तलाक के बारे में बात कर रही थी। कह रही थी कि पापा, अगर बात नहीं बनी तो मैं उसे छोड़ दूंगी। मैं पीछे नहीं हटूंगी। ट्विशा ने अपनी मां से एक बातचीत के दौरान कहा था कि मैं इस तरह नहीं जीना चाहती। वहीं, ट्विशा के भाई हर्षित ने कहा कि परिवार इंसाफ के लिए लड़ेगा। ट्विशा की चचेरी बहन मीनाक्षी ने आरोप लगाया है कि उत्पीड़न तब अपने चरम पर पहुंच गया जब ट्विशा की 'वर्क-फ़्रॉम-होम' वाली नौकरी चली गई और वह गर्भवती हो गई। उसके पति ने उस बच्चे को अपना मानने से इनकार कर दिया। बता दें कि 2024 में एक डेटिंग ऐप पर ट्विशा की मुलाकात समर्थ सिंह से हुई थी। एक साल बाद दिसंबर 2025 में दोनों ने शादी कर ली थी।

महिला स्व-सहायता समूहों ने बदली गांवों की तस्वीर, आत्मनिर्भरता और पोषण का बन रहीं नया आधार

विशेष लेख आत्मनिर्भरता, पोषण और बदलाव की नई पहचान बनीं महिला स्व-सहायता समूह रायपुर छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति को एक साथ जोड़ते हुए राज्य सरकार ने एक ऐसी पहल शुरू की है, जिसने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आशा, आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता की नई रोशनी जगाई है। आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए पूरक पोषण आहार (रेडी-टू-ईट) के निर्माण एवं वितरण का दायित्व महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपकर सरकार ने महिलाओं को केवल रोजगार ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त भागीदारी का अवसर भी प्रदान किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ की गई यह पहल राज्य में महिला सशक्तिकरण और पोषण सुरक्षा के समन्वित मॉडल के रूप में उभर रही है। पहले जहां पूरक पोषण आहार निर्माण का कार्य बाहरी एजेंसियों के माध्यम से किया जाता था, वहीं अब यह जिम्मेदारी गांव की महिलाओं ने संभाल ली है, इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हुआ है और महिलाओं की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रही है। राज्य सरकार ने प्रथम चरण में रायगढ़, कोरबा, सूरजपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा और बलौदाबाजार-भाटापारा जिलें में इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया है। इन छह जिलें के 42 महिला स्व-सहायता समूहों को रेडी-टू-ईट पोषण आहार निर्माण एवं वितरण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन समूहों के माध्यम से हजारों महिलाओं को रोजगार मिली है और वे अब संगठित रूप से उत्पादन, पैकेजिंग, गुणवत्ता नियंत्रण और वितरण का कार्य संभाल रही हैं। प्रदेश का पहला रेडी-टू-ईट उत्पादन रायगढ़ जिले में प्रारंभ हुआ, जिसने पूरे राज्य के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत किया। कोरबा जिले में 10, रायगढ़ में 10, सूरजपुर एवं बलौदाबाजार-भाटापारा में 7-7, बस्तर में 6 तथा दंतेवाड़ा में 2 महिला स्व-सहायता समूह इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। इन समूहों के माध्यम से आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण पूरक पोषण आहार पहुंचाया जा रहा है। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे महिलाओं की भूमिका केवल श्रमिक तक सीमित नहीं रही, बल्कि वे प्रबंधन और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा भी बनी हैं। उत्पादन इकाइयों में कार्यरत महिलाओं को मशीन संचालन, गुणवत्ता परीक्षण, पैकेजिंग, भंडारण वितरण और लेखा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित इन इकाइयों ने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है। सूरजपुर जिले में संचालित रेडी-टू-ईट निर्माण संयंत्र इस बदलाव की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। भैयाथान, प्रतापपुर और सूरजपुर विकासखंडों में संचालित संयंत्रों में महिलाएं पौष्टिक नमकीन दलिया और मीठा शक्ति आहार तैयार कर रही हैं। इन खाद्य पदार्थों में विटामिन ‘ए’, विटामिन ‘डी’, आयरन, कैल्शियम, जिंक और फोलिक एसिड जैसे आवश्यक पोषक तत्व शामिल हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इन संयंत्रों में कार्यरत महिलाएं अब केवल अपने परिवार की जिम्मेदारियां नहीं निभा रहीं, बल्कि जिले के पोषण अभियान में महत्वपूर्ण भागीदार बन चुकी हैं। सूरजपुर जिले में निर्माण के साथ-साथ वितरण की जिम्मेदारी भी महिला समूहों को सौंपी गई है, जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं आजीविका से जुड़ सकी हैं। लगभग 430 महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों तक पोषण आहार पहुंचाने के कार्य में सक्रिय रूप से लगी हुई हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने इस पहल को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और बच्चों के बेहतर पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। उनका कहना है कि यह योजना महिलाओं को रोजगार देने के साथ-साथ राज्य के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। दरअसल, यह पहल केवल पोषण आहार निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक बदलाव की एक सशक्त कहानी भी है, जिन महिलाओं की पहचान कभी केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, वे आज उत्पादन इकाइयों का संचालन कर रही हैं। समूहों का नेतृत्व कर रही हैं और अपने परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन रही हैं। नियमित आय ने उनके जीवन में स्थिरता लाई है, आत्मविश्वास बढ़ाया है और समाज में उनकी भागीदारी को मजबूत किया है। छत्तीसगढ़ में महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से संचालित यह मॉडल “पोषण के साथ सशक्तिकरण” की अवधारणा को वास्तविक रूप दे रहा है। यह पहल साबित कर रही है कि जब महिलाओं को अवसर और विश्वास मिलता है, तो वे न केवल अपने जीवन को बदलती हैं, बल्कि पूरे समाज के विकास की दिशा भी तय करती हैं। • डॉ. दानेश्वरी संभाकर • उप संचालक (जनसंपर्क)

गिरते रुपये पर सरकार का बड़ा प्लान, विदेशी आयात घटाने की रणनीति पर काम तेज

नई दिल्ली भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 96.5 पर बंद हुआ, जबकि  यह 96.34 पर था. इस गिरते हुए रुपया को संभालने के लिए पिछले महीने ही आरबीआई ने कई अहम कदम उठाए थे. लेकिन इससे भी कुछ खास असर पड़ता हुआ नजर नहीं आया।  अब सरकार देश के बढ़ते इंपोर्ट बिल को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गैर-जरूरी(non essential) सामानों के इंपोर्ट की समीक्षा कर रही है. अधिकारियों के मुताबिक, जिन सामानों में भारत की विदेशों पर निर्भरता कम है, उनके आयात पर ज्यादा चार्ज या कुछ प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  पेमेंट बैलेंस पर दबाव इस मुद्दे पर अगले हफ्ते पश्चिम एशिया संकट को लेकर होने वाली मंत्रालय की बैठक में चर्चा हो सकती है. भारत का ट्रेड डेफिसिट अप्रैल में बढ़कर 28.4 अरब डॉलर पहुंच गया, जो मार्च में 20.7 अरब डॉलर था. इससे देश के पेमेंट बैलेंस पर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि विदेशी निवेश में कमी और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश के बाहर जाने जैसी चुनौतियां भी सामने हैं।  इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का कहना है कि अगर आयात पर कोई रोक या अतिरिक्त शुल्क लगाया जाता है तो उसे बहुत सोच-समझकर लागू किया जाएगा, ताकि जरूरी सप्लाई चेन और उद्योगों पर कोई बड़ा असर न पड़े।  रुपये की स्थिति सुधारने के लिए सरकार का कदम अगले हफ्ते होने वाली बैठक में सरकार गैर-जरूरी सामानों(non essential items) के आयात को कम करने, रुपये की स्थिति सुधारने और अर्थव्यवस्था को गति देने के उपायों पर चर्चा करेगी. अधिकारियों के मुताबिक, सरकार ऐसे कदमों पर विचार कर रही है जिससे देश का इंपोर्ट बिल कम हो और घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिले।  इस बैठक में वित्त मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम मंत्रालयों के अधिकारी शामिल होंगे. साथ ही रेवेन्यू बढ़ाने और आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने के लिए तुरंत लागू किए जा सकने वाले उपायों पर भी चर्चा की जाएगी।  इंपोर्टेड सामानों नए प्रतिबंध लगाने की तैयारी सरकार का मानना है कि कई ऐसे सामान विदेशों से इंपोर्ट किए जा रहे हैं, जिन्हें भारत में ही बनाया जा सकता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ रहा है. अधिकारियों ने कहा कि सरकार उद्योगों से बातचीत कर रही है ताकि गैर-जरूरी आयात कम हो सके. जरूरत पड़ने पर कुछ सामानों पर इंपोर्ट बिल बढ़ाया जा सकता है या नए प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।  सोने के आयात पर सरकार का फैसला हाल ही में सरकार ने सोने के आयात को कम करने के लिए कस्टम ड्यूटी बढ़ाई थी और कुछ नियम भी लागू किए थे. सरकार ने गोल्ड इंपोर्ट ड्यूटी 6 से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिसमें 10 प्रतिशत कस्टम ड्यूटी और 5 प्रतिशत सेस शामिल है. सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कम होगा, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा और देश का बढ़ता इंपोर्ट बिल नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।  अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में उठाए जाने वाले कदम पूरी योजना और संतुलन के साथ होंगे, ताकि जरूरी सामानों और मैन्युफैक्चरिंग सप्लाई चेन पर असर न पड़े. इसका मकसद रुपये को मजबूती देना और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है।  सरकार ने सभी मंत्रालयों से उन सामानों की लिस्ट मांगी है जिनके आयात को सीमित किया जा सकता है. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी कारोबारियों से कहा है कि जिन चीजों का उत्पादन भारत में हो सकता है, उन्हें विदेशों से मंगाने से बचना चाहिए. उनका कहना है कि कई सस्ते आयातित सामान की क्वालिटी भी अच्छी नहीं होती, इसलिए देश में निर्माण बढ़ाना जरूरी है। 

समय सीमा से पहले खत्म हुई माओवादी चुनौती, प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को मिलेगी रफ्तार

भोपाल  छत्तीसगढ़ के बस्तर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश ने केंद्र सरकार द्वारा तय समय सीमा से पहले माओवादी समस्या के उन्मूलन में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि कई इनामी माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया, जबकि सुरक्षा बलों और जवानों को लगातार प्रोत्साहित किया गया, जिससे नागरिकों का सरकार पर विश्वास मजबूत हुआ है। केंद्रीय मंत्री शाह और कई मुख्यमंत्री रहे मौजूद मुख्यमंत्री ने माओवादी समस्या मुक्त भारत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का प्रदेशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे। 330 करोड़ रुपये से होगा विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए नई कार्ययोजना तैयार की गई है। प्रभावित गांवों के लिए 330 करोड़ रुपये की लागत से सूक्ष्म विकास योजना लागू की गई है। इसके तहत सड़क, पुल, मोबाइल टावर और नई सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तार किया जा रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सुशासन और जनकल्याण से जुड़े प्रयासों की जानकारी भी साझा की। उन्होंने सहकारिता, साइबर सुरक्षा, शिक्षा, शहरी विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और दुग्ध उत्पादन जैसे क्षेत्रों में मध्य प्रदेश की प्रगति को रेखांकित किया।बैठक में सुशासन, जनकल्याण, क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। मोहन यादव सरकार एमपी को औद्योगिक केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध बीजेपी की डबल इंजन की सरकार ने एमपी में औद्योगिक सेक्टर के विस्तार के लिए सुगम नीतियां और अनुकूल वातावरण तैयार किया है। यही वजह है कि एमपी की मोहन यादव सरकार निवेशकों को आकर्षित कर रही है और प्रदेश को सशक्त बना रही है। मालूम हो कि एमपी सरकार ने मध्य प्रदेश के औद्योगिक सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। सरकार का फोकस निवेश आकर्षित करने, रोजगार बढ़ाने और राज्य को औद्योगिक हब बनाने पर रहा है। राज्य सरकार ने 2025 को 'उद्योग और रोजगार का वर्ष' घोषित किया, ताकि उद्योग और रोजगार को प्राथमिकता दी जा सके। साथ ही नई 'औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025' लागू की गई, जिसमें टेक्सटाइल, ईवी मैन्युफैक्चरिंग, फार्मा, बायोटेक, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस सेक्टर के लिए विशेष नीतियां बनाई गई हैं। सरकार ने अगले पांच सालों में 20 लाख रोजगार और औद्योगिक जीडीपी को 6 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। सीएम मोहन यादव ने डिजिटल ट्रांसमिशन कार्यक्रम में की शिरकत उधर, पिछले दिनों एमपी के चीफ मिनिस्टर मोहन यादव ने जबलपुर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत समेत अन्य गणमान्य लोगों के साथ एक खास कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान सीएम मोहन ने कहा, 'मध्य प्रदेश न्याय और संस्कृति की गौरवशाली परंपराओं का प्रदेश है। आज जबलपुर में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के साथ मुलाकात की।' सीएम ने आगे कहा, 'केंद्रीय विधि एवं न्याय (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल और मप्र उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा के साथ 'डिजिटल ट्रांसमिशन: पेपरलेस कानूनी प्रणाली को आगे बढ़ाना' विषय पर आयोजित विधि व्याख्यान कार्यक्रम में विचार साझा किए। हमारे प्राचीन ग्रंथों में भारतीय न्याय परंपरा के कई महान उदाहरण मिलते हैं। आज न्याय व्यवस्था, लोकतंत्र और भारतीय मूल्यों के पुनर्जागरण का काल है।'  

मध्यप्रदेश में टेक्नोलॉजी ट्रांसफॉर्मेशन की तैयारी, गूगल संग बैठक में AI आधारित बदलावों पर फोकस

भोपाल   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 20 मई बुधवार यानी आज राजधानी भोपाल में गूगल के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक करेंगे। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के समन्वय से आयोजित ये बैठक मध्य प्रदेश में एआई आधारित डिजिटल परिवर्तन, स्मार्ट गवर्नेंस और तकनीक आधारित विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे। इन समाधानों के इस्तेमाल पर होगी चर्चा बैठक में मध्य प्रदेश सरकार और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई आधारित समाधानों के उपयोग पर चर्चा होगी। साथ ही डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल और सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा। नागरिक सेवा विकास को दी जाएगी प्राथमिकता धर्म नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ-2028 के तकनीक आधारित प्रबंधन, स्मार्ट भीड़ प्रबंधन, एआई आधारित स्मार्ट पुलिसिंग, डेटा आधारित निगरानी, अधिक प्रभावी नागरिक सेवा विकास को प्राथमिकता दी जाएगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई आधारित रोग पहचान और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली, कृषि में किसानों को डिजिटल सेवाओं की बेहतर पहुंच और शिक्षा के क्षेत्र में एआई आधारित शिक्षण और कौशल विकास पर भी विचार किया जाएगा। एमपी और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को मिलेगी नई दिशा बैठक में एआई स्किलिंग, एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, स्टार्टअप इकोसिस्टम और पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्नत तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। ये बैठक मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दूरदर्शी तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देने और प्रदेश को नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक पर आधारित विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। बैठक में ये होंगे शामिल बैठक में गूगल क्लाउड इंडिया के निदेशक (पब्लिक सेक्टर) आशीष वाट्टल, एपीएसी क्षेत्र के निदेशक (स्ट्रेटेजिक एंगेजमेंट्स) मदन ओबेरॉय समेत सिंगापुर से गूगल क्लाउड के वैश्विक प्रतिनिधि, हेल्थकेयर एआई और डिजिटल अवसंरचना विशेषज्ञ और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इनपर होगा विचार बैठक में मध्य प्रदेश और गूगल के बीच दीर्घकालिक तकनीकी साझेदारी, उन्नत क्लाउड तकनीकों और एआई पर आधारित समाधानों के इस्तेमाल पर चर्चा की जाएगी। साथ ही, डिजिटल गवर्नेंस को अधिक प्रभावी बनाने, जनसेवाओं को सरल एवं सुगम बनाने और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।