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मध्यप्रदेश के पावर सेक्टर को मिली नई रफ्तार, सीएम मोहन यादव ने औद्योगिक विकास पर जताई प्रतिबद्धता

 सीहोर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 सितंबर को सीहोर जिले में क्रॉम्पटन ग्रीव्स की नई पावर ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट के ट्रांसफॉर्मर के रोल-आउट का शुभारंभ किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षित करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है, क्योंकि निवेश से ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित होते हैं। सरकार छोटे-बड़े सभी निवेशकों को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले ही केबल निर्माण के लिए 106 करोड़ की लागत से एक फैक्ट्री का भूमि-पूजन किया गया है। आज जन्माष्टमी के पावन अवसर पर 888 करोड़ की लागत से तैयार हुई सीजी पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस की नई पावर ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री का लोकार्पण हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते करीब 8 महीने में गोदरेज जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों की इकाइयों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किए गए। ग्वालियर-चंबल अंचल में गोदरेज इंडस्ट्रीज ने साबुन तैयार करने के लिए एशिया की सबसे बड़ी अपनी चौथी यूनिट का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों के बलबूते देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के बीच मध्य प्रदेश आकर उद्योग स्थापित करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो रही है। प्रदेश में आ रहीं फैक्ट्रियों में केवल प्रोडक्ट तैयार नहीं होता है, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि, टैक्स कलेक्शन और रोजगार के अवसरों का भी विकास होता है। मात्र 13 महीने में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीहोर श्योर है, निवेश में सिक्योर है और रिटर्न एश्योर है। यह जिला पर्यटन के क्षेत्र में तेज गति से विकास कर रहा है। सीहोर अब भोपाल मेट्रोपोलिटन सिटी का हिस्सा है, जिससे भविष्य में यहां के नागरिकों को लाभ मिलेगा। देश के इलेक्ट्रिकल इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस की पावर ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट बड़ी भूमिका निभाएगी। सीहोर में टायर से लेकर ट्रांसफॉर्मर तक सब कुछ तैयार हो रहा है। वर्तमान समय में मध्यप्रदेश की ग्रोथ में 5 अहम कड़ियां हैं, पैशन, पोटेंशियल, पॉलिसी, परफॉर्मेंस और प्रोडक्शन। सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस ने अपनी 9 दशक की यात्रा में आज मध्य प्रदेश की धरती पर नया मुकाम हासिल किया है। पिछले साल अगस्त में भूमि-पूजन के बाद रिकॉर्ड 13 महीने में सीहोर में दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर निर्माण फैक्ट्री प्रारंभ हुई है। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के लिए यह बड़ी सौगात है। उन्होंने कहा कि इस यूनिट में हर वर्ष 365 ट्रांसफॉर्मर तैयार होंगे और 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के आसपास स्थित खाली भूमि से छोटे-बड़े झाड़ हटाने में सरकार सहयोग प्रदान करेगी। तेज गति से आगे बढ़ा रहा है भारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। देश के साथ मध्य प्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत की विकास दर दुनिया में सर्वाधिक 7.8 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका की ग्रोथ रेट मात्र 2 प्रतिशत और चीन की 4 प्रतिशत पर है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को तेज गति से आगे बढ़ा रहा है। केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका अपनी ट्रेड डील को ओपन करे, तभी भारत अपने कदम आगे बढ़ाएगा। इस मामले में देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लैब अब सीहोर में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के सीईओ अमर कौल ने कहा कि यह हमारी कंपनी का महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा 13 प्रतिशत है, इसे 2035 तक 25 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सीहोर में क्रॉम्पटन ग्रीव्स की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में लगभग 2000 लोगों को रोजगार मिला है। यहां पर हर महीने 35 ट्रांसफॉर्मर तैयार किए जाएंगे, जिनका आकार किसी तीन मंजिला बंगले के बराबर होगा। हमारी कंपनी आधुनिक मशीनों के माध्यम से प्रोडक्शन कर रही है। इस यूनिट में दुनिया की सबसे बड़ी टेस्ट लैब भी तैयार की गई है। यूनिट की जरूरत के लिए 36 प्रतिशत बिजली सोलर एनर्जी से मिलेगी। राज्य सरकार के सहयोग से सीहोर में यह यूनिट मात्र 13 महीने में प्रोडक्शन के तैयार हुई है। हमारी कंपनी विकसित भारत और समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण के लिए संकल्पित है।  

सीएम डॉ. यादव बोले- भगवान श्रीकृष्ण ने कष्टों के बीच भी जीवन को सार्थक बनाने की सीख दी

भगवान श्रीकृष्ण ने कष्टों के बीच रहकर भी जीवन को सार्थक बनाने की दी सीख : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव इस्कॉन मंदिर भोपाल में आयोजित श्रीकृष्ण जन्म उत्सव में हुए शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि कष्टों के बीच जीवन को किस तरह सार्थक बनाया जा सकता है, यह भगवान श्रीकृष्ण से सीखा जा सकता है। उन्होंने कंस को जो एक सत्ताधीश थे, उनके घर में ही घुसकर मार कर साहस और शौर्य का परिचय दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नगरीय क्षेत्रों में गीता भवन और ग्रामीण क्षेत्रों में वृंदावन ग्राम प्रारंभ किये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा गौशालाओं के संचालन के लिए सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के पटेल नगर स्थित इस्कॉन मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्म उत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में प्रस्तुत भजन भी सुने। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि घर-घर गोपाल की कल्पना को साकार करते हुए प्रदेश में गौपालन को प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रदेश में दुग्ध उत्पादन वृद्धि के प्रयास किये जा रहे हैं। आने वाले समय में मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में नंबर वन बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की सभी श्रद्धालुओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस्कॉन मंदिर में आकर वृंदावन की भांति महसूस होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन काल में मित्रता के महत्व को भी स्थापित किया। साथ ही शिक्षा की महत्ता स्थापित की। उन्होंने उज्जैन में गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण की। अपने जीवन में ही जगतगुरु की उपाधि भी उन्होंने प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की पहल की गई। संविधान की दृष्टि से सभी नागरिक समान हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में श्रीकृष्ण पाथेय का निर्माण किया जा रहा है। प्रारंभ में संस्था द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस्कॉन मंदिर पहुंचकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा पर नमन कर पूजा अर्चना की। उन्होंने इस्कॉन संस्था के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद की प्रतिमा को भी नमन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नए इस्कॉन मंदिर निर्माण की कल्पना की सराहना की। उन्होंने बताया कि जब वे उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष थे तो सर्वप्रथम मध्यप्रदेश में उज्जैन में ही इस्कॉन मंदिर प्रारंभ हुआ। यह सिलसिला राजधानी भोपाल तक पहुंचा है। यहां निर्मित किये जा रहे नए मंदिर की वास्तुकला और नागर शैली के अनुरूप निर्माण की पहल प्रशंसनीय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए इस्कॉन मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए प्रोजेक्ट की जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस्कॉन संस्थान की ओर से स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया। 

आस्था की ताकत पर बोले सीएम योगी, ‘आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, हमारी श्रद्धा नहीं’

आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, हमारी आस्था नहीं: सीएम योगी लखनऊ पुलिस लाइन में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आयोजन में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अंधकार में जन्म लेकर श्रीकृष्ण ने जीवन भर समाज को दिखाया प्रकाश का मार्ग- मुख्यमंत्री सीएम ने कहा- आक्रांताओं ने मूर्तियां तोड़ीं, मंदिरों के ऊपर इमारतें खड़ी कीं, लेकिन हमारे मन में बसे श्रीराम-श्रीकृष्ण को नहीं छू पाए अयोध्या में राम मंदिर और काशी विश्वनाथ धाम के भव्य स्वरूप ने दिखाई आस्था की अजेय शक्ति लखनऊ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन आस्था नहीं। वे मूर्तियां तोड़ सकते हैं, मंदिरों के ऊपर अपनी इमारत खड़ी कर सकते हैं, लेकिन वे हमारे मन में बसे श्रीराम-श्रीकृष्ण को कभी छू नहीं पाए। सोमनाथ मंदिर बार-बार टूटा, लेकिन भारत ने उसे बार-बार बनाया। अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भगवान राम का मंदिर बार-बार टूटा, लेकिन आज यह अपनी अजेय पताका के साथ खड़ा है। काशी में बाबा विश्वनाथ का मंदिर भी बार-बार टूटा, लेकिन पहले लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर और आधुनिक भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने काशी विश्वनाथ धाम के रूप में इसे भव्य स्वरूप दिया। पुलिस लाइन लखनऊ में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने भारत को मिटाने और उसकी आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में मिट गए। आज कोई उन्हें पूछने वाला नहीं। इसके विपरीत भारत आज भी जाग्रत है और अपनी शाश्वत यात्रा को लेकर आगे बढ़ रहा है। आज का यह आयोजन हम सभी को योगेश्वर श्रीकृष्ण के उस शाश्वत संदेश के साथ जोड़ता है, जो पिछले 5000 वर्षों से अधिक समय से सम और विषम परिस्थितियों में इस समाज का मार्गदर्शन कर रहा है। सीएम ने कहा कि श्रीकृष्ण का जन्म जेल की काल कोठरी में होता है। जन्म अंधकार में होता है, लेकिन जीवन भर श्रीकृष्ण ने उन परिस्थितियों को परास्त करते हुए समाज को प्रकाश का मार्ग दिखाया। धर्म, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए प्रभु का अवतरण हुआ। यह धर्म कुछ और नहीं, बल्कि वही कर्तव्य है, जिसका पालन करते हुए श्रीकृष्ण को हमने कंस के विरुद्ध और महाभारत के युद्ध में भी देखा है। जीवन में जब भ्रम हो, संशय हो, तब कर्म की प्रेरणा प्रदान करने वाला श्रीकृष्ण का संदेश हम सभी को श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से प्राप्त होता है, हर सनातनी और हर भारतवासी बड़ी श्रद्धा के साथ उनका स्मरण करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सौभाग्य रहा कि मैं कल से आज दोपहर तक वृंदावन और मथुरा में ही था। वहां लाखों की संख्या में उमड़ा जनसैलाब था। लोगों को न बरसात की चिंता थी, न गर्मी की, न सुविधा की और न ही किसी प्रकार का कोई संकोच। सभी के मन में एक ही भाव और एक ही भंगिमा थी कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि में दर्शन करना है। मथुरा, वृंदावन, बरसाना, गोकुल, गोवर्धन, बलदेव और नंदगांव, इन सभी क्षेत्रों में आज भी श्रीकृष्ण की वे स्मृतियां लोगों के मन में बसी हुई हैं। वहां लोग अनावश्यक रूप से पहाड़ों का खनन नहीं करते, पेड़ों की टहनियां नहीं तोड़ते और प्रकृति को नुकसान नहीं पहुंचाते। सीएम ने कहा कि इंद्र अपनी पूजा कराना चाहते थे। श्रीकृष्ण ने कहा कि नहीं, जो हमारे अन्नदाता किसानों को और हमारे पशुपालकों को संरक्षण देता है, हमें उसकी पूजा करनी चाहिए। इसीलिए आज भी हम लोग पिछले 5000 वर्षों से गोवर्धन की पूजा कर रहे हैं। श्रद्धालु गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं और लाखों की संख्या में वहां पहुंचते हैं। यह भाव हमें दिखाता है कि आक्रांता मंदिर तोड़ सकता है, लेकिन हमारी आस्था नहीं। प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीकृष्ण का संदेश हम सबके लिए एक ही है कि कर्म क्षेत्र में अपने आप को पहचानो। आज प्रत्येक क्षेत्र में एक नई प्रतिस्पर्धा है। एक नए भाव के साथ पूरा देश आगे बढ़ने के लिए उत्सुक दिखाई देता है, लेकिन यह प्रतिस्पर्धा सकारात्मक होनी चाहिए। जिन लोगों ने आस्था को नष्ट करने का प्रयास किया था, उनका भाव नकारात्मक था, इसलिए वे स्वयं नष्ट हो गए। जिन लोगों ने भारत के भाव और भंगिमा को नष्ट करने का प्रयास किया था, वे इतिहास में नाम शेष हो गए। हर व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे मुख्यमंत्री ने कहा कि यह यात्रा केवल सरकार को नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतवासियों को मिलकर तय करनी है। विकसित भारत की संकल्पना तब पूरी होगी, जब सकारात्मक भाव के साथ हर व्यक्ति अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करे। हर व्यक्ति कर्म क्षेत्र में श्रेष्ठ करने की दिशा में अग्रसर होगा तो निश्चित रूप से भारत विकसित भारत होगा और उत्तर प्रदेश विकसित उत्तर प्रदेश होगा। कार्यक्रम में जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, ऊर्जा राज्य मंत्री कैलाश राजपूत, पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, पूर्व मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, अमरेश कुमार और ओपी श्रीवास्तव, मुख्य सचिव एसपी गोयल, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद समेत गणमान्य अतिथि मौजूद रहे।

सीएम विष्णुदेव साय बोले- भगवान श्रीकृष्ण का जीवन धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण की प्रेरणा देता है

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की देता है प्रेरणा – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर मुख्यमंत्री ने किया शंख अभिषेक, प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, भक्तों के साथ किया हरे कृष्ण महामंत्र का घोष रामलला दर्शन और मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से श्रद्धालुओं की तीर्थ यात्रा की अभिलाषा हो रही पूरी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आस्था केंद्रों को भव्य स्वरूप देने की दिशा में तेजी से हो रहा कार्य रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के टाटीबंध स्थित इस्कॉन रायपुर के राधा रासबिहारी जी मंदिर में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव में शामिल हुए। भक्तिमय वातावरण के बीच मुख्यमंत्री साय ने भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना एवं शंख अभिषेक किया और प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों और उपस्थित श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन मानव समाज को धर्म, कर्तव्य और लोककल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने कर्मयोग का जो संदेश दिया, वह आज भी मानवता को जीवन की चुनौतियों के बीच अपने कर्तव्य पथ पर दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ने की दिशा दिखाता है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का उत्सव नहीं, बल्कि उनके जीवन-दर्शन और आदर्शों को आत्मसात करने का भी अवसर है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन के माध्यम से अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, धर्म की रक्षा करने और समाज के कमजोर वर्ग के साथ खड़े रहने का संदेश दिया। उनके विचार युगों-युगों से भारतीय समाज को प्रेरित करते आ रहे हैं। इस अवसर पर मंदिर परिसर ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण, हरे हरे’ के महामंत्र से गुंजायमान रहा। मुख्यमंत्री साय ने भी भक्तवृंद के साथ हरे कृष्ण महामंत्र का घोष किया और वृंदावन बिहारीलाल के प्राकट्य उत्सव पर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर में बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं के उत्साह और भक्तिभाव से पूरा वातावरण कृष्णमय हो गया। छत्तीसगढ़ की धार्मिक विरासत हमारी अमूल्य धरोहर मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती प्राचीन काल से ही धर्म, अध्यात्म और संस्कृति की पुण्यभूमि रही है। यह माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। हमारे गांवों, नगरों, मंदिरों, तीर्थों और लोक परंपराओं में हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत जीवंत है। इस गौरवशाली धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सहेजना, उसका संवर्धन करना तथा नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भोरमदेव, गंधेश्वर महादेव, मधेश्वर महादेव और कुलेश्वर महादेव जैसे प्रसिद्ध शिवधाम हैं, वहीं मां बमलेश्वरी, रतनपुर की मां महामाया, माता दंतेश्वरी और मां चंद्रहासिनी जैसे शक्तिपीठ एवं आस्था केंद्र प्रदेश की आध्यात्मिक पहचान को समृद्ध करते हैं। राज्य सरकार इन धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने और उन्हें भव्य स्वरूप देने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के भोरमदेव मंदिर क्षेत्र को प्रसाद योजना के अंतर्गत लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसके माध्यम से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। हर श्रद्धालु को तीर्थ दर्शन का अवसर देने का प्रयास मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आस्था हमारे समाज की बड़ी शक्ति है। आर्थिक अथवा अन्य कारणों से कोई श्रद्धालु तीर्थ दर्शन की अपनी अभिलाषा से वंचित न रहे, इस भावना के साथ राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं का संचालन कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला के विराजमान होने के बाद छत्तीसगढ़ के लोगों में अपने आराध्य के दर्शन को लेकर अपार उत्साह है। राज्य सरकार की श्रीरामलला दर्शन योजना के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालुओं को अयोध्याधाम की यात्रा कराई जा रही है। अब तक 50 हजार से अधिक श्रद्धालु इस योजना के माध्यम से प्रभु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इसी प्रकार मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के अंतर्गत प्रदेश के वृद्धजनों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों के दर्शन का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है। जीवन के इस पड़ाव पर तीर्थ दर्शन की उनकी अभिलाषा पूरी होते देखना सरकार के लिए भी संतोष का विषय है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के विकास से हमारी विरासत का संरक्षण तो होता ही है, साथ ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं के विस्तार से पर्यटन बढ़ता है और स्थानीय युवाओं, स्व-सहायता समूहों, छोटे व्यवसायियों तथा कारीगरों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर निर्मित होते हैं। सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख आस्था केंद्र राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाएं। भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जा रहा महा-महोत्सव उल्लेखनीय है कि इस्कॉन रायपुर के 26वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 03 से 05 सितम्बर तक श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महा-महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। महोत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की आराधना, भजन-कीर्तन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु महोत्सव में शामिल होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के दर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक पुरन्दर मिश्रा, इस्कॉन रायपुर के पदाधिकारीगण, संतजन एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

पंजाब में नशे पर सियासत जारी, अकाली-कांग्रेस से AAP तक बदली सरकारें; 2027 चुनाव में भी बनेगा मुद्दा

चंडीगढ़  पंजाब की राजनीति में नशा करीब दो दशक से ऐसा मुद्दा है जो सरकार बदलने के साथ खत्म नहीं हुआ। 2007 के बाद अकाली-भाजपा सरकार फिर 2017 में कांग्रेस और 2022 में आम आदमी पार्टी की सरकार आई। तीनों सरकारों ने नशे के खिलाफ कार्रवाई की लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सवाल फिर वही है कि इतने वर्षों की कार्रवाई के बाद नशे की जड़ कितनी कमजोर हुई और युवा इससे कितना दूर हुआ। उपलब्ध सरकारी पुलिस एनसीआरबी एनसीबी और केंद्रीय जांच एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार आप सरकार के दौरान कार्रवाई का पैमाना सबसे बड़ा दिखता है। हालांकि अधिक मामले और गिरफ्तारियां नशे की खपत का सीधा पैमाना नहीं हैं। ये पुलिस की अधिक सक्रियता और मामलों के ज्यादा पंजीकरण का नतीजा भी हो सकते हैं। अब बहस सिर्फ गिरफ्तारियों और बरामदगी की नहीं बल्कि सप्लाई लाइन और बड़े नेटवर्क को तोड़ने की है। अकाली-भाजपा सरकार : 6,000 करोड़ के नेटवर्क ने बढ़ाई सियासी तपिश 2007 से 2017 तक अकाली-भाजपा सरकार रही। एनसीआरबी के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2007 से 2011 के बीच एनडीपीएस मामलों में 30,422 गिरफ्तारियां हुईं। 2012 से 2015 के बीच 58,511 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। 2012 में 11,715 2013 में 16,821 2014 में 17,084 और 2015 में 12,171 गिरफ्तारियां हुईं। एनसीबी के अनुसार 2015 में पंजाब में 601.88 किलोग्राम हेरोइन जब्त हुई। इसी दौर में पूर्व डीएसपी और अर्जुन पुरस्कार विजेता पहलवान जगदीश भोला को 2013 में सिंथेटिक ड्रग तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने नेटवर्क का आकार करीब 6,000 करोड़ रुपये बताया। बाद में कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए। 2019 में भोला को सजा हुई और 2024 में धनशोधन मामले में भोला समेत 17 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए करीब 12.37 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त करने का आदेश दिया गया। कांग्रेस से आप तक : कार्रवाई का दायरा बढ़ा पर सवाल कायम 2017 में कांग्रेस सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स बनाई। 2017 से 2021 के उपलब्ध आंकड़ों में 52,255 एनडीपीएस मामले और 68,064 गिरफ्तारियां दर्ज हुईं। करीब 2,412-2,415 किलोग्राम हेरोइन बरामद हुई। दिसंबर 2021 में अकाली नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस कानून के तहत मामला दर्ज हुआ। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और बाद में जमानत मिली। मार्च 2022 में भगवंत मान के नेतृत्व में आप सरकार आई और ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया। 2022 से 2026 तक सरकार के अनुसार 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए और 98,596 लोग गिरफ्तार हुए। करीब 5,979 किलोग्राम हेरोइन 93 किलो आईसीई 3,583 किलो अफीम और 8.7 करोड़ फार्मा गोलियां-कैप्सूल जब्त किए गए। 772 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त करने और 54.47 करोड़ रुपये की ड्रग मनी बरामद करने का दावा है। दोषसिद्धि दर करीब 89 प्रतिशत बताई गई है। तस्करों से पुलिस और नेताओं तक पहुंची जांच 2012 में रंजीत सिंह कंडोला उर्फ राजा कंडोला गिरफ्तार हुआ। उसकी सहयोगी वानिया खन्ना को 2 किलो हेरोइन के साथ पकड़ा गया और उसे 10 साल की सजा हुई। 2013 में एनआरआई अनूप सिंह काहलो 540 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया। उसकी निशानदेही पर 16 किलो और सहयोगी की कार से 10 किलो हेरोइन मिली। इसी जांच से भोला नेटवर्क सामने आया। भोला के साथ फार्मा कारोबारी जगजीत सिंह चहल और पूर्व अकाली नेता मनिंदर सिंह ‘बिट्टू’ औलख के नाम भी सामने आए। 2017 में पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर इंदरजीत सिंह को गिरफ्तार किया गया। उसके सरकारी क्वार्टर से 4 किलो हेरोइन 3 किलो स्मैक हथियार और नकदी मिली। उस पर ड्रग आरोपियों को बचाने के आरोप लगे। 2023 में एसएसपी राजजीत सिंह हुंदल को सेवा से बर्खास्त किया गया। वह ड्रग और भ्रष्टाचार मामलों में फरार हैं और घोषित अपराधी हो चुके हैं। नेता, पुलिसकर्मी भी धरे गए 2020 में पूर्व एसएसबी सदस्य और अकाली नेता अनवर मसीह गिरफ्तार हुए। उनके मकान से 188-194 किलो हेरोइन और ड्रग प्रोसेसिंग लैब का सामान मिलने का मामला सामने आया। कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा को 2021 में ईडी और 2023 में पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया। मूल मामले में 2 किलो हेरोइन गुरदेव सिंह से मिली थी। 2024 में खैरा को हाईकोर्ट से जमानत मिली। उन्होंने आरोपों से इनकार किया। 2022 में मजीठिया ने एनडीपीएस मामले में आत्मसमर्पण किया। 2025 में आय से अधिक संपत्ति के कथित 540 करोड़ रुपये के मामले में उन्हें गिरफ्तार किया गया। 2024 में पूर्व विधायक सतकार कौर गेहरी को 128 ग्राम हेरोइन के मामले में गिरफ्तार किया गया और भाजपा ने निष्कासित किया। 2025 में पुलिस कांस्टेबल अमनदीप कौर 17 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ी गईं और सेवा से बर्खास्त हुईं।  खैरा के पूर्व पीएसओ जोगा सिंह को 2015 के मामले में 2025 में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया। मार्च 2026 में तरनतारन के सरपंच परमजीत सिंह उर्फ पम्मा से 18 किलो हेरोइन बरामद होने का मामला सामने आया। इसे सीमा-पार नेटवर्क से जोड़ा गया।   

क्या पानी में समा जाएगी मुंबई? बढ़ते समुद्री स्तर पर UN की चेतावनी, 1.4 करोड़ लोग खतरे में

मुंबई क्या एक दिन ऐसा भी आ सकता है जब मुंबई के कुछ हिस्सों का पता तो वही रहे, लेकिन जमीन समुद्र के नीचे चली जाए? यह सवाल किसी साइंस फिक्शन फिल्म का नहीं, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) की एक नई रिपोर्ट का है.  UN महासचिव की रिपोर्ट में  मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर आने वाले दशकों में इन शहरों के निचले इलाकों को हमेशा के लिए पानी में डूबो (Permanent Inundation) सकता है. हालात अगर इसी दिशा में बढ़ते रहे तो लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया में 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग इस खतरे की जद में हैं।  आखिर यह रिपोर्ट है क्या और किसने जारी की? यह चेतावनी UN महासचिव की रिपोर्ट"Challenges related to sea level rise and ways and approaches to address it" में दी गई है. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा के दस्तावेज़ A/81/74 के रूप में दर्ज है. रिपोर्ट में दुनिया भर में बढ़ते समुद्री जलस्तर और उससे पैदा होने वाले खतरों का आकलन किया गया है.रिपोर्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह है जिसमें मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि यहां सबसे बड़ा खतरा आर्थिक नुकसान नहीं, बल्कि लोगों के घरों और बस्तियों पर पड़ सकता है।  क्या सचमुच डूब सकते हैं मुंबई और कोलकाता? यहां एक बात समझना जरूरी है. रिपोर्ट यह नहीं कहती कि पूरा मुंबई, पूरा कोलकाता या पूरा ढाका समुद्र में समा जाएगा. लेकिन रिपोर्ट साफ तौर पर चेतावनी देती है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर इन शहरों के निचले इलाकों में Permanent Inundation यानी ऐसा जलभराव पैदा कर सकता है जो अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बना रहे. इसी वजह से लाखों लोगों के घर प्रभावित होने की बात कही गई है.यानी कहानी केवल बाढ़ की नहीं है. चिंता इस बात की है कि अगर समुद्र लगातार आगे बढ़ता रहा तो कुछ इलाकों में लोगों के लिए रहना मुश्किल हो सकता है।  मुंबई के लिए खतरा दूसरों से ज्यादा क्यों माना जा रहा? रिपोर्ट के मुताबिक समुद्र किनारे बसे लगभग सभी बड़े शहर खतरे में हैं, लेकिन UN रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई के सामने कुछ अतिरिक्त चुनौतियां भी हैं.रिपोर्ट में जमीन धंसने (Land Subsidence), भूजल में खारे पानी के प्रवेश और समुद्री तूफानों से आने वाली ऊंची लहरों का जिक्र किया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि जब ये सभी कारक समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ जुड़ते हैं, तब खतरा और बढ़ जाता है।  आसान भाषा में समझें तो अगर समुद्र का पानी लगातार आगे बढ़ता है, तो उसका असर सिर्फ समुद्र किनारे की जमीन तक सीमित नहीं रहेगा. खारा पानी पीने के पानी के स्रोतों तक पहुंच सकता है, कई इलाकों में जलभराव की समस्या और गंभीर हो सकती है और समुद्री तूफानों के दौरान होने वाला नुकसान भी पहले से ज्यादा बढ़ सकता है।  UN रिपोर्ट यह भी कहती है कि मुंबई जैसे शहरों में बढ़ता समुद्री जलस्तर ट्रांसपोर्ट, हाउसिंग और सैनिटेशन जैसे बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है. यही वजह है कि रिपोर्ट में मुंबई को सिर्फ एक तटीय शहर नहीं, बल्कि उन बड़े महानगरों में गिना गया है जिन्हें आने वाले दशकों में सबसे ज्यादा तैयारी करने की जरूरत पड़ सकती है.मुंबई को लेकर इससे पहले भी कई रिपोर्टें चिंता जता चुकी हैं. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की क्लाइमेट एक्शन प्लान रिपोर्ट में भी समुद्र के बढ़ते खतरे और जलवायु परिवर्तन के असर का जिक्र किया गया था।  UN को अचानक इतनी चिंता क्यों हुई? दरअसल समुद्र अब पहले से ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक 2014 से 2023 के बीच वैश्विक समुद्री जलस्तर औसतन 4.7 मिलीमीटर प्रति वर्ष बढ़ रहा था. लेकिन 2024 में यह बढ़ोतरी 5.9 मिलीमीटर रही, जो रिकॉर्ड स्तर है.रिपोर्ट में कहा गया है कि मौजूदा परिस्थितियों में 2100 तक कम से कम 0.5 मीटर समुद्री जलस्तर वृद्धि लगभग तय मानी जा रही है. वहीं कुछ रिसर्च में यह बढ़ोतरी 2 मीटर तक पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।  सिर्फ मुंबई नहीं, दुनिया के सैकड़ों शहरों पर खतरा UN रिपोर्ट के अनुसार दुनिया की करीब 77 करोड़ आबादी ऐसे तटीय इलाकों में रहती है जो ऊंचे ज्वार के स्तर से 5 मीटर से भी कम ऊंचाई पर हैं. रिपोर्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश की राजधानी ढाका का विशेष रूप से जिक्र किया गया है.इसके अलावा रिपोर्ट बताती है कि समुद्री जलस्तर में बढ़ोतरी का असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहने वाला. दुनिया के कई बड़े तटीय शहरों और निचले इलाकों को भी आने वाले सालों में इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है. रिपोर्ट में न्यूयॉर्क, मियामी और चीन के ग्वांगझोउ जैसे शहरों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि वहां सबसे बड़ा खतरा अरबों डॉलर की संपत्तियों और बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान का है, जबकि दक्षिण एशिया में सबसे बड़ी चिंता लोगों के घर और आबादी का पलायन है। 

गाड़ी चलाने वालों के लिए बड़ा बदलाव, हर ट्रैफिक उल्लंघन पर कटेंगे लाइसेंस के पॉइंट; अच्छे ड्राइवरों को मिलेगा इनाम

नई दिल्ली भारत में जल्द ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) को लेकर नियम बदल सकता है. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय DL और RC के लिए एक ग्रेडेड पॉइंट्स सिस्टम लागू करने पर विचार कर रहा है. इससे बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल किया जा सकता है. केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित व्यवस्था में ड्राइवर को इनाम देने का भी प्रावधान होगा. ये इनाम उनको दिया जाएगा जो जिम्मेदारी से गाड़ी चलाते हैं और जिनका ड्राइविंग रिकॉर्ड साफ-सुथरा रहता है।  क्या है प्रस्ताव? सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के 66वें सालाना सम्मेलन के दौरान नितिन गडकरी ने कहा मंत्रालय एक ऐसा सिस्टम तैयार कर रहा है जो ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को सीधे ड्राइविंग लाइसेंस के रिकॉर्ड से जोड़ेगा।  उन्होंने आगे कहा, "मेरा मंत्रालय ड्राइविंग लाइसेंस और व्हीकल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट में ग्रेडेड पॉइंट सिस्टम शुरू करने की योजना बना रहा है." इस प्रस्तावित व्यवस्था के तहत, ट्रैफिक नियम तोड़ने पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स काटे जाएंगे. इसमें जैसे ही पेनाल्टी एक तय सीमा (थ्रेशोल्ड) तक पहुंचेगी, प्रशासन लाइसेंस धारक के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकेगा. गडकरी ने कहा, "हर नियम उल्लंघन पर ड्राइविंग लाइसेंस से पॉइंट्स कटेंगे. इसके अलावा एक तय लिमिट के बाद लाइसेंस सस्पेंड या कैंसिल भी हो जाएगा।  जिम्मेदार ड्राइवर्स को मिलेंगे रिवॉर्ड्स प्रस्तावित व्यवस्था केवल सजा या पेनाल्टी तक ही सीमित नहीं है. गडकरी ने कहा कि अच्छे ड्राइविंग रिकॉर्ड वाले वाहन चालकों को फायदे दिए जा सकते हैं. जिसमें संभवतः इंश्योरेंस कंपनियों की ओर से मिलने वाले इंसेंटिव्स भी शामिल हो सकते हैं. हालांकि, इन संभावित इंसेंटिव्स के रूपरेखा को लेकर अभी जानकारी नहीं दी गई है।  पॉइंट्स-बेस्ड सिस्टम सिर्फ एक बार चालान भरने के मुकाबले ड्राइविंग के पूरे रिकॉर्ड पर लगातार नजर रखेगा. आसान भाषा में ऐसे समझें बार-बार ओवरस्पीडिंग, रेड लाइट जंप करना या खतरनाक ड्राइविंग जैसे मामलों को अलग-अलग घटना मानने के बजाय एक साथ जोड़कर देखा जाएगा. जिससे लाइसेंस को रिव्यू किया जा सकेगा।  ड्राइवर के बिहेवियर पर भी फोकस गडकरी ने कहा कि भारत में रोड सेफ्टी को बेहतर बनाने के प्रयासों में चालकों का व्यवहार (ड्राइवर बिहेवियर) सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है. उन्होंने कहा, "ड्राइवरों का बर्ताव एक बड़ी समस्या है. अब हम इसके लिए कई कदम उठा रहे हैं।  उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि जो लोग बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ते हैं, उन्हें अपने गलत रवैये के नतीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए. उन्होंने कहा, "हम लगातार गलतियां करते हैं और फिर सीखते हैं, यह सही नहीं होगा. हमें ऐसे लोगों पर सख्ती करनी होगी जहां उनकी गलतियां ही हादसों और नतीजों के लिए जिम्मेदार होती हैं।  इस प्रस्ताव पर बड़े स्तर पर सड़क-सुरक्षा पहलों के साथ चर्चा की गई. इसमें Bharat NCAP 2.0 भी शामिल है, जिसे गडकरी ने अक्टूबर 2027 के लिए प्लान बताया है. व्हीकल-सेफ्टी असेसमेंट प्रोग्राम के अगले फेज में केवल क्रैश परफॉर्मेंस ही नहीं, बल्कि सेफ्टी से जुड़ी पूरी चेन पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है।  बाइक टैक्सी सर्विस पर भी जोर केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने ये भी घोषणा की कि प्राइवेट मोटरसाइकिल मालिकों को बाइक टैक्सी सर्विस चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए. उन्होंने राज्य सरकारों को इन सर्विसेज को कानूनी मान्यता देने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने बताया कि इस पहल से लगभग आठ करोड़ लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। 

भारत-बेल्जियम की बढ़ी डिफेंस पार्टनरशिप, अंडरवाटर रोबोट से Zorawar टैंक तक मिलेगी नई ताकत

नई दिल्ली सोचो अगर यूरोप की यह टॉप-नॉच मिलिट्री टेक्नोलॉजी भारत में आ गई, तो सीन क्या होगा? चीन-पाकिस्तान तो सोच में ही पड़ जाएंगे! बेल्जियम अपने साथ 15 रक्षा दिग्गजों की पूरी टोली लेकर आया है जो भारत को सुपर-एडवांस टेक ऑफर कर सकते हैं. अपने स्वदेशी जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला किलर 3105 टरेट हो या प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (जो Mach 2+ की सुपरसोनिक स्पीड से वार करते हैं), सब टेबल पर है. समंदर के नीचे माइन्स का सफाया करने वाले अंडरवाटर रोबोट्स से लेकर हर साल 10 करोड़ एम्युनिशन राउंड्स बनाने का मास्टरप्लान तक. बेल्जियम भारत को मेक इन इंडिया के तहत सब ऑफर करने को तैयार है. बॉस, यह टेक ट्रांसफर हुआ तो भारत डिफेंस वर्ल्ड में सिर्फ खरीदार नहीं, सीधा बॉस बनकर उभरेगा. चलिए हम आपको बेल्जियम के टॉप हथियारों के बारे में विस्‍तार में बताते हैं।  कौन से वेपन्स बेल्जियम भारत को देने जा रहा? 1. जोरावर टैंक का ‘हेड’ (John Cockerill 3105 Turret) सीन क्या है: जोरावर भारत का वो हल्का टैंक है जो चीन बॉर्डर पर लद्दाख की बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों की बजाएगा।  • पावर: बेल्जियम इस टैंक का मुख्य सिर (टरेट) बना रहा है. इसमें 105mm की तोप है जो 4 किमी दूर से ही टारगेट उड़ा देती है. भारी नहीं है, इसलिए पहाड़ों पर मक्खन की तरह चलेगा।  2. 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट (Thales Rocket) • सीन क्या है: ये वो रॉकेट है जो अपने प्रचंड और ध्रुव हेलीकॉप्टर्स में फिट होगा. • पावर: साउंड की स्पीड से भी 2 गुना तेज (Mach 2+) भागता है. 9 किमी तक की रेंज में सटीक लेजर निशाना लगाता है. 2027 तक ये पूरी तरह ‘मेड इन इंडिया’ बनने लगेगा।  3. पानी के अंदर माइन ढूंढने वाला रोबोट (Exail Mine Sweeper) • सीन क्या है: इंडियन नेवी के लिए स्पेशल अंडरवाटर रोबोटिक टूलबॉक्स. • पावर: समंदर में 300 मीटर नीचे जाकर दुश्मनों की बिछाई समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) को खुद ही ढूंढेगा और डिफ्यूज कर देगा।  4. 10 करोड़ राउंड एम्युनिशन फैक्ट्री (New Lachaussée): • सीन क्या है: गोलियों की कोई कमी नहीं होने वाली. • पावर: बेल्जियम कंपनी भारत में एक ऐसा प्लांट लगा रही है जो हर साल 10 करोड़ धांसू गोलियां/गोला-बारूद बनाएगा।    वेपन / टेक पार्टनर कंपनी क्या है खास बात? असली काम कहाँ आएगा? 3105 टैंक टरेट John Cockerill 105mm तोप, 4 किमी रेंज, लाइटवेट जोरावर टैंक (चीन सीमा पर तैनाती) 70mm लेजर रॉकेट Thales Belgium स्पीड: Mach 2+, 9 किमी रेंज प्रचंड हेलीकॉप्टर के लिए अंडरवाटर रोबोट्स Exail Robotics 300m गहराई में माइन्स ढूंढेगा इंडियन नेवी के जहाजों हेतु एम्युनिशन फैक्ट्री New Lachaussée 10 करोड़ राउंड्स/साल आर्मी के लिए गोलियों का बैकअप बॉटम लाइन 1. नो मोर इंपोर्ट: भारत अब सिर्फ बाहर से हथियार खरीदेगा नहीं बल्कि बेल्जियम के साथ मिलकर खुद बनाएगा. 2. चीन-पाक हैरान: पहाड़ों पर जोरावर टैंक और हवा में प्रचंड हेलीकॉप्टर के नए रॉकेट दुश्मनों का गेम बजाने के लिए काफी हैं. 3. फ्यूचर एक्सपोर्ट: आने वाले टाइम में भारत इन हथियारों को दूसरे देशों को बेचकर खुद मोटा पैसा छापेगा. सवाल-जवाब 1. इस भारत-बेल्जियम बातचीत के सबसे बड़ा हाइलाइट क्या है? 10 MoUs जिससे भारत में ही रॉकेट, टैंक के टरेट, रोबोट्स और गोला-बारूद की डायरेक्ट मैन्युफैक्चरिंग होने की संभावना है. 2. जोरावर टैंक में बेल्जियम क्या अलग कर रहा है? बेल्जियम जोरावर टैंक के लिए 105mm गन वाला हल्का और सुपर-अकाउंटेबल ‘टरेट’ (तोप वाला हिस्सा) दे रहा है जो पहाड़ों पर तबाही मचाएगा. 3. बेल्जियम वाले रॉकेट्स भारत में कब तक बन सकते हैं? अगर सबकुछ फाइनल हुआ था थैलेस बेल्जियम और कल्याणी ग्रुप मिलकर 2027 की शुरुआत तक भारत में 70mm लेजर गाइडेड रॉकेट बना सकते है. 4. इंडियन नेवी को इस डील से क्या फायदे मिल सकते है? नेवी को पानी के अंदर काम करने वाले हाई-टेक अंडरवाटर रोबोट्स मिल सकते हैं, जो समंदर में छिपे माइन्स और खतरों को चुटकी में खत्म कर देंगे. 5. क्या भारत में गोलियों की नई फैक्ट्री भी लग सकती है? हाँ भाई! बेल्जियम की कंपनी भारत में सालाना 10 करोड़ राउंड गोला-बारूद बनाने वाली एक विशाल फैक्ट्री सेटअप कर रही है.      

भोपाल में रहवासी इलाकों के कारोबार पर सख्ती, 576 कॉलोनियां कार्रवाई के दायरे में

भोपाल भोपाल शहर में प्रशासनिक अधिकारियों व दूसरी एजेंसियों में रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर कार्रवाई का मामला केवल नगर निगम पर छोड़ दिया है। जिन घरों में दुकान व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स चल रहे है, उनमें बड़ी हिस्सेदारी नजूल, बीडीए व हाउसिंग बोर्ड की भी है। अरेरा कॉलोनी से एमपी नगर, अशोका गार्डन से बैरागढ़ तक नजूल पट्टों की जमीन है। जिला प्रशासन के रेकॉर्ड के अनुसार, शहर में 576 कॉलोनियां नजूल जमीनों या गैर अनुमोदित ले आउट्स पर बसी है। बीडीए हाउसिंग के 50 प्रोजेक्ट है। यहां आवासीय में बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां व निर्माण है। इस स्थिति में कलेक्टर समेत बीडीए-हाउसिंग बोर्ड के अफसरों को मैदान में उतारने की जरूरत महसूस की जा रही है। सरकारी भूमि पर बनी कॉलोनियां पुराने भोपाल के शाहजहांनाबाद, बैरागढ़, सुल्तानिया रोड, लखेरापुरा, अशोका गार्डन, है, जबकि नया भोपाल अरेरा, टीटी नगर, एमपी नगर के बड़े हिस्से नजूल लीज-लैंड पर बसे है। ईदगाह हिल्स में 600 एकड़ जमीन मर्जर में है और रिकॉर्ड में सरकारी है। हाउसिंग बोर्ड-बीडीए की स्थिति हाउसिंग बोर्ड ने भोपाल में 25 से अधिक बड़ी आवासीय कॉलोनियां व टाउनशिप विकसित की है। इनमें अयोध्या नगर क्षेत्र सबसे बड़ा आवासीय परिसर है। बीडीए की 13 से योजनाएं निगम को हस्तांतरित हो हो चुकी है, पर 7 की जिम्मेदारी उसी की है। निगम सीमा के तहत निगम कार्रवाई कर रहा है। नजूल, हाउसिंग बोर्ड, बीडीए के प्रोजेक्ट्स व क्षेत्र को लेकर समीक्षा कर ली जाएगी। कोर्ट के आदेश का पूरा पालन किया जाएगा।- कर्मवीर शर्मा, संभागायुक्त घर चार इमली में, अरेरा में बनाया व्यावसायिक भवन जब से नगर निगम द्वारा सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई है, मकान में कारोबार को लेकर पोल भी खुल रहे है। कई मामले ऐसे भी सामने आ रहे है, जिनमें भवन मालिक का असली पता किसी और इलाके का है और उसने किसी और रहवासी क्षेत्र में कारोबार के लिए भवन खड़ा किया है। ऐसा ही एक मामला अरेरा ई4/115 प्लॉट का है। इस पर हिंमाश चौरसिया और शुभम चौरसिया के नाम पर अप्रेल 2024 में मैं आवासीय निर्माण की अनुमति दी गई थी। लेकिन यहां कारोबारी भवन बना लिया गया है। अनुमति 0.75 एफएआर के आधार पर दी गई थी। यानी क्षेत्रफल से 75 फीसदी ही दो मंजिला निर्माण की मंजूरी है। लेकिन प्लॉट मालिक ने पूरा व्यावसायिक निर्माण कर लिया। ट्रैफिक पर पड़ेगा असर इमारत वंदेमातरम चौराहा से आगे 1100 क्वार्टर हनुमान मंदिर के बीच चार लेन रोड पर तैयार हो रही है। यहां अरेरा से लेकर कोलार, शाहपुरा, चुनाभट्टी और आसपास के ट्रैफिक गुजरता है। ऐसे में पीक ऑवर्स में चौराहे पर जाम की स्थिति बनेगी जिससे चौराहा भी प्रभावित होगा।

देवेंद्र फडणवीस के दिल्ली जाने की अटकलों पर BJP मंत्री का बड़ा बयान, कहा- अभी महाराष्ट्र में ही जरूरत

मुंबई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर पिछले कई दिनों से कयास लगाए जा रहे हैं कि वे अब केंद्र की राजनीति में आ सकते हैं। हालांकि इसको लेकर ना तो फडणवीस और ना ही भाजपा की शीर्ष लीडरशिप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि हुई है। इस बीच महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री और BJP नेता पंकजा मुंडे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में शामिल होने की अटकलों पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि फडणवीस इस समय महाराष्ट्र में जहां हैं, वहीं उनकी जरूरत है। पंकजा मुंडे ने कोल्हापुर एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि ऐसा फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या पीएम मोदी की मंजूरी के बिना नहीं हो सकता। ‘फडणवीस प्रभावशाली और मजबूत नेता’  रिपोर्ट के मुताबिक, पंकजा मुंडे ने फडणवीस की तारीफ करते हुए कहा कि वह एक प्रभावशाली और अकादमिक रूप से मजबूत नेता हैं। उन्होंने कहा कि वह पिछले करीब ढाई दशक से फडणवीस के साथ काम कर रही हैं। उन्होंने कहा, “मैं सिर्फ प्रार्थना कर सकती हूं कि वह वर्तमान पद से आगे बढ़ें। हालांकि, अभी उन्हें वहीं जरूरत है, जहां वह हैं।” पंकजा का यह बयान शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत के उस हालिया दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी फडणवीस को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करना चाहते हैं। क्या दावा कर बैठे संजय राउत? संजय राउत ने दावा किया था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की राजनीति में एक बड़े बदलाव का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जिसके तहत महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को राष्ट्रीय राजधानी बुलाकर उन्हें उप-प्रधानमंत्री का पद सौंपने की कोशिश की जा रही है। राउत ने मीडिया कर्मियों से बात करते हुए दावा किया कि 'भगवा परिवार' दिल्ली के बाहर के किसी प्रमुख नेता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर स्थापित करने की तैयारी कर रहा है और इस अहम पद के लिए फडणवीस सबसे आगे चल रहे हैं। राउत के मुताबिक आरएसएस और पार्टी से जुड़ी अन्य अहम शख्सियतें फडणवीस को दिल्ली लाने की योजना बना रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर सीधा हमला करते हुए संजय राउत ने दावा किया कि इतिहास गवाह है कि कोई भी पूर्व गृह मंत्री कभी प्रधानमंत्री नहीं बन पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही अमित शाह शीर्ष पद पाने की बड़ी महत्वाकांक्षा रखते हों, लेकिन उन्हें पार्टी के भीतर कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। खबरों के अनुसार सत्ताधारी पार्टी के कई वरिष्ठ मंत्रियों ने कैबिनेट में संभावित फेरबदल को लेकर नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया है। मनोज जरांगे की मांगों पर भी बोलीं पंकजा पंकजा मुंडे ने मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे के जारी अनशन पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों को पूरा करने के लिए प्रयास कर रही है। जरांगे की मांग है कि जिन मराठाओं के कुनबी रिकॉर्ड मिले हैं, उन्हें जाति प्रमाणपत्र जारी किए जाएं। इसके अलावा, वह कोल्हापुर, सतारा और मुंबई गजेटियर में मौजूद प्रावधानों को लागू कर मराठाओं को कुनबी के रूप में मान्यता देने की मांग कर रहे हैं। पंकजा मुंडे ने बताया कि सरकार ने जरांगे से बातचीत के लिए राधाकृष्ण विखे पाटील की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक समिति गठित की है। उन्होंने कहा कि सरकार संवैधानिक दायरे में रहते हुए उनकी मांगों के साथ न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है। बाद में पंकजा मुंडे ने अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की। इसमें पंचगंगा नदी में प्रदूषण से निपटने के उपायों पर चर्चा की गई।