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CM योगी ने शिक्षकों को दी बधाई, कहा- आधुनिक शिक्षा और नवाचार से नई पीढ़ी को दे रहे नई दिशा

आधुनिक शिक्षा और नवाचार से नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे शिक्षक : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का प्रदेश के शिक्षकों के नाम खास संदेश मुख्यमंत्री ने सेल्फी वीडियो साझा कर शिक्षकों को दी शुभकामनाएं   काशी, सारनाथ और नैमिषारण्य तक यूपी की प्राचीन ज्ञान परंपरा का किया उल्लेख लखनऊ,   शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सेल्फी वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को याद किया और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की विशिष्ट ज्ञान परंपरा को आधुनिक स्वरूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले सभी गुरुजनों और शिक्षकों को वह शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई देते हैं। उत्तर प्रदेश प्राचीन काल से ज्ञान, साधना और संस्कारों की पावन भूमि रहा है। काशी ने विश्व को ज्ञान का प्रकाश दिया, जबकि सारनाथ में भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था। अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज भी सनातन ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शुकतीर्थ और नैमिषारण्य की ज्ञान परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार वर्ष पूर्व शुकतीर्थ में महर्षि शुकदेव जी ने श्रीमद्भागवत का प्रथम वाचन किया था। वहीं नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों की साधना ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। इसी भूमि से आयुर्वेद, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय ज्ञान-विज्ञान की महान परंपराएं विकसित हुईं। सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश के शिक्षक इसी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और नवाचार से जोड़कर नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति मंगलमय शुभकामनाएं व्यक्त कीं।

गोरक्षपीठ में सीएम योगी ने मनाया गोपाल का प्राकट्योत्सव, लड्डू गोपाल को झुलाया पालने में

गोरक्षपीठ में सीएम योगी ने मनाया गोपाल का प्राकट्योत्सव मुख्यमंत्री ने गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में विधि विधान से की पूजा-अर्चना, प्राकट्य के बाद प्रभु श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल स्वरूप को पालने में झुलाया महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में बाल गोपाल को दुलारकर भजनों का भी आनंद उठाया गोरक्षपीठाधीश्वर ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मथुरा से लेकर गोरखपुर तक, योगेश्वर की साधना में रमे रहे गोरक्षपीठाधीश्वर गोरखपुर भक्ति, प्रेम व धर्म के शाश्वत आलोक, गोपाल, जगतपाल, पूर्ण परब्रह्म, भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्योत्सव का पवित्र पर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी शिवावतार महायोगी गोरखनाथ की साधनास्थली गोरखनाथ मंदिर में पारंपरिक श्रद्धा, भव्यता एवं हर्षोल्लास से मनाया गया। गोरक्षपीठ के इस पारंपरिक कार्यक्रम का नेतृत्व करने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार रात लखनऊ से गोरखपुर पहुंचे। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार सुबह से मध्य रात्रि तक, मथुरा से लेकर लखनऊ और गोरखपुर तक, समस्त योगियों के परमेश्वर माने जाने वाले योगेश्वर श्रीकृष्ण की साधना में रमे रहे। सुबह उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा स्थित जन्मभूमि मंदिर में कान्हा की विधि विधान से आराधना कर प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन की प्रार्थना की। शाम को वह लखनऊ पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्माष्टमी समारोह में सम्मिलित हुए और फिर रात में गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर उन्होंने पारंपरिक श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में प्रभु के प्राकट्य अनुष्ठान को पूर्ण कराया।  गोरखनाथ मंदिर पहुंचने पर मुख्यमंत्री ने सबसे पहले शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन किया। इसके बाद उन्होंने अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर मत्था टेक पुष्पार्चन किया, उनका आशीर्वाद लिया। गोरखनाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन उपलक्ष्य में महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सभागार में भजन संध्या का आयोजन किया गया था। मुख्यमंत्री यहां पहुंचे और सुमधुर भजनों का आनंद उठाते हुए राधा-कृष्ण बने बच्चों को दुलारकर उन्हें उपहार देते रहे।  गोरक्षपीठाधीश्वर ने मध्य रात्रि गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर विधि विधान से विशिष्ट पूजा अर्चना की। रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य के बाद 'नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की' और ‘श्रीकृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेव’ की मंगल धुन, सोहर गीत और घंटों-घड़ियाल की ध्वनि के बीच गोरक्षपीठाधीश्वर उन्हें गोद में लेकर गर्भगृह से बाहर आए। सीएम योगी ने, प्रभु श्रीहरि के बाल स्वरूप ‘लड्डू गोपाल’ को फूलों से सजे पालने में बैठाकर श्रद्धाभाव से उन्हें झुलाया और आरती उतारी। प्रभु श्रीकृष्ण का प्राकट्य अनुष्ठान पूर्ण होने के उपरांत मंदिर की तरफ से श्रद्धालुओं को फलाहार और प्रसाद वितरित किया गया।  गोरखनाथ मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव परंपरागत रूप से धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में भजन संध्या कार्यक्रम सुपरिचित लोक गायक डॉ. राकेश श्रीवास्तव के संयोजन में शाम से ही जारी था। दूसरी तरफ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का मुख्य धार्मिक अनुष्ठान मंदिर के गर्भगृह में रात करीब साढ़े ग्यारह बजे से प्रारंभ हुआ और ठीक मध्य रात्रि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोपरांत मंगल गीत व प्रसाद वितरण के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, कई साधु-संत और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। मध्य रात्रि तक मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से खचाखच भरा रहा।  राधा-कृष्ण बने बच्चों को मिला सीएम योगी का स्नेह व उपहार श्रीकृष्ण जन्मोत्सव समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में भजन कीर्तन के मध्य श्रीकृष्ण रूप सज्जा प्रतियोगिता में राधा व कृष्ण बने बच्चों को खूब स्नेह दिया। उनसे खूब हंसी ठिठोली भी की। उन्हें खिलौने व चॉकलेट उपहार में दिए। इस दौरान कई मासूमों को अपनी गोद में लेकर वह काफी देर तक खिलाते रहे, प्यार-दुलार करते रहे। कुछ बच्चों ने सीएम योगी को दोहे और श्लोक सुनाए तो कुछ ने उनके साथ सेल्फी ली। मुख्यमंत्री सभी बच्चों का अनुरोध पूरा करते रहे।   बालरूप सज्जा नयनाभिराम भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर गोरखनाथ मंदिर के ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित श्रीकृष्ण बालरूप सज्जा प्रतियोगिता में सजधज कर आए बच्चों ने लोगों का मन मोह लिया। प्रतियोगिता में कोई श्रीकृष्ण के रूप में था तो कोई राधा। इन बच्चों के वेश और रूप से सभागार एकबारगी गोकुल का भान करा रहा था। दो वर्गों में हुई इस प्रतियोगिता में शामिल सभी बच्चे कार्यक्रम का आकर्षण बढ़ा रहे थे। बाल रूप सज्जा प्रतियोगिता के कान्हा वर्ग में प्रथम पुरस्कार शर्विल पांडेय को, द्वितीय पुरस्कार सौम्या प्रजापति और तृतीय पुरस्कार हिमांशी श्रीवास्तव को दिया गया। गोपाल वर्ग में प्रथम पुरस्कार सार्थक, द्वितीय राजवीर और तृतीय पुरस्कार रूद्र को मिला। श्रीकृष्ण रूप सज्जा में विजेताओं को मुख्यमंत्री ने प्रशस्ति पत्र और उपहार देकर पुरस्कृत किया। निर्णायक की भूमिका सारिका राय, मनीषा सिंह और हृदया त्रिपाठी ने निभाई जबकि संचालन शिवेंद्र पांडेय ने किया। भजनों में गूंजा जय कान्हा-श्याम श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में, डॉ. राकेश श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित भजन संध्या में कान्हा-श्याम की आराधना की गूंज रही। शुभारंभ पुनीत श्रीवास्तव ने एक सुमधुर भक्ति गीत से किया। इसके पश्चात हृदया त्रिपाठी व अनीता सिंह ने सोहर और लक्ष्मी गुप्ता ने बधाई गीत की कर्णप्रिय प्रस्तुति दी। गायक उमेश मिश्रा और एकता शुक्ला ने कृष्ण भजन सुनाकर सबको भाव विभोर कर दिया। डॉ. राकेश श्रीवास्तव ने पारंपरिक बधाई गीत एवं सोहर के गायन से वातावरण को उल्लासमय बना दिया। वाद्य यंत्रों पर श्यामसुंदर लाल श्रीवास्तव हंसलोना, दीपक, आभास पाठक एवं सुधाकर सिन्हा ने संगत की। गर्भगृह में हनुमत संगीत आश्रम ने सजाई भजन संध्या श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के गर्भगृह में हनुमत संगीत आश्रम एवं सेवा संस्थान की तरफ से रात आठ बजे से बारह बजे तक भजनों की प्रस्तुति की गई। जन्मोत्सव से पूर्व, गर्भगृह में भजनों का श्रवण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी किया। कार्यक्रम की शुरुआत गायक और संगीतकार अभिषेक पांडेय बिट्टू के भजनों से हुई। तत्पश्चात सिद्धि सिंह, निशांत शुक्ला, श्रेयांश तेजस्वी, ओम सिंह, हृदयांश श्रीवास्तव, अपूर्व नमन, आकांक्षा त्रिपाठी, प्रीति अग्रहरि और अलका जायसवाल ने अपने भजनों की प्रस्तुति से लोगों को खूब झुमाया। कार्यक्रम का संयोजन धर्मेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं संगीत निर्देशन अभिषेक पांडेय बिट्टू का था। वाद्य यंत्र पर … Read more

शिक्षक दिवस पर PM मोदी की गुरुओं से अपील, ‘बच्चों का बचपन बचाइए, उनकी प्रतिभा पहचानिए’

नईदिल्ली  क्लास में बैठा बच्चा सिर्फ किताबों के पन्ने नहीं पढ़ रहा होता. उसके आसपास की दुनिया भी उसे हर दिन कुछ न कुछ सिखा रही होती है. कभी मोबाइल की स्क्रीन उसे अपनी तरफ खींचती है. कभी दोस्तों का असर पड़ता है. कभी पढ़ाई का दबाव परेशान करता है. ऐसे में बच्चे के साथ सबसे ज्यादा वक्त बिताने वाले लोगों में शिक्षक भी शामिल हैं. शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी भूमिका की याद शिक्षकों को दिलाई. उन्होंने कहा कि बच्चों का बचपन बचाना भी शिक्षकों की बड़ी जिम्मेदारी है. प्रधानमंत्री ने नेशनल टीचर्स अवॉर्ड पाने वाले 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने सिर्फ पढ़ाई और परीक्षा के नंबरों की बात नहीं की. उन्होंने बच्चों के व्यवहार, उनकी आदतों और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी नजर रखने की जरूरत बताई।  पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चा पढ़ाई में कैसा कर रहा है, यह जरूरी है. लेकिन उससे भी जरूरी यह समझना है कि वह सामान्य जिंदगी में कैसा व्यवहार कर रहा है. उसके स्वभाव में अचानक कोई बदलाव तो नहीं आया. वह दोस्तों से दूर तो नहीं हो रहा. वह देर रात तक मोबाइल तो नहीं चला रहा. कहीं नशे जैसी किसी बुरी आदत की तरफ तो नहीं बढ़ रहा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि ऐसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बच्चे के व्यवहार में बदलाव दिखे तो उसकी वजह समझने की कोशिश करनी चाहिए. जरूरत पड़े तो माता-पिता से बात करनी चाहिए और बच्चे को सही रास्ते पर लाने में मदद करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि संयुक्त परिवार कम होने के दौर में बच्चों की जिंदगी में शिक्षक की भूमिका और ज्यादा बढ़ गई है।  स्क्रीन टाइम पर पीएम मोदी की चिंता प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को सिर्फ सिलेबस पूरा कराने तक शिक्षक की भूमिका सीमित नहीं होनी चाहिए. बच्चा सवाल पूछता है तो उसकी जिज्ञासा को दबाने के बजाय उसे सही दिशा देनी चाहिए. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा ही उनके सीखने की सबसे बड़ी ताकत हो सकती है. अगर बच्चा कुछ नया जानना चाहता है, अलग सवाल पूछता है या चीजों को अपने तरीके से समझना चाहता है तो उसे रोकने के बजाय प्रोत्साहित किया जाना चाहिए. पीएम मोदी ने यह भी जोर दिया कि पढ़ाई सिर्फ किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ना जरूरी है।  स्क्रीन टाइम भी प्रधानमंत्री की चिंता का एक बड़ा मुद्दा रहा. उन्होंने शिक्षकों से कहा कि वे माता-पिता से बातचीत करें और यह समझें कि बच्चा मोबाइल या दूसरी स्क्रीन पर कितना समय बिता रहा है. खास तौर पर यह देखना जरूरी है कि बच्चे देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल तो नहीं कर रहे. ज्यादा स्क्रीन टाइम से बच्चों को निकालने के लिए उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और रचनात्मक कामों से जोड़ने की सलाह दी गई. पीएम मोदी ने शिक्षकों से कहा कि बच्चों को सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त रखने के बजाय उनकी पूरी दिनचर्या और विकास पर ध्यान देना जरूरी है।  नशे की लत से बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री ने नशे की लत को लेकर भी शिक्षकों को सतर्क रहने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि अगर किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव नजर आता है तो शिक्षक उसे सिर्फ अनुशासन की समस्या मानकर छोड़ न दें. उसके पीछे की वजह जानने की कोशिश होनी चाहिए. शिक्षक बच्चे और उसके परिवार के बीच संवाद का पुल बन सकते हैं।  स्क्रीन टाइम पर भी रखें नजर मोबाइल और स्क्रीन आज बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं. ऐसे में पीएम मोदी ने शिक्षकों से माता-पिता के साथ मिलकर इस पर नजर रखने को कहा. बच्चों को मोबाइल से दूर करने के लिए सिर्फ रोक-टोक पर्याप्त नहीं है. उन्हें खेल, शारीरिक गतिविधियों और क्रिएटिव कामों के विकल्प देने होंगे. इससे उनका समय भी बेहतर तरीके से इस्तेमाल होगा और उनका विकास भी होगा।  क्लासरूम से बाहर भी हो बच्चों की पढ़ाई पीएम मोदी ने कहा कि पढ़ाई सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. बच्चों को वास्तविक दुनिया दिखानी चाहिए. उन्हें कामकाज की प्रक्रिया समझानी चाहिए. इससे किताबों में पढ़ी चीजों को जिंदगी से जोड़ना आसान होगा. प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों में ‘श्रम की गरिमा’ जैसे संस्कार विकसित करने पर भी जोर दिया।  82 शिक्षकों को मिला नेशनल टीचर्स अवॉर्ड इस साल 82 शिक्षकों और एजुकेटर्स को नेशनल टीचर्स अवॉर्ड के लिए चुना गया है. इनमें 48 स्कूल शिक्षक, 21 उच्च शिक्षा संस्थानों और पॉलिटेक्निक के शिक्षक और 13 स्किल ट्रेनर शामिल हैं. अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों ने प्रधानमंत्री के साथ अपने अनुभव भी साझा किए. उन्होंने क्लासरूम में किए गए नए और रचनात्मक प्रयोगों के बारे में बताया।  कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का संदेश सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं, बल्कि स्कूल, परिवार और समाज तीनों के लिए था. बच्चे के विकास का मतलब सिर्फ अच्छे नंबर नहीं हैं. उसका व्यवहार, उसकी आदतें, उसकी जिज्ञासा और उसका आत्मविश्वास भी उतना ही जरूरी है. ऐसे समय में शिक्षक की भूमिका और बड़ी हो जाती है. क्योंकि कई बार बच्चा अपनी परेशानी घर पर नहीं बता पाता, लेकिन उसके व्यवहार में बदलाव क्लास में सबसे पहले नजर आ सकता है. यही वजह है कि पीएम मोदी ने शिक्षकों से बच्चों का बचपन बचाने और उन्हें सही दिशा देने को अपनी जिम्मेदारी का अहम हिस्सा मानने की अपील की।   

पंजाब चुनाव के लिए AAP का मेगा प्लान, बादल-कैप्टन के गढ़ में सेंधमारी की तैयारी

बठिंडा  पंजाब की राजनीति में कभी बेहद मजबूत रहे दो सियासी घरानों बादल परिवार और कैप्टन अमरिंदर सिंह- के प्रभाव वाले इलाकों में मुख्यमंत्री भगवंत मान की लगातार सक्रियता ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। मुख्यमंत्री मान दो दिनों में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के पैतृक गांव घुद्दा और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के पैतृक गांव महराज में ‘लोक मिलनी’ कर रहे हैं। इसे महज सरकारी कार्यक्रम के बजाय 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि दोनों गांव पंजाब की उस पारंपरिक सियासत के प्रतीक माने जाते हैं, जिसने लंबे समय तक राज्य की राजनीति की दिशा तय की। प्रकाश सिंह बादल का नाम शिरोमणि अकाली दल की सियासत और मालवा क्षेत्र में पार्टी के प्रभाव से जुड़ा रहा है, जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस की पंजाब राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री मान का दोनों दिग्गज़ों के पैतृक गांवों में पहुंचना राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। घुद्दा में पहुंचकर अकाली राजनीति को संदेश प्रकाश सिंह बादल का पैतृक गांव घुद्दा बठिंडा जिले की सियासत में खास महत्व रखता है। बादल परिवार का मालवा क्षेत्र में लंबे समय तक मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में मुख्यमंत्री की ‘लोक मिलनी’ के लिए घुद्दा का चयन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आप के लिए यह कार्यक्रम अकाली दल के पुराने गढ़ में अपनी मौजूदगी और स्वीकार्यता दिखाने का मौका भी है। मुख्यमंत्री यहां लोगों की समस्याएं सुनने के साथ-साथ सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए यह संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं कि पंजाब की राजनीति अब पुराने सियासी परिवारों के इर्द-गिर्द नहीं, बल्कि आम लोगों के मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित है। महराज में कैप्टन के प्रभाव को चुनौती इसके अगले दिन मुख्यमंत्री का कैप्टन अमरिंदर सिंह के पैतृक गांव महराज पहुंचना कांग्रेस के पुराने प्रभाव क्षेत्र में आप की राजनीतिक पैठ का संकेत माना जा रहा है। कैप्टन लंबे समय तक पंजाब कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा रहे हैं और मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। ऐसे में उनके पैतृक गांव में ‘लोक मिलनी’ को कांग्रेस के पुराने सियासी आधार को चुनौती देने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है। राजनीतिक जानकारों की नजर में मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल विकास कार्यों और जनसमस्याओं तक सीमित नहीं है। आप लगातार मालवा क्षेत्र को अपने मजबूत आधार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है। घुद्दा और महराज जैसे प्रतीकात्मक स्थानों पर पहुंचकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह पुराने राजनीतिक गढ़ों में भी अपनी पकड़ मजबूत कर चुकी है। 2027 की तैयारी का ट्रेलर पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का गांव-गांव पहुंचकर सीधे लोगों से संवाद करना आप की चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। ‘लोक मिलनी’ के जरिए सरकार एक तरफ प्रशासन को जनता के दरवाजे तक ले जाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक तौर पर उन इलाकों में अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी है, जहां कभी बादल और कैप्टन जैसे दिग्गज़ों का दबदबा रहा। अब सवाल यह है कि घुद्दा और महराज में मुख्यमंत्री की दस्तक क्या सिर्फ जनसुनवाई है या फिर 2027 के चुनावी मुकाबले का राजनीतिक संदेश। दो दिग्गज़ों के पैतृक गांवों का लगातार चयन इस बात के संकेत जरूर दे रहा है कि आप अब पंजाब की पारंपरिक सियासी विरासत को सीधे चुनौती देने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

नेपाल त्रासदी में नहीं थम रही मौतों की संख्या, अब तक 1,344 लोगों की मौत

काठमांडू  नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. अब तक 1,344लोगों की जान जा चुकी है और 5053 लोग लापता हैं. 32963 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और 7570 घरों को नुकसान पहुंचा है। नेपाल पुलिस के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ में अब तक 1,344 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले हफ्ते आई फ्लैश फ्लड ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई गांवों और कस्बों को बुरी तरह प्रभावित किया. कई इलाकों में अब भी मलबे और कीचड़ के बीच लोगों की तलाश जारी है।  मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी NDRF तबाही के बीच सबसे बड़ी चुनौती उन लोगों को ढूंढना है, जो अभी भी मलबे और कीचड़ के नीचे फंसे हो सकते हैं. इसी को देखते हुए भारत ने 11 सदस्यीय  NDRF तकनीकी टीम नेपाल भेजी है. यह टीम स्थानीय बचाव दलों के साथ मिलकर उन जगहों पर तलाशी अभियान चला रही है, जहां लोगों के दबे होने की आशंका है।  नेपाल के दार्चुला में भूस्खलन से नदी का रास्ता बंद, निचले इलाकों में अलर्ट नेपाल के दार्चुला जिले में शुक्रवार को भारी भूस्खलन के बाद चौलानी नदी का प्रवाह बाधित हो गया। नदी का रास्ता बंद होने से आसपास के क्षेत्रों में खतरा बढ़ गया है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निचले इलाकों में अलर्ट जारी किया है। लोगों को नदी के आसपास और निचले क्षेत्रों में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। चिलिमे सुरंग में भारतीय टीम क्या कर रही है? भारतीय सुरंग बचाव दल ने शुक्रवार को चिलिमे सुरंग के अंदर अभियान चलाया। टीम का प्रयास सुरंग के पानी और मलबे से प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने और वहां फंसे लोगों की तलाश करने का है। भारी उपकरणों को सुरंग तक पहुंचाने और बचाव अभियान को गति देने के लिए एक अस्थायी ट्रैक भी तैयार किया जा रहा है। टीम ने सुरंग के भीतर सुरक्षा रस्सियां लगाई हैं, जबकि पानी और मलबे से बाधित हिस्सों में फ्लोट और पंप भी तैनात किए जा रहे हैं। रसुवा जिले के स्याब्रुबेसी गांव के पास स्थित चिलिमे जलविद्युत परियोजना का इलाका बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ था। सुरंग के कई हिस्से पानी और मलबे से बाधित हो गए थे, जिसके कारण वहां पहुंचना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था। अब भारतीय टीम सुरंग के अंदर आगे बढ़कर प्रभावित हिस्सों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है, ताकि खोज और बचाव अभियान को और प्रभावी बनाया जा सके।  चिलिमे सुरंग में फंसे लोगों के लिए बचाव अभियान, भारतीय टीम जुटी; मृतकों का आंकड़ा 1344 पहुंचा नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारतीय बचाव दल नेपाली अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित इलाकों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटा है। इसी क्रम में विशेष भारतीय सुरंग बचाव टीम ने चिलिमे सुरंग में अभियान तेज कर दिया है। वहीं शुक्रवार को नेपाल सरकार ने एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। इससे सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान पहुंचा है। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। वहीं इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1344 हो गई। प्रभावित इलाकों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी है।   कहां से कितने लोगों की हो चुकी है मौत कुल मौत – 1,344     रसुवा: 140     नुवाकोट: 184     धादिंग: 67     गोरखा: 73     तनहुं: 38     नवलपरासी पूर्व: 221     नवलपरासी पश्चिम: 212     चितवन: 359     (विभिन्न मानव अंगों सहित)     शिनाख्त कर सौंपे गए शवों की संख्या: 96     घायलों की संख्या: 5,663     लापता लोगों की संख्या: 5,053     बचाए गए लोगों की संख्या: 13,095 7570 घरों को हुआ नुकसान     निजी घर: कुल 7570     सरकारी संरचना: कुल 48 (35 पूर्ण क्षति, 13 आंशिक क्षति)     विद्यालय: कुल 18 (11 पूर्ण क्षति, 7 आंशिक क्षति)     स्वास्थ्य संस्था: कुल 7 (4 पूर्ण क्षति, 3 आंशिक क्षति)     सड़क: 55 किलोमीटर पूर्ण क्षति पुल: कुल मोटरेबल 37 (33 पूर्ण क्षति) और 68 झोलुंगे (झूला) पुल 26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़ नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन से अचानक आई बाढ़ ने उत्तर और मध्य नेपाल के कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई और व्यापक स्तर पर नुकसान हुआ। 

सहारनपुर में कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर कार्रवाई, सांसद इकरा हसन को किया गया हाउस अरेस्ट

 सहारनपुर/शामली सहारनपुर के कलेक्ट्रट परिसर में मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन को लेकर सपा सांसद इकरा हसन का हाउस अरेस्ट कर लिया गया है। बता दें कि शनिवार सुबह कलेक्ट्रट परिसर में मौजूद मस्जिद को प्रशासन ने ढहा दिया है। इकरा हसन ने लगाया हाउस अरेस्ट का आरोप मस्जिद प्रकरण को लेकर कैराना सांसद इकरा हसन ने आरोप लगाया कि उनके आवास पर रात में भारी पुलिस बल तैनात कर उन्हें बाहर निकलने से रोक दिया गया। इकरा हसन ने इसे हाउस अरेस्ट बताते हुए सवाल उठाया कि क्या जनता के मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अब अपराध हो गया है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि को रोककर जनता की आवाज दबाई नहीं जा सकती। यूपी के सहारनपुर में शनिवार सुबह डीएम परिसर में बनी मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध पाया था. मस्जिद कमेटी की पहली अपील भी खारिज हो चुकी थी. कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ की तैनाती रही. वहीं, इस मामले को लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश कर रहीं कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया।  सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर पिछले कुछ समय से विवाद चल रहा था. शनिवार सुबह प्रशासन ने इस निर्माण को गिराने की कार्रवाई शुरू कर दी. मौके पर बुलडोजर लगाया गया और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।  प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में सुनवाई के दौरान मस्जिद के निर्माण को अवैध पाया गया था. अधिकारियों के मुताबिक, यह निर्माण सरकारी जमीन पर था. इस आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने पहली अपील की थी, लेकिन वहां भी अपील खारिज कर दी गई और सिटी मजिस्ट्रेट के मूल आदेश को बरकरार रखा गया।  कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की अपील की थी खारिज डिस्ट्रिक्ट जज की कोर्ट ने 4 सितंबर को सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने वाली मुस्लिम पक्ष की अपील खारिज कर दी थी। जिला जज की कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पेश किए गए सबूतों की जांच करने के बाद मस्जिद को अवैध घोषित करने वाले सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखा। सिटी मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मस्जिद गिराने का दिया था आदेश सिटी मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने 17 जुलाई को मस्जिद को गिराने का आदेश दिया था और सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे और उसके गलत इस्तेमाल के लिए वहां मौजूद लोगों पर लगभग 6.41 करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया था। रात से ही पुलिस की तैनाती, अफवाहों पर नजर कार्रवाई से पहले ही सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. प्रशासन ने बताया कि त्योहारों को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी, आरआरएफ की तैनाती की गई है. मिश्रित आबादी वाले इलाकों में लगातार फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च किया जा रहा है।  सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं. उनके मुताबिक नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।  डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों को भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति इस मामले को लेकर अफवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. ध्वस्तीकरण के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा का खास इंतजाम किया गया. बुलडोजर से मस्जिद के निर्माण को गिराने की कार्रवाई जारी रही और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे।  सहारनपुर जाने से पहले इकरा हसन हाउस अरेस्ट उधर, इस कार्रवाई के बीच कैराना से सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया. वह सहारनपुर जाने की तैयारी कर रही थीं. इसी दौरान उनके आवास पर बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया।  हाउस अरेस्ट के बाद इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं और इलाके की जनता की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं. उनका आरोप है कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने के लिए घर पर ही नजरबंद कर दिया गया।  सांसद ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपनी जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना भी अब अपराध हो गया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं और उन्हें रोककर उस आवाज को दबाया नहीं जा सकता. फिलहाल सहारनपुर में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है. कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के साथ-साथ इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है।   

MP में बारिश का जोर, ग्वालियर-गुना-शिवपुरी में आसमानी आफत; 19 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून का असर अब उत्तर और मध्य हिस्से में ज्यादा दिखाई देगा। पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद सक्रिय हुआ मौसमी तंत्र अब ग्वालियर-चंबल की ओर बढ़ गया है। मौसम विभाग ने शनिवार को 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। श्योपुर और शिवपुरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, सागर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर में भारी बारिश हो सकती है। ग्वालियर-चंबल में अगले दो दिन ज्यादा असर मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक मौसमी तंत्र का असर 5 और 6 सितंबर को ग्वालियर-चंबल, सागर और उज्जैन संभाग के कई जिलों में रहेगा। इसके बाद 7 और 8 सितंबर को भी कुछ इलाकों में तेज बारिश का दौर जारी रह सकता है। हालांकि इंदौर में इस दौरान तेज बारिश की संभावना कम है। ग्वालियर में लगातार बारिश से नदी-नाले उफान पर ग्वालियर में बीते 24 घंटे से हो रही रुक रुक कर बारिश के बीच मौसम विभाग ने ग्वालियर अंचल में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. जिसे देखते हुए शुक्रवार देर शाम ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान के निर्देश पर जिला पंचायत सीईओ ऑफिस से पांच सितम्बर को जिले के सभी स्कूल में कक्षा आठवीं तक के विद्यार्थियों केनलिये अवकाश घोषित करने का आदेश जारी किया गया है।  बारिश के कारण 7 जिलों में स्कूल बंद लगातार बारिश और कई जगह बने बाढ़ जैसे हालात को देखते हुए प्रशासन ने विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए 5 सितंबर को कई जिलों में स्कूल बंद रखने का फैसला लिया है।मुरैना में सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद हैं। श्योपुर में नर्सरी से 12वीं तक के स्कूल बंद किए गए हैं। शिवपुरी में सभी शैक्षणिक संस्थान और आंगनवाड़ी केंद्र बंद हैं। गुना में नर्सरी से 12वीं तक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद किए गए हैं। भिंड में नर्सरी से 8वीं तक छुट्टी है। जबकि ग्वालियर में  नर्सरी से 8वीं तक छुट्टी कर दी गई है। वही रायसेन में सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद की घोषणा की गई है। छुट्टी सिर्फ छात्रों की, स्कूल खुलेंगे, टीचर्स को पहुंचना होगा प्रशासन ने बरसात के समय ग्वालियर अंचल और निचले इलाकों में संचालित स्कूलों और आसपास के इलाके में जहां जलभराव की स्थिति बनती हैं, उन्हें देखते हुए ही यह आदेश जारी किया गया है. हालांकि ये छुट्टी सिर्फ छात्रों के लिए होगी, शिक्षकों और टीचिंग स्टाफ को हर दिन की तरह समय पर स्कूल पहुंचना होगा. ग्वालियर कलेक्टर ने यह आदेश जिले के सभी स्कूलों और शिक्षा विभाग प्रबंधन को पालन कराने का जिम्मा सौंपा है।  गुरुवार से ही हो रही है बारिश हालांकि, इस आदेश के साथ ही यह बात भी स्पष्ट की गई है कि, जिन विद्यालयों में पूर्व से परीक्षा या कोई अन्य खास गतिविधि या इवेंट प्लान हैं ऐसे में उन विद्यालयों में संबंधित तय गतिविधि का आयोजन हो सकेगा. आपको बता दें कि ग्वालियर में गुरुवार दोपहर से शुरू हुई बारिश पूरी तरह नहीं थमी है, शुक्रवार को भी सुबह से कई इलाकों में हल्की तो कई इलाकों में तेज बारिश देखने को मिली है, ऐसे में निचले इलाकों में जलभराव से छात्रों का आवागमन प्रभावित होने के साथ ही बारिश में भीगने से बीमार होने और जहरीले जानवरों के दंश का खतरा भी रहता है. ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही ये आदेश जारी कराया गया है।  30 इंच बारिश, फिर भी सामान्य से 7% पीछे प्रदेश में अब तक 762.7 मिलीमीटर यानी करीब 30 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। सामान्य बारिश 816 मिलीमीटर यानी 32.1 इंच होनी चाहिए थी। इस हिसाब से प्रदेश अभी करीब 2.1 इंच पीछे है और कुल बारिश सामान्य से 7 प्रतिशत कम है। हालांकि बारिश के आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर काफी बड़ा है। पूर्वी मध्यप्रदेश में अब बारिश सामान्य से 3 प्रतिशत ज्यादा हो गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में अभी भी सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बदली तस्वीर जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में पिछले एक सप्ताह की लगातार बारिश ने आंकड़ों को तेजी से सुधारा है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बनने के बावजूद यही बारिश अब मौसमी औसत की कमी को पाट रही है। प्रदेश में इस सीजन में पहली बार पूर्वी हिस्से का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंचा है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में अब भी सामान्य से 4 से 23 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। शिवपुरी में भी हालात बिगड़े शिवपुरी में भी पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है. बारिश के चलते शिवपुरी शहर सहित अंचल में कई जगह जलभराव की स्थिति बन गई है. हालातों की गंभीरता और छात्रों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 को जिले के सभी शासकीय व अशासकीय शैक्षणिक संस्थानों में अवकाश घोषित कर दिया है. शहर की संजय कॉलोनी, नमो नगर, कमला हेरिटेज होटल के पास, रेलवे स्टेशन मार्ग सहित कई कॉलोनियों में सड़कें पानी में डूब गईं. कई स्थानों पर घुटनों से ज्यादा पानी भरने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा।  मड़ीखेड़ा डैम के गेट पहली बारे खुले लगातार हो रही बारिश और मड़ीखेड़ा डैम में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए इस सीजन में पहली बार मड़ीखेड़ा डैम के गेट खोलकर सिंध नदी में पानी छोड़ा जा रहा है. वहीं पोहरी अनुविभाग में छर्च बिलौआ मार्ग सकुला नदी में आए उफान से बंद हो गया है. कलेक्टर कार्यालय की भू-संसाधन प्रबंधन शाखा द्वारा 4 सितंबर 2026 को जारी आंकड़ों के मुताबिक, '' शिवपुरी में 1 जून से अब तक औसतन 764.46 मिमी बारिश दर्ज हो चुकी है. जिले की सामान्य औसत वर्षा 816.30 मिमी है। यानी शिवपुरी अब सामान्य बारिश के आंकड़े से महज 51.84 मिमी पीछे रह गया है।  गुना में भी स्कूलों की छुट्टी गुना में भी ऐसे ही हाल हैं. भारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं, जिसके चलते अब प्रशासन ने सुरक्षा दृष्टि से स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया है. नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक शनिवार को अवकाश रहेगा और अब … Read more

85 हजार सरकारी कर्मचारियों को बड़ी सौगात, पंजाब में DA बढ़कर हुआ 60 फीसदी

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने राज्य के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ते (डीए) को लेकर एक अहम घोषणा की है। पंजाब सरकार के मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा किए गए इस एलान से राज्य के हजारों कर्मचारियों के वेतन में सीधा इजाफा होगा। डीए में भारी बढ़ोतरी 17 जुलाई 2020 के बाद ड्यूटी जॉइन करने वाले सभी कर्मचारियों को अब 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता (डीए) दिया जाएगा। वर्तमान में इन कर्मचारियों को केवल 42 प्रतिशत डीए मिल रहा था, जिसमें अब सीधे 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। किन 85 हजार कर्मियों को मिलेगा 60%  DA/ महंगाई भत्ता  पंजाब कैबिनेट सब-कमेटी ने साल 2020 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को केंद्र सरकार के बराबर DA देने का प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे मान सरकार मंजूरी देने वाली है. कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 17 जुलाई 2020 के बाद जितने कर्मी बहाल हुए हैं उन्‍हें केंद्र के पे-स्‍केल पर बहाल किया गया था, लेकिन उन्‍हें राज्‍य के मुताबिक, 42% महंगाई भत्ता ही दिया जा रहा था. इनकी संख्‍या राज्‍य में करीब 85 हजार है. अब इन्‍हें मान सरकार, केंद्र के बराबर यानी 60 फीसदी महंगाई भत्ता देने जा रही है।  केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी मिलेगी  कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने बताया कि पंजाब सरकार ने 17 जुलाई 2020 के बाद भर्ती हुए करीब 85,000 नए कर्मचारियों को राहत देते हुए उनके महंगाई भत्ते (DA) को 42% से बढ़ाकर 60% करने की सिफारिश की गई है. इस संबंध में कैबिनेट सब-कमेट्री की मीटिंग में फैसला लिया गया है ताकि इन कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर सैलरी दी जा सके।  अमन अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि पिछली सरकार ने 17 जुलाई 2020 को फैसला लिया था कि उसके बाद भर्ती होने वाले कर्मचारियों को पंजाब के वेतनमान की बजाय केंद्रीय वेतनमान पर रखा जाएगा. मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार का रुख बिल्कुल साफ है कि नए कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तुलना में कम सैलरी नहीं मिलनी चाहिए।  मंजूरी के लिए मुख्‍यमंत्री के पास भेजी गई फाइल  उन्‍होंने बताया कि कैबिनेट सब-कमेट्री के इस अहम फैसले को अब मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान के पास भेज दिया गया है और उम्मीद है कि इस पर जल्द ही अंतिम मुहर लग जाएगी. मंत्री ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्य राज्यों की सरकारों को भी अपने कर्मचारियों को पंजाब की तर्ज पर बेहतर वेतन देना चाहिए।  85,000 कर्मचारियों को सीधा लाभ सरकार के इस कदम से पंजाब के करीब 85,000 कर्मचारियों को फायदा होगा और उनके वेतन में अच्छी-खासी वृद्धि देखने को मिलेगी। केंद्रीय कर्मियों के बराबर मिलेगा हक मंत्री अमन अरोड़ा ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंजाब सरकार अपने कर्मचारियों को केंद्रीय कर्मचारियों के बराबर वेतन और महंगाई भत्ता (डीए) देने के लिए पूरी तरह से तैयार है। यह कदम कर्मचारियों के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है, जिससे आगामी त्योहारों से पहले उन्हें बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी।     

त्रिशूर में भीषण सड़क हादसे में 8 छात्रों की मौत, खड़े ट्रक से टकराकर कार के उड़े परखच्चे

त्रिशूर  केरल के त्रिशूर जिले में शुक्रवार देर रात भीषण सड़क हादसा हो गया. इस सड़क दुर्घटना में तमिलनाडु के आठ इंजनीयरिंग छात्रों की मौत हो गई. पुलिस के मुताबिक, छात्रों की कार कैपामंगलम में बन रहे नेशनल हाईवे 66 पर खड़ी एक मालवाहक ट्रक से टकरा गई।  यह दुखद हादसा पनम्बिक्कुन्नू सेंटर में हुआ, जिसमें डिंडीगुल के पीएसएनए कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के छात्रों की जान चली गई. यह घटना शुक्रवार रात 11.42 बजे हुई जब तमिलनाडु नंबर वाली कार का नियंत्रण खो गया और वह तेज रफ्तार में लॉरी से टकरा गई. खबर के मुताबिक, ट्रक नेशनल हाईवे पर एक मोड़ के पास खड़ी थी।  टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए. कार का अगला हिस्सा पूरी तरह से लॉरी के नीचे फंस गया. जोरदार टक्कर की आवाज़ सुनकर, आस-पास के लोग, पुलिस और फायर फोर्स के लोग मौके पर पहुंचे और बचाव का काम शुरू किया।  इस भीषण दुर्घटना का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है, क्योंकि, कार के अंदर आगे की सीटों में फंसे शवों को बाहर निकालने के लिए कार को काटना पड़ा. कार में सवार सभी आठ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया. मरने वाले सभी लोग तमिलनाडु के 20 साल के लड़के थे।  मरने वालों में से पांच की पहचान सलेम के विश्वा, डिंडीगुल के सूर्या और युवा संजीत, और मदुरै के संतोष और प्रसन्ना के तौर पर हुई है. बाकी तीन यात्रियों की पहचान करने की कोशिशें चल रही हैं. पुलिस ने पहचाने गए पीड़ितों के परिवारों को जानकारी दे दी है।  शुरुआती जांच से पता चलता है कि लड़के केरल में छुट्टियां मनाने गए थे. छात्रों की अचानक मौत से इलाके में मातम छा गया है, जिससे कॉलेज के अधिकारी और सहपाठी गहरे सदमे में हैं।  खबर के मुताबिक, कैपामंगलम पुलिस ने जांच पूरी कर ली है और शवों को त्रिशूर मेडिकल कॉलेज अस्पताल की मॉर्चरी में शिफ्ट कर दिया है. पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को रिश्तेदारों को सौंप दी जाएंगी. इस बीच, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि स्ट्रीट लाइट ठीक से न होने और हाईवे पर वॉर्निंग बोर्ड न होने की वजह से यह हादसा हुआ. उन्होंने बताया कि रात के समय इलाके में आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं. हालांकि, चल रहे सड़क निर्माण कार्य की वजह से कई जगहों पर ट्रैफिक डायवर्ट किया गया है, लेकिन सही साइनबोर्ड न होने की वजह से दूर-दराज से आने वाले ड्राइवर को यहां कुछ समझ में नहीं आता है।  पुलिस और जानकारी इकट्ठा कर रही है. पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज की जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि दुर्घटना की वजह तेज रफ्तार तो नहीं थी. वहीं, मोटर वाहन विभाग के अधिकारी भी मौके पर पहुंचकर दुर्घटना की जांच करेंगे।   

मध्यप्रदेश के पावर सेक्टर को मिली नई रफ्तार, सीएम मोहन यादव ने औद्योगिक विकास पर जताई प्रतिबद्धता

 सीहोर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 4 सितंबर को सीहोर जिले में क्रॉम्पटन ग्रीव्स की नई पावर ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट के ट्रांसफॉर्मर के रोल-आउट का शुभारंभ किया।इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश आकर्षित करने के लिए हमारी सरकार प्रतिबद्ध है, क्योंकि निवेश से ही स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर विकसित होते हैं। सरकार छोटे-बड़े सभी निवेशकों को पूरा सहयोग देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि दो दिन पहले ही केबल निर्माण के लिए 106 करोड़ की लागत से एक फैक्ट्री का भूमि-पूजन किया गया है। आज जन्माष्टमी के पावन अवसर पर 888 करोड़ की लागत से तैयार हुई सीजी पॉवर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस की नई पावर ट्रांसफॉर्मर फैक्ट्री का लोकार्पण हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते करीब 8 महीने में गोदरेज जैसी बड़ी-बड़ी कंपनियों की इकाइयों के लोकार्पण और भूमि-पूजन किए गए। ग्वालियर-चंबल अंचल में गोदरेज इंडस्ट्रीज ने साबुन तैयार करने के लिए एशिया की सबसे बड़ी अपनी चौथी यूनिट का शुभारंभ किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों के बलबूते देश की बड़ी-बड़ी कंपनियों के बीच मध्य प्रदेश आकर उद्योग स्थापित करने की स्वस्थ प्रतिस्पर्धा विकसित हो रही है। प्रदेश में आ रहीं फैक्ट्रियों में केवल प्रोडक्ट तैयार नहीं होता है, बल्कि राज्य की आर्थिक समृद्धि, टैक्स कलेक्शन और रोजगार के अवसरों का भी विकास होता है। मात्र 13 महीने में शुरू हुई दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सीहोर श्योर है, निवेश में सिक्योर है और रिटर्न एश्योर है। यह जिला पर्यटन के क्षेत्र में तेज गति से विकास कर रहा है। सीहोर अब भोपाल मेट्रोपोलिटन सिटी का हिस्सा है, जिससे भविष्य में यहां के नागरिकों को लाभ मिलेगा। देश के इलेक्ट्रिकल इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस की पावर ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट बड़ी भूमिका निभाएगी। सीहोर में टायर से लेकर ट्रांसफॉर्मर तक सब कुछ तैयार हो रहा है। वर्तमान समय में मध्यप्रदेश की ग्रोथ में 5 अहम कड़ियां हैं, पैशन, पोटेंशियल, पॉलिसी, परफॉर्मेंस और प्रोडक्शन। सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस ने अपनी 9 दशक की यात्रा में आज मध्य प्रदेश की धरती पर नया मुकाम हासिल किया है। पिछले साल अगस्त में भूमि-पूजन के बाद रिकॉर्ड 13 महीने में सीहोर में दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर निर्माण फैक्ट्री प्रारंभ हुई है। जन्माष्टमी के पावन अवसर पर प्रदेशवासियों के लिए यह बड़ी सौगात है। उन्होंने कहा कि इस यूनिट में हर वर्ष 365 ट्रांसफॉर्मर तैयार होंगे और 2 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के आसपास स्थित खाली भूमि से छोटे-बड़े झाड़ हटाने में सरकार सहयोग प्रदान करेगी। तेज गति से आगे बढ़ा रहा है भारत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था तेज गति से आगे बढ़ रही है। देश के साथ मध्य प्रदेश भी कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ रहा है। अर्थव्यवस्था के हालिया आंकड़े बताते हैं कि भारत की विकास दर दुनिया में सर्वाधिक 7.8 प्रतिशत है, जबकि अमेरिका की ग्रोथ रेट मात्र 2 प्रतिशत और चीन की 4 प्रतिशत पर है। भारत अपनी अर्थव्यवस्था की रफ्तार को तेज गति से आगे बढ़ा रहा है। केंद्रीय उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि अमेरिका अपनी ट्रेड डील को ओपन करे, तभी भारत अपने कदम आगे बढ़ाएगा। इस मामले में देश के हितों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। दुनिया की सबसे बड़ी ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लैब अब सीहोर में सीजी पावर एंड इंडस्ट्रियल सॉल्यूशंस के सीईओ अमर कौल ने कहा कि यह हमारी कंपनी का महत्वपूर्ण पड़ाव है। प्रधानमंत्री मोदी ने जीडीपी में मैन्यूफैक्चरिंग का हिस्सा 13 प्रतिशत है, इसे 2035 तक 25 प्रतिशत पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। सीहोर में क्रॉम्पटन ग्रीव्स की नई पॉवर ट्रांसफॉर्मर मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट में लगभग 2000 लोगों को रोजगार मिला है। यहां पर हर महीने 35 ट्रांसफॉर्मर तैयार किए जाएंगे, जिनका आकार किसी तीन मंजिला बंगले के बराबर होगा। हमारी कंपनी आधुनिक मशीनों के माध्यम से प्रोडक्शन कर रही है। इस यूनिट में दुनिया की सबसे बड़ी टेस्ट लैब भी तैयार की गई है। यूनिट की जरूरत के लिए 36 प्रतिशत बिजली सोलर एनर्जी से मिलेगी। राज्य सरकार के सहयोग से सीहोर में यह यूनिट मात्र 13 महीने में प्रोडक्शन के तैयार हुई है। हमारी कंपनी विकसित भारत और समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण के लिए संकल्पित है।