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कौशल विकास से युवाओं को मिलेगी नई दिशा, केदार कश्यप बोले- हुनरमंद युवा बनाएंगे स्वर्णिम भविष्य

हुनरमंद युवा ही गढ़ेंगे स्वर्णिम भविष्य, कौशल विकास से निखरेगी नई पीढ़ी -वन मंत्री केदार कश्यप ​जिज्ञासा से हुनर तक, युवाओं के कौशल विकास से ही संभव है प्रगति -विश्व विजय सिंह तोमर विकसित छत्तीसगढ़ 2047 के संकल्प से जुड़ेगा युवा, नारायणपुर में ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम का आयोजन ​मेधावी विद्यार्थियों, राष्ट्रीय खिलाड़ियों व मलखंभ विजेताओं को खेल एवं शिक्षा सम्मान से नवाजा गया ​रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य गठन के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रदेश के युवाओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प से जोड़ने के उद्देश्य से नारायणपुर स्थित ए.जी. ऑडिटोरियम में ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 16 से 24 वर्ष आयु वर्ग के मेधावी विद्यार्थियों, राष्ट्रीय- राज्य स्तरीय खिलाड़ियों, दिव्यांगजनों, कौशल विकास प्रशिक्षणार्थियों और आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली युवाओं की व्यापक सहभागिता रही। युवाओं के हुनर, शिक्षा और खेल प्रतिभा का राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका        छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ‘युवा उड़ान’ कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ गठन के इस रजत जयंती वर्ष में प्रदेश की युवा शक्ति ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ और ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के विजन को साकार करेगी। बस्तर क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों, राष्ट्रीय खिलाड़ियों और कौशल विकास से जुड़ रहे युवाओं की सक्रिय भागीदारी राज्य की प्रगति की नई दिशा तय कर रही है। राज्य सरकार युवाओं के हुनर, शिक्षा और खेल प्रतिभा को बढ़ावा देकर उन्हें आत्मविश्वास के साथ राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए हर संभव अवसर प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।        ​ ​हुनर और जिज्ञासा से बनेगी युवाओं की पहचान- तोमर      ​राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि केवल किताबी शिक्षा पर्याप्त नहीं है; युवाओं को अपने हुनर, कौशल, जिज्ञासा और रचनात्मकता को लगातार विकसित करना होगा। उन्होंने कहा कि प्रतिभा को सही दिशा और मंच देना ही श्युवा उड़ानश् का मुख्य ध्येय है, जिससे युवाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की सोच विकसित हो सके। उन्होंने पंजीयन के लिए युवा आयोग की वेबसाइट और क्यूआर कोड/गूगल फॉर्म की जानकारी भी साझा की। ​विशेषज्ञों ने साझा किए राष्ट्र निर्माण के मंत्र        ​कार्यक्रम के बौद्धिक सत्रों में विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया।​ युवा शक्ति-राष्ट्र शक्ति पर केंद्रित डॉ. मीनाक्षी ठाकुर ने विकसित भारत 2047, आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया में युवाओं की निर्णायक भूमिका पर प्रकाश डाला।​ डॉ. विश्वजीत ने विद्यार्थियों को इस राष्ट्रीय विषय के संवैधानिक व व्यावहारिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया तथा एक देश-एक चुनाव की महत्ता पर प्रकाश डाला। इसी तरह डॉ. सतीश पाण्डेय ने प्रेरक कहानियों के माध्यम से सकारात्मक सोच और निरंतर सीखने की ललक बनाए रखने का आह्वान किया। ​प्रतिभावान विद्यार्थियों और उत्कृष्ट खिलाड़ियों का किया गया सम्मान      ​शिक्षा और खेल के क्षेत्र में जिले का नाम रोशन करने वाली प्रतिभाओं को मंच पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ​शिक्षा क्षेत्र में कक्षा 10वीं में 94.33 प्रतिशत अंक लाकर जिले में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा भाविका देवांगन तथा 94ः अंकों के साथ द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाली कोविता कोर्राम को सम्मानित किया गया। ​खेल क्षेत्र में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 के मलखंभ विजेता संताय पोटाई व मोनिका पोटाई, खेलो इंडिया फुटबॉल उपविजेता शशिकांत कुमेटी व मनीष कोवाची; ऑल इंडिया खो-खो क्वालीफायर अमृता गोटा, नेशनल स्कूल गेम्स खो-खो विजेता शामुएल कल्लो व किशोर कावड़ो तथा राष्ट्रीय खिलाड़ी दिव्या कांगे को खेल पुरस्कार से नवाजा गया।      ​इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष, जनपद अध्यक्ष, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक और युवा उपस्थित रहे।

मध्यप्रदेश में 11 IAS अफसरों की नई पोस्टिंग, दिलीप कुमार को सागर संभाग की कमान; 5 को अतिरिक्त प्रभार

भोपाल मध्य प्रदेश में आज राज्य शासन ने 11 अधिकारियों के तबादले आदेश जारी किए हैं। सागर के कमिश्नर अनिल सुचारी को राज्य भंडार गृह निगम का प्रबंध संचालक बनाया गया है। आयुक्त उद्योग दिलीप कुमार को सागर का संभागीय कमिश्नर पदस्थ किया गया है।साथ ही महिला और बाल विकास विभाग की आयुक्त निधि निवेदिता को अब ओएसडी शहर राजस्व आयुक्त और आयुक्त भू अभिलेख की अतिरिक्त प्रभार की जिम्मेदारी सौंप गई है।सरकार ने ओएसडी शाह श्रम आयुक्त संदीप जीआर को भी बदला है और उन्हें ओएसडी सह आयुक्त महिला और बाल विकास तथा पड़े मिशन संचालक अटल बिहारी वाजपेई बाल आरोग्य एवं पोषण मिशन के पद पर पदस्थ किया है। 6 जिला पंचायत CEO भी बदले गए सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने एक अन्य तबादला आदेश में 6 राज्य प्रशासनिक सेवा (SAS) के अफसर के तबादले करते हुए उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी और अपर मेला अधिकारी सिंहस्थ उज्जैन के पद पर पदस्थ किया है। जारी आदेश के अनुसार प्रमुख राजस्व आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव को अब सचिव राजस्व विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं, आयुक्त सहसंचालक पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण सतेंद्र सिंह को अब सचिव पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग का जिम्मा सौंपा है। इसके अलावा राजस्व, महिला एवं बाल विकास, नगर निगम और निगम-मंडल स्तर के कई पदों पर भी बदलाव हुए हैं। नीचे पूरी सूची दी गई है। ट्रांसफर सूची (नई पदस्थापना)     आईएएस अनिल सुचारी (2006): आयुक्त, सागर संभाग, सागर से उन्हें प्रबंध संचालक बनाया गया है। अब वे मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम, भोपाल में पोस्टेड होंगे। (समकक्ष घोषित पद: सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस दिलीप कुमार (2008): आयुक्त उद्योग तथा प्रबंध संचालक लघु उद्योग निगम, भोपाल (अतिरिक्त प्रभार सहित) से उन्हें आयुक्त बनाया गया है। अब वे सागर संभाग, सागर में पोस्टेड होंगे।     आईएएस अनुभा श्रीवास्तव (2009): प्रमुख राजस्व आयुक्त तथा आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोवस्त, ग्वालियर (अतिरिक्त प्रभार सहित) से उन्हें सचिव बनाया गया है। अब वे राजस्व विभाग, मंत्रालय भोपाल में पोस्टेड होंगी।     आईएएस सतेन्द्र सिंह (2009): आयुक्त-सह-संचालक, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, भोपाल से उन्हें सचिव बनाया गया है। अब वे पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में पोस्टेड होंगे। (अतिरिक्त प्रभार: सचिव-अनुसूचित जाति कल्याण विभाग, आयुक्त-अनुसूचित जाति विकास, प्रबंध संचालक-अनुसूचित जाति वित्त निगम एवं आयुक्त-सह-संचालक पिछड़ा वर्ग कल्याण)     आईएएस नेहा मारव्या सिंह (2011): संचालक, आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं एवं अन्य प्रभार, भोपाल से उन्हें प्रबंध संचालक बनाया गया है। अब वे अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, भोपाल में पोस्टेड होंगी। (समकक्ष घोषित पद: अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस निधि निवेदिता (2012): वि.क.अ.-सह-आयुक्त, महिला एवं बाल विकास, भोपाल से उन्हें वि.क.अ.-सह-प्रमुख राजस्व आयुक्त बनाया गया है। अब वे भोपाल में पोस्टेड होंगी। (अतिरिक्त प्रभार: आयुक्त, भू-अभिलेख एवं बंदोवस्त, ग्वालियर; समकक्ष घोषित पद: अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस अनुराग वर्मा (2012): प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश भण्डार गृह निगम एवं राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (अतिरिक्त प्रभार सहित), भोपाल से उन्हें प्रबंध संचालक बनाया गया है। अब वे राज्य नागरिक आपूर्ति निगम, भोपाल में पोस्टेड होंगे। (समकक्ष घोषित पद: अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस मयंक अग्रवाल (2013): प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन, भोपाल से उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अब वे विकसित भारत-रोजगार गारंटी आजीविका मिशन (VB-GRAMG), भोपाल में पोस्टेड होंगे। (अतिरिक्त प्रभार: मिशन संचालक, समग्र नर्मदा मिशन; समकक्ष घोषित पद: अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस संदीप जी.आर. (2013): वि.क.अ.-सह-श्रम आयुक्त, इंदौर से उन्हें वि.क.अ.-सह-आयुक्त बनाया गया है। अब वे महिला एवं बाल विकास विभाग, भोपाल में पोस्टेड होंगे। (समकक्ष घोषित पद: अपर सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस अवि प्रसाद (2014): मुख्य कार्यपालन अधिकारी, रोजगार गारंटी परिषद, भोपाल से उन्हें प्रबंध संचालक बनाया गया है। अब वे मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉर्पोरेशन, भोपाल में पोस्टेड होंगे। (अतिरिक्त प्रभार: अपर सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग; समकक्ष घोषित पद: उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन)     आईएएस नेहा जैन (2018): अपर संचालक, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, इंदौर से उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी बनाया गया है। अब वे स्मार्ट सिटी, उज्जैन में पोस्टेड होंगी। (अतिरिक्त प्रभार: अपर आयुक्त, नगर पालिक निगम उज्जैन; समकक्ष घोषित पद: उप सचिव, मध्यप्रदेश शासन) अतिरिक्त प्रभार (मूल पद यथावत)     आईएएस रघुराज एम.आर. (2004): सचिव, श्रम विभाग, भोपाल के मूल पद पर बने रहेंगे। उन्हें सचिव, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     आईएएस तरुण राठी (2010): आयुक्त, आदिवासी विकास, भोपाल के मूल पद पर बने रहेंगे। उन्हें आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं, MAPCET एवं आदिम जाति अनुसंधान संस्थान का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     आईएएस कुमार पुरूषोत्तम (2012): अपर सचिव, मुख्यमंत्री कार्यालय, भोपाल के मूल पद पर बने रहेंगे। उन्हें आयुक्त उद्योग एवं प्रबंध संचालक लघु उद्योग निगम का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     आईएएस शीतला पटले (2014): सचिव, मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग, इंदौर के मूल पद पर बनी रहेंगी। उन्हें श्रम आयुक्त, इंदौर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।     आईएएस अनिशा श्रीवास्तव (2021): कार्यकारी संचालक, मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम, ग्वालियर के मूल पद पर बनी रहेंगी। उन्हें मुख्य कार्यपालन अधिकारी, ग्वालियर विकास प्राधिकरण का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

शिक्षकों के सम्मान में सजा मंच, केदार कश्यप ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षा दूतों को दिए सम्मान

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण समारोह- वन मंत्री केदार कश्यप ने सेवानिवृत्त शिक्षकों और शिक्षा दूतों को किया सम्मानित रायपुर  शिक्षक दिवस के अवसर पर नारायणपुर के ए.जी. ऑडिटोरियम में मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण सम्मान समारोह का आयोजन भव्य रूप से किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन, परिवहन, सहकारिता तथा संसदीय कार्य मंत्री श्री केदार कश्यप और राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष श्री विश्व विजय सिंह तोमर उपस्थित रहे। अनुशासन और संस्कारों से ही मिलती है सफलतारू केदार कश्यप     वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि अनुशासन, संस्कार, धैर्य और संकल्प के साथ शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने से ही सफलता प्राप्त होती है। उन्होंने परिवार को पहली पाठशाला बताते हुए कहा कि माता-पिता और गुरुजनों का सम्मान करना हमारी संस्कृति का मूल आधार है। विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उन्होंने मोबाइल फोन का उपयोग केवल पढ़ाई और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के लिए करने तथा इसके दुरुपयोग से बचने की सलाह दी। उन्होंने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके साथ सेल्फी भी ली। पुस्तक विमोचन और शिक्षकों का सम्मान        समारोह के दौरान लेखक श्री शिव कुमार पाण्डेय द्वारा अबूझमाड़ की संस्कृति पर आधारित लिखित पुस्तक ‘बस्तर के लोक जीवन में वनस्पतियां’ का विमोचन किया गया। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 15 सेवानिवृत्त शिक्षकों (श्री सुमेर सिंह मंडावी, श्रीमती उषा किरण बैस, श्री धनसिंह बघेल आदि) को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया। विकासखंड स्तर पर 6 शिक्षकों को शिक्षा दूत पुरस्कार और जिला स्तर पर 3 शिक्षकों को ज्ञानदीप पुरस्कार से नवाजा गया।         इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री इंद्रप्रस्थ बघेल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती पिंकी उसेंडी, कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन, पुलिस अधीक्षक श्री संदीप कुमार पटेल, डीएफओ डॉ. वेंकटेशा एमजी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रही।

जहां गुरुर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 राष्ट्र निर्माण की पीढ़ी तैयार करते हैं शिक्षक : राज्यपाल श्री पटेल जहां गुरुर खत्म और गुण शुरू होते हैं, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जिन्हें ज़रूरत है, उन शिक्षकों को ऑफलाइन टीईटी परीक्षा दिलाने के किए जाएंगे प्रयास शिक्षकों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की घोषणा राज्यपाल श्री पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किया उत्कृष्ट शिक्षकों का सम्मान शिक्षक दिवस पर प्रदेश के 33 उत्कृष्ट शिक्षक हुए सम्मानित प्रशासन अकादमी में हुआ राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह भोपाल राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने कहा है कि बच्चों की पहली पाठशाला उसका घर होती है। माता-पिता उन्हें प्रारंभिक शिक्षा और संस्कार देते हैं, लेकिन वास्तव में शिक्षक ही बच्चों को ज्ञान और संस्कारों से परिपूर्ण करते हैं। राष्ट्र् निर्माण की भावी पीढ़ी तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों को आत्मीय भाव से पढ़ाएं। उनकी बुद्धि, क्षमता और अपेक्षाओं को समझते हुए अपनापन और सहनशीलता का व्य्वहार करें। कठिनाईयों और जिज्ञासाओं को धैर्य के साथ सुनें। प्रेमपूर्वक व्यवहार करते हुए समाधान करें। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि बच्चे, विकसित भारत के कर्णधार है। शिक्षक इन कर्णधारों के शिल्प्कार है। इसलिए शिक्षक पहले स्वयं ज्ञान और नैतिक गुणों का आदर्श व्यक्ति बनें। बच्चों में ईमानदारी, सहनशीलता, जुझारूपन आदि गुणों का विकास कर, उनके व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करें। राज्यापाल श्री पटेल शनिवार को शिक्षक दिवस पर आरसीवीपी नरोन्हा प्रशासन एवं प्रबंधकीय अकादमी में हुए राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मा्न समारोह 2026 को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मा्न-2026 और गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान प्राप्तकर्ता शिक्षकों को सम्मानित कर सभी को शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। राज्यपाल श्री पटेल एवं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। मां सरस्वती और डॉ. सर्वपल्ली् राधाकृष्ण्न के चित्र पर माल्यार्पण कर नमन किया। राज्यपाल श्री पटेल का मुख्यतमंत्री डॉ. यादव ने पौधा भेंट कर स्वागत किया। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यापाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार- 2026 और गत वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से पुरस्कृत शिक्षकों के सम्मान का यह आयोजन, उन सभी शिक्षकों को नमन करने का प्रसंग है, जो ज्ञान और संस्कार से राष्ट्र का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता तो केवल बच्चे को जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक बच्चे के व्यक्तित्व को दिशा देकर आदर्श नागरिक बनाने का महान कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजनरी नेतृत्व में देश ने नई सोच और नए कौशल के द्वारा शिक्षा को नये भारत की शक्ति बनाने का संकल्प, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। शिक्षक दिवस पर सभी शिक्षक, भारत को ज्ञान की महाशक्ति बनाने का संकल्प ग्रहण करें। शिक्षा को निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन की जरूरत राज्यापाल श्री पटेल ने कहा कि आज की दुनिया में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह सकती, उसे बदलती वैश्विक आवश्यकताओं और रोजगार के नए अवसरों के अनुरुप निरंतर अपडेशन, अपग्रेडेशन और इनोवेशन करते रहना होगा। समय की जरूरत है कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़कर, हमारी शिक्षा को नई पहचान और शक्ति प्रदान करें। कला, विज्ञान, खेल, कौशल और व्यावसायिक शिक्षा के बीच की दीवारे हटाते हुए, विद्यार्थियों को उनकी रुचि से विषय चुन कर पढ़ने का भरपूर अवसर दिया जाए। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि आपको अब पाठ पढ़ाने से आगे बढ़कर, विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचान कर, उन्हें प्रेरित करने और सही दिशा देने वाले मार्गदर्शक के रूप में आगे आना होगा। राज्यपाल श्री पटेल ने कहा कि राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह 2026 में आज प्रदेश के 33 शिक्षकों का सम्मान हुआ है। भारत के दूसरे राष्ट्रपति और महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जन्म जयंती के अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं। यह आयोजन हमारे शिक्षकों को नमन करने का अवसर है, जो ज्ञान और संस्कार का देश का भविष्य गढ़ रहे हैं। माता-पिता और शिक्षक बच्चों को संस्कार देकर बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने शिक्षा को नए भारत की शक्ति बनाने का संकल्प राष्ट्रीय शिक्षा नीति के रूप में लिया है। उन्होंने शिक्षकों से अनुरोध किया कि वे भारत को महाशक्ति बनाने का संकल्प लें। आज शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है। उसे वैश्विक जरूरतों और रोजगार के अवसरों के अनुरूप अपग्रेड और इनोवेट करने की आवश्यकता है। बच्चों को उनकी रुचि के विषय चुनने का अवसर दिया जाए। शिक्षक विद्यार्थियों की प्रतिभा को खोजें और उसे आगे बढ़ने में सहयोग करें। बच्चों को संस्कारित करने में माता-पिता की जिम्मेदारी अहम है। तभी हमें देश के अच्छे नागरिक मिलेंगे। माता-पिता, बड़े भाई-बहन बच्चों से पूछें कि आज स्कूल में क्या पढ़ाया। हमारे लिए सभी शिक्षक सम्मानीय हैं। शिक्षक अपने परिवार के बच्चों की तरह उन्हें पढ़ाएं। बड़े होकर विद्यार्थी अपने शिक्षक को कभी नहीं भूलते हैं। आज सिखाए हुए बच्चे विकसित भारत @2047 के संकल्प में योगदान देंगे। बच्चों को सहनशील बनाएं। कई बच्चे मानसिक परेशानी में गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसे बच्चों को प्यार से समझाएं। हमें ऐसी पीढ़ी तैयार करनी है, जो अपने माता-पिता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी न भूलें। अध्यक्षीय संबोधन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गुरु शिष्य परम्परा भारतीय संस्कृति की अनुपम धरोहर हैं। गुरुजन नि:संदेह विशेष भी है और हमारी प्राचीन सांस्कृतिक परम्पराओं का विशेषण भी। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में देश का मान निरंतर बढ़ रहा है। इसके पीछे गुरु की महिमा है, क्योंकि जहां गुरूर खत्म होता है, और गुण शुरू होता है, वहीं गुरु की दृष्टि पैदा होती है। गुरु की दृष्टि से ही शिक्षित समाज की सृष्टि होती है। उन्होंने कहा कि हमारे गुरुजन एक दीपक की तरह स्वयं अंधेरे में रहकर अपने विद्यार्थियों को शिक्षित कर उनका पूरा जीवन-चरित्र आलोकित करते हैं। इस दुनिया में माता-पिता के बाद वो शिक्षक ही हैं, जो यह कामना करते हैं कि आप वह बनें, जो आप वास्तव में बनना चाहते हैं। आपको वह सब मिले, जो आप पाना चाहते हैं। इसीलिए गुरुजन सदैव वंदनीय हैं, पूजनीय हैं। … Read more

CM धामी का बड़ा बयान- सरकारी नौकरी अब सिफारिश से नहीं, मेहनत और प्रतिभा के दम पर

101 युवाओं को नियुक्ति पत्र, धामी बोले—मेहनत और प्रतिभा के आधार पर मिल रही सरकारी नौकरी देहरादून  उत्तराखंड में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और सरकारी भर्तियों को पारदर्शी बनाने की दिशा में राज्य सरकार की पहल जारी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को मुख्य सेवक सदन में पशुपालन तथा गन्ना विभाग में चयनित 101 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इनमें 88 पशुधन प्रसार अधिकारी और 13 गन्ना पर्यवेक्षक शामिल हैं। नवनियुक्त कार्मिकों को शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र युवाओं की मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। अब वे अपने करियर के साथ जनसेवा की नई यात्रा शुरू कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने उनसे अपने ज्ञान, अनुभव और ऊर्जा का उपयोग करते हुए शासकीय कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने की अपेक्षा की। पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के हितों की रक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी नौकरियों में चयन मेहनत और प्रतिभा के आधार पर हो। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में 34 हजार से अधिक युवा सरकारी नौकरी पाने में सफल हुए हैं। सरकार का प्रयास है कि भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शी और निष्पक्ष रहें तथा युवाओं को अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिले। पशुपालन और गन्ना क्षेत्र को मिल रहा बढ़ावा मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन और गन्ना विभाग प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सीधे जुड़े हुए हैं। विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में पशुपालन हजारों परिवारों की आजीविका का आधार है। यह ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना, मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना और मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के माध्यम से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों और पशुपालकों को अनुदान पर गाय, बकरी, भेड़ और मुर्गी पालन की इकाइयां उपलब्ध कराने के साथ कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और पशु चिकित्सा जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। गन्ना किसानों के लिए तकनीक और बेहतर सुविधाओं पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि गन्ना सर्वेक्षण की प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को नई तकनीक, उन्नत प्रजातियों और वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने के लिए गन्ना क्लीनिक एवं परामर्श केंद्र शुरू किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में गन्ना किसानों को उत्तर प्रदेश की तुलना में पांच रुपये प्रति कुंतल अधिक मूल्य दिया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि किसानों को आधुनिक तकनीक और बेहतर कृषि पद्धतियों के साथ उनकी उपज का उचित लाभ भी मिल सके। योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जिम्मेदारी मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त कार्मिकों से कहा कि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाना उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसानों और पशुपालकों के साथ लगातार संवाद कर उनकी समस्याओं को समझना और उनका समाधान करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि आम नागरिक को सरकारी कार्यालयों में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था में संवेदनशीलता और जवाबदेही को प्राथमिकता देते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों को जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करना होगा। ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ का मंत्र मुख्यमंत्री धामी ने नवनियुक्त कार्मिकों से ‘सरलीकरण, समाधान, निस्तारण और संतुष्टि’ के मूल मंत्र को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, अनुशासन और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करना ही जनसेवा की वास्तविक भावना है। उन्होंने नवनियुक्त कार्मिकों से विकसित भारत-2047 के लक्ष्य के अनुरूप सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया। 101 युवाओं को मिली यह नियुक्ति केवल रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों—पशुपालन और गन्ना क्षेत्र—को नई ऊर्जा देने का अवसर भी है। आने वाले समय में इन नवनियुक्त कार्मिकों की भूमिका किसानों और पशुपालकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण होगी।चाहें तो मैं इसके लिए मैगज़ीन के फ्रंट पेज/इनसाइड पेज के लिए 5 ज्यादा दमदार हेडलाइन और सबहेडिंग भी बना सकता हूं।

इंदौर मेट्रो के विस्तारित रूट की आज शुरुआत, ₹20-80 में सफर; CM मोहन यादव करेंगे शुभारंभ

इंदौर   मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के लिए आज का दिन बेहद खास है. शनिवार को यहां मेट्रो की विस्तारित सेवा का शुभारंभ होने जा रहा है. आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल विस्तारित मेट्रो सेवा का शुभारंभ करेंगे. इंदौर मेट्रो की विस्तारित सेवा आज से इंदौर के गांधीनगर से मालवीय नगर चौराहा तक शुरू हो जाएगी. आज औपचारिक उद्घाटन के बाद 6 सितंबर 2026 से यह सेवा आम यात्रियों के लिए उपलब्ध होगी।  इसके साथ ही यात्रियों को गांधीनगर से मालवीय नगर चौराहा तक निर्बाध मेट्रो यात्रा की सुविधा मिलेगी. मेट्रो की पहली ट्रेन दोनों छोरों से प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे रवाना होगी, जबकि अंतिम ट्रेन शाम 7:00 बजे प्रस्थान करेगी. यात्रियों की सुविधा के लिए हर 15 मिनट के अंतराल पर ट्रेन उपलब्ध रहेगी तथा प्रतिदिन 80 से अधिक फेरे संचालित किए जाएंगे।  लगभग 17 किलोमीटर तक हुआ मेट्रो एक्सटेंशन वर्तमान में इंदौर मेट्रो का संचालन गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर-3 तक लगभग 6 किलोमीटर के मार्ग पर किया जा रहा है. सेवा विस्तार के बाद अब मेट्रो गांधीनगर से मालवीय नगर चौराहा तक लगभग 17 किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित होगी. विस्तारित कॉरिडोर में कुल 16 स्टेशनों से यात्रियों को आवागमन की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे शहर के प्रमुख व्यावसायिक व आवासीय क्षेत्रों के बीच यात्रा अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगी।  यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता इंदौर मेट्रो की आधुनिक, पूर्णतः वातानुकूलित ट्रेनें यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी. सभी स्टेशनों पर डिजिटल यात्री सूचना प्रणाली, सीसीटीवी आधारित सुरक्षा व्यवस्था, एस्केलेटर, लिफ्ट तथा दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध हैं. यह परियोजना पर्यावरण-अनुकूल, सुरक्षित एवं समयबद्ध सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  डिजिटल टिकटिंग से होगी स्मार्ट और कैशलेस यात्रा यात्रियों की सुविधा के लिए इंदौर मेट्रो में ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन (AFC) प्रणाली पहले से संचालित है. यात्री एमपीएमआरसीएल मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल टिकट प्राप्त कर सकते हैं और यूपीआई, क्यूआर कोड, ई-वॉलेट व मोबाइल ऐप के जरिए कैशलेस भुगतान कर सहज व सुरक्षित यात्रा का लाभ उठा सकते हैं. रिटर्न, ग्रुप टिकट एवं ई-वॉलेट रिचार्ज पर विशेष लाभ यात्रियों को प्रोत्साहित करने के लिए एमपीएमआरसीएल द्वारा आकर्षक प्रमोशनल डिस्काउंट पॉलिसी लागू की गई है. इसके तहत रिटर्न जर्नी टिकट पर 5 प्रतिशत व ग्रुप टिकट पर 10 प्रतिशत की छूट दी जा रही है. वहीं, मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-वॉलेट रिचार्ज करने पर रिचार्ज राशि के अनुसार 8 प्रतिशत से 15 प्रतिशत तक बोनस मिलेगा. ₹200–499 के रिचार्ज पर 8 प्रतिशत, ₹500–999 पर 10 प्रतिशत, ₹1000–1499 पर 12 प्रतिशत और ₹1500–2000 के रिचार्ज पर 15 प्रतिशत बोनस प्रदान किया जाएगा। 

शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय

AI के युग में शिक्षक बनें विद्यार्थियों के मार्गदर्शक, तकनीक के विवेकपूर्ण उपयोग की दें सीख : राज्यपाल डेका शिक्षक नई पीढ़ी के निर्माता, विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण : मुख्यमंत्री साय लोकभवन में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह का गरिमामय आयोजन प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षक राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित, चार शिक्षकों को मिला राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं, शिक्षा में गुणवत्ता और नवाचार पर सरकार का विशेष जोर – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर   राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस के अवसर पर आज लोकभवन के छत्तीसगढ़ मण्डपम् में आयोजित राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह में शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को सम्मानित कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। समारोह में वर्ष 2025-26 के लिए प्रदेश के 63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। चार उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा भी की। समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका ने शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में शिक्षा और शिक्षक की भूमिका भी व्यापक हो रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीकों से परिचित होना आवश्यक है, लेकिन उससे भी अधिक जरूरी तकनीक का विवेकपूर्ण, जिम्मेदार और मानवीय मूल्यों के अनुरूप उपयोग है। उन्होंने कहा कि AI हमारा सहायक बने, हमारा नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का उपयोग ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए प्रेरित करें। राज्यपाल डेका ने कहा कि आज गूगल और डिजिटल तकनीक के माध्यम से हमारे पास सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है। इसके बावजूद हमें यह ध्यान रखना होगा कि तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित न करे। दुनिया के अनेक देशों में विद्यार्थियों द्वारा स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर गंभीर विचार-विमर्श हो रहा है। तकनीक हमें जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन, प्रेरणा और जीवन की सही दिशा गुरु से ही मिलती है। इसलिए बदलते समय में शिक्षक की भूमिका पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार किया है। आने वाले समय में शिक्षा के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। ऐसे में शिक्षकों को निरंतर अपने ज्ञान और कौशल को अद्यतन करना होगा। साथ ही विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना होगा। विद्यार्थियों की काउंसलिंग भी शिक्षक की महत्वपूर्ण भूमिका का हिस्सा है। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि एक महान और गरिमामय दायित्व है। शिक्षक अपने ज्ञान के साथ-साथ अपने आचरण से भी विद्यार्थियों को शिक्षित करते हैं। बच्चे अपने शिक्षकों को आदर्श के रूप में देखते हैं, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा, संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करना चाहिए। प्रत्येक विद्यार्थी कैसे आगे बढ़े, उसकी प्रतिभा कैसे निखरे और उसका भविष्य कैसे बेहतर बने, यह शिक्षक की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां साझा करते हुए राज्यपाल डेका ने कहा कि शिक्षक दिवस उन्हें प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक की अपनी यात्रा की याद दिलाता है। पहले शिक्षक और विद्यार्थी के बीच आदर, आत्मीयता और विश्वास का अत्यंत गहरा संबंध होता था। सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षक पूरी सेवा भावना और समर्पण के साथ विद्यार्थियों का भविष्य संवारते थे। यही समर्पण और आत्मीयता शिक्षक-विद्यार्थी संबंध की वास्तविक शक्ति है। उन्होंने कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी का संबंध केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता। शिक्षक विद्यार्थी के व्यक्तित्व, सोच और भविष्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। शिक्षक अपने विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और विशेष प्रतिभा को पहचानें तथा उन्हें जीवन में सही दिशा चुनने के लिए प्रेरित करें। राज्यपाल डेका ने शासकीय सेवा में स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए कहा कि जहां भी दायित्व मिले, उसे सहजता से स्वीकार कर पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सम्मानित सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि प्रदेश के शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और समर्पण से छत्तीसगढ़ की नई पीढ़ी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे। शिक्षा का उद्देश्य सक्षम नागरिक और श्रेष्ठ समाज का निर्माण : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय समारोह की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिक्षक दिवस पर सभी गुरुजनों को शुभकामनाएं दीं और राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त करने वाले शिक्षक-शिक्षिकाओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मान शिक्षकों के समर्पण, कठिन परिश्रम, नवाचार और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है। शिक्षक वास्तव में राष्ट्र और नई पीढ़ी के निर्माता हैं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने महान शिक्षाविद् एवं पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पुण्य स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि भारत की शिक्षा परंपरा अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रही है। हमारे यहां शिक्षा का उद्देश्य कभी केवल डिग्री या नौकरी प्राप्त करना नहीं रहा, बल्कि व्यक्ति को ज्ञानवान, संस्कारवान, सक्षम और जिम्मेदार नागरिक बनाना रहा है। ऐसी शिक्षा ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के विकास में सार्थक योगदान देने के लिए तैयार करती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार और प्रत्येक बच्चे तक बेहतर शैक्षणिक अवसर पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। पिछले ढाई वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और भाषायी विविधता को ध्यान में रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में स्थानीय आवश्यकताओं को भी महत्व दिया जा रहा है। बस्तर अंचल में बच्चों … Read more

बिट्टू तबाही से सीएम की मुलाकात का असर, ब्यावरा में अजनार नदी की सफाई के लिए चला अभियान

ब्यावरा  राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर का रहने वाला बिट्टू तबाही एक बार फिर चर्चा में है। शुक्रवार को वह दिनभर सोशल मीडिया पर ट्रेंड करता रहा। ट्रेंड होने के बाद उसे मुख्यमंत्री ने भी शुक्रवार को मिलने बुलाया। सीएम से बिट्टू तबाही की मुलाकात के बाद ब्यावरा नगर पालिका ने शनिवार सुबह अजनार नदी को सफाई को लेकर अभियान शुरू कर दिया है। लोगों ने कहा- AI जनरेटेड है इमेज, बाद में फोटो की शेयर असल में सोशल मीडिया पर नदी की सफाई को लेकर उसके द्वारा डाली गई तस्वीर को किसी ने एआई क्रिएटेड लिख दिया। इसके बाद बिट्टू ने सभी को आईना दिखा दिया। उसकी मेहनत और उसके द्वारा किए गए काम के बाद की तस्वीरें बताई। इसके बाद सभी उसके काम की तारीफ क रहे हैं। उसके काम की सराहना की जा रही है। देश के साथ ही विदेशों में भी उसके वीडियो शेयर किए जा रहे हैं और खूब तारीफें वह बटोर रहा है। बिट्टू के जज्बे को देख मुख्यमंत्री ने बुलाया बिट्टू के जज्बे को देखकर और सोशल मीडिया पर ट्रेंड देख मुख्यमंत्री कार्यालय से भी मिलने का न्यौता मिला। शुक्रवार को बिट्टू मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) से मिलने पहुंचा। देर शाम हुई मुलाकात में सीएम यादव ने बिट्टू के काम की सराहना की है। साथ ही हर संभव मदद देने की बात कही है। साथ ही कहा कि बिट्टू की मेहनत बेकार नहीं जाएगी। बिट्टू तबाही से मुलाकात का वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। सीएम-बिट्टू की मुलाकात के बाद ब्यावरा नगर पालिका ने चलाया अभियान शुक्रवार को सीएम मोहन यादव और बिट्टू तबाही की मुलाकात के बाद शनिवार सुबह ब्यावरा नगर पालिका हरकत में आया। नगर पालिका ने बिट्टू तबाही के सफाई अभियान का समर्थन करते हुए अजनार नदी में जमा पुराने कचरे और पॉलीथीन को जेसीबी और पोकलेन मशीन के माध्यम से साफ किया। इसके अलावा मंदिर के पास अजनार नदी के घाट का भी सौंदर्यीकरण भी कराया। राजगढ़ जिले के ब्यावरा में 21 साल के एक बीएससी छात्र ने अजनार नदी को साफ करने का ऐसा बीड़ा उठाया, जिसकी शुरुआत उसने अकेले की थी। सोशल मीडिया पर 'बिट्टू तबाही' के नाम से पहचाने जाने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी 26 जनवरी से नदी में जमा कचरा, पॉलिथीन और गंदगी निकालने में जुटे हैं। शुरुआत में लोग उन्हें देखकर हैरान होते थे, लेकिन उनकी लगातार मेहनत ने अब नगर पालिका को भी इस मुहिम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है। सुरेंद्र नदी के उस हिस्से की सफाई कर रहे हैं, जहां लंबे समय से बड़ी मात्रा में कचरा जमा था। स्थानीय मंदिर के आसपास नदी में उतरकर सफाई करने के दौरान उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गंदे पानी में काम करने से हाथ-पैर में संक्रमण का खतरा बना रहता है, वहीं नदी की सफाई के दौरान कई बार सांप भी सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद सुरेंद्र ने सफाई का काम नहीं छोड़ा। सांप मिले, संक्रमण हुआ, फिर भी नहीं रुके बिना किसी जरूरी उपकरण के नदी की सफाई आसान नहीं थी. काम के दौरान उन्हें हाथ-पैर में संक्रमण जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और सांपों से भी सामना हुआ. इसके बावजूद उन्होंने सफाई नहीं छोड़ी. उनकी लगातार मेहनत देखकर ब्यावरा नगर पालिका भी आगे आई. अब जेसीबी और पोकलेन मशीनों की मदद से नदी में जमा पुराना कचरा, पॉलीथिन और मलबा हटाया जा रहा है।  नगर पालिका के सब-इंजीनियर रूपेश कुमार नेताम के मुताबिक, नदी में पांच बड़े नालों का पानी गिरता है, जो कि गंदगी और बदबू का कारण है. इसे रोकने के लिए करीब 14.77 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।  सुरेंद्र की कहानी उस सोच की कहानी है जिसमें एक इंसान ने शुरुआत की और धीरे-धीरे लोग उसके साथ जुड़ते चले गए. एक फावड़े से शुरू हुई मुहिम ने पूरे शहर को बता दिया कि बदलाव के लिए हमेशा भीड़ का इंतजार जरूरी नहीं।  जिस काम की शुरुआत सुरेंद्र ने अकेले फावड़े के साथ की थी, उसने लोगों और नगर पालिका को सात आने पर मजबूर कर दिया. फिलहाल नदी के पूरी तरह साफ होने में वक्त लगेगा, लेकिन ‘बिट्टू तबाही’ की मुहीम ने साबित कर दिया कि बड़े बदलाव के लिए सिर्फ एक छोटी पहल की जरूरत होती है।  अकेले शुरू की मुहिम सुरेंद्र का कहना है कि अजनार नदी उनके शहर की पहचान का हिस्सा है लेकिन लगातार कचरा डाले जाने से इसकी हालत खराब होती जा रही थी। उन्होंने किसी संस्था या अभियान का इंतजार करने के बजाय खुद नदी में उतरकर सफाई शुरू करने का फैसला किया। 26 जनवरी से शुरू हुई उनकी यह मुहिम लगातार जारी है। सुरेंद्र की मेहनत का असर दिखाई देने लगा तो नगर पालिका भी आगे आई। अब पुराने समय से जमा कचरे और पॉलिथीन को हटाने के लिए नगर पालिका की ओर से जेसीबी और पोकलेन मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं। मशीनों की मदद से नदी और उसके आसपास जमा भारी मात्रा में कचरे को हटाया जा रहा है।   

CM धामी ने लॉन्च किया ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ ऐप, AI बताएगा फसल की बीमारी, मौसम का मिलेगा अलर्ट

बिल्कुल। आपकी दी गई जानकारी को मैगज़ीन के लिए समाचार-आधारित, प्रभावी और सहज भाषा में इस तरह प्रस्तुत किया जा सकता है मनोरमा कृषि रक्षक: मोबाइल ऐप से किसानों को मौसम, बीमारी और बाजार की जानकारी देहरादून  खेती-किसानी में मौसम की अनिश्चितता, फसलों में होने वाली बीमारियां और बाजार भाव की सही जानकारी का अभाव किसानों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। इन समस्याओं को डिजिटल तकनीक के माध्यम से आसान बनाने की दिशा में ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ मोबाइल ऐप एक नई पहल के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में इस ऐप को लॉन्च किया। ऐप को मनोरमा डबराल जन कल्याण समिति ने विकसित किया है। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ का उद्देश्य किसानों को फसल तैयार करने से लेकर उसे बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम से जरूरी जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराना है। ऐप में मौसम, फसल स्वास्थ्य, कृषि सलाह, बाजार और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। मौसम में बदलाव पर मिलेगा रियल टाइम अलर्ट खेती में मौसम की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। मौसम में अचानक होने वाला बदलाव कई बार किसानों के लिए नुकसान का कारण बन जाता है। ऐसे में ऐप के जरिए किसानों को रियल टाइम मौसम की जानकारी और अलर्ट उपलब्ध कराने की सुविधा दी गई है। मौसम के पूर्वानुमान और बदलाव की जानकारी के आधार पर किसान सिंचाई, फसल सुरक्षा और अन्य कृषि संबंधी फैसले अधिक बेहतर तरीके से ले सकेंगे। फोटो से फसल की बीमारी पहचानने में मदद ऐप की प्रमुख विशेषताओं में एआई आधारित फसल रोग पहचान सुविधा भी शामिल है। फसल में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर किसान फोटो के माध्यम से समस्या की पहचान में मदद ले सकेंगे। शुरुआती स्तर पर बीमारी की जानकारी मिलने से किसान समय रहते उचित कृषि सलाह लेने और फसल को संभावित नुकसान से बचाने की दिशा में कदम उठा सकते हैं। इसके साथ ही अलग-अलग फसलों के लिए फसल-विशिष्ट कृषि सलाह उपलब्ध कराने का भी प्रयास किया गया है, जिससे किसानों को उनकी फसल के अनुरूप उपयोगी जानकारी मिल सके। बाजार भाव और लॉजिस्टिक्स की जानकारी भी किसान के लिए उत्पादन के साथ-साथ उपज को उचित बाजार तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ में कृषि और बाजार से संबंधित जानकारी के साथ परिवहन और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। इसका उद्देश्य किसान को खेत से बाजार तक की पूरी प्रक्रिया में डिजिटल सहयोग उपलब्ध कराना है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को भी लाभ ऐप का दायरा केवल व्यक्तिगत किसानों तक सीमित नहीं रखा गया है। स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमों को बाजार से जोड़ने से संबंधित सुविधाएं भी इसमें शामिल की गई हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले उत्पादों को संभावित बाजार तक पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा सकेगा। आधुनिक तकनीक से किसानों को मिलेगी आसानी: धामी ऐप लॉन्च के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे किसानों और स्वयं सहायता समूहों के लिए उपयोगी पहल बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का बेहतर इस्तेमाल कर किसानों को कृषि से जुड़ी आवश्यक जानकारियां और सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराई जा सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इस पहल के लिए संस्था को शुभकामनाएं भी दीं। ‘मनोरमा कृषि रक्षक’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म खेती को केवल उत्पादन की प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय मौसम की जानकारी, फसल स्वास्थ्य, कृषि सलाह, बाजार और लॉजिस्टिक्स को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। इससे तकनीक और खेती के बीच की दूरी कम करने में मदद मिल सकती है और किसानों को समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।अगर आप चाहें तो मैं इसी के लिए मैगज़ीन कवर स्टोरी के अनुरूप 5 दमदार हेडलाइन और सबहेडिंग भी बना सकता हूं।

CM योगी ने शिक्षकों को दी बधाई, कहा- आधुनिक शिक्षा और नवाचार से नई पीढ़ी को दे रहे नई दिशा

आधुनिक शिक्षा और नवाचार से नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे शिक्षक : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ   शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का प्रदेश के शिक्षकों के नाम खास संदेश मुख्यमंत्री ने सेल्फी वीडियो साझा कर शिक्षकों को दी शुभकामनाएं   काशी, सारनाथ और नैमिषारण्य तक यूपी की प्राचीन ज्ञान परंपरा का किया उल्लेख लखनऊ,   शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सभी शिक्षकों और गुरुजनों को शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री ने शनिवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सेल्फी वीडियो साझा करते हुए उत्तर प्रदेश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को याद किया और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश की विशिष्ट ज्ञान परंपरा को आधुनिक स्वरूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाने वाले सभी गुरुजनों और शिक्षकों को वह शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई देते हैं। उत्तर प्रदेश प्राचीन काल से ज्ञान, साधना और संस्कारों की पावन भूमि रहा है। काशी ने विश्व को ज्ञान का प्रकाश दिया, जबकि सारनाथ में भगवान बुद्ध ने अपना प्रथम उपदेश दिया था। अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज भी सनातन ज्ञान परंपरा के प्रमुख केंद्र रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शुकतीर्थ और नैमिषारण्य की ज्ञान परंपरा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब पांच हजार वर्ष पूर्व शुकतीर्थ में महर्षि शुकदेव जी ने श्रीमद्भागवत का प्रथम वाचन किया था। वहीं नैमिषारण्य में 88 हजार ऋषियों की साधना ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध किया। इसी भूमि से आयुर्वेद, अध्यात्म, दर्शन और भारतीय ज्ञान-विज्ञान की महान परंपराएं विकसित हुईं। सीएम योगी ने कहा कि आज प्रदेश के शिक्षक इसी गौरवशाली ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा, तकनीक और नवाचार से जोड़कर नई पीढ़ी का भविष्य गढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षकों का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति मंगलमय शुभकामनाएं व्यक्त कीं।