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नई शिक्षा नीति 2020 का असर, आंगनवाड़ी और स्कूलों के तालमेल से मजबूत होगी बच्चों की बुनियाद

राष्ट्रीय शिक्षा नीति – 2020: आंगनवाड़ी और स्कूलों के समन्वय से सुदृढ़ होगी प्रारंभिक शिक्षा की नींव महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के को -लोकेशन के दिशा-निर्देशों से शिक्षा और पोषण के क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत भोपाल  छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत अक्सर एक अनजान जगह से होती है, जहां उनको नया माहौल मिलता है। इस माहौल के डर और झिझक को खत्म करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने आंगनवाड़ी और प्राथमिक विद्यालय को अब एक ही परिसर में लाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और 'मिशन सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0' के विज़न को धरातल पर उतारने के लिए केन्द्र सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक बड़ा और दूरदर्शी कदम उठाया है। अब आंगनवाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों का को-लोकेट किया जा रहा है। इस व्यावहारिक रणनीति का उद्देश्य बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और देखभाल की एक ऐसी मजबूत नींव रखना है, जो उनके उज्ज्वल भविष्य का मार्ग प्रशस्त कर सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल दो संस्थानों को एक परिसर में लाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह महिला एवं बाल विकास और स्कूल शिक्षा विभाग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर बच्चों के लिए एक सुरक्षित, प्रेरक और उत्कृष्ट शैक्षणिक माहौल तैयार करने का महाअभियान है। क्या बदलेगा इस व्यवस्था से यह को-लोकेशन मॉडल मुख्य रूप से उन आंगनवाड़ी केंद्रों पर लागू किया जा रहा है जो प्राथमिक विद्यालयों के समीप स्थित हैं और जहाँ बच्चों के लिए सुरक्षित पहुँच उपलब्ध है। इसमें अस्थायी या सीमित संसाधनों वाले परिसरों में चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रों को प्राथमिक विद्यालयों में स्थानांतरित कर अधिक सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। ऐसे विद्यालय जहॉ अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध हैं, वहाँ आंगनवाड़ी केंद्रों को को-लोकेट किया जा रहा है जिससे शासकीय परिसंपत्तियों और संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग हो सके। भौगोलिक कारणों से जिन क्षेत्रों में भौतिक रूप से को- लोकेशन संभव नहीं है, वहाँ समीपस्थ प्राथमिक विद्यालयों के साथ आंगनवाड़ी केंद्रों की डिजिटल मैपिंग की जा रही है जिससे दोनों संस्थानों के बीच समन्वय और संसाधनों का साझा उपयोग सुनिश्चित किया जा सके। इस एकीकृत मॉडल से बच्चों का आंगनवाड़ी केन्द्रों से पहली कक्षा में स्थानांतरण बेहद सुचारू और सहज हो जाएगा। विद्यालय परिसर से पहले से परिचित होने के कारण बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे शुरुआती कक्षाओं में होने वाले ड्रॉप आउट की दर में भारी कमी आएगी। इस नई व्यवस्था से आंगनवाड़ी के बच्चों को स्कूलों की आधुनिक अधोसंरचना, खेल के मैदानों और उन्नत शैक्षणिक संसाधनों तक समान पहुँच मिलेगी। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित होने के साथ-साथ खेल-आधारित पाठ्यक्रमों जैसे 'आधारशिला' और 'जादुई पिटारा' के साझा उपयोग से शिक्षा की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होगा। आंगनवाड़ी एवं विद्यालीन समन्वय से बच्चों के डेटा का मिलान आसान होगा, जिससे सेवाओं के दोहराव से बचा जा सकेगा और प्रत्येक बच्चे तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचना सुनिश्चित हो। 'विद्यारंभ'- म.प्र. ने रचा इतिहास आंगनवाड़ी और प्राथमिक स्कूलों के इस को-लोकेशन मॉडल को प्रभावी बनाने में 'विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम' एक ऐतिहासिक कड़ी साबित हो रहा है, जो बच्चों की औपचारिक शैक्षणिक यात्रा की शुरुआत को रेखांकित करता है। राष्ट्रीय चिंतन शिविर के निर्णयों के अनुरूप बाल चौपाल अर्ली चाइल्ड हूड केयर एंड एजुकेशन -डे) के पावन अवसर पर मध्यप्रदेश के 94 हजार से अधिक आंगनवाड़ी केंद्रों में एक साथ "विद्यारंभ प्रमाण पत्र वितरण समारोह" संपन्न हुआ। पूरे प्रदेश में एक साथ इस गरिमामयी अभियान को सफलतापूर्वक संचालित करने वाला मध्यप्रदेश देश का प्रथम राज्य बना है। इस महाअभियान में 5 से 6 वर्ष की आयु वर्ग के 9.28 लाख से अधिक बच्चों को उनके जीवन की पहली औपचारिक शिक्षा यात्रा के लिए प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इस प्रदेशव्यापी आयोजन की व्यापकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें राज्य स्तर पर 1, जिला स्तर पर 65, परियोजना स्तर पर 445, सेक्टर स्तर पर 3,358 तथा आंगनवाड़ी स्तर पर 94,482 सफल कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन सभी स्तरों पर आयोजित कार्यक्रमों में मंत्रियों, विधायकों, कलेक्टर्स, मुख्य कार्यपालन अधिकारियों सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता कर बच्चों का उत्साहवर्धन किया। भविष्य की कार्ययोजना को सुदृढ़ करने के लिये स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को पात्र बच्चों की सूची भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे आगामी सत्र में शालाओं में उनका शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जा सके।  

साल में दूसरी बार भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन, BRICS समिट में दुनिया की नजरें

 नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। यह सम्मेलन 12-13 सितंबर को आयोजित होगा। क्रेमलिन ने इसकी पुष्टि कर दी है। एक साल के भीतर पुतिन का यह दूसरा भारत दौरा होगा। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति पिछले साल दिसंबर में 23वें भारत-रूस एनुअल समिट में हिस्सा लेने के लिए यहां आए थे। बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक के लिए भारत में थे। ब्रिक्स नेताओं की बैठक पिछले साल जुलाई में ब्राजील के रियो डि जनेरियो में हुई थी। यह ब्रिक्स का 17वां शिखर सम्मेलन था, जिसका विषय था-‘अधिक समावेशी और सतत शासन के लिए वैश्विक दक्षिण सहयोग को सशक्त बनाना।’ भारत के लिए रूस अहम क्यों भारत का रूस संबंध विदेश नीति के लिए काफी अहम है। खासतौर पर पिछले कई दशकों से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और ऊर्जा संबंध काफी करीबी रहे हैं। हालांकि पिछले कुछ अरसे में भारत, अमेरिका के नजदीक आया है। इसके बावजूद, भारत अभी भी रूस को अपनी दीर्घकालीन रणनीतिक हितों की सुरक्षा में अहम सहयोगी मानता है। भारत के लिए रूस इसलिए भी अहम है क्योंकि, देश के डिफेंस स्ट्रक्चर में यह एक बड़ी भूमिका निभाता है। भारतीय सशस्त्र बलों के सैन्य हार्डवेयर का एक बड़ा हिस्सा रूसी मूल का है। इसमें एस-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम, सुखोई लड़ाकू विमान और संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल शामिल हैं। दशकों में, मॉस्को भारत का सबसे भरोसेमंद सप्लायर बनकर उभरा है जो उन्नत सैन्य उपकरण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और रणनीतिक रक्षा सहयोग प्रदान करता है। तेल संकट में भी बड़ा मददगार एक जो सबसे अहम बात है, वह यह है कि मौजूदा हालात को देखते हुए रूस भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी तेजी से महत्वपूर्ण हो गया है। यूक्रेन संघर्ष के बाद मॉस्को पर पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते, भारत ने रियायती रूसी कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा दिया। इस कदम ने नई दिल्ली को वैश्विक ऊर्जा मूल्य झटकों से बचाने, घरेलू ईंधन की कीमतों को स्थिर करने और आर्थिक अनिश्चितता के समय मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने में मदद की। चीन के खिलाफ भी आएगा काम रक्षा और ऊर्जा के अलावा, इस संबंध का जियो-पॉलिटिकल महत्व भी काफी है। रूस के साथ भारत की घनिष्ठ भागीदारी तेजी से ध्रुवीकृत हो रहे वैश्विक क्रम में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। मॉस्को के साथ मजबूत संबंध बनाए रखकर, नई दिल्ली यह सुनिश्चित करने का प्रयास करती है कि रूस की चीन के साथ बढ़ती साझेदारी सीधे भारतीय हितों के खिलाफ एक गठबंधन में न बदल जाए। रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई संवेदनशील मुद्दों पर लगातार भारत का समर्थन भी किया है, जिससे नई दिल्ली को वीटो रखने वाली वैश्विक शक्ति का समर्थन मिलता है। ब्रिक्स क्या है ब्रिक्स एक प्रभावशाली संगठन है, जिसे मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर बनाया था। इसका मकसद पश्चिमी देशों के पारंपरिक भू-राजनीतिक और आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देना था। यह संगठन विश्व की जनसंख्या और वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का एक विशाल हिस्सा प्रतिनिधित्व करता है। इसका ध्यान अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रणालियों में सुधार करने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है।

अफगानिस्तान सीरीज के लिए Team India का ऐलान, युवा खिलाड़ियों के साथ विराट-रोहित की वापसी

नई दिल्ली भारत में इस समय इंडियन प्रीमियर लीग की धूम मची हुई है। IPL 2026 का फाइनल मुकाबला 31 मई को खेला जाएगा। इसके बाद टीम इंडिया मैदान में होगी। भारतीय टीम जून में टेस्ट और ODI सीरीज खेलती नजर आएगी, जिसके लिए भारतीय स्क्वाड का ऐलान हो गया है। दरअसल, टीम इंडिया जून में अफगानिस्तान की टीम की मेजबानी करेगी। दोनों टीमों के बीच एक टेस्ट मैच और 3 मैचों की ODI सीरीज खेली जाएगी। ऐसे में 19 मई को गुवाहाटी में मेन्स सिलेक्शन कमेटी की बैठक हुई, जिसमें टेस्ट और ODI दोनों के लिए भारतीय टीम चुन ली गई। एकमात्र टेस्ट का 6 जून से मुल्लांपुर में आगाज होगा, जिसके लिए 14 सदस्यीय भारतीय टीम का ऐलान कर दिया गया है। गौरतलब है कि 2018 के बाद भारत के खिलाफ अफगानिस्तान का पहला टेस्ट मैच होगा। 2018 में ही अफगानिस्तान ने बेंगलुरु के एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम में पहली बार आधिकारिक तौर पर टेस्ट मैच में हिस्सा लिया था। भारत ने वह मैच एक पारी और 262 रनों से जीता था। आखिरी टेस्ट और वनडे सीरीज हारी है टीम इंडिया टीम इंडिया को अपने आखिरी टेस्ट और वनडे सीरीज में हार झेलनी पड़ी थी। पिछले साल के अंत में साउथ अफ्रीका ने दो मैचों के टेस्ट सीरीज को 2-0 से क्लीन स्वीप किया था। वहीं न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी में टीम वनडे सीरीज का पहला मैच जीतने के बाद 2-1 से हार गई थी। अफगानिस्तान के खिलाफ अभी तक भारत ने एक ही टेस्ट खेला है और उसमें टीम को जीत मिली है। वहीं चार वनडे में भारत ने 3 जीते हैं जबकि एक टाई रहा है। यह पहला मौका होगा जब भारत और अफगानिस्तान के बीच द्विपक्षीय वनडे सीरीज होगी। विराट और रोहित की जगह बरकरार अफगानिस्तान के खिलाफ ODI सीरीज के लिए 15 खिलाड़ियों को चुना गया है, जिसमें विराट और रोहित शर्मा शामिल हैं। अफगानिस्तान के खिलाफ सीरीज के लिए भारत की ODI टीम से ऋषभ पंत को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। वहीं, टेस्ट टीम की उप-कप्तानी केएल राहुल को सौंप दी गई है। इससे पहले टेस्ट टीम की उप-कप्तानी पंत के पास थी। हालांकि, पंत टेस्ट में अपनी जगह बरकरार रखने में कामयाब रहे। एक बार फिर स्टार गेंदबाज मोहम्मद शमी को नजरअंदाज किया गया। अजीत अगरकर ने साफ तौर पर कहा है कि सिलेक्शन कमेटी ने मोहम्मद शमी के नाम पर चर्चा तक नहीं की। बुमराह को दिया गया रेस्ट भारत के दिग्गज तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज से आराम दिया गया है, ताकि इंग्लैंड दौरे से पहले उनके वर्कलोड को मैनेज किया जा सके। दोनों ही टीमों में कई नए चेहरों को शामिल किया गया हैं, जिनमें मानव सुथार, हर्ष दुबे, गुरनूर बराड़ और प्रिंस यादव शामिल हैं। मानव सुथार को टेस्ट टीम में पहली बार शामिल किया गया है। वहीं, गुरनूर बराड़ और हर्ष दुबे दोनों टीमों में जगह पाने में सफल रहे। वहीं, प्रिंस यादव ODI टीम में पहली बार शामिल हुए हैं।  अफगानिस्तान के भारत दौरे का फुल शेड्यूल      6 जून: पहला टेस्ट, न्यू चंडीगढ़ (9:30 AM)     14 जून: पहला ODI, धर्मशाला (1:30 PM)     17 जून: दूसरा ODI, लखनऊ (1:30 PM)     20 जून: तीसरा ODI, चेन्नई (1:30 PM) अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच के लिए भारतीय टीम का स्क्वाड: शुभमन गिल (कप्तान), यशस्वी जयसवाल, केएल राहुल (उपकप्तान), साई सुदर्शन, ऋषभ पंत, देवदत्त पडिक्कल, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, मानव सुथार, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे, ध्रुव जुरेल। अफगानिस्तान के खिलाफ ODI सीरीज के लिए भारतीय टीम का स्क्वाड: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, ईशान किशन, हार्दिक पंड्या, नितीश रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़, हर्ष दुबे।

ओबीसी आरक्षण के लिए बनेगा समर्पित आयोग, पंचायत चुनाव में अब वैज्ञानिक तरीके से तय होगा कोटा

लखनऊ उत्तर प्रदेश पंचायत चुनावों को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। राज्य में पहली बार ग्राम प्रधान, ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का आरक्षण 'ट्रिपल टेस्ट फॉर्मूले' (Triple Test Formula) के तहत तय किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा एक 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' का गठन किया जा रहा है। सोमवार को कैबिनेट ने आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। 2021 के पंचायत चुनावों में केवल रैपिड सर्वे के आधार पर ही आरक्षण की सीटें तय कर दी गई थीं, लेकिन इस बार प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक, अनुभवजन्य और विधिक होगी। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2023 के नगर निकाय चुनावों में पहली बार इस फॉर्मूले को आजमाया था, और अब इसे पंचायत चुनावों में भी पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। क्या है ‘ट्रिपल टेस्ट फार्मूला’ ट्रिपल टेस्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित किया गया एक कड़ा विधिक पैमाना है। शीर्ष अदालत ने पहली बार साल 2010 में 'के. कृष्णमूर्ति बनाम भारत संघ' मामले में और बाद में साल 2021 में 'विकास किशनराव गवली बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले में इस फॉर्मूले को स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अनिवार्य किया था। इसके तहत राज्य सरकार को आरक्षण लागू करने से पहले तीन मुख्य शर्तों (तीन टेस्ट) को अनिवार्य रूप से पार करना होता है। 1. पहला टेस्ट: समर्पित आयोग का गठन इसके तहत राज्य सरकार को एक विशेष और समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन करना होता है। इस आयोग का मुख्य काम स्थानीय निकायों में पिछड़ेपन की प्रकृति, प्रभाव और उसकी स्थिति की समकालीन व गहन अनुभवजन्य (Empirical) जांच और अध्ययन करना है। 2. दूसरा टेस्ट: आरक्षण का सटीक अनुपात तय करना आयोग द्वारा जुटाए गए जमीनी और अनुभवजन्य आंकड़ों (Empirical Data) के आधार पर ही स्थानीय निकायवार (Local Body-wise) ओबीसी वर्ग के लिए सीटों के आरक्षण का सटीक प्रतिशत तय किया जाना चाहिए। अदालत के नियमों के मुताबिक, यह आरक्षण बिना किसी वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन के नहीं दिया जा सकता। 3. तीसरा टेस्ट: 50% की अधिकतम सीमा यह इस फॉर्मूले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके तहत यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि किसी भी स्थानीय निकाय (जैसे कोई ग्राम पंचायत या जिला पंचायत) में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को मिलाकर दिया जाने वाला कुल आरक्षण किसी भी परिस्थिति में कुल सीटों के 50% से अधिक न हो। आखिर क्यों पड़ी इस कड़े फॉर्मूले की जरूरत? सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि नौकरियों और शिक्षा में मिलने वाला आरक्षण (संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत) और राजनीति या स्थानीय निकाय चुनावों में मिलने वाला प्रतिनिधित्व (अनुच्छेद 243D और 243T के तहत) दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं। राजनीतिक पिछड़ेपन को साबित करने के लिए सरकार के पास पुख्ता और समकालीन आंकड़े होने जरूरी हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि आरक्षण का वास्तविक लाभ धरातल पर मौजूद जरूरतमंदों तक पहुंचे और पूरी चुनावी प्रक्रिया संवैधानिक रूप से वैध रहे नियम यह भी है कि यदि कोई राज्य सरकार इन तीनों शर्तों (ट्रिपल टेस्ट) को पूरा किए बिना या आयोग की रिपोर्ट के बिना चुनाव कराती है, तो उन ओबीसी सीटों को 'सामान्य श्रेणी' (General Category) की सीट मानकर ही चुनाव कराना होगा। यही वजह है कि यूपी सरकार अब पूरी विधिक तैयारी के साथ कदम आगे बढ़ा रही है। जून के पहले हफ्ते तक हो जाएगी आयोग में नियुक्तियां शासन स्तर से मिली जानकारी के अनुसार, समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का कार्यकाल 6 महीने का तय किया गया है। आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया इस महीने (मई) के अंत तक या जून के प्रथम सप्ताह में पूरी होने की उम्मीद है। यह आयोग जमीनी स्तर पर जाकर पिछड़पेपन की प्रकृति, उसके प्रभावों की समकालीन व सतत जांच करेगा। जिन क्षेत्रों में पिछड़ा वर्ग के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, वहां नए सिरे से सर्वे कराया जाएगा और उसी के आधार पर आरक्षण की रूपरेखा तैयार होगी।

दवा दुकानदारों का देशव्यापी बंद, 8 लाख मेडिकल स्टोर रहेंगे बंद; ऑनलाइन बिक्री पर संग्राम

भोपाल  ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट व ड्रगिस्ट और मध्य प्रदेश केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर सभी प्राइवेट मेडिकल दुकानें बंद रहेंगे। हड़ताल की वजह से मरीजों को जरूरी दवाइयों के लिए परेशान होना पड़ सकता है, ऐसे में एक दिन पहले पर्याप्त डोज लेकर रख सकते हैं। दवा बाजार की हड़ताल में यहां मिलेगी दवाइयां इस हड़ताल में इमरजेंसी के लिए प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों की मेडिकल खुली रहेंगी। प्रदेशभर में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर भी दवाइयां मिलेंगी। जयारोग्य अस्पताल, जिला अस्पताल, प्राइवेट अस्पतालों की मेडिकल दुकानों को हड़ताल से दूर रखा गया है। देशभर में ऑनलाइन और ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स पर दवा बिक्री के विरोध में ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स ने 20 मई को देशव्यापी बंद का ऐलान किया है। संगठन का दावा है कि इस दौरान दिल्ली में करीब 15 हजार और देशभर में लगभग 7 से 8 लाख मेडिकल स्टोर बंद रह सकते हैं। हालांकि, आपातकालीन दवा सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है। कारोबार हो रहा प्रभावित केंद्रीय औषधि मानक संगठन नियंत्रण (CDSCO) के सूत्रों का कहना है कि कई राज्य स्तरीय रिटेल फार्मेसी एसोसिएशनों ने इस हड़ताल से दूरी बना ली है और दवाओं की उपलब्धता सामान्य बनाए रखने का भरोसा दिया है। दिल्ली रिटेल डिस्ट्रीब्यूशन केमिस्ट अलायंस (RDCA) के अध्यक्ष संदीप नांगिया ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भारी छूट और तेज डिलीवरी देकर छोटे मेडिकल स्टोर्स के कारोबार को प्रभावित कर रहे हैं। दवा दुकानों की हड़ताल से कौन-कौन बाहर? हालांकि, सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा है कि इस हड़ताल का असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि कई राज्य स्तरीय फार्मेसी एसोसिएशनों ने इसका समर्थन नहीं किया है. सूत्रों के मुताबिक, सभी बड़े फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, जन औषधि केंद्र और AMRIT फार्मेसी स्टोर मंगलवार को खुले रहेंगे।  सूत्रों ने बताया कि पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, केरल, छत्तीसगढ़, सिक्किम और लद्दाख समेत कई राज्यों के फार्मेसी संगठनों ने लिखित रूप से भरोसा दिया है कि वे हड़ताल में शामिल नहीं होंगे और दवाओं की सप्लाई सामान्य बनी रहेगी।  ऑनलाइन प्लेटफार्मों पर बिक रही नकली दवाएं कोरोना काल में अधिसूचना जीआरएस 220 ई के जरिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है, जिसे तुरंत वापस ली जाए। अवैध रूप से ई-कॉर्पोरेट्स द्वारा बाजार में कब्जा किया जा रहा है। यह मूल्य निर्धारण में मनमानी कर रहे हैं, जिसे रोका जाना चाहिए। ऑनलाइन फार्मेसियों और प्लेटफार्मों पर मिलावटी या नकली दवाएं बेची जा रही हैं। इन्होंने हड़ताल से बनाई दूरी कई केमिस्ट असोसिएशन की ओर से 20 मई को प्रस्तावित भारत बंद और हड़ताल को लेकर दवा कारोबारियों के संगठन ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन (AICDF) ने खुद को इससे अलग कर लिया है। संगठन ने कहा कि इस बंद का समर्थन नहीं करेंगे। दावा है कि इससे अव्यवस्था बढ़ेगी और व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ेगा। AICDF के अध्यक्ष कैलाश गुप्ता ने बताया कि बंद बुलाने वाले ने संगठनों का उद्देश्य व्यापारियों के हितों की रक्षा से ज्यादा बाजार में दबाव बनाना प्रतीत होता है।

एमपी में खर्चों पर सख्ती, मोहन यादव ने निगम और मंडल अध्यक्षों को दिए बचत के निर्देश

भोपाल  मध्य प्रदेश में नवनियुक्त निगम, मंडल, बोर्ड, आयोग और प्राधिकरणों के नए अध्यक्ष और सदस्यों को ट्रेनिंग दी गई है। इस दौरान सभी नए पदाधिकारियों को सीएम मोहन यादव ने संबोधित किया है। उन्होंने कहा है कि अनेकता में एकता ही हमारी ताकत है। हम योग्यता का सम्मान करते हैं। साथ ही उन्होंने भाषा में सौम्यता रखने की ट्रेनिंग दी है। योग्यता के आधार पर दी गई है जिम्मेदारी सीएम मोहन यादव ने कहा कि हम योग्यता का सम्मान करना जानते हैं और इसीलिए योग्यता के आधार पर सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में नैतिकता और शुचिता बेहद जरूरी है। हमें अटल जी के आदर्शों पर चल कर इस देश और प्रदेश की सेवा करनी है। उन्होंने कहा कि भाषा में सौम्यता और निर्णय में दृढ़ता हो। आपकी यह नियुक्ति सिर्फ पद नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश की सेवा का सुनहरा अवसर है। सेवा भावना से करें काम मोहन यादव ने कहा कि हमें परमेश्वर ने जनसेवा का अवसर दिया है इसीलिए सभी नवनियुक्त पदाधिकारी पूरी प्रशासनिक दक्षता, पूर्ण क्षमता, निष्ठा और सेवा भावना से काम करें। आप सब एमपी सरकार का अभिन्न अंग हैं। आपके काम से ही सरकार की समाज और नागरिकों में साख बनेगी। इसीलिए पहले अपने काम को अच्छी तरह से समझें, विभागीय नीतियों और नियमों का समुचित अध्ययन करें। अपने उपलब्ध संसाधनों का उत्कृष्ट नियोजन करें और बेहतर तालमेल एवं सामंजस्य से अपने कार्य दायित्व को अंजाम दें। आत्मानुशासन से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना है उन्होंने कहा कि वित्तीय प्रबंधन एक बड़ी चुनौती होती है। इसीलिए अपने दायित्व के दायरे में रहकर आत्मानुशासन से हमें आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ना है। इसके लिए वित्तीय अनुशासन लाना, फिजूल खर्ची पर कड़ा अंकुश लगाना और नवाचारों के माध्यम से आय के नए स्रोत बनाना बेहद जरूरी है। नवनियुक्त पदाधिकारी अपने संस्थान के अधिकारियों के साथ टीम भावना से काम करें और अपने मितव्ययिता पूर्ण काम से ही अपनी पहचान बनाएं। उन्होंने कहा कि सरकार जो भी दायित्व दे, उसे हमें एक परिवार भाव और उदात्त कर्तव्य भाव से पूरा करना चाहिए। अनावश्यक चीजों से बचना है हमें सीएम मोहन यादव ने कहा कि सभी पदाधिकारी पूरी गरिमा से अपने दायित्वों को अंजाम दे। सोच-विचार कर ही अपने सहयोगी रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें अनावश्यक प्रचार और अनावश्यक चीजों से भी बचना है। कदाचार पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति है। इसीलिए अपने संस्थान में किसी भी प्रकार के कदाचार को कतई बर्दाश्त न करें। ऐसे काम और ऐसे लोगों से भी दूरी बनाकर रखें, जिनसे आपकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि जनहित आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए। यह आपको आपसी समन्वय और टीम वर्क के मार्ग पर चलना है।  

तरबूज कांड पर बढ़ा हड़कंप, मौत के मामले में भोपाल तक सक्रिय हुई एजेंसियां

 भोपाल / श्योपुर मध्य प्रदेश के श्योपुर में तरबूज खाने के बाद ड्राइवर पिता की मौत और बेटे की तबियत बिगड़ने के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। मामला अब राजधानी भोपाल तक पहुंच गया है। शहर के खातौली तिराहे के पास किराये के मकान में किराये से रहने वाले इंद्र सिंह परिहार और उनके पुत्र विनोद परिहार की संदिग्ध परिस्थितियों में तबीयत बिगडने और कोटा रेफर के दौरान इंद्र सिंह की मौत के मामले में फिलहाल पुलिस जांच कर रही है। अब इस मामले में पशुपालन विभाग ने भी अपनी जांच शुरू कर दी है। रविवार को पशुपालन विभाग ने भी चार सदस्यीय टीम गठित कर पोल्ट्री फार्म से सेंपल लिए है। पशुपालन विभाग पहुंची पोल्ट्री फार्म, भोपाल भेजे सैंपल सुभाष बाबू दोहरे उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने बताया कि, तीन पशु चिकित्सक सहित चार सदस्यीय टीम गठित कर पोल्ट्री फार्म से सेंपल लिया गया है। टीम द्वारा लिए गए सेंपल को जांच हेतु भोपाल भी भेजा जा चुका है। जहां से जांच उपरांत आने वाले रिपोर्ट के आधार पर ही विधि अनुसार कार्रवाई की जाएगी।उन्होंने बताया कि, गठित टीम पोल्ट्री फार्म की सतत निगरानी व देखरेख करेगी। सुभाष बाबू दोहरे ने बताया कि, टीम के सदस्य डॉ. सचिन उपाध्याय ने जानकारी दी है कि, यहां साफ-सफाई पाई गई है साथ ही मुर्गियों में भी ऐसे कोई लक्षण नहीं पाए गए जिससे किसी प्रकार की आशंका व्यक्त की जा सके। डॉक्टरों ने बताया था संभाविक कारण हालांकि इंद्र सिंह की मौत और विनोद की गंभीर हालत का वास्तविक कारण अभी सामने नहीं आया है, लेकिन आशंक व्यक्त की जा रही है कि कोई बर्ड संक्रमण भी हो सकता है, क्योंकि ये दोनों पोल्ट्री फार्म पर काम करते थे। वहीं दूसरी ओ किसी केमिकल का भी दुष्प्रभाव होने की आशंका व्यक्ति की जा रही है, लेकिन चिकित्सक साफ तौर पर रहे है कि तरबूज खाने से मौत होने जैसी स्थितियां कहीं से नजर नहीं आ रही है। वहीं पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में प्रारंभिक रूप से पाया गया है कि गला चोक होने से इंद्र सिंह की मौत हुई है। विनोद की हालत अभी स्थिर मृतक इंद्रसिंह के पुत्र विनोद का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है और आईसीयू में वेंटीलेटर पर है। दो दिन बाद भी हालत अभी स्थिर है। चिकित्सकों का कहना है कि विनोद की हालत पहले जैसी ही है। तरबूज खाने के बाद अचानक बिगड़ी तबियत बता दें कि, 15 मई शुक्रवार को सुबह 5 बजे इंद्र सिंह व उनके पुत्र विनोद की सुबह अचानक तबीयत खराब हो गई थी, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया था। लेकिन इंद्र सिंह की रेफर के दौरान मौत हो गई थी वहीं बेटा विनोद का उपचार अभी जारी है। बताया गया है कि, मृतक इंद्र सिंह अपने परिवार के साथ पोल्ट्री फार्म में काम करते थे। ऐसे में बर्ड संक्रमण की आशंकाओं के बीच इस मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। 

लू के थपेड़ों से पंजाब बेहाल, बठिंडा में पारा 47 डिग्री पार; मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

पटियाला  पंजाब में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। लू चलने से सोमवार को भीषण गर्मी रही। इससे राज्य के तापमान में 2.3 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई। पारा अब सामान्य से 3.1 डिग्री ऊपर पहुंच गया है। 47 डिग्री के तापमान के साथ बठिंडा राज्य में सबसे गर्म रहा। मौसम विभाग ने मंगलवार को फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, लुधियाना, बरनाला, मानसा और संगरूर में लू चलने का अलर्ट जारी किया है। बुधवार से लू पूरे पंजाब को अपनी चपेट में ले लेगी। विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री की वृद्धि दर्ज की जा सकती है। सोमवार को पटियाला का पारा 44 डिग्री दर्ज हुआ, जो सामान्य से 4.5 डिग्री ऊपर रहा। पटियाला में लू की स्थिति रही। अमृतसर का अधिकतम पारा 42.0 डिग्री, लुधियाना का 42.2 डिग्री, पटियाला का 44.0 डिग्री, पठानकोट का 40.9 डिग्री, फाजिल्का का 42.6 डिग्री, फिरोजपुर का 42.0 डिग्री, एसबीएस नगर का 39.9 डिग्री, गुरदासपुर का 42.0 डिग्री, होशियारपुर का 40.0 डिग्री और रूपनगर का 42.3 डिग्री दर्ज किया गया। वहीं पंजाब के न्यूनतम तपमान में 0.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। यह फिलहाल सामान्य के नजदीक बना है। सबसे कम 20.4 डिग्री का न्यूनतम पारा पठानकोट का दर्ज किया गया। अमृतसर का न्यूनतम पारा 24.7 डिग्री, लुधियाना का 25.0 डिग्री, पटियाला का 26.0 डिग्री, बठिंडा का 20.3 डिग्री, फिरोजपुर का 22.7 डिग्री, होशियारपुर का 21.1 डिग्री और रूपनगर का 20.9 डिग्री दर्ज किया गया।  मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा पूर्वानुमान में 19 मई से 22 मई तक लू चलने की चेतावनी दी गई है। दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ाएंगी, वहीं रात के तापमान में भी लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद कम दिखाई दे रही है। मौसम विभाग के स्थानीय मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 19 मई को अधिकतम तापमान 44 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। इस दिन दोपहर और शाम के समय तेज सतही हवाओं के साथ हीट वेव की स्थिति बनी रहेगी। विभाग ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि दोपहर के समय बिना जरूरत घर से बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। 20 मई को भी गर्मी से राहत मिलने के कोई संकेत नहीं हैं। इस दिन अधिकतम तापमान 44 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने दोपहर और शाम के समय हीट वेव जारी रहने की चेतावनी दी है। लगातार गर्म हवाएं चलने से लोगों को लू के थपेड़ों का सामना करना पड़ेगा। 21 मई को तापमान में मामूली गिरावट के बावजूद गर्मी का असर बरकरार रहेगा। अधिकतम तापमान 43 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। विभाग के मुताबिक इस दिन भी दोपहर और शाम के समय हीट वेव की स्थिति बनी रहेगी। आर्द्रता 50 प्रतिशत से 35 प्रतिशत तक रह सकती है, जिससे उमस भी लोगों की परेशानी बढ़ाएगी। 22 मई को भी हालात लगभग समान बने रहेंगे। मौसम विभाग ने अधिकतम तापमान 43 डिग्री और न्यूनतम 27 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान जारी किया है। पूरे दिन गर्म हवाएं चलने की संभावना है। हालांकि 23 मई से मौसम में कुछ बदलाव देखने को मिल सकता है और आसमान मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई गई है। तेज हवाओं के कारण फिलहाल वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया है और स्थिति अभी गंभीर श्रेणी में नहीं पहुंची है। बावजूद इसके विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि लगातार पानी पीते रहें, धूप में निकलने से बचें और शरीर को हाइड्रेट रखें ताकि लू और डिहाइड्रेशन से बचाव किया जा सके।   

पंजाब में बिजली व्यवस्था होगी सुरक्षित, खेतों से हटेंगे खुले तार; CM मान की बड़ी घोषणा

संगरूर. पंजाब के खेतों में बिजली के खंभों व ऊपर से गुजरने वाली तारों से किसानों को होने वाली परेशानियों को खत्म करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने अपने पैतृक गांव सतोज से खेतों में बिजली की लाइनों को अंडरग्राउंड करने की महत्वाकांक्षी परियोजना की शुरुआत की। इस परियोजना पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार के अनुसार सतोज गांव में करीब सात किलोमीटर लंबी हाईटेंशन लाइन तथा 9.5 किलोमीटर लो टेंशन बिजली लाइनों को जमीन के नीचे डाला जाएगा। इसके तहत खेतों में लगे बिजली के खंभों व खुली तारों को हटाकर आधुनिक अंडरग्राउंड केबल प्रणाली विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने क्या कहा? मुख्यमंत्री ने कहा कि खेतों में बिजली की खुली तारों के कारण अक्सर शॉर्ट सर्किट या स्पार्किंग से फसलों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नई योजना से ऐसी घटनाओं पर काफी हद तक रोक लग सकेगी। मुख्यमंत्री मान ने कहा कि यह परियोजना केवल सतोज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि चरणबद्ध तरीके से पूरे पंजाब में लागू की जाएगी। इससे किसानों को सुरक्षित और बाधारहित खेती का वातावरण मिलेगा। खेतों में खंभों और तारों के हटने से कृषि कार्यों में भी सुविधा बढ़ेगी तथा आधुनिक मशीनों के उपयोग में आने वाली दिक्कतें कम होंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हितों को प्राथमिकता दे रही है और खेती को अधिक सुरक्षित, आधुनिक तथा सुविधाजनक बनाने के लिए लगातार नई योजनाएं लागू की जा रही हैं। ग्रामीण इलाकों में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ किसानों की जमीन को तारों और खंभों से मुक्त करना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है। गांव सतोज में इस योजना की शुरुआत को किसानों ने भी सराहा है। किसानों का कहना है कि अंडरग्राउंड बिजली व्यवस्था लागू होने से फसलें सुरक्षित रहेंगी और खेतों में काम करना पहले से अधिक आसान होगा।

महिला सुरक्षा से कुपोषण तक एक्शन प्लान तैयार, बस्तर बैठक में शाह ने दिए बड़े निर्देश

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में पहली बार मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में जगदलपुर में हुई इस बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी।  बैठक में राज्यों के विकास के साथ-साथ गंभीर सामाजिक और सुरक्षा मुद्दों पर कड़े फैसले लिए गए हैं। बैठक में चारों राज्यों में अपराध नियंत्रण, विशेषकर महिलाओं के उत्पीड़न और रेप जैसे मामलों पर जल्द फैसले लेने पर चर्चा की गई। विकास, समन्वय और सीमावर्ती मुद्दों पर चर्चा मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक में राज्यों के बीच आपसी समन्वय, कानून व्यवस्था, सीमा विवाद, परिवहन, बिजली, जल संसाधन और आंतरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में संयुक्त रणनीति और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल पर भी फोकस रहा। बस्तर को नई पहचान देने की कोशिश बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक खत्म होने के बाद अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजरें टिकी हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसके जरिए केंद्र सरकार बस्तर को लेकर अपना भविष्य का विजन और बड़ा रोडमैप देश के सामने रखेगी। इसके जरिए सरकार यह साफ संदेश देने की कोशिश कर रही है कि बस्तर अब केवल संघर्ष या नक्सलवाद की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में यह अंचल पर्यटन, निवेश, तेज विकास और बड़ी प्रशासनिक गतिविधियों के एक नए और मजबूत केंद्र के रूप में उभरेगा, जिसकी शुरुआत इस सफल बैठक से हो चुकी है। वर्चुअल हो सकती थी बैठक- दीपक बैज बस्तर में मध्य क्षेत्रीय परिषद की बैठक को लेकर PCC चीफ दीपक बैज ने तंज कसा। बैज के मुताबिक एक तरफ प्रधानमंत्री देश से पेट्रोल-डीजल बचाने और वर्क फ्रॉम होम करने का आह्वान करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही गृहमंत्री और मुख्यमंत्री उनकी बातों को हवा में उड़ा रहे हैं। जब केंद्रीय गृह मंत्रालय और सभी राज्यों के मुख्यमंत्री सचिवालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की हाईटेक सुविधाएं पहले से उपलब्ध हैं, तो इस बैठक को वर्चुअल भी किया जा सकता था।