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सत्ता का सेमीफाइनल बने निकाय चुनाव, 105 नगर निकायों में पार्टियां झोंकेंगी पूरी ताकत

चंडीगढ़  पंजाब में 26 मई को होने वाले निकाय चुनाव सूबे में सियासी दलों की नब्ज टटोलेंगे। 105 नगर निकायों (नगर निगम, नगर परिषद व नगर पंचायत) के यह चुनाव पंजाब के कुल 117 में से 90 विधानसभा क्षेत्रों को प्रभावित करेंगे। इन हलकों के शहरी इलाकों के मतदाताओं पर किस दल की कितनी पकड़ है, चुनाव परिणाम के बाद यह तय हो जाएगा।  दरअसल, सभी राजनीतिक दल इन निकाय चुनावों को विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता के सेमीफाइनल के तौर पर देखते हुए मैदान में उतरेंगे और जीत के लिए पूरी ताकत झोंकेंगे, क्योंकि आठ महीने बाद पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये चुनाव सभी दलों के लिए इसलिए अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव सीधे तौर पर एक करोड़ से अधिक शहरी मतदाताओं और 90 हलकों की सियासत पर केंद्रित हैं। नामांकन प्रक्रिया खत्म चुनावी प्रक्रिया के तहत नामांकन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है और अब दलों के जो मतदाता मैदान में हैं, उन्हें जितवाने के लिए पार्टी के रणनीतिकारों ने अपना काम शुरू कर दिया है। इस दौरान पिछले चुनावों की समीक्षा की जा रही है, तो वहीं वार्डवार मुद्दों की जमीन भी तैयार की जा रही है, क्योंकि कुछ कॉमन मुद्दों के साथ-साथ हर वार्ड के अलग-अलग मुद्दों पर चुनाव लड़ा जाना है। हालांकि भाजपा और आप अपनी केंद्र व प्रदेश स्तरीय नीतियों व एजेंडे को भी आगे रखेंगी, वहीं कांग्रेस और शिअद के निशाने पर आप सरकार रहेगी। सूबे में शहरी मतदाता अहम क्यों पंजाब में राजनीतिक दलों के लिए शहरी वोटर बहुत अहम माने जाते हैं, खासकर उन सियासी दलों के लिए जिनकी सियासत पंथक एजेंडे से ऊपर सूबे के विकास के इर्द-गिर्द घूमती है। भाजपा इन चुनावों को इसलिए खासा गंभीरता से ले रही है, क्योंकि अधिकतर गैर-सिख आबादी शहरों में ही बसती है, जिसे पंजाब में भाजपा अपनी ताकत मानती है। हालांकि भाजपा ने पिछले दिनों कुछ सिख व पंथक नेताओं को पार्टी में शामिल कर अपना फोकस सिख वोटरों पर भी बढ़ाया है, लेकिन पार्टी का मुख्य सियासी केंद्र गैर-सिख वोटर ही हैं। इसी तरह पंथक पार्टी शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की स्थिति ग्रामीण सिख वोटरों के बीच ठीक है। आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस की बात करें तो ये दोनों दल शहरों और ग्रामीण इलाकों में अपनी अच्छी पैठ रखते हैं। आप इस वक्त सत्तारूढ़ है, जबकि कांग्रेस विभिन्न धड़ों में बंटी हुई है। मतदाताओं का आशीर्वाद बढ़ाएगा मनोबल निकाय चुनाव में यह बात तो जाहिर है कि जिस दल को मतदाता जीत का आशीर्वाद देंगे, आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उसका मनोबल बढ़ेगा। आप के लिए परिणाम यह भी तय करेंगे कि कहीं प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर तो नहीं है, जबकि भाजपा को यह मालूम चल जाएगा कि पंजाब जीतने के लिए उनके प्रयासों और पार्टी की रणनीति को कितनी मजबूती मिली है। कांग्रेस यदि धड़ेबाजी में बंटी रही तो यह चुनाव पार्टी को एक और सबक देंगे, जबकि शिअद को इस बात का आभास हो जाएगा कि शहरी और गैर-सिख मतदाताओं में उनकी पहुंच कितनी है। 

Stray Dogs मामले में SC का बड़ा फैसला, बच्चों और मरीजों की सुरक्षा को दी प्राथमिकता

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्‍तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है. Supreme Court of India ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश को बरकरार रखा है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।  मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ (Vikram Nath) की अगुवाई वाली बेंच ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने देशभर में बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की समस्या पर गंभीर चिंता जताई और राज्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं किया गया. अदालत के मुताबिक नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान बिना किसी ठोस और दीर्घकालिक योजना के चलाए गए, जिसके कारण पूरे तंत्र का उद्देश्य प्रभावित हुआ।  सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी आज की सुनवाई में सबसे जरूरी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी बताया कि अनुच्छेद 21 के तहत जिंदगी और आजादी के अधिकार में हर नागरिक का यह अधिकार शामिल है कि वह बिना किसी शारीरिक हमले के लगातार डर या सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों के काटने जैसी जानलेवा घटनाओं के खतरे के आजादी से घूम सके और सार्वजनिक जगहों तक पहुंच बना सके।  बेंच ने आगे कहा, 'राज्य मूक दर्शक बनकर नहीं रह सकता, जहां ह्यूमन लाइफ के लिए ऐसे खतरे, जिन्हें रोका जा सकता है. ऐसी घटनाएं उन वैधानिक तंत्रों के बावजूद बढ़ती जा रही हैं, जिन्हें विशेष रूप से इन खतरों से निपटने के लिए ही बनाया गया है।  बता दें कि आवारा कुत्तों से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 जुलाई को स्वत संज्ञान लिया था.  सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. कोर्ट ने सभी पक्षों को एक हफ्ते के अंदर अपनी लिखित दलीलें जमा करने का निर्देश भी दिया था और इस मामले में 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. याचिकाकर्ताओं, प्रतिवादियों, भारत सरकार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI), कुत्तों से प्यार करने वाले लोगों, कुत्तों के काटने से पीड़ित लोगों, पशु अधिकार कार्यकर्ताओं, केंद्र और राज्य सरकारों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों और इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद, अब मंगलवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है।  नवंबर 2025 में क्या हुआ? पिछले साल कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे सार्वजनिक जगहों जैसे अस्पताल, पार्क, रेलवे स्टेशन जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाकर उन्हें शेल्टर में ले जाएं. कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इन कुत्तों को एक बार नसबंदी हो जाने के बाद वापस उन्हीं इलाकों में नहीं छोड़ा जा सकता, जहां वो मिले थे।  कोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी रोक लगा दी थी, सिवाय उन जगहों के जो इसके लिए तय की गई थीं  अदालत का फैसला आने के बाद डॉग लवर्स और जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले एनजीओ ने इस आदेशों को वापस लेने के लिए याचिकाएं दायर कीं. इनमें से कई याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने जनवरी में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।  राज्‍य सरकारों पर तीखी टिप्‍पणी सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आवारा कुत्तों से होने वाली घटनाओं और बढ़ती शिकायतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्यों और नगर निकायों पर संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू करने का दबाव बढ़ गया है। 

TMC-Congress गठबंधन होता तो कितनी सीटें जीतती ममता? सामने आया बड़ा चुनावी समीकरण

कोलकत्ता  पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस भले ही सिर्फ एक राज्य केरल में जीत दर्ज करने में सफल रही हो, पर इन चुनाव में पार्टी यह साबित करने में सफल रही कि उसके बगैर INDIA गठबंधन के घटक दलों के लिए जीत आसान नहीं है। कम से कम पश्चिम बंगाल में यह बात सही बैठती है, क्योंकि भाजपा विरोधी वोट बंटवारे की वजह से तृणमूल कांग्रेस को करीब तीन दर्जन सीट का नुकसान हुआ है। 1 दर्जन से ज्यादा सीटों पर असर चुनाव परिणाम के आंकड़ों के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक सीट पर कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। वर्ष 2021 में इनमें से दस सीट टीएमसी के पास थी। पर इस बार कांग्रेस को टीएमसी और भाजपा के बीच जीत के अंतर से अधिक वोट मिले। इसके साथ टीएमसी को छह सीट का नुकसान नोटा की वजह से हुआ। इन सीट पर भी कांग्रेस को नोटा से अधिक वोट मिले थे। बंगाल में कुल विधानसभा सीटें 294 हैं, जिनमें से टीएमसी के खाते में 80 सीटें आईं हैं। जबकि, भाजपा 207 पर विजयी रही है। कांग्रेस ने 2 और लेफ्ट को 1 सीट मिली है। मुस्लिम वोटर्स ने दिया किसका साथ इसके साथ भाजपा को मुस्लिम वोट में विभाजन का भी फायदा मिला। मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर की कुल 43 में से 20 सीट पर भाजपा ने जीत दर्ज की। क्योंकि, मतदाता कांग्रेस, लेफ्ट, इंडियन सेकुलर फ्रंट और हुमायूं कबीर की पार्टी में बंट गए। जबकि वर्ष 2021 में मतदाता टीएमसी के पक्ष में एकजुट थे। उस वक्त टीएमसी को इन सीट में 35 और भाजपा को सिर्फ आठ सीटें मिली थी। लेफ्ट के पास सात फीसदी वोट राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में लेफ्ट वर्षों सरकार में रहा है। लेफ्ट के पास अभी भी करीब सात फीसदी वोट है। हार के बाद INDIA गठबंधन की दुहाई देने वाली पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहले स्थिति को समझ लेतीं, तो उन्हें इस तरह हार का मुंह नहीं देखना पड़ता। विश्लेषकों का कहना है कि कई दर्जन ऐसी सीट हैं, जहां लेफ्ट और कांग्रेस को तृणमूल की हार के अंतर से अधिक वोट मिले हैं। स्थिति समझनी होगी कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि वक्त आ गया है कि सभी विपक्षी दल एक बार फिर एकजुट और नए सिरे से रणनीति बनाए। बकौल उनके, कांग्रेस अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है, पर क्षेत्रीय पार्टियों को भी स्थिति को समझना होगा। सभी घटक दलों के बेहतर तालमेल और साझेदारी के साथ चुनाव में उतरना होगा। इसके लिए लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा में एकजुटता जरूरी है। पहले भी हुआ नुकसान ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि विपक्षी दलों के मत विभाजन का फायदा भाजपा को मिला है। वर्ष 2022 के गुजरात और 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम इसकी मिसाल हैं। दिल्ली में कांग्रेस को करीब एक दर्जन सीट पर हार के अंतर से अधिक वोट मिले थे। इसी तरह गुजरात में आप की वजह से कांग्रेस को 39 सीट का नुकसान हुआ था। इन सीट पर आप को भाजपा की जीत के अंतर से अधिक वोट मिले थे। जबकि आप को सिर्फ पांच सीटें मिली थी।

भीषण गर्मी के बीच गुड न्यूज, जल्द दस्तक देगा मॉनसून; कई राज्यों में आज बरसेंगे बादल

नई दिल्ली भारत में मॉनसून की एंट्री में बस कुछ ही दिन बाकी हैं। खबर है कि मई के अंतिम सप्ताह में राहत भरी बौछारें केरल में दस्तक दे सकती हैं। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत के अधिकांश राज्य गर्मी का सामना करेंगे। हालांकि, उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों में बारिश के आसार हैं। इसके अलावा IMD यानी भारत मौसम विज्ञान विभाग ने मंगलवार को कम से कम 10 राज्यों में बारिश की संभावनाएं जताई हैं। आज भीगेंगे ये राज्य IMD ने मंगलवार को बताया है कि 19 मई से 22 मई के बीच जम्मू और कश्मीर, 20 से 22 मई के बीच उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। वहीं, इस दौरा हवा की रफ्तार 30-40 किमी प्रतिघंटा पहुंच सकती है। साथ ही अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 19 से 24 मई, गंगीय पश्चिम बंगाल में 21 और 22 मई, ओडिशा में 19 मई और 22 मई से 24 मई को बारिश के आसार हैं। बिहार में 19 से 21 मई के बीच, झारखंड में 20 मई, ओडिशा में 20 और 21 मई को तेज हवा के साथ भारी बारिश की संभावना है। दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु, तटीय कर्नाटक, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, केरल और माहे में 19 मई को भारी बारिश हो सकती है। 19 से 22 मई के बीच असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में बारिश के आसार हैं। अरुणाचल प्रदेश में 22 मई को भारी बारिश हो सकती है। जबकि, असम और मेघालय में ऐसा ही मौसम 21 और 22 को बन सकता है। कहां पहुंचा मॉनसून मौसम विभाग ने सोमवार को कहा कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के 26 मई को केरल पहुंचने की संभावना है। विभाग ने यह भी कहा कि मॉनसून के आगमन की तारीख में चार दिन का अंतर देखने को मिल सकता है। आईएमडी ने कहा कि अगले पांच दिनों में केरल और माहे के कुछ हिस्सों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, ऐसा दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में चक्रवाती परिसंचरण के कारण हो सकता है, जिससे केरल, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और दक्षिण लक्षद्वीप से सटे दक्षिण-पूर्वी अरब सागर में निम्न वायु दाब का क्षेत्र बन गया है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून दक्षिण-पूर्वी अरब सागर के अधिकांश हिस्सों और कन्याकुमारी क्षेत्र के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ चुका है। मौसम विभाग के अनुसार, यह दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी के अधिकांश हिस्सों, अंडमान सागर के अधिकांश भाग, अंडमान निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में भी आगे बढ़ चुका है।

सेहत के लिए साथ आएं सभी दल, सुखना लेक पर CM सैनी ने विपक्ष से भी की अपील

चंडीगढ़. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए विशेष सहयोग के आह्वान का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसी कड़ी में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक अनूठी पहल करते हुए साइकिल से सफर तय किया और जनता के बीच 'स्वस्थ भारत, स्वस्थ हरियाणा' का संदेश दिया। मुख्यमंत्री सैनी सुबह-सुबह चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना लेक पहुंचे। वहां उन्होंने न केवल मॉर्निंग वॉक की, बल्कि सैर पर आए आम नागरिकों और युवाओं से मुलाकात भी की। मुख्यमंत्री ने लोगों से बातचीत करते हुए उन्हें स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया। विपक्ष से भी मिलकर साथ आने की अपील इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने विपक्ष को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस राष्ट्रव्यापी आह्वान पर विपक्ष को भी राजनीति से ऊपर उठकर जनता के साथ मिलकर 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में साथ आना चाहिए। हरियाणा सरकार ने जारी की SOP मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए कहा, "हरियाणा में भी हमने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार अपनी राज्य सरकार के स्तर पर SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी कर दी है।" पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अब वर्चुअल मीटिंग के साथ-साथ 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) जैसे विकल्पों को भी अपनाने का फैसला किया है, जिससे यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी।

ईरान-अमेरिका तनाव और गहरा, 14 मांगों पर ट्रंप का साफ इनकार; युद्धविराम पर संकट

वाशिंगटन ईरान-अमेरिका के युद्ध में अब तक लग रहा था कि जल्दी ही दोनों पक्ष फिर से भिड़ जाएंगे. अमेरिका की ओर से लगातार धमकियां आ रही थीं, तो ईरान भी कभी चुप नहीं बैठा. ऐसे में माना जा रहा था कि 24-48 घंटों के भीतर ही खाड़ी फिर जल उठेगी. हालांकि अब थोड़ी राहत की खबर ये आई है कि कम से कम अमेरिका आगे के हमलों को टालने की योजना बना चुका है. पहले से ही दुनियाभर में तेल को लेकर हाहाकार मचा हुआ है, इस बीच ये खबर थोड़ी राहत जरूर देगी।  मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान दिया है. ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमला फिलहाल टाल दिया है. उनके मुताबिक कतर, सऊदी अरब और UAE के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अब ईरान के साथ गंभीर बातचीत चल रही है. वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने साफ कहा कि बातचीत का मतलब आत्मसमर्पण नहीं है. उन्होंने कहा कि तेहरान सम्मान, ताकत और अपने राष्ट्रीय अधिकारों की रक्षा करते हुए वार्ता में शामिल हुआ है।  अब तक ईरान युद्ध में क्या-क्या हुआ?     इस बीच इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष जारी है. अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम बढ़ाए जाने के बावजूद सोमवार को इजरायली हमलों में कम से कम सात लोगों की मौत हो गई. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक 2 मार्च से अब तक इजरायली हमलों और सैन्य कार्रवाई में 3020 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 9273 लोग घायल हुए हैं।      उधर गाजा के लिए राहत सामग्री ले जा रहे जहाजों को रोकने को लेकर भी इजरायल की आलोचना बढ़ रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायली बलों ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में गाजा सहायता बेड़े के कई जहाजों को रोक लिया. बताया जा रहा है कि करीब 47 नौकाओं को कब्जे में लिया गया और सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।      इस कार्रवाई के बाद कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सहायता जहाजों को रोकना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हो सकता है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, ईरान-अमेरिका वार्ता, लेबनान में जारी हमले और गाजा सहायता बेड़े को लेकर विवाद ने पूरे क्षेत्र को फिर से बड़े संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है।  ईरान ट्रंप-नेतन्याहू के सिर पर रखेगा इनाम पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को लेकर शांति वार्ता अभी भी अटकी हुई है। इस बीच ईरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर इनाम घोषित करने पर विचार कर रहा है. द टेलीग्राफ यूके की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की संसद एक ऐसे बिल पर वोटिंग की तैयारी कर रही है, जिसमें ट्रंप और नेतन्याहू की हत्या करने वाले व्यक्ति को इनाम देने का प्रस्ताव रखा गया है।   बार-बार शर्तें बदलने से समझौते में आ रही दिक्कत ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बघेई ने कहा कि पाकिस्तान ने ईरान की चिंताओं को अमेरिका तक पहुंचाया है. वहीं रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में जारी संघर्ष खत्म करने के लिए ईरान का नया संशोधित प्रस्ताव वॉशिंगटन को सौंपा है. एक पाकिस्तानी सूत्र ने कहा कि दोनों देश बार-बार अपनी शर्तें और मांगें बदल रहे हैं, जिससे समझौता करना मुश्किल हो रहा है।  ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियां हटाएगा अमेरिका ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम के मुताबिक अमेरिका ने बातचीत के दौरान ईरान के तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में राहत देने पर सहमति जताई है. यह राहत ईरान की बड़ी मांगों में शामिल थी ताकि वह शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हो सके. हालांकि अमेरिका ने अभी तक आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि अंतिम समझौता होने तक यह छूट लागू रह सकती है. वहीं पाकिस्तान ने ईरान की ओर से तैयार किया गया नया प्रस्ताव अमेरिका को सौंपा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्रस्ताव मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए है. एक पाकिस्तानी सूत्र ने कहा कि हमारे पास ज्यादा समय नहीं है और यह भी कहा कि दोनों देश बार-बार अपनी शर्तें बदल रहे हैं।   

सुखना लेक पर साइकिल चलाते नजर आए हरियाणा CM, लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील

चंडीगढ़ चंडीगढ़ की सुखना लेक पर मंगलवार सुबह हरियाणा के CM नायब सिंह सैनी अलग अंदाज में नजर आए। मुख्यमंत्री ने मॉर्निंग वॉक करने के साथ साइकिलिंग कर लोगों को फिटनेस और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘स्वस्थ भारत, विकसित भारत’ आह्वान के तहत मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि स्वस्थ नागरिक ही मजबूत राष्ट्र की नींव होते हैं। उन्होंने आम लोगों, युवाओं और मॉर्निंग वॉक पर आए नागरिकों से मुलाकात कर उन्हें नियमित व्यायाम और साइकिलिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया। आत्मनिर्भर भारत के लिए विपक्ष से भी मांगा सहयोग मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए देशवासियों से सहयोग मांगा है। इस अभियान में विपक्ष को भी राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी पूरा होगा, जब सभी मिलकर स्वास्थ्य, पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देंगे। विपक्ष से भी मिलकर साथ आने की अपील इस अवसर पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए आम जनता से सहयोग की अपील की है। उन्होंने विपक्ष को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस राष्ट्रव्यापी आह्वान पर विपक्ष को भी राजनीति से ऊपर उठकर जनता के साथ मिलकर 'विकसित भारत' के संकल्प को पूरा करने में साथ आना चाहिए। हरियाणा सरकार ने जारी की SOP मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी देते हुए कहा, "हरियाणा में भी हमने केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार अपनी राज्य सरकार के स्तर पर SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी कर दी है।" पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने अब वर्चुअल मीटिंग के साथ-साथ 'वर्क फ्रॉम होम' (घर से काम करने) जैसे विकल्पों को भी अपनाने का फैसला किया है, जिससे यातायात और प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। हरियाणा सरकार ने जारी की SOP मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि केंद्र सरकार की गाइडलाइंस के अनुसार हरियाणा सरकार ने भी अपनी SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी कर दी है। उन्होंने कहा कि प्रदूषण कम करने और ईंधन बचाने के लिए सरकार वर्चुअल मीटिंग और ‘वर्क फ्रॉम होम’ जैसे विकल्पों को बढ़ावा दे रही है। इससे ट्रैफिक का दबाव कम होगा और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। लोगों ने लिया फिटनेस का संकल्प सुखना लेक पर मौजूद लोगों ने भी मुख्यमंत्री के साथ बातचीत की और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संकल्प लिया। इस दौरान कई युवाओं ने साइकिलिंग और नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की बात कही। पीएम ने की थी देश से अपील गौरतलब है कि पीएम मोदी ने हालही में देश से ईंधन बचाने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की थी। पीएम मोदी की इस अपील के बाद देश के कई राज्यों के सीएम ने अपनी कारों का काफिला छोटा कर दिया था। खुद पीएम मोदी का काफिला भी छोटा हुआ था। इसके अलावा तमाम राज्यों के मंत्रियों और बड़े अधिकारियों ने भी अपना काफिला छोटा किया था। दिल्ली सरकार की सीएम और अन्य मंत्री तो दिल्ली मेट्रो में सफर करते हुए नजर आए थे। बीजेपी नेताओं ने भी अपने काफिले को छोटा करते हुए पब्लिक ट्रांसपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल में सफर करना शुरू किया था। वहीं विपक्ष ने पीएम मोदी की अपील के बाद पीएम मोदी पर ही निशाना साधा था और कहा था कि पीएम, देश को बताएं कि ऐसी कौन सी वजह है, जिसको लेकर पीएम मोदी को देशवासियों से इस तरह से अपील करनी पड़ रही है।  

भोपाल के रिटायर्ड जज की बहू केस में सास का बड़ा बयान, ‘अलग कमरे में सोने लगी थी ट्विशा’

 भोपाल मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कथित तौर पर ससुराल की प्रताड़ना की वजह से मौत के इस मामले में जहां एक तरफ पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, वहीं हर दिन कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं. बीते सोमवार को आरोपों में घिरी ट्विशा की सास ने मीडिया से बातचीत की. आरोपों में घिरी गिरबाला ने कहा कि मेरे बेटे समर्थ ट्विशा ने एक-दूसरे को पसंद किया था. सबसे पहले ट्विशा ही हमारे घर पर आई थी, उसके बाद उसके माता-पिता आए थे. उसके परिवार और हमारे परिवार में काफी अंतर था, फिर भी हमने शादी करवाई।  'दवा लेकर एक दो दिन ठीक रहती थी ट्विशा' उन्होंने कहा- वह बहुत कम उम्र में ही ग्लैमर वर्ल्ड में आ गई थी. उसका जाना हमारे लिए भी बहुत बड़ा झटका है. उसकी जो दवाई चल रही थी, उससे वह एक-दो दिन ठीक रहती थी, लेकिन फिर उसकी हालत पहले जैसी हो जाती थी. समर्थ कोर्ट में था, तभी ट्विशा ने उसे फोन कर बताया कि उसने MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) पिल ले ली है।  'प्रेग्नेंट हुई तो उसने पिल खा ली' गिरबाला ने कहा -पहला बच्चा परिवार के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, लेकिन उसने हमें एक पल की भी खुशी महसूस नहीं होने दी. 7 मई को उसने पिल्स ले ली थीं. मैं खुद उसका सिर गोद में लेकर बैठती थी. ट्विशा के पिता का व्यवहार अजीब रहता है. वह 20 साल तक उज्बेकिस्तान में फार्मा सेक्टर में रहे हैं और मुझे लगता है कि वह इसका संभावित स्रोत हो सकते हैं. मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।  'समर्थ उसे देखकर लगातार रो रहा था' उन्होंने कहा-  ये लोग फौज की बात करते हैं, लेकिन हमारी तो पीढ़ियां सेना में रही हैं. मेरे पति ने देश के लिए अपनी जान दी है. मुझे जांच एजेंसियों पर भरोसा है. ऐसा नहीं है कि मुझे सिर्फ इसलिए जमानत मिल गई क्योंकि मैं जिला जज रह चुकी हूं. कोई आम इंसान भी होता, तो उसे भी जमानत मिल जाती. मेरे बेटे को भी बेल मिल जाती।  ट्विशा की मौत हुई तो समर्थ तो AIIMS में नंगे पैर, बिना चप्पल के दौड़ रहा था और ये लोग कह रहे हैं कि AIIMS में हमारी सेटिंग है. समर्थ उसे देखकर लगातार रो रहा था. ड्रग्स के आरोपों पर ट्विशा ने खुद स्वीकार किया था कि उसने भारी मात्रा में मारिजुआना का सेवन किया था. वह बार-बार ज़िद करती थी कि उसे बच्चा नहीं चाहिए था. डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी से ट्विशा का इलाज चल रहा था. दवाइयां उसे प्रेस्क्राइब की गई थीं, लेकिन उसने उन्हें लिया नहीं था।  'ट्विशा के पिता ने मेरे बेटे पर आरोप लगाए' गिरबाला ने बताया कि ट्विशा के पिता ने मेरे बेटे पर ड्रग्स लेने के आरोप लगाए थे, लेकिन वह झूठ था. बाद में उनके पिता ने मुझसे माफी भी मांगी थी. वह ड्रग्स नहीं लेता. ट्विशा के परिवार वाले उल्टा हमें मारने दौड़े और हमें पुलिस बुलानी पड़ी. उसी दिन मैंने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस को पत्र लिखा था।  'ट्विशा और समर्थ में लड़ाई नहीं होती थी' उन्होंने कहा कि- ट्विशा और समर्थ के बीच कभी लड़ाई नहीं होती थी, लेकिन जब भी वह दिल्ली से लौटकर आती थी तो उसका व्यवहार बदल जाता था. MTP (मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी) के बाद ट्विशा ने समर्थ से कहा था कि उसे स्पेस चाहिए और वह अलग कमरे में सोने लगी थी. ट्विशा कहती थी कि उसके परिवार ने उसे बहुत छोटी उम्र से ही ग्लैमर वर्ल्ड में डाल दिया था. वह 17 तारीख को दिल्ली गई थी, लेकिन वह घर नहीं गई और पूरी रात कहां रही, यह उसने नहीं बताया. उसने पहले भी ऐसा कुछ किया था, जिसकी वजह से उबर ने ट्विशा को ब्लैकलिस्ट कर रखा था।  बता दें कि  बीते 12 मई को छत के सरिये से फांसी पर लटकी मिली ट्विशा शर्मा के केस में रोज नई परतें खुल रही हैं. वहीं ट्विशा के माता पिता का इसे मर्डर बता रहे हैं। 

PM सूर्य घर योजना में डिजिटल पहल, ‘सोलर चाचा’ व्हाट्सऐप चैटबॉट और ‘मेरा सोलर-बड़ा होनहार’ अभियान लॉन्च

प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत व्हाट्सऐप चैटबॉट सोलर चाचा एवं मेरा सोलर-बड़ा होनहार अभियान का हुआ शुभारंभ ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर करें कार्य : ऊर्जा मंत्री तोमर बैंकर्स और वेंडर्स समन्वय पूर्वक कार्य करें : मंत्री शुक्ला भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा कि भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिये सोलर एनर्जी का इस्तेमाल आज की महती आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ऊर्जा विभाग के साथ मिलकर कार्य करने को कहा। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिये महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये सभी बैंकर्स और सोलर एनर्जी सेक्टर में कार्य करने वाले वेंडर्स से समन्वय पूर्वक कार्य करने का आग्रह किया। ऊर्जा मंत्री तोमर और नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में आयोजित व्हाट्सपेए चेटबॉट, 'सोलर चाचा' और 'मेरा सोलर-बड़ा होनहार' प्रचार अभियान के शुभारंभ समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड एवं कॉउंसिल ऑफ एनर्जी एन्वायरमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के सहयोग से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ऊर्जा मंत्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना अंतर्गत प्रारंभ किये गये चेटबॉट और प्रचार अभियान से निश्चित की जनता लाभान्वित होगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जितना अधिक प्रचार-प्रसार होगा उतना ज्यादा लाभ जनता को भी मिलेगा। इससे अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। मंत्री तोमर ने कहा कि प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को आर्थिक लाभ पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि डिजिटल माध्यमों के उपयोग से अब योजना संबंधी जानकारी आमजन तक और अधिक सरलता एवं त्वरित रूप से पहुंचाई जा सकेगी। साथ ही ऊर्जा विभाग के माध्यम से सभी तरह की सोलर से जुड़े कार्य मे विभाग पूरी तत्परता के साथ सहयोग देगा। नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मंशानुसार प्रदेश के हर गाँव की हर छत पर सौर संयंत्र को स्थापित करने के समग्र प्रयास किये जायेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास होगा कि बिजली के बिल को न्यूनतम किया जाये ताकि सौर एनर्जी का उपयोग करने वालों को अधिकतम आर्थिक लाभ मिल सके। मंत्री शुक्ला ने सभी बेंकर्स और वेंडर्स को प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मंशानुसार लक्ष्यों की प्राप्ति के लिये तत्पर होकर कार्य करने का संकल्प लेने का आहवान किया। उन्होंने कहा कि बेंकर्स और वेंडर्स के कार्यक्षेत्र में आने वाली समस्याओं का यथासंभव शीघ्रता से निराकरण किया जायेगा। मंत्री शुक्ला ने कहा कि प्रदेश तेजी से अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है तथा नागरिकों को सौर ऊर्जा अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध संचालक अमनबीर सिंह बैंस ने बेंकर्स और वेंडर्स से सीधे संवाद कर जिज्ञासाओं का समाधान किया। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति में समन्वित प्रयास किये जायेंगे। इसमें कोई कमी नहीं छोड़ी जायेगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत अब तक 1,97,663 आवेदन प्राप्त हुए हैं तथा 1,25,291 सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनकी कुल क्षमता 469.39 मेगावाट है। भारत सरकार द्वारा इन स्थापनाओं के लिए अब तक 888.26 करोड़ रुपये का अनुदान प्रदान किया जा चुका है। कार्यक्रम में सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले एजेंसियों को मंत्री तोमर और मंत्री शुक्ला ने मंच से सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र प्रदान किये। उन्होंने वेंडर्स श्रेणी में मेसर्स सोलर स्क्वायर एनर्जी मेसर्स आरडी पावर एंड डेफा सॉल्यूशन प्रो. रूपेश राठौट मेसर्स एचएम सोलर एनर्जी सेटार्स शुभम सोलर सॉल्यूशन, मेसर्स भंडारी सोलट, मेसर्स सूर्यमटेक इंजीनियरिंग, मेसर्स ए जी सोलर मेसर्स ट्रायंगल एंटरप्राइजेज, मैसर्स कान्हा उठटपाइजेज, मेसर्स ग्रीन एटा सोलर सॉल्यूशंस मेसर्स ऑटोसिस इंदौर, मेसर्स महावीर मल्टी इंजीनियरिंग को सम्मानित किया। कार्यक्रम में बैंक श्रेणी में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब एण्ड सिंध बैंक और डिस्कॉम श्रेणी में मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड के अधिकारियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में नवकरणीय ऊर्जा कार्पोरेशन लिमिटेड के अधिकारी, बैंक प्रतिनिधि, विद्युत वितरण कंपनियों के अधिकारी तथा प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत कार्यरत पंजीकृत वेंडर्स उपस्थित रहे।  

महंगाई का नया झटका! पेट्रोल-डीजल के दामों में 90 पैसे की बढ़ोतरी, चंडीगढ़-पंजाब में क्या है नया भाव

चंडीगढ़  ईंधन के दामों में करीब 90 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। अब लुधियाना में पेट्रोल के नए दाम 101.98 रुपये हो गए हैं। वहीं डीजल 91.79 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं चंडीगढ़ में अब पेट्रोल का दाम 98.10 रुपये हो गया है। डीजल का भाव 86.09 रुपये प्रति लीटर हो गया है।  तीन दिन पहले बढ़े थे भाव तीन दिन पहले ही पेट्रोल-डीजल तीन रुपये लीटर महंगे हुए थे। जिसके बाद चंडीगढ़ में पेट्रोल के दाम 97.24 रुपये हो गए थे। वहीं डीजल 85.25 रुपये प्रति लीटर हो गया था। अब नई बढ़ोतरी से लोगों की जेब पर नया बोझ पड़ गया है। पटियाला में पेट्रोल 101.3 रुपये और डीजल का दाम 90.80 रुपये है। अमृतसर में पेट्रोल का भाव 101.30 रुपये और डीजल का 90.80 प्रति लीटर हो गया है।   वाहन चालकों में नाराजगी बताया जा रहा है कि वैश्विक ऊर्जा संकट और ईरान संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, आम लोगों का कहना है कि पहले से बढ़ी महंगाई के बीच ईंधन के दाम बढ़ने से घरेलू बजट बिगड़ गया है। पेट्रोल पंपों पर वाहन चालकों में नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा के खर्च पहले ही बढ़ चुके हैं और अब पेट्रोल-डीजल महंगा होने से सफर करना भी मुश्किल होता जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर नौकरीपेशा लोगों, ऑटो चालकों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। शहरवासियों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से सब्जियों, दूध और अन्य जरूरी सामान के दाम भी बढ़ेंगे। लुधियाना में पेट्रोल की कीमत ₹101.11 से बढ़कर ₹101.98 हो गई है, यानी इसमें 85 पैसे की बढ़ोतरी हुई। वहीं डीजल के दाम ₹90.90 से बढ़कर ₹91.79 पहुंच गए, जिससे 89 पैसे प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। जालंधर में पेट्रोल पहले ₹100.40 का था, तो अब बढ़ाकर ₹101.41 हो गया, जबकि डीज़ल ₹90.35 से बढ़ाकर ₹91.24 हो गया हैं। वहीं पठानकोट में पेट्रोल ₹101.60 से बढ़कर ₹102.46 हो गया, जबकि डीजल ₹91.38 से बढ़कर ₹92.25 हो गया है। चंडीगढ़ में पेट्रोल 97.27 से बढ़कर 98.12 रुपए हो गए। इसमें 85 पैसे की बढ़ोतरी हुई है। डीजल के रेट 85.25 से बढ़कर 86.09 रुपए हो गए। उसमें 84 पैसे बढ़े हैं। चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित सिटको पेट्रोल पंप के मैनेजर ने बताया की हमारे यहां अदानी टोटल गैस ग्रुप की सप्लाई है। सीएनजी के रेट आज ₹94.25 से बढ़कर ₹96 हो गए हैं। एक्सपर्ट क अनुसार, पेट्रोल-डीचल में हुई बढ़ोतरी से अब धान के सीजन में किसानों को ₹756 करोड़ ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। क्योंकि औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी? इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव है। ईरान और अमेरिका की जंग शुरू होने से पहले क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर थे जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गए हैं। क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें और भी बढ़ाई जा सकती हैं। डीजल के दाम बढ़ने का किसानों पर क्या असर… किसानों को ₹756 करोड़ ज्यादा खर्च करना पड़ेगाः पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सचदेवा के अनुसार, पेट्रोल-डीजल के रेट एक बार फिर से बढ़ गए हैं। धान के सीजन में डीजल के रेट बढ़ने का सीधा असर किसानों पर भी दिखता है। पांच दिन में डीजल के रेट करीब 4 रुपए प्रति लीटर बढ़ गए हैं। पहले 3.11 रुपए प्रति लीटर बढ़ोत्तरी हुई और अब 89 पैसे प्रति लीटर बढ़े हैं। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण सेल के अनुसार पंजाब में धान सीजन (4 महीने) में कुल 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत होती है। ऐसे में पंजाब की किसानी पर 756 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार पड़ेगा। चार महीने में 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत: पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के अुनसार, धान के चार महीने के सीजन के दौरान पंजाब में कुल 189 करोड़ लीटर डीजल की खपत का अनुमान है। पंजाब पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (PPDA) के अनुसार, धान के सीजन (जून से सितंबर) के दौरान पंजाब में डीजल की कुल बिक्री का लगभग 50% हिस्सा सीधे कृषि क्षेत्र और किसानों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता: पंजाब में खेत तैयार करने (कद्दू करने) से लेकर सिंचाई और फसल कटाई तक औसतन प्रति एकड़ करीब 90 लीटर डीजल खर्च होता है। वहीं कृषि विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक राज्य में लगभग 5.5 लाख पंजीकृत ट्रैक्टर, करीब 1.2 लाख फसल अवशेष प्रबंधन (पराली संभालने वाली) मशीनें और लगभग 1.5 लाख डीजल चालित ट्यूबवेल मौजूद हैं। इन कृषि उपकरणों और मशीनों में बड़े स्तर पर डीजल की खपत होती है, इसलिए डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर किसानों की खेती लागत और कृषि खर्च पर पड़ता है। अन्य चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं… डीजल के दाम बढ़ने का सीधा असर आम आदमी की जेब और किचन पर पड़ता है। इसे ऐसे समझिए: मालभाड़ा बढ़ेगा: ट्रक और टेम्पो का किराया बढ़ जाएगा, जिससे दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल और राशन महंगे हो जाएंगे। खेती की लागत: ट्रैक्टर और पंपिंग सेट चलाने के लिए किसानों को ज्यादा खर्च करना होगा, जिससे अनाज की लागत बढ़ेगी। बस-ऑटो का किराया: सार्वजनिक परिवहन और स्कूल बसों के किराए में भी इजाफा देखने को मिल सकता है।