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मध्य प्रदेश तंदूर बना! रिकॉर्ड तापमान से लोग बेहाल, इन जिलों में भीषण गर्मी की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मई के तीसरे सप्ताह में आग बरसने लगी है. सोमवार को पूरा प्रदेश तप गया. यहां कई जिलों में पारा 46°C से ऊपर पहुंच गया. वहीं मंगलावर को भी मौसम बेहद गर्म रहने वाला है, जिससे स्थिति और बिगड़ने वाली है. सोमवार को खजुराहो सबसे गर्म रहा. यहां टेम्परेचर रिकॉर्ड दर्ज किया गया. वहीं आज मध्य प्रदेश के 30 जिलों में लू का अलर्ट जारी किया है।  47 डिग्री के करीब पहुंचा पारा सोमवार को छतरपुर के खजुराहो में पारा 46.8 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, जबकि नौगांव में 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. राजगढ़ में पारा 45.5 डिग्री सेल्सियस, रतलाम में तापमान 45.4 डिग्री सेल्सियस, खंडवा में 45.1 डिग्री सेल्सियस, शाजापुर, श्योपुर-मुरैना में 45 डिग्री सेल्सियस, दमोह-सतना में तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस, सागर में पारा 44.7 डिग्री सेल्सियस, गुना-रीवा में 44.5 डिग्री, रायसेन में 44.4 डिग्री, खरगोन में 44.2 डिग्री, धार में 44.1 डिग्री, टीकमगढ़ और मंडला में पारा 44 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।  वहीं राजधानी भोपाल में तापमान 44 डिग्री रिकॉर्ड किया गया. वहीं इंदौर में 44.3 डिग्री, ग्वालियर में 43.7 डिग्री, उज्जैन में 44 डिग्री और जबलपुर में तापमान 44.2 डिग्री सेल्सियस पारा रहा।  30 जिलों में लू का अलर्ट इस बीच मौसम विभाग ने मंगलवार को प्रदेश के पांच जिलों में तीव्र लू की चेतावनी जारी की है, जबकि 30 जिलों में लू चलने का अलर्ट है. IMD के अनुसार, आज छतरपुर, दतिया, भिंड, टीकमगढ़ और निवाड़ी में तीव्र लू चलने की चेतावनी जारी की है. तो वहीं राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर समेत 30 से अधिक जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है. जबकि 20 जिलों में तेज गर्मी का अलर्ट जारी किया गया है।  इन जिलों में हीट वेव का अलर्ट भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, नीमच, राजगढ़, शाजापुर, धार, बड़वानी, खरगोन, बुरहानपुर, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, खंडवा, देवास, सीहोर, विदिशा, दमोह, पन्ना, गुना, अशोकनगर, रायसेन, नरसिंहपुर, सागर, शिवपुरी, श्योपुर और मुरैना में भी हीट वेव का अलर्ट जारी किया गया है. इसके अलावा जबलपुर, झाबुआ, नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा, आलीराजपुर, हरदा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, अनूपपुर, शहडोल, मंडला, डिंडौरी, उमरिया, कटनी, मैहर, रीवा, मऊगंज, सतना, सीधी और सिंगरौली में भीषण गर्मी का असर देखने को मिलेगा।  इन जिलों में लू का अलर्ट जारी मौसम विभाग के अनुसार, आज सोमवार को सूबे के ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, सागर, जबलपुर, दमोह, छतरपुर, सतना, रीवा, रतलाम, मंदसौर, नीमच, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर समेत कई जिलों में लू चलने का अलर्ट जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि, संबंधित क्षेत्रों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से लेकर 44 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई है। बड़े शहरों में तेज गर्मी बताया ये भी जा रहा है कि, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिल रहा है। हालांकि कुछ जिलों में लू का अलर्ट नहीं है, लेकिन वहां भी तेज धूप और गर्म हवाओं से लोग परेशान हैं। 16 शहरों में 43 डिग्री से ऊपर तापमान  प्रदेश के 16 शहरों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया। राजगढ़ के बाद रतलाम में 44.8 डिग्री, खंडवा में 44.5 डिग्री, नौगांव और खजुराहो में 44.4 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरों में भी तापमान 42 से 43 डिग्री के बीच बना रहा।मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक सतर्क रहने की सलाह दी है क्योंकि गर्मी का असर अभी कम होने की संभावना नहीं है।

आम आदमी पर महंगाई की नई मार, पेट्रोल-डीजल महंगा… फिर चर्चा में आया 90 पैसे फॉर्मूला

नई दिल्ली  पेट्रोल और डीजल के दाम फिर बढ़ गए हैं। एक हफ्ते में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल महंगा हुआ है। दिल्ली में मंगलवार को पेट्रोल के दाम 0.87 रुपये बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गए हैं। वहीं, दिल्ली में डीजल 0.91 रुपये बढ़कर 91.58 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। उपभोक्ताओं को फिलहाल LPG की कीमतों में राहत है। कंपनियों ने मंगलवार को LPG सिलेंडर के दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। कोलकाता में मंगलवार को एक लीटर पेट्रोल का रेट अब 109.70 रुपये और डीजल का रेट 96.07 रुपये हो गया है। जबकि, चेन्नई में पेट्रोल आज 19 मई से 104.49 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 96.11 रुपये हो गई है। 5 दिन पहले 3-3 रुपये बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम अभी 5 दिन पहले ही पेट्रोल-डीजल के रेट में 3-3 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। पहले जहां तेल कंपनियों का डेली घाटा करीब 1,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था, वहीं अब यह घटकर लगभग 750 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजार में महंगे कच्चे तेल और कमजोर रुपये की वजह से तेल कंपनियों पर काफी दबाव बना हुआ है। क्रिसिल के अनुमान के अनुसार, सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क में राहत और ताजा बढ़ोतरी से घाटा घटकर पेट्रोल पर लगभग 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर रह गया है। फिर भी, संघर्ष शुरू होने के बाद से कुल घाटा मई के अंत तक 1 लाख करोड़ रुपये के पार जाने का अनुमान है। देश अलग-अलग शहरों में पेट्रोल-डीजल का ताजा भाव     दिल्ली में पेट्रोल ₹0.87 महंगा होकर ₹98.64 प्रति लीटर और डीजल ₹0.91 बढ़कर ₹91.58 प्रति लीटर हो गया है.     मुंबई में पेट्रोल ₹0.91 बढ़कर ₹107.59 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 महंगा होकर ₹94.08 प्रति लीटर बिक रहा है.     कोलकाता में पेट्रोल ₹1 बढ़कर ₹109.70 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 चढ़कर ₹96.07 प्रति लीटर पहुंच गया है.     चेन्नई में पेट्रोल ₹0.79 महंगा होकर ₹104.46 प्रति लीटर और डीजल ₹0.86 बढ़कर ₹96.11 प्रति लीटर हो गया है.     गुरुग्राम में पेट्रोल ₹0.82 बढ़कर ₹99.29 प्रति लीटर और डीजल ₹0.86 महंगा होकर ₹91.80 प्रति लीटर बिक रहा है.     नोएडा में पेट्रोल ₹1.15 चढ़कर ₹98.91 प्रति लीटर और डीजल ₹1.22 बढ़कर ₹92.21 प्रति लीटर हो गया है.     बेंगलुरु में पेट्रोल ₹0.95 महंगा होकर ₹107.12 प्रति लीटर और डीजल ₹0.94 बढ़कर ₹95.04 प्रति लीटर पहुंच गया है.     भुवनेश्वर में पेट्रोल ₹0.52 बढ़कर ₹105.09 प्रति लीटर और डीजल ₹0.57 महंगा होकर ₹96.68 प्रति लीटर बिक रहा है.     चंडीगढ़ में पेट्रोल ₹0.83 बढ़कर ₹98.10 प्रति लीटर और डीजल ₹0.84 चढ़कर ₹86.09 प्रति लीटर हो गया है.     हैदराबाद में पेट्रोल ₹0.99 महंगा होकर ₹111.88 प्रति लीटर और डीजल ₹0.99 बढ़कर ₹99.95 प्रति लीटर पहुंच गया है.     जयपुर में पेट्रोल ₹1.71 बढ़कर ₹109.32 प्रति लीटर और डीजल ₹1.60 महंगा होकर ₹94.50 प्रति लीटर बिक रहा है.     लखनऊ में पेट्रोल ₹0.68 बढ़कर ₹98.40 प्रति लीटर और डीजल ₹0.72 चढ़कर ₹91.73 प्रति लीटर हो गया है.     पटना में पेट्रोल ₹1.10 महंगा होकर ₹110.02 प्रति लीटर और डीजल ₹1.08 बढ़कर ₹96.05 प्रति लीटर पहुंच गया है. 4 साल बाद बढ़े पेट्रोल-डीजल के रेट इससे पहले सरकारी तेल कंपनियों ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी. करीब 4 साल बाद तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव देखने को मिला. इससे पहले अप्रैल 2022 में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे. वहीं मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले सरकार ने ₹2 प्रति लीटर की कटौती की थी. पेट्रोल-डीजल और LPG रेट दिल्ली पेट्रोल: ₹98.64 प्रति लीटर डीजल: ₹91.36 प्रति लीटर घरेलू LPG सिलेंडर (14.2kg): ₹913 कमर्शियल सिलेंडर (19kg): ₹3,071.50 5 किलो सिलेंडर: ₹339 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट लखनऊ पेट्रोल: ₹98.42 डीजल: ₹91.73 घरेलू LPG: ₹950.50 कमर्शियल LPG: ₹3,194 5 किलो सिलेंडर: ₹352.50 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट कोलकाता पेट्रोल: ₹109.70 डीजल: ₹96.07 घरेलू LPG: ₹939 कमर्शियल LPG: ₹3,202 5 किलो सिलेंडर: ₹348 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट पटना पेट्रोल: ₹109.54 डीजल: ₹95.58 घरेलू LPG: ₹1,002.50 कमर्शियल LPG: ₹3,346.50 5 किलो सिलेंडर: ₹371.50 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट जयपुर पेट्रोल: ₹108.94 डीजल: ₹94.14 घरेलू LPG: ₹916.50 कमर्शियल LPG: ₹3,099 5 किलो सिलेंडर: ₹341.50 पेट्रोल-डीजल और LPG रेट बेंगलुरु पेट्रोल: ₹107.14 डीजल: ₹95.04 घरेलू LPG: ₹915.50 कमर्शियल LPG: ₹3,152 5 किलो सिलेंडर: ₹340 सरकार फिलहाल सब्सिडी देने के मूड में नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने साफ कहा कि तेल कंपनियों को राहत देने के लिए फिलहाल किसी सरकारी सब्सिडी पैकेज पर विचार नहीं हो रहा है। कंपनियां अब भी पेट्रोल, डीजल और LPG को लागत से कम कीमत पर बेच रही हैं। ईरान युद्ध से बढ़ा दबाव अमेरिका-इजराइल और ईरान संघर्ष के बाद वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हुई, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। सरकार ने लंबे समय तक घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखीं, लेकिन आखिरकार 15 मई को पेट्रोल-डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करनी पड़ी। इसके 5वें दिन ही एक बार फिर पेट्रोल-डीजल के रेट में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी तेल कंपनियों को सीमित राहत देती है, लेकिन इससे महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

भोजशाला में आज जश्न का माहौल, ऐतिहासिक निर्णय के बाद श्रद्धालु दीपक और आतिशबाजी से मनाएंगे उत्सव

धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर MP हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद भगवामय हो गया है. 15 मई 2026 को आए फैसले में हाई कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर भोजशाला को एक हिंदू मंदिर घोषित किया है, जिसके बाद से रोजाना नियमित रूप से श्रद्धालु भोजशाला पहुंच रहे हैं. चूंकि आज फैसले के बाद पहला मंगलवार है तो भोजशाला परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं, जिसके लिए प्रशासन ने सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत की है।  ऐतिहासकि फैसले में हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर करार दिया गौरतलब है मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई, 2026 को सुनाए अपने ऐतिहासकि फैसले में भोजशाला परिसर को एक हिंदू मंदिर करार दिया था. हाई कोर्ट ने अपने 242 पन्नों के फैसले में साल 2003 के उस प्रशासनिक आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया, जिसके तहत शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज और मंगलवार को हिंदुओं को पूजा की सीमित अनुमति थी।  हाई कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया हाई कोर्ट ने मंदिर के पक्ष में सुनाए अपने ऐतिहासिक फैसले में ASI की सर्वे रिपोर्ट को मुख्य आधार बनाया. हाई कोर्ट का फैसला ASI की 98 दिनों के वैज्ञानिक और पुरातात्विक सर्वे पर आधारित है, जिसमें आधार पर कोर्ट ने भोजशाला परिसर को मंदिर करार दिया. कोर्ट ने माना कि ऐतिहासिक साक्ष्यों और एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट से यह सिद्ध होता है कि इस स्थान का धार्मिक चरित्र मां सरस्वती का मंदिर ही है।  11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के प्रतापी राजा भोज ने की जशाला परिसर स्थापना उल्लेखनीय है ऐतिसाहसिक तथ्यों के मुताबिक 11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के प्रतापी राजा भोज ने भोजशाला परिसर स्थापना की थी. मूल रूप से संस्कृत अध्ययन का एक प्रतिष्ठित केंद्र और विद्या की देवी मां सरस्वती (वाग्देवी) को समर्पित एक भव्य भोजशाला मंदिर है. साल 1875 में खुदाई के दौरान यहां से मां वाग्देवी की एक अत्यंत सुंदर ऐतिहासिक प्रतिमा मिली थी, जिसे तत्कालीन ब्रिटिश अधिकारी अपने साथ इंग्लैंड ले गए थे। 

2029 की जंग से पहले दक्षिण में कांग्रेस मजबूत, क्या BJP की राह होगी मुश्किल?

नई दिल्ली केरल की सत्ता में वापसी के साथ कांग्रेस पार्टी के अरमानों को नए फंख लग गए हैं. इसके साथ ही कांग्रेस दक्षिण के पांच में से तीन राज्यों में सीधे और एक में परोक्ष रूप से सत्ता में भागीदार हो गई है. केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी में उसकी हालत ठीक है. वहीं उत्तर में पार्टी की एक मात्र राज्य हिमाचल प्रदेश में सरकार है. लेकिन, दक्षिण में मिली सफलता के बाद राजनीतिक पंडितों का एक धड़ा इस बात की चर्चा करने लगा है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी कहां खड़ी होती दिख रही है।  दरअसल, उत्तर और दक्षिण भारत का राजनीतिक मिजाज पूरी तरह अलग है. हर एक मानक पर देश के दोनों क्षेत्र बिल्कुल अलग है. देश भर में एकछत्र सफलता हासिल कर चुकी भाजपा दक्षिण की ओर बढ़ते-बढ़ते अपनी रफ्तार खो देती है. मौजूदा वक्त में केवल आंध्र प्रदेश में वह चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी सरकार में वह भागीदार है. हालांकि पुड्डुचेरी में भी उसी सरकार है. मगर पांचों बड़ों राज्यों यानी तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, केरल और तेलंगाना में से केवल कर्नाटक में ही पार्टी अपना एक ठोस जनाधार बना पाई है. वह कर्नाटक की सत्ता तक पहुंची है लेकिन बाकी के चारों राज्यों में उसकी मौजूदगी काफी कम है।  पूरे दक्षिण की बात करें तो यहां लोकसभा की कुल 130 सीटें हैं. इसमें से 39 तमिलनाडु, 28 कर्नाटक, 25 आंध्र प्रदेश, 20 केरल, 17 तेलंगाना और एक सीट पुड्डुचेरी में हैं. इसमें आंध्र प्रदेश को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर कांग्रेस की स्थिति अच्छी है. यानी कुल 106 सीटों पर कांग्रेस सीधी टक्कर में है. कांग्रेस ने बीते 2024 के लोकसभा चुनाव में दक्षिणी राज्यों में भी इंडिया गठबंधन के बैनर तले चुनाव लड़ा. ऐसे में गठबंधन को कुल 74 और भाजपा की एनडीए को 49 सीटों पर जीत मिली थी. केवल कांग्रेस की बात करें तो उसने अपने दम पर तमिलनाडु में नौ, कर्नाटक में नौ, आंध्र प्रदेश में शून्य, तेलंगाना में आठ और केरल में 14 सीटों पर जीत हासिल की. इस तरह उसे कुल 40 सीटों पर जीत मिली. वहीं भाजपा को अपने दम पर तमिलनाडु में शून्य, कर्नाटक में 17, आंध्र प्रदेश में तीन, तेलंगाना में आठ और केरल में एक सीट पर जीत मिली. उसे कुल 29 सीटें मिलीं. इस तरह पूरे इलाके में अकेले और बतौर गठबंधन दोनों स्थितियों में कांग्रेस का पलड़ा भारी है।  तमिलनाडु में बदल चुकी है स्थिति तमिलनाडु में राजनीतिक स्थिति बदल चुकी है. कांग्रेस ने अपने पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर टीवीके के साथ चली गई है. ऐसे में लोकसभा चुनाव में उसको इसका और अधिक फायदा मिल सकता है. दूसरी तरफ पार्टी केरलम में वापस सत्ता में आई है. तेलंगाना और कर्नाटक में उसकी सरकार है और वहां भाजपा ने लोकसभा चुनाव में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था. ऐसी स्थिति में दक्षिण में भाजपा के लिए चुनौती देखी जा रही है।  थोड़ी बात उत्तर की अब थोड़ी उत्तर भारत की भी बात कर लेते हैं. उत्तर भारत में वैसे तो कांग्रेस करीब-करीब पूरी तरह सत्ता से बाहर है लेकिन कुछ राज्यों में उसके मजबूत मौजूदगी को खारिज नहीं किया जा सकता. इसमें सबसे पहला नाम पंजाब का है. पंजाब में लोकसभा की 13 सीटें हैं. इसमें से सात पर कांग्रेस और तीन पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली थी. यहां आम आदमी पार्टी की सरकार है. राज्य में आम आदमी पार्टी दोफाड़ हो चुकी है. ऐसे में यहां पर भी कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है. इस राज्य में भाजपा की शून्य सीटें मिली थी।  इस कड़ी में दूसरा राज्य हरियाणा है. यहां लोकसभा की 10 सीटें हैं. भाजपा और कांग्रेस यहां बराबरी पर हैं और दोनों को पांच-पांच सीटों पर जीत मिली थी. उत्तर भारत में तीसरा सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है जहां कांग्रेस अभी भी मजबूत स्थिति में है. राज्य में लोकसभा की 26 सीटें हैं और बीते चुनाव में वह आठ सीटों पर जीत हासिल करने में कामयाब हुई थी. भाजपा को यहां 14 सीटों पर जीत मिली थी. कहने का मतलब है कि इन कुछ राज्यों से कांग्रेस को उम्मीद है. राजनीति के जानकार और आंकड़ों भी बताते हैं कि यहां अपने दम पर कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन कर सकती है. इस तरह से देखें तो दक्षिण की 130 और उत्तर भारत की 49 सीटों पर वह सीधे टक्कर में है. यानी कुल 179 सीटों पर वह टक्कर में है. इसके अलावा महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस की ठीकठाक मौजूदगी है। 

मध्यप्रदेश सरकार ला रही नई Attendance व्यवस्था, कर्मचारियों की हर मूवमेंट पर रहेगी नजर

भोपाल   मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के लिए नई खबर सामने आ रही है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश के 5.50 लाख सरकारी कर्मचारियों की बायोमैट्रिक अटेंडेंस के लिए सॉफ्टवेयर तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) से सैद्धांतिक सहमति मिलने के बाद यह काम एमपीएसईडीसी को सौंप दिया गया है। साथ-ही साथ सरकारी ऑफिसों में मशीनों की खरीदी और वेंडर चयन का काम भी शुरु हो गया है। इसके लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं। एमपीएसईडीसी जो सिस्टम तैयार कर रहा है, उसमें कर्मचारी के मशीन पर पंच करते ही उसका लॉग-इन सीधे केंद्रीय सर्वर पर दर्ज हो जाएगा। इसमें ऑटोमेशन फीचर को भी ऐड किया जा रहा है। जिसके जरिए रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी। शुरुआत में ये सॉफ्टवेयर मंत्रालय, सतपुड़ा, विंध्याचल और राजधानी के विभागाध्यक्ष कार्यालयों से होगी। इसके बाद इसे कमिश्नर कार्यालय, कलेक्ट्रेट और अन्य सरकारी दफ्तरों में लागू किया जाएगा। अब लगेगी शॉर्ट लीव और हॉफ डे नए सॉफ्टवेयर के आने के बाद कर्मचारियों के पंच करते ही सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के लिए पंच लग जाएगा। इसका समय सीधे क्रेंद्रीय सर्वर पर दर्ज होगा। साथ ही यदि कोई कर्मचारी अपनी सीट से जाता है तो ये सॉफ्टवेयर अपने आप शॉर्ट लीव और हॉफ डे दर्ज कर देगा। ये सिस्टम खुद ही बता देगा कि कौन कर्मचारी डेस्क पर है और कौन फ्रील्ड पर है। बदलेंगे ये 2 पुराने नियम मोहन सरकार अपने कर्मचारियों से जुड़े दो बड़े नियमों में भी बदलाव करने जा रही है। वर्षों पहले 'दो ही बच्चे अच्छे' वाली जो बंदिशें लगाई थी, उसे हटाने पर सहमति बन गई है। आदेश कभी भी जारी हो जाएंगे। जिसके बाद उन सैकड़ों कर्मचारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट जाएगी, जिन्होंने जाने अनजाने में दो से अधिक बच्चे पैदा किए हैं। सरकार का यह फैसला राहत देने वाला होगा। दूसरी तरफ कुछ शर्तों के साथ अधिकारी, कर्मचारियों के लिए गिफ्ट लेना पहले से आसान हो जाएगा। ये एक वर्ष के भीतर अपनी एक सैलरी के बराबर गिफ्ट ले सकेंगे। ज्यादा कीमती गिफ्ट लेने पर कार्रवाई के दायरे में आएंगे। अधिकारी, कर्मचारियों को निवेश भी सोच समझकर ही करना होगा। गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाया तो खैर नहीं निवेश की जाने वाली रकम, कमाई से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। ये सभी प्रावधान नए सिरे से तैयार किए जा रहे सिविल सेवा आचरण नियमों में किया जा रहा है। संशोधित सेवा नियम जारी होने बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सरकार उक्त नियमों में संशोधन कर एक तरफ जहां राहत देने जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ गिफ्ट को कमाई का जरिया बनाने से रोकने को लेकर भी कई कड़े प्रावधान किए जाने पर विचार चल रहा है।

बंगाल का ‘अग्निक्षेत्र’ बना फलता, ममता के किले को भेदना BJP के लिए क्यों है बड़ी चुनौती?

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की सियासत में 'डायमंड हार्बर' का इलाका हमेशा से हाई-वोल्टेज रहा है. इस वक्त सबसे बड़ा सियासी अखाड़ा बना हुआ है इसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला फलता विधानसभा क्षेत्र. चुनावी हिंसा के आरोपों के बाद निर्वाचन आयोग ने 29 अप्रैल को हुए मतदान को रद्द कर फालता में 21 मई को दोबारा मतदान कराने का फैसला किया।  फलता विधानसभा सीट पर चुनाव कैंपेनिंग के लिए आखिरी 48 घंटे बचे हैं. फलता की धरती पर राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर है. इस बार के विधानसभा चुनाव के केंद्र में हैं टीएमसी के कद्दावर उम्मीदवार जहांगीर खान, जिनके इर्द-गिर्द इस इलाके का पूरा समीकरण घूम रहा है।  बंगाल की सियासत में जहांगीर खान की तूती बोलती थी, लेकिन अब सत्ता बदल चुकी है. ऐसे में फलता सीट जो 15 सालों से टीएमसी का मजबूत गढ़ बना हुआ है, उस पर बीजेपी भी जीत का परचम फहराना चाहती है. ऐसे में क्या जहांगीर खान अपना सियासी प्रभाव जमाए रख सकेंगे या फिर सत्ता के बदलन के साथ ही सियासी गेम भी फालता का बदल जाएगा।  सिंघम' बनाम 'पुष्पा' की  चुनावी जंग  फालता का चुनाव आम सियासी लड़ाई से कहीं आगे निकलकर एक एक्शन फिल्म की स्क्रिप्ट जैसा हो चुका है. चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा, जिन्हें यूपी की सियासत में 'सिंघम' के तौर पर देखा जाता है. वहीं, टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने एक चुनावी जनसभा में खुलेआम चुनौती देते हुए कहा था, 'अगर तुम सिंघम हो, तो मैं पुष्पा हूं… पुष्पराज, झुकेगा नहीं।  पश्चिम बंगाल में हुए सत्ता परिवर्तन और बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब सियासी समीकरण पूरी तरह पलट गए हैं. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान जो कुछ दिन पहले तक गायब (अंडरग्राउंड) बताए जा रहे थे, वे चुनाव आयोग के निर्देश और पुलिस सुरक्षा के साये में वापस फालता लौटे हैं और अपने प्रचार में जुटे हैं।  फलता सीट का सियासी समीकरण फलता विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले में आती है. पारंपरिक रूप से यह इलाका टीएमसी और खासकर अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. देश की आजादी के बाद से फलता सीट पर 1952 से लेकर अब तक कुल 17 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और इस बार 18वीं बार चुनाव हो रहे. इस सीट की खासियत यह रही है कि यहां जब भी जो लहर आई, जनता ने लंबे समय तक उसी पार्टी का साथ दिया।  1952 से लेकर 2006 तक लेफ्ट ने नौ बार फलता सीट पर जीत दर्ज की है. कांग्रेस ने चार बार इस सीट पर जीत का परचम फहरा चुकी है तो टीएमसी भी 4 बार जीतने में सफल रही है. 2011 से लेकर अभी तक टीएमसी का दबदबा है. 2021 के चुनाव में टीएमसी ने यहां करीब 40 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी. इतिहास गवाह है कि फलता सीट पहले करीब तीन दशक तक वामपंथ का अभेद्य दुर्ग थी, जिसे बाद में टीएमसी ने अपना नया घर बना लिया।  देवांग्शु पांडा और जहांगीर खान में फाइट 2026 फलता सीट पर अभूतपूर्व पुनर्मतदान में चलते दोबारा चुनाव हो रहे हैं. बीजेपी के देवांग्शु पांडा और टीएमसी के जहांगीर खान के बीच मुख्य मुकाबला है. फलता का यह किला टीएमसी के पास सुरक्षित गढ़ रहा है, लेकिन बीजेपी अब इस सीट पर हरहाल में जीत का परचम फहराना चाहती है.  बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा, जो पेशे से वकील हैं, वे इस बार टीएमसी के 'खौफ वाले नैरेटिव' को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. केंद्रीय बलों की भारी तैनाती के कारण इस बार फर्जी वोटिंग या बूथ कैप्चरिंग की गुंजाइश न के बराबर है, जो बीजेपी के पक्ष में जा सकता है।  बीजेपी की प्रचंड जीत के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी ने फलता में खुद कमान संभाल ली है. उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार देवांशु पांडा के समर्थन में एक बड़ी रैली की और सीधे जहांगीर खान पर निशाना साधा. शुभेंदु ने सरेआम चेतावनी देते हुए कहा था कि वह (जहांगीर खान) खुद को पुष्पा कहता है, अब इस 'पुष्पा' की जिम्मेदारी मेरे ऊपर है. फलता के लोगों ने पिछले 10 साल से आजादी से वोट नहीं डाला है, लेकिन इस बार बिना किसी खौफ के मतदान कीजिए और बीजेपी को 1 लाख से अधिक वोटों से जिताइए।  फलता सीट पर क्या बीजेपी जीत सकेगी फलता विधानसभा सीट के सियासी समीकरण को देखें तो मुस्लिम और दलित वोटर अहम हैं. इस इलाके में अल्पसंख्यक और दलित मतदाताओं की संख्या अच्छी-खासी है, जो अब तक टीएमसी का पारंपरिक वोट बैंक रहे हैं, जहांगीर खान इसी समीकरण के भरोसे अपनी नैया पार लगाना चाहते हैं तो बीजेपी दलित वोटों और हिंदू वोटों के धार्मिक ध्रुवीकरण पर अपनी जीत की आस लगा रही है।  पश्चिम बंगाल की सत्ता में बीजेपी के आने के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस का रुख पूरी तरह बदल चुका है. फलता में पुलिस ने हाल ही में जहांगीर खान के बेहद करीबी और फलता पंचायत समिति के उपाध्यक्ष सैदुल खान को जानलेवा हमले और हिंसा फैलाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।  आखिरी 48 घंटे में आर-पार की लड़ाई फलता सीट पर चुनाव कैंपेनिंग के ये आखिरी 48 घंटे बेहद संवेदनशील हैं. एक तरफ टीएमसी और जहांगीर खान अपनी राजनीतिक साख बचाने के लिए घर-घर जाकर वोट मांग रहे हैं और सहानुभूति कार्ड खेलने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें फंसाया जा रहा है. वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी इस पुनर्मतदान को 'आतंक से मुक्ति' के उत्सव के रूप में प्रचारित कर रही है।  बंगाल में बीजेपी सरकार बनने के बाद 21 मई को होने वाला यह पुनर्मतदान सिर्फ एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं है, बल्कि यह इस बात का लिटमस टेस्ट है कि क्या केंद्रीय बलों और सख्त प्रशासन की मौजूदगी में डायमंड हार्बर के इस इलाके में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं. जहांगीर खान का 'पुष्पा' अवतार फाल्टा की जनता को भाता है या शुभेंदु अधिकारी का 'एक्शन' रंग लाता है, इसका फैसला 24 मई को नतीजों के साथ होगा।   

गाड़ियों की रफ्तार से छोटा पड़ रहा चंडीगढ़, पार्किंग के लिए जगह कम पड़ने लगी

चंडीगढ़  फ्रांसीसी आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए ने जब चंडीगढ़ को धरातल पर उतारा तो कुछ लोग इसमें जरूरत से अधिक खाली स्पेस देखकर छोड़कर चले गए। दूर-दूर तक इक्का-दुक्का वाहन ही दिखते थे। लेकिन यह किसी ने नहीं सोचा था कि इतना खुला शहर भी वाहनों के जंजाल में फंसकर हांफने लगेगा। ली कार्बूजिए शायद 60 वर्ष बाद का भविष्य देखते हुए शहर को गढ़ रहे थे लेकिन जनसंख्या और वाहनों का विस्फोट उनके गढ़े मॉडल से कहीं आगे निकल चुका है। चंडीगढ़ देश में सर्वाधिक कारों के घनत्व वाला शहर बन चुका है। यह समृद्धि गौरव का विषय होने के साथ ही गंभीर समस्या भी बन चुकी है। पांच लाख की आबादी के लिए बसाए गए चंडीगढ़ में हर तीन मिनट में एक नई कार सड़क पर उतर रही है। दस हजार नंबरों की नई सीरीज दो महीने में ही खत्म हो रही है। जमीनी हकीकत यह है कि अब पार्किंग के लिए जगह नहीं बची है। ग्रीन बेल्ट हो या साइकिल ट्रैक सभी पार्किंग की भेंट चढ़ चुकी हैं। कड़वी सच्चाई यह है कि इंसाफ के मंदिर कहे जाने वाले हाईकोर्ट हो या डिस्ट्रिक्ट कोर्ट यहां पर कारों की दोहरी लाइनें लगने लगी हैं। अभी आबादी 12 लाख, 2051 में 23 लाख होगी अभी चंडीगढ़ की आबादी 12 लाख है। 2051 तक यह बढ़कर दो गुना होगी। ट्राइसिटी में 2051 तक आबादी 45 लाख प्रोजेक्टेड है। प्रशासन न तो नई गाड़ियों के सड़क पर उतरने की रफ्तार को कम कर पाया है, न ही कोई योजना पार्किंग स्पेस देने की बना पाया। सड़क, पार्क, ग्रीन बेल्ट, फुटपाथ और खेल के मैदान हर जगह कारें खड़ी दिखाई देती हैं और प्रशासन मूकदर्शक बन इस बिगड़ती स्थिति को देख रहा है। ज्यादातर पार्क बन गए पार्किंग स्थल घनी आबादी वाले इलाकों में पार्किंग की समस्या सबसे ज्यादा है। वहां तेजी से लोग दोपहिया से चारपहिया की तरफ जा रहे हैं। इन इलाकों में पहले ही पार्किंग की जगह नहीं है, ऐसे में लोगों ने कालोनियों के छोटे-छोटे पार्कों में गाड़ियां खड़ी कर उसे पार्किंग बना दिया है। आलम यह है कि अब पार्कों में भी जगह नहीं बची है। ऐसे में सड़कों पर गाड़ियां खड़ी होने लगी हैं। शहर में बढ़ते वाहन और पार्किंग स्पेस विवरण (Description) आंकड़े / स्थिति (Data / Status) कार घनत्व (Car Density) 731 कारें प्रति 1,000 लोगों पर (पूरे देश में सबसे अधिक) शहर में कुल वाहन 10 लाख से अधिक वाहन मौजूद रोजाना सड़कों पर उतरने वाले नए वाहन 175 से अधिक गाड़ियां प्रतिदिन पड़ोसी शहरों (पंचकूला-मोहाली) से रोजाना आने वाले वाहन 1.5 लाख वाहन प्रतिदिन सरकारी गाड़ियां (पेट्रोल-डीजल) 3,724 वाहन पेड पार्किंग (Paid Parking) की स्थिति 89 स्थल (कुल 22,725 कारों के लिए स्पेस) फ्री पार्किंग (Free Parking) की स्थिति 200 स्थल (इसके बावजूद स्पेस की भारी कमी) पिछले वर्षों का रिकॉर्ड (संभावित 2022/23) 38,659 नई कारें पंजीकृत हुईं    

घर में रखें ये 8 हेल्थ गैजेट्स, इमरजेंसी में बन सकते हैं लाइफसेवर

 नई दिल्ली दुनियाभर में इन दिनों हंतावायरस को लेकर चर्चा बढ़ गई है. यह एक खतरनाक वायरस माना जाता है, जो ज्यादातर चूहों और दूसरे रोडेंट्स से इंसानों तक पहुंचता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक संक्रमित चूहों की लार या गंदगी के संपर्क में आने से यह वायरस फैल सकता है. कई मामलों में बंद जगहों की सफाई के दौरान हवा में फैले छोटे कणों से भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।  शुरुआती लक्षण आम वायरल जैसे लगते हैं, जैसे बुखार, शरीर दर्द, कमजोरी और सांस लेने में दिक्कत. गंभीर मामलों में यह फेफड़ों और शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।  हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम लोगों के लिए खतरा फिलहाल कम है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है. दूसरे देशों में इस वायरस के मामले लगातार मिल रहे हैं। हंतावायरस के खौफ के बीच अब कांगो में इबोला से अब तक 80 मौतें हो चुकी हैं. WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है।  इबोला वायरस ने फिलहाल अफ्रिका के दो मुल्कों में हड़कंप मचा रखा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर समय रहते इसे कंट्रोल नहीं किया गया तो हालात कोविड जैसे हो सकते हैं।  ऐसे समय में सिर्फ दवाइयां ही नहीं, बल्कि कुछ जरूरी हेल्थ डिवाइस घर में होना भी बहुत काम आ सकता है. खासकर तब जब घर में बुजुर्ग, बच्चे या पहले से बीमार लोग हों. कई बार छोटी-सी हेल्थ दिक्कत अचानक बड़ी इमरजेंसी में बदल जाती है और तब ये गैजेट तुरंत मदद करते हैं।  ऑक्सीमीटर कोविड के बाद यह डिवाइस लगभग हर घर का हिस्सा बन गया. ऑक्सीमीटर उंगली में लगाकर शरीर का ऑक्सीजन लेवल और पल्स चेक करता है।  अगर किसी को सांस लेने में दिक्कत हो रही हो, कमजोरी लग रही हो या वायरल के लक्षण हों, तो यह डिवाइस तुरंत संकेत दे सकता है कि बॉडी में ऑक्सीजन कम तो नहीं हो रही।  डिजिटल थर्मामीटर बुखार लगभग हर बीमारी का पहला संकेत होता है. इसलिए घर में एक अच्छा डिजिटल थर्मामीटर जरूर होना चाहिए. पुराने मर्करी थर्मामीटर के मुकाबले यह ज्यादा सेफ और तेज होता है. कुछ सेकंड में तापमान बता देता है और छोटे बच्चों के लिए भी आसान रहता है।  ब्लड प्रेशर मॉनिटर आजकल हाई BP और लो BP की समस्या बहुत आम हो चुकी है. कई बार टेंशन, वायरल या कमजोरी की वजह से अचानक ब्लड प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगता है. डिजिटल BP मॉनिटर घर में होने से तुरंत स्थिति समझी जा सकती है. खासकर बुजुर्गों और दिल के मरीजों के लिए यह बहुत जरूरी गैजेट माना जाता है।  एयर प्यूरिफायर हंतावायरस जैसी बीमारियों में साफ हवा और साफ माहौल बहुत जरूरी माना जाता है. अगर घर ऐसी जगह है जहां धूल, गंदगी या पॉल्यूशन ज्यादा रहता है, तो एयर प्यूरिफायर काफी मदद कर सकता है. अच्छे एयर प्यूरिफायर HEPA फिल्टर के साथ आते हैं, जो हवा में मौजूद छोटे पार्टिकल्स और डस्ट को फिल्टर करते हैं।  स्टीम इनहेलर नाक बंद होना, गले में परेशानी या सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्याओं में स्टीम इनहेलर काफी काम आता है. गर्म भाप लेने से सांस की नली खुलती है और राहत मिलती है. वायरल सीजन में यह छोटा गैजेट बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है।  नेब्युलाइजर अगर घर में किसी को अस्थमा, एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्कत है, तो नेब्युलाइजर जरूर होना चाहिए. यह लिक्विड दवा को धुंध में बदलकर सीधे फेफड़ों तक पहुंचाता है. अचानक सांस फूलने जैसी स्थिति में यह काफी मदद कर सकता है।  स्मार्ट हेल्थ वॉच आजकल कई स्मार्टवॉच सिर्फ स्टेप्स नहीं गिनतीं, बल्कि हार्ट रेट, SpO2, स्ट्रेस लेवल और स्लीप ट्रैकिंग जैसी चीजें भी मॉनिटर करती हैं. कुछ डिवाइस इरेगुलर हार्टबीट का अलर्ट भी देती हैं. लगातार हेल्थ ट्रैकिंग के लिए यह काफी काम की डिवाइस बन चुकी है।  पोर्टेबल इमरजेंसी लाइट और पावर बैंक यह सुनने में हेल्थ गैजेट नहीं लगता, लेकिन मेडिकल इमरजेंसी में बिजली जाना बड़ी समस्या बन सकता है. खासकर रात में या खराब मौसम में. इसलिए घर में चार्ज्ड पावर बैंक और इमरजेंसी लाइट रखना भी जरूरी है ताकि जरूरत पड़ने पर फोन, मेडिकल डिवाइस या इंटरनेट बंद न हो।  एक बात हमेशा याद रखनी चाहिए कि कोई भी गैजेट डॉक्टर की जगह नहीं ले सकता. लेकिन सही समय पर सही जानकारी देकर ये डिवाइस बड़ी परेशानी को समय रहते पकड़ने में मदद जरूर कर सकते हैं. यही वजह है कि अब हेल्थ एक्सपर्ट्स भी सलाह देते हैं कि घर में कुछ जरूरी मेडिकल गैजेट हमेशा मौजूद होने चाहिए, ताकि इमरजेंसी में घबराहट कम और तैयारी ज्यादा हो।   

मोबाइल स्क्रीन और गिरता बर्थ रेट! रिसर्च के दावे से दुनिया में हलचल

 नई दिल्ली दुनिया के कई देशों में एक बड़ी समस्या तेजी से बढ़ रही है. लोग पहले के मुकाबले कम बच्चे पैदा कर रहे हैं. कई देशों में हालात ऐसे हो गए हैं कि वहां की आबादी धीरे-धीरे घटने लगी है। पहले माना जाता था कि इसकी सबसे बड़ी वजह महंगाई, नौकरी का दबाव, छोटे घर और बदलती लाइफस्टाइल है. लेकिन अब रिसर्च में एक नया और चौंकाने वाला एंगल सामने आ रहा है. साइंटिस्ट्स और रिसर्चर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या स्मार्टफोन और सोशल मीडिया भी जन्म दर घटने की बड़ी वजह बन चुके हैं।  सोशल मीडिया बदल रहा है लाइफ फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के दो-तिहाई से ज्यादा देशों में बर्थ रेट उस स्तर से नीचे जा चुकी है, जिसे आबादी को स्टेबल रखने के लिए जरूरी माना जाता है।  आसान शब्दों में कहें तो अब कई देशों में लोग इतने बच्चे पैदा नहीं कर रहे कि अगली पीढ़ी पुरानी आबादी की जगह ले सके. साउथ कोरिया, जापान, चीन, यूरोप और अमेरिका जैसे देशों में यह प्रॉब्लम पहले से थी, लेकिन अब लैटिन अमेरिका, मिडिल ईस्ट और एशिया के कई देशों में भी यही ट्रेंड तेजी से दिख रहा है।  रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 10-15 साल में बर्थ रेट में अचानक आई गिरावट सिर्फ आर्थिक वजहों से नहीं समझाई जा सकती. रिसर्चर्स का मानना है कि स्मार्टफोन और सोशल मीडिया ने लोगों की जिंदगी जीने का तरीका बदल दिया है।  अब लोग पहले की तरह बाहर मिलना-जुलना कम कर रहे हैं. रिलेशनशिप बनाना मुश्किल हो रहा है और अकेलापन बढ़ रहा है. यही चीज आगे चलकर शादी और बच्चों पर असर डाल रही है।  जहां इंटरनेट फास्ट वहां बर्थ रेट स्लो! एक स्टडी में अमेरिका और ब्रिटेन में 4G इंटरनेट नेटवर्क आने के बाद के डेटा को देखा गया. इसमें पाया गया कि जिन इलाकों में तेज मोबाइल इंटरनेट पहले पहुंचा, वहां बर्थ रेट ज्यादा तेजी से गिरी. रिसर्चर्स का कहना है कि स्मार्टफोन आने के बाद यंगसटर्स का ज्यादा समय ऑनलाइन जाने लगा और आमने-सामने मिलने का समय कम हो गया।  एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब डेटिंग, दोस्ती और रिश्तों का बड़ा हिस्सा स्क्रीन तक सीमित होता जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग लगातार दूसरों की परफेक्ट लाइफ देखते रहते हैं, जिससे रिश्तों को लेकर उम्मीदें बदल रही हैं. कई लोग लंबे रिश्ते बनाने से बच रहे हैं. अकेले रहने वाले युवाओं की संख्या भी बढ़ रही है।  रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पहले जन्म दर इसलिए घटती थी क्योंकि शादीशुदा जोड़े कम बच्चे पैदा करते थे. लेकिन अब सबसे बड़ा कारण यह बन रहा है कि रिश्ते ही कम बन रहे हैं. यानी बड़ी संख्या में लोग शादी या लंबे रिलेशनशिप तक पहुंच ही नहीं रहे।  हालांकि एक्सपर्ट्स सिर्फ स्मार्टफोन को ही पूरी तरह जिम्मेदार नहीं मानते. महंगे घर, नौकरी का दबाव, बच्चों की पढ़ाई का खर्च और भविष्य को लेकर डर भी बड़ी वजहें हैं. कई देशों में युवाओं को स्थायी नौकरी और घर खरीदना मुश्किल लग रहा है. ऐसे में वे शादी और बच्चों का फैसला टाल रहे हैं।  सोशल मीडिया का असर मेंटल हेल्थ पर भी देखा जा रहा है. कई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि लगातार स्क्रीन पर रहने से अकेलापन, तनाव और डिप्रेशन बढ़ रहा है. इससे लोगों की सोशल लाइफ प्रभावित हो रही है।  कुछ देशों में सरकारें इस गिरती जन्म दर को रोकने के लिए पैसे भी दे रही हैं. जापान और साउथ कोरिया जैसे देशों में बच्चों के लिए आर्थिक मदद, टैक्स छूट और दूसरी योजनाएं चलाई जा रही हैं. लेकिन इसके बावजूद जन्म दर में खास सुधार नहीं दिख रहा. एक्सपर्ट्स का कहना है कि सिर्फ पैसे देने से समस्या हल नहीं होगी, क्योंकि असली बदलाव लोगों की लाइफस्टाइल और सोशल बिहेवियर में आया है।   

फूटा चांदी का बुलबुला? रिकॉर्ड हाई के बाद कीमतों में भारी गिरावट

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) में गिरावट का सिलसिला जारी है. सप्ताह के पहले कारोबार दिन सोमवार को भी मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर दोनों कीमती धातुओं के भाव गिर गए. चांदी, जो बीते दिनों सरकार के सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के फैसले (Gold-Silver Import Duty Hike) के बाद रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 3 लाख के पार निकल गई थी, उसका बुलबुला अब फूटा हुआ नजर आ रहा है और हर रोज ये फिसल रही है. हाई लेवल से तुलना करें, तो 1 Kg Silver Price इसके हाई से 1.92 लाख रुपये से ज्यादा कम हो गया है।  न सिर्फ चांदी, बल्कि सोने की कीमत में भी ओपनिंग के साथ ही गिरावट देखने को मिली. हालांकि, कारोबार आगे बढ़ने के साथ ये रिकवरी करता हुआ भी नजर आया. आइए जानते हैं 10 ग्राम 24 कैरेट वायदा सोना खरीदने के लिए आपको कितना पैसा खर्च करना होगा।  चांदी की कीमत में गिरावट जारी सबसे पहले बात करते हैं चांदी के भाव में आई गिरावट के बारे में, तो बीते शुक्रवार को एमसीएक्स पर 3 जुलाई की एक्सपायरी वाली 1 किलो चांदी की कीमत तेज गिरावट लेकर 2,71,866 रुपये पर क्लोज हुई थी, लेकिन सोमवार को खुलने के साथ ही ये कीमती धातु फिसलकर 2,64,949 रुपये प्रति किलो पर आ गई. इस हिसाब से कैलकुलेशन करें, तो एक झटके में चांदी 6,917 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई।  वहीं कुछ दिनों से जारी गिरावट के बाद चांदी के भाव की तुलना इसके लाइफ टाइम हाई लेवल से करें, तो ये काफी सस्ती हो चुकी है. दरअसल, MCX Silver Price पर नजर डालें, तो इसने जनवरी महीने में पहली बार 4 लाख का ऐतिहासिक आंकड़ा पार करते हुए 4,57,328 रुपये का हाई छुआ था और ये स्तर छूने के बाद तेजी से क्रैश भी हुई थी. अब ताजा गिरावट से बाद ये इस लेवल से 1,92,379 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना पहले फिसला, फिर रिकवरी बात सोने की कीमत के बारे में करें, तो ये कीमती पीली धातु खुलने के सात ही पहले धड़ाम नजर आई, लेकिन फिर इसमें गिरावट थमने लगी. दरअसल, बीते शुक्रवार को 5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,58,547 रुपये प्रति 10 ग्राम पर क्लोज हुआ था, लेकिन सोमवार को खुलने के साथ ही ये 1000 रुपये सस्ता होकर 1,57,547 रुपये के लेवल पर आ गया. हालांकि, वायदा कारोबार शुरू होने के कुछ देर बाद इसमें रिकवरी भी देखने को मिली।   चांदी की तरह अगर सोने के ताजा भाव की तुलना इसके लाइफ टाइम हाई लेवल से करें, तो जनवरी में ही MCX Gold Rate भी पहली बार 2 लाख रुपये के पार निकला था और इसका हाई लेवल 2,02,984 रुपये है. जहां से गिरते हुए अब 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1.57 लाख रुपये पर आ गया है. यानी सोना 45,437 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता मिल रहा है।