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सरकार ने बैंकों पर लगाई बड़ी पाबंदी, नए निर्देशों से मची हलचल

 नई दिल्ली देश में पेट्रोल-डीजल, सीएनजी की कीमतों में बीते सप्ताह इजाफा देखने को मिल चुका है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मिडिल ईस्ट युद्ध के गंभीर असर का हवाला देते हुए ईंधन के सीमित इस्तेमाल की अपील कर चुके हैं. अब वित्त मंत्रालय की ओर से सरकारी बैंकों, बीमा कंपनियों और अन्य वित्तीय संस्थानों को खर्च कम करने के उपाय लागू करने के निर्देश दिया गया है।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी आदेश में लागत कम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके तहत लागू किए जाने वाले उपायों में अधिकारियों की विदेश यात्राएं कम करने से लेकर, बैठकों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का ज्यादा उपयोग और इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर शिफ्टिंग करना शामिल हैं. वित्तीय सेवा विभाग द्वारा सोमवार को जारी किया गया यह आदेश स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) समेत अन्य फाइनेंस और इंश्योरेंस फर्मों पर लागू होगा।  विदेश यात्रा में करें कटौती  सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नए कॉस्ट कटिंग उपायों के तहत सभी बैठकें, काम-प्रोजेक्ट्स की समीक्षाएं और सुझावों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मीटिंग आयोजित की जानी चाहिए, ऐसा तब तक होना चाहिए, जब तक कि शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य न हो. इसके अलावा चेयरमैन, एमडी या CEO समेत अन्य टॉप ऑफिशियल की विदेश यात्रा निर्धारित लिमिट से कम रखी जानी चाहिए, और जहां तक ​​संभव हो, विदेशी कार्यक्रमों में वर्चुअल तौर पर भाग लिया जाना चाहिए।  इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल सरकार की ओर से इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी लाने की भी अपील की गई है. जारी आदेश में कहा गया है कि सभी संगठनों को अपने हेडक्वाटरों और ब्रांचों के लिए किराए पर अटैच किए गए पेट्रोल और डीजल वाहनों को जितना संभव हो इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का टारगेट सेट करना चाहिए।  PM मोदी ने की थी अपील गौरतलब है कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की अपील के बाद उठाया गया है, जिसमें उन्होंने अधिकारियों और देश के नागरिकों से कोरोना महामारी के दौरान लागू किए गए उपायों की तरह वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन बैठकें और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को फिर से शुरू करने का आग्रह किया था, उन्होंने इसे राष्ट्रीय हित में उठाया जाने वाला कदम करार दिया था।  पीएम मोदी ने कहा था कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और ग्लोबल अस्थिरता भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव डाल रही हैं. दुनिया की तेल-गैस जरूरत के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट और इसके आसपास रुकावट ने तेल आयात पर निर्भर भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ाने का काम किया है।  अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने मेट्रो कनेक्टिविटी वाले शहरों के लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और निजी वाहनों का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील की थी. इसके अलावा PM Modi ने मिडिल क्लास से विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए कम से कम एक वर्ष तक विदेश यात्रा न करने,  एक वर्ष तक सोना न खरीदने और भारत में निर्मित उत्पादों की खरीदने की अपील की थी। 

NCR में पेट्रोल-डीजल गाड़ियों पर सख्ती, हरियाणा सरकार ने EV-CNG को दी प्राथमिकता

चंडीगढ़  हरियाणा कैबिनेट की मीटिंग चंडीगढ़ में सचिवालय में हुई. सीएम नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई इस मीटिंग में 27 एजेंडों को मंजूरी दी गई. अहम बात है कि  कैबिनेट ने हरियाणा मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव किया है. मीटिंग में पानीपत की चुलकाना धाम को श्राइन बोर्ड का दर्जा भी दिया गया है।  कैबिनेट मीटिंग में बीसीए और और बीसीबी वर्ग के तहत नौकरी अप्लाई करने वाले लोगों को राहत दी गई है. इस संबंध में 3069 पदों के लिए ऐड दी गई थी. लेकिन जो तकनीकी प्रॉब्लम थी उसे आज कैबिनेट में राहत दी गई है. उधर, मेक इन हरियाणा इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2026 को लागू करने का फैसला लिया गया. पॉलिसी बनाने से पहले दिल्ली में इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के सुझाव लिए गए थे. इसमें अगले 5 वर्षों में करोड़ों के निवेश का लक्ष्य रखा गया है।  जानकारी के अनुसार, गुरुग्राम और पंचकूला में आईटी से जुड़े सेंटर खोलने को लेकर कैबिनेट ने मंजूरी दी है और यहां पर युवाओं को आईटी और एआई से जुड़ी जानकारी सिखाई जाएगी।  मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति 2026 को मिली मंजूरी     हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम डिजाइन एवं मैन्युफैक्चरिंग नीति 2026 को मंजूरी.     हरियाणा खिलौना एवं खेल उपकरण निर्माण नीति 2026 को मिली मंजूरी.     ड्राफ्ट हरियाणा इलेक्ट्रॉनिक वेस्ट रीसाइकलिंग नीति 2026 को मंजूरी.     हरियाणा फार्मास्यूटिकल एवं मेडिकल डिवाइसेज मैन्युफैक्चरिंग नीति 2026 को मंजूरी.     हरियाणा आईटी, आआई और उभरती प्रौद्योगिकी नीति 2026 को मंजूरी. अहम बात है कि हरियाणा में एनसीआर व्हीकल नीति में बदलाव किया गया है और मुख्यमंत्री ने कहा कि एनसीआर में अब इलेक्ट्रिक व्हीकल और सीएनजी गाड़ियां ही चलेंगी. वहीं, हरियाणा में इलेक्ट्रिक व्हीकल पर कोई रजिस्ट्रेशन टैक्स नहीं लगेगा. गौर रहे कि गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत समेत करनाल तक के इलाके दिल्ली एनसीआर में आते हैं. प्रदेश के कुल 14 जिले एनसीआर में आंशिक और पूरी तरह आते हैं।  मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि आने वाले समय मे इलेक्ट्रिक गाड़ियों को बढ़ावा मिल रहा है. ऐसे में ईवी रजिस्ट्रेशन फ्री करने पर काम किया जा रहा है. वर्क फ्रॉम होम पर भी काम किया जाएगा और वर्चुल बैठकों पर भी जोर दिया जाएगा।  इलेक्ट्रिक वाहनों पर शत-प्रतिशत टैक्स छूट देने का प्रस्ताव परिवहन मंत्री अनिल विज ने कहा कि हरियाणा में चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर इलेक्ट्रिक वाहनों पर शत-प्रतिशत टैक्स छूट देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है , ताकि लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. उन्होंने कहा कि यदि ईवी वाहनों पर टैक्स में राहत दी जाती है तो लोगों का रुझान इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर तेजी से बढ़ेगा. विज सोमवार को चंडीगढ़ में कैबिनेट बैठक से पूर्व मीडिया कर्मियों के सवालों का जवाब दे रहे थे. उन्होंने बताया कि राज्य सरकार 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने जा रही है. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर टैक्स छूट देने के लिए भी प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है. यह प्रस्ताव चंडीगढ़ और दिल्ली की तर्ज पर 100 प्रतिशत टैक्स छूट प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के लिए प्रेरित हों सकें।  एक प्रश्न के उत्तर में विज ने कहा कि कैबिनेट में प्रस्ताव लाने का विशेष अधिकार मुख्यमंत्री का होता है और कौन-सा प्रस्ताव बैठक में लाया जाएगा, इसका निर्णय वहीं लेते हैं. उन्होंने कहा कि विभागों के बीच लगातार वर्चुअल बैठकें होती रहती हैं और कई प्रशासनिक कार्य टेलीफोन के माध्यम से भी संपन्न हो जाते हैं।  कांग्रेस पर बरसे सीएम सैनी सीएम नायब सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधा कि उनके समय में महंगाई चरम पर थी, लेकिन मोदी सरकार ने इसे काबू किया.सैनी ने कहा कि ये समय राजनीति करने का नहीं है, ये विश्व की समस्या है. उधऱ, इनेलो की तरफ से पंचकूला में दिए गए एचपीएसी (HPSC) के खिलाफ धरने पर सीएम ने कहा कि कांग्रेस और इनेलो ने अपने समय जो किया, वो सबको पता है. लोगों को हमारे पर भरोसा है. ये पारदर्शी सिस्टम है, जहां कोई भी अप्लाई कर सकता है. बाहरी राज्यों के युवाओं को नोकरी देने के विपक्ष के आरोपों पर मुख्य्मंत्री ने कहा विपक्ष ने अपने शासनकाल में कभी मेरिट को प्राथमिकता नहीं दी। 

पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट! पिछड़ा आयोग की बाधा दूर, जल्द बज सकता है चुनावी बिगुल

लखनऊ   उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे करोड़ों ग्रामीणों और राजनीतिक दलों के लिए सोमवार का दिन बड़ी खुशखबरी लेकर आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में कुल 12 प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई है। इस बैठक का सबसे बड़ा फैसला पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण को लेकर जरूरी ओबीसी आयोग के गठन का रहा। इससे चुनाव के रास्ते की सबसे बड़ी कानूनी अड़चन दूर होगी। यूपी पंचायत चुनाव में देरी हो गई है। 2021 में 2 मई को ही नतीजे आ गए थे। 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' के गठन को हरी झंडी उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक और जिला पंचायतों के निर्वाचन को लेकर पिछले काफी समय से बनी उहापोह की स्थिति आखिरकार समाप्त हो गई है। योगी कैबिनेट ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ओबीसी (OBC) आरक्षण का सटीक स्वरूप और आनुपातिक आबादी तय करने के लिए 'समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग' (Dedicated OBC Commission) के गठन को मंजूरी दे दी है। अब इस आयोग की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही सीटों के आरक्षण का रोटेशन तय किया जाएगा, जिससे सुप्रीम कोर्ट के 'ट्रिपल टेस्ट' फॉर्मूले की वैधानिक बाध्यता पूरी हो जाएगी। योगी कैबिनेट के फैसले के अनुसार पांच सदस्यीय आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश होंगे। अन्य सदस्य पिछड़ा वर्ग की जानकारी रखने वाले लोग ही होंगे। इनका कार्यकाल छह महीने होगा। पशु चिकित्सा विवि में इंटर्नशिप भत्ता तीन गुना बढ़ा कैबिनेट बैठक में प्रदेश के पशु चिकित्सा (Veterinary) विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर रहे छात्रों के मासिक इंटर्नशिप भत्ते (Stipend) को सीधे तीन गुना बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब इंटर्नशिप कर रहे भावी पशु चिकित्सकों को हर महीने 4,000 के स्थान पर 12,000 रुपए मिलेंगे। उप्र पं० दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा, आचार्य नरेंद्रदेव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या और सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के छात्रों को इसका फायदा होगा। लखनऊ और आगरा में मेट्रो रेल नेटवर्क का विस्तार लखनऊ और आगरा में मेट्रो रेल नेटवर्क के विस्तार को लेकर राज्य सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दोनों शहरों की मेट्रो परियोजनाओं से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। जहां एक तरफ लखनऊ मेट्रो के बहुप्रतीक्षित फेज-1बी (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) के निर्माण के लिए भारत सरकार के साथ त्रिपक्षीय समझौते (MoU) के रास्ते साफ हो गए हैं, वहीं दूसरी तरफ आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 के लिए निःशुल्क भूमि हस्तांतरण के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। इन फैसलों से दोनों ही शहरों में मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण कार्यों में तेजी आएगी। लखनऊ मेट्रो: 5801 करोड़ के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के लिए हस्ताक्षरित होगा MoU राजधानी लखनऊ में चारबाग से वसंतकुंज तक बनने वाले 11.1 किलोमीटर लंबे 'ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर' (फेज-1बी) की राह अब पूरी तरह साफ हो गई है। मुख्यमंत्री की कैबिनेट ने आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (भारत सरकार), उत्तर प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) के मध्य निष्पादित होने वाले त्रिपक्षीय मेमोरेण्डम ऑफ अण्डरस्टैण्डिंग (MoU) के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इससे पहले 5 मार्च 2024 को राज्य कैबिनेट ने इसके डीपीआर (DPR) को मंजूरी दी थी, जिसके बाद भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने 3 सितंबर 2025 को इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत ₹5,801.05 करोड़ को स्वीकृत करते हुए अपना अंतिम अनुमोदन प्रदान किया था। भारत सरकार की शर्तों और न्याय विभाग द्वारा विधीक्षित (संशोधित) आलेख के अनुसार, इस त्रिपक्षीय समझौते में राज्य सरकार की भूमिका, वित्तीय हिस्सेदारी और दायित्वों को पूरी तरह निर्धारित कर दिया गया है। इस कॉरिडोर के बनने से पुराने लखनऊ के लाखों निवासियों को विश्वस्तरीय यातायात की सुविधा मिलेगी। आगरा मेट्रो: कॉरिडोर-2 के निर्माण के लिए सेवायोजन कार्यालय की जमीन निःशुल्क ट्रांसफर ताजनगरी में आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक बनने वाले मेट्रो कॉरिडोर-II के काम को गति देने के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा और अपवादस्वरूप फैसला लिया है। इस कॉरिडोर के तहत मेट्रो स्टेशन और वायडक्ट सेक्शन के निर्माण के लिए आगरा के सदर तहसील के अंतर्गत मौजा चक अव्वल में स्थित क्षेत्रीय सेवायोजन कार्यालय परिसर की पार्क के रूप में रिक्त पड़ी 550 वर्गमीटर नजूल भूमि को उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है। जिलाधिकारी आगरा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव और यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक के अनुरोध पर विचार करते हुए, राज्य सरकार ने प्रभावी सर्किल दर पर पूरी तरह से छूट प्रदान की है। कतिपय नियमों और शर्तों के अधीन यह कीमती जमीन मेट्रो कॉर्पोरेशन को बिल्कुल निःशुल्क (Free of Cost) ट्रांसफर की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मेट्रो परियोजना के जनहित को देखते हुए यह भूमि हस्तांतरण केवल एक 'अपवादस्वरूप' फैसला है, जिसे भविष्य के लिए किसी भी अन्य मामले में नजीर या दृष्टांत के रूप में नहीं माना जाएगा। मिर्जापुर में पूलिंग उपकेन्द्र (एआईएस) एवं सम्बन्धित पारेषण लाइनों का निर्माण प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए प्रस्तावित तापीय एवं पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं से उत्पादित ऊर्जा के समुचित निकासी के लिए 765/400 केवी मिर्जापुर पूलिंग उपकेन्द्र और संबंधित पारेषण लाइनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। परियोजना की कुल अनुमानित लागत 2799.47 करोड़ है। इसमें उपकेन्द्र एवं 'बे' निर्माण हेतु 1315.91 करोड़ और पारेषण लाइनों के लिए 1483.56 करोड़ सम्मिलित हैं। यह परियोजना एक Common Public Infrastructure के रूप में विकसित की जाएगी। इससे प्रदेश में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता एवं निरंतरता में सुधार होगा और सभी उपभोक्ताओं-घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। लोहिया इंस्टीट्यूट में 1010 बेड का मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर डॉक्टर राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस गोमती नगर विस्तार सेक्टर-7 स्थित संस्थान के नवीन परिसर (शहीद पथ) में 1010 बेडेड मल्टी स्पेशलिटी इमरजेंसी सेंटर अस्पताल, Teaching Block और नवीन ओपीडी ब्लाक के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना की लागत 85504.34 लाख (आठ अरब पचपन करोड़ चार लाख चौतीस हजार) है । इसके अंतर्गत हास्पिटल भवन में 1010 बेड्स के साथ ही एक नया … Read more

दुनिया में बढ़ा भारत का गौरव, PM मोदी को नॉर्वे के सर्वोच्च सम्मानों में से एक से नवाजा गया

नई दिल्ली स्वीडन के बाद अब नॉर्वे ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ से सम्मानित किया है। यह सम्मान नॉर्वे की ओर से विदेशी नागरिकों को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मानों में शामिल है। ‘ग्रैंड क्रॉस’ रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट का सर्वोच्च ग्रेड माना जाता है। प्रधानमंत्री मोदी को यह सम्मान वैश्विक कूटनीति, भारत-नॉर्वे संबंधों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके नेतृत्व के योगदान के लिए दिया गया। क्या है रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट ? नार्वे ने पीएम मोदी को जिस रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट से सम्मानित किया है, वह नॉर्वे का एक प्रतिष्ठित शाही सम्मान है। ग्रैंड क्रॉस नॉर्वे के शाही सम्मान का सर्वोच्च श्रेणी का पुरस्कार है। इसकी स्थापना 1985 में राजा ओलाव पंचम ने की थी। नॉर्वे और मानवता के हित में उत्कृष्ट सेवा देने वाले विदेशियों और विदेश में रहने वाले नॉर्वे के नागरिकों को यह प्रदान किया जाता है किसे दिया जाता है यह सम्मान? रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट को मुख्य रूप से विदेशी राजनयिकों, सिविल सेवकों, मानद वाणिज्य दूतों और अंतर्राष्ट्रीय हस्तियों को दिया जाता है। इस सम्मान को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों या ग्रेड में बांटा गया है। इसमें 'ग्रैंड क्रॉस'सर्वोच्च ग्रेड है। इसके बाद सेंट ओलाव आता है। सेंट ओलाव का शाही नॉर्वेजियन पदक ऑर्डर ऑफ सेंट ओलाव नॉर्वे के नागरिकों के लिए है, वहीं, 'ऑर्डर ऑफ मेरिट'मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नॉर्वे के साथ संबंधों को मजबूत करने वालों को दिया जाता है। कल स्वीडन ने किया था सम्मानित एक दिन पहले,मोदी को द्विपक्षीय संबंधों में उनके असाधारण योगदान और दूरदर्शी नेतृत्व के सम्मान में स्वीडन के प्रतिष्ठित 'रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार स्वीडन का सर्वोच्च सम्मान है जो विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को प्रदान किया जाता है। अब तक 32 देश पीएम मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से कर चुके हैं सम्मानित इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी को दुनिया भर में मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मानों की संख्या 32 पहुंच गई है। बीते दिन ही स्वीडन ने भी उन्हें अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाजा था। ट्रेड पर भी हुई बात सम्मान समारोह में दोनों देशों के बीच व्यापार, ग्रीन एनर्जी, जलवायु परिवर्तन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक साख और प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सफलता को दर्शाता है. इस सम्मान के बाद भारत और नॉर्वे के रिश्तों में और अधिक मजबूती आने की उम्मीद जताई जा रही है. अब तक 32वां सम्‍मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक 32 देशों ने सर्वोच्‍च नागर‍िक सम्‍मान से सम्‍मान‍ित क‍िया है. एक द‍िन पहले ही स्‍वीडन ने भी पीएम मोदी अपने सर्वोच्च सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया था.

ग्रामीण निकाय चुनाव में OBC आरक्षण का रास्ता साफ, बनेगा समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग

ग्रामीण निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनेगा उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में सरकार का निर्णय, छह माह में देगा रिपोर्ट पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए सामाजिक और राजनीतिक अध्ययन करेगा आयोग पांच सदस्यीय होगा आयोग, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे अध्यक्ष कैबिनेट में 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, सभी पर लगी स्वीकृति की मुहर लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में आयोजित कैबिनेट बैठक में प्रदेश के त्रिस्तरीय ग्रामीण निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण के निर्धारण के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी गई। यह आयोग पंचायत चुनावों में पिछड़े वर्गों को आरक्षण प्रदान करने हेतु उनके सामाजिक और राजनीतिक पिछड़ेपन की समकालीन एवं अनुभवजन्य जांच करेगा। कैबिनेट बैठक में कुल 12 प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए और सभी को स्वीकृत कर लिया गया। कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश कुमार ने बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को आरक्षण प्रदान करने के लिए “उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” के गठन को मंजूरी दे दी है। आयोग प्रदेश में पिछड़े वर्गों की स्थिति, उनकी जनसंख्या, सामाजिक प्रतिनिधित्व और पंचायतों में भागीदारी का समकालीन एवं अनुभवजन्य अध्ययन करेगा तथा निकायवार आनुपातिक आरक्षण निर्धारित करने के लिए अपनी संस्तुतियां देगा। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 तथा उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के तहत पंचायतों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा और यदि जनसंख्या के अद्यतन आंकड़े उपलब्ध नहीं होंगे तो सर्वेक्षण के माध्यम से आंकड़े निर्धारित किए जा सकेंगे। आयोग के गठन को कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान की है तथा आयोग का कार्यकाल सामान्य रूप से छह माह का होगा। आयोग प्रदेश की ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों और जिला पंचायतों में ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षण तय करने के उद्देश्य से आंकड़ों का अध्ययन करेगा और निकायवार आनुपातिक आरक्षण की संस्तुति देगा। इसके आधार पर आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाएगी। कैबिनेट के निर्णय के अनुसार आयोग में कुल पांच सदस्य होंगे, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी। इनमें एक सदस्य उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे, जिन्हें आयोग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। आयोग में ऐसे व्यक्तियों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें पिछड़े वर्गों से जुड़े मामलों का ज्ञान व अनुभव हो। सरकार ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 243-घ तथा संबंधित अधिनियमों की धाराओं के तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्गों के लिए पंचायतों में आरक्षण का प्रावधान है। पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण कुल पदों के 27 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।

सड़क सुरक्षा पर बड़ा एक्शन, गड्ढों की मरम्मत और बेरिकेडिंग को लेकर प्रशासन को निर्देश

भोपाल   सड़क हादसों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑफ रोड सेफ्टी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। अब सड़कों पर बने गड्ढों, खुले नालों, मैनहोल और जलभराव वाले इलाकों में बैरिकेडिंग करना अनिवार्य होगा। समिति ने राज्यों से कहा है कि किसी भी खतरनाक जगह की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सुप्रीम कोर्ट की रोड सेफ्टी कमेटी ने मुख्य सचिवों को पत्र भेजकर दो महीने के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है। निर्देशों में साफ कहा गया है कि बारिश के दौरान जलभराव वाले इलाकों में पर्याप्त लाइटिंग, रिफ्लेक्टिव टेप और मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि रात में सड़क हादसे रोके जा सकें। खुले मैनहोल और जलभराव पर विशेष सख्ती समिति ने कहा है कि खुले नाले, मैनहोल और बिना सुरक्षा वाले जलभराव क्षेत्र लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। कई हादसों में लोगों की मौत और गंभीर चोटें सामने आई हैं। इसी वजह से अब स्थानीय प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा। निर्देशों में यह भी कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। अगर किसी राज्य में लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है। 48 घंटे में कार्रवाई के निर्देश समिति ने निर्देश दिए हैं कि सड़क पर किसी भी गड्ढे, खुले मैनहोल या खतरनाक जलभराव की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। इसके तहत:     गड्ढों की तत्काल मरम्मत     खुले नालों और मैनहोल पर मजबूत बैरिकेडिंग     रिफ्लेक्टिव टेप लगाना     रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था जैसे कदम उठाने होंगे। बारिश में हादसे रोकने पर फोकस सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने कहा है कि बारिश के मौसम में अंधेरे और जलभराव वाले इलाकों में दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी को देखते हुए रात में प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि वाहन चालकों को खतरे का पहले से अंदाजा हो सके। दो महीने में मांगी रिपोर्ट समिति ने सभी राज्यों से दो महीने के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पिछले पांच वर्षों में गड्ढों की वजह से हुए हादसे, खुले जलभराव क्षेत्रों में मौतें और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में घायल लोगों का डेटा भी शामिल करना होगा। IRC मानकों के अनुसार होगा सड़क निर्माण निर्देशों में साफ कहा गया है कि सड़क निर्माण और रखरखाव भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार होना चाहिए। यदि किसी राज्य ने निर्देशों का पालन नहीं किया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को भी जिम्मेदारी समिति ने जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने को कहा गया है। पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी इससे पहले 2018 में भी सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दे चुकी है। इनमें:     हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना     स्पीड मॉनिटरिंग     सड़क किनारे बैरियर लगाना     ब्लैक स्पॉट ऑडिट     स्कूल वाहनों की सुरक्षा जैसे कदम शामिल थे। पांच साल के हादसों का डेटा भी मांगा सुप्रीम कोर्ट कमेटी ने राज्यों से पिछले पांच वर्षों में गड्ढों और खराब सड़कों के कारण हुए हादसों का पूरा डेटा मांगा है। इसके अलावा खुले जलभराव और बिना बैरिकेड वाले क्षेत्रों में हुई मौतों और घायलों की जानकारी भी मांगी गई है। जिला सड़क सुरक्षा समितियों को नियमित ऑडिट करने और सड़क सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने के आदेश दिए गए हैं। समिति का कहना है कि सड़क सुरक्षा में लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पहले भी जारी हो चुके हैं निर्देश इससे पहले साल 2018 में भी सुप्रीम कोर्ट रोड सेफ्टी कमेटी ने सड़क हादसे कम करने के लिए राज्यों को कई अहम निर्देश दिए थे। इनमें हाईवे पेट्रोलिंग बढ़ाना, स्पीड मॉनिटरिंग, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का ऑडिट और स्कूल वाहनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। अब बारिश के मौसम को देखते हुए एक बार फिर राज्यों को सख्ती से सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।  

‘सड़क पर नमाज नहीं चलेगी’, CM योगी की चेतावनी; नियम तोड़ने वालों को दिया सख्त संदेश

लखनऊ   बकरीद (Bakrid 2026) से पहले उत्तर प्रदेश में सड़क पर नमाज को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) का सख्त बयान सामने आया है. राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम योगी ने साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में सड़कों पर नमाज की इजाजत नहीं दी जाएगी. उन्होंने कहा कि सड़कें आवागमन के लिए होती हैं, किसी भी व्यक्ति को उन्हें रोकने या सार्वजनिक रास्तों पर धार्मिक आयोजन करने का अधिकार नहीं है।  सीएम योगी ने कहा, ‘लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं बिल्कुल नहीं होती. सड़कें चलने के लिए हैं, कोई भी चौराहे पर आकर तमाशा नहीं बना सकता.’ उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों के लिए निर्धारित स्थल हैं और वहीं पर आयोजन होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि जब कुछ लोगों ने उनसे कहा कि नमाजियों की संख्या अधिक होने के कारण जगह कम पड़ती है, तो उन्होंने सुझाव दिया कि ‘शिफ्ट में नमाज पढ़ लीजिए.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर व्यवस्था के साथ रहना है तो नियम-कानून का पालन करना होगा।  आपको बता दें कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए. प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग मुझसे पूछते हैं साहब आपके यहां यूपी में क्या सड़कों पर सचमुच नमाज नहीं होती? मैं कहता हूं कतई नहीं होती है. आप जा कर देख लो नहीं होती है. अरे सड़कें चलने के लिए है या कोई भी व्यक्ति आकर के चौराहे पर आकर तमाशा बना देगा. क्या अधिकार है उसको सड़क रोकने का? आवागमन बाधित करने का कौन सा अधिकार है? जहां उसका स्थल होगा वहां जाकर करें।  बकौल सीएम योगी- 'उन लोगों ने मुझसे कहा साहब कैसे होगा? हमारी संख्या ज्यादा है. हमने कहा शिफ्ट में कर लो. तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई संख्या नियंत्रित कर लो. और नहीं है सामर्थ्य क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ाई जा रही है और यह चाहिए आपको कि अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो याद करना हम उन नियम और कानून को मानना शुरू करें।  सीएम योगी ने सख्‍त लहजे में कहा कि अगर तुम्हारे घर में रहने की जगह नहीं है तो भाई अपनी जनसंख्‍या को ही नियंत्रित कर लो. अगर सामर्थ्य नहीं है तो क्यों बेकार आगे संख्या बढ़ा रहे हो. अगर आपको सिस्टम के साथ रहना है तो उन नियम और कानूनों को भी मानना शुरू करें. मुख्यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने आगे कहा कि यूपी में कानून का राज होागा और हम इसे सबके लिए समान रूप से ही लागू करेंगे. नमाज पढ़नी जरूरी है तो आप लोग इसे शिफ्ट में पढ़िए. हम तो उसको रोकेंगे नहीं, लेकिन सड़क पर नहीं।  सीएम योगी ने साफ किया कि ‘सड़क चलने के लिए है. एक आम नागरिक के लिए, एक बीमार व्यक्ति के लिए, एक आम नागरिक के लिए, एक कामगार के लिए, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है. सबके लिए समान रूप से लागू होता है।  इसके बाद वह और ज्‍यादा सख्‍त दिखे. उन्‍होंने यहां तक कह डाला कि ‘हम यूपी में सड़कों पर अराजकता नहीं फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे तो ठीक बात है. अगर नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम है संवाद बनाना. आप संवाद से मानेंगे.. संवाद से नहीं तो संघर्ष से भी देख लो. बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का काम किया था. देख लिया ताकत. इसलिए सरकार उन सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून का राज होगा. कानून के राज को सबको समान रूप से लागू करेंगे. नमाज पढ़नी आवश्यक है. आप शिफ्ट में पढ़िए. हम उसको रोकेंगे नहीं. लेकिन सड़क पर नहीं. सड़क चलने के लिए एक आम नागरिक के लिए, एक बीमार व्यक्ति के लिए, एक आम नागरिक के लिए, एक कामगार के लिए, एक कर्मचारी के लिए, एक सामान्य नागरिक के लिए, एक व्यापारी के लिए हम सड़क को बाधित नहीं करने देंगे. सरकार का नियम सार्वभौम है. सबके लिए समान रूप से लागू होता है।  उन्होंने कहा है कि हमने सबको कहा हमने कहा भाई नहीं चलने देंगे. अराजकता नहीं सड़कों पर फैलने देंगे. प्यार से मानेंगे ठीक बात है. नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे. हमारा काम है संवाद बनाना. आप संवाद से मानेंगे संवाद से नहीं तो संघर्ष से भी देख लो. बरेली में लोगों ने हाथ आजमाने का कार्य किया. देख लिया ताकत. इसलिए सरकार उन सिस्टम के साथ पूरी व्यवस्था को जोड़ना चाहती है। 

योगी सरकार का बड़ा दावा, 9 वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधी ढेर; 34 हजार से ज्यादा गिरफ्तार

योगी सरकार की पुलिस ने नौ वर्षों में 289 दुर्दांत अपराधियों को मुठभेड़ में किया ढेर, 34,253 को गिरफ्तार किया योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जारी है एनकाउंटर की कार्रवाई  सबसे अधिक मेरठ में 97 अपराधी किए गए ढेर, प्रदेश में पहले स्थान पर    एनकाउंटर की कार्रवाई में दूसरे नंबर पर है वाराणसी जोन और तीसरे नंबर पर है आगरा जोन  लखनऊ,  योगी सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रदेश में पिछले नौ वर्षों में अपराध और अपराधियों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 289 दुर्दांत अपरधियों को मुठभेड़ में ढेर कर यमलोक पहुंचाया है। इस दौरान पुलिस ने कुल 17,043 मुठभेड़ की कार्रवाइयां कीं, जिनमें 34,253 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। एनकाउंटर की कार्रवाई में 11,834 अपराधी घायल हुए। वहीं अपराधियों से लोहा लेते हुए 18 पुलिसकर्मी शहीद हो गये जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए। एनकाउंटर में मेरठ जोन पूरे प्रदेश में पहले स्थान पर  सबसे अधिक मुठभेड़ मेरठ ज़ोन में दर्ज की गईं, जहां पुलिस ने 4,813 कार्रवाई की गईं। इस कार्रवाई में 8,921 अपराधी दबोचे गये जबकि 3,513 अपराधियों को घायल हुए। वहीं 97 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया। मेरठ जोन की मुठभेड़ के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मी शहीद हो गये। एनकाउंटर कार्रवाई ने पूरे प्रदेश में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा है। इसी तरह वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ हुईं, जिनमें 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया जबकि 29 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया। इस दौरान 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए। पूरे प्रदेश में वाराणसी जोन एनकाउंटर कार्रवाई में दूसरे स्थान पर है। वहीं एनकाउंटर कार्रवाई में पूरे प्रदेश में आगरा जोन तीसरे स्थान पर है। यहां 2,494 एनकाउंटर की कार्रवाई की गईं, जिनमें 5,845 अपराधियों को दबोचा गया। इस दौरान 968 अपराधी घायल हुए जबकि 24 अपराध मार गिराए गए। मुठभेड़ के दौरान 62 पुलिसकर्मी घायल हुए।  कमिश्नरेट में सबसे अधिक गाजियाबाद में 18 अपराधी किए गये ढेर एनकाउंटर आंकड़ों पर नजर डालें तो बरेली ज़ोन में 2,222 मुठभेड़ के दौरान 21 दुर्दांत अपराधियों को मारा गया, वहीं लखनऊ ज़ोन में 971 मुठभेड़ के दौरान 20 अपराधी मारे गए। गाजियाबाद कमिश्नरी में 7,89 मुठभेड़ों में 18 अपराधी मारे गये। सभी कमिश्नरेट में यह सबसे अधिक है। कानपुर जोन में 791 मुठभेड़ों में 12, लखनऊ कमिश्नरी में 147 मुठभेड़ों में 12 और प्रयागराज जोन में 643 मुठभेड़ों में 11 अपराधियों को मारा गया। इसी तरह आगरा कमिश्नरी में 489 मुठभेड़ों में 10, गौतमबुद्ध नगर में 1,144 मुठभेड़ों में 9, गोरखपुर जोन में 699 मुठभेड़ों में 8, वाराणसी कमिश्नरी में 146 मुठभेड़ों में 8, प्रयागराज कमिश्नरी में 150 मुठभेड़ों में 6 और कानपुर कमिश्नरी में 253 मुठभेड़ों में 4 अपराधियों को ढेर किया गया। पुलिसिया एक्शन ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर किया मजबूर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में यूपी पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारा। इससे अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। यही वजह है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है। योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत पुलिस ने संगठित अपराध, माफिया और अवैध वसूली पर सख्त प्रहार किया। मुठभेड़ों के साथ ही संपत्ति कुर्की, गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई और एनएसए जैसे कानूनों के प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ चला यह नौ वर्षीय अभियान न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि जमीनी हकीकत में भी कानून का राज स्थापित करने में सफल रहा है। पुलिस की त्वरित, कठोर और साहसिक कार्रवाई ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर कर दिया है और उत्तर प्रदेश अब भयमुक्त और सुरक्षित राज्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है।

रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा की मौत पर नया खुलासा, आखिरी चैट आई सामने

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रिटायर्ड जज की बहू ट्विशा शर्मा की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. कथित तौर पर ससुराल की प्रताड़ना की वजह से मौत के इस मामले में जहां एक तरफ पुलिस ने जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) बनाई है, वहीं हर दिन कई नए खुलासे सामने आ रहे हैं. बीते 12 मई को छत के सरिये से फांसी पर लटकी मिली ट्विशा को लेकर आरोपियों में से एक उसकी सास गिरिबाला सिंह ने कोर्ट में अग्रिम जमानती आवेदन दिया था. आवेदन में उन्होंने दावा किया कि ट्विशा परिवार में एडजस्ट नहीं हो पा रही थी और वह ड्रग्स लेती थी।  'ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं' इस बीच ट्विशा और उसकी मां के बीच हुई आखिरी व्हाट्सएप चैट आजतक के हाथ लगी. मां के बात करते हुए वह काफी परेशान दिख रही है. इसमें ट्विशा ने अपने ससुराल वालों को लेकर कई गंभीर बातें लिखीं और पति पर चरित्र पर शंका करने जैसे आरोप लगाए।  व्हाट्सएप चैट के मुताबिक, ट्विशा ने मां को भेजे मैसेज में लिखा था ‘बहुत परेशान हूं… ये लोग बहुत घटिया हैं. शक करते हैं. समर्थ पूछता है कि मेरे पेट में किसका बच्चा है. इतना ही नहीं, ट्विशा ने अपनी मां से उसे वहां से ले जाने की गुहार भी लगाई थी. उसने लिखा, 'मुझे यहां से आकर ले जाओ, ये लोग मुझे जीने नहीं देंगे।  ‘मेरा जीवन नरक हो गया है, ले जाओ यहां से' यही नहीं चैट में ट्विशा ने एक जगह अपनी मां को लिखा है ‘मेरा जीवन नरक हो गया है’. ट्विशा ने लिखा है कि ‘ये लोग बहुत निर्दयी है. समर्थ तो ठीक से मुझसे बात तक नहीं करता।  इधर ससुराल वालों द्वारा हत्या का आरोप लगा रहा ट्विशा का परिवार उसके दोबारा पोस्टमार्टम के लिए आज आवेदन देगा. ट्विशा के माता पिता का कहना है कि इससे पहले जो बेल्ट ट्विशा के गले में मिली थी, उसके इंस्पेक्शन के बिना ही पोस्टमार्टम कर दिया गया था।  'मैं फंस गई हूं, तू मत फंसना' बता दें कि इससे पहले भी ट्विशा की उसकी दोस्त मीनाक्षी के साथ इंस्टाग्राम चैट सामने आई थी जिसमें वह उससे कह रही थी- मैं फंस गई हूं तू मत फंसना, ज्यादा बात नहीं कर पाउंगी।  'बहू ड्रग्स न ले तो हाथ कांपते थे' मृतका की सास और सेवानिवृत्त जज गिरिबाला सिंह को कोर्ट ने शुक्रवार को ही अग्रिम जमानत दे दी है. अपने जमानती आवेदन में गिरबाला ने दावा किया था कि बहू ड्रग्स लेती थी और ड्रग्स न मिल पाने की स्थिति में उसके हाथ कांपने लगते थे.  उन्होंने बताया कि ट्विशा विवाह के पूर्व फिल्म एक्ट्रेस और मॉडल थी और उन्होंने तेलगू और अन्य भाषाओं की फिल्मों में हीरोइन के रूप में और एड फिल्मों में काम किया था. शादी के समय ट्विशा दिल्ली की प्रायवेट कंपनी में वर्कफार्म होम काम कर रही थी. घर पर रहते हुए हम लोगों को ट्विशा के व्यवहार से संदेह हुआ कि वह ड्रग्स लेती हैं.  बाद में उसका पापा ने ही इस बात की पुष्टी की।  'प्रेग्नेंट हुई तो सामान बांधकर निकल गई' उन्होंने कहा कि ट्विशा शादी के दिन यानी 09 दिसंबर 2025 से  12 मई 2026 के बीच पांच बार सुसराल से मायके और अन्य जगहों पर गयी थी. हाथों में कंपन और कुछ समय तक डग्स न ले पाने के कारण उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन नजर आता था. ट्विशा के पिता ने ही हमें बताया कि वह ड्रग्स लेती है।  गिरिबाला का कहना है कि 17 अप्रैल 2026 को पहली बार ट्विशा को अपने प्रेग्नेंट होने की जानकारी हुई. उसी दिन ट्विशा अपने पति के साथ हजेला अस्पताल गयी. इसके बाद उसका व्यवहार मेरे और मेरे बेटे के प्रति  काफी अधिक परेशान करने वाला था. अस्पताल से आने के बाद ट्विशा ने अपना सामान बैग में भरा ओर बोली कि वह अपने घर नोएडा जाना चाहती हैं . वह 17 अप्रैल को निकलकर 18 अप्रैल 2026 को हवाई जहाज से दिल्ली पहुंची. लेकिन सीधा घर नहीं गई और घर पहुंचने में इतना समय लगने का कोई कारण भी नहीं बताया. इधर, मामले में फरार ट्विशा के पति समर्थ सिंह की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही हैं।  ट्विशा शर्मा का गलने लगा शव भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. मृतका का शव पिछले पांच दिनों से भोपाल एम्स (AIIMS) की मर्चुरी में रखा हुआ है, जो अब डीकंपोज (गलने) लगा है. इस बीच, ट्विशा शर्मा के परिजनों ने रविवार को सीएम हाउस के बाहर प्रदर्शन किया, जिसके बाद उनके पिता नवनिधि शर्मा और भाई ने मुख्यमंत्री के ओएसडी (OSD) से मुलाकात की. दूसरी ओर, पुलिस शव को सौंपने के लिए परिजनों को नोटिस देने की तैयारी कर रही है।  कानूनी सुनवाई किसी अन्य राज्य में की जाए सीएम हाउस में मुख्यमंत्री के ओएसडी से मुलाकात के दौरान ट्विशा के पिता और भाई को इस मामले में उचित और निष्पक्ष कार्रवाई का आश्वासन मिला है. OSD से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने कहा, "हमारी मुख्य रूप से दो मांगें हैं. पहली मांग यह है कि बेटी का दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली एम्स में कराया जाए, और दूसरी यह कि इस पूरे मामले की कानूनी सुनवाई मध्य प्रदेश के बजाय किसी अन्य राज्य में की जाए." उन्होंने बताया कि इस विषय पर अभी परिवार में चर्चा होगी और उसके बाद ही आगे का कोई फैसला लिया जाएगा।  क्या है ट्विशा शर्मा भोपाल मौत का पूरा मामला? 31 वर्षीय ट्विशा शर्मा मूल रूप से नोएडा की रहने वाली थीं और उन्होंने एक मॉडल के रूप में भी काम किया था. शादी से पहले वह दिल्ली में जॉब करती थीं. वैवाहिक वेबसाइट 'शादी डॉट कॉम' के जरिए उनका रिश्ता भोपाल की रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह के बेटे वकील समर्थ सिंह से तय हुआ था. दोनों ने दिसंबर 2025 में शादी की थी. शादी के कुछ समय बाद ट्विशा का गर्भपात हो गया और इसके बाद 12 मई 2026 को उन्होंने कथित तौर पर फांसी लगाकर अपनी जान दे दी।  शरीर पर चोटों के निशान, मौत … Read more

10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

20,000 नए शिक्षक व अनुदेशक बेसिक शिक्षा के कायाकल्प को बनाएंगे और मजबूत: सीएम योगी 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने बढ़े मानदेय और स्वास्थ्य सुरक्षा सुविधा का किया शुभारम्भ 10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा गया: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए अनुदेशकों की नियुक्ति की जाएगी: सीएम सीएम बोले: हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता बेसिक शिक्षा परिषद में 96% विद्यालयों में पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं, ड्रॉपआउट दर घटी: सीएम बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद की कायाकल्प यात्रा को और अधिक मजबूती देने के लिए प्रदेश सरकार 20,000 नए शिक्षक और अनुदेशकों की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए प्रदेश सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में शिक्षा आयोग का गठन किया गया है, जो विभिन्न स्तरों पर शिक्षकों का चयन कर रहा है। उन्होंने कहा कि 10,000 नए शिक्षकों का अधियाचन भेजा जा चुका है, जबकि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नए अनुदेशकों की नियुक्ति भी की जाएगी, जिससे छात्र-शिक्षक अनुपात भी बेहतर होगा। मुख्यमंत्री रविवार को लोकभवन सभागार में बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के सम्मान समारोह एवं बढ़े हुए मानदेय के चेक वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सरकार ने खुद मांगा मानदेय वृद्धि का प्रस्ताव मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2011-12 में बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम के तहत शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अंशकालिक अनुदेशकों की नियुक्ति शुरू की गई थी। उस समय उन्हें 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता था। वर्तमान में कला शिक्षा के 8,469, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा के 9,645 तथा कार्यानुभव शिक्षा के 6,192 अनुदेशक कार्यरत हैं और कुल संख्या 24,296 रह गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2011-12 से लेकर 2022 तक इनके मानदेय में कोई वृद्धि नहीं हुई थी। वर्ष 2019 में अनुदेशक महासंघ के साथ बैठक में उन्होंने स्वयं प्रस्ताव मांगा था, लेकिन चुनाव अधिसूचना के कारण निर्णय नहीं हो सका। वर्ष 2022 में सरकार ने 2,000 रुपये की वृद्धि की, लेकिन सरकार स्वयं भी इससे संतुष्ट नहीं थी। सभी अनुदेशक पोर्टल पर कराएं पंजीकरण, जल्द मिलेगा स्वास्थ्य कार्ड मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का मानना है कि अनुदेशक, शिक्षामित्र और बेसिक शिक्षा से जुड़े प्रत्येक कर्मचारी का सम्मान और मानदेय गरिमापूर्ण होना चाहिए। लंबे समय से चली आ रही मांगों को स्वीकार करते हुए सरकार ने अब अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाकर 17,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। साथ ही उन्हें और उनके परिवारों को 5 लाख रुपये तक का कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर भी उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी अनुदेशक बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा तैयार पोर्टल पर तत्काल पंजीकरण कराएं ताकि अगले सप्ताह बड़े समारोह में स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा सकें। शिक्षा की नींव मजबूत करने वालों को सामाजिक सुरक्षा की गारंटी अवश्य मिलनी चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के लगभग 1.43 लाख शिक्षामित्रों, 24,296 अनुदेशकों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को सामाजिक एवं स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति भारत की शिक्षा की नींव मजबूत करने के लिए निरंतर योगदान दे रहा है, उसे सामाजिक सुरक्षा की गारंटी अवश्य मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बढ़ा हुआ मानदेय सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा और कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी इससे जुड़ी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2019 में अनुदेशक बहनों को छह माह का पूर्ण मानदेय सहित मातृत्व अवकाश दिया था। वर्ष 2023 में स्वेच्छा से विद्यालय परिवर्तन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसके तहत 4,000 से अधिक अनुदेशकों को अपनी पसंद का विद्यालय चुनने का अवसर मिला।  96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में जब उनकी सरकार बनी, उस समय बेसिक शिक्षा परिषद की स्थिति बेहद खराब थी। 100 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों में अनुदेशकों की सेवाएं समाप्त करने तक के प्रस्ताव आए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें अस्वीकार करते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ और ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ की शुरुआत की। आज परिणाम यह है कि 96 प्रतिशत बेसिक विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं और विद्यालयों की स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि ड्रॉपआउट दर, जो पहले 17-18 प्रतिशत थी, अब घटकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई है और सरकार का लक्ष्य इसे शून्य तक पहुंचाना है।  बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें मुख्यमंत्री ने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी प्रतिभा के साथ जन्म लेता है। कोई खेल में अच्छा होता है, कोई कला में, कोई विज्ञान में। शिक्षकों और अनुदेशकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की छिपी प्रतिभा को पहचानें और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दें। उन्होंने कहा कि बच्चों को दबाने की नहीं, बल्कि प्रेरित करने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है। आत्म अनुशासन, समय पालन, स्वच्छता और संस्कार शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने मीडिया से भी अपील करते हुए कहा कि यदि बच्चे श्रमदान करते दिखाई दें तो उसे नकारात्मक रूप में प्रस्तुत न किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों को छुई-मुई न बनाएं, उन्हें मजबूत, अनुशासित और आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। बेसिक शिक्षा परिषद से उन्होंने कहा कि ऐसे शिक्षकों को दंडित करने के बजाय सम्मानित किया जाना चाहिए जो बच्चों में अनुशासन और स्वच्छता की भावना विकसित कर रहे हैं। समय पर उपलब्ध करा दी जाएंगी पुस्तकें मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ को नीति आयोग ने देश के सामने एक सफलता की कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के सामूहिक प्रयासों से ही यह बदलाव संभव हुआ है। सरकार की साफ नीयत और स्पष्ट नीति के कारण आज प्रदेश में लगभग 1 करोड़ 60 लाख बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में अध्ययन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने बच्चों के लिए जूते-मोजे, यूनिफॉर्म, स्वेटर और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था … Read more