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NRI ने भर दिया भारत का डॉलर खजाना! RBI की स्कीम को मिला जबरदस्त रिस्पॉन्स, 127 अरब डॉलर जुटाए

नई दिल्ली प्रवासी भारतीयों (NRI) से डॉलर जुटाने की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की खास पहल उम्मीद से कहीं ज्यादा सफल रही. 31 अगस्त 2026 तक फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट के जरिए भारत में $100 बिलियन से ज्यादा की रकम आ चुकी थी. तेज इनफ्लो को देखते हुए RBI ने इस स्कीम के लिए दी गई स्पेशल स्वैप फैसिलिटी की विंडो तय समय से करीब एक महीने पहले ही बंद कर दी।  इस तेज डॉलर इनफ्लो से भारत का फॉरेक्स रिजर्व भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. 21 अगस्त तक देश का विदेशी मुद्रा भंडार $729.3 बिलियन था. इससे कुछ ही हफ्ते पहले 24 जुलाई को यह करीब $682 बिलियन था।  मिडिल ईस्ट संकट से बढ़ा डॉलर का दबाव RBI का यह कदम ऐसे समय में आया, जब मिडिल ईस्ट में जारी जंग और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारत के बाहरी खाते और रुपये पर दबाव बढ़ा रखा था. रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल फरवरी में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भारत के फॉरेक्स रिजर्व में करीब $46 बिलियन की कमी आई थी. इसी दौरान 24 जुलाई तक रिजर्व करीब $682 बिलियन रह गया था, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 6% कमजोर हो चुका था. ऐसे माहौल में RBI ने NRI से विदेशी मुद्रा जुटाने के लिए FCNR(B) डिपॉजिट को बढ़ावा देने की रणनीति अपनाई।  क्या है FCNR(B) डिपॉजिट? फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) अकाउंट NRI के लिए एक फिक्स्ड टर्म डिपॉजिट होता है. इसमें NRI अपनी विदेशी कमाई को भारत में विदेशी मुद्रा में जमा कर सकते हैं. उन्हें रकम को पहले भारतीय रुपये में बदलने की जरूरत नहीं होती. इस खाते की खासियत यह है कि मूलधन और उस पर मिलने वाला ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही वापस मिलते हैं. ऐसे में NRI को रुपये में उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं उठाना पड़ता।  क्यों शुरू करनी पड़ी खास स्वैप फैसिलिटी? FCNR(B) डिपॉजिट में इनफ्लो पहले कमजोर हो गया था. वित्त वर्ष 2024-25 में इस माध्यम से $7 बिलियन से ज्यादा की रकम आई थी, लेकिन FY26 में यह घटकर सिर्फ $946 मिलियन रह गई. इनफ्लो को फिर से बढ़ाने के लिए RBI ने जून 2026 में एक खास स्वैप फैसिलिटी का ऐलान किया था. इसके तहत 3 से 5 साल की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट पर बैंकों को रियायती स्वैप की सुविधा दी गई. इस व्यवस्था में हेजिंग की लागत RBI ने वहन की. इसका मकसद NRI को विदेशी मुद्रा भारत में जमा करने के लिए ज्यादा आकर्षक विकल्प देना था।  RBI की उम्मीद से कहीं ज्यादा आया पैसा RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा को शुरुआत में करीब $80 बिलियन के इनफ्लो की उम्मीद थी. लेकिन डिपॉजिट में पैसा आने की रफ्तार अनुमान से काफी ज्यादा रही. अगस्त की शुरुआत तक ही करीब $40.8 बिलियन आ चुके थे. इसके बाद 31 अगस्त तक FCNR(B) के जरिए आने वाली रकम $100 बिलियन के आंकड़े को पार कर गई. तेज इनफ्लो को देखते हुए RBI ने 30 सितंबर 2026 की तय डेडलाइन का इंतजार नहीं किया और स्पेशल स्वैप फैसिलिटी की विंडो करीब एक महीने पहले ही बंद कर दी।  फॉरेक्स रिजर्व और रुपये को मिला सहारा इस डॉलर इनफ्लो का असर भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर भी दिखाई दिया. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 21 अगस्त तक भारत का फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर रिकॉर्ड $729.3 बिलियन पर पहुंच गया था. 24 जुलाई को यह करीब $682 बिलियन था. इतना बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार भारत के करंट अकाउंट डेफिसिट को फाइनेंस करने और बाहरी झटकों से निपटने में मदद कर सकता है. रुपये को भी इससे कुछ राहत मिली. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 सितंबर को रुपया 0.4% मजबूत होकर 94.7988 प्रति डॉलर पर पहुंच गया. यह 1 जुलाई के बाद रुपये का सबसे मजबूत स्तर था. इस दौरान RBI ने ऑफशोर और ऑनशोर बाजारों में डॉलर की बिक्री भी की।  NRI से पहले भी RBI ने जुटाए हैं डॉलर मुश्किल आर्थिक परिस्थितियों में RBI के लिए NRI से विदेशी मुद्रा जुटाना कोई नया कदम नहीं है. 1991 के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स संकट के दौरान भी प्रवासी भारतीयों के विदेशी मुद्रा संसाधनों का इस्तेमाल किया गया था. इसके बाद 2013 में रुपये पर दबाव बढ़ने के दौरान करीब $34 बिलियन जुटाए गए थे. $100 बिलियन से ज्यादा का फॉरेन करेंसी इनफ्लो दिखाता है कि संकट के समय NRI डिपॉजिट भारत के लिए विदेशी मुद्रा जुटाने का एक अहम जरिया बन सकता है। 

गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को होगा भव्य समारोह

उत्कृष्ट योगदान देने के लिए शिक्षक दिवस पर प्रदेश के 81 अध्यापकों को सम्मानित करेंगे मुख्यमंत्री गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में 5 सितंबर को होगा भव्य समारोह बेसिक शिक्षा के 61 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों को मिलेगा राज्य अध्यापक पुरस्कार, माध्यमिक के 5 शिक्षकों को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार इनमें 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) हैं शामिल    पुरस्कार के लिए चयनित अध्यापकों को गोरखपुर में ससम्मान होटलों में ठहराने की व्यवस्था गोरखपुर,   शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण में भविष्य की पीढ़ियों को आकार देने में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों की भूमिका शिक्षक दिवस पर स्वर्णिम अध्याय में दर्ज हो जाएगी। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विद्यालयों का उचित प्रबंधन, नवाचार और विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करने वाले प्रदेश के कुल 81 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार 2025 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार 2025 से सम्मानित करेंगे। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों को सम्मानित करने का भव्य समारोह गोरखपुर के योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में होगा। पुरस्कार के लिए चयनित प्रदेशभर के शिक्षकों को विशिष्ट अतिथि की तरह ससम्मान ठहराने की व्यवस्था होटलों में की गई है।  समाज के प्रति शिक्षक के समर्पण को प्रतिष्ठित करने वाले राज्य स्तरीय पुरस्कार के लिए बेसिक शिक्षा विभाग के 61 और माध्यमिक शिक्षा विभाग के 20 शिक्षकों का चयन किया गया है। इनमें कुल मिलाकर 33 शिक्षिकाएं (31 बेसिक और 2 माध्यमिक विद्यालयों की) शामिल हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिन शिक्षकों को चयनित किया गया है उनमें से 5 को ‘मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। पुरस्कार का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को अच्छे शिक्षण कार्य के लिए प्रोत्साहित करना है। साथ ही बेहतर ढंग से समाज में शिक्षा की अलख जगाने के उनके प्रयासों को और प्रभावी बनाना है। पुरस्कार राशि के रूप में मिलेंगे 25 हजार रुपये योगी सरकार, राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित होने वाले शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह के साथ ही पुरस्कार राशि के रूप में 25 हजार रुपये भी भेंट करेगी। इसके अलावा सम्मानित शिक्षकों को आजीवन उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में प्रतिवर्ष 4000 किलोमीटर की निशुल्क यात्रा की सुविधा भी मिलेगी। राज्य स्तरीय पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों की सेवानिवृत्ति की सीमा भी दो वर्ष बढ़ जाएगी।  बेसिक शिक्षा के इन शिक्षकों को दिया जाएगा राज्य अध्यापक पुरस्कार 1. संगीता शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय धनौली, अकोला, आगरा) 2. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौबारा, गजरौला, अमरोहा) 3. प्रीति मिश्रा (सहायक अध्यापक, पीएम उच्च विद्यालय बेलवा, पयागपुर, बहराइच) 4. सलमा खान (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय आदर्श, नगर क्षेत्र, बलरामपुर) 5. उर्मिला देवी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय खेमईपुर, भदोही) 6. रचना कपूर (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नंगली छोइया, हल्दौर, बिजनौर) 7. किरन देवी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अंबियापुर, बदायूं) 8. जूही मलिक (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय स्याना, बुलंदशहर) 9. उषा सिंह (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय सैदपुर, शहबादगंज, चंदौली) 10. गीता वर्मा (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय अमानाबाद, फर्रुखाबाद) 11. अर्चना पांडेय (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट स्कूल पर्थला खंजरपुर, गौतमबुद्धनगर) 12. ज्योत्स्ना गोस्वामी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय ननकागढ़ी, राजापुर, गाजियाबाद) 13. शुचि त्यागी (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पिपलैडा, दहौलाना, हापुड़) 14. विजया अवस्थी (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय मंसूरनगर, पिहानी, हरदोई) 15. पल्लवी चतुर्वेदी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सासनी, हाथरस) 16. प्रीति श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय पठाकरका, बंगरा, झांसी) 17. डॉ. सुमनलता यादव (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कुंवरपुर बनवारी, छिबरामऊ, कन्नौज) 18. डॉ. कामायनी शर्मा (सहायक अध्यापक, संविलियन विद्यालय औरोताहरपुर, ककवन, कानपुर नगर) 19. सुमन कुशवाहा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय भगवानपुर, नेवादा, कौशाम्बी) 20. प्रीति गुप्ता (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय चौकी बस स्टैंड, बिरधा, ललितपुर) 21. विनीता (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अमेठी उर्दू, गोसाईगंज, लखनऊ) 22. सीमा कुमारी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय महटौली, घिरोर, मैनपुरी) 23. प्रतिभा रानी भारती (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, हर्रा, सरूरपुर, मेरठ) 24. सुनीता रानी (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय सिरसवां, भगतपुर, मुरादाबाद) 25. आरती शर्मा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रुस्तमगढ़, मुज्जफरनगर) 26. वैलेंटिना विक्टर (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय अहमदनगर, नगर क्षेत्र, रामपुर) 27. अमिता टंडन (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय राजपुर रानी, श्रावस्ती) 28. मीरा सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गड़ईडीह, चोपन, सोनभद्र) 29. प्रीति भारती (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय नेवलगंज, हसनगंज, उन्नाव) 30. नीलम राय (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मंडुआडीह, वाराणसी) 31. सय्यदा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय पिपरिया अगरु, मरौरी, पीलीभीत) 32. सुनीत मित्र पांडेय (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गोकुला, नवाबगंज, गोंडा) 33. अमर सिंह (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय बहरावद, अतरौली, अलीगढ़) 34. राम मिलन गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च विद्यालय, नसीरपुर छितौना, जहांगीरगंज, अम्बेडकरनगर) 35. पंकज कुमार द्विवेदी (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, ठेउंगा, सोहावल, अयोध्या) 36. प्रदीप कुमार सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय भैरवपुर, कोयलसा, आजमगढ़) 37. अजीत कुमार श्रीवास्तव (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, इब्राहिमाबाद, मुरली छपरा, बलिया) 38. राहुल कुमार शुक्ल (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बहुता, त्रिवेदीगंज, बाराबंकी) 39. हरिशंकर त्रिपाठी (प्रधानाध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय गढ़चपा, मानिकपुर, चित्रकूट) 40. ओमवीर सिंह (प्रधानाध्यापक, पीएम उच्च प्राथमिक विद्यालय पिदौरा, मरेहरा, एटा) 41. वीरेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय ताखा, इटावा) 42. आनंद कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय मलूकपुर, ऐरायां, फतेहपुर) 43. संतोष कुशवाहा (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय मनिहारी, गाजीपुर) 44. नीतिराज सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय, चुनकी का डेरा, सुमेरपुर, हमीरपुर) 45. राजेश कुमार उपाध्याय (सहायक अध्यापक, पूर्व माध्यमिक विद्यालय बारीगांव, घुघली, महराजगंज) 46. संजय कुमार मिश्र (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय गरियांव, मुंगरा बादशाहपुर, जौनपुर) 47. विनीत कुमार मिश्र (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय अन्ता, रसूलाबाद, कानपुर देहात) 48. धनंजय प्रताप सिंह (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सलेमपुर लाला, कासगंज) 49. प्रमोद कुमार (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय रतासिया, बेहजम, लखीमपुर खीरी) 50. नवीन कुमार त्रिपाठी (सहायक अध्यापक, पीएम कम्पोजिट विद्यालय उनवल प्रथम, बांसगांव, गोरखपुर) 51. ओमप्रकाश तिवारी (सहायक अध्यापक, कन्या उच्च प्राथमिक विद्यालय बिलखी, कबरई, महोबा) 52. अनिल कुमार मौर्य (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय दौलसेपुर, रानीपुर, मऊ) 53. दयानंद मिश्रा (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय सिद्धि, पहारी, मिर्जापुर) 54. डॉ. देवेंद्र सिंह (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय बरना, प्रतापगढ़) 55. रामलखन मौर्या (सहायक अध्यापक, उच्च प्राथमिक विद्यालय, सिरसा, प्रतापपुर, प्रयागराज) 56. बृजकिशोर (प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय रसूलपुर, गुन्नौर, सम्भल) 57. अरुण कुमार गुप्ता (सहायक अध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय धनौरा, ददरौल, शाहजहांपुर) 58. दिनकर चौहान (प्रधानाध्यापक, प्राथमिक विद्यालय गंगेरू प्रथम, कांधला, शामली) 59. महेश कुमार (सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय बूड़ा, बर्डपुर, … Read more

GDP पर उठे सवाल तो World Bank ने दिया जवाब, बोले- कम FDI से भारतीय अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ता बड़ा असर

 नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को लेकर बहस तेज हो गई है. वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की GDP ग्रोथ 7.8% रही है. सरकार जहां इसे अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति का संकेत बता रही है, वहीं पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के आंकड़ों और इसकी गणना के तरीके पर सवाल उठाए हैं. इस बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने GDP पर उठ रहे सवालों को खारिज करते हुए तीखी टिप्पणी की है।  विवाद की बड़ी वजह GDP की नई सीरीज है. फरवरी 2026 में सरकार ने GDP की नई सीरीज जारी की थी, जिसमें बेस ईयर 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया. इसके साथ आंकड़े जुटाने और उनकी गणना के तरीके में भी बदलाव किया गया. पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि नई सीरीज में पिछली तिमाहियों के आंकड़ों में बड़ा बदलाव आया है।  उन्होंने खास तौर पर जून 2025 की तिमाही के मौजूदा कीमतों वाले GDP आंकड़े में करीब 6 लाख करोड़ रुपये की कमी का मुद्दा उठाया है. सुभाष चंद्र गर्ग का तर्क है कि अगर पुराने आंकड़ों को आधार बनाया जाए तो जून 2026 की ग्रोथ का आंकड़ा काफी अलग दिखाई देगा और यह 2.6% के आसपास ठहरेगा. उनका यह दावा सरकार के 7.8% ग्रोथ के दावे के एकदम विपरीत है।  कांग्रेस भी सरकार पर उठा रही सवाल कांग्रेस भी GDP के आंकड़ों को लेकर सरकार पर निशाना साध रही है. पार्टी का आरोप है कि नई GDP सीरीज और आंकड़ों में बदलाव के जरिए अर्थव्यवस्था की तस्वीर को जरूरत से ज्यादा मजबूत दिखाया जा रहा है. कांग्रेस का कहना है कि सिर्फ GDP ग्रोथ बढ़ने से आम लोगों की आर्थिक स्थिति बेहतर नहीं हो जाती. रोजगार, कमाई, खपत और लोगों की जेब में बचने वाली रकम जैसे मुद्दों को भी देखना जरूरी है।  नीलकंठ मिश्रा ने दावों को बताया 'अल्पज्ञान' इस पूरे विवाद के बीच वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर GDP के आंकड़ों का बचाव किया. उन्होंने GDP की नई सीरीज पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें 'अल्पज्ञानी और बेहद गलत दावों' को देखकर हैरानी होती है. उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग और कांग्रेस पार्टी की ओर माना जा रहा है।  नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि GDP के आंकड़ों में हुए बदलाव को समझे बिना पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करना सही नहीं है. उनके मुताबिक, नई सीरीज में आंकड़े जुटाने और अर्थव्यवस्था की वास्तविक गतिविधियों को मापने का तरीका बेहतर किया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि गलत जानकारी कई बार सही जानकारी से ज्यादा तेजी से फैलती है. इसलिए सही तथ्यों को बार-बार सामने रखना जरूरी है।  सिर्फ GDP नहीं, ये आंकड़े भी सकारात्मक नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति समझने के लिए सिर्फ GDP का आंकड़ा देखना पर्याप्त नहीं है. उन्होंने अगस्त के कई आंकड़ों का हवाला दिया. उनके मुताबिक, कार और SUV की बिक्री में करीब 35% की बढ़ोतरी हुई है. दोपहिया वाहनों की बिक्री भी 20% से ज्यादा बढ़ी है. निर्यात में करीब 9% की बढ़ोतरी हुई है. कमर्शियल वाहनों की बिक्री में तो करीब 40% की तेजी देखने को मिली है. वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा के मुताबिक, यह कारोबार और निर्माण गतिविधियों में मजबूती का संकेत है।  कर्ज और निवेश में भी दिख रहा सुधार नीलकंठ मिश्रा ने कहा कि बैंक लेंडिंग की ग्रोथ भी उम्मीद से बेहतर रही है. उनके मुताबिक, पहले कर्ज की धीमी रफ्तार की एक बड़ी वजह बैंकों की तरफ से कर्ज देने में कमजोरी थी, लेकिन अब इसमें सुधार दिखाई दे रहा है. टैक्स कलेक्शन में सुधार और निर्माण क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि देश में निवेश की गतिविधियां भी जारी हैं. निर्माण क्षेत्र के सभी संकेतक बेहद मजबूत हैं. उनका मानना है कि अब उन लोगों की संख्या बेहद कम हो जानी चाहिए जो लगातार निजी क्षेत्र के निवेश के कमजोर होने का रोना रोते हैं, क्योंकि देश में निवेश के स्पष्ट और पुख्ता प्रमाण मौजूद हैं।  आम आदमी की कमाई अब भी चुनौती हालांकि, नीलकंठ मिश्रा ने यह भी माना कि अर्थव्यवस्था में अभी कुछ 'स्लैक' यानी कमियां मौजूद हैं. इसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था अभी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर रही है. उन्होंने वास्तविक वेतन यानी महंगाई को हटाने के बाद बचने वाली कमाई में धीमी बढ़ोतरी को इसका एक संकेत बताया. उनके मुताबिक, इस स्थिति को पूरी तरह बदलने में कुछ तिमाहियां लग सकती हैं. उन्होंने कहा कि इन कमियों को पूरी तरह से दूर करने और लेबर मार्केट को मजबूत करने के लिए देश को लगातार कई तिमाहियों तक औसत से अधिक की आर्थिक विकास दर बनाए रखनी होगी, ताकि मार्केट पूरी तरह से चुस्त हो सके और भविष्य में महंगाई के दबावों को नियंत्रित रखा जा सके।  7.5% तक पहुंच सकती है भारत की ग्रोथ भविष्य की अर्थव्यवस्था को लेकर वर्ल्ड बैंक के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नीलकंठ मिश्रा ने काफी सकारात्मक रुख दिखाया है. उनका कहना है कि देश पर बजट का दबाव अब कम हो रहा है और मौद्रिक नीतियां भी अर्थव्यवस्था के लिए अनुकूल बन रही हैं. इसका असर GDP ग्रोथ पर भी दिख रहा है. उनके मुताबिक, आने वाले समय में भारत की औसत GDP ग्रोथ 7% से ऊपर रह सकती है. यहां तक कि अगर सरकार की बजट और मौद्रिक नीतियां सामान्य यानी तटस्थ भी रहती हैं, तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था करीब 7.5% की ग्रोथ हासिल कर सकती है. हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले समय में महंगाई का दबाव फिर बढ़ सकता है। 

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से बाजार में आएगी रौनक, देशभर में 40 हजार करोड़ रुपये से अधिक व्यापार का अनुमान

नई दिल्ली  देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों पर है। बड़े पैमाने पर लोग खरीदारी कर रहे हैं। घरों और मंदिरों को सजाया है। जन्माष्टमी सिर्फ आस्था का ही त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की 'सनातन अर्थव्यवस्था' का एक जीता-जागता प्रतीक है। इस वर्ष जन्माष्टमी के दौरान देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने की उम्मीद की जा रही है। रक्षाबंधन के दौरान हुए जबरदस्त व्यापार के बाद इस वर्ष श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर देशभर में 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा व्यापार होने का अनुमान है।  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (सीएआईटी) की ओर से यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर में होने वाली संभावित बिक्री, घर और धार्मिक कामों के लिए खरीदारी, मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर होने वाले खर्च, देशभर में बड़े पैमाने पर होने वाले जश्न और धार्मिक पर्यटन से जुड़े खर्चों पर आधारित है। सीएआईटी के सेक्रेटरी जनरल और भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव सिर्फ भक्ति और आस्था का त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपराओं, सामाजिक भागीदारी और आर्थिक गतिविधियों का एक अद्भुत संगम भी है। जन्माष्टमी एक अनोखा त्योहार है जहां आस्था सीधे तौर पर आर्थिक गतिविधियों में बदल जाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "वोकल फॉर लोकल" (स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने) के आह्वान का असर देश भर के त्योहारों वाले बाजारों में साफ दिख रहा है। भारतीय उत्पादों को ज्यादा प्राथमिकता मिल रही है। जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योगों, हस्तशिल्प और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को काफी बढ़ावा मिल रहा है। पूजा के सामान से लेकर सजावट और धार्मिक उत्पादों तक, जन्माष्टमी के दौरान स्वदेशी सामान की भारी मांग रहती है। प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ी हर रस्म और जश्न लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान, डेयरी उत्पादक, फूल उगाने वाले, मिठाई बनाने वाले, कपड़े के व्यापारी, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर, होटल और रेस्टोरेंट के मालिक और कई तरह की सेवाएं देने वाले लोग इस त्योहार से सीधे या परोक्ष रूप से फायदा उठाते हैं। सीएआईटी के अनुसार, 2024 में जन्माष्टमी के दौरान व्यापार लगभग 25 हजार करोड़ रुपए था और 2025 में यह बढ़कर लगभग 30 हजार करोड़ रुपए हो गया। इस वर्ष, ग्राहकों की ज्यादा मांग, सामान और सेवाओं की कीमतों में बदलाव, बढ़ते सामाजिक उत्सव, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, और मॉडर्न रिटेल व डिजिटल कॉमर्स के विकास के कारण, व्यापार में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि होने और इसके 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है। प्रवीण खंडेलवाल ने बताया कि इस साल जिन उत्पादों की मांग खास तौर पर ज्यादा है, उनमें माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद, मिठाइयां, फल, सूखे मेवे, पूजा का सामान, फूलों की मालाएं, सजावटी तोरण, झूले, लड्डू गोपाल की मूर्तियां, मुकुट, बांसुरी, मोर पंख, आभूषण और त्योहार के खास कपड़े शामिल हैं। खंडेलवाल की ओर से इस बात पर जोर दिया गया है कि भारतीय त्योहारों को सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन मानना ​​उनके असली महत्व को कम करके आंकना होगा। दिवाली, होली, रक्षाबंधन, नवरात्रि, गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दुर्गा पूजा, करवा चौथ, छठ पूजा और कई अन्य त्योहार लाखों व्यापारियों, कारीगरों, शिल्पकारों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्वरोजगार करने वाले लोगों और सेवा प्रदाताओं के लिए आर्थिक अवसरों का एक बड़ा नेटवर्क बनाते हैं। जन्‍माष्‍टमी पर कहां कितना खर्च करेंगे लोग?  कैट के आकलन के अनुसार जन्माष्टमी से जुड़े व्यापार में कई चीजों की हिस्‍सेदारी रहने वाली है. खंडेलवाल ने बताया कि इस वर्ष बाजारों में माखन-मिश्री, दूध, दही, पनीर और अन्य डेयरी उत्पादों, मिठाइयों, फलों, सूखे मेवों, पूजा सामग्री, फूल-मालाओं, बंदनवार, झूलों, लड्डू गोपाल की मूर्तियों, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, आभूषणों और विशेष परिधानों की मांग विशेष रूप से बढ़ी हुई है।  मिठाई, माखन-मिश्री और डेयरी उत्पाद पर 20% तो पूजा सामग्री, धूप-अगरबत्ती, पंचामृत और पूजन किट पर 10% खर्च कर सकते हैं. वहीं फूल, मालाएं और सजावट सामग्री पर 12%, पारंपरिक परिधान और वस्त्र पर 10%, फल, सूखे मेवे और प्रसाद सामग्री पर 10% खर्च किया जा सकता है. लड्डू गोपाल की मूर्तियां, झूले और श्रृंगार सामग्री पर 8%, उपहार, खिलौने और घरेलू सजावटी सामग्री पर 5%, धार्मिक पर्यटन, होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं पर 15% और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं पर 10% खर्च कर सकते हैं।  राष्‍ट्रीय महामंत्री बोले- वोकल फॉर लोकल की ताकत  कैट के राष्ट्रीय महामंत्री एवं चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव केवल श्रद्धा और भक्ति का पर्व नहीं है, बल्कि यह भारत की संस्कृति, परंपरा, सामाजिक सहभागिता और आर्थिक गतिविधियों का अद्भुत संगम भी है. जन्माष्टमी ऐसा पर्व है, जिसमें आस्था सीधे आर्थिक गतिविधियों में परिवर्तित होती दिखाई देती है।  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए “वोकल फॉर लोकल” के आह्वान का प्रभाव त्योहारों के बाजारों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है. अब उपभोक्ता बड़ी संख्या में भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्थानीय व्यापार, कुटीर उद्योग, हस्तशिल्प, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को व्यापक लाभ मिल रहा है।  किसान, फल-फूल विक्रेता से होटल-रेस्‍तरां व्‍यवसाई तक को लाभ   जन्माष्टमी के अवसर पर पूजा सामग्री से लेकर सजावटी वस्तुओं और धार्मिक उत्पादों तक अधिकांश मांग स्वदेशी वस्तुओं की है. खंडेलवाल ने कहा कि जन्माष्टमी से जुड़ा प्रत्येक अनुष्ठान और आयोजन किसी न किसी रूप में लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा हुआ है. किसान, दुग्ध उत्पादक, फूल उत्पादक, मिठाई कारोबारी, वस्त्र विक्रेता, मूर्तिकार, कारीगर, महिला उद्यमी, ट्रांसपोर्टर, होटल व्यवसायी, रेस्तरां संचालक और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग इस पर्व से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होते हैं।  2024 में 25,000 करोड़, 2025 में 30,000 करोड़ का कारोबार  कैट के अनुसार वर्ष 2024 में जन्माष्टमी के अवसर पर देशभर में लगभग ₹25,000 करोड़ का व्यापार हुआ था, जबकि वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग ₹30,000 करोड़ तक पहुंच गया. इस वर्ष उपभोक्ता मांग में वृद्धि, वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन, त्योहारों के बढ़ते सामाजिक विस्तार, धार्मिक पर्यटन में वृद्धि और आधुनिक रिटेल एवं डिजिटल खरीदारी के विस्तार को देखते हुए लगभग 30 प्रतिशत वृद्धि के साथ व्यापार ₹40,000 करोड़ से अधिक रहने का अनुमान है।  सनातन अर्थव्‍यवस्‍था की ताकत  उन्‍होंने कहा कि भारत के त्योहारों को … Read more

धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को मिल रही रफ्तार, CM डॉ. यादव बोले- देश में तेजी से हो रहा विकास

देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुन: स्थापित करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध उज्जैन में महाकाल लोक निर्माण के बाद 20 गुना बढ़ गई श्रद्धालुओं की संख्या मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान द्वारकाधीश के किए दर्शन प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की मुख्यमंत्री ने देश-प्रदेशवासियों को दीं जन्माष्टमी की शुभकामनाएं भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को सपत्नीक गुजरात की देवभूमि द्वारका के पावन द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर सपत्नीक भगवान द्वारकाधीश के अलौकिक रूप का दर्शन एवं विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान द्वारकाधीश से सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से पहले देश-प्रदेशवासियों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर्व के हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सीमा यादव एवं अन्य परिजनों सहित सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय के डॉ. इलैया राजा टी. भी उपस्थित थे। मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा भगवान द्वारकाधीश के दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर के बाहर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज वे सपरिवार द्वारिका आये हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश के उज्जैन और गुजरात की द्वारिका नगरी सहित देशभर में लगातार धार्मिक पर्यटन के नए कीर्तिमान गढ़े जा रहे हैं। उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या 20 गुना बढ़ गई है। वर्तमान में लगभग 10 करोड़ से अधिक तीर्थ यात्री उज्जैन आ रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के कर कमलों से उज्जैन में बाबा महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद बनारस में भी काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का निर्माण हुआ, जिससे बाबा विश्वनाथ की नगरी में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिली हैं। जन्माष्टमी से पहले भगवान द्वारकाधीश के दर्शन का मिला सौभाग्य मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि द्वारकाधीश मंदिर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सनातन संस्कृति के चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ है। जन्माष्टमी से ठीक पहले भगवान द्वारकाधीश के भव्य दर्शन का अवसर मिलना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुछ समय पहले ही वे सोमनाथ धाम गये थे। इसके बाद आज द्वारका के प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर में विधिवत् दर्शन-पूजन-अर्चन कर यहां की सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। हम भी अपने देवस्थानों में बेहतर से बेहतर प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में श्रद्धालुओं के लिए विकसित की जा रहीं सुगम व्यवस्थाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार लगातार धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं देवस्थानों पर सहज एवं सुगम आवागमन, श्रद्धालुओं के ठहरने, उनकी सुरक्षा और पर्यटकों की वृद्धि को देखते हुए वहां सभी जरूरी अधोसंरचनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है। हमारी सरकार भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुन: स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।  

छत्तीसगढ़ में जन्माष्टमी पर सख्ती, शराब-मांस की बिक्री पर रोक; लागू होगा ‘नो नॉन-वेज डे’

रायपुर. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर छत्तीसगढ़ में 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को कई महत्वपूर्ण प्रतिबंध लागू रहेंगे। राज्य शासन ने जहां जन्माष्टमी के दिन पूरे प्रदेश में शुष्क दिवस घोषित किया है, वहीं नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नगरीय निकायों की सीमा में आने वाले पशुवध गृह और मांस बिक्री की दुकानों को भी बंद (नो नॉन-वेज डे) रखने के निर्देश दिए हैं। वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार 4 सितंबर को प्रदेशभर की सभी देशी और विदेशी मदिरा की फुटकर दुकानें बंद रहेंगी। इसके साथ ही रेस्टोरेंट बार, होटल बार, क्लब, अहाता तथा शराब बेचने या परोसने वाले अन्य सभी लाइसेंसी प्रतिष्ठान भी बंद रहेंगे। इस दौरान भांग और भांगघोटा की फुटकर दुकानें भी बंद रखने के निर्देश हैं। शराब बेचने और परोसने पर रहेगी पूरी रोक शुष्क दिवस के दौरान किसी भी होटल, रेस्टोरेंट, क्लब अथवा अन्य प्रतिष्ठान या व्यक्ति को मदिरा बेचने या परोसने की अनुमति नहीं होगी। गैरमालिकाना क्लब, रेस्टोरेंट और स्टार होटल भी प्रतिबंध के दायरे में रहेंगे। आदेश में शुष्क दिवस की अवधि के दौरान मदिरा के व्यक्तिगत भंडारण तथा गैर-लाइसेंसी परिसरों में शराब के भंडारण पर भी रोक का उल्लेख किया गया है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर मदिरा जब्त करने के साथ संबंधित व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अवैध शराब पर आबकारी विभाग की नजर जन्माष्टमी के दौरान अवैध शराब के परिवहन, संग्रहण और बिक्री पर रोक लगाने के लिए आबकारी विभाग को विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। जिला कार्यालयों के अलावा संभागीय और राज्य स्तरीय उड़नदस्ते भी कार्रवाई करेंगे। इसके लिए जांच दल गठित किए जाएंगे, जो अवैध शराब के संभावित संग्रहण स्थलों के साथ संदिग्ध वाहनों की जांच करेंगे। नियमों का उल्लंघन मिलने पर संबंधित लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मांस की दुकानें और पशुवध गृह भी बंद इधर, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने भी जन्माष्टमी के अवसर पर पशुवध गृह और मांस बिक्री की दुकानों को बंद रखने का आदेश जारी किया है। आदेश में सभी कलेक्टरों, नगर पालिक निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि नगरीय निकायों की सीमा में स्थित पशुवध गृह एवं मांस बिक्री की दुकानों को संबंधित अवसर पर बंद रखा जाए। विभाग ने अपने पूर्व में जारी निर्देशों और शासन के संदर्भित पत्रों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि विशिष्ट अवसरों में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी शामिल है। ऐसे में 4 सितंबर को संबंधित आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

विश्वविद्यालयों को राज्यपाल डेका का संदेश, छात्र कल्याण और क्वालिटी एजुकेशन पर दें सबसे ज्यादा जोर

विद्यार्थियों का कल्याण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हो विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता – राज्यपाल  डेका निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक में नैक ग्रेडिंग, पीएचडी  की गुणवत्ता, पाठ्यक्रमों और सामाजिक दायित्वों की समीक्षा रायपुर राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि विद्यार्थियों का कल्याण विश्वविद्यालयों की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। विश्वविद्यालय शिक्षा के पवित्र मंदिर हैं, इसलिए उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास और सामाजिक दायित्वों के निर्वहन पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए।            राज्यपाल रमेन डेका ने आज निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की बैठक लेकर विश्वविद्यालयों में शिक्षा एवं शोध की गुणवत्ता सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों को नैक (NAAC) में बेहतर ग्रेडिंग प्राप्त करने के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों और शिक्षकों का अनुपात संतुलित होना चाहिए तथा विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। प्रत्येक विश्वविद्यालय में कम से कम 1000 विद्यार्थियों की संख्या सुनिश्चित करने की दिशा में कार्य करने को कहा। विश्वविद्यालय द्वारा शोधार्थियों को प्रोत्साहित करना चाहिए        डेका ने कहा कि पीएच.डी. उपाधि प्रदान करने की प्रक्रिया पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण और पारदर्शी होनी चाहिए। पीएच.डी. के लिए होने वाले पंजीयनों की विशेषज्ञों के माध्यम से रैंडम चेकिंग कराई जाएगी, ताकि शोध कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल उपाधि प्रदान करने तक सीमित न रहकर ऐसे शोध को प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसका समाज और देश के विकास में वास्तविक योगदान हो। रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दें         राज्यपाल ने कहा कि कोई भी नया पाठ्यक्रम प्रारंभ करने से पहले विश्वविद्यालय संबंधित क्षेत्र में सर्वेक्षण कर आवश्यकता और विद्यार्थियों की रुचि का आकलन करें। जिन पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या नहीं है, उन्हें बंद करने पर विचार किया जाए। अनावश्यक रूप से पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ाने के बजाय रोजगार एवं भविष्य की संभावनाओं वाले विषयों को प्राथमिकता दी जाए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल           डेका ने एनवायरनमेंटल साइंस और साइबर सिक्योरिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप इंटीग्रेटेड कोर्स को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी उन्होंने जोर दिया। विश्वविद्यालय गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका हो        डेका ने सभी निजी विश्वविद्यालयों को अपने आसपास के गांवों को गोद लेकर वहां शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नियमित कार्यक्रम संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने सामाजिक दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए। गोद लिए गए गांवों में स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रमों के साथ ब्रेस्ट कैंसर सर्वे जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में भी विश्वविद्यालय सक्रिय भूमिका निभाएं। स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान महत्वपूर्ण        राज्यपाल ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए योग और ध्यान को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को प्रत्येक विद्यार्थी तक योग पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए। विद्यार्थियों को योग के लिए इस प्रकार प्रेरित किया जाए कि यह उनकी दैनिक जीवनशैली और आदत का हिस्सा बन जाए। छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा दें      डेका ने छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण, संवर्धन और विकास के लिए विश्वविद्यालयों  को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ी भाषा से जुड़े विषयों पर शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देकर भाषा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें             राज्यपाल ने कहा कि फार्मेसी सीधे मानव स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए जिन विश्वविद्यालयों में फार्मेसी पाठ्यक्रम संचालित हैं, वहां विद्यार्थियों के बेहतर व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ टाई-अप किया जाए। उन्होंने फार्मेसी पाठ्यक्रम की गुणवत्ता के लिए नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करें             डेका ने विश्वविद्यालयों से नशा मुक्ति अभियान में विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने तथा उन्हें नशे से दूर रखने में विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय करें           राज्यपाल ने निजी विश्वविद्यालयों को शिक्षा की गुणवत्ता, शोध, रोजगारपरक शिक्षा और सामाजिक सरोकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए कार्य करने का आह्वान किया।           बैठक में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना, उच्च शिक्षा सचिव अविनाश चंपावत, निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष वी. के. गोयल सहित विभिन्न निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित थे।

विजय शाह को बड़ी राहत! कर्नल सोफिया कुरैशी मामले में MP सरकार ने मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने सेना की वरिष्ठ अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में अपने कैबिनेट मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से साफ इनकार कर दिया है।मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए इस फैसले पर राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी अपनी मुहर लगा दी है। सरकार अब इस फैसले के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना पांच सूत्रीय जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रही है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद तैयार सरकारी जवाब में पहला तर्क दिया गया है कि विजय शाह के बयान के बाद किसी भी व्यक्ति ने उनके खिलाफ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई।सरकार की दलील है कि मंत्री ने अपने पूरे बयान में कहीं भी कर्नल सोफिया कुरैशी के नाम का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया था। सरकार ने क्या वजह बताई सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि विजय शाह की टिप्पणी के बाद किसी भी व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराई। सरकार का यह भी कहना है कि शाह ने अपने बयान में कर्नल सोफिया कुरैशी का नाम नहीं लिया था। उन्होंने अपनी टिप्पणी के लिए कई बार माफी मांगी और उनका किसी का अपमान करने का इरादा नहीं था।सरकार ने यह भी दावा किया है कि शाह की टिप्पणी से सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित नहीं हुआ और न ही ऐसा करने की उनकी मंशा थी। सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ? बीते सोमवार को राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी अपनी जांच पूरी कर चुकी है। उन्होंने कहा था कि मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी। बताया जा रहा है कि सरकार जल्द ही अपना जवाब अदालत में पेश कर सकती है। क्या हुआ था विजय शाह तब विवादों में आए थे, जब मई 2025 में उनका एक वीडियो सामने आया। जिसमें उन्होंने कथित रूप से कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए शाह की भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई थी और पुलिस को उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को अपने पास ले लिया था और राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी से जांच की स्थिति रिपोर्ट मांगी थी। विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने माफी मांगी थी। हालांकि, जुलाई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का रिकॉर्ड पेश नहीं करने पर फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि वह उसके धैर्य की परीक्षा न लें। इसके बाद शाह ने कई बार माफी मांगी। सरकार के अनुसार, मंत्री का इरादा किसी को ठेस पहुंचाने या अपमानित करने का नहीं था और उनके इस बयान से समाज में कोई सांप्रदायिक सौहार्द नहीं बिगड़ा।जवाब में यह भी रेखांकित किया गया है कि विवाद बढ़ने के बाद मंत्री ने कई बार सार्वजनिक और लिखित रूप से माफी मांगकर खेद व्यक्त किया है।सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल ने अपनी जांच पूरी कर ली है।  

चित्रकूट में बाढ़ का खतरा बढ़ा! खतरे के निशान के करीब पहुंची मंदाकिनी, 400 दुकानें जलमग्न

सतना   चित्रकूट लगातार 5 दिनों से बाढ़ की चपेट में है। निचले इलाके मंदाकिनी नदी की बाढ़ में घिरे हुए है। मंदाकिनी नदीं का जल स्तर इन पांच दिनों में कई बार खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। इससे यहां का जनजीवन अस्त व्यस्थ हो चुका है। बाजार पूरी तरह से बंद है। लोगों के घर बाढ़ के कीचड़ से रहने की स्थिति में नहीं है। दुकान होटल भी बंद पड़े हुए है। चित्रकूट के 60 फीसदी हिस्से में बाढ़ की तबाही का सन्नाटा फैला हुआ है। देर शाम तक मंदाकिनी का जल स्तर बढ़ कर लंका तिराहे तक पहुंच चुका है जिससे कामदगिरी मुख्य पहुंच मार्ग बंद है। रामघाट पूरी तरह डूबा हुआ है और नयागांव में डूब प्रभावित है। यहां पर 400 से ज्यादा दुकानें डूब गई हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि मौसम विभाग ने एक बार फिर सतना जिले में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। 36 गांवों में भी अलर्ट जारी किया गया है। दो दिन और भारी वर्षा की चेतावनी मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए सतना जिले में बारिश का यलो अलर्ट बताया है जिसके अनुसार सामान्य से तेज बारिश होगी। शहर में राहत आयुक्त ने जारी किए गए वायरलेस मैसेज में भारी बारिश की संभावना जताई है। जिला मौसम कार्यालय ने बताया कि बंगाल के ऊपर बना कम दबाव का क्षेत्र झारखंड आने के बाद मध्यप्रदेश की ओर मुड़ गया। जिससे सतना जिले में झमाझम बारिश हो सकती है। शांत नहीं हो रहा जलस्तर जानकारी के अनुसार चित्रकूट और उसके ऊपरे इलाकों में जिस तरह से लगातार बारिश हो रही है उससे मंदाकिनी नदी का जल स्तर शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा है। लगातार इसका जल स्तर खतरे के निशान के आसपास ही चल रहा है। इस वजह से यहां पर राहत कार्य करने में भारी परेशानी हो रही है। सबसे बुरी स्थिति और बीमार लोगों के सामने है, जल भराव कीचड़ के कारण वे इलाज कराने तक नहीं जा पा रहे है। परिक्रमा मार्ग से पानी की निकासी चित्रकूट के परिक्रमा मार्ग में जमा पानी को पंप के माध्यम से निकाला जा रहा है। नगर परिषद द्वारा जल निकासी एवं साफ-सफाई के कार्य लगातार कराए जा रहे हैं। वार्डों और जलभराव वाले क्षेत्रों में नालियों की सफाई कर पानी की निकासी सुनिश्चित की जा रही है। नगर परिषद चित्रकूट के शेड में राहत एवं आवश्यक कार्यों के लिए दो ट्रक सुखी लकड़ी रखवाई गई है, जिसका उपयोग ईंधन की आवश्यकता के लिए किया जाएगा। चित्रकूट में चुनौती बना राहत और बचाव कार्य चित्रकूट में बाढ़ की समस्या विकट स्थितियों में पहुंच गई है। यहां पर राहत और बचाव कार्य करना काफी चुनौती पूर्ण हो गया है। इसकी मुख्य वजह मंदाकिनी नदी का लगातार बढ़ता और घटना जल स्तर है। कुछ ही घंटों में यह खतरे के निशान तक पहुंच कर कस्बे को अपने आगोश में ले लेती है और अगले कुछ घंटो में इसका जल स्तर फिर नीचे हो जाता है। सबसे बड़ी समस्या यहां सफाई कार्य हो गया है। यहां जैसे ही सफाई कार्य पूरा होता है फिर से बारिश और बाढ़ स्थिति वापस वैसी ही कर देते हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए लगातार चार दिन से कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक हंसराज सिंह, जिला पंचायत सीईओ शैलेन्द्र सिंह सहित अन्य अधिकारी चित्रकूट में ही डेरा डाले हुए है और स्वयं राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। इस तरह रहा मंदाकिनी का जल स्तर लगातार हो रही बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बुधवार की प्रातः 7 बजे 126 मीटर रिकार्ड किया गया था। वह अपरान्ह 3.30 बजे तक बढकर 129.15 मीटर तक पहुंच गया है। शाम 5 बजे की स्थिति में मंदाकिनी नदी का जल स्तर 129 मीटर पर स्थिर रिकार्ड किया गया है। चित्रकूट के शहरी क्षेत्रों में बाढ का पानी उतरने से जिला प्रशासन द्वारा प्रभावित नागरिकों को राहत एवं आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ साफ-सफाई, जल निकासी, स्वास्थ्य जांच, पेयजल शुद्धिकरण और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता से कराया जा रहा है। खजुराहो में 7 इंच से ज्यादा वर्षा मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले 24 घंटों के दौरान गुरुवार सुबह साढ़े आठ बजे तक खजुराहो में सर्वाधिक 178.2 मिमी यानी 7 इंच से ज्यादा वर्षा हुई। वहीं सतना में 88.2, नौगांव में 87.8, जबलपुर में 70.6, सागर में 70.5, मंडला में 61.1, बालाघाट जिले के मलाजखंड में 58, सीधी में 54.2, उमरिया में 51.6 और रीवा में 42.8 मिलीमीटर बरसात हुई। कुछ अन्य जिलों में भी मध्यम से हल्की बरसात हुई। निम्न दाब का क्षेत्र, तीन ट्रफ लाइन हैं एक्टिव मौसम विज्ञानी प्रमेंद्र कुमार ने बताया कि झारखंड और उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश के ऊपर बना निम्न दाब का क्षेत्र गुरुवार को आगे बढ़ते हुए दक्षिणी उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश से गुजरेगा। साथ ही बंगाल की खाड़ी तक फैली मानसून ट्रफ लाइन के चलते प्रदेश में वर्षा की गतिविधियां तेज होंगी। इसके अलावा अन्य दो ट्रफ लाइन भी सक्रिय हैं। चार और पांच सितंबर को भोपाल में तेज वर्षा हो सकती है। इन जिलों के लिए अलर्ट जारी रेड अलर्ट: नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अत्यधिक भारी वर्षा। ऑरेंज अलर्ट: रायसेन, बैतूल, नरसिंहपुर, सिवनी, सागर, छतरपुर में अति भारी वर्षा। येलो अलर्ट (भारी वर्षा): विदिशा, सीहोर, राजगढ़, आगर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, सतना, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा में भारी वर्षा के आसार। येलो अलर्ट (हल्की व मध्यम वर्षा): भोपाल, हरदा, बुरहानपुर समेत कुछ अन्य जिलों में।  

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर राज्यपाल रमेन डेका ने दिया जोर

दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए और अधिक प्रयास जरूरी -राज्यपाल रमेन डेका वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज राज्यपाल ने टीम के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर किया सम्मानित रायपुर  राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए छत्तीसगढ़ में अभी और बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्हें गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री सहज रूप से उपलब्ध कराना हम सभी की जिम्मेदारी है। तकनीक के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने का वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ का प्रयास सराहनीय और अनुकरणीय है। वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम को उल्लेखनीय योगदान के लिए किया सम्मानित           राज्यपाल डेका से आज लोक भवन में वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम छत्तीसगढ़ के सदस्यों ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल ने टीम के सभी सदस्यों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। टीम की उपलब्धि को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किए जाने पर उन्होंने सभी सदस्यों को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। शारदा ने 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी           वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम द्वारा दृष्टिबाधित एवं सामान्य विद्यार्थियों के लिए 11 हजार से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इस अभिनव अभियान की शुरुआत 5 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रपति पुरस्कृत शिक्षिका सुके. शारदा के नेतृत्व में हुई। सुशारदा स्वयं अब तक 1,800 से अधिक ऑडियो बुक्स तैयार कर चुकी हैं। उनके नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के 30 शिक्षक- शिक्षिकाएं अपने नियमित शैक्षणिक दायित्वों के साथ इस कार्य में योगदान दे रहे हैं। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर बनाने समान अवसर           राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए। दृष्टिबाधित विद्यार्थियों के लिए ऑडियो के माध्यम से अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना उन्हें आत्मनिर्भर बनाने और शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को और व्यापक बनाने की जरूरत है, ताकि अधिक से अधिक दृष्टिबाधित विद्यार्थी इसका लाभ उठा सकें। वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल को 8 लाख से अधिक बार देखा गया         वर्ल्ड ऑडियो बुक चैनल पर 107 से अधिक प्लेलिस्ट उपलब्ध हैं और इसे अब तक 8 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। टीम द्वारा विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित एवं उपयोगी अध्ययन सामग्री तैयार की जा रही है। इस अवसर पर गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की छत्तीसगढ़ हेड डॉ. सोनल राजेश शर्मा सहित वर्ल्ड ऑडियो बुक टीम के सभी सदस्य उपस्थित थे।