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मध्य प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट, 25 जिलों में झमाझम के आसार; बरगी डैम से छोड़ा जा रहा पानी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून का स्ट्रॉन्ग सिस्टम एक्टिव है। चित्रकूट में मंदाकिनी का जलस्तर 138.52 मीटर पर डेंजर लेवल के करीब स्थिर है। SDRF ने करीब 100 लोगों को सुरक्षित बचाया है। छतरपुर में बारिश और बाढ़ के खतरे को देखते हुए आज सभी स्कूलों में छुट्टी है। मैहर में पुलों के ऊपर से पानी बहने के कारण मुकुंदपुर मार्ग बंद है। मंडला में नर्मदा का जलस्तर 436.1 मीटर पहुंच गया है। जबलपुर में बरगी बांध का जलभराव 93.33% होने के बाद 5 गेट करीब 1 मीटर खोले गए हैं। इससे नर्मदा घाटों पर 3 से 4 फीट पानी बढ़ने की संभावना है। बरगी डैम के भी 5 गेट खोले गए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, गुरुवार को प्रदेश के आधे हिस्से में भारी बारिश की चेतावनी है। नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा में अति भारी बारिश का रेड अलर्ट, जबकि छतरपुर, सागर, रायसेन, नरसिंहपुर, सिवनी और बैतूल में ऑरेंज अलर्ट है। इन जिलों में 24 घंटे में 4 इंच से ज्यादा बारिश हो सकती है। इन जिलों में भी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग के मुताबिक, सीहोर, आगर-मालवा, राजगढ़, गुना, विदिशा, अशोकनगर, शिवपुरी, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, दमोह, पन्ना, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, डिंडौरी, मंडला, पांढुर्णा और बालाघाट में भारी बारिश हो सकती है। वहीं, भोपाल, रायसेन, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सिवनी, नरसिंहपुर, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर और छतरपुर में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश का अनुमान है। कल से पश्चिमी हिस्से में पहुंचेगा सिस्टम मौसम विशेषज्ञों की मानें तो 4 सितंबर को सिस्टम आगे बढ़ेगा। भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, नर्मदापुरम, चंबल संभाग में इसका ज्यादा असर दिखाई देगा। भोपाल, उज्जैन और ग्वालियर में भारी बारिश हो सकती है। इंदौर में तेज बारिश होने का अनुमान नहीं है। 5 सितंबर को प्रदेश के उत्तरी हिस्से में तेज बारिश हो सकती है। 6 सितंबर को ग्वालियर-चंबल संभाग में सिस्टम असर दिखाएगा। बांधों में बढ़ रहा पानी लगातार बारिश की वजह से प्रदेश के बांधों की स्थिति सुधरी है। अधिकांश बांधों में 70 प्रतिशत तक पानी आ गया है। कुछ डैम के गेट तो खोल दिए गए हैं। हालांकि, इंदौर और उज्जैन संभाग के बांधों की स्थिति ठीक नहीं है। भोपाल के बड़ा तालाब में पानी का लेवल 1666.50 फीट तक पहुंच गया है। अब यह सिर्फ 0.30 फीट ही खाली है। बड़ा तालाब फुल भरने के बाद भदभदा डैम के गेट खुलेंगे। यहां से छोड़ा जाने वाला पानी कलियासोत डैम में पहुंचेगा और इसमें भी पानी का लेवल बढ़ जाएगा। अब तक 28.1 इंच बारिश मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में अब तक 714.2 मिमी यानी 28.1 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 31.5 इंच (799.9 मिमी) की तुलना में 3.4 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 11 प्रतिशत कम पानी गिरा है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में 4% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 17% बारिश कम हुई है।

Chandigarh Master Plan 2031: आज दिल्ली में बड़ा मंथन, ऊंची इमारतों, FAR और फ्रीहोल्ड प्रस्ताव पर होगी चर्चा

चंडीगढ़  शहर के भविष्य से जुड़े कई अहम फैसलों पर आज दिल्ली में मंथन होगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित बदलावों के साथ पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने, व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने और मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने के प्रस्ताव पर चर्चा होगी। इन फैसलों का सीधा असर शहर के विकास, संपत्ति व्यवस्था और नगर निगम के कामकाज पर पड़ सकता है। यूटी प्रशासन की ओर से गृह सचिव रामनदीप बराड़, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा और उपायुक्त निशांत कुमार यादव के बैठक में शामिल होने की संभावना है। अधिकारी प्रस्तावों पर प्रस्तुति देंगे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के साथ इनमें बदलाव या नए सुझाव भी दिए जा सकते हैं। मास्टर प्लान में ऊंची इमारतों का रास्ता होगा साफ मास्टर प्लान-2031 में संशोधन को लेकर प्रशासन ने ड्राफ्ट अधिसूचित कर लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित बदलावों में चिन्हित परिधीय और फेज-3 क्षेत्रों में एफएआर बढ़ाकर 3.0 करने का प्रावधान है। वहीं चयनित बाहरी सेक्टरों, फेज-3 और औद्योगिक क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को मंजूरी देने का प्रस्ताव है। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े प्लाटों को विभाजित करने, फेज-1 से बाहर स्कूल-कालेज और सांस्कृतिक संस्थानों के लिए एफएआर व ऊंचाई सीमा में राहत देने का भी प्रस्ताव है। इसके अलावा चिन्हित इलाकों में हाईराइज और मिश्रित भू-उपयोग के जरिए बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा करने की योजना है। प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद प्रस्तावित संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद तय प्रक्रिया के तहत मास्टर प्लान में बदलाव की कार्रवाई आगे बढ़ेगी। फ्रीहोल्ड से करोड़ों की संपत्तियां होंगी अन-लॉक लीजहोल्ड व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का प्रस्ताव भी बैठक में महत्वपूर्ण रहेगा। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अनलाक होंगी। संपत्ति मालिकों को राहत मिलने के साथ प्रशासन का राजस्व भी बढ़ेगा और कारोबार करना आसान होगा। यूटी प्रशासन ने मई में इस प्रस्ताव को मंजूरी देकर गृह मंत्रालय को भेजा था। पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को मालिकाना हक की उम्मीद पुनर्वास कालोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने का प्रस्ताव भी लंबे समय से लंबित है। प्रशासन ने इस संबंध में भी गृह मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। इस पर फैसला होने से हजारों परिवारों की संपत्तियों से जुड़ी स्थिति स्पष्ट हो सकती है। मेयर का कार्यकाल ढाई साल करने पर भी नजर मेयर का कार्यकाल एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव भी बैठक में अहम रहेगा। नगर निगम के मौजूदा सदन का कार्यकाल समाप्त होने की ओर है और आने वाले महीनों में चुनाव प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर का कार्यकाल बढ़ाने का फैसला निगम के कामकाज के साथ-साथ आगामी राजनीतिक बदलाव पर भी असर डाल सकता है। मंजूरी मिली तो आगे बढ़ेगी प्रक्रिया प्रशासन की नजर अब दिल्ली में होने वाली बैठक के फैसले पर है। अधिकारियों का कहना है कि सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद संबंधित प्रस्तावों पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैठक में चंडीगढ़ के विकास और प्रशासन से जुड़े अन्य प्रस्तावों पर भी सुझाव आने की संभावना है।  

बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ अव्वल, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम

रायपुर : बारिश की हर बूंद सहेजने में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी, ‘जल संचय जन भागीदारी’ के तीसरे चरण में देश में प्रथम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया छत्तीसगढ़ का जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण मॉडल खेत का 5 प्रतिशत हिस्सा जल संरक्षण के लिए देने की किसानों की अनूठी पहल बनी मिसाल जल संचय जन भागीदारी के तीन चरणों में प्रदेश में 28 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पंजीयन सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल मुख्यमंत्री साय ने हर राज्य के लिए ‘कैच द रेन’ प्लान, स्टेट वाटर अवार्ड्स और त्रैमासिक समीक्षा का दिया सुझाव रायपुर बारिश की हर बूंद को सहेजने और उसे धरती के भीतर पहुंचाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षित करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने देश के सामने जनभागीदारी का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य के पांच जिले भी जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाने में सफल रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी राष्ट्रीय मंच पर साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण तथा पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की विस्तार से जानकारी दी। सम्मेलन में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित विभिन्न राज्यों के जल संसाधन मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। *जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम नहीं, जनअभियान बनाया : मुख्यमंत्री साय* मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण को केवल शासकीय योजनाओं और जल संरचनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं रखा है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को इससे जोड़कर इसे व्यापक जनअभियान का स्वरूप दिया गया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और अपने गृहग्राम बगिया में हल चलाकर खेती कर चुके हैं। इसलिए खेती और ग्रामीण जीवन में पानी का महत्व उन्होंने बहुत करीब से देखा और समझा है। किसान के लिए पानी केवल एक प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि उसकी फसल, परिवार, आजीविका और भविष्य से जुड़ा विषय है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की योजनाओं के केंद्र में किसान और गांव को रखा गया है। उन्होंने कहा कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल में लगभग चार प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाला छत्तीसगढ़ ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह उपलब्धि केवल जल संरचनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि जल संरक्षण के प्रति प्रदेश में विकसित हो रही सामूहिक चेतना और जनभागीदारी की भी उपलब्धि है। *कोरिया से निकला ‘5 प्रतिशत मॉडल’, किसान स्वयं दे रहे जमीन* मुख्यमंत्री साय ने सम्मेलन में कोरिया जिले से शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ का विशेष उल्लेख किया। यह मॉडल जल संरक्षण में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी का अभिनव उदाहरण है। इस पहल के अंतर्गत किसान अपनी कृषि भूमि का लगभग 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं। इस हिस्से में ऐसी जल संरचनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें बारिश का पानी खेत से बहकर बाहर जाने के बजाय वहीं एकत्र हो और धीरे-धीरे जमीन के भीतर समाहित हो सके। इस मॉडल की विशेषता यह है कि इसमें किसान जल संरक्षण के केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार हैं। किसान अपनी भूमि उपलब्ध करा रहे हैं, पंचायतें और स्थानीय समुदाय सहयोग कर रहे हैं तथा विभिन्न विभागों और योजनाओं के समन्वय से जल संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और प्रगति की समीक्षा को भी इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। जल सखी, जल मित्र, किसान और पंचायत प्रतिनिधि गांवों में जल संरक्षण की इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। खेत में ही वर्षा जल को रोकने से भू-जल पुनर्भरण को बढ़ावा मिलने के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। लंबे समय में इससे खेती की वर्षा पर निर्भरता कम करने और जल सुरक्षा बढ़ाने में भी सहायता मिलेगी। *JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम* जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। पहले दो चरणों में देश में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद तीसरे चरण में राज्य ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के प्रथम चरण JSJB 1.0 में छत्तीसगढ़ में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा। दूसरे चरण JSJB 2.0 में प्रदेश में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें से 23 लाख 7 हजार 768 जल संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है। इस चरण में भी छत्तीसगढ़ ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया। अब तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इस चरण में प्रदेश में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 जल संरचनाओं का कार्य पूर्ण हो चुका है। इस प्रकार अभियान के अलग-अलग चरणों में छत्तीसगढ़ ने बड़े पैमाने पर जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण की संरचनाओं को विकसित और दर्ज किया है। इन प्रयासों का मूल उद्देश्य बारिश के पानी को बहकर बाहर जाने से रोकना, स्थानीय स्तर पर उसका संचयन करना और अधिक से अधिक पानी को जमीन के भीतर पहुंचाना है। *छत्तीसगढ़ के पांच जिले देश के टॉप-10 में* राज्य स्तर की उपलब्धि के साथ ही छत्तीसगढ़ के जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। जल संरक्षण के क्षेत्र में सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल … Read more

यूपीकॉस: भरोसे की नींव पर तैयार हो रही नई व्यवस्था, आउटसोर्स कर्मियों को मिलेगा सम्मान

यूपीकॉस: भरोसे की नींव पर खड़ी नई व्यवस्था लखनऊ   किसी भी सरकार की संवेदनशीलता परखने के लिए यह देखने की जरूरत नहीं कि वह अपने राज्य के ताकतवर तबके के लिए क्या करती है, यह देखना जरूरी है कि वह अपने सबसे कमजोर, सबसे अनदेखे और सबसे मौन नागरिक के लिए क्या सोचती है। आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाला कर्मचारी दफ्तर में सबसे पहले आता है और सबसे बाद में जाता है, लेकिन व्यवस्था में उसका स्थान हमेशा सबसे अंतिम पायदान पर रहा है। न उसे स्थायी कर्मचारी जैसा सम्मान मिलता, न सामाजिक सुरक्षा की गारंटी, न भविष्य निधि की निश्चितता। वह विभाग, एजेंसी और खुद अपने बीच बंटा हुआ एक ऐसा व्यक्ति था, जिसकी पीड़ा सुनने वाला कोई संस्थागत तंत्र नहीं था। यही वह शून्य था, जिसे भरने का प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) गठित करके किया है।  एक लंबे इंतज़ार का अंत आउटसोर्स कर्मचारी बरसों तक शासन-प्रशासन की भूल-भुलैया में अपनी पहचान तलाशता रहा। हर महीने वेतन कब आएगा, यह सवाल उसके लिए स्थायी बना रहा। उसे इस बात का भी यकीन नहीं था कि उसकी तकलीफ कभी किसी दहलीज़ तक पहुंचेगी भी या नहीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम का उद्घाटन इसी लंबी प्रतीक्षा को विराम देने वाला क्षण है। यह केवल एक नए निगम की स्थापना भर नहीं, बल्कि उस अदृश्य कर्मचारी वर्ग को औपचारिक पहचान और संस्थागत सहारा देने की पहल है, जो अब तक व्यवस्था के हाशिए पर खड़ा रहकर काम करता आया। पुरानी व्यवस्था की टूटी कड़ियां 2017 से पहले के दौर को देखें तो एक असहज तस्वीर उभरती है। तब आउटसोर्स कर्मचारी को संसाधन समझा ही नहीं जाता था। ठेके देने का काम अक्सर उन्हीं एजेंसियों को मिलता, जिनके तार सत्ता के गलियारों से जुड़े रिश्तेदारों और करीबियों तक जाते थे। भर्ती के नाम पर, वर्दी के नाम पर, और अन्य छोटी-छोटी सुविधाओं के नाम पर शोषण की कहानियां आम बात थीं। पूरा ढांचा तीन हिस्सों में टूटा हुआ था- कार्मिक, एजेंसी और विभाग। किसी समस्या के साथ कर्मचारी जब एक दरवाज़े पर पहुंचता, तो उसे दूसरे दरवाज़े की ओर मोड़ दिया जाता। न वेतन समय पर मिलने की गारंटी, न ईपीएफ-ईएसआई को लेकर कोई स्पष्टता, न सेवा अधिकारों की कोई ठोस रूपरेखा। इस प्रशासनिक ढिलाई ने लाखों परिवारों को स्थायी अनिश्चितता में जीने पर मजबूर कर दिया था। बोझ से संपत्ति तक का वैचारिक सफर समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्तियों तक शासन की नीतियों, योजनाओं व कार्यक्रमों का लाभ पहुंचाने को अपना विजन बनाने वाली योगी सरकार ने इस सोच को जड़ से बदलने का मानवीय दृष्टिकोण अपनाया। योगी सरकार में आउटसोर्स कर्मी अब बोझ नहीं, राज्य की मानव पूंजी के रूप में देखा जा रहा है। यही वैचारिक बदलाव यूपीकॉस की बुनियाद है। इसके दायरे और गहराई को आंकड़ों से इसे और गहराई से समझा जा सकता है। साढ़े तीन लाख से ज़्यादा आउटसोर्स कर्मचारी सीधे इसके दायरे में आएंगे, और जब उनके परिवारजनों को जोड़ें तो यह संख्या 17 से 20 लाख के बीच पहुंच जाती है। यह अकेले किसी वर्ग विशेष की बात नहीं, बल्कि प्रदेश की सामाजिक बुनावट के एक बड़े हिस्से की तक़दीर बदलने वाला निर्णय है। हर महीने की पांचवीं तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में स्थानांतरित होगा, जिससे पूरी व्यवस्था में किसी पड़ाव पर भी बिचौलियों के लिए कोई स्थान नहीं होगा और भुगतान संबंधित तमाम विसंगतियों पर लगाम लगेगी। सुरक्षा कवच जो जीवन बदल देगा इससे भी आगे बढ़कर बनाई गई व्यवस्था इस फैसले को असल मायनों में इंसानी बनाती है। किसी दुर्घटना, हादसे या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा संरक्षण मिलेगा। यह प्रावधान उस डर को खत्म करता है, जो हर आउटसोर्स कर्मचारी के भीतर हमेशा से बना रहा कि किसी अनहोनी की सूरत में उसका परिवार बेसहारा हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का योगदान अब निश्चित रूप से जमा होगा। सरकार खुद एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, ताकि कर्मचारी की जेब पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े। यह व्यवस्था उस आर्थिक दबाव को सीधे कम करती है, जो अब तक कर्मचारी अकेले उठाता आया था। नौकरी को लेकर छाई असुरक्षा भी अब समाप्त होने जा रही है। कोई भी एजेंसी अब किसी कर्मी को अपनी मर्ज़ी से बर्खास्त नहीं कर सकेगी। ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले सरकार को जानकारी देनी होगी, और उचित जांच के बाद ही निर्णय लिया जाएगा।  परिवार तक फैला भरोसे का दायरा असली सामाजिक सुरक्षा वही है, जिसमें कोई भी कर्मचारी अपने पूरे परिवार को संरक्षण के दायरे में पाता है। बेटे की पढ़ाई के लिए आठ लाख रुपये तक और बेटी की पढ़ाई के लिए दस लाख रुपये तक की मदद, दो बेटियों की शादी के लिए आठ से दस लाख रुपये तक का सहयोग, और कर्मचारी के आकस्मिक निधन जैसी अप्रिय स्थिति में अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था- ये सभी प्रावधान मिलकर एक पारिवारिक सुरक्षा कवच का निर्माण करते हैं। मातृत्व अवकाश जैसे वैधानिक लाभ भी अब सुनिश्चित किए गए हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट का शुभारंभ इस पूरी संरचना को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ता है, जहां हर कर्मचारी की समस्या को सुनने और सुलझाने के लिए एक स्थायी संस्थागत तंत्र मौजूद रहेगा। मुख्यमंत्री की सोच श्रम के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाती है। यूपीकॉस इसी सम्मान भावना का प्रतिबिंब है, ठीक वैसे ही जैसे योगी सरकार के वे तमाम फैसले हैं, जिन्होंने किसानों, नौजवानों, महिलाओं व कर्मचारियों के साथ ही समाज के हर तबके के वंचित लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है। 2017 में जो वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन मात्र तीन सौ रुपये थी, वह आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी इज़ाफा किया गया है। ये सभी निर्णय मिलकर उस नीति की तस्वीर पेश करते हैं, जिसमें समाज के सबसे उपेक्षित वर्गों तक सम्मान और सुरक्षा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। भरोसे की जीत यूपीकॉस केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं है, यह एक सामाजिक वादा है। यह इस विश्वास की पुनर्स्थापना है कि … Read more

पंजाब में मानसून मेहरबान! अगले 3 दिन भारी बारिश के आसार, चंडीगढ़ में भी छाए रहेंगे बादल

अमृतसर  पंजाब में एक बार फिर मानसून एक्टिव हो रहा है। मौसम विभाग ने 3 से 5 सितंबर तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इस दौरान उत्तरी और पूर्वी पंजाब के जिलों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं 6 सितंबर को पूरे राज्य में किसी तरह की विशेष चेतावनी नहीं है और मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। हालांकि मौसम विभाग की तरफ से बुधवार भी बारिश का अलर्ट जारी किया गया था। लेकिन बारिश कुछ चुनिंदा जिलों तक ही सीमित रही। हिमाचल से सटे कुछ जिलों के अलावा लुधियाना और जालंधर में पॉकेट रेन रिकॉर्ड हुई। इससे तापमान जो कुछ दिनों से सामान्य से ऊपर बना हुआ था, सामान्य के करीब पहुंच गया है। आज 20 जिलों में बारिश की संभावना मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब के 20 जिलों में बारिश का अनुमान है। पठानकोट, होशियारपुर, रूपनगर और मोहाली में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा गुरदासपुर, अमृतसर, नवांशहर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, संगरूर, फतेहगढ़ साहिब, पटियाला और मोहाली में कुछ जगहों पर बारिश हो सकती है। तरनतारन, फिरोजपुर, फाजिल्का, फरीदकोट, मुक्तसर, मोगा, बठिंडा, बरनाला और मानसा में भी कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का अनुमान है। रात को चंडीगढ़-मोहाली में बारिश मंगलवार को चंडीगढ़ में रात में एक एमएम बारिश हुई है। इसी तरह पंचकूला और मोहाली में भी रात को बारिश हुई। दिन में लुधियाना, पटियाला और चमकौर साहिब में बारिश रिकॉर्ड की गई थी। वहीं, आज सुबह से बादल छाए हुए हैं। मौसम ठंडा बना हुआ है। अब बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी मानसून की ट्रफ बठिंडा के ऊपर से गुजर रही है, जिससे पंजाब के मौसम पर इसका असर बना हुआ है। इस सिस्टम के कारण पंजाब के कुछ हिस्सों, खासकर बठिंडा और आसपास के इलाकों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। वहीं, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल तक बनी दूसरी ट्रफ भी मानसून को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर रही है। चंडीगढ़ में भी इसके असर से बादल छाने और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बनी रह सकती है। हालांकि इस जानकारी में चंडीगढ़ के लिए सीधे भारी बारिश का संकेत नहीं है। बिजली की मांग में आई कमी बारिश होने से बिजली की मांग में कमी आई है। गुरुवार सुबह बिजली की मांग 12,789 मेगावाट है। राज्य में 4,793 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। बाहर से करीब 7,997 मेगावाट बिजली ली जा रही है। तय शेड्यूल 7,961 मेगावाट था, यानी करीब 36 मेगावाट ज्यादा बिजली ली जा रही है। बिजली ग्रिड की फ्रीक्वेंसी 49.89 हर्ट्ज है। हालांकि पिछले चार दिनों में सुबह के समय यह 15 हजार मेगावाट तक पहुंच गई थी। आज भी 4 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी  3 सितंबर: वीरवार को पठानकोट, होशियारपुर, मोहाली और रूपनगर में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश हो सकती है। हालांकि अमृतसर, गुरदासपुर, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर, फिरोजपुर, मोगा, फरीदकोट, श्री मुक्तसर साहिब, फाजिल्का, बठिंडा, बरनाला, संगरूर, मानसा, पटियाला, फतेहगढ़ साहिब और नवांशहर में कोई विशेष चेतावनी नहीं है। 4 सितंबर: शुक्रवार को बारिश का दायरा थोड़ा बढ़ सकता है। पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। राज्य के बाकी जिलों में कोई विशेष चेतावनी नहीं है। 5 सितंबर: शनिवार को भी पठानकोट, होशियारपुर, नवांशहर, रूपनगर और मोहाली में येलो अलर्ट रहेगा। इन जिलों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि अन्य जिलों में मौसम सामान्य रहने का अनुमान है। 6 सितंबर: रविवार को पंजाब के सभी जिलों में मौसम सामान्य रहने की संभावना है। किसी भी जिले के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। ऐसे में लगातार बारिश की संभावना वाले जिलों को रविवार को राहत मिल सकती है। बुधवार को बठिंडा सबसे गर्म इससे पहले बुधवार को पंजाब में मौसम अधिकांश हिस्सों में शुष्क रहा। राज्य में सबसे अधिक तापमान बठिंडा में 36.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे की तुलना में 1.4 डिग्री अधिक रहा। फिरोजपुर में 35.7, पटियाला में 35.5, रूपनगर में 34.8, अमृतसर में 34.2 और लुधियाना में 34.0 डिग्री तापमान रहा। मोहाली में अधिकतम तापमान 33.7, नवांशहर के बललोवाल सौंखड़ी में 33.5, जालंधर में 33.3 और गुरदासपुर में 32.5 डिग्री दर्ज किया गया। चंडीगढ़ में तापमान 34.7 डिग्री रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री अधिक था। बारिश की बात करें तो अधिकांश जिलों में वर्षा नहीं हुई। लुधियाना और पठानकोट के थीन बांध क्षेत्र में केवल 1.0 मिलीमीटर हल्की बारिश दर्ज की गई। राज्य का औसत अधिकतम तापमान पिछले दिन के मुकाबले 0.1 डिग्री बढ़ा, लेकिन यह सामान्य के आसपास रहा।  

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर बन रहा खास संयोग, 4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र में जन्मेंगे कान्हा; जानें पूजा का समय

भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी आते ही देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारियां शुरू हो जाती हैं.भक्त इस दिन भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं. रात के समय उनके जन्म का उत्सव मनाते हैं.धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में रोहिणी नक्षत्र में हुआ था.इस वजह से जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र और मध्यरात्रि के पूजा मुहूर्त को खास महत्व दिया जाता है. इस साल 4 सितंबर, शुक्रवार को जन्माष्टमी मनाई जाएगी।  जन्माष्टमी की तारीख क्या है? साल 2026 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी.इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करेंगे. दिनभर व्रत और भक्ति के बाद रात में कान्हा के जन्म के समय विशेष पूजा की जाती है।  जन्माष्टमी के मौके पर घरों और मंदिरों में कृष्ण की झांकियां सजाई जाती हैं. कई जगह बाल गोपाल को पालने में झुलाने और उनका विशेष श्रृंगार करने की परंपरा है. रात 12 बजे के आसपास मंदिरों में जन्मोत्सव शुरू होता है. आरती के साथ भक्त भगवान के जन्म की खुशी मनाते हैं।  मथुरा में कब होगा कृष्ण जन्मोत्सव? श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में जन्माष्टमी का उत्सव विशेष रूप से भव्य होता है. यहां आधी रात के समय भगवान कृष्ण के जन्म का उत्सव मनाया जाता है।  मथुरा के लिए पंचांग के अनुसार निशीथ पूजा का शुभ समय रात 11:56 बजे से 12:41 बजे तक रहेगा.इसी अवधि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की पूजा, अभिषेक और आरती की जाएगी।  निशीथ काल को जन्माष्टमी की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण का प्राकट्य हुआ था।  जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र का संयोग इस बार जन्माष्टमी के दिन रोहिणी नक्षत्र की मौजूदगी भी रहेगी.कृष्ण जन्म से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं में रोहिणी नक्षत्र का विशेष स्थान है।  पंचांग गणना के अनुसार रोहिणी नक्षत्र 4 सितंबर की रात करीब 11:04 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है. वहीं अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात करीब 12:13 बजे तक रहेगी. ऐसे में जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का संयोग बन रहा है।  जन्माष्टमी का व्रत कब खोलें? जन्माष्टमी पर बड़ी संख्या में भक्त भगवान कृष्ण के जन्म तक व्रत रखते हैं. मथुरा की गणना के अनुसार व्रत का पारण 5 सितंबर को सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे के बाद किया जा सकता है. हालांकि अलग-अलग परंपराओं में व्रत खोलने के नियम अलग हो सकते हैं. इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपने स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार पारण कर सकते हैं।  5 सितंबर को दही हांडी और नंदोत्सव कृष्ण जन्माष्टमी के अगले दिन यानी 5 सितंबर, शनिवार को दही हांडी और नंदोत्सव मनाया जाएगा. भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप से जुड़ी माखन चोरी की लीलाओं की याद में कई स्थानों पर दही हांडी का आयोजन किया जाता है।  दही से भरी मटकी को ऊंचाई पर लटकाया जाता है.  गोविंदा की टोलियां मानव पिरामिड बनाकर उसे फोड़ती हैं. वहीं ब्रज क्षेत्र में कृष्ण जन्म के बाद नंदोत्सव की परंपरा भी बड़े उत्साह के साथ निभाई जाती है।  जन्माष्टमी पर क्या है खास? इस बार जन्माष्टमी का पर्व इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि 4 सितंबर को अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा. रात में निशीथ काल के दौरान कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाएगा. मथुरा-वृंदावन में इस मौके पर मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम होंगे। 

आउटसोर्स कर्मियों के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल, शुरू हुआ गरिमा और सम्मान का नया अध्याय

आउटसोर्स कर्मियों के लिए गरिमा का नया अध्याय लखनऊ  समाज में पूरी गरिमा के साथ जीने का हर व्यक्ति को अधिकार है और नेतृत्व यदि संवेदनशील है तो इसे सुनिश्चित भी करता है। किसी कर्मचारी को गरिमा का अहसास तभी होता है जब उसे यह महसूस हो कि उसका परिश्रम सुरक्षित है, उसका परिवार सुरक्षित है और उसकी आवाज़ सुनी जाएगी। यह हर कर्मचारी का अधिकार है और यही वह मापदंड है, जिससे किसी भी सरकार की संवेदनशीलता का आकलन किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश में आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम (यूपीकॉस) का शुभारंभ कर आउटसोर्स कर्मियों की गरिमा लिखने का नया अध्याय शुरू किया है। आउटसोर्स कर्मी जो वर्षों से शासन-सत्ता के गलियारे में अपनी पहचान खोज रहा था, जो अब तक अनिश्चितता के वातावरण में अपना जीवन गुजार रहा था और जिसे यह विश्वास भी नहीं था कि कोई उसकी पीड़ा को सुनेगा। योगी सरकार में गठित हुआ उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम इसी पीड़ा को दूर करने का तंत्र और प्रयास है।  2017 से पहले की सरकारों पर नज़र डालें तो एक कड़वी सच्चाई सामने आती है। उस दौर में आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ के रूप में देखा जाता था, संपत्ति के रूप में नहीं। जिन एजेंसियों को ठेके दिए जाते थे, उनमें से अधिकतर सत्ताधारी नेताओं के करीबियों और रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली होती थीं। भर्ती प्रक्रिया से लेकर वर्दी और अन्य सुविधाओं तक में शोषण की शिकायतें आम थीं। यह एक ऐसा तंत्र था, जिसमें लाभ कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहता था और पीड़ा उन तक पहुंचती थी, जो सबसे कमजोर स्थिति में खड़े थे। यह व्यवस्था कितनी बिखरी हुई थी, इसे इसकी संरचना से ही समझा जा सकता है। एक तरफ कार्मिक होता था, दूसरी तरफ एजेंसी, और तीसरी तरफ सरकारी विभाग। कर्मचारी जब भी किसी समस्या के साथ इनमें से किसी दरवाज़े पर दस्तक देता, उसे दूसरे दरवाज़े की ओर भेज दिया जाता। वेतन में देरी, ईपीएफ और ईएसआई की अनिश्चितता, और सेवा से जुड़े बुनियादी अधिकारों को लेकर व्याप्त असमंजस उसकी नियति थी। यह ऐसी संरचनात्मक उपेक्षा थी, जिसने लाखों परिवारों को अनिश्चितता के अंधेरे में धकेल रखा था।  पंडित दीन दयाल उपाध्याय के अंत्योदय सिद्धातों को अपनी सोच में ढालने वाली योगी सरकार ने आउटसोर्स कर्मियों को बोझ नहीं, अपनी मानव संपत्ति के रूप में स्वीकार किया। यह वैचारिक परिवर्तन ही यूपीकॉस की आत्मा है। इसके तथ्यात्मक पक्ष को देखें तो इसकी गंभीरता और स्पष्ट होती है। साढ़े तीन लाख से अधिक आउटसोर्स कर्मियों को सीधा लाभ मिलेगा, लेकिन जब उनके परिवारों को भी जोड़ा जाए तो यह संख्या 17 से 20 लाख तक पहुंच जाती है। यह आंकड़ा उत्तर प्रदेश की सामाजिक संरचना के एक बड़े हिस्से के लिए जीवन बदलने वाला कदम है। हर महीने की पांच तारीख तक पारिश्रमिक सीधे बैंक खाते में पहुंचेगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और भुगतान में होने वाली देरी और गड़बड़ी पर भी अंकुश लगेगा। इससे एक कदम आगे जाकर की गई व्यवस्था इस निर्णय को और मानवीय बनाती है। किसी घटना, दुर्घटना या आपदा की स्थिति में परिवार को 20 से 40 लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलेगा। यह सुविधा उस असुरक्षा को दूर करती है, जो अब तक हर आउटसोर्स कर्मचारी के मन में एक स्थायी भय की तरह बसी रहती थी कि किसी अनहोनी की स्थिति में उसका परिवार असहाय हो जाएगा। ईपीएफ और ईएसआई का अंशदान भी अब सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार आउटसोर्स एजेंसी को सर्विस चार्ज देगी, जिससे कर्मचारी के वेतन से कटौती नहीं होगी। यह प्रावधान सीधे तौर पर उस आर्थिक बोझ को कम करता है, जो पहले कर्मचारी अकेले वहन करता था। नौकरी की सुरक्षा को लेकर भी इस व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब कोई एजेंसी किसी आउटसोर्स कर्मी को मनमाने ढंग से नौकरी से नहीं निकाल सकेगी। ऐसा करने से पहले सरकार को सूचित करना अनिवार्य होगा, और जांच के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। इससे किसी भी समय नौकरी जाने की आशंका समाप्त होती है। इसके साथ ही पारिश्रमिक अब किसी अधिकारी या एजेंसी की मर्ज़ी पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि कर्मचारी की श्रेणी और शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप तय होगा। यह पारदर्शिता कर्मचारी के आत्मसम्मान को पुनर्स्थापित करने वाला कदम है। सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल कर्मचारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसके परिवार को भी उसका लाभ मिलना चाहिए। पुत्र की शिक्षा के लिए आठ लाख रुपये तक और पुत्री की शिक्षा के लिए दस लाख रुपये तक की सहायता, दो पुत्रियों के विवाह के लिए आठ से दस लाख रुपये तक की सहायता और अमसय मृत्यु की स्थिति में कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए पचास हजार रुपये तक की व्यवस्था तथा मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभ पारिवारिक सुरक्षा कवच हैं। यूपीकॉस पोर्टल और वेबसाइट की लॉन्चिंग इस पूरी व्यवस्था को डिजिटल पारदर्शिता से जोड़ती है जहां हर कार्मिक की समस्या सुनने और सुलझाने की संस्थागत व्यवस्था मौजूद है।  मुख्यमंत्री स्वयं यह मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और नई अर्थव्यवस्था के दौर में काम की प्रकृति भले बदल रही हो, लेकिन मानव श्रम की गरिमा कभी नहीं बदलेगी। यह मानव श्रम के प्रति सम्मान का परिचायक है। इसी सम्मान भाव का प्रतीक यूपीकॉस और योगी सरकार के वे सभी फैसले हैं जिसमें किसान, नौजवान, महिलाओं, कारीगर, रेहड़ी-पटरी वाले, छोटे उद्यमी और सरकारी कर्मचारी, सभी को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया गया। वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन जो 2017 में मात्र तीन सौ रुपये थी, आज बढ़कर पंद्रह सौ रुपये हो चुकी है। रसोइयों के मानदेय में भी बढ़ोतरी की गई है। ये सभी कदम एक ऐसी नीति को दर्शाते हैं, जिसमें समाज के हर वंचित और उपेक्षित वर्ग को सम्मान और सुरक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है। लाभार्थियों की प्रतिक्रियाएं इस निर्णय की सार्थकता को और पुख्ता करती हैं। संविदाकर्मियों का कहना है कि इस निर्णय से अब घर चलाना आसान होगा और उनके जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। पोर्टल और वेबसाइट की पारदर्शिता उन्हें यह भरोसा देती है कि अब उनकी बात सुनी जाएगी। यह भरोसा ही किसी भी कल्याणकारी नीति की सबसे बड़ी सफलता होता है। … Read more

राघव चड्ढा के वोटर रिकॉर्ड पर विवाद, SIR में ‘पर्मानेंटली शिफ्टेड’ दिखा नाम; AAP पर बरसे

चंडीगढ़  पंजाब में एसआईआर की लिस्ट से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम हटने के बाद राजनीति शुरू हो गई है। राघव ने कहा कि उन्हें वोटर लिस्ट के ड्राफ्ट से 'शिफ्टेड' मार्क करके हटाया गया है, जो बदले की राजनीति का स्पष्ट संकेत है। चड्ढा ने ईसीआई की गाइडलाइंस के उल्लंघन का भी दावा किया है।  राघव चड्ढा ने लगाए पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप भाजपा के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से काम किया है। चड्ढा के अनुसार, मतदाता सूची के मसौदे में उनका नाम गलत तरीके से 'दूसरी जगह चले जाने वाला' (शिफ्टेड) दिखाया गया है। वह पंजाब से राज्यसभा सांसद हैं और उनका मतदाता पहचान पत्र मोहाली में पंजीकृत है। चड्ढा ने एक्स पर एक पोस्ट साझा कर यह जानकारी दी।  उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल मसौदा मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। 'दावे और आपत्तियां' की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें नामों में सुधार किया जा सकता है। अंतिम मतदाता सूची अक्तूबर 2026 में प्रकाशित होगी। सांसद चड्ढा ने बताया कि वह स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) दिशानिर्देशों के तहत उपलब्ध उपायों का लाभ उठा रहे हैं। उन्होंने इसे केवल एक लिपिकीय त्रुटि मानने से इन्कार किया। चड्ढा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का स्पष्ट मामला बताया।  चड्ढा ने कहा कि यह कोई सामान्य क्लेरिकल मिस्टेक नहीं है, बल्कि सोची-समझी साजिश है। गनीमत है कि यह केवल प्रारूप मतदाता सूची है, अंतिम सूची नहीं। उन्होंने कहा कि मैंने SIR दिशा-निर्देशों के तहत पहले ही अपने कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल करते हुए ऑब्जेक्शन फाइल कर दिया है। अंतिम मतदाता सूची अक्टूबर 2026 में प्रकाशित होगी। सांसद ने आरोप लगाया कि जब से उन्होंने AAP छोड़ी है और भाजपा में शामिल हुए हैं, तब से आप नेतृत्व बौखलाया हुआ है। प्रशासनिक मशीनरी का दुरुपयोग कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि उनका नाम "दूसरी जगह चले जाने वाला" किसने चिह्नित किया। इसका सत्यापन और उच्च स्तर पर प्रसंस्करण आप की पंजाब सरकार के अधिकारियों ने किया। जमीनी स्तर के बीएलओ से लेकर पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक, इस अभ्यास का हर परिचालन स्तर पंजाब सरकार के अधिकारियों द्वारा संचालित है। अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बीएलओ आमतौर पर पंजाब सरकार के कनिष्ठ कर्मचारी होते हैं। एईआरओ, ईआरओ और डीईओ भी पंजाब सरकार के अधिकारी होते हैं। आगे कहा कि शीर्ष पर पंजाब कैडर के एक आईएएस अधिकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। ये अधिकारी जानते हैं कि आप सरकार उनकी चुनावी ड्यूटी समाप्त होने के बाद उनके स्थानांतरण, नियुक्तियों और कॅरिअर को नियंत्रित करती है। उन्हें पता है कि कौन उनका स्थानांतरण कर सकता है और कौन उनका जीवन मुश्किल बना सकता है। इस तरह आप सरकार राजनीतिक प्रतिशोध को अंजाम देने के लिए राज्य के अधिकारियों के माध्यम से राजनीतिक दबाव डालती है। भाजपा सांसद ने पंजाब सरकार पर लगाए ये आरोप…     वोट काटने के पीछे प्रशासनिक तंत्र पर दबाव: राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) से लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) तक की पूरी प्रक्रिया में पंजाब सरकार के प्रशासनिक अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि मुझे ‘शिफ्टेड’ किसने मार्क किया? आप सरकार के अधिकारी ने। उस वर्गीकरण की पुष्टि किसने की? आप सरकार के ही अधिकारी ने। उच्च स्तर पर इसे किसने प्रोसेस किया? आप सरकार के ही वरिष्ठ अधिकारी ने। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी खत्म होने के बाद इन अधिकारियों के ट्रांसफर, पोस्टिंग और करियर पर राज्य सरकार का ही नियंत्रण होता है, इसलिए अधिकारी दबाव में काम कर रहे हैं।     राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई: सांसद ने कहा कि जब से मैंने भ्रष्ट आम आदमी पार्टी छोड़ी है, इसका शीर्ष नेतृत्व गुस्से से जल रहा है। जिन नेताओं और सांसदों ने आप छोड़कर भाजपा का दामन थामा है, उनके खिलाफ पंजाब पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी को तैनात कर दिया गया है। वोटर लिस्ट में गलत वर्गीकरण उसी राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है।     चुनाव आयोग (ECI) के नियमों का उल्लंघन: राघव चड्ढा ने भारत निर्वाचन आयोग के SIR के विस्तृत दिशानिर्देशों के पैराग्राफ 4(d) का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इस नियम के अनुसार न्यायाधीशों, जनप्रतिनिधियों (सांसद/विधायक) और प्रमुख हस्तियों के नाम यदि डेटाबेस में चिह्नित भी होते हैं, तो भी उन्हें ड्राफ्ट रोल में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाना चाहिए, ताकि दावे-आपत्ति की अवधि के दौरान आवश्यक दस्तावेज जुटाए जा सकें। उन्होंने कहा कि इस नियम को अनदेखा नहीं किया गया, बल्कि उनके मामले में इसका जानबूझकर उल्लंघन किया गया है।     वोटर लिस्ट किसी की निजी संपत्ति नहीं: सांसद ने सख्त लहजे में कहा कि भले ही पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार चल रही हो, लेकिन पंजाब की प्रारूप मतदाता सूची आप की कोई निजी संपत्ति नहीं है। मतदाता सूची में पारदर्शिता होना हर नागरिक और जनप्रतिनिधि का संवैधानिक अधिकार है।  

Zomato डिलीवरी बॉय और Rapido ड्राइवर का खतरनाक खेल, घर में छापते थे नकली नोट; VIDEO आया सामने

हैदराबाद दिनभर कोई खाना पहुंचाता था, कोई बाइक से सवारी छोड़ता था तो कोई ऑटो चलाकर परिवार का खर्च निकालता था. बाहर से तीनों की जिंदगी आम लोगों जैसी ही नजर आती थी, लेकिन पुलिस के मुताबिक पर्दे के पीछे ये तीनों नकली नोट छापने और उन्हें बाजार में चलाने के खेल में शामिल थे. हैदराबाद पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर दिया।  शमशाबाद जोन की हैदराबाद कमिश्नर टास्क फोर्स और बालापुर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली नोट बनाने और चलाने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने इनके कब्जे से 2 लाख 91 हजार 100 रुपये कीमत के 1,124 नकली नोट बरामद किए हैं. बरामद नकली नोटों में 500, 200 और 100 रुपये के नोट शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने नकली नोट बनाने का तरीका किसी बड़े गिरोह से नहीं, बल्कि YouTube और Instagram पर वीडियो देखकर सीखा था. इसके बाद प्रिंटर, स्कैनर, कागज और दूसरे सामान जुटाकर नकली नोट तैयार किए जाने लगे. इस मामले में एक अन्य सहयोगी फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है।  कौन-कौन गिरफ्तार हुआ पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रामावत रामू उर्फ मोहम्मद (36), रामावत मोतीलाल (35) और रामावत गांधी (19) के रूप में की है. तीनों तेलंगाना के चिंतल थांडा, वड्डीपटला के रहने वाले बताए गए हैं. पुलिस के अनुसार रामू Zomato डिलीवरी वर्कर, मोतीलाल Rapido ड्राइवर और गांधी ऑटो रिक्शा चालक है. पुलिस जांच में सामने आया कि सामान्य कामकाज के साथ कथित तौर पर वे नकली नोट बनाने और उन्हें बाजार में खपाने की कोशिश कर रहे थे. मामले में सुधीर जॉन चेला उर्फ वामशी को भी कथित सहयोगी बताया गया है. वह फिलहाल फरार है।  आर्थिक परेशानी के बाद शुरू हुआ खेल पुलिस के मुताबिक रामू पारिवारिक जीवन में आई परेशानियों के बाद आर्थिक मुश्किलों से गुजर रहा था. इसी दौरान उसकी मुलाकात अपने रिश्तेदार मोतीलाल से हुई. जांचकर्ताओं का दावा है कि इसके बाद दोनों ने पैसे कमाने के लिए गलत रास्ता चुना. पुलिस के अनुसार दोनों ने इंटरनेट पर नकली नोट बनाने से जुड़े वीडियो खंगालने शुरू किए. इसी दौरान मोतीलाल को Instagram और YouTube पर नकली नोट तैयार करने से संबंधित जानकारी मिली. वीडियो में दिए गए एक मोबाइल नंबर के जरिए कथित तौर पर उसने एक व्यक्ति से संपर्क किया. इसके बाद मिले निर्देशों के आधार पर नकली नोट बनाने की तैयारी शुरू की गई. हालांकि पुलिस अभी इस बात की भी जांच कर रही है कि वीडियो में मिले संपर्क के पीछे कौन व्यक्ति था और क्या इस नेटवर्क में गिरफ्तार तीन आरोपियों के अलावा कोई और लोग भी शामिल हैं।  प्रिंटर और स्कैनर से शुरू हुआ काम पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने नकली नोट तैयार करने के लिए Epson का कलर प्रिंटर, कलर स्कैनर, बॉन्ड पेपर और दूसरी सामग्री खरीदी. इसके बाद असली नोटों को देखकर उनकी नकल तैयार करने की कोशिश की गई. जांच में पुलिस ने दावा किया कि आरोपी नोटों को असली जैसा दिखाने के लिए उसके कुछ सुरक्षा फीचर्स की नकल करने का प्रयास कर रहे थे. इनमें वॉटरमार्क और महात्मा गांधी की तस्वीर जैसी चीजें शामिल थीं. नकली नोट तैयार करने के बाद उन्हें काटने, लैमिनेट करने और पैक करने के लिए भी सामान इस्तेमाल किया जा रहा था. पुलिस ने छापेमारी के दौरान प्रिंटर और स्कैनर के अलावा लैमिनेटर, पेपर कटर, रंगीन तरल पदार्थ, कागज के बंडल, गांधी की छपी तस्वीरें और वॉटरमार्क पेपर भी बरामद करने का दावा किया है।  रात में शराब की दुकानों और सब्जी बाजारों में खपाते थे नोट पुलिस के मुताबिक नकली नोट तैयार करना ही इस कथित गिरोह का अंतिम मकसद नहीं था. असली चुनौती इन नोटों को बाजार में चलाने की थी. जांच में सामने आया कि आरोपी छोटी-छोटी मात्रा में नकली नोट बाजार में चलाने की कोशिश करते थे. पुलिस के अनुसार शराब की दुकानों और सब्जी बाजारों को इसके लिए इस्तेमाल किया गया. खासतौर पर रात के समय इन नोटों को चलाने की कोशिश की जाती थी. पुलिस का मानना है कि रात के समय भीड़भाड़ और लेनदेन के बीच छोटे मूल्य के नोटों की पहचान से बच निकलने की संभावना आरोपियों को ज्यादा लगती थी. बताया गया है कि गांधी को भी बाजार में नकली नोटों को व्यापक स्तर पर चलाने के प्रयास में इस्तेमाल किया जा रहा था।  सिर्फ नोट नहीं, पूरा सेटअप मिला कार्रवाई के दौरान पुलिस को केवल तैयार नकली नोट ही नहीं मिले, बल्कि उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाला कथित सेटअप भी बरामद हुआ. पुलिस के अनुसार जब्त सामान में Epson L6460 कलर प्रिंटर, Epson कलर स्कैनर, लैमिनेटर, पेपर कटर, रंगीन तरल पदार्थ, कागज के बंडल, छपी हुई गांधी तस्वीरें, वॉटरमार्क पेपर और पैकिंग सामग्री शामिल हैं. इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है. बरामद सामान से पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि नकली नोट बनाने का काम कितने समय से चल रहा था और अब तक कितनी नकली करेंसी बाजार में पहुंचाई जा चुकी है। 

जशपुर को सड़क विकास की बड़ी सौगात, खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के लिए 6.30 करोड़ से अधिक मंजूर

रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर जशपुर को सड़क विकास की बड़ी सौगात खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के निर्माण के लिए 6.30 करोड़ रुपये से अधिक की प्रशासकीय स्वीकृति 6.20 किलोमीटर सड़क का पुल-पुलिया सहित होगा निर्माण, ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी होगी मजबूत रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर जिले के ग्रामीण एवं सुदूर क्षेत्रों में सड़क अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा लगातार महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में वर्ष 2025-26 के बजट में शामिल खरकट्टा से कोडेकेला पहुंच मार्ग के निर्माण के लिए 6 करोड़ 30 लाख 81 हजार रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। स्वीकृत परियोजना के तहत 6.20 किलोमीटर लंबी सड़क का पुल-पुलिया सहित निर्माण किया जाएगा। इस मार्ग के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों की मुख्य मार्गों से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और क्षेत्रवासियों को वर्षभर सुगम एवं सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। विशेषकर बरसात के दौरान आवागमन में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में पुल-पुलिया सहित सड़क निर्माण महत्वपूर्ण साबित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों तक मजबूत सड़क नेटवर्क पहुंचाने को प्राथमिकता दी जा रही है। बेहतर सड़कें गांवों को केवल मुख्य मार्गों से जोड़ने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, कृषि और व्यापार जैसी आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच भी आसान होती है। सड़क संपर्क मजबूत होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिलती है और विकास की संभावनाएं भी व्यापक होती हैं। कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच होगी आसान खरकट्टा-कोडेकेला मार्ग के निर्माण से क्षेत्र के किसानों को अपनी कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में सुविधा होगी। विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों तक आवागमन में सहूलियत मिलेगी, वहीं मरीजों एवं उनके परिजनों को स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में आसानी होगी। सड़क निर्माण से स्थानीय व्यापारिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। पुल-पुलिया सहित सड़क का निर्माण होने से वर्षा ऋतु में जलभराव एवं मार्ग बाधित होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी। इससे ग्रामीणों को पूरे वर्ष बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी तथा गांवों और आसपास के प्रमुख क्षेत्रों के बीच संपर्क और अधिक मजबूत होगा। क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का जताया आभार खरकट्टा से कोडेकेला मार्ग के निर्माण के लिए मिली स्वीकृति पर क्षेत्रवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। ग्रामीणों ने कहा कि इस सड़क के निर्माण से लंबे समय से आवागमन से जुड़ी समस्याओं का समाधान होगा और लोगों को बेहतर सड़क सुविधा मिल सकेगी। क्षेत्रवासियों ने कहा कि सड़क निर्माण से न केवल आवागमन सुगम होगा, बल्कि क्षेत्र में कृषि, व्यापार, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस महत्वपूर्ण सड़क परियोजना के पूर्ण होने से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई दिशा मिलेगी और लोगों का जीवन अधिक सुगम एवं सुविधाजनक बनेगा।