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वायुसेना को बड़ा झटका: विमान दुर्घटना में 5 जवानों की मौत, कारणों की जांच शुरू

नईदिल्ली /जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस के पास भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई, जबकि विमान का सह-पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल अधिकारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी सैन्यकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे। दुर्घटना में बलिदान होने वालों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम शामिल हैं। भारतीय वायुसेना ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बलिदान जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। वायुसेना ने कहा कि इस कठिन समय में पूरा संगठन शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा है और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।  इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और  अग्निवीरवायु दानिश आलम शहीद हो गए है। वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारतीय वायुसेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है। दुख की इस घड़ी में पूरी वायुसेना शहीदों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई। जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की गई है। बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे। दुर्घटना के बाद वायुसेना मुख्यालय ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है, जो हादसे के सभी पहलुओं की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी संभावित समस्या, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन कारणों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। हादसे में जीवित बचे सह-पायलट से भी जांच टीम पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि दुर्घटना से ठीक पहले विमान की स्थिति और कॉकपिट में हुई घटनाओं के बारे में उनकी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। वायुसेना की जांच टीम विभिन्न तकनीकी और परिचालन तथ्यों का विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।  जांच के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' के आदेश हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई. जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है. बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे। 

स्कूल खुलने से पहले खास तैयारी: ड्रॉपआउट बच्चों की वापसी पर फोकस, छात्रों को मिलेंगी फ्री किताबें और यूनिफॉर्म

रायपुर  छत्तीसगढ़ में गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल 16 जून से ही खुलेंगे। लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया है। सभी सरकारी और निजी स्कूलों में 16 जून 2026 से पढ़ाई शुरू होगी। आदेश के मुताबिक, प्रदेश में 20 अप्रैल से 15 जून 2026 तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया था। छुट्टियां खत्म होने के बाद नया शैक्षणिक सत्र 2026-27 का नियमित संचालन 16 जून से शुरू किया जाएगा। इससे पहले गर्मी के कारण स्कूल खुलने में देरी की अटकलें लगाई जा रही थी। स्कूल खुलने के साथ ही एडमिशन फेस्ट होगा। तिलक लगाकर बच्चों का स्वागत किया जाएगा। नए बच्चों के एडमिशन के लिए गांवों-शहरों में मुनादी की जाएगी। पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। साथ ही ड्रॉपआउट बच्चों को वापस लाने स्पेशल प्लान तैयार किया गया है। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले स्टूडेंट्स का सम्मान किया जाएगा। वहीं प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार फ्री किताबें दी जाएगी। किताबों का वितरण 12 डिपो (6 स्थायी और 6 अस्थायी) के जरिए किया जाएगा। स्कूलों में मनाया जाएगा एडमिशन फेस्ट 16 जून से शाला प्रवेश उत्सव मनाया जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को इसकी तैयारी के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं। विभाग का उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा बच्चों का स्कूल में प्रवेश सुनिश्चित करना, पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को वापस स्कूल से जोड़ना और बेहतर शैक्षणिक माहौल तैयार करना है। निर्देशों के अनुसार, स्कूल खुलने से पहले परिसर, कक्षाओं और भवनों की साफ-सफाई और आवश्यक मरम्मत का काम पूरा किया जाएगा। शाला प्रवेश उत्सव के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर, पोस्टर, रैली और मुनादी का उपयोग किया जाएगा। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, स्कूल प्रबंधन समितियों और अभिभावकों को भी आमंत्रित किया जाएगा। स्कूल छोड़ चुके बच्चों को लाने स्पेशल प्लान विभाग ने आंगनबाड़ी केंद्रों से बच्चों की सूची लेकर पहली कक्षा में प्रवेश की तैयारी करने और पांचवीं पास विद्यार्थियों का छठवीं कक्षा में प्रवेश सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। शिक्षकों के पेंडिंग मामलों के निराकरण और आगामी 3 महीनों की पढ़ाई की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग ने विद्यार्थियों और शिक्षकों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा है। शाला प्रवेश उत्सव के दौरान पात्र विद्यार्थियों को फ्री किताबें, यूनिफॉर्म और साइकिल बांटी जाएगी। बोर्ड और स्थानीय परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों का सम्मान किया जाएगा। वहीं पहली बार स्कूल आने वाले बच्चों का विशेष स्वागत किया जाएगा। प्राइवेट स्कूलों को तय शेड्यूल के अनुसार मिलेंगी फ्री किताबें नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रदेश के गैर अनुदान प्राप्त प्राइवेट स्कूलों को कक्षा 1 से 10वीं तक की हिंदी और अंग्रेजी माध्यम की मुफ्त पाठ्यपुस्तकें तय कार्यक्रम के अनुसार दी जाएंगी। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम ने इसके लिए जिला और ब्लॉक स्तर पर वितरण योजना तैयार की है। निगम के अनुसार, किताबों का वितरण 12 डिपो (6 स्थायी और 6 अस्थायी) के माध्यम से किया जाएगा। स्कूलों को निर्धारित तारीख पर अपने प्रतिनिधि को भेजकर किताबें लेनी होंगी। यदि कोई स्कूल तय दिन नहीं पहुंच पाता है, तो उसे बाद में भी किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्थायी डिपो में रिजर्व डे भी रखा गया विभाग ने बताया कि किसी तकनीकी या अन्य कारण से वितरण प्रभावित होने पर स्कूलों को टोकन नंबर दिया जाएगा और अगले दिन प्राथमिकता के आधार पर किताबें दी जाएंगी। अस्थायी डिपो में इसके लिए रिजर्व डे भी रखा गया है। सुबह 10 बजे से दी जाएगी किताबें भीड़ से बचने के लिए स्कूल संचालक डिपो प्रभारी से संपर्क कर अलग समय निर्धारित कर सकते हैं। किताबों का वितरण हर दिन सुबह 10 बजे से शुरू होगा। जरूरत पड़ने पर रविवार और सरकारी अवकाश के दिन भी किताबें दी जाएगी। पाठ्यपुस्तक निगम ने कहा है कि किताबों का वितरण डीपीआई की उपलब्ध कराई गई छात्र संख्या और ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों के आधार पर होगा। यदि किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या में बदलाव हुआ है, तो इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को देनी होगी।

मध्य प्रदेश में बदलेगा मौसम, कई जिलों में बारिश-आंधी की चेतावनी; इंदौर-उज्जैन में खिली रहेगी धूप

भोपाल  दक्षिण-पश्चिम मानसून ने फिर रफ्तार पकड़ ली है। ऐसे में अनुमान है कि मध्य प्रदेश में मानसून 15 से 18 जून के बीच एंटर हो सकता है। इससे पहले प्रदेश में प्री-मानसून की एक्टिविटी जारी है। तेज आंधी, बारिश के साथ ओले भी गिर रहे हैं। शुक्रवार को श्योपुर में आंधी ने तबाही मचाई। अलग-अलग हादसों में 4 लोगों की मौत हो गई। जिले में करीब एक इंच पानी गिर गया। सागर में आधा इंच पानी गिरा। जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर रहा। तापमान में गिरावट देखने को मिली। हालांकि, जून की बारिश में प्रदेश पिछड़ गया है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अब तक औसत से 23 प्रतिशत बारिश कम हुई है। पूर्वी हिस्से जैसे- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में औसत से 55% कम जबकि पश्चिमी हिस्से- भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में औसत से 2% बारिश ज्यादा हुई है। 33 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर समेत 33 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का दौर बना रह सकता है। इंदौर-उज्जैन संभाग में धूप का असर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहेगा। इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, बुरहानपुर, देवास, आगर-मालवा और शाजापुर समेत कई जिलों में तेज धूप निकलने के आसार हैं। बारिश के आंकड़ों में अभी भी पीछे प्रदेश हालांकि प्री-मानसून बारिश का दौर जारी है, लेकिन जून महीने में प्रदेश का कुल वर्षा रिकॉर्ड अभी सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अब तक मध्य प्रदेश में औसत से 23 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जिलों में बारिश की कमी सबसे ज्यादा बनी हुई है। कई जिलों में तापमान सामान्य रहा फिलहाल, प्रदेश के कई जिलों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, लेकिन बारिश और बादलों की वजह से आने वाले दिनों में तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है. मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी कर रहा है. इसके अलावा लोगों को सलाह दी गई है कि तेज आंधी, बिजली गिरने और बारिश के दौरान सुरक्षित जगहों पर रहें।  कई जिलों में गरज-चमक के आसार मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, शाजापुर, आगर मालवा, मंदसौर, नीमच, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, रीवा, सतना, शहडोल, दमोह, उमरिया, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, मंडला, पन्ना, सागर और पांढुर्णा समेत कई जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है. आईएमडी के अनुसार, दोपहर बाद मौसम का मिजाज बदल सकता है और कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश भी हो सकती है।  बारिश से लुढ़का तापमान प्री-मानसून बारिश का असर तापमान पर भी दिखाई दिया। रीवा में 7.3 डिग्री, सतना में 6.6 डिग्री और ग्वालियर में 5.8 डिग्री सेल्सियस तक तापमान में गिरावट दर्ज की गई। कई शहरों में लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है और अगले तीन से पांच दिनों में मध्य प्रदेश में इसकी एंट्री हो सकती है। मानसून के आगमन के साथ प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।  आज भिंड-दतिया में तेज आंधी मौसम विभाग के मुताबिक, भिंड, दतिया, छतरपुर, पन्ना और सागर में बारिश के साथ तेज आंधी चल सकती है। जिसकी रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा रहने की संभावना है। भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गरज-चमक, तेज हवा और बारिश का दौर रहेगा। वहीं, इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, आगर-मालवा, राजगढ़ और शाजापुर में तेज धूप खिली रहेगी।  

पंजाब की राजनीति में हलचल: केजरीवाल बोले- नवंबर में हो सकते हैं चुनाव, बताया AAP का मुख्यमंत्री उम्मीदवार

चंडीगढ़  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब विधानसभा चुनावों को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 के बजाय इस साल नवंबर में हो सकते हैं। वहीं केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के सीएम कैंडिडेट के नाम की घोषणा भी कर दी है। उन्होंने कहा कि भगवंत मान को पार्टी के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के तौर पर भी पेश किया और कहा हमें उन्हें फिर से मुख्यमंत्री बनाना है। केजरीवाल ने बठिंडा में मुख्यमंत्री भगवंत मान, आप के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमन अरोड़ा सहित अन्य नेताओं के साथ रोड शो को संबोधित किया। उन्होंने पिछले महीने हुए नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी के शानदार प्रदर्शन के लिए लोगों का आभार जताया। बता दें कि बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी के चार पार्षद बरनाला, मोगा, बटाला और बठिंडा नगर निगमों के महापौर निर्वाचित हुए। केजरीवाल ने कहीं ये बातें     केजरीवाल ने कहा कि मुझे बताया गया है कि चुनाव फरवरी 2027 के बजाय नवंबर 2026 में होंगे। ऐसे में अब केवल चार महीने बचे हैं। हमें अभी से काम में जुट जाना चाहिए और भगवंत मान को फिर से मुख्यमंत्री बनाना है।’     केजरीवाल ने नगर निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत के लिए लोगों का आभार भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने आठ नगर निगमों, 75 नगर परिषदों और 19 नगर पंचायतों की कुल 1,977 वार्ड सीटों में से 958 पर जीत दर्ज की है।     केजरीवाल ने दावा किया कि पंजाब में आप चार साल से सरकार चला रही है और लोग इसके शासन से खुश हैं।’ क्या बोले भगवंत मान वहीं सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहाकि पंजाब के लोगों को यह जानना चाहिए कि हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा, अकाली दल और कांग्रेस ने मिलकर मुकाबला किया था। इन दलों ने अपने संसाधन साझा किए, रणनीतियों में तालमेल बिठाया और आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के खिलाफ पर्दे के पीछे एकजुट होकर अभियान चलाया। उन्होंने कहा कि ईमानदार सरकार से ये दल घबराए हुए थे, क्योंकि उन्हें एहसास हो गया था कि यदि ‘आप’ की जनसेवा की यात्रा इसी तरह जारी रही, तो भ्रष्टाचार की उनकी दुकानें हमेशा के लिए बंद हो जाएंगी। लेकिन पंजाब की राजनीतिक रूप से जागरूक और दूरदर्शी जनता ने इस गठजोड़ की हकीकत को समझ लिया और ‘आप’ के पक्ष में स्पष्ट जनादेश दिया।  

स्कूलों की प्रार्थना सभा में नया नियम, राष्ट्रगान के साथ राज्यगीत और वैदिक मंत्रों का होगा पाठ

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने 2026-27 सत्र से स्कूलों में राष्ट्रगान, राज्यगीत, वैदिक मंत्र, सरस्वती वंदना और भोजन मंत्र को शामिल करने का निर्णय लिया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों में सांस्कृतिक मूल्यों और अनुशासन को बढ़ावा देना है। शिक्षा सत्र 2026-27 से लागू होगी नई व्यवस्था छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य के सभी सरकारी और अनुदान प्राप्त स्कूलों में शिक्षा सत्र 2026-27 से नई सांस्कृतिक एवं मूल्य आधारित व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जिला शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत विद्यालयों की दैनिक गतिविधियों में राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जुड़े कार्यक्रमों को नियमित रूप से शामिल किया जाएगा। प्रार्थना सभा में जुड़ेगा सांस्कृतिक और प्रेरणात्मक आयाम नई व्यवस्था के अनुसार सुबह की प्रार्थना सभा केवल राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र और देश के महापुरुषों की जीवनी का वाचन भी कराया जाएगा। सरकार का मानना है कि विद्यार्थियों को विद्यालय स्तर पर ही भारतीय परंपराओं, आदर्श व्यक्तित्वों और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया जाना आवश्यक है। इससे छात्रों में नैतिक शिक्षा, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। भोजन के समय होगा सामूहिक भोजन मंत्र विद्यालयों में मध्याह्न भोजन के दौरान भी नई पहल लागू की जाएगी। छात्रों को भोजन ग्रहण करने से पहले सामूहिक रूप से भोजन मंत्र का पाठ कराया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इससे विद्यार्थियों में भोजन के प्रति सम्मान, अनुशासन और सामूहिकता की भावना विकसित होगी। यह व्यवस्था सभी स्कूलों में समान रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। तीन सत्रों में बंटा शेड्यूल विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में अब प्रतिदिन तीन अलग-अलग समय पर निर्धारित क्रम में गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रातःकालीन सत्र स्कूल प्रारंभ होने पर सुबह की प्रार्थना सभा में एक तय क्रम के अनुसार ये प्रस्तुतियां अनिवार्य होंगी। विद्यालय प्रारंभ होने पर प्रातःकालीन प्रार्थना सभा में क्रमशः राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, दीपमंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र तथा महापुरुषों की जीवनी का वाचन कराया जाएगा। इसी प्रकार मध्यान्ह भोजन के समय विद्यार्थियों द्वारा भोजन मंत्र का सामूहिक पाठ किया जाएगा। वहीं विद्यालय की छुट्टी के समय संध्या सत्र में राज्यगीत, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र का सामूहिक वाचन कराया जाएगा।  जानें क्या है उद्देश्य? स्कूल शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों के नियमित और प्रभावी संचालन से छात्रों में न केवल राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी, बल्कि उनके भीतर नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक चेतना का भी सही विकास होगा। यह पहल विद्यार्थियों को भारतीय परंपराओं और राष्ट्रीय मूल्यों से परिचित कराने में मील का पत्थर साबित होगी। लापरवाही पर होगी कार्रवाई शासन ने स्पष्ट किया है कि सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को प्रतिदिन स्कूलों का औचक निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि इन नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं। निर्धारित क्रम में अवहेलना पाए जा छुट्टी के समय राज्यगीत और शांति मंत्र विद्यालयों में दिन की समाप्ति भी अब एक निर्धारित सांस्कृतिक क्रम के तहत होगी। छुट्टी के समय विद्यार्थियों द्वारा राज्यगीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का सामूहिक गान किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक पहचान और राज्य की गौरवशाली परंपराओं से जोड़ना बताया जा रहा है। इस पहल को शिक्षा और संस्कारों के समन्वय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। संस्कृति और शिक्षा के समन्वय पर जोर रायपुर में इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपराएं देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उनके अनुसार विद्यालयों में राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत, राज्यगीत और वैदिक मंत्रों को शामिल करने से बच्चों के व्यक्तित्व विकास और संस्कार निर्माण में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है। राजनीतिक प्रतिक्रिया भी आई सामने इस निर्णय पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए विधायक पुरंदर मिश्रा ने पूर्ववर्ती सरकारों पर सांस्कृतिक मूल्यों की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आज विश्व के कई देशों में भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, ऐसे समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में इन मूल्यों को स्थान देना एक स्वागतयोग्य पहल है। उन्होंने इस निर्णय के लिए नरेंद्र मोदी,विष्णु देव साय और गजेन्द्र यादव के प्रति आभार भी व्यक्त किया। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर फोकस शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि विद्यालय केवल शैक्षणिक ज्ञान का केंद्र नहीं होते, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण और सामाजिक मूल्यों के विकास का भी प्रमुख माध्यम होते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ सांस्कृतिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में देखी जा रही है। आने वाले शिक्षा सत्र से यह व्यवस्था राज्यभर के स्कूलों में लागू होने के बाद शिक्षा और संस्कार के संतुलित मॉडल की नई तस्वीर प्रस्तुत कर सकती है। स्कूल समाप्ति पर राज्यगीत और शांति मंत्र का गायन छुट्टी के समय स्कूलों में राज्य गीत, गायत्री मंत्र और शांति मंत्र का गायन अनिवार्य किया गया है, जिससे दिन का समापन सकारात्मक वातावरण में हो सके। कड़ाई से लागू होंगे नियम, लापरवाही पर कार्रवाई तय शिक्षा विभाग का मानना है कि इन गतिविधियों से छात्रों में राष्ट्रप्रेम और अनुशासन की भावना मजबूत होगी। जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से औचक निरीक्षण करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी नियमों का पालन हो।यदि किसी स्कूल में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य पर कार्रवाई की जा सकती है। 16 जून से खुलेंगे स्कूल, तैयारियों के सख्त निर्देश Chhattisgarh में सभी स्कूल 16 जून 2026 से खुलेंगे। इसके साथ ही शाला प्रवेश उत्सव 2026 के आयोजन के लिए भी विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति, पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता, टाइम टेबल की तैयारी और स्कूलों की साफ सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

आर्यभट्ट पर टिप्पणी से घिरा Amazon, विज्ञापन के खिलाफ हिंदू संगठन ने उठाई कानूनी कार्रवाई की मांग

नई दिल्ली  ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म अमेजन (Amazon) के एक विज्ञापन को लेकर हिंदू संगठन ने आपत्ति जताई है. हिंदू संगठन का कहना है कि अमेजन के एक एड में प्राचीन भारत के महान गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट्ट का आपत्तिजनक ढंग से उपहास उड़ाया गया. इस मामले में कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा गया है. सर्वोच्च न्यायालय में कार्यरत और हिंदू जनजागृति समिति की अधिवक्ता अमिता सचदेवा द्वारा भेजी गई इस नोटिस में मांग की गई है कि अमेजन 48 घंटे के भीतर भारतीय जनता से सार्वजनिक माफी मांगे और इस विवादित विज्ञापन को तुरंत वापस ले. मांग पूरी न होने पर अमेजन के विरुद्ध फौजदारी और दीवानी मुकदमा दर्ज किया जाएगा, ऐसा स्पष्ट अल्टीमेटम दिया गया है।  हिंदू संगठन के मुताबिक इस विज्ञापन को लेकर देश भर के राष्ट्रप्रेमी नागरिकों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर ‘अमेज़न का बहिष्कार करो' (#Boycott_Amazon) अभियान तेजी से ट्रेंड कर रहा है।  आयभट्ट जैसी वेशभूषा में मजाकिया तंज यह विवाद ‘अमेज़न नाऊ' (Amazon Now) के प्रचार अभियान से जुड़ा है. जिसमें आर्यभट्ट की वेशभूषा में एक व्यक्ति को ‘‘जीरो डिलीवरी चार्ज खोजने वाले वैज्ञानिक'' के रूप में बेहद मजाकिया और व्यंग्यात्मक ढंग से पेश किया गया है. नोटिस में कहा गया है कि जिस महान ऋषि-तुल्य वैज्ञानिक ने दुनिया को ‘शून्य' की अमूल्य अवधारणा दी और वैश्विक स्तर पर भारत का वैज्ञानिक परचम लहराया, उन्हें केवल व्यावसायिक लाभ के लिए एक ‘कॉर्पोरेट मस्कट' बनाकर उनकी क्रूर थट्टा उड़ाना भारत की महान ज्ञान-विरासत और राष्ट्रीय अस्मिता का जानबूझकर किया गया अपमान है।  पहले भी अमेजन के एड विवादों में आए नोटिस में ध्यान दिलाया गया है कि व्यावसायिक लाभ के लिए भारतीय संस्कृति और हिंदू प्रतीकों का अपमान करने का अमेजन का यह पुराना इतिहास रहा है. इससे पहले भी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर हिंदू देवी-देवताओं (भगवान गणेश और माता लक्ष्मी) के चित्रों वाले पायदान, टॉयलेट सीट कवर बेचे जाने और ‘तांडव' वेब सीरीज के माध्यम से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के मामले सामने आ चुके हैं, जिसके लिए भारी विरोध के बाद कंपनी को माफी मांगनी पड़ी थी।  केवल व्यावसायिक मुनाफे के लिए भारतीय महापुरुषों का जानबूझकर अपमान करने का यह कृत्य संशोधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), धारा 196 व 197 (वैमनस्य फैलाना और राष्ट्रीय अखंडता को बाधित करना) तथा धारा 302 (धार्मिक भावनाओं को आहत करने का इरादा) के तहत सीधे आपराधिक और दीवानी कार्रवाई के योग्य है।  48 घंटे में विज्ञापन हटाकर मांगे माफी नहीं तो केस इस पृष्ठभूमि में हिंदू जनजागृति समिति ने अमेज़न को अपनी शर्तें पूरी करने के लिए 48 घंटे का समय दिया है. इसके तहत ‘आर्यभट्ट – अमेज़न नाऊ' विज्ञापन को यु-ट्यूब, इन्स्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और टीवी सहित सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्थाई रूप से हटाना होगा. साथ ही, कंपनी को अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल, वेबसाइट के होमपेज और देश के अग्रणी समाचार पत्रों में हिंदू समाज और भारतीय संस्कृति से बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगनी होगी, तथा भविष्य में राष्ट्रीय प्रतीकों या महापुरुषों का अपमान न करने का एक लिखित वचन पत्र भी देना होगा. अधिवक्ता अमिता सचदेवा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि दी गई अवधि में कार्रवाई न होने पर अदालत में मुकदमा दायर किया जाएगा। 

श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान बनीं महक नरवासे, CM विष्णु देव साय ने किया सम्मानित

श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय अंडर-19 महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान बनीं महक नरवासे : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया सम्मानित महक की उपलब्धि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजनांदगांव जिले की प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर सुमहक नरवासे ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तथा सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने भारतीय महिला अंडर-19 क्रिकेट टीम के आगामी श्रीलंका दौरे के लिए टी-20 एवं वनडे दोनों टीमों का उपकप्तान नियुक्त किए जाने पर सुमहक नरवासे को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने शॉल और स्मृति चिन्ह भेंट कर महक का सम्मान किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महक नरवासे की यह उपलब्धि केवल उनके परिवार या राजनांदगांव जिले की नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बेटियां आज खेल सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बना रही हैं। महक ने अपनी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के बल पर यह मुकाम हासिल किया है, जो प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि महक आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ और देश का नाम गौरवान्वित करेंगी। उन्होंने महक को प्रोत्साहित करते हुए कहा, "खूब खेलो, आगे बढ़ो और नई ऊंचाइयों को छुओ। आपकी सफलता प्रदेश के हजारों युवा खिलाड़ियों के सपनों को नई उड़ान देगी।" मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। महक नरवासे का भारतीय अंडर-19 महिला टीम की उपकप्तान के रूप में चयन प्रदेश में विकसित हो रहे खेल वातावरण और खिलाड़ियों को मिल रहे अवसरों का उत्कृष्ट उदाहरण है। सुमहक नरवासे ने सम्मान एवं शुभकामनाओं के लिए मुख्यमंत्री साय के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर उनके पिता राधेश्याम नरवासे, महापौर मधुसूदन यादव, कोच मनोज तिवारी तथा अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

आजमगढ़ में सीएम योगी का हमला, विकास परियोजनाओं के साथ सियासी बयानबाज़ी तेज

लखनऊ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी को लेकर प्रदेश में माहौल गर्म है। समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को लेकर शुक्रवार को प्रदेश के अलग-अलग जिलों में प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार किया। सपा प्रमुख की बेटी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर सपा ही नहीं भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के नेता-कार्यकर्ता भी मुखर विरोध जता रहे हैं। वहीं शनिवार को अखिलेश यादव के निर्वाचन क्षेत्र आजमगढ़ पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी पहली बार सार्वजनिक रूप से इसे लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया। सीएम योगी ने कहा कि बेटी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी कतई स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही सीएम ने सपा प्रमुख को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि जरूरत है कि सपा प्रमुख भी अपने लोगों को संस्कारित करें। उन्हें सोचना चाहिए कि उनके लोग दूसरों की बेटियों, बुजुर्गों, दिवंगत लोगों और वरिष्ठ नेताओं के प्रति किस प्रकार की भाषा का प्रयोग करते हैं। सीएम योगी ने कहा, ‘बेटी, बेटी होती है। बेटी का सम्मान होना चाहिए। मैं पिछले दिनों देख रहा था समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की पुत्री के खिलाफ कुछ लोगों ने गलत टिप्पणियां की थीं जैसे मेरे संज्ञान में आया मैं तत्काल पुलिस के एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। बेटी के खिलाफ कोई भी अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। बेटी, बेटी होती है और हम तो उस संस्कार में पले-बढ़े हैं जहां कहा जाता है कि गांव की बेटी सबकी बेटी है और गांव की बहन सबकी बहन है। हमने तो कोई भेदभाव नहीं किया। लेकिन अखिलेश जी दूसरों को उपदेश देते हो अपने चेले-चपाटों को भी थोड़ा उपदेश दे दो कि अपनी भाषा को संयमित कर लें। दूसरों के प्रति टिप्पणी करने से पहले स्वयं भी सोचा करो कि उनके लोग किस प्रकार की भाषा का प्रयोग बहन और बेटियों के प्रति, बुजुर्गों के प्रति, दिवंगत हुए लोगों के प्रति और वरिष्ठ नेताओं के प्रति करते हैं। इसके बारे में उनको भी अपने लोगों को संस्कारित करने की आवश्यकता है। अच्छा होगा उनको समझाओ और नहीं समझ सकते तो हमारे हवाले कर दो हम उनको अच्छी तरह समझा देंगे सीएम योगी ने आजमगढ़ में 955 करोड़ रुपए से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले के आजमगढ़ को याद कीजिए जो अपनी पहचान के लिए मोहताज था। तब यहां न विश्वविद्यालय था, न पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे था, न एयरपोर्ट ठीक ढंग से काम कर पा रहा था, न हरिहरपुर में संगीत महाविद्यालय था, तब आजमगढ़ की साड़ी को भी कोई मंच नहीं मिल पा रहा था और मुबारकपुर की ब्लैक पॉटरी के लिए भी कोई स्थान नहीं था। आज ब्लैक पॉटरी से जुड़ा कारिगर मुझसे मिला और बहुत खुश होकर उसने मुझसे कहा कि जब से उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की सरकार आई है, हमारा कारोबार कई गुना बढ़ा है। इस बार निरहुआ को जिताइए सीएम योगी ने कहा कि आजमगढ़ में 10 विधानसभा सीटें हैं। भाजपा ने एक भी नहीं जीतीं। इसके बावजूद हमारी सरकार ने आजमगढ़ के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले चुनाव में निरहुआ की जीत जरूर होगी। उन्होंने आजमगढ़ से सांसद रहे निरहुआ की चुटकी लेते हुए कहा कि मैं तो कहता हूं कि अपनी कुछ फिल्मों की शूटिंग यहां भी किया करो। आजमगढ़ के नौजवानों को भी अपनी कला के प्रदर्शन का मौका दो।

जेल व्यवस्था में सुधार की पहल: MP सरकार बदलेगी 58 साल पुराने नियम, बंदियों को मिलेगा असर

भोपाल राज्य सरकार ने वर्ष 1968 के मध्य प्रदेश जेल अधिनियम में कुछ बदलाव किए हैं। इसमें अप्रासंगिक हो चुके कुछ नियम हटाकर उनकी जगह नए जोड़े गए हैं। पहली बार मैन्युअल में निर्धारित किया गया है की जेल में पांच कैदियों के बीच में एक शौचालय सीट होगी। हालांकि, अभी आठ कैदियों पर एक शौचालय बनाने के निर्देश जेल मुख्यालय की तरफ से थे। आदतन और गैर आदतन अपराधी को किया परिभाषित दूसरा बड़ा बदलाव यह कि आदतन और गैर आदतन अपराधी को पहली बार परिभाषित किया गया है। लगातार पांच वर्ष की अवधि में कम से कम दो अलग-अलग अवसरों पर एक या एक से अधिक अपराधों में सजा पा चुके अपराधी को आदतन और अन्य को गैर आदतन माना जाएगा। दोनों को रखने की व्यवस्था व कुछ और शर्तें अलग-अलग रहेंगी। भेदभाव करने वाले कैदियों को मिलेगी अनोखी सजा भोजन बनाने वाली टोली में गैर आदतन अपराधी ही होंगे। यदि कोई कैदी भेदभावपूर्ण रवैया रखते हुए टोली द्वारा तैयार खाना खाने से आपत्ति करता है तो दंडस्वरूप उस बंदी को भोजन बनाने में लगाया जाएगा और उसे समस्त कैदियों का भोजन पकाना होगा। पहली बार यह व्यवस्था की गई है कि केंद्रीय एवं जिला जेल जहां कैदियों की संख्या अधिक है वहां स्वचालित मशीनों से वस्त्रों की धुलाई का काम किया जाएगा। कैदियों के गीले कपड़ों को सुखाने के लिए व्यवस्था की जाएगी। संशोधित नियमों में दोषसिद्ध कैदियों को दो श्रेणियों में बांटने का प्रावधान किया गया है। पहली श्रेणी आदतन अपराधियों की होगी जबकि दूसरी श्रेणी गैर-आदतन अपराधियों की। नए नियमों के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति लगातार पांच वर्षों की अवधि में अलग-अलग मामलों में दो से अधिक बार सजा प्राप्त कर चुका है और उसकी सजा किसी अपील या पुनर्विचार में निरस्त नहीं हुई है, तो उसे आदतन अपराधी माना जाएगा। हालांकि पांच वर्ष की अवधि की गणना करते समय जेल में बिताए गए समय को शामिल नहीं किया जाएगा। बाकी सभी दोषसिद्ध कैदी गैर-आदतन अपराधी की श्रेणी में रखे जाएंगे। जेलों में स्वच्छता सुविधाओं को लेकर भी सरकार ने कई नए मानक तय किए हैं। अब हर सेल में शौचालय होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा प्रत्येक पांच बंदियों पर कम से कम एक शौचालय सीट उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान किया गया है। अधिकारियों के अनुसार शौचालयों में चौबीसों घंटे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। दिव्यांग बंदियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वार्ड में वेस्टर्न सीट वाले शौचालय भी बनाए जाएंगे। रोटी बनाने के लिए तय हुई एसओपी रोटी बनाने को लेकर भी पहली बार नियम तय किए गए हैं। आटा तय मात्रा में लेकर स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा। रोटियों के लिए लोई धीरे-धीरे और समान आकार में तैयार की जाएगी। बेलन से रोटियों को गोल आकार दिया जाएगा। गर्म तवे पर रोटियों को धीरे-धीरे सेंका जाएगा ताकि वे बाहर से न जलें और भीतर से कच्ची न रहें। रोटी बनाने में स्वचालित उपकरणों का भी उपयोग किया जा सकेगा। जो बंदी भोजन बनाने के कार्य में लगे होंगे, उन्हें सामान्य धुलाई कार्यों में शामिल नहीं किया जाएगा ताकि रसोई कार्य और स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित न हो। कपड़े धोने और स्वच्छता पर विशेष जोर नियम 640 में संशोधन के अंतर्गत हर बंदी को सप्ताह में साबुन उपलब्ध कराया जाएगा। बंदियों के कपड़े, कंबल और बिस्तरों की नियमित धुलाई होगी। अस्पताल में भर्ती बंदियों के कपड़ों और बिस्तरों की अलग से सफाई कराई जाएगी। बड़े जिला जेलों में आवश्यकता के अनुसार स्वचालित वाशिंग मशीनों का उपयोग किया जा सकेगा। गीले कपड़ों को सुखाने के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी। एमपी की जेलों में 48 हजार कैदी मध्य प्रदेश की 132 जेलों में क्षमता से अधिक करीब 45,500 से 48,000 कैदी बंद हैं, जिनमें से लगभग 50% विचाराधीन हैं। राज्य के जेलों की कुल तय क्षमता लगभग 30,000 है, जिसके कारण जेलों में अत्यधिक भीड़भाड़ की स्थिति है। यूपी और बिहार के बाद मध्यप्रदेश ही ऐसा राज्य है जहां जेलों में क्षमता से अधिक कैदी बंद हैं। जेल सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार का मानना है कि इन संशोधनों से जेलों में स्वच्छता, स्वास्थ्य सुरक्षा और बंदियों के जीवन स्तर में सुधार होगा। साथ ही आदतन अपराधियों की स्पष्ट पहचान, भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता मानकों और जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। यह संशोधन राज्य की जेलों को आधुनिक और मानवीय व्यवस्थाओं के अनुरूप विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नियमों में यह भी कहा गया है कि सभी शौचालयों में प्लास्टिक की बाल्टी और बड़े मग की व्यवस्था की जाएगी। बैरकों के भीतर और बाहर पर्याप्त संख्या में शौचालय तथा मूत्रालय बनाए जाएंगे। हाथ धोने के लिए हर शौचालय के बाहर पानी और साबुन की व्यवस्था अनिवार्य होगी। जेल कर्मचारियों और बंदियों के लिए अलग-अलग शौचालय बनाए जाएंगे। महिला कर्मचारियों के लिए भी सुरक्षित स्थानों पर पृथक शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। भोजन बनाने की व्यवस्था में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। अब केवल गैर-आदतन और स्वस्थ बंदियों को ही भोजन तैयार करने वाली टोली में शामिल किया जाएगा। भोजन बनाने से पहले सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। रसोई में प्रवेश करने वाले बंदियों को स्वच्छ वस्त्र पहनना अनिवार्य होगा। भोजन तैयार करने से पहले और बाद में हाथ धोना भी जरूरी किया गया है। यदि कोई बंदी अस्वच्छ परिस्थितियों में भोजन बनाता पाया गया या भोजन को दूषित करने की कोशिश करता है तो उसे तत्काल उस कार्य से हटा दिया जाएगा। पहली बार रोटी बनाने को लेकर भी विस्तृत दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। आटा स्वच्छ वातावरण में गूंथा जाएगा और रोटियों के लिए समान आकार की लोइयां तैयार की जाएंगी। रोटियों को ठीक तरीके से बेलकर गर्म तवे पर संतुलित तापमान में सेंका जाएगा ताकि वे कच्ची या जली हुई न रहें। आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित मशीनों का उपयोग भी किया जा सकेगा। जेल विभाग का कहना है कि इससे भोजन की गुणवत्ता बेहतर होगी और सभी बंदियों को एक समान भोजन उपलब्ध कराया जा सकेगा। सुबह का नाश्ता तैयार करने वाले बंदियों को भी विशेष सुविधा देने का प्रावधान किया गया है। नए नियमों के अनुसार आवश्यकता होने … Read more

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय बोले- केंद्र और राज्य के समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति

केंद्र-राज्य समन्वय से विकास को मिलेगी नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य भेंट रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सौजन्य मुलाकात की।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह का शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर संवाद की भावना ने विकास कार्यों को नई गति प्रदान की है। इसी सहयोगात्मक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंच रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच मजबूत साझेदारी से अधोसंरचना विकास, उद्योग, रोजगार, कौशल विकास तथा जनसेवा से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में नए अवसर निर्मित हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आपसी सहयोग और समन्वय से छत्तीसगढ़ के विकास को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को साकार करने में सहायता प्राप्त होगी। इस अवसर पर सांसद बृजमोहन अग्रवाल उपस्थित थे।