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योगी सरकार के छह माह में एक लाख भर्ती के संकल्प में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी

एक लाख नौकरियों के लक्ष्य को मिली रफ्तार, शिक्षा में 17 हजार से अधिक पदों पर भर्ती योगी सरकार के छह माह में एक लाख भर्ती के संकल्प में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी हिस्सेदारी भर्ती प्रक्रिया में प्राचार्य से लेकर सहायक अध्यापक तक के पद शामिल रोजगार के साथ ही प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को भी उपलब्ध होगा आवश्यक मानव संसाधन लखनऊ,   प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार का मिशन रोजगार तेज गति से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह माह में एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती का संकल्प लिया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। इसी क्रम में शिक्षा क्षेत्र में ही 17,059 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज की ओर से वर्ष 2026 में जारी भर्ती विज्ञापनों में उच्च शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इन भर्तियों के जरिए बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवा में आने का अवसर मिलेगा, साथ ही प्रदेश के शिक्षण संस्थानों को भी आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध होगा। उच्च शिक्षा में 2,047 पदों पर अवसर आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार के अनुसार, उच्च शिक्षा विभाग में प्राचार्य के 111 पद और सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) के 1,936 पद विज्ञापित किए गए हैं। सहायक आचार्य पदों के लिए परीक्षा 19 और 20 नवंबर 2026 को प्रस्तावित है। इस भर्ती से उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार का अवसर मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा में 3,504 पद उन्होंने बताया कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के 897 पद तथा प्रवक्ता (पीजीटी) के 2,607 पद शामिल हैं। सहायक अध्यापक पदों के लिए परीक्षा 3 और 4 दिसंबर 2026, जबकि प्रवक्ता पदों के लिए परीक्षा 15 और 16 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है। बेसिक शिक्षा में 11,508 पदों की बड़ी भर्ती शिक्षा क्षेत्र में प्रस्तावित भर्तियों में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बेसिक शिक्षा विभाग की है। यहां सहायक अध्यापक प्राथमिक शहरी (अर्बन) के 11,508 पद विज्ञापित किए गए हैं। इन पदों के लिए परीक्षा 3 और 4 दिसंबर 2026 को प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त बेसिक शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (स्पेशल टीईटी) भी आयोजित की जा रही है। एक लाख भर्ती के लक्ष्य में शिक्षा क्षेत्र की अहम भूमिका शिक्षा विभाग के इन आंकड़ों को देखें तो अकेले विज्ञापित 17,059 पद एक लाख सरकारी नौकरियों के लक्ष्य का करीब 17 प्रतिशत हैं। इससे स्पष्ट है कि योगी सरकार के रोजगार मिशन में शिक्षा क्षेत्र को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इनमें 11,508 पद अकेले प्राथमिक शहरी सहायक अध्यापकों के, 2,607 प्रवक्ता, 1,936 सहायक आचार्य, 897 माध्यमिक सहायक अध्यापक और 111 प्राचार्य के पद हैं। यानी भर्ती प्रक्रिया में स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक के विभिन्न स्तरों को कवर किया गया है। रोजगार के साथ शिक्षा व्यवस्था को भी मजबूती योगी सरकार की प्राथमिकता पारदर्शी चयन प्रक्रिया और समयबद्ध भर्ती के जरिए रिक्त पदों को भरने की है। शिक्षा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नियुक्तियां होने से एक ओर प्रदेश के युवाओं को सरकारी रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर स्कूलों, माध्यमिक शिक्षण संस्थानों और उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की उपलब्धता भी बढ़ेगी। मिशन रोजगार के तहत हो रही ये भर्तियां युवाओं के लिए सरकारी नौकरी के नए अवसर खोलने के साथ प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का भी काम करेंगी।

जगदलपुर में ‘सहकार से समृद्धि’ का राष्ट्रीय मंथन, दूरदराज के क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने का संकल्प

बस्तर से सहकारिता का नया सूर्योदय जगदलपुर में सहकार से समृद्धि राष्ट्रीय वर्कशाॅप का शुभारंभ सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय विमर्श से दूरदराज के क्षेत्रों तक विकास पहुंचाने का शंखनाद अंतिम छोर तक जनमानस को लाभ पहुंचाना ही सहकारिता की सार्थकता-सचिव सहकारिता भारत सरकार डाॅ. आशीष भूटानी रायपुर मां दंतेश्वरी की पावन धरा बस्तर जिले के जगदलपुर में भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सहकार से समृद्धि वर्कशाॅप का भव्य शुभारंभ गुरुवार को हुआ। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में आयोजित यह नौवां सम्मेलन ऐतिहासिक महत्व रखता है, क्योंकि बस्तर में पहली बार किसी केंद्रीय मंत्रालय द्वारा इस स्तर का राष्ट्रीय विचार-मंथन आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का मुख्य ध्येय सहकारिता आंदोलन के माध्यम से देश के सबसे दूरदराज, आकांक्षी और जनजातीय अंचलों के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक समृद्धि और विकास का लाभ पहुंचाना है।         सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारत सरकार के सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने रेखांकित किया कि सहकारिता की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब इसका प्रभाव जमीनी स्तर पर अंतिम छोर तक दिखाई दे। असम में शांति बहाली के बाद आई विकास की गति का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ठीक वैसा ही सकारात्मक और अभूतपूर्व बदलाव आज बस्तर की धरती पर भी महसूस किया जा रहा है। प्राथमिक कृषि साख समितियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धुरी बताते हुए उन्होंने देश भर में दो लाख नई बहुउद्देशीय पैक्स की स्थापना, उनके पूर्ण डिजिटलीकरण, कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में रूपांतरण और विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत अनाज भंडारण योजना को तेजी से लागू करने की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही उन्होंने नाबार्ड, एनसीडीसी और एनडीडीबी जैसी शीर्ष संस्थाओं के सहयोग से पैक्स के विविधीकरण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में नए अवसर तलाशने और सहकारी बैंकिंग व्यवस्था के पारदर्शी व सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन पर विशेष बल दिया।          छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ते हुए सहकारिता को केवल पारंपरिक खाद व ऋण वितरण तक सीमित न रखकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विविधीकरण, प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन का सशक्त माध्यम बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में अब तक 500 से अधिक नई बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि साख समितियों का गठन हो चुका है और डेयरी, मत्स्य पालन तथा लघु वनोपज के क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर तेजी से कार्य जारी है। इन समितियों को डिजिटल करने के साथ-साथ माइक्रो-एटीएम और सीएससी सुविधाओं से लैस किया गया है, जिससे ग्रामीण आबादी को नागरिक सेवाएं मिलने के साथ समितियों की आय भी बढ़ी है। औद्योगिक विस्तार की चर्चा करते हुए उन्होंने कोंडागांव के मक्का आधारित और कवर्धा के गन्ना आधारित एथेनॉल संयंत्रों का उल्लेख किया और कहा कि गुजरात व महाराष्ट्र के सफल मॉडलों की तरह इकोनॉमिक्स ऑफ स्केल हासिल करने के लिए नेफेड, एनसीसीएफ और बीबीएसएसएल जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है।       सम्मेलन में अन्य राज्यों के अनुभवों को साझा करते हुए तमिलनाडु की अतिरिक्त मुख्य सचिव सहकारिता पी. अमुधा ने बताया कि उनके राज्य ने केंद्र के दिशा-निर्देशों के आधार पर एक, तीन और पांच वर्षीय विजन डॉक्यूमेंट तथा विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर उन्हें जमीन पर उतारा है। तमिलनाडु का सहकारी तंत्र राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर प्राथमिक समितियों के उत्पादों को एक मजबूत और प्रतिस्पर्धी बाजार उपलब्ध करा रहा है।      सत्र के शुभारंभ पर छत्तीसगढ़ के सहकारिता सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना ने बस्तर के जीवट और अदम्य इच्छाशक्ति का प्रभावशाली खाका खींचा। उन्होंने साझा किया कि मात्र पंद्रह दिन पहले ही यह पूरा क्षेत्र भारी जलभराव से जूझ रहा था और सम्मेलन का सभागार भी कई दिनों तक पानी में डूबा रहा, लेकिन जिला प्रशासन और पूरी टीम ने इस प्राकृतिक आपदा को चुनौती मानकर बहुत कम समय में परिसर का कायाकल्प कर इसे राष्ट्रीय स्तर के आयोजन के लिए तैयार कर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि अतीत के संघर्षों को पीछे छोड़कर बस्तर अब विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ रहा है और यहां सहकारिता के क्षेत्र में मौजूद अपार संभावनाएं स्थानीय आजीविका को नई ऊंचाई देंगी। सम्मेलन के शुरूआत में देश में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों को लघु फिल्म के द्वारा प्रदर्शित किया गया। साथ ही सम्मेलन स्थल पर विभिन्न सहकारी समितियों एवं संस्थाओं द्वारा अपने उत्पादों से संबंधित स्टाॅल लगाया गया है। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न राज्यों के अधिकारियों द्वारा अपने अनुभव साझा करने सहित सहकारिता के क्षेत्र में नवोन्मेषी प्रयासों के बारे में अवगत कराया जाएगा।          बस्तर कमिश्नर डोमन सिंह, कलेक्टर आकाश छिकारा, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, विभिन्न राज्यों के सहकारिता सचिवों और पंजीयकों तथा विभिन्न सहकारी संगठनों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में शुरू हुआ यह दो दिवसीय मंथन देश भर में सहकार से समृद्धि के राष्ट्रीय संकल्प को नई गति और दिशा प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा।

राजनीतिक विचार अलग थे, लेकिन भारतीय परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान रखते थे पासवान: मुख्यमंत्री योगी

रामविलास पासवान को बिहार जैसा सम्मान देगा यूपी: मुख्यमंत्री योगी   लखनऊ में रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान रहे मौजूद   मुख्यमंत्री योगी ने चित्र पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि, हरे राम-हरे कृष्ण भजन से भक्तिमय हुआ माहौल   पिता के सामाजिक न्याय के मिशन को आगे बढ़ा रहे चिराग पासवान: मुख्यमंत्री योगी   दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने के लिए रामविलास पासवान ने समर्पित किया जीवन   राजनीतिक विचार अलग थे, लेकिन भारतीय परंपराओं के प्रति गहरा सम्मान रखते थे पासवान: मुख्यमंत्री योगी   संसद में साथ बिताए दिनों को मुख्यमंत्री योगी ने किया याद, बोले- सहज व्यवहार से हर किसी का दिल जीत लेते थे    लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय रामविलास पासवान की छठी पुण्यतिथि पर कहा कि उन्हें बिहार में जो सम्मान मिला है, वही सम्मान उत्तर प्रदेश में भी दिया जाएगा। रामविलास पासवान ने सामाजिक न्याय के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने तथा समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान दिलाने के लिए उन्होंने लंबा संघर्ष किया। उनके योगदान को उत्तर प्रदेश में भी पूरा सम्मान मिलेगा।   मुख्यमंत्री योगी गुरुवार को सुशांत गोल्फ सिटी स्थित दयाल बाग एन ईको रिजॉर्ट में आयोजित श्रद्धांजलि सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की मौजूदगी में रामविलास पासवान के चित्र पर पुष्प अर्पित किए। मुख्यमंत्री योगी ने उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि दी।   सामाजिक न्याय की लड़ाई को दिया जीवन मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि करीब 50 वर्ष पहले बिहार की राजनीति में एक युवा नेता के रूप में रामविलास पासवान का उदय हुआ था। वह दलितों और वंचितों की प्रखर आवाज बने। बिहार की जनता ने उन्हें भारी मतों से संसद पहुंचाया। उन्होंने बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के सपनों का भारत बनाने के लिए अपना जीवन समर्पित किया। समाज के वंचित वर्गों को न्याय और सम्मान दिलाना उनका संकल्प था।   उन्होंने कहा कि बिहार में रामविलास पासवान की पुण्यतिथि राष्ट्रीय समारोह के रूप में मनाई जा रही है। इसके लिए बिहार सरकार का आभार जताते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रामविलास पासवान ने जो कहा, उसी के अनुरूप जीवन जिया। बिना किसी भेदभाव के सामाजिक न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाया।   भारतीय परंपराओं के प्रति थी गहरी श्रद्धा मुख्यमंत्री योगी ने संसद में रामविलास पासवान के साथ बिताए दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक उनके साथ काम करने का अवसर मिला। राजनीतिक विचारों में अंतर हो सकता था, लेकिन भारतीय परंपराओं के प्रति उनके मन में उतनी ही श्रद्धा थी, जितनी दलितों और वंचितों को न्याय दिलाने की प्रतिबद्धता। वह चाहते थे कि समाज के प्रत्येक वर्ग को मुख्यधारा में सम्मानजनक स्थान मिले।   मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रामविलास पासवान का व्यवहार बेहद सहज और स्नेहपूर्ण था। अटल बिहारी वाजपेयी और प्रधानमंत्री मोदी के मंत्रिमंडल में काम करने के दौरान भी उनका यही स्वभाव रहा। सार्वजनिक कार्यक्रमों और चुनावी सभाओं में उनकी सदाशयता लोगों के हृदय को छू लेती थी।   पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे चिराग मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि रामविलास पासवान की भौतिक अनुपस्थिति आज भी महसूस होती है। उनकी स्मृतियां हमेशा साथ रहेंगी। संतोष इस बात का है कि उनके पुत्र चिराग पासवान पिता के मिशन को निरंतर आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्री के रूप में वह विभिन्न मंचों से सामाजिक न्याय की आवाज उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी ने लखनऊ में कार्यक्रम आयोजित करने के लिए चिराग पासवान का आभार व्यक्त किया।   भजनों के बीच दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि श्रद्धांजलि सभा में मुख्यमंत्री योगी के संबोधन के बाद हरे राम-हरे कृष्ण भजन का गायन हुआ। भजन की प्रस्तुति से कार्यक्रम स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया। उपस्थित लोगों ने रामविलास पासवान को श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को याद किया।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद श्रद्धांजलि सभा में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, रामविलास पासवान के परिवार के सदस्य, शुभचिंतक और अनुयायी मौजूद रहे।

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर दें विशेष ध्यान, वन मंत्री केदार कश्यप ने दिया संदेश

बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर दें विशेष ध्यान- वन मंत्री केदार कश्यप आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में बच्चों और महिलाओं से किया संवाद, कुपोषण से बचाव के लिए जागरूकता पर दिया जोर रायपुर,   वन मंत्री केदार कश्यप ने गुरुवार को कोंडागांव जिले के गोलावंड स्थित स्कूलपारा आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित आंगन मिलन सेवा कार्यक्रम में बच्चों और महिलाओं से संवाद किया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने पोषण एवं कुपोषण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों और गर्भवती महिलाओं के पोषण पर विशेष ध्यान देने तथा पालकों को कुपोषण से बचाव के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। बच्चों से किया, महिलाओं के पोषण पर विशेष फोकस के निर्देश वन मंत्री कश्यप ने बच्चों से बातचीत कर उनकी सीखने की क्षमता परखी। जहां बच्चों ने चित्रों के माध्यम से फल, पशु-पक्षियों और विभिन्न वस्तुओं की पहचान की। मंत्री ने उनका उत्साह बढ़ाते हुए फल और चॉकलेट वितरित किए। उन्होंने महिलाओं को बच्चों के संतुलित आहार और गर्भावस्था में उचित पोषण की सलाह दी। इस दौरान पांच गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और तीन बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार हुआ। सेवाभाव के लिए छह आंगनवाड़ी कार्यकर्ता-मितानिन का सम्मान मंत्री कश्यप ने आंगनवाड़ी केंद्र की व्यवस्थाओं और साफ-सफाई का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र को स्वच्छ एवं व्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। कार्यक्रम में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और मितानिन सहायिका सहित छह महिलाओं को उनके सेवाभाव और योगदान के लिए सम्मानित किया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती रीता सोरी, जनपद अध्यक्ष श्रीमती अनिता कोर्राम सहित जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त, 67.38 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में पहुंचे ₹632.40 करोड़

मातृशक्ति के सम्मान और स्वावलंबन का मजबूत आधार बनी महतारी वंदन योजना: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जारी की महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त, 67.38 लाख से अधिक माताओं-बहनों के खातों में पहुंचे ₹632.40 करोड़ महतारी वंदन योजना के माध्यम से अब तक माताओं-बहनों को ₹20,708 करोड़ से अधिक की आर्थिक सहायता मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक महिलाओं के खातों में अंतरित किए ₹37.19 करोड़ मातृशक्ति के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर परिवार और प्रदेश को सशक्त बना रही हमारी सरकार: मुख्यमंत्री साय दुर्ग जिले को ₹218.48 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात, सड़क, सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगी नई गति 23 विकास कार्यों का भूमिपूजन, आईटीआई दुर्ग के उन्नयन कार्य का लोकार्पण रायपुर  छत्तीसगढ़ की लाखों माताओं-बहनों के आर्थिक स्वावलंबन, आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को मजबूत कर रही महतारी वंदन योजना ने आज एक और महत्वपूर्ण पड़ाव पूरा किया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दुर्ग जिले में आयोजित कार्यक्रम में योजना की 32वीं किस्त जारी करते हुए प्रदेश की 67 लाख 38 हजार 217 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से 632 करोड़ 40 लाख रुपये से अधिक की राशि अंतरित की। इसके साथ ही महतारी वंदन योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को अब तक दी गई आर्थिक सहायता की राशि 20708 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस अवसर पर कहा कि मातृशक्ति का सम्मान और उनका आर्थिक सशक्तीकरण हमारी सरकार के लिए केवल एक योजना या कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुशासन की प्रमुख प्राथमिकता है। हमारा विश्वास है कि जब परिवार की महिला आर्थिक रूप से सशक्त होती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। बच्चों की शिक्षा और पोषण से लेकर परिवार के स्वास्थ्य और भविष्य से जुड़े निर्णयों तक उसकी भागीदारी और मजबूत होती है। इसलिए महतारी वंदन योजना के माध्यम से सरकार माताओं-बहनों के हाथों में आर्थिक सामर्थ्य देकर उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने का आत्मविश्वास दे रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में नारीशक्ति को विकास की धुरी बनाते हुए महिला सशक्तीकरण को नई दिशा दी है। उनके नेतृत्व में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए अनेक ऐतिहासिक पहल हुई हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी इसी भावना के अनुरूप माताओं-बहनों के जीवन में स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना इसी संकल्प का सशक्त उदाहरण है। प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की राशि लाखों महिलाओं के लिए अपनी व्यक्तिगत और पारिवारिक आवश्यकताओं को पूरा करने का भरोसेमंद आर्थिक आधार बनी है। कोई बहन इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई में कर रही है, कोई पोषण और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों में, तो कोई अपनी छोटी-छोटी बचत और आजीविका से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में इसका उपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि महतारी वंदन की राशि केवल बैंक खातों में पहुंचने वाली आर्थिक सहायता नहीं है। यह माताओं-बहनों के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वावलंबन को नई शक्ति देने वाली राशि है। हमारी सरकार का प्रयास है कि प्रदेश की माताएं-बहनें न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हों, बल्कि परिवार और समाज के निर्णयों में उनकी भागीदारी भी निरंतर बढ़े। हर महीने सीधे माताओं-बहनों के खाते में पहुंच रहा आर्थिक संबल प्रदेश में 1 मार्च 2024 से प्रभावी महतारी वंदन योजना के अंतर्गत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना की शुरुआत से सितंबर 2026 तक 31 किस्तों में महिलाओं को 20075 करोड़ 76 लाख रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी थी। मुख्यमंत्री साय द्वारा आज जारी 32वीं किस्त में प्रदेश की 67 लाख 38 हजार 217 पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 632 करोड़ 40 लाख 4 हजार 250 रुपये की राशि अंतरित की गई। इस प्रकार योजना के अंतर्गत माताओं-बहनों को अब तक 20708 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा चुकी है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचने से उन्हें नियमित आर्थिक संबल मिल रहा है। यह व्यवस्था पारदर्शिता के साथ महिलाओं को अपने संसाधनों पर सीधा अधिकार भी प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के जीवन में खुशहाली लाना और उन्हें आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कौशल और आजीविका के क्षेत्र में भी निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि एक महिला सशक्त होती है तो उसका परिवार सशक्त होता है और जब प्रदेश की लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बनती हैं तो पूरा समाज और राज्य विकास की नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। दुर्ग की 3.89 लाख से अधिक माताओं-बहनों को मिले ₹37.19 करोड़ महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त से दुर्ग जिले की 3 लाख 89 हजार 507 पात्र महिलाओं को भी सीधा लाभ मिला। मुख्यमंत्री साय ने जिले की इन माताओं-बहनों के बैंक खातों में 37 करोड़ 19 लाख 10 हजार 250 रुपये की राशि अंतरित की। नियमित रूप से मिलने वाली यह आर्थिक सहायता महिलाओं को घरेलू आवश्यकताओं के साथ स्वयं की जरूरतों को पूरा करने की स्वतंत्रता दे रही है। इससे परिवार की आर्थिक व्यवस्था में महिलाओं की भूमिका और निर्णय क्षमता भी मजबूत हो रही है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि छत्तीसगढ़ की हर माता-बहन आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़े। उनके सपनों और आकांक्षाओं को पूरा करने में सरकार सहभागी बने। महिला सशक्तीकरण हमारे लिए केवल आर्थिक सहायता तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि उनके जीवन में सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने का व्यापक संकल्प है। मातृशक्ति के सशक्तीकरण के साथ दुर्ग के विकास को ₹218.48 करोड़ की नई गति कार्यक्रम में एक ओर प्रदेश की लाखों माताओं-बहनों को महतारी वंदन योजना के माध्यम से आर्थिक संबल मिला, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री साय ने दुर्ग जिले के समग्र विकास के लिए 218 करोड़ 48 लाख 29 हजार रुपये की लागत के विकास कार्यों की सौगात दी। … Read more

RPG ग्रुप की MP में निवेश पर नजर, जबलपुर-रतलाम-सागर में टायर निर्माण और उज्जैन में IT प्रोजेक्ट पर चर्चा

 भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मुंबई के होटल द सेंट रेजिस में आयोजित 'मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद' कार्यक्रम में कई बड़े समूहों से चर्चा की। उन्होंने वन टू वन चर्चा भी। इस मुलाकात के दौरान आरपीजी समूह के चेयरमैन हर्ष गोयनका और वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से निवेश पर चर्चा हुई। हर्ष गोयनका ने मध्यप्रदेश के जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। वहीं संदीप गर्ग के साथ पाइप निर्माण, टेक्सटाइल और अधोसंरचना पर निवेश की बातें हुईं। मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं पर संवाद' कार्यक्रम को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गुरुवार को आरपीजी समूह के अध्यक्ष हर्ष गोयनका से मुलाकात की। मुंबई में हुई बैठक में समूह की ओर से प्रदेश में विद्युत पारेषण, टायर निर्माण और आईटी क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की गई। इस दौरान जबलपुर, रतलाम, सागर और उज्जैन को संभावित निवेश स्थलों के तौर पर चर्चा में रखा गया। जबलपुर में ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट की संभावना आरपीजी समूह ने जबलपुर में विद्युत पारेषण क्षेत्र में निवेश करने में रुचि दिखाई। बैठक में प्रदेश की औद्योगिक सुविधाओं, भौगोलिक स्थिति और उपलब्ध कार्यबल के साथ निवेश के लिए राज्य की नीतियों पर भी चर्चा हुई। बैठक के दौरान हर्ष गोयनका ने जबलपुर में निवेश कर विद्युत पारेषण क्षेत्र में कार्य करने की इच्छा व्यक्त की। चर्चा में मध्यप्रदेश की औद्योगिक अवसंरचना, भौगोलिक स्थिति, कुशल कार्यबल और राज्य सरकार की निवेश अनुकूल नीतियों का लाभ लेकर नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया। आरपीजी समूह ने मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति और कच्चे माल की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए राज्य में टायर निर्माण इकाई स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा की। इसके लिए रतलाम, सागर और जबलपुर संभावित निवेश स्थलों के रूप में चर्चा में आए। इन स्थानों पर उपलब्ध औद्योगिक सुविधाओं और अन्य आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद आगे की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में निवेश को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई। आरपीजी समूह की टीम ने संभावित निवेश स्थलों का दौरा कर आवश्यक सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करने की इच्छा व्यक्त की। इस क्रम में उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क में उपलब्ध प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं के उपयोग की संभावना पर भी चर्चा हुई। इससे समूह को तैयार बुनियादी ढांचे के माध्यम से आईटी क्षेत्र में अपनी गतिविधियां शुरू करने का अवसर मिल सकता है। तीन शहरों में टायर प्लांट पर विचार टायर निर्माण इकाई के लिए रतलाम, सागर और जबलपुर के विकल्पों पर चर्चा हुई। समूह इन स्थानों पर औद्योगिक सुविधाओं, कच्चे माल की उपलब्धता और अन्य जरूरी संसाधनों का आकलन कर सकता है। इसके बाद संभावित परियोजना को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी।  मध्यप्रदेश से पुराना जुड़ाव आरपीजी समूह अवसंरचना, मोबिलिटी, टायर, सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऊर्जा समाधान और उभरती प्रौद्योगिकियों सहित विविध क्षेत्रों में कार्यरत प्रमुख भारतीय औद्योगिक समूह है। इसके प्रमुख व्यवसायों में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह की वैश्विक उपस्थिति छह महाद्वीपों के 135 से अधिक देशों में है। समूह का मध्यप्रदेश से लंबे समय से जुड़ाव रहा है। वर्ष 1951 से आरपीजी ट्रांसमिशन लिमिटेड के माध्यम से समूह की राज्य में उपस्थिति रही है। टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क में वेलस्पन समूह ने दिखाई रुचि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वेलस्पन एंटरप्राइजेज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक संदीप गर्ग से पाइप निर्माण, टेक्निकल टेक्सटाइल और अधोसंरचना क्षेत्र में समूह की निवेश योजनाओं तथा नई परियोजनाओं में सहभागिता की संभावनाओं पर चर्चा की। वेलस्पन समूह ने मिल की भूमि पर टेक्निकल टेक्सटाइल पार्क विकसित करने में निवेश की रुचि दिखाई। समूह ने प्रस्तावित पार्क में एंकर यूनिट स्थापित करने की इच्छा भी व्यक्त की। इस संबंध में वेलस्पन समूह स्थल का निरीक्षण करने के लिए अपनी टीम भेजेगा। एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. यादव और गर्ग के बीच वेलस्पन कॉर्प द्वारा एमएस लाइन पाइप क्षेत्र में ₹150 करोड़ के निवेश पर चर्चा हुई। प्रदेश में पाइप निर्माण क्षेत्र में समूह की गतिविधियों और निवेश योजनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में सिंटेक्स के ₹700 करोड़ के प्रगतिरत निवेश पर भी चर्चा की गई। समूह की रायसेन और देवास में उपस्थिति के संदर्भ में पाइप निर्माण तथा टेक्सटाइल क्षेत्र की गतिविधियों पर संवाद हुआ। उज्जैन के आईटी पार्क पर नजर आईटी क्षेत्र में निवेश के लिए उज्जैन के आईटी बिल्ट-अप पार्क की सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। समूह की टीम संभावित स्थानों का दौरा कर वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और व्यावसायिक संभावनाओं का आकलन करेगी। प्लग-एंड-प्ले सुविधा के कारण तैयार इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर आईटी गतिविधियां शुरू करने का विकल्प भी बैठक में सामने आया। बैठक में संभावित परियोजनाओं के लिए जमीन, जरूरी मंजूरियों और निवेशकों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी चर्चा हुई। सरकार की एकल-खिड़की व्यवस्था के जरिए परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सहयोग देने की बात कही गई। आरपीजी समूह के प्रमुख कारोबार में केईसी इंटरनेशनल, सिएट और जेनसार टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। समूह का मध्यप्रदेश से भी पुराना कारोबारी जुड़ाव है। केईसी इंटरनेशनल ने प्रदेश में विद्युत पारेषण से जुड़ी परियोजनाओं में काम किया है। अब समूह की ओर से नए क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं तलाशने से प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ने की उम्मीद है।  

पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को बड़ी राहत, हाईकोर्ट ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र मामले में आरोप किए खारिज

गुना  मध्य प्रदेश में गुना से पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का आरोप लगा था. जिस पर हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच में सुनवाई चल रही थी. सालों से चल रहे इस मामले में हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पूर्व विधायक राजेंद्र सलूजा को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया है. कोर्ट में यह साबित नहीं हो पाया है कि पूर्व विधायक ने कूटरचित दस्तावेज बनवाए थे।  राजेंद्र सिंह सलूजा पर फर्जी जाति प्रमाण का आरोप बता दे की राजेंद्र सिंह सलूजा द्वारा गुना विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनकी जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी. जिसमें कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि सलूजा सामान्य वर्ग से आते हैं, उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया है. जांच के बाद 2011 को उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था. पत्रकार कोमल प्रसाद शाक्य ने कोर्ट में एफआईआर के लिए प्राइवेट इस्तगासा लगाया था. (जब पुलिस कोई एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में एक निजी शिकायत दर्ज कर सकते हैं. जिसे कानून की भाषा में इस्तगासा कहा जाता है।  ग्वालियर हाईकोर्ट ने आरोपों से किया बरी उस पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने राजेंद्र सिंह सलूजा, उनके पिता अमरीक सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह पर आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 120B के तहत मामला संज्ञान में लिया था. इसमें निचली अदालत से अग्रिम जमानत हो गई थी. इसके बाद कोमल प्रसाद शाक्य सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. सुप्रीम कोर्ट ने साल 2025 में आदेश दिया था कि हाईकोर्ट एक साल में इस मामले में फैसला ले. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई. जहां बुधवार को कोर्ट ने मामले में चारों आरोपियों को बरी कर दिया है।  सालों चला कोर्ट में केस, राजेंद्र सलूजा ने जताई खुशी राजेंद्र सिंह सलूजा ने जाति प्रमाण पत्र रद्द होने के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. 2012 में याचिका कोर्ट द्वारा खारिज कर दी गई थी. इसके बाद रिव्यू पिटीशन भी 2013 में खारिज हो गई थी. हालांकि वह पहले ही 5 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे. मामले में ईटीवी भारत से फोन पर चर्चा में पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा ने बताया कि "सब टेकरी सरकार की कृपा और आशीर्वाद है. मैं न्यायालय के आदेशों का सम्मान करता हूं। यह सब जनता का आशीर्वाद है. टेकरी सरकार ने आज तक मेरे को एक कांटा भी नहीं लगने दिया. गुना जिले की जनता का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं. जो मेरे बुरे समय भी मेरे साथ खड़ी रही. बता दें पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा गुना के प्रसिद्ध हनुमान टेकरी मंदिर बालाजी के परम भक्त माने जाते हैं। 

योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और तकनीक पर दिया जोर

योगी सरकार ने 17 हजार करोड़ से बदली यूपी की जेलों की सूरत  योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और तकनीक पर दिया जोर पिछले नौ वर्षों में जेल विभाग के बजट में 215 फीसदी का इजाफा  वर्ष 2017-18 में 913 करोड़ से बढ़कर 2026-27 में 2,877 करोड़ हुआ बजट लखनऊ योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की जेल व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और बेहतर सुविधाओं से लैस करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये हैं। इस दौरान जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिकीकरण और नई तकनीक पर विशेष जोर दिया गया। इसके लिए योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में 17 हजार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की। इसमें सबसे अधिक धनराशि जेलों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च की गयी।  जेल विभाग के बजट में 215 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी डीजी, कारागार एवं सुधार सेवाएं पीसी मीना ने बताया कि योगी सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही जेलों की व्यवस्थाओं को भी समय के अनुरूप बनाने पर जोर दिया है। योगी सरकार के प्रयासों से प्रदेश की जेल व्यवस्था में एक ओर जहां क्षमता विस्तार हो रहा है, वहीं दूसरी ओर आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक के जरिए सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले साढ़े नौ वर्षों में जेल विभाग के लिए बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में जेल विभाग के लिए कुल 913.07 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। इसके मुकाबले वित्तीय वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 2,877.58 करोड़ रुपये हो गया। इस अवधि में जेल विभाग के बजट में करीब 215 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच जेल विभाग के लिए कुल 5,494.41 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया जबकि वर्ष 2022-23 से 2026-27 तक यह राशि बढ़कर 11,913.53 करोड़ रुपये हो गई। यह बढ़ोतरी योगी सरकार की ओर से जेलों के विकास और आधुनिकीकरण को दी जा रही प्राथमिकता को दर्शाती है। जेलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर डीजी ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में नई जेलों के निर्माण के साथ ही बंदी क्षमता बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। अमेठी में 176.12 करोड़, महोबा में 203.42 करोड़, हाथरस में 184.94 करोड़, कुशीनगर में 228.31 करोड़, जौनपुर में 179.79 करोड़, और हापुड़ में 190.08 करोड़ की लागत से जिला कारागार का निर्माण किया जा रहा है। नई जेलों के निर्माण के साथ ही प्रस्तावित कारागारों के लिए भूमि की खरीद की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। संभल में प्रस्तावित जेल के लिए शासन की ओर से 24.56 करोड़, शामली में 96.20 करोड़, बलिया में 24.12 करोड़, सहारनपुर में 50.87 करोड़, अमरोहा में 32.28 करोड़ और चंदौली में 34.27 करोड़ रुपये भूमि के लिए स्वीकृत किए गये हैं।

बेअंत सिंह हत्याकांड: राजोआना की फांसी की सजा उम्रकैद में बदलने का केंद्र ने किया विरोध

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में मौत की सजा पाए दोषी बलवंत सिंह राजोआना की उस याचिका का विरोध किया है जिसमें उन्होंने अपनी सजा को कम करने की मांग की है।30 से अधिक वर्षों से हिरासत में रह रहे राजोआना ने राष्ट्रपति के समक्ष 2012 से लंबित दया याचिका पर निर्णय में देरी के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया, “हमें उनकी मांगों पर आपत्ति है। राज्य [पंजाब] में मौजूदा स्थिति को देखते हुए, कोई भी निर्णय लेना उचित नहीं होगा।” केंद्र सरकार द्वारा याचिका का विरोध किए जाने के मद्देनजर, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और अपारेश कुमार सिंह सहित पीठ ने कहा कि वह मामले की सुनवाई गुण-दोष के आधार पर करेगी।"चूंकि अब वे अपनी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने पर जोर दे रहे हैं, जिसका आप विरोध कर रहे हैं, इसलिए हम मामले की योग्यता के आधार पर सुनवाई करेंगे," पीठ ने कहा।श्री नटराज द्वारा मामले की तैयारी के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने मामले की सुनवाई 28 अक्टूबर को तय की। बब्बर खालसा के उग्रवादी राजोआना को तत्कालीन पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था। बेअंत सिंह की हत्या 31 अगस्त, 1995 को चंडीगढ़ में पंजाब और हरियाणा सिविल सचिवालय के बाहर एक आत्मघाती बम विस्फोट में हुई थी। इस विस्फोट में हमलावर दिलावर सिंह और 17 अन्य लोग भी मारे गए थे। एक विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में रजोआना को मृत्युदंड सुनाया था, जिसे पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने 2010 में बरकरार रखा था। उनकी फांसी 31 मार्च, 2012 को तय की गई थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा उनकी ओर से दया याचिका प्रस्तुत करने के बाद इसे स्थगित कर दिया गया था। 14 साल से राष्ट्रपति के पास लंबित है दया याचिका राजोआना की याचिका का मुख्य आधार उसकी दया याचिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होना है। राजोआना की ओर से दलील दी गई है कि उसकी दया याचिका वर्ष 2012 से राष्ट्रपति के पास लंबित है। 14 साल से अधिक समय तक फांसी की सजा के अनिश्चित भविष्य में रहने से उसे मानसिक पीड़ा और असहनीय तनाव का सामना करना पड़ा है। याचिका में कहा गया है कि दया याचिका पर फैसला लेने में इतनी लंबी देरी संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले जीवन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा है। राजोआना के वकील की ओर से सुप्रीम कोर्ट के उन पूर्व फैसलों का भी हवाला दिया जाएगा, जिनमें दया याचिका पर अत्यधिक देरी को मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के आधार के रूप में स्वीकार किया गया है। 23 सितंबर को वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि राजोआना अब मुख्य रूप से मृत्युदंड को उम्रकैद में बदलने के मुद्दे पर जोर दे रहा है। 31 अगस्त 1995 को हुआ था बम विस्फोट बलवंत सिंह राजोआना को 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर हुए आत्मघाती बम विस्फोट मामले में दोषी ठहराया गया था। इस विस्फोट में तत्कालीन पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह और 16 अन्य लोगों की मौत हुई थी। जांच में राजोआना को मामले में बैकअप बम हमलावर बताया गया था। विशेष अदालत ने जुलाई 2007 में राजोआना को मृत्युदंड की सजा सुनाई थी। इसके बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने वर्ष 2010 में उसकी सजा को बरकरार रखा। राजोआना को 31 मार्च 2012 को फांसी दी जानी थी, लेकिन शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से उसकी ओर से दया याचिका दाखिल किए जाने के बाद फांसी पर रोक लगा दी गई। इसके बाद से उसकी दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है। 2019 में केंद्र ने रखा था सजा कम करने का प्रस्ताव राजोआना की सजा को लेकर वर्ष 2019 में केंद्र सरकार ने भी पहल की थी। गृह मंत्रालय ने गुरु नानक देव जी की 550वीं जयंती के अवसर पर राजोआना की मृत्युदंड की सजा को उम्रकैद में बदलने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि यह प्रस्ताव औपचारिक रूप से लागू नहीं हो सका। इसके बाद राजोआना ने वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और केंद्र के प्रस्ताव को लागू करने के साथ-साथ उसकी दया याचिका पर फैसला करने की मांग की। इस दौरान केंद्र ने अदालत को बताया था कि मामले में फैसला टाल दिया गया है। दया याचिका पर लंबे समय से फैसला नहीं होने के कारण यह मामला कई बार सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है। पंजाब के मौजूदा माहौल का दिया हवाला इस बार केंद्र ने राजोआना की सजा कम करने का स्पष्ट रूप से विरोध किया है। केंद्र का ताजा रुख ऐसे समय आया है जब पंजाब में राजनीतिक और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे संवेदनशील बने हुए हैं। हालांकि, केंद्र ने अदालत के समक्ष मौजूदा परिस्थितियों का हवाला देते हुए सजा कम करने को अनुकूल नहीं बताया है। अब सुप्रीम कोर्ट 28 अक्टूबर को केंद्र के विरोध और राजोआना की ओर से सजा में देरी को आधार बनाकर दायर याचिका पर विस्तार से सुनवाई करेगा।  

MP Travel Mart से बढ़ेगा पर्यटन कारोबार, मध्यप्रदेश की आतिथ्य अर्थव्यवस्था को मिलेगी ग्लोबल पहचान

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से प्रदेश की आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक पहचान: मुख्य सचिव बर्णवाल मुख्य सचिव बर्णवाल और केंद्रीय पर्यटन सचिव कुमार ने ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट’ में एग्जिबिशन का किया शुभारंभ टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलियर्स, आर्ट एंड क्राफ्ट, टेबल स्पेस और ग्रामीण पर्यटन है एग्जिबिशन का मुख्य आकर्षण मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से संवाद कर बढ़ाया उत्साह 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगे, पर्यटन ग्राम पंचवटी में दिखी ग्रामीण होम-स्टे की सुंदरता भोपाल मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और केंद्रीय सचिव पर्यटन मंत्रालय भुवनेश कुमार ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर मे ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026’ (सप्तम संस्करण) के दूसरे दिन एग्जिबिशन का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का निरंतर विकास हो रहा है और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल सके। मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट में लगाई गई यह प्रदर्शनी टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों व होम-स्टे संचालकों जैसे स्टेकहोल्डर्स को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एग्जिबिशन का अवलोकन कर इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजिटल पहल की भी जानकारी प्राप्त की।  मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से किया संवाद मुख्य सचिव बर्णवाल ने प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए देश-विदेश से आए ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने हितधारकों से उनके व्यावसायिक पैकेजेस, आगामी योजनाओं और मध्यप्रदेश में पर्यटन विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र के प्रतिनिधि प्रदेश के पर्यटन ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, वन्यजीव विविधता और अनूठे ग्रामीण पर्यटन अनुभवों को वैश्विक पटल पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM 2026) में इस बार 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगाए गए हैं, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा मंच साबित हो रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को और गति देना है।  मध्यप्रदेश के पवेलियन में दिखी पर्यटन की खास झलक मध्य प्रदेश के पवेलियन में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुंदरता को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पवेलियन में लगाई गई बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन के माध्यम से पर्यटकों और आगंतुकों को यहाँ के खूबसूरत ऐतिहासिक किलों, वन्यजीव अभयारण्यों और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत अनुभव कराया जा रहा हैं। इसके साथ ही, अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन्टरैक्टिव कियोस्क (Interactive Kiosks) के जरिए आगंतुक अपनी पसंद के अनुसार मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पूरी जानकारी खुद देख और समझ पा रहे हैं, जिससे यह पूरा अनुभव बेहद आधुनिक और सुगम बन गया है। पर्यटन ग्राम पंचवटी का किया अवलोकन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटकों को अनूठे और वास्तविक ग्रामीण जीवन का अनुभव कराया जा रहा है। इस प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव को जीवंत रूप देने के लिए मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट परिसर में एक विशेष प्रतिकृति पर्यटन ग्राम पंचवटी  तैयार की गई है। इस जीवंत प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए होम-स्टे का अनुभव, स्टारगेजिंग, बैलगाड़ी की सवारी, साइकलिंग, जनजातीय लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियाँ, तीर-कमान चलाने की कला, तथा विभिन्न हस्तकलाओं की प्रदर्शनी जैसी आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, इस अनूठे स्थल पर नेशनल पार्क की झलक, प्राकृतिक झरने, गोंड पेंटिंग, तथा जनजातीय ग्रामीणों द्वारा अपनी जीवनशैली और कहानियों का सजीव चित्रांकन व प्रस्तुतिकरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है।  मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए आर्ट एंड क्राफ्ट के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉल्स पर मध्य प्रदेश की अनूठी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा (हैंडलूम) की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है—इनमें बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, भैरवा क्राफ्ट और बाटिक प्रिंट प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये स्टॉल न केवल राज्य की लोक कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों की कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक शानदार जरिया भी हैं। इस अवसर पर सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी., मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के प्रबंध संचालक दिलीप कुमार यादव, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, फिक्की मध्यप्रदेश के चेयरमैन महेंद्र प्रताप सिंह सहित संबंधित अधिकारी सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।