samacharsecretary.com

समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर   मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज सक्ती जिला कार्यालय में आयोजित मेधावी विद्यार्थी सम्मान समारोह में राज्य एवं जिला स्तर पर बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं तथा उन्हें जीवन में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री  साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद करते हुए उनके भविष्य के लक्ष्य, करियर की योजनाओं और रुचियों की जानकारी ली। विद्यार्थियों ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, चार्टर्ड अकाउंटेंट, डॉक्टर सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाने की इच्छा व्यक्त की। मुख्यमंत्री ने उनके आत्मविश्वास और ऊँचे सपनों की सराहना करते हुए कहा कि समर्पण, अनुशासन, निरंतर अध्ययन और कठिन परिश्रम ही सफलता की वास्तविक कुंजी हैं। उन्होंने कहा कि जो विद्यार्थी बड़े लक्ष्य निर्धारित करते हैं और पूरी निष्ठा से उन्हें प्राप्त करने का प्रयास करते हैं, सफलता स्वयं उनके कदम चूमती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमारा प्रयास है कि छत्तीसगढ़ का प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़े और राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों, सामाजिक संवेदनशीलता और राष्ट्रसेवा की भावना को भी अपने जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज सम्मानित हुए विद्यार्थी केवल अपने परिवार का ही नहीं, बल्कि पूरे जिले और प्रदेश का गौरव हैं। उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बनेगी और उत्कृष्टता की नई संस्कृति को आगे बढ़ाएगी। इस अवसर पर प्रभारी मंत्री  गुरु खुशवंत साहब, सांसद मती कमलेश जांगड़े सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कलेक्टर  अमृत विकास तोपनो, पुलिस अधीक्षक  प्रफुल्ल ठाकुर सहित अन्य अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

मां नर्मदा के जल को निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए नमन मिशन तैयार, 2026 का क्रियान्वयन रोड मैप भी तैयार

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। यह आबादी नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर ही निर्भर है। नर्मदा हमारी धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे हर तरह से निर्मल और अविरल बनाए रख कर नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न आयोजन किए जायें। नर्मदा और इसकी सहायक नदियों सहित पूरे प्रदेश में नदियों के संरक्षण के लिए समाज को विशेषकर युवाओं को जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की बैठक में इस नदी क्षेत्र के विकास के निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा के विकास से जुड़ना एक पवित्र काम है। सभी विभाग के अधिकारी पूरे समर्पण से यह काम करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूर्णत: अतिक्रमण मुक्त कर पथिकों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाये और परिक्रमा मार्ग पर संकेतक (सूचना पट्टिकाएं) भी लगाए जाए। नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर जहां मंदिर हैं वहां श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र भी स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ कराने की व्यवस्था भी कराएगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्मदा समग्र से समन्वय कर नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सभी आश्रमों की सूचियां तैयार कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देशित किया कि वे सामूहिक प्रयास कर किसानों को घाटी क्षेत्र में नकद फसलों की पैदावार लेने के लिए प्रेरित करें। बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि नर्मदा नदी के सीमावर्ती प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर आयोजन किए जाएंगे। माँ नर्मदा की भव्य आरती, नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाएंगे। बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि माँ नर्मदा के जल को सदैव निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए विभाग द्वारा 'नमन मिशन' तैयार किया गया है। यह मिशन मां नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्राधिकृत होगा। मुख्यमंत्री इस नमन मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिशन की साधारण सभा के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव इस मिशन के सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मिशन के सह-सचिव होंगे। मिशन को क्रियान्वित करने के लिए इस साल 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है। एसीएस श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पहले से विद्यमान 3 समितियों (मंत्रिमण्डल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति) का भी सहयोग लिया जाएगा। मिशन के संचालन में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय विकास, वन, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, वित्त, पर्यटन, विधि, उद्यानिकी, मत्स्य, राजस्व, जनजातीय कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, धर्मस्व, योजना एवं आर्थिकी सांख्यिकी एवं खनिज संसाधन विभाग सदस्य के रूप में तथा 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे। इस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राज्य अनुदान की व्यवस्था का प्रस्ताव है। अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने बताया कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए 32 लाख रुपये का योजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी क्षेत्र में करीब 415 हैक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग 2.70 लाख पौधे लगायेगा। अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नर्मदा घाटों को निर्मल बनाये रखने की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा कोष पोर्टल भी बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों के सीएमओ को नर्मदा क्षेत्र के विकास के लिए नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 एसटीपी तैयार किए जा रहे है। यह काम दिसम्बर 2027 तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के विकास के लिए यहां स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) तैयार की जाएगी। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि महेश्वर में 18 होमस्टे तैयार किए है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 13 गावों में 79 होमस्टे तैयार किए गये हैं। बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, खनिज साधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, योजना आर्थिकी सांख्यिकी, एवं अन्य विभागों ने भी नर्मदा घाटी क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।  

हसदेव नदी पर पुल, बिजली विभाग का सब डिवीजन कार्यालय और सर्वसुविधायुक्त मंगल भवन की घोषणा

रायपुर स्थानीय स्वशासन लोकतंत्र की सबसे सशक्त कड़ी है और नगर पंचायतें केवल प्रशासनिक इकाइयाँ नहीं, बल्कि नागरिकों की आकांक्षाओं को धरातल पर उतारने का प्रभावी माध्यम हैं। नवगठित नगर पंचायत बम्हनीडीह के प्रथम जनप्रतिनिधियों के कंधों पर केवल एक नगर के विकास की नहीं, बल्कि एक नई कार्यसंस्कृति और जनविश्वास की नींव रखने की जिम्मेदारी है।मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में नगर पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं पार्षदों के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष  रमेश कुमार डडसेना एवं सभी पार्षदों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जनता ने जिस विश्वास के साथ उन्हें दायित्व सौंपा है, उसका प्रतिफल पारदर्शी प्रशासन, संवेदनशील कार्यशैली और विकास के रूप में दिखाई देना चाहिए। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बम्हनीडीह के विकास को नई गति देने वाली तीन महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए दहिदा-बम्हनीडीह के बीच हसदेव नदी पर पुल निर्माण, बिजली विभाग का सब डिवीजन कार्यालय तथा सर्वसुविधायुक्त मंगल भवन के निर्माण की घोषणा की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल आधारभूत संरचनाओं का विस्तार करना नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधासंपन्न बनाना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में विकास को नई गति देते हुए हर वर्ग के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के माध्यम से लाखों परिवारों को पक्के घर, किसानों को उनकी उपज का सम्मानजनक मूल्य, महिलाओं को महतारी वंदन योजना के जरिए आर्थिक संबल तथा युवाओं के लिए रोजगार और अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का संकल्प है कि विकास का लाभ बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण केवल बड़े शहरों के विकास से नहीं, बल्कि बम्हनीडीह जैसे उभरते नगरों को सशक्त बनाने से होगा। राज्य सरकार ऐसे सभी नगरीय क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, बेहतर नागरिक सेवाओं और सुनियोजित विकास के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बम्हनीडीह नगर पंचायत जनभागीदारी, सुशासन और विकास का एक आदर्श मॉडल बनकर उभरेगी तथा आने वाले वर्षों में क्षेत्र की नई पहचान बनेगी। समारोह में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, सांसद मती कमलेश जांगड़े, विधायक  किरण सिंह देव ने भी जनता को संबोधित किया।  इस अवसर पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष  अनुराग सिंहदेव, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष  सौरभ सिंह,  नारायण चंदेल सहित अन्य जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

CM योगी शुक्रवार को करेंगे उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का शुभारंभ, किसानों और बागवानों को मिलेगा बड़ा मंच

सीएम योगी शुक्रवार को उत्तर प्रदेश आम महोत्सव का करेंगे शुभारंभ  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होगा आयोजन, 3 से 5 जुलाई तक चलेगा 04 जुलाई को 'जन भवन' में किया जाएगा आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन: उद्यान मंत्री महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियां की जाएंगी प्रदर्शित यूपी से आम और पल्प के निर्यात में भारी उछाल, वर्ष : 2025-26 में ₹12.67 करोड़ मूल्य के 3563 मीट्रिक टन आम का हुआ रिकॉर्ड निर्यात  लखनऊ, 'उत्तर प्रदेश आम महोत्सव -2026' का आयोजन 3 से 5 जुलाई तक इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर में होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को त्रिदिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। महोत्सव में 07 श्रेणियों और 56 वर्गों में लगभग 800 से अधिक आम की प्रजातियों का प्रदर्शन किया जाएगा। यह जानकारी उद्यान,कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि 4 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  मेजबान उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के प्रतिनिधि व निर्यातक लेंगे हिस्सा उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में मेजबान उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, उत्तराखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र के उ‌द्यान विभाग के प्रतिनिधि, प्रगतिशील बागवान एवं निर्यातक हिस्सा लेंगे। उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में प्रदर्शन के लिए रखे गए आम के पौधे बिक्री के लिए भी उपलब्ध रहेंगे। उन्होंने अपील की कि महोत्सव में आए नागरिक अपने साथ कम से कम एक पौधा ले जाकर अवश्य रोपित करें।  बच्चों के लिए होंगी प्रतियोगिताएं उद्यान मंत्री ने बताया कि महोत्सव में बच्चों के लिए आम खाने की प्रतियोगिता और आम से बने व्यंजनों (पकवानों) की प्रतियोगिता मुख्य आकर्षण होगी। साथ ही बागवानों के लिए उन्नत तकनीक, तुड़ाई उपरान्त प्रबन्धन, कीट-व्याधि नियंत्रण और विपणन पर विशेष कार्यशालाएं आयोजित होंगी। बागवानों को सीधा बाजार देने के लिए पहली बार 04 जुलाई को 'जन भवन', लखनऊ में आम क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।  आम उत्पादन में उत्तर प्रदेश शीर्ष पर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश आम उत्पादन के क्षेत्र में देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश के 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगभग 61.96 लाख मीट्रिक टन आम का उत्पादन होता है, जो पूरे देश के कुल आम उत्पादन का लगभग 26.22 प्रतिशत है। उत्तर प्रदेश के दशहरी, लंगड़ा, चौसा, गौरजीत, लखनऊ सफेदा, रटौल और आम्रपाली जैसी प्रजातियां दुनिया भर में विख्यात हैं। इनका लखनऊ, सहारनपुर, मेरठ, मुरादाबाद, वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज मण्डलों में बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। विदेशों में भी निर्यात किया जाता है उप्र का आम एपीडा (APEDA) के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि प्रदेश से आम के निर्यात में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। वर्ष 2024-25 में जहां ₹2.63 करोड़ मूल्य का 404 मीट्रिक टन आम व पल्प निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर ₹12.67 करोड़ मूल्य का 3,563 मीट्रिक टन हो गया है। उत्तर प्रदेश का आम यूनाइटेड किंगडम (लंदन), यूएई, सऊदी अरब, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर और रूस जैसे विकासशील व विकसित देशों को निर्यात किया जा रहा है। इस वर्ष भी महोत्सव के अवसर पर प्रदेश से अन्य देशों को आम का निर्यात किया जाएगा। कई जनपदों में स्थापित किए गए मैंगो पैक हाउस लखनऊ, सहारनपुर, वाराणसी और अमरोहा में आधुनिक मैंगो पैक हाउस स्थापित किए गए हैं, जहाँ अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल के तहत आम की प्रीप्रोसेसिंग और उपचार किया जा रहा है। जेवर एयरपोर्ट के पास फलों की टेस्टिंग एवं ट्रीटमेंट सेंटर का निर्माण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में औद्यानिक निर्यात को और अधिक रफ्तार मिलेगी। आम को कीटों/रोगों से बचाने, उनका आकार, स्वाद और चमक सुधारने के लिए इस वर्ष विभाग द्वारा किसानों को लगभग 1.50 करोड़ फल बैग वितरित किए गए हैं। अनुत्पादक और पुराने पड़ चुके बागों के कैनोपी प्रबन्धन हेतु प्रति हेक्टेयर इकाई लागत पर 40 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है।

कम पानी और कम अवधि वाली फसलें अपनाने के लिए किसानों को करें प्रेरित

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संभावित अल्प वर्षा की स्थिति को चुनौती नहीं, बल्कि बेहतर योजना, वैज्ञानिक खेती और समयबद्ध तैयारी के अवसर के रूप में लिया जाए। सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराएं, जिससे प्रदेश में कृषि उत्पादन और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में इस वर्ष प्रदेश में संभावित अल्प वर्षा की स्थिति के मद्देनज़र किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सहित अन्य संबंधित विभागों की अब तक की पूर्व तैयारियों की गहन समीक्षा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राथमिकता है कि प्रदेश का प्रत्येक किसान मौसम की चुनौतियों का सामना वैज्ञानिक सोच और उचित तैयारी के साथ करे। समय पर सही निर्णय और विभागों के प्रभावी समन्वय से हम संभावित अल्प वर्षा के प्रभाव को काफी हद तक कम कर सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की खेती के लिए व्यापक स्तर पर जागरूक किया जाए। उन्होंने ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर विशेष बल देते हुए कहा कि ये फसलें कम पानी में भी बेहतर उत्पादन देने के साथ किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई नहीं करने के लिए भी प्रेरित किया जाए। खेतों में पर्याप्त नमी आने के बाद ही बुआई की जाए तथा नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही कम समय में अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुंचाया जाए, जिससे वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार संभावित अल्प वर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभाग पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करें और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि किसानों का हित सर्वोपरि है और उनकी समृद्धि तथा कृषि उत्पादन को बनाए रखने के लिए राज्य सरकार हर आवश्यक कदम उठाएगी। अगले दो वर्षों की तैयारी प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में वैकल्पिक स्रोतों का चिन्हांकन एवं टैंकर व्यवस्था की आकस्मिक योजना तैयार कर अमृत 2.0 के अंतर्गत जल प्रदाय योजनाओं का समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित की जायेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन की ग्रामवार समीक्षा, बंद/अपूर्ण नल-जल योजनाओं की मरम्मत का 90 दिवसीय अभियान चलाया जाएगा। "जलाभिषेक 2.0" अंतर्गत प्रदेश में पुराने तालाबों, बावड़ियों, कुओं एवं अन्य जल संरचनाओं का सर्वे एवं जीर्णोद्धार, वीबीपी रामजी अभिसरण से प्रति विकासखंड न्यूनतम 100 जल संरचनाओं का पुनर्जीवन 2 वर्षों में किया जायेगा। भूजल पुनर्भरण अभियान के तहत सभी विकासखंडों में रिचार्ज शाफ्ट, चेक डैम, स्टॉप डैम एवं खेत-तालाब निर्माण का मिशन मोड कार्यक्रम; "खेत का पानी खेत में, गांव का पानी गांव में" सिद्धांत पर चलाया जाएगा। नहरों की सफाई मरम्मत रबी से पूर्व पूर्ण, टेल-एंड तक पानी पहुंचाने की जवाबदेही तय की जायेगी। कम जल मांग वाली फसलों यथा दलहन, तिलहन, अन्न (मोटे अनाज) प्रोत्साहन एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन, ग्रीष्मकालीन धान/मूंग पर जल उपलब्धता आधारित सलाह, धान क्षेत्रों में सीधी बुवाई एवं वैकल्पिक गीला-सूखा पद्धति एवं प्रत्येक जिले के लिए कंटिन्जेंसी क्रॉप प्लान तैयार किया जा रहा है। जल विद्युत एवं जलाशय प्रबंधन के तहत सभी प्रमुख जलाशयों (इंदिरा सागर, ओंकारेश्वर, बाणसागर, गांधीसागर) के लिए रूल कर्व का कड़ाई से पालन; जल उपयोग की प्राथमिकता दी जाएगी। पहले पेयजल, फिर सिंचाई, फिर विद्युत उत्पादन का स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जा रहा है।     रियल-टाइम मॉनिटरिंग एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली के लिए राज्य स्तरीय जल डैशबोर्ड बनाए जाएंगे।     जन-जागरूकता महाअभियान "जल गंगा संवर्धन" की तर्ज पर जनभागीदारी आधारित सतत् अभियान चलाए जाएंगे।     प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जल संकट आकस्मिक योजना बनाई जाएगी। आरबीसी 6 (4) अंतर्गत क्षति सर्वे के लिये राजस्व, कृषि एवं पंचायत अमले का संयुक्त प्रशिक्षण अभी से पूर्ण; डिजिटल क्रॉप सर्वे एवं सैटेलाइट इमेजरी आधारित क्षति आंकलन प्रणाली का सत्यापन कराया जायेगा, जिससे सर्वे 15 दिवस में पूरा हो सके।     फसल बीमा का कवरेज विस्तार एवं दावा तत्परता से हो, इस संबंध में कार्यवाही की जाएगी। आकस्मिकता की स्थिति से निपटने के लिए राज्य की तैयारियां     राज्य स्तरीय मॉडल आकस्मिक कार्य योजना तैयार कराकर विभागीय पोर्टल पर अपलोड कराई गई हैं।     विभिन्न योजनाओं में फसल प्रदर्शनों, उन्नत फसल किस्मों के बीज वितरण के लक्ष्य जिलों को जारी किये गए हैं।     वर्षा जल संरक्षण के लिये बलराम तालाब अन्तर्गत जिलों को लक्ष्य जारी किये गए ।     सोशल मीडिया का अधिकाधिक उपयोग कर कृषकों को जागरूक करना।     मौसम के पूर्वानुमान, फसलों में मौसम अनुसार किये जाने वाले कार्यों तथा अन्य समसामयिक सलाह कृषकों को उनके मोबाइल संदेश भेजकर उपलब्ध कराई जा रही है।     सभी जिले के कलेक्टर्स को सिंचाई, जल भराव की स्थिति, जीवन रक्षक सिंचाई हेतु विद्युत की उपलब्धता, सूखे की निगरानी व्यवस्था के लिये समस्त विभागों से कार्यवाही की नियमित समीक्षा के लिये निर्देश दिये गए हैं।     26 से 30 जून की अवधि में आयोजित ग्राम सभाओं में आकस्मिक कार्य योजना की चर्चा की गई। बैठक में राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग, किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री  एदल सिंह कंषाना, मत्स्य पालन राज्य मंत्री  नारायण सिंह पंवार, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव  संजय दुबे, अपर मुख्य सचिव  मनीष रस्तोगी, अन्य प्रमुख सचिव, सचिव एवं अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।  

सुरक्षित सुशासन और डेटा संरक्षण के मानकों से सुदृढ़ हुई विभाग की डिजिटल विश्वसनीयता : आयुक्त भोंडवे

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त  संकेत भोंडवे ने कहा कि "नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने आधुनिक तकनीकों और सुदृढ़ साइबर सुरक्षा उपायों के समन्वय से सदैव पारदर्शी, सुरक्षित एवं विश्वसनीय डिजिटल नागरिक सेवाओं को सर्वोपरि प्राथमिकता दी है। साइबर सुरक्षा, जोखिम प्रबंधन और डेटा संरक्षण के क्षेत्र में अपनाए गए प्रभावी एवं कड़े वैश्विक मानकों का ही प्रतिफल है कि आज हमारी डिजिटल प्रणालियों की विश्वसनीयता राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ हुई है। विभाग भविष्य में भी नागरिकों को पूरी तरह सुरक्षित, भरोसेमंद और अत्याधुनिक डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः कटिबद्ध रहेगा।" मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास विभाग के 'ई-नगर पालिका' पोर्टल को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 के अंतर्गत साइबर सुरक्षा श्रेणी में प्रतिष्ठित रजत पुरस्कार (Silver Award) प्राप्त हुआ है। जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार समारोह में यह सम्मान मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा आयुक्त  संकेत भोंडवे को प्रदान किया गया। मध्यप्रदेश को मिला यह राष्ट्रीय सम्मान राज्य की दूरदर्शी नीति और तकनीकी श्रेष्ठता का जीवंत प्रमाण है। मध्यप्रदेश शासन ने न केवल नागरिक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से सुलभ और सुगम बनाया है, बल्कि उन्हें एक अभेद्य सुरक्षा आवरण भी प्रदान किया है। नगरीय निकायों से जुड़े लाखों नागरिकों के संवेदनशील व्यक्तिगत एवं वित्तीय डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना, पारदर्शी प्रशासन को अक्षुण्ण रखना तथा सुरक्षित आईटी अवसंरचना का निर्माण करना पोर्टल की विशेषता रही है। डिजिटल गवर्नेंस और जोखिम प्रबंधन के इन उच्चतम मानकों पर 'ई-नगर पालिका' पोर्टल ने देश के अन्य राज्यों के सम्मुख सुरक्षित डिजिटल सुशासन का एक अनुकरणीय प्रतिमान स्थापित किया है। आयुक्त  भोंडवे ने इस अभूतपूर्व सफलता का श्रेय विभाग की संपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक टीम के सामूहिक प्रयासों को दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी टीम भावना के साथ इस दिशा में और बेहतर प्रयास किए जाएंगे, जिससे मध्यप्रदेश डिजिटल गवर्नेंस के शीर्ष पायदान पर सदैव प्रतिष्ठित रहे।  

हेमंत खंडेलवाल का एक साल बेमिसाल, MP BJP संगठन को मिली नई मजबूती; मुख्यमंत्री ने की प्रशंसा

भोपाल  मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के कार्यकाल का एक वर्ष पूर्ण हो गया है। इस अवसर पर शुभकामनाएं देकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उनके कार्यकाल को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में संगठन को नई मजबूती मिली है और कई महत्वपूर्ण संगठनात्मक कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय जनता पार्टी का वास्तविक आधार उसके समर्पित कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में पिछले एक वर्ष के दौरान संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं, जिनके सकारात्मक परिणाम पूरे प्रदेश में दिखाई दे रहे हैं। संगठन विस्तार और संवाद को मिली नई रफ्तार मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले एक साल के दौरान कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक विस्तार को गति देने और संगठन को आधुनिक स्वरूप प्रदान करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए. नए जिला कार्यालयों के निर्माण, नियमित प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन और सहयोग सेल जैसी पहलों ने संगठन की कार्यक्षमता को बढ़ाने के साथ-साथ सेवा भावना को भी मजबूत किया है. इन प्रयासों से भाजपा की जमीनी पकड़ और अधिक मजबूत हुई है।  ‘भाजपा सिर्फ राजनीतिक दल नहीं, राष्ट्रसेवा का माध्यम’ डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि राष्ट्रसेवा का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने विश्वास जताया कि हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन आने वाले समय में भी नई ऊंचाइयों को हासिल करेगा और प्रदेश में जनसेवा के कार्यों को और अधिक गति मिलेगी. मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उनके सफल एक साल के कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संगठन की ऊर्जा, कार्यकर्ताओं का समर्पण और नेतृत्व की प्रतिबद्धता ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  प्रदेेश संगठन को मजबूत बनाया डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेशभर में कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों के बीच लगातार संवाद स्थापित करने, संगठनात्मक विस्तार को गति देने, नए जिला कार्यालयों के निर्माण, प्रशिक्षण वर्गों के आयोजन तथा सहयोग सेल जैसी पहलों से संगठन की कार्यक्षमता और सेवा भाव को नई मजबूती मिली है। इन प्रयासों ने भाजपा को जमीनी स्तर पर और अधिक सशक्त बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को उनके सफल एक वर्ष के कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन आगे भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सशक्त माध्यम है। संगठन की ऊर्जा और कार्यकर्ताओं का समर्पण ही विकसित मध्यप्रदेश और विकसित भारत के संकल्प को नई गति प्रदान करेगा।

मध्य प्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी पदों पर निकली भर्ती, आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई

मध्यप्रदेश में 2,548 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं के पदों पर होगी भर्ती आवेदन की अंतिम तिथि 13 जुलाई तक भोपाल राज्य सरकार ने महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और जमीनी स्तर पर पोषण प्रबंधन को और अधिक मजबूत करने के उद्देश्य से प्रदेश की विभिन्न बाल विकास परियोजनाओं में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और आंगनवाड़ी सहायिकाओं की बड़े पैमाने पर भर्ती करने का निर्णय लिया है। राज्य के विभिन्न जिलों में कुल 2,548 पदों पर योग्य महिला अभ्यर्थियों की नियुक्तियां की जा रही हैं। स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता भर्ती में स्थानीय पात्रताधारियों को प्राथमिकता मिलेगी। कुल रिक्तियों में से 781 पद आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए और 1,767 पद आंगनवाड़ी सहायिकाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इन पदों पर चयन के लिए पारदर्शिता और स्थानीय प्रतिनिधित्व को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। नियमों के मुताबिक, आवेदिका का उसी राजस्व ग्राम या शहरी वार्ड का निवासी होना अनिवार्य है, जहां का पद रिक्त है। किसी अन्य ग्राम या वार्ड की महिला इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी। इससे स्थानीय महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से मैदानी स्तर पर सेवाओं का कुशल संचालन सुनिश्चित हो सकेगा। ऑनलाइन आवेदन केवल 13 जुलाई तक स्वीकार होंगे भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी रहेगी। इसमें एम.पी. ऑनलाइन के माध्यम से ही आवेदन स्वीकार किए जा रहे हैं। इच्छुक महिला अभ्यर्थी चयन पोर्टल (https://chayan.mponline.gov.in) पर जाकर 1 जुलाई 2026 से अपने आवेदन पत्र ऑनलाइन जमा कर सकती हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है, जबकि भरे गए फॉर्म में किसी भी प्रकार के त्रुटि सुधार के लिए 15 जुलाई 2026 तक का समय दिया जाएगा। विभाग द्वारा स्पष्ट किया है कि केवल पोर्टल पर प्राप्त ऑनलाइन आवेदनों को ही स्वीकार किया जाएगा। किसी भी स्तर के कार्यालय में ऑफलाइन भेजे गए आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। न्यूनतम योग्यता हायर सेकण्डरी, आयु सीमा 18-35 वर्ष तय शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के मापदंडों के अनुसार, दोनों ही पदों के लिए आवेदिकाओं का हायर सेकेंडरी अर्थात 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अन्य राज्यों या अशासकीय बोर्डों की अंकसूचियों को तभी मान्यता दी जाएगी जब वे माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश की समकक्षता सूची में शामिल हों। साथ ही 1 जनवरी 2026 की स्थिति में आवेदिका की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होना आवश्यक है, जिसकी पुष्टि के लिए 10वीं बोर्ड की अंकसूची संलग्न करना अनिवार्य होगा। आवेदन के दौरान सभी आवश्यक प्रमाण-पत्र पीडीएफ प्रारूप में अपलोड करने होंगे, जिसके लिए निर्धारित शुल्क 100 रुपये और 18 प्रतिशत जीएसटी तय किया गया है। रिक्त पदों की जिलेवार स्थिति आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं आंगनवाड़ी सहायिका के रिक्त पदों के अनुसार जिलेवार स्थिति इस प्रकार है। आलीराजपुर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा आंगनवाड़ी सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। इंदौर जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 43 पद रिक्त हैं। खंडवा जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। खरगोन जिले में कार्यकर्ता के 34 एवं सहायिका के 40 पद रिक्त हैं। झाबुआ जिले में कार्यकर्ता के 21 तथा सहायिका के 23 पद रिक्त हैं। धार जिले में कार्यकर्ता के 30 एवं सहायिका के 82 पद रिक्त हैं। बड़वानी जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 44 पद रिक्त हैं। बुरहानपुर जिले में कार्यकर्ता के 7 एवं सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। आगर मालवा जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 6 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। उज्जैन जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 45 पद रिक्त हैं। देवास जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 35 पद रिक्त हैं। नीमच जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 32 पद रिक्त हैं। मंदसौर जिले में कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 25 पद रिक्त हैं। रतलाम जिले में कार्यकर्ता के 31 एवं सहायिका के 62 पद रिक्त हैं। शाजापुर जिले में कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 22 पद रिक्त हैं। अशोकनगर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 5 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। गुना जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। ग्वालियर जिले में कार्यकर्ता के 15 तथा सहायिका के 39 पद रिक्त हैं। दतिया जिले में कार्यकर्ता के 16 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। शिवपुरी जिले में कार्यकर्ता के 23 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। भिंड जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 8 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। मुरैना जिले में कार्यकर्ता के 8 एवं सहायिका के 18 पद रिक्त हैं। श्योपुर जिले में कार्यकर्ता के 16 तथा सहायिका के 37 पद रिक्त हैं। कटनी जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 9 तथा सहायिका के 15 पद रिक्त हैं। छिंदवाड़ा जिले में कार्यकर्ता के 38 एवं सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। जबलपुर जिले में कार्यकर्ता के 12 तथा सहायिका के 38 पद रिक्त हैं। डिंडौरी जिले में कार्यकर्ता के 14 एवं सहायिका के 42 पद रिक्त हैं। नरसिंहपुर जिले में कार्यकर्ता के 18 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। पांढुर्णा जिले में कार्यकर्ता के 5 एवं सहायिका के 10 पद रिक्त हैं। बालाघाट जिले में कार्यकर्ता के 24 तथा सहायिका के 51 पद रिक्त हैं। मंडला जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 26 पद रिक्त हैं। सिवनी जिले में कार्यकर्ता के 20 तथा सहायिका के 48 पद रिक्त हैं। नर्मदापुरम जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 13 तथा सहायिका के 21 पद रिक्त हैं। बैतूल जिले में कार्यकर्ता के 20 एवं सहायिका के 71 पद रिक्त हैं। हरदा जिले में कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 17 पद रिक्त हैं। भोपाल जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 10 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। राजगढ़ जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 70 पद रिक्त हैं। रायसेन जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 29 पद रिक्त हैं। विदिशा जिले में कार्यकर्ता के 19 एवं सहायिका के 73 पद रिक्त हैं। सीहोर जिले में कार्यकर्ता के 14 तथा सहायिका के 28 पद रिक्त हैं। मैहर जिले में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 7 तथा सहायिका के 14 पद रिक्त हैं। मऊगंज जिले में कार्यकर्ता का कोई पद रिक्त नहीं है, जबकि सहायिका के 4 पद रिक्त हैं। रीवा जिले … Read more

2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं, योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से अधिक शौचालय

योगी सरकार आने पर पकड़ी केंद्रीय योजनाओं ने रफ्तार  2017 तक एक भी जिला ओडीएफ नहीं, योगी सरकार ने बनवाए 3.31 करोड़ से अधिक शौचालय खाली सिलेंडरों के दौर से निकलकर अब होली-दिवाली पर मुफ्त रिफिल का तोहफा लखनऊ,   प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद आमजन को सभी केंद्रीय योजनाओं का लाभ मिल रहा है। वर्ष 2017 से पहले ऐसा नहीं था, क्योंकि पिछली सरकारें राजनीतिक कारणों से केंद्रीय योजनाओं को लागू करने में रोड़े अटकाती थीं। इतना ही नहीं, कई योजनाओं के मिलते-जुलते नाम रखकर लोगों को बरगलाने की भी चेष्टा की जाती थी। नतीजा यह कि उत्तर प्रदेश की जनता मोदी सरकार की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रहती थी। लेकिन, जैसे ही 2017 में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, केंद्र सरकार की योजनाओं पर लगे ताले खुल गए। इससे केंद्र व राज्य, दोनों सरकारों की योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचा।          प्रधानमंत्री आवास योजना से गरीबों को मिला सहारा केंद्र सरकार ने देश के हर गरीब को पक्का मकान देने के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की थी। हालांकि प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना को उत्तर प्रदेश में गति देने के बजाय अपनी समाजवादी आवास योजना और लोहिया ग्रामीण आवास योजना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया था। इसके बाद आरोप लगे कि पूर्ववर्ती सरकार ने केंद्र को लाभार्थियों की सूची भेजने और मैचिंग ग्रांट (राज्य का हिस्सा) जारी करने में ढिलाई बरती। स्थिति यह थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2014 से 2017 तक वह सरकार 50 हजार आवास भी नहीं बना पाई। बाद में योगी सरकार आने पर इस कार्य को 'डबल इंजन' की रफ्तार दी गई। योगी सरकार ने 9 वर्षों में 62 लाख से अधिक परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराया है। पीएम फसल बीमा योजना में 6,283 करोड़ से अधिक भुगतान  किसानों को सूखे, बाढ़ या ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए केंद्र ने 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) लॉन्च की थी। इस योजना में राज्य सरकार की ओर से भी प्रीमियम का एक हिस्सा दिया जाना था और राज्य की एजेंसियों को सक्रिय भूमिका निभानी थी। हालांकि 2017 से पहले की सरकार की उदासीनता के कारण करीब 3 प्रतिशत किसानों का ही बीमा हो सका था, जिससे यूपी के किसान केंद्रीय मुआवजे से वंचित रह गए। वहीं उस समय के दौरान भाजपा शासित राज्यों में जहां 60-70 प्रतिशत किसानों को इसका लाभ मिल चुका था। योगी सरकार में इस योजना के तहत पिछले 9 वर्षों में 79 लाख से अधिक कृषकों को 6,283 करोड़ रुपये से अधिक भुगतान किया जा चुका है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत 100 प्रतिशत लक्ष्य 2014 में शुरू हुआ स्वच्छ भारत मिशन पीएम मोदी के सबसे बड़े ड्रीम प्रोजेक्ट्स में एक था, जिसका उद्देश्य देश को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) बनाना था। इस योजना के तहत शौचालयों के निर्माण के लिए केंद्र से फंड जारी होना था, लेकिन इसके लिए राज्य को उपयोगिता प्रमाण पत्र देना था और अपनी हिस्सेदारी तय करनी थी। पूर्ववर्ती सरकार ने इस योजना के प्रचार-प्रसार और क्रियान्वयन में रुचि नहीं दिखाई। वह इस योजना की ब्रांडिंग के खिलाफ थी, क्योंकि वह इसे भाजपा की योजना मानती थे। नतीजा यह हुआ कि 2014-2017 के बीच यूपी में शौचालय निर्माण की गति बेहद धीमी रही और राज्य ओडीएफ रैंकिंग में काफी पीछे छूट गया। मार्च 2017 तक उत्तर प्रदेश का ग्रामीण स्वच्छता दायरा महज 35 प्रतिशत के आस-पास ही पहुंच पाया था। वहीं प्रदेश का एक भी जिला पूरी तरह से खुले में शौच से मुक्त घोषित नहीं हो सका था। दूसरी तरफ वर्ष 2017 के बाद योगी सरकार के आने पर अब तक प्रदेशभर में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के तहत 3.31 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ है। इसके बाद स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत उत्तर प्रदेश 100 प्रतिशत ओडीएफ राज्य घोषित किया गया। वहीं 94 हजार से अधिक गांव ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों के साथ ओडीएफ प्लस घोषित किए गए। यह सब 2017 में लगभग नामुमकिन लग रहा था। उज्जवला योजना में घर-घर पहुंचे गैस सिलेंडर पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान बेहद कम संख्या में महिलाओं को मुफ्त कनेक्शन (सिलेंडर व रेगुलेटर) मिले। इनमें भी लगभग 35-40 प्रतिशत परिवारों ने पहला सिलेंडर खत्म होने के बाद दूसरा सिलेंडर नहीं भरवाया, क्योंकि उस वक्त रिफिलिंग पर राज्य सरकार की तरफ से कोई अतिरिक्त वित्तीय मदद या सब्सिडी टॉप-अप नहीं मिलता था। दूसरी तरफ योगी सरकार और केंद्र सरकार ने मिलकर पिछले 9 वर्षों में प्रदेश की लगभग 1.86 करोड़ से अधिक महिलाओं को मुफ्त एलपीजी कनेक्शन का लाभ दिया। इसके साथ ही होली और दीपावली पर दो सिलिंडर मुफ्त रिफिल किए जा रहे हैं।

सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी प्रदर्शनी : मंत्री सारंग

सहकारी सप्ताह के अंतर्गत राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी का शुभारंभ सहकारिता आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने का प्रभावी माध्यम बनेगी प्रदर्शनी : मंत्री सारंग प्रधानमंत्री मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में मध्यप्रदेश निरंतर अग्रसर भोपाल सहकारिता मंत्रालय, भारत सरकार की स्थापना के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित सहकारी सप्ताह के अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ मर्यादित, भोपाल द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी का शुभारंभ गुरुवार को सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंत्री सारंग ने फीता काटकर प्रदर्शनी का विधिवत उद्घाटन किया तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं, राष्ट्रीय सहकारी संगठनों, शासकीय विभागों, महिला स्व-सहायता समूहों एवं उत्पादक संगठनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शित उत्पादों, नवाचारों एवं सेवाओं की जानकारी प्राप्त कर प्रतिनिधियों से संवाद किया तथा सहकारिता आधारित आर्थिक गतिविधियों को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। मंत्री सारंग ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में विकास, जनकल्याण और रोजगार के नए अवसर सृजित करने के लिए निरंतर नए-नए प्रकल्पों पर कार्य कर रहे हैं। सहकारिता इस विकास यात्रा का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आयाम है। इसी दृष्टि से प्रधानमंत्री मोदी ने देश में पृथक सहकारिता मंत्रालय का गठन किया तथा देश के केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। आज सहकारिता के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि 29 जून से 5 जुलाई तक पूरे मध्यप्रदेश में ‘सहकारी सप्ताह’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से सहकारिता की अवधारणा को जन-जन तक पहुँचाया जा रहा है। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी भी इसी श्रृंखला का महत्वपूर्ण आयोजन है। मंत्री सारंग ने कहा कि यह प्रदर्शनी सहकारिता से जुड़े सभी प्रमुख आयामों की व्यापक झलक प्रस्तुत करती है। इसके माध्यम से प्रदेश में सहकारिता के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, उपलब्धियों, नवाचारों और योजनाओं का प्रभावी प्रदर्शन किया गया है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाएँ नवाचार के माध्यम से जो गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं, उनका प्रदर्शन भी इस प्रदर्शनी में किया जा रहा है। इससे सहकारी संस्थाओं को नए बाजार उपलब्ध होंगे, उत्पादों का प्रचार-प्रसार होगा तथा प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को और अधिक मजबूती मिलेगी। मंत्री सारंग ने कहा कि सहकारिता प्रधानमंत्री मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के संकल्प को साकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों एवं ग्रामीण उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में सहकारी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। सहकारिता के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने सहकारी संस्थाओं से नवाचार, गुणवत्ता, पारदर्शिता एवं जनसहभागिता को प्राथमिकता देते हुए अपने उत्पादों एवं सेवाओं को अधिकाधिक लोगों तक पहुँचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियाँ सहकारी संस्थाओं को विपणन का प्रभावी मंच उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं और उत्पादकों के बीच विश्वास को सुदृढ़ करती हैं तथा नई पीढ़ी को सहकारिता आंदोलन से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनती हैं। मंत्री सारंग ने हस्तशिल्प कारीगरों एवं महिला स्व-सहायता समूहों को प्रोत्साहन स्वरूप सिलाई मशीन सहित विभिन्न टूल किट एवं आवश्यक सामग्री का वितरण किया। साथ ही मध्यप्रदेश राज्य सहकारी संघ परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया। तीन दिवसीय प्रदर्शनी में प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर की सहकारी संस्थाओं, वित्तीय संस्थानों, महिला स्व-सहायता समूहों तथा उत्पादक संगठनों द्वारा कृषि, दुग्ध, बीज, उर्वरक, मत्स्य, वनोपज, बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, महिला सशक्तिकरण, हस्तशिल्प, उद्यमिता विकास, एफपीओ, सौर ऊर्जा तथा ग्रामीण आजीविका से संबंधित उत्पादों एवं सेवाओं का प्रदर्शन किया गया है। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (सांची), मार्कफेड, इफको, कृभको, नेफेड, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक), जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी), नाबार्ड सहित अनेक प्रमुख सहकारी संस्थाओं ने अपने स्टॉल स्थापित किए हैं। कार्यक्रम में प्रबंध संचालक मध्यप्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ अभिजीत अग्रवाल, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बैंक प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता, प्रबंध संचालक महेंद्र दीक्षित, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी बीज उत्पादक संघ सहित विभिन्न विभागों एवं सहकारी संस्थाओं के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएँ, कृषक, उद्यमी तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। राज्य स्तरीय सहकारी प्रदर्शनी 4 जुलाई 2026 तक आम नागरिकों के लिए खुली रहेगी। प्रदर्शनी में सहकारी संस्थाओं द्वारा निर्मित उत्पादों, नवाचारों एवं सेवाओं का प्रदर्शन एवं विक्रय किया जा रहा है। यह आयोजन प्रदेश में सहकारिता आंदोलन को नई गति प्रदान करने तथा “सहकार से समृद्धि” के राष्ट्रीय अभियान को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।