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MP Travel Mart से बढ़ेगा पर्यटन कारोबार, मध्यप्रदेश की आतिथ्य अर्थव्यवस्था को मिलेगी ग्लोबल पहचान

मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट से प्रदेश की आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को मिलेगी वैश्विक पहचान: मुख्य सचिव बर्णवाल मुख्य सचिव बर्णवाल और केंद्रीय पर्यटन सचिव कुमार ने ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट’ में एग्जिबिशन का किया शुभारंभ टूर ऑपरेटर्स, हॉस्पिटेलियर्स, आर्ट एंड क्राफ्ट, टेबल स्पेस और ग्रामीण पर्यटन है एग्जिबिशन का मुख्य आकर्षण मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से संवाद कर बढ़ाया उत्साह 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगे, पर्यटन ग्राम पंचवटी में दिखी ग्रामीण होम-स्टे की सुंदरता भोपाल मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और केंद्रीय सचिव पर्यटन मंत्रालय भुवनेश कुमार ने कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर मे ‘मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट 2026’ (सप्तम संस्करण) के दूसरे दिन एग्जिबिशन का शुभारंभ किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि प्रदेश में पर्यटन का निरंतर विकास हो रहा है और पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। स्थानीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है ताकि राज्य के आतिथ्य और पर्यटन अर्थव्यवस्था को वैश्विक पहचान मिल सके। मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट में लगाई गई यह प्रदर्शनी टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों व होम-स्टे संचालकों जैसे स्टेकहोल्डर्स को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करेगी। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एग्जिबिशन का अवलोकन कर इंटरैक्टिव डिजिटल डिस्प्ले और AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजिटल पहल की भी जानकारी प्राप्त की।  मुख्य सचिव बर्णवाल ने ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलियर्स से किया संवाद मुख्य सचिव बर्णवाल ने प्रदर्शनी में विभिन्न स्टॉल्स का अवलोकन करते हुए देश-विदेश से आए ट्रैवल-टूर ऑपरेटर्स, होटल व्यवसायियों और होमस्टे संचालकों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने हितधारकों से उनके व्यावसायिक पैकेजेस, आगामी योजनाओं और मध्यप्रदेश में पर्यटन विस्तार की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया। मुख्य सचिव बर्णवाल ने कहा कि टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटेलिटी क्षेत्र के प्रतिनिधि प्रदेश के पर्यटन ब्रांड एंबेसडर की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी को राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर, वन्यजीव विविधता और अनूठे ग्रामीण पर्यटन अनुभवों को वैश्विक पटल पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।  मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट (MPTM 2026) में इस बार 177 ट्रैवल और हॉस्पिटैलिटी स्टॉल लगाए गए हैं, जो राज्य के पर्यटन क्षेत्र के लिए एक बहुत बड़ा मंच साबित हो रहे हैं। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि को और गति देना है।  मध्यप्रदेश के पवेलियन में दिखी पर्यटन की खास झलक मध्य प्रदेश के पवेलियन में राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुंदरता को बेहद आकर्षक ढंग से प्रदर्शित किया गया है। पवेलियन में लगाई गई बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन के माध्यम से पर्यटकों और आगंतुकों को यहाँ के खूबसूरत ऐतिहासिक किलों, वन्यजीव अभयारण्यों और प्राकृतिक सौंदर्य का जीवंत अनुभव कराया जा रहा हैं। इसके साथ ही, अत्याधुनिक तकनीक से लैस इन्टरैक्टिव कियोस्क (Interactive Kiosks) के जरिए आगंतुक अपनी पसंद के अनुसार मध्य प्रदेश के पर्यटन स्थलों की पूरी जानकारी खुद देख और समझ पा रहे हैं, जिससे यह पूरा अनुभव बेहद आधुनिक और सुगम बन गया है। पर्यटन ग्राम पंचवटी का किया अवलोकन मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड द्वारा संचालित ग्रामीण पर्यटन कार्यक्रम के अंतर्गत पर्यटकों को अनूठे और वास्तविक ग्रामीण जीवन का अनुभव कराया जा रहा है। इस प्रामाणिक ग्रामीण अनुभव को जीवंत रूप देने के लिए मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट परिसर में एक विशेष प्रतिकृति पर्यटन ग्राम पंचवटी  तैयार की गई है। इस जीवंत प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों के लिए होम-स्टे का अनुभव, स्टारगेजिंग, बैलगाड़ी की सवारी, साइकलिंग, जनजातीय लोक नृत्य, पारंपरिक वाद्ययंत्रों की प्रस्तुतियाँ, तीर-कमान चलाने की कला, तथा विभिन्न हस्तकलाओं की प्रदर्शनी जैसी आकर्षक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इसके साथ ही, इस अनूठे स्थल पर नेशनल पार्क की झलक, प्राकृतिक झरने, गोंड पेंटिंग, तथा जनजातीय ग्रामीणों द्वारा अपनी जीवनशैली और कहानियों का सजीव चित्रांकन व प्रस्तुतिकरण इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बना हुआ है।  मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करते हुए आर्ट एंड क्राफ्ट के विशेष स्टॉल भी लगाए गए हैं। इन स्टॉल्स पर मध्य प्रदेश की अनूठी कला, पारंपरिक हस्तशिल्प और हथकरघा (हैंडलूम) की बेहतरीन झलक देखने को मिलती है—इनमें बाघ प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, भील आर्ट, भैरवा क्राफ्ट और बाटिक प्रिंट प्रमुख रूप से शामिल हैं। ये स्टॉल न केवल राज्य की लोक कला को वैश्विक मंच प्रदान करते हैं, बल्कि स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों की कला को सहेजने और आगे बढ़ाने का एक शानदार जरिया भी हैं। इस अवसर पर सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी., मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (MPSTDC) के प्रबंध संचालक दिलीप कुमार यादव, मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के अपर प्रबंध संचालक डॉ. अभय अरविंद बेडेकर, फिक्की मध्यप्रदेश के चेयरमैन महेंद्र प्रताप सिंह सहित संबंधित अधिकारी सहित ट्रैवल एंड टूर ऑपरेटर, एग्जीबिटर और होटलियर उपस्थित रहे।

Anne Carson को मिला साहित्य का नोबेल पुरस्कार, कल्पनाशील और साहसिक लेखन के लिए सम्मानित

नई दिल्ली कनाडा की कवि और लेखिका ऐनी कार्सन को 2026 का साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला है। स्वीडिश अकादमी ने गुरुवार को यह घोषणा की। पुरस्कार उनके साहसिक और नए अंदाज के लेखन के लिए दिया गया है। उनके काम में पुरानी क्लासिकल परंपरा से हल्की-फुल्की बातचीत के जरिए आज के साहित्य के लिए नए रूप बनाए गए हैं। बता दें कि यह पुरस्कार स्वीडिश अकादमी देती है। इसकी राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना है, जो करीब 1.2 मिलियन डॉलर है। अकादमी की स्थायी सचिव इंग्रिड कार्लबर्ग ने बताया कि कार्सन इस खबर से बहुत हैरान थीं। बातचीत के लिए ज्यादा समय नहीं मिला। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे इस समय आइसलैंड में हैं और हवा की दिशा सुन रही हैं। कार्सन का लेखन कविता, गद्य, संवाद और अनुवाद का ऐसा मिश्रण है, जो किसी एक शैली में नहीं बंधता। उनका जन्म टोरंटो में हुआ था। 2022 से उनके पास आइसलैंड की नागरिकता भी है। वे प्राचीन ग्रीक साहित्य के अनुवाद के लिए जानी जाती हैं। इन अनुवादों का उनके अपने लेखन पर गहरा असर पड़ा है। उनके काम में ओपेरा के गीत, साहित्यिक आलोचना और 1998 की कविता-उपन्यास 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ रेड' शामिल हैं। अकादमी ने कहा कि उनकी लगभग सारी रचनाएं शब्दों के प्रति भाषाविद के जुनून और कवि की नए अर्थ खोजने की चाह के बीच के रिश्ते पर टिकी हैं। वे खुद शब्दों की उत्पत्ति को अपने काम की शुरुआत मानती हैं। प्राचीन ग्रीक से उनके अनुवाद अपने आप में स्वतंत्र रचनाएं माने जा सकते हैं। उनकी शैली का उदाहरण 2019 की 'नॉर्मा जीन बेकर ऑफ ट्रॉय' है। यह एक मंचन रचना है, जिसमें यूरिपिडीज के नाटक 'हेलेन' की हेलेन ऑफ ट्रॉय और मर्लिन मुनरो की कहानियों को एक साथ जोड़ा गया है। 76 साल की कार्सन इस साल पुरस्कार पाने की पसंदीदा दावेदारों में थीं। सट्टेबाजी कंपनी लैडब्रोक्स के मुताबिक उनका नाम आगे चल रहा था। इस पुरस्कार को पाने वालों में अलेक्जेंडर सोल्झेनित्सिन, एलिस मुनरो और अर्नेस्ट हेमिंग्वे जैसे नाम भी शामिल था। कौन हैं एन कार्सन एन कार्सन कनाडा की एक प्रसिद्ध निबंधकार, अनुवादक, क्लासिकल साहित्य की विद्वान और कवयित्री हैं। उन्होंने प्राचीन यूनानी साहित्य और दर्शन को आधुनिक कविता और लेखन से जोड़ा। उनका लेखन पारंपरिक कविता से काफी अलग माना जाता है। एन कार्सन को प्राचीन यूनानी भाषा और साहित्य में रुचि बचपन से ही थी। ऐन कार्सन का जन्म 21 जून 1950 को कनाडा के टोरंटो शहर में हुआ था। उनके पिता बैंक में काम करते थे। हाई स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनके एक लैटिन भाषा के शिक्षक ने उन्हें प्राचीन यूनान की दुनिया और वहां की भाषा से परिचित कराया। इसके बाद यूनानी भाषा और साहित्य में उनकी रुचि बढ़ती गई।

चुनाव आयोग के समर्थन में 42 पूर्व न्यायाधीश समेत 272 नागरिक, SIR को लेकर खुला पत्र जारी

 नई दिल्ली चुनाव आयोग के मतदाता सूची के SIR को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच देश के 272 नागरिकों और उच्च न्यायपालिका के 42 पूर्व जजों ने एक ओपन लेटर जारी किया है. इस पत्र में चुनाव आयोग का खुलकर समर्थन किया है। पत्र में चेतावनी दी गई है कि लोकतंत्र में चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर बार-बार बेबुनियाद सवाल खड़े नहीं किए जाने चाहिए. पूर्व जजों ने विपक्ष के विरोध को'माहौल बनाने की सियासत' करार दिया है।  दिल्ली हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस शिव नारायण ढींगरा ने इस मुद्दे पर बेबाक राय रखते हुए कहा. 'ये सारा शोर मतदाताओं का नहीं, बल्कि वो राजनीतिक दल मचा रहे हैं जो चुनाव जीतने में नाकाम रहे हैं।  जस्टिस भुइयां के बयान पर रिटायर्ड जजों की आपत्ति बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में SIR प्रक्रिया की आलोचना की थी. उन्होंने इसे नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित करने वाली एक मनमानी प्रक्रिया करार दिया था. जस्टिस भुइयां के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी.आर. गवई और दूसरे रिटायर्ड जजों ने कड़ी आपत्ति जताई थी।  उनका कहना था कि जो मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, उस पर किसी मौजूदा जज को सार्वजनिक रूप से ऐसी टिप्पणी करने से बचना चाहिए।  इन पूर्व जजों का तर्क है कि कानून के दायरे में रहकर योग्य और अयोग्य मतदाताओं की छंटनी करना पूरी तरह से चुनाव आयोग का वैधानिक अधिकार है. इस प्रशासनिक प्रक्रिया को 'नागरिकों को दोयम दर्जे का बनाना' कहना किसी भी तरह से संतुलित नजरिया नहीं है।  एक तरफ पूर्व जजों का एक बड़ा समूह चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और उसके कानूनी अधिकारों का बचाव कर रहा है. दूसरी तरफ वकीलों के संगठनों (LAFC) ने इस पूरी प्रक्रिया के प्रभाव की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग का भी गठन कर दिया है।  बिना ठोस सबूत के EC पर आरोपों को बताया गलत इस बीच, पूर्व जजों के खुले पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई है कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और दूसरे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया जा रहा है. पत्र में बिना किसी ठोस सबूत के 'वोट चोरी' जैसे आरोप लगाने पर सवाल उठाए गए हैं।  पत्र में चेतावनी दी गई है कि संवैधानिक संस्थाओं को बार-बार 'तस्कर' या 'समझौतावादी' कहकर बदनाम करने से लोकतंत्र में आम जनता का भरोसा डगमगा सकता है. 'संस्थाओं की आलोचना करना एक लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उनका हनन करना या उन्हें नीचा दिखाना सही नहीं है।  SIR का बचाव करते हुए पूर्व जजों ने कहा कि ये पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका मकसद साफ-सुथरी और सही वोटर लिस्ट तैयार करना है. 'भरोसा ही लोकतंत्र की असली मुद्रा है' और चुनावों को अमान्य ठहराने की ऐसी कोशिशें देश में अशांति और अराजकता को बढ़ावा दे सकते हैं। पत्र के आखिर में राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वो अपनी शिकायतों को संवैधानिक और कानूनी मंचों पर रखें, न कि सड़कों पर संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाएं। 

Stock Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी में बड़ी गिरावट, निवेशकों को ₹10 लाख करोड़ का झटका

मुंबई  घरेलू शेयर बाजार में आज भारी गिरावट रही। घरेलू शेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन गिरावट दिख रही है। RBI की सख्त पॉलिसी, FII की लगातार बिकवाली और दूसरी वजहों से इन्वेस्टर्स डर गए। कारोबार के दौरान नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी लगभग 2% गिरकर अप्रैल 2025 के बाद सबसे निचले लेवल पर आ गया। इंडेक्स 52 हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,179 पर आ गया, जबकि सेंसेक्स 1,200 पॉइंट से ज्यादा गिरकर 71,400 के लेवल से नीचे फिसला। इस गिरावट ने BSE पर लिस्टेड सभी कंपनियों का टोटल मार्केट कैप करीब 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक गिरकर 460 लाख करोड़ रुपये रह गया। रियल्टी, एनर्जी और इंफ्रा में सबसे ज्यादा नुकसान लगभग सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा टूटने वाले सेक्टर है निफ्टी रियल्टी इंडेक्स, जिसमें 2.98% की सबसे बड़ी गिरावट आई। इसके अलावा निफ्टी एनर्जी (-2.87%), निफ्टी इंफ्रा (-2.66%), निफ्टी पीएसई (-2.47%), निफ्टी फार्मा (-2.38%) और निफ्टी एफएमसीजी (-2.01%) 2 से 3 फीसदी तक टूट गए। वहीं, भारी बिकवाली के बीच केवल निफ्टी आईटी (+0.04%) मामूली बढ़त बनाकर हरे निशान में टिकने में सफल रहा। कौन से शेयर चमके और किसमें हुई भारी बिकवाली? बाजार में मंदी के बावजूद केवल चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी देखी गई। फोसिस (+0.50%), टेक महिंद्रा (+0.34%) और एक्सिस बैंक (+0.20%) जैसे शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। वहीं, सबसे बड़ा नुकसान अडानी एंटरप्राइजेज (-5.36%), जेएसडब्ल्यू स्टील (-4.46%), आईटीसी (-4.03%), मैक्स हेल्थकेयर (-3.81%), इंडिगो (-3.55%) और श्रीराम फाइनेंस (-3.24%) में दर्ज किया गया। गिरावट की क्या बड़ी वजह? भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली के पीछे कई घरेलू और वैश्विक कारण रहे। RBI ने तीन साल बाद रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% किया और नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया। इससे ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ी। वहीं, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल ने भी शेयर बाजार पर दबाव बढ़ाया। 30 साल की यील्ड 5.71% और 10 साल की 5.3% से ऊपर पहुंच गई। ऐसे में बॉन्ड निवेशकों के लिए ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। महंगे कच्चे तेल से भारत में महंगाई और कंपनियों की लागत बढ़ने की आशंका है। सेंसेक्स 1045.46 अंक यानी 1.44% गिरावट के साथ 71,593.24 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स के 30 में से 27 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। आईटीसी में सबसे ज्यादा 4.24 फीसदी गिरावट रही। एनएसई का निफ्टी50 इंडेक्स 371.25 अंक यानी 1.64% फिसलकर 22,231.80 अंक पर बंद हुआ। इससे पहले कारोबार के दौरान ITC, अडानी पोर्ट्स, इंडिगो, पावर ग्रिड और रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 4% तक गिरकर सेंसेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान में रहे। आज की गिरावट के मुख्य कारण: 1) RBI की सख्त पॉलिसी RBI ने करीब चार साल में पहली बार रेपो रेट बढ़ाया है लेकिन मार्केट एनालिस्ट्स ने कहा कि मुश्किल ग्लोबल जियोपॉलिटिकल बैकग्राउंड के बीच सेंट्रल बैंक का अपना रुख 'न्यूट्रल' से 'सख्त' में बदलने का फैसला ज्यादा जरूरी था। जेफरीज को उम्मीद है कि RBI मौजूदा साइकिल में ब्याज दरों में करीब 100 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी करेगा। नोमुरा के मुताबिक रुख में बदलाव एक सरप्राइज़ था। 2) बॉन्ड यील्ड 24 साल के हाई पर ग्लोबल बॉन्ड में बिकवाली बढ़ने से बॉन्ड यील्ड कई साल के हाई पर पहुंच गई। अमेरिका में 30-साल के बॉन्ड की यील्ड 5.71% से ऊपर चली गई। बेंचमार्क 10-साल के नोट्स की यील्ड 5.3% से ऊपर है जबकि दो-साल के नोट्स की यील्ड 4.9% के करीब पहुंच गई। बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी से आमतौर पर डेट मार्केट को इन्वेस्टर्स के लिए ज्यादा आकर्षक बनाते हैं। इससे उभरते इक्विटी मार्केट पर दबाव पड़ता है। 3) कच्चे तेल की कीमत ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें आज 2% तेजी के साथ $102 प्रति बैरल को पार कर गईं। इसकी वजह यह है कि गल्फ और होर्मुज स्ट्रेट में शिपमेंट पर बढ़ते हमलों के बीच इन्वेस्टर्स मिडिल ईस्ट से सप्लाई को लेकर चिंतित हैं। यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने बुधवार को कहा कि कतर के उत्तर में एक टैंकर कई प्रोजेक्टाइल से टकरा गया, जिससे कई लोग मारे गए। एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक पिछले हफ्ते क्रूड का स्टॉक 3.2 मिलियन बैरल घटकर 424.1 मिलियन बैरल रह गया। 4) FII की भारी बिकवाली NSE के प्रोविजनल डेटा के मुताबिक विदेशी इन्वेस्टर्स ने भारतीय बाजार में 6,121 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे। FIIs ने बुधवार तक लगातार नौवें सेशन में लगभग 57,000 करोड़ रुपये के भारतीय इक्विटीज बेचे हैं। कुल मिलाकर, सितंबर की शुरुआत से अब तक FIIs 25 में से 20 सेशन में भारतीय इक्विटीज़ के नेट सेलर बने हुए हैं। 5) फेड रेट बढ़ने की चिंता मिनट्स के मुताबिक पिछले महीने फेड के पॉलिसीमेकर्स इंटरेस्ट रेट बढ़ाने के पीछे के कारण को लेकर बंटे हुए थे। कुछ पार्टिसिपेंट्स एनर्जी और दूसरे प्राइस शॉक के असर को दूर रखने के लिए बढ़ोतरी को जरूरी मान रहे थे। वहीं कुछ इसे उभरती डिमांड से चलने वाली महंगाई से बचने के लिए जरूरी मान रहे थे। CME के ​​फेडवॉच टूल के मुताबिक ट्रेडर्स दिसंबर में बढ़ोतरी की 80% संभावना मान रहे हैं। 6) कमजोर ग्लोबल संकेत ग्लोबल मार्केट से भी कमजोर संकेत मिल रहे हैं। साउथ कोरिया का कोस्पी 2% से ज्यादा गिरा, जबकि जापान का निक्केई, चीन का शंघाई कम्पोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग 1% से ज्यादा गिरे। वॉल स्ट्रीट और यूरोपियन मार्केट भी पिछले सत्र में लाल निशान पर बंद हुए जबकि डाउ जोन्स फ्यूचर्स आज अमेरिकी स्टॉक मार्केट में और गिरावट का संकेत दे रहे हैं। 7) टेक्निकल लेवल टूटे शेयर मार्केट में गिरावट बीच के कारोबारी घंटों में और तेज हो गई क्योंकि निफ्टी जरूरी सपोर्ट लेवल को तोड़ गया, जिससे बिकवाली तेज हो गई। एक्सिस डायरेक्ट में डेरिवेटिव्स और टेक्निकल रिसर्च के सीनियर रिसर्च एनालिस्ट हेमांग गोर ने चेतावनी दी थी कि जब तक निफ्टी 22,800 से नीचे है, मार्केट का माहौल बहुत कमजोर बना हुआ है। इसके 52-हफ्ते के सबसे निचले स्तर 22,180 के पास पहुंचने की संभावना है।

जिम्मेदार पर्यटन के लिए पर्यावरण जागरूकता जरूरी, केंद्रीय सचिव कुमार ने दिया बड़ा संदेश

पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक- केंद्रीय सचिव कुमार मध्यप्रदेश का लक्ष्य सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन पर हुआ पैनल डिस्कशन वन्यजीव पर्यटन के संरक्षण के साथ समुदायों की समृद्धि पर जोर भोपाल  मध्यप्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 के दूसरे दिन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 'भारत के वन्य क्षेत्रों का जीवंत परिदृश्य : मध्यप्रदेश में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन' विषय पर पैनल चर्चा हुई। सत्र में केंद्रीय सचिव पर्यटन भुवनेश कुमार ने अपने विचार रखें। पैनल में सीईओ मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड एल. कृष्णमूर्ति, सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी., महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू, निदेशक, एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर, संस्थापक एवं सीईओ, ग्राम स्टे पारीक्षित सिंह और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर शिवांग मेहता शामिल रहे। सत्र का संचालन वैक्सपोल होटल्स एंड रिसॉर्ट्स की संस्थापक एवं निदेशक तथा एटोआई वुमन्स कलेक्टिव की चेयरपर्सन सुआकांक्षा गर्ग ने किया। वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ाव जरूरी- केंद्रीय सचिव कुमार केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बेहद महत्वपूर्ण है। "स्थानीय समुदाय के साथ चलें और उनसे जुड़ें" की भावना के साथ ही सतत पर्यटन का उद्देश्य पूरा हो सकता है। मध्यप्रदेश में वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है, और कूनो में हुआ चीता संरक्षण इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। वन्यजीव पर्यटन को केवल वन्यजीव देखने तक सीमित न रखकर विविध प्राकृतिक अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता है। चंबल में डॉल्फिन, गांधीसागर क्षेत्र की जैव विविधता, गिद्ध संरक्षण तथा गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनूठे अनुभव मध्यप्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को नया आयाम दे सकते हैं। केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि पर्यटन से स्थानीय समुदाय और प्रकृति को कितना लाभ मिल रहा है। पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यटन और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। साथ ही स्थानीय समुदायों को पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद और आतिथ्य के लिए प्रशिक्षित किया जाए, ताकि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंच सके। पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी है महत्वपूर्ण- एल. कृष्णमूर्ति मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के सीईओ एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि आने वाले समय में पर्यटन तकनीक और बेहतर संवाद के साथ आगे बढ़ेगा। वन्यजीव पर्यटन केवल भ्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटक विशिष्ट और यादगार अनुभव के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश में कान्हा के साथ रातापानी, सतपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य जैसे क्षेत्रों को भी वन्यजीव पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। मध्यप्रदेश का लक्ष्य 'सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल' विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन एवं वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया है। हाल ही में भारत में जन्मी चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो देश में चीता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चीतों को मध्यप्रदेश के पर्यावरण में ढलने में समय लगा, लेकिन अब संरक्षण के प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। इन संरक्षण प्रयासों को पर्यटन के नए और जिम्मेदार अनुभवों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रातापानी को नए बाघ अभयारण्य के रूप में विकसित किया जाना प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चंबल में गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की चांदनी में नौका विहार जैसे विशिष्ट अनुभव पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों के करीब लाने के साथ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का लक्ष्य ऐसा सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता हो और स्थानीय समुदायों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर मिलें। वन्यजीव पर्यटन में विविध अनुभव और प्रशिक्षित गाइड जरूरी निदेशक एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर  ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन अब केवल बाघ देखने तक सीमित नहीं रहा। जंगल, प्रकृति, पक्षी, अन्य वन्यजीव और स्थानीय जीवन के अनुभवों को भी पर्यटन का हिस्सा बनाना होगा। इसके लिए प्रशिक्षित कहानीकारों की आवश्यकता है, ताकि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे समझें और महसूस भी करें। महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू ने कहा कि छोटे-छोटे अनुभव ही किसी गंतव्य को खास बनाते हैं। सफारी और वाहन के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ गाइडों के ज्ञान और प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को जंगल, वन्यजीव और स्थानीय पारिस्थितिकी की बेहतर जानकारी देकर उनका अनुभव अधिक ज्ञानवर्धक और यादगार बना सकते हैं। पैनल चर्चा में संरक्षण आधारित और समुदाय-केंद्रित वन्यजीव पर्यटन पर जोर दिया गया। साथ ही कहा गया कि कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और माधव सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। पर्यटन का विकास पर्यटकों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता देकर किया जाना चाहिए। स्थानीय रोजगार, प्रशिक्षित गाइड, होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

CM मोहन यादव ने राहुल गांधी को दी नसीहत, बोले- कांग्रेस को कमजोर होने पर आत्ममंथन करना चाहिए

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) ने कहा कि लगातार चुनावों में कांग्रेस की पराजय के लिए चुनाव आयोग को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। कांग्रेस को यह विचार करना चाहिए कि तमिलनाडु में वह लंबे समय से कमजोर क्यों हैं, पश्चिम बंगाल में दशकों से सत्ता से बाहर क्यों हैं। उत्तर प्रदेश और बिहार सहित अनेक राज्यों में उसका जनाधार क्यों कमजोर हुआ है। इन सवालों का जवाब चुनाव आयोग को दोष देने में नहीं, बल्कि पार्टी के संगठन और नेतृत्व की कमजोरियों के आत्ममंथन में मिलेगा। डा. मोहन यादव गुरुवार को सीएम हाउस में तीन एजेंसियों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि जिस चुनाव आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से उसे कई राज्यों में सरकार बनाने का अवसर मिला, उसी चुनाव आयोग पर लगातार सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं। यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर ही अविश्वास है, तो केरल में कांग्रेस की जीत का क्या अर्थ है? हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, वहां भी इसी लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से चुनाव हुए हैं। तमिलनाडु में भी राजनीतिक परिस्थितियों के मुताबिक गठबंधन और सरकार में भागीदारी के निर्णय लिए जाते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र डा. यादव ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहां चुनाव की पूरी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनाव आयोग के माध्यम से संपन्न होती है। चुनावी पराजय को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। लगातार हार के बाद अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास लोकतंत्र के हित में नहीं है। आत्ममंथन करें राहुल गांधी मुख्यमंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपनी पार्टी के प्रदर्शन और नेतृत्व का आत्ममंथन करना चाहिए। लगातार मिल रही पराजय के लिए चुनाव आयोग अथवा अन्य संवैधानिक संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने के बजाय कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं का विश्वास बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज पूरी दुनिया के सामने मजबूती के साथ खड़ा है। एक अत्यंत साधारण परिवार से निकलकर प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे मोदी ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया और प्रधानमंत्री पद की गरिमा को स्थापित किया है। उनकी लोकप्रियता को कम करने के प्रयास सफल नहीं होंगे। कांग्रेस को चाहिए कि वह अपनी कमजोरियों को स्वीकार करे, संगठन को मजबूत बनाए और जनता के बीच अपना विश्वास पुनः स्थापित करे।

15 अक्टूबर से नहीं लगेगा UPI चार्ज? NPCI को त्योहारों तक फैसला टालने का प्रस्ताव

नई दिल्ली देश में 2,000 रुपये से ज्‍यादा के UPI ट्रांजैक्‍शन पर 15 अक्‍टूबर से लगने वाले MDR चार्ज को इस साल टाला जा सकता है. व्‍यापारियों के संगठनों ने इस संबंध में NPCI को प्रस्‍ताव भेजा है. व्‍यापारियों ने आग्रह किया है कि 15 अक्‍टूबर से लागू होने वाले UPI-MDR चार्ज को फेस्टिव सीजन या फिर इससे भी आगे 31 दिसंबर तक टाल‍ दिया जाए. आग्रह है कि अगले साल की शुरुआत से ये चार्ज लागू किया जाए।  हालांकि, NPCI ने सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत के बाद अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं लिया है.सूत्रों के हवाले से ये जानकारी मिली है. अगर व्‍यापारिक संगठनों का प्रस्‍ताव मान लिया जाता है तो ये व्‍यापारियों के लिए त्‍यौहारों के मौसम में बड़ी राहत होगी. कारण कि इस दौरान बंपर सेल होती है और बड़ी संख्‍या में लोग UPI से शॉपिंग करते है।  वित्त मंत्री से भी किया गया है आग्रह   एक बड़े व्‍यापारिक सूत्र ने बताया कि व्यापारी संगठनों ने वित्त मंत्री से  UPI लेनदेन पर MDR लगाने को टालने का आग्रह किया है. ट्रेडर्स ने वित्त मंत्री से अपील की है कि UPI के पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR के प्रस्ताव को 6 हफ्ते के लिए टाल दिया जाए।  वित्त मंत्री को दिए एक लिखित मेमोरेंडम में व्यापारी संगठनों ने कहा है कि MDR को लेकर व्यापारियों में  संशय की स्थिति है. इसलिए इसे लागू करने की तारीख 15 अक्टूबर से बढ़ाकर 1 जनवरी 2027 किया जाए।  कितना MDR देना होगा? पिछले महीने यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी ने ₹2,000 से ज्यादा के कुछ लेनदेन पर 0.4 फीसदी यानी 40 बेसिस प्वाइंट MDR तय किया था. MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया के लिए मर्चेंट की तरफ से संबंधित बैंक या भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों को दिया जाता है. आसान उदाहरण से समझें तो ₹2,000 के लेनदेन पर 0.4 फीसदी के हिसाब से ₹8 और ₹10,000 के लेनदेन पर ₹40 का शुल्क बनता है. हालांकि यह शुल्क किन लेनदेन पर लागू होगा और किस श्रेणी में कितनी दर होगी, यही फिलहाल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी उलझन बनी हुई है।  जनवरी तक टालने की मांग क्यों? पेमेंट इंडस्ट्री का कहना है कि यूपीआई में कार्ड पेमेंट की तरह एक समान फी स्ट्रक्चर नहीं है. यूटिलिटी बिल, लोन की किस्त और कैपिटल मार्केट से जुड़े लेनदेन के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं. इन अलग-अलग श्रेणियों और उनके नियमों को लेकर कंपनियों और मर्चेंट्स के बीच भ्रम है. यही वजह है कि पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े कई संगठन चाहते हैं कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले तैयारी के लिए कुछ और समय दिया जाए।  फेस्टिव सीजन भी बड़ी वजह 15 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने की तारीख ऐसे समय पड़ रही है, जब देश में त्योहारी खरीदारी शुरू हो चुकी होगी. एक सूत्र के मुताबिक, पेमेंट इंडस्ट्री के कई निकायों और मर्चेंट्स ने NPCI से कहा है कि MDR लागू करने की तारीख को फेस्टिव सीजन खत्म होने तक टाल दिया जाए. इंडस्ट्री को चिंता है कि महंगाई के दबाव के बीच त्योहारी बिक्री के दौरान कारोबारियों की लागत बढ़ सकती है. इसका असर उनकी कमाई और ग्राहकों की खरीदारी पर भी पड़ सकता है. यह आशंका भी जताई जा रही है कि कुछ कारोबारी MDR का बोझ किसी न किसी तरीके से ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकते हैं।  UPI और कार्ड पेमेंट में क्या फर्क? कार्ड पेमेंट में हर मर्चेंट की एक कैटेगरी होती है. कार्ड नेटवर्क इसी आधार पर लेनदेन को प्रोसेस और उसकी जांच करते हैं. कार्ड में MDR की दरें भी अपेक्षाकृत एक जैसी व्यवस्था में होती हैं. यूपीआई में स्थिति थोड़ी अलग है. यहां अलग-अलग तरह के पेमेंट के लिए अलग नियम और शुल्क की व्यवस्था बनाई गई है. इनमें से कुछ ऐसे भुगतान भी हैं, जिन्हें कार्ड के जरिए किया ही नहीं जा सकता. यूपीआई के लोकप्रिय होने से पहले लोन की किस्त या कैपिटल मार्केट से जुड़े कई भुगतान नेट बैंकिंग, IMPS, NEFT और RTGS जैसे माध्यमों से किए जाते थे. इन माध्यमों पर शुल्क की अलग व्यवस्था थी।  लोन रीपेमेंट को लेकर सबसे ज्यादा उलझन लोन की किस्त के भुगतान को लेकर भी MDR व्यवस्था में पेमेंट इंडस्ट्री के बीच सवाल हैं. कुछ मामलों में बैंक पैसे भेजने वाले और पाने वाले, दोनों पक्षों से शुल्क लेते थे. कैपिटल मार्केट से जुड़े पक्षों का तर्क है कि ब्रोकिंग अकाउंट में पैसे डालना पर्सन-टू-पर्सन (P2P) पेमेंट की तरह है. इसलिए ब्रोकिंग कंपनियों पर MDR नहीं लगाया जाना चाहिए, क्योंकि इस तरह के लेनदेन से उन्हें सीधे कमाई नहीं होती।  मैनुअल लोन पेमेंट पर भी सवाल छोटी रकम वाले कई लोन में ऑटो-डेबिट फेल हो जाता है. इसकी एक वजह यह होती है कि ग्राहक के बैंक खाते में तय समय पर पर्याप्त बैलेंस नहीं होता. इसके बाद ग्राहक खुद मैनुअल तरीके से लोन की किस्त जमा करता है. यहीं से नया सवाल खड़ा होता है. मैनुअल पेमेंट को फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन पेमेंट माना जाता है, तो उस पर 0.4 फीसदी MDR लग सकता है. वहीं NPCI ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे पेमेंट पर ₹5 की फ्लैट फीस का प्रावधान है. अब बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर्स के सामने यह सवाल है कि लोन रीपेमेंट और सामान्य फाइनेंशियल सर्विस ट्रांजैक्शन में अंतर कैसे किया जाए. इसी वजह से नई व्यवस्था के लागू होने से पहले नियमों को लेकर और स्पष्टता की मांग की जा रही है।  अब NPCI के फैसले पर नजर फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि 15 अक्टूबर से MDR लागू होगा या इसे जनवरी 2027 तक टाल दिया जाएगा. इंडस्ट्री की मांग NPCI तक पहुंच चुकी है और वित्त मंत्रालय के साथ भी चर्चा जारी बताई जा रही है. अगर NPCI तारीख नहीं बदलता है, तो तय नियम के मुताबिक 15 अक्टूबर से पात्र ₹2,000 से ज्यादा के यूपीआई मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू हो जाएगा. वहीं अगर मांग स्वीकार होती है, तो कारोबारियों और पेमेंट कंपनियों को तैयारी के लिए कुछ और समय मिल सकता है. अब अगले दो दिनों में NPCI के फैसले पर सबकी नजर है. इसी से साफ होगा कि 15 अक्टूबर की डेडलाइन बरकरार … Read more

मुख्यमंत्री ने कहा – न चौक का नाम बदल रहे हैं, न उसके मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ की जा रही है

तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा, किसी तरह का भ्रम न रखें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय प्रदेश के 38 स्थानों पर विकसित होंगे ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’, तेलीबांधा चौक भी इनमें शामिल मुख्यमंत्री ने कहा – न चौक का नाम बदल रहे हैं, न उसके मूल स्वरूप से कोई छेड़छाड़ की जा रही है महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त होगी जारी, दुर्ग जिले को मिलेंगी विकास कार्यों की सौगात रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के तेलीबांधा चौक के नाम परिवर्तन को लेकर उत्पन्न भ्रम को स्पष्ट करते हुए कहा है कि तेलीबांधा चौक का नाम नहीं बदला जा रहा है। न तो चौक के नाम में कोई परिवर्तन किया जा रहा है और न ही उसके मूल स्वरूप के साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ की जा रही है। मुख्यमंत्री साय ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि प्रदेश में 38 स्थानों पर ‘सेवा ज्योति संकल्प चौक’ के तहत विकसित किए जाने की घोषणा की गई है। इनमें रायपुर का तेलीबांधा चौक भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर किसी को भी भ्रम में नहीं रहना चाहिए। तेलीबांधा चौक का नाम यथावत रहेगा, इसे केवल ‘सेवा ज्योति संकल्प’ की भावना के अनुरूप विकसित किया जाएगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में भी इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसी क्रम में आज दुर्ग में आयोजित ‘सेवा सेतु’ कार्यक्रम में वे शामिल होंगे। कार्यक्रम के दौरान प्रदेश की माताओं-बहनों के लिए संचालित महतारी वंदन योजना की 32वीं किस्त जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रदेश की सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि दुर्ग जिले को इस अवसर पर विभिन्न विकास एवं जनकल्याणकारी कार्यों की सौगात भी मिलेगी। उन्होंने कहा कि सेवा, सुशासन और जनकल्याण की भावना के साथ राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के प्रत्येक क्षेत्र और प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

PM मोदी बोले- DBT से करीब ₹5 लाख करोड़ की बचत, ‘जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हुई वो मुझसे प्यार करेंगे क्या?’

  नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण में डिजिटल तकनीक और सरकारी योजनाओं का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आज मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रह गया है. यह सुशासन का बड़ा माध्यम बन चुका है. इसी दौरान उन्होंने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी DBT का भी जिक्र किया।  पीएम ने कहा कि DBT के जरिए 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंचे हैं. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है. इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि इस वजह से जिनकी मुफ्त की कमाई बंद हो चुकी है, वो मोदी से प्यार करेंगे क्या?  '5 लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे' पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की डिजिटल व्यवस्था से सरकारी मदद सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है. उन्होंने कहा कि मोबाइल से जुड़े बैंक खातों के जरिए लोगों तक सरकारी सहायता पहुंची है. इससे व्यवस्था में होने वाली लीकेज को रोकने में मदद मिली है।  उन्होंने कहा कि DBT के जरिए 50 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के खातों में पहुंचे. इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई. पीएम ने कहा कि यह कोई छोटी रकम नहीं है. उनके मुताबिक, यह पैसा गलत हाथों में जाने से बचा है।  पीएम मोदी ने इसी बात को लेकर सवालिया अंदाज में कहा कि जिन लोगों की बिना मेहनत की कमाई बंद हो गई है, वे मोदी से प्यार करेंगे क्या? उन्होंने पूछा कि क्या उन्होंने सही काम किया या नहीं. पीएम ने कहा कि इस तरह की गड़बड़ियों को रोका जाना चाहिए या नहीं. उन्होंने कहा कि विरोध और आलोचना के बावजूद वह इस काम को जारी रखेंगे. उन्होंने कहा कि वह इसे पूरा करके रहेंगे।  पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 से 12 साल में मोबाइल फोन की भूमिका काफी बदल गई है. अब यह सिर्फ बातचीत करने का साधन नहीं है. मोबाइल के जरिए सरकारी सेवाएं भी लोगों तक पहुंच रही हैं. उन्होंने कहा कि आज सैकड़ों सरकारी सेवाएं मोबाइल फोन पर उपलब्ध हैं. लोगों को कई कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते. डिजिटल व्यवस्था ने सरकारी सेवाओं को लोगों तक पहुंचाने का तरीका बदला है।   डीपफेक और साइबर सुरक्षा पर भी की बात प्रधानमंत्री ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई. उन्होंने डेटा की सुरक्षा और साइबर धोखाधड़ी का मुद्दा उठाया. उन्होंने डीपफेक जैसी तकनीक से पैदा होने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया. पीएम ने कहा कि डिजिटल दुनिया में बढ़ती चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर एक मजबूत ढांचे की जरूरत है. उन्होंने डेटा और डिजिटल सुरक्षा को लेकर देशों के बीच सहयोग की जरूरत बताई।  पीएम मोदी ने भारत के गेमिंग इकोसिस्टम का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि देश में 50 करोड़ से ज्यादा लोग गेमिंग इकोसिस्टम का हिस्सा हैं. इसमें छोटे शहरों और कस्बों के युवाओं की भी बड़ी भूमिका है।  इंडिया मोबाइल कांग्रेस के इस कार्यक्रम में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के अलावा देश और विदेश के कई उद्योगपति और टेक्नोलॉजी से जुड़े लोग शामिल हुए।   

अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें, गम्भीरता और सक्रियता से दायित्वों का करें निर्वहन – अरुण साव

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की विकास कार्यों की प्रगति और योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा कार्यों में तेजी लाने और योजनाओं के प्रभावी व समयबद्ध क्रियान्वयन पर दिया जोर, जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देने के दिए निर्देश अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें, गम्भीरता और सक्रियता से दायित्वों का करें निर्वहन – अरुण साव त्योहारों के पहले सड़कों की मरम्मत पूर्ण कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश रायपुर.  उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने सरगुजा संभागीय मुख्यालय अंबिकापुर में सरगुजा और सूरजपुर जिले के अधिकारियों की संयुक्त बैठक लेकर लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा खेल एवं युवा कल्याण विभाग के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने बैठक में विकास कार्यों की प्रगति, योजनाओं के क्रियान्वयन तथा विभागीय स्तर पर किए जा रहे कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। सरगुजा के कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल और सूरजपुर की कलेक्टर श्रीमती रेना जमील भी बैठक में मौजूद थीं। योजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर, जनहित के कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने चारों विभागों के अधिकारियों से योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की नियमित समीक्षा करने को कहा। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने विकास कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने तथा कार्यों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर विकास कार्यों को गति देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का वास्तविक उद्देश्य नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है, इसलिए अधिकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। उन्होंने अधिकारियों को अपने कार्यालय की व्यवस्था सुधारने तथा अच्छी साफ-सफाई रखने को कहा। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की योजनाओं और विकास कार्यों का सीधा लाभ आम नागरिकों तक पहुंचे। अधिकारी अपनी जिम्मेदारी समझें, गम्भीरतापूर्ण ढंग से दायित्वों का निर्वहन करें।  निर्माणाधीन पीएम आवासों को अक्टूबर तक पूर्ण करने कहा उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय क्षेत्रों में संचालित विकास कार्यों एवं विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को नगरीय निकायों द्वारा संचालित योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग तथा जनहित से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हमारे शहर, हमारे प्रदेश की छवि और जिले की प्रतिष्ठा बनाते हैं। इसलिए नगरों की व्यवस्था दुरुस्त करें, स्वच्छता पर विशेष ध्यान दें।  उन्होंने अधिकारियों से कहा कि टेण्डर प्रकिया होने के बाद तुरंत कार्य शुरू हो जाएं, प्रगतिरत कार्यों को जल्द पूरा करें, गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखें और अपने दायित्वों का गम्भीरता से निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) प्राथमिकता का कार्य है, इसलिए सभी सीएमओ अक्टूबर माह तक प्रगतिरत निर्माण कार्यों को पूरा करें। उन्होंने राजस्व संग्रहण कार्य की हर माह समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बैठक में मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना, अधोसंरचना मद के कार्यों, स्वच्छ भारत मिशन (शहरी), प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), 15वें वित्त आयोग, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सहित विभिन्न कार्यों की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  ’सड़कों की मरम्मत में लाएं तेजी’ उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में लोक निर्माण विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने तथा कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बरसात के बाद सड़कों की मरम्मत के कार्यों में तेजी लाने को कहा।  साव ने भवनों, सड़कों, पुल-पुलियों तथा अन्य निर्माण कार्यों की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सड़क एवं अधोसंरचना से जुड़े कार्यों का सीधा प्रभाव आम लोगों के आवागमन पर पड़ता है, इसलिए निर्माण कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी कार्ययोजना बनाकर कार्य करें। आने वाला समय त्यौहारों का समय है, इसलिए समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य हो, लोगों को असुविधा न हो।  पेयजल अधोसंरचनाओं के रखरखाव एवं योजनाओं की नियमित निगरानी के निर्देश साव ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यों की समीक्षा के दौरान पेयजल एवं अन्य योजनाओं की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने जल जीवन मिशन के अंतर्गत पेयजल व्यवस्था, जलापूर्ति से संबंधित कार्यों तथा संचालित योजनाओं की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने पेयजल व्यवस्था सुचारू बनाए रखने, जल स्रोतों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा पेयजल से जुड़ी समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए। लंबित कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूर्ण करने तथा शासन की योजनाओं का लाभ आम नागरिकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने को कहा। उन्होंने पेयजल से संबंधित अधोसंरचना के रखरखाव एवं योजनाओं की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। ’प्राथमिक शालाओं में खेल गतिविधियां बढ़ाएं’ उप मुख्यमंत्री ने बैठक में खेल गतिविधियों, खेल अधोसंरचना तथा युवाओं को खेलों से जोड़ने के लिए संचालित कार्यक्रमों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने प्राथमिक शालाओं में खेल गतिविधियां बढ़ाएं। खेल अधिकारी जिला पंचायत सीईओ एवं शिक्षा विभाग के साथ मिलकर कार्ययोजना बनाएं। उन्होंने स्कूलों के संकुलवार एक-एक पीटीआई को खेल गतिविधियां संचालित करने के लिए चिन्हांकित करने को कहा। उन्होंने सरगुजा ओलंपिक के लिए किए जा रहे पंजीयन की भी जानकारी ली। उन्होंने इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने, खेल संघों, खेल से जुड़े लोगों को शामिल करने तथा अधिक से अधिक लोगों को हिस्सा लेने के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खेल स्वास्थ्य, अनुशासन, आत्मविश्वास, मिलकर चलने का स्वभाव, रचनात्मकता की प्रेरणा देता है। इसलिए युवाओं को बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रयास करें। सरगुजा जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुरोमा श्रीवास्तव, सूरजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी विजेंद्र सिंह पाटले और अंबिकापुर नगर निगम के आयुक्त विनय कुमार अग्रवाल भी बैठक में उपस्थित थे।