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मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार तेज, 13 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी; 7 संभाग पहले ही कवर

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। सागर और भोपाल संभाग के कई जिलों को कवर करने के बाद गुरुवार को इसके उज्जैन और ग्वालियर-चंबल संभाग तक पहुंचने की संभावना है। मौसम विभाग ने प्रदेश के 13 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि भोपाल, इंदौर, उज्जैन सहित 40 से ज्यादा जिलों में गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुसार हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में अगले 24 घंटे के दौरान 4 से 8 इंच तक बारिश हो सकती है। वहीं अशोकनगर, देवास, खंडवा, बैतूल, सागर, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। गुरुवार को ही प्रदेश में अति भारी, भारी और तेज बारिश का दौर जारी रहेगा। हरदा, नर्मदापुरम, रायसेन, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा और बालाघाट में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है। अगले 24 घंटे में यहां 4 से 8 इंच तक पानी गिर सकता है। वहीं, अशोकनगर, देवास, खंडवा, बैतूल, सागर, मंडला और डिंडौरी में भारी बारिश का यलो अलर्ट है। भोपाल, इंदौर-उज्जैन में पानी गिरेगा मौसम विभाग ने भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, झाबुआ, आलीराजपुर, धार, बुरहानपुर, बड़वानी, खरगोन, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, बैतूल, ग्वालियर, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, गुना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में गुरुवार को आंधी-बारिश की चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को इंदौर के कई हिस्सों में तेज बारिश हुई। वार्ड क्रमांक 80 में बारिश का पानी दुकानों में घुस गया, जबकि कई इलाकों की सड़कें जलमग्न हो गईं। बारिश के दौरान एक थार नाले में गिर गई। वाहन में पूरा परिवार सवार था। मौके पर मौजूद लोगों ने तत्काल मदद कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र के अहीरखेड़ी-काकड़ इलाके में रपटा पार करते समय दो बाइक सवार तेज बहाव में बह गए। दोनों की उम्र 20 से 22 साल बताई जा रही है। इनमें मनीष को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि महेश तेज बहाव में लापता हो गया। पुलिस और रेस्क्यू टीम मौके पर उसकी तलाश में जुटी है। 5 जुलाई तक रहेगा तेज बारिश का दौर मौसम विभाग ने 5 जुलाई तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की संभावना जताई है। 3 जुलाई को धार और बड़वानी तथा 4 जुलाई को खरगोन जिले के लिए रेड अलर्ट जारी किया गया है। जून में कमी, जुलाई से उम्मीद प्रदेश में अब तक करीब 100.2 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से लगभग 28 प्रतिशत कम है। मौसम विभाग का कहना है कि जून में बारिश अपेक्षा से कम रही, लेकिन जुलाई में मानसून के सक्रिय रहने से अच्छी बारिश होने की संभावना है। सामान्य तौर पर प्रदेश की कुल मानसूनी बारिश का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा जुलाई में ही दर्ज होता है।  भोपाल-इंदौर समेत कई जिलों में बारिश के आसार गुरुवार को भोपाल, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, झाबुआ, आलीराजपुर, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम, आगर-मालवा, शाजापुर, ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित कई जिलों में बारिश और तेज हवा चलने की संभावना है। 

DA Hike: केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी, 42% महंगाई भत्ते पर हाईकोर्ट में सुनवाई, 17 जुलाई को आंदोलन संभव

चंडीगढ़  पंजाब के करीब 8 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए आज का दिन अहम रहने वाला है। लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) और पे-कमिशन एरियर के मामले में आज पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की डबल बेंच सुनवाई करेगी। इस सुनवाई पर प्रदेश के लाखों कर्मचारियों की नजर।  बुधवार को हाईकोर्ट की छुट्टियों के बाद पहले दिन भी मामला सूचीबद्ध था, लेकिन देर शाम सुनवाई होने के कारण सरकार की ओर से ही पक्ष रखा जा सका। अब आज कर्मचारी संगठनों की दलीलें भी सुनी जाएंगी, जिसके बाद अदालत आगे का फैसला करेगी। सिंगल बेंच ने 30 जून तक भुगतान का दिया था आदेश हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 8 अप्रैल को पंजाब सरकार को 30 जून तक लंबित डीए का भुगतान करने का निर्देश दिया था। इस आदेश को सरकार ने डबल बेंच में चुनौती दी। डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर रोक नहीं लगाई, लेकिन सरकार से सीलबंद लिफाफे में भुगतान की योजना मांगी थी। अब गुरुवार की सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि सरकार ने बकाया डीए के भुगतान के लिए क्या रोडमैप तैयार किया है। सरकार किस्तों में भुगतान का प्रस्ताव रखती है या वित्तीय स्थिति का हवाला देकर और समय मांगती है, इस पर फैसला निर्भर करेगा। केंद्र से 18% पीछे पंजाब के कर्मचारी फिलहाल पंजाब के कर्मचारियों को 42 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तुलना में 18 प्रतिशत डीए अभी भी लंबित है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से इस अंतर को समाप्त करने और बकाया राशि जारी करने की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से पेश वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया था कि महंगाई भत्ता कोई बोनस या अनुग्रह राशि नहीं, बल्कि कर्मचारियों के वेतन का हिस्सा है। इसी आधार पर कर्मचारी बकाया डीए के भुगतान की मांग कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों हो रहे लामबंद कर्मचारी संगठनों ने पहले ही सरकार को चेतावनी दी है कि यदि हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलती और भुगतान को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं आता, तो 17 जुलाई को पंजाब में महारैली और महाबंद का ऐलान किया जा सकता है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि यदि कर्मचारियों और पेंशनरों के परिवारों को जोड़ दिया जाए तो यह संख्या करीब 40 लाख लोगों तक पहुंचती है। ऐसे में इस मुद्दे का राजनीतिक असर भी आगामी समय में देखने को मिल सकता है।  

राबड़ी देवी का बड़ा फैसला, 20 वर्षों बाद छोड़ा 10 सर्कुलर रोड का सरकारी बंगला

पटना  खूब सियासत के बाद आखिरकार 10 सर्कुलर रोड बंगले को राबड़ी देवी (Rabri Devi) ने खाली कर दिया. करीब 20 साल बाद राबड़ी देवी का यह आवास खाली हुआ है. अब राबड़ी देवी अपने परिवार के साथ कौटिल्य नगर स्थित आवास में शिफ्ट हो गई हैं।  यह निजी आवास है जहां राबड़ी देवी अपने परिवार के साथ शिफ्ट हुई हैं. उन्हें सरकार की ओर से हार्डिंग रोड स्थित 39 नंबर बंगला अलॉट हुआ है लेकिन यहां वे नहीं गई हैं. गौरतलब हो कि 22 जून को भवन निर्माण विभाग ने नोटिस जारी कर 7 दिनों में आवास खाली करने का आदेश जारी किया था।  सरकारी आवास में शिफ्ट हुए तेजस्वी यादव जानकारी के अनुसार, लालू यादव और राबड़ी देवी कौटिल्य नगर वाले घर में शिफ्ट हुए हैं जबकि तेजस्वी यादव का परिवार यानी कि उनकी पत्नी और बच्चे एक पोलो रोड वाले सरकारी आवास में शिफ्ट हुए हैं।  बतौर नेता विरोधी दल राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड आवास साल 2006 में आवंटित हुआ था. बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व में चल रही सरकार पर इस बंगले को खाली कराने का आरोप लग रहा था. लालू यादव के परिवार ने इस बंगले में रहते हुए राजनीति में कई छोटे और बड़े उतार-चढ़ाव देखे हैं. राबड़ी देवी जब बिहार विधान परिषद की नेता विरोधी दल बनीं उस दौरान इस बंगले में आई थीं. इसी बंगले में रहते हुए तेजस्वी यादव बिहार के उपमुख्यमंत्री बने थे।  तेजस्वी यादव के लिए खास रहा था ये बंगला तेजस्वी यादव के लिए सत्ता हो या विपक्ष दोनों ही पड़ाव पर यह बंगला खास रहा था. बता दें कि बिहार हो या देश के अन्य प्रदेश, कोई भी बड़ा राजनीतिक परिवार अगर किसी बंगले को छोड़ा है तो खूब विवाद हुआ है. 10 सर्कुलर रोड बंगले में राबड़ी देवी के बाद अब भारतीय जनता पार्टी के मंत्री नंदकिशोर राम इस बंगले में रहने आएंगे। 

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा का उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किया सम्मानपूर्वक अभिनंदन

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा का उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने किया अभिनंदन 28वें एओएमएसआई मिड-टर्म कन्वेंशन एवं 14वें एओएमएसआई पोस्टग्रेजुएट कन्वेंशन—मिडकॉम्स 2026 में होंगे शामिल भोपाल त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा का उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने गुरुवार को निवास कार्यालय, भोपाल में आत्मीय अभिनंदन किया। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. साहा और उप मुख्यमंत्री शुक्ल के मध्य विभिन्न समसामयिक विषयों और स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों को लेकर चर्चा हुई। इस अवसर पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी श्रीमती स्वप्ना साहा भी उपस्थित थीं। त्रिपुरा मुख्यमंत्री डॉ. साहा मध्यप्रदेश प्रवास पर हैं। मुख्यमंत्री डॉ. साहा भोपाल में आयोजित 28वें एओएमएसआई मिड-टर्म कन्वेंशन एवं 14वें एओएमएसआई पोस्टग्रेजुएट कन्वेंशन—मिडकॉम्स 2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। एसोसिएशन ऑफ ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन्स ऑफ इंडिया, मध्यप्रदेश स्टेट चैप्टर तथा पीपुल्स यूनिवर्सिटी, भोपाल के संयुक्त तत्वावधान में यह राष्ट्रीय सम्मेलन 2 से 4 जुलाई 2026 तक पीपुल्स यूनिवर्सिटी परिसर में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन की थीम “क्रिएटिंग अ होलसम सर्जन” अर्थात “समग्र सर्जन का निर्माण” है। यह सम्मेलन ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जरी के क्षेत्र का प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अकादमिक आयोजन है, जिसमें देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञ, वरिष्ठ चिकित्सक, चिकित्सा शिक्षक, शोधकर्ता तथा स्नातकोत्तर विद्यार्थी सहभागिता करेंगे। सम्मेलन में नवीनतम वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीकों, जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं तथा चिकित्सा शिक्षा के विविध आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।  

Delhi New Rules: बाहरी वाहनों पर रोक, बिना PUC पेट्रोल-डीजल नहीं, 4 महीने सख्त रहेगा सिस्टम

नई दिल्ली सर्दियों में बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनके तहत 1 नवंबर से सरकारी और निजी दफ्तरों में कर्मचारियों की उपस्थिति को सीमित किया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, दफ्तरों में एक समय पर केवल 50 % कर्मचारी ही काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम यानी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को कम करने और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। इसके साथ ही दिल्ली में वाहनों की पार्किंग दरों को दोगुना करने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि पार्किंग शुल्क बढ़ने से लोग निजी वाहनों का कम इस्तेमाल करेंगे और सार्वजनिक परिवहन की ओर बढ़ेंगे। सरकार ने सर्दियों के दौरान लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) की पाबंदियों को अब पूरे सीजन के लिए लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत GRAP के अलग-अलग चरणों में लगने वाले प्रतिबंध हर साल 1 नवंबर से 28 फरवरी तक स्वत: प्रभावी रहेंगे। दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू किए गए नए दिशा-निर्देशों को लेकर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि इन नियमों में पुराने सभी आदेशों को एकीकृत कर एक स्पष्ट, सरल और सख्त व्यवस्था तैयार की गई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई व्यवस्था से सरकारी विभागों, संस्थानों और आम लोगों के लिए नियमों का पालन करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि अधिसूचना तैयार करते समय पिछले वर्षों के प्रदूषण स्तर, अनुभवों और वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़ों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। उन्होंने कहा कि नए दिशा-निर्देशों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की ओर से जारी संशोधित ग्रैप और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों को भी शामिल किया गया है। रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में हर साल नवंबर से फरवरी के बीच प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। इसी चुनौती को देखते हुए सरकार ने ऐसी स्थायी व्यवस्था लागू की है, जिससे हर साल अलग-अलग आदेश जारी करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सरकारी ऑफिसों की बदलेगी टाइमिंग दिल्‍ली में पिछले कई सालों में देखा गया है कि वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण व्‍हीकल्‍स से निकालने वाला धुआं होता है. इसमें निजी वाहनों की भूमिका सबसे ज्‍यादा होती है. इस समस्‍या से निपटने के लिए 'वर्क फ्रॉम होम' सबसे बेहतर उपाय है. ऐसे में दिल्‍ली सरकार ने नवंबर से फरवरी तक पाबंदियों के दिनों में यातायात का दबाव कम करने के लिए ऑफिसों के अलग-अलग समय और घर से काम करने की व्यवस्था भी लागू की गई है. सर्दियों के दौरान, दिल्ली नगर निगम के तहत आने वाले कार्यालयों में सुबह 8:30 बजे से शाम पांच बजे तक काम होगा, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालयों में एक नवंबर से 28 फरवरी के बीच सुबह 10 बजे से शाम 6:30 बजे तक काम होगा।  वायु प्रदूषण के दिनों में कुछ ऐसी होती है दिल्‍ली की स्थिति प्राइवेट ऑफिसों के लिए 50% वर्क फ्रॉम होम दिल्‍ली सरकार के मुताबिक, एक नवंबर से 31 जनवरी तक दिल्ली सरकार और प्राइवेट ऑफिसों में 50 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी मौजूद नहीं रहेंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉर्म होम करेंगे. इससे सड़कों पर वाहनों की संख्‍या काफी कम होने की उम्‍मीद है. हालांकि, जरूरी और इमरजेंसी सर्विस (जैसे अस्पताल, सार्वजनिक यातायात, बिजली, पानी की आपूर्ति, साफ-सफाई, आपदा प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण करने वाली एजेंसियों) को इससे छूट दी गई है।      PUC सर्टिफिकेट दिखाने पर ही मिले पेट्रोल-डीजल  रेखा गुप्‍ता सरकार के अनुसार, दिल्ली में सभी पेट्रोल, डीजल और सीएनजी/एलपीजी खुदरा दुकानें पूरे साल सिर्फ वैध पीयूसीसी दिखाने पर ही पेट्रोल और डीजल देंगे. बिना वैध प्रमाणपत्र के ईंधन लेते पाए जाने पर वाहनों पर जुर्माना लगाया जा सकता है. इसकी जांच फिजिकल सर्टिफिकेट, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) प्रणाली और 'वाहन' जैसे इलेक्ट्रॉनिक डेटाबेस के जरिए की जाएगी।  PUC के बिना ईंधन नहीं मिलेगा अब पूरे वर्ष पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और LPG पंपों पर केवल उन्हीं वाहनों को ईंधन दिया जाएगा, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) होगा। सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन वाहनों के पास वैध PUC प्रमाणपत्र नहीं होगा, उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा। साथ ही ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई भी की जाएगी। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण के उद्देश्य से यह व्यवस्था लागू की गई है। बाहरी वाहनों के प्रवेश पर रोक नए दिशा-निर्देशों के तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-6 से कम मानक वाले वाहनों के राजधानी में प्रवेश पर रोक रहेगी। इसका उद्देश्य पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना है। हालांकि, इस प्रतिबंध से कुछ आवश्यक वाहनों को छूट दी गई है। CNG वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति रहेगी। निर्माण गतिविधियां पर रहेगा प्रतिबंध नए दिशा-निर्देशों के तहत निर्माण और तोड़फोड़ से निकलने वाली धूल पर नियंत्रण रखा जाएगा। इसके लिए 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़-फोड़ और खुले में होने वाली निर्माण गतिविधियों पर रोक रहेगी। सरकार का उद्देश्य निर्माण स्थलों से निकलने वाली धूल के कारण बढ़ने वाले प्रदूषण को कम करना है। सर्दियों के महीनों में हवा की गति कम होने और प्रदूषक तत्वों के जमा होने से दिल्ली की वायु गुणवत्ता प्रभावित होती है। दफ्तरों में 50% उपस्थिति दिल्ली सरकार ने सरकारी और निजी कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सरकारी और निजी कार्यालयों में एक समय में केवल 50 % कर्मचारी ही कार्यालय से काम करेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। यह व्यवस्था प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करने और कार्यालय आने-जाने वाले वाहनों की संख्या कम करने के उद्देश्य से लागू की जाएगी। हालांकि, विभागाध्यक्षों और जरूरी सेवाओं से जुड़े अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यालय आना होगा। आवश्यक सेवाओं के संचालन में किसी तरह की बाधा न आए, इसके लिए ऐसे कर्मचारियों को इस नियम से अलग रखा गया है। पार्किंग शुल्क होगा दोगुना नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अधिकृत पार्किंग स्थलों पर अब … Read more

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने लिया एक सप्ताह का ब्रेक, विपश्यना साधना के लिए पहुंचे बेंगलुरु

 चंडीगढ़  पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान एक सप्ताह के प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रम के लिए बेंगलुरु रवाना हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, वह करीब सात दिनों तक एक निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में रहेंगे। इस दौरान प्राकृतिक उपचार, शरीर की शुद्धि, योग, ध्यान और विशेष खानपान के माध्यम से उनके स्वास्थ्य में सुधार पर ध्यान दिया जाएगा। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री पिछले कुछ समय से लगातार राजनीतिक कार्यक्रमों, प्रशासनिक बैठकों और विभिन्न सरकारी गतिविधियों में व्यस्त रहे हैं। लगातार कामकाज और यात्रा के कारण उन्हें पहले भी थकान की शिकायत हुई थी। इसके बाद चिकित्सकों ने उन्हें कुछ समय आराम करने और स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी थी। इसी सलाह के आधार पर उन्होंने एक सप्ताह का यह स्वास्थ्य कार्यक्रम तय किया है। प्राकृतिक चिकित्सा से गुजरेंगे सीएम सूत्रों का कहना है कि इस दौरान मुख्यमंत्री प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के तहत शरीर की शुद्धि की प्रक्रिया से गुजरेंगे। साथ ही योग, ध्यान और विशेष आहार योजना का पालन करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को बेहतर बनाना तथा व्यस्त दिनचर्या के बाद शरीर को फिर से सक्रिय करना है। बेंगलुरु स्थित निजी प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में उनके रहने की पूरी व्यवस्था की गई है। कार्यक्रम के दौरान चिकित्सकों और विशेषज्ञों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी किया जाएगा। आवश्यकतानुसार उपचार और खानपान की योजना में बदलाव भी किया जा सकता है। रवाना होने से पहले खत्म किए सभी कार्य स्वास्थ्य कार्यक्रम पर रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य में चल रही कई महत्वपूर्ण विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। इसके अलावा विभिन्न योजनाओं से जुड़े कार्यों का उद्घाटन और प्रशासनिक स्तर पर जरूरी निर्देश भी दिए, ताकि उनकी अनुपस्थिति के दौरान विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो। सरकारी सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में भी पंजाब सरकार का नियमित कामकाज पहले की तरह चलता रहेगा। सभी विभागों को आवश्यक निर्देश पहले ही दिए जा चुके हैं और प्रशासनिक व्यवस्था सामान्य रूप से जारी रहेगी। जरूरत पड़ने पर मुख्यमंत्री अधिकारियों के संपर्क में भी रहेंगे।

CM विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनिज उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, प्रशासन सख्त

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर अवैध खनिज उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई राजनांदगांव, बालोद, बलरामपुर और सरगुजा में ताबड़तोड़ अभियान, वाहन जब्त और लाखों रुपये का अर्थदंड रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर प्रदेश में अवैध खनिज उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा सख्त और सतत अभियान चलाया जा रहा है। शासन की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विभिन्न जिलों में संयुक्त कार्रवाई करते हुए अवैध रेत, पत्थर, मिट्टी एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों को जब्त किया गया है तथा नियमानुसार अर्थदंड एवं वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। शासन का उद्देश्य प्रदेश के खनिज संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना तथा अवैध उत्खनन में संलिप्त लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करना है। इसी क्रम में राजनांदगांव जिले में वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान अब तक अवैध रेत उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के 52 प्रकरणों में कार्रवाई करते हुए 18 लाख 95 हजार 600 रुपये का अर्थदंड वसूला गया है। इनमें अवैध उत्खनन के 9, परिवहन के 41 तथा भंडारण के 2 प्रकरण शामिल हैं। वहीं डोंगरगढ़ तहसील के ग्राम आसरा में आकस्मिक निरीक्षण के दौरान नदी में रेत उत्खनन प्रतिबंधित पाया गया तथा मौके पर कोई अवैध गतिविधि नहीं मिली। बालोद जिले के ग्राम कसही में अवैध पत्थर उत्खनन करते पाए जाने पर एक चेन माउंटेन (पीसी-130-7) मशीन को जब्त कर सील किया गया। संबंधित पक्ष वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत कार्रवाई प्रारंभ की गई है। बलरामपुर जिले में खनिज विभाग ने राजपुर क्षेत्र के ग्राम नरसिंहपुर और बसंतपुर में कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त एक टिपर जब्त किया। वहीं बसंतपुर स्थित फ्लाई ऐश ब्रिक्स इकाई में अवैध रूप से भंडारित लगभग 90 घनमीटर रेत भी जब्त कर संचालक को नोटिस जारी किया गया। सरगुजा जिले में शिकायतों के आधार पर विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई करते हुए अवैध मिट्टी, मुरूम, रेत एवं गिट्टी के उत्खनन और परिवहन में प्रयुक्त जेसीबी, ट्रैक्टर और टिपर सहित छह वाहनों को जब्त किया गया। सभी मामलों में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 तथा संशोधित छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 के तहत कार्रवाई की जा रही है। संशोधित नियमों के अनुसार अब शमन शुल्क न्यूनतम 25 हजार रुपये अथवा 2 हजार रुपये प्रति टन, जो अधिक होगा, के आधार पर वसूला जाएगा। इसके अतिरिक्त खनिज का बाजार मूल्य भी वसूला जाएगा। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देशानुसार प्रदेश में अवैध खनिज गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नियमित गश्त, आकस्मिक निरीक्षण और संयुक्त प्रवर्तन अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

Punjab Cabinet Decision: वोटर लिस्ट अपडेट कराने वालों को 1 जुलाई से 30 सितंबर तक मुफ्त मिलेंगे जरूरी दस्तावेज

चंडीगढ़ पंजाब सरकार ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की प्रक्रिया के दौरान लोगों को बड़ी राहत देने का फैसला लिया है। राज्य सरकार द्वारा एसआइआर के लिए अनिवार्य दस्तावेजों के लिए एक जुलाई से 30 सितंबर के समय के दौरान कोई भी फीस नहीं वसूलने का निर्णय किया है। यह मंजूरी बुधवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में दी गई है। इस संबंध में तुरंत सभी सेवा केंद्रों व अन्य पब्लिक डीलिंग विभागों को सूचित किया जाएगा। कैबिनेट ने न केवल एसआइआर की प्रक्रिया के दौरान इन जरूरी दस्तावेजों को बनवाने की फीस माफ की है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि संबंधित दस्तावेज के लिए लोगों द्वारा अप्लाई करने के बाद की प्रक्रिया को तेजी से निपटाया जाए ताकि आवेदन करने वाले व्यक्ति को समय रहते ही संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हो सकें। सरकार की मंशा स्पष्ट की गई है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम एसआइआर में केवल इस वजह से नहीं छूटना चाहिए कि उसे जरूरत के मुताबिक व समय रहते सरकारी दस्तावेज हासिल नहीं हुआ। ध्यान रहे कि एसआइआर प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल रखने के लिए 2003 की मतदाता सूची में दर्ज जानकारी के साथ-साथ कुछ ऐसे दस्तावेज हैं, जिन्हें सहयोगी दस्तावेज के तौर पर अंकित किया गया है। इनमें जन्म प्रमाणपत्र, पेंशन कार्ड, स्थायी निवासी प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र सरीखे 12 दस्तावेज हैं। हालांकि यह सभी मतदाताओं के लिए अनिवार्य नहीं होंगे, लेकिन पंजाब सरकार का मानना है कि जिन भी मतदाताओं को इनकी जरूरत होगी, उन्हें यह दस्तावेज हासिल करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। लैंड पुलिस में भी किया आंशिक परिवर्तन कैबिनेट ने आवास एवं शहरी विकास विभाग की लैंड पूलिंग पालिसी में भी थोड़ा बदलाव करने को मंजूरी दी गई है। इसके तहत भूमि अधिग्रहण होने पर भूमि मालिक को मिलने वाली रिहायशी व कमर्शियल जमीन को थोड़ा बढ़ाया गया है। पहले भूमि मालिक को एक एकड़ जमीन अधिग्रहण होने पर एक हजार गज रिहायशी और 200 गज कमर्शियल जमीन देने का प्रविधान था, जिसे अब बढाकर एक हजार गज रिहायशी और 210 गज कमर्शियल जमीन दी जाएगी। ठीक ऐसे ही यदि सिर्फ रिहायशी जमीन लेने की आप्शन चुनी जाती है तो पहले के प्रविधान के मुताबिक 1,600 वर्ग गज के बजाये अब 1,630 वर्ग गज जमीन दी जाएगी। इसके अलावा आवास एवं शहरी विकास विभाग के द्वारा अवैध कालोनियों के निवासियों को एनओसी. जारी करने संबंधी प्रक्रिया में बदलाव व वेबसाइट पर जानकारी मुहैया कराने को भी मंजूरी दी गई है।  

WhatsApp का नया Username फीचर कितना सुरक्षित? कंपनी ने 7 सवालों के दिए जवाब, फ्रॉड पर भी किया साफ़ खुलासा

नई दिल्ली  व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।  हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके।  फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है।  व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा।  यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं।  केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता।  सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है।  मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है।  सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

USA Birthright Citizenship: ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से झटका, अमेरिका में जन्मे पंजाबी बच्चों की नागरिकता बरकरार

जालंधर अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले को रद्द कर जन्मजात नागरिकता को बहाल कर दिया है। इससे अवैध रूप से रहे पंजाबी समुदाय के साथ प्रवासियों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के इस फैसले से अवैध रूप से या अस्थायी वीजा पर रह रहे पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में जन्मे बच्चों को अब पूर्ण नागरिकता का अधिकार मिल गया है। हर साल पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में करीब 8 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार 2016 से 2024 तक एशियन मूल की माता-पिता की संख्या 66 हजार के करीब है। यहां सालाना 8 हजार के करीब भारतीय मूल के बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें ज्यादा संख्या पंजाबी समुदाय के बच्चों की है।  रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका की अलग-अलग जगहों पर इस वक्त शरणार्थी वीजा पर या अवैध रूप से लगभग 7 लाख भारतीय रह रहे हैं, न्यूयार्क में रहने वालों में ज्यादातर पंजाबी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पंजाबी समुदाय के उन माता पिता को बड़ी राहत है जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा हुए हैं, लेकिन ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने से उनको स्थायी वीजा नहीं मिल पा रहा था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने लिखा- अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिक है। फैसले से पंजाबी समुदाय में खुशी इस फैसले से अमेरिका में बसे पंजाबी परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है।  पंजाबी समुदाय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है क्योंकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य राज्यों में रह रहे पंजाबी परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित होने वाले थे। समुदाय के लोग इसे संवैधानिक जीत मान रहे हैं। पंजाब से आने वाले प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस फैसले से उनकी अगली पीढ़ी को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाबी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकारी नौकरी, स्कूल में एडमिशन का फायदा मिलेगा पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है।  हर साल पंजाबी माता-पिता के अमेरिका में करीब 8 हजार बच्चे जन्म लेते हैं। अमेरिका की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2024 तक एशियन मूल की माता-पिता की संख्या 66 हजार के करीब है। यहां सालाना 8 हजार के करीब भारतीय मूल के बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें ज्यादा संख्या पंजाबी समुदाय के बच्चों की है। अमेरिका की अलग-अलग जगहों पर इस वक्त शरणार्थी वीजा पर या अवैध रूप से लगभग 7 लाख भारतीय रह रहे हैं। न्यूयार्क में रहने वालों में ज्यादातर पंजाबी हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पंजाबी समुदाय के उन माता-पिता को बड़ी राहत है, जिनके बच्चे अमेरिका में पैदा हुए हैं, लेकिन ट्रंप के जन्मजात नागरिकता खत्म करने से उन्हें स्थायी वीजा नहीं मिल पा रहा था। न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा- अमेरिका की धरती पर जन्म लेने वाला हर बच्चा संविधान के 14वें संशोधन के तहत नागरिक है। फैसले से पंजाबी समुदाय में खुशी इस फैसले से अमेरिका में बसे पंजाबी परिवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। पंजाबी समुदाय के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और अन्य राज्यों में रह रहे पंजाबी परिवारों में कई ऐसे हैं जिनके बच्चे इस आदेश से प्रभावित होने वाले थे। समुदाय के लोग इसे संवैधानिक जीत मान रहे हैं। पंजाब से आने वाले प्रवासियों की संख्या लगातार बढ़ रही है और इस फैसले से उनकी अगली पीढ़ी को कानूनी सुरक्षा मिलने की उम्मीद जगी है। पंजाबी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। सरकारी नौकरी, स्कूल में एडमिशन का फायदा मिलेगा पंजाब से अमेरिका जाने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पंजाब में खेती संकट, बेरोजगारी और बेहतर भविष्य की तलाश में कई परिवार यहां बस रहे हैं। ऐसे में जन्म सिद्ध नागरिकता का अधिकार उनके बच्चों को अमेरिकी समाज में पूर्ण रूप से शामिल होने का मौका देगा। वे स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के ले सकेंगे। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला पंजाबी संस्कृति को अमेरिका में मजबूत करने में मदद करेगा। बच्चे अब अमेरिकी नागरिक के रूप में बड़े होंगे, लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। पंजाब में खेती संकट, बेरोजगारी और फ्यूचर की तलाश में कई परिवार यहां बस रहे हैं। ऐसे में जन्म सिद्ध नागरिकता का अधिकार उनके बच्चों को अमेरिकी समाज में पूर्ण रूप से शामिल होने का मौका देगा। वे स्कूल, कॉलेज, नौकरी और अन्य सुविधाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के ले सकेंगे। समुदाय के बुजुर्गों का कहना है कि यह फैसला पंजाबी संस्कृति को अमेरिका में मजबूत करने में मदद करेगा। बच्चे अब अमेरिकी नागरिक के रूप में बड़े होंगे लेकिन अपनी जड़ों से भी जुड़े रहेंगे। 150 साल पुराना था जन्मजात नागरिका का कानून अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को संवैधानिक रूप से नागरिकता का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने इस कानून को प्रशासनिक आर्डर से खत्म कर दिया था।  सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्मे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वहां मौजूद हैं, वे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि अवैध प्रवासियों और कुछ अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे यूएसए के अधिकार क्षेत्र के अधीन नहीं हैं, इसलिए उन्हें जन्म सिद्ध नागरिकता नहीं मिलनी चाहिए।  150 साल पुराना था जन्मजात नागरिका का कानून अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि अमेरिका में जन्मे बच्चों को संवैधानिक रूप से नागरिकता का अधिकार है। डोनाल्ड ट्रंप ने 150 साल पुराने इस कानून को प्रशासनिक ऑर्डर से खत्म कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में 6-3 के फैसले में मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि अमेरिका में जन्मे बच्चे, जिनके माता-पिता अवैध रूप से या अस्थायी रूप से वहां मौजूद हैं, वे 14वें संशोधन के तहत जन्म से ही नागरिक हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कार्यकारी आदेश में तर्क दिया था कि अवैध प्रवासियों और कुछ अस्थायी रूप से रह रहे लोगों के बच्चे … Read more