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‘पाकिस्तान से आए लोग शरणार्थी नहीं थे’, मोहन भागवत ने बंटवारे पर दिया बड़ा बयान

नागपुर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि 1947 के बंटवारे के बाद भारत आए लोग शरणार्थी नहीं थे, बल्कि संघर्ष करने वाले योद्धा थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि और धर्म के प्रति प्रेम के कारण भारी कठिनाइयों और दर्द का सामना किया। उन्होंने कहा कि इन लोगों ने नए बने पाकिस्तान में कई पीढ़ियों से बनाई और बढ़ाई गई अपनी संपत्ति, जमीन और कारोबार को पीछे छोड़ दिया और भारत आना चुना।  भागवत  नागपुर में सिंधी समुदाय द्वारा चलाए जा रहे संगठन 'सिंधु एजुकेशन सोसाइटी' के 75वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख ने कहा कि बंटवारे के बाद, लोगों ने सोच-समझकर दूसरी तरफ से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे उस जमीन पर रहना चाहते थे जो भारत है, जहां वे बिना किसी डर के अपने धर्म का पालन कर सकें।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि विभाजन के बाद लोगों ने सोच-समझकर सीमा पार से भारत आने का फैसला किया, क्योंकि वे भारत भूमि में रहना चाहते थे, जहां वे बिना भय के अपने धर्म का पालन कर सकें। उन्होंने कहा कि यद्यपि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन वे शरणार्थी नहीं थे, उस समय उनके लिए ‘शरणार्थी’ शब्द का इस्तेमाल करना गलत था। वे मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष करने वाले योद्धा थे। वे उस लड़ाई में केवल अपनी गलतियों के कारण नहीं हारे थे। 'उन्होंने करियर चुना, न ही संपत्ति' मोहन भागवत ने कहा कि हम सभी भारत को एकजुट बनाए रखने की वह लड़ाई हार गए थे, लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने न तो करियर चुना और न ही संपत्ति। उन्होंने देश और अपने धर्म को चुना। आरएसएस प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 वर्ष की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे पड़ाव किसी भी संस्था को अपने कार्यों की समीक्षा करने और अपने उद्देश्यों को याद करने का अवसर प्रदान करते हैं। जीवन की कठिनाइयों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों के सामने हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि दोबारा उठ खड़े होने का प्रयास करना चाहिए। मोहन भागवत ने कहा कि परिस्थितियों या भाग्य के सामने स्वयं को असहाय नहीं समझना चाहिए। कठिन समय से निकलने का प्रयास करने वाला व्यक्ति ही अंततः सफल होता है, जबकि कठिनाइयों से भागने वाला पहले ही अपनी हार स्वीकार कर चुका होता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए शिक्षा प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यही शिक्षा का अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए। भागवत ने कहा कि सही और गलत में अंतर करने की क्षमता विकसित करने के लिए मूल्य आधारित शिक्षा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि शिक्षकों के आचरण और विद्यार्थियों में उनके द्वारा विकसित किए जाने वाले मूल्यों से भी मिलती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य अच्छे इंसानों का निर्माण करना और ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो समाज के कल्याण के प्रति सजग हो। उन्होंने बताया कि वे शरणार्थी नहीं थे, हालांकि वे विस्थापित हुए थे, लेकिन उस समय उनके लिए यह शब्द गलत इस्तेमाल किया गया था. वे संघर्षरत योद्धा थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि और अपने धर्म के प्रति प्रेम के कारण संघर्ष किय।  भागवत ने कहा कि हम सभी, भारत को एकजुट रखने की वह लड़ाई हार गए. लेकिन उन्होंने क्या चुना? उन्होंने करियर नहीं चुना, उन्होंने धन नहीं चुना. उन्होंने देश को चुना, उन्होंने अपने धर्म को चुना।  RSS प्रमुख ने सिंधु एजुकेशन सोसाइटी की 75 साल की यात्रा का जिक्र किया और कहा कि ऐसे पड़ाव किसी संस्था द्वारा किए गए कामों की समीक्षा करने और उसके लक्ष्यों को याद करने का मौका देते हैं।  वहीं, जीवन की कठिनाइयों के बारे में बात करते हुए, उन्होंने जोर दिया कि विपरीत परिस्थितियों में हार नहीं माननी चाहिए, बल्कि फिर से उठने की कोशिश करनी चाहिए। 

Punjab Scheme: मावां-धीयां सत्कार योजना की शुरुआत, महिलाओं को मिली सम्मान राशि; ₹1100 करोड़ जारी

चंडीगढ़  पंजाब सरकार की मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत पंजीकरण करा चुकी करीब 50 लाख महिलाओं के बैंक खातों में आज से पहली किस्त आ गई। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने धुरी में मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना' की शुरुआत की।  मुख्यमंत्री ने योजना का वेब लिंक लॉन्च कर इसका औपचारिक शुभारंभ किया। महिलाओं के खातों में 1100 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। योजना के तहत बाद में रजिस्ट्रेशन कराने वाली महिलाओं को भी इस स्कीम का पूरा लाभ मिलेगा। तीन महीने की सम्मान राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।  मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि लाभार्थियों के मोबाइल पर बैंक की ओर से राशि जमा होने का संदेश आया और तीन महीनों की राशि एक साथ सीधे खातों में ट्रांसफर की गई। मुख्यमंत्री का दावा है कि राज्य की 97 प्रतिशत महिलाओं को इस योजना का लाभ मिलेगा। योजना के तहत सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की महिलाओं को 1000 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से तीन महीने के 3000 रुपये दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं के खातों में 1500 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से 4500 रुपये ट्रांसफर होंगे। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त करने वाली पात्र महिलाओं को भी इस योजना का लाभ मिलेगा।  सरकार के अनुसार योजना का लाभ 18 वर्ष या उससे अधिक आयु की उन महिलाओं को मिलेगा जो पंजाब की स्थायी निवासी और पंजीकृत मतदाता हैं। लाभार्थी का बैंक खाता आधार से लिंक होना अनिवार्य है। कई जिलों में अभी भी बैंक खाते खुलवाने और आधार लिंक कराने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने पात्र महिलाओं से जल्द रजिस्ट्रेशन और बैंक संबंधी सभी औपचारिकताएं पूरी करने की अपील की है ताकि उन्हें योजना का लाभ समय पर मिल सके। सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी, सरकारी पेंशनभोगी और आयकरदाता परिवारों की महिलाओं को योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। 

आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, जनता को सपा-कांग्रेस के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं

दंगाइयों के मुकदमे वापस लेने का प्रयास करती थी सपा सरकार:  सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं, जनता को सपा-कांग्रेस के बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं कांग्रेस व सपा सरकारें रोकती थीं कांवड़ यात्रा,  जन्माष्टमी व दुर्गा पूजा जैसे आयोजनों पर लगता था प्रतिबंध 2017 से पहले दंगा व पलायन, लेकिन आज विकास और निवेश बना है सहारनपुर की पहचान सहारनपुर,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, अलीगढ़ व मथुरा दंगों और कर्फ्यू की आग में झुलसते थे। कैराना व कांधला से पलायन की स्थिति थी, बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे। तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार दंगाइयों और उपद्रवियों के मुकदमे वापस लेने का कुत्सित प्रयास करती थी। लेकिन डबल इंजन सरकार ने कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया और हाल में मुरादाबाद के उपद्रवियों को कड़ी सजा भी दिलवाई है। अब उत्तर प्रदेश में दंगे नहीं होते, बल्कि विकास की योजनाएं धरातल पर उतरती हैं। मुख्यमंत्री बुधवार को सहारनपुर नगर एवं सहारनपुर देहात विधानसभा क्षेत्रों के लिए ₹620 करोड़ से अधिक लागत वाली विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास करने के उपरांत जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विपरीत मौसम व बारिश की चुनौतियों के बावजूद कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों, किसानों, मातृशक्ति व स्थानीय जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व अभिनंदन किया। सीएम ने जनपदवासियों को विकास की इन सौगातों के लिए बधाई भी दी। इस दौरान उन्होंने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को प्रमाण पत्र भी वितरित किए। आस्था के साथ खिलवाड़ स्वीकार नहीं सीएम ने कहा कि जाति व क्षेत्र के नाम पर बांटने वाले लोग आपको कमजोर कर रहे हैं। इनके बहकावे में आने की आवश्यकता नहीं। वे कभी मां शाकंभरी के दर्शन करने के लिए नहीं गए। वे काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन, श्रीराम मंदिर का विरोध कर रहे थे। इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में कह दिया कि भगवान राम व श्रीकृष्ण हुए ही नहीं। रामभक्तों पर गोलियां चलवाने वाले  आस्था पर उपदेश दे रहे हैं! आस्था के साथ कोई खिलवाड़ स्वीकार नहीं है, जो अपराधी होगा उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। वैश्विक पटल पर चमक रही अयोध्या सीएम ने कहा कि कभी संकरी गलियों व अव्यवस्था की पहचान बन चुकी अयोध्या में आज चारों ओर से फोर लेन कनेक्टिविटी है। ब्रॉडगेज की डबल लाइन, इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन गया है। सपा को चार बार सरकार बनाने का मौका मिला, लेकिन उसने अयोध्या धाम के लिए कुछ नहीं किया। आज प्रधानमंत्री मोदी जी के यशस्वी नेतृत्व में अयोध्या धाम त्रेतायुग की दिव्यता व भव्यता के साथ वैश्विक पटल पर चमक रहा है। संत रविदास, महर्षि वाल्मीकि व बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर जैसे महापुरुषों की विरोधी समाजवादी पार्टी व कांग्रेस ने सिर्फ अपने परिवार का नाम आगे बढ़ाने का काम किया।  2017 से पहले दंगा-पलायन थी पहचान सीएम योगी कहा कि 2017 से पहले दंगा, कर्फ्यू हमारी नियति बन गई थी। कैराना व कांधला से पलायन होता था। ये सभी क्षेत्र हिंदू विहीन कर दिए गए थे। बेटी व व्यापारी सुरक्षित नहीं थे। कानून-व्यवस्था तहस नहस हो चुकी थी। 2011 में मुरादाबाद में डीआईजी पर हमला किया गया। उपद्रवी उन्हें मरा हुआ समझ छोड़कर चले गए। सपा सरकार ने उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, बल्कि उनके केस वापस लेने का कुत्सित प्रयास कर रही थी। हमारी सरकार ने उन सभी उपद्रवियों को सजा दिलाई। मजबूत कानून-व्यवस्था अब यूपी की नई पहचान है। कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में लगता था पैसा मुख्यमंत्री ने कांग्रेस व समाजवादी पार्टी के नेताओं के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उनकी आस्था तब कहां थी जब कांवड़ यात्राओं, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा के पंडालों पर प्रतिबंध लगाए जाते थे और विकास का पैसा या तो सपा के गुर्गों द्वारा खा लिया जाता था या कब्रिस्तान की बाउंड्री बनाने में खर्च हो जाता था। आज वही पैसा मां शाकंभरी कॉरिडोर, इकोनॉमिक कॉरिडोर, फोर व टू लेन सड़क, पुल, विश्वविद्यालय, स्पोर्ट्स कॉलेज, सरसावा में सिविल टर्मिनल निर्माण, रनवे की लंबाई बढ़ाने और वुड कार्विंग के कारीगरों का जीवन स्तर उठाने में खर्च हो रहा है। यह दृष्टिकोण का अंतर है। सपा को केवल सैफई की चिंता होती थी, जबकि डबल इंजन सरकार सभी 75 जनपदों, 1,07,000 गांवों, 57,000 ग्राम पंचायतों, 825 विकास खंडों, 12,000 वार्डों और 762 नगर निकायों की चिंता करती है। कनेक्टिविटी व इंफ्रास्ट्रक्चर से अर्थव्यवस्था को नई उड़ान सहारनपुर की बदलती तस्वीर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने ₹12,000 करोड़ की लागत से बने दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (ग्रीन फील्ड कॉरिडोर) का विशेष जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर के शुरू होने से दिल्ली व सहारनपुर के बीच की दूरी महज डेढ़ घंटे की रह गई है। अब सहारनपुर एयर कनेक्टिविटी के लिए भी पूरी तरह तैयार हो रहा है। सरसावा में सिविल टर्मिनल के निर्माण और रनवे के विस्तार का कार्य तेजी से चल रहा है, जिससे जल्द ही सहारनपुर का अपना चालू एयरपोर्ट होगा और यहां के नागरिकों को दिल्ली या देहरादून जाने की बाध्यता नहीं रहेगी।   मां शाकंभरी देवी का भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर धार्मिक व सांस्कृतिक धरोहरों के पुनरुद्धार पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मां शाकंभरी देवी के दरबार में श्रद्धालुओं की सुगमता के लिए एक भव्य एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण युद्ध स्तर पर चल रहा है। पिछले दिनों शिवालिक की पहाड़ियों में अचानक हुई भारी वर्षा के दौरान प्रशासनिक मुस्तैदी और समय पर जारी अलर्ट के कारण जन-धन की हानि रोकने में सफलता मिली थी। भविष्य में मौसम चाहे कैसा भी हो, श्रद्धालुओं का आवागमन बाधित न हो, इसके लिए एलिवेटेड कॉरिडोर और बेहतरीन फैसिलिटेशन सेंटर का निर्माण कराया जा रहा है, जो पहले की सरकारों के लिए सपना था। सहारनपुर के कारीगरों व हस्तशिल्पियों ने विपरीत परिस्थितियों में भी वुड कार्विंग की परंपरा को जीवित रखा। यहां से 600 करोड़ रुपये से अधिक के वुड कार्विंग उत्पादों का निर्यात किया गया है। सहारनपुर में सुनिश्चित किया चौतरफा विकास मुख्यमंत्री ने कहा कि सहरानपुर का अपना मेडिकल कॉलेज भी बन गया है। इसके प्रथम चरण का काम पूरा हो चुका है … Read more

शेयर बाजार में जोरदार उछाल, इन 3 कारणों से Sensex-Nifty ने भरी उड़ान, IT शेयरों का जलवा

मुंबई   अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत और कच्चे तेल में गिरावट सेघरेलूशेयर बाजार में आज लगातार दूसरे दिन तेजी आई है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 500 अंक उछल गया जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी50 इंडेक्स भी 24,150 के करीब पहुंच गया। सुबह 9.40 बजे सेंसेक्स 493.71 अंक यानी 0.64% तेजी के साथ 77,416.35 अंक पर ट्रेड कर रहा था। निफ्टी भी 143.85 अंक यानी 0.60% ऊपर 24,149.70 अंक पर ट्रेड कर रहा है। रुपया शुरुआती कारोबार में मजबूत होकर 94.95 पर पहुंच गया। सेंसेक्स के 30 में से 19 शेयर तेजी के साथ खुले। देश की दूसरी बड़ी आईटी कंपनी इन्फोसिस के शेयरों में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। इसके अलावा एचसीएल टेक, टीसीएस और टेक महिंद्रा के शेयर भी 2% तक उछल गए। दूसरी ओर, बजाज फाइनेंस के शेयरों में 1% से ज्यादा गिरावट आई और यह बेंचमार्क इंडेक्स में सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा। ब्रॉडर बाजार का हाल ब्रॉडर बाजार में भी तेजी रही। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में लगभग 0.3% की तेजी आई। सेक्टर के हिसाब से देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे ज्यादा 3% तेजी रही। वहीं, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी मेटल में लगभग 1-1% की तेजी आई। एनएसई पर लगभग 1,818 शेयरों में तेजी रही जबकि 586 शेयरों में गिरावट आई और 99 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। शेयर बाजार में तेजी के तीन कारण  अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत को लेकर पॉजिटिव सिग्नल का शेयर बाजार में तेजी के पीछे अहम रोल रहा. कतर ने कहा कि ईरान और अमेरिका ने Hormuz Strait को लेकर बातचीत आगे बढ़ाई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 20 फीसदी हिस्से को संभालता है. इसके चलते विदेशी बाजारों में भी तेजी आई, तो गिफ्ट निफ्टी भी रफ्तार में नजर आया. इससे बाजार का सेंटीमेंट सुधरा।  दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों में लगातार जारी गिरावट ने बाजार की रफ्तार बढ़ाने में योगदान किया. बता दें कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 70 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं।  इनके अलावा आईटी कंपनियों के शेयर खुलने के साथ ही बाजार की हीरो साबित हुए. बीएसई की लार्जकैप कैटेगरी में शामिल Infosys Share (4.60%), HCL Tech Share (3.80%), TCS SHare (3.05%), Tech Mahindra Share (3%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. मिडकैप कैटेगरी में देखें, तो Coforge Share (4.70%), MPhasis Share (4.50%), Presistent Share (3.60%) की तेजी के साथ ट्रेड कर रहे थे।   बैंकिंग शेयर भी चमके मार्केट में तेजी के बीच सिर्फ आईटी शेयर ही नहीं, बल्कि बैंकिंग स्टॉक्स भी चमके. लार्जकैप में शआमिल ICICI Bank Share, HDFC Bank Share, SBI Share करीब 1 फीसदी की तेजी में दिखे. इसके अलावा सनफार्मा, अडानी पोर्ट्स से लेकर ट्रेंट और हिंदुस्तान यूनिलीवर जैसे कंपनियों के स्टॉक्स भी ग्रीन जोन में नजर आए।  कच्चे तेल में गिरावट इस बीच ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता में तेजी से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स अभी 1.06 फीसदी नीचे $70.81 प्रति बैरल पर आ ट्रेड कर रहा है। दोनों देशों के प्रतिनिधि पिछले दो दिनों से कतर की राजधानी दोहा में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के फ्रीज किए गए फंड को जारी करने के बारे में चर्चा कर रहे हैं।

‘बम बम भोले’ से गूंजा जम्मू, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना, श्रद्धालुओं में दिखा जबरदस्त उत्साह

 जम्मू  जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बृहस्पतिवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां भगवती नगर आधार शिविर से अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को कश्मीर स्थित पहलगाम और बालटाल आधार शिविरों के लिए रवाना किया।करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर के लिए 57 दिनों की वार्षिक तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होगी। यात्रा अनंतनाग जिले के पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम मार्ग और गांदरबल जिले के 14 किलोमीटर लंबे, लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाले बालटाल मार्ग से एक साथ आरंभ होगी। इसका समापन 28 अगस्त को होगा। अधिकारियों ने बताया कि उपराज्यपाल सिन्हा ने तीर्थयात्रियों के काफिले को रवाना करने से पहले भगवती नगर आधार शिविर में विशेष पूजा-अर्चना की।इस अवसर पर उनके साथ पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात, विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा, भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा, भाजपा के स्थानीय विधायक, वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। ‘बम-बम भोले’, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बर्फानी बाबा की’ के जयघोष के बीच पांच हजार से अधिक तीर्थयात्री कड़े सुरक्षा प्रबंध में सुरक्षित वाहनों के काफिले में दोनों आधार शिविरों के लिए रवाना हुए।समारोह के बाद उपराज्यपाल सिन्हा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘हर-हर महादेव! बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए यात्रा शुरू हो गई है। जम्मू के भगवती नगर आधार शिविर से श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 के लिए तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को रवाना किया। अमरनाथ यात्रा गहन आध्यात्मिक जागृति का प्रतीक है।’’ पहला जत्था बालटाल और पहलगाम बेस कैंप के लिए भेजा गया है. इन दोनों मार्गों से श्रद्धालु 3 जुलाई से पवित्र अमरनाथ गुफा की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इस वर्ष यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. 57 दिनों तक चलने वाली यह धार्मिक यात्रा रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी।  जयपुर से पहुंचे श्रद्धालुओं में दिखा खास उत्साह यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के चेहरों पर बाबा बर्फानी के दर्शन की खुशी साफ दिखाई दी. जी मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान के जयपुर से आए Genz Group के सदस्यों ने ज़ी मीडिया से बातचीत में कहा कि लोग अक्सर छुट्टियां बिताने या घूमने के लिए अलग-अलग जगहों का रुख करते हैं, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य बाबा अमरनाथ के दर्शन करना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है।  कड़ी सुरक्षा के बीच रवाना हुआ यात्रा काफिला यात्रा को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को सीआरपीएफ की सुरक्षा में रवाना किया गया. सुरक्षा बलों के वाहन पूरे काफिले के आगे और पीछे मौजूद रहे ताकि यात्रा पूरी तरह सुरक्षित रहे. यात्रा में शामिल प्रत्येक सरकारी और निजी वाहन की पहले विस्तृत जांच की गई. जांच पूरी होने के बाद ही वाहनों को काफिले में शामिल किया गया और उन पर सत्यापन का विशेष टैग लगाया गया।  ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम से रखी जा रही निगरानी इस बार यात्रा मार्ग पर बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है. सेना, सीआरपीएफ, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पूरे रूट पर तैनात हैं. संवेदनशील इलाकों में ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, एंटी-ड्रोन सिस्टम और अन्य आधुनिक निगरानी उपकरणों की मदद से चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है.प्रशासन ने यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए व्यापक व्यवस्थाएं की हैं. जम्मू से लेकर पवित्र गुफा तक विभिन्न स्थानों पर ठहरने की व्यवस्था, लंगर, चिकित्सा सेवाएं, एम्बुलेंस, स्वच्छ पेयजल, शौचालय और हेल्प डेस्क उपलब्ध कराए गए हैं।  हर साल उमड़ती है आस्था की विशाल भीड़ प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे केवल वैध पंजीकरण और RFID कार्ड के साथ ही यात्रा करें तथा जारी दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें, ताकि यात्रा सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके. हिमालय की ऊंची पहाड़ियों में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं. प्रशासन को इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है, जिसके मद्देनजर सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम पहले से किए गए हैं।  उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर बढ़ाया गया प्रत्येक कदम भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भक्ति का प्रतीक है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं की सुरक्षित और आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा की कामना की।तीर्थयात्रियों ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा किए गए प्रबंधों पर संतोष व्यक्त किया। पहली बार यात्रा पर आए सूरत के सुरेश कुमार ने प्रशासन और सेना की ओर से उपलब्ध कराई गई सुविधाओं तथा सहयोग की सराहना की। जूनागढ़ अखाड़े के बाबा गोगा नाथ ने इस यात्रा को भगवान का आशीर्वाद बताते हुए साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की।काशी से 20 साधुओं के साथ आए संत सुखम दास ने कहा कि बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। दास पिछले 32 वर्षों से अमरनाथ यात्रा पर जाते आ रहे हैं।उत्तराखंड के श्रद्धालु वैभव ने पहले जत्थे का हिस्सा बनने पर खुशी जताते हुए सुरक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा व्यक्त किया। जयपुर की रजनी देवी ने भी श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड और प्रशासन द्वारा किए गए प्रबंधों की सराहना की। अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं के काफिले को भारी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। उनकी सुरक्षित आवाजाही के लिए जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात प्रतिबंध और क्षेत्रीय सुरक्षा नियंत्रण के विशेष उपाय लागू किए गए हैं।यातायात प्रबंध से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि राजमार्ग के विभिन्न हिस्सों में दो जुलाई से 28 अगस्त तक यातायात प्रतिबंध प्रभावी रहेंगे। इसके लिए प्रतिदिन यातायात परामर्श और वाहनों के आवागमन का समय निर्धारित किया गया है। इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के लिए 3.90 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जबकि जम्मू में तत्काल पंजीकरण की सुविधा भी शुरू कर दी गई है।पूरे जम्मू क्षेत्र को बहुस्तरीय सुरक्षा बलों की तैनाती और तकनीक आधारित निगरानी के साथ व्यापक सुरक्षा के दायरे में रखा गया है। भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने अमरनाथ यात्रा को देश की सबसे महत्वपूर्ण तीर्थयात्राओं में से एक बताते हुए विश्वास जताया कि यह यात्रा शांतिपूर्ण और सुचारू ढंग से संपन्न होगी।विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने भी तीर्थयात्रियों का स्वागत किया … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बोले- दादा ईश्वरदास रोहाणी जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे

जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पित कर्मयोगी थे दादा ईश्वरदास रोहाणी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव समाजसेवा, शिक्षा, चिकित्सा, विधि, पत्रकारिता सहित विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय 12 विभूतियों का सम्मान स्व. ईश्वरदास रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का किया विमोचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जबलपुर में गौरव शिखर सम्मान समारोह-2026 को किया संबोधित जबलपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि संस्कारधानी जबलपुर की प्रतिभाओं ने संपूर्ण देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे दादा स्व. ईश्वरदास रोहाणी स्मृति गौरव शिखर सम्मान 2026 में 12 महान विभूतियों का सम्मान गौरवशाली क्षण है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति वसुधैव कुटुम्बकम पर आधारित है। हम विश्व को एक परिवार मानते हैं। इसी प्रकार स्व. रोहाणी भी अपने कार्यों के बलबूते आज समाज कल्याण के प्रतीक बने। वे एक कर्मयोगी थे, जिन्होंने गरीब से गरीब के जीवन को रोशन करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जनसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और संगठन निर्माण के प्रति समर्पित राष्ट्र-साधक स्व. रोहाणी का अद्वितीय योगदान प्रेरणादायी रहेगा। उनकी शुचिता और विराट व्यक्तित्व यादगार है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को जबलपुर में आयोजित पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. रोहाणी की पावन स्मृति में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. रोहाणी के जीवन मूल्यों पर केंद्रित पुस्तक का विमोचन भी किया। सम्मान समारोह की अध्यक्षता लेफ्टिनेंट जनरल हरविंदर सिंह चंद्रा ने की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी प्राचीन समृद्ध संस्कृति गुरुकुल परंपरा से पल्लवित थी। भगवान श्रीकृष्ण, बलराम और सुदामा ने उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण की। इसी आश्रम में श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की मिसाल बनीं, जो आज भी हमें कठिन समय में अपने मित्रों की सहायता के लिए प्रेरित करती है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने समाज को कर्म की श्रेष्ठता का संदेश दिया है। इन 12 हस्तियों का हुआ सम्मान कार्यक्रम में समाज के विभित्र क्षेत्रों में अपनी साधना और उत्कृष्ट योगदान से राष्ट्र निर्माण में संलग्न 12 विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित किया गया। शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए सुरेखा चुडास्मा, समाज सेवा में जीवन समर्पित करने वाले डॉ. कैलाश गुप्ता, महिला सशक्तिकरण के लिए सुज्ञानेश्वरी दीदी, संस्कृति एवं कुटुंब प्रबोधन के लिए नंदलाल नेगांधी, युवा प्रेरणा के लिए सरबजीत सिंह कलासी, सनातन ज्ञान के लिए पंडित रोहित दुबे, उद्योग के क्षेत्र में नितिन चंडोक, चिकित्सा के क्षेत्र में डॉ. वाई. आर. यादव, पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्याम कटारे, सेवानिवृत्त अधिकारियों की श्रेणी में सब लेफ्टिनेंट (रिटा.) आर. एन. तिवारी, विधि के क्षेत्र में पूर्व सांसद आर. एन. सिंह, न्याय क्षेत्र में जस्टिस देवव्रत माधव धर्माधिकारी का सम्मान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कार्यक्रम में सम्मानित हुईं विभूतियों के कार्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक हैं। कार्यक्रम के आयोजक और विधायक अशोक रोहाणी ने कहा कि स्व. रोहाणी ने सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में अच्छा काम करने वालों को सम्मानित करने की शुरुआत की थी। उनका मानना था कि ऐसे आयोजन से समाज के अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, सांसद आशीष दुबे, विधायक नीरज सिंह लोधी, विधायक संतोष बरकड़े, विधायक अभिलाष पांडे, विधायक अजय विश्नोई, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं समाजसेवी उपस्थित थे।  

18% आबादी, लेकिन सिर्फ 4% जल संसाधन! क्या बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है भारत?

 नई दिल्ली भारत इस समय दुनिया के सबसे बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है. आबादी और पानी के संसाधनों के बीच का असंतुलन देश के भविष्य, इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुका है. दुनिया की लगभग 18% आबादी भारत में रहती है, लेकिन हमारे पास दुनिया के कुल पीने वाले पानी का सिर्फ 4% हिस्सा ही मौजूद है।  तेजी से हो रहे शहरीकरण, औद्योगीकरण और जलवायु परिवर्तन के दबाव के कारण मौजूदा संसाधनों पर बोझ बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पानी की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिसके लिए आने वाले दशक में भारी निवेश की ज़रूरत होगी।  PL Capital की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध आपूर्ति से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में लगभग ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  आर्थिक उतार-चढ़ाव के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, पानी की सुरक्षा में निवेश मुख्य रूप से स्ट्रक्चरल कारणों से बढ़ रहा है. बढ़ती आबादी, शहरों का विस्तार, औद्योगिक विकास, भूजल में कमी और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं।  PL Capital में एडवाइजरी के चीफ बिजनेस ऑफिसर विक्रम कसात ने कहा, "भारत में पानी एक अहम रणनीतिक संसाधन बनता जा रहा है. इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े दूसरे ट्रेंड्स, जो आर्थिक चक्रों से जुड़े हो सकते हैं, उनके उलट पानी की सुरक्षा में निवेश स्ट्रक्चरल और पॉलिसी पर आधारित होता है और टिकाऊ विकास के लिए ज़रूरी है।  सीवेज को ट्रीट करने की क्षमता कम  भारत में अभी हर दिन 72,000 मिलियन लीटर से ज़्यादा सीवेज पैदा होता है, लेकिन इसे ट्रीट करने की क्षमता काफी नहीं है. इस वजह से बड़ी मात्रा में बिना ट्रीट किया हुआ वेस्टवॉटर नदियों और दूसरे जल स्रोतों में बहा दिया जाता है. आने वाले सालों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग सुविधाओं का विस्तार इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले खर्च का एक बड़ा हिस्सा बनने की उम्मीद है।  रिपोर्ट में पानी की ज्यादा खपत वाले कई उद्योगों के उभरने की ओर भी इशारा किया गया है, जिनसे अच्छी क्वालिटी वाले इंडस्ट्रियल पानी की मांग बढ़ने की उम्मीद है. डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन, ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट और स्पेशलिटी केमिकल्स इन सभी में बहुत ज़्यादा शुद्ध पानी की ज़रूरत होती है. इससे पानी को शुद्ध करने और रीसाइक्लिंग टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों के लिए नए मौके बन रहे हैं।  PL Capital की एक नई थीम-बेस्ड रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्ध सप्लाई से दोगुनी हो सकती है. इससे अगले 10 सालों में वॉटर ट्रीटमेंट, वेस्टवॉटर रीसाइक्लिंग, सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर, डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और स्टोरेज सिस्टम में ₹20 लाख करोड़ के निवेश का मौका बन सकता है।  इकोनॉमिक साइकल के साथ बदलने वाले कई इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के उलट, वॉटर सिक्योरिटी में निवेश अब स्ट्रक्चरल वजहों से बढ़ रहा है. आबादी का बढ़ना, शहरों का विस्तार, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट, ग्राउंडवॉटर का कम होना और पर्यावरण से जुड़े कड़े नियम ये सभी भारत के सीमित मीठे पानी के संसाधनों पर दबाव बढ़ा रहे हैं। 

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) पर बड़ा अपडेट, मतांतरित आदिवासियों के सुझावों की कानूनी समीक्षा जारी

भोपाल  मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक 20 जुलाई से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें आदिवासियों के साथ-साथ मतांतरित आदिवासी भी कानून के दायरे से बाहर रखे जा सकते हैं। इस विषय को लेकर सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई वाली समिति को जन परामर्श में बड़ी संख्या में सुझाव मिले हैं। अधिकतर का पक्ष है कि जब आदिवासी मतांतरित हो गया तो फिर उसे आदिवासियों को मिलने वाले अधिकार व सुविधा नहीं मिलने चाहिए। सैद्धांतिक तौर पर सभी इससे सहमत भी हैं लेकिन समिति कानूनी प्रावधान देख रही है। जन परामर्श में मिले विविध सुझाव जन परामर्श के दौरान भोपाल में पूर्व न्यायाधीश मोहन पी तिवारी ने आदिवासियों को लेकर यह तर्क रखा था कि इनकी अपनी परंपराएं और व्यवस्थाएं हैं, इसलिए इन्हें कानून के दायरे से बाहर रखा जाना चाहिए। जहां तक बात मत परिवर्तन करने वाले आदिवासियों की है, तो वे मतांतरण के बाद आदिवासी तो रह नहीं गए। ब्राह्मण व ऊंची जातियों के बच्चों से विवाह कर रहे हैं, फिर भी आदिवासी बने हुए हैं। वनवासी कल्याण आश्रम एसएस कुमरे ने भी इस बात पर जोर दिया कि आदिवासी समाज की लड़की अगर दूसरी जाति में विवाह करती है तो उस पर यूसीसी लागू होना चाहिए। इसी तरह के अन्य सुझाव भी आए हैं। कानूनी पहलुओं का अध्ययन सूत्रों का कहना है कि समिति में इस विषयों को लेकर काफी विचार-विमर्श हुआ है। कानूनी पहलू देखे गए। दरअसल, संविधान के प्रविधान अनुसार अनुसूचित जनजातियों के लिए धर्म आधारित कोई रोक-टोक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न निर्णयों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि आदिवासी व्यक्ति किसी भी धर्म (जैसे ईसाई या इस्लाम) को अपना ले, फिर भी वह कानूनी रूप से अपना अनुसूचित जनजाति का दर्जा और उससे जुड़े अधिकार बनाए रख सकता है। जाति प्रमाण पत्र भी बनते हैं और आरक्षण का लाभ भी मिलता है।  

AI पर बढ़ा भारतीयों का विश्वास, 85% उपभोक्ताओं ने जताया भरोसा; रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली   भारत में 85 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर मजबूत भरोसा जताया है और भविष्य को आकार देने में इसकी भूमिका को लेकर उत्साह दिखाया है। वहीं, 94 प्रतिशत लोगों का मानना है कि तकनीक ने उनके जीवन को पहले से बेहतर बनाया है। यह जानकारी मंगलवार को जारी अश्योरेंट इंक. की एक रिपोर्ट में सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार, टेक्नोलॉजी सेंटिमेंट इंडेक्स में भारत को 74 अंक मिले हैं, जो वैश्विक औसत से काफी अधिक है। यह दर्शाता है कि भारतीय उपभोक्ताओं में नई तकनीकों के प्रति विश्वास मजबूत है और वे अगली पीढ़ी के डिजिटल अनुभवों को अपनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारतीय उपभोक्ता अब ऐसे एआई-सक्षम उपकरणों को तेजी से अपनाने के लिए तैयार हैं, जो उनकी उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर संचार और रोजमर्रा के कामों को अधिक सुविधाजनक बनाने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, स्मार्टफोन, कंप्यूटर और अन्य कनेक्टेड डिवाइस अब काम, मनोरंजन, संचार और वित्तीय लेनदेन जैसी दैनिक जरूरतों का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं की अपेक्षा है कि उन्हें हर समय बिना किसी रुकावट के सहज और भरोसेमंद डिजिटल अनुभव मिलें। अश्योरेंट इंटरनेशनल के अध्यक्ष फेडेरिको बुंगे ने कहा कि दुनिया भर में कनेक्टेड तकनीक लोगों के दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि तकनीकी अनुभव लोगों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार खुद को ढालें, ताकि नवाचार के साथ सरलता, भरोसा और विश्वसनीयता भी बनी रहे। उन्होंने कहा कि भारत में यह बदलाव बेहद तेजी से हो रहा है, जहां के डिजिटल रूप से जागरूक उपभोक्ता एआई-आधारित नवाचारों को तेजी से अपना रहे हैं और ऐसे निर्बाध अनुभव चाहते हैं जो उनके दैनिक जीवन में बिना किसी परेशानी के शामिल हो जाएं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब कनेक्टिविटी या स्टोरेज जैसी तकनीकी समस्याएं सामने आती हैं, तो वे लोगों की दिनचर्या को प्रभावित करती हैं। ऐसे में डिवाइस का भरोसेमंद प्रदर्शन और समय पर तकनीकी सहायता उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, डिवाइस प्रोटेक्शन प्लान अब उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ाने और कंपनियों के ब्रांड मूल्य को मजबूत करने का अहम माध्यम बन रहे हैं। भारत में 97 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने कहा कि यदि उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार अनुकूलित (कस्टमाइजेबल) प्रोटेक्शन प्लान मिलें, तो वे नया डिवाइस खरीदने और उसके साथ सुरक्षा योजना लेने के लिए अधिक इच्छुक होंगे। अश्योरेंट इंडिया की कंट्री डायरेक्टर हरिनी कन्नन ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे गतिशील और भविष्य की ओर तेजी से बढ़ने वाले कनेक्टेड उपभोक्ता बाजारों में से एक है। उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बड़े पैमाने पर नई तकनीकों को अपना रहे हैं और चाहते हैं कि तकनीक बिना किसी परेशानी के उनके जीवन का हिस्सा बने। ऐसे में कंपनियों के लिए बेहतर प्रोटेक्शन और सर्विस अनुभव प्रदान कर खुद को प्रतिस्पर्धियों से अलग साबित करने का बड़ा अवसर मौजूद है।

MP News: बेतवा में अब नहीं मिलेगा जहरीला पानी, सीवेज और औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए बड़ा एक्शन

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार नमामि गंगे मिशन के तहत बेतवा नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए बड़े स्तर पर काम शुरू करने जा रही है। सरकार का फोकस केवल नदी की सफाई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैज्ञानिक और दीर्घकालिक योजना के जरिए पूरे नदी तंत्र को पुनर्जीवित किया जाएगा। इसके लिए भोपाल में अधिकारियों को प्रशिक्षण देकर पूरे प्रोजेक्ट की योजना तैयार कराई जा रही है। बेतवा नदी के लिए व्यापक डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए इंजीनियरों को तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। बेतवा जहां सबसे ज्यादा प्रदूषित, वहीं से होगी संरक्षण की शुरुआत मध्यप्रदेश में नमामि गंगे परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बेतवा नदी का उद्गम रायसेन जिले के जंगलों में स्थित झिरी नामक स्थान पर है। लेकिन उद्गम के बाद भोपाल, रायसेन और विदिशा जिलों में यह नदी प्रदूषण का शिकार हो रही है। भोपाल की कलियासोत नदी और बेतवा का संगम भोजपुर के पास होता है, जहां नदी की स्थिति काफी खराब है। वहीं मंडीदीप के पास बेतवा का बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढक गया है। ऐसे में इन तीनों जिलों में बेतवा के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है। सीवेज ट्रीटमेंट पर सबसे ज्यादा फोकस भोपाल की कलियासोत नदी से लेकर बेतवा नदी में मिलने वाले सीवेज को रोकने और प्रदूषण कम करने के लिए तीनों जिलों के नगरीय निकायों के इंजीनियरों को विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंडीदीप में उद्योगों का प्रदूषित पानी सीधे बेतवा में मंडीदीप में उद्योग स्थापित होने के बाद से अब तक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं बन पाया है। इसके कारण उद्योगों से निकलने वाला प्रदूषित पानी सीधे बेतवा नदी में मिल रहा है। इसका असर नदी के साथ-साथ आसपास की खेती पर भी पड़ रहा है। सरकार की कोशिश है कि बेतवा की धारा निर्मल और अविरल बनाई जा सके। अधिकारियों ने बताया कि नमामि गंगे भारत सरकार का एकीकृत नदी संरक्षण मिशन है, जिसका उद्देश्य गंगा और उसकी सहायक नदियों का संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास सुनिश्चित करना है। मध्यप्रदेश का गंगा बेसिन 34 जिलों और 283 शहरी निकायों तक फैला है। इसमें चंबल, बेतवा, सिंध, काली सिंध, धसान, केन, क्षिप्रा, गंभीर, टोंस, सोन और पावती जैसी 11 प्रमुख नदियां शामिल हैं। बेतवा पर बढ़ा प्रदूषण का दबाव प्रस्तुति में बताया गया कि बेतवा नदी इस समय अनुपचारित सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट, नदी तटों के कटाव और पर्यावरणीय प्रवाह में कमी जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रही है। इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक और टिकाऊ डीपीआर तैयार की जाएगी। डीपीआर में शामिल होंगे ये प्रमुख बिंदु डीपीआर में केवल सीवेज प्रबंधन ही नहीं, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण, अपशिष्ट जल एवं ठोस कचरा प्रबंधन, पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाना, नदी तटों का पुनर्स्थापन, जैव विविधता संरक्षण, जलग्रहण क्षेत्र का उपचार और जनभागीदारी जैसे विषय भी शामिल किए जाएंगे। अधिकारियों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण सरकार का मानना है कि डीपीआर तैयार करने में क्षेत्रीय अधिकारियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। इसलिए उन्हें डेटा संग्रह, विभिन्न विभागों के समन्वय, हितधारकों से परामर्श और परियोजना क्रियान्वयन की तकनीकी जानकारी दी जा रही है, ताकि नमामि गंगे मिशन के लक्ष्यों को समयबद्ध और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके। प्रदेश में 824.57 करोड़ की आठ परियोजनाएं पहले से मंजूर नमामि गंगे मिशन के दूसरे चरण में मध्यप्रदेश को 824.57 करोड़ रुपए की आठ परियोजनाएं स्वीकृत हो चुकी हैं। इनमें इंदौर, उज्जैन और नागदा में सीवेज प्रबंधन, चित्रकूट की मंदाकिनी, मंदसौर की शिवना, ग्वालियर की मोरार नदी से जुड़े कार्य तथा मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की चार प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण की परियोजनाएं शामिल हैं। इन सभी योजनाओं को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता से लागू किया जा रहा है। नमामि गंगे मिशन (मध्यप्रदेश) की प्रमुख जानकारी भारत सरकार ने वर्ष 2014 में नमामि गंगे कार्यक्रम शुरू किया था। पहले चरण में गंगा किनारे के पांच राज्यों में सीवेज, औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण और अन्य परियोजनाएं शुरू की गई थीं। दूसरे चरण में गंगा की सहायक नदियों वाले राज्यों, जिनमें मध्यप्रदेश भी शामिल है, में नदी प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी परियोजनाएं स्वीकृत की गईं। मध्यप्रदेश में स्वीकृत परियोजनाएं मध्यप्रदेश में कुल आठ परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनकी कुल लागत 824.57 करोड़ रुपए है। इनमें तीन परियोजनाएं नगरीय विकास एवं आवास विभाग (इंदौर, उज्जैन और नागदा) को सीवेज एवं प्रदूषण नियंत्रण के लिए मिली हैं। एक परियोजना चित्रकूट (सतना) में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण के लिए है। एक परियोजना मंदसौर में शिवना नदी के पर्यावरण उन्नयन के लिए है। दो परियोजनाएं ग्वालियर में मोरार नदी के पुनर्जीवन और रिवर फ्रंट विकास के लिए हैं। एक परियोजना मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) की प्रयोगशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए है। इनमें सबसे बड़ी परियोजना इंदौर की कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना है, जिसकी स्वीकृत लागत 511.15 करोड़ रुपए है। क्रम परियोजना लागत (करोड़ रु.) 1 ग्वालियर में मोरार नदी का पुनर्जीवन एवं विकास 39.24 (स्वीकृति), 22.19 (अवार्ड) + 18% GST 2 मोरार नदी रिवर फ्रंट विकास (फेज-II), ग्वालियर 32.44 3 मंदसौर में शिवना नदी का पर्यावरण उन्नयन 28.91 (स्वीकृति), 27.12 (अवार्ड) 4 चित्रकूट (सतना) में मंदाकिनी नदी पर घाट निर्माण 31.88 (स्वीकृति), 26.22 (अवार्ड) 5 इंदौर में कान्ह एवं सरस्वती नदी प्रदूषण नियंत्रण हेतु अतिरिक्त विकेन्द्रीकृत STP 511.15 (स्वीकृति), 416.46 (अवार्ड) 6 उज्जैन में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य 101.57 7 नागदा में इंटरसेप्शन, डायवर्जन एवं STP कार्य 65.98 8 MPPCB प्रयोगशालाओं का सुदृढ़ीकरण 13.40