samacharsecretary.com

इंग्लैंड, आयरलैंड और जर्मनी में प्रवासी विरोधी माहौल, विदेश जाने की सोच रहे भारतीयों के लिए कितनी चिंता?

लंदन  कभी बेहतर पढ़ाई, अच्छी नौकरी और सुरक्षित भविष्य के सपने लेकर यूरोप जाने वाले प्रवासियों के लिए अब माहौल पहले जैसा नहीं रहा. ब्रिटेन, आयरलैंड, जर्मनी, नीदरलैंड और कई दूसरे यूरोपीय देशों में पिछले कुछ सालों से प्रवासियों को लेकर बहस तेज होती जा रही है. ताजा हालात ये हैं कि कहीं सड़कों पर प्रदर्शन हो रहे हैं, कहीं सरकारें वीजा नियम सख्त कर रही हैं और कहीं स्थानीय लोग अपने शहरों में बढ़ती आबादी और संसाधनों पर दबाव को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।  ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर यूरोप में प्रवासियों के खिलाफ यह गुस्सा क्यों बढ़ रहा है? क्या भारतीय भी इसके निशाने पर हैं? और अगर हां, तो फिर इस माहौल का भारतीय छात्रों, कामगारों और परिवारों पर क्या असर पड़ सकता है? इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें कुछ साल पीछे जाना होगा।  साल 2015 में सीरिया, अफगानिस्तान और पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता की वजह से लाखों लोग यूरोप की ओर बढ़े. जर्मनी समेत कई देशों ने बड़ी संख्या में शरणार्थियों को स्वीकार किया. उस समय इसे मानवीय कदम माना गया. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतते गए, कई देशों में लोगों को लगने लगा कि स्कूलों, अस्पतालों, मकानों और सरकारी सेवाओं पर दबाव बढ़ रहा है।  बेहतर भविष्य और अच्छी नौकरी के लिए भारतीय भी बड़ी संख्या में यूरोप जाने लगे. शिक्षा से लेकर रहन-सहन, साफ हवा और परिवार के लिए बेहतर माहौल की तलाश में भारतीयों ने यूरोपीय देशों को चुना. इसी दौरान यूक्रेन युद्ध की वजह से भी लाखों लोग अन्य यूरोपीय देश पहुंचे. यहीं से प्रवास और शरणार्थियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।  ब्रिटेन में क्यों भड़का लोगों का गुस्सा? ब्रिटेन में पिछले कुछ वर्षों से प्रवासी एक बड़ा मुद्दा रहा है. यहां कहावत है कि लोग इंग्लिश चैनल पार करके छोटी नावों से आते हैं और संसाधनों पर कब्जा कर लेते हैं. जंगों और स्थानीय प्रताड़ना की वजह से जब लोग ब्रिटेन पुहंचते हैं और सरकार उन्हें स्वीकार करती हैं तो उनके रहने-सहने के लिए सरकारी इंतजाम भी किए जाते हैं।  कहा जाता है कि सरकार इन लोगों को अस्थायी रूप से होटलों में ठहराती है. कई शहरों और कस्बों में स्थानीय लोगों ने इसका विरोध शुरू कर दिया. उनका कहना था कि उनके इलाके में पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूलों और आवास की कमी है. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर कई बार ऐसी खबरें और अफवाहें भी फैलती रही हैं, जिनसे तनाव बढ़ा. कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन हिंसक भी हुए।  कई मामलों में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा. हालांकि, इन प्रदर्शनों का मुख्य मुद्दा शरणार्थी नीति और अवैध प्रवास था, लेकिन माहौल ऐसा बना कि कई प्रवासी समुदायों को असुरक्षा महसूस होने लगी है।  आयरलैंड में क्या हुआ, प्रदर्शन क्यों हो रहे हैं? कुछ साल पहले तक आयरलैंड को प्रवासियों के प्रति आमतौर पर एक उदार देश माना जाता था. लेकिन हाल के वर्षों में वहां भी हालात बदलने लगे हैं. डबलिन और दूसरे शहरों में मकानों की भारी कमी है. किराए आसमान छू रहे हैं. स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि बड़ी संख्या में नए लोगों के आने से दबाव और बढ़ा है. 2023 के आखिर में डबलिन में हुई हिंसा के बाद प्रवास और सुरक्षा का मुद्दा राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन गया है. इसके बाद कई जगहों पर शरणार्थी केंद्रों और आवास योजनाओं के खिलाफ प्रदर्शन देखने को मिले. ताजा हालात ये हैं कि शहर-शहर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे हैं।  ताजा मामला उत्तरी आयरलैंड की राजधानी बेलफास्ट में एक सूडानी शरणार्थी से जुड़ी चाकूबाजी से जुड़ा है, जिससे हालात तनावपूर्ण हो गए. घटना के विरोध में भड़की हिंसा के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं. हालात को काबू में करने के लिए एंटी-राइट पुलिस, स्पेशल फोर्सेज और वॉटर कैनन की तैनाती की गई. प्रदर्शनकारियों पर ईंटें फेंकने और वाहनों में आग लगाने के आरोप हैं, जिसके बाद कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है।  स्थानीय मीडिया की मानें तो कुछ दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े उपद्रवियों ने प्रवासियों और जातीय अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हुए कई इलाकों में घर-घर जाकर डराने-धमकाने की कोशिश भी की. इस दौरान कुछ मकानों और कारोबारों पर हमले किए गए और प्रदर्शनकारियों ने कई संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचाया।  जर्मनी में प्रवासियों और शरणार्थिों पर बहस तेज जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है. यहां लाखों विदेशी काम करते हैं. भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. लेकिन जर्मनी में भी प्रवास को लेकर राजनीतिक माहौल बदल रहा है. कुछ राजनीतिक दलों का कहना है कि देश को अपनी सीमाओं और शरणार्थी व्यवस्था पर ज्यादा नियंत्रण की जरूरत है।  दूसरी तरफ लाखों लोग ऐसे भी हैं जो प्रवासियों के समर्थन में सड़कों पर उतरते हैं. यानी जर्मनी में लड़ाई सिर्फ प्रवासियों के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज दो अलग-अलग विचारधाराओं में बंटा हुआ नजर आ रहा है।  नीदरलैंड और दूसरे देशों में क्या तस्वीर है? यूरोप के अन्य देशों में भी प्रवास को लेकर बहस तेज हुई है. कहीं मुद्दा मकानों की कमी है, कहीं सुरक्षा को लेकर चिंता है, तो कहीं सरकारों पर यह आरोप लगाया जा रहा है कि वे सीमाओं को नियंत्रित नहीं कर पा रहीं. इटली लंबे समय से भूमध्य सागर के रास्ते आने वाले प्रवासियों का मुख्य प्रवेश द्वार रहा है. वहीं फ्रांस में भी समय-समय पर प्रवास और राष्ट्रीय पहचान को लेकर प्रदर्शन देखे जाते हैं. यानी हर देश की अपनी कहानी है, लेकिन लगभग हर जगह कुछ समान कारण दिखाई देते हैं।  दक्षिणी यूरोप के कई हिस्सों में इस समय बड़े पैमाने पर पर्यटन के खिलाफ भी विरोध बढ़ रहा है. नीदरलैंड, बेल्जियम, स्वीडन, फ्रांस, स्पेन और इटली के कई शहरों में भी स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे हैं. लोगों का कहना है कि पर्यटकों की वजह से मकानों के किराए और संपत्तियों की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं, जबकि सार्वजनिक सुविधाओं पर भी दबाव बढ़ा है।   स्पेन में बार्सिलोना और कैनरी द्वीप समूह समेत 40 से ज्यादा शहरों में प्रदर्शन हुए हैं. वहीं इटली के वेनिस, फ्लोरेंस, रोम और मिलान में किराये वाले पर्यटन आवासों के खिलाफ … Read more

छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

रायपुर कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।  छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।    कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (च्ड ैट।छपकीप) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।      योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।      पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।     छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।

“शिक्षा केंद्रों के निकट छेड़छाड़ की घटनाएं न हों, महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर रहें”

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बदलते दौर में पुलिस बल को नई चुनौतियों से निपटने के लिए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे। अपराधों के अन्वेषण का दायित्व निभाने वाले विवेचना अधिकारियों को अन्वेषण भत्ता भी मिले, इस दृष्टि से अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। इस क्षेत्र में अपराध स्थल पर त्वरित पहुंच, सुरक्षा व्यवस्था, साक्ष्य संकलन, अभियुक्त गवाह और पीड़ित के परिवहन, भोजन आदि के साथ फोटोग्राफी -वीडियोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य संग्रह, न्यायलीन प्रक्रिया से जुड़े आकस्मिक खर्च देखते हुए मध्यप्रदेश में अन्वेषण भत्ता लागू किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में निर्देश दिए कि पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति मजबूत रहे, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर आरक्षक स्तर तक सजगता और सक्रियता से भूमिका निभाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में गृह विभाग की समीक्षा में कहा कि सायबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गृह विभाग द्वारा आईटी कंसल्टेंट की सेवाएं लेने का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। बैठक में सिंहस्थ: 2028 के लिए भीड़ प्रबंधन, कानून व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से आवश्यक पुलिस बल की व्यवस्था पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से विभिन्न कंट्रोल रूम तथा अन्य व्यवस्थाओं को इस तरह पूर्ण किया जाए ताकि उनका स्थाई महत्व और प्रभाव रहे। उज्जैन में अनेक बाबा महाकाल मंदिर सहित देव स्थान हैं। सभी व्यवस्थाओं को तात्कालिक के स्थान पर स्थायी अधोसंरचना के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बसंत पंचमी और हाल ही में भोजशाला से संबंधित प्रसंग में पुलिस बल की सजग सक्रिय भूमिका के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और फोर्स के अन्य सदस्यों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचार सराहनीय हैं। राज्य को नक्सल मुक्त बनाने, आपदा मित्रों को प्रशिक्षित करने, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, अन्य विभागों के सहयोग से सुगम परिवहन सुनिश्चित करने, अग्निशमन इकाईयों को सहयोग, एयर एम्बुलेंस के उपयोग में सहयोग, सैनिक कल्याण प्रयासों को बढ़ाने के कार्य सराहनीय हैं। इसके साथ ही खुले स्थानों में मांस विक्रय पर प्रतिबंध और तेज ध्वनि में स्पीकर आदि के प्रयोग को नियंत्रित करने के निर्देशों का भी निरंतर पालन किया गया है। यह व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहें, इसके लिए विभाग का अमला सक्रिय रहे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन वर्चुअली शामिल हुए। अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा, एडीजी श्री ए. साई मनोहर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस चयन और भर्ती बोर्ड के गठन की पहल, सायबर अपराधों, सोशल मीडिया आधारित गतिविधियों और अपराधों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के बढ़ते दुरूपयोग के प्रभावी विशलेषण के लिए राज्य सायबर सेल ने विशेषज्ञों की सेवाएं प्राप्त करने के संबंध में विचार किया गया। इसके साथ ही काउंटर टेररिस्ट ग्रुप की संरचना और बल में वृद्धि, राज्य स्तरीय उन्नत प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से एटीएस,एसटीएफ, हॉक फोर्स और अन्य विशिष्ट इकाईयों के लिए क्षमता संवर्धन प्रबंध, जिला स्तर पर सीन ऑफ क्राइम मोबाइल इकाई के संचालन के प्रावधान, वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों को विशेष भत्ता देने, एआई का प्रयोग कर सेफगार्ड एमपी प्रणाली के माध्यम से बुजुर्गों, कमजोर व्यक्तियों, महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में एक नई तरह की पहल करने के संबंध में भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश          पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ रहे, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी मुस्तैद रहें।          शिक्षा केंद्रों के निकट छेड़छाड़ की घटनाएं न हों, महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर रहें।          गौवंश रक्षा पर पूरा ध्यान दें, उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध सख्त एक्शन हो।          भू-माफिया के विरूद्ध कार्यवाही सख्त हो। अपराधियों की सम्पत्ति कुर्क करने में पीछे न रहें। संगठित अपराधियों पर निरंतर नजर रखी जाएं। मुखबिर तंत्र सशक्त रहना चाहिए।          राज्य में ई-चालान व्यवस्था और ई-साक्ष्य जैसे उपायों का अधिक से अधिक प्रयोग करें। आईटी के अधिकतम प्रयोग से अपराधों के नियंत्रण और जांच कार्य में आसानी लाएं जिससे कि मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी बने।          प्रतिदिन ग्रामों से दूध ,सब्जी आदि लाने वाले किसानों को कृषक कल्याण वर्ष में जीवन रक्षा के लिए हेलमेट प्रदान किए जा रहे हैं। पुलिस विभाग ऐसे अभिनव प्रयोग में सहयोगी बने और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए उपयोगी हेलमेट के इस्तेमाल के लिए नागरिकों को जागरूक करने का अभियान जारी रखे।          पुलिसकर्मियों के लिए अपने आवास अर्थात आशियाने की व्यवस्था करने में गृह विभाग आवश्यक सहयोग दे। पुलिस लाइन्स में आवास गृहों की व्यवस्था और पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा नए आवास गृहों के निर्माण करवाने के साथ ही वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, ताकि कम व्यय पर पुलिस जवानों को मकान उपलब्ध हो सके।          विभाग के श्रेष्ठ कार्य करने वालों को प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाए।          प्रदेश में नशा विरोधी अभियान निरंतर संचालित करें। युवाओं को हर हालत में नशे से बचाना है।          सिंहस्थ : 2028 में सुरक्षा उपकरणों के साथ ही पार्किंग, परिवहन और भीड़ प्रबंधन के लिए बेहतर व्यवस्थाएं बनाएं। प्रमुख उपलब्धियां और नवाचार बैठक में गृह विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए श्रेष्ठ कार्यों की भी चर्चा हुई। प्रमुख उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी दी गई।          सैनिक कल्याण के क्षेत्र मध्यप्रदेश के कार्य की रक्षा मंत्रालय द्वारा सराहना की गई।          संपदा संचालनालय द्वारा शासकीय आवास गृह के ऑनलाइन आवंटन का कार्य किया जा रहा है।          आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता वर्धन के लिए निरंतरण प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।  

दुनिया के पहले खरबपति बनने की राह पर एलन मस्क, कई देशों की अर्थव्यवस्था से ज्यादा हुई संपत्ति

वाशिंगटन एलन मस्क खरबपति बनने से केवल 29 अरब डॉलर दूर हैं। उनकी संपत्ति में गुरुवार को आया 274 अरब डॉलर का उछाल उनके SpaceX के आईपीओ से आया है।एलन मस्क अब ताईवान (976.72 अरब डॉलर) आयरलैंड (779.38 अरब डॉलर), बेल्जियम (776.73 अरब डॉलर), स्वीडन (760.48 अरब डॉलर), इजरायल (719.85 अरब डॉलर), अर्जेंटीना (688.38 अरब डॉलर) जैसे देशों से भी अमीर हो गए हैं। उनका कुल नेटवर्थ इन देशों की जीडीपी से भी अधिक है। कैसे बनेंगे दुनिया के पहले खरबपति ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के मुताबिक एलन मस्क की कुल दौलत 971 अरब डॉलर हो गई है। जबकि, फोर्ब्स रियल टाइम बिलियनेयर इंडेक्स के मुताबिक अब वह 982 अरब डॉलर के मालिक हैं। रॉयटर्स के अनुमान के अनुसार शेयर मार्केट में स्पेसएक्स की लिस्टिंग के बाद मस्क की दौलत एक ट्रिलियन डॉलर के पार चली जाएगी और वह दुनिया के पहले खरबपति बन जाएंगे। SpaceX का सबसे बड़ा IPO SpaceX ने अपने IPO में 75 अरब डॉलर जुटाए हैं। कंपनी के शेयर 135 डॉलर प्रति शेयर के भाव पर जारी किए गए हैं, जिससे कंपनी का बाजार मूल्य करीब 1.77 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 152 लाख करोड़ रुपये) पहुंच गया है। इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा IPO माना जा रहा है। SpaceX क्यों है इतना खास? 2002 में शुरू हुई SpaceX आज रॉकेट लॉन्च, स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट और AI इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में काम कर रही है। निवेशक इसे भविष्य की सबसे बड़ी टेक और स्पेस कंपनियों में गिन रहे हैं। IPO को संस्थागत और रिटेल निवेशकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है। भारत के सबसे अमीर लोगों से कितने आगे? ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स के अनुसार गौतम अडानी की संपत्ति लगभग 115 अरब डॉलर और मुकेश अंबानी की संपत्ति उससे भी कम है। ऐसे में मस्क की संभावित 1 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ भारत के शीर्ष अरबपतियों की संपत्ति से कई गुना अधिक होगी। निवेशकों की नजर लिस्टिंग पर अब पूरी दुनिया की नजर SpaceX की लिस्टिंग पर है। अगर शेयर में शुरुआती कारोबार के दौरान तेजी आती है तो एलन मस्क आधिकारिक तौर पर दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन सकते हैं। इस साल 2026 में मस्क की संपत्ति में 351 अरब डॉलर का इजाफा हो चुका है यानी कुल 56.7% की बढ़ोतरी। इसमें गुरुवार को 274 अरब डॉलर की उछाल शामिल है, जो भारत के कई राज्यों के वार्षिक बजट से कई गुना अधिक है। यह राशि भारत की कई बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त मार्केट कैप के बराबर है।

मोदी सरकार के 12 साल पर बोले सम्राट चौधरी, बिहार को औद्योगिक हब बनाने की तैयारी

पटना पटना के एक निजी होटल में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश और बिहार में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और बिहार के विकास को लेकर सरकार की आगामी योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं. अब सरकार का लक्ष्य भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और बिहार भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भाजपा ने अपने संकल्पों को पूरा किया सम्राट चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा अपने वैचारिक और राजनीतिक संकल्पों को पूरा करने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि जनसंघ के दौर से लेकर आज तक पार्टी ने जो वादे किए, उन्हें पूरा करने की दिशा में काम किया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने को ऐतिहासिक फैसला बताया. साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा सपना बताया, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में साकार हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा कभी अपने एजेंडे और विचारधारा से पीछे नहीं हटी है. यही कारण है कि जनता लगातार पार्टी पर भरोसा जता रही है. बिहार में 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई नई औद्योगिक परियोजनाओं की शुरुआत हुई है और बड़े निवेशक बिहार में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने घोषणा की कि सरकार ने 20 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारने का लक्ष्य तय किया है. उनका कहना था कि यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में डाटा सेंटर परियोजना पर जल्द काम शुरू होने वाला है, जिससे आईटी और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे. उद्योगों को 30 दिनों में मिलेगी मंजूरी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के लिए आवेदन करने वाले निवेशकों को अब लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत उद्योगों से जुड़े जरूरी प्रस्तावों को 30 दिनों के भीतर मंजूरी मिल जाएगी. इससे कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. राजगीर और मुंगेर में बनेगा डिफेंस कॉरिडोर मुख्यमंत्री ने बिहार में रक्षा क्षेत्र के विकास को लेकर भी बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि राजगीर और मुंगेर को डिफेंस कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. उनका कहना था कि देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बिहार भी इस विकास यात्रा का हिस्सा बनेगा. डिफेंस कॉरिडोर बनने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में निवेश बढ़ेगा. एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप पर जोर सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के हर जिले को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राजगीर और सासाराम-कैमूर क्षेत्र के बीच नई एयरस्ट्रिप बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार विभिन्न जिलों में एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप विकसित किए जाएंगे. इससे पर्यटन, उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने पटना एयरपोर्ट के नए स्वरूप की भी सराहना की और कहा कि अब वहां पहुंचकर बिहार में बदलाव साफ दिखाई देता है. सड़क, बिजली और सौर ऊर्जा पर फोकस मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सड़क और बिजली के क्षेत्र में बिहार ने बड़ी प्रगति की है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण और गांवों को जोड़ने के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के जरिए लाखों परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी तथा बिजली बिल का बोझ कम होगा. जीएसटी और जनधन योजना का किया जिक्र सम्राट चौधरी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. उन्होंने बिहार की 14 करोड़ आबादी को राज्य की सबसे बड़ी ताकत बताया. उन्होंने जनधन योजना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है. इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है. शिक्षकों के वेतन और पेंशन पर नहीं लगेगी रोक राज्य की वित्तीय स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों के वेतन और पेंशन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वेतन और पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में रोका नहीं जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं के उपयोगिता प्रमाणपत्र जरूर लिए जाएं, लेकिन वेतन और पेंशन भुगतान में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए. बड़ी परियोजनाओं की खुद करेंगे समीक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को लंबित योजनाओं की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है. इसी के तहत बिहार सरकार ने भी बड़ा फैसला लिया है. सम्राट चौधरी ने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा वह स्वयं करेंगे. इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी की वजहों का पता चलेगा और विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

3 भारतीय नागरिकों की मौत से बढ़ा तनाव, UN ने भी अमेरिका को सुनाई खरी-खरी; नियम-कायदों की दिलाई याद

नई दिल्ली ओमान तट के पास एक कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद भारत ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। नागरिकों की जान जाने की इस गंभीर घटना पर कड़ी आपत्ति जताते हुए विदेश मंत्रालय (MEA) ने अमेरिकी उप-राजदूत जेसन मीक्स को दोबारा तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया है। पिछले कुछ ही दिनों में यह दूसरी बार है जब भारत ने किसी अमेरिकी राजनयिक को तलब किया है। 30 मिनट तक चला कड़ा कूटनीतिक विरोध विदेश मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव (अमेरिका) नागराज नायडू ने जेसन मीक्स को तलब किया। यह बैठक लगभग 40 मिनट तक चली, जिसमें भारत ने कॉमर्शियल जहाज पर हुए हमले और उसमें तीन भारतीयों के मारे जाने पर अपना कड़ा आक्रोश व्यक्त किया। चूंकि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं, इसलिए उनकी जगह जेसन मीक्स को यह कूटनीतिक विरोध सौंपने के लिए बुलाया गया। अमेरिका ने जहाजों पर हमला किया; टाइमलाइन     8 जून: अमेरिकी हमले में जहाज 'मैरीवेक्स' निशाना बना; 24 भारतीय क्रू सदस्यों को बचाया गया     9 जून: 'एमटी सेटेबेलो' पर हमला; 3 भारतीयों की मौत, 21 को बचाया गया     10 जून: अमेरिकी CdA मीक्स को तलब किया गया     11 जून: 'एमटी जलवीर' पर हमला; 20 भारतीय क्रू सदस्यों को बचाया गया     12 जून: अमेरिकी CdA मीक्स को तलब किया गया निशाना बने तीन प्रमुख जहाज और भारतीयों की मौत हालिया विवाद मुख्य रूप से तीन कॉमर्शियल जहाजों पर हुए हमलों से जुड़ा है, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल मौजूद था। 'Settebello' पर हमला और मौतें: बुधवार को ओमान के सोहर बंदरगाह के पास इस पलाऊ-झंडे वाले टैंकर को निशाना बनाया गया। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वारा दागी गई मिसाइल के कारण जहाज के इंजन रूम में आग लग गई। जहाज पर 24 भारतीय सवार थे। इस भयावह हमले में 3 भारतीय नाविकों की जान चली गई, जबकि 21 को बचा लिया गया। 'MT Marivex' पर हमला: इससे पहले सोमवार को एक अन्य टैंकर, 'MT Marivex' पर भी अमेरिकी नौसेना द्वारा हमला किया गया था। उस जहाज पर भी 24 भारतीय नाविक मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया था।  अमेरिकी नौसेना के हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत पर संयुक्त राष्ट्र समेत दूसरे संगठनों और देशों ने अमेरिकी कार्रवाई की तीखी आलोचना की है और इसे अस्वीकार्य बताया है. अमेरिकी दादागीरी के सामने तनकर खड़े होते हुए अंतर्राष्ट्रीय मेरीटाइम संगठन (अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन ) ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर डालने वाली सभी गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय कानूनों और समुद्र में व्यक्ति की सुरक्षा का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. वहीं UN ने कहा कि वो IMO के बयान से इत्तेफाक रखता है।  बुधवार को अमेरिका ने पलाऊ के झंडे वाले एक टैंकर पर हमला किया था. इस टैंकर का नाम MT सेटेबेलो है. अमेरिका नौसेना ने सेटेबेलो पर मिसाइलों से हमला किया था. इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी।  भारत ने गुरुवार को कहा कि पिछले चार दिनों में ओमान के तट के पास भारतीय क्रू मेंबर वाले तीन कमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी सेना ने हमला किया, जिसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई. नई दिल्ली ने इन हमलों को लेकर अमेरिका के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।  दुनिया भर में जहाजों की सुरक्षा और समुद्री अनुशासन करने वाली संयुक्त राष्ट्र की विशेष एजेंसी अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने इस घटना के लिए अमेरिका की तीखी आलोचना की।  IMO ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट के पास हुई इस घटना में जहाज पर एक प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ, जिससे जहाज में आग लग गई और तीन नाविकों की मौत हो गई।  IMO के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने कहा कि वह किसी भी पक्ष की ओर से की गई ऐसी किसी भी हरकत की "कड़ी" निंदा करते हैं, जिससे नाविकों की जान और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग की सुरक्षा को खतरा हो।  "यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है. मेरी संवेदनाएं उन तीन नाविकों के परिवारों के साथ हैं जिनकी जान चली गई और उन सभी लोगों के साथ भी जो क्रू सदस्यों के बारे में खबर का इंतजार कर रहे हैं।  डोमिंग्वेज़ ने कहा कि IMO ने हर समय नाविकों, आम नागरिक जहाजों और नेविगेशन की आज़ादी की सुरक्षा की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।  डोमिंग्वेज़ ने कहा, "अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर असर डालने वाली सभी गतिविधियों में अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्र में जीवन की सुरक्षा का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए. नाविकों की सुरक्षा एक साझा ज़िम्मेदारी है जिसे सबसे ज़्यादा अहमियत दी जानी चाहिए।  IMO के बयान से सहमति जताते हुए संयुक्त राष्ट्र के सेक्रेटरी-जनरल ने इस हमले की निंदा की. सेक्रेटरी-जनरल के प्रवक्ता स्टीफन डुजारिक ने ने कहा कि, 'खास बात यह है कि सेट्टेबेलो टैंकर पर हमला हुआ और कई भारतीय नाविक मारे गए. और इस हमले की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (IMO) के सेक्रेटरी-जनरल ने साफ़ तौर पर निंदा की थी. और हम उस बात का पूरी तरह से समर्थन और अनुमोदन करते हैं।    एमटी जलवीर पर हमला: ताजा मामला इस गिनी-बिसाऊ के ध्वज वाले जहाज एमटी जलवीर से जुड़ा है। अमेरिकी मध्य कमान ने एक बयान में कहा कि उसने एमटी जलवीर को ईरान के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध का कथित तौर पर उल्लंघन करके ईरानी तेल परिवहन करने के प्रयास के आरोप में निष्क्रिय कर दिया। कमान ने कहा कि चालक दल द्वारा 'अमेरिकी सेना के निर्देशों का बार-बार पालन न करने' के बाद एक अमेरिकी विमान ने जहाज के इंजन कक्ष पर हमला किया। ओमान बंदरगाह के पास इस टैंकर पर हमले के बाद उसमें सवार 22 भारतीयों को बृहस्पतिवार को सुरक्षित निकाल लिया गया था। पिछले चार दिनों में ओमान तट के निकट अमेरिकी सेना द्वारा भारतीय चालक दल वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले की यह तीसरी घटना है। भारत का सख्त रुख भारतीय नागरिकों की जान जाने से यह कूटनीतिक विवाद अब एक बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि वाणिज्यिक शिपिंग और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने की घटनाएं बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएंगी। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों … Read more

समर्थ की शादी में डांस करना पड़ा भारी? ट्विशा शर्मा के पिता ने वकीलों के खिलाफ दर्ज कराई शिकायत

भोपाल  बहुचर्चित ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई की जांच जारी है। इसी बीच, ट्विशा के पिता ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है और 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल स्कीम' से जुड़े कुछ वकीलों की भूमिका की जांच की मांग की है। ट्विशा शर्मा के पिता नवनिधि शर्मा ने मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस विवेक रूसिया के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। अधिकारी की भूमिका पर भी उठ सवाल उन्होंने कानूनी सहायता प्रणाली से जुड़े कुछ वकीलों और एक अधिकारी की भूमिका की जांच कराने की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था के तहत नियुक्त कुछ वकील आरोपी पक्ष का समर्थन करते नजर आए। शिकायत के अनुसार, इन वकीलों की नियुक्ति भोपाल में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में गिरिबाला सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई थी। समर्थ की शादी में किया था डांस शर्मा ने शिकायत के साथ एक तस्वीर भी सौंपी है, जिसमें 'लीगल एड डिफेंस काउंसिल' स्कीम के असिस्टेंट एडवोकेट श्रेयस सक्सेना को समर्थ सिंह की शादी में नाचते हुए दिखाया गया है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि 15 मई को अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सक्सेना कोर्ट में आरोपी के निजी वकील के साथ मौजूद थे। ट्विशा शर्मा के पिता ने 'चीफ लीगल एड डिफेंस काउंसिल' रीना वर्मा का नाम भी शिकायत में शामिल किया है। लीगल एड वकीलों ने सक्रिय भूमिका निभाई उन्होंने सवाल उठाया है कि जब आरोपी के पास पहले से निजी वकील मौजूद था, तो लीगल एड वकीलों ने सक्रिय भूमिका क्यों निभाई। इसके अलावा, ब्यूटी पार्लर और बाद में विवाह समारोह में देखे गए एक अज्ञात व्यक्ति की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में उस व्यक्ति की पहचान तथा घटनाक्रम में उसकी भूमिका को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अदालत में ट्विशा शर्मा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील अंकुर पांडे ने कहा कि यह मामला संबंधित अधिकारियों के समक्ष रख दिया गया है। पांडे ने शुक्रवार को कहा, "हमने संबंधित अधिकारियों को शिकायत भेज दी है और अब इस मामले में कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।" शिकायत में लीगल एड वकीलों की भूमिका और आरोपी के साथ उनके कथित संबंधों की निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। साथ ही, अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान हुए कानूनी प्रतिनिधित्व की समीक्षा करने की भी मांग की गई है।     ट्विशा शर्मा केस में आया नया मोड़     ट्विशा के पिता ने दर्ज कराई आपत्ति     असिस्टेंट एडवोकेट श्रेयस सक्सेना की भूमिका पर सवाल     16 जून तक रिमांड पर हैं समर्थ और उसकी मां 16 जून को खत्म होगी रिमांड इस बीच, ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में सीबीआई की जांच जारी है। पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह की न्यायिक हिरासत 16 जून को समाप्त हो रही है। एजेंसी उस दिन दोनों को अदालत में पेश करेगी, जहां यह तय किया जाएगा कि उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई जाए या आगे की पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड दिया जाए। सीबीआई ने पहले अदालत को बताया था कि आवश्यकता पड़ने पर वह रिमांड की मांग करेगी। हालांकि, 2 जून को भोपाल सेंट्रल जेल भेजे जाने के बाद से अब तक किसी रिमांड की मांग नहीं की गई है।

Inflation Alert: खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों से तेज हुई रिटेल महंगाई, जानिए कितना बढ़ा असर

नई दिल्ली देश में खाने-पीने की चीजों के दाम मई महीने में बढ़े हैं. रिटेल महंगाई दर मई के महीने में बढ़कर 3.93 प्रतिशत पहुंच गई है. अप्रैल महीने में महंगाई दर 3.48 प्रतिशत थी. हालांकि, महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमान 4 प्रतिशत से नीचे रही है।  महंगाई दर रिजर्व बैंक के अनुमान 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे है. लगातार 16वें महीने महंगाई दर आरबीआई के लक्ष्य के नीचे रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और ईरान युद्ध के कारण महंगाई दर बढ़ी है. जून के मॉनिटरी पॉलिसी में आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए महंगाई दर को सुधार करते हुए पहले के 4.6 प्रतिशत की तुलना में बढ़ाकर 5.1 फीसदी किया था।  ईरान, अमेरिका और इजरायल युद्ध के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर प्रेशर बढ़ा है. करेंसी मार्केट पर भी इसका असर पड़ा है. हालांकि, इन सब झटकों के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है और देश की जीडीपी 7.8 प्रतिशत है. खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमत महंगाई दर को बढ़ा रही है. इसकी कारण CPI में तेजी आई है।  अप्रैल के मुकाबले मई में दर्ज हुई बड़ी बढ़त सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मई महीने की खुदरा महंगाई दर ने अप्रैल के 3.48% के स्तर से एक लंबी छलांग लगाई है और यह सीधे 3.93% पर जा पहुंची है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) की गणना श्रृंखला में हाल ही में किए गए ढांचागत बदलावों के बाद से अब तक की यह सबसे बड़ी और उच्चतम रीडिंग दर्ज की गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आया उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर चुनिंदा खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई मौसमी तेजी को माना जा रहा है, जिसने खुदरा बाजार के रुख को बदल दिया है। आरबीआई के निर्धारित बजटीय लक्ष्य के भीतर आंकड़े महंगाई के इस बढ़ते ग्राफ के बीच आम आदमी और नीति निर्माताओं के लिए सबसे बड़ी तसल्ली यह है कि यह आंकड़ा अब भी केंद्रीय बैंक के नियंत्रण दायरे में है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक को देश की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए खुदरा महंगाई दर को 4% के मानक स्तर से नीचे रखने का वैधानिक लक्ष्य सौंपा हुआ है, जिसमें परिस्थितियों के अनुसार 2% का ऊपरी और निचला मार्जिन (टोलरेंस बैंड) शामिल किया गया है। वर्तमान में 3.93% की दर पर होने के कारण यह केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत ब्याज दरों (रेपो रेट) की समीक्षा करते समय बहुत अधिक आक्रामक रुख अपनाने के दबाव को कम करती है। पश्चिम एशिया के संकट का घरेलू बाजार पर सीधा असर बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि पश्चिम एशिया क्षेत्र में जारी सैन्य और राजनीतिक गतिरोध के चलते वैश्विक व्यापारिक मार्गों पर माल ढुलाई की लागत में भारी इजाफा हुआ है। इस वैश्विक संकट के कारण भारत आयातित खाद्य तेलों, ईंधनों और अन्य आवश्यक कच्चे माल के लिए अधिक भुगतान कर रहा है, जिसका संचयी प्रभाव देश के भीतर खुदरा वस्तुओं के अंतिम मूल्य संवर्धन पर दिखाई दे रहा है। यदि आने वाले समय में वैश्विक स्तर पर यह तनाव और गहराता है, तो आगामी तिमाहियों में घरेलू बाजार के भीतर खुदरा महंगाई दर के इस 4% के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।  

किसानों से जुड़े मुद्दों पर मंथन, समीक्षा बैठक में खाद-बीज और योजनाओं की स्थिति का आकलन

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी ने महासमुंद जिले के कृषि एवं समवर्गीय विभागों की समीक्षा बैठक लेकर खरीफ सीजन की तैयारियों, खाद-बीज की उपलब्धता और किसान हितैषी योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। बैठक उप संचालक कृषि कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में चंद्रवंशी ने जिले की सभी सहकारी समितियों में किसानों के लिए खाद और बीज की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा निर्धारित दर पर वितरण व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को समय पर कृषि आदान उपलब्ध कराना शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने विभागीय कार्ययोजना में किसानों के सुझावों और समस्याओं को शामिल कर शासन स्तर पर भेजने के निर्देश भी दिए। बैठक में ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत रासायनिक खेती के बजाय जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने, दलहन एवं तिलहन फसलों का रकबा बढ़ाने, किसानों को प्रशिक्षण देने तथा व्यापक जागरूकता अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में कृषि, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, सिंचाई, विपणन संघ, सहकारी बैंक और कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी एवं वैज्ञानिक उपस्थित रहे।

वन विभाग ने हटाया अवैध निर्माण, इटावा सफारी के पास जमीन पर किया वृक्षारोपण

इटावा इटावा में एक ऐसी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है, जिसकी चर्चा शहर से लेकर सोशल मीडिया तक हो रही है. वजह सिर्फ एक ध्वस्तीकरण अभियान नहीं, बल्कि वह तस्वीर है जिसने लोगों को चौंका दिया. जिन लोगों ने रात तक एक मजार देखा था, सुबह जब वे उसी स्थान पर पहुंचे तो पूरा दृश्य बदल चुका था. जहां पहले मजार दिखाई देती थी, वहां अब पेड़-पौधे और हरियाली नजर आ रही थी. मामला इटावा सफारी पार्क के पीछे बीहड़ क्षेत्र में स्थित सैयद बाबा की मजार से जुड़ा है. वन विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में इस मजार से जुड़े निर्माण को हटाकर जमीन को खाली कराया गया. इसके बाद उसी स्थान पर वृक्षारोपण कर दिया गया. बताया जा रहा है कि कार्रवाई इतनी गोपनीय और शांतिपूर्ण तरीके से की गई कि आसपास के अधिकांश लोगों को इसकी जानकारी तब हुई, जब काम पूरा हो चुका था. रात में चला अभियान, सुबह बदली तस्वीर स्थानीय लोगों के अनुसार देर रात प्रशासनिक गतिविधियां तेज हुईं. सुरक्षा व्यवस्था के बीच सबसे पहले मजार परिसर में मौजूद सामग्री और अवशेषों को हटाया गया. इसके बाद बुलडोजर की मदद से वहां बने कमरे और अन्य निर्माण को ध्वस्त किया गया. कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया. प्रशासन ने कोशिश की कि प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रहे और किसी तरह की अव्यवस्था न हो. सुबह जब लोगों ने इलाके का रुख किया तो वहां का नजारा बदल चुका था. ध्वस्तीकरण के बाद मलबा भी हटा दिया गया था और जमीन को समतल कर वन विभाग की ओर से वृक्षारोपण शुरू कर दिया गया था. कई बड़े पौधों के साथ सैकड़ों छोटे पौधे भी लगाए गए. इसी बदलाव ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा. सोशल मीडिया पर भी तस्वीरें और वीडियो साझा किए जाने लगे, जिनमें रात और सुबह के दृश्य का अंतर साफ दिखाई दे रहा था. आखिर क्यों हुई कार्रवाई? जानकारी के अनुसार वन विभाग काफी समय से इस मामले की जांच कर रहा था. विभाग का कहना था कि जिस भूमि पर मजार और उससे जुड़े निर्माण मौजूद थे, वह वन विभाग की भूमि है. ऐसे में निर्माण की वैधता से जुड़े दस्तावेज मांगे गए थे. वन विभाग की ओर से मजार के केयरटेकर फजले इलाही को नोटिस जारी किया गया था. नोटिस में भूमि और निर्माण से जुड़े आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था. सूत्रों के अनुसार कई महीनों तक सुनवाई चलती रही. इस दौरान अलग-अलग तारीखों पर पक्षकारों को दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया. लेकिन वन विभाग का दावा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके. यहीं से मामला आगे बढ़ा और विशेष वन न्यायालय तक पहुंच गया. तीन महीने चली प्रक्रिया बताया जा रहा है कि कार्रवाई अचानक नहीं हुई. इसके पीछे करीब तीन महीने तक चली प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया रही. वन विभाग की ओर से लगातार यह पूछा जाता रहा कि जिस भूमि पर निर्माण है, उसके स्वामित्व और वैधता से जुड़े कागजात प्रस्तुत किए जाएं. विभाग का कहना था कि यदि निर्माण वैध है तो संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं. सुनवाई के दौरान कई अवसर दिए गए, लेकिन कथित तौर पर कोई ऐसा दस्तावेज सामने नहीं आया जो निर्माण को वैध साबित कर सके.  इसके बाद विशेष वन विभाग की अदालत ने मामले में आदेश जारी किया, जिसके आधार पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का रास्ता साफ हुआ. मीडिया से दूर रखी गई पूरी कार्रवाई इस पूरे घटनाक्रम का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि कार्रवाई को मीडिया की नजरों से काफी हद तक दूर रखा गया. आमतौर पर इस तरह के अभियानों के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों के बयान सामने आते हैं और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक रूप से दी जाती है. लेकिन इस मामले में अधिकारी खुलकर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए. ध्वस्तीकरण के बाद भी जिला प्रशासन और वन विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया. यही वजह है कि कार्रवाई को लेकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ गई. स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी रही कि प्रशासन किसी भी प्रकार के विवाद या तनाव से बचना चाहता था. इसलिए पूरे अभियान को बेहद शांत और नियंत्रित तरीके से अंजाम दिया गया. रेंजर ने पहले ही दिए थे संकेत इस मामले में पहले बढ़पुरा वन रेंज के रेंजर अशोक शर्मा ने बातचीत के दौरान संकेत दिए थे कि विभाग भूमि से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रहा है. उन्होंने बताया था कि संबंधित पक्ष से लगातार कागजात मांगे जा रहे हैं और वन भूमि पर अनधिकृत निर्माण को लेकर नोटिस भी जारी किया गया है. रेंजर के अनुसार यदि वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाते हैं तो नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी. उस समय यह बयान सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा माना गया था, लेकिन अब ध्वस्तीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया कि विभाग कानूनी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा था. वृक्षारोपण बना चर्चा का विषय ध्वस्तीकरण के बाद जिस तेजी से वृक्षारोपण किया गया, वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है. स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई पूरी होते ही वन विभाग की टीम ने क्षेत्र को हरित स्वरूप देने की प्रक्रिया शुरू कर दी. बड़े पौधों के साथ-साथ बड़ी संख्या में नए पौधे रोपे गए. वन विभाग के सूत्रों का कहना है कि भूमि को उसके मूल स्वरूप में विकसित करने की योजना के तहत यह कदम उठाया गया. चूंकि क्षेत्र सफारी पार्क और वन क्षेत्र के नजदीक स्थित है, इसलिए पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को प्राथमिकता दी गई. यही वजह है कि जिस स्थान पर कुछ घंटे पहले तक निर्माण मौजूद था, वहां अब हरियाली दिखाई दे रही है. लोगों के बीच चर्चा तेज कार्रवाई के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. कुछ लोग इसे वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल भी उठा रहे हैं. हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार कार्रवाई न्यायालय के आदेश और विभागीय प्रक्रिया के बाद की गई है. इसलिए अधिकारियों का जोर कानूनी … Read more