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भारत का अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार! इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल रोकने की क्षमता से बढ़ी सैन्य ताकत

 नई दिल्ली भारत की सामरिक सुरक्षा और सैन्य इतिहास में 10 और 11 जून, 2026 की तारीखें सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गई हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन- DRDO ने लगातार तीन ऐतिहासिक फ्लाइट-टेस्ट करके देश की 'नेक्स्ट-जेनरेशन' की रक्षा क्षमताओं का लोहा मनवाया है।  इन सफल परीक्षणों के माध्यम से भारत ने लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' और समुद्र में मध्यम दूरी की एंटी-शिप मारक क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO को बधाई देते हुए कहा कि इन परीक्षणों ने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 'एलीट' देशों के समूह में शामिल कर दिया है, जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) को भी हवा में नष्ट करने की तकनीक मौजूद है।  इसके साथ ही, भारत ने पहली बार अपनी स्वदेशी नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का भी सफल पहला परीक्षण किया है, जो देश की समुद्री ताकत को कई गुना बढ़ा देगी।  क्या है मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस क्षमता? मिसाइल डिफेंस की भाषा में 'मल्टी-लेयर्ड डिफेंस' का मतलब एक ऐसे अभेद्य सुरक्षा चक्र से है, जो दुश्मन की मिसाइल को आसमान की अलग-अलग ऊंचाइयों पर ही ढूंढकर पूरी तरह नष्ट कर देता है. मान लीजिए कि किसी दुश्मन देश ने भारत पर कोई लंबी दूरी की घातक मिसाइल दागी है, तो भारत का यह नया डिफेंस सिस्टम उसे दो स्तरों पर निशाना बनाएगा…     एक्सो-एटमॉस्फेरिक: इसके तहत इंटरसेप्टर मिसाइल दुश्मन की मिसाइल को पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर (अंतरिक्ष की सीमा पर) ही मार गिराती है।      एंडो-एटमॉस्फेरिक: यदि कोई मिसाइल पहले सुरक्षा चक्र को पार कर जाती है, तो वायुमंडल के भीतर मौजूद दूसरा इंटरसेप्टर उसे धरती पर गिरने से पहले ही हवा में उड़ा देता है।  DRDO द्वारा 10 और 11 जून को किए गए इन लगातार तीन परीक्षणों के दौरान इंटरसेप्टर मिसाइलों ने अपने तय लक्ष्यों (टारगेट्स) को बेहद सटीकता के साथ एंगेज किया और उन्हें हवा में ही मलबे में तब्दील कर दिया. ये डिफेंस सिस्टम्स उभरते हुए आधुनिक मिसाइल खतरों से निपटने के लिए सबसे लेटेस्ट और स्वदेशी तकनीकों के आधार पर डिजाइन की गई हैं।  ICBM को रोकने वाला 'एलीट क्लब': भारत की बड़ी वैश्विक छलांग इस सफल परीक्षण के बाद भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा हो गया है जिनके पास इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के खतरों को निष्क्रिय करने की तकनीक है. ICBM ऐसी मिसाइलें होती हैं जो एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक (5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी) मार कर सकती हैं और इनकी स्पीड बहुत तेज होती है।  अब तक ऐसी मिसाइलों को रोकने और हवा में ही मार गिराने की तकनीक केवल अमेरिका, रूस, चीन और इजरायल जैसी महाशक्तियों के पास ही प्रमुख रूप से मानी जाती थी. भारत ने इस परीक्षण के जरिए साबित कर दिया है कि उसका 'बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस'सुरक्षा कवच अब पूरी तरह से एक्टिव हो चुका है. यह तकनीक आने वाले समय में देश के प्रमुख महानगरों, परमाणु प्रतिष्ठानों और सामरिक ठिकानों को दुश्मन के किसी भी अचानक होने वाले मिसाइल हमले से पूरी तरह सुरक्षित रखेगी।     नेवल एंटी-शिप मिसाइल (NASM-MR) का पहला सफल परीक्षण इन तीन परीक्षणों की कड़ी में भारत को एक और बड़ी कामयाबी समुद्र में मिली. DRDO ने अपनी अत्याधुनिक नेवल एंटी-शिप मिसाइल-मीडियम रेंज (NASM-MR) का 'मेडन फ्लाइट-टेस्ट' यानी पहला आधिकारिक उड़ान परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।    यह मिसाइल पूरी तरह से स्वदेशी है और इसे भारतीय नौसेना के युद्धपोतों तथा हेलीकॉप्टरों से दागे जाने के लिए तैयार किया गया है. मध्यम दूरी की इस एंटी-शिप मिसाइल का मुख्य काम समुद्र में भारतीय सीमाओं की तरफ बढ़ रहे दुश्मन के बड़े युद्धपोतों और पनडुब्बियों को पलक झपकते ही नष्ट करना है. इस मिसाइल के सफल परीक्षण से भारतीय नौसेना की आक्रामक और रक्षात्मक दोनों क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा हुआ है।  वैज्ञानिकों और भारतीय उद्योग की साझी कूटनीतिक जीत इन बेहद जटिल और संवेदनशील परीक्षणों की कमान रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह के हाथों में थी. उन्होंने खुद इन परीक्षणों की बारीकी से निगरानी की और इसे देश की रक्षा सुरक्षा के लिए एक बहुत बड़े बदलाव वाला मोड़ बताया।  इन परीक्षणों को भारतीय सशस्त्र बलों (सेना, वायुसेना और नौसेना) के शीर्ष अधिकारियों ने भी अपनी आंखों से देखा और इसकी मारक क्षमता को देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी बताया।   भले ही भारत के पड़ोसी देश अपनी मिसाइल क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण कर रहे हों, लेकिन DRDO के इस नेक्स्ट-जेन सुरक्षा कवच ने यह साफ कर दिया है कि भारत अब किसी भी आसमानी या समुद्री खतरे को सीमा पार ही ढेर करने के लिए पूरी तरह तैयार है। 

मुहर्रम को लेकर सख्त निर्देश: DJ-म्यूजिक बजाने पर लगेगा 50 हजार रुपये का जुर्माना

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने एक नई एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि इस्लामिक पर्वों को केवल इस्लामिक शिक्षा के अनुसार की आयोजित किया जाना चाहिए। इसके लिए वफ्फ बोर्ड ने मस्जिद कमेटियों, दरगाह कमेटियों और आयोजकों के लिए लेजर जारी किया है। इसमें अपील की गई है कि सभी कार्यक्रम इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार ही आयोजित किए जाएं। इस्लामिक एडवाइजरी जारी एडवाइजरी में मुहर्रम और दूसरे इस्लामिक धार्मिक आयोजनों से पहले किसी भी तरह के शोर पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। एजवाइजरी में वक्फ बोर्ड ने डीजे म्यूजिक, बैंड-बाजा, डांस प्रोग्राम, आतिशबाजी और पारंपरिक “शेर” परफॉर्मेंस जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि ऐसी गतिविधियां शरीयत के नियमों के मुताबिक नहीं हैं। जुर्माने का भी प्रावधान एडवाइज़री में चेतावनी दी गई है कि जो कमेटियां इन निर्देशों का उल्लंघन करेंगी, उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। इसमें कमेटी को भंग करने और 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाने जैसी कार्रवाई शामिल हो सकती है। सादगी से मनाएं त्योहार वक्फ बोर्ड ने मुसलमानों से अपील की है कि वे मुहर्रम को इबादत, सादगी, अनुशासन और इमाम हुसैन व कर्बला के शहीदों की कुर्बानियों को याद करते हुए मनाएं।     छत्तीसगढ़ मुस्लिम वक्फ बोर्ड की एडवाइजरी     सादगी से साथ त्योहार मनाएं मुस्लिम समाज     डीजे बजाना शरीयत के नियमों के खिलाफ     उल्लंघन करने वालों पर लगेगा जुर्माना बकरीद में की थी अपील इससे पहले छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड ने बकरीद को लेकर भी अपील की थी। बकरीद के दौरान वक्फ बोर्ड ने कहा था कि कुर्बानी खुले में नहीं करना चाहिए। कुर्बानी बंद जगह पर होनी चाहिए। बोर्ड ने कहा था कि खुले में खून नहीं बहाना चाहिए। दूसरे धर्म के लोगों को सम्मान करते हुए आपसी भाईचारे का उदाहरण पेश करना चाहिए।

अगले थल सेना अध्यक्ष की दौड़ में लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ, जानिए उनका सैन्य सफर और उपलब्धियां

नई दिल्ली लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भारतीय थल सेना के अगले अध्यक्ष होंगे. सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा भी कर दी है. जनरल के स्थायी रैंक के साथ वो 30 जून को पदभार ग्रहण करेंगे. वो वर्तमान सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी की जगह लेंगे. लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का कार्यकाल 31 अगस्त, 2028 तक होगा।  महाराष्ट्र के पुणे जिले स्थित खड़कवासला के राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के पूर्व-छात्र धीरज सेठ दिसंबर 1986 में बख्तरबंद कोर में कमीशन प्राप्त हुए थे. लगभग चार दशकों के अपने कार्यकाल में उन्होंने विभिन्न भू-भागों और संघर्षपूर्ण परिस्थितियों में असाधारण संचालन अनुभव प्राप्त किया है, जिसमें आतंकवाद विरोधी अभियान भी शामिल हैं।  लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक बख्तरबंद रेजिमेंट, विकसित क्षेत्र में एक बख्तरबंद ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी बल की कमान संभाली है. लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर पदोन्नति के बाद, उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर की कमान संभाली और बाद में दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के रूप में काम किया, जहां उन्होंने प्रमुख राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अभियानों का नेतृत्व किया. सेना कमांडर के पद पर पदोन्नत होने के बाद, उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में कार्य किया और पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमांड की कमान संभालने का दुर्लभ गौरव हासिल किया।  लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र बख्तरबंद ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ संचालन अधिकारी, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ ऑपरेशंस और अनुशासन, समारोह और कल्याण के महानिदेशक सहित कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर काम किया।  क्षमता विकास और आधुनिकीकरण में एक विशिष्ट योगदानकर्ता के रूप में, उन्होंने सामरिक योजना और क्षमता विकास निदेशालयों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।  करीब 40 साल का सैन्य अनुभव, कई अहम कमानों का नेतृत्व किया दिसंबर 1986 में आर्मर्ड कोर में कमीशन हासिल करने वाले धीरज सेठ को करीब 40 साल का सैन्य अनुभव है। उन्होंने रेगिस्तान, जम्मू-कश्मीर और पश्चिमी मोर्चे सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में कमान संभाली है। धीरज सेठ दक्षिण-पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जीओसी-इन-सी भी रह चुके हैं। वे पश्चिमी मोर्चे पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करने वाले चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मिशन (अंगोला), सेना मुख्यालय और क्षमता विकास से जुड़े कई अहम पदों पर भी काम किया है। जूनियर कमांड कोर्स में टॉपर, कई सम्मान हासिल किए वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) खड़कवासला, इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA), DSSC वेलिंगटन और नेशनल डिफेंस कॉलेज के पूर्व छात्र हैं। वे जूनियर कमांड कोर्स में फर्स्ट रैंक और DSSC में बेस्ट ऑल राउंड स्टूडेंट ऑफिसर मेडल हासिल कर चुके हैं। उन्हें उनकी विशिष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा मेडल (PVSM), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (UYSM) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित किया जा चुका है। लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका-पेरिस में किया कोर्स लेफ्टिनेंट जनरल सेठ ने अमेरिका के कैलिफोर्निया में मोंटेरी स्थित नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल में इंटरनेशनल डिफेंस एक्विजिशन मैनेजमेंट कोर्स,, पेरिस में मिलिट्री कॉलेज में डिफेंस सर्विसेज कमांड एंड जनरल स्टाफ कोर्स, महू में हायर कमांड कोर्स और नई दिल्ली में नेशनल डिफेंस कॉलेज में ट्रेनिंग ली है। इसके अलावा, उन्होंने रेगिस्तानी इलाके में एक आर्मर्ड रेजिमेंट, विकसित इलाके में एक आर्मर्ड ब्रिगेड और जम्मू-कश्मीर में एक काउंटर-इंसरजेंसी फोर्स की कमान भी संभाली है। सेना के आधुनिकीकरण के लिए जाने जाते हैं लेफ्टिनेंट जनरल लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ हमेशा एक कुशल सैन्य अधिकारी रहे हैं और पेशेवर सैन्य शिक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह सेना के आधुनिकीकरण में अपने योगदान के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले जनरल ऑफिसर हैं। उन्होंने सेना मुख्यालय के रणनीतिक योजना और क्षमता विकास विभागों में अहम पदों पर काम किया है। सेना के आधुनिकीकरण की दिशा, क्षमता विकास के रोडमैप और लंबे समय के लिए सेना से जुड़ी पहलों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है।

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ा अपडेट, जुलाई में वेतन वृद्धि की उम्मीद; 8वें वेतन आयोग पर नजरें

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों को मंजूरी दे दी है। इसके बाद अब करीब 55 लाख सेवारत कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनर्स की सैलरी, पेंशन और भत्तों में बड़े बदलाव की उम्मीद है। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। फिटमेंट फैक्टर क्या है और यह क्यों जरूरी है? फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक यानी मल्टीप्लायर है जिसका इस्तेमाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की बेसिक सैलरी को रिवाइज करने के लिए किया जाता है। नया सैलरी स्ट्रक्चर तय करने में इसकी भूमिका सबसे जरूरी होती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जो 2016 से प्रभावी हुआ था। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹15,000 थी, तो वह बढ़कर ₹38,550 हो गई थी। कर्मचारी यूनियनों की मांग और एक्सपर्ट्स का अनुमान 8वें वेतन आयोग के लिए केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और एसोसिएशनों ने मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने और न्यूनतम बेसिक पे में बड़ी बढ़ोतरी की मांग की है। कुछ यूनियनों ने फिटमेंट फैक्टर को 3 से 5 या उससे अधिक करने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि, पेंशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इतनी बड़ी मांग वित्तीय वास्तविकताओं के अनुकूल नहीं हो सकती है। पेंशन एक्सपर्ट्स के अनुसार, आयोग न्यूनतम वेतन की गणना के तरीके में बदलाव कर सकता है। इसके लिए परिवार की उपभोग इकाइयों (कंजम्पशन यूनिट्स) को तीन से बढ़ाकर पांच किया जा सकता है और फिटमेंट फैक्टर को 2.64 करने पर विचार किया जा सकता है। कितनी बढ़ सकती है कर्मचारियों की इनहैंड सैलरी? सैलरी में होने वाली अंतिम बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार किसे मंजूरी देती है। इसे दो अलग-अलग उदाहरणों से समझा जा सकता है…     पहला उदाहरण (60% DA के आधार पर): मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक पे ₹100 है। 60% महंगाई भत्ता (DA) मिलाकर उसकी कुल कमाई ₹160 हो जाती है। नए फिटमेंट फैक्टर के बाद अगर बेसिक पे दोगुनी होकर ₹200 हो जाती है, तो मौजूदा ₹160 के मुकाबले उसकी प्रभावी सैलरी में करीब 25% की बढ़ोतरी होगी।     दूसरा उदाहरण (फिटमेंट फैक्टर 3 होने पर): अगर सरकार मौजूदा फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.0 कर देती है, तो एंट्री-लेवल की बेसिक पे में 15 से 20% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। इस स्थिति में ₹15,000 की बेसिक सैलरी सीधे ₹45,000 हो जाएगी। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कर्मचारी यूनियनों की मांग से कम फिटमेंट फैक्टर भी रखती है, तो भी सरकारी खर्च में बड़ी बढ़ोतरी होगी और कर्मचारियों को अपनी सैलरी में एक सम्मानजनक उछाल देखने को मिलेगा। 7वें वेतन आयोग में कितना हुआ था फायदा? तुलना के लिए 7वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सबसे निचले स्तर के कर्मचारियों की न्यूनतम सैलरी को बढ़ाकर ₹18,000 प्रति महीने किया था। इसके साथ ही नई भर्ती वाले क्लास-I अधिकारियों की सैलरी को ₹56,100 तय किया गया था। इसके कारण 1 जनवरी 2016 से कुल सैलरी और पेंशन में 14.29% की कुल बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। राज्यों का दौरा कर रही है 8वें वेतन आयोग की टीम वर्तमान में 8वां वेतन आयोग अलग-अलग राज्यों का दौरा कर रहा है। आयोग की टीम वहां कर्मचारी एसोसिएशनों और यूनियनों से मुलाकात कर रही है। इस दौरान कर्मचारियों की मांगों और उनके प्रस्तावों के ज्ञापन (मेमोरेंडम) नोट किए जा रहे हैं। यूनियनों ने मुख्य रूप से सैलरी रिवीजन और रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले फायदों में सुधार की मांग रखी है। कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग और कब तक आएगी रिपोर्ट? केंद्र सरकार ने अक्टूबर 2025 में 8वें वेतन आयोग की शर्तों को मंजूरी दी थी और पैनल को रिपोर्ट सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया था। हालांकि 7वें वेतन आयोग की जगह 8वें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2026 से लागू मान लिया गया है, लेकिन आयोग को अपना काम पूरा करने में करीब 18 महीने का समय लगने की उम्मीद है। आयोग ने मेमोरेंडम जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया है। इसके बाद सभी हितधारकों (स्टेकहोल्डर्स) के सुझावों की जांच की जाएगी और अंतिम सिफारिशें तैयार होंगी। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि अगर रिपोर्ट जून-जुलाई 2027 तक सौंपी जाती है, तो सरकार पर एरियर (बकाया) देने की देनदारी काफी बढ़ जाएगी। सिफारिशें स्वीकार और लागू होने के बाद, केंद्र सरकार बीच की अवधि का पूरा एरियर कर्मचारियों को देगी। फिलहाल कर्मचारी संगठन ज्यादा मल्टीप्लायर और बेहतर रिटायरमेंट फायदों के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि अंतिम फैसला देश के वित्तीय हालातों को देखकर ही लिया जाएगा। क्या होता है वेतन आयोग ? केंद्रीय वेतन आयोग केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी, भत्तों, पेंशन और अन्य फायदों की समीक्षा करने के लिए गठित एक पैनल होता है। आमतौर पर देश में हर 10 साल में एक नए वेतन आयोग का गठन किया जाता है, जो बदलती अर्थव्यवस्था और महंगाई के हिसाब से सरकारी कर्मचारियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सिफारिशें देता है।

गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुगम यातायात सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यमंत्री गौर

राज्यमंत्री  गौर ने किया निर्माणाधीन 10 लेन सड़क का जायजा गुणवत्तापूर्ण निर्माण और सुगम यातायात सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : राज्यमंत्री गौर राज्यमंत्री  गौर बोली एक वर्ष में पूर्ण करें 10 लेन सड़क का निर्माण कार्य, आमजन को यातायात में नहीं हो असुविधा भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  कृष्णा गौर ने शनिवार को निर्माणाधीन 10 लेन सड़क के कार्य का औचक निरीक्षण कर जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को गुणवत्ता के साथ तय समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं। यह 10 लेन सड़क परियोजना भी इसी तीव्र विकास यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि 10 लेन सड़क का यह निर्माण कार्य हर हाल में अगस्त 2027 तक पूर्ण कर लिया जाएगा। उन्होंने निर्माण कार्य में सामने आ रही व्यवस्थागत समस्याओं एवं अव्यवस्थाओं को गंभीरता से लिया और इनके शीघ्र निराकरण के लिये संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने निर्माण एजेंसी और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्य के दौरान आम नागरिकों को यातायात, आवागमन एवं अपनी दैनिक गतिविधियों में किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। इसके लिए वैकल्पिक मार्गों और सुव्यवस्थित ट्रैफिक डायवर्जन की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधा, सुगम यातायात एवं गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  

मध्य प्रदेश में तबादलों को लेकर नया निर्देश, अब 3 साल का कार्यकाल नहीं बल्कि कामकाज तय करेगा पोस्टिंग

भोपाल  अब तबादलों में परफार्मेंस को आधार बनाया जाएगा। जिनका परफार्मेंस अच्छा होगा, वे तीन साल की अवधि पूरी करने बाद भी एक ही स्थान पर रह सकेंगे। ऐसे शासकीय सेवकों को विभागाध्यक्ष अपनी ओर से मौका देंगे, लेकिन जिनका कामकाज अच्छा नहीं होगा, उन्हें हटाने के लिए तीन साल के कार्यकाल पूरा होने का इंतजार नहीं किया जाएगा। 6 महीने में ही हटाया जा सकेगा। ये निर्देश मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार सामान्य प्रशासन के एसीएस शिवशेखर शुक्ला और प्रमुख सचिव (कार्मिक) एम सेलवेन्द्रन को दिए। अब तक तीन साल में होती थी कार्यवाही आमतौर पर शासकीय सेवकों को एक स्थान पर तीन साल या अधिक की सेवा अवधि पूरी करने के बाद हटाया जाता है। सीएम ने सुशासन भवन में अपने प्रभार के विभागों की समीक्षा की। बारी-बारी से अफसरों को बुलाकर कामकाज पूछा आगामी निकाय चुनावों की तैयारियों को लेकर भी सीएम ने चर्चा की। अगले साल काम के आधार पर होगा ट्रांसफर मुख्यमंत्री (MP Transfer Policy) ने शासकीय सेवकों के तबादलों के लिए परफार्मेंस वाले जिन आधारों को तैयार करने की बात कही है, वे अगले साल की तबादला नीति में शामिल किए जाएंगे। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में तबादलों का अंतिम चरण जारी है। इसमें किसी भी आधार को शामिल करना मुश्किल काम हो सकता है इसलिए आने वाले वर्ष की तबादला नीति को परफार्मेंस बेस्ड तबादला नीति के रूप में तैयार करेंगे। इधर तीन दिन और लेकिन नहीं हो रहे ट्रांसफर सरकार ने 13 दिन पहले तबादलों से बैन हटाया। अब तीन दिन बाद फिर से बैन लगने वाला है। लेकिन इन 13 दिनों में 90 फीसदी विभागों ने एक भी तबादले नहीं किए। यानी जो अफसर-कर्मचारी जहां पर डटे हुए हैं वे वहीं पर रहना चाहते हैं। वहीं सबसे बड़ी अनदेखी यह कि सरकार द्वारा तबादला नीति सार्वजनिक किए जाने के बावजूद एक भी विभागों ने खाली पदों को पोर्टल पर अपलोड नहीं किया। जबकि अंदर खाने गुपचुप सूचियां बनाई जा रही हैं। सीएम ने पारदर्शिता की बात कही लेकिन अफसरों ने इस पर तवज्जो नहीं दी। अब प्रदेशभर के शासकीय सेवक सरकार और भाजपा को कोस रहे हैं। स्कूल शिक्षा में पोर्टल ही नहीं, प्रोग्रामर पर गाज मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव, दोनों ने कहा कि जो भी तबादले होंगे, उसके लिए ऑनलाइन आवेदन मंगवाए जाएं। स्कूल शिक्षा विभाग में हाल यह है कि शिक्षकों के लॉग-इन आइडी के जरिए पोर्टल खोलने के निर्देश हैं, लेकिन वह खुल ही नहीं रहा। आवेदन के लिए प्लेटफार्म ही नहीं है। मंत्री के दफ्तर में भीड़ लग रही है। हालांकि विभाग ने एक प्रोग्रामर को हटा दिया है। स्वास्थ्य विभाग में आवेदन ले रहे, तबादला नहीं कर्मचारियों के मुताबिक स्वास्थ्य विभाग ने सबसे पहले आवेदनों के लिए पोर्टल बनाया। हजारों की संख्या में आवेदन भी आ चुके हैं, लेकिन तबादले नहीं किए जा रहे हैं। यही हाल जनजाति कार्य विभाग का है। यहां भी आवेदनों की भरमार है लेकिन निपटारा नहीं। मंत्रियों से बिना पूछे तबादला, सीएम को शिकायत कास एवं आवास विभाग में तबादलों को लेकर शिकायतें भी होने लगी हैं। सूत्रों के मुताबिक मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, इंदर सिंह परमार और प्रद्मु्न सिंह तोमर के क्षेत्र के कुछ सीएमओ को नगरीय प्रशासन विभाग के एक अधिकारी ने अपने स्तर पर ही हटा दिया। तीनों मंत्रियों ने इस बात की शिकायत सीएम को कर दी। इसके बाद मामला विभागीय मंत्री को देखने के लिए कहा गया। उधर एक जिले के पुलिस अधीक्षक पर प्रभारी मंत्री से बगैर पूछे तबादला करने का मामला भी सीएम तक पहुंचा है। संबंधित मंत्री का कहना है कि पुलिस अधीक्षक ने 17 पुलिस अधिकारियों के तबादले किए लेकिन, एक भी सहमति नहीं ली। इसके बाद एसपी को जमकर फटकारा गया।

12 वर्षों में बदला भारत का स्वरूप: आस्था और आर्थिकी के संगम से विकसित राष्ट्र बन रहा देश, बोले सीएम योगी

12 वर्षों में बदला भारत का स्वरूप, आस्था व आर्थिकी के संगम से विकसित राष्ट्र की ओर बढ़ रहा भारत: सीएम योगी मीडिया संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां, कहा- गरीब, महिला, युवा व किसान को केंद्र में रखकर हुआ अभूतपूर्व विकास कोविड प्रबंधन से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा, महिला सशक्तीकरण, किसान एवं युवा कल्याण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और आत्मनिर्भर भारत तक की यात्रा को सीएम योगी ने बताया ऐतिहासिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोहराया उत्तर प्रदेश को 2030 तक वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनाने का संकल्प प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में संचालित जन कल्याणकारी कार्यक्रमों का सर्वाधिक लाभ उत्तर प्रदेश को मिला: मुख्यमंत्री लखनऊ,   सेवा, सुशासन और समर्पण को समर्पित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 140 करोड़ भारतीयों की निरंतर सेवा के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लोकभवन में मीडिया संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश और उत्तर प्रदेश में हुए व्यापक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी शक्ति, सामर्थ्य और नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री ने लोकभवन में आयोजित विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 10 जून को एनडीए द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पूरे देश और दुनिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में सबसे लंबे कार्यकाल और उनकी सफल नेतृत्व यात्रा का उत्सव देखा। दुनिया के प्रमुख राष्ट्राध्यक्षों ने प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और भारत की विकास यात्रा की सराहना करते हुए शुभकामनाएं दीं। पिछले 12 वर्षों में भारत ने अभूतपूर्व परिवर्तन देखा है और आज देश का प्रत्येक नागरिक नए भारत का हिस्सा होने पर गर्व महसूस कर रहा है। योजनाओं को मिला जन आंदोलन का रूप सीएम ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लंबे समय तक योजनाएं बनती रहीं, लेकिन उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पहली बार योजनाओं को जन आंदोलन का स्वरूप मिला। जनधन योजना के माध्यम से करोड़ों बैंक खाते खोले गए, स्वच्छ भारत मिशन के तहत 12 करोड़ शौचालय बने, 4 करोड़ गरीब परिवारों को पक्के मकान मिले और आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्राप्त हुआ। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया और मुद्रा योजना जैसी पहलों ने देश को नई दिशा दी। 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने विकास की धुरी के रूप में गरीब, महिला, युवा व किसान को केंद्र में रखा। भारत ने पिछले 12 वर्षों में आस्था व आर्थिक विकास का अद्भुत संगम देखा है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने में सफलता मिली, जो विश्व इतिहास की एक बड़ी उपलब्धि है। उत्तर प्रदेश को प्रधानमंत्री की योजनाओं का सर्वाधिक लाभ मिला है। राज्य में 65 लाख गरीबों को आवास, 3 करोड़ परिवारों को शौचालय, लगभग 2 करोड़ परिवारों को उज्ज्वला गैस कनेक्शन तथा 15 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिला। कोविड काल में 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन उपलब्ध कराया गया। गरीब अब केवल वोट बैंक नहीं रहा, बल्कि विकास प्रक्रिया का केंद्र बन चुका है। महिलाओं को मिली नई पहचान महिला सशक्तीकरण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’, मातृ वंदन योजना, नारी शक्ति वंदन अधिनियम और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं ने महिलाओं को नई पहचान दी है। उत्तर प्रदेश में भी बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग, पुस्तकें और स्वेटर उपलब्ध कराए गए। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना तथा मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन को सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने का कार्य किया गया। मिशन शक्ति अभियान और पुलिस बल में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण ने महिलाओं को सुरक्षा व अवसर प्रदान किए हैं। युवाओं को नई ऊर्जा व अवसर दिए युवाओं के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने शिक्षा, कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया। परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम, मुद्रा योजना, पीएम विश्वकर्मा योजना, आत्मनिर्भर भारत अभियान, फिट इंडिया और खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रमों ने युवाओं को नई ऊर्जा और अवसर दिए हैं। पहली बार युवाओं को यह विश्वास मिला कि वे नौकरी मांगने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बन सकते हैं। योजनाओं से मजबूत बने किसान किसानों को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, फसल बीमा योजना और सॉइल हेल्थ कार्ड जैसी योजनाओं ने किसानों को मजबूत किया है। उत्तर प्रदेश में 3 करोड़ से अधिक किसान सम्मान निधि का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। गन्ना किसानों को 3.22 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है और 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा से जोड़ा गया है। मुख्यमंत्री ने कोविड-19 महामारी के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने दुनिया के सामने सफल कोविड प्रबंधन का मॉडल प्रस्तुत किया। मुफ्त टेस्टिंग, मुफ्त वैक्सीन, मुफ्त राशन और मुफ्त उपचार जैसी व्यवस्थाओं ने करोड़ों लोगों को राहत दी। इसी दौरान ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के माध्यम से पूरे देश को राष्ट्रभक्ति के सूत्र में बांधा गया। पंच प्रण के माध्यम से विकसित भारत का आह्वान मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने ‘पंच प्रण’ का आह्वान किया, जो विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की आधारशिला हैं। इन पंच प्रणों में गुलामी की मानसिकता के अवशेषों को समाप्त करना, भारत की समृद्ध विरासत पर गर्व करना, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना, प्रत्येक नागरिक द्वारा अपने कर्तव्यों का पालन करना तथा विकसित भारत के संकल्प को साकार करना शामिल है। प्रधानमंत्री ने देश को केवल अमृत महोत्सव के उत्सव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप भी प्रस्तुत किया। आस्था व सांस्कृतिक विरासत का सम्मान मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की आस्था व सांस्कृतिक विरासत को वह सम्मान प्राप्त हुआ, जिसकी लंबे समय से अपेक्षा थी। 500 वर्षों के संघर्ष के बाद अयोध्या … Read more

शौर्य चक्र से सम्मानित वीर जवानों से मिले उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, किया सम्मान और उत्साहवर्धन

रायपुर : शौर्य चक्र से सम्मानित वीर जवानों से मिले उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा साहस, समर्पण और राष्ट्रसेवा की मिसाल बने जवानों को दी बधाई एवं शुभकामनाएं रायपुर,   माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के हाथों “शौर्य चक्र” से सम्मानित वीर पुलिस एवं सुरक्षा बल के जवानों से उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने आज अपने नवा रायपुर अटल नगर स्थित निवास कार्यालय में आत्मीय मुलाकात कर उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर डीजीपी अरुण देव गौतम सहित जवानों के परिजन एवं परिवार के सदस्य भी उपस्थित रहे। जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत – शर्मा      उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ और देश को ऐसे वीर सपूतों पर गर्व है, जिन्होंने अपने अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति का परिचय देते हुए असाधारण परिस्थितियों में भी वीरता का प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि इन जवानों की बहादुरी आने वाली पीढि़यों के लिए प्रेरणास्रोत है। योगदान में परिवारों का त्याग, समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण        मुलाकात के दौरान शर्मा ने शौर्य चक्र से सम्मानित इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट, इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख तथा राइफलमैन भोज राम साहू के साहसिक कार्यों की सराहना की और उनके परिजनों से भी मुलाकात की और सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश सेवा के इस गौरवपूर्ण योगदान में परिवारों का त्याग और समर्थन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने जवानों के अदम्य साहस भरी घटनाओं के बारे में भी उनसे जानकारी ली। कठिन परिस्थितियों में किया नक्सलियों का मुकाबला       ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर लक्ष्मण केवट एवं इंस्पेक्टर रामेश्वर प्रसाद देशमुख को 16 अप्रैल 2024 को कांकेर क्षेत्र में नक्सलियों के विरुद्ध संचालित एक बड़े अभियान में अद्वितीय नेतृत्व, साहस और रणनीतिक कौशल का परिचय देने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। उनके नेतृत्व में सुरक्षा बलों ने कठिन परिस्थितियों में नक्सलियों का मुकाबला करते हुए महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की थी। गंभीर रूप से घायल होकर भी अदम्य साहस के साथ संभाला मोर्चा        इसी प्रकार 3 असम राइफल्स के राइफलमैन भोज राम साहू को भारत-म्यांमार सीमा क्षेत्र में घुसपैठ विरोधी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस के साथ मोर्चा संभालते हुए दुश्मनों को पीछे हटने के लिए मजबूर करने और अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया है। सरकार जवानों के सम्मान, कल्याण और परिवारों की सुरक्षा लिए प्रतिबद्ध       उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार सुरक्षा बलों के जवानों के सम्मान, कल्याण और उनके परिवारों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने सम्मानित जवानों एवं उनके परिजनों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनका साहस और बलिदान राष्ट्र सेवा का सर्वाेच्च उदाहरण है।

मध्य प्रदेश पर्यटन का बढ़ा मान, कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित

एमपी टूरिज्म को "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता" पुरस्कार मुंबई में 10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026 में किया गया सम्मानित पर्यटन विकास निगम की प्रतिबद्धता, व्यावसायिकता और अद्वितीय टीम वर्क का परिणाम : प्रबंध संचालक यादव भोपाल मध्यप्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम ने इवेंट, एक्जीबिशन और माइस के प्रबंधन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। मुंबई के सिडको एक्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित '10वें डेसेनियल एक्जीबिशन एक्सीलेंस अवार्ड्स (EEA) 2026' में एमपी टूरिज्म को "कॉन्फ्रेंस मैनेजमेंट में उत्कृष्टता" (Excellence in Conference Management) का राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया है। यह पुरस्कार देश के इवेंट, एक्जीबिशन और माइस (MICE – मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेसिंग एंड एक्जीबिशन) सेक्टर के सबसे प्रतिष्ठित सम्मानों में से एक माना जाता है। मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम के प्रबंध निदेशक दिलीप कुमार यादव ने टीम के साथ यह पुरस्कार ग्रहण किया।  प्रबंध संचालक यादव ने इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुरस्कार पर्यटन विकास निगम की प्रतिबद्धता, व्यावसायिकता और अद्वितीय टीम वर्क का परिणाम है। मध्यप्रदेश पर्यटन लगातार अपने इंफ्रास्ट्रक्चर, आतिथ्य सेवाओं और आयोजन क्षमताओं को विश्वस्तरीय बना रहा है। राज्य में अत्याधुनिक कन्वेंशन सेंटर्स, बेहतरीन कनेक्टिविटी और बेमिसाल मेहमाननवाज़ी के कारण अब देश-विदेश के बड़े कॉर्पोरेट घराने और संगठन मध्यप्रदेश का रुख कर रहे हैं। महाप्रबंधक इवेंट्स विवेक जूड ने कहा कि पर्यटन निगम को यह राष्ट्रीय पुरस्कार राज्य में 20 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और राज्य महत्व के बड़े सम्मेलनों के सफल प्रबंधन के लिए दिया गया है। निगम ने अपनी टीम के उत्कृष्ट प्रबंधन से MP Growth Summit 2025, MP Tech Growth Summit 2025, Regional AI Impact Summit 2025, Regional Industry and Employment Summit और Madhya Pradesh Mining Conclave जैसे बेहद महत्वपूर्ण और हाई-इम्पैक्ट सम्मेलनों का कुशलतापूर्वक संचालन किया है। यह राष्ट्रीय पुरस्कार न केवल पर्यटन निगम की कुशल प्रबंधन क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह 'अतुल्य भारत का दिल' मध्यप्रदेश को बिजनेस टूरिज्म के क्षेत्र में एक अग्रणी ग्लोबल हब बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। भविष्य में इससे राज्य में आर्थिक गतिविधियों, रोजगार और ज्ञान-आधारित बड़े आयोजनों को और अधिक गति मिलेगी।  

वायुसेना को बड़ा झटका: विमान दुर्घटना में 5 जवानों की मौत, कारणों की जांच शुरू

नईदिल्ली /जोरहाट  असम के जोरहाट एयरबेस के पास भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में वायुसेना के पांच कर्मियों की मौत हो गई, जबकि विमान का सह-पायलट गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल अधिकारी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है।वायुसेना की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले सभी सैन्यकर्मी अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहे थे। दुर्घटना में बलिदान होने वालों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम शामिल हैं। भारतीय वायुसेना ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बलिदान जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। वायुसेना ने कहा कि इस कठिन समय में पूरा संगठन शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा है और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा।  इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और  अग्निवीरवायु दानिश आलम शहीद हो गए है। वायुसेना ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारतीय वायुसेना शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करती है। दुख की इस घड़ी में पूरी वायुसेना शहीदों के परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई। जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की गई है। बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे। दुर्घटना के बाद वायुसेना मुख्यालय ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है, जो हादसे के सभी पहलुओं की जांच करेगी। अधिकारियों का कहना है कि जांच में तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी संभावित समस्या, मौसम की स्थिति और अन्य परिचालन कारणों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। हादसे में जीवित बचे सह-पायलट से भी जांच टीम पूछताछ करेगी। माना जा रहा है कि दुर्घटना से ठीक पहले विमान की स्थिति और कॉकपिट में हुई घटनाओं के बारे में उनकी जानकारी जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। फिलहाल दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा नहीं हुआ है। वायुसेना की जांच टीम विभिन्न तकनीकी और परिचालन तथ्यों का विश्लेषण कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा किन परिस्थितियों में हुआ।  जांच के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' के आदेश हादसे की गंभीरता को देखते हुए भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस बात की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है कि आखिर यह दुर्घटना कैसे हुई. जोरहाट एयरबेस के पास हुए इस क्रैश के पीछे क्या कारण थे- क्या कोई तकनीकी खराबी थी, इंजन फेलियर हुआ था या मौसम की खराबी की वजह से यह हादसा हुआ- इन सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करने के लिए 'कोर्ट ऑफ इंक्वायरी' गठित की गई है. बचे हुए को-पायलट का बयान भी इस जांच में बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि वे ही हादसे के समय कॉकपिट में मौजूद थे।