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पत्नी की हत्या कर रचा था ‘कोबरा कांड’, साढ़े छह साल बाद आरोपी बैंककर्मी को मिली उम्रकैद

इंदौर इंदौर के बहुचर्चित शिवानी हत्याकांड में जिला अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी पति अमितेष उर्फ शालू पटेरिया को उम्रकैद की सजा दी है। साल 2019 में बैंक अधिकारी अमितेष ने अपनी पत्नी शिवानी की हत्या के लिए एक बेहद खौफनाक और सुनियोजित साजिश रची थी। वह इंदौर से लगभग 620 किलोमीटर दूर राजस्थान के अलवर जिले से ब्लैक डेजर्ट प्रजाति का एक खतरनाक कोबरा 30 हजार रुपए में खरीदकर लाया था। आरोपी ने इस सांप को 11 दिनों तक अपने घर में छिपाकर रखा। इसके बाद जब उसे सही मौका मिला, तो उसने तकिए से अपनी पत्नी का गला घोंटकर उसे मौत के घाट उतार दिया। हत्या को प्राकृतिक रूप देने के लिए उसने कोबरा को मार डाला और उसके दांतों को अपनी मृत पत्नी के हाथ में जबरन गड़ा दिए, ताकि पुलिस और डॉक्टर्स इसे सर्पदंश से हुई सामान्य मौत समझें। हालांकि, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने इस पूरी साजिश का भंडाफोड़ कर दिया और फोरेंसिक साक्ष्यों के साथ डॉक्टरों के बयानों ने अदालत के सामने सच्चाई लाकर रख दी। करीब साढ़े छह साल तक चली लंबी अदालती सुनवाई के बाद कोर्ट ने अमितेष को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा संरक्षित वन्यजीव कोबरा की हत्या करने के मामले में तीन साल के कारावास व 25 हजार रुपए के जुर्माने और साक्ष्य मिटाने के जुर्म में दो साल की सजा भी सुनाई गई है। सर्पदंश की झूठी कहानी रची यह पूरी घटना इंदौर के संचार नगर में 1 दिसंबर 2019 को घटित हुई थी। 35 वर्षीय शिवानी पटेरिया को उसका पति अमितेष और उनका एक किरायेदार निखिल गंभीर हालत में एमवाय अस्पताल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों को ससुराल पक्ष द्वारा यह जानकारी दी गई कि शिवानी की मौत सांप के काटने की वजह से हुई है लेकिन शिवानी के मायके पक्ष के लोगों ने घटना की सूचना मिलते ही इसे पूरी तरह संदेहास्पद बताया। जब कनाडिया थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर जांच के लिए पहुंचे, तो उन्हें घर के अंदर एक मरा हुआ कोबरा सांप पड़ा मिला। उस दौरान शिवानी के चाचा प्रभात दीक्षित ने पुलिस के सामने सीधे तौर पर आरोप लगाया था कि उनकी भतीजी की सोची-समझी रणनीति के तहत हत्या की गई है। बिस्तर पर ही मरा हुआ था सांप शिवानी अपने घर के पलंग पर मृत अवस्था में पाई गई थी और उसी बिस्तर पर वह सांप भी मरा हुआ मिला था। चाचा का कहना था कि कुछ समय पहले अमितेष ने शिवानी से तलाक लेने का प्रयास किया था, क्योंकि वह दिल्ली की किसी अन्य युवती के लगातार संपर्क में था और हर हाल में शिवानी को अपने जीवन से हटाना चाहता था। मायके पक्ष का यह भी आरोप था कि पति ने पहले भी हत्या का प्रयास किया था, जिसमें एक बार गला दबाने और घटना से दो दिन पहले जहर देने की कोशिश शामिल थी। घटना की सुबह भी यह अफवाह फैलाई गई कि पार्लर में सांप ने काटा है, लेकिन जब बात कराने को कहा गया तो मना कर दिया गया और शाम को मौत की सूचना दी गई। उस वक्त घर में ससुर ओमप्रकाश और ननद ऋचा भी मौजूद थे। बहन भी साजिश में शामिल थी शिवानी के पिता आनंद दीक्षित ने पुलिस को दिए अपने बयानों में स्पष्ट कहा था कि उनके दामाद ने अपनी बहन के साथ मिलकर इस पूरी वारदात को अंजाम दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सुनियोजित योजना के तहत घटना वाले दिन आरोपी की बहन दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर मॉल चली गई थी ताकि घर खाली रहे। शाम को जब बच्चे वापस लौटे तब तक शिवानी को अस्पताल ले जाया जा चुका था। दिल्ली में दूसरी महिला के साथ रहता था  अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने पिता को बताया कि शिवानी की मृत्यु लगभग 10 से 12 घंटे पहले ही हो चुकी थी। पिता ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि बेटी का शरीर जहर के कारण काला पड़ने के बजाय पूरी तरह पीला था, जिससे साफ था कि मौत सांप के काटने से नहीं हुई थी। पिता ने बताया कि 9 साल पहले उन्होंने बड़े अरमानों से बेटी की शादी की थी, लेकिन शादी के बाद से ही दामाद दिल्ली में किसी दूसरी महिला के साथ पति-पत्नी की तरह रह रहा था। इस बात की जानकारी मिलने पर जब वे दिल्ली गए तो दामाद उस महिला के साथ ही मिला, जिसके बाद वे उसे समझा-बुझाकर वापस इंदौर लेकर आए थे। इसके बावजूद वह लगातार दहेज के नाम पर शिवानी को प्रताड़ित करता रहा और मायके पक्ष की ओर से समय-समय पर करीब 25 लाख रुपए दिए जा चुके थे। पिता ने शुरुआत में ही मांग की थी कि जिस सांप के डसने का दावा किया जा रहा है, उसका किसी वेटरनरी डॉक्टर से पोस्टमॉर्टम कराया जाए ताकि सच सामने आ सके। पुलिस तफ्तीश के बाद अदालत ने सजा सुनाई इन बयानों और घटनास्थल के परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को देखते हुए पुलिस का शक गहराता चला गया। कनाड़िया पुलिस ने अमितेष पटेरिया को हिरासत में लेकर दो दिनों तक कड़ी पूछताछ की। शुरुआती दौर में वह पुलिस को लगातार गुमराह करता रहा, लेकिन सख्ती बरतने पर वह टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने स्वीकार किया कि शिवानी से उसका आए दिन विवाद होता था, जिससे तंग आकर उसने तकिए से उसका मुंह दबाकर उसे मार डाला। इससे पहले वह योजना के मुताबिक अलवर से कोबरा लाया था, जिसे मारकर उसने पत्नी के शव के पास रख दिया ताकि यह एक हादसा लगे। पुलिस ने जांच पूरी कर अमितेष, उसके पिता ओमप्रकाश पटेरिया और बहन ऋचा चतुर्वेदी के खिलाफ हत्या, साक्ष्य मिटाने और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। 24 जून 2026 को अदालत ने अपने फैसले में माना कि अमितेष ने ही तकिए से मुंह दबाकर हत्या की और इसे प्राकृतिक रूप देने के लिए सांप के काटने का नाटक रचा था। पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक जांच से खुला राज इस पूरे आपराधिक मामले में सबसे निर्णायक मोड़ पोस्टमॉर्टम और फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की जांच रिपोर्ट से आया। डॉक्टरों … Read more

मोहन सरकार ने ₹3,600 करोड़ का नया लोन लिया, 18 और 30 साल में होगी अदायगी

भोपाल मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने मंगलवार को बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज उठाया है। यह राशि दो अलग-अलग किश्तों में 18 वर्ष और 30 वर्ष की अवधि के लिए जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज 17,400 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि प्रदेश पर कुल देनदारी बढ़कर करीब 5.6114 लाख करोड़ रुपए पहुंच गई है। वित्त विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह राशि बॉन्ड जारी कर और सरकारी प्रतिभूतियों (सिक्योरिटीज) की नीलामी के माध्यम से जुटाई जाएगी। ऋण की राशि का उपयोग राज्य में उत्पादक विकास कार्यक्रमों और विभिन्न सार्वजनिक विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण में किया जाएगा। इस उधारी के लिए केंद्र सरकार से आवश्यक स्वीकृति भी प्राप्त कर ली गई है। 18 और 30 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया ऋण अधिसूचना के मुताबिक, पहली किश्त 1,600 करोड़ रुपए की है, जिसे 18 वर्ष की अवधि के लिए लिया गया है। इस पर ब्याज का भुगतान निर्धारित अवधि तक प्रत्येक वर्ष किया जाएगा। दूसरी किश्त 2,000 करोड़ रुपए की है, जिसकी परिपक्वता अवधि वर्ष 2056 तक रहेगी। दोनों ऋणों पर राज्य सरकार 7.90 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर का भुगतान करेगी। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि ऋण राशि का भुगतान बुधवार को होगा। ई-कुबेर प्लेटफॉर्म के जरिए हुई नीलामी राजपत्र के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ई-कुबेर प्रणाली के माध्यम से सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी आयोजित की गई, जिसमें पात्र और संस्थागत निवेशकों ने भाग लिया। गैर-प्रतिस्पर्धी निवेशकों के लिए भी निर्धारित सीमा तक निवेश की सुविधा उपलब्ध कराई गई। 31 मार्च तक प्रदेश पर था 4.88 लाख करोड़ का कर्ज सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश पर कुल 4,88,714.17 करोड़ रुपए का ऋण था। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपए के मार्केट लोन का है। इसके अलावा वित्तीय संस्थानों, केंद्र सरकार, राष्ट्रीय लघु बचत निधि और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी कुल देनदारियों में शामिल हैं। विकास कार्यों पर खर्च होगा ऋण राज्य सरकार का कहना है कि इस ऋण का उपयोग सिंचाई, कृषि, ऊर्जा, सड़क, संचार, पेयजल, सहकारी संस्थाओं के विकास और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। सरकार ने यह भी दावा किया है कि राज्य की परिसंपत्तियों का मूल्य उसकी कुल देनदारियों से अधिक है, जिससे वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है।

अमरनाथ यात्रा 2026: बाबा बर्फानी समय से पहले हुए अंतर्ध्यान, 5 दिन में पूरी तरह पिघली हिम शिवलिंग

श्रीनगर  अमरनाथ यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही बाबा बर्फानी का प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा में दर्शन कर चुके हैं। हिमलिंग के इतनी जल्दी पिघलने के बाद अमरनाथ श्राइन बोर्ड की व्यवस्थाओं और पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।अमरनाथ यात्रियों के लिए दुख वाली खबर सामने आई है. यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन बाद ही हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु गुफा तक पहुंचकर दर्शन कर चुके हैं. अमरनाथ यात्रा इस बार 3 जुलाई से शुरू हुई थी और 7 जुलाई को बाबा बर्फानी पूरी तरह से अंतर्ध्यान हो गए. हर वर्ष 57 दिन तक चलने वाली बाबा अमरनाथ यात्रा का रक्षाबंधन के दिन यानी सावन पूर्णिमा पर समापन होता है. लेकिन महज पांच दिन में ही बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने से अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  3 जुलाई से शुरू हुई थी यात्रा इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू हुई थी। बताया जा रहा है कि 7 जुलाई तक प्राकृतिक हिमलिंग पूरी तरह पिघल गया। जबकि यह यात्रा हर साल 57 दिनों तक चलती है और इस बार इसका समापन 28 अगस्त को रक्षाबंधन (सावन पूर्णिमा) के दिन होना है। श्राइन बोर्ड ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमरनाथ श्राइन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हिमलिंग का बनना और पिघलना पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है। उन्होंने इसे मौसम और प्राकृतिक परिस्थितियों से जुड़ी सामान्य घटना बताया है।अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों से जब इस बारे में बात कई गई तो उन्होने इस स्थिति को प्राकृतिय प्रकिया का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया. लेकिन कश्मीर के पर्यावरणविदों का मानना है कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति देना इसका सबसे बड़ा कारण है. उनका कहना है कि लाखों भक्तों की गर्म सांस हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है और श्राइन बोर्ड के अधिकारी भी यह मानते हैं लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की. साथ ही हिमलिंग के पिघलने से रोकने के लिए किए गए सभी उपाय भी इनको नाकाफी साबित हुए।  पर्यावरणविदों ने जताई चिंता कश्मीर के कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से गुफा के आसपास का तापमान बढ़ता है, जिससे हिमलिंग तेजी से पिघल सकता है। उनका कहना है कि श्रद्धालुओं की संख्या और पर्यावरणीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। हालांकि, इस दावे पर सभी विशेषज्ञों की एक जैसी राय नहीं है और हिमलिंग के जल्दी पिघलने के पीछे मौसम और जलवायु भी अहम कारण माने जाते हैं। मौसम और तापमान का भी असर विशेषज्ञों के अनुसार, अमरनाथ गुफा में बनने वाला प्राकृतिक हिम शिवलिंग हर साल तापमान, बर्फबारी और मौसम की स्थिति के अनुसार आकार लेता है। ऊंचाई वाले इलाकों में बढ़ता तापमान, कम बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन जैसी स्थितियां इसके बनने और पिघलने की प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं।  अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड ने झाड़ा पल्ला अमरनाथ यात्रा श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि यह प्राकृतिक प्रक्रिया है। हालांकि कश्मीर के पर्यावरणविद इसे मानने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना था कि क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं को यात्रा में शामिल होने की अनुमति देने से ऐसा हुआ है।  भक्तों की गर्म सांसों से पिघल रहा है हिमलिंग! पिछले कई सालों से जिस तेजी से हिमलिंग पिघल रहा है उसे रोकने की खातिर किए जाने वाले उपाय नाकाफी साबित हो रहे हैं। दरअसल गुफा में क्षमता से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने से हिमलिंग को नुकसान पहुंच रहा है क्योंकि लाखों भक्तों की गर्म सांसों को हिमलिंग सहन नहीं कर पा रहा है। श्राइन बोर्ड के अधिकारी अप्रत्यक्ष तौर पर भक्तों की सांसों की थ्योरी को मानते हैं पर प्रत्यक्ष तौर पर वे इसे कुदरती प्रक्रिया करार देते थे।  पहले भी जल्दी पिघल चुका है हिमलिंग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 मई को हिमलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट थी। 29 जून तक यह घटकर करीब 5 फीट रह गई और अब इसके पूरी तरह पिघलने की जानकारी सामने आई है। यह पहली बार नहीं है जब हिमलिंग यात्रा के दौरान जल्दी पिघला हो। वर्ष 2016 में यात्रा शुरू होने के करीब 10 दिन बाद ही हिमलिंग पिघल गया था। वहीं, 2013 में भी यात्रा समाप्त होने से पहले ही हिमलिंग अंतर्ध्यान हो गया था। 28 अगस्त तक चलेगी अमरनाथ यात्रा इस वर्ष अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक चलेगी। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए इस पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य सुनाया था। इसी वजह से यह हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में से एक मानी जाती है।

कोलकाता में ED की ताबड़तोड़ रेड, TMC फंड केस में 5 ठिकानों पर कार्रवाई; अभिषेक बनर्जी की फ्लाइट पर उठे सवाल

कोलकाता  तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बैंक खातों और चुनावी चंदे में मचे घमासान के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। केंद्रीय जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमें कोलकाता और उसके आसपास सॉल्ट लेक, राजारहाट और राधाबाजार समेत पांच ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं। ईडी के अधिकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को साथ लेकर एक चार्टर्ड एविएशन कंपनी के डायरेक्टरों के घर और दफ्तरों को खंगाल रहे हैं। पूरा मामला टीएमसी के खातों में हुए संदिग्ध लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा हुआ है। अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स जांच के दायरे में मंगलवार की सुबह ईडी की टीम सबसे पहले 'केयरवेल एविएशन' नाम की कंपनी के निदेशकों के घर पहुंची। जांच में यह बात सामने आई है कि इसी कंपनी के प्राइवेट विमानों और हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल टीएमसी के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और पार्टी के अन्य बड़े नेता दौरों के लिए करते रहे हैं। सॉल्ट लेक में रहने वाले कंपनी के दो निदेशकों, पवन जाजू और राजेश जाजू के घर पर टीम मौजूद है और उनसे बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है। इसके साथ ही राजारहाट और राधाबाजार स्थित केयरवेल एविएशन के दफ्तरों पर भी छापेमारी चल रही है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या नेताओं के लिए बुक होने वाले इन महंगे चार्टर्ड विमानों का भुगतान टीएमसी के उन्हीं खातों से किया जा रहा था, जिन्हें लेकर शिकायत दर्ज है। पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद की थी बैंक खाते फ्रीज करने की मांग दरअसल, टीएमसी के इन बैंक खातों को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप विश्वास ने खुद बैंक अधिकारियों को एक चिट्ठी भेजी थी। इस चिट्ठी में उन्होंने खुद को पार्टी का अधिकृत कोषाध्यक्ष बताते हुए इन खातों से होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने और इन्हें फ्रीज करने का अनुरोध किया था। इसके अलावा साइबर क्राइम ब्रांच में भी वित्तीय गबन को लेकर एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से ही ये खाते केंद्रीय एजेंसियों के रडार पर आ गए थे। भाजपा विधायक की शिकायत पर पुलिस ने की थी कार्रवाई इस मामले में राजनीतिक मोड़ तब आया जब जयनगर से भाजपा विधायक ने निजी बैंक के तीन खातों में भारी गड़बड़ी और संदिग्ध लेन-देन का आरोप लगाते हुए बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में साफ कहा गया था कि इन खातों के जरिए बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग का खेल चल रहा है। इसी आधार पर पुलिस ने बैंक को पत्र लिखकर तीनों खातों को तुरंत फ्रीज करवा दिया था, जिसकी कड़ियां जोड़ते हुए अब ईडी ने इस मामले को अपने हाथ में ले लिया है। "चार्टर्ड फ्लाइट का किराया इसी संदिग्ध पैसे से दिया गया" पार्टी के भीतर और बाहर इस भारी खर्च को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रीतब्रत बनर्जी ने इस पूरे विवाद पर तीखा दावा करते हुए कहा कि अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स के लिए जो मोटी रकम पानी की तरह बहाई गई, वह इसी फंड से निकली थी। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा, "हमारे लिए अब यह साबित कर पाना नामुमकिन है कि इस खाते में जमा किया गया करोड़ों रुपया किसी घोटाले, डकैती, जबरन वसूली या भ्रष्टाचार की कमाई का हिस्सा नहीं है। साफ दिख रहा है कि वीआईपी चार्टर्ड फ्लाइट्स का लाखों-करोड़ों का किराया इसी संदिग्ध पैसे से चुकाया जा रहा था।" फिलहाल ईडी की टीमें दस्तावेज और डिजिटल सबूत जुटाने में लगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में टीएमसी के कई बड़े नेताओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  

18 साल बाद अहमदाबाद ब्लास्ट पीड़ितों को न्याय, 38 दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर

अहमदाबाद साल 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 अन्य दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा है. इसके साथ ही दोषियों की ओर से दायर सभी अपीलों को खारिज कर दिया गया. अदालत ने विस्फोटों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है।  यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट की विशेष पीठ ने सुनाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इस केस की सुनवाई के लिए विशेष बेंच का गठन किया था. मार्च 2025 से इस मामले की नियमित आधार पर सुनवाई चल रही थी. राज्य सरकार की ओर से फांसी की सजा की पुष्टि करने की याचिका और दोषियों द्वारा सजा के खिलाफ दाखिल अपीलों पर संयुक्त सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया है।  दरअसल, अहमदाबाद की विशेष अदालत ने 18 फरवरी 2022 को इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 38 दोषियों को फांसी और 11 अन्य दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. भारतीय कानून के अनुसार किसी भी निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा तब तक लागू नहीं की जा सकती, जब तक संबंधित हाईकोर्ट उसकी पुष्टि न कर दे. इसी कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला गुजरात हाईकोर्ट में विचाराधीन था।  इसके साथ ही हाईकोर्ट ने पीड़ितों को मुआवजा देने का आदेश भी दिया है. धमाकों में मारे गए 56 लोगों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये और 200 से ज्यादा घायलों को 1-1 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। यह पूरा मामला 26 जुलाई 2008 का है, जब अहमदाबाद में एक के बाद एक करीब 70 मिनट के भीतर कुल 21 बम धमाके हुए थे. इन धमाकों में 56 लोगों की जान चली गई थी और 200 से ज्यादा लोग घायल हुए थे. बम को साइकिल पर रखे टिफिन बॉक्स में छिपाया गया था।  20 धमाके, 59 लोगों की गई थी जान 26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में महज 49 मिनट के अंदर एक के बाद एक 20 धमाके हुए थे। इस सीरियल ब्लास्ट में 59 लोगों की जान चली गई थी। हमलावरों ने नरोदा, बापू नगर, सरखेज और हटकेश्वर जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों को निशाना बनाया था। अस्पतालों, बसों, सार्वजनिक स्थानों और बाजारों में बम लगाए थे। 38 आरोपियों को फांसी, 11 को उम्रकैद इस केस के 14 साल बाद 2022 में सेशन कोर्ट ने 38 आरोपियों को फांसी और 11 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस मामले को सबसे दुर्लभ बताया और कहा कि मौत की सजा देना उचित है। साथ ही, मारे गए और घायल लोगों के परिवारों को मुआवजा देने का भी आदेश दिया। यह पहला मामला है, जब किसी भी केस में एक साथ 38 आरोपियों को दोषी मानते हुए अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। राज्य सरकार ने भी दायर की थी याचिका इसके बाद, सभी दोषियों ने निचली अदालत के इस फैसले के खिलाफ गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की थी। वहीं, राज्य सरकार ने भी हाई कोर्ट के समक्ष मौत की सजा के लिए याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट क्यों पहुंचा मामला? कानून के मुताबिक, किसी भी अपराधी को फांसी देने के लिए हाई कोर्ट की मंजूरी मिलना जरूरी होता है, इसीलिए सजा पाए दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। दोषियों के वकीलों ने पुलिस की जांच, सबूतों और कबूलनामों पर सवाल उठाए। हमलावरों ने शहर की बसों, बाजारों और अस्पताल तक को निशाना बनाया था. धमाकों के बाद अहमदाबाद और सूरत से भी बम बरामद हुए थे. आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिदीन ने इन धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. बताया जाता है कि यह धमाके साल 2002 में हुए गुजरात दंगों का बदला लेने के लिए किए गए थे।  इस मामले में सरकार ने 78 लोगों को आरोपी बनाकर 35 अलग-अलग केस दर्ज किए थे, जिनकी सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाई गई थी. करीब 14 साल की लंबी सुनवाई के बाद फरवरी 2022 में स्पेशल कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया था।  उस समय 49 दोषियों में से 38 को फांसी और 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी, जबकि सबूतों की कमी के चलते 28 लोगों को बरी कर दिया गया था. भारत के न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका था जब एक साथ 38 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई थी।  इस मामले में स्पेशल कोर्ट में 1150 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और 8 फरवरी 2022 को 6700 से ज्यादा पन्नों का फैसला सुनाया गया था. स्पेशल कोर्ट के इस फैसले को दोषियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।     

सिया गोयल पहले से थी शादीशुदा! WhatsApp चैट से हुआ बड़ा खुलासा, जांच में नया मोड़

पुणे पुणे के लोहगढ़ किले से धक्का देकर केतन अग्रवाल की कथित हत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और डिजिटल सबूतों से खुलासा हुआ है कि मामले की मुख्य आरोपी और केतन की मंगेतर सिया गोयल ने सह-आरोपी चेतन चौधरी से गुपचुप तरीके से शादी रचा ली थी। पुलिस का मानना है कि यह शादी सगाई से महीनों पहले ही हो चुकी थी। परिवार से छिपाकर की थी 'सीक्रेट मैरिज' न्यूज18 मराठी की एक रिपोर्ट के हवाले से सामने आया है कि जांचकर्ताओं का मानना है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने करीब चार महीने पहले अपने-अपने परिवारों को बिना बताए गुपचुप शादी कर ली थी। इस बात का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से रिकवर की गई वॉट्सऐप चैट्स को खंगाला। डिजिटल सबूतों से खुली साजिश की पोल जांचकर्ताओं ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपियों के पिछले 6 से 7 महीने के कॉल रिकॉर्ड्स, लोकेशन डेटा, वॉट्सऐप चैट और इंटरनेट सर्च हिस्ट्री की गहन जांच की है। पुलिस का दावा है कि इस डिजिटल एक्टिविटी से साफ होता है कि दोनों ने अपनी शादी की बात परिवारों से छिपाकर रखी थी। पुलिस को संदेह है कि सीक्रेट मैरिज के बाद ही केतन अग्रवाल को रास्ते से हटाने की खौफनाक साजिश रची गई। 14 जून को फेल हो गया था हत्या का पहला प्लान पुलिस के मुताबिक, केतन अग्रवाल की हत्या की पहली कोशिश 14 जून को की गई थी, लेकिन वह नाकाम रही। जांचकर्ताओं का दावा है कि सिया ऐन मौके पर डर गई और पीछे हट गई, जिसकी वजह से वह प्लान फेल हो गया था। पुलिस का कहना है कि इसके बाद दोनों आरोपियों के बीच कई मैसेज का आदान-प्रदान हुआ, जिसमें आगे की साजिश पर चर्चा की गई। वॉट्सऐप चैट में लिखा- 'तुम भी आ जाओ, मिलकर धक्का दे देंगे' पुलिस के हाथ एक ऐसी अहम वॉट्सऐप चैट लगी है, जिसने इस हत्याकांड की पूरी कहानी साफ कर दी है। रिकवर किए गए एक मैसेज में कथित तौर पर सिया ने चेतन से कहा कि वह अकेले इस काम को अंजाम देने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही है, इसलिए उसने चेतन को अपने साथ आने के लिए कहा। पुणे मर्डर केस जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया ने मैसेज में लिखा था: "मुझमें इसे करने की हिम्मत नहीं है, तुम भी आ जाओ- हम दोनों मिलकर उसे चट्टान से धक्का दे देंगे।" पुलिस का दावा है कि इस खौफनाक बातचीत के बाद 18 जून को कथित तौर पर दोनों ने मिलकर केतन अग्रवाल की हत्या कर दी। फिलहाल पुलिस ने इस मामले में सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की जांच लगातार जारी है और यह पूरा केस कोर्ट के विचाराधीन है।

5वीं और 8वीं की पुनः परीक्षा का रिजल्ट जारी, राज्य शिक्षा केंद्र ने घोषित किए परिणाम

राज्य शिक्षा केंद्र ने 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम किए घोषित 5वीं में 80% और 8वीं में 74 % से अधिक विद्यार्थी उत्तीर्ण सत्र 2025-26 में पांचवीं में कुल 98.89 और आठवीं में 98.19 % हुआ परीक्षा फल भोपाल मध्यप्रदेश राज्य शिक्षा केन्द्र, स्कूल शिक्षा विभाग ने मंगलवार को कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। विद्यार्थी व अभिभावक राज्य शिक्षा केन्द्र के परीक्षा पोर्टल पर परिणाम देख सकते हैं। शैक्षणिक सत्र 2025-26 की पुन: परीक्षा में कक्षा 5वीं में 80.42 एवं कक्षा 8वीं में 74.16 % परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। वहीं, मुख्य वार्षिक परीक्षा और पुन: परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थियों की संख्या को मिलाकर इस सत्र में कक्षा 5वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.89 एवं कक्षा 8वीं का कुल परीक्षा परिणाम 98.19 प्रतिशत रहा है। राज्य शिक्षा केन्द्र के अपर संचालक डॉ. अरूण सिंह ने बताया कि विद्यार्थी, अभिभावक एवं शिक्षकगण उक्त परिणामों को राज्य शिक्षा केन्द्र के https://www.rskmp.in/result.aspx पर अपना रोल नम्बर डालकर देख सकते हैं। साथ ही शिक्षक, संस्था प्रमुख भी अपनी शाला का विद्यार्थीवार परिणाम इसी पोर्टल पर देख सकते हैं। गौरतलब है कि राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा 16 से 23 जून के बीच कक्षा 5वीं व 8वीं की पुन: परीक्षाओं का आयोजन किया गया था। इसमें प्रदेश की शासकीय, अशासकीय शालाओं एवं पंजीकृत मदरसों के कक्षा 5वीं के 71, 548 तथा कक्षा 8वीं के 76, 274 विद्यार्थी सम्मिलित हुए थे। इन विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रदेश में कुल 322 केन्द्र बनाए गए थे। 17, 000 से अधिक मूल्यांकनकर्ताओं के द्वारा अंकों की ऑनलाइन प्रविष्टि पोर्टल पर दर्ज की गई थी। वहीं कक्षा पांचवीं में शासकीय स्कूलों के कुल 46, 665 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 36, 217 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा में 581 में से 352 विद्यार्थी पास हुए हैं, तो वहीं अशासकीय स्कूलों के 24, 302 विद्यार्थियों में से 20, 971 विद्यार्थी परीक्षा में पास हुए हैं। इसी प्रकार कक्षा 8वीं में शासकीय स्कूलों के कुल 56,738 विद्यार्थियों में से 40, 315 उत्तीर्ण हुए हैं। मदरसा के 423 में से 268 और अशासकीय विद्यालयों के 19, 113 में से 15,978 विद्यार्थी पास हुए हैं।  

CM योगी ने कांग्रेस-सपा को घेरा, राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दिया बड़ा बयान

प्रतापगढ़  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ में 384 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के पास कोई नया मुद्दा नहीं है, इसलिए वे समाज को जाति और आस्था के आधार पर बांटने की राजनीति कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पहले भगवान राम और भगवान कृष्ण के अस्तित्व को नकारती थी, लेकिन अब खुद को आस्तिक बताने लगी है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की सरकारें धार्मिक स्थलों के पुनरुत्थान के लिए मिलने वाले धन को कब्रिस्तानों पर खर्च करती थीं और रामभक्तों पर गोलियां चलवाती थीं. योगी ने कहा कि देश अब कांग्रेस और सपा के चंगुल में फंसने वाला नहीं है।  हिंदू आस्था पर प्रहार की कोशिश- योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस कथित चोरी को आधार बनाकर हिंदू आस्था पर प्रहार करने की कोशिश की जा रही है, उसकी जांच के लिए पहले ही एसआईटी गठित की जा चुकी है और उन्होंने पहले ही कहा था कि एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी कर देगी. उन्होंने सवाल उठाया कि वक्फ की उन जमीनों पर, जो गरीबों और कमजोर तबकों के हित में इस्तेमाल होनी चाहिए थीं, कथित कब्जों और अनियमितताओं पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस कभी क्यों नहीं बोलतीं।  CM योगी ने आरोप लगाया कि वक्फ की जमीनों की कथित लूट पर सपा और कांग्रेस के मुंह में फेविकॉल लग जाता है. उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस भगवान राम और भगवान कृष्ण को काल्पनिक बताती थी, तब क्या हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जब रामभक्तों पर गोलियां चलाई गईं, कांवड़ यात्रा रोकी गई और कृष्ण जन्माष्टमी के आयोजन में बाधाएं डाली गईं, तब भी हिंदू आस्था पर चोट पहुंची थी, लेकिन उस समय विपक्ष मौन रहा।  मुख्यमंत्री ने प्रतापगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के शंखनाद की भूमि है और पंडित मुनीश्वर दत्त उपाध्याय, बाबू लाल गौड़ तथा हरिवंश राय बच्चन जैसी विभूतियों की कर्मभूमि रही है. उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ कभी पिछड़े जिलों में गिना जाता था, लेकिन अब तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है।  2017 से पहले किसान आत्महत्या करने को मजबूर थे- सीएम सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले किसान आत्महत्या करने को मजबूर थे, नौजवान पलायन करते थे, बहन-बेटियां सुरक्षित नहीं थीं और गरीबों की सुनवाई नहीं होती थी. उन्होंने कहा कि पहले वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया की स्थिति थी, जबकि उनकी सरकार ने वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज की दिशा में काम किया है. उन्होंने बताया कि प्रतापगढ़ में मेडिकल कॉलेज बनने के बाद अब नर्सिंग कॉलेज का भी शिलान्यास किया जा रहा है और गंगा एक्सप्रेसवे के माध्यम से जिले की कनेक्टिविटी को मजबूत किया गया है।  योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उनकी सरकार ने बिना किसी भेदभाव के सबका साथ, सबका विकास के मंत्र पर काम करते हुए गरीबों को आवास, मुफ्त इलाज और गैस सिलेंडर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराईं. उन्होंने कहा कि प्रदेश में पुलिस की 60 हजार भर्तियों में प्रतापगढ़ के युवाओं को भी अवसर मिला है और अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती प्रक्रियाओं में भी जिले के युवा सफल हो रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में नौकरियों की नीलामी होती थी और सैफई घराना भर्ती प्रक्रिया पर कब्जा जमाए रहता था, जिससे प्रतिभाशाली गरीब युवाओं को अवसर नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि अब काम करने का तरीका बदल गया है और उत्तर प्रदेश की प्रगति तथा युवाओं को मिल रहे रोजगार के अवसर विपक्ष को रास नहीं आ रहे हैं। 

CM विष्णु देव साय 8 जुलाई को करेंगे डूमरतराई नवीन थोक बाजार का लोकार्पण और नामकरण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 8 जुलाई को करेंगे डूमरतराई के नवीन थोक बाजार का नामकरण एवं लोकार्पण  आधुनिक अधोसंरचना से व्यापार, रोजगार तथा आर्थिक विकास को मिलेगी नई गति रायपुर  छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा डूमरतराई, रायपुर में विकसित अत्याधुनिक नवीन थोक बाजार का लोकार्पण अब 8 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़ के यशस्वी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री इस आधुनिक व्यावसायिक परिसर का नामकरण भी करते हुए इसे प्रदेशवासियों एवं व्यापारियों को समर्पित करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता माननीय मंत्री आवास एवं पर्यावरण ओ पी चौधरी करेंगे। उल्लेखनीय है कि यह कार्यक्रम पूर्व में 5 जुलाई 2026 को आयोजित होना था, किन्तु छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका पद्म विभूषण तीजन बाई जी के निधन के कारण घोषित राजकीय शोक के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था। अब यह कार्यक्रम 8 जुलाई को आयोजित किया जाएगा। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर लगभग 36 एकड़ क्षेत्र में विकसित यह आधुनिक थोक बाजार सुव्यवस्थित व्यापारिक गतिविधियों, चौड़ी सड़कों, पर्याप्त पार्किंग, बेहतर यातायात प्रबंधन तथा आवश्यक नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित है। यह बाजार रायपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ के व्यापारिक विकास को नई दिशा देने के साथ प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को गति प्रदान करेगा। डूमरतराई व्यापारिक परिसर का विकास चरणबद्ध रूप से किया गया है। फेज-1 में लगभग 76 करोड़ रुपये की लागत से 536 व्यावसायिक दुकान एवं हॉल निर्मित किए गए, जिससे प्रदेश के व्यापारियों को सुव्यवस्थित एवं आधुनिक व्यवसायिक सुविधाएँ उपलब्ध हुईं। वहीं फेज-2 के अंतर्गत लगभग 145 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति से विभिन्न श्रेणियों की 154 स्वतंत्र व्यावसायिक दुकानों का निर्माण किया गया है। व्यापारियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं का समुचित प्रावधान किया गया है। दोनों चरणों के पूर्ण होने से प्रदेश को एक आधुनिक एवं सुव्यवस्थित थोक व्यवसायिक परिसर उपलब्ध होगा। प्रदेशवासियों एवं व्यापारियों को समर्पित किए जाने वाले इस आधुनिक व्यापारिक परिसर को राज्य के व्यापार, विकास और समृद्धि का नया प्रतीक माना जा रहा है यह ‘थोक बाजार' प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति देगा, रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा तथा रायपुर को एक सुव्यवस्थित व्यापारिक केंद्र के रूप में और अधिक सशक्त बनाएगा। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल प्रदेश में आधुनिक शहरी अधोसंरचना के विकास का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। डूमरतराई का यह नवीन थोक बाजार व्यापारियों की वर्षों पुरानी आवश्यकता को पूरा करेगा तथा उन्हें सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं आधुनिक व्यापारिक वातावरण उपलब्ध कराएगा। लोकार्पण  एवं नामकरण समारोह में माननीय मंत्री वन एवं जलवायु केदार कश्यप, मानिए मंत्री कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोज़गार गुरु खुशवंत साहेब, माननीय सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल, माननीय सांसद राज्यसभा श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक राजेश मूणत, माननीय अध्यक्ष छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल अनुराग सिंह देव, माननीय विधायक   मोतीलाल साहू, पुरन्दर मिश्रा, सुनील सोनी, माननीय महापौर रायपुर श्रीमती मीनल चौबे, माननीय अध्यक्ष जिला पंचायत रायपुर नवीन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, व्यापारी, नागरिक तथा मंडल के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहेंगे। नवीन थोक बाजार' छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की गुणवत्ता, नवाचार एवं जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है । यह परियोजना आने वाले वर्षों में प्रदेश के व्यापार, निवेश, रोजगार सृजन तथा आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था होगी पारदर्शी, पुजारियों के लिए बिना जेब वाले कुर्ते अनिवार्य

 हरिद्वार उत्तराखंड के प्रसिद्ध मां मनसा देवी मंदिर में चढ़ावे की व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए मंदिर ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया है. अब मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारी बिना जेब वाले कुर्ते पहनेंगे. इसके साथ ही मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे की निगरानी के लिए सात सदस्यीय पर्यवेक्षण समिति का भी गठन किया गया है. मंदिर प्रशासन का कहना है कि इन कदमों का उद्देश्य श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करना तथा चढ़ावे के प्रबंधन में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।  यह निर्णय हाल के दिनों में अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर सामने आए विवाद के बाद लिया गया है. हालांकि मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि नई व्यवस्था भविष्य में किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को खत्म करने और जवाबदेही बढ़ाने के लिए लागू की जा रही है. नई व्यवस्था के तहत पुजारियों के कुर्तों में किसी प्रकार की जेब नहीं होगी. वहीं, सात सदस्यीय समिति मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे की नियमित निगरानी करेगी. यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. समिति के सभी सदस्यों को इस जिम्मेदारी के निर्वहन के लिए शपथ भी दिलाई गई है।  मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्र पुरी महाराज ने मंदिर परिसर में इस फैसले की घोषणा करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था सर्वोपरि है. इसलिए चढ़ावे के प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के लिए यह पहल की गई है।