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वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग, CM डॉ. यादव की पहल से देशभर में पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश बन रहा देश का वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन हब वाइल्डलाइफ संरक्षण, इको-टूरिज्म और रोजगार का उभरता केंद्र भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में ग्लोबल पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दायित्व तक सीमित न रखते हुए उसे विकास, पर्यटन, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की इसी दूरगामी सोच से मध्यप्रदेश आज ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ही देश के सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वन्यजीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है कि प्रदेश के वन और नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। मध्यप्रदेश के वन देश की अनेक प्रमुख नदियों का मायका हैं। इस तरह ये वन कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित और समुदाय केंद्रित वन प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ा रही है। कूनो बना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का ग्लोबल प्रयोगशाला श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। एक शताब्दी पूर्व लुप्त हो चुके चीतों की देश में सफल वापसी ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बल पर विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। मध्यप्रदेश में चीतों साथ ही लुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंस’ प्रजाति को भी कान्हा की घास-भूमि में आबाद किया जा रहा है। राज्य सरकार अब कूनो को ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य को चीतों का दूसरा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौरादेही को तीसरा बड़ा चीता लैंडस्केप बनाया जा रहा है। नौरादेही में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा के निर्माण से परियोजना के अगले चरण का शुभारंभ हो चुका है। विलुप्त प्रजातियों की वापसी का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में चीतों के साथ ही कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों का पुनर्वास इस दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रयास केवल एक प्रजाति को बसाने तक सीमित नहीं, बल्कि खो चुकी जैव-विविधता और पारिस्थितकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का अभियान है। इसी प्रकार चंबल, कूनो और नर्मदा क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी पहले से ही दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़ना तथा ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी में मगरमच्छों का संवर्धन शुरू करना प्रदेश की जलीय जैव विविधता संरक्षण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिवस पर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति और जैव विविधता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध संरक्षण में देश का नेतृत्व मध्यप्रदेश गिद्ध संरक्षण में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की संख्या राज्य में अब 14 हजार से अधिक हो चुकी है, जो देश में सर्वाधिक है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन विहार में उपचार के बाद मुक्त किया गया एक गिद्ध पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक की लंबी यात्रा पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। वन विहार को पर्यावरण प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए वहां 40 ई-व्हीकल भी उपलब्ध कराए गए हैं। नए टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से बढ़ा संरक्षण क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और जैव- विविधता संपन्न क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिसंबर-2024 में रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के दर्जे के साथ वन एवं वन्य जीव संरक्षणको नया आयाम मिला। यह निर्णय वर्ष 2008 में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक लंबित रहा था, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। इस टाइगर रिजर्व का नाम विश्वप्रसिद्ध पुरातत्वविद् पं. विष्णुदेव श्रीधर वाकणकर के नाम पर रखा गया। मार्च-2025 में शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व को प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई गई है। इसी क्रम में अप्रैल 2025 में सागर जिले के 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया। साथ ही ओंकारेश्वर और जहानगढ़ को नए वन्यजीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। अगस्त 2025 में ताप्ती क्षेत्र को मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया, यहाँ टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं।  हाथी संरक्षण में वैज्ञानिक और मानवीय दृष्टिकोण राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ का गठन, ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि होने पर मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही कर्नाटक, केरल और असम जैसे राज्यों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। टाइगर कॉरिडोर और वाइल्डलाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर वन्यजीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना … Read more

तपती गर्मी के बीच खुशखबरी: आ रहा है मॉनसून, मौसम विभाग ने जताई बारिश की संभावना

नई दिल्ली बंगाल की खाड़ी में बने सिस्टम की वजह से देश के अधिकांश हिस्सों में मौसम सक्रिय हो गया है. मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान परिस्थितियां दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में मॉनसून की समय से पहले दस्तक के लिए बेहद अनुकूल बन रही हैं. बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पश्चिम हिस्से में एक कम दबाव का क्षेत्र यानी लो प्रेशर एरिया बन गया है, जो अगले कुछ घंटों में और अधिक मजबूत होने की संभावना है. इस सिस्टम के प्रभाव से दक्षिण भारत के कई राज्यों में बारिश की गतिविधियां बढ़ेंगी. साथ ही इस सिस्टम से मॉनसून उत्तरी दिशा में तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर भारत में आज आंधी-बारिश का अलर्ट यूपी-बिहार समेत पांच राज्यों में आज आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. बिहार और उत्तराखंड के सभी जिलों में जबकि उत्तर प्रदेश के 38 जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में आंधी-तूफान और बारिश से जनजीवन प्रभावित है. इस बीच मौसम विभाग ने अगले दो दिन के लिए प्रदेश में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत में बारिश का दौर दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में बारिश का दौर जारी रहने वाला है. मौसम विभाग के अनुसार, केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक में 14 से 17 मई के बीच भारी बारिश हो सकती है. वहीं, असम, मेघालय और मणिपुर सहित अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी कई जगहों पर अच्छी बारिश की संभावना है. बंगाल की खाड़ी में बने इस सिस्टम का असर ओडिशा में भी साफ दिखाई देगा, जहां राज्य के कई हिस्सों में अगले 6 दिनों तक बारिश का अनुमान है. ओडिशा के 20 जिलों में बिजली गिरने और तेज हवाओं के साथ बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। कब होगी मॉनसून की एंट्री? भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां तेजी से अनुकूल होती जा रही हैं. सप्ताह के अंत तक दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के कुछ इलाकों में मॉनसून की एंट्री हो सकती है. इस दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में बारिश, आंधी, बिजली गिरने, ओलावृष्टि और कुछ क्षेत्रों में भीषण गर्मी का मिश्रित असर देखने को मिलेगा। मौसम विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और श्रीलंका के उत्तरी तट के पास बना कम दबाव का क्षेत्र अब उत्तर दिशा की ओर बढ़ रहा है. इसके चलते अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की आशंका है। उत्तर भारत में मौसम में बदलाव DTE के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ ऊपरी हवाओं में चक्रवाती रूप में बना हुआ है. इसके प्रभाव से 12 से 15 मई तक दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है. गरज-चमक के साथ हवाओं की रफ्तार 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है. पूर्वी राजस्थान में धूल भरी आंधी चलने का भी अंदेशा है। मौसम विभाग ने खराब मौसम में खुले में न निकलने की सलाह दी है.  पहाड़ी राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बारिश व बर्फबारी जारी रह सकती है. कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की भी संभावना है, जिससे फलों और सब्जियों की फसलों को नुकसान हो सकता है। पूर्वी भारत में बारिश और तेज हवाएं बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और ओडिशा में अगले कुछ दिनों तक बारिश और तेज हवाओं का असर रहेगा. बिहार में ओलावृष्टि, झारखंड और ओडिशा में गरज के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं. सिक्किम और उत्तर बंगाल के पर्वतीय इलाकों में भारी बारिश (64.5-115.5 मिमी) का येलो अलर्ट जारी है। दक्षिण भारत में बारिश और हवाएं तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और केरल में भी बारिश व गरज-चमक का दौर रहेगा. कई जगहों पर 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। कहां चलेगी लू और भीषण गर्मी? डाउन टू अर्थ की खबर के मुताबिक, एक तरफ जहां कई राज्यों में बारिश से राहत मिल रही है. वहीं, राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है. पश्चिम राजस्थान और गुजरात में 12 से 17 मई तक लू चलने की संभावना है. पूर्वी राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी हो सकती है।

आज 13 मई को मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे नरसिंहपुर से 1835 करोड़ का अंतरण

मुख्यमंत्री डॉ. यादव 13 मई को नरसिंहपुर से 1835 करोड़ की राशि का अंतरण 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों को मिलेगी 36वीं किश्त नरसिंहपुर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 13 मई को मध्यप्रदेश की करोड़ों महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सम्मान के लिये नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक भूमिका मजबूत हुई है। योजना की शुरुआत से अब तक सशक्तिकरण की यात्रा निरंतर जारी वर्ष 2023 जून में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना में अप्रैल 2026 तक 35 मासिक किस्तों का सफलतापूर्वक अंतरण किया जा चुका है। मई 2026 में जारी की जा रही राशि योजना की 36वीं किश्त जारी होगी। जून 2023 से अप्रैल 2026 तक महिलाओं के खातों में कुल 55,926.51 करोड़ रूपये की राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से जमा की जा चुकी है। राशि में क्रमिक वृद्धि: 1,000 से बढ़कर 1,500 रूपये प्रतिमाह योजना के प्रारंभ में प्रत्येक पात्र महिला को 1,000 रूपये प्रतिमाह प्रदान किए जाते थे। अक्टूबर 2023 में इसे बढ़ाकर 1,250 रूपये प्रतिमाह किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः वृद्धि कर इसे 1,500 रूपये प्रतिमाह कर दिया गया। सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के अंतर्गत कम राशि प्राप्त करने वाली महिलाओं को भी इस योजना के माध्यम से अतिरिक्त सहायता देकर कुल देय राशि सुनिश्चित की जा रही है। महिला कल्याण के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता लाड़ली बहना योजना पर राज्य सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2023-24 में 14,726.05 करोड़ रूपये, वर्ष 2024-25 में 19,051.39 करोड़ रूपये तथा वर्ष 2025-26 में 20,318.53 करोड़ रूपये की राशि व्यय की गई। वर्ष 2026-27 में अप्रैल 2026 तक 1830.54 करोड़ रूपये की राशि की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लाडली बहना योजना में 23,882.81 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है, जो महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया व्यापक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे उनमें वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण और शहरी महिलाओं के लिए समान रूप से उपयोगी योजना का लाभ ग्रामीण, आदिवासी, शहरी, कल्याणी, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाओं सहित व्यापक वर्ग को मिल रहा है। पात्र महिलाओं के सक्रिय और आधार-लिंक्ड बैंक खातों में राशि सीधे जमा होने से प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और त्वरित बनी है। राज्य सरकार ने विभिन्न विशेष अवसरों और त्योहारों पर अतिरिक्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर महिलाओं के जीवन में उत्साह और खुशियों का संचार किया है। इससे योजना केवल नियमित सहायता तक सीमित न रहकर भावनात्मक संबल का भी माध्यम बनी है।

राफेल की ताकत होगी और मजबूत: फ्रांस देगा तकनीकी डेटा, भारत में रिपेयर होंगी MICA मिसाइलें

नई दिल्ली  राफेल और मिराज-2000 जैसे लड़ाकू विमानों में लगने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत भारत में ही की जा सकेगी। फ्रांसीसी कंपनी MBDA ने भारतीय वायुसेना (IAF) के साथ इस बारे में करार किया है। इसके तहत भारत में ही MICA मिसाइलों का आधुनिकीकरण किया जा सकेगा और साथ ही फ्रांस से खरीदे गए राफेल की भी मरम्मत की जा सकेगी। इस समझौते के लिए अरसे से कोशिशें की जा रही थीं। फ्रांसीसी कंपनी भारत में MICA के रखरखाव और मरम्मत केंद्र स्थापित करेगी। राफेल और मिराज में लगने वाले मिसाइलों की भी मरम्मत     OPEXNews की एक खबर के अनुसार, MBDA और IAF के इस नए समझौते में भारतीय डसॉल्ट राफेल लड़ाकू विमानों और आधुनिक मिराज 2000 विमानों द्वारा उपयोग की जाने वाली MICA मिसाइलों की मरम्मत और मध्यम स्तर के आधुनिकीकरण के लिए स्थानीय क्षमताओं की तैनाती का प्रावधान है।     भारत और MBDA ने MICA हवा से हवा मिसाइल के लिए एक नए समर्थन समझौते की घोषणा की है। इस समझौते के तहत भारतीय वायु सेना MICA के लिए एक घरेलू मरम्मत केंद्र स्थापित और संचालित करेगी, जबकि MBDA कलपुर्जे, तकनीकी डेटा और ट्रेनिंग देगी।     दरअसल, मिसाइलें रिपेयर नहीं, ओवरहॉल होती हैं। एक बार लॉन्च होने के बाद मिसाइल नष्ट हो जाती है। मरम्मत का मतलब उसके भंडारण (Storage) के दौरान खराबी को ठीक करना या उसकी उम्र बढ़ाने के लिए उसे सर्विस करना है। मिसाइल भंडार हमेशा भरा रहेगा     भारत वायु सेना ने बताया कि यह सेंटर मिसाइल भंडार को फिर से तैयार करने में लगने वाले समय को कम करेगा और वायु सेना की युद्धक तत्परता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा। फ्रांस आवश्यक उपकरण और तकनीकी दस्तावेज उपलब्ध कराएगा और स्थानीय कर्मियों को प्रशिक्षण देगा।     इस सुविधा की स्थापना का निर्णय ऑपरेशन सिंदूर के बाद लिया गया, जिसके दौरान भारत ने लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और वायु रक्षा प्रणालियों का सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया गया था। MICA मिसाइलें क्या होती हैं, भारत क्यों कर रहा इस्तेमाल     MICA मिसाइल एक बहुमुखी हवा से हवा में मार करने वाला हथियार है। इसे फ्रांसीसी में (MICA:Missile d'Interception, de Combat et d'Auto-défense) कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है-'अवरोधन, युद्ध और आत्मरक्षा के लिए मिसाइल'। यह एक फ्रांसीसी वायुरोधी मल्टीपल टार्गेट्स वाली हर मौसम में दागो और भूल जाओ वाली लघु से मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली है, जिसका निर्माण MBDA फ्रांस द्वारा किया गया है।     MICA दो वर्जन में उपलब्ध है। MICA-RF सक्रिय रडार सीकर, जबकि MICA-IR इमेजिंग इन्फ्रारेड सीकर से लैस है। दोनों को लंबी दूरी (60-80 किमी) और करीबी लड़ाई में लक्ष्यों को भेदने के लिए डिजाइन किया गया है। मिसाइल का वजन लगभग 112 किलोग्राम है, जिसमें 12 किलोग्राम का उच्च-विस्फोटक वारहेड लगा है और यह लगभग मैक 4 की गति तक पहुंच सकती है। कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुआ जंगी विमानों का आधुनिकीकरण 1999 के कारगिल युद्ध के बाद भारत ने अपने वायुसेना बेड़े का बड़े पैमाने पर आधुनिकीकरण शुरू किया और इन्फ्रारेड (MICA IR) और रडार (MICA RF) होमिंग हेड से लैस मिसाइलों के MBDA संस्करणों की मांग की। 2011 में दोनों पक्षों ने 50 मिराज 2000 लड़ाकू विमानों को मिराज 2000I/TI मानक में अपग्रेड करने के लिए एक करार पर हस्ताक्षर किए, जिसमें इन मिसाइलों के एडवांस संस्करणों का एकीकरण भी शामिल था। इस समझौते की टाइमिंग बेहद अहम     भारत को 2000 के दशक की शुरुआत में मिराज-2000 के आधुनिकीकरण के साथ-साथ MICA मिसाइलें मिलनी शुरू हुईं। यह समझौता ऐसे समय में घोषित किया गया है जब भारत कई और राफेल जेट खरीदने पर विचार कर रहा है। भारत घरेलू रखरखाव क्षमताओं का निर्माण करके MICA मिसाइल भंडार को बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।     स्थानीय मरम्मत और पुनर्निर्माण केंद्र होने से दागी गई या खराब मिसाइलों की त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित होती है, जो तीव्र गति वाले अभियानों या संकटों के दौरान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे विदेशी मरम्मत चक्रों पर निर्भरता कम होती है और विदेशी शिपिंग या निर्यात अनुमोदन में होने वाली देरी से बचा जा सकता है। उदाहरण के लिए, मध्य पूर्व में हाल ही में हुए अभियानों में एमआईसीए राउंड की खपत हुई, जिससे पर्याप्त भंडार की आवश्यकता स्पष्ट होती है।

भाजपा में सियासी हलचल: संगठन से सरकार तक बदलाव की अटकलें, महिला चेहरे को मिल सकती है बड़ी जिम्मेदारी

रायपुर छत्तीसगढ़ भाजपा में संभावित बड़े फेरबदल को लेकर चर्चा हो रही है। यहां पार्टी के अंदर सत्ता और संगठन दोनों स्तर पर बदलाव की अटकलें तेज हैं। दरअसल, प्रदेश में 12 और 13 मई को दो दिन बैठकें आयोजित की गई है। 2028 विधानसभा चुनाव की रणनीति होगी। जहां पार्टी इसे सामान्य संगठन की बैठक बता रही है, वहीं, भाजपा के अंदर की चर्चाएं देखे तो इसे आने वाले बदलावों की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, छत्तीसगढ़ भाजपा इस समय दो बड़े मुद्दों पर ध्यान दे रही है। पहला, राज्य सरकार अपने ढाई साल पूरे करने की ओर बढ़ रही है। दूसरा, संगठन के कई बड़े नेताओं का कार्यकाल खत्म होने वाला है। प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल के कार्यकाल को लेकर भी पार्टी में चर्चा चल रही है। माना जा रहा है कि संगठन में कुछ नए नेताओं को जिम्मेदारी दी जा सकती है और कुछ नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका मिल सकती है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में सरकार और संगठन के कामकाज को लेकर फीडबैक और सर्वे कराया है। इसी के आधार पर आगे की रणनीति बनाई जा रही है। इसलिए अब सिर्फ छोटे बदलाव नहीं, बल्कि बड़े स्तर पर फेरबदल की चर्चा हो रही है। सीएम विष्णुदेव साय (Vishnu Deo Sai) के नेतृत्व को लेकर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व का भरोसा कायम बताया जा रहा है। फिलहाल मुख्यमंत्री बदलने जैसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले चुनाव भी उनके नेतृत्व में ही लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, मंत्रिमंडल में फेरबदल और विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। खबर है कि 2 से 4 मंत्रियों के चेहरे बदले जा सकते हैं और उनकी जगह नए नेताओं को मौका मिल सकता है। इस बार पार्टी पुराने और वरिष्ठ विधायकों के बजाय नए चेहरों को प्राथमिकता दे सकती है। चर्चा यह भी है कि मंत्रिमंडल में एक और महिला मंत्री को शामिल किया जा सकता है। पार्टी महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के साथ-साथ सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। राजनीतिक गलियारों में जिन नेताओं के नाम चर्चा में हैं, उनमें भावना बोहरा,पुरंदर मिश्रा, सुशांत शुक्ला और सरगुजा क्षेत्र की किसी आदिवासी महिला विधायक का नाम प्रमुख है। वहीं, डिप्टी सीएम स्तर पर बदलाव में भाजपा एक महिला चेहरे को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकती है। राजनीतिक गलियारों में लता उसेंड़ी और रेणुका सिंह जैसे नाम चर्चा में हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, भाजपा इसके जरिए कई सामाजिक और राजनीतिक समीकरण साधना चाहती है। यदि किसी महिला आदिवासी या ओबीसी चेहरे को डिप्टी सीएम बनाया जाता है, तो इससे महिलाओं, आदिवासी समाज और पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत हो सकती है। इसके साथ ही सरगुजा और बस्तर जैसे क्षेत्रों में राजनीतिक संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि भाजपा सिर्फ वर्तमान सरकार पर नहीं, बल्कि 2028 विधानसभा चुनाव की तैयारी और नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति पर भी काम कर रही है।

NEET पेपर लीक में बड़ा खुलासा, नासिक से खरीदकर हरियाणा में ऊंचे दाम पर बेचने वाला आरोपी पकड़ा गया

नासिक NEET परीक्षा 2026 रद्द होने की खबर के बाद देशभर में नाराजगी का माहौल है. पेपर लीक और धांधली के आरोपों के चलते यह मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है. पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. नासिक (महाराष्ट्र) से एक आरोपी शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया गया है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) के छात्र शुभम खैरनार पेपर लीक करने के आरोप में पकड़ा गया है. बताया जा रहा है कि टेलीग्राम ऐप के माध्यम से एक अन्य आरोपी के जरिए पेपर लीक की सूचना मिली थी, जिसका पुणे में होने का संदेह है. इसके अलावा शुभम खैरनार पर आरोप है कि उसने पेपर 10 लाख रुपये में खरीदा था, जिसे बाद में हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख रुपये में बेच दिया. सीबीआई की चार टीमें नासिक में क्राइम ब्रांच यूनिट-2 के दफ्तर पहुंचीं और आरोपी शुभम खैरनार को अपनी हिरासत में लिया. शुभम खैरनार को नासिक क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था. वहीं, एसओजी ने उन 150 छात्रों और 70 अभिभावकों की सूची सीबीआई को सौंपी है, जिन्हें लीक हुए कथित गेस पेपर (Guess Paper) मिले थे. इसके अलावा, एसओजी की हिरासत में मौजूद 13 एमबीबीएस काउंसलर्स को भी सीबीआई के हवाले किया गया है. NEET काउंसलरों के अनुसार, NEET का अधिकतम कट-ऑफ 600 अंक है और दिलचस्प बात यह है कि लीक हुए गेस पेपर में भी 600 अंकों के प्रश्न थे, जो NEET के प्रश्न पत्र में भी आए थे. 600 अंकों का यह कट-ऑफ देश के टॉप मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश सुनिश्चित करता है. गुरुग्राम से एक युवक हिरासत में NEET पेपर लीक मामले में SIT टीम ने गुरुग्राम से यश यादव नाम के युवक को भी हिरासत में लिया है. जानकारी के अनुसार, राजस्थान SIT और गुरुग्राम क्राइम ब्रांच की टीम ने यश को हिरासत में लिया. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक मामले में यश यादव की भूमिका क्या रही है, लेकिन राजस्थान SIT टीम का गुरुग्राम आना और यश को हिरासत में लेना पेपर लीक मामले में बड़ी साजिश का खुलासा करता हुआ नजर आ रहा है. CBI ने शुरू की जांच पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. सीबीआई ने शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग से मिली लिखित शिकायत के आधार पर NEET UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामले में एफआईआर दर्ज की है.  शिकायत में कहा गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने 3 मई को NEET UG परीक्षा आयोजित की थी. इसमें आरोप लगाया गया है कि परीक्षा से पहले एनटीए को NEET (UG) 2026 परीक्षा से संबंधित कुछ दस्तावेजों के प्रसारित होने की शिकायत और सूचना मिली थी. इन आरोपों से परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं. मामले को लेकर सीबीआई ने जांच शुरू कर दी है. सीबीआई की विशेष टीमें गठित कर जांच के लिए कई जगहों पर भेजी गई हैं.

वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग, CM डॉ. यादव के नेतृत्व में नई पहचान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन और वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने वन्य जीवों के संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं माना। सरकार ने इसे विकास, पर्यटन, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरगामी सोच से मध्यप्रदेश आज ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ही देश के सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वन्य जीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है कि प्रदेश के वन और नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। मध्यप्रदेश के वन देश की कई प्रमुख नदियों का मायका हैं। इस तरह ये वन कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित और समुदाय केंद्रित वन प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ा रही है। कूनो बना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का ग्लोबल प्रयोगशाला श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। एक शताब्दी पूर्व लुप्त हो चुके चीतों की देश में सफल पुनर्स्थापना ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बल पर विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। मध्यप्रदेश में चीतों साथ ही लुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंसा’ प्रजाति को भी कान्हा की घास-भूमि में आबाद किया जा रहा है। राज्य सरकार अब कूनो को ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य को चीतों का दूसरा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौंरादेही को तीसरा बड़ा चीता लैंडस्केप बनाया जा रहा है। नौंरादेही में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा के निर्माण से परियोजना के अगले चरण का शुभारंभ हो चुका है। विलुप्त प्रजातियों की पुनर्स्थापना का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में चीतों के साथ ही कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों का पुनर्वास इस दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रयास केवल एक प्रजाति को पुनर्स्थापित करने तक सीमित नहीं, बल्कि विलुप्त हो रही जैव-विविधता और पारिस्थितकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का अभियान है। चंबल, कूनो और नर्मदा क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी पहले से ही दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़ना तथा ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी में मगरमच्छों का संवर्धन शुरू करना प्रदेश की जलीय जैव विविधता संरक्षण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिन पर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौंरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति और जैव विविधता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध संरक्षण में प्रदेश कर रहा देश का नेतृत्व मध्यप्रदेश गिद्ध संरक्षण में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की संख्या राज्य में अब 14 हजार से अधिक हो चुकी है, जो देश में सर्वाधिक है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन विहार में उपचार के बाद 23 फरवरी 2026 को मुक्त किया गया एक गिद्ध पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक की लंबी यात्रा पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। नए टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से बढ़ा संरक्षण क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और जैव- विविधता संपन्न क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिसंबर-2024 में रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के दर्जे के साथ वन एवं वन्य जीव संरक्षण को नया आयाम मिला। यह निर्णय वर्ष 2008 में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक लंबित रहा था, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। इस टाइगर रिजर्व का नाम विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पं. विष्णुदेव धर वाकणकर के नाम पर रखा गया। शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व को मार्च-2025 में प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई गई है। सागर जिले के 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अप्रैल 2025 में ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया। साथ ही ओंकारेश्वर और जहानगढ़ को नए वन्य जीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। ताप्ती क्षेत्र को अगस्त 2025 में मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया, यहाँ टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। हाथी संरक्षण के लिये उठाये गये महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ का गठन, ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि होने पर मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही कर्नाटक, केरल और असम जैसे राज्यों की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को अपनाकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। टाइगर कॉरिडोर और वाइल्ड लाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर वन्य जीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उनके बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। मध्यप्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली 5,500 करोड़ … Read more

पाकिस्तान की ‘मानव ढाल’ रणनीति? ब्रह्मोस के बाद हैंगर में छिपे फाइटर जेट, रनवे पर उतारा जेडी वेंस का विमान

चंडीगढ़  पाकिस्तान एक बार फिर अपनी दोहरी नीति का शिकार नजर आ रहा है. भारत के ब्रह्मोस मिसाइल हमलों से हुए घावों को ढकने के लिए आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने जो रणनीति अपनाई, वह अब उल्टी पड़ रही है. नूर खान एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को छिपाने की रिपोर्ट्स ने पाकिस्तान को बुरी तरह फंसा दिया है. सोचिए, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस का प्लेन उसी रनवे पर उतारा गया, जहां ईरान के जेट छिपे हुए थे. ये रिपोर्ट सच निकली तो यह घटनाक्रम पाकिस्तान को महागद्दार साबित करने वाला है. वैसे पहले भी पाकिस्तान ऐसा ही कर चुका है लेकिन डोनाल्ड ट्रंप की पुचकार पर पहली बार इस देश ने उन्हें अपनी औकात दिखाई है। CBS न्यूज की हालिया रिपोर्ट के बताती है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में ईरान के साथ सीजफायर की घोषणा के कुछ दिन बाद ही ईरान ने अपने सैन्य विमानों को पाकिस्तान में छिपाया. जिन विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर पार्क करवा दिया, उनमें RC-130 टोही विमान भी शामिल है. ईरान अमेरिकी या इजरायली हमलों से अपने एसेट्स को बचाना चाहता था और इसमें उसका साथ दिया पाकिस्तान ने. ये वही पाकिस्तान है, जो खुद को वाशिंगटन और तेहरान के बीच मध्यस्थ बता रहा था, वो हौले से ईरानी खेमे में सरक गया। पाकिस्तान की गद्दारी तो देखिए पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए इसे डेलिगेशन लॉजिस्टिक्स बताया, लेकिन तथ्य कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं. इस बीच आसिम मुनीर की दोहरी छवि भी चर्चा में रही. ईरानी डेलिगेशन का स्वागत करते समय वे कॉम्बैट गियर में थे, जबकि जेडी वैंस के आने पर सूट-बूट में. नूर खान एयरबेस, जो पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस हमलों से क्षतिग्रस्त हुआ था, एक बार फिर सुर्खियों में है. मुनीर ने इस बेस को ढाल बनाने की कोशिश की, लेकिन यह अब पाकिस्तान की कमजोरी का प्रतीक बन गया है. ये पाकिस्तान के दोहरे चेहरे का सिंबल बन गया है, जो कभी भी पाला बदल सकता है। अमेरिकी सीनेटर ने उठाए सवाल अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की इस भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका पर पुनर्विचार की मांग की और कहा कि पाकिस्तान की निष्पक्षता पर संदेह है. ग्राहम की टिप्पणियों ने वाशिंगटन में पाकिस्तान के प्रति बढ़ते अविश्वास को रेखांकित किया. ईरान के साथ पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से चले आ रहे हैं- साझा सीमा, ऊर्जा सहयोग और क्षेत्रीय संतुलन के नाम पर. साल 1979 की ईरानी क्रांति के बाद भी दोनों देशों ने एक-दूसरे को समर्थन दिया, लेकिन अमेरिका, पाकिस्तान का प्रमुख सहयोगी रहा है. वो उससे अरबों डॉलर की सैन्य और आर्थिक मदद, F-16 जैसे हथियार और आतंकवाद के खिलाफ साझा अभियान चलाता रहा है. बावजूद इसके पाकिस्तान ईरान को शरण दे रहा है. ये उसकी नीयत पर सवाल उठाता है। कूटनीति या दोगलापन?     पाकिस्तान न तो पूर्ण रूप से अमेरिकी ब्लॉक में है और न ही चीनी-ईरानी धुरी में. चीन के साथ CPEC और सैन्य सहयोग और ईरान के साथ गुप्त संबंध बनाए रखना उसे अमेरिका की नजर में अविश्वसनीय बनाता है।     ब्रह्मोस हमलों के बाद पाकिस्तान ने अपनी वायु रक्षा को मजबूत करने का दावा किया, लेकिन ईरानी जेट छिपाने से उसकी क्षमता और विश्वसनीयता दोनों पर सवाल उठ गए हैं।     पाकिस्तान अब बुरी तरह फंस गया है. एक तरफ अमेरिका से सहायता की उम्मीद, दूसरी तरफ ईरान और चीन के साथ पुराने गठजोड़ उसे कठघरे में खड़ा करता है. जेडी वेंस का प्लेन उसी एयरबेस पर उतरा, जो संकेत देता है कि अमेरिका की भी नजर उसकी हर चाल पर है।     फिलहाल, पाकिस्तान सिर्फ अपना स्वार्थ देख रहा है, यही वजह है कि उसने सऊदी अरब के साथ अपने पैक्ट के तहत सेनाएं न भेजने के लिए ईरान से भी समझौता कर लिया. भले ही इससे वो अमेरिका की आंखों में धूल झोंक रहा है।  

देश के गेहूं निर्यात में म.प्र. का योगदान 40 प्रतिशत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के परिणामस्वरूप इस साल गेहूँ उत्पादन 365.11 लाख मीट्र‍िक टन तक पहुंच गया है। उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हैक्टेयर हो गई है। मध्यप्रदेश “गेंहूं प्रदेश” बन गया है। देश के कुल गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 18 प्रतिशत है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश के गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है। प्राकृतिक मिठास के कारण शरबती और डयूरम गेहूँ की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है। भारत से विदेशों को निर्यात किये जाने वाले गेहूँ में मध्यप्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत होता है। प्रदेश के गेहूँ को ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सउदी अरब, मलेशिया, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया में पसंद किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का गेहूँ ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गेहूँ उत्पादक किसानों के हित में नई योजनाएं बनाने और समय पर मदद करने की रणनीति के फलस्वरूप मध्यप्रदेश ने परंपरागत गेहूँ उत्पादक राज्यों की बराबरी कर ली है। वर्ष 2004–05 में सिर्फ 42 लाख हैक्टेयर में गेहूँ होता था, जो आज बढकर 96.58 लाख हैक्टेयर हो गया है। क्या है मध्यप्रदेश के गेंहूं में भारत सरकार के गेहूँ अनुसंधान निदेशालय ने अपने अनुसंधान में दो हजार सेम्पल का परीक्षण करने के बाद उच्च स्तर की गुणवत्ता का दाना पाया। प्रदेश के सामान्य से सामान्य किस्म के गेहूँ में भी औसत रूप से 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) आयरन तथा 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूँ में भरपूर प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक है। इन्हीं विशेषताओं से मध्यप्रदेश के गेहूँ को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। प्रदेश में गेंहूं की उगाई जाने वाली किस्मों की अपनी विशेषताएं हैं, जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 नामक गेहूँ की किस्में – एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं। जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1203 किस्मों से अधिक तापमान में भी बेहतर उत्पादन मिलता है। जे.डब्ल्यू. 1202 और जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1106 किस्में प्रोटीन से भरपूर हैं। एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211 किस्में निर्यात के लिये बेहतर है। गेहूँ की 51 किस्मों का विकास पौष्टिक आहार बनाने के लिये गेहूँ वर्ष 2026 में की जो 5 किस्में उपयोग में आ रही हैं उनमें से 4 मध्यप्रदेश में विकसित की गई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 एवं एम.पी. 4010 शामिल हैं। मध्यप्रदेश में अब तक गेहूँ की 51 किस्मों का विकास हुआ है। इनमें से 12 किस्मों का विकास सिर्फ एक दशक की अल्प अवधि में हुआ है। 100 लाख मीट्र‍िक टन उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से गेहूँ खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्र‍िक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्र‍िक टन हो गया है। प्रदेश में गेहूँ का उपार्जन जारी है। किसानों के लिए उपार्जन केन्द्रों में पूरे इंतजाम किए गये हैं। गेहूँ उपार्जन 23 मई तक चलेगा। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बडा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है। सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है। बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से ज्यादा किसान जुडे हैं। ये कंपनियां अब भंडारण विपणन और खादय प्रसंस्‍करण से भी जुड़ रही हैं। फार्मर प्रोडयूसर कंपनियों को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। इन सभी गतिविधियों से मध्यप्रदेश न केवल गेहूँ बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में राष्ट्र में अग्रणी बना हुआ है।  

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिला प्रशासन ने वितरित की मुआवजा राशि

रायपुर : हाथी के हमले में जान गंवाने वाले ग्रामीणों के परिजनों को त्वरित राहत पीड़ितों को मिली राहत: मंत्री लक्ष्मी Rajwade के प्रयास से वितरित हुआ मुआवजा मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिला प्रशासन ने वितरित की मुआवजा राशि रायपुर महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देशों पर जिला प्रशासन और वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सूरजपुर जिला के कल्याणपुर में हाथी हमले के शिकार हुए हितग्राहियों के परिजनों को मुआवजा राशि का वितरण कर दिया है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया था कि पीड़ित परिवारों को बिना किसी विलंब के सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।   सूरजपुर जिले के कल्याणपुर निवासी दो ग्रामीणों की हाथी हमले में मृत्यु होने के पश्चात, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (सूरजपुर मंडल) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की गई। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, दोनों प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा राशि स्वीकृत कर वितरित की गई है, जिनमें हितग्राही श्रीमती कांति भोई को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में 5 लाख 50 हजार रूपए एवं श्रीमती राजेश्वरी सिंह श्याम को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में 5 लाख 50 हजार रूपए भेज दी गई है। साथ ही डिविजनल फारेस्ट ऑफिसर सूरजपुर को 50-50 हजार रूपए डीबीटी के माध्यम से प्रदान किया गया है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी ने कहा कि क्षेत्र की जनता की सुरक्षा और संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ा होना सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। हाथी-मानव द्वंद्व को कम करने के लिए प्रशासन सजग है और प्रभावितों को हर संभव मदद दी जाएगी। इस त्वरित कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिला है, जिसके लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मंत्री श्रीमती राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया है।