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पंजाब एवं हरियाणा सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी, चंडीगढ़ में बढ़ाई गई सुरक्षा

चंडीगढ़  चंडीगढ़ स्थित पंजाब एवं हरियाणा सिविल सचिवालय को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया। धमकी मिलते ही पुलिस, बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड और सुरक्षा एजेंसियों की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। जानकारी के अनुसार सचिवालय को ईमेल/फोन के माध्यम से बम धमाके की धमकी मिलने की सूचना मिली थी। इसके बाद सचिवालय भवन में तलाशी अभियान चलाया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने परिसर के हर फ्लोर, पार्किंग एरिया, एंट्री गेट और संवेदनशील स्थानों की गहन जांच की। एहतियात के तौर पर सचिवालय में आने-जाने वाले लोगों की जांच बढ़ा दी गई है। कई जगहों पर बैरिकेडिंग कर सुरक्षा कड़ी कर दी गई। पुलिस अधिकारियों ने कर्मचारियों और आम लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। हाई अलर्ट पर पुलिस प्रशासन धमकी के बाद पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई है। आसपास के इलाकों में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। साइबर टीम धमकी भरे संदेश की जांच में जुटी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धमकी कहां से भेजी गई। पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां गौरतलब है कि इससे पहले भी चंडीगढ़ के कई सरकारी संस्थानों और महत्वपूर्ण इमारतों को बम से उड़ाने की धमकियां मिल चुकी हैं। ज्यादातर मामलों में जांच के दौरान धमकियां फर्जी पाई गई थीं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां किसी भी खतरे को हल्के में नहीं ले रही हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

निकाय चुनाव को लेकर पंजाब में तैयारियां तेज, रिटर्निंग ऑफिसर दफ्तरों में CCTV से होगी मॉनिटरिंग

 चंडीगढ़ पंजाब में 105 नगर निकायों के लिए उम्मीदवार आज से नामांकन दाखिल कर सकेंगे और साथ ही नामांकन पत्रों का विवरण संबंधित जिलों की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 मई निर्धारित की गई है। प्रदेश के 8 नगर निगमों, 76 नगर परिषदों और 21 नगर पंचायतों के आम चुनाव 26 मई को होंगे और 29 को मतगणना के बाद चुनाव नतीजे घोषित किए जाएंगे। आयोग के अनुसार उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए शपथ पत्रों सहित नामांकन पत्रों का विवरण संबंधित जिले की सरकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगा और साथ ही इसका लिंक आयोग की वेबसाइट sec.punjab.gov.in पर भी उपलब्ध रहेगा। साथ ही मतदाता अपने इलाके के उम्मीदवार के संबंध में भी वेबसाइट से जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सभी दलों ने चुनाव के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।  वहीं, नामांकन करने वाला उम्मीदवार अपने साथ अधिकतम 4 लोगों को ही ले जा सकेगा। यह चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि इसके बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कोई भी दल कसर छोड़ने के मूड में नहीं है। नामांकन प्रक्रिया ऑनलाइन नहीं होगी। जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी उम्मीदवार को चुनाव अधिकारी के कार्यालय में पहुंचकर आवेदन करना होगा। इसके बाद उनकी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। 18 मई को स्क्रूटनी होगी। सभी उम्मीदवारों को उस दिन चुनाव कार्यालय जाने की अनुमति होगी। इस दौरान वे रिटर्निंग अफसर के सामने अपने एतराज रख सकेंगे। यदि किसी उम्मीदवार का फार्म रिजेक्ट होता है तो उसकी जानकारी भी दी जाएगी। 19 मई नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख होगी। 105 जगह होंगे निकाय चुनाव आठ नगर निगमों में चुनाव होंगे। इनमें मोहाली, बठिंडा, अबोहर, बरनाला, कपूरथला, मोगा, बटाला और पठानकोट शामिल हैं। इसके अलावा 76 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों में भी चुनाव कराए जाएंगे। चुनाव के लिए 3977 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। सभी चुनाव शहरी क्षेत्रों में होंगे। 36 लाख वोटर करेंगे मतदान प्रशासन ने शांतिपूर्ण तरीके से चुनाव करवाने की तैयारी की है। कुल 36,72,932 मतदाता वोट करेंगे। इनमें 18,00,990 पुरुष, 17.73 लाख महिलाएं और 226 अन्य मतदाता शामिल हैं। आज से आचार संहिता भी लागू हो गई है। इस संबंध में सरकार को पत्र भेजा जा रहा है। इसके बाद तबादलों पर रोक लग जाएगी। पार्टी निशान पर लड़ सकेंगे चुनाव राजनीतिक दल पार्टी निशान पर भी चुनाव लड़ सकेंगे। इसके लिए राजनीतिक पार्टियों को सूचित कर दिया गया है। नामांकन फार्म के साथ एफिडेविट भी जमा करवाना होगा। सारी जानकारी ऑनलाइन अपडेट की जाएगी, ताकि लोग उम्मीदवारों की प्रोफाइल देख सकें। इसके लिए एक अलग लिंक जारी किया जाएगा। निगम चुनाव में 4 लाख तक खर्च की सीमा नगर निगम चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम 4 लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे। नगर काउंसिलों के लिए खर्च सीमा 3.60 लाख, 2.30 लाख और 2 लाख रुपए तय की गई है। वहीं नगर पंचायत चुनाव के लिए 1.40 लाख रुपए खर्च सीमा निर्धारित की गई है। हर बूथ पर तैनात होंगे 5 कर्मचारी निकाय चुनाव के लिए करीब 4 हजार बूथ बनाए गए हैं। चुनावी प्रक्रिया में 36 हजार कर्मचारी शामिल होंगे। पुलिस के साथ पूरा तालमेल रखा गया है। करीब 35,500 पुलिसकर्मी और होमगार्ड जवान तैनात किए जाएंगे। हर बूथ पर पांच कर्मचारी मौजूद रहेंगे। जिलों में आईएएस और पीसीएस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। वीडियोग्राफी से रखी जाएगी नजर पूरी चुनाव प्रक्रिया की वीडियोग्राफी करवाई जाएगी। रिटर्निंग अफसर के कमरे के अंदर और बाहर कैमरे लगाए जाएंगे, ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके। नामांकन के दौरान उम्मीदवार के साथ केवल चार लोग ही अंदर जा सकेंगे। रिटर्निंग अफसर के तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती की गई है। एडीसी और एसडीएम स्तर के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। डीसी को हथियार जमा करवाने के आदेश भी जारी किए गए हैं। 29 मई को आएंगे नतीजे निकाय चुनाव के परिणाम महीने के आखिर में 29 मई को घोषित किए जाएंगे. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. आम आदमी पार्टी, कांग्रेस, बीजेपी और शिरोमणी अकाली दल ने चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है।  चुनाव में पार्टियों से टिकट लेने के लिए उम्मीदवारों में होड़ मची हुई है. पंजाब के होशियारपुर नगर निगम को लेकर भी राज्य चुनाव आयोग ने चुनाव न कराने का फैसला लिया है. वोटर लिस्ट को दोबारा से तैयार करने के निर्देश दिए हैं।  बता दें कि वोटर लिस्ट को लेकर लोगों ने आपत्ति जताई थी. इसको देखते हुए चुनाव आयोग ने समीक्षा की और सही वोटर लिस्ट जारी करने के लिए कहा है. चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद तैयारी कर रहे उम्मीदवारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। 

तमिलनाडु की राजनीति में हलचल: फ्लोर टेस्ट से पहले विजय की पार्टी को DMDK का झटका

चेन्नई तमिलनाडु की थलापति विजय सरकार के लिए बुधवार का दिन बहुत बड़ा साबित होने वाला है. आज उनकी सरकार विधानसभा में बहुमत साबित करेगी. राज्य विधानसभा में 107 सीटें जीतने वाली विजय की पार्टी टीवीके कांग्रेस, वाम दलों और अन्य के समर्थन के साथ सरकार बनाने में सफल हुई है. थलापति विजय ने तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्रे आर्लेकर के समक्ष 120 विधायकों से अधिक विधायकों के समर्थन की सूची पेश की थी तभी उनको सरकार बनाने का मौका मिला. इसके बाद राज्य की दूसरी अहम पार्टी एआईएडीएमके भी दो फाड़ हो गई है. उसके एक धड़े ने थलापति विजय का समर्थन करने का फैसला किया है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि थलापति सहज तरीके से बहुमत हासिल करे लेंगे।  डीएमके ने विश्वास मत का बहिष्कार किया  तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके सरकार के विश्वास मत को लेकर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है. विपक्षी दल DMK ने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार करते हुए सदन से वॉकआउट करने का फैसला किया. DMK नेता उदयनिधि स्टालिन ने सदन में कहा कि उनकी पार्टी इस फ्लोर टेस्ट में हिस्सा नहीं लेगी और मतदान से पूरी तरह अलग रहेगी. उन्होंने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने सत्ता पक्ष को वोट दिया था, अब उन्हें लगने लगा है कि उन्होंने गंभीर गलती की है. उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि हम DMK के सदस्य सदन से वॉकआउट कर रहे हैं और इस वोटिंग प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे. इस फैसले के बाद विधानसभा का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्म हो गया है. विपक्ष के बहिष्कार से सरकार के विश्वास मत की वैधता और समर्थन संख्या को लेकर नई बहस शुरू हो गई है. तमिलनाडु की राजनीति में यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक बदलावों का संकेत दे सकता है।   थलापति विजय सरकार का विरोध करेंगे AIADMK के सभी विधायक- पलानीस्वामी तमिलनाडु विधानसभा में टीवीके सरकार के खिलाफ राजनीतिक टकराव तेज हो गया है. एआईएडीएमके प्रमुख ई पलानीस्वामी ने स्पष्ट कहा है कि उनकी पार्टी टीवीके के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव और विश्वास मत दोनों का विरोध करेगी. पलानीस्वामी ने कहा कि AIADMK के 47 विधायक पार्टी लाइन पर रहकर एकजुट रूप से टीवीके सरकार के खिलाफ वोट करेंगे. उन्होंने विधानसभा में बढ़ते मतभेदों और राजनीतिक अराजकता पर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी मुख्यमंत्री का एक गुट का समर्थन करना सही नहीं है. उन्होंने आगे सवाल उठाया कि जब सदन में असहमति साफ दिखाई दे रही है, तब सरकार द्वारा एक पक्ष का समर्थन करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है. पलानीस्वामी ने दोहराया कि हम इस प्रस्ताव का विरोध करते हैं और AIADMK के सभी सदस्य इसके खिलाफ मतदान करेंगे. इस बयान के बाद तमिलनाडु की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है, जिससे विधानसभा में निर्णायक वोटिंग का माहौल और भी दिलचस्प हो गया है।  थलापति विजय को किन-किन दलों ने दिया समर्थन  तमिलनाडु विधानसभा में हुए ट्रस्ट वोट के दौरान कई प्रमुख दलों ने टीवीके सरकार को समर्थन देने की घोषणा की है. मतदान प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले मुस्लिम लीग ने खुलकर टीवीके के पक्ष में समर्थन की घोषणा की. पार्टी ने कहा कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी की गलत रणनीतियों को रोकने और राज्य में गवर्नर शासन की स्थिति बनने से बचाने के लिए यह कदम जरूरी है. इसके अलावा वीसीके ने भी टीवीके को समर्थन दिया और सरकार से महाराष्ट्र व कर्नाटक की तरह राज्य में अंधविश्वास विरोधी कानून लाने की मांग की. वहीं माकपा और कांग्रेस ने भी विधानसभा में टीवीके सरकार के पक्ष में वोट देने की घोषणा की. इन दलों के समर्थन से टीवीके को राजनीतिक मजबूती मिलती दिख रही है और राज्य की सत्ता समीकरणों में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। 

खर्च घटाने की पहल: प्रधानमंत्री मोदी ने छोटा किया काफिला, सुरक्षा व्यवस्था में भी बदलाव के निर्देश

नई दिल्ली देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से ‘किफायत’ बरतने की अपील के बाद सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई है. पीएम मोदी ने लोगों से आग्रह किया है कि वे एक साल के लिए सोना न खरीदें और विदेश यात्राओं पर खर्च कम करें. इसके अलावा पेट्रोल-डीजल का इस्तेमाल भी संभलकर करने को कहा ताकि देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम हो सके।  PM Narendra Modi: पीएम मोदी जो कहते हैं, वो खुद भी करते हैं. इसका सबूत उन्होंने खुद दिया है. पूरी दुनिया में ईंधन संकट की आहट है. संकट से बचने को भारत में भी इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है. यही कारण है कि पीएम मोदी अब लोगों को विदेश यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं. सोना न खरीदने को कह रहे हैं. खर्च कम करने को प्रेरित कर रहे हैं. पीएम मोदी केवल देशवासियों से ही ऐसा करने को नहीं कह रहे. वह खुद भी इसे अमल में ला रहे हैं. या यूं कहिए कि उन्होंने एग्जांपल सेट कर दिया है. जी हां, पीएम मोदी ने अपना काफिला आधा कर दिया है. एसपीजी को खास निर्देश देकर काफिले में गाड़ियों की संख्या 50 फीसदी कम करने को कहा है।  टीओआई की खबर के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उनके काफिले का आकार आधिकारिक रूप से कम कर दिया गया है. पीएम मोदी का यह एक बड़ा कदम है. इससे पीएम मोदी ने सरकारी खर्च में कटौती की मिसाल पेश की है. पीएम मोदी ने इस उम्मीद से ऐसा किया है, ताकि बाकी सरकारी विभाग भी इसका पालन करेंगे. हालांकि, पीएम मोदी के इस निर्देश का असर दिखने लगा है. यूपी से एमपी तक मंत्रियों के काफिले कम होने लगे हैं।  PM मोदी का एसपीजी को निर्देश सूत्रों की मानें तो, पीएम मोदी ने एसपीजी यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप को काफिला कम करने का निर्दश दिया है. पीएम मोदी ने कहा है कि उनके काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या 50% तक कम की जाए. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा है कि काफिले में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ाई जाए. हालांकि, इसके लिए नई गाड़ियां न खरीदी जाएं ताकि अतिरिक्त खर्च से बचा जा सके।  SPG ने एक्शन दिखाना शुरू किया पीएम मोदी का निर्देश मिलते ही एसपीजी एक्शन में है. एसपीजी ने पीएम के निर्देशों को लागू करना शुरू कर दिया है एसपीजी यह भी सुनिश्चित कर रही है कि भले काफिला कम हो, मगर सुरक्षा के लिए जरूरी नियमों में कोई ढील न दी जाए. सूत्रों का कहना है कि हाल ही में पीएम की दिल्ली के बाहर की यात्राओं में काफिले का आकार पहले से छोटा नजर आया है. एसपीजी अब आगे भी इस दिशा में काम करेगी ताकि ब्लू बुक में दिए गए सख्त नियमों का पालन हो सके।  पीएम मोदी ने ऐसा क्यों किया? गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह कदम ऐसे वक्त में आया है, जब वह लगातार देशवासियों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील कर रहे हैं. पीएम मोदी ने रविवार को हैदराबाद दौरे के दौरान लोगों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील भी की थी. इसके कुछ घंटे बाद गुजरात में भी पीएम मोदी ने यही दोहराया था. महज 24 घंटे में दो बार पीएम मोदी ने ईंधन और सोने की खपत में कमी की अपील की थी।  पीएम मोदी के इस कार्य का क्या संकेत अब सवाल है कि आखिर पीएम मोदी ने अपना काफिला छोटा क्यों किया? तो इसके पीछे वजह है एग्जांपल सेट करना. जी हां, पीएम ने खुद पहल करके अन्य विभागों और राज्य सरकारों को एक संकेत दिया है. अब पीएम मोदी की पहल के बाद बाकी सरकारी विभाग भी ऐसा ही कदम उठाएंगे. केंद्र सरकार के मंत्रालय भी अब खर्च कटौती के लिए ऐसे कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं. सरकार अपने कर्मचारियों को मेट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करने, कारपूलिंग को अपनाने और बड़े-खर्चीले कार्यक्रम से बचने को प्रमोट कर रही है। 

सोना-चांदी के दामों में आग: ड्यूटी बढ़ते ही गोल्ड ₹9231 और सिल्वर ₹16675 उछला

मुंबई  केंद्र सरकार ने सोने और चांदी पर इंपोर्ट टैरिफ को 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. इन कीमती धातुओं पर इंपोर्ट टैरिफ में यह बढ़ोतरी सोने के इंपोर्ट को कम करने और चालू खाता घाटे (CAD) पर लगाम लगाने के उपायों में से एक है. इस कदम से भारतीय मुद्रा को भी सहारा मिलने की संभावना है, जो लगभग हर हफ्ते नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच रही है।  इसी के साथ MCX पर चांदी की कीमत 2,95,805 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई, जबकि सोना 1,62,648 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया. यह महंगाई और भू-राजनीतिक तनावों के बीच वैश्विक स्तर पर मिल रहे मजबूत समर्थन को दर्शाता है. चांदी की कीमत 6% के अपर सर्किट पर पहुंच गई है।      सरकार ने सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी 6% से 15% कर दी.     यह कदम चालू खाता घाटा और डॉलर की निकासी रोकने हेतु.     ड्यूटी बढ़ने से चांदी 7.25% बढ़कर 2,99,283 रुपये प्रति किलोग्राम पहुंची.     भारत का गोल्ड इम्पोर्ट बढ़ा, व्यापार घाटा 333.2 अरब डॉलर पहुंचा. आज सोने का लेटेस्ट रेट  शहर  24 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम) 22 कैरेट सोने की कीमत (प्रति ग्राम) दिल्ली 16,804 14,331 मुंबई 16,789 15,390 चेन्नई 15,634 14,331 कोलकाता  16,789 15,390 बेंगलुरु 16,789 15,390 केरल 16,789 15,390 वडोदरा 16,794 15,395 अहमदाबाद 16,794 15,395 पुणे 16,789 15,390 चांदी की कीमत  इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाने के सरकार के फैसले के बाद आज वायदा (MCX) और रिटेल बाजारों में चांदी की कीमतों में करीब 16675 रुपये प्रति किलोग्राम का इजाफा हुआ है. इम्पोर्ट ड्यूटी का ऐलान होते ही MCX पर चांदी का जुलाई कॉन्ट्रैक्ट 7.25 परसेंट की भारी तेजी के साथ 2,99,283 प्रति किलोग्राम के करीब पहुंच गया. चेन्नई जैसे देश के कई बड़े शहरों में आज चांदी का भाव उछलकर 3,00,100 प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है. दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में भी कीमत 2,90,100 रुपये प्रति किलो पर बनी हुई हैं ।  भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में से एक है. हालांकि, अधिकारियों ने सरकार के इस कदम पर चिंता जताते हुए कहा है कि कस्टम ड्यूटी बढ़ाने से कीमती धातुओं की स्मगलिंग बढ़ सकती है. अधिकारियों का तर्क है कि साल 2024 के बदा से स्मगलिंग के मामलों में कमी आई थी. गौरतलब है कि भारत सरकार ने साल 2024 के बजट में सोने-चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी में बड़ी कटौती की थी।  भारत सरकार ने तब सोने-चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दिया था. सरकार के इस कदम के बाद सोना-चांदी के आयात में रिकॉर्ड इजाफा देखने को मिला था. अब ताजा फैसले के बाद कस्टम ड्यूटी फिर से 2024 के बजट से पहले वाले स्तर पर पहुंच गया है।  सरकार ने एकाएक क्यों बढ़ाई इम्पोर्ट ड्यूटी?  भारत अपनी जरूरत का लगभग पूरा सोना और चांदी विदेशों से आयात करता है. इसका भुगतान डॉलर में होता है. पश्चिम एशिया में संकट के चलते वैश्चिक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई हें, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खर्च हो रहा है. डॉलर की इसी बाहरी निकासी को रोकने के लिए सरकार ने गैर-जरूरी आयातों पर रोक लगाई है. कारोबारी साल 2025-26 में भारत का टोटल गोल्ड इम्पोर्ट 24 परसेंट बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर पहुंच गया. इससे देश का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) बढ़कर 333.2 अरब डॉलर हो गया और चालू खाता घाटा (CAD) भी GDP के 1.3 परसेंट तक पहुंच गया. इस बढ़ते हुए आर्थिक अंतर को पाटने के लिए टैक्स बढ़ाना जरूरी हो गया था. 

PM मोदी की अपील का असर: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कारकेड में कम किए वाहन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी की अपील पर अपने कारकेड में घटाई वाहनों की संख्या राष्ट्र हित में पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने पर मध्यप्रदेश में होगा अमल, निर्देश जारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आहवान पर आगामी आदेश तक अपने कारकेड में वाहनों की संख्या कम कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोमवार को राज्य मंत्री परिषद की बैठक में मंत्री परिषद के सदस्यों से वर्तमान वैश्विक संकट को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने सहित राष्ट्र हित में सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को प्रोत्साहित करने की अपील की थी। मध्यप्रदेश गंभीरता से इस पर अमल करेगा। इस तारतम्य में राज्य सरकार ने आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री के काफिले में चलेंगे 8 वाहन आगामी आदेश तक मुख्यमंत्री के कारकेड में 13 वाहनों के स्थान पर 8 वाहन ही चलेंगे। उनके भ्रमण के समय वाहन रैली आयोजित नहीं की जाएगी। सभी मंत्रीगण यात्रा में न्यूनतम वाहनों का प्रयोग करेंगे। यह भी निर्देश जारी किए गए हैं कि नव नियुक्त निगम-मंडल के पदाधिकारी सादगी से कार्यभार ग्रहण करें और वाहन रैली आयेाजित न करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के आहवान और दिए गए सुझावों के अनुरूप मध्यप्रदेश में शासकीय कार्यों में मितव्ययता के उपायों पर अमल करने को कहा है। मंत्रीगण सहित निगम-मंडल के पदाधिकारियों और आम नागरिकों से वाहनों के कम से कम प्रयोग करने, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने और अनावश्यक रूप से वाहनों का उपयोग न किए जाने को कहा गया है।  

दुखद खबर: अखिलेश यादव के भाई प्रतीक नहीं रहे, अस्पताल में इलाज के दौरान निधन

लखनऊ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव (38) का लखनऊ में निधन हो गया है. प्रतीक यादव, समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के छोटे बेटे थे. वे अखिलेश यादव के सौतेले भाई थे।  प्रतीक यादव को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते लखनऊ के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया. वे बीजेपी लीडर अपर्णा यादव के पति थे. हालांकि, पिछले दिनों पति-पत्नी के बीच विवाद की भी खबरें आई थीं. हालांकि, मौजूदा वक्त में वे परिवार के साथ ही रह रहे थे लेकिन कहा जा रहा है कि पारिवारिक कलह जारी थी।  बीते कुछ दिनों से उनकी तबियत खराब थी और इलाज चल रहा था. आज यानी बुधवार को सुबह उन्हें हॉस्पिटल लाया गया और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. प्रतीक यादव के निधन की खबर मिलते ही यादव परिवार और समाजवादी पार्टी के समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई है।  अपर्णा यादव के पति थे प्रतीक प्रतीक यादव, बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति थे और राजनीतिक तौर पर लो-प्रोफाइल रहते हुए बिजनेस और फिटनेस सेक्टर से जुड़े थे. फिलहाल इस खबर को लेकर परिवार की ओर से कोई औपचारिक पुष्टि सामने नहीं आई है. मौत के कारणों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है और विस्तृत जानकारी का इंतज़ार किया जा रहा है।  शरीर पर चोट के कोई निशान हीं फिलहाल पुलिस मामले को गंभीरता से देख रही है. शव का पंचनामा किया जा रहा है और कुछ ही देर में डॉक्टरों का पैनल पोस्टमार्टम करेगा. सूत्रों के मुताबिक, प्रतीक यादव के शरीर पर किसी भी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया है।  फेफड़ों की समस्या से परेशान थे प्रतीक अधिकारियों का कहना है कि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी. जानकारी के मुताबिक प्रतीक लंबे वक्त से फेफड़ों की समस्या से परेशान थे. उनके लंग्स में क्लॉट था, जिसका इलाज मेदांता में चल रहा था. सुबह जब उनकी तबीयत बिगड़ी तो वो रिएक्ट नहीं कर रहे थे. तभी तुरंत परिजन सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे।  KGMU में होगा पोस्टमार्टम प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का पैनल करेगा, ताकि मौत की वजह साफ हो सके. बता दें कि 38 वर्षीय प्रतीक, मुलायम सिंह यादव और उनकी दूसरी पत्नी साधना यादव के बेटे थे।  – समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने पोस्टमार्टम हाउस से निकलने के बाद प्रतीक यादव को लेकर एक भावुक बयान दिया. अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतीक अपने स्वास्थ्य के प्रति काफी जागरूक था और हमेशा अपने बिजनेस में व्यस्त रहता था. उन्होंने बताया कि करीब दो महीने पहले उनकी प्रतीक यादव से मुलाकात हुई थी, जिस दौरान उन्होंने प्रतीक को अपने काम पर ध्यान देने की सलाह दी थी।  – अखिलेश यादव ने प्रतीक यादव को एक 'बहुत अच्छा लड़का' बताते हुए कहा कि वह परिवार के लिए हमेशा समर्पित रहा. बिजनेस के उतार-चढ़ाव पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई बार व्यापार में नुकसान होने पर व्यक्ति मानसिक रूप से प्रभावित हो जाता है।  – अखिलेश ने यादव परिवार की एकजुटता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि पूरा परिवार इस वक्त दुख में एक साथ खड़ा है. भविष्य की कार्रवाई के बारे में बात करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि परिवार जो भी फैसला करेगा, उसी के मुताबिक कानूनी रास्ते पर आगे बढ़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जो भी परिवार कहेगा, उस पर ही आगे की प्रक्रिया और जांच की जाएगी।  – प्रतीक यादव के शव का पोस्टमार्टम लखनऊ में KGMU के डॉक्टरों का पैनल कर रहा है. जानकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम के लिए KGMU की डॉ. मौसमी और डॉ. शिवली के नाम तय किए गए हैं, जबकि एक सीनियर डॉक्टर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे. पोस्टमार्टम से पहले वीडियोग्राफी की औपचारिक कार्रवाई पूरी कर ली गई है. अब कुछ ही देर में पोस्टमार्टम प्रक्रिया शुरू की जाएगी. पूरे मामले को देखते हुए पोस्टमार्टम हाउस के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।  क्यों हुई मौत? किस बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई है यह पता नहीं चला है. कुछ वक्त पहले वे मेदांता में भर्ती किए गए थे. इस दौरान अपर्णा यादव और अखिलेश यादव मिलने भी पहुंचे थे. हालत स्थिर होने के बाद उन्हें वापस घर लाया गया था।  जिम करना, कई तरह की दवाइयां लेने जैसी बातें उन्हें लेकर कही जा रही थी. वे कुछ दिनों से पूरी तरह से स्वस्थ नहीं दिखाई दे रहे थे. लेकिन बीमारी जानलेवा हो सकती है, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।  प्रतीक यादव का शव अस्पताल में रखा हुआ है. मौके पर परिवार को लोग पहुंचे हैं।  जिम का बिजनेस अपने परिवार की राजनीतिक बैकग्राउंड से दूर, प्रतीक यादव रियल एस्टेट और फिटनेस एंटरप्रेन्योरशिप के सेक्टर में काम करते थे. उन्होंने यूनाइटेड किंगडम के लंदन स्थित लीड्स यूनिवर्सिटी से MBA किया था।  प्रतीक यादव फिटनेस फ्रीक थे. लखनऊ में उनके जिम का बिजनेस भी है. उन्हें जिम करने और फिट रहने का बहुत ज्यादा शौक था।  प्रतीक ने अब तक कोई भी चुनाव नहीं लड़ा और न ही पार्टी में कोई बड़ा पद संभाला था. वे आम तौर पर सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे. साल 2017 में दिए गए एक इंटरव्यू में यादव ने कहा था कि वह जब तक संभव हो सकेगा, राजनीति से दूर रहेंगे और अपने कारोबार पर ध्यान देंगे. हालांकि, पार्टी के अंदरूनी हलकों से कभी-कभार उनके चुनाव लड़ने की मांग उठती रही, लेकिन उन्होंने कभी भी सियासत में अपना करियर बनाने के बारे में नहीं सोचा। 

Varanasi-Kolkata Expressway को बड़ा बूस्ट: बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद 35,000 करोड़ की परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

कलकत्ता पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार जो हुआ, उसने दिल्ली से लेकर कोलकाता तक सबको चौंका दिया. कभी बंगाल की राजनीति पर पूरी पकड़ रखने वाली ममता बनर्जी की पार्टी TMC को बड़ा झटका लगा और BJP ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर दी. अब शुभेंदु अधिकारी सूबे के नए मुख्यमंत्री बन चुके हैं. इस बदलाव का असर सिर्फ सत्ता बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय से अटके पड़े बड़े प्रोजेक्ट्स भी तेजी पकड़ते नजर आ रहे हैं. इन्हीं में सबसे बड़ा नाम है 'वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे'. जिस प्रोजेक्ट की फाइलें सालों से मंजूरियों, रूट बदलाव और पर्यावरणीय अड़चनों में फंसी थीं, अब उसे तेजी से पूरा करने की तैयारी हो रही है। देश के पूर्वी हिस्से में रोड कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार अब वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है. करीब 35 हजार करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस एक्सप्रेसवे को लेकर सरकार काफी गंभीर नजर आ रही है. हालांकि पश्चिम बंगाल में पर्यावरण मंजूरी और रूट बदलाव से जुड़ी दिक्कतों की वजह से परियोजना के कुछ हिस्सों में अभी भी देरी जरूर है. लेकिन केंद्र सरकार इस प्रोजेक्ट को तय समय पर पूरा करने के प्रयास कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी (EAC) ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) को झारखंड और पश्चिम बंगाल के हिस्सों में 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबे हिस्से के निर्माण की मंजूरी दे दी है. इस क्लियरेंस के बाद एक्सप्रेसवे के रुके हुए हिस्सों पर काम तेज होने की उम्मीद है और इस मेगा प्रोजेक्ट को बड़ा बूस्ट मिला है. माना जा रहा है कि यह एक्सप्रेसवे पूर्वी भारत की कनेक्टिविटी, व्यापार और ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को नई रफ्तार देगा, हालांकि इसके लिए पश्चिम बंगाल में 103 हेक्टेयर से ज्यादा वन भूमि का डायवर्जन भी करना होगा। 6 घंटे में वाराणसी से कोलकाता! करीब 610 किलोमीटर लंबे इस 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को काशी-बंगाल एक्सप्रेसवे के नाम से भी जाना जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को बेहतर तरीके से जोड़ने का काम करेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि इसके शुरू होने के बाद वाराणसी से कोलकाता तक का सफर, जो अभी 12 से 14 घंटे में पूरा होता है, वह घटकर करीब 6 से 7 घंटे का रह जाएगा. इससे माल ढुलाई और व्यापारिक गतिविधियों को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। बिजनेस टुडे को सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में इस परियोजना का करीब 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. वहीं बिहार में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और झारखंड में वन विभाग से जरूरी मंजूरियां भी मिल चुकी हैं. इन राज्यों में प्रोजेक्ट की रफ्तार थोड़ी बताई जा रही है। कहां अटक रहा प्रोजेक्ट? दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में यह परियोजना अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है. इसकी बड़ी वजह रूट अलाइनमेंट में बदलाव, जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और पर्यावरण मंजूरियों में देरी बताई जा रही है. सूत्रों के अनुसार अगर वन्यजीवों से जुड़ी चिंताओं का जल्द समाधान नहीं निकला तो केंद्र सरकार बंगाल वाले हिस्से के रूट में कुछ बदलाव भी कर सकती है। यह मुद्दा हाल ही में संसद में भी उठाया गया था. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में जानकारी देते हुए कहा था कि, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में निर्माण कार्य के ठेके पहले ही दिए जा चुके हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा मूल रूट में बदलाव की मांग किए जाने के बाद वहां काम की रफ्तार धीमी पड़ गई. उन्होंने बताया कि वाराणसी-रांची-कोलकाता वाले मूल रूट को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी थी और 3 जनवरी 2023 को पश्चिम बंगाल सरकार की सहमति भी मिल गई थी. लेकिन राज्य सरकार की ओर से मांगे गए संशोधित रूट को अक्टूबर 2024 में मंजूरी मिली, जिससे आगे की प्रक्रिया में देरी हुई। इन इलाकों में वन्यजीवों के लिए अंडरपास अधिकारियों के अनुसार पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा, पश्चिम मेदिनीपुर, हुगली और हावड़ा जिलों से गुजरने वाले हिस्सों में वन और वन्यजीवों की सेफ्टी एक बड़ी चिंता है. वन्यजीवों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने एक्सप्रेसवे पर कई वन्यजीव अंडरपास बनाने का प्रस्ताव दिया है, ताकि जानवरों की आवाजाही प्रभावित न हो।

सरकारी खर्चों पर लगाम की तैयारी, सीएम काफिले में वाहनों की कटौती पर विचार

 भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पेट्रोल-डीजल उपयोग का उपयोग कम करने की अपील का असर मध्य प्रदेश सरकार में दिखने लगा है। राज्य सरकार ने तय किया है कि अब शासकीय कार्यों में उपयोग के लिए निजी एजेंसी के माध्यम से पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) को टैक्सी के रूप में लिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने काफिले में से वाहनों की संख्या कम कर सकते हैं। इसके अलावा वित्त विभाग ने शासकीय सेवकों की विदेश यात्रा पर भी रोक लगा रखी है। मुख्यमंत्री के काफिले में बदलाव की तैयारी मुख्यमंत्री के काफिले में लगभग 13 गाड़ियां हैं। इसमें से पांच से छह गाड़ियां कम की जा सकती हैं। सुरक्षा के हिसाब से कुछ वाहन काफिले में खाली चलते हैं, इन्हें कम किया जा सकता है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जहां भी दौरे पर जाते हैं उनके स्वागत के लिए वाहनों से जुटने वाली भीड़ पर भी रोक लगाई जा सकती है। इस बीच, वन विभाग और पुलिस को छोड़कर सभी विभागों में नए वाहन क्रय करने पर रोक लगा दी गई है। खर्चों में कटौती के सख्त निर्देश जल्द ही कम खपत वाले वाहनों के उपयोग के निर्देश जारी किए जाएंगे। वित्त विभाग यह भी निर्धारित करने जा रहा है कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का कितना और कब उपयोग हो, जल्द ही इसको लेकर निर्णय लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने मंत्रियों से कहा है कि पेट्रोल-डीजल के मद में खर्च कम करें और खुद के खर्चों में भी कटौती करें। मंत्रियों के काफिले पर स्थिति केवल जनता से पेट्रोल-डीजल के किफायती उपयोग की अपील की जा रही है, लेकिन मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या घटाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। प्रदेश में मुख्यमंत्री और दो उप मुख्यमंत्रियों को मिलाकर कुल 30 मंत्री हैं। मंत्रियों के काफिले में तीन से चार वाहन चलते हैं। स्टेट गैराज से इन्हें वाहन आवंटित होता है और पेट्रोल-डीजल भी मिलता है।  

‘डॉलर’ बचाने की तैयारी में सरकार? विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर बढ़ी चिंता, क्या लग सकता है बड़ा बैन

नई दिल्ली ईरान युद्ध का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस संकट से बचने के लिए सरकार कुछ इमरजेंसी कदम उठाने पर विचार कर रही है। सरकार का मुख्य लक्ष्य देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचाना है। इसके लिए सोने और इलेक्ट्रॉनिक सामानों जैसी गैर-जरूरी चीजों के आयात पर रोक लगाई जा सकती है। इसके अलावा, देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों के बीच इस संभावित संकट को टालने के लिए कई अहम चर्चाएं हुई हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर भारत के पास कितने दिनों का विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) बचा? संकट के बीच कौन से बड़े कदम उठाने की तैयारी में सरकार? ईंधन (पेट्रोल-डीजल) की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी चर्चा में सबसे प्रमुख प्रस्तावों में से एक ईंधन की कीमतों में वृद्धि करना है। यदि ऐसा होता है, तो ईरान युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। हालांकि, अभी तक इस पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए गैर-जरूरी आयात पर रोक अधिकारियों की एक बड़ी चिंता बढ़ता चालू खाता घाटा है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए सरकार सोना और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात पर प्रतिबंध या सख्ती लगाने पर विचार कर रही है। यदि स्थिति नहीं सुधरती है, तो अधिकारी गैर-जरूरी कार्यों, जैसे विदेश यात्रा के लिए विदेशी मुद्रा निकालने पर भी अस्थायी रूप से रोक लगा सकते हैं। भारत पर ईरान युद्ध और तेल संकट का सीधा असर भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की सप्लाई रुकने और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ने से भारत को भारी नुकसान हो रहा है। रुपये पर दबाव महंगे कच्चे तेल को खरीदने के लिए भारत को भारी मात्रा में डॉलर (विदेशी मुद्रा) चुकाना पड़ रहा है। इस कारण भारतीय रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है। इस साल अब तक रुपया डॉलर के मुकाबले 5.6% टूट चुका है, जो इसे प्रमुख एशियाई मुद्राओं में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्रा बनाता है। भारत के पास कितना विदेशी मुद्रा भंडार बचा? RBI के आक्रामक कदम रुपये को लगातार गिरने से रोकने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) कई अहम कदम उठा रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति: 1 मई तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार गिरकर 690.7 बिलियन डॉलर रह गया है, जो एक महीने से अधिक समय में सबसे निचला स्तर है। हालांकि, यह भंडार अभी भी 10 से 11 महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है। सट्टेबाजी पर लगाम: RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी रोकने के लिए बैंकों की दैनिक सीमा को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित कर दिया है। भविष्य के नियम: RBI आयातकों के लिए 'करेंसी हेजिंग' के नियम बदल सकता है और निर्यातकों को निर्देश दे सकता है कि उन्हें विदेशी व्यापार से मिलने वाले डॉलर वे तुरंत देश वापस लाएं। प्रधानमंत्री की जनता से अपील रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से इस संकट की घड़ी में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिए कि:     ईंधन बचाने के लिए लोग सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें और 'वर्क फ्रॉम होम' करें।     लोग सोना खरीदना बंद करें (क्योंकि सोना भारत के सबसे बड़े आयातों में से एक है)।     गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचें। विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम की यह चेतावनी भविष्य में किसी भी संभावित कमी से निपटने की तैयारी का हिस्सा है। वियतनाम और थाइलैंड जैसे अन्य एशियाई देशों ने भी डॉलर और ईंधन बचाने के लिए ऐसे ही 'वर्क फ्रॉम होम' के निर्देश दिए हैं। सख्त फैसले लेने की मजबूत राजनीतिक स्थिति हाल ही में पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी दल अब भारत के दो-तिहाई राज्यों को नियंत्रित करते हैं। इस मजबूत राजनीतिक स्थिति के कारण सरकार के लिए देश हित में इस तरह के सख्त आर्थिक फैसले लेना आसान हो गया है। संक्षेप में कहें तो ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा हो गया है, जिससे भारत का खजाना (विदेशी मुद्रा) तेजी से खाली हो रहा है और रुपया कमजोर पड़ रहा है। इससे बचने के लिए सरकार पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने, सोना व इलेक्ट्रॉनिक्स का आयात रोकने और जनता से ईंधन व डॉलर बचाने की अपील करने जैसे आपातकालीन उपाय कर रही है।