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अवैध पेड़ कटाई मामले में सख्ती, प्रधान पाठक सस्पेंड, अध्यक्ष-सचिव के खिलाफ FIR के निर्देश

बालोद. बालोद जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़भूम परिसर में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने का एक गंभीर मामला सामने आया है. स्कूल परिसर में बिना किसी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के 29 हरे-भरे पेड़ों को बेरहमी से काट दिया गया. मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. कलेक्टर के निर्देश पर विकास खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) गुरूर ने बीते 2 जुलाई को विद्यालय का आकस्मिक और विस्तृत निरीक्षण किया, जिसमें अवैध रूप से पेड़ों की कटाई की बात पूरी तरह सच और प्रमाणित पाई गई. जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीईओ ने 3 जुलाई को गुरुर थाना प्रभारी को पत्र लिखकर दोषियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने का आवेदन दिया है. इसके साथ ही मुख्य आरोपी प्रधान पाठक के निलंबन की अनुशंसा उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है. समिति ने बाकायदा बैठक कर पास किया था प्रस्ताव जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पेड़ों की इस अवैध कटाई की बाकायदा साजिश रची गई थी. इसके लिए 23 अप्रैल को शाला विकास समिति की एक बैठक हुई, जिसमें नियमों को ताक पर रखकर पेड़ों को काटने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया. शाला विकास समिति के अध्यक्ष जीवन लाल उईके और सदस्य निर्मला उईके मुख्य तौर पर घटनाक्रम में शामिल रहे. प्रधान पाठक की भूमिका रही मुख्य पूरी प्रक्रिया में माध्यमिक स्तर के प्रधान पाठक और शाला विकास समिति के सचिव डोमर सिंह निषाद की मुख्य भूमिका रही, जिनकी सीधी देखरेख में सरकारी संपत्ति और पर्यावरण को यह नुकसान पहुँचाया गया. नियमानुसार पेड़ों की कटाई से पहले वन विभाग या राजस्व विभाग से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी, जो कि सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है. कड़ी कार्रवाई की तैयारी गुरूर बीईओ ललित चंद्राकर ने कहा कि मामले में नियमों का घोर उल्लंघन और पदीय कर्तव्यों का दुरुपयोग पाया गया है. थाना प्रभारी को नामजद FIR दर्ज करने के लिए पत्र दे दिया गया है. साथ ही संबंधित प्रधान पाठक डोमर सिंह निषाद एवं अन्य संलिप्त कर्मचारियों के निलंबन के लिए औपचारिक अनुशंसा उच्चाधिकारियों को भेजी गई है.

दतिया उपचुनाव को लेकर BJP अलर्ट, मतदान से 24 दिन पहले आज होगी बड़ी रणनीति बैठक

भोपाल. दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने रविवार को भोपाल में दिग्गज नेताओं की बड़ी बैठक प्रस्तावित की है। भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री शिवप्रकाश भी रविवार को भोपाल में रहेंगे। शिवप्रकाश भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ बैठक करेंगे। कांग्रेस ने बढ़ाई सक्रियता कांग्रेस भी आपसी मतभेद भुलाकर दतिया चुनाव में जुट गई है। इसे देखते हुए भाजपा उप चुनाव में कोई कोताही नहीं बरतना चाहती है। यही वजह है कि पार्टी के भोपाल जिले के कार्यक्रम में शामिल होने के बाद शिवप्रकाश, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के साथ उप चुनाव की रणनीति पर मंथन करेंगे। 30 जुलाई है मतदान बता दें कि चुनाव आयोग ने दतिया उपचुनाव की घोषणा कर दी है, यहां 30 जुलाई को मतदान है। ऐसे में चुनाव प्रचार को केवल 24 दिन शेष है। इन 24 दिनों की चुनावी रणनीति तय कर आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा बनाई जाएगी। निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 2 जुलाई को बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की घोषणा कर दी। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव कराया जाएगा। यह सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद रिक्त हुई थी। आर्थिक अनियमितता से जुड़े मामले में सजा राजेंद्र भारती को आर्थिक अनियमितता से जुड़े एक मामले में अदालत ने तीन वर्ष की सजा सुनाई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी। उन्होंने इस निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी है, लेकिन अब तक उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 21 फरवरी 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची के आधार पर उपचुनाव कराया जाएगा। उपचुनाव कार्यक्रम – 6 जुलाई – अधिसूचना जारी, नामांकन प्रक्रिया शुरू – 13 जुलाई – नामांकन की अंतिम तिथि – 14 जुलाई – नामांकन पत्रों की जांच – 16 जुलाई – नाम वापसी की अंतिम तिथि – 30 जुलाई – मतदान – 3 अगस्त – मतगणना गौरतलब है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा को पराजित किया था। अब इस सीट पर होने वाला उपचुनाव प्रदेश की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने की कोशिश तेज, ट्रंप बोले समझौते की संभावना बनी हुई है

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से अलग-अलग फोन पर बातचीत की। बताया जा रहा है कि इस बातचीत में यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिकी प्रयासों को नई गति देने पर जोर दिया गया। क्रेमलिन के अनुसार, ट्रंप और पुतिन के बीच करीब 90 मिनट तक चली फोन कॉल में युद्ध समाप्ति की दिशा में ठोस कदम उठाने पर चर्चा हुई। पुतिन ने ट्रंप को अमेरिका की 250वीं स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी और यूक्रेन संकट पर विस्तृत बातचीत की। बातचीत के बाद क्या बोला रूस? क्रेमलिन के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव ने बताया कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन समझौते पर चर्चा की, जिसमें 7-8 जुलाई को तुर्की में होने वाले नाटो शिखर सम्मेलन को भी ध्यान में रखा गया। ट्रंप ने शत्रुता शीघ्र समाप्त करने और संकट के राजनीतिक समाधान के लिए अपनी तत्परता दोहराई। पुतिन ने युद्धक्षेत्र की नवीनतम स्थिति से ट्रंप को अवगत कराया और राजनीतिक-राजनयिक माध्यमों से समस्या सुलझाने पर रूस की प्राथमिकता बताई। जेलेंस्की से भी की बात ट्रंप ने इसके बाद यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से फोन पर बात की। जेलेंस्की ने भी ट्रंप को स्वतंत्रता दिवस की बधाई दी। दोनों नेताओं ने मोर्चे पर मौजूदा स्थिति और चल रही राजनयिक पहल की समीक्षा की। जेलेंस्की ने टेलीग्राम पर लिखा कि बातचीत बहुत अच्छी रही। युद्ध समाप्त करने की वास्तविक संभावना है और इसमें अमेरिकी संकल्प बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इस दौरान दोनों ने नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान आगे चर्चा जारी रखने पर सहमति जताई। अमेरिकी दूत मध्यस्थता करेंगे क्रेमलिन सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मॉस्को और कीव के बीच समझौता कराने के लिए मध्यस्थता के प्रयास तेज करेंगे। जरूरत पड़ने पर ये दूत मॉस्को यात्रा के लिए भी तैयार हैं। वार्ता के दौरान पुतिन ने ईरान संकट में अमेरिकी राजनयिक भूमिका की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे आपसी सहमति वाला दीर्घकालिक समाधान निकलेगा। इस दौरान पुतिन ने ट्रंप को मॉस्को आने का निमंत्रण भी दोहराया। नाटो शिखर सम्मेलन से पहले महत्वपूर्ण वार्ता बता दें कि ये फोन कॉल तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे नाटो शिखर सम्मेलन से ठीक पहले हुए हैं। सम्मेलन में यूक्रेन के लिए समर्थन और रूस के हमलों का मुद्दा प्रमुखता से उठने की उम्मीद है। हाल ही में रूस ने कीव पर इस साल के सबसे घातक हमलों में से एक किया था, जिसमें 30 लोग मारे गए। दूसरी ओर, यूक्रेन ने रूस के अंदर ड्रोन और मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं, जिनमें तेल रिफाइनरियां और अन्य बुनियादी ढांचे निशाने पर हैं। गौरतलब है कि यह प्रयास ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका की अगुवाई वाली वार्ता कुछ समय से ठप पड़ी हुई थी।

मध्यप्रदेश सरकार को मिलेगा नया VVIP विमान, 235 करोड़ का बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 अगले माह होगा शामिल

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार आगामी अगस्त महीने में अपने राजकीय विमानन बेड़े का विस्तार करने जा रही है। सरकार करीब 235 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से कनाडा निर्मित 'बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500' बिजनेस जेट खरीदने जा रही है। यह अत्याधुनिक विमान तकनीक के मामले में गुजरात सरकार के पास मौजूद चैलेंजर 650 से भी कहीं अधिक उन्नत माना जा रहा है। इस नए जेट के संचालन के लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह में दो पायलटों को विशेष ट्रेनिंग के लिए अमेरिका भेजा जाएगा। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से जुड़े तमाम कानूनी कागजी काम पूरे किए जा चुके हैं। विमान खरीदने की क्यों आई नौबत? दरअसल, मई 2021 में कोरोना काल के दौरान रेमडेसिविर इंजेक्शन की इमरजेंसी सप्लाई करते समय राज्य सरकार का 'बीचक्राफ्ट किंग एयर बी-200जीटी' विमान ग्वालियर में क्रैश हो गया था। तत्कालीन कमलनाथ सरकार द्वारा 62 करोड़ रुपए में खरीदे गए इस विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद से मध्य प्रदेश सरकार के पास अपना कोई चालू विमान नहीं था। वर्तमान में बेड़े में सिर्फ एक चालू हेलीकॉप्टर है। किराए के विमानों पर ही 290 करोड़ खर्च सरकारी विमान न होने के कारण मुख्यमंत्री, राज्यपाल और अन्य अतिविशिष्ट (VIP) दौरों के लिए निजी चार्टर विमान और हेलीकॉप्टर किराए पर लेने पड़ रहे थे। विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच केवल किराए के विमानों पर ही सरकार 290 करोड़ रुपए की मोटी रकम फूंक चुकी है। सीएम डेली खर्च कर रहे 21 लाख रुपये मौजूदा समय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरों के लिए औसतन 21 लाख रुपए रोजाना किराए पर खर्च हो रहे हैं। एक तरफ जहां मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 4.64 लाख करोड़ रुपए पहुंच चुका है और सालाना ब्याज ही 27 हजार करोड़ रुपए चुकाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ इसी किराए के दैनिक खर्च को रोकने के लिए सरकार ने स्थाई रूप से इस नए बिजनेस जेट को खरीदने का फैसला किया। डील को कैबिनेट से मिल चुकी है मंजूरी इस नए विमान को खरीदने की कवायद लगभग दो साल पहले शुरू हुई थी। शुरुआत में टेक्सट्रॉन कंपनी ने 145 करोड़ रुपए का कोटेशन दिया था, लेकिन बाद में दाम बढ़ाकर 208 करोड़ रुपए करने के कारण वह प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। इसके बाद, 10 जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस कनाडाई चैलेंजर 3500 जेट को हरी झंडी दी गई। सितंबर 2024 से शुरू हुई वित्तीय और तकनीकी प्रक्रियाओं के समापन के बाद अब अगस्त 2026 में यह जेट आधिकारिक तौर पर प्रदेश की सेवा में तैनात हो जाएगा।

मध्यप्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, DRP नीति में बदलाव के बाद डीन करेंगे PG डॉक्टरों की तैनाती

भोपाल. मध्य प्रदेश सरकार ने जिला रेजिडेंट प्रोग्राम (डीआरपी) नीति में तीन साल बाद बड़ा बदलाव किया है। अब जिला अस्पतालों में तीन माह की सेवा देने वाले रेजिडेंट डॉक्टरों की पोस्टिंग राज्य स्तर से नहीं होगी। इसके बजाय संबंधित मेडिकल कॉलेज के डीन की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय डीआरपी प्लेसमेंट एलोकेशन कमेटी पोस्टिंग का निर्णय करेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय जरूरतों के अनुसार डॉक्टरों की तैनाती करना और जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। हालांकि, नई नीति में आवास भत्ता समाप्त किए जाने से रेजिडेंट डॉक्टरों के बीच असंतोष भी देखा जा रहा है। डीन की अध्यक्षता वाली समिति करेगी पोस्टिंग नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में गठित पांच सदस्यीय समिति रेजिडेंट डॉक्टरों के जिला आवंटन का फैसला करेगी। पहले यह प्रक्रिया राज्य स्तर पर होती थी। अब जिस मेडिकल कॉलेज में जिस क्षेत्र के मरीज अधिक आते हैं, उसी क्षेत्र के जिला अस्पतालों में वहां के रेजिडेंट डॉक्टरों को भेजा जाएगा। क्षेत्र के अनुसार होगा जिला आवंटन नई नीति के अनुसार गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के रेजिडेंट डॉक्टरों की तैनाती भोपाल, विदिशा, रायसेन और सीहोर जैसे जिलों में होगी। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर के डॉक्टरों को इंदौर, धार, झाबुआ और आसपास के जिलों में सेवाएं देनी होंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी। आवास भत्ता खत्म, खुद करनी होगी व्यवस्था नीति में सबसे बड़ा बदलाव आवास भत्ते को समाप्त करना है। अब रेजिडेंट डॉक्टरों को अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करनी होगी। जिला प्रशासन केवल सुरक्षित आवासों की सूची उपलब्ध कराएगा। वहीं महिला और दिव्यांग रेजिडेंट डॉक्टरों को सुविधा के अनुसार नजदीकी जिलों में पदस्थापना देने का प्रयास किया जाएगा। जिला अस्पतालों में मेंटर और रेजिडेंट डॉक्टरों का अनुपात 1:3 रखा गया है। रेजिडेंट डॉक्टरों ने रखीं मांगें रेजिडेंट डॉक्टरों का कहना है कि पहले की तरह आवास भत्ता जारी रखा जाना चाहिए। साथ ही अधिक मेडिकल कॉलेजों वाले क्षेत्रों से बाहर भी जिलों को डीआरपी में शामिल किया जाए। उन्होंने पूरे प्रदेश में डिवीजन से बाहर म्युचुअल ट्रांसफर की सुविधा लागू करने की भी मांग की है।

बारिश ने खोली अस्पताल की पोल! गोहद सिविल अस्पताल में भरा पानी, प्रसूति वार्ड कराया गया खाली

भिंड. गोहद में रुक-रुककर लगातार हो रही बारिश ने कस्बे की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। शनिवार को सिविल अस्पताल परिसर और वार्डों में बारिश का पानी भर जाने से मरीजों, प्रसूताओं और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालात इतने बिगड़ गए कि पानी प्रसूति वार्ड तक पहुंच गया, जिसके चलते मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए वार्ड खाली कराना पड़ा। विधायक अस्पताल पहुंचे सूचना मिलने पर गोहद विधायक केशव देसाई अस्पताल पहुंचे और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बीएमओ से अस्पताल में भरे पानी की निकासी को लेकर सवाल किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बीएमओ ने कहा कि पानी निकालना उनका काम नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी है। विधायक ने जब पूछा कि तत्काल यह काम कौन करेगा तो बीएमओ ने आशा कार्यकर्ताओं की ओर इशारा किया, लेकिन उन्होंने भी यह जिम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया। विधायक ने सीएमएचओ से की शिकायत बीएमओ के रवैये से नाराज विधायक ने मौके से ही सीएमएचओ डॉ. जेएस यादव को फोन कर अस्पताल की स्थिति से अवगत कराया। सीएमएचओ ने तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने और पानी की निकासी के निर्देश देने का आश्वासन दिया। इसके बाद विधायक ने भिंड कलेक्टर केएल मीना से भी चर्चा कर अस्पताल की अव्यवस्थाओं से अवगत कराया और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। स्कूल और बैंक परिसर में भी भरा पानी पिछले दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण गोहद में नालों का पानी उफान पर है। जल निकासी व्यवस्था ठप होने से सड़कों के साथ सरकारी भवनों में भी पानी भर गया। सिविल अस्पताल के अलावा सीएम राइज स्कूल और एक बैंक शाखा भी जलभराव से प्रभावित हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर में वर्षों से जल निकासी की समस्या बनी हुई है और हर बारिश में यही हालात बनते हैं। विधायक बोले- व्यवस्था में सुधार जरूरी विधायक केशव देसाई ने कहा कि अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर जलभराव गंभीर लापरवाही है। मरीजों को सुरक्षित और बेहतर इलाज मिलना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने अधिकारियों को जल्द स्थायी समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी – गोहद सिविल अस्पताल में जलभराव की सूचना मिली है। तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और पानी की निकासी के निर्देश दिए गए हैं। मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। – डॉक्टर जेएस यादव, सीएमएचओ भिंड

लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना, संसद में फिर गरमाएगा परिसीमन का मुद्दा

नई दिल्ली केंद्र की भाजपा नीत एनडीए सरकार आगामी मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण को 2029 से ही लागू करने के लिए एक नया संविधान संशोधन विधेयक और लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने के लिए परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) लाने की तैयारी में है। हालांकि, इन ऐतिहासिक विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की होगी। संसद के पिछले बजट सत्र में संख्या बल की कमी के कारण 131वां संविधान संशोधन विधेयक गिर गया था, जिसके बाद साधारण बहुमत से पास होने वाले परिसीमन विधेयक को आगे नहीं बढ़ाया गया था। इस बार सरकार नए सिरे से रणनीति बना रही है। दो-तिहाई बहुमत से कितनी दूर है NDA? संविधान संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन अनिवार्य है। मौजूदा स्थिति में पाला बदलने वाले सांसदों को जोड़ने के बाद भी एनडीए बहुमत के आंकड़े से पीछे है। लोकसभा में एनडीए की वर्तमान ताकत 319 सांसदों की हो चुकी हैं। इनमें टीएमसी 20 और शिवसेना यूबीटी के 6 सांसद भी शामिल हैं। अब भाजपा को संसद में 41 सीटों की आवश्यक्ता है। आपको बता दें कि 543 सीटों वाले लोकसभा में दो तिहाई बहुत में के लिए 360 सांसदों की जरूरत होती है। राज्यसभा का क्या है समीकरण राज्यसभा में NDA की वर्तमान ताकत 152 सांसदों की है। दो-तिहाई बहुमत के लिए 161 सांसदों की जरूरत है। भाजपा को यहां भी 9 सांसदों के समर्थन की आवश्यक्ता है। इस कमी को पूरा करने के लिए सरकार को या तो विपक्षी दलों का सीधा समर्थन चाहिए होगा या फिर मतदान के समय वॉकआउट के जरिए दो-तिहाई के लिए जरूरी कुल संख्या को कम करना होगा। तमिलनाडु का बदलता समीकरण विपक्षी और क्षेत्रीय दलों का समर्थन हासिल करने के लिए नए विधेयक में उनकी चिंताओं को दूर करना सबसे अहम होगा। 22 लोकसभा सांसदों वाली द्रमुक (DMK) का रुख हमेशा से सीटों के आवंटन पर मौजूदा स्थिति बनाए रखने का रहा है। डीएमके का मानना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों की सीटें कम नहीं होनी चाहिए। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद सी. जोसेफ विजय की पार्टी TVK के सत्ता में आने से राज्य के राजनीतिक समीकरण बदले हैं, जिससे भाजपा के प्रति डीएमके के कड़े रुख में कुछ नरमी के संकेत मिले हैं। हालांकि डीएमके सांसद तिरुची शिवा का कहना है कि आधिकारिक प्रस्ताव सामने आने से पहले कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। क्या हैं संवैधानिक अड़चनें? इस पूरे विवाद और नए विधेयक के केंद्र में अनुच्छेद 81 के दो मुख्य कड़े नियम हैं। अंतर-राज्यीय सीटों का आवंटन यानी कि अनुच्छेद 81(2)(a)। यह नियम कहता है कि राज्यों को लोकसभा सीटें उनकी आबादी के अनुपात में मिलनी चाहिए। आपको बता दें कि देश में राज्यों के बीच सीटों के संतुलन को बनाए रखने के लिए 1971 की जनगणना के आधार पर सीटों के आवंटन को पिछले 50 वर्षों से फ्रीज किया गया है। पहला फ्रीज 1976 में और दूसरा 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान लगाया गया था। इसकी मियाद 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के आंकड़े आने पर समाप्त हो जाएगी। 2011 की जनगणना का पेंच यदि सरकार 2011 की जनगणना को आधार बनाकर नया परिसीमन लाती है तो उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों की सीटें दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों की तुलना में बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी, क्योंकि उत्तर भारत की आबादी तेजी से बढ़ी है। केंद्र सरकार अन्य दलों का समर्थन हासिल करने के लिए अनुच्छेद 81 में संशोधन करके इस फ्रीज की समयसीमा को कुछ और दशकों के लिए आगे बढ़ा सकती है, जिससे राज्यों की मौजूदा सीटों का अनुपात सुरक्षित रहे। राज्य के भीतर का परिसीमन यह नियम राज्य के भीतर ही अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं को तय करता है ताकि राज्य के भीतर सभी क्षेत्रों में जनसंख्या का अनुपात बराबर रहे। वर्तमान में इसके लिए 2001 की जनगणना को आधार माना गया है। सरकार नए विधेयक में इसे बदलकर 2011 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित करने का प्रस्ताव दे सकती है, जिस पर विपक्षी दलों में व्यापक सहमति बनने की संभावना अधिक है।

पंडवानी की महान लोकगायिका तीजन बाई नहीं रहीं, पीएम मोदी और सीएम साय ने जताया गहरा शोक

रायपुर. छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की पहचान और पंडवानी लोकगायन शैली की विश्वविख्यात स्तंभ, पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई के निधन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने उनके निधन कला व संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया है। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने एम्स रायपुर पहुंचकर महान कलाकार के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें अंतिम विदाई दी। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने न केवल छत्तीसगढ़ की माटी का मान बढ़ाया, बल्कि पंडवानी जैसी लोक विधा को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया। मुख्यमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि तंबूरे की थाप पर महाभारत की गाथाओं को जीवंत करने वाली तीजन बाई का जाना लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन है। दुनिया भर में दिलाई लोक कला को विशिष्ट पहचान सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में एक विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और… – Narendra Modi (@narendramodi) July 5, 2026 जनप्रतिनिधियों ने दी श्रद्धाजंलि इस अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और रायपुर उत्तर के विधायक पुरंदर मिश्रा भी उपस्थित थे। सभी जनप्रतिनिधियों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार उनकी स्मृतियों को संजोने और लोक कला के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्षों और सफलता की वह गाथा है जो आने वाले समय में कलाकारों के लिए प्रकाश स्तंभ का कार्य करेगी।

कश्मीर में सुरक्षा बलों का बड़ा ऑपरेशन, शोपियां के बाग में घिरे लश्कर के दो खूंखार आतंकी

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में रविवार को भी एनकाउंटर जारी है। सुरक्षा बलों ने शनिवार से ही लश्कर-ए-तैयबा के दो खूंखार आतंकवादियों को घेर रखा है। ये दोनों आतंकी स्थानीय हैं। अभी भी मीमंदर इलाके के एक घने बाग के भीतर घिरे हुए हैं। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया है ताकि वे भाग न सकें। भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के द्वारा इस ऑपरेशन को अंजाम दिया जा रहा है। आपको बता दें कि इससे पहले शनिवार को कुछ अपुष्ट खबरों में दावा किया गया था कि दोनों आतंकी मारे गए हैं, लेकिन रविवार को अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आतंकियों को पकड़ने या उन्हें मार गिराने के लिए ऑपरेशन अभी भी जारी है। सुरक्षा बलों की तकनीकी निगरानी के दौरान शुक्रवार को इन दोनों आतंकियों की गतिविधि मीमंदर इलाके में देखी गई थी। शनिवार को जब सेना की एक टीम तलाशी लेते हुए आगे बढ़ी, तो आतंकियों ने उन पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई के बाद यह मुठभेड़ में बदल गई। एक A++ श्रेणी का कमांडर खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार फंसे दोनों आतंकियों की पहचान दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के निवासियों के रूप में हुई है। जाकिर गनी: यह लश्कर-ए-तैयबा का एक खूंखार ऑपरेटिव है, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने A++ श्रेणी के आतंकवादियों की सूची में रखा है। जाकिर साल 2024 से घाटी में सक्रिय है और कई आतंकी मामलों में वॉन्टेड है। अक्टूबर 2025 में कुलगाम की एक एनआईए (NIA) अदालत ने उसके खिलाफ उद्घोषणा नोटिस भी जारी किया था। लतीफ भट: लतीफ पिछले साल ही इस आतंकी संगठन में शामिल हुआ था और जाकिर के साथ मिलकर नेटवर्क चला रहा था। विक्टर फोर्स ने संभाला मोर्चा गर्मियों के इस मौसम में बागों के घने पत्तों और पेड़ों के कारण सुरक्षा बलों को ब्लाइंड स्पॉट्स का सामना करना पड़ रहा है। इसके लिए सेना की विशेष आतंकवाद विरोधी इकाई विक्टर फोर्स ने मोर्चा संभाला है। इलाके में रोशनी की व्यवस्था की गई है। रात के समय आतंकियों के भागने की कोशिशों को रोकने के लिए पूरे बाग को हाई-बीम लाइटों से रोशन किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए शनिवार शाम तक सेना ने आस-पास के चार गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया है, जबकि मुख्य घेराबंदी को और मजबूत कर दिया गया है। क्यों महत्वपूर्ण है यह ऑपरेशन? शोपियां जिला ऐतिहासिक रूप से दक्षिण कश्मीर को मध्य कश्मीर और पीर पंजाल श्रृंखला से जोड़ने वाला एक प्रमुख ट्रांजिट कॉरिडोर रहा है। ऐसे में जाकिर गनी और लतीफ भट जैसे स्थानीय कमांडरों को बेअसर करना लश्कर के लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ने और स्थानीय युवाओं की नई भर्ती को रोकने के लिए बेहद जरूरी है। फिलहाल, अंतिम रिपोर्ट मिलने तक दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है और सुरक्षा बल बेहद सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

MP के SIR मॉडल की मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने की तारीफ, ज्ञानेश कुमार बोले- सबसे पारदर्शी व्यवस्था

इंदौर. भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार शनिवार को इंदौर पहुंचे। उन्हाेंने बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) से संवाद कर कहा कि मध्यप्रदेश के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची के परिशोधन का कार्य अत्यंत पारदर्शी, व्यवस्थित और दक्ष तरीके से पूरा कर देश के लिए आदर्श प्रस्तुत किया है। जिस गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ यह अभियान मध्यप्रदेश में संचालित हुआ है, वैसा उदाहरण अन्य राज्यों में दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि भारत की चुनावी प्रक्रिया विश्व की सबसे पारदर्शी और विश्वसनीय व्यवस्थाओं में शामिल है, जहां मतदाता सूची निर्माण से लेकर मतदान और मतगणना तक हर चरण में राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों की भागीदारी सुनिश्चित होती है। इसी भरोसे के कारण भारत वर्ष 2026 में इंटरनेशनल आइडिया की अध्यक्षता कर रहा है। तला ऑडिटोरियम में हुए कार्यक्रम में निर्वाचन आयुक्त ने कहा कि निर्वाचन आयोग का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र नाम सूची में शामिल न हो। इसके लिए एसआईआर अभियान के तहत मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और अपात्र मतदाताओं की पहचान कर सूची को अधिक शुद्ध बनाया गया। देश में लगभग 95 करोड़ मतदाता हैं और चुनाव प्रक्रिया के संचालन में करीब 1.80 करोड़ चुनावकर्मी भाग लेते हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग के डिजिटल प्लेटफार्म ईसीआई नेट एप को बेहतर बताते हुए कहा कि इससे बीएलओ और मतदाताओं के बीच सीधा संपर्क मजबूत हुआ है। एसआईआर अभियान की उपलब्धियों और नवाचारों पर आधारित काफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव कुमार झा, संभागायुक्त डा. सुदाम खाड़े, संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी राम प्रताप सिंह जादौन तथा कलेक्टर शिवम वर्मा उपस्थित रहे। इंदौर में 4.47 लाख से अधिक नाम हटे एसआइआर प्रक्रिया के दौरान इंदाैर की सभी नो विधानसभा क्षेत्रों में 28.67 लाख से अधिक मतदाताओं के फार्म 2625 बीएलओ द्वारा भरे गए। इसमें 24.20 लाख मतदाता की मैपिंग 2003 की मतदाता सूची से हुई, जबकि प्रक्रिया के बाद 4.47 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटे थे। इंदौर में 6.67 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी कर सुनवाई की गई और दस्तावेजों की जांच की गई। बीएलओ से मुख्य चुनाव आयुक्त ने किया संवाद बीएलओ :- मतदाता सूची की पारदर्शिता के लिए आधार को अनिवार्य किया जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन आयुक्त :- आधार न जन्म और न ही नागरिकता का प्रमाण है, इसलिए अनिवार्य नहीं किया गया। बीएलओ :- स्थानीय चुनाव की मतदाता सूची और एसआइआर के बाद शुद्ध हुई केंद्रीय सूची को क्यो नहीं जोड़ा जा रहा? आयुक्त :- दोनों चुनाव प्रक्रियाओं का विधान अलग-अलग है, इसलिए सूची को एक नहीं किया जा सकता।