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राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राघव चड्ढा ने किया खुलासा, कहा – ‘AAP मुझे भी टारगेट कर सकती है’

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और आप सरकार द्वारा उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर चर्चा की। मुलाकात के बाद राज्यसभा सांसद ने आम आदमी पार्टी पर खूब निशाना साधा। उन्होंने कहा, आज हमने राष्ट्रपति को बताया कि पंजाब सरकार किस तरह आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों के खिलाफ बदले की राजनीति के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। पंजाब पुलिस की मदद से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विश्व कप विजेता हरभजन सिंह के आवास के बाहर 'देशद्रोही' लिखा। इसके बाद पंजाब में पद्म श्री राजेंद्र गुप्ता की फैक्ट्री का पानी का कनेक्शन काट दिया गया। राघव चड्ढा ने दावा किया है कि इनका अगला टारगेट मैं बनूंगा। मीडिया से बात करते हुए राघव चड्ढा ने कहा , आम आदमी पार्टी ने संदीप पाठक के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत एफआईआर दर्ज कराईं और मीडिया के जरिए यह अफवाह फैलाई कि उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। मैं आम आदमी पार्टी को बताना चाहता हूं कि उन्होंने सतर्कता बोर्ड और प्रदूषण बोर्ड की मदद से बदले का एक खतरनाक खेल शुरू किया है, जिसका अंजाम बेहद बुरा होगा। आप का अगला टारगेट मैं- राघव चड्ढा उन्होंने सूत्रों के हवाले से दावा करते हुए कहा कि , मैं उनका अगला निशाना बनूंगा। ये मेरे ऊपर भी कोई कार्रवाई करने जा रहे हैं। इन्होंने हम सब की छवि खराब करने की पूरी कोशि्श की है। पंजाब सरकार ने सोशल मीडिया पर हमें धमकाने के लिए एजेंसियों को काम पर रखा है। आम आदमी पार्टी यह सब पंजाब सरकार के फंड से कर रही है। यही कारण है कि मैंने कहा कि आम आदमी पार्टी भ्रष्ट और समझौतावादी लोगों के हाथों में फंसी हुई है। बता दें, आम आदमी पार्टी (आप) को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके राज्यसभा के 10 सदस्यों में से सात- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी कि 'आप' अपने मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटक गई है। इसके बाद इन सभी ने भाजपा में विलय कर लिया था। 'आप' छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से थे। 

नूंह में दर्दनाक घटना: रेड के दौरान हादसा, यूपी पुलिस के 4 जवान समेत 5 की जान गई

जालौन अपहरण के एक मामले में कार्रवाई करने हरियाणा गई कोतवाली उरई पुलिस टीम मंगलवार सुबह भीषण सड़क हादसे का शिकार हो गई। नूंह जनपद के तावड़ू सदर थाना क्षेत्र में हुए इस हादसे में चार पुलिसकर्मियों समेत एक वादी की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस विभाग में शोक की लहर दौड़ गई। मिली जानकारी के अनुसार, कोतवाली उरई में दर्ज एक अपहरण मामले में अपहृत व्यक्ति की बरामदगी के लिए पुलिस टीम हरियाणा रवाना हुई थी। टीम आरोपियों की तलाश में तावड़ू क्षेत्र पहुंची थी, तभी मंगलवार सुबह करीब 10 बजे उनकी गाड़ी हादसे का शिकार हो गई। ओवरटेक करने के चक्कर में हुआ हादसा बताया जा रहा है कि ओवरटेक के दौरान वाहन अनियंत्रित हो गया और सामने से आ रहे वाहन से टकरा गया, जिससे यह दर्दनाक दुर्घटना हुई। हादसे में उपनिरीक्षक सत्यभान सिंह, उपनिरीक्षक मोहित कुमार यादव, आरक्षी प्रदीप कुमार (सर्विलांस सेल) और आरक्षी अशोक कुमार (कोतवाली उरई) की मौके पर ही मौत हो गई। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकाला इसके अलावा मुकदमे के वादी अमरीक सिंह निवासी संगरूर (पंजाब) ने भी दम तोड़ दिया। सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गए और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया गया। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को कड़ी मशक्कत के बाद बाहर निकाला गया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस द्वारा हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। क्षतिग्रस्तवाहन को सड़क से हटवाकर खड़ा कराया गया है। इस हृदयविदारक घटना के बाद उरई समेत पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है।     एक मामले में कोतवाली की पुलिस टीम हरियाणा में दबिश देने गई थी। हादसे में चार पुलिसकर्मियों व वादी की मौत हुई है।  -विनय कुमार सिंह, एसपी जालौन सीएम योगी ने जताया शोक इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृत पुलिसकर्मियों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देते हुए शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना जताई है। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हरियाणा सरकार से समन्वय स्थापित कर मृतकों के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द उनके परिजनों तक पहुंचाया जाए और सभी आवश्यक प्रक्रियाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएं। प्रदेश में शोक की लहर एक साथ पांच लोगों की मौत से पुलिस विभाग में गहरा दुख है। जालौन समेत कन्नौज, कासगंज, रायबरेली और बांदा में मृतकों के घरों पर मातम पसरा हुआ है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।  

जनता दर्शन में 200 लोगों की समस्याएं सुनीं सीएम योगी ने

गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने मिलने आए लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत करिए, सरकार हर समस्या का प्रभावी समाधान कराएगी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की समस्याओं पर त्वरित संवेदनशीलता दिखाते हुए पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान सीएम योगी करीब 200 लोगों से मिले। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के सामने कुर्सियों पर बैठे लोगों तक मुख्यमंत्री खुद पहुंचे और उनकी समस्याएं सुनीं। उनके प्रार्थना पत्र लिए तथा समीप खड़े अफसरों को समस्या समाधान हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिए। अलग-अलग मामलों से जुड़ी समस्याओं के निस्तारण के लिए उन्होंने संबंधित प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को प्रार्थना पत्र संदर्भित कर निर्देशित किया कि सभी समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध और निष्पक्ष होना चाहिए।  जमीन कब्जा किए जाने से संबंधित शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कहा यदि कोई दबंग किसी की जमीन पर जबरन कब्जा कर रहा हो तो उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। जनता दर्शन में हर बार की तरह इस बार भी कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिया कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्चस्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। एस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। जनता दर्शन में कुछ महिलाओं के साथ उनके बच्चे भी आए थे। मुख्यमंत्री ने इन बच्चों को दुलारा और चॉकलेट के साथ आशीर्वाद दिया।   गोशाला में गोवंश को दुलारकर खिलाया गुड़ गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने प्रातःकाल गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर मत्था टेका। सीएम योगी जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए मंदिर की गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया। गोशाला में मुख्यमंत्री ने गोवंश के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़ खिलाया।

पाकिस्तान में महिला आत्मघाती दस्ते तैयार, जम्मू-कश्मीर को निशाना बनाने की साजिश में जैश-ए-मोहम्मद

श्रीनगर  पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-ताइबा महिला आत्मघाती दस्ते के लिए बड़े स्तर पर भर्तियां करने में लगा है। इस आत्मघाती दस्ते को तैयार करने की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात को दी गई है।    इस संगठन की ओर से आयोजित महिला आत्मघाती दस्ते की बड़ी बैठक की खुफिया जानकारी और तस्वीरें मिली है। 18 अप्रैल को सुबह 9 बजे मुजफ्फराबाद के गोजर स्थित ओएसए (वन स्टेप अहेड कॉलेज) कॉलेज में 10 घंटे का विशेष सत्र आयोजित किया गया और भर्तियां की गयीं।  इस सत्र में आतंकवादी मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर समेत पीओके के चार कमांडर भी मौजूद थे। करीब 150 से ज्यादा महिलाओं को इस विशेष सत्र के लिए बुलाया गया था। खुफिया एजेंसी से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक 18 अप्रैल को हुई आत्मघाती दस्तों की भर्ती और ट्रेनिंग कैंप पूरी जानकारी केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपी जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना कर रही मदद पाकिस्तानी मामलों के जानकार और लंबे समय तक खुफिया एजेंसियों को सेवा देने वाले रिटायर्ड ब्रिगेडियर हरदीप सिंह विरदी कहते हैं कि पाकिस्तान की सेना का पूरा फोकस महिलाओं के आत्मघाती दस्ते को तैयार करने पर लगा हुआ है। यही वजह है कि जैश ए मोहम्मद की महिला विंग जमात उल मोमिनात को आगे किया जा रहा है।      रिटायर्ड ब्रिगेडियर विरदी कहते हैं कि इसके साथ-साथ पाकिस्तान में ही हरकत-उल-मुजाहिदीन से जुड़ी महिलाएं भी आतंक को आगे बढ़ाने में शरीक होती हैं। उनको भी जम्मू कश्मीर से लेकर भारत के अलग अलग हिस्सों में आतंक को फैलाने का टास्क दिया जा रहा है। निशाने पर जम्मू-कश्मीर केंद्रीय खुफिया एजेंसी को मिली जानकारी के मुताबिक इस कोर्स के बाद दो चरण के बड़े कोर्स जमात-उल-मोमिनात की ओर से कराए जाने हैं। सूत्रों के मुताबिक आखिरी सेशन में पाकिस्तानी आतंकवादी मसूद अजहर के खुद शामिल होने का बयान भी जारी किया गया।        जानकारी के मुताबिक इस बैठक में महिलाओं को जम्मू कश्मीर के नक्शे के साथ यहां के एक-एक जिले और उसकी डेमोग्राफी के बारे में बताया गया। इस बैठक में जिक्र इस बात का भी किया गया कि मई के तीसरे हफ्ते में इन महिलाओं को इस सत्र के बाद लाहौर में एक विशेष ट्रेनिंग दी जानी है।      इससे पहले भी 17 जनवरी को लाहौर के वीमेन लॉ कॉलेज और बहावलपुर के मरकज उस्मान-ओ-अली में भी कैंप लगाए जा चुके हैं। जिसमें 90 से ज्यादा महिलाओं ने शिरकत की थी।  

डेटा आधारित मॉनिटरिंग से विकास योजनाओं की होगी सटीक समीक्षा, जिलों में आर्थिक रणनीति बनेगी मजबूत

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। इसके तहत हर जिले में ओटीडी सीएम फेलो (वन ट्रिलियन डॉलर मुख्यमंत्री फेलोशिप कार्यक्रम) लागू किया जाएगा, जिससे जिला स्तर पर विकास योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन को और प्रभावी बनाया जा सके। हर जिले में दो फेलो की तैनाती कैबिनेट के निर्णय के अनुसार प्रत्येक जनपद में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में संचालित ओटीडी सेल को मजबूत करने के लिए दो विशेषज्ञ तैनात किए जाएंगे, एक आर्थिक विकास फेलो और एक डेटा विश्लेषक फेलो। ये दोनों मिलकर जिले की आर्थिक गतिविधियों की निगरानी और रणनीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे। ये फेलो विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर कृषि, उद्योग, निवेश, अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार और जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की नियमित समीक्षा करेंगे। नियोजन विभाग के डैशबोर्ड के माध्यम से ऑनलाइन रिपोर्टिंग और केपीआई आधारित मॉनिटरिंग की जाएगी, जिससे निर्णय प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तथ्यपरक और परिणामोन्मुख बनेगी। योग्यता और चयन प्रक्रिया तय ओटीडी सीएम फेलो बनने के लिए संबंधित विषय में परास्नातक डिग्री अनिवार्य होगी और अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष रखी गई है। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा (50 अंक), अधिमानी योग्यता (30 अंक) और साक्षात्कार (20 अंक) शामिल होंगे। चयन स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन उत्तर प्रदेश द्वारा किया जाएगा। चयनित फेलो को ₹50,000 प्रतिमाह पारिश्रमिक के साथ लैपटॉप, यात्रा भत्ता और आवासीय सुविधा/भत्ता प्रदान किया जाएगा। प्रारंभिक कार्यकाल एक वर्ष का होगा, जिसे प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकेगा। ओटोडी सीएम फेलो स्थानीय संसाधनों, निवेश संभावनाओं और विकास अवसरों का विश्लेषण कर साक्ष्य-आधारित रणनीतियां तैयार करेंगे। इससे विभागीय योजनाओं का बेहतर प्राथमिकता निर्धारण और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। इस फैसले से जिलों में विकास कार्यों की निगरानी और योजना निर्माण अधिक पेशेवर और डेटा-आधारित होगा। इससे प्रदेश के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को हासिल करने में ठोस आधार मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास की गति तेज होगी। बॉक्स डिजिटल सिस्टम से साक्ष्य होंगे सुरक्षित, छोटे अपराधों में जेल के बजाय सेवा योगी कैबिनेट ने नई न्याय संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए तीन महत्वपूर्ण नियम लागू किए हैं, पहला ई-साक्ष्य प्रबंधन नियम, दूसरा ई-समन (इलेक्ट्रॉनिक आदेशिका) नियम और तीसरा सामुदायिक सेवा गाइडलाइंस 2026 है। ये नियम न्याय प्रक्रिया को आधुनिक, तेज और ज्यादा प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माने जा रहे हैं। ई-साक्ष्य के तहत अब डिजिटल सबूत सुरक्षित और मजबूत होंगे। नए ई-साक्ष्य प्रबंधन नियमों के तहत डिजिटल सबूत (जैसे मोबाइल डेटा, वीडियो, ईमेल आदि) को एक वैज्ञानिक तरीके से इकट्ठा, सुरक्षित और अदालत में पेश किया जाएगा। इससे सबूत के साथ छेड़छाड़ की संभावना कम होगी। केस मजबूत होंगे और फैसले ज्यादा सटीक होंगे। वहीं, ई-समन नियम के तहत अब कोर्ट के समन और वारंट डिजिटल माध्यम से भेजे जा सकेंगे,जैसे ईमेल, मोबाइल मैसेज या अन्य ऐप्स के जरिए। इससे नोटिस जल्दी पहुंचेगा। साथ ही, प्रक्रिया पारदर्शी और ट्रैक करने योग्य बनेगी तो वहीं महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामलों में पहचान गोपनीय रहेगी। सामुदायिक सेवा की नई गाइडलाइंस के अनुसार छोटे अपराधों में अब जेल भेजने के बजाय ‘सामुदायिक सेवा’ कराई जा सकेगी। इससे अपराधियों को सुधार का मौका मिलेगा। जेलों पर बोझ कम होगा और समाज के लिए उपयोगी कार्य (जैसे सफाई, वृक्षारोपण, गो-सेवा, ट्रैफिक मैनेजमेंट) होंगे।  150 सरकारी स्कूलों में बनेंगी ड्रीम स्किल लैब्स, छात्रों को मिलेगा आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण कैबिनेट ने मिलका नेटवर्क प्रोडक्ट्स लि. के सहयोग से प्रदेश के 150 राजकीय विद्यालयों में ड्रीम (डिजाइन, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग) स्किल लैब्स स्थापित करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों से जोड़कर उन्हें भविष्य की औद्योगिक जरूरतों के अनुसार तैयार करना है। इन लैब्स के जरिए छात्रों को रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक डिजाइन जैसी स्किल्स सीखने का मौका मिलेगा। इससे न केवल उनकी तकनीकी समझ और व्यक्तित्व विकास होगा, बल्कि उन्हें पढ़ाई के बाद बेहतर नौकरी और प्लेसमेंट के अवसर भी मिलेंगे। इस परियोजना में 68% निवेश टाटा नेल्को नेटवर्क प्रोडक्ट्स लि. द्वारा और 32% राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। नोएडा-यमुना क्षेत्र को बड़ा पावर बूस्ट, 653 करोड़ से बनेगा नया हाईटेक बिजली उपकेंद्र कैबिनेट बैठक में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र (गौतमबुद्ध नगर) में नया आधुनिक बिजली उपकेंद्र बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। इसके तहत सेक्टर-28, यीडा में 400/220 केवी का जीआईएस (गैस इंसुलेटेड) उपकेंद्र स्थापित किया जाएगा, जिसकी कुल क्षमता 3×500 एमवीए होगी। करीब ₹653.53 करोड़ की लागत से बनने वाला यह उपकेंद्र क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे उद्योगों को मजबूत बिजली आपूर्ति देगा। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, फिल्म सिटी और अन्य औद्योगिक इकाइयों को बिना रुकावट बिजली मिल सकेगी। यह परियोजना न सिर्फ वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि आने वाले समय में बढ़ने वाली बिजली की मांग को भी ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इससे पूरे क्षेत्र में ग्रिड की स्थिरता मजबूत होगी और बिजली आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बनेगी।

ऑपरेशन तलाश बना मिसाल: बिलासपुर में 579 लापता लोगों की खोज, 69 मासूम सुरक्षित लौटे घर

बिलासपुर. बिलासपुर पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान और तलाश के तहत एक महीने के भीतर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन के अभियान के तहत 648 को ढूंढ निकाला गया है. बारमद किए गए व्यक्तियों में 69 अपहृत बच्चें (11 लड़के और 58 लड़कियां) और 579 वयस्क (430 महिला और149 पुरूष) शामिल हैं. पुलिस टीमों ने न केवल राज्य भीतर, बल्कि देश के महाराष्ट्र और ओडिशा से भी 3 बच्चों को किडनैप किया है.  1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलाए गए अभियान में तकनीकी सहयोग और मुखबिर तंत्र को स्ट्रांग किया गया, जिससे कई अपहृत बच्चों के विभिन्न राज्यों में होने की जानकारी प्राप्त हुई. टीम तैयार करके देश के विभिन्न राज्यों और राज्य के विभिन्न जिलों में टीम रवाना की गई, जिस पर राज्य के बाहर महाराष्ट्र से 2 बालिका और ओडिशा से 1 बालिका की दस्तायाबी की गई. गौरतलब है कि इस अभियान में बिलासपुर जिला ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 69 बच्चों की दस्तयाबी कर राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. इसी प्रकार ऑपरेशन तलाश के तहत 579 महिला और पुरूष की दस्तयाबी कर राज्य में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है.

आधार कार्ड में होगा बड़ा बदलाव, नया डिजाइन और नाम, पता, DOB नहीं दिखेंगे?

 नई दिल्ली आधार कार्ड में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, जिसका दावा मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है. भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की तरफ से जारी होने वाले फिजिकल/प्रिंटेड आधार कार्ड पर सभी डिटेल्स प्रिंट होती हैं।   रिपोर्ट में बताया है कि सेफ्टी के मद्देनजर आधार कार्ड में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. ये बदलाव आधार कार्ड के मिसयूज को रोकेगे और साइबर ठगों से आधार कार्ड को बचाएगा।  रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले दिनों में फिजिकल आधार कार्ड की कॉपी पर फोटो और एक क्विक रिस्पोंस कोड (क्यूआर कोड) होगा. क्यूआर कोड से डिटेल्स पाने के लिए उसको स्कैन करना होगा. इस दौरान यूजर्स तय कर पाएंगे कि वह कौन सी डिटेल्स छिपाना चाहते हैं और किस डिटेल्स को रिवील करना चाहते हैं।  आधार कार्ड पर प्रिंट होती हैं ये डिटेल्स  UIDAI की तरफ से जारी आधार कार्ड पर नाम, फोटो, डेट ऑफ बर्थ, जेंडर, घर का पता और पिता का नाम तक होता है. ऐसे में अगर किसी ठग तक आधार कार्ड की फोटो कॉपी तक पहुंच जाती है, जिसके बाद वह आसानी से एक अनजान शख्स की कई डिटेल्स को जान लेता है।  ये बदलाव आने वाले दिनों में लागू होगा. रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. इसको लेकर और भी डिटेल्स आने वाले दिनों में शेयर की जाएंगी. हालांकि UIDAI की तरफ से अभी इसको लेकर कोई ऑफिशियल जानकारी शेयर नहीं की है।  UIDAI जारी कर चुका है न्यू आधार ऐप  कुछ सप्ताह पहले ही आधार ऐप का फुल वर्जन जारी कर चुका है. आधार ऐप की मदद से कुछ डिटेल्स को हाइड करके उसको PDF या इमेज फॉर्मेट में शेयर कर सकते हैं. न्यू आधारो ऐप एंड्रॉयड और आईओएस पर मौजूद है।  आधार कार्ड क्या होता है?  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण असल में 12 नंबर का यूनिक डिजिट जनरेट करती है. हर एक आधार कार्ड होल्डर के लिए अलग संख्या होती है. ये नंबर भारतीय नागरिकों को उनकी बायोमेट्रिक, नाम, पता और डेट ऑफ बर्थ के आधार पर दिया जाता है। 

भीषण दुर्घटना: नरसिंहपुर में डीडीएस टैंक गिरने से 2 मजदूरों की जान गई

बिलासपुर. बिलासपुर पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान और तलाश के तहत एक महीने के भीतर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन के अभियान के तहत 648 को ढूंढ निकाला गया है. बारमद किए गए व्यक्तियों में 69 अपहृत बच्चें (11 लड़के और 58 लड़कियां) और 579 वयस्क (430 महिला और149 पुरूष) शामिल हैं. पुलिस टीमों ने न केवल राज्य भीतर, बल्कि देश के महाराष्ट्र और ओडिशा से भी 3 बच्चों को किडनैप किया है.  1 अप्रैल से 30 अप्रैल तक चलाए अभियान में तकनीकी सहयोग और मुखबिर तंत्र को स्ट्रांग किया गया, जिससे कई अपहृत बच्चों के विभिन्न राज्यों में होने की जानकारी प्राप्त हुई. टीम तैयार करके विभिन्न राज्यों और राज्य के विभिन्न जिलों में टीम रवाना की गई, जिस पर राज्य के बाहर महाराष्ट्र से 2 बालिका और ओडिशा से 1 बालिका की दस्तायाबी की गई. गौरतलब है कि इस अभियान में बिलासपुर जिला ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत 69 बच्चों की दस्तयाबी कर राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त किया है. इसी प्रकार ऑपरेशन तलाश के तहत 579 महिला और पुरूष की दस्तयाबी कर राज्य में द्वितीय स्थान प्राप्त किया है.

हॉर्मुज बंद, फिर भी UAE और सऊदी से भारत में आयी भारी मात्रा में तेल, जानिए चौंकाने वाले आंकड़े

 नई दिल्‍ली अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का रास्‍ता पूरी तरह से ब्‍लॉक है. अमेरिका का दावा है कि इस रास्‍ते से कोई तेल की जहाज नहीं गुजर रही है, क्‍योंकि उसकी सेना ने पूरी तरह से नाकाबंदी कर दी है. इतना ही नहीं अमेरिका ने वहां से गुजरने वाले जहाजों को देखते ही उड़ाने का भी आदेश दिया है।  यह वह रास्‍ता है, जहां से भारत और चीन जैसे देश मिडिल ईस्‍ट से भारी मात्रा में तेल का आयात करते हैं. इस बीच, एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है, जो आपको भी हैरान कर देगा. दरअसल, मार्च की तुलान में भारत के तेल आयात का डाटा जारी हुआ है, जिसके मुत‍ाबिक भारत ने होर्मुज बंद रहने के बाद भी मिडिल ईस्‍ट के देशों से खूब तेल का आयात किया है. हालांकि, रूसी तेल खरीद में छूट मिलने के बाद भी कमी देखी गई है।  रूसी तेल का आयात गिरा  कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात अप्रैल में मार्च की रिकॉर्ड खरीद की तुलना में 21 प्रतिशत गिर गया. अप्रैल में हरदिन 1.56 मिलियन बैरल (एमबीडी) तेल का आयात यूक्रेन में हड़ताल के बाद एक प्रमुख रूसी टर्मिनल पर लोडिंग में आई बाधाओं से प्रभावित हुआ. यह मार्च की तुलना में भारी गिरावट है , जब भारत का आयात 1.98 मिलियन बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्‍तर पर था।  भारत के किस कंपनी ने कितना तेल मंगाया?  इंडियन ऑयल ने हर दिन 677,000 बैरल तेल खरीदा और नंबर वन पर है. इसकी खरीद मार्च की तुलना में 14 फीसदी ज्‍यादा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज 235,000 बैरल प्रतिदिन तेल खरीदकर दूसरे स्थान पर है. भारत पेट्रोलियम ने प्रतिदिन 176,000 बैरल तेल आयात किया, जो मार्च से 38 प्रतिशत कम है।  नाकाबंदी के बाद भी बढ़ी तेल खरीद  ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण मार्ग होर्मुज की नाकाबंदी के बावजूद, अप्रैल में पश्चिम एशियाई देशों से भारत में तेल की आपूर्ति में सुधार देखने को मिला है. सऊदी अरब से हरदिन 704,000 बैरल तेल का आयात हुआ, जो मार्च की तुलना में 23 प्रतिशत अधिक है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात में 191 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर हरदिन 591,000 बैरल पहुंच गया।  नाकाबंदी के बाद भी कैसे भारत आया तेल?  तेल को सऊदी अरब की यानबू और यूएई की फुजैराह पाइपलाइनों के माध्यम से भेजा गया था, जो होमुज को बाईपास करती हैं और वैश्विक ऊर्जा आयात के लिए महत्वपूर्ण मार्गों के तौर पर उभर रही है. वेस्‍ट एशिया में चल रहे जंग के बीच, भारत ने वेनेजुएला, ईरान, ब्राजील और नाइजीरिया से भी तेल का आयात बढ़ाया है।  ईरान से इतना हुआ तेल का आयात  सात साल के अंतराल के बाद, भारत ने अप्रैल में ईरान से तेल की खरीद फिर से शुरू की और प्रतिदिन 137,000 बैरल तेल का आयात किया, जब अमेरिका ने प्रतिबंधों में 30 दिनों की छूट की घोषणा की. भारत ईरान से कच्चे तेल का एक प्रमुख खरीदार रहा है. 2018 में अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों को कड़ा करने के बाद, मई 2019 से आयात बंद हो गया, और इसकी जगह पश्चिम एशियाई, अमेरिकी और अन्य ग्रेड के माल ने ले ली. करीब एक साल के अंतराल के बाद, इस महीने वेनेजुएला से तेल का आयात 298,000 बैरल प्रति दिन रहा।  इन सभी आयातों के बीच, कुल आयात में कमी देखने को मिली है. ईरान युद्ध के बाद होर्मुज की नाकाबंदी के चलते, भारत का कच्चे तेल का आयात अप्रैल में घटकर 4.3 मिलियन बैरल हर दिन हो गया, जो पिछले महीने के 4.4 मिलियन बैरल से कम है, यह जानकारी केप्लर के आंकड़ों से मिलती है। 

TET केस में बड़ा मोड़: मोहन सरकार को मिली सफलता, सुप्रीम कोर्ट ने तय की सुनवाई तारीख

भोपाल शिक्षकों के हित में लगातार प्रयास कर रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को इस बार सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए प्रदेश शासन द्वारा किए गए सतत प्रयासों को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। दरअसल, शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET-Teacher Eligibility Test) से जुड़े प्रकरण में दायर रिव्यू याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रकरण से संबंधित आवेदनों को स्वीकार करते हुए मामले को ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दे दिया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, इस महत्वपूर्ण प्रकरण की सुनवाई 13 मई को दोपहर 2 बजे के लिए निर्धारित की गई है। ये सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की अनुमति के अधीन की जाएगी। ये निर्णय शिक्षकों के पक्ष को विस्तार से रखने का अवसर प्रदान करेगा। साथ ही, मामले के न्यायिक पुनर्विचार का मार्ग प्रशस्त करेगा। महत्वपूर्ण कानूनी पहल आपको बता दें, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्य प्रदेश शासन ने शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए ये महत्वपूर्ण कानूनी पहल मानी जा रही है। सीएम ने कहा है कि, प्रदेश सरकार शिक्षकों के अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है, साथ ही इस प्रकरण में पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखेगी। शासन को विश्वास है कि, न्यायालय में पेश किए जाने वाले तथ्यों के आधार पर शिक्षकों को जल्द ही न्याय भी जरूर मिलेगा। शिक्षक कल्याण के लिए सरकार प्रतिबद्ध गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश शासन ने 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट के उस निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर की थी, जिसमें शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करनी जरूरी बताया गया है। इस फैसले के बाद कई कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन मोहन यादव से उनके आवास पर मुलाकात की थी। संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पैदा हुई स्थितियों की जानकारी उन्हें दी थी। इसके बाद मुख्यमं ने सभी को आश्वासन दिया था। उन्होंने कहा था कि शिक्षकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि कोर्ट की प्रक्रिया में किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो। सरकार हर समय शिक्षकों के साथ है। शिक्षकों को मिली सरकारी वकालत प्रदेश सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करना शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण उम्मीद की किरण माना जा रहा है। इस कदम से ये संदेश जाता है कि, राज्य स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों के अधिकारों का भी पूरी तरह से ध्यान रखा जा रहा है। न्यायालय की सुनवाई के बाद उम्मीद है कि, शिक्षकों के हितों की रक्षा और उनकी स्थिति को मजबूत करने वाले फैसले आएंगे। साथ ही, इस पूरे मामले ने शिक्षकों को ये विश्वास भी दिया कि, उनकी आवाज को सरकार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा रही है और उनके भविष्य को संवारने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।