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ऑपरेशन सिंदूर,भारत की नई रणनीतिक सैन्य सोच का प्रदर्शन

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद, मई 2025 में भारत की प्रतिक्रिया अब किसी अचानक बदलाव के बजाय अधिक एक विकसित रणनीतिक सोच के रूप में दिखाई देती है। पहलगाम आंतकी हमले में 26 नागरिकों की मौत के बाद, नई दिल्ली की कार्रवाई सिर्फ प्रतिक्रियात्मक नहीं थी। यह सोची-समझी संतुलित एक स्पष्ट जवाब देने वाली पहल थी, कि भारत अब अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए क्षमता के साथ-साथ राजनीतिक इच्छाशक्ति भी रखता है। पीछे मुड़कर देखने पर, सिंदूर एक ऐसा क्षण बनकर उभरा जहां इरादा और क्षमता असाधारण स्पष्टता के साथ एकरूप हो गए। सैन्य स्तर पर देखें तो इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी विशेषता तीनों सेनाओं थल, जल और वायुसेना के बीच बेहतर समन्वय रहा। जिस व्यवस्था को अक्सर आपसी तालमेल की कमी के लिए आलोचना झेलनी पड़ती थी, उसने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के नेतृत्व में एकीकृत और प्रभावी संचालन का प्रदर्शन किया। स्वदेशी प्रणालियों के प्रभावी उपयोग ने इसे और भी पुष्ट किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रयास ठोस युद्धक्षेत्र लाभों में तब्दील होने लगे हैं। इससे समय के साथ ऐसी क्षमताओं को बनाए रखने की भारत की क्षमता में विश्वास मजबूत हुआ है। स्थिति को अनियंत्रित किए बिना भी बनाया जा सकता है दबाव इस ऑपरेशन का एक और महत्वपूर्ण पहलू युद्धक्षेत्र का विस्तार रहा। नियंत्रण रेखा के पार जाकर पाकिस्तान के रणनीतिक क्षेत्रों में कार्रवाई करके भारत ने यह स्पष्ट किया कि परमाणु निरोध (न्यूक्लियर डिटरेंस) की सीमाएं उतनी कठोर नहीं हैं जितनी पहले मानी जाती थीं। भारत ने दिखाया कि बिना स्थिति को अनियंत्रित किए संतुलित और सीमित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई के जरिए भी दबाव बनाया जा सकता है। इसमें नौसेना की सक्रियता ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे ऑपरेशन का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़े। कूटनीतिक मोर्चे पर भी भारत का रुख स्पष्ट कूटनीतिक मोर्चे पर भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का रुख अधिक स्पष्ट और आत्मविश्वास भरा नजर आता है। पाकिस्तान के साथ संबंधों में अब यह संकेत दिया गया है कि संवाद और सहयोग उसके व्यवहार पर निर्भर करेगा। जल और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों को भी सुरक्षा से जोड़कर भारत ने यह स्पष्ट किया है कि आतंकवाद को समर्थन देने की कीमत केवल सैन्य नहीं, बल्कि बहुआयामी होगी। ऑपरेशन सिंदूर पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया खासकर अमेरिका का रुख, भारत के रणनीतिक माहौल को समझने में अहम संकेत देता है। अमेरिका ने भारत की कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ कदम के रूप में स्वीकार तो किया, लेकिन यह समर्थन पूरी तरह स्थायी या बिना शर्त नहीं था। दरअसल, भारत-अमेरिका संबंधों में एक तरह का व्यवहारिक (ट्रांजैक्शनल) दृष्टिकोण अभी भी मौजूद है। ट्रंप के दावे ने कम किया प्रभाव अमेरिका के लिए भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है, लेकिन पाकिस्तान से जुड़े संकटों के मामले में इस साझेदारी की सीमाएं हैं। डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे ने, जिसमें उन्होंने संघर्ष विराम में अपनी भूमिका बताई, भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की छवि को कुछ हद तक चुनौती दी। चाहे यह दावा कितना भी सही या गलत क्यों न हो, इससे भारत के उस रुख पर असर पड़ता है, जिसमें वह कश्मीर जैसे मुद्दों पर किसी तीसरे पक्ष की भूमिका को नकारता रहा है। इस तरह के बयान भारत के ऑपरेशन सिंदूर के मैसेज को कमजोर कर सकते हैं। वहीं ट्रंप के इस दावे का साया आज भी छाया हुआ है और भारत-अमेरिका संबंधों पर इसका प्रभाव, चाहे कितना भी सूक्ष्म क्यों न हो, आज भी बना हुआ है। नैरेटिव की लड़ाई अहम पाकिस्तान के लिए, ऐसे दावे एक तरह से कूटनीतिक राहत लेकर आए। इससे उसे अपने पुराने एजेंडे भारत के साथ विवादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने को आगे बढ़ाने का मौका मिला। इस पूरे घटनाक्रम में नैरेटिव की लड़ाई उतनी ही अहम बन गई है जितनी वास्तविक सैन्य कार्रवाई। ऑपरेशन सिंदूर जहां भारत के लिए एक नई निरोधक नीति स्थापित करने का प्रयास था, वहीं उसकी व्याख्या को लेकर अस्पष्टता पाकिस्तान के लिए फायदेमंद रही। हालांकि, जमीनी स्तर पर इस ऑपरेशन के परिणामों ने पाकिस्तान के लिए यह स्पष्ट कर दिया है कि प्रॉक्सी आतंकवाद की रणनीति अब अधिक महंगी साबित हो रही है। इससे दोनों देशों के संबंधों में एक कठोरता आई है और इस्लामाबाद को अपनी रणनीतिक सीमाओं का एहसास भी हुआ है। भारत के लिए चीन के नजरिए से भी ऑपरेशन सिंदूर महत्वपूर्ण रहा। पाकिस्तान के पास मौजूद चीनी हथियारों और प्रणालियों के प्रदर्शन के साथ-साथ भारत की बहु-आयामी कार्रवाई ने बीजिंग को यह संकेत दिया है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय चुनौती नहीं, बल्कि एक व्यापक रणनीतिक क्षमता वाला देश बन रहा है। एक साल बाद यह साफ है कि ऑपरेशन सिंदूर किसी कठोर सिद्धांत की बजाय एक व्यवहारिक पैटर्न को दर्शाता है। भारत ने यह दिखाया है कि वह जरूरत पड़ने पर संतुलित और उद्देश्यपूर्ण तरीके से सैन्य शक्ति का उपयोग कर सकता है, साथ ही स्थिति को नियंत्रित भी रख सकता है। ऑपरेशन सिंदूर भारत की रणनीतिक परिपक्वता का संकेत है। आगे की चुनौती यही होगी कि इस संतुलन को बनाए रखा जाए जहां आक्रामकता हो, लेकिन उसके साथ विवेक भी बना रहे।

सांसदों के टूटने से AAP संकट में, संसद में NDA को मिला रणनीतिक बढ़त

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए ये हफ्ता किसी बुरे सपने से कम नहीं रहा. सात दिनों के अंदर पार्टी ने राज्यसभा में अपने 10 में से 7 सांसदों को खो दिया. इसे एक सोचा-समझा राजनीतिक ऑपरेशन बताया जा रहा है. इसकी वजह से संसद में सियासत का गणित पूरा तरह बदल गया है. बुधवार, 22 अप्रैल की सुबह जब अरविंद केजरीवाल को इस तरह के किसी कदम अंदेशा हुआ, तो उन्होंने तुरंत अपने सांसदों को फोन मिलाना शुरू किया. कुछ ने फोन उठाए, कुछ ने गोल-मोल जवाब दिए और कुछ ने फोन ही नहीं उठाए. केजरीवाल शुक्रवार सुबह तक संदीप पाठक को फोन करते रहे और उन्हें भरोसा दिया गया कि पाठक उनके ही साथ हैं. लेकिन शुक्रवार दोपहर तक पाठक सीधे बीजेपी मुख्यालय पहुंच गए और सत्ताधारी पार्टी का दामन थाम लिया. पहले आप सांसदों का विलय सोमवार, 27 अप्रैल को होना था. गृह मंत्री पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार से लौटकर सभी सांसदों से मिलने वाले थे. लेकिन फिर बीजेपी को पता चला कि केजरीवाल को इस साजिश की भनक लग गई है और वो सांसदों को मनाने की कोशिश में जुट गए हैं. ऐसे में इस 'ऑपरेशन' की तारीख बदल दी गई और शाह की गैर-मौजूदगी में ही शुक्रवार को मिशन को अंजाम दे दिया गया. इस ऑपरेशन के मुख्य किरदार 1. राघव चड्ढा: पर्दे के पीछे के रणनीतिकार राघव चड्ढा इस पूरे ऑपरेशन के फील्ड कमांडर बताए जा रहे हैं. शराब नीति मामले के बाद से ही वो पार्टी से दूरी बनाए हुए थे. लंदन में उनकी आंखों की सर्जरी के दौरान ही बीजेपी से बातचीत का रास्ता साफ हुआ. वापस आकर उन्होंने एक-एक करके दूसरे सांसदों को भरोसे में लिया. 2. संदीप पाठक: सबसे बड़ा झटका संदीप पाठक वो शख्स हैं जिन्होंने पंजाब में AAP की ऐतिहासिक जीत की नींव रखी थी. केजरीवाल को सबसे ज्यादा दुख पाठक के जाने का हुआ क्योंकि वो आखिरी मिनट तक केजरीवाल को वफादारी का भरोसा दिलाते रहे और फिर सीधे राघव चड्ढा के साथ बीजेपी में शामिल हो गए. 3. हरभजन सिंह: पहले ही तय था रुख पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह का जाना चौंकाने वाला नहीं था. सूत्रों के मुताबिक, उपराष्ट्रपति चुनाव के दौरान ही BCCI से आए एक फोन ने उनका रुख साफ कर दिया था. वो पहले से ही बीजेपी के प्रभाव क्षेत्र में थे. 4. उद्योगपति सांसदों की 'मजबूरी' राजिंदर गुप्ता (ट्राइडेंट ग्रुप), विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल (LPU) जैसे सांसदों का आधार राजनीति से ज्यादा व्यापार था. अशोक मित्तल के संस्थानों पर विलय से ठीक 9 दिन पहले ED की छापेमारी हुई थी. इन सांसदों के लिए केंद्र सरकार के साथ चलना एक व्यावसायिक जरूरत भी थी. बीजेपी को क्या मिला? राजनीतिक रूप से पंजाब में बीजेपी को शायद तुरंत बड़ा फायदा न मिले, क्योंकि इनमें से ज्यादातर सांसद जमीनी नेता नहीं हैं. लेकिन संसदीय गणित में बीजेपी को बंपर जीत मिली है: बीजेपी सांसदों की संख्या 113 पहुंच गई है और NDA ने पहली बार राज्यसभा में साधारण बहुमत पार कर लिया है. अब सरकार को 'वन नेशन वन इलेक्शन' जैसे बड़े बिल पास कराने के लिए क्षेत्रीय दलों के समर्थन की जरूरत नहीं पड़ेगी. विपक्ष अब राज्यसभा में बिलों को नहीं रोक पाएगा. शुक्रवार शाम तक AAP के पास राज्यसभा में सिर्फ 3 सांसद (संजय सिंह, एनडी गुप्ता और बलबीर सिंह सीचेवाल) रह गए. केजरीवाल ने इसे पंजाबियों के साथ धोखा बताया, लेकिन बीजेपी के लिए 2027 के पंजाब मिशन का असली खेल अब शुरू हुआ है.

कोल थॉमस एलन ने मचाया हड़कंप, कई हथियारों के साथ पकड़ा गया संदिग्ध

वॉशिंगटन वाइट हाउस के हिल्टन होटल में आयोजित करेंस्पॉन्डेंट डिनर के दौरान जो कुछ हुआ उससे 45 साल पुरानी यादें फिर ताजा हो गईं। पत्रकारों के लिए आयोजित किए गए इस डिनर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस समेत कैबिनेट के सीनियर नेता मौजूद थे। उसी सयम बैंक्वेट के बाहर एक हथियारोंसे लैस 31 साल के युवक ने गोलीबारी शुरू कर दी। सीक्रेट सर्विस ने तुरंत ट्रंप समेत सभी को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उधर हमलावर को दबोच लिया गया। इस होटल में यह अपनी तरह की कोई पहली घठना नहीं है। 45 साल पहले भी एक राष्ट्रपति के साथ ऐसा ही हो चुका है। इसी होटल के बाहर रोनाल्ड रीगन पर भी हुआ था हमला अमेरिका के इतिहास में कई राष्ट्रपतियों की हत्या हो चुकी है। वहीं रोनाल्ड रीगन पर जानलेवा हमला किया गया था। 1981 में वह वॉशिंटन हिल्टन से बाहर निकले ही थे की एक शख्स ने उनपर गोलियां चला दीं। एक गोली उनके सीने में जा लगी। उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ा। उनकी जान बचा लगी गई थी। एफबीआई की आर्काइव के मुताबिक जॉन हिंकली जूनियर ने 6 गोलियां दागी थीं। होटल से सीधे एलिवेटर के जरिए उन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया। इस हममले में उनके साथ मौजूद सीक्रेट सर्विस के एजेंट भी घायल हो गए थे। 45 साल बाद फिर हिल्टन होटल में वैसा ही वाकया देखने को मिला। हालांकि इस बार कोई घायल नहीं हुआ। हमलावर को को मैग्नेट स्कैनिंग के दौरान बैंक्वेट में जाने से रोक दिया गया था और उसने वहीं फायरिंग शुरू कर दी। होटल की सुरक्षा रहती है चुस्त वॉशिंगटन होटल की काफी सुरक्षा रहती है। आम तौर पर यहां समान्य गेस्ट भी आते हैं लेकिन बालरूम में सरकारी कार्यक्रमों का आयोजन होता है। ऐसे में इसकी खास सुरक्षा रहती है। डिनर के कार्यक्रम के चलते इस होटल को आम लोगों के लिए दोपहर 2 बजे से रात के 8 बजे तक बंद कर दिया गया था। बालरूम में उस वक्त 2300 गेस्ट मौजूद थे। सभी अतिथियों को भी कई चरणों की सुरक्षा को पार करके आना था। दहशत का माहौल प्रत्यक्षदर्शियों  ने बताया कि गोलीबारी के कारण स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गयी थी, लेकिन किसी भी खास मेहमान के घायल होने की खबर नहीं है। हमले के पीछे के मकसद की अभी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने इलाके की घेराबंदी कर दी है और फॉरेंसिक टीमें घटनास्थल से सबूत जुटाने में लगी हैं। कई हथियारों से लैस था हमलावर वाइट हाउस ने पुष्टि की है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है।। कानून प्रवर्तन सूत्रों के अनुसार, संदिग्ध हमलावर की पहचान कोल टॉमस एलन के रूप में हुई है। वह 31 वर्ष का है और कैलिफोर्निया के टोरेंस का रहने वाला है। उसके पास से एक शॉटगन, एक हैंडगन और कई चाकू बरामद हुआ है। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावर उसी होटल में ठहरा हुआ था, जहां कार्यक्रम आयोजित था। इसी वजह से वह सुरक्षा के बाहरी घेरे को पार करने में सफल रहा। राष्ट्रपति ट्रंप ने सीक्रेट सर्विस की बहादुरी की प्रशंसा की है और कहा है कि सुरक्षाबलों ने बहुत ही 'तेजी और निडरता' से काम किया।

विद्यार्थी परिषद की पाठशाला से निकले स्व. केलकर जी की कार्य पद्धति का स्मरण किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की कार्यप्रणाली को अद्भुत और अनुकरणीय बताते हुए कहा कि यह संगठन केवल बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक समरसता को व्यवहार में उतारने का कार्य करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सिलेबस के साथ-साथ अपने सांस्कृतिक गौरव को भी समझें और देश के निर्माण में आगे बढ़कर काम करें। वे घंटाघर स्थित नेताजी सुभाषचंद्र बोस कल्चरल एंड इंर्फोमेशन सेंटर गीता भवन में आयोजित अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शिल्पकार स्वर्गीय यशवंत राव केलकर की जन्मशती के अवसर पर विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व. यशवंत राव केलकर को परिषद के वर्तमान स्वरूप की 'नींव का पत्थर' बताया, जिन्होंने संगठन को गढ़ने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने छात्र जीवन के संस्मरण साझा करते हुए बताया कि परिषद एक परिवार की तरह है। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सीख दी कि यदि हम छोटा बनकर काम करेंगे, तभी जीवन में बड़े लक्ष्य प्राप्त कर पाएंगे। विद्यार्थी आज का नागरिक है। विद्यार्थियों में जोश के साथ होश का संतुलन बनाये रखने के लिए इसमें शिक्षकों की भूमिका अतुलनीय है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा स्वामी विवेकानंद और माँ सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया गया। वक्ताओं ने स्व. केलकर के जीवन दर्शन और संगठन की विशिष्ट कार्य पद्धति पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष  रघुराज किशोर तिवारी ने बताया कि आज विद्यार्थी परिषद विश्व का सबसे बड़ा छात्र संगठन है, जिसका श्रेय स्व. केलकर द्वारा विकसित की गई विशिष्ट कार्य पद्धति को जाता है। उन्होंने कहा कि स्व. केलकर केवल उपदेश नहीं देते थे, बल्कि 'जीवंत आदर्श' थे, जो गरीब विद्यार्थियों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते थे और स्वयं सहायता प्रदान करते थे। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि विद्यार्थी परिषद एक ऐसी कार्यशाला है जिसने समाज के हर क्षेत्र को नेतृत्व दिया है। कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह, सांसद मती सुमित्रा बाल्मिक, सांसद  आशीष दुबे, विधायक  अजय विश्नोई, डॉ. अभिलाष पांडे,  नीरज सिंह,  रत्नेश सोनकर,  राजकुमार पटेल,  अखिलेश जैन सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी तथा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।  

सामाजिक समरसता का उत्सव बना सामूहिक विवाह, मुख्यमंत्री ने 13 जोड़ों को दिया आशीर्वाद

रायपुर दुर्ग जिले के ग्राम भरर (जामगांव-आर) में आयोजित तहसील स्तरीय विशाल कर्मा महोत्सव एवं सामूहिक आदर्श विवाह कार्यक्रम सामाजिक समरसता और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जहां मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सहभागिता करते हुए 13 नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया और उनके सुखमय दांपत्य जीवन एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज भवन पाटन में शेड निर्माण के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की। साथ ही ग्राम भरर पंचायत में शौचालय एवं शेड निर्माण तथा ग्राम पंचायत में सीसी रोड निर्माण के लिए 10 लाख रुपये देने की घोषणा भी की, जिससे क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री साय ने साहू समाज को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा और गौरवशाली समाज बताते हुए माता कर्मा के योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने कहा कि माता कर्मा की भक्ति और सेवा भावना समाज के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रही है। इस दौरान उन्होंने स्वर्गीय ताराचंद साहू को भी नमन किया और उनके साथ कार्य करने के अपने अनुभव साझा किए। राज्य सरकार की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले 28 महीनों में राज्य में सुशासन स्थापित करने के साथ-साथ “मोदी की गारंटी” को पूरा करने की दिशा में ठोस कार्य किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के प्रयासों की सराहना करते हुए बताया कि राज्य में 18 लाख परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ प्रदान किया जा रहा है। किसानों को बकाया बोनस राशि का भुगतान, 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी तथा “महतारी वंदन योजना” के माध्यम से महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं और सिलाई-कढ़ाई, किराना दुकान सहित अन्य छोटे व्यवसाय शुरू कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा  कि “रामलला दर्शन योजना” के अंतर्गत दो वर्षों में लगभग 42 हजार लोगों को लाभ मिला है । उन्होंने बस्तर क्षेत्र में नक्सल समस्या के उन्मूलन और विकास कार्यों में आई तेजी को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। ऊर्जा क्षेत्र की पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026 की शुरुआत मार्च 2026 में की गई है, जो उन उपभोक्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है जिनका बिजली बिल लंबे समय से बकाया है। “मोर बिजली ऐप” के माध्यम से उपभोक्ता मोबाइल से ऑनलाइन पंजीकरण कर अपनी पात्रता की जांच कर सकते हैं। इस योजना के तहत बकाया राशि पर लगने वाले ब्याज या सरचार्ज में 100 प्रतिशत छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में अटल डिजिटल केंद्र खोलकर डिजिटल सेवाओं को सुलभ बनाया जा रहा है, जबकि प्राथमिक कृषि साख समितियों के माध्यम से किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में सुशासन को सुदृढ़ करने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए भी प्रभावी कदम उठाए गए हैं, जिससे विकास कार्यों में तेजी आई है। इस अवसर पर सांसद विजय बघेल, कमिश्नर सत्यनारायण राठौर, कलेक्टर अभिजीत सिंह, अध्यक्ष जिला साहू संघ नंदलाल साहू, अध्यक्ष तेलघानी बोर्ड जितेन्द्र साहू सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं नागरिकगण उपस्थित थे।

₹46,660 करोड़ निवेश से बदलेगी तस्वीर, गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होगा इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग हब

594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर के रूप में विकसित कर रही योगी सरकार पूरे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 आईएमएलसी नोड्स विकसित किए गए, 6507 एकड़ भूमि भी की गई चिन्हित मेरठ से प्रयागराज तक रणनीतिक रूप से स्थापित होंगे आईएमएलसी, क्षेत्रीय संतुलित विकास सुनिश्चित होगा अब तक मिले 987 निवेश प्रस्ताव, लगभग ₹47 हजार करोड़ के संभावित निवेश का लक्ष्य निर्धारित मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए बड़ा केंद्र बनेगा कॉरिडोर, 12 जिलों में फैलेगा विकास लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अप्रैल को हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे को देशवासियों को समर्पित करेंगे। योगी सरकार इस परियोजना को “एक्सप्रेसवे सह इंडस्ट्रियल कॉरिडोर” मॉडल के रूप में आगे बढ़ा रही है। सरकार ने उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे को औद्योगिक विकास से जोड़ते हुए गंगा एक्सप्रेसवे को इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) के रूप में विकसित किया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की इस योजना के तहत 594 किमी लंबे एक्सप्रेसवे के किनारे 12 औद्योगिक नोड्स विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। अब तक 987 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनके जरिए लगभग ₹47 हजार करोड़ के निवेश का लक्ष्य तय किया गया है। यह पूरी योजना 12 जिलों में औद्योगिक विकास का नया नेटवर्क खड़ा करेगी।  594 किमी एक्सप्रेसवे, 12 नोड्स और 6,507 एकड़ का इंडस्ट्रियल नेटवर्क आईएमएलसी योजना के तहत पूरे एक्सप्रेसवे कॉरिडोर में सभी 12 जिलों में 12 नोड्स बनाए गए हैं। इन नोड्स के लिए कुल 6,507 एकड़ भूमि चिन्हित की गई है। प्रत्येक नोड को उसकी भौगोलिक स्थिति और औद्योगिक संभावनाओं के आधार पर डिजाइन किया गया है, ताकि मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को एकीकृत रूप से बढ़ावा मिल सके। मेरठ से प्रयागराज तक हर नोड का लोकेशन और एरिया तय कर लिया गया है। इन नोड्स की यह स्ट्रैटेजिक प्लानिंग पूरे एक्सप्रेसवे को एक “इकोनॉमिक ग्रोथ बेल्ट” में बदल देगी। 987 निवेश प्रस्ताव, ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावनाएं आईएमएलसी योजना को निवेशकों से जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। अब तक 987 ‘इंटेंट्स ऑफ इन्वेस्टमेंट’ (ईओआई) प्राप्त हुए हैं, जिनके जरिए ₹46,660 करोड़ के निवेश की संभावना है। यह निवेश मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउसिंग, ई-कॉमर्स सप्लाई चेन और एग्री-प्रोसेसिंग सेक्टर में आएगा। एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित होने वाले आईएमएलसी नोड्स माल परिवहन को तेज और सस्ता बनाएंगे, जिससे उद्योगों की लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। 12 जिलों में संतुलित विकास, हरदोई बनेगा प्रमुख केंद्र यह कॉरिडोर 12 जिलों को सीधे जोड़ेगा, जिससे क्षेत्रीय असमानता कम होगी। खासतौर पर हरदोई, उन्नाव, रायबरेली और प्रतापगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों में बड़ा इजाफा होगा। योगी सरकार का फोकस अब केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि उसे औद्योगिक विकास से जोड़कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देना है। गंगा एक्सप्रेसवे के साथ विकसित हो रहा आईएमएलसी मॉडल इस विजन का प्रमुख हिस्सा है, जो उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में मजबूत कदम है। गंगा एक्सप्रेसवे पर प्रस्तावित नोड्स का विस्तृत विवरण मेरठ : 10 किमी पर, 529 एकड़ हापुड़ : 54 किमी पर, 304 एकड़ बुलंदशहर : 2,798 एकड़ (सबसे बड़ा क्लस्टर) अमरोहा : 74 किमी पर, 348 एकड़ संभल : 100 किमी पर, 591 एकड़ बदायूं : 189 किमी पर, 269 एकड़ शाहजहांपुर : 255 किमी पर, 252 एकड़ हरदोई : 282 किमी पर, 335 एकड़ उन्नाव : 422 किमी पर, 333 एकड़ रायबरेली : 517 किमी पर, 232 एकड़ प्रतापगढ़ : 555 किमी पर, 263 एकड़ प्रयागराज : 601 किमी पर, 251 एकड़

Jabalpur में गड़बड़ी पर शिकंजा, पुराने गेहूं की बिक्री के शक में गोदामों पर ताला

जबलपुर. प्रशासनिक अमले द्वारा जिले में स्थित ऐसे कई निजी गोदामों को सील करने की कार्रवाई की गई, जहां गेहूं का भंडारण पाया गया था। ज्ञात हो कि समर्थन मूल्य पर उपार्जन में पुराने गेहूं की रीसाइक्लिंग की आशंका को देखते हुये कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आदेश जारी कर जिले में स्थित निजी गोदामों से गेहूं की निकासी पर उपार्जन अवधि तक प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर के आदेश पर ऐसे सभी गोदामों को सील किया जा रहा है, जहां पूर्व वर्ष का गेहूं रखा हुआ है, ताकि किसानों की आड़ में बिचौलियों या व्यापारियों द्वारा पहले से भंडारित गेहूँ को उपार्जन केंद्रों पर बेचा न जा सके। गोदामों में भंडारित गेहूं की निकासी पर रोक जबलपुर जिले में गेहूं उपार्जन में फर्जीवाड़ा रोकने गोदामों में भंडारित गेहूं की निकासी पर रोक लगाने के अलावा भी ऐसे कई कदम उठाये जा रहे है, जिससे वास्तविक किसानों को ही उपार्जन व्यवस्था का लाभ मिल सके। किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं के उपार्जन के लिए बनाए गए खरीदी केंद्रों की गतिविधियों पर नजर रखने प्रत्येक खरीदी केंद्र पर एक नोडल अधिकारी को तैनात किया गया है। इसके साथ ही जिला प्रशासन द्वारा अवैध रूप से भंडारित गेहूं की सूचना देने वालों को 5 हजार रुपये से 21 हजार रुपये तक के नकद पुरस्कार देने की घोषणा भी की गई है। डेटा एनालिसिस सेल का गठन इस वर्ष उपार्जन प्रक्रिया की निगरानी हेतु डेटा एनालिसिस सेल का गठन किया गया है, जो जेनरेटिव एआइ तकनीक के माध्यम से कार्य करेगा। यह सेल पिछले तीन से चार वर्षों के राजस्व, खाद वितरण एवं पंजीयन संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण कर असामान्य प्रवृत्तियों की पहचान करेगा। इस तकनीक के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन एवं बिचौलियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी, ताकि केवल वास्तविक एवं पात्र किसान ही उपार्जन केंद्रों पर अपनी उपज विक्रय कर सकें। गेहूं उपार्जन के लिये पंजीयन कराने वाले किसानों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने एसएमएस प्रणाली भी लागू की गई है, जिसके माध्यम से किसानों को उपार्जन से संबंधित जानकारी प्रदान की जा रही है।

Anil Tuteja की जमानत याचिका खारिज, कोर्ट ने कहा— सबूतों से छेड़छाड़ का खतरा

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने कोरबा जिले के डिस्टि्रक्ट मिनरल फंड से जुड़े फंड के इस्तेमाल में भ्रष्टाचार के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल में बंद पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा की तुरंत जमानत दिए जाने पेश आवेदन को खारिज कर दिया, कोर्ट ने कहा कि जुर्म की गंभीरता, आवेदक की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में आवेदक की स्थिति पर गौर किया गया, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. आर्थिक अपराध जानबूझकर और सोच-समझकर किया जाता है, जिसमें निजी फ़ायदे को ध्यान में रखा जाता है, चाहे समुदाय पर इसका कोई भी नतीजा हो, जिससे समुदाय का भरोसा और आस्था खत्म हो जाती है और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय हित को नुकसान होता है. मामले की सुनवाई जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में हुई. ईओडब्ल्यू एवं एसीबी ने कोरबा जिले में डीएमएफ फंड घोटाला मामले में तत्कालीन इंडस्ट्रीयल डिपोर्टमेंट के एडिशनल सिक्रेटरी अनिल टुटेजा को 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल किया है. जेल में बंद अधिकारी ने हाईकोर्ट में स्थाई जमानत दिए जाने आवेदन दिया था. आवेदन में सह आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दिए जाने, मामले की सुनवाई में विलंब के आधार पर जमानत की मांग की गई थी. आवेदन पर जस्टिस नरेन्द्र कुमार व्यास की कोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद आदेश में कहा करप्शन एक्ट, 1988 की धारा 7 और 12 के तहत अपराध करने में आवेदक की संलिप्तता साबित करते हैं. केस डायरी को और देखने पर, यह साफ़ पता चलता है कि सतपाल सिह छाबड़ा को उन फर्मों से गैर-कानूनी कमीशन के तौर पर 16 करोड़ रुपये मिले हैं. इसमें से आवेदक को पेमेंट किया गया है, इसलिए पहली नज़र में, आवेदक के इस अपराध में शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता. आवेदक ने अपने पद का गलत इस्तेमाल करके प्राइवेट कंपनियों द्बारा पब्लिक फंड का गलत इस्तेमाल किया है, जिससे पब्लिक के हित को बहुत नुकसान हुआ है. सतपाल सिह छाबड़ा के 18.02.2025 को पुलिस के सामने दिए गए बयान में लगाए गए आरोपों के बारे में सच्चाई सामने लाने के लिए, आवेदक की कस्टडी ज़रूरी है. आवेदक का यह भी कहना है कि दूसरे सह-आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई है, इसलिए, मौजूदा आवेदक को पैरिटी बेसिस पर ज़मानत दी जा सकती है. इस पर कहा कि केस के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आरोपी दीपेश टांक 8 महीने से एक साल से ज़्यादा जेल में रहा, इसी तरह रानू साहू और सौम्या चौरसिया 2 साल से ज़्यादा जेल में रहे, जबकि आवेदक 23.02.2026 से यानी सिर्फ़ दो महीने जेल में रहा, इसलिए आवेदक इन आरोपियों के साथ पैरिटी का दावा नहीं कर सकता है. आवेदक का यह भी कहना है कि ट्रायल में ज़्यादा समय लग सकता है क्योंकि प्रॉसिक्यूशन को कई गवाहों से पूछताछ करनी है और चार्जशीट के साथ बहुत सारे डॉक्यूमेंट्स फाइल किए गए हैं. इस पाइंट पर कोर्ट ने कहा ट्रायल में देरी हमेशा आरोपी को बेल पर रिहा होने का कोई हक नहीं देती. कोर्ट को जुर्म की गंभीरता, एप्लीकेंट की भूमिका और गवाहों को प्रभावित करने में एप्लीकेंट की स्थिति पर गौर करना होगा, क्योंकि वह डिपार्टमेंट में सीनियर ऑफिसर था और एप्लीकेंट ने सप्लायर्स के साथ मिलकर बहुत सारा पब्लिक फंड हड़पा है. एप्लीकेंट पहले भी एक असरदार पद पर था, इस बात की बहुत ज़्यादा संभावना है कि अगर उसे इस कोर्ट ने बेल पर रिहा किया तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है, गवाहों को प्रभावित कर सकता है और जांच में रुकावट डाल सकता है. इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की जमानत आवेदन को खारिज किया है.

Swachh Survekshan को लेकर तैयारी तेज, फीडबैक प्रक्रिया शुरू; मई में Delhi से पहुंचेगी केंद्रीय टीम

भोपाल. स्वच्छ सर्वेक्षण-2026 के अंतर्गत सिटीजन फीडबैक की प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है। ऑनलाइन पोर्टल खुलते ही भोपाल को नंबर वन बनाने के लिए नागरिकों ने फीडबैक देना शुरू कर दिया है। यह प्रक्रिया शहर की स्वच्छता रैंकिंग निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाएगी, क्योंकि इसी फीडबैक के आधार पर अगले महीने केंद्र सरकार की टीमें भोपाल की जमीनी सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने आएंगी। दरअसल, राजधानी में स्वच्छ सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सर्वेक्षण के अंतिम चरण मई माह में दिल्ली की टीमें भोपाल आएंगी और सिटीजन फीडबैक के आधार पर शहर की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करेंगी। इसके बाद देशभर के शहरों का रिजल्ट जारी होगा। हर बार की तरह इस बार भी भोपाल नगर निगम ने नंबर वन का दावा किया है। इसके लिए पब्लिक फीडबैक ज्यादा से ज्यादा चाहिए। फीडबैक के दौरान सफाई व्यवस्था से जुड़े 13 सवालों के जवाब देने होंगे। शनिवार को पब्लिक फीडबैक की साइट खुलते ही महापौर मालती राय, सांसद आलोक शर्मा सहित विधायक और दूसरे जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने मोबाइल से फीडबैक दिया। अब शहरवासियों की जिम्मेदारी है कि वह भी अपने भोपाल के लिए वोट करें। सफाई देखने अधिकारी फील्ड में उतरे शहर की सफाई व्यवस्था पर नजर रखने के लिए नगर निगम अधिकारी फील्ड में उतर आए हैं। शनिवार को निगम कमिश्नर संस्कृति जैन ने जोन 19 के इलाकों का जायजा लिया। कमिश्नर ने 106 अधिकारी-कर्मचारियों को नोडल नियक्ति किया है, लेकिन इनमें से 40 ही फील्ड में उतरे। सर्वे में पूछे जा रहे ये प्रश्न क्या आपके घर और दुकान से रोजाना कचरा उठाया जा रहा है? क्या आप कचरा फेंकने से पहले सूखे और गीले कचरे को अलग-अलग करते हैं? क्या कचरा उठाने वाला कर्मचारी अलग-अलग तरीके से गाड़ी में डालता है या उठाने-लोड करने के दौरान उसे मिला देता है? क्या आपके इलाके में रोजाना झाडू या फिर सफाई की जाती है? आप अपने इलाके की साफ-सफाई को कैसे रेट करेंगे? इलाके के आसपास कितनी बार लावारिस कूड़े-कचरे के ढेर देखते हैं? स्थानीय प्रशासन मार्केट, बाजार, पार्क, गार्डन या दूसरी जगहों जैसी सार्वजनिक जगहों पर साफ-सफाई बनाए रखने में कितनी असरदार है? क्या आप लोगों को खुलेआम सार्वजनिक जगहों पर या आसपास शौच करते देखते हैं? आप अपने इलाके के सार्वजनिक शौचालय की सफाई और रख-रखाव से कितने संतुष्ट हैं? क्या आप शहर में वेस्ट मैनेजमेंट के लिए रिड्यूस, रीयूज, रीसाइकल सेंटर के बारे में जानते हैं? जब आपके सीवर या सेप्टिक टैंक को सफाई की जरूरत होती है, तो आप किससे संपर्क करते हैं? स्थानीय अधिकारियों को सफाई से जुड़ीं समस्याएं (जैसे, कचरा फेंकना, कूड़ेदानों का ओवरफ्लो होना, साफ-सफाई की कमी) को कैसे बताते हैं? आप शहर की सफाई से संबंधित शिकायतों (जैसे, कचरा फेंकना, कूड़ेदानों का ओवरफ्लो होना) पर प्रतिक्रिया को कैसे रेट करेंगे? नागरिकों का फीडबैक जरूरी – भोपाल को स्वच्छता में शीर्ष स्थान दिलाने नागरिकों का फीडबैक जरूरी है। सर्वेक्षण में पूछे जा रहे सवालों के जवाब देकर शहर को नंबर वन बनाने में योगदान दें। यह प्रक्रिया स्वच्छता साख को मजबूती देगी। – मालती राय, महापौर

डिजिटल जनगणना 2027 पर जोर, पीएम मोदी के संदेश को सीएम ने सराहा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 133वें संस्करण का भोपाल के वीआईपी रोड स्थित एक निजी रेस्टोरेंट में जनप्रतिनिधियों के साथ श्रवण किया। इस अवसर पर आमजन भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ‘मन की बात’ देश के करोड़ों नागरिकों को जोड़ने वाला एक सशक्त संवाद मंच है। इसके जरिए प्रधानमंत्री श्री मोदी समाज के विभिन्न वर्गों की प्रेरक कहानियों, नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाते हैं, जिससे आमजन को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने मन की बात कर कार्यक्रम को पूरे देशवासियों के मन में बिठा दिया है। उन्होंने देश को नवाचार की नई दृष्टि दी है। ऐसे कार्यक्रम समाज में सकारात्मक सोच को बढ़ावा देते हैं और राष्ट्र निर्माण में जनभागीदारी को सशक्त करते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है हमारी 2027 की डिजीटल जनगणना : प्रधानमंत्री श्री मोदी 'मन की बात' में प्रधानमंत्री श्री मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि इन दिनों हमारे देश में एक बहुत ही अहम अभियान चल रहा है, जिसके बारे में हर भारतीय को जानकारी होनी जरूरी है। ये है जनगणना का अभियान, यह दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना है। हमारे साथी पहले भी इस तरह की प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। इस बार जनगणना का उनका अनुभव, अलग होने वाला है। जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजीटल बनाया गया है। सारी जानकारी सीधे डिजीटल माध्यम में दर्ज हो रही है। घर-घर जाने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप है। वे नागरिकों से बात करके उसी में सारी जानकारी दर्ज करेंगे। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना में आपकी भागीदारी भी आसान बनाई गई है, नागरिकगण खुद भी अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। कर्मचारी के आने से 15 दिन पहले सबके लिए यह सुविधा शुरू होगी। नागरिक अपने समय के अनुसार जानकारी भर सकते हैं। जब जब नागरिक यह प्रक्रिया पूरी करते हैं, तो उन्हें एक विशेष आईडी मिलती है। ये आईडी उनके मोबाइल या ई-मेल आईडी पर आती है। बाद में जब कर्मचारी उनके घर आता है, तो वे यही आईडी दिखाकर अपनी जानकारी की पुष्टि कर सकते हैं। इससे दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं पड़ती। समय भी बचता है और प्रक्रिया भी आसान हो जाती है प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि देश के जिन राज्यों में स्व-गणना का काम पूरा हो गया है, वहां, गणना कर्मचारी द्वारा घरों के सूचीकरण का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया की अब तक लगभग 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण का कार्य पूरा भी हो चुका है। देश की जनगणना सिर्फ एक शासकीय काम नहीं है। यह हम सबकी जिम्मेदारी है। इसमें नागरिकों की भागीदारी बहुत जरूरी है। नागरिकों द्वारा दी गई जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहती है, यह गोपनीय रखी जाती है और इसे पूरी डिजीटल सुरक्षा के साथ सुरक्षित किया जाता है। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा है कि आइए, हम सब मिलकर इस प्रक्रिया में भाग लें और जनगणना 2027 को सफल बनाएं। आमजनों से किया संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर मौजूद आमजनों विशेषकर युवाओं से आत्मीय संवाद किया। उनके साथ स्वल्पाहार कर नारी शक्ति वंदन सहित विभिन्न विषयों पर खुलकर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के तहत बेटियों की शिक्षा की पुख्ता व्यवस्था एवं प्रोत्साहन सहायता, महिला सुरक्षा, महिला आरक्षण, इनकी आजीविका, समान वेतन और इन्हें स्वरोजगार से जोड़कर स्वावलंबी बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन पर केंद्र सरकार तत्पर होकर प्रयास कर रही है, पर विपक्षी दलों के असहयोग के कारण यह प्रस्ताव संसद में पारित नहीं हो पाया। बच्चों का बढ़ाया हौंसला मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रेस्टोरेंट में कैप पेंटिंग कर रहे चार छोटे बच्चों से बाल सुलभ वार्तालाप कर उनकी हौसला अफजाई की। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने बच्चों को अपने हाथों से नाश्ता कराया। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई सम्बंधित बातचीत कर उन्हें हमेशा अपने बड़े-बुजु़र्गों, माता-पिता और बड़े भाई-बहनों का सम्मान करने और माता-पिता के नाम का उच्चारण करते समय सदैव 'श्रीमती' और 'श्री' से प्रारंभ कर सम्मानजनक संबोधन ही करने की सीख दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आमजनों, युवाओं और बच्चों के साथ सहज रूप से अभिभावक की तरह अनौपचारिक चर्चा की और सबके साथ समूह चित्र खिंचवाकर उनका उत्साहवर्धन भी किया। मन की बात के श्रवण एवं आमजन से संवाद कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, श्री राहुल कोठारी, श्री रविन्द्र यति सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण एवं नागरिकगण उपस्थित थे। जल संरक्षण में हम हैं अव्वल कार्यक्रम के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 'मन की बात' प्रधानमंत्री श्री मोदी का पूरे देश को एकजुटता का सकारात्मक संदेश देने का अद्भुत प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण के क्षेत्र में हमारा मध्यप्रदेश पूरे देश में अग्रणी है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के तहत हमारी सरकार नई जल संरचनाओं के निर्माण-विस्तार के साथ-साथ पुराने कुओं, तालाबों, बावड़ियों और अन्य पारम्पारिक जल स्रोतों जैसे हैंडपंप आदि को भी नया जीवन देने का प्रयास कर रही है। इस अभियान में जनभागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत चलेगा।