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मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, 33 से 36 मंत्री तक बढ़ सकती है संख्या

पटना बिहार को सुंदर बनाना है। समृद्ध और विकसित बनाना है। फैक्ट्री लगानी है। इस दिशा में हरसंभव प्रयास करूंगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सहित रोजगार को और अधिक बढ़ावा मिल सके, इसके लिए काम किया जायेगा।" मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अप्रैल को अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर में जब यह बातें कहीं तो स्पष्ट हो गया कि वह लंबी पारी खेलना चाहते हैं। 15 अप्रैल को नई सरकार बनने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम करने के तौर तरीके और बयानों से स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई टीम चाहते हैं। सम्राट चौधरी के करीबी इसे 'नई विकास टीम' का नाम दे रहे हैं। नई टीम में कई चेहरों का नाम फाइल हो चुका है। कुछ पर मंथन चल रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही इस नई टीम की घोषणा भी कर दी जाएगी। एक दिन पहले यानी रविवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। तारीख उन्होंने नहीं बताई लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद पांच मई तक बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार कर लिया जाए। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा नए चेहरों को मौका जरूर देगी। विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल जैसे पुराने दिग्गजों को दुबारा मौका मिल सकता है। युवा और महिलाओं पर सम्राट चौधरी का विशेष फोकस रहेगा। आलाकमान चाहते हैं कि सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखा जाए। हर वर्ग को मौका मिले ताकि संतुलन बरकरार रहे। सम्राट चौधरी की नई टीम में क्षेत्रीय और समाजिक समीकरण का समावेश दिख सकता है। जदयू ने अपने दो पुराने चेहरों को उपमुख्यमंत्री बनाकर यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार अधिक प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। निशांत कुमार फिलहाल सरकार में कोई पद नहीं लेंगे। यह लगभग तय है। अन्य पुराने चेहरे जैसे श्रवण कुमार, जमां खान, मदन सहनी, लेशी सिंह को दुबारा मौका मिल सकता है। हालांकि निशांत के करीबी कुछ युवा विधायक भी मंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। इनमें कुछ को जदयू मौका दे सकती है। हाल के दिनों में विपक्ष ने जिन मंत्रियों पर सवाल उठाया है, उनपर  एनडीए विचार कर रहा है। विजय सिन्हा का क्या होगा? 2025 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी तो सम्राट चौधरी के साथ विजय सिन्हा भी उपमुख्यमंत्री बने थे। उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस विभाग में भ्रष्टाचार अंकुश लगाने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाए, जिसकी चर्चा आज तक हो रही है। जनता ने विजय सिन्हा को एक ईमानदार नेता के रूप में देखा। हालांकि, राजस्व सेवा के अधिकारियों ने उनके काम करने की शैली का विरोध किया और हड़ताल पर चले गए। लेकिन, विजय सिन्हा अपने निर्णय पर अडिग रहे और उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। नई सरकार बनी तो विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री नहीं बने। सोशल मीडिया पर विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के बीच नोंकझोंक के पुराने वीडियो वायरल होने लगे। चर्चा होने लगी कि विजय सिन्हा अब किनारे कर दिए जाएंगे। तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है। हालांकि, सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के काम की तारीफ की। इसके बाद ऐसा लगा कि विजय सिन्हा को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह दिया जाएगा। चर्चा है कि नाराज चल रहे विजय सिन्हा की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें दोबारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ गृह विभाग की भी जिम्मेदारी मिल सकती है। फिलहाल गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली दरबार में बैठे आलाकमान को ही लेना है। अब वहीं से सारा कुछ तय होगा।   चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे? 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी, उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सम्राट चौधरी सरकार में जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू के 14 और भाजपा के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं चिराग की पार्टी से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। अगर पूरी संख्या, यानी 36 विधायक रहे तो भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा रामविलास के 2, रालोमो और हम के एक-एक मंत्री तय फॉर्मूले के तहत बनेंगे। विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा? विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। 

ईरान ने दिया अमेरिका को शर्त—स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलो, तब होगी चर्चा

तेहरान  पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया शांति प्रस्ताव रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के जरिए भेजे गए इस प्रस्ताव में ईरान ने कहा है कि सबसे पहले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से नाकेबंदी हटाई जाए और युद्ध को तुरंत खत्म किया जाए। इसके बाद, दूसरे चरण की बातचीत में परमाणु हथियार के मुद्दे पर चर्चा की जाए। जानकारी के मुताबिक इस प्रस्ताव को वाइट हाउस भेज दिया गया है। गौरतलब है कि ईरान की तरफ से यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब शांति वार्ता लगभग ठप पड़ी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने कहा है कि अगर ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह अमेरिका को कॉल कर सकता है। हालांकि इस दौरान ट्रंप ने यह भी दोहराया कि ईरान को किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाने दिए जाएंगे। इससे पहले ट्रंप ने अपनी टीम को ईरान भेजने का प्लान भी कैंसिल कर दिया था। खबर थी कि US ईरान के पुराने प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं था। नए प्रस्ताव में क्या? ईरान के इस नए प्लान में दो चरणों में वार्ता का जिक्र है। पहले चरण में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने की मांग की गई है। ईरान चाहता है कि इसके लिए या तो युद्धविराम को बढ़ाया जाए या फिर युद्ध को तुरंत खत्म किया जाए। वहीं दूसरे चरण में, यानी हालात सामान्य होने के बाद, परमाणु मुद्दे पर बातचीत शुरू की जाए। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक कोई भी गंभीर बातचीत संभव नहीं है। साथ ही ईरान ने सुरक्षा की गारंटी, मुआवजा और होर्मुज को लेकर नया कानूनी ढांचा बनाने की भी मांग रखी है। पुतिन से मिलेंगे अराघची इस बीच अमेरिका के साथ वार्ता के दूसरे दौर को लेकर अनिश्चितता के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रविवार को तीन दिन में दूसरी बार पाकिस्तान पहुंचे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, रक्षा बलों के प्रमुख फील्ड मार्शल मुनीर और अन्य शीर्ष अधिकारियों के साथ बातचीत के बाद अराघची शनिवार को इस्लामाबाद से रवाना हुए थे। यहां से निकलकर अराघची ओमान गए थे। वहीं अब दोबारा पाकिस्तान से निकलने के बाद अब वे रूस रवाना हो गए हैं और यहां अराघची पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। इस दौरान भी युद्ध के लेकर चर्चा हो सकती है। मानेगा अमेरिका? ईरान ने अमेरिका को नया प्रस्ताव भेजा जरूर है लेकिन इस पर सहमति बनना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि ईरान कम से कम 10 साल के लिए परमाणु कार्यक्रम यानी न्यूक्लियर एनरिचमेंट रोक दे और अपने मौजूदा भंडार को भी बाहर कर दें। अमेरिका ने कई मौकों पर इस शर्त के बिना युद्धविराम की संभावना से इनकार किया है। ऐसे में ईरान के नए ऑफर पर अमेरिका की सहमति मिलना मुश्किल है।

पंजाब में NDPS मामलों में 40% बढ़ोतरी, मान सरकार ने तस्करों के खिलाफ लिया बड़ा एक्शन

चंडीगढ़  पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के प्रभावी, तेज और ठोस परिणाम सामने आ रहे हैं. ताजा आंकड़े दर्शाते हैं कि नशों के खिलाफ कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, नशा तस्करी नेटवर्क को बड़े स्तर पर कमजोर किया गया है और दोषियों के खिलाफ सजा दर में भी महत्वपूर्ण सुधार दर्ज किया गया है।  आंकड़ों के अनुसार, साल 2022 से 2026 (अब तक) के दौरान 73,541 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए हैं, जो 2017–2021 के 52,255 मामलों की तुलना में 40 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्शाते हैं. गिरफ्तारियों की संख्या भी 68,064 से बढ़कर 98,596 हो गई है, जो राज्यभर में नशा तस्करी नेटवर्क के खिलाफ लगातार और व्यापक कार्रवाई को दर्शाती है।  जब्तियों के आंकड़े इस अभियान की सफलता को और साफ करते हैं. हेरोइन की बरामदगी में 148 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है—2022 से अब तक 5,979 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई, जबकि 2017–21 के दौरान यह मात्रा 2,412 किलोग्राम थी. अफीम की जब्ती में भी 43 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होकर यह 3,583 किलोग्राम तक पहुंच गई है, जो जमीनी स्तर पर तेज कार्रवाई को दर्शाती है। सिंथेटिक ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में विशेष रूप से उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है. ‘आइस’ (क्रिस्टल मेथामफेटामाइन) की जब्ती 17 किलोग्राम से बढ़कर 93 किलोग्राम हो गई है, जो 447 प्रतिशत की वृद्धि है. कोकीन की जब्ती 6,064 किलोग्राम रही, जो पहले के 6,852 किलोग्राम के लगभग बराबर है।  इस अभियान की पहुंच अब दवाइयों के दुरुपयोग तक भी बढ़ चुकी है. 2022–26 के दौरान 8.7 करोड़ गोलियां और कैप्सूल जब्त किए गए हैं, जो खासकर युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सप्लाई चेन पर बड़े प्रहार का संकेत है।  इस कार्रवाई के सकारात्मक परिणाम न्याय प्रणाली में भी दिखाई दे रहे हैं. दोषियों के लिए सजा दर बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो मजबूत जांच, साक्ष्य संग्रह और प्रभावी अभियोजन को दर्शाती है।  डीजीपी पंजाब गौरव यादव ने कहा, 'यह केवल कार्रवाई में वृद्धि नहीं, बल्कि नशे के खतरे से निपटने के तरीके में एक मूलभूत बदलाव है. मामलों और जब्तियों में वृद्धि इंटेलिजेंस आधारित कार्रवाई को दर्शाती है, जबकि बढ़ती सजा दर यह दिखाती है कि मामलों को उनके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जा रहा है. सप्लायर से लेकर डिस्ट्रीब्यूटर तक पूरी श्रृंखला पर लगातार दबाव बनाया गया है।  उन्होंने बताया कि इस कार्रवाई की व्यापकता और निरंतरता मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की साफ रणनीतिक सोच का परिणाम है, जिसके तहत ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान राज्यभर में सक्रिय और निर्णायक कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा बन चुका है।  हालांकि जब्तियों में वृद्धि जमीनी स्तर पर तेज कार्रवाई को दर्शाती है, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि मुख्य उद्देश्य नशा नेटवर्क को तोड़ना और नशों की उपलब्धता को कम करना है, ताकि इस अभियान का स्थायी और दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।   

यूपी में शिक्षा पर फोकस: योगी आदित्यनाथ सरकार का मिशन—अब कोई बच्चा नहीं रहेगा स्कूल से बाहर, 1 मई से विशेष अभियान शुरू

श्रमिक बस्तियों से ईंट-भट्ठों तक पहुंचेगी टीम, 6 से 14 आयु वर्ग का 100 प्रतिशत नामांकन लक्ष्य ड्रॉपआउट पर सीधा प्रहार, योगी सरकार ने ‘स्कूल चलो अभियान’ को मिशन मोड में किया लागू ड्रॉपआउट बच्चों को चिह्नित कर मुख्यधारा से जोड़ने पर फोकस, ट्रांजिशन दर बढ़ाने का लक्ष्य लखनऊ योगी सरकार ने शिक्षा के मोर्चे पर बड़ा और निर्णायक कदम उठाते हुए ‘स्कूल चलो अभियान’ को उत्तर प्रदेश में मिशन मोड में लागू कर दिया है। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि अब कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर नहीं रहेगा। इसी क्रम में अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा, पार्थ सारथी सेन शर्मा ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 6 से 14 वर्ष तक के प्रत्येक बच्चे का नामांकन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए। पहली मई से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर श्रमिक बस्तियों, ईंट-भट्ठों और वंचित वर्गों के बच्चों को चिह्नित कर स्कूल से जोड़ा जाएगा। यह अभियान खास तौर पर उन बच्चों पर केंद्रित होगा, जो अब तक शिक्षा की मुख्यधारा से बाहर हैं। दिव्यांग बच्चों के नामांकन को प्राथमिकता देने, आरटीई के अंतर्गत लॉटरी के माध्यम से चयनित पात्र बच्चों का आवंटित विद्यालय में शत-प्रतिशत नामांकन कराने और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में बालिकाओं के प्रवेश को बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सरकार ने ड्रॉपआउट और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों की पहचान कर उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ने के लिए जमीनी स्तर पर रणनीति तैयार की है। कक्षा 5 से 6, 8 से 9 और 10 से 11 तक 100% ट्रांजिशन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि बच्चों की पढ़ाई बीच में न छूटे और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। जागरूकता अभियान, स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भागीदारी और निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से इस अभियान को प्रभावी बनाने की योजना है। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हैं कि प्रत्येक गांव, वार्ड और बस्ती स्तर पर सर्वे कर बच्चों को चिह्नित किया जाए और उन्हें विद्यालय से जोड़ा जाए। जहां पहले ड्रॉपआउट चिंता का विषय था, अब सरकार घर-घर पहुंचकर हर बच्चे को स्कूल से जोड़ रही है।

7 करोड़ कैश मिलने के बाद ED का एक्शन तेज, भुल्लर के 11 ठिकानों पर रेड

चंडीगढ़ रिश्वतखोरी के केस में गिरफ्तार पंजाब के पूर्व DIG हरचरण सिंह भुल्लर के 11 ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) तलाशी अभियान चला रही है. यह कार्रवाई सोमवार सुबह शुरू हुई. भुल्लर के चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा और जालंधर में स्थित 11 ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है. ये जगहें आरोपी भुल्लर और उसके साथियों और संदिग्ध बेनामीदारों से जुड़ी हैं. मालूम हो कि डीआईजी भुल्लर को पिछले साल 8 लाख रुपए के रिश्वत से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद उनके ठिकानों पर हुई छापेमारी में 7 करोड़ से ज्यादा रुपए कैश मिले थे।  आज भुल्लर के ठिकानों पर चल रही ईडी की रेड CBI, ACB द्वारा दर्ज किए गए मूल अपराधों से जुड़ी है। इन अपराधों में एक बिचौलिए के ज़रिए किसी आपराधिक मामले को निपटाने के लिए अवैध रिश्वत मांगने के आरोप शामिल हैं, साथ ही आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं ज़्यादा संपत्ति का पता भी चला है।  चंडीगढ़, लुधियाना, पटियाला, नाभा, जालंधन में चल रही तलाशी मिली जानकारी के अनुसार भुल्लर और उसके करीबियों के चंडीगढ़ में स्थित दो, लुधियाना में स्थित 5, पटियाला में स्थित दो के साथ-साथ नाभा और जालंधर में स्थित एक-एक ठिकानों पर तलाशी ली जा रही है. इन तलाशी अभियानों का मकसद अपराध से हासिल हुई और संपत्ति का पता लगाना, बेनामी संपत्तियों की पहचान करना और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत इकट्ठा करना है।  बताते चले कि पिछले साल चंडीगढ़ में भुल्लर के आवास पर तलाशी के दौरान सीबीआई ने 7.36 करोड़ रुपये से अधिक नकदी, 2.32 करोड़ रुपये से अधिक के आभूषण, 26 ब्रांडेड घड़ियां और परिवार के सदस्यों के नाम अचल संपत्ति के दस्तावेज बरामद किए थे।  इन 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी ईडी की टीमें पीएमएलए की धारा 17 के तहत कुल 11 जगहों पर तलाशी अभियान चला रही हैं. ये अभियान 5 शहरों में चल रहे हैं।      चंडीगढ़ – 2 ठिकाने     लुधियाना जिला – 5 ठिकाने     पटियाला – 2 ठिकाने     नाभा – 1 ठिकाना     जालंधर – 1 ठिकाना जानकारी के अनुसार ये छापे आरोपी, उसके सहयोगियों और संदिग्ध बेनामी संपत्तियों से जुड़े लोगों के ठिकानों पर मारे जा रहे हैं. इस दौरान मनी ट्रेल और बेनामी संपत्तियों की जांच की जा रही है।  ईडी की कार्रवाई का ये है उद्देश्य     . अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) का पता लगाना     . भुल्लर से संबंधित बेनामी संपत्तियों की पहचान करना     . मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े सबूत जुटाना फिलहाल ईडी की तलाशी की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे की जांच की जा रही है।  सीबीआई ने क्‍यों क‍िया था गि‍रफ्तार  पंजाब पुलिस के पूर्व उप महानिरीक्षक यानी DIG हरचरण सिंह भुल्लर को रिश्वत लेने के आरोप में सीबीआई ने पिछले साल गिरफ्तार किया था और वे तभी से जेल में बंद हैं. भुल्लर के साथ बिचौलिए कृष्ण शारदा को भी 8 लाख रुपये की रिश्वत के मामले में पकड़ा था. हाल ही में भुल्लर ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत मांगी थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी थी।   

केजरीवाल का बड़ा कदम: जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट में नहीं होंगे पेश, सत्याग्रह शुरू

 नई दिल्ली दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले में निचली अदालत ने बरी कर दिया था. इस फैसले के खिलाफ जांच एजेंसी ने दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की है. दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी. अब अरविंद केजरीवाल ने यह ऐलान किया है कि वह जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होंगे।  उन्होंने इसे लेकर जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र भी लिखा है. अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है।  दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा है कि जस्टिस स्वर्णकांता के फैसले की अपील में सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा. गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बेंच बदलने की अपील की थी. उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से यह केस सुनना बंद करने की अपील करते हुए दलील दी थी कि उनके मन में पहले से ही अरविंद केजरीवाल के मन में राय बन चुकी है।  अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने का हवाला देते हुए कहा था कि जज अगर उस विचारधारा की समर्थक है और मैं विरोधी, तो क्या मुझे इंसाफ मिलेगा?  जस्टिस शर्मा के बहिष्कार को बताया सत्याग्रह आखिरकार सत्य की जीत हुई। अदालत ने मुझे निर्दोष बता दिया। अदालत ने कहा कि केजरीवाल निर्दोष है, केजरीवाल ने कोई भ्रष्टाचार किया। कोर्ट ने सीबीआई की जांच पर सवाल खड़ा कर दिया। जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दिया। सीबीआई ने हाई कोर्ट में चुनौती दी। यह केस जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा जी के सामने लगा। तब मेरे मन में बहुत बड़ा सवाल उठा कि क्या मुझे इनके सामने न्याय मिलेगा। इसके कई कारण हैं, लेकिन दो कारण मुख्य हैं, पहला कारण यह है कि आरएसएस की जिस विचारधारा वाली सरकार ने झूठे आरोप लगाकर मुझे जेल में डाला, जज साहिबा ने माना कि उससे जुड़े संगठन के मंचों पर वह जाती रही हैं। मैं और आम आदमी पार्टी उस विचारधारा के घोर विरोधी हैं,ऐसे में क्या मुझे अन्या मिल सकता है। दूसरा कारण हैं हितों का टकराव। कोर्ट में मेरे खिलाफ सीबीआई है, और जस्टिस के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं। हमारे सामने दूसरी तरफ से वकील हैं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वह उनके दोनों बच्चों को केस देते हैं। कितने और कौन से केस मिलेंगे यह तय करते हैं। पैनल में 700 वकील हैं लेकिन जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के बेटे सबसे ज्यादा केस हासिल करने वाले वकीलों में हैं। उनको करोड़ों रुपये फीस में मिले। उनके बच्चों का भविष्य और कमाई तुषार मेहता पर निर्भर है। किसी के मन में स्वभाविक है कि यदि जज साहब के बच्चों का भविष्य वकील तय कर रहा है तो क्या वह उस वकील के खिलाफ फैसला कर पाएंगी। मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है, बहुत सम्मान करता हूं। जब मेरे खिलाफ गलत साजिश हुई तो न्यायपालिका ने ही न्याय दिया। इसी ने बेल दी। दोषमुक्त करार किया। जब जब देश पर आंच आई न्यायापालिका ने ही बचाया। मैं जस्टिस स्वर्ण कांता का भी बहुत सम्मान करता हूं। मुझे उनसे कोई व्यक्तिगत आपत्ति नहीं है। लेकिन न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है कि ना सिर्फ न्याय हो बल्कि न्याय होता दिखे। इसलिए मैंने उनसे अपील की थी कि वबह खुद को इस केस से अलग कर लें। लेकिन उन्होंने मेरी दलीलें खारिज कर दीं और कहा कि वह खुद सुनेंगी। मेरे सामने आसान रास्ता है कि मैं उनका आदेश मान लूं और एक बड़ा वकील खड़ा करके अपना केस लड़ूं। लेकिन यह मुद्दा सिर्फ मेरे केस का नहीं आम लोगों के न्यायपालिका पर भरोसे का है। दिविधा के मौके पर बापू ने हमें सत्याग्रह का रास्ता दिया था। अन्याय का सामना करो तो पहला कदम विरोध नहीं बातचीत हो। पूरी विनम्रता से बात रखनी चाहिए। सारी कोशिशों के बाद भी न्याय ना मिले तो अंतरात्मा की बात सूनो। शांति और विनम्रता के साथ सत्याग्रह करना चाहिए, फिर उसके जो भी परिणाम हो। इस पूरे प्रकरण में अन्याय करने वाले के प्रति गुस्सा, नफरत नहीं होना चाहिए। मैंने भी अपनी बात जस्टिस के सामने रखी, उनसे आग्रह किया कि किसी और जज के द्वारा सुन लिया जाए। उन्होंने मेरी प्रार्थना अस्वीकार कर दीं। उन्होंने कहा कि वह खुद को अलग नहीं करेंगी। उनके इस फैसले से मैं असहमत हूं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मेरी आशंका और गहरी हो गई है कि क्या मुझे न्याय मिलेगा। बापू के रास्ते पर चलते हुए मैंने फैसला लिया है कि मैं इस केस में जस्टिस स्वर्ण कांता जी के सामने पेश हूंगा और ना ही कोई वकील जाएगा। वह जो भी फैसला सुनाएंगी, मैं सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए स्वतंत्र हूं। मेरा उनसे कोई व्यक्तिगत विरोध नहीं है। यदि उनके सामने कोई केस लगता है जिसके विरोध में बीजेपी, केंद्र सरकार या तुषार मेहता नहीं हैं तो मैं उनके सामने पेश होऊंगा। आप पूछ सकते हैं कि मैं उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नहीं जा रहा हूं। मैं तैयारी कर रहा हूं। कानून और न्यायपालिका के सम्मान को ध्यान में रखकर एक एक कदम उठाना है। मैं यह कदम अहंकार और विद्रोह में नहीं उठा रहा हूं। कानून को चुनौती देना नहीं है। इसी केस में मैंने हर अदालत में सहयोग दिया है। मैं न्यायपालिका का बहुत सम्मान करता हूं। देश के न्याय व्यवस्था पर लोगों के भरोसे को बढ़ाना।

Madhya Pradesh सरकार का बड़ा तोहफा, 75%+ अंक लाने वाले छात्रों को मिलेगा लैपटॉप अनुदान

भोपाल. प्रदेश में इस साल भी 12वीं की परीक्षा में 75 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वालों की संख्या बढ़ी है। इसका असर मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना पर भी पड़ा है। इस साल इस योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि दी जाएगी। यह संख्या पिछले वर्ष की तुलना में 26 हजार ज्यादा है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा मंडल से उन सभी विद्यार्थियों की सूची मांगी है, जिन्होंने 12वीं परीक्षा में 75 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। विभाग द्वारा सूची के सत्यापन के बाद पात्र विद्यार्थियों के खातों में सीधे राशि ट्रांसफर की जाएगी। जून व जुलाई में विद्यार्थियों को लैपटाप की राशि प्रदान करने की तैयारी है। इस योजना पर इस साल सरकार करीब 302 करोड़ रुपयों से अधिक खर्च करने जा रही है। हर साल बढ़ रहा आंकड़ा वर्ष लैपटॉप पाने वालों की संख्या 2023 – 78000 2024 – 90,000 2025 – 94,500 16 साल पहले शुरू हुई थी योजना मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना की शुरुआत वर्ष 2009-10 में की गई थी। प्रारंभ में इस योजना के तहत केवल 85 प्रतिशत या उससे अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को ही पात्र माना जाता था। उस समय लाभार्थियों की संख्या करीब 20 से 25 हजार के बीच रहती थी। बाद में इसे घटाकर 70 प्रतिशत किया गया। कुछ वर्षों से 75 प्रतिशत अंक का मानक तय किया गया है। स्कूल टॉपर को स्कूटी मिलती है राज्य सरकार मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए अन्य योजनाएं भी चला रही है। शासकीय स्कूलों में 12वीं कक्षा के टॉपर विद्यार्थियों को स्कूटी प्रदान करने की योजना भी लागू है। इसमें स्कूल स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाला छात्र या छात्रा पात्र होता है। 1.21 लाख विद्यार्थियों को राशि इस बार मुख्यमंत्री प्रोत्साहन योजना के तहत करीब 1.21 लाख विद्यार्थियों को लैपटॉप खरीदने के लिए 25-25 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। मंडल से ऐसे विद्यार्थियों की सूची मांगी गई है। – धर्मेंद्र शर्मा, संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण संचालनालय।

HRA, ट्रांसपोर्ट अलाउंस और चाइल्ड एजुकेशन भत्ते में बढ़ोतरी की मांग तेज

नई दिल्ली आठवें वेतन आयोग ने अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। इसके तहत वेतन आयोग लगातार बैठकों का दौर कर रहा है। बीते 24 अप्रैल को देहरादून में बैठक हुई तो अब दिल्ली में भी बैठकों का दौर शुरू होने वाला है। इसी कड़ी में अलग-अलग संगठनों की ओर से वेतन आयोग को डिमांड लिस्ट दी जा रही है। प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच (PSNM) की भी वेतन आयोग से कुछ डिमांड है। बता दें कि यह केंद्र सरकार के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन है। क्या है डिमांड? वेतन आयोग से लेवल 1 (ग्रुप D) के कर्मचारी के लिए न्यूनतम मूल वेतन 50,000 रुपये और 3.83 तक के फिटमेंट फैक्टर की मांग की गई है। इसके अलावा, PSNM चाहता है कि वेतन आयोग बच्चों के शिक्षा भत्ते यानी चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस को कम से कम 2,812.59 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति माह कर दे। बता दें कि केंद्र सरकार के शिक्षकों को बच्चे की 12वीं कक्षा तक की शिक्षा के लिए चाइल्ड एजुकेशन अलाउंस मिलता है लेकिन संगठन इसे ग्रेजुएशन तक के लिए मांग कर रहा है। इसके अलावा, हर महीने 2,000 रुपये के डिजिटल सपोर्ट अलाउंस (ब्रॉडबैंड और AI सपोर्ट) की भी मांग की गई है। यह पहली बार है जब वेतन आयोग के सामने इस तरह के अलाउंस की मांग हुई है। 7वां वेतन आयोग ऐसा कोई अलाउंस नहीं देता है। एचआरए में बदलाव कर्मचारी संगठन ने प्रस्ताव दिया है कि अलग-अलग शहरों के लिए हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA को मौजूदा दरों 10%, 20% और 30% से बढ़ाया है। नई दर 12%, 24% और 36% किए जाने की मांग है। कर्मचारी संगठन ने यह भी प्रस्ताव दिया है कि ट्रांसपोर्ट अलाउंस को बढ़ाकर बेसिक पे का 12 से 15% किया जाए। इसे कम से कम 9,000 रुपये + महंगाई भत्ता यानी डीए प्रतिशत के हिसाब से बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। बता दें कि कर्मचारियों के अलग-अलग लेवल के लिए ट्रांसपोर्ट अलाउंस की दरें 1,800 रुपये, 3,600 रुपये और 7,200 रुपये हैं। लीव में भी बदलाव की मांग प्रगतिशील शिक्षक न्याय मंच हर साल 14 दिनों की कैजुअल लीव (CL) की मांग कर रहा है। वहीं 30 दिनों की अर्नड लीव (EL) और 20 दिनों की मेडिकल लीव की डिमांड है। अगर केंद्रीय कर्मचारी रिटायर होते हैं तो 400 दिनों तक की EL एनकैशमेंट होनी चाहिए। बता दें कि यह अभी 300 दिन है। कर्मचारियों का संगठन चाहता है कि 8वां वेतन आयोग नॉन-प्रोडक्टिविटी लिंक्ड बोनस को 6,908 रुपये से बढ़ाकर 27,640 रुपये कर दे। यह 5-दिन का वर्क वीक (45 घंटे) चाहता है।

रांची में जल संकट गहराया, धुर्वा-हटिया क्षेत्र में आपूर्ति बाधित

रांची  झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रही है. खासकर धुर्वा और आसपास के इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे करीब एक लाख की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है. भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. हटिया डैम से सप्लाई बाधित शहर के कई प्रमुख इलाकों (धुर्वा, हटिया, डोरंडा, हिनू, बिरसा चौक और एयरपोर्ट क्षेत्र) में हटिया डैम से होने वाली जलापूर्ति बाधित हो गई है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पिछले 72 घंटों से नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. इससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. जलापूर्ति बाधित होने का असर घरों के साथ-साथ छोटे व्यवसायों और दुकानों पर भी देखने को मिल रहा है. बिजली कटौती बनी मुख्य वजह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह लगातार हो रही बिजली कटौती है. हटिया डैम स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. बिजली की कमी के कारण पानी को लिफ्ट करने और पाइपलाइन में पर्याप्त दबाव (प्रेशर) बनाने में समस्या आ रही है. इसी वजह से जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही है. आंशिक सप्लाई से बढ़ी परेशानी पिछले तीन दिनों से इन इलाकों में केवल आंशिक जलापूर्ति ही हो रही है. कई जगहों पर नलों में पानी आता भी है, तो उसका प्रेशर बेहद कम होता है. इससे लोगों को पानी भरने में काफी दिक्कत हो रही है. धुर्वा सेक्टर-2 के निवासी राजीव सिन्हा बताते हैं कि नल से पानी या तो आता नहीं है, और अगर आता है तो इतना कम कि बर्तन भरना भी मुश्किल हो जाता है. बाजार से पानी खरीदने को मजबूर लोग जल संकट के चलते लोग अब बाजार से जार और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हो गए हैं. इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में पानी की मांग पहले से ज्यादा होती है, लेकिन सप्लाई अनियमित होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है. कई परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी का इंतजाम करना चुनौती बन गया है. विभाग ने जताई परेशानी पेयजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब तक पावर कट की समस्या दूर नहीं होती, तब तक जलापूर्ति को पूरी तरह बहाल करना मुश्किल रहेगा. अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बिजली आपूर्ति सामान्य होगी, जलापूर्ति भी धीरे-धीरे सुचारू हो जाएगी. लोगों में बढ़ती नाराजगी लगातार हो रही पानी की किल्लत से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में ऐसी समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जलापूर्ति और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सके. जल्द समाधान की उम्मीद फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं. लेकिन जब तक बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक जल संकट से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. रांची के हजारों लोगों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, और सभी को जल्द से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.  

भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड डील: निर्यात और MSME सेक्टर को बड़ा फायदा

 नई दिल्ली  भारत और न्यूजीलैंड के बीच लंबे समय से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर आज भारत मंडपम में हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। इस मौके पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले मौजूद रहेंगे। यह समझौता मार्च 2025 में शुरू हुई बातचीत के बाद दिसंबर 2025 में अंतिम रूप से तैयार हुआ था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाना है। पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता आने वाले महीनों में लागू होगा और इससे भारत-न्यूजीलैंड के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी। भारत को क्या होगा फायदा? इस समझौते के तहत भारत से न्यूजीलैंड जाने वाले करीब 70 प्रतिशत उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। पीयूष गोयल के मुताबिक, इससे आगरा के लेदर उद्योग, उत्तर प्रदेश के हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट जैसे क्षेत्रों को नए मौके मिलेंगे। यह समझौता खास तौर पर श्रम आधारित और MSME सेक्टर के लिए फायदेमंद माना जा रहा है। इस समझौते में सेवा क्षेत्र को भी शामिल किया गया है। इसके तहत भारतीय पेशेवरों के लिए हर साल 5000 अस्थायी वीजा दिए जाएंगे, जिनकी अवधि तीन साल तक होगी। इन वीजा के तहत आईटी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर, शिक्षा और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में काम करने का मौका मिलेगा। इसके अलावा आयुष विशेषज्ञ, योग प्रशिक्षक, भारतीय शेफ और संगीत शिक्षक भी इसमें शामिल होंगे। नियमों में राहत और कृषि सहयोग FTA के तहत नियमों को आसान बनाया जाएगा और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम किया जाएगा। इससे भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों को न्यूजीलैंड में जल्दी मंजूरी मिल सकेगी। कृषि क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम करेंगे। कीवी, सेब और शहद जैसे उत्पादों पर एग्री-टेक्नोलॉजी प्लान के जरिए सहयोग बढ़ाया जाएगा। इस समझौते का लक्ष्य अगले पांच साल में द्विपक्षीय व्यापार को 2.4 अरब डॉलर से बढ़ाकर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। न्यूजीलैंड को क्या मिलेगा? इस समझौते के तहत न्यूजीलैंड को भारत में अपने 95 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में छूट या समाप्ति का लाभ मिलेगा। इनमें ऊन, कोयला, लकड़ी, वाइन, एवोकाडो और ब्लूबेरी जैसे उत्पाद शामिल हैं, जबकि कुछ उत्पादों पर कोटा लागू होगा। हालांकि भारत ने डेयरी, प्याज, चीनी, मसाले, खाद्य तेल और रबर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखा है, ताकि घरेलू किसानों और उद्योगों की सुरक्षा हो सके। हस्ताक्षर से पहले पीयूष गोयल और टॉड मैक्ले ने अपने परिवार के साथ ताजमहल का दौरा किया और करीब दो घंटे वहां बिताए। इस दौरान गोयल ने आगरा के उद्योगपतियों से भी मुलाकात की, जिसमें लेदर, टेक्सटाइल, मसाले, हैंडलूम, हैंडीक्राफ्ट और कारपेट सेक्टर के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कहा कि आगरा भविष्य में निर्यात के क्षेत्र में अहम भूमिका निभाएगा और यहां के उद्योगों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही देशभर में 100 इंडस्ट्रियल पार्क बनाने की योजना के तहत आगरा के पास भी एक नया औद्योगिक पार्क बनाने पर विचार किया जा रहा है।