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नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 की स्वीकृति ऐतिहासिक पहल, बोले मुख्यमंत्री डॉ. यादव

नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 स्वीकृति के लिए प्रस्तुत होना ऐतिहासिक पहल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक होगा यह सप्ताह प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर 16 अप्रैल से आरंभ हो रहे संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा- नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 प्रदेश में 10 से 25 अप्रैल तक मनाया जा रहा है नारी शक्ति वंदन पखवाड़ा जबलपुर की कृषि मंथन कार्यशाला कृषकों के लिए रही उपयोगी केंद्र सरकार अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों और कीमतों के रुझान के बावजूद, किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने, अन्नदाताओं को खाद पर सब्सिडी उपलब्ध कराने के लिए माना आभार नक्सल उन्मूलन के बाद अब बालाघाट में बहेगी विकास की गंगा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्री परिषद की बैठक से पहले किया संबोधित भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सप्ताह महिला सशक्तिकरण के लिए ऐतिहासिक होगा। संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16 अप्रैल को आरंभ हो रहा है, जिसमें महिला आरक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम-2023 स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि हमारे देश की नारी शक्ति को लोकसभा और विधानसभा में 33% स्थान मिलना चाहिए। राज्य सरकार भी 10 अप्रैल से 25 अप्रैल तक "नारी शक्ति वंदन" पखवाड़ा मना रही है। पूरे प्रदेश में बड़े स्तर पर नारी शक्ति वंदन सम्मेलन होंगे, इसके साथ ही विभिन्न स्थानों पर नारी शक्ति पदयात्रा भी निकल जाएगी। प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में इस दौरान नारी शक्ति वंदन से संबंधित कार्यक्रम वृहद स्तर पर आयोजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह जानकारी मंत्रि-परिषद की बैठक से पहले अपने संबोधन में दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2026 को समृद्ध किसान-समृद्ध मध्यप्रदेश की थीम के साथ पूरे प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इस क्रम में 8 अप्रैल को जबलपुर में आयोजित कृषि मंथन कार्यशाला में देश-विदेश के कृषि वैज्ञानिक, कृषि उत्पादक और एफपीओ शामिल हुए। कार्यशाला में देश के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिकों के साथ कृषि को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करने, खेत से कारखाने तक उत्पादों की पहुंच सुगम बनाने ,कम पानी में उत्पादन की फसल बढ़ाने और कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। कार्यशाला मे सहभागी किसानों को कई उपयोगी जानकारियां प्राप्त हुई। कार्यशाला के निष्कर्ष किसानों को उनकी आमदनी बढ़ाने में सहायक सिद्ध होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय चुनौतियों एवं कीमतों के रुझानों के बावजूद केन्द्र सरकार किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसके लिये प्रधानमंत्री मोदी का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आभार माना। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अन्नदाताओं को खाद पर सब्सिडी के लिए प्रधानमंत्री मोदी का आभार मानते हुए कहा कि केन्द्रीय मंत्री मण्डल ने 8 अप्रैल 2026 को फास्फेट एवं पोटेशियम उर्वरको जैसे न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी को मंजूरी दी है।केन्द्रीय मंत्री मण्डल द्वारा खरीफ सीजन 2026 के लिये फास्फेट एवं पोटेशियम उर्वरकों पर पोषण तत्व आधारित सब्सिडी के लिये 41 हजार 833 करोड़ रुपए की बजटीय व्यवस्था को स्वीकृति दी, जो विगत वर्ष से 4,317 करोड़ रूपये अधिक है। खरीफ सीजन 2026 में इससे किसान प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होगे। केन्द्र सरकार उर्वरक निर्माताओं/आयातकों के माध्यम से किसानों को रियायती दरों पर डीएपी सहित 28 श्रेणियों के फॉस्फेट और पोटेशियम उर्वरक उपलब्ध करा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रायसेन में 11 अप्रैल से आरंभ तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव का केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुभारंभ किया। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि इस महोत्सव में उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, कृषि यंत्र, प्राकृतिक खेती, कम्यूनिटी एवं इंटीग्रेटेड फॉर्मिंग एवं कृषि एव बागवानी से संबंधित नई तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। लगभग 350 से अधिक स्टॉल लगाये गये हैं और खेती से जुड़े अलग-अलग विषयों पर विभिन्न सत्र आयोजित किये गये हैं। इनमें विभिन्न कृषि वैज्ञानिक, विषय विशेषज्ञ एफपीओ तथा किसान बंधु भाग ले रहे है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नक्सल उन्मूलन के बाद बालाघाट में अब विकास की गंगा बहेगी। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के कुशल मार्गदर्शन में प्रदेश में नक्सल ग़तिविधियों का उन्मूलन हो गया है। अब प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास किया जायेगा। आगामी माह बालाघाट में जनजातीय महोत्सव का आयोजन होगा। इसमें सांस्कतिक और खेल गतिविधियों के साथ-साथ विकास से जुड़े हुये सभी विभाग स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। धरती आबा अभियान में हितग्राहियों को लाभान्वित करने और मेगा स्वास्थ्य शिविर तथा सिकल सेल स्क्रीनिंग का कार्य भी किया जायेगा साथ ही विभिन्न पारम्परिक व्यंजनों के स्टॉल भी लगाये जाएंगे।  

अनुराधा देवी के नेतृत्व में रसूलपुर पंचायत ने रचा विकास का मॉडल

रोहतास बिहार के रोहतास जिले की रसूलपुर ग्राम पंचायत ने महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण प्रशासन और सतत विकास के क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल कायम की है। इस 9 हजार 876 की आबादी वाली पंचायत में लगभग 45 प्रतिशत महिलाएं हैं। मुखिया अनुराधा देवी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में इस पंचायत ने स्वास्थ्य, शिक्षा, आजीविका, सुरक्षा और सामाजिक समावेश की कई अभूतपूर्व पहलें सफलतापूर्वक लागू की गई हैं। यहां वर्तमान में 16 आंगनवाड़ी केंद्र, 9 विद्यालय, 1 स्वास्थ्य केंद्र और एक पंचायत भवन संचालित हो रहे हैं। मुखिया अनुराधा देवी का स्पष्ट उद्देश्य है- महिला-केंद्रित शासन सुनिश्चित करना, स्वास्थ्य व पोषण में सुधार, बालिका शिक्षा को बढ़ावा, आजीविका के नए अवसर और एक सुरक्षित और सशक्त ग्राम पंचायत का निर्माण। मुखिया की कोशिशों ने पंचायत में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया है। यहां 216 गर्भवती महिलाओं का सफल पंजीकरण किया गया। सौ प्रतिशत प्रसवोत्तर जांच सुनिश्चित की गई और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दिया गया। परिणामस्वरूप मातृ मृत्यु दर मात्र 1 और शिशु मृत्यु दर केवल 2 रही। यहां नियमित पोषण दिवस का आयोजन, स्तनपान और सही पोषण संबंधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। शिक्षा और बालिका सशक्तिकरण अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्र-छात्राओं को शिक्षा में बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। मुखिया अनुराधा देवी बताती हैं कि प्रति वर्ष दसवीं और बारहवीं में अच्छे अंक लाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया जाता है। परिणामस्वरूप शिक्षा के प्रति लोगों का रवैया बदला है, लड़कियां इसमें खासकर अच्छा कर रही हैं। आर्थिक आजादी की ओर कदम इस पंचायत में 172 स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) सक्रिय हैं, जिनमें से 162 बैंक ऋण से जुड़ चुके हैं। महिलाओं को सिलाई, हस्तशिल्प और कंप्यूटर जैसे कौशल के प्रशिक्षण दिए जा रहे हैं। जीविका के माध्यम से एससी-एसटी की महिलाएं स्कूल ड्रेस सिलाई कर अच्छी आय कमा रही हैं। अब सैकड़ों महिलाएं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो चुकी हैं और शासन प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। ग्राम स्तर पर समस्याओं का समाधान महिलाओं की सुरक्षा के लिए शक्ति सलाह केंद्र की स्थापना की गई है। दहेज, बाल विवाह और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों से संबंधित मामलों को मुखिया अनुराधा देवी अपने स्तर पर या ग्राम कचहरी में सुलझाती हैं। उनका प्रयास रहता है कि मामले थाने तक न पहुंचें। मजबूत जागरूकता अभियान के कारण लिंग आधारित हिंसा में उल्लेखनीय कमी आई है। पंचायत ने 2 हजार 572 शौचालयों का निर्माण करवाया है। सभी घरों तक सड़क बनाई गई है। सौ एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं और आरओ आधारित पेयजल सुविधा भी उपलब्ध है। इसके साथ ही विधवा पेंशन के 143, वृद्धावस्था पेंशन के 149 और विकलांगता पेंशन के 67 लाभार्थियों को नियमित लाभ मिल रहा है। पात्र सभी लाभार्थियों को सौ प्रतिशत कवरेज देने का लक्ष्य रखा गया है। चुनौतियों से निपटने के लिए निकाले रास्ते मुखिया बताती हैं कि शुरुआत में महिलाओं की भागीदारी कम थी और सामाजिक रूढ़िवादी मानसिकता बाधा बन रही थी। नियमित जागरूकता अभियान, महिला सभाएं, क्षमता निर्माण प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से समन्वय के माध्यम से इन चुनौतियों पर काबू पाया। आज महिलाओं की निर्णय लेने में सक्रिय भागीदारी बढ़ी है और अब वे विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आर्थिक स्वतंत्रता हासिल कर चुकी हैं। सूर्यकांत पाठक

जल गंगा संवर्धन अभियान में सभी विभागों को डैशबोर्ड में जानकारी दर्ज करने का आदेश, बोलीं अपर मुख्य सचिव रस्तोगी

जल गंगा संवर्धन अभियान के सहभागी सभी विभाग डैशबोर्ड में अनिवार्य रूप से दर्ज करें जानकारी : अपर मुख्य सचिव श्रीमती रस्तोगी गंगा संवर्धन अभियान के सहभागी विभागों के नोडल अधिकारियों के साथ की बैठक कार्यों के प्रगति की समीक्षा कर दिए आवश्यक दिशा-निर्देश भोपाल  अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने जल गंगा संवर्धन अभियान के सहभागी विभागों के नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की। विभागों द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। सभी विभागों के नोडल अधिकारियों को रैकिंग के लिए बनाए गए डैशबोर्ड में अनिवार्य रूप से समय पर जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए। जिससे अभियान की प्रगति का प्रभावी मूल्यांकन सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में वर्षा जल की प्रत्येक बूंद को सहेजने तथा पारंपरिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से प्रदेश में 19 मार्च से “जल गंगा संवर्धन अभियान” संचालित किया जा रहा है। अभियान से जुड़े 18 विभागों द्वारा जल संरक्षण एवं पर्यावरण संवर्धन को लेकर विभिन्न प्रकार के कार्य किए जा रहे हैं, इससे प्रदेश में जल संसाधनों के संरक्षण को नई दिशा मिल रही है। अपर मुख्य सचिव श्रीमती रस्तोगी ने 19 मार्च से अब तक किए गए कार्यों की विभाग वार प्रगति की समीक्षा कर सभी विभागों को अभियान का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।  आयुक्त, म.प्र. राज्य रोजगार गारंटी परिषद श्री अवि प्रसाद ने बैठक में सहभागी विभागों के नोडल अधिकारियों से विभागवार प्रगति की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि सभी विभाग मॉनिटरिंग एवं रिपोर्टिंग के लिए बनाए गए डैश बोर्ड में अनिवार्य रूप से जानकारी दर्ज करें। डैश बोर्ड के माध्यम से अभियान की प्रगति की विभागवार रैंकिंग भी की जाएगी। बैठक में सहभागी विभागों द्वारा अभियान अंतर्गत संचालित की जा रही गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई। बैठक में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, नगरीय प्रशासन एवं आवास, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, उद्यानिकी, किसान कल्याण तथा कृषि विकास, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, पर्यावरण, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा, राजस्व, संस्कृति और जन अभियान परिषद सहित अन्‍य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।  

बिहार में नई सरकार की उलटी गिनती: शपथ ग्रहण की तैयारी पूरी, CM नाम का इंतजार

पटना.  बिहार में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सीएम के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की अंतिम रूपरेखा सामने आ गई है। मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार (कल) दोपहर 2 बजे से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के विधायक दल की बैठक सीएम आवास पर बुलाई है। भाजपा ने 3 बजे विधायकों की बैठक बुलाई है, जहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान विधायक दल के नेता यानी राज्य के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान करेंगे। जेडीयू और भाजपा की बैठकों के बाद शाम 4 बजे विधानमंडल के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें भाजपा विधायक दल के नेता को गठबंधन का नेता चुना जाएगा। नीतीश की जगह पर आगे राजपाट चलाने के लिए यही नेता सरकार बनाने का दावा पेश करने राजभवन जाएगा या जाएगी। बिहार में भाजपा के नेतृत्व में बन रही पहली एनडीए सरकार 15 अप्रैल को शपथ लेगी। डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर आज एनडीए के नेताओं की बैठकों का दौर चल रहा है। जेडीयू के नेता संजय झा और ललन सिंह ने उनसे करीब 40 मिनट मुलाकात की। फिर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय सरावगी पहुंचे थे। इस समय सरकार गठन की गतिविधियों का केंद्र नीतीश का सीएम आवास और सम्राट चौधरी का डिप्टी सीएम आवास बना हुआ है। भाजपा विधायक दल के नेता को सीएम बनना है, जिसके लिए पर्यवेक्षक बनाए गए शिवराज सिंह चौहान कल सुबह पटना पहुंचेंगे। पांच महीने पहले विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल के नेता का चुनाव कराने के लिए उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को पर्यवेक्षक बनाया गया था। अभी भाजपा विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी और उप-नेता विजय सिन्हा हैं। दोनों नेता नीतीश कैबिनेट में डिप्टी सीएम हैं, जिसकी आखिरी बैठक 14 अप्रैल को होगी। कैबिनेट बैठक के बाद गठबंधन के विधायक दल के नेता नीतीश त्यागपत्र देने राजभवन जाएंगे और अगली सरकार के गठन को औपचारिक रास्ता देंगे। राजभवन से इस्तीफा देकर लौटने के बाद दोपहर 2 बजे नीतीश कुमार जदयू के विधायक दल की बैठक करेंगे, जिसका मौजूदा नेता रहने के कारण वो सीएम हैं। भाजपा के पास तो विकल्प है कि वो विधायक दल के नेता सम्राट चौधरी या उप-नेता विजय कुमार सिन्हा को ना भी बदले, लेकिन जदयू के विधायकों को सांसद बन चुके नीतीश की जगह पर कोई नया नेता चुनना ही होगा, जो विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य हो।

सागर जिले की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286.26 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति

लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 19 हजार 810 करोड़ रूपये की स्वीकृति सागर जिले की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 286.26 करोड़ रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति लोक निर्माण विभाग अंतर्गत 10,801 करोड़ रूपये की स्वीकृति पंचायत एवं ग्रामीण विकास की योजनाओं के लिए 3,553 करोड़ 35 लाख रूपये की स्वीकृति सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाईजेशन के लिए 2,250 करोड़ रूपये की स्वीकृति नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना के लिए 1,674 करोड़ रूपये की स्वीकृति भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,005 करोड़ रूपये का अनुमोदन मुख्यमंत्री डॉ.यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक सोमवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए तकरीबन 19,810 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। मंत्रि-परिषद ने लोक निर्माण विभाग, सिंचाई परियोजना, महिला बाल विकास के कार्यों, नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों तथा कृषि विभाग के प्रस्तावों को भी स्वीकृति दी है। मंत्रि-परिषद द्वारा सागर जिले की मिडवासा मध्यम सिंचाई परियोजना के निर्माण के लिए 286 करोड़ 26 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। इस परियोजना से सागर जिले की सागर तहसील के 27 ग्रामों की 7200 हैक्टेयर भूमि की सिंचाई के लिये किसानों को लाभ मिलेगा। मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों के लिए 10,801 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। इसके अंतर्गत बी.ओ.टी. मार्गों का विकास एवं पर्यवेक्षण के लिए 150 करोड़ रूपये, बी.ओ.टी. परियोजनाओं की समाप्ति पर भुगतान के लिए 765 करोड़ रूपये, एन्यूटी भुगतान के लिए 4,564 करोड़ रूपये और म.प्र. सड़क विकास निगम (एन.डी.बी.) बाह्य वित्त परियोजना के लिए 5,322 करोड़ रूपये की स्वीकृति सहित 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखे जाने की स्वीकृति दी गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत प्रधानमंत्री पोषण शक्ति और मध्याह्न भोजन सहित विभिन्न योजनाओं/कार्यक्रमों के सुचारू संचालन के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 3,553 करोड़ 35 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकेनाईजेशन (SMAM) के तहत कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने, ग्रामीण युवाओं के माध्यम से कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना करने, नरवाई प्रबंधन को बढ़ावा देने और प्रदेश के वन पट्टाधारियों के लिए हस्तचलित/बैलचलित कृषि यंत्रों पर अनुदान उपलब्ध कराने के लिए योजना आगामी 5 वर्षों के निरन्तर संचालन के लिए 2,250 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है।  योजना के क्रियान्वयन से फार्म पॉवर उपलब्धता में वृद्धि होगी। कृषि यंत्रों के उपयोग से श्रमिकों पर निर्भरता में कमी आएगी और लागत एवं समय की बचत सहित रोजगार सृजन होगा। इससे वन-पट्टाधारी कृषक भी लाभान्वित होंगे।  मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में भारत सरकार की सहायता से नए चिकित्सा महाविद्यालयों की स्थापना की योजना को आगामी 5 वर्षों तक चलाए जाने के लिए 1,674 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। इसमें जिला चिकित्सालय को चिकित्सा महाविद्यालय से समबद्ध किया जाएगा। मंत्रि-परिषद द्वारा भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग अंतर्गत स्वास्थ्य सेवाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने के लिए लगभग 1,005 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया है। बेटी बचाओ-बेटी पढाओ, वन स्टॉप सेंटर एवं महिला हेल्पलाइन-181 के संचालन के लिए 240 करोड 42 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा महिला एवं बाल विकास विभाग अंतर्गत बेटी बचाओ बेटी पढाओ योजना, वन स्टॉप सेंटर योजना एवं महिला हेल्पलाइन-181 योजना के संचालन के लिए 240 करोड़ 42 लाख रूपये और आगामी 5 वर्ष, 2026-27 से 2030-31 की अवधि तक संचालन एवं निरंतरता की स्वीकृति दी गई है। 8 नये वन स्टॉप सेंटर के संचालन की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार से प्राप्त स्वीकृति अनुसार प्रदेश में 8 नए वन स्टॉप सेंटर के संचालन की स्वीकृति दी गयी है। मैहर, मउगंज, पांढुर्णा, धार में मनावर और पीथमपुर, इंदौर में लसूडिया और सांवेर एवं झाबुआ में पेटलावद में नये वन स्टॉप सेंटर का संचालन किया जायेगा।

चुनाव के कारण हम अंधे नहीं हो सकते: सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, निर्वाचन आयोग को दिया जवाब देने का आदेश

 नई दिल्ली पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले चल रहे वोटर लिस्ट के 'स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू' (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है. कोर्ट ने कहा कि मतदाताओं का चुनावी सूची में बने रहने का अधिकार लगातार बना रहता है. इसे किसी भी हाल में चुनावी दबाव के कारण प्रभावित नहीं किया जा सकता।  सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में वोटर का अधिकार केवल कानूनी नहीं, बल्कि भावनात्मक महत्व भी रखता है. कोर्ट की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और मतदाता सूची को लेकर लगातार विवाद सामने आया है।  यह मामला उन मतदाताओं की याचिका से जुड़ा है, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं. उनकी अपीलें अभी अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं. याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने की कट-ऑफ तारीख आगे बढ़ाई जाए, ताकि अपील मंजूर होने पर वे मतदान कर सकें।  चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि चुनावों की गहमागहमी और दबाव के बीच भी अदालत मतदाताओं के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं कर सकती. बेंच ने कहा, ''जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोटर बने रहने का अधिकार केवल संवैधानिक नहीं है।  कोर्ट ने कहा कि ये एक भावनात्मक अधिकार भी है. हमें इसकी रक्षा करनी होगी. भारत निर्वाचन आयोग ने बताया कि वोटर लिस्ट को 9 अप्रैल की तारीख के आधार पर अंतिम रूप दे दिया गया है. हालांकि, कोर्ट ने इस प्रक्रिया में कुछ कमियों की ओर इशारा किया. लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी जैसी नई श्रेणी पर सवाल उठाए।  बेंच ने यह भी याद दिलाया कि पहले के मामलों में आयोग ने 2002 की मतदाता सूची के लोगों से अतिरिक्त दस्तावेज मांगने की जरूरत नहीं बताई थी. याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि भारत निर्वाचन आयोग अपील प्रक्रिया में जरूरी दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं करा रहा है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस पर जोर देते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मामलों की जांच के दौरान त्रुटियों की संभावना बनी रहती है, इसलिए एक मजबूत और प्रभावी अपीलीय तंत्र बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब एक दिन में सैकड़ों-हजारों दस्तावेजों की जांच होती है, तो पूर्ण सटीकता की उम्मीद करना व्यावहारिक नहीं है।  पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को होने हैं, जबकि मतगणना 4 मई को होगी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बेहद अहम है. इसका सीधा असर उन मतदाताओं पर पड़ सकता है, जिनकी चुनावी भागीदारी फिलहाल अनिश्चित बनी हुई है. कोर्ट का अंतिम रुख चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है। 

महिला आरक्षण से महिलाओं को मिलेगा पूरा हक, निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारी – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

महिला आरक्षण से आधी आबादी को मिलेगा उनका पूरा हक, निर्णय प्रक्रिया में बढ़ेगी भागीदारी  –  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उद्बोधन को सुना। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह देश की मातृशक्ति के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है, जो भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी एवं सशक्त बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ नारी की भागीदारी सुनिश्चित करने का यह प्रयास नए भारत की स्पष्ट झलक प्रस्तुत करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के इस दृष्टिकोण को रेखांकित किया कि निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की सीधी भागीदारी ही विकसित भारत की सशक्त नींव है। उन्होंने कहा कि 16 अप्रैल को संसद में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर होने वाली चर्चा इस ऐतिहासिक पहल को मूर्त रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल से लेकर वर्तमान समय तक महिलाओं की भूमिका समाज के निर्माण और विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। हमारी डबल इंजन सरकार की विभिन्न योजनाओं ने इस परंपरा को आधुनिक संदर्भ में सशक्त रूप दिया है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ आगे बढ़ रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए कई प्रभावी कदम उठाए गए हैं। स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को नेतृत्व का अवसर मिला है, जिसका सकारात्मक प्रभाव जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी पहल माताओं-बहनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सुदृढ़ बना रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सुखद संयोग है कि जब देश में महिला आरक्षण पर ऐतिहासिक चर्चा हो रही है, उसी समय छत्तीसगढ़ ‘महतारी गौरव वर्ष’ मना रहा है। उन्होंने कहा कि ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ का सम्मान और महिलाओं की सक्रिय भागीदारी प्रदेश की पहचान बन चुकी है। उन्होंने प्रदेश की मातृशक्ति और महिला संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज़ बुलंद करें और इस परिवर्तन यात्रा में सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने विश्वास जताया कि महिलाओं की बढ़ती सहभागिता से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा तथा समाज में सकारात्मक बदलाव की नई दिशा स्थापित होगी। मुख्यमंत्री साय ने अंत में कहा कि जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। यह समय देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार दिलाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में निर्णायक भूमिका देने का है। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, विधायक पुरंदर मिश्रा सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

सीएम योगी ने अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का भी किया अनावरण, रोजगार मेले में बांटे नियुक्ति पत्र

मुजफ्फरनगर को विकास की सौगात, मुख्यमंत्री ने किया ₹951 करोड़ की 423 परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास सीएम योगी ने अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का भी किया अनावरण, रोजगार मेले में बांटे नियुक्ति पत्र सड़क, पेयजल, रेल और शहरी विकास से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को मिली रफ्तार कौशल विकास, एआई और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने की पहल मुजफ्फरनगर को मिलेगा आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं को रोजगार के नए अवसर मुजफ्फरनगर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को महर्षि शुकदेव की पावन धरा मुजफ्फरनगर को ₹951 करोड़ से अधिक की लागत वाली 423 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। इस दौरान उन्होंने बटन दबाकर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा का अनावरण किया और रोजगार मेले का अवलोकन करते हुए युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विकास और रोजगार के अवसरों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। लोकार्पित प्रमुख परियोजनाओं में बेहड़ा सादात से मेरठ-पौड़ी मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण, मंसूरपुर से शाहपुर मार्ग का सुदृढ़ीकरण, शुक्रतीर्थ में लाइट एंड साउंड शो तथा नगर पंचायत चरथावल की पेयजल पुनर्गठन योजना शामिल हैं। वहीं शिलान्यास की गई योजनाओं में खतौली रेलवे स्टेशन पर दो लेन का रेल उपरिगामी सेतु, छपार-रोहना-चरथावल मार्ग और खतौली-मीरापुर मार्ग का चौड़ीकरण, नाला निर्माण कार्य तथा राजकीय इंटर कॉलेज में 800 क्षमता वाले ऑडिटोरियम का निर्माण शामिल है। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की पुस्तक ‘कौशल दर्शन’ का विमोचन किया और देश में एआई विश्वविद्यालयों की रूपरेखा से जुड़ी ‘एआई सेंटीमेंट एंड रेडीनेंस’ रिपोर्ट लॉन्च की। महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नीति आयोग और एनएसडीसी के बीच एमओयू भी संपन्न कराया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये सभी परियोजनाएं न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देंगी, बल्कि रोजगार, कौशल विकास और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार में भी अहम भूमिका निभाएंगी।

बंगाल चुनाव: 34 लाख लोग नहीं कर सकेंगे वोटिंग, SC ने अंतरिम राहत देने से किया मना

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ 13 लोगों द्वारा दायर याचिका पर सोमवार को सुनवाई से इनकार कर दिया. पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान 23 अप्रैल को होगा. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका को ‘‘समय पूर्व'' करार देते हुए पीड़ित पक्षों को स्थापित अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क करने का निर्देश दिया।  सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों को अंतरिम वोटिंग अधिकार देने से मना कर दिया है, जिनके नाम वोटर लिस्ट की सफाई प्रक्रिया (SIR) के दौरान हटा दिए गए थे और जिनकी अपीलें अभी भी अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने लंबित हैं।  सुनवाई के दौरान तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने पीठ को बताया कि कम से कम 16 लाख अपीलें दायर की गई हैं। उन्होंने आग्रह किया कि इन लोगों को आगामी दो चरणों के विधानसभा चुनाव में वोट डालने की अनुमति दी जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि यह बिल्कुल असंभव है। अगर हम ऐसा करते हैं, तो संबंधित व्यक्तियों के मतदान अधिकार निलंबित करने पड़ेंगे। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि एसआईआर प्रक्रिया में कुल 34 लाख अपीलें लंबित हैं। यह आदेश 13 लोगों के एक समूह द्वारा दायर याचिका पर आया, जिसमें मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ हस्तक्षेप की मांग की गई थी। पीठ ने याचिका को 'समय से पहले' बताते हुए खारिज कर दिया और याचिकाकर्ताओं को अपीलीय न्यायाधिकरणों में ही राहत मांगने की सलाह दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा चूंकि याचिकाकर्ता (कुरैशा यास्मीन और अन्य) पहले ही अपीलीय न्यायाधिकरणों से संपर्क कर चुके हैं, इसलिए याचिका में व्यक्त आशंकाएं समय से पहले हैं। अगर याचिका स्वीकार कर ली जाती है, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, अदालत ने याचिका के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दी। न्यायमूर्ति बागची ने चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता पर जोर देते हुए कहा कि जिस देश में आपका जन्म हुआ है, वहां वोट देने का अधिकार न केवल संवैधानिक है, बल्कि भावनात्मक भी है। यह लोकतंत्र का हिस्सा होने और सरकार चुनने से जुड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि पूर्व न्यायाधीशों द्वारा गठित न्यायाधिकरणों पर निर्णय की समयसीमा का बोझ नहीं डाला जा सकता। यह लक्ष्य हासिल करने के लिए गलत तरीके अपनाने की बात नहीं है। साधन ही लक्ष्य को सही ठहराते हैं। हमें उचित प्रक्रिया के अधिकारों की रक्षा करनी होगी। मतदाता को दो संवैधानिक प्राधिकरणों के बीच नहीं फंसाया जाना चाहिए। कल्याण बनर्जी ने कहा कि बंगाल के लोग न्याय के लिए इस अदालत की ओर देख रहे हैं. लोग अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल करना चाहते हैं. 34 लाख लोग असली वोटर हैं, इसीलिए वे न्याय के लिए आपकी ओर देख रहे हैं।  टीएमसी ने तर्क दिया कि उन सभी व्यक्तियों को मतदान करने की अनुमति दी जानी चाहिए जिनके नाम 22 अप्रैल तक अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा स्वीकार किए जाते हैं।  इस केस की सुनवाई करते हुए सीजेआई ने कहा कि हमें कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से पत्र मिला है. उन्होंने अपडेट किया है कि 60 लाख से 6 हजार 675 आपत्तियां और दावे निपटाए गए. उनके पास लगभग 1823 आपत्तियों पर निर्णय लिया जाना बाकी है, उनमें तकनीकी कारण हैं. कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने अपडेट किया है कि उन्होंने न्यायाधिकरणों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया तैयार करने के लिए उच्च न्यायालय के तीन सेवानिवृत्त जजों की एक समिति बनाई है।  अधिकारियों को मिलती रहेगी सुरक्षा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम भारत सरकार और निर्वाचन आयोग के साथ-साथ राज्य सरकार को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश देते हैं कि न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा किसी भी सूरत में वापस नहीं ली जाए।  याचिका में आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना मनमाने ढंग से नाम हटा रहा है और अपीलों की सुनवाई समय पर नहीं हो रही है। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डीएस नायडू ने बताया कि लगभग 30 से 34 लाख अपीलें अभी लंबित हैं। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि अगर बहस करने की अनुमति ही नहीं दी जाती तो अपीलों का क्या फायदा? क्या इनका फैसला तय समयसीमा में होगा या इन्हें लगातार टाला जाएगा? गौरतलब है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पहले ही पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को फ्रीज कर दिया है। अदालत के कोई विशेष निर्देश न होने तक कोई नया नाम शामिल नहीं किया जा सकता। बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में हटाए गए लगभग 27 लाख मामलों का फैसला करने के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण गठित किए गए हैं।

एग्रीस्टेक परियोजना से किसानों को तकनीकी ताकत, छत्तीसगढ़ को मिले 104 करोड़ रुपए

खेती में डिजिटल क्रांति की नई उड़ान:डिजिटल क्रॉप सर्वे से बढ़ी पारदर्शिता, 58 हजार से अधिक युवाओं को रोजगार एग्रीस्टेक परियोजना से किसानों को तकनीकी ताकत, छत्तीसगढ़ को मिले 104 करोड़ रुपए रायपुर       छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र को तकनीकी रूप से सशक्त और आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी एग्रीस्टेक परियोजना नई क्रांति का आधार बन रही है। इस परियोजना के अंतर्गत संचालित डिजिटल क्रॉप सर्वे (Digital Crop Survey) योजना ने राज्य में खेती-किसानी को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ते हुए पारदर्शिता और सटीकता बढ़ाने का कार्य किया है। मोबाइल ऐप आधारित इस सर्वे के जरिए खरीफ और रबी फसलों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज की जा रही है, जिससे कृषि प्रबंधन अधिक प्रभावी बन रहा है। 85 प्रतिशत खसरों का डिजिटल सत्यापन पूर्ण      खरीफ वर्ष 2025 के लिए 15 अगस्त 2025 से प्रारंभ किए गए डिजिटल क्रॉप सर्वे में राज्य के 33 जिलों के 18,008 गांवों के कुल 1 करोड़ 19 लाख 68 हजार 415 खसरों का सर्वेक्षण किया गया। इनमें से 1 करोड़ 18 लाख 07 हजार 537 खसरों को अनुमोदित किया गया है। इस प्रकार 85 प्रतिशत खसरों का डिजिटल सर्वे कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया है। वहीं, रबी फसल वर्ष 2026 का सर्वे 1 जनवरी 2026 से जारी है। 79 प्रतिशत किसानों की बनी फार्मर आईडी      एग्रीस्टेक परियोजना के तहत राज्य के कुल 40 लाख 08 हजार 908 किसानों में से 31 लाख 68 हजार 555 किसानों का सत्यापन कर फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी है। यह कुल किसानों का 79.22 प्रतिशत है। राज्य के उत्कृष्ट प्रदर्शन को देखते हुए केंद्र सरकार ने विशेष केंद्रीय सहायता योजना के अंतर्गत 104 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की है। तकनीक से मजबूत होगा कृषि तंत्र       मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़कर खेती को अधिक सक्षम और पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि एग्रीस्टेक परियोजना के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ शीघ्र मिलेगा तथा कृषि आंकड़ों का वैज्ञानिक प्रबंधन संभव होगा। ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया अवसर      राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे केवल तकनीकी सुधार नहीं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार का नया माध्यम बन रहा है। उन्होंने बताया कि खरीफ सीजन 2025-26 में 33 जिलों के 14,066 गांवों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण कार्य पूर्ण किया गया, जिसमें 58 हजार 335 ग्रामीण बेरोजगार युवाओं को सर्वेयर के रूप में रोजगार मिला। इन युवाओं को इस कार्य के एवज में लगभग 12 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा। साल में दो बार मिलेगा रोजगार        अब वर्ष में दो बार—खरीफ और रबी सीजन में—डिजिटल फसल सर्वे होने से ग्रामीण युवाओं को नियमित रोजगार के अवसर मिलेंगे। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और तकनीक आधारित कृषि प्रणाली को नई मजबूती मिलेगी।