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रेल प्रशासन की ‘दमनकारी’ नीति के खिलाफ उतरे रनिंग कर्मचारी, वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने से किया साफ इनकार

 रामगढ़ धनबाद रेल मंडल के सीआईसी सेक्शन अंतर्गत रामगढ़ के पतरातू में, लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने कॉशन पेपर की अव्यवहारिक व्यवस्था के विरोध में रविवार को जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है. लोको रनिंग कर्मियों का तर्क है कि ऑन-ड्यूटी तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा से संबंधित ‘कॉशन पेपर’ या तो क्रू लॉबी में ही दिया जाना चाहिए या सीधे इंजन में उपलब्ध कराना चाहिए. वर्तमान में प्रचलित प्रक्रिया के कारण रेल परिचालन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है. वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने पर जताई कड़ी आपत्ति आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत उन्हें सबसे पहले क्रू लॉबी में अपनी उपस्थिति दर्ज (रिपोर्ट) करानी पड़ती है, जिसके बाद उन्हें ‘कॉशन पेपर’ लेने के लिए वाईएम (Yard Master) कार्यालय जाना पड़ता है. इस दोहरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो जाता है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर इंजन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कर्मियों का आरोप है कि यदि इस प्रशासनिक देरी के कारण ट्रेन लेट होती है, तो रेल प्रशासन सारा दोष लोको पायलट के मत्थे मढ़ देता है. इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब रनिंग कर्मियों ने वाईएम कार्यालय जाकर कॉशन पेपर लेने से साफ इनकार कर दिया है. सुरक्षित परिचालन के लिए ‘कॉशन पेपर’ का महत्व रेलवे की शब्दावली में ‘कॉशन पेपर’ एक अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य दस्तावेज होता है, जो ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए लोको पायलट को सौंपा जाता है. इसमें ट्रैक की वर्तमान स्थिति, विभिन्न खंडों (Sections) में गति सीमा (Speed Limit) और सिग्नल से संबंधित महत्वपूर्ण चेतावनियां दर्ज होती हैं. लोको पायलट इसी अधिकार पत्र के आधार पर ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. कर्मियों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज की प्राप्ति प्रक्रिया को जटिल बनाने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि चालक के मानसिक एकाग्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. रेलवे प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी पतरातू के लोको पायलटों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर अविलंब संज्ञान नहीं लिया गया और व्यवस्था को सरल नहीं बनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे. उन्होंने रेलवे के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि डिजिटल युग में भी ऐसी पुरानी और थकाऊ प्रक्रियाओं को ढोना अनुचित है. फिलहाल, इस आंदोलन के कारण पतरातू क्षेत्र में रेल परिचालन की सुगमता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर रेल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

नक्शा पास कराने में नहीं चलेगी अफसरों की मनमानी, एआई तकनीक से गुरुग्राम में आएगी पारदर्शिता

गुरुग्राम गुरुग्राम में मकान का नक्शा पास करने के लिए नगर निगम अब अपना खुद का पोर्टल बनाएगा। यह पोर्टल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस होगा। नए पोर्टल की खासियत होगी कि इसमें नक्शे और दस्तावेजों की जांच के लिए एआई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। सभी नक्शे सख्ती के साथ हरियाणा बिल्डिंग कोड के निर्धारित नियमों के तहत ही पास किए जाएंगे। अधिकारियों का कहना है कि एआई आधारित पोर्टल के शुरू होने से पूरी प्रक्रिया आसान, तेज और पारदर्शी हो जाएगी। बिल्डिंग कोड की अनदेखी पड़ेगी भारी आवेदन आते ही एआई अपने आप सिस्टम में अपलोड किए गए सभी कागजातों की छंटनी करेगा और सबमिट किए गए नक्शे की बारीकी से जांच करेगा। यदि नक्शे में हरियाणा बिल्डिंग कोड के नियमों की कोई अनदेखी की गई होगी या कोई खामी होगी, तो एआई तुरंत उसकी पहचान कर लेगा और एक रिपोर्ट बनाकर संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी दे देगा। फिर अधिकारी इस पर ऐक्शन लेंगे। नहीं रहेगी अधिकारियों की दखलंदाजी इस पूरी प्रक्रिया में अधिकारियों का मानवीय हस्तक्षेप न के बराबर रहेगा। एआई की जांच रिपोर्ट के आधार पर ही अधिकारी अंतिम रूप से नक्शा पास करने या उसे रद्द करने का फैसला लेंगे। गुरुग्राम के निगम आयुक्त प्रदीप दहिया ने बताया कि निगम की तरफ से भवनों के नक्शे पास करने के लिए खुद का पोर्टल तैयार कर रहा है, जो एआई आधारित होगा। इसको लेकर टीम काम कर रही है। भारी परेशानी का करना पड़ रहा सामना गौरतलब है कि अभी तक प्रदेश में शहरी स्थानीय निकाय विभाग के होब पास पोर्टल के माध्यम से ही भवनों के नक्शे पास किए जाते थे। पिछले करीब छह महीने से यह पोर्टल तकनीकी खामियों के चलते पूरी तरह से ठप पड़ा है। इस कारण अपना घर या भवन बनाने की चाह रखने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि फिलहाल मजबूरी में नगर निगम को अस्थायी तौर पर सरल पोर्टल के जरिए लोगों से नक्शा पास करने के आवेदन लेने पड़ रहे हैं। धड़ल्ले से बन रहे अवैध भवन नगर निगम के पास पूरे एक साल में नक्शा पास कराने के लिए बमुश्किल 500 के करीब ही आवेदन आते हैं। इसके विपरीत, नियमों की खुलेआम अनदेखी करके शहर में हर साल पांच हजार से ज्यादा अवैध भवनों का निर्माण धड़ल्ले से हो रहा है। लंबी और जटिल प्रक्रिया से बचने के लिए लोग बिना नक्शा पास कराए ही अवैध निर्माण का रास्ता चुन लेते हैं। निगम को उम्मीद है कि नए एआई आधारित पोर्टल के शुरू होने से यह पूरी प्रक्रिया इतनी आसान, तेज और पारदर्शी हो जाएगी कि लोग खुद आगे नक्शा पास करवाएंगे।

बिहार में खरमास खत्म होने से पहले गैस की किल्लत ने बढ़ाई टेंशन, कालाबाजारी करने वालों पर एस्मा के तहत होगी कार्रवाई

पटना  बिहार में 14 अप्रैल को खरमास खत्म होते ही शहनाइयां बजनी शुरू हो जाएंगी, लेकिन इस बार दूल्हे और उनके परिवारों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंची हुई हैं. पटना सहित कई जिलों में रसोई गैस (LPG) की भारी किल्लत जारी है. शादियों के घरों में इस बात का डर सता रहा है कि अगर समय पर सिलेंडर नहीं मिला, तो बारातियों के स्वागत और खाने-पीने का इंतजाम कैसे होगा. प्रशासन ने अभी तक शादी-ब्याह जैसे आयोजनों के लिए किसी अतिरिक्त कोटे की व्यवस्था नहीं की है. शादी वाले घरों में बढ़ी टेंशन शादी समारोहों के लिए बुकिंग तो महीनों पहले हो चुकी है, लेकिन अब गैस की कमी ने संचालकों के हाथ-पांव फुला दिए हैं. पटना के बेली रोड और दीघा आशियाना रोड के बैंक्वेट हॉल प्रबंधकों का कहना है कि उन्हें जरूरत का आधा कमर्शियल सिलेंडर भी नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि मेहमानों के सामने परोसे जाने वाले व्यंजनों की लिस्ट छोटी करनी पड़ सकती है. वहीं, जिन घरों में श्राद्ध या अन्य आकस्मिक आयोजन हैं, वहां के लोग एक-एक सिलेंडर के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं. कालाबाजारी करने वालों पर एस्मा के तहत कार्रवाई गैस संकट की गंभीरता को देखते हुए डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम ने अधिकारियों और गैस एजेंसियों के साथ आपात बैठक की है. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जो भी एजेंसी या व्यक्ति कालाबाजारी, ओवर-प्राइसिंग या गैस के अवैध उपयोग में शामिल पाया जाएगा, उस पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए.     जिलाधिकारी, पटना द्वारा लोक शिकायत के अपीलीय मामलों की सुनवाई की गई तथा परिवादों का निवारण किया गया। पदाधिकारियों को पूर्ण पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं संवेदनशीलता के साथ जन-शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण समाधान तथा जनहित के कार्यों का संवर्द्धन करने का निदेश दिया गया। प्रशासन ने लापरवाही बरतने वालों पर एस्मा (ESMA) के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है. उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए जिला कंट्रोल रूम का नंबर (0612-2219810) जारी किया गया है, जहां 24 घंटे शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. 1.71 लाख तक पहुंचा बैकलॉग स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एलपीजी सिलेंडर का बैकलॉग 1.71 लाख तक पहुंच गया है. लोग बुकिंग के बावजूद समय पर गैस नहीं पा रहे हैं. कई उपभोक्ताओं को फर्जी डिलीवरी मैसेज मिलने की शिकायत भी सामने आई है, जिससे नाराजगी बढ़ रही है. प्रशासन ने कालाबाजारी और ओवरप्राइसिंग पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. गैस एजेंसियों को रिस्पॉन्सिव तरीके से काम करने को कहा गया है, वहीं गड़बड़ी मिलने पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी तक की कार्रवाई हो रही है.

राज्यपाल ने सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन को जन-आंदोलन बनाने का आहवान किया

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि सिकल सेल एनीमिया के उन्मूलन प्रयासों को जन-आंदोलन बनाना होगा। उन्होंने  आहवान करते हुए कहा कि “सबका साथ, सबका विकास” के मूल मंत्र को अपनाकर ही इस अनुवांशिक बीमारी से समाज को मुक्त किया जा सकता है। राज्यपाल  पटेल रविवार को बदनावर के सिविल अस्पताल के नवीन भवन के आभासी माध्यम से लोकार्पण के बाद मेगा स्वास्थ्य शिविर को संबोधित कर रहे थे।  राज्यपाल  पटेल ने कहा है कि सिकल सेल उपचार के विषय मे भ्रामक जानकारियों से भ्रमित नहीं हो। सिकल सेल उपचार के प्रति किसी भी प्रकार की भ्रांति नही पालें। केवल पंजीकृत चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार ही दवाइयों का नियमित सेवन करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बीमारी को निरंतर उपचार और सही जानकारी के माध्यम से ही नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक 1 करोड़ 31 लाख से अधिक जांचें की जा चुकी हैं। जनजातीय क्षेत्रों में विशेष रूप से जागरूकता बढ़ाने के लिए “सिकल सेल मित्र” तैयार किए जा रहे हैं, जो इस मिशन में सेतु का कार्य करेंगे। स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक बनाते हुए मरीजों के लिए डिजिटल कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है, जिससे उपचार अधिक सुगम और प्रभावी होगा।  राज्यपाल  पटेल ने बदनावर प्रवास के दौरान 'संकल्प से समाधान अभियान' के समापन कार्यक्रम मे शासन कि विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ प्रदान किए। स्थल पर शासकीय विभागों द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। राज्यपाल के समक्ष जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदूर अंचलों तक पहुँचाने के उद्देश्य से जिला रेडक्रॉस सोसायटी धार एवं अरविंदो आयुर्विज्ञान संस्थान, इन्दौर के मध्य अनुबंध (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। अनुबंध के तहत जिले के प्रत्येक विकासखंड में प्रति तीन माह में विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा वृहद स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाएगा।  “संकल्प से समाधान अभियान” के तहत 80 शिविरों के माध्यम से विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित किए गए है। राज्यपाल को वर्ष 2025-26 में रेडक्रॉस की गतिविधियों से परिचित कराया गया। बताया गया कि  जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविर, सिकल सेल जागरूकता रैली, रक्तदान शिविर, महिला सशक्तिकरण कार्यक्रम, पोषण कार्यशालाएं एवं CPR प्रशिक्षण जैसे नवाचार किए गए है। साथ ही स्वच्छता अभियान एवं सामाजिक सहभागिता के माध्यम से जन-जागरूकता को भी बढ़ावा दिया गया है। वृहद स्वास्थ्य शिविर में विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा 688 मरीजों का निःशुल्क उपचार किया गया, जिसमें 384 महिलाएं एवं 304 पुरुष शामिल हुये।         इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री  सावित्री ठाकुर, विधायक  नीना विक्रम वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष सरदार सिंह मेढ़ा, नगर पालिका अध्यक्ष  मीना शेखर यादव,  पूर्व मंत्री राजवर्धन सिंह दत्तीगांव और शहीद नरेंद्रसिंह राठौर के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।    

भोपाल मेट्रो की लागत आसमान छू रही, भूमिगत कॉरिडोर में देरी पर अफसरों की चुप्पी

भोपाल राजधानी में मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण को लेकर मेट्रो प्रबंधन के दावों और हकीकत के बीच बड़ा अंतर नजर आ रहा है। एक तरफ भोपाल रेलवे स्टेशन से पुल पातरा तक ट्विन टनल के निर्माण के लिए जिस टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) का उद्घाटन 30 मार्च को बड़ी धूमधाम से किया गया था, वह अब तक एक इंच भी आगे नहीं बढ़ सकी है। ऐसा इसलिए क्योंकि टीबीएम के पीछे लगाए जाने वाले बूस्टिंग के पार्ट अब तक इंस्टॉल नहीं हुए हैं। जबकि उद्घाटन के समय मेट्रो के अफसरों ने मशीन चालू कर फोटो खिंचवाए थे, लेकिन तकनीकी खामियों और प्रशासनिक चुप्पी ने पूरी परियोजना की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह देखकर कहना गलत नहीं होगा कि जब तैयारी पूरी नहीं थी, तो जल्दबाजी में उद्घाटन का दिखावा क्यों किया गया। हालांकि, इस सवाल का जवाब भी मेट्रो के अधिकारी देने से कतरा रहे हैं। मशीन से बूस्टिंग सिस्टम गायब: 6 दिन बाद भी प्रगति शून्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, टीबीएम को आगे धकेलने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रणाली यानी बूस्टिंग सिस्टम अब तक सक्रिय नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि इस प्रणाली से जुड़े कुछ अनिवार्य कलपुर्जे अभी तक मशीन में फिट ही नहीं किए गए हैं। उद्घाटन के समय प्रबंधन ने दावा किया था कि मशीन प्रतिदिन 5 से 7 मीटर की खुदाई करेगी, लेकिन छह दिन बीत जाने के बाद भी प्रगति शून्य है। बिना बूस्टिंग सिस्टम के मशीन का आगे बढ़ना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे प्रोजेक्ट की समयसीमा पर असर पड़ना तय है। जर्जर इमारतें और सुरक्षा चिंताएं बनीं रोड़ा खुदाई शुरू न होने के पीछे तकनीकी कारणों के अलावा सुरक्षा के पहलू भी अहम हैं। हमीदिया रोड स्थित शालीमार ट्रेड सेंटर की हालत अत्यंत जर्जर है। टनल का मार्ग इसी क्षेत्र से होकर गुजरना है। विशेषज्ञों का मानना है कि खुदाई के दौरान होने वाले कंपन के कारण किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए काम को आगे बढ़ाने की हिम्मत नहीं जुटाई जा पा रही है। जर्जर इमारतों को सुरक्षित करना या उन्हें खाली कराना प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। इंदौर पर फोकस, भोपाल की रफ्तार सुस्त परियोजना से जुड़े सूत्रों का यह भी कहना है कि एमपी मेट्रो का पूरा ध्यान फिलहाल इंदौर मेट्रो पर केंद्रित है, जहां दूसरे चरण के कॉरिडोर के उद्घाटन की जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं। इस प्राथमिकता के चक्कर में भोपाल मेट्रो की रफ्तार प्रभावित हो रही है। संसाधनों और तकनीकी टीम का बड़ा हिस्सा इंदौर प्रोजेक्ट में व्यस्त होने के कारण भोपाल के भूमिगत कार्य में अपेक्षित गति नहीं आ पा रही है। लागत में वृद्धि: सरकारी खजाने पर बढ़ेगा बोझ पुल पातरा से सिंधी कॉलोनी तक के 3.39 किलोमीटर लंबे भूमिगत कॉरिडोर के लिए ट्विन टनल का निर्माण रीढ़ की हड्डी के समान है। अगले दो महीनों में 400 मीटर खुदाई का जो लक्ष्य रखा गया था, वह अब नामुमकिन नजर आ रहा है। प्रोजेक्ट में हो रही हर दिन की देरी से निर्माण लागत लाखों रुपये बढ़ रही है, जिसका सीधा बोझ सरकारी खजाने पर पड़ेगा। देरी से न केवल बजट प्रभावित होगा बल्कि शहरवासियों को भी लंबे समय तक निर्माण जनित असुविधाओं का सामना करना पड़ेगा। टीबीएम चालू है, लेकिन बूस्टिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। जल्द ही बूस्टिंग का काम शुरू होगा। जमीन के नीचे कितनी खुदाई हो चुकी है, इसकी जानकारी बाद में बताएंगे। – धीरज शुक्ला, पीआरओ, एमपी मेट्रो

RTE एक्ट पर हाई कोर्ट की टिप्पणी,सामाजिक समानता जरूरी, पर खास प्राइवेट स्कूल में दाखिले की जिद गलत

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी बच्चे के शिक्षा के अधिकार में उसके लिए कोई खास स्कूल चुनने का अधिकार शामिल नहीं है। कोर्ट का यह फैसला एक महिला की अपील पर आया, जिसमें उसने अपने बच्चे को ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत एक प्राइवेट स्कूल में दूसरी क्लास में एडमिशन दिलाने की गुहार लगाई थी। दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डी के उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने कहा कि शिक्षा का अधिकार एक्ट एक फायदेमंद कानून है। इसे सामाजिक समावेश के लक्ष्यों को पाने और यह पक्का करने के लिए बनाया गया था कि स्कूल एक ऐसी जगह बनें, जहां जाति, नस्ल या वर्ग के आधार पर कोई भेदभाव न हो। कोर्ट ने 25 मार्च को फैसला सुनाते हुए कहा कि शिक्षा के इस अधिकार को किसी खास स्कूल को चुनने के अधिकार के तौर पर नहीं देखा जा सकता। कोर्ट का यह फैसला एक मां की अपील पर आया था, जिसमें उसने अपने बच्चे को 2024-2025 के एकेडमिक सेशन के लिए ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत एक प्राइवेट स्कूल में दूसरी क्लास में एडमिशन दिलाने की गुहार लगाई थी। एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी थी अपीलकर्ता ने इससे पहले 2023-2024 के शैक्षणिक सत्र के लिए एक निजी स्कूल की पहली कक्षा में ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के तहत अपने बच्चे के दाखिले के लिए हाई कोर्ट की एकल जज की पीठ से संपर्क किया था। इस अपील में, अपीलकर्ता ने एकल जज के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि चूंकि स्कूल के पास अपीलकर्ता के बच्चे को दाखिला देने से इनकार करने का कोई वैध आधार नहीं था, फिर भी संबंधित शैक्षणिक वर्ष के खत्म हो जाने के कारण कोर्ट उसके बच्चे को अगले शैक्षणिक वर्ष यानी 2024-25 में एडमिशन देने का आदेश जारी करने में असमर्थ थी। दूसरी कक्षा में प्रवेश चाहती थी महिला एकल जज ने कहा था कि इस शैक्षणिक वर्ष के लिए कक्षा एक में ईडब्ल्यूएस की जो सीटें खाली रह गई हैं, उन्हें अगले वर्ष इसी कक्षा के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। यदि कोई ईडब्ल्यूएस उम्मीदवार आवेदन करना चाहता है, जिसमें अपीलकर्ता का बच्चा भी शामिल है तो ये सीटें उसके लिए उपलब्ध होंगी। लेकिन, अपीलकर्ता ने डिवीजन बेंच के सामने यह तर्क दिया कि उसके बच्चे को शैक्षणिक वर्ष 2024-2025 के लिए स्कूल में कक्षा दो में प्रवेश दिया जाना चाहिए। डिवीजन बेंच का राहत देने से इनकार डिवीजन बेंच ने अपील में राहत देने से इनकार कर दिया। बेंच ने कहा कि याचिका के लंबित रहने के दौरान अंतरिम आदेश के तहत अस्थायी दाखिला या सीट आरक्षित करने का कोई आदेश न होने की स्थिति में शैक्षणिक वर्ष समाप्त होते ही स्कूल में दाखिला पाने का छात्र का अधिकार समाप्त हो गया। बेंच ने यह भी कहा कि जब स्कूल ने दाखिला देने से इनकार कर दिया तो शिक्षा निदेशालय ने अपीलकर्ता के बच्चे को एक दूसरे स्कूल में समायोजित कर दिया। यह स्कूल उन पसंदीदा स्कूलों में से एक था जिन्हें अपीलकर्ता ने आवेदन पत्र भरते समय चुना था। हालांकि, कोर्ट ने यह नोट किया कि अपीलकर्ता ने दूसरे स्कूल को स्वीकार नहीं किया। लॉटरी ड्रॉ के दौरान चुना गया नाम अपीलकर्ता ने बताया कि मार्च 2023 में शिक्षा निदेशालय द्वारा किए गए लॉटरी ड्रॉ के दौरान उनके बच्चे का नाम एक प्राइवेट स्कूल में एडमिशन के लिए चुना गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह डॉक्यूमेंट्स के वेरिफिकेशन और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए स्कूल गईं तो उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। बताया गया कि उन्हें आगे की जानकारी दी जाएगी। वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया कोर्ट को बताया गया कि बाद में अपीलकर्ता को सूचित किया गया कि ईडब्ल्यूएस बच्चों को तब तक एडमिशन नहीं दिया जा सकता, जब तक कि जनरल कैटेगरी की सभी सीटें भर न जाएं। इसलिए उनके बच्चे को वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया। इसलिए, उसने एक रिट याचिका दायर की, जिसमें स्कूल को यह निर्देश देने की मांग की गई कि वह शिक्षा निदेशालय द्वारा लॉटरी के माध्यम से चुनी गई उम्मीदवारों की सूची के आधार पर प्रवेश दे। नगर निगम स्कूल में प्रवेश देने की पेशकश अपील की सुनवाई के दौरान, शिक्षा निदेशालय के वकील ने अपीलकर्ता के बच्चे को किसी भी नगर निगम स्कूल में प्रवेश देने की पेशकश की। अपीलकर्ता के वकील ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता आवंटित स्कूल के अलावा किसी अन्य संस्थान में प्रवेश स्वीकार करने को तैयार नहीं है, क्योंकि उनकी ओर से कोई गलती न होने के बावजूद उनके बच्चे को प्रवेश देने से मना कर दिया गया था।

यूपी की जनता को सुरक्षा का भरोसा: सीएम योगी ने कर्फ्यू और अराजकता पर लगाई रोक

गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि वे उत्तर प्रदेश की धरती पर गुंडों और माफिया को पनपने नहीं देंगे। गुंडों और माफिया की जहां जगह होगी, वहां उन्हें पहुंचा दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश में दंगे, कर्फ्यू, अराजकता और लूटखसोट के दिन लग गए हैं। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में व्यापारियों व महिलाओं की सुरक्षा की गारंटी है। सरकार हर व्यक्ति के जीवन सुगमता और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूजरी प्रतिबद्धता से कार्य कर रही है। एम योगी रविवार शाम घंटाघर स्थित अमर बलिदानी बंधु सिंह पार्क में बने मल्टीलेवल पार्किंग सह कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स, घंटाघर के सौंदर्यीकरण कार्य के लोकार्पण और विरासत गलियारा पांडेयहाता कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स के शिलान्यास समारोह को संबोधित कर रहे थे। हर जिले में थी माफिया की समानांतर सरकार- सीएम  नवनिर्मित पार्किंग कॉम्प्लेक्स की छत पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के बाद आज भी प्रदेश, इसका तंत्र और पुलिस वही है लेकिन आज इसकी पहचान बदल गई है। 2017 के पहले हर जिले में माफिया की समानांतर सरकार थी, नौजवानों के सामने पहचान का संकट था। जबकि आज प्रदेश के नौजवान को अन्य जगहों पर सम्मान मिलता है। आज का उत्तर प्रदेश अब उपद्रव नहीं उत्सव प्रदेश बन चुका है। अब यहां अराजकता नहीं है बल्कि यह माफियामुक्त हो चुका है। सुरक्षित माहौल में व्यापारी और बेटियों ने स्वावलंबन की नई ऊंचाई की यात्रा शुरू की है। नीयत साफ हो तो नजारा बदलते देर नहीं लगती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो नजारा बदलते देर नहीं लगती। विरासत गलियारा और मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स इसका उदाहरण है। सरकार की नियत साफ है तो विरासत गलियारा के पहले फेज का काम लगभग पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले इसी गोरखपुर की पहचान माफिया, मच्छर और इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी के चलते थी। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन की सरकार ने गोरखपुर सहित प्रदेश को माफियामुक्त, उपद्रवमुक्त, दंगामुक्त, मच्छरमुक्त और इंसेफिलाइटिसमुक्त बना दिया है। उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि संकीर्णता में उठाए गए कदम से माफिया और मच्छर को पनपने का मौका मिलता है। इसलिए लोमड़ी की तरह ताक लगाए बैठे ऐसे लोगों को अवसर नहीं देना है जो शोषण का कारण बनते थे। माफिया और अराजकता को प्रश्रय देते थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश में माफिया और गुंडों के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति बनी रहेगी। पुलिस को स्पष्ट हृदय दी गई है कि जहां भी गुंडों का फन उठे, उसे कुचल दीजिए। खाएंगे हिंदुस्तान का लेकिन गाएंगे नहीं अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान का विरोध करने वाले लोगों पर निशाना साधते हुए कहा कि ये ऐसे लोग हैं जो खाएंगे हिंदुस्तान का लेकिन हिंदुस्तान का गाएंगे नहीं। उन्होंने कहा कि नया भारत इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिना भेदभाव सबको शासन की योजनाओं का लाभ मिल रहा है तो, राष्ट्र के प्रतीकों, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान राष्ट्रीय ध्वज और बाबा साहब अंबेडकर के बनाए संविधान को सम्मान देना होगा। स्मार्ट सिटी के विजन के अनुरूप बढ़ रहा गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर में इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वास्थ्य, शिक्षा, कारोबारी और जीवन सुगमता के क्षेत्र में आए उल्लेखनीय बदलाव की विस्तार से चर्चा की और कहा कि आज का गोरखपुर स्मार्ट विजन के अनुरूप आगे बढ़ रहा है। उन्होंने घंटाघर क्षेत्र में विरासत गलियारा के निर्माण और मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स को जाम की समस्या का समाधान करने वाला बताया। साथ ही कहा कि जब आवागमन सुगम होगा तो व्यापार में भी समृद्धि आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब विरासत गलियारा बनकर तैयार होगा तो यहां की सड़क सबसे खूबसूरत होगी और यहां फिल्मों की शूटिंग भी होगी। जब विरासत गलियारा बन जाएगा तब यहां भव्य रोड शो की तैयारी करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मल्टीलेवल पार्किंग कॉम्प्लेक्स में भी विरासत गलियारा के प्रभावित दुकानदारों को जगह दी गई है। जो शेष रह जाएंगे उनका पांडेयहाता के कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में व्यवस्थित पुनर्वास कराया जाएगा। नौ साल में नहीं लगाया कोई नया टैक्स आमजन और व्यापारियों के हित पर सरकार के रूख का ध्यान आकर्षित करते हुए सीएम योगी ने कहा कि नौ साल में उनकी सरकार ने कोई भी नया टैक्स नहीं लगाया। इसके बावजूद प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना बढ़ाया गया है। उन्होंने नगर निगम को हिदायत दी कि कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स में व्यापारियों से अधिक किराया न लिया जाए। उतना ही किराया तय किया जाए, जितना व्यापारी आसानी से दे सकें। उन्होंने कहा कि जीआईएस सर्वे को लेकर भी उन्होंने अधिक टैक्स न लेने और अधिक लिए गए रुपये के समायोजन के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि टैक्स में राहत देने की व्यवस्था पर उनका जोर है। टैक्स की व्यवस्था ऐसी ही होनी चाहिए जैसे बादल बारिश के रूप में वापस कर देते हैं। उन्होंने कहा कि जब टैक्स का पैसा विकास और वेलफेयर की योजनाओं में खर्च होगा तो समृद्धि आएगी। चिलुआताल में बनेगा फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने चिलुआताल में फ्लोटिंग सोलर पॉवर प्लांट की स्थापना की मंजूरी दी है। यहां 20 मेगावाट बिजली पैदा होगी जिसका इस्तेमाल सोलर लाइट में किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब गोरखपुर सोलर सिटी के रूप में भी विकसित होगा। उन्होंने कहा कि गोड़धोइया नाला परियोजना भी जल्द पूर्ण होकर विकास का मॉडल बनेगा। मुख्यमंत्री में चार विश्वविद्यालय, नाइलिट, कई पॉलिटेक्निक, आईटीआई का उल्लेख करते हुए बताया कि एमपीआईटी में पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी बनकर तैयार है। 15 अप्रैल को इसके शुभारंभ अवसर पर टाटा संस के चेयरमैन एन चन्द्रशेखरन भी गोरखपुर आएंगे। आजादी की लड़ाई का साक्षी है घंटाघर मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक घंटाघर के सौंदर्यीकरण कार्य के लोकार्पण के अवसर पर कहा कि यह घंटाघर क्षेत्र आजादी की लड़ाई का साक्षी है। यह बता सकता है कि आजादी की क्या कीमत होती है। इसने पीढ़ियों को बदलते देखा है। यह प्रेरणा और गर्व का केंद्र है। इसके पुनरोद्धार और संरक्षण की जिम्मेदारी वर्तमान पीढ़ी की है। सीएम योगी के नेतृत्व में नजर आ रही विकास की अद्वितीय तस्वीर … Read more

कुर्मी भवन जामगांव(एम) में डोम शेड और मंच बनाने की घोषणा की

रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा आज दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के ग्राम जामगांव (एम) में चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज दुर्ग राज के 56 वें वार्षिक अधिवेशन में शामिल हुए। इस अवसर पर उनके साथ दुर्ग ग्रामीण विधायक एवं राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  ललित चंद्राकर भी अधिवेशन में विशिष्ट अतिथि मौजूद थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज का गौरवशाली अतीत रहा है। छत्रपति शिवाजी महाराज और सरदार वल्लभ भाई पटेल जैसे इस समाज के पुरोधाओं ने देश को दिशा दिखाई है। समाज के सामाजिक संगठन की मजबूती के लिए ऐसे अधिवेशन होते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज मैं अपने आप को कुर्मी समाज के बीच पाकर कृतज्ञ हुआ हूं।  अधिवेशन में समाज की महिलाओं की बड़ी सहभागिता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं की प्रतिभा को स्थान व सम्मान दिलाने देश के प्रधानमंत्री  मोदी जी के मंशा के अनुरूप विधानसभा एवं लोकसभा तथा अन्य सभी जगह महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने आगामी 16, 17 एवं 18 तारीख को संसद का विशेष सत्र का आयोजन किया जा रहा है।  उन्होंने बस्तर सहित छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त राज्य बनाने का श्रेय जवानों को देते हुए बस्तर में शांति स्थापना में शासन के संकल्प से सिद्धि तक के सफर को साझा किया। उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने समाज के उन्नत कृषक मती पूजा चंद्राकर, सफल व्यवसायी  विनोद चंद्राकर और कलाकार  पप्पू चंद्राकर को साल व फल भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने समाज की मांग पर सामाजिक भवन जामगांव (एम) में डोम शेड और मंच निर्माण तथा ग्राम तर्रा में कुर्मी सामाजिक भवन हेतु 12 लाख रूपए की घोषणा की। कार्यक्रम में दुर्ग ग्रामीण विधायक  ललित चंद्राकर ने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा और संगठन दोनों आवश्यक है। संगठित प्रयास से हर कार्य संभव होता है। वहीं समाजिक जागरूकता के लिए शिक्षा बहुत जरूरी है। उन्होंने समाज के विकास के लिए माताओं एवं बहनों को आगे आने का आह्वान किया। इस कार्यक्रम में चंद्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के केन्द्रीय एवं प्रदेश स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में समाज के सदस्य उपस्थित थे।  

‘गजवा-ए-हिंद’ की साजिश नाकाम, पाकिस्तान और दुबई से जुड़े तार, संवेदनशील स्थलों की रेकी करने वाले गिरफ्तार

मरेठ उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ता (UP ATS) ने मेरठ और आसपास के इलाकों में सक्रिय एक खतरनाक आतंकी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसके तार सीधे तौर पर सीमा पार पाकिस्तान से जुड़े हुए हैं। इस जांच में जो खुलासे हुए हैं, उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह मॉड्यूल न केवल भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल था, बल्कि पकड़े जाने से बचने के लिए हिंदू रंग-रूप और कोड नेम का इस्तेमाल कर रहा था। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि पाकिस्तान में बैठे आकाओं ने अपने गुर्गों को सख्त हिदायत दी थी कि वे सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए स्थानीय हिंदू युवाओं को भर्ती करें और संवेदनशील स्थलों की रेकी के लिए उन्हें कवर के तौर पर इस्तेमाल करें। 'गजवा-ए-हिंद' का मिशन मीडिया  रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी शाकिब से हुई पूछताछ में यह बात सामने आई है कि वह पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के सीधे संपर्क में था। शाकिब को निर्देश दिए गए थे कि किसी भी परिस्थिति में मिशन अधूरा नहीं रहना चाहिए। हैंडलर्स ने उसे गजवा-ए-हिंद के एजेंडे पर काम करने और नेटवर्क का विस्तार इस तरह करने को कहा था जिससे कि सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक न लगे। हैंडलर्स ने शाकिब को चेतावनी दी थी कि यदि भारत इस बार कोई ऑपरेशन करने की कोशिश करता है, तो हमें तैयार रहना होगा। इस साजिश के तहत शाकिब ने विकास और लोकेश नाम के दो हिंदू युवाओं को लालच देकर मॉड्यूल में शामिल किया। पहचान छिपाने के लिए उन्हें कोड नेम दिए गए। लोकेश को सलीम और विकास को जाहिद के नाम से बुलाया जाता था। हिंदू रंग-रूप को बनाया सुरक्षा का पास जांचकर्ताओं का कहना है कि शाकिब ने लोकेश (सलीम) का उपयोग उन संवेदनशील और धार्मिक स्थलों की रेकी करने के लिए किया, जहां एक विशेष समुदाय के व्यक्ति के रूप में प्रवेश करना मुश्किल हो सकता था। हिंदू पहचान होने के कारण लोकेश को सुरक्षा जांच में संदिग्ध नहीं माना जाता था, जिसका फायदा उठाकर उसने कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की टोह ली। इस मॉड्यूल का मुख्य उद्देश्य सैन्य ठिकानों और प्रमुख धार्मिक स्थलों की जानकारी जुटाना था। एटीएस को पता चला है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स गूगल लोकेशन साझा करते थे, जिसके बाद शाकिब और उसके साथी उन स्थानों पर जाकर वीडियो रिकॉर्ड करते और वापस भेज देते थे। इस काम के बदले उन्हें विदेशी माध्यमों से भुगतान किया जाता था। दुबई कनेक्शन इस पूरे खेल की कड़ियां केवल पाकिस्तान तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इसका एक बड़ा सिरा दुबई से भी जुड़ा है। जांच में आकिब नाम के एक व्यक्ति की भूमिका सामने आई है, जो दुबई में बैठकर शाकिब और पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच सेतु का काम कर रहा था। आकिब इंस्टाग्राम और टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल कर युवाओं को कट्टरपंथी बनाने का काम करता था। वह हथियारों (विशेषकर AK-47) के वीडियो और भड़काऊ कंटेंट साझा करता था ताकि युवाओं के मन में हिंसा के प्रति आकर्षण पैदा किया जा सके। एडीजी (कानून एवं व्यवस्था) अमिताभ यश का कहना है कि शाकिब सीधे तौर पर दुबई स्थित आकिब के संपर्क में था। आकिब के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। यूपी में पनपते हाइब्रिड मॉड्यूल का पुराना पैटर्न जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि पिछले कुछ महीनों में उत्तर प्रदेश में ऐसे कई मॉड्यूल सामने आए हैं। यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है जिसे हाइब्रिड टेररिज्म कहा जा सकता है, जहां अपराधी अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान छिपाकर वार करते हैं। हाल ही में एटीएस ने बीड़ीएस (BDS) छात्र हारिस अली को गिरफ्तार किया था, जो आईएसआईएस (ISIS) की विचारधारा फैला रहा था और टेलीग्राम, डिस्कॉर्ड जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप के जरिए पाकिस्तान से निर्देश ले रहा था।

सीक्रेट मिशन,24 घंटे तक दुश्मन की जमीन पर पिस्तौल लेकर छिपा रहा अमेरिकी जांबाज, सैकड़ों सैनिकों ने बचाई जान

वॉशिंगटन अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशंस फोर्सेज ने शनिवार की रात एक जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन में ईरान में फंसे अपने एक लापता एयरफोर्स ऑफिसर को ईरान में घुसकर रेस्क्यू कर लिया.  इस मिशन के दौरान रेस्क्यू टीम का कोई भी सदस्य हताहत नहीं हुआ और घायल ऑफिसर को इलाज के लिए सीधे कुवैत भेज दिया गया है. दरअसल, शुक्रवार को ईरान ने अमेरिका के F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को मार गिराया था. जेट गिरने के बाद दोनों क्रू मेंबर्स ने इजेक्ट कर लिया था. पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स ऑफिसर दुश्मन के इलाके में फंस गया और लगभग एक दिन तक सिर्फ एक पिस्तौल के साथ छिपा रहा. जबकि ईरानी सेना ने उसे ढूंढने के लिए पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी थी और स्थानीय लोगों को इनाम का लालच भी दिया था. हालांकि, जिस इलाके में F-15E जेट गिरा वहां सरकार के खिलाफ काफी विरोध है, इसी वजह से ऑफिसर को छिपने में मदद मिली. उधर, ईरान में फंसे ऑफिसर तक पहुंचने के लिए अमेरिकी सेना का अधिकारियों में होड़ लगी थी, जिसमें अंततः सैकड़ों अमेरिकी कमांडो ने बाजी मार ली. 'कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद…' न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस ट्रूप्स शामिल थे. साथ में दर्जनों अमेरिकी युद्ध विमान, हेलिकॉप्टर, साइबर, स्पेस और अन्य इंटेलिजेंस क्षमताओं का इस्तेमाल किया गया. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान में फंसे अमेरिकी ऑफिसर एक बीकन और सुरक्षित कम्युनिकेशन डिवाइस की मदद से रेस्क्यू टीम के संपर्क में था. जब अमेरिकी कमांडो ऑफिसर के करीब पहुंचे तो वहां जबरदस्त गोलीबारी शुरू हो गई. अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ऑफिसर की लोकेशन के पास बढ़ रहे ईरानी काफिलों पर बमबारी की, ताकि उन्हें दूर रखा जा सके. इस मिशन में दर्जनों युद्धक विमानों, हेलीकॉप्टरों और साइबर व इंटेलिजेंस क्षमताओं का इस्तेमाल किया गया. सीआईए ने भी 'अनकन्वेंशनल असिस्टेड रिकवरी' के जरिए नागरिकों से संपर्क साधने में अहम भूमिका निभाई. 'बेस में फंसे अमेरिकी ट्रांसपोर्ट विमान' रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि इस ऑपरेशन के आखिरी पलों में रेस्क्यू टीम को एक तकनीकी दिक्कत का भी सामने करना पड़ा, जब कमांडो और ऑफिसर को ले जाने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान ईरान के एक रिमोट बेस पर फंस गए. कमांडरों ने तुरंत फैसला लेते हुए तीन नए विमान वहां भेजे. पुराने दोनों खराब विमानों को बम से उड़ा दिया गया, ताकि वो ईरान के हाथ न लग सकें. इसके बाद सभी सैन्य कर्मियों और बचाए गए ऑफिसर को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी ने इस रेस्क्यू को इतिहास के सबसे चुनौतीपूर्ण और जटिल ऑपरेशंस में से एक बताया है. सैकड़ों सैनिकों की भागीदारी और दुश्मन की जमीन पर इस तरह की कार्रवाई ने अमेरिकी सैन्य ताकत का लोहा मनवाया है. फिलहाल घायल ऑफिसर की हालत स्थिर है और वह कुवैत में विशेषज्ञों की निगरानी में है. इस सफल मिशन ने अमेरिकी खेमे में नई ऊर्जा भर दी है.