samacharsecretary.com

स्वदेशी तकनीक का कमाल, एनएमएल के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोने का विशेष गोलाकार पाउडर

 जमशेदपुर झारखंड के लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल ) ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार पाउडर तैयार करने में सफलता पाई है. यह पाउडर विशेष रूप से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ( थ्री डी प्रिंटिंग) के लिए विकसित किया गया है. उक्त बातें सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने शनिवार को साझा की. वे बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में इंजीनियर्स संस्था (भारत) जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. के. गोपाला ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की सफलता पूरी तरह से कच्चे माल यानी मेटल पाउडर की गुणवत्ता पर टिकी होती है. एनएमएल की ‘विशेष गैस एटोमाइजर सुविधा’ का उपयोग कर तैयार किया गया 22 कैरेट सोने का यह पाउडर स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है. इससे भविष्य में आभूषण निर्माण और अन्य जटिल तकनीकी क्षेत्रों में थ्री डी प्रिंटिंग के प्रयोग को एक नयी दिशा मिलेगी. इससे पूर्व कच्चे माल के संश्लेषण से उन्नत उत्पाद विकास एवं विशेषता निर्धारण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मनोस डे (ऑफिस हेड, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) और विशिष्ट अतिथि विनीत कुमार साह (चीफ लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं चेयरमैन, आईईआई) ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को सीधे उद्योगों से जोड़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. लैब के रिसर्च का उपयोग फैक्ट्रियों में हो: मनोस डे मुख्य अतिथि मनोस डे ने अपने संबोधन में कच्चे माल के विकास और उन्नत उत्पाद निर्माण के बीच समन्वय को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि लैब में होने वाले शोध तभी सार्थक हैं. जब वे कारखानों तक पहुंचे. उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में लागत और ऊर्जा की बचत पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को नयी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया. जटिल डिजाइनों के लिए थ्री डी प्रिंटिंग अनिवार्य: विनीत कुमार साह संस्थान के चेयरमैन विनीत कुमार साह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में सटीक फिनिशिंग और जटिल ढांचों के निर्माण के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मांग बढ़ी है. इस तकनीक के माध्यम से ऐसी ग्रेडेड सामग्री तैयार की जा सकती है. जो पारंपरिक निर्माण विधियों से संभव नहीं थी. स्टील की आंतरिक संरचना पर शोध: डॉ. मोनालिसा मंडल एनआईटी जमशेदपुर की डॉ. मोनालिसा मंडल ने एसएस 420 मार्टेंसिटिक स्टील पर अपना शोध प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि डीएमएलएस तकनीक से उत्पाद बनाते समय यदि मानकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो उत्पादों की मजबूती और उनकी सूक्ष्म संरचना को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. बढ़ेगा जंग के प्रति प्रतिरोध: कौशल किशोर टाटा स्टील आरएंडडी के प्रिंसिपल रिसर्चर कौशल किशोर ने वायर आर्क एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर व्याख्यान दिया. उन्होंने 316 एल स्टेनलेस स्टील की सूक्ष्म संरचना में होने वाले बदलावों और उसके जंग प्रतिरोध पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी. उच्च तापमान तकनीक और सिरेमिक उत्पाद: डॉ. राम कृष्ण एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. राम कृष्ण ने उच्च तापमान वाले वातावरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की. उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिरेमिक उत्पादों के विकास और उनके विशेषता निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया. कार्यक्रम का संचालन जुस्को की सुकन्या दास ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस डी. भट्टाचार्जी ने किया. पूरे कार्यक्रम के सफल समन्वय में कृष्णेंदु शॉ की अहम भूमिका रही. संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच एक प्रभावी साझा मंच तैयार होता है.

पंजाब में शराब ठेकेदारों को राहत, लाइसेंस फीस में 15% तक की कटौती

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब में आबकारी विभाग द्वारा ग्रुपों की नीलामी प्रक्रिया के बावजूद अभी भी 10 एक्साइज (आबकारी) ग्रुप अलॉट होने से रह गए हैं। महंगे रेट और कम मुनाफे के कारण ठेकेदार इन ग्रुपों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए लाइसेंस फीस में कुल 15 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, ताकि लंबित ग्रुपों को जल्द से जल्द अलॉट किया जा सके। आवेदन करने की सीमा तय ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब 4 अप्रैल को दोपहर 4 बजे तक ई-टैंडर के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम समय सीमा तय की है। इसके तहत न्यू चंडीगढ़, भारतगढ़ (रोपड़), अमृतसर सिटी सैंटर, टांडा (होशियारपुर-2), दसूया (होशियारपुर-2), बी.एम.सी. चौक (जालंधर ईस्ट), फगवाड़ा-2, बस स्टैंड (पठानकोट) और फिरोजपुर कैंट सहित कई प्रमुख क्षेत्र अभी भी लंबित ग्रुपों में शामिल हैं, जिन्हें विभाग जल्द अलॉट करना चाहता है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वे नए ग्रुप लेने से हिचकिचा रहे हैं।  उनका यह भी मानना है कि यदि अंग्रेजी शराब की बिक्री और वितरण पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जाए, तो बाजार में चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा सकता है और कारोबार में स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नीतियों में और सुधार किए जाएं, ताकि ठेकेदारों का भरोसा बहाल हो सके और आबकारी विभाग को भी राजस्व का नुकसान न उठाना पड़े।  …तो  राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव  फिलहाल विभाग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद यह देखना बाकी है कि 4 अप्रैल तक इन लंबित ग्रुपों के लिए कितने आवेदन आते हैं और स्थिति कितनी सुधरती है। इसके अलावा आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लाइसैंस फीस में की गई 15 प्रतिशत की कटौती से ठेकेदारों को कुछ राहत मिलेगी और ई-टैंडर प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे और राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सभी ग्रुप समय पर अलॉट हो सकें और सरकार के राजस्व लक्ष्य पूरे किए जा सकें।  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए।  

प्रीमियम शराब और बीयर पर पाबंदी, मध्य प्रदेश में बढ़ा शराब संकट

भोपाल. मध्य प्रदेश में बीयर का संकट बढ़ता जा रहा है। बीयर का सीमित स्टॉक होने की वजह से आबकारी विभाग ने अन्य राज्यों में बीयर के निर्यात पर रोक लगा दी है। शराब के प्रीमियम ब्रांड का स्टॉक भी सीमित है। इसके साथ ही प्रदेश में नई शराब दुकानों के संचालन के शुरुआती दिनों में ही सप्लाई और बिलिंग व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ठेकेदारों का कहना है कि प्रीमियम ब्रांड्स के बिना दुकान चलाना लगभग असंभव है, लेकिन इन कंपनियों के लोकप्रिय ब्रांड्स की बिलिंग ही शुरू नहीं हो पाई है। ठेकेदारों का आरोप है कि आबकारी विभाग समय पर माल उपलब्ध नहीं करा पा रहा है, जिसके कारण कई दुकानों में शुरुआती दिनों से ही बेचने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद नहीं है। ऐसे में ठेकेदारों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब दुकान में माल ही नहीं होगा, तो वे करोड़ों रुपये की आबकारी ड्यूटी कैसे जमा करेंगे। स्थिति यह है कि आठ से 10 दिन केवल स्टॉक उपलब्ध कराने में ही निकल सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु में बीयर सीजन का पीक पीरियड होता है। यदि इस दौरान दुकानों पर बीयर और प्रीमियम ब्रांड्स उपलब्ध नहीं हुए, तो ठेकेदारों को शुरुआती चरण में ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। सूत्रों के मुताबिक, यही एक बड़ा कारण है कि कई स्थानों पर ठेके उठाने को लेकर उत्साह कम दिखाई दे रहा है। कारोबारियों का कहना है कि सप्लाई, बिलिंग और ब्रांड उपलब्धता जैसे बुनियादी मुद्दे ठेका आवंटन से पहले ही अंतिम रूप से तय कर लिए जाने चाहिए थे।

एमपी में ई-बसों का विस्तार: इंदौर से रतलाम-बुरहानपुर तक सफर, 64 EV स्टेशन तैयार होंगे

इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, सेंधवा, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, धार-मांडू और महेश्वर के लिए शुरू होंगी इलेक्ट्रिक बसें इंदौर. बीते दौर के मप्र परिवहन निगम (रोडवेज) की तर्ज पर एआइसीटीएस का विस्तार होगा। इंदौर में पहले सिटी बस से शुरुआत करने वाली कंपनी अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (एआईसीटीएसएल) का विस्तार पूरे संभाग में होगा। यह कंपनी मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवायपीआईएल) की सहायक कंपनी के रूप में काम करेगी। इसका पुनर्गठन करते हुए इंदौर संभाग में विस्तार किया जाएगा। शनिवार को एआईसीटीएसएल की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। एआईसीटीएसएल को नई इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा भी मिला। 26 नई इलेक्ट्रिक बसें जल्द शुरू होंगी। इनका संचालन इंदौर से जुड़े मालवा-निमाड़ के शहरों तक किया जाएगा। इसी के साथ बोर्ड बैठक में नए डिपो बनाने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई। वीसी के जरिए हुई बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से हुई बैठक की अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनीष सिंह ने की। बोर्ड बैठक में वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कलेक्टर एवं कंपनी निदेशक शिवम वर्मा एवं संभाग के जिलों के कलेक्टर एवं संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में नगर निगम आयुक्त एवं कंपनी निदेशक क्षितिज सिंघल, स्मार्ट सिटी कंपनी के सीईओ अर्थ जैन, आइडीए बोर्ड के सीईओ एवं कंपनी निदेशक डॉ. परीक्षित झाड़े व अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बस सेवाओं का विस्तार बैठक में सार्वजनिक बस परिवहन को सुदृढ़ एवं विस्तारित करने की दिशा में कंपनी का इंदौर संभाग के सभी जिलों में औपचारिक पुनर्गठन किया गया। संभाग में विस्तार के साथ ही कंपनी का लक्ष्य संभाग में बस सेवाओं का व्यापक विस्तार भी करना है। इलेक्ट्रिक बस सेवा इंदौर से उज्जैन, भोपाल, खरगोन, सेंधवा, खंडवा, बुरहानपुर, रतलाम, धार-मांडू एवं महेश्वर के लिए शुरू की जाएगी। बोर्ड ने इस सेवा को अतिशीघ्र आरंभ करने हेतु निर्देशित किया। बताया गया कि ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की पीए ई-बस सेवा के अंतर्गत इंदौर को प्रथम चरण में 150 इलेक्ट्रिक बसें प्राप्त होने जा रही हैं। इन बसों के संचालन हेतु आइएसबीसी नायता मुंडला एवं देवास नाका पर दो इलेक्ट्रिक बस डिपो का निर्माण शुरू कर दिया गया है। बोर्ड द्वारा इंदौर शहर में 500 इलेक्ट्रिक साइकिलों के संचालन हेतु निविदा प्रक्रिया की स्वीकृति प्रदान की गई। ईवी चार्जिंग स्टेशन बनेंगे यह परियोजना यात्रियों को सुविधाजनक लास्ट माइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के साथ-साथ कंपनी को वित्तीय आय भी प्रदान करेगी। बोर्ड बैठक में पीएम ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत इंदौर शहर में सार्वजनिक उपयोग हेतु 64 ईवी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बोर्ड द्वारा इस संबंध में प्रस्ताव प्रेषित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई। सिटी बस डिपो में सीएनजी ईंधन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु अवंतिका गैस लिमिटेड के साथ संपादित अनुबंध एवं प्रस्ताव को बोर्ड ने स्वीकृति प्रदान की।

मलबे में फंसे पिता को निकालने बेटे ने लगाया प्रयास, अनूपपुर में NDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

अनूपपुर. अनूपपुर जिले के कोतमा नगर पालिका क्षेत्र में शनिवार शाम करीब 5:36 बजे एक बड़ा हादसा हो गया। यहां स्थित एक लॉज की पुरानी इमारत अचानक जमींदोज हो गई। चश्मदीदों के मुताबिक, बगल में नए निर्माण के लिए खुदाई चल रही थी, तभी दीवार भरभराकर गिर पड़ी। पास की दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज में लोग अपनी जान बचाने के लिए भागते हुए नजर आ रहे हैं। इमारत गिरते ही चारों ओर धूल का गुबार छा गया। रेस्क्यू में जुटा रहा बेटा, मलबे में दबे थे पिता हादसे में मरने वालों में हरिदीन यादव (50 वर्ष) और रामकृपाल यादव (55 वर्ष) शामिल हैं। हृदयविदारक बात यह है कि नगर पालिका का जेसीबी चालक हरपाल यादव घटनास्थल पर मलबा हटाने का काम कर रहा था। करीब 3 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे अस्पताल से फोन आया कि जिस मलबे को वह हटा रहा है, उसी के नीचे दबने से उसके पिता हरिदीन और मामा की जान चली गई है। मृतक हरिदीन वहां टाइल्स लगाने का काम कर रहे थे। बिना अनुमति चल रहा था निर्माण कार्य प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, रामनरेश गर्ग द्वारा किए जा रहे नए निर्माण कार्य के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। लॉज के चौथे फ्लोर पर भी पाइप फिटिंग और टाइल्स का काम चल रहा था, जिसके कारण वहां कोई यात्री नहीं रुका था, अन्यथा हताहतों की संख्या और बढ़ सकती थी। प्रशासनिक मुस्तैदी और मुआवजा हादसे की खबर मिलते ही प्रभारी मंत्री दिलीप अहिरवार, राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल, कमिश्नर सुरभि गुप्ता और कलेक्टर हर्षल पंचोली पूरी रात मौके पर डटे रहे। भिलाई और बनारस से आई एनडीआरएफ की टीमें स्निफर डॉग्स की मदद से मलबे में अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं। कलेक्टर ने बताया कि पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा मुख्यमंत्री द्वारा की जाएगी, वहीं प्रभारी मंत्री ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

कोरापुट से बस्तर तक कांपी धरती, भूकंप के झटकों का वीडियो सामने आया

जगदलपुर. छत्तीसगढ़ के जगदलपुर/बस्तर संभाग में बीती रात उस वक्त अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। जगदलपुर समेत आसपास के कई इलाकों में जमीन हिलने से लोग घबरा गए और एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि या बड़े नुकसान की सूचना नहीं है। नैशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, भूकंप रात 11:31 बजे आया। इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.4 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में जमीन से लगभग 5 किलोमीटर नीचे स्थित था। कुछ सेकंड की दहशत, फिर सामान्य हुआ माहौल प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, झटके कुछ सेकंड तक ही महसूस हुए, लेकिन अचानक जमीन हिलने से लोग घबरा गए। कई लोग तुरंत घरों से बाहर निकल आए और खुले स्थानों पर खड़े हो गए। झटके थमने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई। CCTV में कैद हुई घटना शहर के कई इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के दौरान की हलचल रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि झटकों के दौरान पंखे और अन्य सामान हिलते नजर आए, जिससे लोगों में डर का माहौल बन गया। कम जोखिम वाले क्षेत्र में भूकंप से बढ़ी चिंता बस्तर क्षेत्र को अब तक भूकंपीय दृष्टि से अपेक्षाकृत सुरक्षित और कम संवेदनशील माना जाता रहा है, जहां बड़े या बार-बार भूकंप आने की घटनाएं सामान्यतः दर्ज नहीं होतीं। ऐसे में अचानक झटकों का महसूस होना न केवल आम लोगों के लिए डर और आशंका का कारण बना है, बल्कि विशेषज्ञों और भूविज्ञानियों के लिए भी यह एक गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या क्षेत्र की भूगर्भीय संरचना में कोई सूक्ष्म बदलाव हो रहा है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जाता रहा। भूविज्ञानियों का मानना है कि भले ही यह भूकंप तीव्रता में मध्यम था, लेकिन इसका असर और स्थान महत्वपूर्ण है, इसलिए इस तरह की घटनाओं का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी हो जाता है। भविष्य में संभावित जोखिमों का आकलन करने, भूकंपीय गतिविधियों के पैटर्न को समझने और समय रहते आवश्यक सतर्कता बरतने के लिए इस क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग और रिसर्च की जरूरत महसूस की जा रही है। प्रशासन सतर्क, स्थिति पर नजर भूकंप के बाद स्थानीय प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों ने बताया कि किसी भी तरह की आपात स्थिति से निपटने के लिए टीमों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन और विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि भूकंप के दौरान घबराएं नहीं, बल्कि सुरक्षित स्थानों पर जाएं। साथ ही भविष्य में इस तरह की किसी भी घटना के लिए जागरूक और तैयार रहने की सलाह दी गई है। भूवैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बस्तर जैसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र में भूकंप के झटके महसूस होना वैज्ञानिकों के लिए अध्ययन का विषय बन गया है। विशेषज्ञ अब इस क्षेत्र की भूगर्भीय गतिविधियों पर और गहन नजर रखेंगे, ताकि भविष्य में संभावित जोखिम का आकलन किया जा सके।

होर्मुज जलडमरूमध्य संकट,भारत में ईंधन की सप्लाई पर्याप्त, अफवाहों और जमाखोरी पर कड़ा प्रहार

नई दिल्ली   सरकार ने एक बार फिर से देश के नागरिकों से पेट्रोल-डीजल या एलपीजी की पैनिक बायिंग यानी घबराहट में खरीदारी न करने की अपील की है. जारी बयान में सरकार ने कहा है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के बंद होने से जुड़ी रुकावटों के बावजूद देश में ईंधन की सप्लाई पर्याप्त और सुचारू बनी हुई है. इसमें भरोसा दिलाते हुए कहा गया है कि पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स से लेकर कुकिंग गैस तक बिना रुकावट के मिल रही है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को सरकार की ओर से नागरिकों से पेट्रोल, डीजल और LPG की घबराहट में खरीदारी करने से बचने की अपील की गई. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सरकार पेट्रोलियम उत्पादों और कुकिंग गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है. पैनिक बायिंग से बचने की अपील करने के साथ ही मंत्रालय की ओर से साफ हिदायत दी गई कि सिर्फ आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और ऊर्जा बचाएं. बयान में साफ कहा गया कि सरकार ने घरेलू LPG और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) की सप्लाई को खासतौर पर घरों, अस्पतालों और अन्य जरूरी सेवाओं के लिए प्राथमिकता पर रखा है. इसके अलावा रिफाइनरी प्रोडक्शन बढ़ाकर डिमांड को मैनेज करने के लिए उपाय लागू किए गए हैं. इनमें LPG रिफिलिंग के बीच के समय को बढ़ाना भी शामिल है. जमाखोरी पर एक्शन जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल-गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ लगातार एक्शन जारी है. इसके तहत 3,700 से अधिक छापे मारे गए हैं और एलपीजी डिस्ट्रिब्यूटर्स को लगभग 1,000 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं. इसके अलावा अब तक 27 डीलरों को निलंबित किया जा चुका है. मंत्रालय की ओर से आंकड़े पेश करते हुए कहा गया है कि जियो-पॉलिटिकल स्थिति के कारण सप्लाई पर दबाव है, लेकिन इसके बावजूद सेंटर्स पर एलपीजी की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं की गई है. बीते शुक्रवार को करीब 51 लाख LPG Cylinder बांटे गए, जिनमें से ऑनलाइन बुकिंग कुल डिमांड का 95% था. 'पेट्रोल पंप पूरी तरह से भरे हैं' अन्य कदमों का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई को होर्मुज संकट से पहले के स्तर के 70% तक सीमित कर दिया गया है. इसके अलावा डिमांड को पूरा करने के लिए केरोसिन और कोयले जैसे वैकल्पिक फ्यूल ऑप्शन का इस्तेमाल हो रहा है. इसके साथ ही मंत्रालय ने आगे कहा कि सभी रिफाइनरियां पर्याप्त कच्चे तेल के भंडार के साथ काम कर रही हैं, और देश भर के पेट्रोल पंप पूरी तरह से भरे हुए हैं.  

अब मिलेगा ज्यादा मुआवजा: सरकारी कर्मचारियों के परिजनों की अनुग्रह राशि ढाई गुना बढ़ी

भोपाल. अब तक सेवाकाल के दौरान किसी शासकीय सेवक की असामयिक मृत्यु होने पर उनके परिजनों को मिलने वाली 'अनुग्रह राशि' (Ex-gratia) की अधिकतम सीमा मात्र 50 हजार रुपये थी। बढ़ती महंगाई और आधुनिक दौर की जरूरतों के सामने यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान थी। लेकिन अब, मध्यप्रदेश सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए इस सीमा को ढाई गुना बढ़ाकर 1 लाख 25 हजार रुपये कर दिया है। वित्त विभाग के नए निर्देशों के अनुसार, अब मृतक कर्मचारी के परिवार को उनके छह माह के वेतन के बराबर राशि दी जाएगी। इसमें 'वेतन पुनरीक्षण नियम 2017' के मानकों को आधार बनाया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब अनुग्रह राशि केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ठोस आर्थिक सहायता होगी। आदेश 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी यह नया प्रावधान 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी होने जा रहा है। यानी इस तारीख या इसके बाद आने वाले सभी दुखद प्रकरणों में पीड़ित परिवारों को सवा लाख रुपये तक की मदद तत्काल मिल सकेगी। यह कदम उन छोटे कर्मचारियों (जैसे चतुर्थ श्रेणी) के लिए जीवनदान जैसा है, जिनके पास बचत के नाम पर बहुत कम संसाधन होते हैं। सवा लाख रुपये की यह राशि शायद किसी की कमी को पूरा न कर सके, लेकिन अंतिम संस्कार, तात्कालिक बिलों और बच्चों की शिक्षा जैसे शुरुआती झटकों को सहने में यह एक मजबूत लाठी का काम जरूर करेगी।

मावां-धीयां सत्कार योजना: अप्रैल से महिलाएं उठाएंगी लाभ, सरकार ने जारी की अधिसूचना, पंजीकरण निशुल्क

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना की अधिसूचना जारी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बजट पेश करते समय वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि योजना का लाभ महिलाओं को 2 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा। पंजीकरण सेवा केंद्रों पर निःशुल्क होगा।  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह आप सरकार की गारंटी थी, जिसे पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं (सरकारी कर्मचारियों, पूर्व विधायकों, सांसदों तथा पेंशनभोगियों को छोड़कर) को इस योजना का लाभ मिलेगा। योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,100 रुपये प्रति माह और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सीएम मान ने कहा कि यह एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना है, इसलिए राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने अपील की कि जिन महिलाओं के बैंक खाते नहीं हैं, वे जल्द से जल्द खाता खुलवाएं। सीएम ने दावा किया कि प्रदेश की करीब 97 प्रतिशत महिलाएं (लगभग 1.10 करोड़) इस योजना के दायरे में आएंगी। क्या है यह योजना? पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' (मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना) की घोषणा की थी। इसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये मिलेंगे। इस महत्वकांक्षी योजना के लिए 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है। किन्हें नहीं मिलेगा इसका लाभ? बता दें कि 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' (मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना) में केवल वर्तमान या पूर्व सरकारी कर्मचारी, पूर्व और वर्तमान सांसद/विधायक और आयकर दाताओं को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं इस योजना का लाभ ले सकती हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत वयस्क महिलाएं इसके दायरे में आएंगी। कैसे करें आवेदन? इस योजना के लिए 13 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। पंजाब सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया को काफी सरल और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के लिए किन-किन माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। आइए जानते हैं। कौन-कौन से डॉक्यूमेंट की पड़ेगी जरूरत? 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' के लिए रजिस्ट्रेशन करने से पहले आपके पास पंजाब का निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र, इनकम सर्टिफिकेट और राशन कार्ड जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ सकती है।   महिलाओं की आर्थिक भलाई पर जोर सरकार ने 'मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना' को लागू करने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। 2 अप्रैल के नोटिफिकेशन के अनुसार, मौजूदा सोशल सिक्योरिटी पेंशन पाने वाले भी इस स्कीम के तहत उन्हें पहले से मिल रही सोशल सिक्योरिटी पेंशन के अलावा पूरे फाइनेंशियल फायदे पाने के हकदार होंगे। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस स्कीम का मकसद पूरे राज्य में महिलाओं की फाइनेंशियल सिक्योरिटी और आजादी को मजबूत करना, घरेलू भलाई में सुधार करना, घरेलू फाइनेंशियल फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और पूरे पंजाब में जेंडर इक्विटी को बढ़ावा देना है। सभी पात्र महिलाओं की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए और उनके पास वैलिड आधार और वोटर आईडी कार्ड होने चाहिए, साथ ही वे पंजाब के रजिस्टर्ड रेजिडेंट वोटर होने चाहिए। इन लोगों को नहीं मिलेगा फायदा     पंजाब सरकार, या केंद्र सरकार, या देश के किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार की रेगुलर या रिटायर्ड कर्मचारी।     राज्य या केंद्र सरकार के तहत बने किसी भी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, स्टैच्युटरी बोर्ड, कॉर्पोरेशन, कमीशन, कमेटी, डायरेक्टरेट, कोऑपरेटिव इंस्टीट्यूशन, या ट्रिब्यूनल से पेंशन पाने और पाने वाली रेगुलर या रिटायर्ड कर्मचारी।     जिन महिलाओं ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में इनकम टैक्स दिया है, मौजूदा या पूर्व मंत्री, सांसद या विधायक और मौजूदा मंत्री, सांसद या विधायक के पति/पत्नी को भी बाहर रखा जाएगा। महिला बाल विकास विभाग लागू करेगा स्कीम नोटिफिकेशन में कहा गया है कि फाइनेंशियल फायदे लाभार्थियों को हाई-लेवल इम्प्लीमेंटेशन कमिटी द्वारा समय-समय पर तय किए गए शेड्यूल और फ्रीक्वेंसी के अनुसार जारी किए जाएंगे। फाइनेंशियल मदद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। इसमें कहा गया है कि पैसे बांटने के तरीके में अगर कोई बदलाव या मॉडिफिकेशन होता है, तो वह मुख्यमंत्री की मंजूरी से किया जा सकता है। स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन सभी तय सेंटर पर फ्री होगा, और किसी भी लाभार्थी से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह स्कीम सोशल सिक्योरिटी और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लागू की जाएगी।

समंदर में तनाव: जहाज रोकने पर चीन और अमेरिका के बीच हुआ आमना-सामना

वाशिंगटन दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें अमेरिका और चीन, समंदर में भी आमने-सामने आ गई हैं. ताजा विवाद पनामा झंडे वाले जहाजों को लेकर शुरू हुआ है, जिसने वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर नए खतरे खड़े कर दिए हैं. अमेरिका ने चीन पर आरोप लगाया है कि वह पनामा-फ्लैग वाले जहाजों को अपने बंदरगाहों पर रोक रहा है और उन्हें जानबूझकर देरी कर रहा है।  अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे "परेशान" या दबाव बनाने की रणनीति बताया. उन्होंने कहा कि चीन के इस कदम से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है, लागत बढ़ रही है और अंतरराष्ट्रीय ट्रेड सिस्टम पर भरोसा कम हो रहा है।  आंकड़े भी इस विवाद को और गंभीर बनाते हैं. एपी की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में चीन के बंदरगाहों पर जिन 124 जहाजों को जांच के नाम पर रोका गया, उनमें से 92 यानी करीब 75% पनामा के झंडे वाले जहाज थे. ये जहाज एक दिन से लेकर 10 दिन तक रोके गए. इससे पहले जनवरी और फरवरी में यह आंकड़ा काफी कम था, जो अब अचानक बढ़ गया है।  पनामा नहर से जुड़ा पूरा विवाद इस पूरे विवाद की जड़ पनामा नहर से जुड़ी है. पनामा कनाल दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से भारी मात्रा में वैश्विक व्यापार गुजरता है. हाल ही में पनामा की सुप्रीम कोर्ट ने एक हांगकांग आधारित कंपनी के नियंत्रण वाले दो बड़े पोर्ट टर्मिनल्स का कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिया था. इसके बाद पनामा ने इन पोर्ट्स पर दोबारा नियंत्रण हासिल कर लिया।  अमेरिका लंबे समय से यह आरोप लगाता रहा है कि चीन इस नहर के जरिए अपना प्रभाव बढ़ा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो यहां तक कह चुके हैं कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका पनामा नहर पर फिर से नियंत्रण हासिल कर सकता है. ऐसे में चीन द्वारा पनामा-फ्लैग जहाजों को रोकना इस बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा माना जा रहा है।  चीन ने अमेरिका पर पनामा पर कब्जा करने का लगाया आरोप चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. वॉशिंगटन में चीनी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका बेबुनियाद आरोप लगा रहा है और असल में खुद पनामा नहर पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है. पनामा सरकार ने इस विवाद को शांत करने की कोशिश की है. विदेश मंत्री ने माना कि जहाजों को रोके जाने के मामले बढ़े हैं, लेकिन इसे सामान्य समुद्री प्रक्रिया का हिस्सा बताया. उन्होंने कहा कि पनामा चीन के साथ सम्मानजनक संबंध बनाए रखना चाहता है।  लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि मामला इतना साधारण नहीं है. रिपोर्ट के मुताबिक, अगर चीन पनामा के झंडे वाले जहाजों को लगातार निशाना बनाता है, तो इससे पनामा की वैश्विक शिपिंग इंडस्ट्री पर बड़ा असर पड़ सकता है. पनामा दुनिया में जहाज रजिस्ट्रेशन का एक बड़ा केंद्र है और इससे उसे हर साल करीब 100 मिलियन डॉलर की कमाई होती है।