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निशातपुरा रेलवे स्टेशन का उद्घाटन जल्द, भोपाल को मिलेगा नया पांचवां रेलवे स्टेशन

 भोपाल  भोपाल मेन स्टेशन के साथ ही रानी कमलापति, संतनगर, मिसरोद के अलावा निशातपुरा के रूप में राजधानी भोपाल को जल्द ही पांचवा रेलवे स्टेशन मिलने जा रहा है। रेल मंत्रालय ने निशातपुरा रेलवे स्टेशन कमीशनिंग प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। बुनियादी सुविधाएं पूरी होने के साथ ही इसे ट्रेनों के हॉल्ट और यात्रियों के आवागमन के लिए खोल दिया जाएगा। निशातपुरा रेलवे स्टेशन पर मालवा एक्सप्रेस सहित कई अन्य ट्रेनों को हॉल्ट मिलेगा जिससे भोपाल रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों का ट्रैफिक वर्तमान के मुकाबले कम किया जा सकेगा। भोपाल स्टेशन पर अभी प्लेटफार्म उपलब्ध नहीं होने के चलते कई यात्री ट्रेन प्लेटफार्म खाली होने के इंतजार में आउटर पर खड़ी करनी पड़ती हैं। भोपाल रेल मंडल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए डीआरएम पंकज त्यागी एवं सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रेल मंडल में यात्री सुविधाओं में इजाफा करने के लिए नए प्रोजेक्ट लागू किए हैं। यात्री सुविधाओं में वृद्धि करने के लिए भोपाल रेल मंडल द्वारा माल परिवहन, टिकट चेकिंग अभियान, स्पेशल ट्रेनों का संचालन कर आमदनी में 14 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है। भोपाल रेलवे को वित्तीय 2025-26 में 896.38 करोड रुपए की आय अर्जित हुई है। इस राशि का इस्तेमाल यात्री सुविधाओं के एक्सटेंशन में किया जाएगा। इन ट्रेनों को निशातपुरा स्टेशन पर मिलेगा ठहराव डॉ. आंबेडकर नगर-श्रीमाता वैष्णो देवी कटरा एक्सप्रेस। इंदौर-पटना-इंदौर (शनिवार/सोमवार) साप्ताहिक एक्सप्रेस। इंदौर-पटना-इंदौर (सोमवार, बुधवार/बुधवार,शुक्रवार) द्वि-साप्ताहिक एक्सप्रेस। डा.आंबेडकर नगर-प्रयागराज जंक्शन-डा. आंबेडकर नगर एक्सप्रेस (प्रतिदिन) अहमदाबाद-पटना-अहमदाबाद (रविवार/मंगलवार) साप्ताहिक एक्सप्रेस। इंदौर-बरेली-इंदौर (गुरुवार/बुधवार) साप्ताहिक एक्सप्रेस। इंदौर-हावड़ा-इंदौर क्षिप्रा (मंगलवार, गुरुवार, शनिवार/सोमवार, गुरुवार, शनिवार) त्रि-साप्ताहिक एक्सप्रेस। भुज-शालीमार-भुज एक्सप्रेस (साप्ताहिक) यात्री सुविधाओं के एक्सटेंशन प्रोजेक्ट में भोपाल स्टेशन पर आधुनिक स्लीपिंग पॉड में फैमिली और सिंगल बेड की सुविधा को बढ़ाया जाएगा। 300 क्षमता वाला एग्जीक्यूटिव लाउंज डेवलप होगा। इंटीग्रेटेड पार्किंग सिस्टम के लिए स्टेशन के बाहर मल्टी लेवल पार्किंग भवन बनेगा। स्टेशन पर ड्रॉप एंड को फैसिलिटी की लेन बढ़ाई जाएंगी। भोपाल स्टेशन पर बनाए जा रहे सभी 6 बेस किचन और प्रीमियम ट्रेनों की मॉनिटरिंग में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का उपयोग भोपाल स्टेशन पर बनाए जा रहे सभी 6 बेस किचन और प्रीमियम ट्रेनों की मॉनिटरिंग में अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का उपयोग किया जाएगा। जो नए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, उन्हें इंटरनेट के जरिए एआइ मॉनिटरिंग से लिंक कर यह व्यवस्था बनाई जाएगी। डीआरएम पंकज त्यागी के मुताबिक रेलवे में भी अन्य विभागों की तरह एआइ बेस्ड मॉनिटरिंग लगातार बढ़ रही है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर नई टेक्नोलॉजी के 150 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। सीनियर DCM बोले – भोपाल स्टेशन का दबाव कम होगा भोपाल रेल मंडल के सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि निशातपुरा स्टेशन 2023 से तैयार किया जा रहा है और इसके अधिकतर कार्य पूरे हो चुके हैं। फिलहाल रेलवे द्वारा अंतिम परीक्षण किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि नव वर्ष में इस स्टेशन को शुरू करने की तैयारी चल रही है। जैसे ही उद्घाटन कार्यक्रम की अनुमति प्राप्त होगी, स्टेशन को ऑपरेशन में लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक मालवा एक्सप्रेस और जबलपुर–वरावल (सोमनाथ) एक्सप्रेस का हॉल्ट निशातपुरा में नोटिफाई किया जा चुका है। भोपाल स्टेशन परिचालन की दृष्टि से अत्यधिक कंजस्टेड है। ट्रेनों का लगातार रिवर्सल होना यात्रियों की यात्रा में देर कराता है। निशातपुरा शुरू होने से न सिर्फ ऑपरेशन आसान होगा, बल्कि भोपाल के भीड़भाड़ वाले हिस्से में जाने का समय भी बचेगा। यात्री सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिए कि “भविष्य में यात्रियों की मांग और लोड के आधार पर और ट्रेनों के हॉल्ट बढ़ाए जाएंगे। कई गाड़ियों के रूट और ठहराव का मूल्यांकन किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को अधिकतम सुविधा मिल सके। भोपाल स्टेशन से दो किलोमीटर दूर है निशातपुरा… भोपाल शहर में अभी 3 रेलवे स्टेशन हैं। इनमें भोपाल रेलवे स्टेशन, रानी कमलापति, संत हिरदाराम नगर शामिल हैं। निशातपुरा और मैन स्टेशन की कनेक्टिविटी बेहतर करने का भी एक प्रोजेक्ट है। संत हिरदाराम नगर स्टेशन का भी विकास कार्य चल रहा है। यह विकास कार्य पूरा होने पर यहां ट्रेनों के स्टॉपेज बढ़ेंगे। निशातपुरा NSG-3 कैटेगरी का स्टेशन होगा भोपाल में निशातपुरा स्टेशन एनएसजी-3 कैटेगरी में कर दिया गया है। इसके चलते पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम को अपग्रेड किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, निशातपुरा स्टेशन को 2017 से पहले सी कैटेगरी में रखा गया था। स्टेशनों के वर्गीकरण के मानदंडों को नवंबर 2017 से संशोधित किया गया है। नए वर्गीकरण के अनुसार, स्टेशनों के वर्गीकरण के लिए वहां आने वाले यात्रियों की संख्या को ध्यान में रखा गया है। स्टेशनों को तीन समूहों में बांटा गया है, गैर-उपनगरीय (एनएसजी), उपनगरीय (एसजी), और हाल्ट (एचजी)। इसके अलावा इन समूहों को क्रमशः 1-6, 1-3 और 1-3 ग्रेड में रखा गया है। नहीं बदलनी पड़ेगी इंजन की दिशा मालवा और ओवरनाइट एक्सप्रेस जैसी चार से ज्यादा ट्रेनें हैं, जिनके स्टॉपेज भोपाल स्टेशन पर हैं। यदि इन ट्रेनों का हाल्ट भोपाल में खत्म कर निशातपुरा तक सीमित किया जाता है, तो इनके इंजन की दिशा नहीं बदलनी पड़ेगी।इससे उन्हें सीधे इंदौर, उज्जैन और रतलाम की तरफ रवाना करना आसान हो जाएगा। वर्तमान में इन ट्रेनों के भोपाल आवागमन के दौरान इंजन की दिशा बदलने में आधे घंटे से अधिक का समय लगता है, जिसे बचाया जा सकेगा।

ट्रंप की 6 अप्रैल तक की मोहलत: ईरान के लिए नहीं, खुद के लिए थी ये समयसीमा

न्यूयॉर्क  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सरेंडर करने के लिए उसे छह अप्रैल तक की मोहलत दी थी. लेकिन, अब साफ हो चुका है कि यह मोहलत ईरान के लिए नहीं, बल्कि खुद डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य और राजनीतिक मजबूरी के लिए थी. 28 फरवरी से शुरू हुए ईरान युद्ध में अमेरिका ने भारी सैन्य तैयारी की, बड़े-बड़े नौसैनिक बेड़े भेजे और नाटो देशों से साथ आने की अपील की, लेकिन होर्मुज की खाड़ी में ईरान की पकड़ इतनी मजबूत साबित हुई कि ट्रंप की सारी रणनीति हांफती नजर आ रही है. अब ट्रंप नाटो सहयोगियों को गरियाने लगे हैं और ईरान के जवाबी हमलों में अमेरिकी फाइटर जेट व हेलीकॉप्टर मारे जा रहे हैं।  ट्रंप प्रशासन ने शुरू से ही ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई. इजराइल के साथ मिलकर शुरू किए गए हमलों में अमेरिका ने ईरान के नेतृत्व, परमाणु सुविधाओं और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया. ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नौसेना और वायु सेना तबाह हो चुकी है. लेकिन हकीकत कुछ और ही निकली. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया. इस समुद्री रास्ते से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल की ढुलाई होती है. इस रास्ते के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया है और तेल की कीमतें आसमान छूने लगीं।  पहले 48 घंटे का दिया था अल्टीमेटम ट्रंप ने शुरू में ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया कि होर्मुज खोलो वरना पावर प्लांट तबाह कर देंगे. फिर इसे बढ़ाकर छह अप्रैल कर दी. जानकारों के अनुसार यह विस्तार इसलिए किया गया क्योंकि अमेरिका को अपनी सैन्य तैयारी मजबूत करने का समय चाहिए था. इस दौरान अमेरिका ने फारस की खाडी में बड़े नौसैनिक फ्लीट भेजे, जिनमें सुपर कैरियर जैसे USS जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश भी शामिल हैं. साथ ही ट्रंप ने नाटो देशों से अपील की कि वे भी नौसेना भेजकर होर्मुज को खोलने में मदद करें।  लेकिन नाटो सहयोगी इस अपील पर खरे नहीं उतरे. यूरोपीय देशों ने साफ कहा कि वे अमेरिका-इजराइल युद्ध में सीधे शामिल नहीं होंगे. ट्रंप ने गुस्से में नाटो को कागजी शेर करार दिया और यहां तक कह दिया कि अमेरिका नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर रहा है. उन्होंने कहा कि जब अमेरिका को जरूरत पड़ी तो सहयोगी पीछे हट गए, जबकि अमेरिका सालों से उनका बचाव करता रहा. नाटो महासचिव मार्क रुट्टे ने कुछ समर्थन जताया, लेकिन ज्यादातर यूरोपीय नेता ट्रंप की मांगों से दूर रहे. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तो ट्रंप की रणनीति को अस्थिर बताया. होर्मुज में अमेरिका की स्थिति कमजोर साबित हुई. ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता के सामने अमेरिकी नौसेना भी पूरी तरह ईरान को हिला नहीं पाई. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मजबूत नियंत्रण बनाए रखा और कुछ जहाजों को ही गुजरने दिया, जो ज्यादातर ईरान से जुड़े थे. इसमें कुछ भारत और चीन के जहाज थे।  अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बनी विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज में ईरान की भौगोलिक स्थिति और एंटी-शिप मिसाइलें अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं. अब युद्ध के करीब पांच हफ्ते बाद अमेरिका को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है. एक दिन पहले ही ईरान ने अमेरिकी F-15E फाइटर जेट को मार गिराया. उस जेट का पायलट लापता है. संभवतः वह ईरान के कब्जे में है. सर्च एंड रेस्क्यू के दौरान दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलीबारी के शिकार हुए, हालांकि वे सुरक्षित लैंड कर गए. एक अन्य A-10 वारथोग विमान को भी कुवैत के ऊपर मार गिराया गया. ये घटनाएं अमेरिकी एयर पावर के दावों पर सवाल खड़े करती हैं. ईरान के आईआरजीसी ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है।  डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि युद्ध समाप्ति की ओर है और अगले 2-3 हफ्तों में अमेरिका बहुत जोरदार हमले करेगा. उन्होंने दावा किया कि ईरान की नौसेना चली गई है, एयर फोर्स तबाह हो चुकी है और मिसाइल स्टॉक खत्म हो रहा है. लेकिन जमीनी हकीकत अलग है. ईरान ने जवाबी हमलों में इजराइल और गल्फ देशों पर सैकड़ों मिसाइलें दागीं और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया. कुछ रिपोर्ट्स में अमेरिकी नौसैनिक अड्डों पर हमलों की भी बात कही गई।  यह युद्ध ट्रंप के लिए राजनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर चुनौती बन गया है. ईरान ने अमेरिका की कमजोर नस पकड़ ली है. होर्मुज की बंदी और उसके सटीक जवाबी हमले ने डोनाल्ड ट्रंप को बैकफुट पर ला दिया है. अब ट्रंप खुद को बचाने की कोशिश में लगे हैं. अगर छह अप्रैल तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई तो पावर प्लांट पर हमले की धमकी फिर दोहराई जा सकती है, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा करना और बड़ा संकट पैदा कर सकता है. कुल मिलाकर ट्रंप की मोहलत खुद उनकी हांफती रणनीति का प्रतीक बन गई है. ईरान ने दिखा दिया कि वह आसानी से दबने वाला नहीं है। 

हिना बलूच का सनसनीखेज खुलासा: पाकिस्तान की 80% आबादी गे, 20% बायसेक्सुअल

कराची  पाकिस्तानी ट्रांसजेंडर कार्यकर्ता हिना बलूच का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने पाकिस्तान में बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। वीडियो में हिना ने दावा किया है कि पाकिस्तान में कोई भी 'स्ट्रेट' (विषमलैंगिक) नहीं है और देश की पूरी आबादी या तो समलैंगिक (Gay) है या बायसेक्सुअल (Bisexual)। उनका तर्क है कि सामाजिक दबाव, धर्म और पारिवारिक सम्मान की आड़ में पाकिस्तान में लोग अपनी कामुकता को छिपाकर रखते हैं। पाकिस्तानी समाज का 'खुला रहस्य' 'क्वीर ग्लोबल' को दिए एक हालिया इंटरव्यू में हिना बलूच ने पाकिस्तानी समाज की इस स्थिति को एक 'खुला रहस्य' बताया। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि पाकिस्तान की आधे से अधिक आबादी वास्तव में गे है। वे बस इसे खुलकर कहना नहीं चाहते हैं। मुझे लगता है कि पाकिस्तान की 80 प्रतिशत आबादी गे है और बाकी 20 प्रतिशत बायसेक्सुअल है। इसलिए मुझे नहीं लगता कि कामुकता के मामले में पाकिस्तान में कोई भी 'स्ट्रेट' है।' धर्म और संस्कृति की आड़ बलूच ने तर्क दिया कि कई लोग अपनी सेक्शुअल ओरिएंटेशन (यौन रुझान) को दबाते हैं या उससे इनकार करते हैं। अपने बचपन के अनुभवों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'लोग इससे इनकार करेंगे, वे इसके बीच में धर्म को लाएंगे, वे संस्कृति का हवाला देंगे, लेकिन यह एक खुला रहस्य है।' हिना बलूच ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को शेयर करते हुए बताया कि उनका निजी संघर्ष कामुकता को लेकर कम, बल्कि अपनी जेंडर एक्सप्रेशन (लिंग अभिव्यक्ति) को लेकर ज्यादा था। उन्होंने बताया, 'मुझे हमेशा इस बात की चिंता सताती थी कि मैं कैसे लिपस्टिक लगाऊं ताकि परिवार से गालियां न सुननी पड़ें। मैं कैसे महिलाओं वाले कपड़े और गहने पहनूं जिससे मुझे मार न खानी पड़े?' समुदाय का शोषण उन्होंने पाकिस्तान के 'ख्वाजा सरा' (ट्रांसजेंडर) समुदाय द्वारा सामना की जाने वाली प्रणालीगत और सामाजिक चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस समुदाय के कई लोगों को मजबूरन भीख मांगने, शादियों में नाचने या सेक्स वर्क (वेश्यावृत्ति) जैसे सीमित और शोषणकारी कामों में धकेल दिया जाता है। इन सामाजिक बंधनों और शोषण को अस्वीकार करते हुए, बलूच ने जेंडर और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से काम करना शुरू किया। वह 'सिंध मूरत मार्च' की सह-संस्थापक बनीं और पाकिस्तान के प्रसिद्ध 'औरत मार्च' में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उन्होंने खुद को ट्रांसजेंडर और अल्पसंख्यक अधिकारों की एक मुखर पैरोकार के रूप में स्थापित किया। हिंसा और देश छोड़ना बलूच ने बताया कि एक विरोध प्रदर्शन के दौरान 'प्राइड फ्लैग' फहराने के बाद उन्हें भारी हिंसक प्रतिशोध का सामना करना पड़ा था। इसके अलावा, उन्होंने कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा कथित अपहरण और दुर्व्यवहार का भी सामना किया। इन जानलेवा और खौफनाक अनुभवों ने अंततः उन्हें पाकिस्तान छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया। बाद में, उन्होंने लंदन के प्रतिष्ठित 'SOAS विश्वविद्यालय' में स्कॉलरशिप हासिल की और अपनी सुरक्षा के लिए यूनाइटेड किंगडम (UK) में शरणार्थी का दर्जा मांगा।

आधे दाम में तैयार हुआ ‘S-400’, IAF ने थोक में ऑर्डर दिया, रूस चौंका

बेंगलुरु  रूस का एस-400 दुनिया का एक सबसे बेहतर एयर डिफेंस सिस्टम है. रूस के साथ चीन और भारत भी इस सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं. बीते साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने इसकी झांकी दिखाई थी. इसके बाद कुछ ही घंटों के भीतर पाकिस्तान घुटनों पर आ गया था. उसने सीज फायर की गुहार लगाई थी. एस-400 ने पाकिस्तान की सीमा से करीब 300 किमी भीतर जाकर उसके एक बड़े अवॉक्स सिस्टम को तबाह कर दिया था. खैर हम इस जंग की बात नहीं कर रहे है. हमारा आज का फोकस एस-400 है. भारत ने रूस से इस डिफेंस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन खरीदे है. इसमें से तीन की डिलिवरी हो गई है. चौथे की डिलिवरी लेने एयरफोर्स की टीम रूस जा चुकी है. वहीं पांचवें स्क्वाड्रन की डिलिवरी भी इसी साल होने की उम्मीद है. भारत इसके अलावा एस-400 के ही पांच और स्क्वाड्रन खरीदे की योजना पर काम रहा है।  इस बीच भारत अपना देसी एस-400 बना रहा है. इसका नाम प्रोजेक्ट कुश है. इस डिफेंस सिस्टम को डीआरडीओ विकसित कर रहा है. यह कई मामलों में एस-400 से बेहतर सिस्टम है. इसको पूरी तरह भारतीय एयरफोर्स की जरूरत के हिसाब से डेवलप किया गया है. एयरफोर्स ने पहली बार में ही इस सिस्टम के पांच स्क्वाड्रन के ऑर्डर दे दिए हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस सिस्टम की लागत एस-400 की तुलना में आधी से भी कम है. ऐसे में रूस के चेहरे पर हैरानी साफ नजर आ रही है. रूस के हथियार कारोबार के लिए एस-400 एक सबसे प्रीमियम हथियार है।  प्रोजेक्ट कुश की खासियत एस-400 की तुलना में कुश न केवल लागत में कम है बल्कि यह राष्ट्रीय संप्रभुता, सॉफ्टवेयर स्वतंत्रता और लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस के मामले में भी कहीं बेहतर है. भारत ने 2018 में रूस से एस-400 के पांच स्क्वाड्रन की डील की थी. उस वक्त उसकी लागत करीब 5.45 अरब डॉलर यानी करीब 45 हजार करोड़ रुपये थी. वहीं प्रोजेक्ट कुश के पांच स्क्वाड्रन की कीमत सिर्फ 21,700 करोड़ रुपये है. यानी यह लागत आधी से भी कम है. यह बचत न केवल सिस्टम की खरीद पर हो रही बल्कि इसमें इस्तेमाल होने वाली मिसाइलें भी काफी सस्ती हैं. यह कुश सिस्टम तीन लेयर वाली इंटरसेप्टर मिसाइलों पर आधारित हैं. इसमें एम-1 मिसाइल की रेंज 150 किमी, एम-2 मिसाइल की रेंज 250 किमी और सबसे भारी एम-3 मिसाइल की रेंज 350 से 400 किमी के बीच है. इन मिसाइलों की कीमत 40 से 50 करोड़ के बीच है जबकि एस-400 की रूसी मिसाइलों की कीमत करीब 100 करोड़ रुपये हैं।  क्यों सस्ता है ये सिस्टम दरअसल, इन मिसाइलों का उत्पादन भारत डायनामिक्स लिमिटेड कर रहा है, जबकि एडवांस मल्टी-फंक्शन कंट्रोल रडार का निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) कर रहा है. ये दोनों कंपनियां डुअल-पल्स सॉलिड रॉकेट मोटर्स जैसी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रही हैं।  पूर्ण सॉफ्टवेयर और टेक्टिकल स्वतंत्रता रूसी सिस्टम एस-400 में सोर्स कोड लॉक रहता है. इनका उपयोग काफी हद तक विदेशी सप्लायर की मर्जी पर निर्भर करता है. कुश प्रोजेक्ट पूरी तरह स्वदेशी है. ऐसे में एयरफोर्स का मिशन अल्गोरिदम और कोर सॉफ्टवेयर पर पूरा नियंत्रण मिलता है. इससे किसी भी स्थिति में इसमें किल स्विच का खतरा नहीं रहता है. इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर दुश्मन नई स्टेल्थ टेक्नोलॉजी या इलेक्ट्रॉमिक वारफेयर का इस्तेमाल करता है तो भारत अपना रडार डिटेक्शन और ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर तुरंत अपडेट कर सकता है. उदाहरण के तौर पर अगर चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के जे-20 या जे-35 फाइटर जेट का इ्स्तेमाल करे तो ये डिफेंस सिस्टम तुरंत अपने रडार डिटेक्शन और ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर को अपडेट कर देंगे।  लाइफ साइकल इकोनॉमी इस मामले में भी कुश एस-400 से काफी आगे हैं. दरअसल, लाइफ साइकल इनोनॉमी का मतलब एक सिस्टम को उसकी पूरी उम्र तक ऑपरेट करने में आने वाला खर्च से है. एस-400 और कुश जैसे बेहद आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम 25 से 30 सालों तक अपनी सेवा देते हैं. ऐसे में एस-400 जैसे विदेश प्लेटफॉर्म के मेंटेनेंस, स्पेयर पार्ट्स और अपग्रेड में बहुत पैसे खर्च होंगे. ऐसे में कई भार पार्ट्स उपलब्ध नहीं होने के कारण पूरा सिस्टम ठप हो जाता है. वहीं कुश का पूरा मेंटेनेंस भारत में होगा. इस कारण कुश के ठप होने की संभावना न के बराबर है।  इसके अलावा कुश को इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम के साथ सहजता से इंटीग्रेट किया जा सकता है. इसे नेटा अवाक्स, भविष्य के अवाक्स, तेजस मार्क-2 देसी फाइटर जेट और ग्राउंड रडार के साथ तुरंत डेटा शेयर किया जा सकेगा।  प्रोजेक्ट कुश की रफ्तार भारत ने प्रोजेक्ट कुश को बेहद तेज गति से विकास कर रहा है. इस साल के शुरू में इसके एम1 इंटरसेप्टर का फ्लाइट टेस्ट पूरा हो गया है. रिपोर्ट के मुताबिक एम1, एम2 और एम3 वैरिएंट 2028 से 2030 के बीच सेना को सौंपे जाएंगे. अगर भारत के सिस्टम 100 फीसदी सफल हो जाते हैं तो यह मित्र देश रूस के लिए एक बड़ी चुनौती होगी. भारत का यह सिस्टम काफी सस्ता है. ऐसे में संभावना है कि कम बजट वाले मुल्कों के लिए भारत ने एक शानदार एयर डिफेंस सिस्टम को विकसित किया है। 

US पायलट की मां की दुआ पर ईरान का पलटवार: ‘हमारे पास सुरक्षित, ट्रंप से नहीं

तेहरान   ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जंग अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है. शुक्रवार (3 मार्च) को ईरान ने अमेरिका के दो खतरनाक लड़ाकू विमानों (F-15 और A-10) को मार गिराया. इस घटना के बाद एक अमेरिकी पायलट लापता है, जिसकी तलाश में ईरान की सेना ने सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. इस बीच, लापता पायलट की मां ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे की सलामती के लिए दुआ मांगी, जिस पर ईरान के दूतावासों ने काफी तीखा जवाब दिया है।  ईरान का पलटवार: ‘ट्रंप से ज्यादा हमारे पास सुरक्षित है आपका बेटा’ पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका में मौजूद ईरानी दूतावासों ने पायलट की मां के पोस्ट पर जवाब देते हुए कहा कि उनके बेटे ट्रंप की कमान में रहने से ज्यादा ईरान की कैद में सुरक्षित रहेंगे. ईरानी दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा कि दुआ कीजिए कि आपका बेटा अमेरिकी रेस्क्यू टीम के हाथ लगने के बजाय ईरान की गिरफ्त में रहे. हम सभ्य लोग हैं और कैदियों के साथ सम्मान से पेश आना जानते हैं. दक्षिण अफ्रीका स्थित दूतावास ने तो यहां तक कह दिया कि वे अमेरिका या उनके साथियों की तरह ‘पाषाण युग’ वाली सोच नहीं रखते।  23 साल बाद अमेरिका को लगा इतना बड़ा झटका वॉल स्ट्रीट जर्नल और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2003 के इराक युद्ध के बाद यह पहली बार है जब किसी जंग में अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराया गया है. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा तेहरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुई इस जंग के छठे हफ्ते में यह अमेरिका के लिए सबसे बड़ी सैन्य हार मानी जा रही है. लापता पायलट को खोजने के लिए गए दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने फायरिंग की, जिसके बाद उन्हें पीछे हटना पड़ा।  ग्राउंड जीरो के हालात: ईरान में तलाशी अभियान और इनाम का ऐलान ईरानी मीडिया के अनुसार, दक्षिण-पश्चिमी ईरान के क्षेत्रीय गवर्नर ने लापता अमेरिकी पायलट को पकड़ने या मारने वाले के लिए इनाम की घोषणा की है. वहीं, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के जवान पूरे इलाके में छानबीन कर रहे हैं. दूसरी ओर, कुवैत में क्रैश हुए A-10 वॉर्थोग विमान का पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब रहा. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के डेटा के अनुसार, इस युद्ध में अब तक 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं।  न्यूक्लियर प्लांट के पास हमला और आम लोगों की मौत तस्नीम न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास एक मिसाइल गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई है, हालांकि प्लांट सुरक्षित है. ईरानी स्टेट मीडिया ने बताया कि इस जंग में अब तक ईरान के 4,000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं, जिनमें उनके सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल हैं. शनिवार को ईरान के पेट्रोकेमिकल जोन और पानी के गोदामों पर भी हवाई हमले हुए हैं।  बातचीत का रास्ता बंद  प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान को ‘पाषाण युग’ में भेजने की धमकी दी थी, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट दिख रही है. ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने तंज कसते हुए कहा कि अमेरिका का मकसद अब ‘सत्ता पलटना’ नहीं बल्कि अपने ‘पायलटों को बचाना’ रह गया है. पाकिस्तान की मध्यस्थता में होने वाली शांति वार्ता भी रुक गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों से मिलने से साफ मना कर दिया है। 

5500 पदों के लिए दौड़ शुरू: 15 से फिजिकल टेस्ट, लाखों अभ्यर्थी आजमाएंगे दमखम

चंडीगढ़. हरियाणा पुलिस में कॉन्स्टेबल के 5500 पदों की भर्ती के लिए मैदान में पसीना बहा रहे युवाओं के लिए परीक्षा का समय आने वाला है। हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग (एचएसएससी) ने शनिवार को संभावित शेड्यूल जारी करते हुए 15 अप्रैल से शारीरिक माप परीक्षण (पीएमटी) शुरू करने की सूचना दी है। प्रवेश पत्र जल्द ही आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। एचएसएससी चेयरमैन हिम्मत सिंह ने भी फेसबुक और एक्स पर इसकी जानकारी साझा की है। पीएमटी के बाद शारीरिक जांच परीक्षण (पीएसटी) किए जाएंगे। पीएमटी के लिए आयोग की ओर से पहले ही खेल निदेशक को पंचकूला स्थित ताऊ देवीलाल स्टेडियम में बास्केटबॉल और वॉलीबॉल हाल को आरक्षित करने का अनुरोध किया जा चुका है। खेल विभाग से कोच भी मांगे गए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि खेल विभाग की ओर से पीएमटी के लिए कितने कोच उपलब्ध कराए जाएंगे। तैयारियों को लेकर एचएसएससी चेयरमैन ने खेल विभाग के संयुक्त निदेशक अश्विनी मलिक के साथ बैठक भी की है, जिसमें स्टेडियम में उपलब्ध सुविधाओं पर चर्चा हुई। एचएसएससी की टीम ने खेल स्टेडियम में जाकर भी तैयारियों का जायजा लिया है। पीएमटी के लिए सीना और कद मापने की मशीनों के लिए अलग-अलग कंपनियों से टाईअप किया जाएगा। जल्द ही मशीनें आयोग के पास पहुंच सकती हैं। भर्ती में करीब दो लाख 70 हजार युवाओं ने आवेदन किया है। ऐसे में लगातार कई दिन तक पीएमटी की प्रक्रिया चलेगी।

स्कूल में फोन पर बैन बढ़ा, बच्चों की पढ़ाई और मानसिक विकास पर असर, दुनिया भर में गहरा प्रभाव

नई दिल्ली आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका असर अब चिंताजनक होता जा रहा है। लगातार बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल के कारण बच्चों का पढ़ाई में ध्यान कम हो रहा है और उनकी मेंटल हेल्थ भी प्रभावित हो रही है। इसी वजह से अब दुनियाभर के स्कूलों में फोन पर पाबंदी लगाने का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। 58% देशों में स्कूलों ने लगाया फोन बैन यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के करीब 58% देशों के स्कूलों में मोबाइल फोन पर बैन लगाया जा चुका है। यह आंकड़ा तेजी से बढ़ा है, 2023 में सिर्फ 24% देशों में बैन था, 2025 की शुरुआत में 40% और अब 2026 में 58% तक पहुंच गया यह साफ दिखाता है कि स्कूल अब बच्चों की पढ़ाई और व्यवहार को लेकर ज्यादा सख्त हो रहे हैं। स्कूलों में फोन बैन की बड़ी वजह Phone Ban करने की सबसे बड़ी वजह है बच्चों का ध्यान भटकना। क्लास के दौरान सोशल मीडिया, गेम्स और वीडियो देखने की आदत पढ़ाई में बाधा बन रही है। इसके अलावा साइबर बुलिंग, ऑनलाइन फ्रॉड और गलत कंटेंट से भी बच्चों को बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। सेंट्रल और साउथ एशिया के देश इस मामले में सबसे आगे हैं, जबकि ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में अभी कम सख्ती देखने को मिलती है। फोन बैन का बच्चों पर असर रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां फोन पर सख्ती लागू की गई, वहां स्कूल टाइम में मोबाइल इस्तेमाल 37% से घटकर सिर्फ 4% रह गया। टीचर्स ने भी बदलाव महसूस किया:     बच्चे आपस में ज्यादा बातचीत करने लगे     आउटडोर एक्टिविटी बढ़ी     किताबें पढ़ने में रुचि बढ़ी हालांकि, यह बदलाव हर जगह एक जैसा नहीं है। करीब एक तिहाई टीचर्स ने इसे पॉजिटिव माना, जबकि 64% का कहना है कि ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। सोशल मीडिया से बढ़ रहा खतरा बच्चों पर Phone Ban का एक बड़ा कारण सोशल मीडिया का बढ़ता असर भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, खासकर लड़कियों को ऑनलाइन हैरेसमेंट और सोशल प्रेशर का सामना करना पड़ता है। एक रिपोर्ट में सामने आया कि इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने के बाद 32% किशोर लड़कियों को अपने शरीर को लेकर खराब महसूस हुआ। वहीं, टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म हर 39 सेकंड में बॉडी इमेज से जुड़ा कंटेंट और कुछ ही मिनटों में ईटिंग डिसऑर्डर से जुड़ी चीजें दिखाने लगते हैं, जो बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है। ध्यान दें स्कूलों में फोन बैन का फैसला सिर्फ अनुशासन के लिए नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए लिया जा रहा है। अगर सही समय पर इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक स्वास्थ्य पर और भी गहरा पड़ सकता है।

MP में राज्यसभा चुनाव का गणित बदलेगा, भाजपा तीसरे प्रत्याशी को उतारने की तैयारी में, कांग्रेस की सीट पर नजर

भोपाल  मध्य प्रदेश में तीन राज्यसभा सीटों के लिए मई से जून के बीच चुनाव होने की संभावना है. अप्रैल में बीजेपी के 2 और कांग्रेस के एक राज्यसभा सांसद का कार्यकाल खत्म हो रहा है. जिसके लिए चुनाव होगा. मध्य प्रदेश में सत्ताधारी बीजेपी को विधायकों की संख्या बल के हिसाब से 2 सीटें जीतने में कोई परेशानी नहीं होगी. लेकिन कांग्रेस को अपनी सीट बचाने में अब मशक्कत करनी पड़ सकती है. क्योंकि कांग्रेस के 3 विधायकों का मामला पूरी तरह से फंस चुका है. जिसमें विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे. वहीं दतिया से विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो चुकी है. जबकि बीना विधायक निर्मला सप्रे को लेकर अब तक असमंजस की स्थिति बनी हुई है. . एमपी में क्रॉस वोटिंग की चर्चा  मध्य प्रदेश में भले ही अभी राज्यसभा चुनाव में 2 महीने का समय है. लेकिन जिस हिसाब से परिस्थितियां बदल रही हैं. उससे राज्यसभा का मामला फंसता दिख रहा है. तीसरी सीट पर मुकाबला रोचक होने की पूरी संभावना है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के एक विधायक आयोग्य साबित हो गए हैं. जबकि एक विधायक को वोट करने का अधिकार नहीं होगा और तीसरे विधायक अपनी स्थिति क्लीयर नहीं कर रही हैं. ऐसे में अगर कांग्रेस के कुछ और विधायक कम होते हैं तो फिर तीसरी सीट पर मुकाबला फंस जाएगा. क्योंकि भाजपा तीसरा उम्मीदवार उतारने की तैयारियों में जुट गई हैं।  जानिए राज्यसभा चुनाव का सरल गणित  राज्यसभा चुनाव के लिए पहले मध्य प्रदेश का सियासी गणित जानना जरूरी है. मध्य प्रदेश में कुल 230 विधायक हैं. लेकिन कांग्रेस के एक विधायक को वोट देने का अधिकार नहीं है. जबकि एक विधायक की सदस्यता समाप्त हो गई है. इस हिसाब से प्रदेश में मौजूदा विधायकों की संख्या 228 है. भाजपा के पास फिलहाल 164 विधायक हैं.कांग्रेस के पास कुल 65 विधायक है. लेकिन इनमें 1 के पास वोटिंग का अधिकार नहीं है. जबकि एक की सदस्यता चली गई है. जबकि बीना से कांग्रेस की निर्मला सप्रे का वोट भी बीजेपी के पक्ष में जाने की स्थिति दिख रही है. इस हिसाब से बीजेपी विधायकों की संख्या 165 तक जाती है. वहीं एक विधायक भारतीय आदिवासी पार्टी से है. जो खुद अपनी पार्टी का उम्मीदवार उतारने का दावा कर रहे हैं. इससे राज्यसभा चुनाव का गणित पूरी तरह उलझ रहा है।  क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रखने की रणनीति बीजेपी सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के समर्थन की जरूरत होती है। इस गणित के हिसाब से कांग्रेस के पास अभी भी विधायक ज्यादा हैं। ऐसे में बीजेपी को सीट हासिल करने के लिए कांग्रेस विधायकों की संख्या 58 से कम करनी होगी। इस स्थिति को देखते हुए बीजेपी कांग्रेस के चार से पांच विधायकों से क्रॉस वोटिंग करा सकती है। इसके अलावा इन विधायकों को सदन में अनुपस्थित रखकर भी सीट अपने पक्ष में करने की कोशिश कर सकती है। खास बात यह है कि बीजेपी के प्रदेश स्तर के शीर्ष रणनीतिकारों के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा चल रही है। ऐसे में आने वाले महीनों में बीजेपी कांग्रेस में और तोड़फोड़ कर विधायकों को अलग करने का प्रयास कर सकती है। एक सीट जीतने चाहिए 58 वोट  राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट की जरुरत है. भाजपा अपने 116 विधायकों के साथ 2 सीटें आसानी से जीतेगी और उसके पास 49 वोट बचेंगे. यानि भाजपा अगर तीसरा उम्मीदवार उतारेगी तो उसके पास 49 वोट सेफ हैं. कांग्रेस के पास फिलहाल 62 विधायक हैं. फिलहाल पार्टी के पास 4 विधायक ज्यादा है. लेकिन अगर कांग्रेस के 7 विधायक क्रॉस वोटिंग या फिर वोटिंग में हिस्सा नहीं लेते तो फिर कांग्रेस जीत के फिगर से नीचे आ जाएगी. इस हिसाब से कांग्रेस का खेल बिगड़ सकता है. यही वजह है कि राज्यसभा चुनाव में मुकाबला बदल रहा है.  बीजेपी इस नेता को बना सकती है उम्मीदवार राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि बीजेपी राज्यसभा चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में किसी ब्राह्मण चेहरे को उतार सकती है. जिसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस से भाजपा में शामिल होने वाले सुरेश पचौरी का नाम चर्चा में आया है. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि वह निर्दलीय मैदान में उतर सकते हैं, जहां भाजपा उन्हें अपना समर्थन दे सकती है. पचौरी लंबे समय तक कांग्रेस में रहे हैं. जिससे अगर कांग्रेस के कुछ विधायक उनके पक्ष में वोटिंग करते हैं तो वह मामला बन सकता है. वहीं कांग्रेस भी अपनी सीट को लेकर अब पूरी तरह एक्टिव है. कांग्रेस ने सभी विधायकों को एकजुट रखने पर जोर दिया है. जबकि पार्टी किसी ओबीसी नेता को मैदान में उतारने की तैयारी में है. जिसमें पूर्व मंत्री कमलेश्वर पटेल और अरुण यादव का नाम सबसे ऊपर लिया जा रहा है. ताकि विधायकों को एकजुट रखा जा सके और राज्यसभा की सीट को जीता जा सके।  एक सीट के लिए 58 वोट जरूरी राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता होती है। ऐसे में कांग्रेस के पास संख्या तो है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस के 4-5 विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। भाजपा तीसरी सीट पर खेल सकती है दांव इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास 164 विधायक हैं, जिनसे दो सीटें जीतने के बाद भी करीब 48 वोट बचते हैं।  

ईरान ने दिखाई ताकत, दो दशक में पहली बार अमेरिका को झटका; 13 सैनिक मारे गए

वाशिंगटन/ तेहरान  ईरान युद्ध में अमेरिका को जो झटका लगा है वैसा झटका पिछले दो दशक में कभी नहीं लगा। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी वायुसेना को दो विमानों को मार गिराया है। बताया जा रहा है कि एक पायलट की जान बच गई है जबकि दूसरा लापता है। पिछले 20 साल में ऐसा नहीं हुआ कि अमेरिकी सेना के दो विमान विदेशी धरती पर गिरा दिए गए हों। एक तरफ डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं कि ईरान एकदम कमजोर हो गया है तो दूसरी तरफ ईरान कहता है कि वजह जवाब देने के लिए तैयार है। दो दिन पहले ही डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा था कि अमेरिका ने ''ईरान को हरा दिया है और उसे पूरी तरह से तबाह कर दिया है और हम अपने काम को बहुत तेजी से पूरा करने जा रहे हैं।' इराक में गिराया गया था अमेरिका का विमान ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका का एफ-15ई स्ट्राइक ईगल मार गिराया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक एक पायलट को बचा लिया गया जबकि दूसरे की तलाश जारी है। ईरान की मीडिया ने दावा किया है कि यूएस ए-10 विमान को भी निशाना बनाया गया है। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ए-10 थंडरबोल्ट II को गिराया गया था। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने कहा कि अब तक ऐसा कोई भी देश नहीं कर पाया, यह कोई चमत्कार से कम नहीं है। मारे गए 13 अमेरिकी सैनिक इस युद्ध के दौरान अब तक कुल 365 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 13 सैनिकों की मौत हुई है। बीसीसी ने अमेरिकी रक्षा विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के हवासे से अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी तक यह तुरंत स्पष्ट नहीं है कि इन आंकड़ों में ईरान में हाल ही में एक अमेरिकी लड़ाकू विमान के मार गिराये जाने और लापता चालक दल को खोजने के लिए चलाए गये बचाव अभियान के दौरान घायल हुए सैनिक भी घायलों की इस सूची में शामिल हैं या नहीं। अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार मरने वालों की संख्या 13 ही बनी हुई है। युद्ध के दौरान घायल हुए अमेरिकी सैनिकों में सेना के 247 जवान, नौ सेना के 63 जवान, वायु सेना के 36 जवान और 19 मरीन सैनिक शामिल हैं। नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर एक अमेरिकी अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य स्थिति पर चर्चा करते हुए पहले कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ या उसे मार गिराया गया या इसमें ईरान की कोई भूमिका थी। चालक दल की स्थिति और विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का सटीक स्थान भी तुरंत ज्ञात नहीं हो सका।

चांदी ₹2.06 लाख सस्ती, सोना ₹53,000 घटा, जानें ताजे भाव

मुंबई  सोना-चांदी की कीमतें (Gold-Silver Rates) बीते सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव के बाद भी बढ़त में रहीं. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ, तो वहीं चांदी का भीव 2,32,600 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इन रेट्स की तुलना दोनों कीमती धातुओं के हाई लेवल से करें, तो ये अभी भी क्रैश (Gold-Silver Price Crash From High) नजर आ रही हैं. जी हां, चांदी जहां हाई से 2 लाख रुपये प्रति किलो से ज्यादा सस्ती है, तो वहीं सोना 53000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ज्यादा सस्ता मिल रहा है।        हाई छूने के बाद क्रैश होती गई चांदी  चांदी की कीमत एमसीएक्स पर अपने हाई को छूने के बाद से संभली नजर नहीं आई है. इस साल जनवरी महीने में इतिहास में पहली बार 1 Kg Silver Price 4 लाख रुपये के पार पहुंचा था और 4,39,337 रुपये के लेवल छू लिया था. इसके बाद इसमें तेज गिरावट देखने को मिली. हालांकि, बीच-बीच में उछाल भी आया, लेकिन वर्तमान 2,32,600 रुपये प्रति किलो के भाव के आधार पर कैलकुलेशन करें, तो चांदी 2,06,737 रुपये प्रति किलो सस्ती मिल रही है।  सोना भी फिर न छू सका हाई न सिर्फ चांदी, बल्कि सोना भी अपने लाइफ टाइम हाई को फिर से नहीं छू सका. चांदी की तरह ही जनवरी महीने में Gold Rate ने एमसीएक्स पर 2 लाख रुपये का लेवल पार किया था और रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 2,02,984 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था. वहीं बीते गुरुवार को ये गिरावट के साथ 1,49,650 रुपये पर क्लोज हुआ. ऐसे में अपने हाई से 10 Gram 24 Karat Gold Rate 53,334 रुपये कम हो गया है।          बीते हफ्ते ऐसा था हाल  बात सिर्फ बीते सप्ताह सोना-चांदी की कीमतों में आए चेंज की करें, तो एमसीएक्स पर 2 अप्रैल को  5 जून की एक्सपायरी वाला सोना 1,49,650 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि 27 मार्च को ये 1,47,255 रुपये था. यानी हफ्तेभर में ये कीमती पीली धातु 2395 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगी हुई है. चांदी का भाव देखें, तो ये 2,27,954 रुपये से चढ़कर बीते सप्ताह 2,32,600 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुई यानी इसमें 4646 रुपये की तेजी आई।                   घरेलू मार्केट में सोना-चांदी  MCX के बाद घरेलू मार्केट में सोना-चांदी की कीमतों को देखें, तो पिछले सप्ताह महज तीन कारोबार दिन में ट्रेड हुआ. इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक 24 कैरेट सोना 27  मार्च को 24 कैरेट सोना 1,42,942 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 2 अप्रैल को ये 1,46,608 रुपये पर क्लोज हुआ यानी यहां भी Gold Rate में 3666 रुपये प्रति 10 ग्राम का उछाल आया. चांदी को देखें, तो घरेलू मार्केट में ये कीमती धातु 2,21,647 रुपये से बढ़कर 2,27,813 रुपये प्रति किलो हो गई. यानी 1 किलो चांदी की कीमत 6166 रुपये बढ़ गई।             घरेलू मार्केट में GST+Making Charge गौरतलब है कि आईबीजेए द्वारा अपडेट किए जाने वाले गोल्ड-सिल्वर रेट्स देशभर में समान रहते हैं, लेकिन जब सर्राफा दुकान पर ज्वेलरी खरीदने के लिए जाते हैं, तो उस पर तय 3 फीसदी जीएसटी के साथ मेकिंग चार्ज भी देना होता है. ये मेकिंग चार्ज विभिन्न शहरों में अलग-अलग हो सकता है और इनके जुड़ने से सोना-चांदी की कीमत बढ़ जाती है।  विदेशों में भी सोना-चांदी सस्ता, ये हैं कारण इंटरनेशनल मार्केट में भी सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है. COMEX पर सोना करीब 2 फीसदी गिरकर 4317 डॉलर प्रति औंस (करीब 28 ग्राम) पर आ गया, तो चांदी की कीमत गिरकर 66.89 डॉलर प्रति औंस पर नजर आई।   Gold-Silver Rates में जारी गिरावट के पीछे के कारणों की बात करें, तो मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते महंगाई बढ़ने का खतरा लोगों को सता रहा है. दूसरी ओर अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा बीते सप्ताह ब्याज दरों में कटौती न करने के फैसले ने कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ाया है. ग्लोबल इकोनॉमिक ग्रोथ को लेकर जारी अनिश्चितता ने भी इस गिरावट को रफ्तार देने का काम किया है. इसके अलावा मंगलवार को भी अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ, जिसका दबाव सोना-चांदी पर पड़ा।