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सीएम मोहन यादव ने काशी की कचौड़ी-पूरी का लिया लुत्फ, उनकी सादगी ने लोगों का दिल जीता

भोपाल  मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने वाराणसी दौरे के दौरान एक अलग अंदाज में नजर आए। उन्होंने यहां के मशहूर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया, जिसकी तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। एयरपोर्ट जाते समय सीएम का काफिला अचानक मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर रुक गया। यहां उन्होंने बनारस की प्रसिद्ध कचौड़ी, पूरी-राम भाजी और जलेबी का आनंद लिया। बता दें मुख्यमंत्री  मोहन यादव का काफिला जब वाराणसी में एयरपोर्ट की ओर जा रहा था, तभी वे मिंट हाउस स्थित श्रीराम भंडार पर अचानक रुक गए। यहां उन्होंने बनारस की मशहूर कचौड़ी, पूरी-राम भाजी और जलेबी का स्वाद लिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के हर प्रांत और शहर की अपनी विशिष्ट खान-पान संस्कृति होती है, जो वहां की पहचान को दर्शाती है। स्थानीय स्वाद और पारंपरिक व्यंजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।   लोगों के बीच सहज सीएम डॉ. यादव मुख्यमंत्री के इस सहज और सरल व्यवहार ने आम लोगों का दिल जीत लिया। स्थानीय लोगों ने भी उनसे मुलाकात कर खुशी जाहिर की और उनके इस अंदाज की सराहना की। कई लोगों ने उनसे संवाद भी किया। लोगों का कहना था कि डॉ. मोहन यादव से मिलकर ये लगा ही नहीं कि वे किसी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।  मेरा सौभाग्य है कि बाबा ने 7 दिन में 2 बार बुलाया सीएम मोहन यादव ने कहा- बाबा विश्वनाथ की कृपा से उन्हें 7 दिन में 2 बार काशी आने का अवसर मिला। यह मेरा सौभाग्य है। शहर में आध्यात्मिक ऊर्जा है। सीएम ने काशी में आयोजित विक्रमादित्य पर आधारित महानाट्य की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्तुति बेहद अद्भुत है और जो भी काशी आए, वह इसे जरूर देखे। 3 अप्रैल को विक्रमोत्सव 2026 के महानाट्य मंचन का शुभारंभ किया 3 अप्रैल को सीएम योगी और मध्य प्रदेश सीएम मोहन यादव ने विक्रमोत्सव 2026 के महानाट्य मंचन का शुभारंभ किया। इस दौरान सीएम मोहन यादव ने योगी को वैदिक घड़ी भी भेंट की। मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव ने कहा- मुख्यमंत्री योगीजी ने जो कहा, वह काफी महत्वपूर्ण है। 3 भाइयों की जोड़ी जगत में विख्यात है। भाइयों के बीच कैसा संबंध होना चाहिए, इसका उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी की जोड़ी से मिलता है। उसी प्रकार भर्तृहरि और महाराज विक्रमादित्य की जोड़ी भी उतनी ही प्रसिद्ध है। विक्रमादित्य की परंपरा में महाराज भर्तृहरि नाथ संप्रदाय में प्रतिष्ठित हुए। उनकी दीक्षा की भूमि उज्जैन थी। उनकी साधना की भूमि काशी के निकट चुनार का किला था। कहा जाता है कि चुनार किले का निर्माण भी महाराज भर्तृहरि के नाम से जुड़ा है। जब इस नाट्य रूपांतरण की प्रस्तुति का प्रस्ताव मध्यप्रदेश सरकार के समक्ष आया, तो मेरा पहला सुझाव था कि इसका आयोजन काशी में किया जाए।

भोपाल में अधिकारी बने शिक्षक, 102 स्कूलों में अफसरों ने दी क्लास और बच्चों से किया संवाद

भोपाल/ इंदौर  इंदौर-उज्जैन समेत प्रदेशभर में 1 अप्रैल से नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो गई है। स्कूलों में पहले दिन विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इस दौरान बाल सभाओं का आयोजन हुआ। साथ ही छात्रों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण भी किया गया। अब ‘स्कूल चलें हम’ अभियान के तहत 4 अप्रैल को प्रदेशभर के स्कूलों में कलेक्टर समेत प्रशासनिक अधिकारी कक्षाएं लेने पहुंचे। इंदौर जिले में 162 प्रशासनिक अधिकारी सरकारी स्कूलों में पहुंचे। इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक-2 में विद्यार्थियों से संवाद किया। इधर, राजधानी भोपाल में 102 स्कूलों में 102 अधिकारी छात्रों के साथ चर्चा की। वहीं, उज्जैन में 106 अधिकारी स्कूलों में पहुंचे। सत्र के पहले दिन स्कूलों में विशेष मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था की गई। शिक्षा विभाग द्वारा कार्यक्रमों की लगातार समीक्षा की जा रही है, ताकि सत्र की शुरुआत व्यवस्थित रूप से हो सके। इंदौर निगम कमिश्नर स्कूल पहुंचे इंदौर नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल नेहरू पार्क स्थित बाल विनय मंदिर स्कूल पहुंचे, जहां उन्होंने बच्चों के साथ समय बिताया और उनके प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स को समझा। इस दौरान उन्होंने छात्रों से बातचीत कर उनकी सीखने की प्रक्रिया को करीब से देखा। सिंघल ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए बेहद खास रहा। बच्चों का आत्मविश्वास देखकर उन्हें खुशी हुई और उनके द्वारा प्रोजेक्ट्स की प्रस्तुति ने उन्हें अपने स्कूल के दिनों की याद दिला दी। उन्होंने लैब में बच्चों के काम की सराहना करते हुए कहा कि यही बच्चे देश का भविष्य हैं। कलेक्टर बोले-कभी निराश न हों कलेक्टर शिवम वर्मा प्रताप नगर स्थित आश्रम क्रमांक-2 पहुंचे। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा कि कभी निराश ना हों। प्रतियोगिता में भाग लेना ही बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने अपने जीवन के बारे में बताया कि एक छोटे से गांव से उन्होंने पढ़ाई शुरू की। इंजीनियरिंग कॉलेज में प्रवेश को अपना लक्ष्य बनाया और इसे पूरा भी किया। बाद में एक ऑयल कंपनी में नौकरी करते हुए यूपीएससी की तैयारी की और सफल हुए। घर-घर संपर्क से बढ़ेगा नामांकन सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक स्कूल से एक शिक्षक अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को प्रवेश के लिए प्रेरित करेगा। 85% से अधिक अंक वालों के अभिभावकों का सम्मान पिछले सत्र में 85% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा। शिक्षा विभाग का लक्ष्य नर्सरी से 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित करना है। इसके लिए सत्र की शुरुआत से ही शैक्षणिक गतिविधियों की कार्ययोजना लागू की जा रही है। नए सत्र के साथ खास शुरुआत प्रदेशभर में 1 अप्रैल से शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। भोपाल में भी पहले दिन स्कूलों में विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया। स्कूलों में बाल सभाएं आयोजित हुईं और बच्चों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया।  अभियान का उद्देश्य: बढ़े नामांकन इस पहल का मकसद सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाना और पढ़ाई के प्रति बच्चों की रुचि बढ़ाना है। शिक्षा विभाग ने शिक्षकों को घर-घर संपर्क अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। हर स्कूल से एक शिक्षक अभिभावकों से मिलकर बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाने के लिए प्रेरित करेगा। अभिभावकों का भी होगा सम्मान पिछले सत्र में 85% से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों को स्कूल स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे छात्रों का मनोबल बढ़ेगा और पढ़ाई के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा। सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने की तैयारी शिक्षा विभाग का लक्ष्य है कि नर्सरी से लेकर 12वीं तक के सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों के बराबर सुविधाएं और गुणवत्ता दी जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए सत्र की शुरुआत से ही अलग-अलग शैक्षणिक गतिविधियों की योजना लागू की जा रही है। 

कमलनाथ का बड़ा बयान: भारत में पेट्रोल-डीज़ल और गैस की कोई कमी नहीं है

भोपाल  कांग्रेस नेता कमलनाथ के देश में LPG गैस क्राइसिस पर दिए गए बयान के बाद अब BJP ने कांग्रेस और राहुल गांधी के एलपीजी क्राइसिस को लेकर घेरना शुरू कर दिया है। सबसे आगे केंद्रीय मंत्री सिंधिया आए, जिन्होंने कहा कि कमलनाथ ने राहुल गांधी और कांग्रेस के आरोपों की पोल खोल दी है, शर्म आना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने X हैंडल पर एक पोस्ट शेयर की है। इसमें उन्होंने लिखा है कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ जी ने भी स्वयं कह दिया है कि देश में पेट्रोल-डीजल और गैस की कोई कमी नहीं है' 'झूठ और भ्रम के बलबूते जनता को इतने दिनों तक गुमराह कर रही कांग्रेस को अब शर्म आना चाहिए। अब समय है कि कांग्रेस जनता में डर और विश्वास पैदा कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकना बंद कर दे।' क्या है मामला, ऐसे समझें     कमलनाथ ने गैस क्राइसिस पर बयान दिया था     उन्होंने कहा था, गैस की ऐसी कोई कमी नहीं है     उनका बयान पार्टी लाइन से इतर आया था     भाजपा ने तत्काल इसे कांग्रेस लपक लिया     सिंधिया ने कहा, कांग्रेस जनता को गुमराह कर रही     कांग्रेस को शर्म आना चाहिए कमलनाथ का वीडियो भी शेयर किया है मंत्री सिंधिया ने भाजपा मध्य प्रदेश के X की पोस्ट को शेयर किया था, जिसमें पार्टी ने लिखा था कि 'अब तो कांग्रेस नेता कमलनाथ ने भी राहुल गांधी द्वारा एलपीजी को लेकर फैलाए जा रहे प्रोपेगेंडा की पोल खोल दी' इसमें कमलनाथ का छिंदवाड़ा का वह वीडियो भी लगाया गया था, जिसमें कमलनाथ ने कहा था कि, गैस की कमी नहीं है, सिस्टम में गड़बड़ी है और एक भ्रम फैलाया गया है। कमलनाथ ने LPG पर क्या कहा था दरअसल बीते रोज कमलनाथ छिंदवाड़ा आए थे। उन्होंने हेलीपेड पर मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि, 'गैस की कोई कमी नहीं है, यह अव्यवस्था है, लेकिन माहौल बना दिया कि कमी है।' उनके इस बयान के कई मायने निकाले जा रहे हैं। उनका यह बयान पार्टी लाइन से हटकर दिया है। कांग्रेस पार्टी पूरे देश में एलपीजी और पेट्रोलियम क्राइसिस को लेकर MP सहित पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन कर रही है। जबकि कमलनाथ कह रहे हैं कि ऐसी कोई कमी नहीं है। BJP ने मौके को तत्काल लपक लिया कमलनाथ का 'गैस ऐसी कोई कमी नहीं है' बयान को BJP ने तत्काल पलक लिया और इसके 'कांग्रेस के गैस की क्राइसिस कैंपेन' की हवा निकालने के लिए उपयोग कर रही है। भाजपा इस मौके को कतई छोड़ने वाली नहीं है। MP से लेकर दिल्ली तक भाजपा ने इसको लेकर राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

अमृतसर में हेल्थ कार्ड से इलाज पर अस्पताल का विरोध, AAP विधायक ने की हस्तक्षेप, बच्चा रेफर

अमृतसर  पंजाब के अमृतसर से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां सरकार की स्वास्थ्य योजना होने के बावजूद एक गरीब परिवार को अपने बीमार बच्चे के इलाज के लिए परेशानी उठानी पड़ी। घटना मकबूलपुरा क्षेत्र के एक निजी अस्पताल की है, जहां स्वास्थ्य कार्ड के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा होने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे का उपचार करने से इन्कार कर दिया। पीड़ित परिवार की सदस्य मनीषा ने बताया कि उनका बच्चा लंबे समय से बीमार है और वे अलग-अलग अस्पतालों में उसका इलाज करवा रहे हैं। इस बार उन्हें उम्मीद थी कि स्वास्थ्य योजना के तहत उन्हें राहत मिलेगी, लेकिन अस्पताल द्वारा इलाज से मना करने पर उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं। इस दौरान अस्पताल परिसर में काफी देर तक हंगामा चलता रहा। अस्पताल में बिगढ़ा माहौल मामले की जानकारी मिलते ही आम आदमी पार्टी के स्थानीय नेता कमल कुमार मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रबंधन के साथ तीखी बहस की। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ निजी अस्पताल सरकारी योजनाओं को सही ढंग से लागू नहीं कर रहे हैं और गरीब मरीजों से अनुचित तरीके से पैसे वसूलने की कोशिश की जाती है। विवाद बढ़ने पर क्षेत्र की विधायक जीवनजोत कौर भी अस्पताल पहुंचीं और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताते हुए कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर प्रकार की बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए कई बार मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे बड़े केंद्रों पर भेजना पड़ता है। विधायक बोलीं-गलतफहमी हुई विवाद बढ़ने पर पूर्वी हलके की विधायक जीवनजोत कौर भी मौके पर आईं। उन्होंने इसे गलतफहमी का मामला बताया और कहा कि अस्पतालों को मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर बीमारी का इलाज हर अस्पताल में संभव नहीं होता, इसलिए मरीजों को उच्च केंद्रों पर रेफर करना पड़ता है। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. ऋषभ ने कहा कि मरीज की बीमारी योजना के तहत कवर नहीं थी, जिससे यह गलतफहमी पैदा हुई। उन्होंने बताया कि अब मरीज को बेहतर इलाज के लिए उच्च केंद्र पर रेफर कर दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझ गया है। बच्चे की बिमारी योजना से बाहर वहीं अस्पताल के निदेशक डॉ. ऋषभ ने अपनी सफाई में कहा कि बच्चे की बीमारी स्वास्थ्य योजना के दायरे में नहीं आती थी, जिससे यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने बताया कि मरीज को अब बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र में भेज दिया गया है और मामला आपसी सहमति से सुलझा लिया गया है। इस घटना ने एक बार फिर स्वास्थ्य योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन और निजी अस्पतालों की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि सरकार इस तरह के मामलों की गंभीरता से जांच करे, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।  

AAP सरकार का बड़ा कदम: पंजाब में महिलाओं को हर महीने मिलेगा ₹1,000, 2022 का वादा हुआ पूरा

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने 'मुख्यमंत्री मावां धियां सत्कार योजना' के क्रियान्वयन के लिए एक अधिसूचना जारी की है जिसके तहत पात्र महिलाओं को 1,000 रुपये से 1,500 रुपये तक की मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी।मपात्रता मानदंडों के अनुसार, योजना का लाभ लेने वाली किसी परिवार की पात्र महिलाओं की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। पहले से पेंशन पाने वाली महलाओं को भी लाभ दो अप्रैल की अधिसूचना के अनुसार, मौजूदा सामाजिक सुरक्षा पेंशनभोगी भी पहले से दी जा रही पेंशन के अलावा योजना के तहत पूर्ण वित्तीय लाभ पाने की हकदार होंगी। मंत्रिमंडल ने रविवार को इस योजना को मंजूरी दी थी, जिसके तहत महिलाओं को 1,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता मिलेगी और अनुसूचित जाति से संबंधित महिलाओं को 1,500 रुपये दिए जाएंगे। 2022 के चुनाव में किया था वादा पंजाब में 2022 के चुनावों से पहले आम आदमी पार्टी (आप) का एक प्रमुख चुनावी वादा महिलाओं को 1,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता प्रदान करना था। पैसे सीधे बैंक अकाऊंट में भेजे जाएंगे। 2 अप्रैल से ही यह योजना लागू मानी जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। किन महिलाओं को मिलेगा फायदा? मान सरकार का दावा है कि इस योजना का फायदा पंजाब की 97 फीसदी महिलाओं को मिलेगा. इस योजना के तहत 18 साल से ज्यादा उम्र की महिलाएं आवेदन कर सकती हैं. इस योजना का लाभ सभी महिलाओं को मिलेगा. हालांकि, मौजूदा या पूर्व सरकारी कर्मचारी, इनकम टैक्स देने वालीं महिलाओं और वर्तमान या पूर्व सांसद-विधायकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा।  और भी कई राज्यों में है ऐसी योजना महिलाओं को हर महीने की वित्तीय सहायता देने वाली योजनाएं कई राज्यों में चल रही है. मध्य प्रदेश में 'लाड़ली बहना योजना' है, जिसके तहत 21 से 60 साल की उम्र की महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये मिलते हैं. कर्नाटक की कांग्रेस सरकार 'गृहलक्ष्मी योजना' चलाती है, जिसके तहत 2,000 रुपये दिए जाते हैं. महाराष्ट्र में 'माझी लाडकी बहिण योजना' है, जिसके तहत गरीब महिलाओं को 1,500 रुपये मिलते हैं।  झारखंड में महिलाओं को सबसे ज्यादा रुपये मिलते हैं. 2024 में सरकार ने 'मुख्यमंत्री मैयां सम्मान योजना' के तहत मिलने वाली रकम को बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दिया था. इसके अलावा, असम में 1,250 रुपये, तमिलनाडु में 1,000 रुपये, पश्चिम बंगाल में 1,000 रुपये और छत्तीसगढ़ में भी 1,000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलती है।  कैसे भरा जाएगा फॉर्म? इस योजना का लाभ उठाने के लिए महिलाओं को फॉर्म भरना होगा और इसमें कुछ दस्तावेज लगाए जाएंगे। योनजा का लाभ उठाने के लिए महला के पास आधार कार्ड होना चाहिए जिसपर पंजाब का पता लिखा हो। इसके अलावा पंजाब का वोटर आई कार्ड. बैंक अकाउंट और पासबुक साथ ही अगर महिला अनुसूचित जाति या जनजाति से हैं तो जाति प्रमाणपत्र होना अनिवार्य है। इस योजना को ठीक से लागू करने का जिम्मा जिला स्टर पर डिप्टी कमिश्नरों को दिया गया है। इसके अलावा गांवों तक लोगों को सुविधा अच्छी तरह पहुंचाने के लिए स्पेशन फेसिलिटेटर और मोबिलाइजर्स तैनात किए जाएंगे। जिन महिलाओं का खाता नहीं खुला है उनके बैंक अकाउंट खुलवाए जाएंगे। नियम के मुताबिक लाभार्थी की मृत्यु होने के बाद तुरंत लाभ मिलना बंद हो जाएगा। इस योनजा की निगरानी और फर्जीवाड़े से बचने के लिए मोबाइल ऐप और डैशबोर्ड भी तैयार किया गया है।

पाकिस्तान के प्रयासों को लगा झटका, ईरान ने इस्लामाबाद बैठक से किया मना, युद्धविराम पर असफलता

इस्लामाबाद पाकिस्तान द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने के प्रयास पूरी तरह विफल हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने शुक्रवार को मध्यस्थों का हवाला देते हुए यह जानकारी दी। ईरान ने पाकिस्तान सहित मध्यस्थता करा रहे देशों को स्पष्ट संदेश दिया है कि वह आने वाले दिनों में इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों से मुलाकात करने को तैयार नहीं है और अमेरिका की मांगों को पूरी तरह अस्वीकार्य मानता है। कुल मिलाकर ये बातचीत अब 'डेड एंड' पर पहुंच गई है। ईरान का इनकार और अमेरिका की मांगें सूत्रों के अनुसार, ईरान ने युद्धविराम के लिए अपनी शर्तें दोहराई हैं। शुरुआती दौर में ईरान ने कहा था कि वह तभी युद्ध समाप्त करेगा जब अमेरिका युद्ध मुआवजा दे, मध्य पूर्व के अपने सभी सैन्य ठिकानों से वापसी करे और भविष्य में किसी भी हमले से सुरक्षा की गारंटी दे। इन मांगों पर कोई समझौता नहीं होने के कारण बातचीत अटक गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के नेतृत्व में बातचीत को आगे बढ़ाने की यह कोशिश कोई सफलता हासिल नहीं कर सकी। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसे अमेरिका की मांगें 'अस्वीकार्य' लगती हैं। वह पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक के लिए अपने कोई अधिकारी को नहीं भेजेगा। इस कड़े रुख ने बातचीत की मौजूदा रूपरेखा के दरवाजे प्रभावी रूप से बंद कर दिए हैं। पाकिस्तान की निकल गई हवा! पिछले कुछ हफ्तों से पाकिस्तान बैकडोर कूटनीति के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और विदेश मंत्री इशाक डार ने सार्वजनिक तौर पर इस्लामाबाद में सार्थक और निर्णायक वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश की थी। इसी दिशा में पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से एक 15-सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव ईरान को सौंपा था। इससे पहले, चीन और पाकिस्तान ने भी संयुक्त रूप से एक 5-सूत्रीय शांति योजना पेश की थी। हालांकि, अमेरिका की कुछ कठोर रणनीतिक मांगों और जमीनी स्तर पर लगातार हो रहे सैन्य हमलों के कारण, ईरान ने इस बातचीत से अपने कदम पीछे खींच लिए। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच अविश्वास की खाई इतनी गहरी है कि पाकिस्तान के लिए दोनों पक्षों को एक मेज पर लाना कूटनीतिक रूप से एक बेहद जटिल काम था, जो अंततः विफल साबित हुआ। शांति प्रयासों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र में एक अमेरिकी युद्धक विमान (F-15E) को मार गिराने का दावा किया। पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी विशेष बलों ने एक पायलट का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर लिया है, जबकि दूसरे की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। तुर्की और मिस्र तलाश रहे नए विकल्प इस कूटनीतिक गतिरोध के कारण शांति प्रयास अधर में लटक गए हैं। इसे देखते हुए तुर्की और मिस्र अब इस समस्या का समाधान इस्लामाबाद से बाहर तलाश रहे हैं। दोनों देश युद्धविराम की बची-खुची उम्मीदों को बचाने के लिए नए स्थानों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें दोहा (कतर) और इस्तांबुल (तुर्की) बातचीत की मेजबानी के लिए प्रमुख विकल्पों के रूप में उभरे हैं। विवाद की मुख्य जड़: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का समुद्री रास्ता एक्सियोस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही थी। इस समझौते के तहत यह प्रस्ताव था कि अगर तेहरान 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के समुद्री रास्ते को वैश्विक व्यापार के लिए फिर से खोल देता है, तो इसके बदले में युद्धविराम लागू किया जा सकता है। डोनाल्ड ट्रंप का कड़ा रुख और धमकियां रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ फोन पर बातचीत के दौरान संभावित युद्धविराम को लेकर चर्चा की थी। उसी दिन, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि ईरान के राष्ट्रपति युद्धविराम चाहते हैं। हालांकि, ट्रंप ने कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया कि युद्धविराम तभी होगा जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से 'खुला और स्वतंत्र' होगा। ट्रंप ने अपने पोस्ट में लिखा: हम तभी विचार करेंगे जब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह से खुला होगा। तब तक, हम ईरान पर विनाश की हद तक बमबारी कर रहे हैं। उन्हें वापस पाषाण युग में भेज देंगे!!!" ईरान की प्रतिक्रिया ट्रंप के इन दावों और बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने युद्धविराम चाहने वाले ट्रंप के दावे को पूरी तरह से झूठा और निराधार करार दिया है। इस युद्ध की आंच अब अन्य देशों तक फैल रही है। इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने हाई-अलर्ट जारी करते हुए अमेरिकी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने को कहा है, क्योंकि ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों द्वारा हमले की आशंका है। बहरीन से लेकर दुबई तक ड्रोन हमलों की घटनाएं सामने आई हैं।

कांग्रेस व यूडीएफ नहीं दे सकती सुरक्षा-रोजगार की गारंटी, यह गारंटी केवल भाजपा ही दे सकतीः मुख्यमंत्री

कांग्रेस घुसपैठ व दंगा कराती थी, भाजपा ऐसा करने वालों को निकाल बाहर करती है: मुख्यमंत्री सीएम योगी ने असम के बरछला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार ऋतु बरन सरमा के लिए मतदाताओं से मांगा वोट  पहले नौजवानों के हक पर काबिज होते थे घुसपैठिए, अब डबल इंजन सरकार नागरिकों को दिला रही हकः सीएम योगी असम में भी दिखा सीएम योगी का जबरदस्त क्रेज, एक झलक पाने के लिए पेड़ों पर चढ़े असम के युवा  पीएम मोदी ने 11 साल में पूर्वोत्तर भारत की 78 और असम की 36 यात्राएं कीं, तब यहां शांति, सुरक्षा व सुशासन का माहौल बना: मुख्यमंत्री कांग्रेस व यूडीएफ नहीं दे सकती सुरक्षा-रोजगार की गारंटी, यह गारंटी केवल भाजपा ही दे सकतीः मुख्यमंत्री  सोनितपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा घुसपैठ व दंगा कराने का काम किया, लेकिन भाजपा ऐसा करने वालों को निकाल बाहर करती है। पहले नौजवानों के हक पर घुसपैठिए काबिज होते थे, असम के लोगों का राशन डकार जाते थे, लेकिन अब डबल इंजन सरकार असम के हर नागरिक को उसका हक दिलाने की गारंटी ले रही है। सीएम योगी शुक्रवार को असम विधानसभा चुनाव में बरछला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी ऋतु बरन सरमा के पक्ष में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जनता से 9 अप्रैल को कमल का बटन दबाकर भाजपा प्रत्याशी को भारी मतों से जिताने की अपील की। कांग्रेस व यूडीएफ ने असमिया संस्कृति समाप्त करने की रची साजिश  सीएम योगी ने कहा कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाली, किसानों का संरक्षण और विदेशी आक्रांताओं को धूल धूसरित करने वाली इस पावन धरा के सामने कांग्रेस ने यूडीएफ के साथ मिलकर पहचान का संकट खड़ा किया। यह संकट किसी एक क्षेत्र में नहीं था। कांग्रेस व यूडीएफ के अघोषित समझौते के कारण असमिया जाति, माटी व बेटी के सामने पहचान का संकट हुआ था। इन्होंने तुष्टिकरण की नीति पर चलकर असमिया पहचान को समाप्त करने का प्रयास किया। यहां की माटी में घुसपैठियों को घुसाकर असम के सामने पहचान का संकट खड़ा किया। असम के नागरिकों, बहनों के हक पर घुसपैठियों के जरिये डकैती डलवाई। असमिया संस्कृति मिटाने की साजिश रची, लेकिन जब पीएम मोदी के नेतृत्व में दिल्ली और असम में पहले सर्वानंद सोनोवाल, फिर हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी तो असम चाय के साथ अब चिप उत्पादन का नया केंद्र भी बन गया है। पहले घुसपैठिए खा जाते थे गरीबों का राशन सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार असम की पहचान को संरक्षित कर रही है। असमिया संगीत-संस्कृति, महापुरुषों, महानायकों, योद्धाओं को सम्मान दे रही है। अब असम में विकास और विरासत का अद्भुत समन्वय दिख रहा है। मां कामाख्या, श्रीमंत शंकर देव कॉरिडोर व भूमि संरक्षण का कार्य नए सिरे से प्रारंभ हुआ है। 10 साल में डबल इंजन सरकार ने बिना भेदभाव गरीबों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। पहले गरीबों का राशन विदेशी घुसपैठिए खा जाते थे, अब असम के लोगों को राशन, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्कीम के तहत हर गरीब को पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य सुविधा, प्रधानमंत्री आवास, नौजवानों को रोजगार-नौकरी मिल रही है। अब चाय बागान में काम करने वाली बहनों, कारीगरों, नौजवानों के लिए स्पेशल पैकेज की व्यवस्था है।  घुसपैठ व दंगा कराती थी कांग्रेस सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार का संकल्प है कि असम के लोगों का संरक्षण होगा और एक-एक घुसपैठिए को निकाल बाहर करेंगे। कांग्रेस घुसपैठ-दंगा कराती थी और भाजपा ऐसा करने वालों को निकाल बाहर करती है। भाजपा सरकार दंगा-कर्फ्यू मुक्त असम के निर्माण के लिए कार्य कर रही है। जहां भी भाजपा सरकार आई है, वहां शांति-सुरक्षा, समृद्धि लाई है। उत्तर प्रदेश में पहले हर दूसरे-तीसरे दिन दंगा व कर्फ्यू लगता था। यूपी की आबादी 25 करोड़ है, लेकिन वहां 9 वर्ष में नो कर्फ्यू, नो दंगा है, सब चंगा है। 500 वर्ष में जो काम नहीं हो पाया, वह काम भी अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के रूप में हो गया।  यूपी में अब सड़कों पर नहीं पढ़ी जाती नमाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में उग्रवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद नहीं है, वहां सड़कों पर नमाज भी नहीं पढ़ी जाती है। भाजपा की डबल इंजन सरकार लव जेहाद, लैंड जेहाद का सफाया करने को संकल्पित है। कांग्रेस व यूडीएफ को घुसपैठियों का वोट चाहिए, वे सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं। इन पार्टियों को देश की कीमत पर वोट चाहिए। ये नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा कर देश की सुरक्षा में सेंध लगाने और अफवाह फैलाकर गुमराह करने वाले लोग हैं। वहीं मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने जो कहा, वो कर के दिखाया। मोदी जी जितनी बार पूर्वोत्तर भारत में आए हैं, 60 साल के कांग्रेस के शासनकाल में इतनी बार कोई प्रधानमंत्री नहीं आया। मोदी जी ने 11 साल में पूर्वोत्तर भारत की 78 और असम की 36 यात्राएं की हैं, तब शांति, सुरक्षा व सुशासन का माहौल तैयार हुआ है। 60 वर्ष में कांग्रेस उचित कनेक्टिविटी नहीं दे पाई, लेकिन आज पूर्वोत्तर के हर राज्य तक रोड, रेलवे, एयर व इनलैंड वाटरवे की कनेक्टिविटी है। पहले मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं थे, लेकिन डबल इंजन सरकार ने एम्स, आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी दिया है। पूर्वोत्तर भारत व असम विश्वस्तरीय संस्थानों का केंद्र बना है।  कांग्रेस व यूडीएफ नहीं दे सकती सुरक्षा, रोजगार की गारंटी  सीएम योगी ने कहा कि पहले नौजवानों के हक पर घुसपैठिए काबिज होते थे और असम के लोगों का राशन डकार जाते थे, लेकिन अब असम के हर नागरिक को उसका हक दिलाने की गारंटी डबल इंजन सरकार ले रही है। अयोध्या में राममंदिर व काशी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण हुआ तो मां कामाख्या के भव्य कॉरिडोर का निर्माण भी उसी भव्यता से हो रहा है। यह गारंटी केवल भाजपा की डबल इंजन सरकार देगी, यह गारंटी कांग्रेस नहीं देगी। नौजवानों को रोजगार, बहनों को सुरक्षा की गारंटी केवल डबल इंजन सरकार देगी, कांग्रेस व यूडीएफ यह गारंटी नहीं दे सकती। वे सुरक्षा में सेंध लगाने वाले लोग हैं। घुसपैठियों के जरिये भारत की संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वाले लोग हैं। कांग्रेस व यूडीएफ पर विश्वास नहीं किया जा … Read more

ईरान जंग में US के लिए मुश्किलें बढ़ीं, 2 फाइटर जेट और 2 चॉपर क्रैश, पायलट लापता

वाशिंगटन पिछले पांच हफ्तों से जारी ईरान-अमेरिका युद्ध अब अपने सबसे खतरनाक और अनिश्चित दौर में पहुंच गया है. पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान ने दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराया है, जबकि बचाव अभियान में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर भी ईरानी हमले की चपेट में आ गए हैं।  ईरानी मीडिया की तरफ से कुछ तस्वीरें जारी की गई हैं और दावा किया गया है कि कुवैत स्थित 'कैंप बुहरिंग' पर हुए ईरानी हमलों में अमेरिकी सेना का एक 'बोइंग CH-47 चिनूक' भारी-भरकम हेलीकॉप्टर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।  28 फरवरी से शुरू हुई जंग के बाद  यह पहली बार है जब अमेरिकी विमानों को इस तरह नुकसान पहुंचा है. जिसने वाशिंगटन के ‘एयर सुपीरियरिटी’ के दावों को कड़ी चुनौती दी है.  जानकारी के मुताबिक, एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान ईरान के भीतर सैन्य अभियान के दौरान क्रैश हो गया. इस विमान में दो क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें से एक को बचा लिया गया, जबकि दूसरा अब भी लापता है और उसके ईरान में कहीं छिपे होने की आशंका है।  कुवैत में भी प्लेन क्रैश एक अन्य घटना में, कुवैत के ऊपर उड़ान भर रहे अमेरिकी A-10 वारथॉग अटैक एयरक्राफ्ट को निशाना बनाया गया, जो दुर्घटनाग्रस्त हो गया. हालांकि, इसका पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा।  लापता पायलट को खोजने के लिए भेजे गए दो ब्लैक हॉक (Black Hawk) हेलीकॉप्टरों पर भी ईरान ने भारी गोलीबारी की जिसके बाद वे किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे. लगातार दो विमानों के नुकसान को इस युद्ध में अमेरिकी सेना के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।  अमेरिकी सेना के लिए मुश्किल भरे रहे पिछले 24 घंटे      F-15E स्ट्राइक ईगल: ईरान की सीमा के भीतर एक F-15E स्ट्राइक ईगल को मार गिराया गया है. विमान में सवार दो क्रू मेंबर्स में से एक को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन दूसरा अभी भी लापता है. लापता क्रू मेंबर की तलाश में हाई-स्टेक रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।      A-10 वारथॉग: दो A-10 वारथॉग विमानों को निशाना बनाया गया. इनमें से एक फारस की खाड़ी में क्रैश हो गया (पायलट सुरक्षित), जबकि दूसरे ने एक इंजन खराब होने के बावजूद इमरजेंसी लैंडिंग की।      रेस्क्यू  हेलीकॉप्टरों पर अटैक: लापता पायलट को खोजने निकले दो HH-60W जॉली ग्रीन II रेस्क्यू हेलीकॉप्टर भी ईरानी गोलाबारी की चपेट में आ गए. हालांकि क्रू सुरक्षित है, लेकिन कुछ जवान घायल हुए हैं।      इमरजेंसी लैंडिंग: एक F-16 फाइटर जेट और दो KC-135 टैंकर विमानों को भी तकनीकी खराबी या हमले के बाद इमरजेंसी घोषित कर सुरक्षित लैंडिंग करनी पड़ी।  ईरान का 'पायलट हंट'  ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दक्षिण-पश्चिम इलाके में लापता अमेरिकी पायलट की तलाश के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गलिबाफ ने इसे जंग का टर्निंग पॉइंट बताते हुए कहा कि अब लड़ाई 'सत्ता परिवर्तन' से हटकर 'अमेरिकी पायलटों की तलाश' पर केंद्रित हो गई है।  ईरानी अधिकारियों ने अपने नागरिकों से पायलट की सूचना देने या उसे पकड़ने का आग्रह किया है और एक क्षेत्रीय अधिकारी ने 'शत्रु की सेनाओं' को पकड़ने या मारने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ा इनाम देने की भी घोषणा की है।  ट्रंप बोले- यह जंग है, होता रहता है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन घटनाओं को बहुत अधिक महत्व न देते हुए कहा, 'यह जंग है और ऐसा होता रहता है.' उन्होंने संकेत दिया कि इन नुकसानों से ईरान के साथ चल रही बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम ट्रंप के उन दावों के विपरीत है जिनमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने ईरान के हवाई क्षेत्र पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है।  सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर एयर डिफेंस सिस्टम भी मोबाइल मिसाइल और ग्राउंड फायर के जरिए खतरा पैदा कर सकते हैं. हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी विमान तेहरान के ऊपर उड़ान भर रहे हैं और ईरान कुछ नहीं कर पा रहा, लेकिन दो विमानों के गिरने की घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  फिलहाल जंग थमने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं और इसका असर पूरे मध्य-पूर्व पर पड़ रहा है. ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के प्रयासों को खारिज कर दिया है, जिससे पाकिस्तान के नेतृत्व में चल रहे सीजफायर की कोशिशों को झटका लगा है. वहीं कुवैत के ऊर्जा ठिकानों पर हमले और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता बढ़ा दी है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य सुशासन का अहम संदेश देता है

सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है। विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया। भेंट की गई वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है। समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग … Read more

योगी सरकार का बड़ा कदम: 2026 के लिए खाद आपूर्ति रणनीति तैयार

खाद आपूर्ति को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान, 2026 के लिए विस्तृत आपूर्ति रणनीति तैयार यूरिया, डीएपी और एनपीके की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सप्लाई प्लान पर किया जा रहा काम सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर, निजी क्षेत्र का 35% कोटा प्रस्तावित किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार की सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लखनऊ  योगी सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2026 के लिए एक व्यापक और सुव्यवस्थित सप्लाई प्लान तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में किसी भी प्रकार की खाद कमी की स्थिति को रोकना और कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखना है। राज्य सरकार द्वारा जारी इस रणनीति के तहत यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिले में मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति समय से पहले सुनिश्चित की जाए, ताकि बुवाई और फसल की बढ़वार के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।        इसके साथ ही प्रदेश के समस्त उर्वरक बिक्री केन्द्रों पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर पारदर्शिता के साथ वितरण किया जाए। उर्वरकों की जमाखोरी कर कृत्रिम अभाव करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। गैर कृषि क्षेत्रों में उर्वरकों के डायवर्जन यथा-प्लाईवुड इण्डस्ट्रियल, पशु आहार निर्मित इकाइयों पर सघन निगरानी रखी जाए। फसल में संस्तुति / संतुलित मात्रा में (अधिकतम यूरिया 07 बोरी एवं डी०ए०पी०-05 बोरी प्रति हेक्टेयर) उर्वरकों का प्रयोग करने के साथ-साथ उर्वरकों का अग्रिम भण्डारण न करने के सम्बन्ध में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाए। अन्तर्राष्ट्रीय / अन्तर्राज्यीय सीमावर्ती जनपदों में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की सघन निगरानी रखी जाए।  इस योजना में सहकारी समितियों की भूमिका को और मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार ने सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खाद वितरण की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे पारदर्शिता और सुगमता दोनों में सुधार होगा। वहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को संतुलित रखते हुए उन्हें लगभग 35 प्रतिशत कोटा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावी बनी रहे।     खाद वितरण की निगरानी के लिए सरकार ने सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लागू की है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जाएगी। इस सुनियोजित रणनीति से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।