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रायपुर: खनिज राजस्व में 14% की बढ़ोतरी, 25-26 में ₹16,625 करोड़ की आय

रायपुर :खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि , 25–26 में ₹16,625 करोड़ की प्राप्ति  पारदर्शी प्रबंधन और तकनीकी नवाचार से हासिल हुई सफलता  रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता, तकनीकी नवाचार और सुदृढ़ प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की गई है।  खनिज विभाग के सचिव पी दयानंद ने बताया कि छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹16,625 करोड़ का खनिज राजस्व अर्जित कर लक्ष्य का 98 प्रतिशत प्राप्त किया है, जो सुशासन, प्रभावी नीति क्रियान्वयन और मजबूत निगरानी व्यवस्था का प्रत्यक्ष परिणाम है।यह उपलब्धि न केवल प्रभावी प्रशासनिक रणनीति का परिणाम है, बल्कि राज्य की खनिज आधारित अर्थव्यवस्था की मजबूती को भी दर्शाती है। इस वर्ष खनिज राजस्व में 14 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले पांच वर्षों की औसत वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 6 प्रतिशत से दोगुनी से अधिक है। यह वृद्धि राज्य शासन द्वारा अपनाए गए सुधारात्मक और तकनीकी उपायों की सफलता को रेखांकित करती है। खनिज राजस्व में इस वृद्धि के प्रमुख कारकों में एनएमडीसी (NMDC) तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए डिस्पैच रूट्स का प्रभावी अनुकूलन शामिल है। इसके साथ ही, ‘खनिज 2.0’ (Khanij 2.0) जैसे आईटी-आधारित प्लेटफॉर्म के माध्यम से पारदर्शिता, निगरानी और संचालन दक्षता में उल्लेखनीय  सुधार हुआ है। आगामी वित्तीय वर्ष में राज्य सरकार का विशेष ध्यान गौण खनिजों को भी ‘खनिज 2.0’ प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर रहेगा, जिससे संपूर्ण खनन प्रणाली को डिजिटल और एकीकृत बनाया जा सके। इसके अतिरिक्त, खनिज परिवहन की निगरानी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए वीटीएस (VTS), आई-चेक गेट्स (iCheck Gates) तथा ड्रोन आधारित निगरानी प्रणाली को और व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा। छत्तीसगढ़ सरकार का उद्देश्य खनिज संसाधनों के प्रबंधन में पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए राजस्व में सतत वृद्धि करना है। इन प्रयासों से न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि विकास कार्यों के लिए संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़

उत्तर प्रदेश बनेगा विश्व की आध्यात्मिक राजधानी, पर्यटन विभाग ने पेश किया यूपी@2047 का रोडमैप

विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा उत्तर प्रदेश, पर्यटन विभाग ने पेश किया विकसित यूपी@2047 का रोडमैप पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान 9.2 प्रतिशत से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 16 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन पर्यटन में वृद्धि के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाना लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” के विजन के तहत वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर इकॉनामी का लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग ने अपना रोडमैप जारी किया है। जिसके तहत विभाग ने वर्ष 2047 तक राज्य को विश्व की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में देश के पर्यटन आधारित सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) में यूपी का योगदान वर्तमान के लगभग 9.2 प्रतिशत में क्रमिक रूप से बढ़ोतरी करते हुए वर्ष 2029-30 तक 11 प्रतिशत, वर्ष 2035-36 तक 14 प्रतिशत और वर्ष 2046-47 तक 16 प्रतिशत तक प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पर्यटकों के लिए कमरों की उपलब्धता को 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विकसित उत्तर प्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में पर्यटन विभाग सबसे जरूरी कार्य राज्य में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के प्रयासों को और गति प्रदान करेगा। हालांकि इस दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में प्रदेश के पर्यटन एवं सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का वृहद पैमाने पर सौंदर्यीकरण व जीर्णोद्धार किया गया है। साथ ही यूपी पर्यटन नीति-2022 के तहत राज्य में पर्यटन आधारित अवसंरचना होटल, रेस्टोरेंट, होमस्टे का भी तेज गति से विकास किया गया है। इसी क्रम में राज्य के पर्यटकों के लिए उपलब्ध कमरों की संख्या को वर्तमान में प्रति लाख जनसंख्या पर 30 से बढ़ाकर वर्ष 2047 तक 150 तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही राज्य में विदेशी पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि को वर्तमान की 3 रात्रि से बढ़ाकर वर्ष 2046-47 तक 6 रात्रि तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी बढ़ोतरी करने के किए जाएंगे सभी संभव प्रयास पर्यटकों की संख्या के मामले में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि घरेलू पर्यटकों के मामले में उत्तर प्रदेश सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए पहला स्थान हासिल कर चुका है, जबकि विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी राज्य का चौथा स्थान है, जिसमें बढ़ोतरी करने के सभी संभव प्रयास किए जाएंगे। पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था के मानक के अनुसार राज्य में आने वाला 1 पर्यटक 6 लोगों के लिए आय का सृजन करता है। इस दिशा में वर्ष 2025 में महाकुंभ के भव्य आयोजन में आए रिकॉर्ड 66 करोड़ पर्यटकों के अतिरिक्त राज्य के अन्य पर्यटन स्थलों में 64.9 करोड़ पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया। पर्यटन विभाग पर्यटकों की इस संख्या को वर्ष 2029-30 तक बढ़ाकर 75 करोड़ और वर्ष 2047 तक 100 करोड़ पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। यूनेस्को से मान्यता प्राप्त विरासतों की संख्या 20 तक पहुंचाने का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में यूनेस्को से मान्यता प्राप्त भौतिक एवं अमूर्त सांस्कृतिक विरासतों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। जिसके तहत वर्तमान में प्रदेश के पास  यूनेस्को से मान्यता प्राप्त 07 विरासतें हैं, जिनकी संख्या वर्ष 2029-30 तक 08,  2035-36 तक 14 और वर्ष 2047 तक 20 पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करेगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का “विकसित उत्तर प्रदेश@2047” का विजन राज्य में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को एक नई गति देने के साथ राज्य की सांस्कृतिक विरासत को विश्व पटल पर और अधिक प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सनातन संस्कृति और भारत की प्राचीन सभ्यता के केंद्र काशी, अयोध्या, प्रयागराज, मथुरा-वृंदावन के विकास से उत्तर प्रदेश में न केवल पर्यटन गतिविधियों का विकास हो रहा है, बल्कि उत्तर प्रदेश वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी स्थापित हो रहा है। इसके साथ ही राज्य में रोजगार सृजन और स्थानीय अर्थव्यवस्था की बढ़ोतरी भी सुनिश्चित हो रही है।

US में पंजाब-हरियाणा के ड्राइवरों पर असर, 1790 नौकरियों का नुकसान, वर्क वीजा के बिना नहीं मिलेगा DL, पूरे USA में हो सकता है लागू

पटियाला  अमेरिका के इंडियाना राज्य ने अवैध रूप से गए सभी पंजाबी ड्राइवरों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए हैं। इंडियाना के नए कानून से 1790 ड्राइवरों की नौकरी चली गई है। इसमें अधिकतर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं।  इंडियाना की लाइसेंसिंग अथारिटी ने बताया कि लगातार इंडियन ड्राइवरों से हो रहे हादसों के बाद ये फैसला लिया गया। हादसों के बाद पूछताछ में पता चला कि पंजाब-हरियाणा मूल के ड्राइवरों को न तो रोड साइन इंग्लिश में पढ़ना आते थे और न ही वे अंग्रेजी में बात कर सकते थे। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 में हाउस एनरोल्ड एक्ट 1200 पर साइन कर दिए हैं। इंडियाना बीएमवी ने 16 मार्च को 1790 ड्राइवरों को नोटिस भेजा था, जिसमें लाइलेंस रद्द करने की सूचना दी गई थी। कानून लागू होते ही 1 अप्रैल को सभी नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल (जिनके पास एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था) अपने आप एक्सपायर हो गए। इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा बोले- हमारा मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्टीयरिंग व्हील के पीछे बैठा व्यक्ति पूरी तरह ट्रेंड और कानूनी रूप से योग्य हो। तरनतारन के युवक ने बैन को मारी थी ट्रक से टक्कर: इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा ने बताया कि कानून बनाने का मुख्य कारण पिछले 4 महीनों में अवैध इमिग्रेंट ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए गए हादसे हैं। इनमें कुल 6 मौतें हुईं। पंजाब के एक ट्रक ड्राइवर की अमेरिका के फ्लोरिडा टर्न पाइक में ड्राइविंग दौरान बड़ी लापरवाही का वीडियो सामने आया था। फ्लोरिडा की सड़क पर गलत यूटर्न लेने कारण एक बड़ा एक्सीडेंट हो गया था। इसमें वैन में सवार 3 लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक ड्राइवर तरनतारन के गांव रटैला का रहने वाला था। पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने रेड लाइट जंप कर मारी थी टक्कर: दूसरा हादसा 18 फरवरी 2026 को पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने किया। 24 साल का सुखदेव 2018 में अवैध रूप से आया था और मई 2025 में लाइसेंस लिया था। उसने हैंड्रिक्स काउंटी में यूएस 36 पर रेड लाइट क्रॉस की। सेमी ट्रक ने पिकअप ट्रक को टक्कर मारी जिसमें 64 वर्षीय टेरी शुल्त्ज की मौत हो गई। सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह सिर्फ 3 महीने से ट्रक चला रहा था। इसी के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाब के ट्रक ड्राइवर ने करीब 10 वाहनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी पहचान 21 साल के जशनप्रीत सिंह के रूप में हुई थी। हादसों के बाद कानून बनने पूरी कहानी     इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश:फरवरी 2026 में इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश किया गया। कई भयंकर एक्सीडेंट्स के बाद यह बिल पास हुआ। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 के मध्य में इसे साइन किया। लेफ्टिनेंट गवर्नर माइका बेकविथ और अटॉर्नी जनरल ने इसे सड़क सुरक्षा का बड़ा कदम बताया।     बीएमवी ने पहले नोटिस भेजा: इंडियाना ब्यूरो ऑफ मोटर व्हीकल्स (बीएमवी) ने 16 मार्च 2026 को लाइसेंस रद्द करने से पहले 1790 ड्राइवरों को मेल से नोटिस भेजा। इनमें वे सभी शामिल थे जिनके पास नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल था और लीगल स्टेटस यानी एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था।     1 अप्रैल 2026 को कानून लागू हुआ: 31 मार्च 2026 की मिडनाइट को सभी पुराने नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल एक्सपायर हो गए। अब अवैध इमिग्रेंट्स को नया सीडीएल नहीं मिलेगा। केवल एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा वाले ही अप्लाई कर सकेंगे।     नए कानून में अंग्रेजी आना जरूरी किया: नया लाइसेंस लेने के लिए एग्जाम अब केवल अंग्रेजी या अमेरिकन साइन लैंग्वेज में होगा। ड्राइवर को अंग्रेजी में बातचीत, ट्रैफिक साइन समझने और रिपोर्ट लिखना आना जरूरी कर दिया गया है। कंपनियां या ड्राइविंग लाइसेंस स्कूल अगर जानबूझकर अनएलिजिबल ड्राइवर को ट्रेनिंग या नौकरी देते हैं तो उन पर 50 हजार डॉलर (लगभग 42 लाख रुपए) जुर्माना होगा। फर्जी दस्तावेज देने पर भी 42 लाख की पेनल्टी लगेगी। लाइसेंस रद्द करने वाला इंडियाना पहला सूबा, बाकी जगह भी हो सकते अवैध रूप से ट्रक चला रहे प्रवासियों पर कार्रवाई करने वाला इंडिया अमेरिका का पहला सूबा है। गवर्नर माइक ब्रॉन ने बताया कि ये फैसला फरवरी 2026 में पंजाबी ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए 2 बड़े हादसों के बाद लिया गया है। खासकर फरवरी 2026 में सुखदीप सिंह के ट्रक से हुए एक्सीडेंट में 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। सरकार का कहना है कि इससे अनट्रेंड और अनक्वालिफाइड ड्राइवरों को रोका जाएगा, सड़कें सुरक्षित होंगी। नए नियम में अंग्रेजी आना अनिवार्य है। रद्द लाइसेंस वाले ट्रक ड्राइवरों को नौकरी देने वाले ट्रक मालिकों पर 50000 डॉलर जुर्माना लगेगा।

सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन के बीच हुई चर्चा, एमपी में होगा बड़ा प्रशासनिक बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होनेवाला है। कई जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक यानि एसपी बदले जाएंगे। इसकी कवायद तेज हो चुकी है। राज्य के आइएएस-आइपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल के लिए वरिष्ठ स्तर पर बातचीत चल रही है। राज्य के सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा के बाद प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल कर आइएएस-आइपीएस अधिकारियों को नए दायित्व देने की अंदरखाने तैयारी की जा रही है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म हो चुका है और 2026-27 की शुरुआत हो गई है। प्रदेशभर के कलेक्टर-संभागायुक्तों को राजस्व संग्रहण के जो लक्ष्य मिले थे, उसके परिणाम भी सामने आ चुके हैं। एसआइआर की बंदिश तो काफी पहले ही खत्म हो चुकी हैं। प्रशासनिक दक्षता के साथ ही अधिकारियों के काम करने के तरीके व आम जनों से उनके व्यवहार को परखा जा रहा है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी है। सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन ने अच्छे व बुरे बर्ताव के कारण निशाने पर आए कई आइएएस के संबंध में बातचीत की है। निगेटिव रिपोर्ट वाले अधिकारियों को मौजूदा ओहदे से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी देने पर चार दौर की चर्चा पूरी की जा चुकी है।  पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी पुलिस महकमे में भी खासा बदलाव किया जाना है। कई जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं। पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी है। 15 जिलों के एसपी बदल सकते हैं, खंडवा, भिंड, धार, रीवा झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में चर्चा है कि 15 से ज्यादा जिलों के एसपी को इधर से उधर किया जाएगा। इसके अलावा खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में तैनात है। ऐसे में इन्हें नई जिम्मेदारी मिलना तय है। साथ ही परफॉर्मेंस पर एसपी को बड़े जिलों की कमान मिल सकती है।

एमपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट की घोषणा 15 अप्रैल से पहले, माध्यमिक शिक्षा मंडल अंतिम चरण में, 16 लाख छात्रों का इंतजार

भोपाल  मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा मंडल इस साल 15 अप्रैल से पहले रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है, जबकि संभावित तारीख 7 से 12 अप्रैल के बीच तय हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं और रिजल्ट पूरी तरह त्रुटिरहित जारी किया जाएगा। इस बार करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए हैं, ऐसे में समय पर परिणाम घोषित कर छात्रों को आगे की पढ़ाई में कोई देरी न हो, यह विभाग की प्राथमिकता है। 16 लाख से ज्यादा छात्र हुए शामिल इस वर्ष प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए परीक्षा संचालन के लिए प्रदेशभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। पूरे प्रदेश से बने 100 नकल प्रकरण परीक्षा को नकलमुक्त बनाने के लिए इस बार विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी निगरानी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इसके बावजूद मुरैना में सबसे ज्यादा 41 नकल के प्रकरण सामने आए, जबकि भोपाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां 20 मामले दर्ज किए गए। वहीं, पूरे प्रदेश से करीब 100 नकल प्रकरण बने थे। अंतिम चरण में रिजल्ट की तैयारी स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। विभाग हर स्तर पर जांच कर रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती न रह जाए। उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, जिससे छात्रों को कोई परेशानी न हो। संभावना है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। एक्सपर्ट की सलाह: तनाव से बचें छात्र परीक्षा के दौरान छात्रों की सेहत को लेकर भी विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक रूप से सहयोग दें। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार से बेहतर प्रदर्शन संभव है। रिजल्ट का ट्रेंड: उतार-चढ़ाव का पैटर्न     2017 में 10वीं का रिजल्ट 49.9% और 12वीं का 67.8% रहा।     2018 में 10वीं 66.54% और 12वीं 68.08% पहुंचा।     2019 में 12वीं का रिजल्ट 72.37% तक गया।     2021 में कोरोना के कारण दोनों कक्षाओं का रिजल्ट 100% रहा।     2023 में 12वीं का रिजल्ट गिरकर 55.28% पर आ गया।     2025 में सुधार दिखा, जहां 10वीं में 76.22% और 12वीं में 74.28% छात्र पास हुए। समय पर रिजल्ट, आगे की पढ़ाई में राहत शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य इस बार समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी के अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। यदि तय समयसीमा के भीतर परिणाम घोषित हो जाते हैं, तो यह छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए बड़ी राहत होगी।

GMADA की स्कीम, बनेंगी चंडीगढ़ जैसी लग्जरी कोठियां, ₹60 हजार प्रति गज तक पहुंचेगी जमीन की कीमत

चंडीगढ़   सिटी ब्यूटीफुल के नाम से देश- दुनिया में विख्यात चंडीगढ़ जैसा एक और नया शहर बसाने की तैयारियां शुरू हो गई है. पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में 309.30 एकड़ जमीन पर लो डेंसिटी आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी जहां पुराने चंडीगढ़ के VIP सेक्टरों की तर्ज पर बड़ी- बड़ी लग्जरी कोठियां और बंगले बनाए जाएंगे. किसानों को जमीन के बदले प्रति एकड़ 6.24 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।  उन्हें 29 जून तक अपना सहमति पत्र ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी (GMADA) को देना होगा. इसके बाद, आगामी प्रकिया शुरू की जाएगी. मुल्लांपुर में गरीबदास गांव के पास विकसित होने वाला यह इलाका भीड़- भाड़ से दूर और हरियाली व पर्यावरण के अनुकूल रहेगा।  यह रहेगी प्लॉट की कीमत इस योजना में 500 गज (1 कनाल) और 1,000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे. इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है. आवेदन करते समय कुल कीमत के 10% पैसे का भुगतान करना होगा।  न्यू चंडीगढ़ की खासियतें     हरियाली और पर्यावरण अनुकूल बसाएं जा रहे न्यू चंडीगढ़ शहर को ग्रिड पैटर्न में बसाया जाएगा जिससे ट्रैफिक और प्लानिंग बेहतर रहेगी।      60, 45 और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।      GMADA एक्सप्रेस-वे से बद्दी और आनंदपुर साहिब तक आसान कनेक्टिविटी मिलेगी।      करीब 33% एरिया को हरियाली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा जिसमें पार्क और ओपन स्पेस शामिल हैं।      900 हेक्टेयर में स्पोर्ट्स और मनोरंजन सुविधाएं जैसे स्टेडियम और गोल्फ कोर्स विकसित होंगे।      रिहायशी, मेडिसिटी, एजुकेशन सिटी, ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और प्रस्तावित मेट्रो के साथ रोजगार और आवागमन की बेहतर व्यवस्था होगी।  किसानों को मिलेगी सुविधा इस योजना के लिए जमीन देने वालों को लैंड पूलिंग की सुविधा का लाभ मिलेगा. इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट मिल सकता है. इस प्लॉट में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलेगी. यदि सरकार जमीन बेचती है या विकसित परियोजना से मुनाफा अर्जित करती है तो जमीन देने वाले किसानों को भी इसका फायदा पहुंचेगा।  मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ।  इको सिटी के पास बसेगी सोसाइटी यह स्कीम न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में मुल्लांपुर गरीबदास गांव के पास बनाई जा रही है। यहां बड़े-बड़े प्लॉट और फार्महाउस जैसे घर बनाए जाएंगे। यानी कम भीड़-भाड़ वाला इलाका होगा। इसका मकसद है कि हरियाली और पर्यावरण का संतुलन बना रहे। GMADA के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इसे लोग काफी पसंद करेंगे, क्योंकि पहले ही इस इलाके में GMADA की ओर से ईको सिटी-1, ईको सिटी-2 और मेडिसिटी बसाई गई हैं। एक से दो कनाल के होंगे प्लॉट इस स्कीम में 500 गज (1 कनाल) और 1000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे। इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है। यानी 500 गज का प्लॉट लगभग 3 करोड़ तक पड़ सकता है। आवेदन करते समय कुल कीमत का 10% पैसा (EMD) जमा करना होगा। स्कीम में कुल प्लॉटों की संख्या अभी तक क्लियर नहीं है, लेकिन योजना में लगभग 185 से 200 के बीच रहने की उम्मीद है। 6 शहरों की स्टडी की गई लो-डेंसिटी योजना दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम, गांधीनगर और लखनऊ में भी है। इन इलाकों की स्टडी भी GMADA की टीम ने की है, ताकि योजना को अच्छे तरीके से पूरा किया जा सके। इसके अलावा GMADA पहले ही न्यू चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित कर रहा है। यहां भी चंडीगढ़ की तरह 17 सेक्टर काटे गए हैं। किसानों को लैंड पूलिंग जमीन मालिकों के पास नकद मुआवजे के अलावा लैंड पूलिंग पॉलिसी का विकल्प भी है। इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट (SCO) मिल सकता है। इसके अलावा पूरा एरिया पहले ही बस चुका है, जिससे इलाके के लोगों का फायदा होगा।  

इंदौर के ट्रिपल लेयर ब्रिज से तीन एनएच मार्गों को मिलेगा रास्ता, पचास हजार वाहन होंगे प्रभावित

इंदौर इंदौर के बायपास पर एमआर-10 जंक्शन पर थ्री लेयर फ्लायओवर का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि, दो साल में फ्लायओवर का निर्माण पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई। अब यह ब्रिज अक्तूबर तक बनकर तैयार होगा। ब्रिज पर देश का सबसे बड़ा पियर कैप बनाया जा रहा है, जिसकी चौड़ाई 27 मीटर रहेगी। इसी पियर कैप के ऊपर गर्डर रखे गए हैं।  इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर ब्रिज बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि यहां तीन राष्ट्रीय राजमार्ग आकर मिलते हैं। एबी रोड के अलावा इंदौर-अहमदाबाद और इंदौर-नागपुर हाईवे इस जंक्शन से जुड़ते हैं। नागपुर को जोड़ने के लिए इंदौर-हरदा के लिए 25 किलोमीटर लंबा बायपास बनाया गया है। इसका ट्रैफिक अंडरपास से होकर गुजरेगा। वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी इस ब्रिज के निर्माण से हर दिन 50 हजार से ज्यादा वाहन चालकों को फायदा होगा। इसके अलावा इंदौर आने वाले वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी। अभी तक बोगदों के भीतर से वाहनों को आना पड़ता है और इस कारण कई बार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, लेकिन अब इससे भी राहत मिलेगी। बेस्ट प्राइस की तरफ के मार्ग से वाहन इंदौर की ओर ब्रिज के नीचे से आ सकेंगे। फ्लायओवर का एक हिस्सा जंक्शन पर बंगाली चौराहे की तरफ बना है, जबकि दूसरे सिरे का निर्माण बेस्ट प्राइस के पास हुआ है। डेढ़ किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे एक और ब्रिज बन चुका है, जिस पर एबी रोड का ट्रैफिक गुजर रहा है। महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहन इस ब्रिज का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अंडरपास को इंदौर-हरदा मार्ग से जोड़ा गया है। अंडरपास बनकर तैयार हो चुका है। अब सड़क निर्माण स्टार चौराहा तक किया जाएगा। इंदौर-हरदा मार्ग का निर्माण भी अंतिम दौर में है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, मुंबई के सी लिंक की तर्ज पर ब्रिज पर एस्थेटिक केबल से लाइटिंग की जाएगी, ताकि यह आकर्षक दिखे। यह फ्लायओवर इंदौर की एंट्री का मुख्य मार्ग भी बनेगा। यहां से ज्यादातर वाहन शहर में आ-जा सकेंगे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह प्रदेश का पहला तीन स्तरीय ब्रिज है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ इंदौर की एंट्री को भी आसान बनाएगा।   

चक्का जाम और DL रिन्यू में देरी पर अब नहीं होगी सजा! समझें जन विश्वास बिल के अहम पहलू

 नई दिल्ली देश की संसद से जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल पारित हो गया है. गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही यह बिल कानून की शक्ल ले लेगा. इस बिल के कानून बन जाने के बाद मौजूदा कानून के कई अपराध, अपराध के दायरे से ही बाहर हो जाएंगे. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का दावा है कि इससे जनता की ईज ऑफ लिविंग बेहतर होगी, जीवनस्तर में बदलाव आएगा।  उन्होंने इसे 'राम राज्य' की अवधारणा से जोड़ते हुए उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है. जन विश्वास बिल के जरिये 80 केंद्रीय कानून संशोधित किए गए हैं. इस संशोधन के जरिये करीब एक हजार अपराध, अपराध के दायरे से बाहर कर दिए गए हैं. कुछ अपराध में सजा का प्रावधान हटाकर जुर्माना जोड़ा गया है।  वहीं, कुछ अपराध ऐसे भी हैं जिनमें अब केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा. बात करते हैं ऐसी कुछ 'छोटी गलतियों', जो इस बिल के कानून बन जाने के बाद अपराध के दायरे से ही बाहर हो जाएंगी।  ड्राइविंग लाइसेंस ड्राइविंग लाइसेंस की वैधता अवधि समाप्त होने के बाद इसके रिन्यू कराने में मामूली देरी अपराध के दायरे से बाहर होगी. अब ड्राइविंग लाइसेंस वैधता समाप्त होने के बाद 30 दिन तक वैलिड माना जाएगा. डीएल रिन्यू कराने पर उसकी वैधता अवधि की गणना रिन्यू कराने की तारीख से की जाएगी, वैधता समाप्त होने की तारीख से नहीं।  राजमार्ग जाम राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत राजमार्ग जाम करने या ऐसी स्थिति उत्पन्न करने, जिससे आवागमन असुरक्षित हो, पर पांच साल तक की जेल या जुर्माना या फिर दोनों सजा का प्रावधान है. जन विश्वास बिल में इसके लिए जेल का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है. राजमार्ग जाम करने के लिए नागरिक दंड, यानी जुर्माने का प्रावधान होगा।  आग का झूठा अलार्म आग का झूठा अलार्म देना अब अपराध नहीं होगा. जन विश्वास बिल में इसे अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया है. मौजूदा कानून के तहत यह अपराध की श्रेणी में आता है और इसके लिए सजा का प्रावधान है।  जन्म-मृत्यु की सूचना न देना जन्म-मृत्यु की सूचना न देना भी मौजूदा समय में कानून अपराध है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ही बात करें तो दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना अपराध है  और इसके लिए सजा का भी प्रावधान है. जन विश्वास बिल के जरिये इसे भी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है. कॉपीराइट अधिनियम, 1957 के तहत रजिस्टर में गलत प्रविष्टि भी अब अपराध के दायरे में नहीं आएगी।  आवारा मवेशियों से फसल को नुकसान आवारा मवेशियों से फसल को नुकसान पहुंचना दंडात्मक अपराध है. जन विश्वास बिल में कैटल ट्रेसपास एक्ट, 1971 को अपडेट कर सजा के प्रावधान को नागरिक दंड यानी जुर्माने में बदलने की बात है. इस कानून के जरिये पशुओं को छोड़ने या आवारा छोड़ने पर भी केवल जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान किया गया है।  बिजली से जुड़े अपराध में जुर्माना बिजली अधिनियम, 2003 के मुताबिक विभाग के आदेश-निर्देश का पालन नहीं करने पर तीन महीने की जेल या जुर्माने का प्रावधान है. जन विश्वास बिल के कानून बन जाने के बाद इस अधिनियम से जुड़े अपराध पर जेल का प्रावधान खत्म हो जाएगा. ऐसे मामलों में केवल जुर्माने का प्रावधान रह जाएगा।  कॉस्मेटिक्स का निर्माण-बिक्री ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमों के खिलाफ कॉस्मेटिक्स का निर्माण करना, बिक्री करना दंडात्मक अपराध है. इसके लिए एक साल जेल, 20 हजार रुपये जुर्माना या दोनों सजा हो सकती है. जन विश्वास बिल में जेल की सजा का प्रावधान खत्म कर केवल जुर्माने का प्रावधान किया गया है।  पहली बार अपराध पर सुधार का मौका जन विश्वास बिल में कुछ कानूनों के उल्लंघन पर सुधार का मौका देने की बात है. अप्रेंटिस अधिनियम के तहत जानकारी देने से इनकार करना या प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे व्यक्ति से ओवरटाइम काम कराना मौजूदा कानून के तहत दंडनीय अपराध है. ऐसे अपराध में पहली बार उल्लंघन पर सलाह, दूसरी बार उल्लंघन पर चेतावनी और उसके बाद भी यही अपराध किए जाने की स्थिति में जुर्माने का प्रावधान जन विश्वास बिल में किया गया है।  अपराध की गंभीरता के अनुपात में जुर्माना जन विश्वास बिल में यह प्रावधान किया गया है कि जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुपात में तय की जाएगी. इसमें यह प्रावधान भी किया गया है कि विधेयक में निर्धारित जुर्माने और दंड हर तीन साल में न्यूनतम राशि के 10 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ेंगे। 

युवाओं को सशक्त बना रहा सोशल मीडिया, सीएम डॉ. यादव का बयान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में शुक्रवार को सोशल मीडिया की मध्यप्रदेश टूरिज्म़ इनफ्लुएंसर मीट का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोशल मीडिया वर्तमान समय में युवाओं की सबसे बड़ी ताकत बन गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई शिक्षा नीति से सनातन परंपरा के वैचारिक आधार को शिक्षा नीति में समाहित किया है। ऐसा करके युवाओं को सच्चे संस्कार के साथ विकास का अवसर दिया गया है। हमें विकास के साथ-साथ प्राचीन काल के गौरव और परंपराओं पर भी गर्व होना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के माध्यम से हम बाबा विश्वनाथ के धाम में उज्जैन और मध्यप्रदेश के प्राचीन गौरव की झलक दिखा रहे हैं। सम्राट विक्रमादित्य की न्यायप्रियता, वीरता और धर्म परायणता हम सबको प्रेरित और गौरवान्वित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने प्राचीन गौरव के साथ विकास को नया आयाम दिया है। वाराणसी में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर और उज्जैन में महाकाल लोक के निर्माण ने धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां दी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच में सद्भाव और विकास के साथ सहयोग बढ़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर से संवाद किया और उनके प्रश्नों के उत्तर भी दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश दो भाइयों की जोड़ी है। दोनों मिलकर विकास के नए प्रतिमान बनाएंगे। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में राज्यों के बीच सद्भाव और विकास के लिए सहयोग बढ़ा है। सिंहस्थ: 2028 में बनेंगे कीर्तिमान उज्जैन में वर्ष 2028 में होने वाला सिंहस्थ महाकुंभ अद्भुत होगा। इसमें श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित किया जा रहा है। देश-विदेश से आने वाले सभी नागरिकों,पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या अप्रत्याशित रहेगी। इस दृष्टि से नए कीर्तिमान भी बनेंगे।  

छत्तीसगढ़ में लाखों श्रमिकों को राहत: DA और सैलरी दरों में वृद्धि, नई वेतन दरें की गई लागू

रायपुर  प्रदेश के लाखों श्रमिकों के लिए राहत की खबर है। राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों के लिए नई परिवर्तनशील महंगाई भत्ता (DA Hike) और न्यूनतम वेतन दरों का निर्धारण कर दिया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होकर 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेंगी। महंगाई भत्ते में वृद्धि लेबर ब्यूरो, शिमला से प्राप्त जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर औद्योगिक सूचकांक में औसतन 11.28 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी आधार पर श्रमिकों के महंगाई भत्ते में 226 रुपये प्रतिमाह की बढ़ोतरी की गई है। वहीं, सूचकांक में 34 अंकों की वृद्धि के चलते कृषि श्रमिकों के भत्ते में 170 रुपये प्रतिमाह का इजाफा हुआ है। अगरबत्ती श्रमिकों को भी लाभ अगरबत्ती निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिकों के लिए भी दरों में वृद्धि की गई है। प्रति हजार अगरबत्ती निर्माण पर 8.53 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी निर्धारित की गई है, जिससे इस क्षेत्र के श्रमिकों को भी सीधा लाभ मिलेगा। श्रेणी और जोन के अनुसार वेतन सरकार द्वारा निर्धारित नई दरों के अनुसार अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल और उच्च कुशल श्रमिकों के लिए अलग-अलग वेतन तय किए गए हैं। जोन ‘अ’, ‘ब’ और ‘स’ के आधार पर मासिक वेतन 10,882 रुपये से लेकर 13,612 रुपये तक निर्धारित किया गया है। दैनिक वेतन और जानकारी दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रमिकों की श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से 524 रुपये के बीच रहेगा। श्रमायुक्त हिमशिखर गुप्ता ने इन दरों को तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। अधिक जानकारी के लिए विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.shramevjayate.cg.gov.in या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से संपर्क किया जा सकता है। इसी क्रम में अर्द्धकुशल श्रमिकों हेतु वेतन क्रमशः 12,052.00 रुपये (जोन अ), 11,792.00 रुपये (जोन ब) और 11,532.00 रुपये (जोन स) निर्धारित है। कुशल श्रमिकों को जोन 'अ' में 12,832.00 रुपये, 'ब' में 12,572.00 रुपये और 'स' में 12,312.00 रुपये प्राप्त होंगे, जबकि उच्च कुशल श्रमिकों के लिए यह दरें क्रमशः 13,612.00 रुपये, 13,352.00 रुपये और 13,092.00 रुपये प्रतिमाह होंगी।  दैनिक वेतन की बात करें तो यह श्रेणी और जोन के अनुसार 419 रुपये से लेकर 524 रुपये के मध्य देय होगा। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट https://shramevjayate.cg.gov.in/ या श्रमायुक्त कार्यालय, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर से प्राप्त की जा सकती है