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एमएसपी से किसानों को मिलेगा लाभ, पारदर्शी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता: सूर्य प्रताप शाही

एमएसपी से किसानों को मिलेगा लाभ, पारदर्शी व्यवस्था हमारी प्राथमिकता: सूर्य प्रताप शाही कृषि मंत्री ने रबी सीजन की फसलों की खरीद के लिए बनाई गई व्यापक रणनीति के बारे में मंगलवार को दी जानकारी एमएसपी पर दलहन-तिलहन खरीद 7 अप्रैल से होगी शुरू, 30 जून तक चलेगी चना, मसूर, सरसों की खरीद पिछले वर्ष की तुलना में एमएसपी दरों में वृद्धि, कृषि विभाग की योजनाओं पर रिकॉर्ड खर्च और बीज वितरण में ऐतिहासिक उपलब्धि का किया उल्लेख* लखनऊ रबी सीजन 2026-27 में भी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ मिलेगा। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने मंगलवार को लोक भवन में पत्रकारों से बातचीत में बताया कि चना, मसूर, सरसों की खरीद 7 अप्रैल से 30 जून तक की जाएगी। इस दौरान पारदर्शी डिजिटल व्यवस्था, डीबीटी भुगतान और विस्तृत क्रय नेटवर्क के माध्यम से किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।  सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार किसानों की आय बढ़ाने, फसलों का उचित मूल्य दिलाने और कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। एमएसपी पर दलहन और तिलहन की खरीद की यह रणनीति किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में उर्वरक की कोई कमी नहीं है और 75 जनपदों में उर्वरकों की सप्लाई सुचारु रूप से हो रही है। एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था कृषि मंत्री ने बताया कि मूल्य समर्थन योजना किसानों के लिए सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती है। चने का एमएसपी 5875 रुपये प्रति क्विंटल, मसूर का 7000 रुपये प्रति क्विंटल, सरसों का 6200 रुपये प्रति क्विंटल और अरहर का 8000 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, जिससे किसानों को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य मिल सके। खरीद लक्ष्य और समयसीमा सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने फसलों की खरीद के स्पष्ट लक्ष्य तय किए हैं। उन्होंने कहा कि चने के लिए 2.24 लाख मीट्रिक टन, मसूर के लिए 6.77 लाख मीट्रिक टन, सरसों के लिए 5.30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष एमएसपी दरों में वृद्धि कर किसानों को अतिरिक्त लाभ देने का प्रयास किया गया है। उन्होंने कहा कि चने पर 225 रुपये, मसूर पर 300 रुपये और सरसों पर 250 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे किसानों की आय में सीधा इजाफा होगा। सरकार लगातार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है और एमएसपी में यह वृद्धि उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। पारदर्शी खरीद और भुगतान प्रणाली कृषि मंत्री ने बताया कि खरीद प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए सभी क्रय केंद्रों पर आधार-सक्षम पीओएस मशीनें स्थापित की गई हैं। इससे वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी और किसी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना समाप्त होगी। किसानों को उपज का भुगतान सीधे डीबीटी के माध्यम से उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे भुगतान प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी। क्रय केंद्रों और एजेंसियों की व्यवस्था कृषि मंत्री ने बताया कि इस वर्ष खरीद व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ी संख्या में क्रय केंद्र स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। भारत सरकार की एजेंसियां नैफेड और एनसीसीएफ को राज्य की 5 एजेंसियां यूपीपीसीयू, यूपीपीसीएफ, जैफेड और यूपीएसएस किसानों से उपज को क्रय करके सप्लाई करेंगी, जिसका लाभ किसानों को सीधे खाते में वितरित किया जाएगा। इन एजेंसियों के समन्वय से खरीद प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान इसका लाभ उठा सकें। कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का किया उल्लेख सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि प्रदेश में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। वर्ष 2025-26 में कृषि विभाग द्वारा लगभग 5700 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि विभिन्न योजनाओं पर व्यय की गई, जो रिकॉर्ड उपलब्धि है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सुधारात्मक प्रावधान लागू करने से राज्य को 303 करोड़ रुपये की बचत हुई है। बीज वितरण की दी जानकारी कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को सशक्त बनाने के लिए बड़े पैमाने पर बीज वितरण किया गया है। 11.25 लाख किसानों को 50 फीसदी अनुदान पर बीज उपलब्ध कराया गया, जबकि 12.73 लाख किसानों को मुफ्त बीज वितरित किए गए। जायद फसलों को बढ़ावा देने के लिए इस वर्ष 31,950 क्विंटल बीज उपलब्ध कराया गया, जिसमें मूंगफली, उड़द और मूंग शामिल हैं। उर्वरक उपलब्धता की दी जानकारी राज्य में किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राज्य में कुल 25.41 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो सभी 75 जनपदों में संतुलित रूप से वितरित किया गया है। उपलब्ध उर्वरकों में 11.26 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.08 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 4.64 लाख मीट्रिक टन एनपीके, 3.45 लाख मीट्रिक टन एसएसपी तथा 98 हजार मीट्रिक टन पोटाश (एमओपी) शामिल है। यह मात्रा किसानों की वर्तमान जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त है और किसी भी जिले में कमी की स्थिति नहीं है। उर्वरकों का वितरण पूरी तरह डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है। पीओएस मशीनों के जरिए अब तक 63.34 लाख मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है, जिससे पारदर्शिता बनी हुई है और वास्तविक किसानों तक ही लाभ पहुंच रहा है। अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार ने अग्रिम योजना के तहत उर्वरकों का भंडारण भी किया है, ताकि आने वाले खरीफ सीजन में भी किसी प्रकार की कमी न हो। साथ ही वैज्ञानिकों की सलाह के आधार पर प्रति हेक्टेयर उर्वरक उपयोग के मानक तय किए गए हैं, जिससे संतुलित उपयोग को बढ़ावा मिल सके। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, क्योंकि प्रदेश में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता है। सरकार लगातार इसकी निगरानी कर रही है, ताकि हर किसान को समय पर उर्वरक मिल सके। सीड पार्क की स्थापना का भी किया उल्लेख कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश को बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने … Read more

नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी पर सवाल: क्या 2026 में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच युद्ध हो सकता है?

 नईदिल्ली  ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच हाल के युद्ध ने पूरी दुनिया की निगाहें अपनी ओर खींच रखी हैं. हर कोई सोच रहा है कि आगे क्या होगा. लोग डर और चिंता में हैं क्योंकि किसी भी समय हालात बिगड़ सकते हैं. ऐसे में कुछ लोग इसे नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियों से जोड़ रहे हैं, जिन्होंने आने वाले समय में बड़े युद्ध और दुनिया में उथल-पुथल होने की बात कही थी. यही वजह है कि 2026 में नास्त्रेदमस जैसी पुरानी भविष्यवाणियां फिर सुर्खियों में आ गई हैं. लोग यह भी सोच रहे हैं कि इस बड़े तनाव का असर सोने और चांदी की कीमतों पर क्या होगा. क्या यह शेयर बाजार में कोई बड़ी गिरावट का संकेत है।  क्या कहती है नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी? नास्त्रेदमस ने अपनी भविष्यवाणी में सीधे सीधे कभी सोना, चांदी या 2026 में मंहगाई का जिक्र नहीं किया था. लेकिन, उनकी लिखी बातें अक्सर युद्ध, आर्थिक उथल-पुथल और दुनिया में अस्थिरता की चेतावनी के रूप में देखी जाती हैं. आज लोग इन्हें हाल के युद्ध और संकट से जोड़कर देख हैं. युद्ध के समय लोग सोना और चांदी जैसी संपत्ति की तरफ जाते हैं. इसका मतलब है कि मांग बढ़ने पर कीमतें ऊपर जा सकती हैं. लेकिन, बाजार में हमेशा ऐसा नहीं होता है क्योंकि कीमतों में हमेशा उतार चढ़ाव बना रहता है।  सोना‑चांदी के रेट ऊपर जाएंगे या नीचे? हाल ही के मार्केट ट्रेंड्स बताते हैं कि स्थिति थोड़ी उलझी हुई है. युद्ध और तनाव होने के बावजूद सोना और चांदी की कीमतें कभी-कभी नीचे जा रही हैं. इसका मुख्य कारण है अमेरिका में डॉलर का मजबूत होना और ब्याज दरों का बढ़ना. असल में इसका मतलब यह है कि सिर्फ दुनिया में युद्ध का होना ही कीमतें बढ़ाने के लिए काफी नहीं. बाजार में और भी कई चीजें असर डालती हैं जैसे कि पैसे की कीमत (डॉलर) और बैंक की नीतियां. यानी, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी चाहे जैसी भी हो, असली मार्केट की चाल तो इन असली आर्थिक कारणों से तय होती है।  क्या हो सकता है तीसरे विश्व? आजकल लोग ये बात खूब कर रहे हैं कि क्या मौजूदा हालात आगे चलकर तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकते हैं. इसकी वजह ये है कि नास्त्रेदमस ने अपनी लिखी बातों में बड़े युद्ध का जिक्र किया था, जिसे लोग आज के हालात से जोड़ रहे हैं. लेकिन सच यह है कि उनकी बातों में कहीं भी साफ-साफ आज के किसी तीसरे विश्व युद्ध का जिक्र नहीं मिलता है।  एक्सपर्ट क्या कहते हैं और नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी क्या कहती है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोना, चांदी और शेयर बाजार का हाल महंगाई, ब्याज दर और दुनिया भर की सप्लाई जैसी चीजों पर निर्भर करता है. यानी बाजार असली आर्थिक हालात से चलता है, न कि किसी भविष्यवाणी से. वहीं, नास्त्रेदमस की लिखी बातें सीधी नहीं होतीं हैं, बल्कि इशारों में होती हैं. लोग उन्हें अपने हिसाब से समझ लेते हैं, इसलिए एक ही बात के अलग-अलग मतलब निकाले जाते हैं।  नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां लोगों के बीच चर्चा और डर को जरूर बढ़ा देती हैं, लेकिन असली मार्केट ऊपर-नीचे होने के पीछे वजह अर्थव्यवस्था और दुनिया के हालात होते हैं. इसलिए, निवेश करते समय अंदाजों या भविष्यवाणी पर नहीं, बल्कि सही डेटा और एक्सपर्ट की सलाह पर भरोसा करना ज्यादा समझदारी है।   

किसानों के लिए बड़ा ऐलान: कृषि बजट में 90,000 करोड़, उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताई सरकार की प्राथमिकता

भोपाल  मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 90 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो किसानों के कल्याण और कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उपमुख्यमंत्री  देवड़ा मंगलवार को नीमच जिले के जावद में मंडी प्रांगण में आयोजित चार दिवसीय जहर मुक्त जीरो बजट कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पूरे वर्ष कृषि और किसानों से जुड़े कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को आधुनिक तकनीकों और नई पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।उपमुख्यमंत्री  देवड़ा ने किसानों से आह्वान किया कि प्रशिक्षण शिविर में उन्होंने जो भी नई तकनीकें और अनुभव प्राप्त किए हैं, उन्हें अपनी खेती में लागू करें ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ लागत को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक और कम लागत वाली खेती की दिशा में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। उपमुख्यमंत्री  देवड़ा ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि आयुष्मान भारत के माध्यम से गरीब परिवारों को 5 लाख रुपये तक के नि:शुल्क उपचार की सुविधा मिल रही है, वहीं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों के खातों में सीधे आर्थिक सहायता पहुंचाई जा रही है।  देवड़ा ने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपने-अपने क्षेत्र में पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करे तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वर्ष 2047 तक विकसित भारत का सपना अवश्य साकार होगा। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल आयोजन की सराहना करते हुए किसानों को आधुनिक तकनीक और ज्ञान के साथ खेती को और अधिक समृद्ध बनाने का संदेश दिया। समारोह में बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे। इस अवसर पर विधायक सर्व ओमप्रकाश सखलेचा,  दिलीप सिंह परिहार,  अनिरूद्ध मारू सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।  

राज्यपाल पटेल बोले: रोगियों के उपचार में सेवा भाव की भूमिका अहम

रोगियों के उपचार प्रयासों में सेवा भाव प्रमुख : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने की लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीन-दुखियों की सेवा मानवता की सेवा है। इससे आत्म संतोष मिलता है। प्रदेश को सिकल सेल और टी.बी. मुक्त बनाने के प्रयासों में सेवा भाव को सर्वोपरि होना चाहिए।    राज्यपाल पटेल मंगलवार को लोकभवन में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन 2047 एवं टी.बी. मुक्त भारत अभियान के तहत लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा जवाहर खण्ड सभागार में आयोजित बैठक में उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल और आयुष मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद थे। राज्यपाल पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान योजना के तहत दी जाने वाली सुविधाएं और पात्रता आदि की समुचित जानकारी दें। प्रदेश स्तरीय सिकल सेल उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शून्य से 40 वर्ष तक के व्यक्तियों की विशेष तौर पर जाँच करें। जाँच शिविरों में आमजन को बताएँ कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सिकल सेल एनीमिया का इलाज कवर होता है। उन्होंने आयुष्मान योजना के तहत सिकल सेल रोगियों के इलाज की जिलेवार समीक्षा की। जन प्रतिनिधि पोषण आहार वितरण में करें सक्रिय सहयोग राज्यपाल पटेल ने बैठक में टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश को टी.बी. मुक्त बनाने स्थानीय जन प्रतिनिधियों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विशेष कर जनजातीय क्षेत्रों के जन प्रतिनिधि टी.बी. रोगियों को पोषण आहार वितरण में सक्रिय सहयोग करें। राज्यपाल पटेल ने नि:क्षय मित्रों की जिलेवार समीक्षा की। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में और अधिक नि:क्षय मित्रों को जोड़कर पोषण आहार वितरण को बढ़ाने के प्रयासों पर बल देने के निर्देश दिए है।  खनन क्षेत्रों में भी कराएं टी.बी. की सघन जाँच राज्यपाल पटेल ने खनन क्षेत्रों में निवासरत और कार्यरत व्यक्तियों की टी.बी. जाँच कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने सिकल सेल जाँच लक्ष्य एवं पूर्ति, जेनेटिक कार्ड वितरण, हाईड्राक्सी यूरिया की उपलब्धता, गर्भावस्था में माताओं और शिशुओं का सिकल सेल प्रबंधन, सिकल सेल रोगियों को आयुष्मान कार्ड वितरण, आयुष्मान योजना का लाभ, दिव्यांगता प्रमाण पत्र वितरण, 125 दिवसीय सिकल सेल जागरूकता अभियान आदि विस्तार से समीक्षा कर जरूरी निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने आयुष्मान कार्ड की प्रगति, सिकल सेल और टी.बी. उन्मूलन कार्यक्रम के विभिन्न मानको को शत-प्रतिशत पूरा करने विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। राज्यपाल पटेल को आयुष विभाग के प्रमुख सचिव शोभित जैन ने जिलेवार दवा वितरण, घर-घर दवाई वितरण, जाँच आदि कार्यक्रमों की विस्तार से जानकारी दी। जैन ने अनुसूचित जनजाति बाहुल्य जिलों में औषधि वितरण के विशेष प्रयासों और नवाचारों की जानकारी भी दी। राज्यपाल पटेल को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. सलोनी सिडाना ने राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम की उपलब्धियों, सघन स्क्रीनिंग, 100 दिवसीय नि:क्षय अभियान, नि:क्षय मित्र, पोषण आहार वितरण आदि की जानकारी दी। राज्यपाल पटेल के निर्देशानुसार प्रारंभ किए गए अनुसूचित जनजाति छात्रावासों में विद्यार्थियों की टी.बी. जाँच, परामर्श, उपचार आदि के बारे में भी बताया। बैठक में जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण के अपर मुख्य सचिव अशोक कुमार बर्णवाल, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, जनजातीय प्रकोष्ठ की सचिव श्रीमती मीनाक्षी सिंह, लोक स्वास्थ्य परिवार कल्याण एवं आयुष विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और लोकभवन के अधिकारी मौजूद रहे।    

राज्यसभा उपसभापति का बयान: ‘विकसित भारत के लिए 66 साल का सफर, कई देशों में लॉकडाउन, भारत में हालात सामान्य’

भोपाल  भोपाल में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों के सम्मेलन का समापन सत्र चल रहा है। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन किया। इस बीच उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना देखने में 66 साल लगा दिए गए। कई देशों में आज लॉकडाउन जैसे हालात लेकिन भारत आराम से चल रहा है। एक समय था जब दुनिया के अर्थशास्त्री, जिन्हें हम बहुत मानते थे- यह कहते थे कि भारत 2 से 3 प्रतिशत से अधिक विकास नहीं कर सकता। इसे “हिंदू ग्रोथ रेट” कहा जाता था। उस समय यह भी माना जाता था कि केवल अलग तरह की राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देश ही तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन आज भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में भी तेज विकास संभव है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह भी सिद्ध किया है कि सही नीतियों और संकल्प के साथ देश तेजी से तरक्की कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष बोले- छतीसगढ़ अलग हुआ तो आंखों में आंसू थे वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में अलग-अलग विचारधाराओं के विधायकों ने अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर विषय के अंतर्गत अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में टेक्नोलॉजी के उपयोग, स्वच्छता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने, शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने, व आधारभूत संरचना के विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। तोमर ने कहा कि, मुझे वह क्षण आज भी याद है जब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश विधानसभा से अलग हुआ। उस दिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों की आंखों में आंसुओं के अलावा कुछ नहीं था। इसीलिए आज भी दोनों राज्यों के बीच वही आत्मीयता बनी हुई है। उज्जैन जाएंगे विधायक युवा विधायक सम्मेलन का समापन होने के बाद विधायक उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करने जाएंगे। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। एमपी के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष मौजूद थे।

स्कूलों में बदला मिड डे मील मेनू, अब शनिवार को परोसी जाएगी पौष्टिक माह की दाल

लुधियाना. पंजाब स्टेट मिड-डे-मील सोसाइटी की ओर से पी.एम. पोषण स्कीम के तहत स्कूलों में दिए जाने वाले दोपहर के भोजन (मिड-डे-मील) के लिए साप्ताहिक मेन्यू जारी आकर दिया है। यह नया मेन्यू 1 से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। सोसाइटी के जनरल मैनेजर द्वारा जारी पत्र के अनुसार, स्कूल के विद्यार्थियों को कतार में बिठाकर मिड-डे-मील इंचार्ज की निगरानी में मेन्यू के अनुसार खाना खिलाना यकीनी बनाया जाए। आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी स्कूल में मेन्यू का पालन नहीं किया जाता या नियमों की अनदेखी होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल मुखी की होगी। इसके अलावा 'तिथि भोजन' के तहत गांव के सरपंच या दानी सज्जनों के सहयोग से विशेष अवसरों, त्यौहारों या जन्मदिन पर विद्यार्थियों को फल, मिठाई या विशेष भोजन देने के प्रयास करने के लिए भी कहा गया है। साप्ताहिक मेन्यू सोमवार : दाल और रोटी। मंगलवार : राजमाह-चावल और खीर। बुधवार : काले या सफेद चने (आलू के साथ) और पूरी या रोटी। गुरुवार : कढ़ी (आलू और प्याज के पकौड़ों के साथ) और चावल। शुक्रवार : मौसमी सब्जी, रोटी और मौसमी फल। शनिवार : साबुत माह की दाल और चावल। पी.टी.एम. के दौरान विद्यार्थियों को मिलेंगे आयुर्वेद के टिप्स पंजाब स्टेट मिड-डे-मील सोसाइटी की ओर से सरकारी स्कूलों के लिए नए निर्देश जारी किए गए हैं। इसके अनुसार अब स्कूलों में पेरैंट्स-टीचर मीटिंग वाले दिन विद्यार्थियों और अध्यापकों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करने के लिए विशेष लेक्चर आयोजित किए जाएंगे। पंजाब स्टेट फूड कमीशन के सुझाव पर आधारित इन निर्देशों में कहा गया है कि आयुर्वैदिक मैडीकल ऑफिसर अपने नजदीकी स्कूलों में जाकर बच्चों को आयुर्वेद के अनुसार खान-पान और रहन-सहन की जानकारी देंगे। स्कूल मुखियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आयुष डॉक्टरों या आयुर्वेद के माहिर व्यक्तियों के माध्यम से ऐसे लेक्चर करवाने के प्रयास करें।

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत:CM यादव

मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर लिखेंगे सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव बाबा विश्वनाथ से की प्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना क्रॉउड मैनेजमेंट, दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का किया अवलोकन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का किया भ्रमण भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारें "विरासत के साथ विकास" के मंत्र को आत्मसात करते हुए सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में साझा संस्कृति विकसित कर रही हैं। यह न केवल दोनों राज्यों के संबंधों को प्रगाढ़ करेगा, बल्कि जन-कल्याण के नए मार्ग भी प्रशस्त करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह बात वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के भ्रमण के दौरान कही। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने वाराणसी भ्रमण की शुरूआत देवादिदेव महादेव काशी विश्वनाथ जी के दर्शन और पूजन के साथ किया। उन्होंने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान से पूजन कर मध्यप्रदेश की जनता की खुशहाली और निरंतर प्रगति की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पावन गंगा घाट पहुँचकर पतित पावनी माँ गंगा के दर्शन किए। उन्होंने श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ माँ गंगा का पूजन किया और गंगाजल से आचमन किया। दर्शन और पूजन के बाद उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ के धाम में आकर जो आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है, वह अद्भुत है। काशी-महाकाल के बीच व्यवस्थाओं का साझा संगम मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को वाराणसी भ्रमण के दौरान विश्व प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर का भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल के धामों के बीच व्यवस्थाओं के सुदृढ़ीकरण और सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू (MOU) किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य दर्शनार्थियों को सुगम और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंदिर परिसर में लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। सिंहस्थ-2028 के लिए प्रबंधन का रोडमैप मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी के अनुभवों को मध्यप्रदेश के उज्जैन में होने वाले आगामी सिंहस्थ-2028 के लिए अत्यंत प्रासंगिक बताया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों के साथ बैठक की। बैठक में प्रेजेंटेशन से कॉरिडोर में तीर्थयात्री प्रबंधन, क्राउड कंट्रोल (भीड़ प्रबंधन), दर्शन व्यवस्था और मोबाइल ऐप आधारित टोकन सिस्टम का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि प्रयागराज कुंभ और काशी कॉरिडोर के प्रबंधन से सीख लेकर हम उज्जैन में श्रद्धालुओं के लिए दूरगामी योजनाएं तैयार कर रहे हैं। श्रद्धालुओं को दर्शन की उच्चतम और सुगम व्यवस्था देना हमारा लक्ष्य है। प्रेजेंटेशन से तीर्थ स्थल प्रबंधन की एसओपी (SOP) को समझा। इसमें रियल टाइम सीसीटीवी मॉनिटरिंग, जोन-बेस्ड क्राउड कंट्रोल, सुरक्षा प्रोटोकॉल और स्वच्छता प्रबंधन के आधुनिक तौर-तरीकों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को इस अवसर पर काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट द्वारा 'ग्लोबल सनातन' पुस्तक भी भेंट की गई। वाराणसी में महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का भव्य मंचन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन और न्यायप्रियता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए आगामी 3 से 5 अप्रैल तक वाराणसी में महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान के माध्यम से आयोजित होने वाले इस महानाट्य में सैकड़ों कलाकार हिस्सा लेंगे, जिसमें हाथी, घोड़े और ऊंटों के साथ प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच बढ़ते आर्थिक और बुनियादी ढांचे के सहयोग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना से दोनों राज्यों के किसानों का भाग्य बदल रहा है। दोनों राज्यों के किसानों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर भ्रमण और बैठक के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी', सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान के साथ अपर मुख्य सचिव राघवेंद्र सिंह, सचिव पर्यटन डॉ. इलैया राजा टी, उज्जैन संभागायुक्त आशीष सिंह, वाराणसी कलेक्टर सत्येंद्र सिंह और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के सीईओ विश्व भूषण मिश्र सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

नई व्यवस्था लागू: आउटसोर्स कर्मचारियों को अब सीधे बैंक खाते में मिलेगा वेतन

भोपाल  मध्यप्रदेश में आउटसोर्स एम्प्लॉइमेंट सिस्टम बदलने जा रहा है। जिसका सीधा फायदा लाखों कर्मचारियों को मिलेगा। मध्यप्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स एम्प्लॉइज के अपॉइंटमेंट और उनके कामकाज की व्यवस्था बदलेगी। 1 अप्रैल 2026 से पूरे आउटसोर्सिंग सिस्टम के संचालन की नई गाइडलाइन लागू हो जाएगी। आउटसोर्स की पूरी प्रोसेस डिजिटल की जाएगी। एम्प्लॉइज के अकाउंट में  सीधे सैलरी आएगी। मध्यप्रदेश में ये कंपनियां होंगी ब्लैकलिस्ट दरअसल, मध्यप्रदेश सरकार उन सभी कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करेगी, जो एम्प्लॉइमेंट के लिए एंट्री फीस या सिक्योरिटी डिपॉजिट वसूलती है। बिचौलिया कंपनियों द्वारा किए जा रहे एम्प्लॉइज के शोषण पर रोक लगेगी। वित्त विभाग ने सभी विभाग के अधिकारियों को आउटसोर्सिंग एजेंसी मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने को कहा है। 1 अप्रैल से लागू होंगी नई गाइडलाइन आगामी 1 अप्रैल से प्रदेश के सभी सरकारी विभागों में आउटसोर्स नियुक्तियों और उनके कामकाज को लेकर नई गाइडलाइन प्रभावी हो जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए इसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। सरकार के इस फैसले से न केवल वेतन मिलने में देरी की समस्या खत्म होगी, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में होने वाले भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगेगी। 4 कैटेगरी में बंटेंगे एम्प्लॉइज, एंट्री फीस पर रोक मध्यप्रदेश सरकार ने पहली बार एम्प्लॉइज को चार कैटेगरी में बांट दिया है। इससे ये होगा कि कोई भी एम्प्लॉइज ग्रे जोन में नहीं रहेगा। इन चार कैटेगरी में स्थायी, अस्थायी, संविदा और आउटसोर्स शामिल हैं। भर्ती में किसी भी तरह की एंट्री फीस पर रोक रहेगी। अवैध वूसली पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। एम्प्लॉइज का EPF, ESIC लेबर कानून से कटेगा नए सिस्टम के तहत प्राइवेट एजेंसियां के पास सैलरी का अधिकार नहीं रहेगा। एम्प्लॉइज की सैलरी सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। मिनिमम सैलरी से एक रुपया भी कम नहीं दिया जाएगा। एम्प्लॉइज के ईपीएफ, ईएसआईसी और लेबर कानूनों के तहत पूरा प्रोसेस की जाएगी। बिचौलिया कंपनियों से राहत, नहीं होगा शोषण     सीधा बैंक खाते में वेतन: नई व्यवस्था में वेतन निजी एजेंसियों के माध्यम से नहीं होगा। वेतन सीधे कर्मचारी के बैंक खातों में ट्रांसफर होगा। बिचौलियों और एजेंसियों द्वारा वेतन में कटौती या कमीशनखोरी नहीं की जा सकेगी।     न्यूनतम वेतन की गारंटी: न्यूनतम वेतन से एक रुपया भी कम नहीं दिया जाएगा। ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कानूनों का पालन अनिवार्य होगा।     स्पष्ट श्रेणी और पहचान: सरकार ने पहली बार कर्मचारियों को स्पष्ट श्रेणियों (स्थायी, अस्थायी, संविदा, आउटसोर्स आदि) में बांट दिया है। इससे कोई भी कर्मचारी 'ग्रे जोन'में नहीं रहेगा।     शोषण से मुक्ति: भर्ती के नाम पर किसी भी तरह की एंट्री फीस या अवैध वसूली पर प्रतिबंध लगेगा। उल्लंघन पर कार्रवाई होगी।

संजीव अरोड़ा का बड़ा ऐलान: लुधियाना और जालंधर में गैस पाइपलाइनों का जाल बिछेगा

चंडीगढ़  राज्य में चालू वर्ष में 39 लाख पीएनजी गैस कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया है। उद्योग मंत्री संजीव अरोड़ा ने पत्रकारों से बातचीत में भरोसा दिलाया कि गैस पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार से इंडस्ट्री को गैस की किल्लत से पूरी तरह राहत मिलेगी। अरोड़ा ने बताया कि अब तक एक लाख 30 हजार कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं और शहरों की हर गली तक पाइपलाइन पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रिहायशी क्षेत्रों में गैस की कोई कमी नहीं है और अब सरकार का फोकस औद्योगिक क्षेत्रों को कवर करने पर है। मंत्री ने कहा कि गैस पाइपलाइन दोराहा तक पहुंच चुकी है और जल्द ही लुधियाना की इंडस्ट्री को इससे जोड़ा जाएगा। इसके बाद जालंधर को भी नेटवर्क में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जहां-जहां पाइपलाइन पहुंची है, वहां स्थिति बेहतर है और इंडस्ट्री को गैस की सप्लाई सुचारू बनी हुई है। अरोड़ा ने इंडस्ट्रियल फोकल प्वाइंट्स की समस्याओं का भी जिक्र किया। उन्होंने माना कि कई फोकल प्वाइंट्स में इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस से जुड़ी दिक्कतें सामने आई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सरकार ने नई आपरेशन एंड मेंटेनेंस (ओ एंड एम) नीति लागू की है। इसके तहत अब स्थानीय स्तर पर ही फैसले लिए जा सकेंगे और जरूरी कामों में देरी नहीं होगी। इंडस्ट्री से जुड़ी सेवाओं में देरी का एक बड़ा कारण पालिसी इंटरप्रिटेशन और विभिन्न स्तरों पर मंजूरी (अप्रूवल) की प्रक्रिया थी। इसे दूर करने के लिए फास्ट सर्विस सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत पहले 15 दिन में मिलने वाली सेवाओं को अब 10 दिन में पूरा किया जाएगा। अरोड़ा ने “फ्रीहोल्ड प्रापर्टी” का जिक्र करते हुए कहा कि फ्रीहोल्ड इंडस्ट्रियल प्लाट्स को अब प्राथमिकता के आधार पर तेज सेवाएं दी जाएंगी, ताकि उद्योगपतियों को कम समय में मंजूरी और सुविधाएं मिल सकें। इसके साथ ही “डेलीगेशन आफ पावर्स” के तहत अधिकारियों को अधिक अधिकार दिए गए हैं, जिससे उन्हें बार-बार उच्च स्तर पर अप्रूवल लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने लीज होल्ड प्रापर्टी से जुड़े मुद्दों को भी स्वीकार किया और कहा कि इन मामलों में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को चरणबद्ध तरीके से हल किया जा रहा है, ताकि उद्योगों को किसी प्रकार की बाधा न हो। नई व्यवस्था के तहत अब संबंधित चार्जेज बिजली बिलों के साथ ही वसूले जाएंगे, जिससे कलेक्शन सुनिश्चित होगा। यह राशि स्पेशल पर्पज व्हीकल (एसपीवी) को ट्रांसफर की जाएगी, जो फोकल प्वाइंट्स में सड़कों, लाइटिंग और अन्य सुविधाओं पर खर्च तय करेगा। मंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य न केवल गैस की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, बल्कि फोकल प्वाइंट्स की समस्याओं को दूर कर उद्योगों के लिए बेहतर माहौल तैयार करना भी है, जिससे पंजाब में औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिल सके।

यति नरसिंहानंद बोले: हिंदुओं को तालिबान और ISIS जैसी सेना बनानी होगी

गुना  'हिंदुओं को बनानी होगी अपनी सेना, तभी बचेगा सनातन!' हमें तालिबान और आईएसआईएस के पैटर्न पर अपनी सेना तैयार करनी होगी। हिंदुत्ववादी नेता यति नरसिंहानंद सरस्वती ने देश के मौजूदा हालात को लेकर चेताया है। उन्होंने दो टूक कहा कि संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों के भरोसे सनातन का बचाना असंभव है। चेतावनी दी है कि अगर हिंदू समाज ने अब भी कट्टरता नहीं दिखाई, तो भारत का 'विश्वगुरु' बनने का सपना सिर्फ एक मुस्लिम राष्ट्र बनकर रह जाएगा। हिंदुत्ववादी यति नरसिंहानंद सरस्वती ने अपने ताजा बयान से नए विवाद को जन्म दे दिया है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए भारत और सनातन को खतरे में बताया है। उन्होंने कहा कि यदि हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाना है, तो उन्हें तालिबान और आईएसआईएस के पैटर्न पर अपनी सेना तैयार करनी होगी। उन्होंने संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों पर तीखा कटाक्ष करते हुए इन्हें नपुंशक संगठन करार दिया और कहा कि इनके भरोसे सनातन धर्म का बचना असंभव है। वे एमपी के गुना में मीडिया से रूबरू हो रहे थे। RSS और बजरंग दल पर दिया विवादास्पद बयान यति नरसिंहानंद ने संगठनों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने इन संगठनों को 'नपुंसक' करार देते हुए कहा कि, इनके भरोसे सनातन धर्म का बचना असंभव है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये संगठन केवल सोशल मीडिया पर फोटो डालने और नेताओं की 'चमचागिरी' कर चुनाव का रास्ता ढूंढने के लिए बने हैं। यति नरसिंहानंद सरस्वती के बयान की मुख्य बातें     हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाने के लिए ISIS और तालिबान जैसी कट्टर सेना बनानी होगी     संघ और बजरंग दल जैसे संगठनों भरोसे सनातन धर्म नहीं बचेगा     भारत 'विश्वगुरु' नहीं बल्कि 'मुस्लिम भारत' बनने की ओर बढ़ रहा है     'विश्वगुरु' का सपना छलावा धर्मगुरु जनता को मूर्ख बना रहे हैं     भारत पिछले 1400 साल से समर्पण की मुद्रा में है     इजरायल मानवता का रक्षक हर हिंदू को उसका साथ देना चाहिए     मुस्लिम लड़कियों से दोस्ती न करें, वे युवकों से भी ज्यादा 'जिहादी' हैं     भारत के कानून हिंदुओं को आपस में लड़ाकर खत्म करने के लिए बनाए गए हैं तालिबान-ISIS की कार्यप्रणाली को बताया आदर्श महामंडलेश्वर ने कहा कि जो समर्पण और कट्टरता इस्लाम के लिए तालिबान और आईएसआईएस दिखाते हैं, वैसी ही सेना बनाने की आज हिंदुओं को जरूरत है। उन्होंने कहा कि 'बाकी की फालतू सेनाओं का हम समर्थन नहीं करते। बजरंग दल और संघ के चक्कर में पड़े रहे, तो भविष्य में सनातनियों का कुछ भी बचने वाला नहीं है।' हिंदुओं को अपना अस्तित्व बचाने के लिए ISIS और तालिबान जैसी कट्टर सेना बनानी होगी, क्योंकि RSS और बजरंग दल जैसे संगठनों के भरोसे सनातन धर्म नहीं बचेगा विश्वगुरु का सपना एक 'छलावा' मात्र है, मूर्ख बना रहे भारत के विश्वगुरु बनने के दावों पर प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जिस गति से जनसंख्या असंतुलन बढ़ रहा है, भारत 'सनातन भारत' नहीं बल्कि 'मुस्लिम भारत' की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने हिंदू धर्मगुरुओं पर भी निशाना साधा और कहा कि जो गुरु भारत के विश्वगुरु बनने का दावा कर रहे हैं, वे अपने अनुयायियों को मूर्ख बनाकर केवल पैसा बटोर रहे हैं। यूजीसी और मौजूदा कानून हिन्दुओं को लड़वा रहे महंत ने UGC और देश के मौजूदा कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये भेदभाव मिटाने के लिए नहीं, बल्कि हिंदुओं को आपस में लड़वाकर खत्म करने के लिए बनाए गए हैं। उन्होंने जनता से ऐसी सरकारों का विरोध करने की अपील की जो सनातन विरोधी 'काले कानून' लाती हैं। इजरायल का समर्थन किया, बोले-जालिमों से लड़ रहे ईरान-इजरायल युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने इजरायल को 'मानवता का रक्षक' बताया। उन्होंने कहा कि 90 लाख इजरायली दुनिया के 200 करोड़ 'जालिमों' से लड़ रहे हैं, इसलिए हर मानवतावादी को इजरायल का साथ देना चाहिए।