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250 करोड़ का जेट विमान खरीदी मध्यप्रदेश सरकार ने, जल्द मिलेगी किराए के विमान से छुटकारा

 भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार को जल्द ही किराए के विमान से मुक्ति मिल जाएगी। राज्य सरकार ने 250 करोड़ का जेट विमान खरीदा है जिसकी जल्द डिलीवरी होगी। कनाडा में सरकार का नया विमान लगभग तैयार हो चुका है। भोपाल लाने के पहले इसका परीक्षण किया जाएगा। इसके लिए पायलट व दो इंजीनियर जून में कनाडा जाएंगे। विमान की जांच के ही इस काम में 50 लाख रुपए लगेंगे। अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। कनाडा में राज्य सरकार का नया जेट विमान (चैलेंजर 3500) लगभग तैयार हो गया है। इसे तैयार कर रही बाम्बार्डियर कंपनी जून 2026 के अंत तक सरकार को सौंपने जा रही है। डिलीवरी लेने से पहले विमान की तकनीकी जांच की जाएगी जिसके लिए सरकार ने समिति गठित कर दी है। विमान की तकनीकी जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम चिह्नित की गई है। ये निजी विशेषज्ञ हैं, जो जांच के लिए 50 लाख रुपए ले रहे हैं। विमान की जांच टीम में विमानन विभाग में पदस्थ पायलट विश्वास राय, तकनीकी विशेषज्ञ जेपी शर्मा और रश्मि सिंह शामिल हैं। 250 करोड़ का है विमान, एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा राज्य सरकार के नए विमान की कीमत 250 करोड़ है। यह अत्याधुनिक जेट विमान है जिसमें अनेक खूबियां हैं। नया विमान 870 प्रति किमी तक की रफ़्तार से उड़ान भर सकता है। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार यह जेट विमान एक बार में करीब 3500 किमी का सफर तय करेगा। एक वरिष्ठ अफसर ने इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस विमान बताया है। अधिकारी के अनुसार ​इसमें 8 से 10 यात्री सफर कर सकते हैं। विमान में दो कैबिन क्रू अलग से होंगे। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी बता दें, अभी सरकार के पास खुद का विमान नहीं है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हवाई दौरों या अन्य अनिवार्य सेवाओं के लिए जरूरत के वक्त राज्य सरकार द्वारा किराए से विमान लिए जा रहे हैं। इसपर हर महीने लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। नया जेट विमान आते ही राज्य सरकार को किराए से राहत मिल जाएगी।

लाडली लक्ष्मी योजना में तीन बेटियों को मिलते हैं 1.43 लाख रुपए, क्या हैं शर्तें?

भोपाल  भारतीय समाज में हर घर में बेटियों को मां लक्ष्मी का रूप माना जाता है। यही कारण है कि उसके जन्म लेते ही, हर कोई कह उठता है, लक्ष्मी आई है… आजकल अस्पताल से घर पहुंचने पर इस नवजात लक्ष्मी और इसे जन्म देने वाली मां का स्वागत ढोल-नगाड़ों के साथ किया जाता है, गृहप्रवेश का यह तरीका धूमधाम से मनाया जाने लगा है। इस बीच मध्य प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना लक्ष्मी स्वरूप बेटी के साथ घर में पहुंच जाते हैं 1.43 लाख रुपए। अगर आपके यहां भी आज हुआ है बेटी का जन्म तो जरूर जानें क्या है मध्य प्रदेश सरकार की यह खास योजना, कैसे कर सकते हैं आवेदन और किन दस्तावेजों की पड़ेगी जरूरत, कैसे आपकी बेटी को मिलेगा 1.43 लाख रुपए का लाभ… यहां जानें लाडली लक्ष्मी योजना क्या है मध्य प्रदेश में बेटियों के जन्म को प्रोत्साहित करने के साथ ही, उनके भविष्य को संवारने में मदद के लिए राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना (Ladli Laxmi Yojana) लॉन्च की थी। इस योजना के तहत बेटियों को अलग-अलग चरणों में आर्थिक मदद दी जाती है। बेटियों को लखपति बनाने के उद्देश्य के लिए छठी क्लास में एडमिशन लेने से 21 साल की उम्र तक प्रदेश सरकार की ओर से कुल 1,43,000 रुपए दिए जाने का प्रावधान किया गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग में संचालित की जा रही इस योजना के तहत पहले 1,18,000 रुपए दिए जाते थे, लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 1,43,000 रुपए कर दिया गया। वर्तमान में लाडली बहना योजना के तहत यही बढ़ी हुई राशि मिल रही है। मुख्यमंत्री Ladli Laxmi Yojana के प्रमुख उद्देश्य     प्रदेश में लिंगानुपात में सुधार लाना     बेटियों के जन्म पर समाज में सकारात्मक सोच पैदा करना     परिवार नियोजन को प्रोत्साहित करना, खासतौर पर 2 बेटियों के जन्म के बाद बेटे की इच्छा रखने वालों को हतोत्साहित करना     कन्या भ्रूण हत्या/शिशु हत्या को रोकना।     बाल विवाह जैसी कुरीतियों पर रोक लगाना Ladli Laxmi Yojana के लाभ क्या-क्या     बेटी के नाम से 1,43,000 रुपए का प्रमाण पत्र दिया जाएगा क्लास – स्कॉलरशिप (रुपए)     छठी में प्रवेश पर – 2000     9वीं में प्रवेश – 4000     11वीं में प्रवेश – 6000     12वीं में प्रवेश – 6000     ग्रेजुएशन या प्रोफेशनल कोर्स में एडमिशन (न्यूनतम 2 साल) 25,000 (2 किस्तों में कोर्स के पहले और आखिरी साल में)21 साल की उम्र होने पर 1,00,000 रुपए नोट: 1 लाख रुपए की राशि तभी मिलेगी, अगर बेटी 12वीं की परीक्षा देगी या अगर शादी हो गई है तो बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत शादी की उम्र के नियम का पालन किया गया हो। Ladli Laxmi Yojana के लिए कौन कर सकता है आवेदन जानें पात्रता शर्तें सामान्य स्थिति     1 जनवरी 2006 या उसके बाद जन्मी बेटियों को इसका लाभ मिल सकेगा।     बेटी का पंजीकरण पास के आंगनवाड़ी केंद्र में कराना अनिवार्य है।     बेटी के माता-पिता मूल रूप से मध्य प्रदेश निवासी होने चाहिएं     माता-पिता इनकम टैक्स न भरते हों।     माता-पिता की 2 या उससे कम संतान होनी चाहिए, दूसरी संतान के बाद परिवार नियोजन अपनाया गया हो, तभी इस योजना का लाभ मिल सकता है।     पहली संतान अगर बेटी होती है, तो बिना परिवार नियोजन के भी लाभ मिलेगा जबकि दूसरी संतान से जन्मीं बेटी को लाभ मिलने के लिए परिवार नियोजन अपनाना अनिवार्य है, तभी योजना का लाभ लिया जा सकेगा। विशेष परिस्थितियों में     जिस परिवार में अधिकतम 2 संतान हैं और माता या पिता का निधन हो गया है तो बच्ची के जन्म के 5 साल तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।     अगर महिला या पुरुष दूसरी शादी करते हैं तो पहले से 2 बच्चे हैं तो फिर लाभ नहीं मिलेगा     अगर पहली प्रसूति में ही एक साथ 3 बच्चियां होती हैं, तो तीनों को ही लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ मिलेगा     जेल में बंद महिला कैदियों या दुष्कर्म पीड़िता की बेटियों को भी योजना के तहत लाभ मिलेगा     अगर स्वास्थ्य कारण से परिवार नियोजन नहीं हुआ है तो, 1 साल की जगह 2 साल तक आवेदन स्वीकार करने का अधिकार कलेक्टर को दिया गया है।     देरी से मिले आवेदनों पर फैसला लेने का अधिकार जिला कलेक्टर के पास होगा।     अनाथालय में प्रवेश के 1 साल में और बालिका की उम्र 5 वर्ष पूर्ण होने से पूर्व या गोद लेने वाले माता-पिता द्वारा गोद लेने के 1 साल के अंदर आवेदन करना होगा। कैसे मिलेगा लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा लाडली लक्ष्मी योजना का पैसा चरणबद्ध तरीके से बेटी के खाते में ट्रांसफर किया जाएगा। यह पैसा DBT के माध्यम से भेजा जाएगा। Ladli Laxmi Yojana के लिए कैसे करें आवेदन, जानें स्टेप बाय स्टेप 1 – मुख्यमंत्री लाडली लक्ष्मी योजना के लिए आप पोर्टल ladlilaxmi.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं     पोर्टल पर आपको ऊपर दायीं ओर 'आवेदन करें' का विकल्प दिखेगा, इस पर क्लिक करें     अब लाडली लक्ष्मी योजना की पात्रता और जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट खुल जाएगी     नीचे स्वघोषणा को तीनों प्वाइंट को पढ़कर टिक करें और 'आगे बढ़ें' पर क्लिक करें 2 – अब अपने समग्र आईडी की जानकारी देनी होगी (Ladli Laxmi Yojana)     सबसे पहले लाडली बेटी की समग्र आईडी भरिए     फिर परिवार यानी माता-पिता की समग्र आईडी भरिए     अब पहली बेटी या दूसरी बेटी या जुड़वां बेटियों के लिए आवेदन कर रहे हैं, उस बॉक्स का चयन करें     समग्र से जानकारी प्राप्त करें ऑप्शन पर क्लिक करें 3- इसके बाद परिवार की पूरी जानकारी भरें     फिर मांगा गया अन्य विवरण भरें और आगे बढ़ें     अब जरूरी दस्तावेज को अपलोड करें     आप नजदीकी आंगनवाड़ी केंद्र, CSC या लोक सेवा केंद्र जाकर भी ऑनलाइन फॉर्म भरवा सकते हैं। Ladli Laxmi Yojana के लिए क्या हैं जरूरी दस्तावेज     बालिका का माता-पिता के साथ फोटो     मूल निवासी/स्थानीय/माता या … Read more

योगी सरकार 22 मार्च को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेगी नियुक्ति पत्र

योगी सरकार 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को 22 मार्च को सौंपेगी नियुक्ति पत्र  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में 492 अभ्यर्थियों को सौंपेंगे पत्र  736 नवचयनित अभ्यर्थियों को लाइव प्रोग्राम के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि सौंपेंगे नियुक्ति पत्र 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में दी जाएगी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को तैनाती    लखनऊ  योगी सरकार स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में योगी सरकार रविवार को 1,228 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेगी। इनमें से 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे जबकि शेष को लाइव प्रोग्राम के दौरान 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज और 2 संस्थानों में जनप्रतिनिधियों द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। बता दें कि योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के डेढ़ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी के तहत कई विभागों में भर्ती प्रक्रिया चल रही है जबकि विभिन्न विभागों में भर्ती का विज्ञापन निकालने की तैयारी अंतिम चरण में है।  13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं दो संस्थानों को मिलेंगे नर्सिंग अधिकारी अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभाग में खाली पदों पर नियुक्ति करने के निर्देश दिए थे ताकि प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी मिल सके। इसी के तहत चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 चिकित्सा संस्थानों में रिक्त नर्सिंग अधिकारियों के पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। ऐसे में लोक सेवा आयोग, प्रयागराज द्वारा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग में 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। योगी सरकार रविवार को सभी नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्त पत्र वितरित करेगी। सीएम योगी 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव एवं महानिदेशक डॉ. सारिका मोहन ने बताया कि 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज क्रमश: आगरा, कानपुर, प्रयागराज, मेरठ, झांसी, गोरखपुर, अंबेडकरनगर, कन्नौज, आजमगढ़, जालौन, सहारनपुर, बांदा एवं बदायूं के साथ 2 संस्थान जेके कैंसर संस्थान तथा हृदय रोग संस्थान कानपुर के लिए 1,228 नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसमें 1,097 महिला अभ्यर्थी और 131 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को लोकभवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में 492 नवचयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। वहीं, सभी 13 राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं 2 संस्थानों में लाइव प्रोग्राम के दौरान जनप्रतिनिधियों द्वारा 736 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे।  अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को वितरित किए गए थे नियुक्ति पत्र योगी सरकार ने इस वर्ष प्रदेश के युवाओं को डेढ़ लाख सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में रविवार को 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए जाएंगे। इसके अलावा 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 94 नवचयनित मुख्य सेविकाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। वहीं, हाल ही में उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड की ओर से दरोगा एवं समकक्ष के 4,543 पदों की परीक्षा संपन्न कराई गई। इसके अलावा विभिन्न विभागों की ओर से भी भर्ती प्रक्रिया चल रही है।

नई शिक्षा नीति में बड़ा बदलाव, 2030 तक B.Ed कॉलेज होंगे बंद, सरकार के अल्टीमेटम से बढ़ी टेंशन

भोपाल  शिक्षक शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव आने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनईपी) की नई गाइडलाइन के मुताबिक 2030 तक सभी स्टैंडअलोन बीएड कॉलेजों (B.Ed Colleges) को मल्टीडिसिप्लिनरी संस्थानों में बदलना अनिवार्य होगा। यानी अब सिर्फ बीएड या एमएड पढ़ाने वाले कॉलेजों को बीए, बीकॉम, बीएससी जैसे कोर्स भी शुरू करने होंगे। इसके साथ ही 4-वर्षीय इंटीग्रेटेड टोचर एजुकेशन प्रोग्राम (आईटीईपी) को प्राथमिकता दी जा रही है। गाइडलाइन के बाद बीयू ने ऐसे कॉलेजों की पहचान शुरू कर दी है, जहां केवल बीएड और एमएड कोर्स संचालित हो रहे है। यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि नए कोर्स शुरू करने से पहले इन संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा और उनकी आधारभूत सुविधाओं का मूल्यांकन होगा। 40 प्रतिशत कॉलेजों पर सीधा असर मध्य प्रदेश में करीब 650 बीएड कॉलेज हैं। जिनमें लगभग 40 प्रतिशत केवल शिक्षक प्रशिक्षण पर आधारित हैं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ये कॉलेज अकेले बीएड कोर्स नहीं चला सकेंगे। उन्हें या तो पास के मल्टीडिसिप्लिनरी कॉलेज में 3 से 10 किलोमीटर के दायरे में मर्ज होना पड़ेगा या फिर बंद होने की नौबत आ सकती है। जगह और संसाधनों की बड़ी चुनौती निजी कॉलेज संचालकों का कहना है कि वे गाइडलाइन का पालन करेंगे, लेकिन सबसे बड़ी समस्या इंफ्रास्ट्रक्चर की है। नए कोर्स शुरू करने के लिए अतिरिक्त क्लासरूम, लैब, लाइब्रेरी और फैकल्टी की जरूरत होगी। खासतौर पर शहरों के बीच स्थित छोटे कैंपस वाले कॉलेजों के लिए यह चुनौती और कठिन है। 15 करोड़ से 200 छात्रों को आवासीय सुविधा भोपाल. राजधानी के आयुर्वेद व होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। लंबे समय से छात्रावास की मांग कर रहे विद्यार्थियों के लिए आयुष विभाग ने 15 करोड़ रुपए मंजूर कर दिए है, जिससे 200 छात्रों को रहने की सुविधा मिलेगी। लंबे समय से थी मांग महाविद्यालयों में सीटें बढ़ीं, लेकिन छात्रावास नहीं बने। छात्र छात्राएं पिछले 3 साल से लगातार मांग कर रहे थे। पिछले वर्ष राशि नहीं मिलने से योजना अटक गई थी। बॉयज हॉस्टल नहीं होने से छात्रों को मिसरौद में किराये के भवन में रखा गया है। आवागमन के लिए बस चलाई जा रही है, जिस पर हर महीने 4 लाख रुपए खर्च हो रहे है। दोनो महाविद्यालयों में बनेंगे छात्रावास आयुष विभाग द्वारा संचालित, पंडित खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद संस्थान व शासकीय होम्योपैथिक चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल में 100-100 सीट के छात्रावास बनाए जाएंगे। महाविद्यालय के प्राचार्य डा. एसके मिश्रा ने बताया, जमीन का चयन व नक्शा तैयार हो चुका है। निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई द्वारा किया जाएगा। नई शिक्षा नीति का बड़ा कदम बीयू के रजिस्ट्रार एसबी सिंह का कहना है कि नई गाइडलाइन का पालन किया जाएगा। यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया जा रहा है. जिसका उद्देश्य शिक्षक शिक्षा को अधिक व्यावहारिक, समग्र और गुणवत्तापूर्ण बनाना है।

जयगांव के पश्चिम बंगाल निवासी: बिना वीजा और भारी फीस के भूटान की यात्रा, जिंदगी है शानदार

जयगांव Gateway Of Bhutan Jaigaon: भारत से सिर्फ नेपाल ही नहीं बल्कि भूटान जाना भी बेहद आसान है, यह जगह अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है. हजारों पर्यटक भूटान घूमने जाते हैं और भारत का पड़ोसी देश होने के नाते भारत से भी लोग यहां घूमने जाते रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिम बंगाल के एक छोटे से शहर से तो आप पैदल ही भूटान जा सकते हैं।  सीमाएं सिर्फ नक्शे पर दिखाई देती हैं, जमीन पर नहीं. ऐसा आपने सुना होगा. लेकिन भारत में ऐसी कई जगहें हैं, जहां यह बात सच साबित होती है. ऐसी ही एक खास जगह है पश्चिम बंगाल का छोटा-सा शहर जयगांव, जहां रहने वाले लोगों की जिंदगी सच में मजेदार है. क्योंकि यहां के लोग जब मन चाहे भूटान में बड़ी आसानी से एंट्री कर सकते हैं।  अच्छी बात यह है कि भूटान जाने के लिए आपको पासपोर्ट या वीजा की जरूरत नहीं है, आपको सिर्फ परमिट लेना होता है. यह परमिट भूटान सरकार का इमिग्रेशन डिपार्टमेंट देता है. हालांकि भूटान में आधार कार्ड नहीं चलता है इसलिए आप अपना पैनकार्ड और वोटर आईडी लेकर ही भूटान की यात्रा शुरू करें।  जयगांव के लोग भूटान में प्रति रात स्टे पर लगने वाली सस्टेनेबल डेवलेपमेंट फीस देने से बचने के लिए शाम होते ही भारत लौट आते हैं. बॉर्डर टाउन जयगांव के लोगों को भूटान में हर एंट्री के लिए 50-100 रुपये तक की फीस देनी पड़ती है. हालांकि, ये लोग केवल भूटान के शहर फुंशोलिंग तक ही जा सकते हैं. उसके आगे जाने के लिए भी परमिट लगता है।  भारत से पैदल जा सकते हैं भूटान जयगांव भारत-भूटान सीमा पर स्थित है और इसके ठीक सामने है फुंशोलिंग (फुएंत्शोलिंग). इन दोनों शहरों को जोड़ता है मशहूर भूटान गेट, जिसे पार करते ही आप एक अलग देश में पहुंच जाते हैं. भारतीयों के लिए भूटान जाना इतना आसान है कि वो अपने रोजाना के कामों के लिए आसानी से इधर-उधर जाते रहते हैं. पश्चिम बंगाल से सड़क मार्ग से भूटान जाने के लिए पर्यटकों को जयगांव वाले रास्ते से ही होकर गुजरना होता है।  जयगांव की गलियों में भारतीय बाजारों की चहल-पहल से भरा एक अलग ही माहौल देखने को मिलता है, जबकि गेट के उस पार फुंशोलिंग में साफ-सुथरी सड़कें, शांत माहौल और अलग संस्कृति नजर आती है. इस तरीके से एक ही दिन में टूरिस्ट दोनों ही देशों का मजा भी ले लेते हैं और यहां आकर उनको एक अलग ही अनुभव भी होता है।  जयगांव के पास फुंशोलिंग क्रॉस करके आप भूटान में एंट्री कर सकते हैं और खास बात यह है कि यहां पर भारत और भूटान दोनों ही देशों के पैसे चलते हैं. ऐसे में वहां लोगों को ज्यादा परेशानी भी नहीं होती है।  कई भूटानी तो जब जयगांव आते हैं तो इधर के गोलगप्पे, समोसे और रसुगुल्ले खाना नहीं भूलते हैं. वैसे ही भारतीय भी फुंशोलिंग जाकर वहां से शॉपिंग करके आ जाते हैं।  फुंशोलिंग में ही भूटान के परमिट का दफ्तर बना हुआ है, जो हर सुबह 9 बजे खुल जाता है. यहां से आप 15 दिनों का एंट्री परमिट ले सकते हैं, हालांकि यह सोमवार से शुक्रवार ही मिलता है. इसका कारण यह है कि भूटान में शनिवार और रविवार पूरे देश में छुट्टी घोषित की गई है, जिसकी वजह से परमिट ऑफिस बंद रहता है।  जयगांव घूमने की खास जगहें  जयगांव से सिर्फ भूटान नहीं लोग देखने नहीं जाते हैं, बल्कि जयगांव में भी कई ऐसी जगहें जिन्हें देखकर किसी भी मन खुश हो जाए।  बुक्सा टाइगर रिजर्व जयगांव में पहाड़ी इलाके में बसा बेहद सुंदर इलाका है, जहां कई घूमने की जगहें मौजूद हैं. अगर आप जयगांव जाते हैं तो आप वहां से 35 किलो दूर टाइगर रिजर्व जा सकते हैं. जो भूटान के दक्षिणी पहाड़ी क्षेत्र की बक्सा पहाड़ियों में स्थित है और करीब 760 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।  सिकियाझोरा जयगांव में घूमने के लिए सिकियाझोरा भी काफी मशहूर पहाड़ इलाका है, जहां पर तोर्षा नदी बहती है. इस नदी में रोजाना तमाम लोग बोटिंग करने के लिए आते हैं और आसपास के पहाड़ी नजारों का मजा लेते हैं।  हासिमारा तोर्षा नदी के किनारे बसे हासिमारा में आपको दिल को जीतने वाली खूबसूरती देखने को मिलेगी. इस पहाड़ी इलाके में टी-गार्डन देखने को मिलेंगे, इसके अलावा हासिमारा में आपको बंगाली और भूटानी परंपरा देखने को मिलेगी. इस जगह से भूटान की सीमा महज 17 किमी ही दूर है।  भूटान के लिए बेस्ट एंट्री पॉइंट जयगांव से भूटान की यात्रा शुरू करना इसलिए भी आसान है क्योंकि यहां से आगे जाने के लिए परमिट प्रोसेस भी काफी आसान होता है. अगर आप पहली बार भूटान जाने का प्लान बना रहे हैं, तो जयगांव आपके लिए सबसे आसान एंट्री पॉइंट साबित हो सकता है।      यहां पहुंचकर आप बिना ज्यादा भागदौड़ के फुंशोलिंग घूम सकते हैं और फिर आगे थिम्पू या पारो जैसी खूबसूरत जगहों का रुख कर सकते हैं।      एक परमिट पर 15 दिनों तक भूटान आप घूम सकते हैं, जो लोग काम के सिलसिले में भूटान जाते हैं उनको 6 महीने या 1 साल तक का परमिट दिया जाता है.     हालांकि जो लोग थिम्पू और पारो से आगे यात्रा करना चाहते हैं उन भारतीय पर्यटकों को थिम्पू में रूट परमिट लेना होता है।      अपनी कार से सफर करने वाले लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ी के सारे पेपर्स रखना भी जरूरी है. बच्चों को जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल आईडी के आधार पर ही परमिट दिया जाता है।      इसके अलावा किसी भी भारतीय नागरिक को पानबांग में रात भर रुकने की इजाजत नहीं है, उन्हें सूर्यास्त से पहले भारतीय इलाके में लौटना होगा।   

नतांज परमाणु केंद्र पर हमले के बाद अमेरिका-इजरायल की विनाशकारी कार्रवाई

 तेहरान मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर है. ईरान के सबसे सुरक्षित और संवेदनशील माने जाने वाले नतांज परमाणु केंद्र (Natanz Nuclear Facility) पर एक भीषण हमला हुआ है. खबर है कि अमेरिका-इजरायल ने मिलकर इस साइट पर जबरदस्त बमबारी की है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया. हालांकि, इस भारी हमले के बीच राहत की एक बड़ी खबर भी सामने आई है।  ईरानी मीडिया के मुताबिक, इस ताजा हमले में नतांज संवर्धन केंद्र को निशाना बनाया गया है. हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसकी गूंज दूर-दराज के इलाकों तक सुनी गई. लेकिन शुरुआती जांच के बाद ईरानी अधिकारियों ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अब तक किसी भी तरह के रेडियोधर्मी पदार्थ (रेडिएशन) के रिसाव की पुष्टि नहीं हुई है. यानी, परमाणु कचरा फैलने जैसा जो सबसे बड़ा डर था, वह फिलहाल टल गया है।  ईरानी मीडिया का दावा है कि धमाके के बावजूद आसपास के रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोग पूरी तरह सुरक्षित हैं. सरकार ने इस सैन्य कार्रवाई को अमेरिका-इजरायल के उस निरंतर अभियान का हिस्सा बताया है, जिसका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है।  बार-बार निशाने पर नतांज, पर हर बार बचा पर्यावरण दरअसल, नतांज परमाणु केंद्र दुश्मनों के लिए हमेशा से टारगेट रहा है. साल 2025 से अब तक इस साइट को कई बार निशाना बनाया जा चुका है. हर बार यहां के ढांचे और मशीनों को नुकसान पहुंचता है, लेकिन गनीमत यह रही है कि अब तक पर्यावरण को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।  आपको बता दें कि पिछले साल जून में इजरायल और ईरान के बीच जो 12 दिनों का भीषण युद्ध चला था, उसमें भी नतांज ही मुख्य टारगेट था. उस समय अमेरिका भी सीधे तौर पर इस संघर्ष का हिस्सा बन गया था. अब एक बार फिर इसी जगह पर बमबारी होना यह संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट के हालात और भी ज्यादा विस्फोटक हो सकते हैं। 

मुख्यमंत्री का कुदरगढ़ी माता मंदिर दौरा: पूजा कर प्रदेश की खुशहाली की प्रार्थना

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज चैत्र नवरात्रि की तृतीया तिथि के पावन अवसर पर कुदरगढ़ी माता के दर्शन करने सूरजपुर जिले स्थित कुदरगढ़ी माता मंदिर पहुंचे। कुदरगढ़ महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने मंदिर के नीचे प्रांगण स्थल पर ही हिंगुलाज माता एवं झगरा खाड़ देवता की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और  खुशहाली की कामना की। मुख्यमंत्री ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार चंदन लगाकर एवं चुनरी चढ़ाकर श्रद्धापूर्वक माता का नमन किया। इस दौरान स्थानीय बैगा  राम कुमार बंछोर ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। उनके परिवार की लगभग 10 पीढ़ियां कुदरगढ़ी माता की सेवा में निरंतर लगी हुई हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने उपस्थित श्रद्धालुओं का अभिवादन किया और सभी को कुदरगढ़ महोत्सव की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृषि मंत्री  रामविचार नेताम,  वन विकास निगम एवं कुदरगढ़ी मंदिर मां बागेश्वरी लोक न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष  रामसेवक पैंकरा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि जनश्रुतियों के अनुसार कुदरगढ़ी माता मंदिर की मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। इसी कारणवश जिले सहित प्रदेश एवं अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।

टीचर्स को नहीं मिलेगी राहत: MP में समर वेकेशन में भी ड्यूटी, मई-जून में होंगी बोर्ड परीक्षाएं

भोपाल प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को इस साल मई माह में मिलने वाला ग्रीष्मावकाश नहीं मिल पाएगा। माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) भोपाल ने इस दौरान 10वीं व 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा प्रस्तावित की हैं। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी इसी दौरान निर्धारित किए हैं। ऐसे में शिक्षक इस बार मई-जून में पूरी तरह से व्यस्त रहने वाले हैं। परीक्षाओं का विस्तृत शेड्यूल और अवकाश में कटौती शिक्षक संगठनों ने इस स्थिति पर आपत्ति जताई है। दरअसल, माशिमं द्वारा 10वीं और 12वीं की द्वितीय बोर्ड परीक्षा सात मई से आयोजित की जानी हैं। जारी समय-सारिणी के अनुसार 12वीं की परीक्षा सात मई को बायोटेक्नोलॉजी विषय से शुरू होकर 25 मई तक चलेंगी, वहीं 10वीं की परीक्षा सात मई से 19 मई तक चलेंगी। इसके अलावा 5वीं और 8वीं कक्षा की पुनः परीक्षाएं मई माह में और 9वीं-11वीं की द्वितीय वार्षिक परीक्षाएं तीन जून से 13 जून तक प्रस्तावित हैं। बता दें कि पूर्व वर्षों में शिक्षकों को एक मई से नौ जून तक करीब एक माह नौ दिन का ग्रीष्मावकाश मिलता था, लेकिन इस साल पूरे एक माह का ग्रीष्मावकाश घोषित किया गया है। अब परीक्षा और प्रशिक्षण के चलते यह अवकाश लगभग समाप्त हो गया है। प्रशिक्षण व मूल्यांकन कार्यों की दोहरी जिम्मेदारी प्रशिक्षण व मूल्यांकन में लगना होगा परीक्षाओं के बीच विभाग ने मई माह में शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी निर्धारित किए हैं। ऐसे में शिक्षकों को अवकाश के दौरान भी स्कूल संबंधी कार्यों में व्यस्त रहना पड़ेगा। इसके अलावा सभी परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य में भी शिक्षकों को लगाया जाएगा। शिक्षक संगठन की नाराजगी और आंदोलन की चेतावनी शिक्षक संगठन ने लिखा पत्र शिक्षक संगठनों का कहना है कि अवकाश अवधि में ही सभी परीक्षाएं और कार्यक्रम रखे जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों को मानसिक और शारीरिक विश्राम का अवसर नहीं मिल पा रहा। उन्होंने निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किए जाने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। मप्र शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष डा. क्षत्रवीर सिंह राठौर ने इस संबंध में शासन-प्रशासन को पत्र लिखकर सभी परीक्षाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम जून में कराने की मांग की है।  

मध्यप्रदेश में बेहिचक कीजिए फुल इन्वेस्टमेंट, सरकार देगी फुल सपोर्ट

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान जुड़वा भाइयों की तरह हैं। दोनों राज्य मिलकर विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत तैयार कर रहे हैं। हम सिर्फ विरासतों और विविधताओं के ही नहीं, आर्थिक दृष्टि से भी एक-दूसरे के स्वाभाविक साझेदार हैं। राजस्थान का विकसित टेक्सटाइल, जेम्स-एंड-ज्वेलरी और मध्यप्रदेश की ऑर्गेनिक कॉटन उत्पादन क्षमता, टेक्सटाइल पार्क एवं मज‍बूत मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम मिलकर एक सशक्त वैल्यू चैन तैयार कर सकते हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच पार्वती-कालीसिंध-चंबल राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। ये परियोजना दोनों राज्यों की तस्वीर और तकदीर बदलेगी। लगभग 1 लाख करोड़ रूपए की इस परियोजना में दोनों राज्यों को मात्र 5-5 प्रतिशत राशि देनी होगी। इसकी 90 प्रतिशत लागत भारत सरकार देगी। उन्होंने कहा है कि दोनों राज्यों के बीच रोटी-बेटी का संबंध रहा है और अब पानी का संबंध भी बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को जयपुर में आयोजित 'इन्टरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्युनिटीज इन मध्यप्रदेश' में राजस्थान के निवेशकों को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर सेशन का शुभारंभ किया। उन्होंने राज्य के सभी निवासियों को हाल ही में मनाए गए राजस्थान राज्य के स्थापना दिवस (19 मार्च) और अखंड सौभाग्य के लोक-पर्व गणगौर पूजन की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। राज्यों के बीच प्राकृतिक संसाधनों के बंटवारे मधुरता से पूरे हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के व्यापारियों ने देश-दुनिया में व्यापार-व्यवसाय में अपना नाम कमाया है। धन कमाने के लिए मन और बुद्धि चाहिए। राजस्थान के व्यापारियों ने अपनी क्षमता, युक्ति-बुद्धि और योग्यता से अपना लौहा मनवाया है। हम यहां दोनों राज्यों के बीच व्यापार संबंध प्रगाढ़ करने के लिए आए हैं। वर्तमान हालातों में कई तरह की चुनौतियां हैं, साथ ही हमारे पास आगे बढ़ने के स्वर्णिम अवसर भी हैं। कुछ साल पहले तक हमारे निवेशक खाड़ी देशों में निवेश के लिए जा रहे थे, लेकिन अब वहां स्थिति तेजी से बदल गई है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र में नियमों-कानूनों का सरलीकरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के लिए 26 प्रकार की नई नीतियां लागू की हैं। अब स्पेस और एआई सेक्टर के लिए भी हम पॉलिसी लाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश, देश के सरप्लस बिजली स्टेट्स में से एक है। अब हम देश के 'ग्रीन, क्लीन एंड सोलर एनर्जी कैपिटल' के रूप में उभर रहे हैं। इलेक्ट्रिसिटी सरप्लस राज्य बनने के बाद अब मध्यप्रदेश की बिजली से दिल्ली में मेट्रो ट्रेन संचालित हो रही है। प्रदेश में लगभग 2 रुपए 90 पैसे प्रति यूनिट दर पर घरेलू बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। औद्योगिक विकास के साथ माइनिंग सेक्टर में भी तेज गति से कार्य हो रहे हैं। मेडिकल टूरिज्म के लिए राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या तेजी से बढ़ाई जा रही है। पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल खोलने के लिए 1 रुपए में लीज पर जमीन दी जा रही है। मध्यप्रदेश दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भी आगे बढ़ रहा है। राज्य में 5 हजार से 50 हजार क्षमता की बड़ी गौशालाएं खोलने के लिए जमीन दी जा रही है। प्रति गौमाता अनुदान भी 20 रुपए से बढ़ाकर 40 रुपए कर दिया गया है। पशुओं की नस्ल सुधार और चिकित्सा के लिए उचित प्रबंध किए गए हैं। राज्य सरकार ने स्कूली बच्चों को नि:शुल्क दूध के पैकेट बांटने के लिए योजना की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि एक समय था, जब लोग कहते थे कि मध्यप्रदेश में उद्योग टिक ही नहीं सकते, किंतु आज मध्यप्रदेश भारत के सबसे तेजी से विकसित होते राज्यों में से एक है। मध्यप्रदेश की औद्योगिक विकास दर निरंतर बढ़ रही है। हमारी जीडीपी नई ऊँचाइयों को छू रही है। प्रदेश में निवेश की एक नई क्रांति आ रही है। उद्योगों की स्थापना एवं निवेश प्रोत्साहन के लिए हमने 6,104 करोड़ रूपये और इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए 1 लाख करोड़ रूपए का प्रावधान किया है। मध्यप्रदेश का 'सिंगल विंडो सिस्टम-इन्वेस्ट एमपी 3.0 पोर्टल' देश के श्रेष्ठ डिजिटल निवेश प्लेटफॉर्म में गिना जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश इंडस्ट्रियल प्रमोशन पॉलिसी 2025 अंतर्गत टेक्सटाइल एवं परिधान क्षेत्र को शामिल कर निवेशकों को आकर्षक इंसेंटिव प्रदान किए जा रहे हैं। अनेक प्रमुख कंपनियाँ मध्यप्रदेश में आ चुकी हैं और निवेश कर रही हैं। मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम जिले में भारत का पहला 'मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन फॉर पॉवर एंड रिन्यूएबल एनर्जी इक्विपमेंट' विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि होटल, हॉस्पिटल जैसे सेक्टर्स में बड़े निवेश पर कैपिटल सब्सिडी दी जा रही है। प्रदेश के रीवा में टाइगर सफारी और एयरपोर्ट की सौगात भी मिल चुकी है। राज्य की एविएशन पॉलिसी के अंतर्गत हवाई सेवाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनियों को प्रति फ्लाइट 15 लाख वीजीएफ दिया जा रहा है। राज्य के अंदर और राज्य के बाहर भी हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पीएम हेली सर्विस शुरू की गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि म.प्र. ने बिजली के समुचित बंटवारे के लिए उत्तरप्रदेश के साथ एक मॉडल तैयार किया है। मुरैना में प्लांट स्थापित कर 6-6 महीने बिजली उपयोग करने के लिए सहमति बनी है। पीकेसी परियोजना में दोनों राज्यों ने एक-दूसरे की बेहतरी के लिए निर्णय लिया है। सूखे क्षेत्र को पानी मिल जाए, तो लोगों की जिंदगी बदल जाती है। इसीलिए यही समय है, मध्यप्रदेश और राजस्थान देश के साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान की उद्यमशीलता और मध्यप्रदेश की संसाधन क्षमता मिलकर सेंट्रल इं‍डिया को इंडस्ट्रियल पॉवर सेंटर बना सकते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से अपील करते हुए कहा कि आप देश के दिल, असीम संभावनाओं और विकास अवसरों के केंद्र से जुड़िए, बेहिचक मध्यप्रदेश में निवेश कीजिए। मध्यप्रदेश में बेहतर नीतियां, बेहतर अवसर, बेहतर इन्सेंटिव, बेहतर इकोसिस्टम, बेहतर मार्केट लिंकेज और बेहतर ग्रोथ रेट के साथ आपको हर कदम पर सरकार का फुल सपोर्ट मिलेगा। राजस्थान और मध्यप्रदेश परिवार जैसे : मंत्री  चौधरी राजस्थान सरकार में … Read more

सीएम योगी ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम का किया शुभारंभ

मुख्यमंत्री ने वीर बच्चों को किया सम्मानित  सीएम योगी ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर अरण्य समागम का किया शुभारंभ  प्रदर्शनी का अवलोकन किया सीएम ने, उत्कृष्ट करने वाले कर्मचारियों व सामाजिक संगठनों को किया सम्मानित लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में वीर बच्चों को सम्मानित किया। तेंदुआ के हमले से खुद को व परिवार को बचाने वाले इन बच्चों की प्रशंसा करते हुए सीएम योगी ने इन्हें समाज के लिए प्रेरक बताया। सीएम योगी ने वानिकी व वन्य जीव क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों को भी सम्मानित किया। इस अवसर पर कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो लाभार्थी किसानों को चेक भी वितरित किए गए।  वीरता के पर्याय बने अच्छे लाल व तनु सिंह  सीएम ने बहराइच के 10 वर्षीय अच्छेलाल व प्रयागराज की तनु सिंह (18) को सम्मानित किया। अच्छेलाल 06 दिसम्बर 2025 को सायं 7 बजे अपने पिता के साथ साइकिल से खेत से वापस घर जा रहा था। इस दौरान रास्ते में अचानक गन्ने के खेत से तेंदुआ ने हमला कर दिया। तेंदुआ से मुकाबला करते हुए अच्छे लाल ने बहादुरी का परिचय देते हुए खुद को बचाया, जिससे हतोत्साहित होकर तेंदुआ भाग गया। इसी प्रकार 8 जनवरी 2026 को झूंसी क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम छिवैया में रतन सिंह के घर में अचानक तेंदुआ घुस गया। कमरे में उपस्थित तनु सिंह ने साहस और सूझ-बूझ का परिचय दिया। तनु ने अपने साथ दो छोटे बच्चों को बाहर निकाला और तेंदुआ को कमरे में बन्द कर दिया, जिससे बिना जनहानि के तेंदुआ को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। वानिकी एवं वन्य जीव क्षेत्र में विभागीय कर्मचारी भी सम्मानित मुख्यमंत्री ने वानिकी व वन्य जीव क्षेत्र में वन विभाग के कर्मचारियों को भी सम्मानित किया। सीएम के हाथों मुरादाबाद वन प्रभाग के उप क्षेत्रीय वन अधिकारी पुष्पेंद्र सिंह, हमीरपुर वन प्रभाग के वन रक्षक सुनील कुमार गौंड, रामपुर वन प्रभाग के वन रक्षक शिवम कुमार व एटा वन प्रभाग की माली रीना शर्मा को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।  वानिकी क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों को भी मिला सम्मान  वानिकी के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले सामाजिक संगठनों को भी मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। इस क्रम में लोकभारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री बृजेंद्र पाल सिंह व हेल्पिंग हैंड्स सेवा संस्थान झांसी के सत्येंद्र कुमार श्रीवास्तव को सम्मानित किया गया।  कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किसानों को वितरित किए चेक  मुख्यमंत्री ने कार्बन क्रेडिट प्रोजेक्ट के अंतर्गत दो लाभार्थी किसानों को चेक वितरित किए। ये चेक कुशीनगर के ईश्वर चंद और रायबरेली की सुनीता को दिए गए।  मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन  मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम प्रारंभ होने से पहले वन विभाग द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस दौरान वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, वन राज्यमंत्री केपी मलिक आदि भी मौजूद रहे।