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अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए CM योगी

अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  सीएम ने प्रकृति को “मां” मानकर संरक्षण का दिया संदेश, जनभागीदारी को बताया सफलता की कुंजी उत्तर प्रदेश में बढ़ा वनाच्छादन और पौधरोपण अभियान, 9 वर्षों में 242 करोड़ पौधे लगाए, जन आंदोलन से मिली बड़ी सफलता रामसर साइट और इको-टूरिज्म को बढ़ावा, रामसर साइट की संख्या वर्ष 2017 में एक से बढ़कर 2026 में 11 हुई लखनऊ आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है, तब वनों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रकृति के साथ हुए खिलवाड़ के दुष्परिणामों को झेल रहा है। यह स्थिति हमें आत्ममंथन के लिए मजबूर करती है कि आखिर हमारे प्रयासों में कहां कमी रह गई। भारतीय वैदिक परंपरा में प्रकृति को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही यह संदेश दिया था कि धरती हमारी माता है और हम उसके पुत्र हैं – ‘माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः’। ऐसे में हर व्यक्ति का यह कर्तव्य है कि अपनी “मां” यानी धरती की रक्षा करे, उसके सम्मान और संरक्षण के लिए कार्य करे और उसके साथ किसी प्रकार का खिलवाड़ न होने दे। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में कहीं। इस दौरान सीएम ने कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया तथा विभिन्न लोगों को सम्मानित किया। उन्होंने वन विभाग की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। इस वर्ष की थीम 'फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स' रखी गयी   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा ने सदैव कहा है कि दशकूपसमा वापी, दशवापीसमो ह्रदः। दशह्रदसमः पुत्रो, दशपुत्रसमो द्रुमः॥’, इसका अर्थ है कि 10 कुंओं के बराबर एक बावड़ी, 10 बावड़ियों के बराबर एक तालाब, 10 तालाबों के बराबर एक पुत्र और 10 पुत्रों के बराबर एक वृक्ष होता है। प्रकृति में वृक्ष की महत्ता सर्वोपरि मानी गयी है। वन, जीवन के आधार और प्रकृति के संतुलन का भी एक महत्वपूर्ण आयाम प्रस्तुत करता है। यदि वन है तो जल है, जल है तो वन, वन है तो वायु और वायु है तो जीवन है। जीवन की कल्पना इसके बगैर नहीं की जा सकती। ऐसे में वैश्विक दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए इस वर्ष की थीम 'फॉरेस्ट एंड इकोनॉमिक्स' रखी गयी है, जो यह दिखाती है कि हमें पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने, वनों से आर्थिक विकास और उससे मानव कल्याण के लिए कार्ययोजना प्रस्तुत करनी होगी। मुझे प्रसन्नता है कि पिछले नौ वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रदेश में वनाच्छादन को बढ़ाने में सफलता मिली है। सफलता तब मिली जब हमने इसे जन आंदोलन बनाया। जब भी कोई अभियान जन आंदोलन बनता है, तो सफलता प्राप्त होती है, क्योंकि तब उसका नेतृत्व समाज करता है, सरकार और विभाग पीछे रहते हैं। वहीं, जब सरकार और विभाग आगे होते हैं और पब्लिक पीछे होती है तो परिणाम नहीं आते। हमने पिछले नौ वर्षों में जो सफलताएं प्राप्त की हैं,  उनका आधार जन आंदोलन था।  वर्ष 2017 में केवल एक रामसर साइट थी, आज 11 हैं, हमारा प्रयास 100 साइट का मुख्यमंत्री ने कहा कि वन महोत्सव के अवसर पर पहले वर्ष कुल 5.5 करोड़ पौधरोपण हो पाए थे। इसमें भी निजी नर्सरी का सहारा लेना पड़ा था। वहीं गत वर्ष वन महोत्सव के अवसर पर 37 करोड़ पौधे एक ही दिन में प्रदेश भर में लगाए गए। इस दौरान हमारे पास 50 करोड़ पौधे मौजूद थे। इस वर्ष भी हमने 35 करोड़ का लक्ष्य रखा है, जो बढ़कर 40-45 करोड़ तक पहुंच सकता है। पिछले कुछ वर्षों से उत्तर प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 2 लाख करोड़ का कैपिटल एक्सपेंडिचर सुनिश्चित कर रहा है। इसके बावजूद प्रदेश का वनाच्छादन बढ़ना एक सुखद अनुभूति कराता है। पिछले नौ वर्ष में 242 करोड़ पौधरोपण करने में सफलता प्राप्त की गई है और अब वनाच्छादन बढ़कर लगभग 10% तक पहुंच चुका है। प्रदेश का वनाच्छादन उतना होना चाहिए जितनी देश की आबादी यूपी में रहती है। यानी इसे 16-17 फीसदी तक पहुंचाने के लिए काम करना होगा। वर्ष 2017 में हमारे पास केवल 1 रामसर साइट थी, आज इसकी संख्या बढ़कर 11 हुई है। हमारा प्रयास इसे 100 तक ले जाने का है। रामसर साइट टूरिज्म, वन्य जीवों, पक्षियों की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण साइट होती है। साथ ही वॉटर कंजर्वेशन की दृष्टि से भी इसकी भूमिका हो सकती है। हम रामसर साइट घोषित करेंगे, तो वह स्थान भू-माफियाओं के कब्जे से मुक्त रहेगा और वहां पर आसानी से संरक्षण कार्यक्रम चलाए जा सकेंगे। इस दिशा में कई प्रयास हुए हैं, जिसमें अटल, एकलव्य, त्रिवेणी, ऑक्सी और स्मृति वन आदि शामिल हैं। गंगा, यमुना और सरयू नदियों के किनारे व्यापक पौधरोपण के कार्यक्रम चल रहे हैं। एक्सप्रेस-वे और राजमार्गों के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर उपयुक्त प्रजाति के पौधों के रोपण कार्यक्रम को आगे बढ़ाया गया है। इसके लिए हर जिले में एक नदी के पुनरोद्धार का कार्य किया गया।  दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां कार्बन फाइनेंस प्रोजेक्ट के तहत कार्बन क्रेडिट के लिए कृषकों को धनराशि वितरित की गयी है। सरकार ने दुधवा नेशनल पार्क में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। कनेक्टिविटी भी बेहतर की गयी है। प्रदेश में वन आधारित 2,467 ग्रीन इकोनॉमी मॉडल उद्योग स्थापित किये गये हैं। हर व्यक्ति नेशनल पार्क में बाघ देखने जाता है। ऐसे में इनका संरक्षण हमारी जिम्मेदारी है। उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां मानव-वन्य जीव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में रखा गया है। सीएम ने कहा कि टाइगर कभी अचानक हमला नहीं करता। मेरा जन्म जहां हुआ था, उस घर से मुश्किल से 50 मीटर दूर से जंगल प्रारंभ हो जाता था। हम लोग टाइगर को देखते थे। कभी छेड़ते नहीं थे, उसने कभी हमें नुकसान नहीं पहुंचाया। हमारे पशुओं को कभी नुकसान नहीं पहुंचाया। वहीं, अगर हम टाइगर के साथ, उसकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेंगे, … Read more

मुख्यमंत्री की पहल, बेमौसम बारिश से फसल नुकसान का तत्काल आकलन कर मुआवजा देने के दिए निर्देश

बेमौसम बारिश को लेकर मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल, फसलों के नुकसान का तत्काल आकलन कर मुआवजा सुनिश्चित करने के निर्देश जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरने का आदेश, राहत आयुक्त को सीधा समन्वय बनाने की जिम्मेदारी किसानों को किसी भी स्थिति में न हो असुविधा, समयबद्ध ढंग से मुआवजा वितरण पर जोर लखनऊ प्रदेश में असमय वर्षा को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा और फसलों को हुए नुकसान का त्वरित आकलन कर राहत पहुंचाना प्राथमिकता होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे स्वयं फील्ड में निकलकर स्थिति का जायजा लें और प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को हुए नुकसान का तत्काल आकलन कराएं। उन्होंने कहा कि यह कार्य केवल कागजी न होकर वास्तविक स्थिति के आधार पर किया जाए, ताकि किसानों को सही और समय पर सहायता मिल सके। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राहत आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह फील्ड स्तर पर कार्य कर रहे अधिकारियों से सीधा संपर्क और समन्वय बनाए रखें। सीएम ने कहा कि सभी सूचनाएं समय पर एकत्रित कर शासन को उपलब्ध कराई जाएं, जिससे राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी न हो। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि फसलों को हुई क्षति का आकलन प्राप्त होते ही मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि भुगतान व्यवस्था पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी आपदा की स्थिति में उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और यह सुनिश्चित करें कि किसी भी किसान को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

कतर एनर्जी के CEO ने ट्रंप को दिया जवाब, बार-बार कहा गैस ठिकानों को हाथ मत लगाना

दोहा  इजरायल ने अमेरिका की मदद से बुधवार रात दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला कर ईरान को आगबबूला कर दिया. जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान ने कतर, सऊदी, यूएई और कुवैत के तेल और गैस ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है. सबसे अधिक नुकसान कतर को हुआ है. सरकारी तेल और गैस कंपनी कतरएनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) साद अल-काबी का कहना है कि उन्होंने लगातार इसे लेकर अमेरिका को चेताया था।  साउथ पार्स पर हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जहां लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की रिफाइनरी के मुख्य ठिकाने मौजूद हैं. कतर की सरकारी गैस कंपनी के अनुसार, ईरान के हमले से समुद्री मार्ग से गैस आपूर्ति करने वाली दुनिया के सबसे बड़े गैस सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है।  इसके प्रमुख अल-काबी, जो देश के ऊर्जा मंत्री भी हैं, ने कहा कि ईरान के हमले से इतना नुकसान हुआ है जिसे ठीक करने में तीन से पांच साल का समय लग सकता है. अल-काबी ने कहा कि उन्होंने पहले ही अधिकारियों और एग्जीक्यूटिव्स को चेताया था कि अगर ईरान के तेल-गैस ठिकानों पर हमला होता है तो हमें ऐसे खतरे झेलने पड़ सकते हैं।  समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में साद अल-काबी ने कहा, 'मैं हमेशा चेतावनी देता रहा, हमारे साथ साझेदारी करने वाली तेल और गैस कंपनियों के अधिकारियों से बात करता रहा, अमेरिकी ऊर्जा मंत्री से बात करता रहा, ताकि उन्हें इस नतीजे के बारे में आगाह कर सकूं और बता सकूं कि यह हमारे लिए नुकसानदेह हो सकता है।  कतरएनर्जी के साझेदारों में एक्सॉनमोबिल और कोनोकोफिलिप्स जैसी बड़ी अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां शामिल हैं।  कतरएनर्जी के प्रमुख को खतरे का अंदाजा था साद अल-काबी ने कहा कि अमेरिका और उसकी कंपनियों को अंदाजा था कि अगर ईरान के गैस फील्ड पर हमला हुआ तो वो कड़ा पलटवार करेगा. उन्होंने कहा, 'उन्हें खतरे की जानकारी थी, और मैं उन्हें लगभग रोजाना याद दिलाता था, उनसे कहता था कि तेल और गैस ठिकानों पर हमलों से हमें एकदम बचने की जरूरत है।  इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर व्हाइट हाउस की प्रवक्ता टेलर रोजर्स ने रॉयटर्स से कहा, 'राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी पूरी ऊर्जा टीम यह सच्चाई जानती थी कि ईरान में जारी ऑपरेशन के दौरान तेल और गैस की सप्लाई में कुछ समय के लिए रुकावटें आएंगी. हमें पहले से इन रुकावटों का अंदाजा था जिसे लेकर हमने प्लानिंग की थी।  कोनोकोफिलिप्स के एक प्रवक्ता ने कहा, 'हम अपनी लंबे समय से चली आ रही साझेदारी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं. कतरएनर्जी के साथ मिलकर चीजों को फिर से ठीक करने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।  ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध के तीन हफ्तों के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों ने टैंकरों, रिफाइनरियों और अन्य एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचाया है।  इसमें अब तक सबसे बड़ा असर कतरएनर्जी के रास लाफान पर पड़ा है, जो दुनिया का सबसे बड़ा लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) कॉम्प्लेक्स है. अल-काबी ने कहा कि 26 अरब डॉलर की लागत से बने इन संयंत्रों को हुए नुकसान से यूरोप और एशिया को एलएनजी सप्लाई पांच साल तक प्रभावित हो सकती है।  बिना किसी चेतावनी के ईरान के गैस फील्ड को इजरायल ने बनाया निशाना बुधवार को इजरायल ने ईरान के मुख्य साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया. इसके जवाब में तेहरान ने कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और कतर के रास लाफान में एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े हमले किए।  काबी ने कहा कि उन्हें साउथ पार्स पर हमले की कोई पूर्व चेतावनी नहीं थी. उन्होंने कहा, 'मुझे किसी भी चीज की जानकारी नहीं थी, और मुझे नहीं लगता कि किसी को भी थी. राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं पता था. तो क्या आपको लगता है कि हमें पता होता? साउथ पार्स दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड का हिस्सा है, जिसे ईरान कतर के साथ साझा करता है. कतर में इसे नॉर्थ फील्ड कहा जाता है।  काबी ने कहा कि कतरएनर्जी ने अभी तक यह आकलन नहीं किया है कि क्या बीमा युद्ध से हुए नुकसान को कवर करेगा।  रास लाफान को कितना नुकसान हुआ है? अल-काबी ने कहा कि रास लाफान पर हमले से न केवल कतर की एलएनजी निर्यात क्षमता का 17 प्रतिशत हिस्सा ठप हो गया, बल्कि नुकसान के कारण इसका असर पांच साल तक रहेगा।  काबी ने कहा, 'कोल्ड बॉक्स खत्म हो गए हैं.' कोल्ड बॉक्स कूलिंग सिस्टम होता है जो गैस को शुद्ध और लिक्विड रूप में ठंडा कर देता है ताकि उसका ट्रांसपोर्टेशन किया जा सके. कतरएनर्जी के 14 ट्रेनें कोल्ड बॉक्स में से 2 को भारी नुकसान हुआ है।  उन्होंने कहा, 'यह मुख्य यूनिट है, यही एलएनजी का कूलिंग बॉक्स है, यह पूरी तरह नष्ट हो चुका है।  रास लाफान का विस्तार भी होने वाला था लेकिन इस महीने की शुरुआत में ईरानी हमले के बाद कंपनी ने अपने संयंत्रों को खाली करा लिया है. इस देरी की वजह से 2027 से फ्रांस, जर्मनी और चीन जैसे देशों को भेजी जाने वाली गैस प्रभावित होगी।  उन्होंने कहा, 'समंदर के बीच स्थित रिफाइनरी से सभी लोगों को हटाना आसान नहीं था, आप जानते हैं, 24 घंटों में 10,000 लोगों को निकाला गया और सभी ऑपरेशंस बंद कर दिए गए. मुझे बहुत खुशी है कि कोई इस दौरान घायल नहीं हुआ, कोई मौत नहीं हुई. यह हमारे उस फैसले की वजह से हुआ।  इस विस्तार के जरिए कतर शीर्ष एलएनजी निर्यातक की अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहता था. इसके तहत 2027 तक कतर की तरलीकरण क्षमता 77 मिलियन टन से बढ़ाकर 126 मिलियन टन प्रति वर्ष की जानी थी।  कतरएनर्जी में अब एलएनजी का उत्पादन कब शुरू होगा? काबी ने कहा कि कतरएनर्जी का उत्पादन तभी दोबारा शुरू हो सकता है जब शत्रुता समाप्त हो जाए, और तब भी पूरी तरह लोडिंग शुरू करने में कम से कम तीन से चार महीने लगेंगे।  काबी, जो कतर एयरवेज के चेयरमैन भी हैं, ने कहा कि इस युद्ध का व्यापक असर खाड़ी की सभी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ेगा।  उन्होंने कहा, 'इसने पूरे क्षेत्र को 10-20 साल पीछे धकेल दिया है. पर्यटन … Read more

दुग्ध व्यवसाय से तरक्की में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर

मिल्क प्रोक्योरमेंट से आत्मनिर्भर बनीं प्रदेश की साढ़े तीन लाख महिलाएं दुग्ध व्यवसाय से तरक्की में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी की महिलाओं ने रचा इतिहास उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बनी तरक्की का आधार लखनऊ मुख्यमंत्री योगी सरकार में उत्तर प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं तरक्की की नई इबारत लिख रहीं हैं। प्रदेश में दुग्ध संग्रहण और उससे जुड़े कार्यों के माध्यम से करीब साढ़े तीन लाख महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं हैं। इतनी बड़ी संख्या के लिहाज से दुग्ध व्यवसाय के क्षेत्र में यूपी देश में नंबर वन है। यह परिवर्तन उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के जरिए संभव हुआ है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए तरक्की का मजबूत आधार बनकर उभरा है। योगी सरकार की अभूतपूर्व योजनाओं के जरिए उत्तर प्रदेश नित नए रिकॉर्ड बना रहा है। मिल्क वैल्यू चेन से मिल रहा अब बेहतर मूल्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में दुग्ध मूल्य श्रृंखला (मिल्क वैल्यू चेन) विकसित होने से अब उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल रहा है। इसके साथ ही किसानों और महिला समूहों को नियमित एवं पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे उनके भरोसे और आय दोनों में वृद्धि हुई है। रोजगार के साथ अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दुग्ध व्यवसाय से गांवों में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन हो रहा है। इससे न सिर्फ महिलाओं की आय बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिली है। छोटे स्तर पर शुरू हुआ यह कार्य अब बड़े आर्थिक मॉडल का रूप ले चुका है। महिलाओं का व्यापक सशक्तीकरण सरकार की योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने की सुविधा दी गई है। इसका परिणाम यह है कि आज ग्रामीण महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के जरिए आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं और परिवार के साथ-साथ समाज में भी अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। प्राथमिकता में ग्रामीण महिलाएं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रामीण महिलाओं को अपनी नीतियों के केंद्र में रखा है। इसी का परिणाम है कि प्रदेश में लगातार अभूतपूर्व योजनाओं के जरिए नए रिकॉर्ड बन रहे हैं और महिलाएं विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उत्तर प्रदेश में दुग्ध व्यवसाय के माध्यम से महिलाओं का सशक्तीकरण न केवल एक आर्थिक बदलाव है, बल्कि यह सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत नींव बन चुका है। प्रदेश की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर देश के सामने नई दिशा प्रस्तुत कर रहीं हैं।

सीएम विष्णु देव साय बस्तर में करेंगे राज्य की सबसे बड़ी हेरिटेज मैराथन की शुरुआत

सीएम विष्णु देव साय बस्तर में देंगे राज्य की सबसे बड़े ‘हेरिटेज मैराथन’ की सौगात बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ की थीम पर 22 मार्च को होगा राज्य का सबसे बड़ा स्पोर्ट्स इवेंट फिटनेस और विरासत का उत्सव- बस्तर को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने की बड़ी तैयारी बस्तर को देश का प्रमुख टूरिज्म और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन बनाना हमारा संकल्प-  साय रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में खेल, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026’ का आयोजन रविवार 22 मार्च को करने जा रही है। यह राज्य का अब तक का सबसे बड़ा रनिंग इवेंट होगा, जिसकी शुरुआत जगदलपुर के ऐतिहासिक लालबाग मैदान से होगी और समापन विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात पर होगा। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर इस रूट पर दौड़ते हुए प्रतिभागियों को बस्तर की अद्भुत वादियों और सांस्कृतिक पहचान का अनूठा अनुभव मिलेगा।            मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस आयोजन को छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा कि बस्तर हेरिटेज मैराथन केवल खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध परंपरा, प्राकृतिक संपदा और जनभागीदारी का उत्सव है। उन्होंने कहा कि ‘बस्तर दौड़ेगा, देश जुड़ेगा’ के संदेश के साथ यह आयोजन न केवल फिटनेस को बढ़ावा देगा, बल्कि बस्तर को राष्ट्रीय और अंतरर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित करेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य ऐसे आयोजनों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अवसर देना, रोजगार सृजन को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।           मैराथन में 42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), 10 किलोमीटर और 5 किलोमीटर (फन रन) की श्रेणियां रखी गई हैं, ताकि हर आयु वर्ग और फिटनेस स्तर के लोग इसमें भाग ले सकें। प्रतिभागियों के लिए कुल 25 लाख रुपये की आकर्षक पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है। पंजीकरण शुल्क मात्र 299 रुपये रखा गया है, जबकि बस्तर संभाग के सातों जिलों के प्रतिभागियों के लिए यह पूरी तरह निःशुल्क है, जिससे स्थानीय स्तर पर अधिकतम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित हो सके।           प्रतिभागियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मैराथन मार्ग पर व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पूरे रूट पर नियमित अंतराल पर रिफ्रेशमेंट पॉइंट्स (आरपीएन) स्थापित किए जाएंगे, जहां एनर्जी ड्रिंक्स और पानी की उपलब्धता रहेगी। इसके अलावा मेडिकल सपोर्ट, इमरजेंसी सेवाएं और सुव्यवस्थित रूट मैनेजमेंट भी सुनिश्चित किया गया है ताकि प्रतिभागियों को सुरक्षित और सुगम अनुभव मिल सके। इस आयोजन को और यादगार बनाने के लिए प्रत्येक प्रतिभागी को फिनिशर मेडल, ई-सर्टिफिकेट और प्रोफेशनल रनिंग फोटोग्राफ्स प्रदान किए जाएंगे। साथ ही जुम्बा सेशन और लाइव डीजे जैसे आकर्षक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, जिससे प्रतिभागियों में उत्साह और ऊर्जा बनी रहे।          ‘रन फॉर नेचर, रन फॉर कल्चर’ (प्रकृति के लिए दौड़ो, संस्कृति के लिए दौड़ो) की थीम पर आधारित यह मैराथन बस्तर की प्राकृतिक धरोहर और जनजातीय संस्कृति को देशभर के सामने प्रस्तुत करने का एक सशक्त माध्यम बनेगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल दौड़ने का है, बल्कि बस्तर को करीब से जानने और उसकी विरासत को महसूस करने का भी है। इच्छुक प्रतिभागी https://www.bastarheritage. run/registration लिंक के माध्यम से या आधिकारिक पोस्टर में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।            मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिट इंडिया’, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ और देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के विजन से प्रेरित है। प्रधानमंत्री ने हमेशा भारत की सांस्कृतिक विविधता और स्थानीय विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर दिया है। बस्तर हेरिटेज मैराथन उसी सोच को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है, जहां खेल, संस्कृति और प्रकृति एक साथ जुड़ते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार बस्तर को देश के प्रमुख पर्यटन और स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस तरह के आयोजनों से न केवल युवाओं में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। बस्तर के कारीगरों, कलाकारों और छोटे-छोटे व्यवसायों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।          मुख्यमंत्री श्री साय ने देशभर के खिलाड़ियों, फिटनेस प्रेमियों और पर्यटकों से इस ऐतिहासिक आयोजन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि वह देश के हर कोने से युवाओं और नागरिकों को आमंत्रित करते हैं कि वे बस्तर आएं, यहां की प्रकृति, संस्कृति और ऊर्जा को महसूस करें और इस ऐतिहासिक मैराथन का हिस्सा बनें।

US के बैन हटाने के बाद, क्या भारत फिर से ईरानी तेल खरीदेगा? समंदर में है विशाल भंडार

 नई दिल्‍ली अमेरिका ने कच्‍चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने के लिए ईरानी तेल से प्रतिबंध हटा दिया है. अब ये तेल एशिया के देशों में आसानी से जा सकते हैं. समंदर के बीच ईरानी तेल का बड़ा भंडार है.  खबर है कि भारत की रिफाइनरियां इसे खरीदने के लिए योजना बना रही हैं. पहले ईरानी तेल सिर्फ चीन द्वारा खरीदे जाते थे, लेकिन बैन हटने के बाद अब भारत भी आ सकते हैं।  रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, व्‍याप‍ारियों ने शनिवार को बताया कि अमेरिका-इजरायल वॉर के कारण ईरान पर लगे एनर्जी संकट को कम करने के लिए अमेरिका द्वारा अस्‍थायी तौर से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद भारतीय रिफाइनरियां ईरानी तेल की खरीद फिर से शुरू करने की योजना बना रही हैं, जबकि एशिया के अन्य हिस्सों में रिफाइनरियां भी इस तरह के कदम पर विचार कर रही हैं।  ईरानी तेल खरीदने के लिए निर्देश का इंतजार  रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन भारतीय रिफाइनर्स सोर्स ने कहा कि वे ईरानी तेल खरीदेंगे और भुगतान की शर्तों पर सरकार के निर्देश का इंतजार कर रहे हैं. रॉयटर्स का कहना है कि भारत में कच्‍चे तेल का भंडार अन्‍य बड़े एशियाई देशों की तुलना में काफी कम है. अमेरिका ने हाल ही में रूसी तेल से भी बैन हटाया है, जिसके बाद भारतीय रिफाइनरियों ने रूसी तेल की बुकिंग में तेजी दिखाई।  अमेरिका ने दी है 30 दिनों की छूट  अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार को समुद्र में मौजूद ईरानी तेल की खरीद के लिए 30 दिनों की प्रतिबंध छूट जारी की है. यह छूट समुद्र में स्थित ईरानी तेल पर होगा, जो 19 अप्रैल तक उतारने तक लागू रहेगा. युद्ध शुरू होने के बाद से यह तीसरी बार है जब अमेरिका ने तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी है।  समंदर के बीच इतना बड़ा तेल भंडार  केप्लर के कच्चे तेल बाजार डेटा के अनुसार, लगभग 170 मिलियन या 17 करोड़ बैरल ईरानी कच्चा तेल समुद्र में है, जो मिडिल ईस्‍ट की खाड़ी से लेकर चीन के निकट के जलक्षेत्र तक फैले जहाजों पर मौजूद है. कंसल्टेंसी एनर्जी एस्पेक्ट्स ने 19 मार्च को अनुमान लगाया कि पानी पर 13 करोड़ से 14 करोड़ बैरल ईरानी तेल मौजूद है, जो मिडिल ईस्‍ट के 14 दिनों के उत्‍पादन के बराबर है।  एशिया अपनी कच्चे तेल की आपूर्ति का 60% हिस्सा मिडिल ईस्‍ट से मंगाता है और इस महीने स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज के लगभग बंद होने से पूरे क्षेत्र की रिफाइनरियों को कम दरों पर काम करने और ईंधन निर्यात में कटौती करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 

ईंट उद्योग से मिली सपनों को उड़ान, 25 लोगों को रोजगार देकर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

महिला सशक्तीकरण की नई पहचान: 25 लाख के ऋण की नींव पर निकिता ने खड़ा किया ईंट का कारोबार ईंट उद्योग से मिली सपनों को उड़ान, 25 लोगों को रोजगार देकर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल योगी सरकार के विजन ‘आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश’ को धरातल पर उतारा, सरकारी योजना के माध्यम से बनीं सफल उद्यमी  लखनऊ योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ‘आत्मनिर्भर राज्य’ बनाने का संकल्प अब जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। प्रदेश में सरकार की योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गांव-गांव में युवाओं और महिलाओं को नई पहचान दे रहीं हैं। इसी बदलाव की एक प्रेरक मिसाल लखीमपुर खीरी की निकिता वर्मा हैं, जिन्होंने न सिर्फ खुद को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि कई लोगों को रोजगार भी दिया। लखीमपुर खीरी के ग्राम शाहपुर राजा की रहने वाली निकिता वर्मा ने सीमेंट की ईंटों के निर्माण का व्यवसाय शुरू किया, जो आज उनके लिए सफलता का आधार बन चुका है। निकिता ने सरकार की ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (PMEGP) योजना का लाभ लेते हुए 25 लाख रुपये का ऋण लिया। जिससे उन्होंने अपना उद्योग स्थापित किया। इनके प्लांट में हररोज लगभग 5 से 7 हजार ईंट तैयार होती हैं, जिसमें इनको प्रतिमाह करीब एक लाख रुपये का मुनाफा होता है।   निकिता ने अपने उद्योग के माध्यम से 25 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है। उनकी मासिक आय लगभग 1 लाख रुपये से अधिक है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि स्थानीय स्तर पर आर्थिक विकास का भी एक मजबूत उदाहरण है। उनके इस प्रयास से गांव में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। निकिता की कहानी केवल एक उद्यमी की सफलता नहीं, बल्कि नारी स्वावलंबन का सशक्त उदाहरण है। निकिता जैसी महिलाएं न केवल अपने परिवार का सहारा बन रही हैं, बल्कि समाज और राज्य की प्रगति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ (PMEGP) भारत सरकार की एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए सूक्ष्म-उद्यम स्थापित करके स्वरोजगार के अवसर पैदा करती है। इसका संचालन प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के तहत खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग द्वारा किया जाता है। ‘पीएमईजीपी योजना’ युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में भी सहायक साबित हो रही है। सरकार की यह पहल आज हजारों युवाओं के जीवन में बदलाव ला रही है।

मध्य प्रदेश में नौकरी का मौका: MPESB ने 1679 पदों पर भर्ती की डेडलाइन बढ़ाई

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने वनरक्षक, क्षेत्र रक्षक और जेल प्रहरी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। जो अभ्यर्थी तकनीकी कारणों या किसी अन्य वजह से अब तक फॉर्म नहीं भर पाए थे, उनके पास अब एक और मौका है। इच्छुक उम्मीदवार विभाग की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। कुल 1679 पदों पर होगी नियुक्ति इस भर्ती अभियान के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न विभागों में कुल 1679 रिक्त पदों को भरा जाएगा। पदों का वर्गीकरण इस प्रकार है। वनरक्षक (Forest Guard): 728 पद क्षेत्र रक्षक (Field Guard): 169 पद जेल प्रहरी (Jail Prahari): 757 पद जेल सुपरिटेंडेंट (Jail Superintendent): 25 पद पात्रता और शैक्षणिक योग्यता (Eligibility Criteria) वनरक्षक, क्षेत्र रक्षक एवं जेल प्रहरी: इन पदों के लिए अभ्यर्थी का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं (High School) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। जेल सुपरिटेंडेंट: इस पद के लिए अभ्यर्थी के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक (Graduate) की डिग्री होनी चाहिए। आयु सीमा: न्यूनतम आयु 18/21 वर्ष (पदानुसार) और अधिकतम आयु 33 वर्ष निर्धारित है। आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को शासन के नियमानुसार आयु सीमा में विशेष छूट दी जाएगी। शारीरिक मानक: शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ अभ्यर्थियों को निर्धारित शारीरिक लंबाई और मापदंडों को भी पूरा करना होगा। विस्तृत जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जरूर देखें। आवेदन शुल्क (Application Fee) सामान्य/OBC/EWS: ₹500 SC/ST: ₹250 कैसे करें आवेदन? (Step-by-Step Guide) सबसे पहले esb.mp.gov.in पर लॉग इन करें। होमपेज पर मौजूद 'Recruitment/Application' लिंक पर क्लिक करें। अपनी बुनियादी जानकारी दर्ज कर पहले पंजीकरण (Registration) करें। पंजीकरण के बाद लॉगिन करें और अपनी शैक्षणिक व व्यक्तिगत जानकारी भरें। अपनी कैटेगरी के अनुसार ऑनलाइन मोड में फीस जमा करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद भविष्य के संदर्भ के लिए इसका एक प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रख लें।  

नवरात्रि पर मुख्यमंत्री ने मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया उद्घाटन

मुख्यमंत्री ने नवरात्रि की पावन बेला पर मां महामाया की धरा से सरगुजा ओलंपिक का किया शुभारंभ 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है : मुख्यमंत्री साय बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु बजट में 10 करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान सरगुजा ओलंपिक में बेटियों की बड़ी संख्या में भागीदारी देखना सुखद, बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करें युवा : श्रीमती गीता फोगाट सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से बनेगी आर्चरी अकादमी खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने शासन की अनूठी पहल से जुड़ रहे है लोग रायपुर  नवरात्रि के पावन बेला में मां महामाया की धरा से यह शुभ शुरुआत हुई है। मां महामाया के आशीर्वाद पिछले दो वर्षों से बस्तर ओलंपिक का आयोजन हो रहा है और आज सरगुजा अंचल के साथियों को ओलंपिक के जरिए अपनी हुनर दिखाने का अवसर मिला है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित पी जी कॉलेज ग्राउंड में सरगुजा ओलंपिक का शुभारंभ किया और कार्यक्रम का शुभारंभ कर अंचल वासियों को शुभकामनाएं दी। साय को इस दौरान संभाग के सभी जिलों से पहुँचे खिलाड़ियों ने मार्च पास्ट का सलामी दी। मुख्यमंत्री ने मुख्य मंच से सभी खिलाड़ियों का अभिवादन स्वीकारा और खिलाड़ियों की हौसला अफजाई की।  मुख्यमंत्री साय ने मां महामाया का स्मरण करते हुए प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक की सफलता के बाद अब सरगुजा में भी इस आयोजन की शुरुआत की गई है, जिससे यहां के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। उन्होंने बताया कि बस्तर ओलंपिक में पहले वर्ष 1.65 लाख और इस वर्ष 3.91 लाख प्रतिभागियों ने भाग लिया, जबकि सरगुजा ओलंपिक में इस बार लगभग 3.49 लाख खिलाड़ियों ने पंजीयन कराया है। इनमें से 2000 से अधिक खिलाड़ी संभाग स्तरीय तीन दिवसीय प्रतियोगिता में भाग ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि 3 लाख 49 हजार खिलाड़ियों की स्वस्फूर्त सहभागिता खेल के प्रति उनके प्रेम और समर्पण को दिखाता है।             मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए बजट में बस्तर एवं सरगुजा ओलंपिक के वार्षिक आयोजन हेतु 10 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। उन्होंने बताया कि ओलंपिक में भाग लेने वाले खिलाड़ियों को 21 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक विजेताओं को क्रमशः 3 करोड़, 2 करोड़ और 1 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।           इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद उन्मूलन के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि बस्तर क्षेत्र अब तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। नक्सल मुक्ति का संकल्प हमारे जवानों के अदम्य साहस से पूरा होने की कगार पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर ओलंपिक में आत्म समर्पित नक्सलियों की टीम ने जोआ बाट के नाम से हिस्सा लिया, जिसमें लगभग 700 आत्म समर्पित नक्सली शामिल हुए।         मुख्यमंत्री ने बताया कि खेलों के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है और बस्तर व सरगुजा अंचल खेल अधोसंरचनाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरगुजा के पंडरापाठ में 20 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है, जिससे क्षेत्र के युवा खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।          मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा एथलीट अनिमेष कुजूर का उल्लेख करते हुए उनकी उपलब्धियों की सराहना की और कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पहली बार खेलो इंडिया नेशनल ट्राइबल गेम्स का आयोजन छत्तीसगढ़ में होगा, जिसका शुभारंभ 25 मार्च को केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री साय ने हाल ही में छत्तीसगढ़ विधानसभा में पारित हुए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक तथा कर्मचारी चयन मंडल के स्थापना के संबंध में भी जानकारी दी। शुभारंभ सत्र के अंत में मुख्यमंत्री सह अतिथियों ने सरगुजा ओलंपिक का मशाल प्रज्ज्वलित किया और सफल आयोजन के लिए बधाई दी।               कार्यक्रम में राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्ण पदक विजेता गीता फोगाट ने भी खिलाड़ियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि सरगुजा ओलंपिक में बड़ी संख्या में बेटियों की भागीदारी देखना सुखद है। उन्होंने युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करने का संदेश दिया, साथ ही नशे और गलत आदतों से दूर रहने की अपील की।             पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि सरगुजा ओलंपिक में 6 जिलों से कुल 3.49 लाख प्रतिभागियों ने पंजीयन कराया है, जिनमें 1.59 लाख पुरुष और 1.89 लाख महिलाएं शामिल हैं। तीन दिवसीय इस आयोजन में 11 से अधिक खेल विधाओं में प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं।            कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने इसे सरगुजा वासियों के लिए बड़ी सौगात बताते हुए कहा कि इस मंच से स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।           इस अवसर पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा खेल विभाग के सचिव यशवंत कुमार, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरेंगे भारतीय झंडे वाले 2 गैस टैंकर, LPG पर मिली गुड न्यूज

 नई दिल्ली दुनिया में जितना भी तेल और गैस समुद्र के रास्ते जाता है, उसका करीब 20 फीसदी सिर्फ एक रास्ते से गुजरता है होर्मुज की खाड़ी. यह एक बहुत ही पतली सी जलधारा है जो ईरान और ओमान के बीच में है. एक तरफ खाड़ी के देश हैं – UAE, कुवैत, सऊदी अरब, इराक. और इन सबका तेल बाहर जाने का एकमात्र समुद्री रास्ता यही है।  अब सोचिए – अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो क्या होगा? दुनिया के पांचवें हिस्से का तेल और गैस रुक जाएगा. कीमतें आसमान छू लेंगी. और भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल बाहर से मंगाते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा तकलीफ होगी।  हुआ क्या है अभी? ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जंग छिड़ी हुई है. ईरान ने धमकी दे दी कि जो भी जहाज होर्मुज से निकलने की कोशिश करेगा, उस पर हमला होगा।  बस इतना सुनते ही सैकड़ों जहाज वहीं लंगर डालकर रुक गए. कोई आगे जाने को तैयार नहीं. पिछले 24 घंटों में एक भी तेल का बड़ा जहाज होर्मुज से नहीं गुजरा. यह बहुत बड़ी बात है. मतलब रास्ता व्यावहारिक रूप से बंद पड़ा है।  भारत का क्या हाल है? भारत के 22 जहाज इस वक्त खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं. न आगे जा पा रहे हैं, न वापस आ पा रहे हैं. इनमें दो जहाज खास तौर पर चर्चा में हैं. पाइन गैस जिसे आईओसी यानी इंडियन ऑयल ने किराए पर लिया है. जग वसंत – जिसे बीपीसीएल ने किराए पर लिया है।  ये दोनों LPG टैंकर हैं. मतलब इनमें रसोई गैस जैसा ईंधन भरा है जो भारत के घरों तक पहुंचना है. ये दोनों जहाज UAE के शारजाह के पास लंगर डाले खड़े हैं. शनिवार को निकलने की तैयारी में बताए जा रहे हैं।  मोदी सरकार क्या कर रही है? भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठी है. विदेश मंत्रालय ने साफ कहा है कि भारत चाहता है कि उसके जहाज सुरक्षित और बिना रोक-टोक के निकल सकें।  और सबसे अहम बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद दूसरे देशों के नेताओं से बात कर रहे हैं ताकि इन जहाजों का सुरक्षित रास्ता निकाला जा सके. यह कूटनीति का खेल है. प्रधानमंत्री की कोशिश है कि ईरान तक यह बात पहुंचे कि भारत के जहाजों को जाने दिया जाए।  खबर के मुताबिक पिछले हफ्ते ईरान ने दो भारतीय LPG जहाजों को होरमुज से गुजरने दिया था. यानी ईरान ने भारत को थोड़ी रियायत दी. यह इसलिए भी समझ में आता है क्योंकि भारत और ईरान के रिश्ते पहले से ही ठीक-ठाक रहे हैं, और भारत ने हमेशा इस जंग में किसी एक तरफ खड़े होने से परहेज किया है।  पाकिस्तान वाला दिलचस्प किस्सा इस पूरी खबर में एक बहुत दिलचस्प बात और है. डेटा से पता चला है कि पाकिस्तान जाने वाला एक तेल का जहाज हाल ही में होर्मुज से गुजर गया. इसका मतलब यह है कि ईरान ने पूरी तरह रास्ता बंद नहीं किया है. वो चुन-चुनकर कुछ देशों को जाने दे रहा है. जिनसे उसके संबंध ठीक हैं, या जो उसके लिए काम के हैं – उन्हें रास्ता मिल रहा है।  यह एक तरह का दबाव का हथियार है. ईरान कह रहा है, "देखो, मैं सबको रोक सकता हूं, लेकिन जिसे चाहूं उसे जाने भी दे सकता हूं।  असली मुद्दा क्या है? यह सिर्फ कुछ जहाजों की कहानी नहीं है. यह उस रास्ते की कहानी है जिससे भारत का रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल आता है. अगर यह रास्ता लंबे समय तक बंद रहा तो भारत में गैस और तेल की कमी हो सकती है. कीमतें बढ़ सकती हैं और आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।