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63,383 किमी सड़कों और 35,433 किमी ग्रामीण मार्गों से मजबूत हुआ नेटवर्क

9 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति, उत्तर प्रदेश बना देश की कनेक्टिविटी का ग्रोथ इंजन 63,383 किमी सड़कों और 35,433 किमी ग्रामीण मार्गों से मजबूत हुआ नेटवर्क देश के 55 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे के साथ यूपी बना एक्सप्रेस-वे हब 16 एयरपोर्ट और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के साथ एविएशन कनेक्टिविटी को मिलेगी नई उड़ान रेल, राष्ट्रीय जलमार्ग और फ्रेट कॉरिडोर से लॉजिस्टिक्स को मिला बूस्ट सर्वोत्तम बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है- संजीव सिंह गौड़, राज्य मंत्री समाज कल्याण निवेश और विकास के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन चुका है उत्तर प्रदेश – दानिश आजाद अंसारी, मंत्री उत्तर प्रदेश प्रदेश के हर हिस्से को जोड़ते हुए विकास की नई धारा प्रवाहित-अवनीश कुमार अवस्थी, मुख्यमंत्री के सलाहकार लखनऊ उत्तर प्रदेश ने बीते 9 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व बदलाव दर्ज करते हुए खुद को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे राज्यों में शामिल कर लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में सड़क, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, रेल, जलमार्ग, ऊर्जा और जल प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर काम हुआ है, जिसने विकास को नई गति दी है। प्रदेश में सड़क नेटवर्क के विस्तार ने विकास की दिशा तय की है। वर्ष 2017 के बाद से 63,383 किलोमीटर सड़कों का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया गया है, जबकि 35,433 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण कर गांवों को मुख्य मार्गों से जोड़ा गया है। प्रतिदिन औसतन 19 किलोमीटर सड़क निर्माण की रफ्तार प्रदेश की तेज प्रगति को दर्शाती है। इसके साथ ही 1,740 पुलों का निर्माण कर आवागमन को और सुगम बनाया गया है। तहसील और ब्लॉक मुख्यालयों को बेहतर सड़कों से जोड़ने का व्यापक कार्य भी पूरा किया गया है। उत्तर प्रदेश आज देश के एक्सप्रेस-वे नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बन चुका है। देश के कुल एक्सप्रेसवे का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा प्रदेश में स्थित है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स ने क्षेत्रीय असमानताओं को कम करते हुए कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है। गंगा एक्सप्रेस-वे, जिसका लगभग 99 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों को जोड़ने वाला एक ऐतिहासिक प्रोजेक्ट साबित होने जा रहा है। इसके अलावा विन्ध्य एक्सप्रेस-वे जैसी नई परियोजनाएं भी विकास के दायरे को और विस्तारित करेंगी। हवाई कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में प्रदेश में 16 एयरपोर्ट संचालित हैं, जिनमें 4 अंतर्राष्ट्रीय हैं। जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट देश का एक प्रमुख एविएशन हब बनने की दिशा में अग्रसर है। इसके शुरू होने के बाद उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट वाला राज्य बन जाएगा, जिससे पर्यटन, व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। रेल और जलमार्ग के क्षेत्र में भी प्रदेश ने अपनी स्थिति मजबूत की है। करीब 16,000 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क के साथ उत्तर प्रदेश देश के सबसे बड़े रेल नेटवर्क वाले राज्यों में शामिल है। वहीं, 11 राष्ट्रीय जलमार्गों का जुड़ाव इसे लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में नई पहचान दे रहा है। वाराणसी में देश का पहला मल्टी मॉडल टर्मिनल और 100 एकड़ में विकसित फ्रेट विलेज प्रदेश को निर्यात और माल ढुलाई का प्रमुख केंद्र बना रहे हैं। जल क्षेत्र में भी बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार किया गया है।  इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश आज मजबूत, आधुनिक और विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक नए विकास मॉडल के रूप में उभर रहा है। बेहतर कनेक्टिविटी और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार ने न केवल आम नागरिकों के जीवन को सुगम बनाया है, बल्कि उद्योग, निवेश और रोजगार के लिए भी नए द्वार खोले हैं। प्रदेश अब इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आम नागरिकों के जीवन को आसान बना “डबल इंजन सरकार के प्रयासों से उत्तर प्रदेश में कनेक्टिविटी का व्यापक विस्तार हुआ है। शानदार सड़क नेटवर्क और तेजी से हो रहा निर्माण आम नागरिकों के जीवन को आसान बना रहा है। यही कारण है कि प्रदेश आज सर्वोत्तम बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।” संजीव सिंह गौड़, राज्य मंत्री समाज कल्याण उत्तर प्रदेश ने नई पहचान बनाई  “योगी सरकार के 9 वर्ष विकास, विश्वास और सुशासन के प्रतीक हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश ने नई पहचान बनाई है। आज प्रदेश निवेश और विकास के लिए एक भरोसेमंद गंतव्य बन चुका है।” दानिश आजाद अंसारी, मंत्री उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी  “मुख्यमंत्री योगी आदित्याथ के नेतृत्व में 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास ने अभूतपूर्व गति पकड़ी है। आज प्रदेश देश के 55 प्रतिशत एक्सप्रेस-वे नेटवर्क के साथ विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी का उदाहरण बन चुका है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेस-वे जैसे प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश के हर हिस्से को जोड़ते हुए विकास की नई धारा प्रवाहित की है।” अवनीश कुमार अवस्थी, मुख्यमंत्री के सलाहकार

लिपुलेख दर्रे से भारत-चीन व्यापार शुरू होगा 6 साल बाद, गलवान झड़प के बाद था स्थगित

पिथौरागढ़  उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित लिपुलेख दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच बॉर्डर ट्रेड छह साल बाद फिर से शुरू होने जा रहा है। यह ट्रेड सेशन आमतौर पर जून से सितंबर तक चलता है। डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट आशीष भटगाई ने बताया कि केंद्र सरकार के निर्देशों के बाद तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। विदेश मंत्रालय की ओर से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी होने के बाद यह प्रक्रिया आगे बढ़ी है। लिपुलेख दर्रे के जरिए तिब्बत के साथ बॉर्डर ट्रेड लंबे अंतराल के बाद 1992 में फिर शुरू हुआ था। हालांकि 2019 में COVID-19 महामारी और गलवान झड़प के कारण इसे बंद कर दिया गया था। पिछले साल 18-19 अगस्त को चीनी विदेश मंत्री वांग यी की भारत यात्रा के दौरान भारत-चीन ने रुपए और युआन में ट्रेड करने का फैसला किया था। अब तक यह ‘वस्तु विनिमय’ आधारित यानी सामान के बदले सामान का लेन-देने होता था। लिपुलेख दर्रा औपचारिक व्यापारिक मार्ग ब्रिटिश काल में भी लिपुलेख दर्रा व्यापार और तीर्थयात्रा का प्रमुख केंद्र था। तिब्बत से व्यापारी नमक, बोराक्स, पशु उत्पाद, जड़ी-बूटियां और स्थानीय सामान बेचने आते हैं, जबकि भारतीय व्यापारी बकरी, भेड़, अनाज, मसाले, गुड़, मिश्री, गेहूं वहां ले जाते हैं। भारत-चीन के बीच साल 2005 में 12 करोड़ रुपए का आयात और 39 लाख रुपए का निर्यात हुआ था। साल 2018 में 5.59 करोड़ रुपए का आयात और 96.5 लाख रुपए का निर्यात हुआ था। नेपाल ने समझौते पर आपत्ति जताई थी लिपुलेख के साथ शिपकी ला और नाथु ला दर्रों से भी कारोबार बहाल करने का फैसला लिया गया था। हिमालय के तीन दर्रों से शुरू होने जा रहा भारत-चीन व्यापार पहली बार पूरी तरह सड़क के जरिए होगा। यहां मनी एक्सचेंज भी खुलेगा। हालांकि नेपाल ने इस समझौते पर आपत्ति जताई थी। उसका कहना है कि लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी उसके क्षेत्र का हिस्सा हैं। उसने भारत और चीन से इस इलाके में कोई एक्टिविटी न करने की अपील की है। केंद्र ने राज्य सरकार से व्यवस्था करने को कहा विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन को लेटर लिखकर हिमालयी दर्रे के जरिए व्यापार बहाल करने का अनुरोध किया है। लेटर में बताया गया है कि गृह मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय से भी मंजूरी मिल चुकी है। प्रशासन ने ट्रेड पास जारी करने, करेंसी एक्सचेंज के लिए बैंकों की व्यवस्था, कस्टम विभाग की तैनाती और धारचूला प्रशासन को विस्तृत एक्शन प्लान तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें व्यापारियों के लिए ट्रांजिट कैंप, संचार, बैंकिंग, सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाएं शामिल होंगी। व्यापारियों ने फैसले का स्वागत किया उत्तराखंड के पिथौरागढ़ सीमांत व्यापार संगठन के अध्यक्ष जीवन सिंह रोंकाली ने इस फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे व्यापारियों को 2019 से तकलाकोट (तिब्बत) के वेयरहाउस में रखे सामान को वापस लाने का अवसर मिलेगा।

उमा भारती ने किया सनसनीखेज बयान, जब तक जिंदा हूं राजनीति करूंगी, बहुत लंबा जीने का मन है

टीकमगढ़  मध्य प्रदेश की पूर्व सीएम और  BJP का फायर ब्रांड नेता उमा भारती  Uma Bharti Statement  के एक नए बयान से प्रदेश की राजनीति में हलचल है। टीमकमढ़ में उमा भारती ने ये बड़ा बयान दिया है। उमा भारती ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि वो अभी राजनीति से संन्यास नहीं लेनी वाली है, जब तक वह जिंदा रहेंगी, तब तक राजनीति के मैदान में डटी रहेंगी। इस दौरान उन्होंने लोगों से साथ देने की भी अपील की।दरअसल  टीकमगढ़ में वीरांगना अवंती बाई लोधी के बलिदान दिवस पर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने ये बड़ी अपील करते हुए हुंकार भरी है। सेहत का जिक्र करते हुए उमा भारती काफी भावुक नजर आई Uma Bharti  उमा भारती ने दो टूक शब्दों में कहा कि जब तक वह जिंदा रहेंगी, तब तक राजनीति के मैदान में रहेंगी, लोगों से भावुक अपील करते हुए भारती न अपने लंबे जीवन और संघर्ष के लिए आशीर्वाद मांगा. इस मौके पर अपनी सेहत का जिक्र करते हुए उमा भारती काफी भावुक नजर आईं हैं। उन्होंने कहा कि उनका बहुत लंबा जीने का मन है और इसके लिए उन्हें समाज और  लोगो के समर्थन की जरूरत है। जब मैं चल न पाऊं तो लोग उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया करें-उमा उमा भारती ने कहा कि कभी ऐसा समय आए और उम्र के साथ ऐसी स्थिति आ जाए कि वह खुद चल न पाएं, तो लोग उन्हें उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया करें, लेकिन वह काम करना बंद नहीं करेंगी। उमा भारती ने वाणी, आंख और कान की सलामती पर जोर दिया।  उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें दिखाई देगा, कानों से सुनाई देगा और बोलने योग्य रहेंगी तब तक वह जनता के हितों के लिए संघर्ष करती रहेंगी उमा बोलीं- जीवनभर राजनीति करना चाहती हैं भारती ने वीरांगना अवंती बाई लोधी के प्रति गहरी आस्था व्यक्त की. उन्होंने कहा कि वह वीरांगना के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए ही जीवनभर राजनीति करना चाहती हैं। पूर्व सीएम ने कहा कि उनकी सेहत ठीक नहीं रहती लेकिन जनता का प्यार और आशीर्वाद ही उन्हें लड़ने की ताकत देता है।

ओलावृष्टि और बारिश से 42 जिलों में फसलों की तबाही, 14 जिलों में आज भी जारी है खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा करवट ली है कि हालात चिंताजनक बन गए हैं। India Meteorological Department (IMD) के अनुसार पिछले 72 घंटों से सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ट्रफ लाइन के कारण पूरे प्रदेश में बेमौसम बारिश, तेज़ आंधी और ओलावृष्टि का दौर जारी है। भोपाल, इंदौर और ग्वालियर समेत 42 जिलों में इसका असर साफ देखने को मिला है। शुक्रवार को कई शहरों में तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में पारा अचानक 23.9°C तक पहुंच गया, जो एक ही दिन में 10.6 डिग्री की गिरावट दर्शाता है। मौसम में इस बदलाव ने गर्मी से राहत तो दी, लेकिन नुकसान कहीं ज्यादा हुआ। सबसे ज्यादा मार किसानों पर पड़ी है। ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने गेहूं, केला, पपीता और संतरे जैसी तैयार फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कई इलाकों में खेत पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। तेज आंधी ने बढ़ाई तबाही बारिश के साथ चली तेज आंधी ने हालात और खराब कर दिए। आगर-मालवा में 74 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं, जबकि सीहोर में 54 किमी और नरसिंहपुर में 46 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार दर्ज की गई। तेज हवाओं के कारण फसलें टूटकर गिर गईं और खेतों में पानी भर गया। धार और खरगोन में सबसे ज्यादा नुकसान धार जिले के मनावर क्षेत्र में तेज आंधी-बारिश से केले और पपीते की फसल पूरी तरह तबाह हो गई। एक किसान के करीब 2 हजार केले के पेड़ गिर गए, जिससे लाखों रुपए का नुकसान हुआ। वहीं खरगोन में तेज हवा से मक्का की फसल चौपट हो गई। किसानों का कहना है कि फसल तैयार थी, लेकिन मौसम ने पूरी मेहनत बर्बाद कर दी।  रायसेन में हाईवे पर बर्फ जैसी चादर रायसेन जिले में ओलावृष्टि इतनी तेज हुई कि नेशनल हाईवे पर बर्फ जैसी सफेद परत जम गई। सड़क पर जमी ओलों की चादर ने लोगों को हैरान कर दिया। हालांकि यह नजारा देखने लायक था, लेकिन किसानों के लिए यह भारी नुकसान का संकेत बन गया। तापमान में गिरावट, ठंड का अहसास बारिश और ठंडी हवाओं के चलते प्रदेश के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। पचमढ़ी 12.6 डिग्री सेल्सियस के साथ सबसे ठंडा रहा। वहीं इंदौर में 15 डिग्री और भोपाल में 16.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। कई जिलों में न्यूनतम तापमान में 3 डिग्री तक की कमी आई है।  किसानों पर संकट, मुआवजे की मांग तेज बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। खड़ी और कटी दोनों फसलें प्रभावित हुई हैं, जिससे आर्थिक नुकसान बढ़ गया है। कई किसान कर्ज में डूबने की आशंका जता रहे हैं और सरकार से जल्द मुआवजा देने की मांग कर रहे हैं।  आगे भी ऐसा ही रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार आने वाले कुछ दिनों तक प्रदेश में आंधी, बारिश और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है। इससे जहां लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, वहीं किसानों की चिंता अभी कम होती नजर नहीं आ रही है। IMD ने शनिवार को 14 जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इसमें टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, कटनी, उमरिया, शहडोल, डिंडौरी और अनूपपुर जैसे जिले शामिल हैं, जहां तेज़ आंधी और बारिश का खतरा बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार यह सिस्टम अब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और 22 मार्च (रविवार) से प्रदेश में मौसम साफ होने की संभावना है। तब तक लोगों को सतर्क रहने और किसानों को अपनी बची फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। पिछले 24 घंटों में प्रदेश के 40 से ज्यादा जिलों में करीब 70 स्थानों पर बारिश दर्ज की गई है, जबकि 11 जिलों में ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई है। अचानक बदले इस मौसम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्रकृति के आगे सभी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं।

9 साल में उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक बदलाव, एक्सप्रेसवे से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी तक

नव निर्माण के 9 वर्ष: इंफ्रास्ट्रक्चर 9 साल में बदला उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर का चेहरा, एक्सप्रेसवे से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी तक ऐतिहासिक छलांग 2017 में सीमित संसाधनों से आज देश का लॉजिस्टिक्स हब बनने की ओर अग्रसर यूपी एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और औद्योगिक कॉरिडोर से विकास को नई रफ्तार निवेश, निर्यात और रोजगार के नए अवसरों के साथ भविष्य की मजबूत आधारशिला लखनऊ  वर्ष 2017 से पहले सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी चुनौतियों से जूझता उत्तर प्रदेश, बीते 9 वर्षों में तेजी से बदलकर आज देश के उभरते लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार ने न केवल विकास की रफ्तार को नई दिशा दी है, बल्कि निवेश, निर्यात और रोजगार के क्षेत्र में भी अभूतपूर्व संभावनाओं के द्वार खोले हैं। आने वाले वर्षों में यही बुनियादी ढांचा प्रदेश को देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख इंजन बनाने की आधारशिला साबित होगा। 2017 से पहले की स्थिति वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास सीमित दायरे में था। प्रदेश में केवल 2 एक्सप्रेसवे संचालित थे और कनेक्टिविटी का दायरा अपेक्षाकृत कमजोर था। औद्योगिक विकास के लिए बड़े स्तर पर योजनाबद्ध भूमि चिह्नांकन और कॉरिडोर आधारित विकास की गति धीमी थी। लॉजिस्टिक्स लागत अधिक होने और परिवहन में समय लगने के कारण उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी प्रभावित होती थी। एविएशन सेक्टर में भी सीमित विस्तार था और प्रदेश का उपयोग बड़े निवेश गंतव्य के रूप में अपेक्षाकृत कम होता था। जलमार्ग और मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी की दिशा में भी कोई बड़ा प्रभावी ढांचा विकसित नहीं हुआ था। 9 वर्षों में बदली तस्वीर पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की है। जहां 2017 में केवल 2 एक्सप्रेसवे थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 22 तक पहुंच गई है। इनमें 7 संचालित, 5 निर्माणाधीन और 10 प्रस्तावित एक्सप्रेसवे शामिल हैं। देश के कुल एक्सप्रेसवे नेटवर्क का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा अब उत्तर प्रदेश से होकर गुजरता है। इन एक्सप्रेसवे के किनारे 26 जनपदों के 27 स्थानों पर लगभग 5,300 हेक्टेयर भूमि औद्योगिक विकास के लिए चिन्हित की गई है। साथ ही बुन्देलखण्ड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) का गठन कर 47 वर्षों बाद एक नए औद्योगिक शहर की नींव रखी गई है, जिससे 56,662 एकड़ क्षेत्र में बहुआयामी विकास को गति मिली है। निर्यात के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार किया है। ‘एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024’ में उत्तर प्रदेश चौथे स्थान पर पहुंच गया है, जबकि 2022 में यह सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों में प्रदेश का प्रथम स्थान इसकी नीतिगत मजबूती को दर्शाता है। लॉजिस्टिक्स सेक्टर में सुधार के चलते परिवहन समय में कमी आई है और लागत घटी है, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है और निवेशकों का विश्वास मजबूत हुआ है। जल, थल और नभ तीनों क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया गया है। वाराणसी में देश का पहला मल्टी-मॉडल टर्मिनल स्थापित किया गया है, जबकि रामनगर, चंदौली, मीरजापुर और गाजीपुर में टर्मिनल और फ्रेट विलेज विकसित किए जा रहे हैं। सड़क निर्माण में तेजी लाते हुए औसतन 19 किलोमीटर प्रतिदिन के हिसाब से सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। एविएशन सेक्टर में भी बड़ा विस्तार हुआ है। वर्तमान में 16 हवाई अड्डे संचालित हैं, जिनमें 4 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं, जबकि 8 हवाई अड्डे प्रक्रियाधीन हैं। भविष्य का विजन आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के शुरू होने के बाद प्रदेश देश का पहला राज्य बन जाएगा, जहां 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे होंगे, जिससे वैश्विक कनेक्टिविटी और निवेश को नई दिशा मिलेगी। मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी के विस्तार, एक्सप्रेसवे नेटवर्क के और सुदृढ़ीकरण तथा औद्योगिक कॉरिडोर के विकास से प्रदेश में लॉजिस्टिक्स लागत और कम होगी तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। निर्यात उन्मुख नीतियों, निवेश अनुकूल वातावरण और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से उत्तर प्रदेश न केवल देश का प्रमुख निवेश केंद्र बनेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति देगा।

व्यापार, शिक्षा और समाज सेवा में सिंधी समाज का महत्वपूर्ण योगदान: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

व्यापार, शिक्षा और समाज सेवा सभी क्षेत्रों में सिंधी समाज ने महत्वपूर्ण योगदान दिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री निवास में होगी सिंधी समाज की पंचायत मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दी चेटीचंड पर्व की मंगलकामनाएं भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार विकास के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोकर आगे बढ़ रही है। हर समुदाय की परंपराओं और संस्कृति को सम्मान देना और सभी को समान अवसर उपलब्ध कराना हमारा उद्देश्य है। चाहे व्यापार हो, शिक्षा हो या समाज सेवा, सिंधी समाज ने अपने परिश्रम समर्पण और सकारात्मक सोच से समाज को नई दिशा देते हुए प्रदेश और देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। शीघ्र ही मुख्यमंत्री निवास में सिंधी समाज की विशेष पंचायत आयोजित की जायेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंधी समाज के नववर्ष के रूप में मनाये जाने वाले भगवान झूलेलाल के जन्मोत्सव चेटीचंड के अवसर पर रवीन्द्र भवन में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समाज बंधुओं को पर्व की मंगलकामनाएं दीं। विधायक भगवान दास सबनानी तथा सिंधी सेंट्रल पंचायत के प्रतिनिधि कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प वर्षा का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में भजन और सांगीतिक प्रस्तुतियां भी हुईं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि चेटीचंड नव वर्ष के आरंभ का प्रतीक होने के साथ आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतिबिंब है। यह पर्व हमें भगवान झूलेलाल की शिक्षाओं के अनुरूप सद्भाव, सेवा और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंधी समाज ने संघर्ष और कठिनतम परिस्थितियों में स्वयं को पुनः स्थापित करने के अनेक उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। लगभग 1200 वर्ष पहले राजा दाहिर द्वारा विधर्मियों से धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया योगदान इतिहास में दर्ज है। स्वतंत्रता प्राप्ति के समय देश विभाजन की कठिनाइयों का भी सिंधी समाज ने दृढ़ता और साहस के साथ सामना किया तथा संघर्ष कर पुन: स्वयं को स्थापित कर अपनी पहचान बनाई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शहीद हेमू कालानी का स्मरण किया और भारतीय राजनीति में लालकृष्ण आडवानी के योगदान की सराहना की। विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव आम आदमी की समस्याओं की प्रति संवेदनशील हैं। उनके नेतृत्व में व्यापार, उद्योग, कृषि सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से विकास हो रहा है और प्रदेशवासियों को इसका लाभ भी मिल रहा है। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती मालती राय सहित समाज के वरिष्ठजन उपस्थित थे।  

मथुरा में ईद पर हिंसा, गौ-सेवक की मौत से भड़का गुस्सा, दिल्ली-आगरा हाईवे जाम, पुलिस ने चलाईं रबड़ गोलियां

 मथुरा  उत्तर प्रदेश के मथुरा में कथित गौ रक्षक 'फरसा वाले बाबा’ नाम से मशहूर चंद्रशेखर की गाड़ी से कुचलकर मौत हो गई। जिससे इलाके में तनाव फैल गया है। जानकारी के मुताबिक फरसा वाले बाबा गौ-तस्करों का पीछा कर रहे थे। इस दौरान कोहरे के कारण पीछे से आ रहे वाहन ने उन्हें कुचल दिया। इस घटना से आक्रोशित लोगों ने दिल्ली-आगरा हाईवे जाम कर दिया। वहीं, सूचना मिलने पर पुलिस प्रशासन भी मौके पर पहुंची और लोगों को समाझाने की कोशिश की। लेकिन जब देखते ही देखते हालात बिगड गए और प्रदर्शनकारियों ने पथराव शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने पहुंची पुलिस को भीड़ को काबू करने के लिए रबड़ की गोलियां चलानी पड़ीं।। कान्हा की नगरी ब्रज में ईद वाले दिन बवाल मच गया. आरोप है कि मथुरा के थाना कोसीकलां के अंतर्गत कोटवन चौकी क्षेत्र के नवीपुर में बीती रात विख्यात गौ-सेवक चंद्रशेखर उर्फ ‘फरसा वाले बाबा’ की गाड़ी से कुचलकर हत्या कर दी. जबकि एसएसपी ने कोहरे को टक्कर की वजह बताई है. इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है. इस दौरान गुस्साए लोगों ने दिल्ली-आगरा हाईवे पर जाम लगा दिया. जाम के चलते हाईवे पर वाहनों की लंबी लाइनें लग गईं और यातायात कई घंटे प्रभावित रहा । जानकारी के मुताबिक घटना कोसीकलां थाना क्षेत्र के नवीपुर इलाके की है। फरसे वाले बाबा को क्षेत्र में गौ-तस्करों की सक्रियता की सूचना मिली थी। इसके बाद वह अपनी टीम के साथ आरोपियों का पीछा कर रहे थे। नवीपुर के पास पीछे से आ रही गाड़ी ने उन्हें टक्कर मारते हुए कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कौन हैं फरसा वाले बाबा? मथुरा के ‘फरसा वाले बाबा’ का नाम चंद्रशेखर था, जो ब्रज क्षेत्र में एक प्रसिद्ध और निडर गौ रक्षक थे. वे हमेशा हाथ में फरसा लेकर गौ-वंश की रक्षा करते थे. गौरक्षा आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे और वे प्रखर गौरक्षक व संत के रूप में जाने जाते थे. मथुरा के अंजनोक में वे प्रवास करते थे. वे निडर होकर गौ रक्षा में लगे रहते थे और ब्रज में उनकी काफी लोकप्रियता थी।  हाईवे पर जाम लगने से फंसे वाहनों पर हुआ पथराव वहीं जैसे-जैसे भीड़ जुटती गई, आक्रोश बढ़ता गया. इस दौरान आगरा दिल्ली हाईवे पर आक्रोशित भीड़ ने पथराव करना शुरू कर दिया. अचानक हुआ पथराव से भगदड़ मच गई. हाईवे पर जाम लगने से फंसे वाहनों पर हुआ पथराव से लोग सहम गए. पुलिस ने मोर्चा संभाला, लेकिन भीड़ के आगे पुलिसकर्मियों के कदम भी पीछे हट गए।  हजारों की संख्या में ग्रामीण और गौ-भक्त जमा बाबा का पार्थिव शरीर उनके गांव अंजनोख स्थित बाबा की गोशाला पहुंचा, जहां हजारों की संख्या में ग्रामीण और गौ-भक्त जमा हैं. बाबा ‘फरसा वाले’ अपने निडर स्वभाव और गौ-वंश की रक्षा के लिए ब्रज क्षेत्र में काफी लोकप्रिय थे. उनकी हत्या की खबर फैलते ही हिंदूवादी संगठनों और गौ-सेवकों में भारी रोष व्याप्त है।  एक आरोपी पकड़ा गया, तीन फरार स्थानीय लोगों ने मौके से एक मुस्लिम युवक को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया, जबकि तीन आरोपी वारदात के बाद फरार होने में सफल रहे. पुलिस टीम उनकी तलाश में जुटी है।  गौ रक्षक की हत्या के बाद क्षेत्र में स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई। पूरे इलाके में शोक के साथ-साथ भारी आक्रोश फैल गया। घटना के विरोध में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए और मुख्य मार्गों पर जाम लगा दिया। प्रदर्शन के दौरान हालात उस समय और बिगड़ गए, जब कुछ लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए रबर की गोलियां चलानी पड़ीं। बताया जा रहा है कि डीआईजी द्वारा समझाने के प्रयासों के बावजूद प्रदर्शनकारी शांत नहीं हुए। जाम के कारण हाईवे पर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया, जिसमें विदेशी नागरिक भी फंसे रहे। कई वाहन चालक गलत दिशा से निकलने की कोशिश करते नजर आए, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।इस दौरान उग्र भीड़ ने एडीएम प्रशासन की गाड़ी को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। स्थिति को देखते हुए क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और हालात पर नजर रखी जा रही है।

भोपाल में ईद के बाद नारे – अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद, सुन्नी और शिया मस्जिदों में अलग-अलग आयोजन

 भोपाल  ईद की नमाज के बाद भोपाल में शिया समुदाय ने अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। नमाज अदा करने के बाद सड़कों और इमामबाड़ा परिसर में “अमेरिका-इजराइल मुर्दाबाद” के नारे गूंज उठे। शिया समुदाय के लोग काली पट्टी बांधकर सादे और पुराने कपड़ों में इमामबाड़ा पहुंचे और इस बार ईद को शोक के साथ मनाने का फैसला किया। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर शिया समुदाय पूरे देश में गम में डूबा हुआ है। भोपाल में भी राष्ट्रीय मुस्लिम त्यौहार कमेटी और स्थानीय शिया संगठनों ने ‘काली ईद’ का ऐलान कर दिया। लोगों ने ईद की रौनक छोड़कर सादगी अपनाई नए कपड़े नहीं पहने, घरों में पारंपरिक स्वीट्स नहीं बनाईं और नमाज के दौरान काली पट्टी बांधकर शोक जताया। भोपाल में शिया समुदाय ने फतेहगढ़ इमामबाड़ा में काली ईद मनाई। नमाज के बाद में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए। लोग काली पट्टी बांधकर सादे और पुराने कपड़ों में पहुंचे, जिससे गम का माहौल दिखा। इमामबाड़ा में आयतुल्लाह अली खामेनेई की तस्वीर रखकर श्रद्धांजलि दी गई। तकरीर में मौलाना राजी उल हसन ने जुल्म के खिलाफ खड़े होने की बात कही। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी के रुख का जिक्र करते हुए उनके विचारों की सराहना भी की। इसके अलावा फतेहगढ़ इमामबाड़ा में भी काली पट्टी बांधकर ईद मनाई गई। करौंद स्थित शिया जामा मस्जिद और अन्य इमामबाड़ों में ईद की नमाज के बाद श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित हुईं। इमाम मौलाना अजहर हुसैन रिजवी ने कहा, “खामेनेई साहब जालिम के खिलाफ और मजलूम के साथ खड़े रहने वाले निडर रहबर थे। उनकी शहादत से उम्मत-ए-मुसलमान खुद को यतीम महसूस कर रही है, लेकिन शहादत विचारधारा को कमजोर नहीं करती, बल्कि मजबूत बनाती है।” इमाम बाकर हुसैन ने भी संबोधित करते हुए कहा, “पूरी दुनिया जानती है कि उन्होंने जुल्म के खिलाफ आवाज उठाई और इस्लामी इंकलाब के सिद्धांतों को आगे बढ़ाया। इतिहास गवाह है कि एक व्यक्ति की शहादत से आंदोलन नहीं रुकता।” सभा में खामेनेई जिंदाबाद, अमेरिका मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद के नारे लगे। शिया समुदाय के नेताओं ने तीन दिवसीय शोक की घोषणा की है। उन्होंने अपील की कि ईद की नमाज सादगी से अदा की जाए और फिलिस्तीन-ईरान के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ एकजुट रहा जाए। भोपाल के अलावा इंदौर, दिल्ली, लखनऊ और अन्य शहरों में भी इसी तरह का मातम देखा जा रहा है।  

सीएम योगी के निर्देश पर यूपीएसआईएफएस में जल्द स्थापित की जाएंगी पांच लैब्स

योगी सरकार अपराध के बदलते तरीकों पर पांच नई लैब्स से लगाएगी ब्रेक  सीएम योगी के निर्देश पर यूपीएसआईएफएस में जल्द स्थापित की जाएंगी पांच लैब्स – क्वांटम कंप्यूटिंग लैब, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब, 3-डी प्रिंटिंग लैब, एससीएडीए लैब और डिजिटल फॉरेंसिक लैब की जाएंगी स्थापित नई लैब्स से केसों के निस्तारण में आएगी तेजी और दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मिलेगी मदद :सीएम योगी लखनऊ योगी सरकार ने अपराध के बदलते तरीकों पर रोक लगाने के लिए यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज में पांच नई लैब स्थापित करने का निर्णय लिया है। इन लैब के जरिये इंस्टीट्यूट के छात्र अपराध के विभिन्न स्वरूपों की जांच करने के तरीके सीख सकेंगे। इसके साथ ही यूपी पुलिस के जांबाज भी इन लैब्स से विभिन्न तरीकों से होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के गुण सीख सकेंगे। योगी सरकार इंस्टीट्यूट में क्वांटम कंप्यूटिंग लैब, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब, 3-डी प्रिंटिंग लैब, आईटी/ओटी सिक्योरिटी के लिए एससीएडीए लैब और डिजिटल फॉरेंसिक लैब शुरू करेगी। इन लैब्स के शुरू होने से प्रदेश में अपराधों की जांच और साक्ष्य विश्लेषण की क्षमता में बड़ा सुधार होगा। गौरतलब है कि वर्तमान में इंस्टीट्यूट में पांच लैब्स संचालित हैं। इनमें एडवांस्ड साइबर फॉरेंसिक, एडवांस्ड डीएनए प्रोफाइलिंग, एआई-ड्रोन एंड रोबोटिक्स, डॉक्यूमेंटेशन एग्जामिनेशन और इंस्ट्रूमेंटेशन लैब्स शामिल हैं।  क्वांटम कंप्यूटिंग लैब से जटिल डाटा एनालिसिस को तेजी से सुलझाया जा सकेगा यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज के निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा मॉर्डन टेक्नोलॉजी अपनाने पर जोर देते हैं। इसी कड़ी में सीएम योगी की मंशा के अनुरूप इंस्टीट्यूट में पांच नई लैब की स्थापना की तैयारी की जा रही है। इसमें क्वांटम कंप्यूटिंग लैब के माध्यम से जटिल डाटा एनालिसिस और एन्क्रिप्शन से जुड़े मामलों को तेजी और सटीकता से सुलझाया जा सकेगा। यह लैब साइबर अपराधों की जांच में विशेष रूप से उपयोगी साबित होगी। वहीं, चैलेंज्ड ऑडियो-वीडियो लैब उन मामलों में अहम भूमिका निभाएगी, जहां खराब गुणवत्ता वाले ऑडियो या वीडियो को स्पष्ट कर साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करना होता है। डिजिटल फॉरेंसिक लैब से डिजिटल उपकरणों की डाटा रिकवरी की बढ़ेगी क्षमता 3-डी प्रिंटिंग लैब अपराध स्थलों के मॉडल तैयार करने, हथियारों के प्रतिरूप बनाने और घटनाओं के रीक्रिएशन में मदद करेगी। इससे जांच एजेंसियों को केस को बेहतर तरीके से समझने और अदालत में प्रभावी प्रस्तुति देने में सहायता मिलेगी। वहीं, एससीएडीए लैब आईटी और ओटी (ऑपरेशनल टेक्नोलॉजी) सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच के लिए महत्वपूर्ण होगी, खासकर औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर होने वाले साइबर हमलों की पड़ताल में अहम भूमिका निभाएगी। इसके अलावा डिजिटल फॉरेंसिक लैब से मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरणों से डाटा रिकवरी और विश्लेषण की क्षमता बढ़ेगी। इससे साइबर क्राइम, वित्तीय धोखाधड़ी और अन्य तकनीकी अपराधों की जांच और भी प्रभावी हो सकेगी। नई लैब्स के शुरू होने से केसों के निस्तारण में आएगी तेजी  योगी सरकार द्वारा प्रदेश में फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योगी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में न केवल नए फॉरेंसिक संस्थानों की स्थापना पर जोर दिया है, बल्कि मौजूदा लैब्स को आधुनिक तकनीकों से लैस करने का भी काम किया है। पुलिस और जांच एजेंसियों को वैज्ञानिक साक्ष्य आधारित जांच के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे अपराधियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किए जा सकें। योगी सरकार का उद्देश्य है कि प्रदेश में न्याय प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया जाए। नई लैब्स के शुरू होने से केसों के निस्तारण में तेजी आएगी और दोषियों को जल्द सजा दिलाने में मदद मिलेगी। साथ ही, इससे प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने में भी योगदान मिलेगा।

मिशन ईरान के करीब, ट्रंप ने सैन्य अभियान समेटने की ओर इशारा किया

वाशिंगटन अमेरिका-ईरान युद्ध के 21वें दिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला 'एग्जिट प्लान' साझा किया है.  'ट्रुथ सोशल' पर जारी एक विस्तृत पोस्ट में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने के 'बेहद करीब' है और अब वह मध्य पूर्व में जारी अपने बड़े सैन्य अभियानों को धीरे-धीरे कम करने (Winding Down) पर विचार कर रहा है।  ट्रंप ने अपनी पोस्ट में उन उपलब्धियों को गिनाया जिन्हें वे जीत का आधार मान रहे हैं' उन्होंने कहा, 'हमने ईरान की मिसाइल क्षमता, रक्षा औद्योगिक आधार, नौसेना और वायुसेना को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है' ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियारों के करीब न पहुंच सके।  इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों-इजरायल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, बहरीन और कुवैत की सुरक्षा सुनिश्चित की है और आगे भी उनकी रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।  ट्रंप के इस बयान का सबसे अहम हिस्सा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा को लेकर था. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जो देश इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल अपने तेल और व्यापार के लिए करते हैं, अब सुरक्षा और पुलिसिंग की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर मदद कर सकता है, लेकिन यह जिम्मेदारी अन्य देशों को निभानी चाहिए।  ट्रंप ने तर्क दिया, 'अमेरिका इस रास्ते का उपयोग नहीं करता है, इसलिए अन्य देशों को आगे आना चाहिए'' उन्होंने इसे उन देशों के लिए एक 'आसान सैन्य अभियान' बताया और कहा कि ईरान का खतरा खत्म होने के बाद अमेरिका की मुख्य भूमिका की आवश्यकता नहीं रह जाएगी।  आपको बता दें कि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. हाल के हफ्तों में यहां हमलों और तनाव के कारण वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा है. ट्रंप के इस बयान को ऐसे समय में देखा जा रहा है जब युद्ध को लगभग तीन हफ्ते हो चुके हैं और क्षेत्र में अस्थिरता बनी हुई है।