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अमेरिकी अधिकारी ने किया बड़ा ऐलान, ‘3-4 दिन में बंदरगाहों तक पहुंचेगा तेल-गैस

नई दिल्‍ली अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग ने पूरी दुनिया के लिए संकट पैदा कर दिया है. इस बीच, अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने शुक्रवार को कहा कि समुद्र में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटाने से तीन-चार दिनों के भीतर एशिया तक आपूर्ति पहुंच जाएगी।  यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका ने समुंद्र में फंसे ईरानी तेल से प्रतिबंध हटा दिया है और 30 दिनों के लिए इन प्रतिबंधों से ढील दी है. इससे पहले वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा था कि अमेरिका जल्द ही समुद्र में टैंकरों में फंसे ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंध हटा सकता है. इस कदम का उद्देश्य ईरान द्वारा स्‍ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करने के कारण बढ़ती कीमतों को कम करना है।  फॉक्स बिजनेस नेटवर्क के साथ एक इंटरव्‍यू में क्रिस राइट ने कहा कि कुछ ही दिनों में, तीन या चार दिनों के भीतर, वह तेल बंदरगाहों पर पहुंचना शुरू हो जाएगा, जिसके बाद तेल की बढ़ती कीमतों को कम किया जा सकेगा. उन्‍होंने कहा कि मौजूदा प्रतिबंधों के कारण ईरान की कच्चे तेल के निर्यात की क्षमता सीमित हो गई है, जिससे तेल का भंडार बाजारों तक पहुंच नहीं पा रहा है।  ईरान से प्रतिबंध हटाया  अमेरिका ने समुद्र में फंसे ईरानी तेल टैंकरों को छूट दी है. अब ये तेल टैंकर एशिया के बंदरगाहों पर आसानी से पहुंच सकते हैं. अमेरिका ने 1 महीने यानी 19 अप्रैल तक इसमें छूट दी है।  गौरलब है कि वैश्विक तेल व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण जलमार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरान की कार्रवाइयों के बाद कीमतों में भारी उछाल आया है. प्रतिबंध हटाने से आपूर्ति की समस्‍या खत्‍म हो सकती है।  गंभीर संकट का समाना कर सकती है दुनिया ऊर्जा अधिकारियों ने बाजार के दबाव को कम करने और इन आपूर्तियों पर निर्भर अन्य क्षेत्रों के लिए ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के लिए तेल की सप्‍लाई बनाए रखने पर जोर दिया है. इस बीच, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है कि खाड़ी देशों से तेल और गैस की आपूर्ति बहाल करने में 6 महीने तक का समय लग सकता है. फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक इंटरव्‍यू में बिरोल ने चेतावनी दी कि दुनिया इतिहास के सबसे गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर सकती है।  इसके अलावा, सऊदी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान से संबंधित आपूर्ति में रुकावटें अप्रैल के अंत तक जारी रहती हैं, तो तेल की कीमत 180 डॉलर प्रति बैरल या उससे भी अधिक हो सकती है. अनुमानों के अनुसार, 180 डॉलर प्रति बैरल की दर पर अमेरिकियों को 7 डॉलर प्रति गैलन से अधिक भुगतान करना होगा। 

नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में श्रद्धा का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

नवरात्रि पर यूपी के देवी मंदिरों में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन नवरात्रि के दूसरे दिन मां विंध्यवासिनी, मां पाटेश्वरी देवी, मां विशालाक्षी के दर्शन के लिए उमड़ी भीड़, युवा भक्तों की सबसे अधिक रही संख्या विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, मां शाकुम्भरी देवी, मां कात्यायनी और मां पाटेश्वरी देवी के धामों में लगा रहा भक्तों का तांता    लखनऊ चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के सभी देवी मंदिरों में आस्था का अद्भुत जनसैलाब देखने को मिल रहा है। नवरात्रि के दूसरे दिन भी शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां लाखों की संख्यां में भक्तों ने मां भगवती का दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विंध्याचल, काशी, प्रयागराज, सहारनपुर, देवीपाटन और वृंदावन सहित कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें सुबह से ही देखी गईं। श्रद्धालुओं के सैलाब में युवाओं की संख्या सबसे ज़्यादा रही, उनके जोश और उत्साह भरे “जय माता दी” के जयकारों से मंदिरों परिसर पूरी तरह भक्तिमय नजर आये। विशेष अवसर के चलते नगर निगमों और प्रशासन द्वारा स्वच्छता और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि श्रद्धालुओं को मां भगवती के सुगम दर्शन सुलभ हो सकें।  नवरात्रि के दूसरे दिन मीरजापुर स्थित माँ विंध्यवासिनी धाम में लोगों की आस्था चरम पर रही। सुबह से लेकर शाम तक यहां 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मां के दरबारों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। मीरजापुर सिटी मजिस्ट्रेट और मेला प्रभारी अविनाश कुमार ने बताया कि प्रशासन के अनुसार श्रद्धालुओं की संख्या सुबह ही 2 लाख के आंकड़े को पार कर गई थी। मां विंध्यवासिनी के धाम में नवरात्रि के अवसर पर पूरे दिन और रात दर्शन-पूजन का क्रम चल रहा है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में पेयजल, छाया, कूलर के साथ एलईडी स्क्रीन की भी  व्यवस्था की गई है, जिससे कतार में लगे भक्तों को भी मां के दर्शन का लाभ मिल सके। साथ ही न केवल मंदिर परिसर, बल्कि विंध्याचल धाम के आस-पास के क्षेत्रों व अन्य मंदिरों में भी सुरक्षा के भी व्यापक इंतजाम किए गए, जिससे दर्शन व्यवस्था सुगम बनी रही। इसी तरह प्रयागराज स्थित मां ललिता देवी शक्तिपीठ में भी आस्था का सैलाब उमड़ा। पिछले दो दिनों में यहां लगभग 2.5 से 3 लाख श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। पौराणिक मान्यता के अनुसार यह मां भगवती के 51 शक्तिपीठों में से एक महत्वपूर्ण स्थल है। इसके साथ ही प्रयागराज के अन्य प्रसिद्ध देवी धाम अलोप शंकरी और कल्याणी देवी मंदिर में भी  की भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में वाराणसी के प्रसिद्ध मां विशालाक्षी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की अपार भीड़ देखी गई। सामान्य दिनों में जहां 4 से 5 हजार लोग दर्शन करने आते हैं, वहीं नवरात्रि में यह संख्या बढ़कर 7 से 8 हजार तक पहुंच गई है। यहां विशेष रूप से दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। इसी क्रम में नगर निगम और प्रशासन द्वारा यहां स्वच्छता और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं।  सहारनपुर के शाकुम्भरी देवी मंदिर में भी नवरात्रि के दूसरे दिन शाम तक 80 हजार से अधिक भक्त पहुंच चुके हैं। वहीं बलरामपुर स्थित मां पाटेश्वरी देवीपाटन मंदिर में करीब 2.5 लाख भक्तों ने दर्शन किए। इन सभी स्थलों पर भक्तों में खासा उत्साह देखा गया, जिसमें युवाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। वहीं कान्हा की नगरी मथुरा-वृंदावन भी नवरात्रि के अवसर पर शक्ति की भक्ति में डूबा नजर आ रहा है। वृंदावन स्थित शक्ति पीठ मां कात्यायनी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। शुरुआती दो दिनों में ही यहां 1.5 लाख से अधिक भक्तों ने माँ के दर्शन किए। मंदिर में विशेष सजावट और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया है। नवरात्रि के अवसर पर प्रदेश के मंदिरों में उमड़ी इस भारी भीड़ के बीच प्रशासन द्वारा सुगम दर्शन, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है। नगर निगम की टीमें लगातार सफाई व्यवस्था में जुटी हैं, जबकि महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर प्रमुख स्थल पर सीसीटीवी कैमरे और भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रदेश में नवरात्रि के दौरान उमड़ा यह जनसैलाब न केवल आस्था की गहराई को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि जिस तरह से उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक पुनर्जागरण की लहर चल रही है, उसे देखते हुए नई पीढ़ी में भी अपने सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति आस्था और विश्वास बढ़ा है।

सीएम योगी करेंगे वन एवं अर्थव्यवस्थाएं विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन

सीएम योगी करेंगे ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय वन दिवस पर लखनऊ में ‘अरण्य समागम’ का आयोजन इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में शनिवार सुबह 10 बजे होगा कार्यक्रम, विशेषज्ञों और गणमान्य अतिथियों की रहेगी मौजूदगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को राजधानी के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मार्स हॉल में प्रातः 10:00 बजे ‘वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषयक राष्ट्रीय वानिकी संवाद का उद्घाटन करेंगे। यह कार्यक्रम अंतरराष्ट्रीय वन दिवस (21 मार्च) के अवसर पर आयोजित ‘अरण्य समागम’ के तहत किया जा रहा है। इस आयोजन में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ तथा गणमान्य अतिथि भाग लेंगे। ’वन एवं अर्थव्यवस्थाएं’ विषय पर होगा मंथन ‘अरण्य समागम’ के अंतर्गत आयोजित इस राष्ट्रीय वानिकी संवाद में वन और अर्थव्यवस्था के बीच संबंधों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा। इस मंच के माध्यम से सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। हरित प्रदेश के लक्ष्य को नई गति प्रदेश में ‘स्वच्छ-समृद्ध-हरित प्रदेश’ के संकल्प के तहत पिछले 9 वर्षों में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया है। हरित क्षेत्र बढ़ाने के सतत प्रयासों से प्रदेश का वनावरण 9.96 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। निजी भूमि पर पौधरोपण को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री कृषक वृक्ष धन योजना संचालित की जा रही है, जबकि पीएम मोदी के विजन के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान जन आंदोलन का रूप ले चुका है। किसानों को कार्बन क्रेडिट की धनराशि वितरित करने वाला उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य बना है और वर्षाकाल 2026 में 35 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। योगी सरकार की महत्वपूर्ण पहल उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा ‘स्वच्छ-समृद्ध-हरित प्रदेश’ के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में यह आयोजन योगी सरकार की एक और महत्वपूर्ण पहल है। वन संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। ‘एक और कदम हरियाली की ओर’ संदेश के साथ आयोजित यह कार्यक्रम जनभागीदारी को प्रोत्साहित करेगा और प्रदेश को हरित एवं समृद्ध बनाने के संकल्प को और मजबूत करेगा। कार्यक्रम में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन  डॉ. अरुण कुमार सक्सेना तथा राज्य मंत्री पर्यावरण, वन, जंतु उद्यान एवं जलवायु परिवर्तन केपी मलिक की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। इसके अलावा अन्य गणमान्य अतिथि और विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में शामिल होंगे, जो अपने अनुभव और विचार साझा करेंगे। यह आयोजन नीति और व्यवहार के बीच समन्वय स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा।

सनातन विरोध वाले स्थानों पर नहीं जाती वर्तमान पीढ़ी: सीएम योगी

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र प्रतिष्ठापना कार्यक्रम  सनातन विरोध वाले स्थानों पर नहीं जाती वर्तमान पीढ़ी: सीएम योगी अब नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाते हैं लोग: मुख्यमंत्री  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में की श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना मुख्यमंत्री ने कहा, दुनिया में युद्ध चल रहे और हम कर रहे रामराज्य की अनुभूति अयोध्या/लखनऊ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिवस पर गुरुवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना की। इस अवसर पर राष्ट्रपति की उपस्थिति में गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने सबसे पहले प्रदेशवासियों को भारतीय नवसंवत्सर की शुभकामना दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरयू मैया अयोध्या धाम को पवित्र करते हुए अपने निर्मल जल से पूरे क्षेत्र को पवित्र करती हैं। रामराज्य की अनुभूति का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दुनिया में युद्ध चल रहे हैं और हम श्रीराम यंत्र की प्रतिष्ठापना कार्यक्रम में सहभागी बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने वर्तमान पीढ़ी की प्रशंसा की और कहा कि यह पीढ़ी नववर्ष पर ऐसे किसी टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाती, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चा भारतीय आनंदित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व-मार्गदर्शन में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन, श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा, रामदरबार के पवित्र विग्रह की स्थापना, ध्वजा आरोहण और आज श्रीराम यंत्र की स्थापना का कार्यक्रम हर सनातन धर्मावलंबी व सच्चे भारतीय को आनंद से विभोर कर देता है और यही भारत की आस्था है।  राम मंदिर को अंधविश्वास बताने वाले सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे सीएम योगी ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा, कहा कि आस्था को अंधविश्वास कहकर अपमानित किया गया था। इसे अपमानित करने वाले वही लोग हैं, जो सत्ता बचाने के लिए नोएडा नहीं जाते थे। नोएडा न जाना उनके लिए अंधविश्वास नहीं था, लेकिन राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, कृष्ण-कन्हैया के मथुरा-वृंदावन की बात करना अंधविश्वास का पर्याय था। लेकिन जो आस्था 500 वर्ष तक निरंतर बनी रही, संघर्षों का मुकाबला करती रही, वह न रुकी, न डिगी और न झुकी। आस्था को अपमानित करने वाली सत्ता के खिलाफ संघर्ष निरंतर जारी रहा। अंततः वह दिन आया, जब अयोध्या इस रूप में सबके सामने है।  श्रीराम मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का बना प्रतीक  सीएम योगी ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर भारत के राष्ट्र मंदिर का प्रतीक बन गया है। यह रामराज्य की आधारशिला भी है। दुनिया में तमाम युद्ध चल रहे हैं, अव्यवस्था, आर्थिक अराजकता, भय-आतंक है और अयोध्याधाम में हजारों की संख्या में उपस्थित हम लोग भयमुक्त होकर राष्ट्रपति जी के अभिवादन और श्रीराम यंत्र की स्थापना कार्यक्रम में सहभागी बनकर रामराज्य की अनुभूति कर रहे हैं। सीएम ने कहा कि भारत इसलिए भारत बना है, क्योंकि इसे ऋषि-मुनियों की तपस्या, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता और भारत की आस्था ने सदैव ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के रूप में बनाए रखा। श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ की पूर्णाहुति कार्यक्रम के साथ जुड़कर न केवल प्रदेशवासी, बल्कि देश-दुनिया के सनातन धर्मावलंबी के मन में भी आनंद की अनुभूति हो रही है। 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु आए उत्तर प्रदेश  सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2025 में 156 करोड़ श्रद्धालु-पर्यटक धार्मिक व आध्यात्मिक स्थलों की यात्रा करने उत्तर प्रदेश आए। अयोध्या, काशी, प्रयागराज महाकुम्भ, मथुरा-वृंदावन में दर्शन करने जितने लोग आए, उतनी आबादी कई देशों की नहीं है। यह नया और बदलता भारत है। वर्तमान पीढ़ी अब दिग्भ्रमित नहीं है, वह सही दिशा में जा रही है। वह नए वर्ष पर परिवार के साथ मंदिर जाती है। लोग किसी ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर नहीं जाते, जहां सनातन के विरोध में कोई कार्य हो रहा है। सीएम योगी ने बलिदान देने वाले रामभक्तों, संतों को किया नमन  सीएम ने राम मंदिर निर्माण यज्ञ में योगदान देने वाले संतों, रामभक्तों, कारीगरों/श्रमिकों का अभिनंदन किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान बलिदान देने वाले रामभक्तों के साथ ही संतों व दिवंगत विहिप नेता अशोक सिंहल आदि को नमन किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को स्मृति चिह्न प्रदान किया। कार्यक्रम का संचालन श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने किया। इस दौरान राज्यपाल आनंदी बेन पटेल, मां अमृतानंदमयी (अम्मा), राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भैया जी, श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले कारीगरों के पारिवारिक सदस्यों समेत हजारों रामभक्त मौजूद रहे।

एमपी के इस जिले में 30 एकड़ पर निर्माण होगा, 2000 घर और 200 दुकानें मिल गई मंजूरी

 जबलपुर  मध्यप्रदेश के जबलपुर शहर में नर्मदा रोड स्थित तिलहरी क्षेत्र में शहर की पहली सैटेलाइट सिटी विकसित की जाएगी। 30 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट को राजस्व विभाग से मंजूरी मिल चुकी है। निर्माण एजेंसी हाउसिंग बोर्ड की ओर से जमीन के एवज में 11 करोड़ रुपए की राशि पहले ही जमा कराई जा चुकी है। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, सेटेलाइट सिटी का उद्देश्य एक सुव्यवस्थित और आधुनिक शहर विकसित करना है, जो बेंगलुरु की इलेक्ट्रॉनिक सिटी और गुरुग्राम की तर्ज पर होगा। यहां रेसिडेंशियल, इंडस्ट्रियल और कमर्शियल सभी प्रकार की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराई जाएंगी। शहर को मिलेंगे कई फायदे सेटेलाइट सिटी बनने से शहर में भीड़भाड़ कम होगी और संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही रोजगार और औद्योगिक अवसर बढ़ेंगे तथा लोगों को बेहतर और शांत जीवनशैली मिलेगी। अभी यह है स्थिति     2 हजार आवासीय भवन और 200 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित     11 करोड़ रुपए हाउसिंग बोर्ड द्वारा राजस्व विभाग को दिए जा चुके     एमआईजी, एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के आवास होंगे शामिल     8 गार्डन विकसित कर क्षेत्र को हरित बनाया जाएगा ऐसा होगा स्वरूप – बेहतर सड़क और परिवहन -किफायती से लेकर लग्जरी हाउसिंग -आइटी पार्क, उद्योग और संभावित एसईजेड -उच्चस्तरीय शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं -हरित क्षेत्र, पार्क और ओपन स्पेस स्पोर्ट्स क्लब, क्लब हाउस सेटेलाइट सिटी के लिए जमीन को राजस्व विभाग से मंजूरी मिल गई है। राशि का आवंटन होते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। यहां विशेष इंफ्रास्ट्रक्चर, उद्योग और आवासीय क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, साथ ही 8 गार्डन भी बनाए जाएंगे। सुनील उपाध्याय, प्रोजेक्ट प्रभारी, हाउसिंग बोर्ड आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी सिटी सेटेलाइट सिटी में बेहतर रोड कनेक्टिविटी के लिए 9 से 12 मीटर चौड़ी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में सर्विस एरिया, अंडरग्राउंड पार्किंग और पेयजल, बिजली जैसी सभी यूटिलिटीटी अंडरग्राउंड रहेंगी। कनेक्टिविटी के लिहाज से यह क्षेत्र और भी महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि यहां से रिंग रोड और डुमना एयरपोर्ट तक सीधी और सुगम पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। इससे न केवल स्थानीय निवासियों को लाभ मिलेगा, बल्कि बाहरी क्षेत्रों से आने-जाने वालों के लिए भी यह स्थान सुविधाजनक बनेगा। इसके अलावा, क्षेत्र को एक पूर्ण विकसित शहरी क्षेत्र के रूप में तैयार करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट की बेहतर व्यवस्था की जाएगी। साथ ही, स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, शॉपिंग मॉल और अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा, ताकि यहां रहने वाले लोगों को सभी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध हो सकें।

मुंबई में घर की कीमतों में इजाफा, ईरान-इजरायल तनाव का पड़ा असर

मुंबई मुंबई में प्रॉपर्टी की कीमतें पहले से ही आसमान छू रहीं हैं और अब इनके रेट्स में और तेजी आ सकती है.  Anarock Group की एक नई रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि मुंबई और उसके आसपास के इलाकों (MMR) में घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका मुख्य कारण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव है, जिसकी वजह से निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान को लाने-ले जाने का खर्च और कच्चे माल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं।  रिपोर्ट के मुताबिक, ऊंची इमारतों को बनाने का खर्च पहले ही करीब ₹50 प्रति वर्ग फुट तक बढ़ चुका है. जानकारों का मानना है कि बिल्डर्स अब इस बढ़े हुए खर्च की भरपाई घर खरीदारों से करेंगे, जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जो बजट होम या मध्यम आय वर्ग के घर तलाश रहे हैं।  निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख इनपुट्स की कीमतों में भी तीखी वृद्धि देखी गई है. स्टील की कीमतें लगभग 20 प्रतिशत बढ़कर ₹62 से ₹72 प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई हैं, जबकि हॉट रोल्ड कॉइल की कीमतें ₹51 से ₹56 प्रति किलोग्राम के बीच बनी हुई हैं, जिनमें आगे और बढ़ोतरी की आशंका है।  खाड़ी देशों में उत्पादन में कटौती के चलते एल्युमीनियम की कीमतें ₹3.5 लाख प्रति टन तक जा पहुंची हैं, जिसका उपयोग इमारतों के बाहरी हिस्सों और मेट्रो स्टेशनों जैसे बुनियादी ढांचे में प्रमुखता से होता है. साथ ही, सड़क निर्माण के लिए अनिवार्य बिटुमेन की कीमतें भी बढ़कर ₹48 से ₹51 प्रति किलोग्राम हो गई हैं।  लॉजिस्टिक्स में आ रही हैं बाधाएं लागत में इस अप्रत्याशित वृद्धि का सबसे बड़ा कारण लॉजिस्टिक्स में आने वाली बाधाएं हैं. होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बाधित होने के कारण शिपमेंट्स को अब 'केप ऑफ गुड होप' के लंबे रास्ते से भेजा जा रहा है, जिससे समुद्री मार्ग की दूरी 6,000 से 10,000 समुद्री मील बढ़ गई है और डिलीवरी में 10 से 20 दिनों की देरी हो रही है. इस बदलाव ने प्रति कंटेनर माल ढुलाई की लागत में ₹1.5 से ₹3.5 लाख की बढ़ोतरी कर दी है. इसके अलावा, ₹1 लाख प्रति टन के पार पहुंचे समुद्री ईंधन के ऊंचे दाम, युद्ध अधिभार (War surcharges) और बढ़ते बीमा प्रीमियम ने डेवलपर्स की वित्तीय चुनौतियों को और अधिक गंभीर बना दिया है।  

सीएम मोहन यादव जयपुर में निवेशकों से करेंगे मुलाकात, टेक्सटाइल से लेकर EV तक के अवसरों पर चर्चा

भोपाल  पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश सरकार निवेश बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। इसी सिलसिले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (mp cm dr mohan yadav) शनिवार को देश के उद्योगपतियों से सीधा संवाद करेंगे। जयपुर में 21 मार्च को बड़ा कार्यक्रम होने जा रहा है। जिसमें टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और पर्यटन के क्षेत्र में काम करने वाले निवेशक शामिल हो रहे हैं। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को राजस्थान की राजधानी जयपुर में रहेंगे। वे जयपुर के आईटीसी राजपूताना में आयोजित निवेशकों के बड़े कार्यक्रम (Investment Summit) में उद्योगपतियों से वन टू वन संवाद करेंगे। कार्यक्रम का नाम 'इंटरेक्टिव सेशन ऑन इन्वेस्टमेंट अपॉर्च्यूनिटीज इन मध्यप्रदेश' है। इस कार्यक्रम में खास प्रोजेक्ट और निवेश की नई योजनाओं पर चर्चा की जाएगी। सीएम मोहन यादव उद्योगपतियों से मीटिंग कर टेक्सटाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग और टूरिज्म के क्षेत्र में निवेश पर बात करेंगे। जयपुर में दूसरा बड़ा आयोजन एमपी सरकार (mp govt) की मंशा है कि मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक उद्योग आएं और युवाओं के लिए रोजगार बढ़े। मोहन सरकार ने इसके लिए मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने के लिए नई औद्योगिक नीति भी बनाई है। इसमें उद्योग लगाने की और निवेश की प्रक्रिया को आसान बनाया है। इससे निवेशकों को पूरी कागजी कार्यवाही में परेशानी न हो। कुछ दिन पहले भीलवाड़ा में एक्सटाइल सेक्टर को लेकर इसी प्रकार का आयोजन हो चुका है, इसके बाद यह दूसरा बड़ा आयोजन जयपुर में हो रहा है।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव का स्पष्ट संदेश है कि मध्यप्रदेश अब संभावनाओं तक सीमित राज्य नहीं रहा, बल्कि नीतिगत स्पष्टता, त्वरित निर्णय क्षमता और मजबूत औद्योगिक आधार के साथ निवेश को धरातल पर उतारने वाला अग्रणी राज्य बन चुका है। उनका मानना है कि निवेश केवल पूंजी का प्रवाह नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और समग्र क्षेत्रीय विकास का माध्यम है। एमपी में चल रहा है काम मध्यप्रदेश (madhya pradesh) में कई जिलों में नए उद्योग विकसित किए जा रहे हैं। उज्जैन में मेडिकल डिवाइस पार्क, ग्वालियर में फुटवियर पार्क, जबलपुर में डिफेंस हब और धार में पीएम मित्रा पार्क बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा आईटी पार्क और स्किल डेवलपमेंट सेंटर पर भी काम तेजी से चल रहा है। राज्य सरकार ने साल 2026 को ‘कृषि वर्ष’ घोषित किया है, जिससे खेती और फूड प्रोसेसिंग से जुड़े उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। जयपुर (jaipur) में होने वाले इस बड़े आयोजन का मकसद भी यह है कि राजस्थान और आसपास के निवेशकों को मध्यप्रदेश में आकर्षित किया जा सके और उनसे निवेश कराया जा सके। इससे मध्यप्रदेश में विकास बढ़े और रोजगार के नए-नए अवसर भी निर्मित हों।  

अप्रैल में राशन कार्ड धारकों को मिलेगा तिगुना अनाज, सरकार ने किया बड़ा ऐलान

नई दिल्ली सरकार गरीबी रेखा के नीचे आने वाले सभी लोगों को मुफ्त में राशन मुहैया कराती है। इस बीच केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने देश के सभी राशन कार्ड धारकों को अप्रैल महीने में तिगुना अनाज देने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने इसकी जानकारी दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘अप्रैल में सभी लाभार्थियों को तीन महीने (अप्रैल, मई और जून 2026) का राशन एक साथ मिलेगा। इसके लिए सभी लाभार्थी अपनी नजदीकी राशन दुकान से निर्धारित समय पर राशन प्राप्त कर सकते हैं।’ आपको बता दें कि सरकार ने फिलहाल इसके पीछे कोई ठोस कारण नहीं बताया है। 41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म इससे पहले सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि वर्ष 2025 में 41.41 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। राज्यसभा में खाद्य राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बंभानिया ने बताया कि हरियाणा में सर्वाधिक लगभग 13.43 लाख राशन कार्ड, राजस्थान में 6.05 लाख, उत्तर प्रदेश में 5.97 लाख, पश्चिम बंगाल में 3.74 लाख और मध्य प्रदेश में 2.60 लाख अपात्र राशन कार्ड खत्म किए गए। बंभानिया ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में प्रौद्योगिकी के उपयोग के परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अपात्र राशन कार्डों को खत्म करने में सफलता हासिल की है। उनके अनुसार, वर्ष 2025 में कुल 41.41 लाख फर्जी राशन कार्ड खत्म किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या 48.85 लाख और 2023 में 41.99 लाख थी। बंभानिया ने बताया कि पीडीएस में चल रहे सुधारों के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में राशन कार्ड और लाभार्थियों के आंकड़ों का पूरी तरह डिजिटलीकरण किया जा चुका है। देश की लगभग सभी उचित मूल्य की दुकानों (एफपीएस) को खाद्यान्न वितरण के लिए इलेक्ट्रॉनिक ''प्वाइंट ऑफ सेल'' (ईपीओएस) उपकरणों की स्थापना के माध्यम से स्वचालित किया गया है। इसके अलावा, 99.2 प्रतिशत लाभार्थियों को आधार से जोड़ा जा चुका है और 98.75 प्रतिशत खाद्यान्न वितरण आधार आधारित बायोमेट्रिक सहित डिजिटल प्रमाणीकरण के माध्यम से किया जा रहा है। मंत्री ने कहा, "पीडीएस का डिजिटलीकरण दक्षता और पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से किया जा रहा है, ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके और खाद्यान्न की चोरी आदि का समाधान किया जा सके।"

RTE एडमिशन में नया बदलाव, अब सिर्फ 1425 बच्चों को मिलेगा दाखिला, केजी और नर्सरी बंद

दुर्ग  छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत इस वर्ष प्रवेश प्रक्रिया में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। जिले में आरटीई सीटों में भारी कटौती करते हुए संख्या घटाकर केवल 1425 कर दी गई है। पिछले वर्ष जहां 4267 सीटें उपलब्ध थीं, वहीं इस बार 2842 सीटें कम कर दी गई हैं, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।  केजी-नर्सरी खत्म, अब सीधे पहली कक्षा में प्रवेश इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि केजी-1, केजी-2 और नर्सरी कक्षाओं को आरटीई दायरे से बाहर कर दिया गया है। अब केवल पहली कक्षा में ही प्रवेश दिया जाएगा। इससे पहले निजी स्कूलों में इन शुरुआती कक्षाओं में भी आरटीई के तहत दाखिले होते थे। विभाग को अब तक 2533 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि सीटें सिर्फ 1425 ही हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में बच्चों का चयन नहीं हो पाएगा। इससे अभिभावकों के बीच प्रतिस्पर्धा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं। निजी स्कूलों की संख्या भी घटी पिछले वर्ष जहां 540 निजी स्कूलों को आरटीई के तहत चिन्हांकित किया गया था, इस बार उनकी संख्या घटकर 528 रह गई है। इससे भी सीटों में कमी का असर साफ नजर आ रहा है। निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत वर्ष 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन की जा रही है। आरटीई पोर्टल के माध्यम से आवेदन और चयन की प्रक्रिया संपन्न होगी। पहले चरण का शेड्यूल जारी आरटीई प्रवेश प्रक्रिया के पहले चरण का शेड्यूल भी जारी कर दिया गया है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है, जबकि नोडल वेरिफिकेशन की प्रक्रिया 16 फरवरी से 31 मार्च तक चलेगी। इसके बाद 13 से 17 अप्रैल के बीच लॉटरी के माध्यम से सीटों का आबंटन किया जाएगा। चयनित छात्रों का स्कूल में प्रवेश 1 मई से 30 मई के बीच कराया जाएगा, वहीं 2025-26 सत्र की शुल्क प्रतिपूर्ति का सत्यापन कार्य 25 मई से 25 जून तक पूरा किया जाएगा। दूसरे चरण की समय-सारणी द्वितीय चरण के तहत आरटीई प्रवेश प्रक्रिया की समय-सारणी भी जारी कर दी गई है, जिसके अनुसार नए स्कूलों का रजिस्ट्रेशन 8 से 20 जून तक किया जाएगा। इसके बाद नोडल अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा सीटों का वेरिफिकेशन 8 जून से 25 जून तक किया जाएगा। छात्र पंजीयन की प्रक्रिया 1 से 11 जुलाई के बीच पूरी होगी, जबकि नोडल वेरिफिकेशन 1 से 15 जुलाई तक किया जाएगा। इसके पश्चात 27 से 31 जुलाई के बीच लॉटरी और सीटों का आबंटन किया जाएगा, वहीं चयनित छात्रों की स्कूल में प्रवेश प्रक्रिया 3 से 17 अगस्त तक पूरी की जाएगी। अभिभावकों में बढ़ी चिंता सीटों में भारी कटौती और कक्षाओं के दायरे में बदलाव के कारण इस बार बड़ी संख्या में बच्चों को आरटीई का लाभ नहीं मिल पाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे निजी स्कूलों में शिक्षा हासिल करने का अवसर सीमित हो सकता है, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए।

क्या BSNL का होगा प्राइवेटाइजेशन? सरकार ने साझा की अहम जानकारी

 नई दिल्‍ली बीएसएनएल को लेकर बुधवार को एक बड़ी जानकारी सामने आई. केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लोकसभा में भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के प्राइवेटाइजेशन की किसी भी संभावना से इनकार करते हुए कहा कि सरकारी दूरसंचार ऑपरेटर पब्लिक सेक्‍टर की ही कंपनी है।  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बीएसएनएल के प्राइवेटाइजेशन का तो कोई सवाल ही नहीं उठता. BSNL भारत की जनता की है और भारत की जनता के लिए है. सिंधिया ने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्‍व में सरकार BSNL को मजबूत करने और उसकी टेलीकॉम क्षमताओं का विस्‍तार करने पर फोकस कर रही है।  बीएसएनल के पास थे दो विकल्‍प  उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के लीडरशिप में प्राइवेटाइजेशन का कोई मुद्दा नहीं है, बीएसएनएल देश की जनता की सेवा के लिए है. बीएसएनएल के 4G रोलआउट को लेकर सरकार के नजरिए को समझाते हुए सिंधिया ने कहा कि कंपनी के पास दो विकल्प थे- या तो ग्‍लोबल कंपनियों से टेलीकॉम सेक्‍टर की चीजें खरीदें या स्वदेशी क्षमताएं डेवलप करे।   उन्होंने कहा कि बीएसएनएल ने अन्‍य कंपनियों की तरह, दक्षिण कोरिया, फिनलैंड, स्वीडन या चीन में स्थित अंतरराष्ट्रीय दिग्गजों से उपकरण खरीदकर 4जी नेटवर्क का निर्माण नहीं किया है, बल्कि खुद के उपकरण बनाए हैं।  ग्‍लोबल लेवल पर भारत का 4G डिजिटल स्टैक  सिंधिया ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री ने साहसिक फैसला लेते हुए कहा कि हम सिर्फ सेवाएं ही नहीं देंगे, बल्कि उपकरण भी बनाएंगे. विश्व में पहली बार, केवल चार देश दूरसंचार उपकरण बनाते हैं, और प्रधानमंत्री की बदौलत, भारत का 4G डिजिटल स्टैक अब एक उपकरण निर्माता के तौर पर वैश्विक मंच पर पहुंच चुका है।  5G से पहले 4G नेटवर्क पर फोकस बीएसएनएल उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा सितंबर 2025 में किया गया था. सिंधिया ने कहा कि पहले बीएसएनएल के 8 करोड़ 55 लाख कस्‍टमर्स थे और अब यह संख्या 9 करोड़ 27 लाख हो गई है. हम 5जी को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए 4G तकनीक को भी आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन हमें पहले 4G को स्थिर करना होगा. इससे पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी राज्यसभा में बीएसएनएल के पुनरुद्धार के बारे में बात की थी।