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ईरान जंग में अमेरिका का खून के आंसू रोने का कारण, 16 मिलिट्री जेट्स और टैंकर हुए तबाह

वाशिंगटन  ईरान जंग में अमेरिका को बहुत गहरी चोट लगी है. यह एक ऐसा जख्म है, जिसे डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका जमाने तक याद रखेंगे. जी हां, ईरान युद्ध की शुरुआत से अब तक अमेरिका के 16 मिलिट्री जेट्स तबाह यानी नष्ट हो चुके हैं. इनमें ड्रोन और लड़ाकू विमान भी शामिल हैं. इसमें एक नया नाम एफ-35 फाइटर जेट का भी जुड़ गया है. इसे ईरान ने हिट किया है. इसके कारण इस विमान की इमरजेंसी लैंडिंग हुई है और इसे नुकसान पहुंचा है. इन नुकसान को देखकर लगता है कि बहुत कुछ खोकर भी ईरान ने युद्ध में अमेरिका को खून के आंसू रुला दिए हैं. ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच युद्ध 20 दिन से जारी है. 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने एक साथ मिलकर ईरान पर अटैक किया था. उस अटैक में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए थे. तब से ही यह ईरान जंग जारी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के साथ जंग शुरू होने के बाद से कम से कम 16 अमेरिकी सैन्य विमान नष्ट हो गए हैं. इनमें 10 MQ-9 रीपर ड्रोन शामिल हैं. इन्हें ईरान की गोलीबारी में मार गिराया गया है. अमेरिका के कई ऐसे विमान भी हैं, जिनमें क्रू मौजूद था और वे दुर्घटनाओं या हमलों में नष्ट हो गए. दावा किया गया कि सबसे अधिक नुकसान दुर्घटनाओं की वजह से हुआ. बताया गया कि कुवैत में तीन F-15 लड़ाकू विमान ‘फ्रेंडली फायर’ यानी अपनी ही सेना की गोलीबारी में गिर गए, जबकि एक KC-135 टैंकर विमान ईंधन भरने के ऑपरेशन के दौरान नष्ट हो गया, जिसमें सवार सभी छह क्रू सदस्यों की मौत हो गई. इसके अलावा सऊदी अरब के एक एयरफ़ील्ड पर ईरानी मिसाइल हमले में पांच KC-135 विमान क्षतिग्रस्त हो गए. हालांकि, ईरानी पक्ष का दावा है कि फ्रेंडली फायर नहीं, बल्कि उनके अटैक में अमेरिकी लड़ाकू विमान नष्ट हुए हैं। ईरान जंग में अमेरिका को गहरे जख्म मिले अब तक ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम ने युद्ध के दौरान केवल बिना पायलट वाले ‘रीपर’ ड्रोन को ही सफलतापूर्वक निशाना बनाया है. इनमें से कम से कम नौ ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया, जबकि एक अन्य ड्रोन जॉर्डन के एक एयरफ़ील्ड पर बैलिस्टिक मिसाइल का शिकार हो गया. इसके अलावा दो अन्य ड्रोन अलग-अलग दुर्घटनाओं में नष्ट हो गए. ‘रीपर’ ड्रोन को विशेष रूप से अत्यधिक जोखिम वाले मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है, क्योंकि इनमें कोई पायलट नहीं होता और इन्हें बदलने का खर्च भी अपेक्षाकृत कम होता है। ईरान जंग में अब भी अमेरिका का पूरा कंट्रोल नहीं ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को बेअसर करने के लिए अमेरिका और इजराय के शुरुआती प्रयासों के बावजूद पूरी तरह से हवाई वर्चस्व हासिल करना मुश्किल साबित हुआ है. ईरानी हिट के बाद एक अमेरिकी F-35 लड़ाकू विमान को मध्य-पूर्व में स्थित एक सैन्य अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी. विमान का पायलट सुरक्षित बच गया और बताया जा रहा है कि उसकी हालत स्थिर है। अमेरिका ने कबूला सच अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ईरानी हवाई क्षेत्र पर उनका नियंत्रण अभी भी सीमित है. जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि अमेरिका के पास फिलहाल केवल कुछ ही जगहों पर हवाई बढ़त हासिल है. उसका नियंत्रण पूरे क्षेत्र के बजाय केवल कुछ ही इलाकों तक सीमित है। आखिर अमेरिका को हुए नुकसान की वजह क्या विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन्स का पैमाना और उनकी तीव्रता ही शायद अधिक नुकसान की वजह हो सकती है. रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स के पूर्व अधिकारी पीटर लेटन ने कहा कि इस अंतर की वजह शायद कहीं अधिक जोरदार कोशिशें हो सकती हैं. हर दिन पहले के मुकाबले अधिक उड़ानें भरी जा रही हैं. यह नुकसान अमेरिकी सेना के सामने मौजूद चुनौतियों को उजागर करता है. खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मार्गों को सुरक्षित करने के प्रयासों में, जहां सक्रिय हवाई सुरक्षा प्रणालियां अभी भी एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं ईरान के निशाने पर आया एफ-35 जी हां, एफ-35 को अमेरिका का सबसे एडवांस फाइटर जेट माना जाता है. ईरान जंग में अब यह भी सेफ नहीं रहा. गुरुवार को ईरान की जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी F-35 स्टील्थ फाइटर जेट को निशाना बनाया गया. इसके बाद उसे मजबूरन इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ी. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना तब हुई जब यह पांचवीं पीढ़ी का घातक फाइटर जेट ईरान के ऊपर कॉम्बैट मिशन पर उड़ान भर रहा था. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने बताया कि ईरानी फायर के बाद विमान को मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी एयरबेस पर आपात लैंडिंग करनी पड़ी. फिलहाल, इस फाइटर जेट के नुकसान की जांच की जा रही है।

डिजिटल स्ट्राइक: ऑनलाइन बेटिंग के 300 प्लेटफॉर्म ब्लॉक, सरकार सख्त

नई दिल्ली ऑनलाइन जुआ और सट्टा खिलाने वाली वेबसाइट्स पर भारत सरकार ने एक बार फिर डिजिटल स्ट्राइक कर दी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने अवैध ऑनलाइन जुआ और सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, और अपनी ताजा कार्रवाई में लगभग 300 वेबसाइट्स और मोबाइल ऐप्स को ब्लॉक कर दिया है। सरकार ने उन प्लेटफॉर्म पर शिकंजा कसा है जो ऑनलाइन स्पोर्ट्स बेटिंग, कसीनो-स्टाइल गेमिंग और पीयर-टू-पीयर सट्टेबाजी सिस्टम जैसी कई तरह की गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थे। इससे पहले जनवरी में, केंद्र सरकार ने 242 अवैध सट्टेबाजी और जुआ खिलाने वाली वेबसाइट्स को ब्लॉक किया था। सरकार के एक बयान के अनुसार, यह कार्रवाई कई तरह के गैर-कानूनी प्लेटफॉर्म्स को निशाना बनाकर की गई, जिनमें ऑनलाइन स्पोर्ट्स बेटिंग वेबसाइट्स, स्लॉट्स, रूलेट और लाइव डीलर टेबल्स जैसे गेम्स देने वाले वर्चुअल कसीनो, और पीयर-टू-पीयर मार्केटप्लेस के तौर पर काम करने वाले बेटिंग एक्सचेंज शामिल हैं। अधिकारियों ने सट्टा और मटका जुआ नेटवर्क्स के साथ-साथ असली पैसों वाले कार्ड और कसीनो गेमिंग एप्लीकेशन्स के खिलाफ भी कार्रवाई की। यह कार्रवाई, अवैध ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर अंकुश लगाने और लोगों को वित्तीय धोखाधड़ी तथा लत के जोखिमों से बचाने के व्यापक प्रयासों का एक हिस्सा है। अब तक 8,400 ऐसी वेबसाइट्स और ऐप हुए ब्लॉक आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सरकार ने अब तक लगभग 8,400 ऐसी वेबसाइट्स और एप्लिकेशन को ब्लॉक कर दिया है। इनमें से एक बड़ा हिस्सा, लगभग 4,900 प्लेटफॉर्म्स को ऑनलाइन गेमिंग अधिनियम लागू होने के बाद हटाया गया; इस अधिनियम ने डिजिटल गेमिंग और सट्टेबाजी की गतिविधियों को रेगुलेट करने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत किया। यह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जिसके तहत अधिकारी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कड़ी नजर रखेंगे और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करेंगे। सरकार ने यूजर्स से यह भी आग्रह किया है कि वे सतर्क रहें और किसी भी अनाधिकृत सट्टेबाजी या जुआ खिलाने वाली सर्विस से दूर रहें।  

NCERT विवाद में सरकार की एंट्री: विशेषज्ञ समिति गठित, सुप्रीम कोर्ट ने पूरी की सुनवाई

नई दिल्ली राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका से जुड़े चेप्टर को फिर से लिखने के लिए तीन सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति का गठन हुआ है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें पूर्व अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और जस्टिस अनिरुद्ध बोस को शामिल किया गया है। सरकार ने ये फैसला एनसीईआरटी की किताब के उस हिस्से पर हुए विवाद के बाद उठाया है, जिसमें 'न्यायपालिका में भ्रष्टाचार' का जिक्र था। कमेटी के गठन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अपनी तरफ से शुरू की गई सुनवाई को खत्म कर दिया। गौरतलब है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने हाल ही में कक्षा 8 के लिए सामाजिक विज्ञान की पुस्तक "एक्सप्लोरिंग सोसाइटीः इंडिया एंड बियॉन्ड" (भाग-2) प्रकाशित की थी। इस पुस्तक में "हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका" शीर्षक से एक पाठ शामिल था। इसमें न्याय व्यवस्था पर विवादित पाठ्य सामग्री थी। यही कारण रहा कि इस अध्याय को लेकर विभिन्न पक्षों से आपत्तियां सामने आईं। स्वयं सुप्रीम कोर्ट ने इस पर आपत्ति जताई थी। सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद एनसीईआरटी ने गलती मानते हुए चैप्टर को वापस ले लिया था। एनसीईआरटी के निदेशक और परिषद के सदस्यों ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि इस अध्याय के कारण उत्पन्न स्थिति के लिए वे बिना किसी शर्त और बिना किसी स्पष्टीकरण के सार्वजनिक रूप से क्षमा चाहते हैं। एनसीईआरटी ने अपने बयान में स्पष्ट किया कि विवादित अध्याय वाली पूरी पुस्तक को वापस ले लिया गया है। यह पुस्तक कहीं भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। परिषद ने कहा कि अध्याय के कारण उत्पन्न असुविधा के लिए उन्हें खेद है और वे सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दोबारा लिखा गया चैप्टर तब तक प्रकाशित नहीं किया जाएगा, जब तक डोमेन एक्सपर्ट कमेटी इसकी समीक्षा नहीं कर लेती। इसके बाद, कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को डोमेन एक्सपर्ट कमेटी के गठन का आदेश दिया था।

सरकार का दावा, देश में घरेलू LPG और कच्चे तेल का है पर्याप्त भंडार

नई दिल्ली  पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ऊर्जा की सप्लाई प्रभावित हुई है. जिसके दुनिया में ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं. भारत में भी इसका असर दिखने लगा है. हालांकि, सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने शुक्रवार को प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि आज की स्थिति के अनुसार सभी रिफाइनरियां उच्चतम क्षमता पर संचालित हो रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि घरेलू LPG उत्पादन जारी है और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, देशभर में किसी भी वितरक (डिस्ट्रीब्यूटर) पर ड्राय-आउट की कोई सूचना नहीं है. प्राकृतिक गैस के संबंध में, सभी उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि जहां संभव हो, वे पीएनजी (PNG) पर शिफ्ट करें. इस संबंध में राज्य सरकारों को भी पत्र लिखकर अनुरोध किया गया है. पैनिक बुकिंग में कमी आई… सुजाता शर्मा ने कहा कि शीर्ष 15 गैस क्षेत्रों में लगभग 13,700 से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं और लगभग 7,500 उपभोक्ता एलपीजी से PNG पर शिफ्ट हुए हैं. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन बुकिंग लगभग 93% है और डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड के माध्यम से की जा रही है. पैनिक बुकिंग में कमी आई है और कल लगभग 55 लाख रीफिल बुकिंग प्राप्त हुईं. उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की डिलीवरी सामान्य रूप से जारी है. वाणिज्यिक एलपीजी के लिए लगभग 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आवंटन आदेश जारी किए हैं और पिछले एक सप्ताह में लगभग 11,300 टन वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति की गई है. सभी राज्यों के पास पर्याप्त आपूर्ति उपलब्ध है. खाड़ी क्षेत्र में मौजूद सभी 22 भारतीय जहाज सुरक्षित वहीं, संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पोत, पत्तन एवं जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने कहा कि पिछले 24 घंटों में किसी भी समुद्री घटना की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हमारे सभी 22 जहाज और 611 भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, जिनकी निगरानी डीजी शिपिंग द्वारा लगातार की जा रही है. उन्होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में 24×7 हेल्पलाइन, संचार केंद्र और कंट्रोल रूम को लगभग 125 कॉल और 200 से अधिक ईमेल प्राप्त हुए, जिनका समय पर जवाब दिया गया. इसके अलावा, पिछले 24 घंटों में 25 भारतीय नाविकों को सुरक्षित रूप से वापस लाया गया है. सिन्हा ने बताया कि न्यू मंगलौर पोर्ट ने क्रूड (Crude) और LPG से संबंधित कार्गो जहाजों के लिए वेवर (छूट) प्रदान करने हेतु एक सर्कुलर जारी किया है, जो 14 मार्च से 31 मार्च तक मान्य है. इसके अलावा, लगभग 3,500 वर्ग मीटर का अतिरिक्त कवर शेड और 76,000 वर्ग मीटर का ओपन यार्ड अतिरिक्त भंडारण क्षमता के लिए निर्धारित (ईयरमार्क) किया गया है. पश्चिम एशिया संकट पर विदेश मंत्रालय का बयान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ओमान, मलेशिया, फ्रांस, जॉर्डन और कतर के नेताओं से बात की. उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष पर भारत का पक्ष रखा और बातचीत, तनाव कम करने और शांति पर जोर दिया. उन्होंने ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की, जबकि सभी पक्षों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन और लगातार तालमेल के लिए अपना समर्थन दोहराया. उन्होंने त्योहारों की शुभकामनाएं भी दीं और भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में मिले सहयोग की सराहना की. जायसवाल ने कहा कि मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय के साथ भी इसी तरह की चर्चाएं हुईं, जिसमें स्थिरता, सामान और ऊर्जा के निर्बाध आवागमन और लगातार तालमेल के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई. ईरान में फंसे 913 भारतीयों को वापस लाया गया उन्होंने कहा कि भारत खाड़ी देशों से लोगों को निकालने के अपने प्रयास जारी रखे हुए है; अब तक आर्मीनिया और अजरबैजान के रास्ते 913 फंसे हुए भारतीय नागरिकों को वापस लाया जा चुका है. विदेश मंत्रालय के कंट्रोल रूम ने कई कॉल संभाले हैं, जो मुख्य रूप से व्यापारिक जहाजों से संबंधित थे. सरकार लगातार सक्रिय है और भारतीयों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्थिति पर नजर रख रही है.

असम में चुनावी बिगुल: सीएम Himanta Biswa Sarma फिर मैदान में, सातवीं बार ठोकी ताल

गुवाहाटी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शुक्रवार को आगामी विधानसभा चुनाव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। यह उनका सातवां चुनाव है। मुख्यमंत्री सरमा ने जालुकबारी निर्वाचन क्षेत्र से अपना नामांकन पत्र भरा है। नामांकन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने पहला चुनाव हारने के बाद लगातार पांच चुनाव जीते हैं और इस बार भी उन्हें अपने क्षेत्र की जनता का पूरा समर्थन मिलने की उम्मीद है। विपक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सीएम हेमंता सरमा ने कहा कि अगर कांग्रेस उन्हें एक संस्था मानती है, तो यह उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, "अगर कांग्रेस ने मुझे एक संस्था के स्तर तक पहुंचा दिया है, तो मुझे इससे खुश होना चाहिए, न कि विवाद करना चाहिए।" शुक्रवार की सुबह ही मुख्यमंत्री सरमा ने राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है न कि कोई दान। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर उन्होंने लिखा, "हमारी संस्कृति कोई नारा नहीं है, यह हमारे त्योहारों, हमारी प्रार्थनाओं और हमारे लोगों में जीवित है।" उन्होंने कहा कि इन परंपराओं को जीवित रखने वाले समुदायों के साथ खड़ा रहना सरकार का कर्तव्य है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक समूहों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। इसके तहत हर रास समिति को 25,000 रुपए की मदद दी जा रही है, जिससे रास उत्सव को बेहतर तरीके से आयोजित किया जा सके। यह उत्सव असम की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान का अहम हिस्सा है। इसके अलावा, राज्य में 8,000 से अधिक पूजा समितियों को 10,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जा रही है ताकि धार्मिक कार्यक्रम सुचारू रूप से आयोजित हो सकें। सरकार ने 620 उदासीन भक्तों के लिए हर महीने 1,500 रुपए की सहायता भी सुनिश्चित की है, जो आध्यात्मिक परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

श्रीलंका ने अमेरिकी फाइटर जेट को लैंडिंग की इजाजत नहीं दी, राष्ट्रपति ने कहा- हम तटस्थ

कोलंबो  श्रीलंका ने अमेरिका को अपनी जमीन पर जंगी जहाजों को उतारने की अनुमति नहीं दी है. ईरान जंग के दौरान अमेरिका अपने दो युद्धक विमानों को श्रीलंका के दक्षिणपूर्व मट्टाला अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर लैंड करना चाहता था. लेकिन राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने अमेरिका को इसकी अनुमति नहीं दी।  शुक्रवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति ने संसद में इस बात की घोषणा की है. संसद में इस फैसले की घोषणा करते हुए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने  कहा कि जिबूती से अमेरिका के दो युद्धक विमानों ने 4 और 8 मार्च को श्रीलंका में  लैंड करने की अनुमति मांगी थी. लेकिन अमेरिका के ये दोनों अनुरोध अस्वीकार कर दिए गए।  राष्ट्रपति ने कहा, "कई दबावों के बावजूद हम अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहते हैं. हम झुकेंगे नहीं. मध्य-पूर्व का युद्ध चुनौतियां खड़ी करता है, लेकिन तटस्थ बने रहने के लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे।  वे जिबूती के एक बेस से आठ एंटी-शिप मिसाइलों से लैस दो लड़ाकू विमान मट्टाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर लाना चाहते थे, और हमने साफ मना कर दिया," श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने कहा।  दिसानायके का यह बयान दक्षिण और मध्य एशिया के लिए अमेरिकी विशेष दूत सर्जियो गोर के साथ उनकी मुलाकात के एक दिन बाद आया है।  एक बयान में कहा गया है कि राष्ट्रपति दिसानायके और सर्जियो गोर ने महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बंदरगाहों को सुरक्षित बनाने, आपसी लाभकारी व्यापार और वाणिज्यिक संबंधों को मजबूत करने, तथा एक स्वतंत्र, खुला और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देने के अमेरिकी प्रयासों पर चर्चा की।  4 मार्च को, अमेरिका ने गाले के पास ईरानी फ्रिगेट 'आइरिस डेना' पर टॉरपीडो से हमला कर दिया। गाले इस द्वीप का दक्षिणी तटीय शहर है। इस हमले में 84 नाविक मारे गए, जबकि 32 को बचा लिया गया। यह जहाज़ भारत के विशाखापत्तनम से एक नौसैनिक बेड़े की समीक्षा अभ्यास के बाद अपने वतन लौट रहा था। दो दिन बाद, एक दूसरा ईरानी जहाज़, 'आइरिस बुशेहर', 219 नाविकों के साथ कोलंबो बंदरगाह में प्रवेश की अनुमति मांगने लगा।  श्रीलंका ने इस जहाज़ को, जो यहाँ बंदरगाह के बाहर लंगर डाले खड़ा था, वहाँ से हटाकर पूर्वी बंदरगाह 'त्रिंकोमाली' भेजने का निर्देश दिया। इन नाविकों में से कुल 204 नाविकों को अब कोलंबो के पास स्थित नौसैनिक सुविधा केंद्र में ठहराया गया है। ईरान शिप को दी थी पनाह 4 मार्च 2026 को अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी तट से लगभग 80 किमी दूर अंतरराष्ट्रीय जल में ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर टॉरपीडो हमला किया. इस हमले में जहाज डूब गया. इस हमले में कम से कम 87 ईरानी नौसैनिक मारे गए, कई लापता हुए और जहाज पर सवार लगभग 180 लोगों में से 32 घायल बचाए गए।  इस दौरान श्रीलंका ने ईरानी जहाज से मिले डिस्ट्रेस सिग्नल पर तुरंत प्रतिक्रिया दी. श्रीलंकाई नौसेना और वायुसेना ने बड़े पैमाने पर खोज-बचाव अभियान चलाया. वे घटनास्थल पर पहुंचे. इस दौरान श्रीलंका ने 87 शव बरामद किए और 32 घायल ईरानी नौसैनिकों को बचाकर गाले में इलाज करवाया।  इसके अलावा श्रीलंका ने ईरानी सैनिकों के शव को ससम्मान ईरान भेजा. इसके अलावा हमले के एक दिन बाद एक अन्य ईरानी सहायक जहाज IRIS Bushehr ने इंजन खराबी का हवाला देकर श्रीलंका से मदद मांगी. श्रीलंका ने मानवीय आधार पर इसे अनुमति दी।   

Meta के मेटावर्स पर ₹6.5 लाख करोड़ का नुकसान, पाकिस्तान का साल भर का बजट इससे कम है

 नई दिल्ली Meta ने अपने मेटावर्स प्लेटफॉर्म Horizon Worlds को लेकर बड़ा फैसला लिया है. कंपनी अब इसे बंद करने जा रही है. साथ ही वीआर एक्सपीरियंस पर नए इन्वेस्टमेंट और डेवलपमेंट को भी लिमिट किया जा रहा है।  यह फैसला सिर्फ एक प्रोडक्ट बंद करने का नहीं है, बल्कि यह इस बात का इशारा है कि Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हट रही है, जिसे कभी मार्क जकबरबर्ग इंटरनेट का फ्यूचर बताया गया था।  मेटावर्स को फ्यूचर बता कर जकरबर्ग ने Facebook को Meta कर दिया साल 2021 में फेसबुक सीईओ मार्क जकरबर्ग ने दुनिया को बताया था कि सोशल मीडिया का दौर खत्म होने वाला है और अगला मेटावर्स अगला बड़़ा प्लेटफॉर्म होगा. मेटावर्स यानी एक वर्चुअल दुनिया ।  हाइप इतनी बनी की मार्क जकरबर्ग ने फेसबुक का नाम बदलकर Meta कर दिया गया. यह टेक इंडस्ट्री में एक बड़ा मोड़ था. पहली बार किसी बड़ी कंपनी ने खुले तौर पर कहा कि वह इंटरनेट के अगले रूप को खुद बनाएगी ।  उस समय यह सिर्फ एक कंपनी का फैसला नहीं था, बल्कि पूरी इंडस्ट्री के लिए एक सिग्नल था. माइक्रोसॉफ्ट, गूगल, ऐपल, सबने इस दिशा में काम तेज कर दिया. वर्चुअल रियलिटी, ऑगमेंटेड रियलिटी और डिजिटल दुनिया को लेकर एक नई दौड़ शुरू हो गई।  पांच साल बाद अब तस्वीर बिल्कुल अलग है Meta धीरे-धीरे अपने उसी मेटावर्स विजन से पीछे हटती दिख रही है. Horizon Worlds, जिसे कंपनी ने अपने वर्चुअल सोशल प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया था, वह उम्मीद के मुताबिक नहीं चला. अब कंपनी वर्चुअल रिएलिटी पर फोकस कम कर रही है और मोबाइल और AI पर ज्यादा ध्यान दे रही है।  यह सिर्फ एक प्रोडक्ट का फेल होना नहीं है. यह उस पूरे आइडिया की कमजोरी दिखाता है, जिसे इंटरनेट का भविष्य बताया गया थ।  80 अरब डॉलर का दांव, लेकिन यूजर नहीं आए Meta ने अपने Reality Labs डिवीजन के जरिए मेटावर्स पर 80 से 85 अरब डॉलर तक खर्च कर दिए. इसमें वीआर हेडसेट्स, सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, चिप डिजाइन, डेटा सेंटर, और डेवलपर टूल्स तक सब शामिल था।  इतना बड़ा निवेश करने के बाद भी कंपनी उस स्तर का यूजर एडॉप्शन नहीं ला पाई, जो इस पूरे मॉडल को टिकाऊ बना सके।  Horizon Worlds पर एक्टिव यूजर्स की संख्या लाखों में ही सीमित रही. कई रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि ज्यादातर यूजर्स प्लेटफॉर्म पर कुछ ही समय के लिए आते थे और फिर वापस नहीं लौटते थे. यानी यूजर रिटेंशन में फेल हो गए।  टेक इंडस्ट्री में किसी भी प्लेटफॉर्म की सफलता सिर्फ यूजर्स से नहीं, बल्कि उनके बार-बार लौटने से तय होती है. मेटावर्स इस कसौटी पर कमजोर साबित हुआ।  टेक्नोलॉजी तैयार नहीं थी, या यूजर तैयार नहीं थे? मेटावर्स की असफलता को समझने के लिए यह सवाल जरूरी है. पहली नजर में लगता है कि समस्या टेक्नोलॉजी की थी. वीआर (VR) हेडसेट अभी भी महंगे हैं, भारी हैं, और लंबे समय तक पहनना आसान नहीं है. बैटरी लाइफ लिमिटेड है, और हाई क्वालिटी ग्राफिक्स के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग पावर चाहिए।  लेकिन असली समस्या इससे भी गहरी है. यूजर्स को जरूरत ही महसूस नहीं हुई. लोग अपने फोन और लैपटॉप पर पहले से ही सोशल मीडिया, गेमिंग और वीडियो कॉल कर रहे हैं. मेटावर्स ने इन्हीं चीजों को एक नए फॉर्म में पेश किया, लेकिन ऐसा कुछ नया नहीं दिया जो लोगों को मजबूर करे कि वे अपनी आदतें बदलें यही वजह है कि मेटावर्स एक ऐसी टेक्नोलॉजी बन गया, जो मौजूद तो थी, लेकिन जरूरी नहीं थी. मेटावर्स कोनॉमी का सपना भी नहीं चला Meta का प्लान था कि मेटावर्स के अंदर एक पूरी डिजिटल इकोनॉमी बनेगी. लोग वर्चुअल जमीन खरीदेंगे, डिजिटल सामान लेंगे, और क्रिएटर्स पैसे कमाएंगे।  लेकिन यह मॉडल भी जमीन पर नहीं उतर पाया. यूजर्स के पास ऐसा कोई ऐसी वजह नहीं थी कि वे वर्चुअल चीजों पर पैसा खर्च करें।  जहां गेमिंग में लोग पैसे खर्च करते हैं, वहां भी एक स्ट्रॉन्ग गेम प्ले और कम्युनिटी होती है. मेटावर्स में वह दोनों चीजें कमजोर थीं. क्रिएटर्स के लिए भी कमाई का रास्ता साफ नहीं था, जिससे पूरा इकोसिस्टम धीमा पड़ गया।  फेसबुक से Meta बनना: एक बड़ा जोखिम जब फेसबुक ने अपना नाम बदलकर Meta किया, तब उसने अपने फ्यूचर को एक ही डायरेक्शन  में बांध दिया. यह एक साहसी बोल्ड मूव था, लेकिन रिस्की भी था।  कंपनी ने अपने मेन बिजनेस, जैसे विज्ञापन और सोशल प्लेटफॉर्म, से ध्यान हटाकर एक लंबे समय वाले विजन पर ज्यादा खर्च करना शुरू किया. इससे इन्वेस्टर्स का भरोसा डगमगाया और कंपनी को कई बार अपनी स्ट्रैटिजी भी बदलनी पड़ी।  बाद में Meta को लागत कम करनी पड़ी, कर्मचारियों की छंटनी करनी पड़ी और नए फोकस की तलाश करनी पड़ी।  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने  पूरा खेल बदल दिया 2022 के बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने टेक इंडस्ट्री का फोकस पूरी तरह बदल दिया. जहां मेटावर्स को भविष्य माना जा रहा था, वहीं एआई ने तुरंत असर दिखाया. कंटेंट बनाना, ऑटोमेशन, कोडिंग, कस्टमर सर्विस और हर जगह एआई का इस्तेमाल बढ़ गया।  कंपनियों को यहां तुरंत फायदा दिखा, जबकि मेटावर्स में फायदा दूर का सपना था. Meta ने भी यह बदलाव समझा और अब वह तेजी से एआई पर काम कर रहा है. इससे साफ है कि कंपनी ने अपनी प्रायॉरिटी बदल दी है।  क्या मेटावर्स को खत्म समझा जाए?  मेटावर्स पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन उसका बड़ा सपना फिलहाल रुक गया है. अब जो दिशा दिख रही है, वह ज्यादा प्रैक्टिकल है। पूरी वर्चुअल दुनिया बनाने के बजाय, अब कंपनियां असली दुनिया में डिजिटल चीजें जोड़ने पर काम कर रही हैं. ऑगमेंटेड रियलिटी, एआई और मोबाइल बेस्ड एक्सपीरिएंस इस डायेरक्शन में आगे बढ़ रहे हैं।  गेमिंग, ट्रेनिंग और कुछ खास इंडस्ट्री में मेटावर्स का इस्तेमाल जारी रहेगा, लेकिन यह आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा अभी नहीं बन पाया है।  Meta ने क्या खोया, क्या पाया? Meta ने इस पूरे एक्सपेरिमेंट में बहुत बड़ा पैसा खोया, समय खोया और कुछ हद तक भरोसा भी खोया. लेकिन इसके साथ ही कंपनी ने बहुत कुछ सीखा भी. वीआर और एआर टेक्नोलॉजी में उसकी पकड़ मजबूत हुई है. उसने नए प्लेटफॉर्म, नए चिप्स और नई तकनीकों पर … Read more

ईरान जंग पर भागवत का बयान, स्वार्थी हितों के कारण हुआ युद्ध, भारत ही करेगा इसे खत्म

नागपुर   ईरान-अमेरिका जंग पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने दुनिया को शांति का संदेश दिया है. नागपुर में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि युद्ध केवल स्वार्थी हितों का परिणाम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम लिए बगैर मोहन भागवत ने नसीहत दी कि दुनिया को संघर्ष की नहीं, बल्कि सद्भाव की जरूरत है. उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि युद्ध केवल भारत ही खत्म कर सकता है।  महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आज यानी शुक्रवार को कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही प्राप्त की जा सकती है. कई देश कह रहे हैं कि केलल भारत ही चल रहे युद्ध को खत्म कर सकता है. दुनिया के चिंतकों के ध्यान में बार-बार देशों से आवाज़ उठ रही है कि चल रहे युद्ध को खत्म भारत ही कर सकता है क्योंकि विकासशील भारत की प्रवृत्ति का ज्ञान है।  मोहन भागवत ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया 2,000 वर्षों से संघर्षों के समाधान के लिए विभिन्न विचारों के साथ प्रयोग करती रही है लेकिन उसे खास सफलता नहीं मिली. उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता, जबरन धर्म परिवर्तन और श्रेष्ठता एवं हीनता के विचार अब भी मौजूद हैं।  आरएसएस प्रमुख भागवत ने नागपुर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद इस सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी जुड़े हुए हैं और एक हैं.’ उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है।  आरएसएस प्रमुख ने कहा कि दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ एवं वर्चस्व की चाह है और स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है. मोहन भागवत ने आचरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए।  उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है और इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती हैं. भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं. उन्होंने कहा कि दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है। 

मुख्यमंत्री साय का ऐलान—अचल संपत्ति रजिस्ट्री पर उपकर खत्म, खर्च में राहत

  जमीन-मकान की रजिस्ट्री होगी अधिक सरल, सुलभ और कम खर्चीली-वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 ध्वनिमत से पारित रायपुर,  छत्तीसगढ़ विधानसभा ने छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को आज ध्वनिमत से पारित कर दिया। इस विधेयक के पारित होने से अचल संपत्ति की रजिस्ट्री पर बाजार मूल्य के आधार पर लगाया जाने वाला 0.60 प्रतिशत उपकर समाप्त हो गया है। वाणिज्यिक कर मंत्री ओ पी चौधरी ने बताया कि इस निर्णय से प्रदेश के आम नागरिकों, किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों तथा संपत्ति के क्रय-विक्रय से जुड़े लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा।            छत्तीसगढ़ उपकर समाप्त होने से अब संपत्ति पंजीयन की लागत में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर एक करोड़ रुपये के बाजार मूल्य की संपत्ति पर नागरिकों को लगभग 60 हजार रुपये की सीधी बचत होगी, इससे जमीन-मकान की रजिस्ट्री अधिक सुलभ, सरल और कम खर्चीली बनेगी। इस अवसर पर विधानसभा में विधेयक प्रस्तुत करते हुए मंत्री चौधरी  ने कहा कि यह विधेयक केवल एक विधिक संशोधन नहीं, बल्कि राज्य सरकार की जनहित, लोककल्याण और कर-व्यवस्था में न्यायपूर्ण सुधार के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का स्पष्ट मत है कि शासन का उद्देश्य केवल राजस्व अर्जित करना नहीं, बल्कि जनता के जीवन को सरल, सुलभ और सम्मानजनक बनाना है।           वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार ने सितंबर 2025 में जीएसटी 2.0 के माध्यम से आम जनता के उपयोग की वस्तुओं एवं सेवाओं पर व्यापक कर रियायतें प्रदान कीं, जिससे आम नागरिकों की निर्वाह लागत में कमी आई। इसी क्रम में पंजीयन विभाग में भी अनेक ऐतिहासिक, व्यावहारिक और जनहितकारी सुधार किए गए हैं, जिनका उद्देश्य आम जनता पर आर्थिक बोझ कम करना और सेवाओं को सरल बनाना है। उन्होंने बताया कि स्वतः नामांतरण व्यवस्था आम जनता के लिए अत्यंत राहतकारी सिद्ध हुई है। पंजीयन के बाद तत्काल नामांतरण होने से पक्षकारों को आर्थिक बचत के साथ-साथ महीनों चलने वाली नामांतरण प्रक्रिया से मुक्ति मिली है। मई 2025 से अब तक लगभग डेढ़ लाख दस्तावेजों का स्वतः नामांतरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है।           पंजीयन प्रणाली को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने के लिए सुगम मोबाइल ऐप विकसित किया गया है, जो संपत्ति की सही भौगोलिक स्थिति सुनिश्चित करने में सहायक है। साथ ही, फर्जी व्यक्ति द्वारा पहचान छुपाकर पंजीयन न कराया जा सके, इसके लिए पंजीयन कार्यालयों में आधार आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू की गई है। नागरिकों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा पंजीयन कार्यालयों को बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के वीजा ऑफिस की तर्ज पर सर्वसुविधायुक्त बनाया जा रहा है। इसके अंतर्गत नागरिकों को वातानुकूलित प्रतीक्षालय, स्वच्छ पेयजल, साफ-सुथरे शौचालय, निःशुल्क वाई-फाई तथा क्यू-आधारित त्वरित पंजीयन जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। वर्तमान में 10 पंजीयन कार्यालयों को पीपीपी मोड पर स्मार्ट पंजीयन कार्यालय के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसके बाद अन्य कार्यालयों को भी चरणबद्ध रूप से स्मार्ट कार्यालय बनाया जाएगा।          चौधरी ने बताया कि सरकार ने पंजीयन शुल्क निर्धारण की व्यवस्था में सुधार किया है। पहले संपत्ति के पंजीयन में गाइडलाइन मूल्य एवं बाजार मूल्य से जो अधिक होता था, उसी पर शुल्क लिया जाता था। अब इस व्यवस्था को बदलते हुए पंजीयन शुल्क को आपसी लेनदेन की कीमत के बजाय गाइडलाइन मूल्य से जोड़ा गया है, इससे बड़ी संख्या में परिवारों को राहत मिली है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी संपत्ति का गाइडलाइन मूल्य 10 लाख रुपये है, लेकिन दस्तावेज में बैंक ऋण आदि के कारण 25 लाख रुपये अंकित हैं, तो अब शुल्क केवल 10 लाख रुपये पर ही लगेगा। इस निर्णय से राज्य सरकार ने लगभग 170 करोड़ रुपये के राजस्व का त्याग किया है।          चौधरी ने बताया कि पहले परिवारजनों के मध्य दान, बंटवारा और हक-त्याग जैसी रजिस्ट्रियों पर बाजार मूल्य का 0.8 प्रतिशत पंजीयन शुल्क लिया जाता था, जिसे सरकार ने घटाकर मात्र 500 रुपये कर दिया है, चाहे संपत्ति का मूल्य कितना भी हो। उदाहरण के तौर पर, एक करोड़ रुपये की संपत्ति के दान पर पहले 80 हजार रुपये शुल्क लगता था, जो अब केवल 500 रुपये रह गया है, इससे सामान्य परिवारों और किसानों को व्यापक राहत मिली है। गाइडलाइन मूल्य निर्धारण में भी व्यापक जनहितकारी सुधार किए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटी भूमि पर भी अत्यधिक मूल्यांकन की स्थिति को समाप्त करते हुए वर्गमीटर आधारित मूल्यांकन व्यवस्था खत्म कर दी गई है और अब मूल्यांकन हेक्टेयर दर से किया जा रहा है, इससे आम जनता को 300 से 400 करोड़ रुपये तक के लाभ का अनुमान है।           मंत्री चौधरी ने बताया किसरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि पर लागू ढाई गुना मूल्यांकन, शहरों और गाँवों में कई प्रकार के अतिरिक्त मूल्यांकन तथा भूमि पर लगे वृक्षों के अलग मूल्यांकन जैसे प्रावधानों को भी समाप्त किया है, इससे जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ कम हुआ है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। शहरी मध्यमवर्गीय परिवारों को राहत देते हुए अब फ्लैट का मूल्यांकन सुपर बिल्ट-अप एरिया के बजाय केवल बिल्ट-अप एरिया के आधार पर किए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही बाउंड्री वॉल, प्लिंथ आदि जैसे कारणों से होने वाले अनावश्यक अतिरिक्त मूल्यांकन को भी समाप्त किया गया है।             चौधरी ने बताया कि किसानों के हित में भी सरकार ने महत्त्वपूर्ण कदम उठाए हैं। पहले दो-फसली भूमि, नकदी फसल, मछली पालन हेतु तालाब जैसी स्थितियों में अतिरिक्त मूल्यांकन कर आर्थिक भार बढ़ा दिया जाता था। अब इन सभी प्रावधानों को समाप्त कर कृषि भूमि के लेनदेन को अधिक सहज, न्यायसंगत और किफायती बनाया गया है। मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ उपकर अधिनियम, 1982 के अंतर्गत स्थावर संपत्ति के अंतरण पर उपकर का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023 में तत्कालीन सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ रोजगार मिशन एवं राजीव गांधी मितान क्लब योजना के वित्तपोषण हेतु स्टांप शुल्क के अतिरिक्त 12 प्रतिशत की दर से उपकर अधिरोपित किया गया था। इसके कारण नागरिकों को संपत्ति के पंजीयन पर बाजार मूल्य का लगभग 0.60 प्रतिशत अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा था।            वाणिज्यिक कर मंत्री चौधरी ने कहा कि वर्तमान में राजीव गांधी मितान क्लब … Read more

बिहार राजनीति में हलचल: क्या रामनवमी पर BJP घोषित करेगी अपना CM चेहरा?

  पटना भारतीय जनता पार्टी अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ज्यादा समय देने के विचार में नहीं है। बिहार में इतिहास रचने के लिए वह खरमास के खत्म होने का इंतजार करे, यह भी शायद संभव नहीं हो। और, मौका है रामनवमी का तो तैयारी उसी हिसाब से हो रही है। जी हां, संभव है कि अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनाने वाली पार्टी इस बार रामनवमी पर बिहार में पहली बार भाजपाई मुख्यमंत्री की शपथ करा ले। इसके लिए अंदर तैयारी है और बाहर माहौल बनाया जाने लगा है। खास बात यह भी है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चौंकाने वाले नाम-काम से अलग भाजपा अपनी राह खुद तैयार कर रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्लानिंग कभी भी सामने आ सकती है। रोज चौंका रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भाजपा ने राज्यसभा जाने के लिए राजी कराया है, यह राज्य का बच्चा-बच्चा जानता है। लेकिन, अब यह भी लोग समझ रहे हैं कि मुख्यमंत्री भाजपा को संशय में डाल रहे हैं। इधर उन्होंने राज्यसभा का नामांकन किया और उधर समृद्धि यात्रा पर निकल गए। राज्यसभा चुनाव के दिन पटना में रहे, लेकिन वोटिंग के दौरान विधानसभा का रुख भी नहीं किया। और तो और, अगले दिन फिर समृद्धि यात्रा पर बिहार के लोगों से मिलने निकल गए। अलग-अलग जिले घूम रहे हैं। इस दौरान वह यह तो बता रहे हैं कि आगे की जिम्मेदारी कौन संभालेगा, लेकिन यह नहीं कह रहे हैं कि वह बिहार छोड़ने जा रहे हैं। अब तक कई कंधों पर हाथ रख चुके नीतीश कुमार अपने बेटे निशांत कुमार को मुख्यमंत्री या उप मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, यह उन्होंने कभी नहीं कहा। निशांत के राजनीति में आने पर भी उन्होंने एक बार भी कुछ नहीं कहा। दूसरी तरफ नीतीश समर्थक निशांत के लिए डिप्टी सीएम की कुर्सी पर अड़े हैं। हालांकि, नीतीश कुमार लगातार अलग-अलग संकेत देकर भाजपा को ही संशय में डाल रहे। समृद्धि यात्रा में उन्होंने सबसे ज्यादा भाजपाई डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रख आगे की जिम्मेदारी संभालने की बात कही, जबकि भाजपा के अंदर से संघ-विद्यार्थी परिषद् बैकग्राउंड वाले किसी नेता को आगे करने की चर्चा निकल रही है। नीतीश ने सम्राट चौधरी को पसंद बताया है। लेकिन, वह इसके साथ ही बिहार सरकार के मंत्री विजय कुमार चौधरी व लेसी सिंह के अलावा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह के कंधे पर भी इसी अंदाज में हाथ रख चुके हैं। भाजपा की प्लानिंग अब आएगी सामने चैत्र नवरात्र शुरू हो चुका है। पहले बात चल रही थी कि 15 मार्च से 14 अप्रैल तक खरमास के बीच नए मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण नहीं होगा। लेकिन, अब भाजपा की तैयारी नवरात्र में ही अपने पहले मुख्यमंत्री को शपथ दिलाने की है। बिहार भाजपा में नेताओं की चर्चा के दौरान अब भी रोज कई मुख्यमंत्री बन रहे हैं और हट रहे हैं, हालांकि नवरात्र का पहला दिन निकलते-निकलते यह कहा जा रहा है कि भाजपा के रणनीतिकार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बिहार के अगले मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम चर्चा कर ली है। इसपर सर्व-सहमति की तैयारी की जा रही है। कहा जा रहा है कि रामनवमी या उसके अगले दिन नई सरकार का शपथ ग्रहण करा लिया जाएगा। नवरात्र के लिए राजनीतिक माहौल बनाया खरमास बाद नई सरकार की चर्चा चल रही थी। कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार राज्यसभा के नए कार्यकाल के लिए अप्रैल में मौजूदा सांसदों का समय पूरा होने तक यहीं जमे रहेंगे। लेकिन, अब नवरात्र शुरू होते ही माहौल बदला है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय के नेताओं की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास यह जानकारी पहुंचा दी गई है कि उन्हें 30 मार्च के पहले ही राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करनी है। वह 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, इसलिए 14 दिन ही उनके पास निर्णय के लिए बचते हैं। नीतीश कुमार राज्यसभा की सदस्यता 30 मार्च के पहले ले लेंगे तो उसके बाद उन्हें नई सरकार के शपथ ग्रहण तक कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनाए रखने का विकल्प हो सकता है या नहीं- इसपर भी चर्चा चल रही है। हालांकि इन चर्चाओं के बीच रामनवमी पर शपथ ग्रहण की चर्चा भाजपा में पटना से लेकर दिल्ली तक है।