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मुझे हटाओ मत…: वर्ल्ड कप जीत के बाद अगरकर ने उठाया बड़ा दांव, BCCI क्या कदम उठाएगा?

 नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट टीम चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) से अपने कार्यकाल को 2027 वनडे वर्ल्ड कप तक बढ़ाने की औपचारिक गुजारिश की है। दरअसल, 2024 T20 वर्ल्ड कप और 2025 चैम्प‍ियंस ट्रॉफी की खिताबी सफलता के बाद IPL 2025 से ठीक पहले अगरकर का कॉन्ट्रैक्ट एक साल के लिए बढ़ाया गया था. अब घरेलू सरजमीं पर T20 वर्ल्ड कप खिताब बचाने के बाद उन्होंने अपने कार्यकाल को और लंबा करने की इच्छा जताई है। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मुद्दे पर बोर्ड के अंदर शुरुआती स्तर पर चर्चा भी हो चुकी है. हालांकि, अंतिम फैसला अभी बाकी है. यह निर्णय ऐसे समय में लिया जाना है जब भारतीय टीम वर्ल्ड टेस्ट चैम्प‍ियनश‍िप के अहम चरण में है और साथ ही 2027 वनडे वर्ल्ड कप की तैयारियों का रोडमैप भी तैयार किया जा रहा है। अगरकर जून 2023 से मेंस सीनियर चयन समिति के चेयरमैन हैं. उनके कार्यकाल में भारत ने कुल तीन ICC खिताब अपने नाम किए हैं. दो T20 वर्ल्ड कप और एक चैम्प‍ियंस ट्रॉफी. यही नहीं टीम ने 2023 और 2025 एशिया कप भी जीते और व्हाइट-बॉल क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन करते हुए 33 में से सिर्फ दो मुकाबले गंवाए। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में टीम का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा. भारत को घरेलू मैदान पर लगातार दो टेस्ट सीरीज में हार का सामना करना पड़ा, जबकि बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी में भी विदेशी जमीन पर हार मिली. इसी वजह से अगरकर के कार्यकाल की चमक थोड़ी फीकी भी पड़ी है। रिपोर्ट में यह भी संकेत मिले हैं कि अगरकर की जगह लेने के लिए वेस्ट जोन का एक पूर्व भारतीय खिलाड़ी रेस में आगे बताया जा रहा था, लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। अब नजरें BCCI के फैसले पर टिकी हैं, क्या बोर्ड अगरकर की सफलता को देखते हुए उन्हें 2027 तक का भरोसा देगा या फिर सेलेक्शन कमेटी में बदलाव की राह अपनाएगा। टीम इंड‍िया की सेलेक्शन कमेटी में कौन-कौन? भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को जो लोग चुनते हैं, उनके सर्वेसर्वा यानी चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर हैं. वह जुलाई 2023 में टीम इंड‍िया के चीफ सेलेक्टर बने बने थे.  सेलेक्शन कमेटी में 2007 की वर्ल्ड चैम्प‍ियन टीम के सदस्य आरपी सिंह हैं, दूसरे द‍िग्गज प्रज्ञान ओझा हैं. आरपी और ओझा के अलावा सेलेक्शन कमेटी में शिव सुंदर दास और अजय रात्रा हैं।

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने पशुपतिनाथ मंदिर से जल गंगा जल संवर्धन अभियान की शुरुआत की

उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से जल गंगा जल संवर्धन अभियान का किया शुभारंभ मंदिर परिसर में प्याऊ का लोकार्पण, जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी पर दिया जोर मंदसौर  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने आज भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर से “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मंदिर परिसर में आमजन की सुविधा के लिए निर्मित प्याऊ का लोकार्पण भी किया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती रमादेवी बंशीलाल गुर्जर, अन्य जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में आमजन, पत्रकार उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि जल ही जीवन का आधार है और वर्तमान समय में जल संरक्षण अत्यंत आवश्यक हो गया है। “जल गंगा जल संवर्धन अभियान” के माध्यम से जिले में जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जाएंगे। यह अभियान 30 जून 2026 तक संचालित होगा। उन्होंने बताया कि अभियान के अंतर्गत तालाबों, नदियों, कुओं, बावड़ियों सहित अन्य पारंपरिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार किया जाएगा। साथ ही इन जल स्रोतों की नियमित साफ-सफाई, गहरीकरण एवं मरम्मत के कार्य भी सुनिश्चित किए जाएंगे, जिससे वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभियान केवल शासन का नहीं, बल्कि जन-जन का अभियान है। इसमें आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं शासकीय विभागों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने सभी से अपील की कि जल संरक्षण के इस पुनीत कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लें और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को सुरक्षित रखें। इस अवसर पर उन्होंने मंदिर परिसर में शुरू की गई प्याऊ व्यवस्था की सराहना की और कहा कि इससे श्रद्धालुओं एवं आमजन को गर्मी के मौसम में शुद्ध पेयजल उपलब्ध होगा, जो एक सराहनीय पहल है।

चांदी में आई बड़ी गिरावट, सोने में भी मंदी, क्या आर्थिक संकट का संकेत है?

 नई दिल्ली शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच गुरुवार को सोने-चांदी की कीमतें भी धाराशायी हो गईं हैं. MCX पर चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से ज्यादा की गिरावट देखी जा रही है. सोना भी करीब 2.50 फीसदी तक फिसल गया है। गुरुवार दोपहर साढ़े 12 बजे अचानक चांदी की कीमतें टूटने लगीं, और देखते ही देखते 12000 रुपये प्रति किलो सस्ती हो गई. जबकि सोने के भाव में करीब 4500 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट आई है। दरअसल, मिडिल ईस्ट का संकट गहाराता जा रहा है, पहले ईरान के तेल इंफ्रा पर अमेरिका ने हमला किया, अब बदले में ईरान ने भी कतर से बड़े ऑयल रिफाइनरी प्लांट पर हमला कर दिया है. जिससे भारी नुकसान का अनुमान  लगाया जा रहा है. इस बीच कच्चे तेल क्रूड ऑयल की कीमत बढ़कर 113 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। चांदी में बड़ी गिरावट के पीछे ये कारण सोने-चांदी में गिरावट के कई कारण हैं. लेकिन मुख्यतौर पर अमेरिका का एक फैसला है. बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को स्थिर रखने का फैसला लिया, फेडरल रिजर्व ने संकेत दिए कि इस साल अब ब्याज दरों में कटौती की संभावना सीमित है. फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने कहा कि ग्लोबल तनाव के चलते आर्थिक स्थिति काफी खराब है, इस फैसले के बाद ग्लोबल मार्केट में सोने-चांदी की जमकर पिटाई हुई। बता दें, पिछले करीब दो साल से सोने-चांदी में एकतरफा रैली देखी गई थी. 29 जनवरी 2026 को चांदी (Silver) की कीमत रिकॉर्ड 4.20 लाख रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी. लेकिन उसके बाद लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. 2 फरवरी 2026 चांदी की कीमत गिरकर 2.25 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी. इसके पीछे मुनाफावसूली कारण थे। युद्ध के बीच सोने-चांदी में भी बिकवाली हावी  लेकिन अब एक बार फिर चांदी इसी कीमत के आसपास पहुंच गई है. चांदी अब 29 जनवरी की हाई से करीब 1.90 लाख रुपये प्रति किलो सस्ती हो चुकी है. फिलहाल चांदी की कीमत MCX पर 2.35 लाख प्रति किलो के आसपास बनी हुई है. जबकि सोना गुरुवार को ट्रेड के दौरान 1.50 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम से नीचे से फिसल गया है। बता दें, अक्सर ये देखा गया है कि ग्लोबल संकट के दौरान खासकर जब युद्ध चल रहा हो तो निवशक ऐसे माहौल में सोने-चांदी को सुरक्षित निवेश मानते हैं, लेकिन इस बार थोड़ी उल्टी तस्वीर देखने को मिल रही है।

धर्मांतरण कानून पर बड़ा फैसला: छत्तीसगढ़ में बिल पास, जानें अन्य राज्यों से कितना अलग

रायपुर. छत्तीसगढ़ बहुप्रतीक्षित विधेयक आखिरकार विधानसभा में पारित किया गया। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन में भारी गहमागहमी देखने को मिली। गृह मंत्री विजय शर्मा ने राज्य में धर्मांतरण पर रोक लगाने के उद्देश्य से ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ सदन के पटल पर रखा। विधेयक पेश होते ही विपक्ष ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया और इसे जल्दबाजी में उठाया गया कदम करार दिया। क्या है छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक? छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण स्वातंत्रय विधेयक 2026 के फॉर्मेट का अनुमोदन किया गया है. इस विधेयक का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति और साधनों पर सही तरीके से रोक लगाना है. अब अगर छत्तीसगढ़ में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई दूसरा इंसान जबरन दबाव डालकर धर्म परिवर्तन करवाता है, तो उसे दोषी मानते हुए उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर नियम के बाहर कोई व्यक्ति धर्म बदलता है, तो उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी. विधेयक साफ तौर पर यह कहता है कि धर्म परिवर्तन किसी भी व्यक्ति की इच्छा से होना चाहिए. दबाव या लालच से नहीं. छत्तीसगढ़ में पहले से ही धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जो 1 नवंबर, 2000 को अस्तित्व में आया था. सार्वजनिक की जाएगी धर्मांतरण की जानकारी छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण विधेयक के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देनी होगी. प्रस्तावित धर्मांतरण की जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएगी और 30 दिनों के भीतर आपत्ति दर्ज कराने का नियम होगा. विधेयक में प्रलोभन, प्रपीड़न, दुर्व्यपदेशन, सामूहिक धर्मांतरण और डिजिटल माध्यम से धर्मांतरण जैसे शब्दों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा. जबरन धर्मांतरण करवाने पर है सजा का प्रावधान     कानून में अवैध धर्मांतरण के मामलों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है. अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और कम से कम 10 लाख रुपए का जुर्माना हो सकता है.     सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में सजा और कठोर होगी, जिसमें 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपए जुर्माना का प्रावधान किया गया है.     विधेयक के तहत आने वाले अपराध संज्ञेय और गैर जमानती होंगे. मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करना नहीं बल्कि अवैध तरीकों से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. दूसरे राज्यों से कैसे अलग है छत्तीसगढ़ का कानून छत्तीसगढ़ से पहले उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, हरियाणा, झारखंड, अरुणाचल प्रदेश और राजस्थान सहित कई राज्यों में धर्म बदलने के खिलाफ कानून मौजूद हैं. सभी राज्यों में लगभग कानून एक जैसा ही है, लेकिन उसकी सजा और जुर्माने में अंतर है. जबकि छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की एक बड़ी आबादी है और उन क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया गया है. इसके अलावा सामूहिक धर्मांतरण ना हो इस पर जोर दिया गया है और सख्त सजा का प्रावधान किया गया है. छत्तीसगढ़ में धर्म परिवर्तन की आईं खबरें छत्तीसगढ़ के बस्तर और जशपुर क्षेत्र में कई बार आदिवासियों को ईसाई धर्म में परिवर्तन की खबरें आई थीं. कई बार ऐसा भी पता चला है कि आदिवासियों और धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के बीच भी विवाद हुआ था. अब धर्मांतरण विधेयक के बाद ऐसे मामलों में रोक लगने की उम्मीद होगी. छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर पिछले कुछ महीनों में कई FIR भी दर्ज हुई हैं और पुलिस को शिकायत भी मिली है. उपमुख्यमंत्री ने कही ये बात धर्मांतरण विधेयक पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 1968 का धर्म स्वतंत्र विधेयक लागू है. अब परिस्थितियां बदल गई हैं, तो नई परिस्थितियों के तहत धर्म स्वतंत्र विधेयक लाया गया है.

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल अविस्मरणीय: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

पं. कुंजीलाल दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल भुलाया नहीं जा सकता : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने तीन बार विधानसभा अध्यक्ष रहे स्व. पं. दुबे की 130वीं जन्म जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी श्रद्धांजलि भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्व. पं. कुंजीलाल दुबे तीन बार मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष रहे। विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने हिन्दी भाषा को प्रतिष्ठित स्थान दिलाने में बड़ा योगदान दिया। स्व. पं. दुबे के विधानसभा अध्यक्षीय कार्यकाल की सुदीर्घ सेवाओं और संसदीय परम्पराओं को और भी समृद्ध बनाने में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को स्व. पं. कुंजीलाल दुबे की 130वीं जन्म जयंती के अवसर पर मध्यप्रदेश विधानसभा भवन परिसर में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्व. पं. दुबे की समाजोन्मुखी सेवाओं के लिए वर्ष 1964 में इन्हें पद्मभूषण की उपाधि विभूषित किया गया। विद्या और ज्ञान के क्षेत्र में की गई सेवाओं और उपलब्धियों के लिए स्व. पं. दुबे को 1965 में एलएलडी की उपाधि दी गई, वहीं 1967 में विक्रम विश्वविद्यालय ने इन्हें डी-लिट की उपाधि प्रदान की थी। वे सदैव हमारी स्मृतियों में बने रहेंगे। म.प्र. विधानसभा के भूतपूर्व अध्यक्ष स्व. पं. कुंजीलाल दुबे का जन्म 19 मार्च 1896 को वर्तमान नरसिंहपुर जिले के ग्राम आमगांव में हुआ था। वकालत के पेशे से एक सुघड़ राजनीतिज्ञ के रूप स्थापित होकर स्व. पं. दुबे प्रथम विधानसभा (1956-57), द्वितीय विधानसभा (1957-62) एवं तृतीय विधानसभा (1962-67) में कुल तीन बार मप्र विधानसभा अध्यक्ष के रूप में सेवारत रहे। पुष्पांजलि कार्यक्रम में म.प्र. विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, विधायक भगवानदास सबनानी, प्रमुख सचिव विधानसभा अरविन्द शर्मा तथा भूतपूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्व. पं. दुबे के परिजन सहित विधानसभा के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित थे।  

मध्य प्रदेश में 3 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट, मार्च में ओलावृष्टि की पहली भविष्यवाणी

भोपाल  मध्यप्रदेश में गर्मी के बीच मौसम ने अचानक करवट ले ली है। तेज सिस्टम के एक्टिव होने से अगले तीन दिन प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर देखने को मिल सकता है। प्रदेश में दो ट्रफ लाइनों और एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन के असर से यह बदलाव आया है, जिसका असर करीब 72 घंटे तक रहने का अनुमान है।  इससे पहले बुधवार को कई जिलों में बादल छाए रहे, कई स्थानों पर हल्की बारिश हुई और कुछ जगहों पर तेज हवाओं का दौर चला। बालाघाट में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने 19 मार्च के लिए भोपाल, इंदौर, ग्वालियर समेत 30 से ज्यादा जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में ओले गिरने की संभावना जताई गई है। इन जिलों में तेज हवाओं की रफ्तार 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक रहने की आशंका है। मौसम का अलर्ट मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 और 20 मार्च को मौसम का असर सबसे ज्यादा रहेगा। यह धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर करेगा। 22 मार्च के बाद मौसम सा 19-20 मार्च को सबसे ज्यादा असर मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 19 और 20 मार्च को इसका असर सबसे ज्यादा रहेगा और यह सिस्टम धीरे-धीरे पूरे प्रदेश को कवर करेगा। 22 मार्च के बाद मौसम साफ होने के संकेत हैं। बदलते मौसम के कारण कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मार्च में पहली बार ओलों की एंट्री इस बार मार्च में पहली बार ओलावृष्टि होने जा रही है। खासतौर पर सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में दो दिन तक ओले गिर सकते हैं, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा। फरवरी में भी मौसम ने चार बार करवट ली थी। कई इलाकों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था, जिसके बाद सरकार को सर्वे कराना पड़ा था। अब मार्च में फिर से वैसा ही पैटर्न देखने को मिल रहा है। 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान मौसम विभाग के मुताबिक, मार्च के आखिरी हफ्ते से गर्मी फिर जोर पकड़ सकती है। अप्रैल-मई में 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश में “तीनों मौसम” का असर देखने को मिल रहा है—दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंड और बीच-बीच में बारिश। कुछ दिन पहले नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में भी दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास जा सकता है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहेंगी।  फ होने के संकेत हैं। बदलाव के कारण कई शहरों में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली है। मार्च में पहली बार ओलावृष्टि विशेष रूप से मार्च में यह पहली बार है जब ओलावृष्टि होने जा रही है। सिवनी, मंडला और बालाघाट जिलों में दो दिन तक ओले गिरने का अनुमान है, जबकि अन्य जिलों में हल्की से मध्यम बारिश का दौर रहेगा। फरवरी में भी मौसम ने चार बार करवट ली थी और कई इलाकों में ओले और बारिश से फसलों को नुकसान हुआ था। अप्रैल और मई में 20 दिन लू का अनुमान मौसम विभाग ने चेताया है कि मार्च के आखिरी हफ्ते से प्रदेश में गर्मी फिर जोर पकड़ सकती है। अप्रैल और मई में 15 से 20 दिन तक लू चलने का अनुमान है। फिलहाल प्रदेश में “तीनों मौसम” का असर देखने को मिल रहा है। दिन में गर्मी, रात में हल्की ठंड और बीच-बीच में बारिश। कुछ दिन पहले नर्मदापुरम में पारा 40 डिग्री के पार पहुंच गया था। आने वाले दिनों में भोपाल, इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री के आसपास रहने की संभावना है, जबकि रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहेंगी।

थरूर का सोनिया गांधी को कड़ा संदेश, ईरान-इजरायल युद्ध पर सरकार की चुप्पी को बताया मोरल सरेंडर

नई दिल्ली  अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, भारत की राजनीति में भी उबाल आ गया है. तमाम विपक्षी दल इस मामले में भारत की चुप्‍पी पर सवाल उठाते हुए सरकार की तीखी आलोचना कर रहे हैं. सोनिया गांधी ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई की एयर स्‍ट्राइक में मौत की निंदा न करने पर सरकार पर खूब खरी-खोटी सुनाई थी. उन्‍होंने ईरान की संप्रभुता को तार-तार करने के मामले में भारत की चुप्‍पी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे. अब सोनिया गांधी को उनकी ही पार्टी के सीनियर लीडर और तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने आईना दिखाया है. थरूर का कहना है कि वेस्‍ट एशिया में छिड़ी जंग पर भारत की चुप्‍पी किसी भी तरह से मोरल सरेंडर यानी नैतिक आत्‍मसमर्पण नहीं है. कांग्रेस सांसद का कहना है कि भारत का साइलेंस एक रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट (सोची-समझी और जिम्‍मेदार कूटनीति) है. वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार की चुप्पी पर देश में छिड़ी बहस के बीच कांग्रेस नेता शशि थरूर ने इसे नैतिक आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि रिस्‍पॉन्सिबल स्‍टेटक्राफ्ट करार दिया है. उन्होंने ‘इंडियन एक्‍सप्रेस’ अखबार में लिखे लेख में कहा कि भारत का यह रुख भावनात्मक प्रतिक्रिया के बजाय व्यावहारिक कूटनीतिक संतुलन को दर्शाता है. थरूर ने स्पष्ट किया कि वे खुद मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ किया गया सैन्य अभियान अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप नहीं है. यह संप्रभुता, आक्रामकता-विरोध और शांतिपूर्ण समाधान जैसे उन सिद्धांतों के खिलाफ है, जिनका भारत ऐतिहासिक रूप से समर्थन करता रहा है. इसके बावजूद उन्होंने सरकार की आलोचना करने से इनकार करते हुए कहा कि हर स्थिति में सार्वजनिक निंदा ही एकमात्र विकल्प नहीं होती. बता दें कि इसी समाचारपत्र में कुछ दिनों पहले सोनया गांधी ने लेख लिखकर सुप्रीम लीडर अयातुल्‍ला अली खामेनेई और ईरान की संप्रभुता पर आक्रमण की खुले शब्‍दों में निंदा न करने के लिए भारत सरकार की तीखी आलोचना की थी. ‘सिद्धांत और व्‍यवहारिकता के बीच संतुलन’ अब शशि थरूर ने कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा सिद्धांत और व्यवहारिकता के बीच संतुलन पर आधारित रही है. जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्ष नीति का हवाला देते हुए थरूर ने कहा कि यह नैतिक रुख से दूरी नहीं, बल्कि शीत युद्ध के दौरान राष्ट्रीय हितों की रक्षा का व्यावहारिक तरीका था. आज के बहुध्रुवीय विश्व (Multipolar World) में भारत मल्टी-अलाइनमेंट की नीति पर चल रहा है, जहां वह अलग-अलग शक्तियों के साथ संबंध बनाए रखते हुए अपने हितों को प्राथमिकता देता है. थरूर ने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे यह भूल जाते हैं कि भारत ने अतीत में भी कई बार राष्ट्रीय हितों के चलते चुप्पी साधी है. 1956 में हंगरी, 1968 में चेकोस्लोवाकिया और 1979 में अफगानिस्तान में सोवियत हस्तक्षेप के दौरान भारत ने खुलकर विरोध नहीं किया था, क्योंकि उस समय सोवियत संघ भारत का प्रमुख रक्षा साझेदार था. शशि थरूर की दलील कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने तर्क दिया कि भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र बेहद अहम है, जहां से हर साल करीब 200 अरब डॉलर का व्यापार होता है. देश की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं और करीब 90 लाख भारतीय वहां काम करते हैं. ऐसे में किसी एक पक्ष के खिलाफ कड़ा सार्वजनिक रुख इन संबंधों को प्रभावित कर सकता है. थरूर ने अमेरिका के साथ भारत के रणनीतिक रिश्तों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मौजूदा अमेरिकी नेतृत्व (खासकर डोनाल्‍ड ट्रंप) अक्सर अपने हितों के खिलाफ जाने वालों पर सख्त रुख अपनाते हैं. ऐसे में भारत के लिए रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और चीन के बढ़ते प्रभाव जैसी चुनौतियों को देखते हुए अमेरिका के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि विदेश नीति ‘नैतिक भाषणबाजी’ का मंच नहीं, बल्कि वह क्षेत्र है जहां सिद्धांत और शक्ति के बीच संतुलन साधना पड़ता है. बिना पर्याप्त प्रभाव (leverage) के किसी बड़ी शक्ति की खुलकर आलोचना करना व्यावहारिक नहीं होता. चुप्‍पी का मतलब युद्ध का समर्थन नहीं थरूर के मुताबिक, भारत की चुप्पी का मतलब यह नहीं है कि वह युद्ध का समर्थन करता है, बल्कि यह एक रणनीतिक विकल्प है, जो देश को अपने हितों की रक्षा करते हुए कूटनीतिक संवाद के रास्ते खुले रखने में मदद करता है. उन्‍होंने कहा कि चुप्पी भी एक रणनीति हो सकती है, जो अनावश्यक टकराव से बचाते हुए शांति की दिशा में काम करने का अवसर देती है. उन्होंने आलोचकों को सलाह दी कि वे नैतिक आदर्शवाद और वास्तविक कूटनीतिक जरूरतों के बीच फर्क समझें. महात्मा गांधी और नेहरू के मूल्यों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी विरासत कठोर सिद्धांतों पर अड़े रहने की नहीं, बल्कि समय के अनुसार समझदारी से उन्हें लागू करने की रही है. अंत में थरूर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालात में भारत का संयम ही उसकी ताकत है. उन्‍होंने कहा कि संयम कमजोरी नहीं, बल्कि वह क्षमता है, जो हमें अपने मूल्यों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में सक्षम बनाती है. सोनिया गांधी ने क्‍या कहा था? सोनिया गांधी ने लिखे लेख में कहा था कि 1 मार्च को ईरान ने पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता (अयातुल्लाह सैयद अली हुसैनी खामेनेई) की एक दिन पहले अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए टार्गेटेड हमलों में हत्या कर दी गई थी. वार्ता के बीच किसी मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गंभीर दरार को दर्शाती है. उन्‍होंने आगे कहा था कि इस घटना से परे जो बात उतनी ही स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आती है, वह है नई दिल्ली की चुप्‍पी. बकौल सोनिया गांधी भारत सरकार ने इस हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया है. जब किसी विदेशी नेता की हत्या पर हमारे देश की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून के पक्ष में कोई स्पष्ट समर्थन नहीं दिखता और निष्पक्षता छोड़ दी जाती है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर सीएम ने की दिन की शुरुआत, प्रदेशभर में आयोजित किए गए भव्य कार्यक्रम

भोपाल  हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, विक्रम संवत 2083 और गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर दिन की शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को नववर्ष की शुभकामनाएं देते हुए भारतीय संस्कृति और उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को याद किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन सदियों से धर्म, ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का प्रमुख केंद्र रहा है। सम्राट विक्रमादित्य द्वारा स्थापित परंपराएं आज भी समाज को प्रेरित कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उज्जैन में आयोजित हो रहा विक्रमोत्सव अब राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय पंचांग और सभी प्रमुख पर्व विक्रम संवत पर आधारित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसी क्रम में 19 मार्च 2026 को सृष्टि आरंभ दिवस और वर्ष प्रतिपदा के अवसर पर प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में सुबह 10 बजे सूर्य उपासना और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।  मंत्री प्रभार वाले जिलों में आयोजित कार्यक्रम में होंगे शामिल  राज्यभर में आयोजित कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ग्वालियर में मौजूद रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा मंदसौर और राजेंद्र शुक्ला रीवा में कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके अलावा कई कैबिनेट मंत्री और राज्य मंत्री अपने-अपने आवंटित जिलों में कार्यक्रमों की अगुवाई करेंगे। विक्रमोत्सव–2026 का आयोजन 15 फरवरी से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा। इस दौरान उज्जैन में विभिन्न सांस्कृतिक, साहित्यिक, धार्मिक और वैचारिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। देशभर से आए कलाकार, विद्वान और सांस्कृतिक साधक अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय परंपरा की समृद्ध झलक प्रस्तुत कर रहे हैं। भारतीय परंपरा को जन जन तक पहुंचाने का प्रयास  उत्सव के अंतर्गत संगीत, नृत्य, नाटक, लोककला और संगोष्ठियों के जरिए सम्राट विक्रमादित्य की परंपरा और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, विद्यार्थियों और पर्यटकों की भागीदारी से उज्जैन की सांस्कृतिक पहचान और भी सशक्त रूप में उभरकर सामने आ रही है। बता दें कि विक्रमोत्सव 2025 को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें “लॉन्गस्टैंडिंग आईपी ऑफ द ईयर” और WOW अवॉर्ड शामिल हैं। आने वाले समय में यह उत्सव भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार का सशक्त माध्यम बनेगा। 

सीएम योगी ने 10 जिलों के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी, रामपुर, गोरखपुर, आगरा और प्रयागराज पर फोकस

लखनऊ यूपी में आने वाले दिनों में एक के बाद एक बड़े धार्मिक पर्वों को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर साफ संदेश दिया कि कानून-व्यवस्था से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. उन्होंने प्रदेश के 10 संवेदनशील जिलों के अधिकारियों से हालिया घटनाओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, जिलाधिकारी और पुलिस अधिकारी जुड़े. बैठक का फोकस साफ था कि त्योहारों के दौरान शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द हर हाल में बनाए रखना। 10 जिलों पर खास नजर, मांगी गई रिपोर्ट मुख्यमंत्री ने बदायूं, मुरादाबाद, रामपुर, गाजियाबाद, जालौन, गोरखपुर, आगरा, जौनपुर, प्रतापगढ़ और प्रयागराज में हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं को गंभीरता से लिया. उन्होंने संबंधित जिलों के अधिकारियों से इन घटनाओं पर अब तक हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा तलब किया. सीएम ने दो टूक कहा कि अपराध की एक भी घटना पूरे माहौल को प्रभावित करती है, इसलिए हर शिकायत पर तुरंत और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधियों में पुलिस का खौफ दिखना चाहिए, तभी कानून का असर जमीन पर नजर आएगा। त्योहारों को लेकर सख्त निर्देश बैठक में खास तौर पर चैत्र नवरात्र, अलविदा की नमाज और ईद-उल-फितर को लेकर तैयारियों की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इन अवसरों पर किसी भी तरह की अव्यवस्था या तनाव की स्थिति पैदा न होने पाए. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की उद्दंडता या माहौल बिगाड़ने की कोशिश को तुरंत रोका जाए और दोषियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए. प्रशासन को निर्देश दिया गया कि संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जाए। मंदिरों में व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश चैत्र नवरात्र के दौरान देवी मंदिरों में भारी भीड़ को देखते हुए मुख्यमंत्री ने विशेष इंतजाम करने को कहा. उन्होंने साफ निर्देश दिए कि मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल, रोशनी और स्वास्थ्य सुविधाओं की पूरी व्यवस्था होनी चाहिए. भीड़ प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन को अलर्ट किया गया है, ताकि किसी भी तरह की भगदड़ या अव्यवस्था की स्थिति न बने. प्रमुख मंदिरों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने के भी निर्देश दिए गए हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक आयोजनों में किसी भी नई परंपरा की अनुमति नहीं दी जाएगी. जो परंपराएं पहले से चली आ रही हैं, उन्हीं का पालन सुनिश्चित किया जाए. इसका मकसद यह है कि किसी भी नई गतिविधि के कारण विवाद की स्थिति पैदा न हो। लाउडस्पीकर और स्टंटबाजी पर सख्ती सीएम योगी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय मानकों के भीतर ही रहनी चाहिए. यदि कहीं नियमों का उल्लंघन होता है, तो तुरंत कार्रवाई करते हुए लाउडस्पीकर हटाए जाएं. इसके साथ ही उन्होंने बाइक स्टंटबाजी पर भी सख्त नाराजगी जताई. अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सड़कों पर इस तरह की गतिविधियों को तुरंत रोका जाए और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. बैठक में चेन स्नेचिंग की बढ़ती घटनाओं पर भी चिंता जताई गई. मुख्यमंत्री ने पीआरवी-112 वाहनों की गश्त बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि पुलिस की मौजूदगी ऐसी होनी चाहिए कि अपराधी वारदात करने से पहले ही डर जाएं। एलपीजी सप्लाई पर भी सरकार सख्त मुख्यमंत्री ने एलपीजी गैस की आपूर्ति को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का असर आम जनता पर नहीं पड़ना चाहिए. कहीं भी कृत्रिम कमी, जमाखोरी या कालाबाजारी की शिकायत मिलती है, तो दोषियों पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए। राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे की तैयारी अयोध्या और मथुरा-वृंदावन में राष्ट्रपति के प्रस्तावित दौरे को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई. मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां तय प्रोटोकॉल के तहत पूरी की जाएं और किसी भी स्तर पर चूक न हो. मुख्यमंत्री ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को लेकर भी अधिकारियों को निर्देशित किया. उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थलों में व्यवस्थाएं मजबूत की जाएं, समय पर धनराशि जारी हो और चारे सहित सभी जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए. बैठक से पहले पुलिस महानिदेशक ने जानकारी दी कि चैत्र नवरात्र, ईद और रामनवमी के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल पूरी तरह तैयार है. संवेदनशील इलाकों में फुट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।  

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: मुकेश मल्होत्रा रहेंगे विजयपुर विधायक, राज्यसभा चुनाव में नहीं होगा वोट

श्योपुर मध्यप्रदेश के श्योपुर की विजयपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. इस सीट को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा की विधायकी को बरकरार रखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया है. हाईकोर्ट ने उपचुनाव में दूसरे नंबर पर रहे रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. विधायक बने रहेंगे मल्होत्रा हाईकोर्ट ने मुकेश मल्होत्रा के निर्वाचन को शून्य घोषित कर रामनिवास रावत को विधायक घोषित किया था. इसके बाद मुकेश मल्होत्रा ने हाईकोर्ट में आवेदन देकर अपील के लिए समय मांगा था. इसके बाद हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि मुकेश मल्होत्रा के पास सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के लिए 15 दिन का समय है. मुकेश मल्होत्रा को विधायकी बचाने के लिए 20 मार्च तक सुप्रीम कोर्ट से स्टे लाना होगा. अब सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्टे लगा दिया है तो मुकेश मल्होत्रा विधायक बने रहेंगे.  सुप्रीम कोर्ट में मुकेश मल्होत्रा का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने दलीलें पेश कीं, जिसके बाद अदालत ने मल्होत्रा को राहत दी। सुप्रीम कोर्ट की दो प्रमुख शर्तें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की डबल बेंच ने मुकेश मल्होत्रा को विधायक के रूप में जारी रखने की अनुमति तो दी है, लेकिन अंतिम फैसला आने तक ये पाबंदियां भी लगाई हैं… वोटिंग राइट नहीं: मुकेश मल्होत्रा फिलहाल राज्यसभा के लिए मतदान नहीं कर सकेंगे। ऐसे में अब मुकेश जून में होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए वोट नहीं डाल पाएंगे। वेतन पर रोक: जब तक कोर्ट इस मामले में अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक उन्हें विधायक के रूप में मिलने वाला वेतन और भत्ते नहीं दिए जाएंगे। हालांकि, उन्हें विधायक निधि मिलेगी या नहीं…यह अभी साफ नहीं हुआ है। वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने बताया कि अब इस मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को होगी। मुकेश और रामनिवास दोनों ने बदली थी पार्टी पूर्व राज्यमंत्री और आदिवासी नेता मुकेश मल्होत्रा ने 2 मई 2024 को कांग्रेस जॉइन की थी। उन्होंने मुरैना जिले में आयोजित प्रियंका गांधी की चुनावी सभा में सदस्यता ली। विधानसभा चुनाव–2023 में मुकेश मल्होत्रा विजयपुर सीट से निर्दलीय मैदान में उतरे थे, तब पूरे क्षेत्र के आदिवासियों ने उनका साथ दिया था। उन्हें 45 हजार वोट मिले थे। मुकेश विजयपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। वह पहले में बीजेपी में थे, तब सरकार ने उन्हें सहारिया प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया था। दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री बनाया था। विधानभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने 2023 के चुनाव से पहले भाजपा का साथ छोड़ दिया था। दरअसल, विजयपुर विधानसभा क्षेत्र में सहारिया आदिवासी समाज के 70 हजार से ज्यादा वोट हैं। कांग्रेस ने आदिवासी वोटों को ध्यान में रखकर मुकेश को उपचुनाव में उम्मीदवार बनाया था।