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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया। अधिकारियों-कर्मचारियों संग होली मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

होली का पर्व हर आंगन में खुशियां, शांति और समृद्धि के रंग भरता है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरता है होली का उत्सव: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संतों , समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, कार्यकर्ताओं और मीडिया के साथियों के साथ खेली होली मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी को दीं मंगलकामनाएं सभी ने हर्षोल्लास और आत्मीयता के साथ एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर दीं बधाई ब्रज, बरसाने और होली गीतों के साथ मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से सराबोर हुआ वातावरण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में प्रदेशवासियों को उत्साह, उमंग और समरसता के पावन पर्व होली की बधाई और मंगलकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यह उत्सव हर आंगन में सुख, शांति और समृद्धि के नए रंग बिखेरे और समाज में सद्भाव-सकारात्मकता और एकता का रंग सदा चटक रहे यही कामना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी से आत्मीयता और सौहार्द के साथ त्यौहार मनाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने होली पर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे नागरिकों के साथ होली की मंगलकामनाओं का आदान-प्रदान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुख्यमंत्री निवास पधारे संतों से आशीर्वाद प्राप्त किया। वरिष्ठ और गणमान्य नागरिकों का अभिवादन किया तथा सभी आगंतुकों पर पुष्प वर्षा एवं गुलाल उड़ाकर मेजबान के रूप में सबका स्वागत किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सांस्कृतिक प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को गुलाल लगाया और पारम्परिक वाद्य यंत्रों के साथ उनके सुर में सुर भी मिलाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को मुख्यमंत्री निवास पधारे राज्य मंत्री  नरेंद्र शिवाजी पटेल, वरिष्ठ सांसद  विष्णु दत्त शर्मा, विधायक  रामेश्वर शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष  किशन सूर्यवंशी, मुख्य सचिव  अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव  नीरज मंडलोई,  मनु वास्तव,  शिवशेखर शुक्ला , प्रमुख सचिव  उमाकांत उमराव , सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसंपर्क  मनीष सिंह, खाटू श्याम मंदिर भोपाल के प्रमुख प्रचारक पूज्य अनिल आनंद महाराज सहित कई जनप्रतिनिधियों, गणमान्य नागरिकों, पत्रकार गण और वरिष्ठ अधिकारियों ने मंगल कामनाएं दीं। मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में उड़ते रंग गुलाल और पुष्प वर्षा के बीच, ब्रज-बरसाने के होली गीतों, पारंपरिक संगीत और मयूर नृत्य के साथ उल्लास और उमंग से सराबोर वातावरण में सभी ने शालीनता के साथ पर्व का आनंद लिया। मंच पर प्रस्तुति दे रहे कलाकारों ने रंग बरसे, होली के दिन दिल खिल जाते हैं, होली खेलें रघुवीरा, आज ब्रज में होली रे रसिया जैसे होली गीतों का सस्वर गायन कर सभी के उल्लास को दोगुना कर दिया। मुख्यमंत्री निवास में होली पर्व पर आयोजित मिलन समारोह में सभी को गुजिया, बालूशाही, ठंडाई सहित कई परंपरागत व्यंजन परोसे गए। 

सीएम डॉ. यादव के प्रयास से एमपी की खिलाड़ी बिटिया की सुरक्षित स्वदेश वापसी की राह आसान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश की खिलाड़ी बिटिया की सुरक्षित स्वदेश वापसी के लिए किए प्रयास परिवार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का माना आभार भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अल्बानिया के तिराना शहर में आयोजित वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप रैंकिंग सीरीज़ में हिस्सा लेने गई मध्यप्रदेश की बेटी सु प्रियांशी प्रजापत की सुरक्षित स्वदेशी वापसी के लिए उच्च स्तरीय प्रयास किए जिसके फलस्वरूप खिलाड़ी बेटी वापस भारत पहुंच गई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सु प्रियांशी को उत्कृष्ट प्रदर्शन, रजत पदक जीतने के लिए बधाई भी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रियांशी के उज्जैन निवासी परिजन से भी आज वीडियो कॉल से आज चर्चा की। प्रियांशी के पिता  प्रजापत ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने द्वारा दिए गए सहयोग के लिए उनका आभार व्यक्त किया। गत 24 फरवरी से 28 फरवरी तक अल्बानिया में हुई वर्ल्ड रेसलिंग प्रतियोगिता में प्रियांशी ने 26 फरवरी को यह मुकाबला जीता था। प्रियांशी ने कज़ाकिस्तान, अमेरिका और अल्बानिया की पहलवानों को हराकर शानदार प्रदर्शन किया। पिछले वर्ष एशियन सीरीज़ में भी उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर देश और प्रदेश का नाम रोशन किया था। उल्लेखनीय है कि हाल ही में मध्य-पूर्व एशिया में बढ़ते युद्ध तनाव के कारण प्रियांशी और उनके साथ गए सभी खिलाड़ी वहाँ फँस गए थे। इस कठिन समय में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लगातार खिलाड़ी बिटिया की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक सभी संसाधन उपलब्ध करवाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमेशा उन्हें अपनी बेटी के समान स्नेह और समर्थन दिया है। जब वे मध्यप्रदेश कुश्ती क्षेत्र के अध्यक्ष थे, तब भी उन्होंने 2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की थी।

नई स्टडी से खुलासा: मौत के बाद इंसान क्या-क्या सुन सकता है? जानिए हैरान कर देने वाले तथ्य

न्यूयॉर्क    सोचिए… आपका दिल धड़कना बंद कर देता है. डॉक्टर CPR रोक देते हैं. आपको ‘डेथ’ घोषित कर दिया जाता है,लेकिन आपका दिमाग अब भी जिंदा है,और आपको सब कुछ सुनाई दे रहा है.यहां तक कि डॉक्टर आपकी मौत का समय भी बोल रहे हों! मौत आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य बनी हुई है. इंसान के साथ मौत के बाद क्या होता है और आखिरी क्षणों में उसका अनुभव कैसा होता है.इस पर बहुत कुछ कहा जा चुका है. इन विषयों पर कई रिसर्च भी हो चुके हैं, लेकिन हाल ही में आई एक नई रिसर्च ने सभी को चौंका दिया. इसमें दावा किया गया है कि इंसान की मौत के बाद भी उसका दिमाग कुछ समय तक एक्टिव रहता है और वह अपने आसपास की आवाजें सुन सकता है. न्यूयॉर्क में एक डॉक्टर ने ऐसा खुलासा किया है जिसने मौत की परिभाषा को ही बदलकर रख दिया है. दिल की धड़कन रुक जाने के बाद भी इंसानी दिमाग सक्रिय रहता है, और कई बार मरीज डॉक्टरों द्वारा अपनी मौत की घोषणा तक सुन लेते हैं. यह दावा एक भयावह लेकिन महत्वपूर्ण स्टडी में किया गया है, जो Resuscitation में पब्लिश हुई है. मौत के बाद भी सबकुछ सुनाई देता है इस स्टडी का नेतृत्व न्यूयॉर्क के एनवाईयू लैंगोन मेडिकल सेंटर (NYU Langone Medical Center) के डॉक्टर सैम पारनिया ने किया. उन्होंने उन मरीजों से बात की जिन्हें क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था-यानी जिनका दिल धड़कना बंद हो चुका था,लेकिन बाद में वे दोबारा जिंदा हो गए. चौंकाने वाली बात यह थी कि कई मरीजों ने अपने कमरे में हो रही घटनाओं को सटीक रूप से याद किया. डॉ. पारनिया के अनुसार, इन मरीजों की याददाश्त इतनी स्पष्ट इसलिए थी क्योंकि दिल रुकने के बाद भी लगभग एक घंटे तक दिमाग में सामान्य और लगभग सामान्य ब्रेन ऐक्टिविटी पाई गई. उन्होंने बताया कि ये अनुभव न तो सपने जैसे होते हैं और न ही भ्रम या मतिभ्रम.ये एक्सपियरेंस खास होते हैं. इस शोध में अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों की दिमागी गतिविधि और जागरूकता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि 40 फीसदी मरीजों ने यादें या सचेत विचार होने की बात कही. डॉ. पारनिया के अनुसार, मौत के दौरान कई लोगों को लगता है कि वे अपने शरीर से अलग हो चुके हैं और कमरे में घूमकर चीजें देख-पहचान रहे हैं. जैसे कंप्यूटर अचानक रीबूट हो गया इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) से पता चला कि मरीजों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक gamma, delta, theta, alpha और beta जैसी ब्रेन वेव्स मौजूद थीं, जो सोचने और जागरूकता से जुड़ी होती हैं. यह बताता है कि दिमाग दिल रुकने के बाद भी पूरी तरह बंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी उच्च स्तरीय गतिविधि दिखाता है-मानो कोई बंद कंप्यूटर अचानक रीबूट हो रहा हो. पूरी लाइफ का फ्लेशबैक एकसाथ डॉ. पारनिया का कहना है कि पहले यह माना जाता था कि दिल रुकने के 10 मिनट बाद दिमाग स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो जाता है, लेकिन यह शोध दिखाता है कि दिमाग CPR जारी रहने पर देर तक सक्रिय रह सकता है. यही ऊर्जा का उभार लोगों को अपने पूरे जीवन की यादें एक साथ देखने जैसा अनुभव भी दे सकता है.

धारावी का ‘गरीबी का बाजार’: विदेशी 2 घंटे की बदहाली देखने के लिए देते हैं 15,000 रुपये

मुंबई  सपनों की इस नगरी में ऐसा तिलिस्म है कि यहां की बदहाली भी नीलाम होती है. कहते हैं कि मुंबई के गटर भी सोने के हैं, जहां गरीबी अब केवल एक हालात नहीं, बल्कि एक 'बिकाऊ वस्तु' बन चुकी है. यह विडंबना ही है कि यहां के अभावों को 'एक्सपोज़र' और 'एजुकेशन' का मुलम्मा चढ़ाकर नुमाइश के लिए रखा जाता है. और इस नुमाइश के खरीदार सिर्फ सात समंदर पार से आए सैलानी ही नहीं, बल्कि मालाबार हिल और पेडडर रोड के वो संभ्रांत रईस भी हैं, जिनके लिए गरीबी एक 'टूरिस्ट डेस्टिनेशन' बन गई है|  दुनिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक, धारावी में यह नज़ारा सबसे ज्यादा दिखाई देता है. मुंबई के दिल में बसी इस बस्ती की हालिया यात्रा के दौरान सबसे चौंकाने वाले दृश्यों में से एक था अभिजात वर्ग को गरीबी बेचा जाना, वह भी दो घंटे के 15,000 रुपये में.  जब धारावी की तंग गलियों में एक प्लंबर, राजू हनुमंता और उनके पड़ोसी इडली बेचने वाले शनप्पा का इंटरव्यू लिया, तो उसी वक्त वहां विदेशियों का एक समूह दिखाई दिया, एक ऐसी जगह जहां उनकी मौजूदगी की उम्मीद सबसे कम थी, उनके साथ एक "गाइड" भी था|  मुंबई का वो अंधेरा हिस्सा… धारावी में ऐसी कई गलियां हैं, जहां आम मुंबईकर भी जाने से हिचकिचाते हैं. ये गलियां मुंबई का वह अंधेरा हिस्सा हैं, जिन्हें कभी वरदराजन मुदलियार जैसे क्राइम बॉसों से जोड़कर देखा जाता था. उनके गुर्गे अब जबरन वसूली या खून-खराबे में तो नहीं, बल्कि उन धंधों में लगे हैं, जिन्हें अब वैध माना जाता है. जैसे रियल एस्टेट, जमीन से जुड़ी चीजें और ड्रग्स. लेखक और पूर्व खोजी पत्रकार एस. हुसैन जैदी, जो मुंबई के इस अंधेरे हिस्से को रग-रग से जानते हैं, उनका कहना है कि तरीके भले ही बदल गए हों, लेकिन फितरत अब भी वही है|  खैर, वह समानांतर अर्थव्यवस्था एक अलग कहानी है. यहां हम बात कर रहे हैं 'गरीबी के व्यापार' की…. गरीबी, खासकर भारत में, हाथों-हाथ बिकती है. धारावी की अरबों डॉलर की अर्थव्यवस्था में यह एक ऐसा पहलू है जिसके बारे में हमने सोचा तक नहीं था. विदेशियों के उस समूह का नेतृत्व एक स्थानीय व्यक्ति, ओंकार ढमाले कर रहा था. जब उससे पूछा गया कि वह इस 'स्लम टूर' के लिए कितना शुल्क लेता है, तो उसका जवाब था, "प्रति व्यक्ति 15,000 रुपये." उसके साथ पांच विदेशी थे. यानी झुग्गियों में सिर्फ दो घंटे की पैदल सैर के लिए वह 75,000 रुपये कमाने वाला था|  गरीबी देखने आते हैं अमीर लोग सालों से चल रहा है गरीबी दर्शन  यह कोई नया चलन नहीं है,साल 2006 में ही पूरे भारत में फैल रहे 'गरीबी पर्यटन' (Poverty Tourism) पर रिपोर्ट दी थी, लेकिन अब कुछ बदल गया है. पहले इस तरह के टूर संगठित समूहों और प्रशिक्षित गाइडों द्वारा चलाए जाते थे. अब यह व्यवसाय खुद धारावी के निवासी संभाल रहे हैं और उनकी फीस किसी कॉर्पोरेट सैलरी के बराबर है. मुंबई आने वाले विदेशी अक्सर धारावी की लेदर मार्केट वाली सड़क तक ही आते हैं. लेकिन यह बस्ती उस मुख्य मार्ग से बहुत आगे, कई किलोमीटर तक गहराई में फैली हुई है. वहां ऐसी गलियां और कोने हैं जो दुनिया की नजरों से ओझल हैं, जहां सिर्फ वहां रहने वाले लोग ही जाते हैं. महज तीन फीट चौड़ी गलियां. ऐसी जगहें न केवल विदेशियों को, बल्कि मुंबई के उन निवासियों को भी आकर्षित करती हैं, जिन्होंने कभी यहां कदम रखने की हिम्मत नहीं की|  हालांकि, भारतीय इन स्लम टूर के लिए अलग कीमत चुकाते हैं- 1,500 रुपये से लेकर 7,000 रुपये के बीच, जहां अधिकतम कीमत भी किसी विदेशी पर्यटक से ली जाने वाली राशि की आधी होती है|  कई लोग इस तरह के दौरों को 'वॉयूरिज्म' (दूसरों की मजबूरी या निजी जिंदगी को मजे के लिए देखना) कहते हैं, लेकिन धारावी में पले-बढ़े और 12वीं तक पढ़े स्थानीय निवासी ढमाले के लिए अपने इलाके से कमाई करने में कुछ भी गलत नहीं है. उनका कहना है, "गोरे लोगों को झोपड़पट्टी पहली बार देखने को मिलता है इधर. अपना घर दिखा कर पैसा मिलता है, कायको नहीं दिखाएं? असली दिक्कत तब आती है, जब रईस लोग ही दूसरे अमीर लोगों को गरीबी की आधी-अधूरी जानकारी देकर पैसे कमाते हैं. धारावी की गलियों में कदम रखते ही आपको समझ आता है कि वहां जिंदगी कितनी जद्दोजहद भरी है, जहां हर शख्स अपनी पहचान बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहा है. जब आप ओंकार ढमाले जैसे गाइडों को विदेशियों के साथ वहां देखते हैं, जो बड़े शौक से उस गरीबी को देखने आते हैं, तब आपको मुंबई की उस उलझी हुई और अजीब सच्चाई का एहसास होता है|  धारावी वॉक्स का दूसरा पहलू जो केवल दिखावे से परे है लंबे समय तक, 'खाकी टूर्स' के संस्थापक भरत गोठोसकर ने पर्यटकों को धारावी ले जाने के विचार का विरोध किया. उन्होंने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया, "पहले तीन-चार साल हमने ऐसा कभी नहीं किया." उनके लिए यह सीधे तौर पर 'पॉवर्टी टूरिज्म' जैसा था. एक ऐसी स्थिति जैसा 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' फिल्म में दिखाया गया था, जहां एक जापानी पर्यटक मुंबई में "गरीब और भूखे लोगों" को देखने आता है|  कैसे बिक रही है गरीबी? लेकिन उन्होंने समझाया कि यह चलन अचानक पैदा नहीं हुआ था. 2005 में एक यूरोपीय सामाजिक कार्यकर्ता क्रिस वे और कृष्णा पुजारी द्वारा शुरू किए गए 'रियलिटी टूर्स' ने धारावी में व्यवस्थित तरीके से घूमने का एक खाका तैयार किया था. इसके पीछे विचार यह था कि स्थानीय छात्र इतना कमा सकें कि वे अपनी शिक्षा का खर्च उठा सकें. गोठोसकर ने कहा कि उनके मुनाफे का एक बड़ा हिस्सा वापस उसी समुदाय के काम आता था. समय के साथ, जो एक व्यवस्थित पहल के रूप में शुरू हुआ था, वह कुछ और ही बन गया. उन्होंने आगे कहा- "अब धारावी में स्लम टूरिज्म एक 'कुटीर उद्योग' बन गया है. आज, कोई भी जो कामचलाऊ अंग्रेजी बोल सकता है, खुद को गाइड के रूप में पेश कर सकता है और "गरीबी बेच" सकता है|  समय के साथ गोठोसकर का अपना नजरिया भी बदला. खुद एक ऐसे ही धारावी दौरे में शामिल होने के बाद, उन्होंने इसे अलग तरह … Read more

ग्वालियर-भिंड-इटावा NH-719 फोर लेन बनेगा, 117 किमी के सफर में होगी सुविधा, NHAI की DPR अंतिम चरण में

भिंड/इटावा/ग्वालियर,    मध्य प्रदेश और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण NH-719 (ग्वालियर-भिण्ड-इटावा) अब जल्द ही फोर लेन हाईवे में तब्दील होगा. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम लगभग पूरा कर लिया है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से जिम्मेदारी मिलने के बाद NHAI अब अगले कुछ महीनों में निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी में है. इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 117 किलोमीटर रहेगी. मौजूदा हालत में इस 2 लेन रोड पर अत्यधिक यातायात दबाव रहता है. इसके चलते इसे फोर लेन बनाया जाएगा. इसमें बायपास निर्माण और ब्लैक स्पॉट्स का खात्मा हो जाएगा. वर्तमान में हर दिन तकरीबन 20 हजार वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं. परियोजना के चरण: कब क्या होगा?     भविष्य के ट्रैफिक और सड़क सुरक्षा पहलुओं का अध्ययन पूरा होने वाला है.      DPR के बाद आवश्यक स्वीकृतियां मिलते ही भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) की प्रक्रिया शुरू होगी.     सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूरी होते ही आगामी कुछ महीनों में टेंडर अवार्ड कर काम शुरू कर दिया जाएगा. फोर लेन बनने के 5 बड़े फायदे     शहरों में प्रस्तावित बायपास के कारण भारी वाहनों को शहर के अंदर नहीं घुसना पड़ेगा, जिससे स्थानीय नागरिकों को जाम और प्रदूषण से राहत मिलेगी.     मार्ग पर मौजूद 'ब्लैक स्पॉट्स' (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को समाप्त किया जाएगा. क्रैश बैरियर और आधुनिक रोड मार्किंग से यात्रा सुरक्षित होगी.     फोर लेन होने से वाहनों की गति बढ़ेगी, जिससे ग्वालियर से इटावा के बीच यात्रा समय में भारी गिरावट आएगी.     बेहतर कनेक्टिविटी से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में औद्योगिक निवेश, कृषि परिवहन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा.     एमपी और यूपी के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे और परिवहन लागत में कमी आएगी. कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई NHAI के क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार, यह परियोजना ग्वालियर-चंबल संभाग के समग्र विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी. जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया जा चुका है ताकि परियोजना के क्रियान्वयन में कोई देरी न हो.

2000 KM रेंज और ब्रह्मोस से तेज, दिल्ली से बटन दबाते ही किराना हिल्स बनेगा मलबा

नई दिल्ली  मॉडर्न एज वॉर में मिसाइल की भूमिका काफी अहम है. घर बैठे एक बटन दबाते ही दुश्‍मन के खेमे में तबाही लाई जा सकती है. आज दुनिया के कई देशों के पास ऐसी कई मिसाइल्‍स हैं, जो सैकडों टन विस्‍फोटक लेकर हजारों किलोमीटर तक ट्रैवल कर टार्गेट पर अटैक कर सकती हैं. इन्‍हें इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल यानी ICBM कहा जाता है. भारत ने अग्नि सीरीज के तहत इस तरह की मिसाइल डेवलप की है. अग्नि-5 बैलिस्टिक मिसाइल न्‍यूक्लियर वेपन ले जाने में सक्षम है. भारतीय डिफेंस साइंटिस्‍ट ऐसी मिसाइल डेवलप करने में जुटे हैं, जिसका इस्‍तेमाल बंकर बस्‍टर की तरह किया जा सके. बता दें कि अधिकांश देश अपने संवेदनशील सैन्‍य ठिकानों और परमाणु बम बनाने वाले प्‍लांट को जमीन के अंदर सुरक्षित कर रहे हैं. पिछले साल अमेरिका ने बंकर बस्‍टर बम का इस्‍तेमाल कर ईरान के ऐसे ही एक परमाणु ठिकाने को तबाह करने का दावा किया था. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने किराना हिल्‍स को टार्गेट कर पाकिस्‍तान को तबाही का ट्रेलर दिखाया था. पाकिस्‍तान का परमाणु ठिकाना किराना हिल्‍स की पहाड़ियों में ही अंडरग्राउंड स्थित है. इस अटैक से इस्‍लामाबाद थर-थर कांपने लगा था. अब भारत को अपने मिसाइल बेड़े में ब्रह्मोस से भी खतरनाक मिसाइल एड करने का ऑफर मिला है. इजरायल ने भारत को बेहद खतरनाक और सामरिक रूप से महत्‍वपूर्ण गोल्‍डन होराइजन एयर लॉन्‍च्‍ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) का ऑफर दिया है. यह मिसाइल डीप स्‍ट्राइक करने में सक्षम है. रेंज और स्‍पीड के मामले में यह मिसाइल ब्रह्मोस से दो कदम आगे है. इजरायल की ओर से भारत को लंबी दूरी की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए ‘गोल्डन होराइजन’ एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) की पेशकश किए जाने की खबर सामने आई है. अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो भारत की स्‍ट्रैटजिक स्ट्राइक कैपेबिलिटी में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. यह मिसाइल खास तौर पर गहरे और अत्यधिक सुरक्षित ठिकानों पर हमला करने के लिए डिजाइन की गई बताई जा रही है. यह मिसाइल इजरायल की ‘सिल्वर स्पैरो’ टार्गेट मिसाइल पर आधारित बताई जाती है, जिसकी लंबाई लगभग आठ मीटर और वजन करीब तीन टन है. सिल्वर स्पैरो का इस्तेमाल पहले मिसाइल डिफेंस सिस्टम के ट्रायल के दौरान बैलिस्टिक खतरे की नकल करने के लिए किया जाता था. अब इसी तकनीक को ऑपरेशनल हथियार में बदलकर गोल्डन होराइजन को एक कॉम्बैट-रेडी डीप-स्ट्राइक सिस्टम के रूप में विकसित किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, यह मिसाइल लड़ाकू विमानों से लॉन्च की जा सकती है और दुश्मन के अत्यधिक सुरक्षित रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम होगी. हालांकि, इसकी आधिकारिक तकनीकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन विभिन्न रक्षा आकलनों के अनुसार इसकी मारक क्षमता 1500 से 2000 किलोमीटर तक हो सकती है. कुछ अनुमान इसकी न्यूनतम प्रभावी रेंज लगभग 1000 किलोमीटर बताते हैं, जो पारंपरिक एयर लॉन्च्ड वेपन से काफी अधिक है. गोल्‍डन होराइजन: कुछ नहीं बचेगा यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है जब Indian Air Force अपनी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है. भारतीय वायुसेना युद्धक्षेत्र के सामरिक लक्ष्यों से लेकर लंबी दूरी के रणनीतिक ठिकानों तक अलग-अलग स्तर की मारक क्षमता विकसित करने पर जोर दे रही है. भारत के पास पहले से ही इजरायल से प्राप्त कई सटीक हमले करने वाले हथियार मौजूद हैं, जो युद्धक्षेत्र में तेज और सटीक कार्रवाई के लिए उपयोग किए जाते हैं, लेकिन गोल्डन होराइजन जैसी मिसाइल भारत को रणनीतिक स्तर पर अधिक गहरी मार करने की क्षमता दे सकती है. इस तरह के सिस्टम से भारत की ‘डीप स्ट्राइक’ क्षमता मजबूत होगी और भविष्य की सैन्य रणनीति में नया लेयर जुड़ सकता है. इजरायल पहले ही भारत को कई उन्नत मिसाइल सिस्टम उपलब्ध करा चुका है. इनमें एयर लोरा मिसाइल शामिल है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 400 किलोमीटर है, जबकि रैम्पेज एयर-टू-सर्फेस मिसाइल करीब 250 किलोमीटर तक हमला कर सकती है. ये दोनों मिसाइलें मुख्य रूप से रडार स्टेशन, एयर डिफेंस सिस्टम, हथियार भंडार और कमांड सेंटर जैसे सामरिक लक्ष्यों को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई हैं. लेकिन गोल्डन होराइजन इनसे अलग श्रेणी का हथियार है. इसे खास तौर पर अंडरग्राउंड न्‍यूक्लियर फैसिलिटी, मजबूत कमांड बंकर्स और कंक्रीट से सुरक्षित रणनीतिक ढांचों को नष्ट करने के लिए विकसित किया गया बताया जाता है. Golden Horizon मिसाइल क्या है? यह एक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे लड़ाकू विमान से दागा जा सकता है. इसे इज़राइल की Silver Sparrow टारगेट मिसाइल तकनीक पर आधारित माना जाता है, जो पहले मिसाइल रक्षा परीक्षणों में इस्तेमाल होती थी. इस मिसाइल की मारक क्षमता कितनी बताई जा रही है? आधिकारिक जानकारी नहीं है, लेकिन अनुमान के अनुसार इसकी रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर तक हो सकती है. यह दूरी भारत के मौजूदा एयर-लॉन्च्ड हथियारों से कहीं अधिक है. इसका उपयोग किन लक्ष्यों पर किया जाएगा? Golden Horizon को गहरे भूमिगत और मजबूत संरचनाओं जैसे परमाणु ठिकानों, कमांड बंकर और रणनीतिक सैन्य ढांचे को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है. यह मिसाइल इतनी खतरनाक क्यों मानी जा रही है? यह बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी में उड़ान भरती है और अंतिम चरण में हाइपरसोनिक गति के करीब पहुंच सकती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है. इसकी तेज गति से टकराने पर भारी विनाशकारी ऊर्जा पैदा होती है. भारत के पास पहले से कौन-सी समान मिसाइलें हैं? इंडियन एयरफोर्स के पास पहले से Air LORA (लगभग 400 किमी रेंज) और Rampage (करीब 250 किमी रेंज) जैसी मिसाइलें हैं, लेकिन ये मुख्य रूप से सामरिक लक्ष्यों के लिए हैं. Golden Horizon रणनीतिक स्तर के हमलों के लिए अलग श्रेणी की प्रणाली होगी. क्या भारत ने इस मिसाइल को खरीदने का फैसला कर लिया है? अभी तक किसी आधिकारिक खरीद की पुष्टि नहीं हुई है. बातचीत प्रारंभिक चरण में बताई जा रही है, लेकिन इससे भारत की लंबी दूरी की सैन्य रणनीति में बदलाव के संकेत मिलते हैं. हाइपरसोनिक रफ्तार से अटैक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल होने के कारण गोल्डन होराइजन लक्ष्य की ओर बढ़ते समय बैलिस्टिक मार्ग अपनाती है. लॉन्च के बाद यह ऊंचाई पर जाकर अत्यधिक तेज गति से नीचे आती है. इसकी अंतिम चरण की गति हाइपरसोनिक स्तर (कम से कम 6100 KMPH की रफ्तार) तक … Read more

भोपाल में तैयार हुई रूपरेखा, 17 मार्च को दिल्ली में कर्मचारियों का बड़ा प्रदर्शन

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के न्यू मार्केट के एक रेस्टोरेंट में शुक्रवार को 'अखिल भारतीय राज्य चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी महासंघ' की राष्ट्रीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में देश के लगभग सभी राज्यों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और कर्मचारियों की उपेक्षा के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का शंखनाद किया। 1.44 करोड़ रिक्त पदों पर भर्ती और 8वें वेतनमान की मांग महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं लघु वेतन कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र शर्मा ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती लंबे समय से बंद है, जिसके कारण लगभग 1 करोड़ 44 लाख पद रिक्त पड़े हैं। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि इन पदों पर नियमित भर्ती शुरू की जाए। साथ ही, केंद्र के समान राज्यों में भी आठवां वेतनमान लागू करने और पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने की मांग की गई। आउटसोर्सिंग बंद हो, आयोग का हो गठन कर्मचारी नेताओं ने आउटसोर्सिंग प्रथा पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे पूरी तरह बंद करने की मांग की। प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि जो कर्मचारी वर्तमान में आउटसोर्स पर कार्यरत हैं, उनके लिए 'आउटसोर्स आयोग' का गठन किया जाए और उन्हें नियमित करने के नियम बनाए जाएं। इसके अतिरिक्त, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, कोटवार, और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं को कम से कम 30,000 रुपये का मासिक वेतन देने की मांग भी उठाई गई। 17 मार्च को दिल्ली में महासंग्राम बैठक में निर्णय लिया गया कि अपनी मांगों को लेकर 17 मार्च को देशभर के 'डी ग्रुप' कर्मचारी दिल्ली के रामलीला मैदान में एकत्रित होंगे। यहां एक विशाल रैली और आमसभा आयोजित की जाएगी, जिसके पश्चात केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ज्ञापन सौंपा जाएगा। देशभर से जुटे प्रतिनिधि बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. के गणेशन. रामनारायण मीणा, बीके मधुराम, बीएम नटराजन, रामचंद्र गुप्ता, अरुण बावरिया, सुजान बिंदु, रणजीत सिंह राणा, ऋतिक बारी, वेंकट और गोविंद सिंह नेगी उपस्थित रहे। कई राज्यों के प्रतिनिधि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भीजुड़े। स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अजय दुबे, राष्ट्रीय सहायक महासचिव सुधीर भार्गव और जिला अध्यक्ष राम कुंडल सेन विचार रखे।

T20 वर्ल्ड कप 2026: चैम्पियन टीम को पुरस्कार राशि कितनी? पूरी जानकारी

नई दिल्ली  टी20 विश्‍व कप 2026 का आधे से अधिक सफर हुआ पूरा  20 टीमों के बीच होने वाले इस टूर्नामेंट की मेजबानी भारत और श्रीलंका संयुक्‍त रूप से कर रहा है। विश्‍व कप का फाइनल 8 मार्च को खेला जाएगा। टूर्नामेंट में सभी टीम खिताब अपने नाम करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा देंगी। भारतीय टीम ने 2024 में खेले गए टी20 विश्‍व कप का खिताब अपने नाम किया था। ऐसे में टीम इंडिया की नजर ट्रॉफी का बचाव करने पर होगी। टूर्नामेंट के इतिहास में अब तक कोई भी टीम लगातार 2 बार विश्‍व कप नहीं जीती है। ऐसे में भारतीय कप्‍तान सूर्यकुमार यादव के पास इतिहास रचने का भी मौका है। फैंस के मन में उठ रहा सवाल विश्‍व कप की शुरुआत से पहले फैंस के मन में सवाल उठने लगा है कि आखिर जीतने वाली टीम को कितनी प्राइज मनी मिलेगी? तो आपको बता दें कि जीतने वाली टीम पर तो छप्‍परफाड़ पैसा बरसेगा। साथ ही हारने वाली टीम की भी चांदी होने वाली है। आइए जानते हैं कि विश्‍व कप की प्राइस मनी क्‍या है। 100 करोड़ से ज्‍यादा प्राइज मनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबकि, टी20 विश्‍व कप 2026 में प्राइज मनी करीब 120 करोड़ रुपये (13.5 मिलियन डॉलर्स) होगी। यह विजेता, उपविजेता, सेमीफाइनल में हारने वाली और विश्‍व कप में हिस्‍सा लेने वाली टीमों को मिलती है। 2024 का खिताब जीतने वाली भारतीय टीम को 20 करोड़ रुपये मिले थे। इस बार प्राइज मनी में इजाफा होगा। टी20 विश्‍व कप 2026 जीतने वाली टीम को 27.48 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। वहीं, फाइनल में हारने वाली टीम को 14.65 करोड़ मिल सकते हैं। इसके अलावा सेमीफाइनल में जगह बनाने वाली टीम को 7.24 करोड़ रुपये, 5 से 12 नंबर तक रहने वाली टीमों को 3.48 करोड़ रुपये और 13 से 20 नंबर तक आने वाली टीमों को 2.29 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।  

होली के बाद बड़ी सौगात: Modern Coach Factory (Raebareli) में तैयार 16 डिब्बों वाली वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल तेज

रायबरेली आधुनिक रेलडिब्बा कारखाना (आरेडिका) में बन रही वंदे भारत ट्रेन बनकर तैयार है, अब इसका ट्रायल किया जा रहा है। इसका पहला गति परीक्षण सफल रहा है। महाप्रबंधक ने स्वयं इंजन में बैठकर परीक्षण को परखा। आरेडिका अधिकारियों के अनुसार यह प्रक्रिया पूरी होने में अभी दो सप्ताह का समय लग सकता है। होली के पहले वंदे भारत के आरेडिका से निकलने की उम्मीद है। वंदे भारत ट्रेन के 16 डिब्बों की रैक को बनाने का काम आरेडिका को मिला था। पहले दौर में आरेडिका की अधिकारियों की टीम जानकारी जुटाने के लिए आइसीएफ चेन्नई गई थी। वहां से टीम के आने के बाद निर्माण का काम शुरू हो सका। अब वंदे भारत ट्रेन बनकर तैयार है। उसके ट्रायल की प्रक्रिया चल रही है। एक लघु ट्रायल रन में ट्रैक्शन, गति व ओवरहेड इक्विपमेंट से लिए गए करंट जैसे प्रमुख परीक्षण मानकों का अवलोकन किया गया। ट्रायल शेड से प्रारंभिक संचालन के दौरान रैक की गति को 10 किलोमीटर प्रति घंटा की निर्धारित गति पर परीक्षण किया गया। ब्रेक प्रतिक्रिया, पैसेंजर एनाउंसमेंट एवं पब्लिक इंफार्मेशन सिस्टम की कार्यप्रणाली व ट्रैक्शन के दौरान प्रणाली के व्यवहार का भी परीक्षण किया गया। महाप्रबंधक प्रशांत कुमार मिश्र ने कहा कि यह उपलब्धि एमसीएफ व उसके उद्योग सहयोगियों के बीच सुदृढ़ समन्वय व सहयोग का प्रतीक है जो वंदे भारत परियोजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। 12 फरवरी को आयोजित ट्रायल पूर्व निरीक्षण के दौरान मेसर्स सीमेंस के जर्मन अभियंता क्रिस्टोफ गोएट्ज, सैंड्रा स्पोंसेट व सेबास्टियन शोएसर, पदमाकर डीके, सैत करकृ ने तकनीकी कार्रवाई में सक्रिय सहभागिता की थी। उन्हाेंने बताया कि यह ट्रायल एमसीएफ की अत्याधुनिक, उच्च गति वाली ट्रेनसेट के निर्माण के लिए उसकी प्रतिबद्धता, नवाचार क्षमता व उत्कृष्टता के प्रति समर्पण को स्थापित करता है।