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न्यूक्लियर फ्यूजन का कमाल: आधा टन का चुंबक और अनलिमिटेड बिजली, सूरज जैसी शक्ति अब इंसानों के पास

नई दिल्ली न्यूजीलैंड की एक छोटी सी कंपनी ओपनस्टार टेक्नोलॉजीज ने न्यूक्लियर फ्यूजन की रेस में पूरी दुनिया को पीछे छोड़ दिया है. इस स्टार्टअप ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसे अब तक नामुमकिन माना जा रहा था. कंपनी ने आधे टन के भारी-भरकम चुंबक को हवा में तैराकर प्लाज्मा को सफलतापूर्वक कंट्रोल किया है. यह दुनिया में अपनी तरह का पहला कमर्शियल प्रयोग है. न्यूक्लियर फ्यूजन को मॉडर्न फिजिक्स का सबसे बड़ा लक्ष्य माना जाता है. अगर यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है, तो इंसानों को असीमित बिजली मिल सकेगी. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें न तो कार्बन उत्सर्जन होता है और न ही खतरनाक रेडियोएक्टिव कचरा निकलता है. हवा में तैरते चुंबक से कैसे पैदा होगी बिजली?     ओपनस्टार के फाउंडर रातु माताइरा ने इस मशीन के काम करने का तरीका समझाया है. उनकी कंपनी ‘लेविटेटेड डायपोल’ नाम की एक खास तकनीक पर काम कर रही है.     इसमें एक शक्तिशाली चुंबक को मैग्नेटिक फील्ड की मदद से हवा में लटकाया जाता है. इसी तैरते हुए चुंबक के चारों ओर प्लाज्मा को रोककर रखा जाता है.     अब तक पूरी इंडस्ट्री को लगता था कि ऐसी मशीन बनाना इंजीनियरिंग के हिसाब से संभव नहीं है. लेकिन न्यूजीलैंड के वैज्ञानिकों ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है.     उन्होंने ‘जूनियर’ नाम के प्रोटोटाइप से यह दिखा दिया कि यह तकनीक न सिर्फ काम करती है, बल्कि इसे बड़े स्तर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है. फ्यूजन और फिशन के बीच क्या अंतर है? आजकल के परमाणु रिएक्टर ‘फिशन’ तकनीक पर चलते हैं. इसमें एटम्स को तोड़ा जाता है, जिससे एनर्जी निकलती है. लेकिन इस प्रोसेस में बहुत सारा खतरनाक कचरा भी पैदा होता है. इसके उलट ‘फ्यूजन’ की प्रक्रिया तारों और सूरज के अंदर होती है. इसमें दो एटम्स के केंद्र को आपस में जोड़ा जाता है. इस प्रोसेस से फिशन के मुकाबले कई गुना ज्यादा ऊर्जा निकलती है. सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि इस प्रोसेस को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा बिजली की जरूरत पड़ती थी. ओपनस्टार की नई खोज ने इस मुश्किल को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. अब कम ऊर्जा खर्च करके ज्यादा बिजली बनाने का रास्ता साफ हो गया है. क्या 2030 तक घर-घर पहुंचेगी परमाणु बिजली? ओपनस्टार की सफलता के बाद अब अगले चरण की तैयारी शुरू हो गई है. कंपनी का अगला प्रोटोटाइप ‘ताही’ होगा, जिसकी मैग्नेटिक फील्ड मौजूदा मशीन से चार गुना ज्यादा ताकतवर होगी. न्यूजीलैंड की सरकार ने भी इस प्रोजेक्ट की अहमियत को समझते हुए 3.5 करोड़ डॉलर की मदद देने का वादा किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह हाई-एनर्जी फ्लक्स-पंप तकनीक आने वाले समय में रिसर्च की दिशा बदल देगी. कंपनी का लक्ष्य है कि 2030 के दशक तक ऐसे कमर्शियल रिएक्टर तैयार कर लिए जाएं, जो शहरों को बिजली सप्लाई कर सकें. यह सफलता कोल और गैस जैसे पुराने ईंधन पर दुनिया की निर्भरता को पूरी तरह खत्म कर सकती है.

आईपीएल 2026 का शेड्यूल जारी: 28 मार्च से शुरुआत, 31 मई को फाइनल

मुंबई आईपीएल ने पिछली नीलामी से एक दिन पहले, 15 दिसंबर 2025 को फ्रेंचाइजी को बताया था कि 2026 एडिशन 26 मार्च से शुरू होगा, लेकिन ईएसपीएन क्रिकइंफो को पता चला है कि आईपीएल ने अंदरूनी तौर पर शुरू होने की तारीख बदलकर 28 मार्च करने और फाइनल 31 मई को कराने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि आईपीएल गवर्निंग काउंसिल अगले हफ्ते शेड्यूल जारी करने के प्लान को फाइनल करने के लिए मीटिंग करेगी, जिसमें देरी हुई है क्योंकि असम, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा अभी तक नहीं हुई है। कोलकाता (पश्चिम बंगाल में) और चेन्नई (तमिलनाडु में) क्रमशः कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) और चेन्नई सुपर किंग्स (सीएसके) के होम बेस हैं, जबकि असम की राजधानी गुवाहाटी राजस्थान रॉयल्स (आरआर) का दूसरा वेन्यू है। जब से आईपीएल 2008 में शुरू हुआ है, जब देश में आम चुनाव हुए हैं – 2009, 2014, 2019 और 2024 में – या किसी राज्य में विधानसभा चुनाव हुए हैं, शेड्यूल दो हिस्सों में अनाउंस किया गया है। उम्मीद है कि जीसी यह तय करेगा कि इस बार भी वही प्लान रखा जाए, या पहले तीन राज्यों के लिए चुनाव की तारीखों की घोषणा करने के लिए इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया का इंतज़ार किया जाए। आईपीएल गवर्निंग काउंसिल इस बात पर भी चर्चा कर सकती है कि टूर्नामेंट का ओपनिंग मैच कहाँ खेला जाएगा, क्योंकि इसमें डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) शामिल होगी। पिछले जून में बेंगलुरु के एम चिन्नास्वामी स्टेडियम में आरसीबी के जीत के जश्न के दौरान भगदड़ मचने के बाद, जिसमें 11 फैंस की मौत हो गई थी, आरसीबी कर्नाटक स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के साथ इस बात पर चर्चा कर रहा है कि टीम के सात होम मैच उसी जगह पर खेले जाएंगे या कहीं और शिफ्ट किए जाएंगे। आरसीबी ने नवी मुंबई, रायपुर और पुणे सहित कुछ दूसरे वेन्यू शॉर्टलिस्ट किए थे।  

WhatsApp अब नहीं रहेगा फ्री! इन 3 फीचर्स के लिए लगेंगे रुपये

 नई दिल्ली  WhatsApp पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल लेकर आ रहा है और अब इसको लेकर ऐप में एक नोटिफिकेशन भी नजर आने लगा है. मैसेजिंग ऐप वॉट्सऐप के अपकमिंग फीचर को ट्रैक करने वाली वेबसाइट WaBetainfo ने शेयर की है. पेड सब्सक्रिप्शन एक ऑप्शनल फीचर होगा |  अब मैसेजिंग ऐप ने इसको लेकर एक नोटिफिकेशन्स जारी करना शुरू कर दिया है, जिसमें पेड सब्सक्रिप्शन की उपलब्धता को दिखाया है. प्रीमियम सब्सक्रिप्शन प्लान के तहत यूजर्स को नए फीचर्स एक्सेस मिलेंगे |  प्ले स्टोर पर आया नया अपडेट  WaBetainfo के मुताबिक, प्ले स्टोर पर WhatsApp beta के लेटेस्ट वर्जन Android 2.26.9.6 में नजर फीचर स्पॉट किया गया है.यूजर्स को न्यू प्लान के लिए waitlist को जॉइन कर सकेंगे |  WaBetainfo का पोस्ट  रिपोर्ट्स में न्यू फीचर को लेकर स्क्रीनशॉट्स शेयर किया गया है,जिसमें न्यू अपडेट को लेकर दिखाया गया है. स्क्रीनशॉट्स में बताया है कि प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के तहत यूजर्स नए फीचर्स भी मिलेंगे |  प्रीमियम सब्सक्रिप्शन के तहत मिलने वाले नए फीचर्स      एक्सक्लूसिव स्टिकर मिलेंगे.     एक्स्ट्रा पिन चैट करने को मिलेगा.      शेड्यूल मैसेज का भी फीचर इसमें शामिल होगा.  वेटलिस्ट देने के पीछे का मकसद WhatsApp प्लस के शुरुआती स्टेज में शामिल यूजर्स वेटलिस्ट के लिए साइन अप कर सकते हैं. वेटलिस्ट में साइन-अप करने का यह मतलब बिलकुल भी नहीं है कि जब WhatsApp का सब्सक्रिप्शन प्लान अवेलेबल होगा तो उन्हें अपने आप उसमें शामिल होना पड़ेगा |   WhatsApp यूजर्स को बताना जरूरी  मैसेजिंग ऐप ने न्यू फीचर को सिर्फ इसलिए तैयार किया है ताकि WhatsApp यूजर्स को पता चल सके कि उनका अकाउंट प्लान के लिए एलिजिबल है. प्लान एक बार उपलब्ध होने के बाद सब्सक्रिप्सन के लिए अलग से प्रोसेस कंप्लीट करना होगा |   

घर के मंदिर में 5 मूर्तियां और सफाई रखने से आती है सकारात्मक ऊर्जा

हिंदू धर्म में रोजाना पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व माना गया है। लोग मंदिर जाकर मत्था टेकते हैं और अपने घर के मंदिर में भी श्रद्धा भाव से पूजा करते हैं। घर का ये पवित्र कोना पॉजिटिव एनर्जी और मानसिक शांति का केंद्र माना जाता है। ऐसे में इसे हमेशा साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना चाहिए। मंदिर में टूटे-फूटे सामान या बेकार की चीजें नहीं रखनी चाहिए। पूजा स्थान से जुड़े कुछ नियम भी होते हैं जिनका पालन करना जरूरी होता है। अक्सर लोग एक बात को लेकर असमंजस में रहते हैं कि घर के मंदिर में कितनी मूर्तियां होनी चाहिए? आज जानेंगे इस बारे में विस्तार से। साथ ही जानेंगे कि आखिर कौन सी मूर्तियों को हमें घर के पूजा स्थल पर नहीं रखना चाहिए? मूर्तियों को लेकर सही तरीका क्या होना चाहिए। पूजा घर में रखें सिर्फ इतनी मूर्तियां वास्तुशास्त्र और हिंदू धर्म मान्यता के अनुसार घर के मंदिर में सादगी रहें तो ये अच्छा माना जाता है। वास्तु शास्त्र के नियम के हिसाब से घर के मंदिर में बहुत ज्यादा मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। अगर सीमित संख्या में यहां मूर्तियां रखी जाए तो मन एकाग्र रहता है और ध्यान लगाकर पूजा करना भी आसान हो जाता है। आम तौर पर यहां पर 2 से 5 मूर्तियां रखना ही सही होता है। इससे मंदिर में सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है और ऐसे में आसानी से साफ-सफाई भी की जा सकती है। पूजा घर में गलती से भी ना रखें ये मूर्तियां घर के मंदिर में शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां रखना ही शुभ माना जाता है। मंदिर कुछ देवताओं के उग्र या क्रोधित रूप घर में रखने की सलाह नहीं दी जाती है। घर के मंदिर में नटराज, शनि देव या फिर राहु-केतु उग्र या फिर क्रोधित रूप वाली मूर्तियां, मां काली की मूर्ति या फिर काल भैरव के उग्र स्वरूप को मंदिर में नहीं रखना चाहिए। ऐसी मूर्तियां शक्ति और तप का प्रतीक मानी जाती है। ऐसे में इन्हें घर के मंदिर में रखना सही नहीं होता है। घर में आम तौर पर शांत और सौम्य रूप वाली मूर्तियां ही रखनी चाहिए। इन मूर्तियों की एनर्जी से घर का वातावरण शांति रहता है और घर में पॉजिटिविटी बनी रहती है। रखें इन बातों का ध्यान घर के मंदिर से जुड़े कुछ और भी नियम हैं, जिनका ध्यान जरूर रखना चाहिए। सबसे पहले तो ये सुनिश्चित कर लें कि मंदिर घर के ईशान कोण में ही हो। बता दें कि वास्तु शास्त्र में ईशान कोण उत्तर-पूर्व दिशा को कहा जाता है। इस दिशा को एनर्जी का सबसे बड़ा सोर्स माना जाता है। ऐसे में यहां पर मंदिर बनाना फलदायी होता है। साथ ही ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिशा में सभी देवी-देवता का वास होता है। इसके अलावा ये जरूर देख लें कि मंदिर में मौजूद मूर्तियों के बीच कम से कम 1-2 इंच की दूरी जरूर हो। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर कभी भी बेडरूम या फिर वॉशरूम के आसपास ना हो। नियम के अनुसार घर का मंदिर सीढ़ियों के ठीक नीचे भी नहीं होना चाहिए क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है। डिस्क्लेमर- इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए वास्तुशास्त्र विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

AI-समिट 2026 में नया आविष्कार, 30 मिनट में कैंसर डिटेक्शन संभव

नई दिल्ली हेल्थ सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का असर तेजी से दिख रहा है. दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे एआई समिट में एक खास डिवाइस लोगों का ध्यान खींच रहा है. दावा किया गया है कि यह नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिवाइस पेट से जुड़ी बीमारियों और खासतौर पर कैंसर का पता आसानी से और समय रहते लगा सकता है, जिससे मरीज को बीमारी के गंभीर होने से पहले इलाज मिल सकेगा. विप्रो की चीफ टेक्निकल ऑफिसर संध्या अरुण के मुताबिक, यह डिवाइस शुरुआती स्टेज में ही कैंसर का पता लगा लेता है. इससे मरीज को समय पर इलाज मिल सकता है और कई मामलों में सर्जरी की जरूरत ही नहीं पड़ेगी.उनका कहना है कि जल्दी पहचान ही सबसे बड़ा फायदा है, क्योंकि बीमारी जितनी जल्दी पकड़ में आ जाएगी, इलाज उतना आसान और असरदार होगा. आइए व‍िस्‍तार से जानते हैं इस ड‍िवाइस के बारे में… कैसे काम करती है मशीन? यह एआई आर्म रोबोटिक एमआरआई मशीन सबसे पहले मरीज के पेट का स्कैन करती है. स्कैन का रिजल्ट रियल-टाइम स्क्रीन पर दिखाई देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत समझ सकते हैं कि अंदर क्या समस्या है. कैंसर का कैसे लगाएगी पता स्कैन में अगर ट्यूमर या कैंसर से जुड़ी कोई असामान्यता दिखती है, तो एआई तुरंत उसका विश्लेषण करता है और बताता है कि तस्वीर में दिख रही चीज क्या है. कंपनी का कहना है कि 30–45 मिनट में पूरा स्कैन और रिपोर्ट तैयार हो जाती है. मशीन में क्या है, क्या सिर्फ पेट होगा स्कैन? विप्रो की ओर से बताया गया कि इस एआई मशीन में चार अलग-अलग आर्म लगी हुई हैं और इनसे पूरा शरीर स्कैन हो सकेगा. एक आर्म मिड-बॉडी स्कैन के लिए है और बाकी अलग-अलग हिस्सों के लिए हैं. इससे पूरे शरीर की जांच आसानी से की जा सकती है. और क्या फायदे हैं इस मशीन के दावा किया गया कि इस मशीन से समय और लागत दोनों की बचत होगी. साथ ही यह भारत में बनी पहली AI-संचालित MRI मशीन है, जो स्कैन समय में करीब 37 फीसदी की कमी लाती है. 75 फीसदी तक हीलियम की खपत घटाती है. यानि जांच होगी तेज़, सटीक और सस्ती होगी और मरीज को जल्दी इलाज मिल सकेगा. बता दें क‍ि नई AI तकनीक से मेडिकल जांच का तरीका लगातार बदल रहा है और भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का पता लगाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है.

Census 2027: डिजिटल होगी जनगणना, 800 लोगों की जिम्मेदारी एक कर्मचारी पर

भोपाल Census 2027: जिला जनगणना समन्वय समिति की दो दिवसीय ट्रेनिंग और बैठक गुरुवार को खत्म हो गई। बैठक में जनगणना 2027 को पूरी तरह डिजिटल मोड में करने से जुड़े बिंदुओं पर चर्चा हुई। स्पष्ट किया गया कि एक कर्मचारी 800 नागरिकों की डिटेल मोबाइल ऐप से जमा कराएगा। लोग खुद भी अपने परिवार की डिटेल भर सकेंगे। 16 अप्रेल से इसके लिए मोबाइल ऐप समेत विभिन्न माध्यमों से डिटेल जमा करने का अवसर मिलेगा। एक मई से हाउसहोल्ड सर्वे शुरू होगा। जनगणना का काम फरवरी 2027 में होगा। बैठक में अपर कलेक्टर प्रकाश नायक, पीसी शाक्य, जिला जनगणना अधिकारी भुवन गुह्रश्वता, एसडीएम, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर सहित समिति के सदस्यगण एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। जनगणना कार्य निदेशालय संयुक्त निदेशक नामित यादव, सहायक निदेशक ऐन्सी रेजी ने प्रशिक्षण दिया। 10 लाख घरों की होगी मैपिंग 01 मई से शुरू हो रही जनगणना के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी पूरी कर ली है। इस बार नागरिक डिजिटल तरीके से अपनी जानकारी सरकार तक पहुंचा सकेंगे। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बताया, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जानकारी देने नागरिकों को इंडियन सेंसस डाटा कलेक्शन पोर्टल पर लॉग-इन करना होगा।   यहां नागरिकों से 33 तरह के प्रश्नों का जवाब मांगा जाएगा। यही जवाब मांगने 'डोर टू डोर' सर्वे भी होगा। जनगणना के लिए 8000 कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम शुरू कर दिया गया है। अभियान के तहत 10 लाख घरों की मैपिंग करने का टारगेट तय किया गया है। घरों की जियो टैगिंग से मैपिंग करने के बाद कर्मियों को रवाना किया जाएगा।  

यूपी चुनाव 2027 की जंग शुरू, BJP vs सपा—किसका प्लान पड़ेगा भारी?

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब सरगर्मी बढ़ने लगी है। भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है। इसके तहत 15 दलित महापुरुषों का कैलेंडर तैयार कराया गया है। इनकी जयंती-पूण्यतिथि के बहाने इस समाज के लोगों से सालों भर मुलाकात का कार्यक्रम तैयार किया गया है। इनमें कांशीराम से लेकर संत रविदास तक शामिल हैं। पहले ही भाजपा ने मायावती पर सीधे हमले से परहेज किया है। पार्टी किसी भी दलित महापुरुष और नेता से सीधे उलझती नहीं दिख रही है। यह संदेश जमीन तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। दरअसल, अखिलेश यादव की पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए पॉलिटिक्स की काट के तौर पर रणनीति को तैयार किया जा रहा है। योगी आदित्यनाथ सरकार भी समाज के हर वर्ग तक सरकार की योजनाओं के पहुंचाए जाने की जानकारी पहुंचाने की रणनीति में जुटी है। दलित वोट बैंक है जरूरी यूपी की राजनीति में सत्ता की सीढ़ी चढ़ने के लिए दलित वोट बैंक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ अखिलेश यादव यादव, गैर यादव पिछड़ा यानी पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए प्रदेश की सत्ता में एक बार फिर वापसी की कोशिशों में जुटे हुए हैं। दूसरी तरफ, भारतीय जनता पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है। इसको लेकर पार्टी की ओर से रणनीति को तैयार किया जा रहा है। इसमें दलित वोट बैंक को अहम माना जा रहा है।हाल के वर्षों में दलित वोट बैंक में बिखराव होता दिखा है। वर्ष 2014 से 2019 तक के चुनावों में प्रदेश में मोदी लहर और भाजपा के उफान के बाद भी बहुजन समाज पार्टी दलित वोट बैंक पर कब्जा जमाती दिखी थी। करीब 20 फीसदी के वोट बैंक पर मायावती का कब्जा दिखता रहा था। हालांकि, यूपी चुनाव 2022 के बाद से दलित वोट बैंक छिटकना शुरू हुआ। लोकसभा चुनाव 2024 में मायावती का वोट प्रतिशत प्रदेश में 10 फीसदी के आसपास सिमटता दिखा है। यूपी चुनाव 2022 में योगी-मोदी सरकार की नीतियों, कोरोना काल में अन्न योजना के प्रभाव ने दलित वोट बैंक के एक बड़े हिस्से को भाजपा से जोड़ा। ऐसे में सॉलिड गैर-यादव ओबीसी वोट बैंक में भटकाव से अधिक असर पार्टी को नहीं हुआ। हालांकि, लोकसभा चुनाव में संविधान बदलने के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर और पीडीए पॉलिटिक्स के जरिए बसपा से छिटकने वाले दलित वोट के एक बड़े हिस्से को पार्टी के साथ जोड़ने में अखिलेश यादव कामयाब रहे। 2027 के लिए डी पॉलिटिक्स यूपी चुनाव 2027 के लिए भाजपा ने अब दलित पॉलिटिक्स पर जोर देना शुरू कर दिया है। लोकसभा चुनाव में छिटके दलित वोटरों को साधने की रणनीति तैयार की जा रही है। भाजपा ने इसके लिए नए सिरे से सोशल इंजीनियरिंग शुरू कर दी है। पार्टी की रणनीति के केंद्र में दलित महापुरुष, उनकी विरासत और समाज के लोगों से लगातार संवाद है। इस संवाद के जरिए समाज के निचले हिस्से तक पार्टी अपने संदेश और कार्यों को पहुंचाने की तैयारी में है। बीजेपी ने इसके लिए कांशीराम, संत रविदास, संत गाडगे, डॉ. भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, उदा देवी, झलकारी बाई, वीरा पासी, लखन पासी, रमाबाई अंबेडकर और अहिल्याबाई होल्कर जैसी करीब 15 दलित और वंचित समाज के महापुरुषों का एक वार्षिक कैलेंडर तैयार किया है। इन महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर प्रदेश भर में कार्यक्रमों की श्रृंखला तैयार की गई है। लगातार संपर्क पर जोर बीजेपी नेताओं का कहना है कि समाज के लोगों से लगातार संपर्क पर जोर दिया जा रहा है। अगर हमारे कार्यकर्ता समाज के लोगों से मिलेंगे। उनकी सुख-दुख सुनेंगे। उसको लेकर काम करेंगे तो निश्चित तौर पर स्थिति को फिर से बहाल किया जा सकेगा। भाजपा इन वोटरों के दरवाजे पर बार- बार दस्तक देकर इन्हें फिर से भाजपा के पाले में लाने की कवायद में जुट गई है। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा 2017 के 62 सीटों के आंकड़े से घटकर 33 पर आ गई थी। रिजर्व सीटों पर पार्टी का प्रदर्शन खराब हुआ। इसके बाद रणनीति में बदलाव होता दिख रहा है।

सड़क दुर्घटनाओं में पीएम राहत योजना से मिलेगी डेढ़ लाख तक की मुफ्त चिकित्सा सुविधा, जबलपुर के 92 अस्पताल होंगे शामिल

जबलपुर  सड़क दुर्घटना में घायल लोगों को अब सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत और मुफ्त इलाज मिलेगा. एक्सीडेंट के बाद तुरंत अस्पताल पहुंचने पर शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार वहन करेगी. यह खर्च प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दिया जाएगा. इलाज सरकार के द्वारा सूचीबद्ध अस्पतालों में ही होगा. जबलपुर में 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया |  मरीज की जान बचाना पहली प्राथमिकता एक्सीडेंट होने के बाद शुरुआती समय किसी भी मरीज को बचाने में सबसे महत्वपूर्ण होता है. यदि एक्सीडेंट के तुरंत बाद इलाज शुरू हो जाए तो मरीज को बचाया जा सकता है. लेकिन ऐसा नहीं हो पता क्योंकि निजी अस्पताल इस बात से डरते हैं कि यदि उन्होंने इलाज शुरू कर दिया तो इसका बिल कौन देगा. कई बार मरीज की कोई जानकारी नहीं होती तो वहीं दूसरी समस्या पुलिस की ओर से होती है कि जब तक पुलिस जांच ना कर ले तब तक इलाज शुरू नहीं हो पाता. लेकिन अब ऐसा नहीं होगा |  एक्सीडेंट में घायल व्यक्तियों के लिए पीएम राहत योजना जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि "इन्हीं समस्याओं को खत्म करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पीएम राहत योजना शुरू की गई है. इसके तहत एक्सीडेंट के तुरंत बाद जब एंबुलेंस से कोई मरीज किसी अस्पताल पहुंचेगा तो इसी शुरुआती गोल्डन ऑवर में अस्पताल को मरीज को इलाज देना होगा. एक्सीडेंट के मामले में शुरुआती डेढ़ लाख का खर्चा सरकार उठाएगी. इलाज कैशलेस होगा |  जबलपुर के 92 अस्पताल शामिल इस योजना में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों को भी शामिल किया गया है. जबलपुर में ऐसे 92 अस्पतालों को इम्पैनल किया गया है, जहां एक्सीडेंट के तुरंत बाद घायल का इलाज शुरू हो जाएगा. इसमें किसी को भी इस बात की चिंता नहीं करनी होगी कि इसका पैसा कौन देगा. कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "भले ही घायल आयुष्मान कार्ड धारी है या नहीं है, इसका भी इस योजना पर कोई असर नहीं पड़ेगा और यह पैसा पीएम राहत के माध्यम से भुगतान करवाया जाएगा |  पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी ताकि पुलिस को भी इस मामले की जानकारी हो और यदि पुलिस को कोई कार्रवाई करनी है तो वह भी साथ में होती रहे लेकिन किसी भी स्थिति में घायल का इलाज नहीं रुकेगा |  कलेक्टर राघवेंद्र सिंह का कहना है कि "रोड एक्सीडेंट के मामले में वाहनों का इंश्योरेंस होता है और शासन जो पैसा खर्च करेगा वह पैसा इंश्योरेंस के माध्यम से वसूला जाएगा. वहीं कुछ ऐसे वाहन जिनका बीमा नहीं होता है और यदि वे एक्सीडेंट करते हैं तो इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी लेकिन इसकी वसूली का काम शासन का होगा |  घायलों के लिए अच्छा कदम जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने बताया कि "यह बहुत ही अच्छा कदम है आम आदमी को यदि इसकी जानकारी होगी तो बहुत सारे घायलों को बचाया जा सकता है. क्योंकि एक्सीडेंट के मामले में अक्सर लोग मरीजों की मदद करने में डरते हैं कई बार पुलिस परेशान करती है तो कई बार लोगों के पास मदद करने लायक पैसा नहीं होता यदि यह दोनों ही सहूलियत हो जाए तो सड़क पर मरने वालों की संख्या घट सकती है |     

एक्सीडेंट पीड़ितों के लिए बड़ी राहत, ‘PM RAHAT’ में 0 रुपये का बिल और 1.5 लाख तक कवर

नई दिल्ली PM RAHAT Scheme: सड़क हादसे भारत में हर साल हजारों परिवारों की जिंदगी बदल देते हैं. कई बार हादसा जानलेवा इसलिए बन जाता है, क्योंकि घायल को समय पर अस्पताल नहीं मिल पाता या इलाज से पहले पैसों की बात आ जाती है. इसी बड़ी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने PM RAHAT योजना को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद साफ है, सड़क हादसे के शिकार लोगों को बिना किसी देरी और बिना पैसे की चिंता के सही और उचित समय पर इलाज मिल सके.  क्या है PM RAHAT योजना PM RAHAT यानी रोड एक्सीडेंट विक्टिम हॉस्पिटलाइजेशन एंड एश्योर्ड ट्रीटमेंट स्कीम. इसके तहत सड़क हादसे में घायल व्यक्ति को दुर्घटना की तारीख से 7 दिन तक कैशलेस इलाज (Cashless Treatment) की सुविधा मिलेगी. इलाज पर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का खर्च सरकार की तरफ से कवर किया जाएगा. मरीज की जेब से एक रुपया भी नहीं लिया जाएगा. स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि, अगर घायल को पहले एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो सड़क हादसों में होने वाली करीब आधी मौतों पर लगाम लगाई जा सकती हैं. इस समय को गोल्डन आवर कहा जाता है. अक्सर अस्पताल में भर्ती होने में देरी इसलिए होती है, क्योंकि पैसे और पेमेंट को लेकर असमंजस रहता है. PM RAHAT योजना इसी समस्या को खत्म करने की कोशिश है. योजना में एक और बड़ी दिक्कत को माना गया है. हादसे के बाद आसपास मौजूद लोग कानूनी झंझट के डर से मदद करने से कतराते हैं. PM RAHAT में ऐसे मददगारों को राहवीर या गुड समैरिटन कहा गया है. इसका मतलब है कि जो व्यक्ति घायल की मदद करेगा, उसे कानूनी परेशानियों से डरने की जरूरत नहीं होगी. न उसे किसी कानूनी पचड़े में पड़ना होगा और न ही उसके जेब से पैसे खर्च होंगे. 112 पर कॉल, सीधे मदद हादसे के समय पीड़ित खुद, कोई राहगीर या मौके पर मौजूद कोई भी व्यक्ति 112 नंबर पर कॉल कर सकता है. इस कॉल के जरिए नजदीकी तय अस्पताल की जानकारी मिलेगी और एंबुलेंस बुलाई जा सकेगी. यह पूरा सिस्टम इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम से जुड़ा है, जिससे पुलिस, एंबुलेंस और अस्पताल आपस में तालमेल से काम कर सकें. योजना के तहत सभी तरह की सड़कों पर हादसे में घायल लोग कवर होंगे. चाहे वो किसी भी शहर की कोई भी सड़क होग. अगर चोट गंभीर नहीं है, तो 24 घंटे तक का स्टेबलाइजेशन इलाज मिलेगा. अगर जान को खतरा है, तो यह समय 48 घंटे तक बढ़ जाएगा. दोनों ही हालात में 7 दिन तक का पूरा इलाज कवर रहेगा. पुलिस की पुष्टि तय समय सीमा में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए जरूरी होगी. डिजिटल सिस्टम से होगा पूरा काम PM RAHAT योजना दो मौजूदा सरकारी डिजिटल सिस्टम पर बेस्ड है. एक सिस्टम हादसे की पूरी जानकारी दर्ज करता है और दूसरा इलाज और भुगतान से जुड़ा काम संभालता है. पहला है इलेक्ट्रॉनिक डिटेल्ड एक्सीडेंट रिपोर्ट यानी eDAR, जिसे केंद्रीय सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ऑपरेट करता है और दूसरा सिस्टम है ट्रांजैक्शन मैनेजमेंट सिस्टम TMS 2.0, जिसकी जिम्मेदारी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी के पास है. इन दोनों सिस्टम का मकसद यह है कि एक्सीडेंट की सूचना मिलते ही पूरी जानकारी एक ही लाइन में आगे बढ़े.  हादसे की रिपोर्ट, अस्पताल में भर्ती, इलाज, क्लेम डालना और फिर अस्पताल को पेमेंट, सब कुछ इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए किया जाए, ताकि इलाज में देरी न हो और किसी को बार बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. अस्पतालों को इलाज का पैसा मोटर व्हीकल एक्सीडेंट फंड से मिलेगा. अगर हादसे में शामिल वाहन का बीमा है, तो पेमेंट बीमा कंपनियों के फंड से होगा. हिट एंड रन या बिना बीमा वाले मामलों में केंद्र सरकार बजट से पैसा देगी. क्लेम मंजूर होने के बाद 10 दिन के भीतर अस्पताल को भुगतान करने का वादा किया गया है. अगर योजना से जुड़ी कोई शिकायत होती है, तो उसका निपटारा जिला सड़क सुरक्षा समिति के तहत किया जाएगा. इसकी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर या जिला मजिस्ट्रेट के स्तर पर होगी. इससे लोगों को अलग से किसी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे. PM RAHAT योजना में परिवहन, स्वास्थ्य, बीमा और पुलिस विभाग को एक साथ लाया गया है. इसका असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अस्पताल कितनी संख्या में जुड़ते हैं, 112 नंबर कितनी तेजी से काम करता है और पुलिस के कन्फर्मेशन में इलाज में देरी तो नहीं होती. जिला स्तर पर ये प्रक्रिया कैसे आगे बढ़ती है और इसे कैसे लागू किया जाता है. आने वाले समय में साफ हो जाएगा कि यह योजना सड़क हादसों में जान बचाने में कितनी कारगर साबित होती है.

राज्यसभा चुनाव की तैयारी तेज: महाराष्ट्र में 7 सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग, जानिए पूरा शेड्यूल

 मुंबई महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है, क्योंकि राज्य से सात राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी गई है। सदस्यों के चुनाव के लिए 16 मार्च को होगा। इस बात की जानकारी रिटर्निंग ऑफिसर विलास अठवाले ने दी। उन्होंने बताया कि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 5 मार्च है। इसके बाद 6 मार्च को नामांकनों की जांच (स्क्रूटनी) होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकते हैं। बता दें कि महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य इस चुनाव में मतदान करेंगे। राज्य से सात राज्यसभा सांसदों की अवधि अप्रैल में समाप्त हो रही है, जिसमें एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी शामिल हैं। अभी तक पवार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वे पुनः उम्मीदवार होंगे या नहीं। ऐसे में यदि आवश्यकता हुई, तो 16 मार्च को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक विधान भवन में मतदान होगा और उसके बाद मतगणना की जाएगी। राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है? राज्यसभा के सदस्य का चुनाव उस राज्य की विधानसभा के चुने हुए विधायक करते हैं, जिस राज्य से वह उम्मीदवार है। राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा और विधानसभा चुनाव से काफी अलग है, क्योंकि इस सदन के लिए मतदान सीधे जनता नहीं करती, बल्कि जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि करते हैं। राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल छह साल का होता है। राज्यसभा चुनावों के नतीजों के लिए एक फॉर्मूला भी तय किया गया है। जीतने के लिए कितने वोट की जरूरत? गौरतलब है कि महाराष्ट्र के फॉर्मूला के हिसाब से यहां किसी उम्मीदवार को जिताने के लिए कम से कम 37 विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के मुताबिक सत्ताधारी गठबंधन सात में छह सीटों  पर आसानी से जीत दर्ज कर सकता है। विपक्ष एकजुट नहीं होता तो सातवें उम्मीदवार के लिए मुकाबला रोचक हो सकता है।   राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन में मिलकर काम करने का संकल्प लिया भारत निर्वाचन आयोग और राज्य चुनाव आयोगों का राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन मंगलवार 24 फरवरी 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में संपन्न हुआ। यह सम्मेलन 27 वर्षों के बाद आयोजित किया गया था और इसमें 30 राज्यों के राज्य चुनाव आयोगों ने भाग लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन में चुनाव आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी भी उपस्थित रहे। सम्मेलन में राज्य चुनाव आयुक्तों ने इस आयोजन की सराहना की और इसे सफल बताया। सभी ने हर साल ऐसे राष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन आयोजित करने का संकल्प लिया। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में सभी ने राष्ट्रीय घोषणा 2026 को अपनाया। घोषणा में जोर दिया गया कि शुद्ध मतदाता सूची तैयार करना लोकतंत्र की मजबूत नींव है और चुनावों का पारदर्शी तथा सुचारू संचालन लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाता है।