samacharsecretary.com

तिरुपति में फार्मा कंपनी के बॉयलर में जोरदार धमाका, 5 कर्मचारियों की मौत; 10 गंभीर घायल

तिरुपति  आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले में एक प्राइवेट फ़ार्मास्युटिकल कंपनी में बॉयलर फटने से बड़ा हादसा हो गया है। तिरुपति ज़िले के सत्यवेदु मंडल इलाके में श्री सिटी स्थित एक प्राइवेट फार्मास्युटिकल कंपनी में बॉयलर फटने से 5 कर्मचारियों की मौत हो गई और 10 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। श्री सिटी स्थित TIL हेल्थकेयर फ़ार्मास्युटिकल कंपनी में हुए इस धमाके से अफ़रा-तफ़री मच गई, जिसके बाद बचाव और इमरजेंसी टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। घायल कर्मचारियों को इलाज के लिए ले जाया गया। अधिकारियों ने अभी तक मृतकों की पहचान उजागर नहीं की है और न ही हादसे के बारे में कोई विस्तृत जानकारी दी है। बचाव कार्य और घायलों की चिकित्सीय जांच पूरी होने के बाद ही हताहतों की अंतिम संख्या की पुष्टि होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने कहा कि वे इस बात की जांच करेंगे कि क्या यह हादसा किसी तकनीकी खराबी, सुरक्षा प्रणालियों की विफलता, कामकाज में किसी चूक या किसी अन्य कारण से हुआ है।  मंत्री ने जताया शोक आंध्र प्रदेश के शिक्षा और IT मंत्री नारा लोकेश ने इस हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। लोकेश ने अधिकारियों से कहा कि वे यह सुनिश्चित करें कि घायल कर्मचारियों को बेहतर से बेहतर इलाज मिले। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार मृतकों के परिवारों के साथ खड़ी रहेगी और उन्हें हर संभव मदद देगी।  तिरुपति के सांसद ने हादसे की जांच की मांग की तिरुपति के सांसद मड्डिला गुरुमूर्ति ने भी इस धमाके पर दुख जताया। उन्होंने मारे गए कर्मचारियों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और अधिकारियों से बचाव और राहत कार्यों में तेज़ी लाने को कहा। गुरुमूर्ति ने हादसे की वजह की गहन जांच की भी मांग की। सांसद ने कहा कि घायलों को बेहतर इलाज मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी से पता चला है कि इस हादसे में कई मज़दूरों की मौत हुई है, जिससे उन्हें गहरा सदमा लगा है। सांसद डॉ. मड्डिला गुरुमूर्ति ने सुझाव दिया कि हादसे के कारणों की अच्छी तरह से जांच की जाए और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जाएं कि इंडस्ट्री में मज़दूरों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन हो। उन्होंने सरकार से अपील की कि प्रभावित परिवारों को तुरंत ज़रूरी मदद दी जाए। इससे पहले इसी साल अप्रैल में छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर फटने से 20 मजदूरों की मौत हो गई थी। अधिकारी ने मृतकों की पहचान जारी नहीं की एक अधिकारी के मुताबिक, बॉयलर फटने की सही वजह अभी पता नहीं चली है। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि हादसा तकनीकी खराबी, सुरक्षा व्यवस्था में चूक, संचालन संबंधी लापरवाही या किसी अन्य कारण से हुआ। अधिकारियों ने अभी सभी मृतकों की पहचान और हादसे की पूरी जानकारी जारी नहीं की है। बचाव अभियान और घायलों की मेडिकल जांच पूरी होने के बाद मृतकों और घायलों की संख्या की पुष्टि होने की उम्मीद है। राज्य में यह पिछले एक साल में हुआ एक और बड़ा औद्योगिक हादसा है। इसी साल जून में विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में पिघला हुआ स्टील ले जा रहा लैडल टूट गया था। इसके बाद आग में 8 कर्मचारियों की मौत हुई थी। बॉयलर फटने के संभावित कारण बॉयलर हादसे के पीछे कई तकनीकी कारण हो सकते हैं। सिर्फ पुराने बॉयलर या प्रेशर गेज को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता।     अत्यधिक दबाव: प्रेशर गेज या सेफ्टी वाल्व खराब होने पर दबाव बढ़ सकता है और बॉयलर फट सकता है।     पानी का स्तर कम होना: इससे बॉयलर ज्यादा गर्म होकर उसकी धातु कमजोर हो सकती है।     पुराना या खराब रखरखाव: जंग, दरार और स्केल जमने से बॉयलर की क्षमता प्रभावित हो सकती है।     मानवीय गलती: गलत वाल्व संचालन, खराब प्रशिक्षण या सुरक्षा नियमों का पालन न करना भी हादसे की वजह बन सकता है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ा उछाल, नायरा ने बढ़ाए दाम; जानें नया रेट

मुंबई  ग्लोबल टेंशन के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने लगे हैं। भारत की सबसे बड़ी निजी ईंधन खुदरा विक्रेता नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दामों में पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल में तीन रुपये प्रति लीटर की तत्काल प्रभाव से बढ़ोतरी की है। ईंधन खुदरा विक्रेताओं पर ऊंची वैश्विक ऊर्जा कीमतों के कारण बने नए दबाव के बीच यह ताजा बढ़ोतरी की गई है। मामले से जुड़े सूत्रों ने पीटीआई को बताया कि देश भर में 7,108 पेट्रोल पंपों का संचालन करने वाली नायरा ने शनिवार के शुरुआती घंटों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ा दी हैं। इस संबंध में टिप्पणी के लिए नायरा के प्रवक्ता को भेजा गया ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला। बता दें कि इस साल की शुरुआत में जब ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई थी, तब अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमतों में हुई वृद्धि का बोझ उपभोक्ताओं पर डालने वाली नायरा पहली ईंधन खुदरा विक्रेता थी। कंपनी ने 26 मार्च को पेट्रोल की कीमतों में पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की ईंधन खुदरा कंपनियों ने मई में पंप कीमतों में वृद्धि करना शुरू किया था। नायरा ने बाद में अपनी मार्च की बढ़ोतरी को वापस ले लिया था। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने पर कंपनी ने एक जुलाई को पेट्रोल के दाम पांच रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम तीन रुपये प्रति लीटर घटा दिए थे। ईंधन बिक्री की सीमा पर सरकार को ऐतराज बता दें कि बीते कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की बिक्री की सीमा की चर्चाएं चल रही हैं। इस बीच, सरकार ने ईंधन बिक्री पर किसी भी तरह की सीमा लगाने पर ऐतराज जताया है। हाल ही में पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने कहा कि किसी को भी पेट्रोल-डीजल की बिक्री सीमित करने की अनुमति नहीं है। मित्तल ने डीजल की बिक्री पर सीमा लगाए जाने की खबरों पर कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता और इस मामले में सरकार के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब जियो-बीपी और नायरा एनर्जी ने अपने कुछ पेट्रोल पंप पर डीजल की खरीद सीमित कर दी है। खुदरा और थोक डीजल की कीमतों में अंतर बढ़ने से कारखानों, दूरसंचार कंपनियों, होटल, अस्पताल और अन्य बड़े उपभोक्ता खुदरा पंप से अपेक्षाकृत सस्ता डीजल खरीदने लगे हैं। डीजल की खुदरा और थोक कीमतों में अंतर करीब 50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है। इससे कुछ औद्योगिक उपभोक्ता खुदरा पंप से एक बार में 400-600 लीटर तक डीजल खरीद रहे हैं। इससे कुछ पेट्रोल पंप के भंडार पर दबाव बढ़ रहा है जबकि उनकी भंडारण क्षमता सीमित होती है और दोबारा आपूर्ति में कुछ दिन लग सकते हैं। ऐसी स्थिति में जियो-बीपी ने कुछ पंप पर एक ग्राहक को प्रतिदिन अधिकतम 50 लीटर डीजल खरीदने की सीमा लगाई है जबकि नायरा एनर्जी के पंप पर यह सीमा 70 से 200 लीटर के बीच है। 

हरमनप्रीत सिंह ने रचा इतिहास, भारत को लगातार दूसरी बार एशियन चैंपियन बनाने वाले पहले कप्तान बने

नागोया  एशियन गेम्स 2026 के फाइनल में भारतीय टीम ने मलेशिया को 5-1 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया है। भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह और जुगराज सिंह ने गोल किए। ये दोनों गोल पेनल्टी कॉर्नर पर आए। भारतीय पुरुष टीम एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल जीती है। इसके साथ ही हरमनप्रीत सिंह ने इतिहास रच दिया है। वह भारत को लगातार दूसरी बार एशियन चैंपियन बनाने वाले पहले भारतीय कप्तान बने हैं। पुरुषों से पहले भारत की महिला टीम ने भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। महिला टीम ने फाइनल में चीन को मात दी थी। यह पहला मौका है, जब एशियन गेम्स में भारत की महिला और पुरुष दोनों हॉकी टीमों ने गोल्ड मेडल जीता है। भारत की पुरुष टीम पांचवीं बार एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने में सफल रही है। वहीं, महिला टीम दूसरी बार गोल्ड जीती है। भारत ने की शानदार शुरुआत भारत ने इस मैच में हमेशा की तरह शानदार शुरुआत की और 10वें मिनट में गोल कर 1-0 की बढ़त बना ली। कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने पेनल्टी कॉर्नर पर गोल किया और टीम को मैच में आगे कर दिया। हालांकि, मलेशिया ने 4 मिनट बाद ही गोल कर मैच में बराबरी कर ली। मलेशिया के लिए सिल्वरस सेलो ने गोल दागा। पहले क्वार्टर का खेल 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ। भारत ने दूसरे क्वार्टर में बनाई बढ़त भारत ने मैच के दूसरे क्वार्टर में पेनल्टी कॉर्नर पर दूसरा गोल कर मलेशिया पर 2-1 की बढ़त बना ली। जुगराज ने 23वें मिनट पर बेहतरीन गोल किया। इसके बाद मलेशिया की टीम गोल करने के लिए छटपटाने लगी और बेहद आक्रामक खेल दिखाया। इसी प्रयास में उनसे गलतियां भी हुईं। हालांकि, दूसरे क्वार्टर के अंत तक स्कोर 2-1 से भारत के पक्ष में था। तीसरे क्वार्टर में भी भारत का गोल भारत ने तीसरे क्वार्टर में मलेशिया की टीम को पूरी तरह से दबाव में ला दिया। लगातार पेनल्टी कॉर्नर बनाकर भारत ने मलेशिया के खिलाड़ियों को दबाव में डाला और उनसे गलती होने पर पेनल्टी शूट हासिल कर लिया। हार्दिक ने मैच के 42वें मिनट में आसानी से पेनल्टी शूट पर गोल किया और टीम इंडिया 3-1 से आगे हो गई। यहां से भारत की जीत दिख रही थी, लेकिन सतर्क रहना जरूरी था। पांचवें क्वार्टर में चित हुआ मलेशिया पांचवें क्वार्टर के 54वें मिनट में शिलानंद ने फील्ड गोल कर भारत को 4-1 से आगे कर दिया। इसके बाद टीम के लिए पहला गोल करने वाले कप्तान हरमनप्रीत सिंह ने 57वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर टीम के लिए आखिरी गोल भी किया। इसके साथ ही टीम इंडिया ने फाइनल मैच 5-1 से जीतकर लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

ममता बनर्जी की 2021 की चोट पर शुभेंदु अधिकारी का दावा, कहा- मेरे पास मेडिकल रिपोर्ट

कोलकाता पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद से मचा घमासान अब नंदीग्राम उप-चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में एक नया मोड़ ले चुका है। 2021 के ऐतिहासिक मुकाबले और 2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी को नंदीग्राम और भवानीपुर से हराने के बाद पहली बार पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट छोड़कर नंदीग्राम खाली करने की असली वजह का खुलासा किया है। शुक्रवार को नंदीग्राम में बीजेपी प्रत्याशी हसिरानी रथ के पक्ष में चुनाव प्रचार करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की 2021 की चर्चित 'पैर की चोट' पर एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि वह चोट कोई हादसा या साजिश नहीं, बल्कि केवल हमदर्दी बटोरने का एक 'राजनीतिक ड्रामा' था। भवानीपुर छोड़कर नंदीग्राम सीट खाली करने की वजह? हाल ही में हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर और नंदीग्राम- दोनों सीटों से भारी अंतर से जीत दर्ज की थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद संवैधानिक नियमों के तहत उन्होंने भवानीपुर सीट को अपने पास बनाए रखने और नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देने का फैसला किया। नंदीग्राम की जनसभा में इस फैसले की वजह बताते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मुझसे कई लोग पूछते हैं कि दोनों जगह जीतने के बाद मैंने भवानीपुर क्यों चुना और नंदीग्राम सीट क्यों खाली की? इसका सीधा कारण यह है कि अगर मैं भवानीपुर सीट छोड़ देता, तो जिस नेता को राज्य की जनता (ममता बनर्जी) ने खारिज कर बाहर का रास्ता दिखा दिया था, उन्हें भवानीपुर उप-चुनाव के जरिए फिर से राजनीति में पैर जमाने का मौका मिल जाता। मैंने उस रास्ते को बंद किया।" कोई फ्रैक्चर नहीं था, मेरे पास SSKM की रिपोर्ट है: शुभेंदु अधिकारी 10 मार्च 2021 को नंदीग्राम में नामांकन दाखिल करने के दौरान ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट की घटना को याद दिलाते हुए शुभेंदु अधिकारी ने बड़ा दावा किया। 2021 में ममता बनर्जी ने व्हीलचेयर पर प्लास्टर बांधकर पूरे राज्य में चुनाव प्रचार किया था और आरोप लगाया था कि शुभेंदु अधिकारी के 'बाहरी गुंडों' ने उन पर हमला कर उनका पैर तोड़ा था। इस पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मैं व्यक्तिगत हमला नहीं करता, लेकिन सच सामने आना चाहिए। मुख्यमंत्री बनने के बाद जब मैं SSKM अस्पताल गया, तो मैंने वहां का मेडिकल रिकॉर्ड देखा। एक्स-रे की रिपोर्ट मेरे पास है। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने रिपोर्ट में साफ लिखा था- 'नो फ्रैक्चर' (यानी कोई हड्डी नहीं टूटी थी)।" कैसे लगी थी चोट? शुभेंदु ने घटना की असलियत बताते हुए कहा, "गाड़ी का दरवाजा आगे लगे एक लोहे के खंभे से टकराकर वापस आया और उनके पैर में हल्की सी खरोंच आई थी। लेकिन सिर्फ राजनीतिक सहानुभूति पाने के लिए उन्होंने हफ्तों तक पैर पर प्लास्टर और पट्टी बांधकर पूरे बंगाल में प्रचार किया और मुझे बदनाम किया।" उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, "मैं अब राज्य का पुलिस मंत्री भी हूं। अगर मुझे चुनौती दी गई, तो मैं उचित समय आने पर अस्पताल की वो आधिकारिक एक्स-रे और मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक कर दूंगा।" नंदीग्राम उप-चुनाव पर पूरे राज्य की निगाहें शुभेंदु अधिकारी के इस दावे के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक हलकों में जबर्दस्त भूचाल आ गया है। 6 अक्टूबर को नंदीग्राम में उप-चुनाव के लिए वोट डाले जाएंगे, जबकि परिणाम 9 अक्टूबर को घोषित होंगे। एक तरफ बीजेपी जहां अपनी इस परंपरागत सीट को बचाए रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं दूसरी तरफ जेल से जमानत पर बाहर आए कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान और टीएमसी के बागी नेताओं के चुनावी मैदान में होने से यह मुकाबला राज्य का सबसे हाई-प्रोफाइल चुनावी दंगल बन चुका है।

भारत ने दूध उत्पादन में रचा इतिहास, दुनिया में सबसे ज्यादा दूध उत्पादक देश बना: अमित शाह

भोपाल  भोपाल आए अमित शाह को लेकर शनिवार को हलचल थी। अमित शाह सुबह से शाम तक विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने वाले थे, लेकिन गौपालकों के सम्मेलन में ही हिस्सा लेकर दिल्ली रवाना हो गए। इससे पहले, ताज होटल में ठहरे अमित शाह सुबह नेहरू नगर स्थित करुणाधाम आश्रम में महालक्ष्मी के दर्शन करने जाने वाले थे, लेकिन बाद में उनके कार्यक्रम में बदलाव हुआ और वे सीधे भेल दशहरा मैदान स्थित गोपालकों के सम्मेलन में पहुंच गए थे। यहां प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। ताज होटल से निकलकर सीधे अमित शाह भेल दशहरा मैदान पहुंचे, जहां गौपालकों के कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। इससे पहले अमित शाह ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। अमित शाह के साथ ही मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद हैं। दिसंबर 2029 तक मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाएंगे शाह ने कहा कि हम मध्यप्रदेश को नशामुक्त बनाना चाहते हैं। मध्यप्रदेश नारकोटिक्स से मुक्त हो जाए। 31 दिसंबर 2029 से पहले मुक्त हो जाए, इसकी बारीक प्लानिंग करने वाले हैं। 31 2029 दिसंबर के बाद आपके बेटे बेटियों के लिए मध्यप्रदेश में नशे की कोई जगह नहीं होगी। उनका भविष्य उज्वल होने वाला है। कांग्रेसियों ने नहीं बनने दिया था सहकारिता मंत्रालय कांग्रेसियों ने 75 साल तक सहकारिता मंत्रालय बनने नहीं दिया। नरेंद्र मोदी सरकार में आए तो सहकारिता मंत्रालय बनाया। इसका सबसे अधिक फायदा गौपालकों को होने वाला है। यदि खुले बाजार में गौपालक दूध बेचता है तो शोषण होता है। मलाई बिचौलियां खा जाते हैं। अब 35 की बजाय 55 रुपए मिलना शुरू हो जाएंगे। इसके लिए दूध लेकर इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया जाना है। आज उज्जैन में 255 करोड़ की लागत से हर रोज तीन लाख लीटर दूध प्रोसेस करने के संयंत्र का भूमिपूजन हो रहा है। शाह ने कहा कि हमने मध्यप्रदेश सरकार से 50 एकड़ भूमि मांगी है। इसमें गायों की नस्लों का सुधार भी होगा। आधुनिक व्यवस्था से बछड़ा नहीं, बछड़ी ही पैदा होगी, ऐसी व्यवस्था कर दी जाएगी। यह कांग्रेसी अलग-अलग मुद्दों पर विरोध करते हैं, मैं उन्हें हिसाब देने आया हूं। मिल्क कैपिटल की ओर मध्यप्रदेश के बढ़ते कदम केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन में प्रदेश को दुग्ध क्षेत्र के लिए कई सौगातें प्रदान कीं। उन्होंने रिमोट का बटन दबाकर हितलाभ वितरण किया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री शाह ने विभिन्न डेयरी परियोजनाओं का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने उज्जैन में 255 करोड़ की लागत से प्रतिदिन 3 लाख लीटर क्षमता वाले दुग्ध प्रोसेसिंग प्लांट का वर्चुअल भूमिपूजन किया। भोपाल में 16.5 करोड़ की लागत से प्रतिदिन 40 हजार लीटर क्षमता वाले प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का लोकार्पण किया। भोपाल में 12.42 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक राज्य स्तरीय केंद्रीय प्रयोगशाला का लोकार्पण हुआ। शिवपुरी में 6.5 करोड़ की लागत से मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण कार्य का लोकार्पण हुआ। इन परियोजनाओं से प्रदेश में दुग्ध प्रसंस्करण और डेयरी अधोसंरचना को विस्तार मिलेगा। तो वहीं रोजगार व स्वरोजगार के अवसरों का भी सृजन होगा। मुख्यमंत्री मोहन यादव का संबोधन मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि इस वर्ष किसान कल्याण के अंतर्गत “बलराम कृषि महोत्सव” के माध्यम से सभी 55 जिलों में उन्नत खेती, पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न माध्यमों से उन्हें प्रोत्साहित किया है। आज मध्यप्रदेश में दुग्ध उत्पादन 12 लाख लीटर पर पहुंचा है। खेती और पशुपालन से किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास हमारी सरकार कर रही है। यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में गाय और भैंस के रूप में 6 करोड़ पशुधन है। किसानों और पशुपालकों की आर्थिक समृद्धि के लिए राज्य में उन्नत नस्ल के पशुधन के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा बड़ा कदम उठाया जाएगा। राज्य में 2 लाख गोपालक दीदीयों ने डेयरी सहकारिता व पशुपालन के आधार पर अपनी व परिवारजनों की ज़िंदगी बदली है। प्रदेश में 3,214 गोशालाओं में 5 लाख गोवंश का संरक्षण कर रहे हैं। राज्य में 313 ब्लॉक में वृंदावन ग्राम बनाने के लिए सरकार कार्यरत है। हेमंत खंडेलवाल का संबोधन कार्यक्रम की शुरुआत में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि केंद्रीय मंत्री श्री अमित शाह ने देश में सहकारिता को नई दिशा दी है। अमित शाह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में सहकारिता की दिशा बदली है। प्रदेश में दुग्ध क्रांति की शुरुआत की गई है। अब तक प्रदेश में 1700 से अधिक दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जा चुकी हैं। सांची और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के एमओयू के बाद दूध का कलेक्शन 12 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचा है। प्रदेश के गौपालकों को अब दूध का ₹8.50 प्रति लीटर अधिक दाम मिल रहा है। दूध उत्पादन से कृषकों की आय बढ़ रही है। हमारा उद्देश्य है- दूध से किसानों की आय बढ़े, गोबर से खाद बने और सरकार के सहयोग से समृद्धि आए। अगले कुछ वर्षों में दूध कलेक्शन को 50 लाख लीटर प्रतिदिन तक पहुंचाने का संकल्प है। मध्यप्रदेश में दूध से आय आधारित अर्थव्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

अमित शाह का दौरा अचानक बदला, तीन कार्यक्रमों के बाद शाम को दिल्ली रवाना हुए गृह मंत्री

भोपाल राजधानी भोपाल आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को तीन कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद शाम को दिल्ली रवाना होने वाले हैं।भोपाल आए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली रवाना होने वाले हैं। गए। इससे पहले अमित शाह शुक्रवार देर रात को दिल्ली से भोपाल पहुंचे थे। शनिवार को भोपाल में उनके पांच कार्यक्रम थे। सुबह ताज होटल में ठहरने के बाद वे संगठन और सरकार के मंत्रियों से मिले। इसके बाद भेल दशहरा मैदान पर आयोजित गौपालकों के सम्मेलन में गए। इसके बाद कानून व्यवस्था को लेकर एमपी के गृहमंत्री, डीजीपी समेत बड़े अफसरों के साथ बैठक की। थोड़ी देर में 3.30 बजे प्रेस कांफ्रेंस होने वाली थी, लेकिन अमित शाह अचानक दिल्ली रवाना हो गए। इससे पहले शनिवार को सुबह अमित शाह ताज होटल में सीएम सहित एमपी के अन्य मंत्रियों के साथ बैठक करने के बाद नेहरू नगर स्थित करुणा धाम आश्रम में महालक्ष्मी मंदिर दर्शन करने आने वाले थे। उनके कार्यक्रम में बदलाव हुआ और वे मंदिर नहीं जाते हुए सीधे भेल दशहरा मैदान चले गए। जहां गौपालकों को संबोधित किया। इसके बाद ही वे ताज होटल वापस आए और एमपी के बड़े अधिकारियों के साथ कानून व्यवस्था को लेकर चर्चा की। इसी में वे मध्यप्रदेश को 2029 तक नारकोटिक्स मुक्त बनाने को लेकर बात कर रहे थे। इसके बाद वे प्रेस कांफ्रेंस करने वाले थे, जिसे अचानक कैंसिल कर दिया गया। दोपहर बाद के सभी कार्यक्रम रद्द भेल दशहरा मैदान में गौपालकों के कार्यक्रम के बाद वे सीधे ताज होटल पहुंचने का कार्यक्रम था। इसके बाद दोपहर 1:30 से 2:15 बजे तक का समय लंच के लिए आरक्षित था। लंच पर भी संगठन और सरकार से चर्चा का समय तय किया गया था। इसके बाद दोपहर 2:15 से शाम 4:15 बजे तक होटल ताज में मध्यप्रदेश सरकार और केंद्रीय गृह मंत्रालय के मध्य लंबित विषयों पर बैठक प्रस्तावित थी। इसके बाद शाम 4:15 से 5:15 बजे तक नारकोटिक्स पर प्रेस कांफ्रेंस के लिए समय आरक्षित किया गया था। लंच के बाद अमित शाह के दिल्ली रवाना होने की सूचना दे दी गई। इसके बाद के सभी कार्यक्रम अमित शाह ने निरस्त कर दिए गए। अमित शाह का दिल्ली जाने का समय 7.50 बजे था, लेकिन वे दोपहर में ही रवाना हो गए।

Rajasthan Panchayat Election 2026: 13 अक्टूबर से शुरू होगी वोटिंग, 4 चरणों में पूरा होगा चुनाव

जयपुर  राजस्थान में निकाय चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब पंचायत चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव कार्यक्रम का पूरा शेड्यूल जारी कर दिया है। राज्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने मीडिया से रूबरू होकर पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया। चुनाव की तिथियों का ऐलान होने के साथ ही आचार संहिता लागू हो गई है। अगले दो महीने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक आचार संहिता प्रभावी रहेगी। नामांकन 8 अक्टूबर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजेश्वर सिंह ने बताया कि पंच सरपंच और जिला परिषद सदस्यों के लिए 8 अक्टूबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू होगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर है। 15 अक्टूबर तक नामांकन वापस लिए जा सकेंगे। जिला प्रमुख के चुनाव 25 नवंबर को होंगे। पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया 28 नवंबर को पूरी हो जाएगी। जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य चुनाव कार्यक्रम चरण / प्रक्रिया अधिसूचना (Notification) नामांकन अंतिम तिथि नाम वापसी व प्रतीक आवंटन मतदान तिथि (सुबह 7 से शाम 6 बजे) प्रथम चरण 08.10.2026 (गुरुवार) 13.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 15.10.2026 23.10.2026 (शुक्रवार) द्वितीय चरण 13.10.2026 (मंगलवार) 16.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 19.10.2026 29.10.2026 (गुरुवार) तृतीय चरण 19.10.2026 (सोमवार) 23.10.2026 (दोपहर 3 बजे) 26.10.2026 04.11.2026 (बुधवार) चतुर्थ चरण 31.10.2026 (शनिवार) 04.11.2026 (दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 14.11.2026 (शनिवार)   पंच एवं सरपंच चुनाव कार्यक्रम (बैलेट पेपर से) चरण अधिसूचना नामांकन, जांच व प्रतीक आवंटन मतदान व मतगणना तिथि उपसरपंच चुनाव प्रथम चरण 08.10.2026 24.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 25.10.2026 (रविवार) 26.10.2026 द्वितीय चरण 13.10.2026 30.10.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 31.10.2026 (शनिवार) 01.11.2026 तृतीय चरण 19.10.2026 05.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 06.11.2026 (शुक्रवार) 07.11.2026 चतुर्थ चरण 31.10.2026 15.11.2026 (सुबह 11 से दोपहर 3 बजे) 16.11.2026 (सोमवार) 17.11.2026 सरपंच और पंच पद की मतगणना मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद उसी दिन होगी। Playing Picture-in-picture Diwali Special Train 2026: दिवाली पर मिलेगा कंफर्म टिकट, रेलवे ने 10 स्पेशल ट्रेन की शुरू मतगणना एवं शीर्ष पदों के चुनाव की तिथियां जिला परिषद व पंचायत समिति मतगणना: 20 नवंबर 2026 (शुक्रवार) प्रातः 8:00 बजे से प्रधान का चुनाव: 25 नवंबर 2026 (बुधवार) उप प्रधान का चुनाव: 26 नवंबर 2026 (गुरुवार) जिला प्रमुख का चुनाव: 27 नवंबर 2026 (शुक्रवार) उप जिला प्रमुख का चुनाव: 28 नवंबर 2026 (शनिवार) इसी के साथ चुनावी प्रक्रिया संपन्न होगी   महिला आरक्षण और वर्गवार समीकरण  पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू होने से ग्रामीण निकायों में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रहेगी। महिला सरपंच: कुल 14,403 ग्राम पंचायतों में से 7,201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनेंगी। महिला वार्ड पंच: 1,30,584 वार्डों में से 65,000 से अधिक वार्ड पंच महिलाएं होंगी। महिला प्रमुख व प्रधान: 41 जिलों में से 20 जिलों में महिला जिला प्रमुख और 457 पंचायत समितियों में से 227 महिला प्रधान चुनी जाएंगी। एसटी आरक्षित जिले: बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर जिलों में सरपंच के सभी पद अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। वर्गवार सरपंच पद आरक्षण: ST – 3,058 | SC – 2,493 | OBC – 1,961 पद। मुख्य बिंदु और चुनाव आयोग के दिशा-निर्देश मतदाता संख्या: कुल मतदाता संख्या में 2.08 करोड़ पुरुष मतदाता शामिल हैं। जयपुर जिला परिषद में सबसे अधिक, जबकि जैसलमेर में सबसे कम मतदाता हैं। खंडेला सबसे बड़ी पंचायत समिति है। मतदान केंद्र व स्टाफ: कुल 45,384 मतदान केंद्रों पर 3.17 लाख कर्मचारी चुनाव संपन्न कराएंगे। बुजुर्ग और दिव्यांग वोटरों के लिए घर से लाने-ले जाने की व्यवस्था होगी। पहचान पत्र: मतदान के लिए मतदाता पहचान पत्र (EPIC) के अलावा 11 वैकल्पिक दस्तावेज़ मान्य होंगे। चुनावी खर्च सीमा: जिला परिषद सदस्य हेतु रुपये 3 लाख, पंचायत समिति सदस्य हेतु रुपये 1.50 लाख तथा सरपंच पद हेतु रुपये 1 लाख की खर्च सीमा तय की गई है। कड़े नियम: नामांकन के दौरान रैली निकालने और जीत के बाद विजय जुलूस निकालने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सरकारी स्तर पर नए कार्यादेश जारी करने पर रोक रहेगी।   महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण मिला था जबकि पंचायती राज संस्थाओं में 50 फीसदी आरक्षण का नियम है। ऐसे में गांव की सरकार में महिलाओं का बोलबाला होगा। वार्ड पंच, सरपंच, उप सरपंच, प्रधान और प्रमुख की कुर्सियों में ज्यादातर जगह महिलाएं ही नजर आने वाली है क्योंकि उन्हें 50 फीसदी आरक्षण प्राप्त है और कई अन्य ग्राम पंचायतों और जिलों में भी महिलाओं नेत्रियां राजनीति में सक्रिय हैं। वे भी चुनाव मैदान में उतरने वाली हैं। 7201 गांवों में महिलाएं बनेंगी सरपंच प्रदेश में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें हैं जहां सरपंच और उपसरपंच के चुनाव होने हैं। पंचायती राज संस्थानों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण का नियम लागू है। ऐसे में 14,403 में से 7201 ग्राम पंचायतों में महिलाएं सरपंच बनने वाली हैं। इन ग्राम पंचायतों में कुल 1 लाख 30 हजार 584 वार्ड हैं जहां पंच चुने जाएंगे। आरक्षण के हिसाब से करीब 65 हजार से ज्यादा महिलाएं वार्ड पंच बनने वाली हैं। 20 जिलों में प्रमुख बनेंगी महिलाएं राजस्थान में कुल 41 जिले हैं। इनमें से 20 जिलों में महिलाएं जिला प्रमुख बनेंगी। जिला परिषद सदस्यों के कुल 1,403 पदों पर और पंचायत समिति के सदस्य के 8,245 पदों पर चुनाव होने हैं। आरक्षण व्यवस्था के मुताबिक जिस तरह से 20 जिलों में महिलाएं प्रमुख बनेंगी। उसी तरह 457 प्रधानों में से 227 पंचायतों में महिला प्रधान बनेंगी। 4 जिलों में सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव में महिलाओं के साथ अन्य वर्गों को आरक्षण प्राप्त है। सरपंचों के कुल पदों में से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 3058, अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 2,493 और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 1,961 पद आरक्षित हैं। इसी तरह से वार्ड पंचों के कुल पदों में से 21,962 पद एससी, 19,117 पद एसटी और करीब 15 हजार पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़ और सलूंबर ऐसे जिले हैं जहां सरपंच के सभी पद एसटी वर्ग के लिए आरक्षित है।    

SING फोरम 2026 में सहभागिता के लिए सिंगापुर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

वैश्विक निवेश मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की मजबूत पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल SING फोरम 2026 में सहभागिता के लिए सिंगापुर पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने किया मुख्यमंत्री साय का आत्मीय स्वागत वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत होंगी छत्तीसगढ़ की उपलब्धियां, विकास की संभावनाएं और निवेश के अवसर CEO राउंडटेबल में सिंगापुर के प्रमुख निवेशकों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से होगी चर्चा रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य में निवेश की नई संभावनाओं को विस्तार देने के उद्देश्य से आज सिंगापुर पहुंचे। सिंगापुर पहुंचने पर भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने मुख्यमंत्री साय का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री साय सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा आयोजित प्रथम SING फोरम 2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से सहभागिता करेंगे। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच के माध्यम से वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, विकास की अपार संभावनाओं और प्रदेश में उपलब्ध आकर्षक निवेश अवसरों को प्रस्तुत किया जाएगा। SING फोरम 2026 के दौरान आयोजित CEO राउंडटेबल में मुख्यमंत्री साय सिंगापुर के प्रमुख निवेशकों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा करेंगे। इस दौरान प्रदेश में निवेश की संभावनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से रखा जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का दृढ़ प्रयास है कि नई औद्योगिक नीति, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, सुदृढ़ अधोसंरचना, कुशल मानव संसाधन तथा उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेश मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की मजबूत पहचान बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री साय की SING फोरम 2026 में सहभागिता वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ की विकास संभावनाओं और निवेश अवसरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी।

मिट्टी के अखाड़े से एशियन गेम्स के गोल्ड तक, अमन सहरावत की संघर्ष से सफलता की कहानी

 नागोया गोया में भारतीय पहलवान अमन सहरावत ने आखिरकार एशियन गेम्स के मेडल का रंग बदल दिया. 23 साल के अमन ने पुरुषों के 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में गोल्ड मेडल जीत लिया. शनिवार को फाइनल में उन्होंने नॉर्थ कोरिया के वर्ल्ड चैम्प‍ियन चोंग सोंग हान को 11-7 से हराया।  अमन ने मुकाबले में शानदार रणनीति दिखाई और हान की हर कोशिश का जवाब दिया. नॉर्थ कोरियाई पहलवान ने भारतीय पहलवान को पछाड़ने की पूरी कोशिश की, लेकिन अमन पूरे मुकाबले में नियंत्रण बनाए रखने में सफल रहे।  फाइनल से पहले अमन ने सेमीफाइनल में ताजिकिस्तान के ऐयाल बेलोल्यूब्स्की को 14-8 से हराया था. इस जीत के साथ उन्होंने पहली बार एशियन गेम्स में गोल्ड जीतने का मौका बनाया और फाइनल में उसे हासिल भी कर लिया।  अमन ने 2023 हांगझोऊ एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता था. अब उन्होंने उसी मेडल का रंग बदलकर गोल्ड कर दिया. शुक्रवार को सुजीत कलकल ने पुरुषों के 65 किग्रा वर्ग में गोल्ड जीता था, यानी कुश्ती में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। . 10 साल की उम्र में मां को खोया अमन सहरावत का सफर बेहद संघर्ष भरा रहा है. उन्होंने 10 साल की उम्र में अपनी मां को खो दिया था और इसके एक साल बाद पिता का भी निधन हो गया. इसके बाद उनके चाचाओं ने उनका साथ दिया. हरियाणा के बिरोहर के मिट्टी वाले अखाड़ों से अमन की कुश्ती की शुरुआत हुई।  बाद में वह दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंचे, जहां कोच ललित कुमार के मार्गदर्शन में उनकी कुश्ती निखरी. अमन की पहचान उनकी तेज रफ्तार, आक्रामक अंदाज और लगातार मूवमेंट वाली कुश्ती से बनी।  सबसे कम उम्र के ओलंपिक मेडलिस्ट बने अमन ने 2018 और 2019 में अंडर-17 वर्ल्ड चैम्प‍ियनशिप में ब्रॉन्ज जीता. 2019 में अंडर-17 एशियन चैम्प‍ियनशिप का गोल्ड भी उनके नाम रहा. 2022 में उन्होंने अंडर-23 वर्ल्ड चैम्प‍ियनशिप और अंडर-23 एशियन चैम्प‍ियनशिप में गोल्ड जीता।  मई 2024 में इस्तांबुल में हुए वर्ल्ड ओलंपिक क्वालिफिकेशन टूर्नामेंट में उन्होंने 57 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत का ओलंपिक कोटा हासिल किया. पेरिस ओलंपिक से पहले वह रोज करीब आठ घंटे ट्रेनिंग कर रहे थे।  पेरिस 2024 में अमन ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर भारत के सबसे कम उम्र के व्यक्तिगत ओलंपिक मेडलिस्ट बनने का गौरव हासिल किया।  हार से वापसी, अब एशियन गेम्स GOLD पेरिस के बाद भी अमन का सफर आसान नहीं रहा. चोट के कारण वह एशियन चैम्प‍ियनशिप में नहीं उतर सके. इसके बाद मंगोलिया के रैंकिंग टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज जीता और तीन हफ्ते से भी कम समय बाद जून 2025 में तुर्की की इंटरनेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड हासिल किया।  2025 वर्ल्ड चैम्प‍ियनशिप में पेट की बीमारी के कारण वह वजन नहीं कर पाए और मुकाबले से पहले ही डिस्क्वालिफाई हो गए।  अब एशियन गेम्स में वर्ल्ड चैम्प‍ियन को हराकर अमन ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है. उनके खाते में अब ओलंपिक ब्रॉन्ज के साथ एशियन गेम्स गोल्ड भी है।  अमन सहरावत की प्रमुख उपलब्धियां     2024 ओलंपिक- ब्रॉन्ज     2026 सीनियर एशियन चैम्प‍ियनशिप- सिल्वर     2023 एशियन गेम्स- ब्रॉन्ज     2023 सीनियर एशियन चैम्प‍ियनशिप- गोल्ड     2022 अंडर-23 वर्ल्ड चैम्प‍ियनशिप- गोल्ड     2022 अंडर-23 एशियन चैम्प‍ियनशिप- गोल्ड     2022 अंडर-20 एशियन चैम्प‍ियनशिप- ब्रॉन्ज     2018 और 2019 अंडर-17 वर्ल्ड चैम्प‍ियनशिप- ब्रॉन्ज     2019 अंडर-17 एशियन चैम्प‍ियनशिप- गोल्ड  

कूनो-गांधी सागर के बाद नौरादेही में भी बसेंगे चीते, 7 अक्टूबर को होगी एंट्री

नौरादेही  मध्यप्रदेश में चीतों का कुनबा अब बुंदेलखंड तक बढ़ने जा रहा है। चीता स्टीयरिंग कमेटी ने वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (नौरादेही) में 4 चीतों को बसाने की मंजूरी दे दी है। शुरुआत 7 अक्टूबर को 2 चीतों से होगी। कूनो नेशनल पार्क से नर थोलो और मादा CCB-3 को नौरादेही लाया जाएगा। CCB-3 गांधी सागर में छोड़ी गई राधा की बहन है। सीएम डॉ. मोहन यादव दोनों को रिलीज करेंगे। इसी दिन नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में लगातार 25 साल पूरे हो रहे हैं। नौरादेही के साथ प्रदेश में चीतों के 3 ठिकाने-कूनो, गांधी सागर और नौरादेही हो जाएंगे। पहले गुजरात में बसाने की तैयारी थी, अब नौरादेही पर राजी Q. नौरादेही ही क्यों चुना, कितना बड़ा इलाका है? – वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व 2,340 वर्ग किमी में फैला मप्र का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। यहां खुले जंगल और लंबे घास के मैदान हैं। यह नर्मदा, बेतवा और केन नदी प्रणालियों का कैचमेंट भी है। Q. चीते कहां रहेंगे, सुरक्षा की क्या तैयारी है? – पहले 439 हेक्टेयर के सॉफ्ट रिलीज बोमा में रखेंगे। यह भोपाल के वन विहार नेशनल पार्क जितना बड़ा है। 5 हिस्सों वाले बोमा में पावर फेंसिंग और 24 घंटे ट्रैकिंग की व्यवस्था है। Q. पहले गुजरात के बन्नी भेजने का प्लान था? – गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में भी चीते बसाने की तैयारी चल रही है, लेकिन वहां रिलीज की तारीख तय नहीं है। 7 अक्टूबर को नौरादेही में पहला जोड़ा पहुंच जाएगा। गुजरात के बन्नी से पहले नौरादेही चुना गुजरात के बन्नी ग्रासलैंड में भी चीतों को बसाने की तैयारी चल रही है। हालांकि बन्नी ग्रासलैंड में चीतों को रिलीज करने की तारीख अभी तय नहीं हुई है। इस बीच मध्यप्रदेश के नौरादेही में 7 अक्तूबर को यहां पहला जोड़ा पहुंच जाएगा। पहले चार चीतों की मंजूरी में से शुरुआती दो चीतों के आने के बाद नौरादेही चीतों का नया प्राकृतिक घर बन जाएगा। वन विभाग ने इसके लिए सभी जरूरी मैदानी तैयारियां पूरी कर ली हैं। वन्यजीव संरक्षण को नई गति मध्यप्रदेश में कूनो और गांधी सागर के बाद नौरादेही में चीतों की पुनर्स्थापना से वन्यजीव संरक्षण को नई गति मिलेगी। विशाल घास के मैदानों और समृद्ध पारिस्थितिकी तंत्र से युक्त यह क्षेत्र चीतों के अनुकूल पाया गया है। चीता स्टीयरिंग कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद अब 7 अक्तूबर का दिन प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में नया अध्याय जोड़ेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चीतों को सॉफ्ट रिलीज बोमा में छोड़े जाने के साथ ही बुंदेलखंड की धरती पर चीतों की चहल-पहल शुरू हो जाएगी। नौरादेही और गुजरात भी बनेगा नया ठिकाना गांधीसागर के अलावा चीतों को गुजरात के बन्नी सेंचुरी ओर रानी दुर्गावर्ती टाइगर रिजर्व नौरादेही भी भेजे जाने की तैयारी है. इन दोनों ही स्थानों पर चीतों को रखे जाने की प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. बन्नी सेंचुरी में सवाना जैसी परिस्थितियों वाला सॉफ्ट रिलीज एनक्लोजर तैयार किया गया है. यहां के घास के मैदान चीतों को खासे पसंद आ सकते हैं. कच्छ जिले में मौजूद बन्नी ग्रासलैंड एशिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक घास का मैदान है. यहां 600 हेक्टेयर में बाड़ा तैयार किया गया है और चीतल, सांभर जैसे शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाई गई है. उधर, नौरादेही में 35 किलोमीटर चैनलिंग फैसिंग का काम भी अंतिम चरण में है।