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FZ1073 हमले के बाद इजरायल में मचा हड़कंप, विदेशी पायलटों की स्क्रीनिंग पर उठे गंभीर सवाल

दुबई दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाईदुबाई (Flydubai) की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के भीतर ओमानी को-पायलट के भारतीय कैप्टन पर किए गए जानलेवा हमले और विमान क्रैश करने की साजिश के बाद अब इजरायल की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। इजरायली न्यूज चैनल चैनल 12 की एक सनसनीखेज रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इजरायल की आंतरिक सुरक्षा एजेंसी 'शिन बेट' और परिवहन मंत्रालय की घोर लापरवाही की वजह से ही यह बड़ा सुरक्षा तंत्र ध्वस्त हुआ। अब्राहम समझौते के स्पष्ट नियमों के बावजूद इजरायल ने ओमान जैसे गैर-कूटनीतिक संबंधों वाले देशों के पायलटों को अपने एयर स्पेस में उड़ने की बिना किसी जांच-पड़ताल के छूट दे रखी थी। खुफिया एजेंसियों ने एयरलाइन के भरोसे छोड़ी सुरक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, 2020 में यूएई और इजरायल के बीच हुए अब्राहम समझौते में यह साफ प्रावधान था कि जिन देशों के इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, उन देशों के नागरिक या पायलट इजरायल जाने वाली उड़ानों के कॉकपिट में नहीं हो सकते। ओमान के साथ इजरायल के कोई औपचारिक संबंध नहीं हैं। इसके बावजूद, इजरायली सुरक्षा एजेंसियों की ढिलाई का आलम यह था कि उन्होंने कभी कोई जांच नहीं की, बल्कि एयरलाइन के भरोसे ही अपना काम छोड़ा हुआ था। 'शिन बेट' ने फ्लाईदुबाई के पायलटों के बैकग्राउंड की कभी गहन जांच ही नहीं की। उन्होंने केवल एयरलाइन से जबानी तौर पर कह दिया था कि वे गैर-मित्र देशों के पायलटों को इजरायल न भेजें। एविएशन इंडस्ट्री के एक सीनियर अधिकारी ने चैनल 12 को बताया, "शिन बेट के पास महज 5 मिनट के भीतर यह पता लगाने के सारे संसाधन मौजूद हैं कि दुबई एयरलाइन के पायलट कौन हैं। लेकिन उन्होंने जानबूझकर आंखें मूंद लीं। इजरायल में अधिकारियों को विदेशी एयरलाइंस पर इतना अंधा भरोसा था कि पिछले कुछ सालों में उन्होंने कोई रिव्यू ही नहीं किया।" परिवहन मंत्रालय ने अपनी सफाई में कहा है कि शिन बेट ने कभी भी फ्लाईदुबाई से किसी संभावित पायलट खतरे की चेतावनी जारी नहीं की थी, केवल लगेज की जांच बढ़ाने को कहा था। सऊदी अरब में क्या हुआ खुलासा? बुधवार को हुए इस हादसे के बाद सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई थी। सऊदी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अस्पताल में इलाज के बाद घायल भारतीय कैप्टन स्मित मछार और हमलावर ओमानी को-पायलट दोनों को गुरुवार सुबह आगे के इलाज और जांच के लिए अबू धाबी भेज दिया गया है इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुलासा किया है कि ओमानी को-पायलट "इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा" का शिकार था। सऊदी जांचकर्ताओं से मिली शुरुआती जानकारी के आधार पर इजरायली खुफिया एजेंसियां- मोसाद और शिन बेट मान रही हैं कि यह हमला 'राष्ट्रीय/धार्मिक नफरत' के कारण किया गया था। प्राथमिक निष्कर्षों के अनुसार, ऐसा प्रतीत होता है कि को-पायलट ने किसी बड़े आतंकी संगठन या ईरान के इशारे के बिना, अपने स्तर पर अकेले ही इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया था। UAE इजरायल से क्यों हुआ नाराज? इस बीच, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने इजरायल के उस जल्दबाजी भरे बयान पर नाराजगी जताई है जिसमें जांच पूरी होने से पहले ही इसे 'राष्ट्रीय आतंकी हमला' घोषित कर दिया गया। यूएई का कहना है कि वह अपने स्तर पर पूरी निष्पक्षता से मामले की जांच कर रहा है। दूसरी तरफ, इजरायल में चौतरफा घिरने के बाद अब मोसाद और शिन बेट यूएई व सऊदी अरब की एजेंसियों के साथ मिलकर सूक्ष्म जांच में जुट गए हैं। चैनल 12 की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात की भी जांच की जा रही है कि क्यों हाल के महीनों में जब इजरायली उड़ानों पर कड़े सुरक्षा प्रतिबंध लगाए गए थे, तब विदेशी एयरलाइंस के पायलटों की कड़े प्रोटोकॉल से चेकिंग क्यों नहीं की गई।

योगी सरकार के औद्योगिक विकास को रफ्तार, बुंदेलखंड में आकार ले रहा बीडा का औद्योगिक भविष्य

योगी सरकार के औद्योगिक विकास के एजेंडे को मिल रही रफ्तार, बुंदेलखंड में आकार ले रहा बीडा का औद्योगिक भविष्य बीडा में 28,874 एकड़ भूमि का अर्जन पूरा, 56,662 एकड़ अनुमोदित क्षेत्र में चरणबद्ध विकास की तैयारी एक्टिवेशन एरिया में 1,000 एकड़ के प्रथम चरण पर फोकस, ₹447.01 करोड़ के विकास कार्य प्रस्तावित मदर‍सन, बीईएमएल, रैप्हे एमफिब्र, सिफी समेत कई बड़े समूहों ने दिखाई रुचि लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र में आधारभूत ढांचे के विकास और भूमि अर्जन की प्रक्रिया को तेजी मिली है। बीडा के 01 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, परियोजना के लिए 33 ग्रामों में कुल 56,662 एकड़ अनुमोदित क्षेत्र में से अब तक 28,874 एकड़ भूमि का अर्जन पूरा किया जा चुका है। प्रथम चरण में 35,298 एकड़ और द्वितीय चरण में 21,364 एकड़ भूमि अनुमोदित है। लगातार बढ़ी भूमि अर्जन की रफ्तार बीडा क्षेत्र में भूमि अर्जन की प्रक्रिया में पिछले महीनों में निरंतर प्रगति हुई है। नवंबर से सितंबर तक कुल 7,026 एकड़ अतिरिक्त भूमि अर्जित की गई। सितंबर 2026 में अकेले 616 एकड़ भूमि का अर्जन हुआ, जिसके साथ कुल अर्जित भूमि का आंकड़ा 28,874 एकड़ पहुंच गया। यह भूमि अर्जन बीडा में प्रस्तावित औद्योगिक, वाणिज्यिक और आधारभूत संरचनात्मक विकास के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार कर रहा है। 1,000 एकड़ के प्रथम चरण में विकसित होगा एक्टिवेशन एरिया बीडा के 2,320 एकड़ क्षेत्रफल को एक्टिवेशन एरिया के रूप में चिह्नित किया गया है। इसके प्रथम चरण में 1,000 एकड़ क्षेत्र विकसित किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए ड्राफ्ट सेक्टर प्लान तैयार किया गया है, जिस पर महायोजना के अनुमोदन के उपरांत अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इस क्षेत्र में सड़क, जलापूर्ति, विद्युत आपूर्ति और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं के विकास को गति देने की तैयारी है। ₹447 करोड़ से अधिक के आधारभूत विकास कार्य प्रस्तावित  एक्टिवेशन एरिया के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों में 132 केवी विद्युत पारेषण लाइन, 30 एमएलडी जल ट्रंक लाइन, सड़क अवसंरचना, स्टॉर्म वाटर ड्रेन, विद्युत डक्ट, साइकिल ट्रैक, फुटपाथ, एवेन्यू प्लांटेशन, प्रशासनिक भवन एवं आईसीसीसी, प्रवेश द्वार, जल वितरण पाइपलाइन एवं ओवरहेड टैंक तथा विद्युत वितरण नेटवर्क और 33/11 केवी सबस्टेशन शामिल हैं। इन कार्यों की अनुमानित कुल लागत 447.01 करोड़ रुपये है। शासन द्वारा इन परियोजनाओं को अटल इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत कराए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। संबंधित कार्यों के डीपीआर तैयार किए जा चुके हैं तथा उनके परीक्षण की प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है। औद्योगिक क्लस्टरों के विकास पर विशेष जोर  बीडा क्षेत्र में विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों के लिए क्लस्टर आधारित विकास की योजना तैयार की गई है। इनमें डेटा सेंटर/आईटी, केमिकल और डिफेंस सेक्टर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। डेटा सेंटर/आईटी क्लस्टर के लिए 1,000 एकड़ क्षेत्र चिह्नित है, जिसमें 810 एकड़ भूमि अर्जित की जा चुकी है। इस क्लस्टर आधारित विकास से बीडा क्षेत्र में विविध औद्योगिक गतिविधियों के लिए समेकित आधारभूत सुविधाएं विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा। जलापूर्ति को लेकर मध्य प्रदेश के साथ समन्वय बीडा परियोजना के लिए आवश्यक जल उपलब्धता को लेकर भी अंतरराज्यीय समन्वय किया जा रहा है। मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश द्वारा मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश को प्रेषित अर्द्धशासकीय पत्र तथा वार्ता के क्रम में 23 सितंबर 2026 को मध्य प्रदेश के जल संसाधन विभाग के साथ बैठक हुई। इसमें बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण परियोजना के लिए 216 एमएलडी जल उपलब्ध कराने के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार की सहमति से अवगत कराया गया। देश की बड़ी कंपनियों ने दिखाई निवेश में रुचि बीडा की संभावनाओं को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों और संस्थानों ने निवेश में रुचि दिखाई है। बीडा की संभावित निवेशकों की सूची में समवर्धन मदरसन इंटरनेशनल लिमिटेड, बीईएमएल लिमिटेड, रैप्हे एमफिब्र, फेयर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (लुलु समूह), प्रभातम ग्रुप, कॉनकॉर, सिद्धार्थ लॉजिस्टिक्स, सिफी टेक्नोलॉजीज, सतीश चंद्र गोयल चैरिटेबल ट्रस्ट (मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज) तथा एनआईसीडीसी शामिल हैं। ये रुचियां क्रमशः ऑटोमोटिव, रक्षा, एफएमसीजी, स्वास्थ्य, लॉजिस्टिक्स, आईटी और संस्थागत क्षेत्र से जुड़ी हैं। कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मिल रहा विस्तार बीडा क्षेत्र को व्यापक कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से जोड़ने के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। भारत सरकार के सहयोग से आगरा-ग्वालियर छह लेन एक्सप्रेसवे, दिल्ली-मुंबई रेल संपर्क, मल्टीमॉडल कार्गो पार्क तथा डिफेंस कॉरिडोर से जुड़ी कनेक्टिविटी जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। यूपीआईटीएस-2026 में बीडा को मिला बेस्ट डिस्प्ले अवॉर्ड बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में भी अपनी औद्योगिक संभावनाओं और निवेश अवसरों को प्रदर्शित किया। बीडा के प्रदर्शनी स्टॉल को बेस्ट डिस्प्ले अवॉर्ड प्रदान किया गया। इससे बीडा की औद्योगिक परिकल्पना, विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश संभावनाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

काशी के आसमान में दिखेगा वायुसेना का शौर्य, नमो घाट पर 24-26 अक्टूबर तक होगा एयर शो

काशी के नभ में गूंजेगा वायुसेना का शौर्य: नमो घाट पर 24 से 26 अक्टूबर तक एयर शो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परखीं तैयारियां, सेक्टरवार तैनात होंगे मैजिस्ट्रेट व पुलिस बल 25 अक्टूबर के मुख्य समारोह में पीएम मोदी और रक्षा मंत्री के शामिल होने की संभावना भीड़ व यातायात प्रबंधन की बने एकीकृत कार्ययोजना, मॉकड्रिल कराने के निर्देश काशी देवाधिदेव महादेव की पावन नगरी काशी भारतीय वायुसेना के शौर्य, साहस और सामर्थ्य की साक्षी बनने जा रही है। गंगा की अविरल धारा के किनारे बसी काशी में जब आसमान भारतीय वायुसेना के विमानों की गर्जना से गूंजेगा, तो यह दृश्य देश के सामरिक सामर्थ्य और काशी की सनातन सांस्कृतिक विरासत का अनूठा संगम प्रस्तुत करेगा। वाराणसी के नमो घाट पर आगामी 24 से 26 अक्टूबर तक प्रस्तावित भव्य एयर शो की तैयारियों की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को उच्चस्तरीय समीक्षा की। 25 अक्टूबर को प्रस्तावित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की गरिमामयी उपस्थिति संभावित है। समीक्षा बैठक में भारतीय वायुसेना के अधिकारियों, वाराणसी जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष एयर शो की तैयारियों और संपूर्ण कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया। अधिकारियों ने आयोजन स्थल पर दर्शक दीर्घाओं, ग्रैंड स्टैंड, विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट अतिथियों के लिए निर्धारित क्षेत्र, मीडिया एरीना, प्रवेश एवं निकास मार्ग, सुरक्षा जांच केंद्र तथा अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी। नमो घाट के साथ गंगा के तटवर्ती क्षेत्रों में संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों को जोन और सेक्टर में विभाजित कर व्यवस्थित प्रबंधन की कार्ययोजना से भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस एयर शो को लेकर आम नागरिकों में भी उत्सुकता है और बड़ी संख्या में लोग भारतीय वायुसेना के प्रदर्शन को देखने के लिए पहुंच सकते हैं। इसे देखते हुए क्राउड मैनेजमेंट, सुगम यातायात, पार्किंग और जोनवार स्थल चिन्हांकन की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित की जाए। दर्शकों के आवागमन के मार्ग स्पष्ट और सुगम हों तथा प्रत्येक क्षेत्र में पेयजल, प्राथमिक चिकित्सा, स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध रहें। उन्होंने प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ प्रत्येक सेक्टर के लिए मैजिस्ट्रेट की सुनियोजित तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि आयोजन के दौरान नमो घाट के साथ काशी के प्रमुख घाटों और आसपास के क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। ऐसे में घाटों पर भीड़ प्रबंधन, यातायात संचालन, पार्किंग तथा जल और थल मार्ग से आवागमन की व्यवस्थाओं को एकीकृत कार्ययोजना के साथ संचालित किया जाए। संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और आपातकालीन व्यवस्थाओं का पूर्वाभ्यास भी कराया जाए, ताकि आवश्यकता पड़ने पर सभी संबंधित टीमें तत्काल समन्वित कार्रवाई कर सकें। मुख्यमंत्री ने वाराणसी मंडल के सभी जनपदों के जिलाधिकारियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एयर शो के दौरान आसपास के जनपदों से आने वाले लोगों की आवाजाही को देखते हुए आवश्यक मानव संसाधन और अन्य व्यवस्थाओं का समुचित समन्वय किया जाए। भारतीय वायुसेना, जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन तथा सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समयसीमा में तैयारियां पूरी करें, ताकि काशी आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और आम नागरिकों को सुरक्षित एवं सुगम वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

योगी सरकार इमरजेंसी हेल्थकेयर को बना रही हाईटेक, गोल्डन ऑवर में मरीजों को मिलेगी शीघ्र मदद

सीएम योगी से मिली स्टार्टअप को नई दिशा, इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक से बदलेगी तस्वीर  योगी सरकार इमरजेंसी हेल्थकेयर को बना रही हाईटेक, गोल्डन ऑवर में मरीजों को मिलेगी शीघ्र मदद  लखनऊ के स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक की पहल, एम्बुलेंस से अस्पताल तक बेहतर समन्वय पर जोर स्मार्ट तकनीक से दुर्घटना की जानकारी समय पर देने और मरीज को उचित अस्पताल तक पहुंचाने का प्रयास लखनऊ, गंभीर बीमारी, दुर्घटना या किसी अन्य मेडिकल इमरजेंसी में शुरुआती पहला घंटा मरीज की जिंदगी के लिए बेहद अहम होते हैं। ऐसे समय में सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि घटना की जानकारी, एंबुलेंस की उपलब्धता, अस्पताल तक सूचना पहुंचने और मरीज के लिए जरूरी मेडिकल तैयारियां समय पर होना भी महत्वपूर्ण है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए लखनऊ का हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक इमरजेंसी हेल्थकेयर को तकनीक से जोड़ने की दिशा में काम कर रहा है। स्टार्टअप की कोशिश ऐसी तकनीक विकसित करने की है, जिससे इमरजेंसी की स्थिति में मरीज, रिस्पॉन्स टीम, एंबुलेंस और अस्पताल के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। गोल्डन ऑवर पर केंद्रित है हिंदकेयर मेडटेक स्टार्टअप यूपी स्टार्टअप मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि योगी सरकार की ओर से प्रदेश में स्टार्टअप और इनोवेशन के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2026 के तहत प्रदेश को देश के अग्रणी स्टार्टअप इकोसिस्टम में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में यू-हब जैसे डीप-टेक इनक्यूबेशन सेंटर, 20 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, जिला स्तर पर इनक्यूबेशन के विस्तार और स्टार्टअप्स के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इसी के तहत मेडिकल क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप हिंदकेयर मेडटेक को लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई के एसटीपीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इनक्यूबेट किया गया है। स्टार्टअप की पूरी सोच इमरजेंसी के उस 'गोल्डन ऑवर' पर केंद्रित है, जिसमें समय पर पहचान, मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना और तत्काल चिकित्सा उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्टार्टअप का मूल विचार है कि सही मरीज को सही समय पर सही जानकारी के साथ सही अस्पताल तक पहुंचाया जाए। दुर्घटना की सूचना से अस्पताल तक बनेगा तकनीकी कनेक्शन मिशन के सीईओ सुमित महाजन ने बताया कि स्टार्टअप की प्रमुख पहल लाइफडैश स्मार्ट क्रैश-डिटेक्शन और इमरजेंसी अलर्ट प्लेटफॉर्म है। यह तकनीक संभावित सड़क दुर्घटना की पहचान करने और रियल टाइम मॉनिटरिंग के साथ इमरजेंसी नोटिफिकेशन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसके जरिए घटना स्थल से इमरजेंसी रिस्पॉन्डर, एंबुलेंस सेवा और अस्पताल तक सूचना के प्रवाह को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है।स्टार्टअप का उद्देश्य केवल दुर्घटना की पहचान तक सीमित नहीं है। इसकी परिकल्पना एक ऐसे कनेक्टेड इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम की है, जिसमें घटनास्थल से लेकर अस्पताल तक जरूरी जानकारी तेजी से पहुंच सके। इससे सूचना और समन्वय में होने वाली देरी को कम करने में मदद मिल सकती है और गोल्डन ऑवर के दौरान मरीज को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकती है। सीएम योगी के सामने भी प्रस्तुत की तकनीक स्टार्टअप के संस्थापक ने हाल ही में गोरखपुर में आयोजित एक स्टार्टअप/ टेक्नोलॉजी कार्यक्रम में अपनी तकनीक और विजन को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने भी प्रस्तुत किया। स्टार्टअप की टीम ने इमरजेंसी हेल्थकेयर में तकनीक के इस्तेमाल और मरीज, एंबुलेंस तथा अस्पताल के बीच बेहतर कनेक्टिविटी की अपनी परिकल्पना साझा की। स्टार्टअप की टीम में डॉ. आयुष सिंह फाउंडर एवं डायरेक्टर के रूप में क्लीनिकल विजन और हेल्थकेयर रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं।

यूपी में बढ़ेगा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क, PM E-Drive के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य

योगी सरकार प्रदेश में कर रही इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार,पीएम ई- ड्राइव योजना के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य 238 स्थानों पर कार्य आगे बढ़ा, 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन पूर्ण, 240 नए स्थान भी चिह्नित सभी डीएम सार्वजनिक स्थल, बस स्टेशन, मॉल, ढाबों सहित अन्य स्थानों का चिन्हीकरण कर संबंधित विभाग को प्रस्ताव जल्द भेजें लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक चार्जिंग ढांचे के विस्तार की योजना पर काम तेज किया जा रहा है। योगी सरकार में प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के अंतर्गत यूपी रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (यूपीआरईवी) द्वारा राज्य में बड़े स्तर पर सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। योजना के मौजूदा चरण में 20 समूहों में 238 स्थान स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 99 स्थानों के लिए समझौता ज्ञापन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि 139 स्थानों पर समझौता ज्ञापन लंबित हैं। 20 समूहों में 238 स्थान स्वीकृत प्रस्तावित चार्जिंग नेटवर्क के तहत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा-ग्रेटर नोएडा) में 39, गाजियाबाद में 6 और मेरठ में 35 स्थान शामिल हैं। गैर-एनसीआर क्षेत्र में आगरा के 21, प्रयागराज के 13, गोरखपुर के 32, कानपुर के 12, कानपुर देहात के 2, लखनऊ के 36, मथुरा के 14 और वाराणसी के 28 स्थान प्रस्तावित हैं। कुल 238 स्वीकृत स्थानों में से 99 पर समझौता ज्ञापन निष्पादित हो चुके हैं। पीएम ई- ड्राइव योजना के दूसरे चरण में 1,500 स्थानों का लक्ष्य    प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना के दूसरे चरण में एनसीआर के 8 जिलों और माल परिवहन गलियारे को ध्यान में रखते हुए कुल 1,500 स्थानों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें नगर निगमों, उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम, परिवहन विभाग, विद्युत वितरण कंपनियों, औद्योगिक विकास प्राधिकरणों, पर्यटन, वित्त, स्वास्थ्य, शिक्षा, गन्ना संस्थान और मंडी समितियों समेत विभिन्न विभागों के स्थान शामिल हैं। अब तक 240 स्थानों की पहचान की जा चुकी है, जबकि 1,260 स्थानों की पहचान की जानी शेष है। उत्तर प्रदेश के नगर निगम क्षेत्रों में 129 स्थान चिह्नित किया दूसरे चरण के तहत नगर निगम क्षेत्रों के लिए कुल 129 स्थान चिह्नित हैं। इनमें अलीगढ़ के 22, अयोध्या के 13, बरेली के 16, फिरोजाबाद के 15, झांसी के 16, मुरादाबाद के 7, सहारनपुर के 5, शाहजहांपुर के 10, आगरा के 8, कानपुर नगर के 11, मेरठ के 5 तथा कानपुर देहात का एक स्थान शामिल है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के लिए 74, गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण के लिए 10 और विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 26 स्थानों की पहचान की गई है। अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों और शैक्षणिक संस्थानों में भी चार्जिंग स्टेशन   इस योजना के तहत मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, औद्योगिक क्षेत्रों, उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण के औद्योगिक पार्कों, विश्वविद्यालयों, गन्ना संस्थान केंद्रों, मंडी समितियों तथा जिलाधिकारी कार्यालय, विकास भवन और तहसील कार्यालयों जैसे स्थानों को भी शामिल किया गया है। प्रस्तावित सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों में 60 किलोवाट क्षमता के दो डीसी चार्जर और 12 किलोवाट क्षमता के एक एसी/डीसी चार्जर की व्यवस्था का प्रावधान है। योजना का उद्देश्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन उपयोगकर्ताओं के लिए सुलभ, विश्वसनीय और व्यापक सार्वजनिक चार्जिंग ढांचा तैयार करना है।    दरअसल, अभी हाल ही में मुख्य सचिव की बैठक में बताया गया कि एनसीआर एवं नॉन-एनसीआर क्षेत्रों में चिन्हित 238 लोकेशन के सापेक्ष अब तक 99 एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जबकि 139 लोकेशन के एमओयू शेष हैं। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने जनपदों में सार्वजनिक स्थलों, बड़े कार्यालयों, बस स्टेशनों, इंडस्ट्रियल पार्कों, शिक्षण संस्थानों, मॉल, ढाबों, पार्किंग स्थलों सहित अन्य उपयुक्त स्थानों का चिन्हीकरण कर संबंधित विभाग को प्रस्ताव शीघ्र प्रेषित करें, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक चार्जिंग अवसंरचना के विकास की कार्यवाही समयबद्ध रूप से आगे बढ़ाई जा सके।

अगले महीने 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देगी सरकार: सीएम योगी

छात्रवृत्ति का पैसा तक खा गई थी सपा सरकार: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्वदशम (9-10) तथा दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खाते में हस्तांतरित की 148 करोड़ रुपये से अधिक छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति मुख्यमंत्री ने 11 विद्यार्थियों को मंच पर अपने हाथों से दिया छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र, 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को मिली छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति अगले महीने 50 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटी देगी सरकार: सीएम योगी मंत्रियों का उदाहरण देकर बोले सीएम- ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा लखनऊ,   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि 2016-17 में अनुसूचित जाति-जनजाति की छात्रवृत्ति भेजी ही नहीं गई। तत्कालीन सरकार यह छात्रवृत्ति खा गई। 2017 में हमारी सरकार बनी तो हमने 2016-17 व 2017-18 की छात्रवृत्ति एक साथ भेजी। पहले केवल 2900 करोड़ रुपये ही छात्रवृत्ति दी जाती थी। आज हमारी सरकार 6200 करोड़ रुपये (दोगुने से अधिक) छात्रवृत्ति देती है।  मुख्यमंत्री ने शनिवार को लोकभवन में चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्वदशम (9-10) तथा दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खाते में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति हस्तांतरित की और 11 विद्यार्थियों को अपने हाथ से छात्रवृत्ति प्रमाण पत्र भी सौंपे। सीएम ने आश्वस्त किया कि छात्रों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। हर पात्र बच्चे को छात्रवृत्ति मिलेगी, छूटे हुए बच्चे भी जल्द आवेदन करें। उन्होंने बच्चों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि छात्रवृत्ति की राशि को खान-पान के बजाय शिक्षा पर ही खर्च कीजिए। इससे अच्छी पाठ्य पुस्तकें, रेफरेंस बुक खरीदिए। पाठ्यक्रम के साथ ही महापुरुषों की आत्मकथा, ज्ञानवर्धक व धार्मिक पुस्तकों को पढ़िए, अपना बुक बैंक बढ़ाइए। सरकार दो करोड़ युवाओं को टैबलेट दे रही है, 60 लाख को मिल चुका है। शेष को भी जल्द दिया जाएगा। अब सीधे अकाउंट में जाती है छात्रवृत्ति सीएम ने कहा कि पहले 100 में से 60-70 बच्चों को ही छात्रवृत्ति का लाभ मिलता था। बाबू और अन्य लोग इस पर डाका डालते थे, छात्र ठगा रहता था। छात्रवृत्ति के लिए चक्कर लगाने में उससे ज्यादा तो युवाओं का किराया लग जाता था। लेकिन, आज खाता खोलकर छात्रों का पैसा सीधे उसमें भेजा जाता है। हमारे समय यह व्यवस्था नहीं थी, लेकिन मोदी जी ने जीरो अकाउंट पर बैंक खाते खुलवा दिए। 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति/शुल्क प्रतिपूर्ति सीएम योगी ने कहा कि गत वर्ष 69 लाख बच्चों को 6200 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई। 9 वर्ष में 4 करोड़ से अधिक बच्चों को छात्रवृत्ति-शुल्क प्रतिपूर्ति मिली है, जबकि 2017 के पहले यह राशि और छात्रों की संख्या भी कम थी। पहले की सरकारें युवाओं को प्रोत्साहन नहीं देती थी और न समय से छात्रवृत्ति मिलती थी। छात्रवृत्ति देने के लिए सरकार ने तय की समयसीमा  सीएम ने बताया कि गत वर्ष अनुसूचित जाति-जनजाति के 26.26 लाख विद्यार्थियों को 2750 करोड़, अल्पसंख्यक वर्ग के 5.89 लाख बच्चों को 360 करोड़, पिछ़ड़ा वर्ग के 37 लाख विद्यार्थियों को 3072 करोड़ रुपये छात्रवृत्ति दी गई। इसी क्रम में अल्प आय वर्ग वर्ग के 9.40 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति दी गई। सरकार ने छात्रवृत्ति वितरण की समयसीमा तय की है। प्रवेश प्रक्रिया संपन्न होने के बाद छात्रवृत्ति की राशि खाते में भेजनी शुरू की गई। तय किया गया कि 2 अक्टूबर (अवकाश के कारण 3 अक्टूबर) तथा 26 जनवरी तक हर हाल में छात्रों तक धनराशि पहुंच जाए। अगले महीने 50,000 मेधावी बच्चियों को देंगे स्कूटी मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले जेईई, नीट की तैयारी के लिए युवा दूसरे राज्यों में जाते थे। अब युवा मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग के जरिए इसका लाभ उठा रहे हैं। सीएम ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना व मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगले महीने 50,000 मेधावी बच्चियों को स्कूटी देंगे। 2017 के पहले सैफई सिंडिकेट को लूट-खसोट से ही फुर्सत नहीं थी। अपने परिवार की सोचने वाले इन लोगों के लिए प्रदेश के अन्य लोग बेगाने थे, पर अब यूपी खुशहाली की राह पर चला है।  कोई भी पात्र छूटने न पाए, हर महीने बच्चे के खाते में जाए पैसा  सीएम ने समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से कहा कि हर महीने बच्चे के खाते में पैसा जाए, कोई भी पात्र बच्चा छूटने न पाए। पिछली बार कई कारणों से एससी-एसटी वर्ग के 4 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई। तब पोर्टल को ठीक कराया गया, अब उन वंचित बच्चों को भी छात्रवृत्ति मिलने जा रही है। धनराशि के अभाव में कोई बच्चा शिक्षा से वंचित न रहने पाए। छात्रवृत्ति अल्प आय परिवार के छात्रों के लिए संबल बनेगी।  हर पात्र बच्चे तक छात्रवृत्ति पहुंचाएंगे सीएम ने कहा कि हर पात्र बच्चे तक छात्रवृत्ति पहुंचाएंगे। आज 4.60 लाख बच्चों को छात्रवृत्ति मिल रही है। इसे 70 लाख बच्चों तक पहुंचाना है। मोदी जी के टेक्नोलॉजी अभियान से सेंधमारी रुकी, अब बच्चों की छात्रवृत्ति में कोई सेंधमारी नहीं कर सकता। सरकार ने अब तक लगभग 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। छह माह में एक लाख और युवाओं को नौकरी मिलेंगी। आप भी मेहनत से तैयारी कीजिए, नौकरी जरूर मिलेगी।  ईमानदारी से प्रयास होगा तो परिणाम भी अनुकूल मुख्यमंत्री ने मंच पर बैठे मंत्रियों का उदाहरण देकर युवाओं से कहा कि परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। प्रयास ईमानदारी से होगा तो परिणाम भी अनुकूल आएगा। उन्होंने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर के संघर्षों का उदाहरण देते हुए कहा कि परिश्रम का परिणाम आता है। राज्यमंत्री संजीव गोंड जंगलों में भटकते थे, उन्हें लगा कि नौकरी के पीछे नहीं भागना है, बल्कि जनता व जनजातीय समुदाय की आवाज उठाना है। मंत्री असीम अरुण आईपीएस के रूप में एडीजी व कानपुर के पुलिस आयुक्त रह चुके हैं। दानिश आजाद अंसारी और नरेंद्र कश्यप भी संघर्ष के साथ सामाजिक कार्य करते रहे। एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष बैजनाथ रावत पूर्व विधायक/सांसद रहे हैं। अब ये सभी लोग मंत्री के रूप में जनता की समस्याओं के समाधान का रास्ता निकालते हैं। बच्चों से बोले सीएम-आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली सीएम ने बच्चों से कहा कि आपकी पीढ़ी सौभाग्यशाली है कि यूपी में ऐसे समय में पढ़ रहे हैं, … Read more

स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जरूरी : राज्यमंत्री गौर

स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए स्वास्थ्य के प्रति सजग रहना आवश्यक : राज्यमंत्री गौर भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने कहा है कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक नागरिक का स्वास्थ्य के प्रति सजग और जागरूक होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने रेखांकित किया कि सेवा संकल्प अभियान का मूल ध्येय जनसेवा के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग तक सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बुनियादी सुविधाएं पहुंचाना है। श्रीमती गौर शनिवार को मिसरोद स्थित शासकीय नवीन उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में 'सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत आयोजित स्वास्थ्य शिविर के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। शिविर में नोबल हॉस्पिटल के विशेषज्ञों द्वारा विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों तथा स्थानीय नागरिकों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यक परामर्श एवं चिकित्सा सेवाएं प्रदान की गईं। राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने शिविर का अवलोकन किया और उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य जांच प्रक्रियाओं एवं चिकित्सा व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने नागरिकों को अपने दैनिक जीवन में स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने तथा नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कराने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने विद्यालय प्रांगण में फलदार एवं छायादार पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। साथ ही उन्होंने विद्यालय परिसर में आयोजित स्वच्छता अभियान में सहभागिता कर श्रमदान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण का संवर्धन और अपने परिवेश की स्वच्छता बनाए रखना हम सभी का सामूहिक एवं नैतिक दायित्व है। सार्वजनिक स्थलों तथा शैक्षणिक संस्थानों को स्वच्छ, निर्मल और हरा-भरा बनाए रखने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सक्रिय योगदान देना चाहिए। कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, स्वास्थ्य शिविर के चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ एवं बड़ी संख्या में गणमान्य स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।  

यूपी में साइबर फ्रॉड पर शिकंजा, सितंबर में 34% धनराशि फ्रीज; राष्ट्रीय औसत 31%

साइबर ठगों पर खाकी का ‘डिजिटल वज्रपात’ ठगी के बाद धनराशि को रोकने में राष्ट्रीय औसत से आगे निकला यूपी यूपी में धनराशि फ्रीज दर सितम्बर में बढ़कर 34% हो गई, जबकि राष्ट्रीय औसत 31% सीएम योगी के नेतृत्व में यूपी का साइबर डिफेंस हुआ मजबूत, 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव से तोड़ी गई डिजिटल जालसाजों की रीढ़ साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर बना डिजिटल ढाल, टेक्नोलॉजी से ठगों का नेटवर्क ध्वस्त कर रही योगी सरकार लखनऊ,  साइबर ठगी के खिलाफ उत्तर प्रदेश में पुलिस की कार्रवाई को तकनीक के जरिए मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में साइबर अपराध की रोकथाम के साथ ही ठगी के बाद धनराशि को रोकने और वापस कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सितंबर में साइबर फ्रॉड की रकम फ्रीज कराने की प्रदेश की दर 34 प्रतिशत रही, जो राष्ट्रीय औसत 31 प्रतिशत से अधिक है। साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर के माध्यम से रियल टाइम रूटिंग के जरिये डाइवर्ट की गई रकम को फ्रीज और रिकवर कराने की कार्रवाई की जा रही है। कई मामलों में तय समय सीमा के भीतर 100 प्रतिशत तक रिकवरी दर्ज की गई है। प्रदेश में साइबर अपराध से बचाव के लिए 84 हजार साइबर अवेयरनेस ड्राइव भी चलाए गए हैं। इन अभियानों के माध्यम से लोगों को फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी, फर्जी अप्रूवल और साइबर ठगी के दूसरे तरीकों के प्रति जागरूक किया गया। सिनेमा हॉल से लेकर रेलवे स्टेशन तक विभिन्न स्थानों पर लोगों को डिजिटल लेनदेन में सावधानी बरतने और किसी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म की प्रामाणिकता जांचने की जानकारी दी गई। रियल टाइम ट्रैकिंग से रकम रोकने की कोशिश साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर साइबर ठगी की रकम रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम को रोकने की कार्रवाई शुरू की जाती है। रियल टाइम रूटिंग और डेटा शेयरिंग के जरिये डाइवर्ट किए गए फंड को फ्रीज कराने और उसे वापस कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है। इससे ठगी के बाद रकम के तेजी से दूसरे खातों में जाने की चुनौती से निपटने में मदद मिलती है। डीजी साइबर क्राइम ने जवानों को अत्याधुनिक तकनीक से किया लैस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर डीजी साइबर क्राइम विनोद कुमार सिंह ने प्रदेश के पुलिस कर्मियों को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया है। इसके अलावा जवानों को साइबर अपराध से मुकाबले के लिए नई तकनीक की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। एआई-डीपफेक, म्यूल अकाउंट और साइबर अपराध के बदलते तरीकों को देखते हुए पुलिस की तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। गोल्डन आवर में शिकायत जरूरी एसपी साइबर क्राइम राजेश यादव ने बताया कि साइबर फ्रॉड में समय सबसे महत्वपूर्ण है। पहले एक घंटे के भीतर शिकायत करने पर रकम को होल्ड या फ्रीज कराने की संभावना काफी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि फिशिंग, फर्जी वेबसाइट, डेटा चोरी और फर्जी अप्रूवल समेत कई तरीकों से साइबर अपराधी लोगों को निशाना बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते समय उसकी प्रामाणिकता की जांच करना और सतर्क रहना जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में साइबर अपराध से निपटने के लिए प्रदेश में मजबूत व्यवस्था की गई है। हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क है। वहीं लखनऊ में 1930 कॉल सेंटर और साइबर फ्रॉड मिटिगेशन सेंटर संचालित किया जा रहा है। शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक के माध्यम से रकम रोकने की कार्रवाई की जाती है। सिर्फ पुलिस नहीं, समाज की भागीदारी भी जरूरी साइबर अपराध की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। इसलिए इससे मुकाबले के लिए पुलिस और बैंकों के साथ स्कूल-कॉलेज, ग्राम पंचायत, स्वयं सहायता समूह, यूथ एवं स्पोर्ट्स क्लब और स्थानीय संगठनों की भागीदारी भी जरूरी है। जागरूकता और त्वरित शिकायत के जरिये साइबर ठगी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से प्रदान किए प्रमाणपत्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 4.60 लाख विद्यार्थियों की पढ़ाई को दिया ₹148 करोड़ का संबल   एक क्लिक पर छात्र-छात्राओं के बैंक खातों में पहुंची छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि   मुख्यमंत्री ने लोक भवन में 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से प्रदान किए प्रमाणपत्र   अन्य पिछड़ा वर्ग के 2.23 लाख और अनुसूचित जाति के 1.59 लाख विद्यार्थियों को मिला लाभ   लखनऊ उत्तर प्रदेश के 4,60,559 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को शनिवार को आर्थिक संबल मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में एक क्लिक कर डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में ₹148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि भेजी। उन्होंने मंच पर 11 छात्र-छात्राओं को अपने हाथों से छात्रवृत्ति प्रमाणपत्र भी प्रदान किए।   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से प्रमाणपत्र पाने वालों में रणबीर वर्मा, अजीत रावत, अंश मिश्रा, अलकैफ, अनन्या अवस्थी, मिली, अधिकांश वर्मा, करिश्मा, बुशरा, अभिषेक यादव और साइमा शामिल रहे। मुख्यमंत्री के हाथों प्रमाणपत्र पाकर विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे।   सरकार की इस पहल का सबसे अधिक लाभ अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिला है। अन्य पिछड़ा वर्ग के 2,23,615 विद्यार्थियों के खातों में ₹60.01 करोड़ भेजे गए। अनुसूचित जाति के 1,59,959 विद्यार्थियों को ₹64.54 करोड़ की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति मिली। इसी तरह सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों के खातों में ₹11.43 करोड़ और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों के खातों में ₹12.06 करोड़ पहुंचाए गए।   आर्थिक अभाव के कारण नहीं छूटेगी पढ़ाई योजना में अल्प आय वर्ग के पूर्वदशम यानी कक्षा नौ और दस के साथ दशमोत्तर कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को शामिल किया गया है। छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति से विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में मदद मिलेगी। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य आर्थिक अभाव को किसी विद्यार्थी की शिक्षा की राह में बाधा नहीं बनने देना है।   आधार आधारित भुगतान से बढ़ी पारदर्शिता छात्रवृत्ति आवेदन से लेकर भुगतान तक की व्यवस्था ऑनलाइन कर दी गई है। आधार आधारित भुगतान प्रणाली से धनराशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रही है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आधार आधारित पैकेट सिस्टम भी लागू किया गया है। इससे छात्रवृत्ति वितरण में बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और विद्यार्थियों को बिना किसी दौड़भाग के योजना का लाभ मिल रहा है।   प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 65.95 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को ₹4,793 करोड़ से अधिक की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति दी है। सरकार की कोशिश प्रक्रिया को और सरल बनाकर प्रत्येक पात्र विद्यार्थी तक योजना का लाभ पहुंचाने की है।

कवर्धा की बेटी ने बढ़ाया देश-प्रदेश का मान – विधायक शर्मा

एशिया कप विजेता गीता यादव से मिले उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा कवर्धा की बेटी ने बढ़ाया देश-प्रदेश का मान – विधायक शर्मा महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी कवर्धा निवास कार्यालय में हुई आत्मीय मुलाकात, गीता की खेल यात्रा और क्षेत्र में खिलाड़ियों के लिए संभावनाओं पर हुई चर्चा रायपुर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने अपने कवर्धा निवास कार्यालय में जूनियर महिला एशिया कप-2026 की विजेता भारतीय हॉकी टीम की सदस्य गीता यादव से मुलाकात कर उन्हें महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दी। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्होंने कहा कि आगे भी सफलता के नए कीर्तिमान प्राप्त करें। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कवर्धा की बेटी ने देश-प्रदेश का मान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया है। इस दौरान शर्मा ने गीता से उनकी अब तक की खेल यात्रा, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के अनुभव, प्रशिक्षण और भविष्य के लक्ष्यों के बारे में विस्तार से बातचीत की।        कबीरधाम जिले के बोड़ला की रहने वाली गीता यादव ने चीन के मोकी में आयोजित एएचएफ महिला जूनियर एशिया कप-2026 में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय टीम ने 13 सितंबर को खेले गए रोमांचक फाइनल में मेजबान चीन को 1-0 से पराजित कर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत ने लगातार तीसरी बार महिला जूनियर एशिया कप का खिताब जीता और एफआईएच जूनियर महिला विश्व कप के लिए भी क्वालीफाई किया।        टूर्नामेंट में मिडफील्डर के रूप में खेलीं गीता ने अपनी प्रतिभा की विशेष छाप छोड़ी। उन्होंने प्रतियोगिता में कुल चार गोल किए। मलेशिया के विरुद्ध भारत की 11-1 की बड़ी जीत में गीता ने दो गोल दागे, वहीं जापान के खिलाफ 7-0 की जीत में भी उन्होंने दो गोल कर टीम की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया।        उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने गीता की उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि एक सामान्य किसान परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। गीता ने अपनी प्रतिभा से कवर्धा के साथ पूरे छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया है। उनकी सफलता क्षेत्र की नई पीढ़ी, विशेषकर खेलों में आगे बढ़ने का सपना देख रही बेटियों के लिए प्रेरणादायी है।         मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री शर्मा और गीता यादव के बीच कवर्धा में खेल एवं खिलाड़ियों के प्रोत्साहन, स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा क्षेत्र में खेलों की संभावनाओं को और विस्तार देने को लेकर भी चर्चा हुई। शर्मा ने गीता से उनके अनुभव और खिलाड़ियों की जरूरतों के बारे में जानकारी ली। बोड़ला से भारतीय टीम तक का शानदार सफर          गीता ने हॉकी की शुरुआती शिक्षा कोच शिवा चौहान से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने बिलासपुर स्थित खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में प्रशिक्षण लेकर अपने खेल को निखारा। लगातार बेहतर प्रदर्शन के दम पर वह राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचीं और बाद में टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम से भी जुड़ीं। गीता ने वर्ष 2024 में नीदरलैंड और बेल्जियम दौरे से अपने अंतरराष्ट्रीय सफर की शुरुआत की। इसके बाद वह अर्जेंटीना तथा इंग्लैंड-स्कॉटलैंड दौरों में भी भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।          उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से हुई मुलाकात के दौरान गीता ने अपनी खेल यात्रा के अनुभव साझा किए। शर्मा ने उन्हें भविष्य में भी इसी समर्पण के साथ आगे बढ़ते हुए देश और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करने के लिए शुभकामनाएं दीं।