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ब्रेकिंग: होली के मौके पर वृंदावन में नहीं होंगे ठाकुर जी के दर्शन, नई अपडेट जारी

वृंदावन होली के अवसर पर इस वर्ष वृंदावन के प्रमुख मंदिरों में पूजा-अर्चना की व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। तीन मार्च को पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रग्रहण पड़ने के कारण ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के कपाट सूतक काल के दौरान बंद रहेंगे। इसी वजह से ब्रज में होली का उत्सव एक दिन पहले मनाया जाएगा और होलिका दहन भी निर्धारित तिथि से पहले किया जाएगा। मंदिर के सेवायत प्रहलाद बल्लभ गोस्वामी ने जानकारी दी कि सामान्यतः पूर्णिमा के दिन होली मनाई जाती है और शाम को होलिका दहन होता है। लेकिन इस बार दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 45 मिनट तक चंद्रग्रहण रहेगा। इसलिए होलिका दहन 2 मार्च की रात्रि में किया जाएगा। परंपरा के अनुसार अगले दिन डोलोत्सव मनाया जाता है, किंतु ग्रहण और सूतक के कारण दर्शन व्यवस्था में बदलाव रहेगा। सूतक काल के दौरान सुबह से शाम लगभग सात बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। तीन मार्च को ठाकुर बांकेबिहारी की सेवा-पूजा सुबह 9 बजकर 5 मिनट से पहले तथा शाम सात बजे के बाद ही संपन्न की जाएगी। नगर के प्राचीन सप्तदेवालयों में शामिल ठाकुर राधा दामोदर मंदिर में भी इसी प्रकार की व्यवस्था लागू रहेगी। यहां सुबह नौ बजे से शाम सात बजे तक मंदिर के पट बंद रखे जाएंगे। सेवायत कृष्ण बलराम गोस्वामी के अनुसार, मंगला आरती प्रातः चार बजे होगी, जिसके बाद धूप और श्रृंगार आरती संपन्न की जाएगी। शाम सात बजे कपाट खुलने के बाद गौर पूर्णिमा के अवसर पर ठाकुरजी का अभिषेक, धूप, संध्या आरती और शयन आरती आयोजित होगी। ठाकुर राधारमण मंदिर में भी तीन मार्च को धुलेंडी मनाई जाएगी, लेकिन चंद्रग्रहण के चलते यहां भी पूजा समय में परिवर्तन रहेगा। सेवायत पदमलोचन गोस्वामी ने बताया कि सुबह की सेवा छह बजे तक पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद सुबह छह बजे से शाम सात बजे तक, लगभग 13 घंटे, मंदिर के पट बंद रहेंगे। ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर की धुलाई और शुद्धिकरण प्रक्रिया के उपरांत नियमित पूजा-अर्चना पुनः आरंभ की जाएगी। ज्योतिषाचार्य रामविलास चतुर्वेदी के अनुसार, पूर्णिमा के दिन चंद्रग्रहण दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से शाम 6 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगा, जबकि सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू हो जाएगा। सूतक अवधि में पूजा-पाठ का विधान नहीं होने के कारण ब्रज के अधिकांश मंदिरों में कपाट बंद रखे जाएंगे। इस प्रकार चंद्रग्रहण के कारण इस वर्ष होली के पर्व पर वृंदावन में धार्मिक कार्यक्रमों और दर्शन व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन देखने को मिलेगा। श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से पहले समय की जानकारी अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।  

T20 World Cup: दो मैच जीतने पर भी भारत के लिए सेमीफाइनल की राह कठिन, सुपर-8 के समीकरण में बड़ा उलटफेर

 नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 का रोमांच अब धीरे-धीरे निर्णायक मोड़ पर पहुंच रहा है. पहला चरण खत्म हो चुका है और अब टूर्नामेंट सुपर-8 दौर में जारी है. जहां समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. 20 टीमों से शुरू हुआ ये महासमर अब 8 टीमों के बीच चल रहा है. जहां मैच दर मैच काफी कुछ बन बिगड़ रहा है. पहले पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के रद्द हुए मैच ने कहानी को पलटा तो अब रविवार को साउथ अफ्रीका की भारत के खिलाफ जीत ने पूरी तस्वीर ही बदल दी है. अब आलम ये है कि टी20 वर्ल्ड कप में पिछले 12 मैचों से अजेय रही टीम इंडिया को एक हार के चलते सेमीफाइनल से हाथ धोना पड़ा सकता है. यानी साउथ अफ्रीका की अहमदाबाद में 76 रनों की जीत भारत के टाइटल डिफेंड करने के सपने को तोड़ सकती है. ऐसा क्यों है आइए आपको समझाते हैं…  पहले सुपर-8 के बारे में जान लीजिए दो ग्रुप में 4-4 टीमें हैं. हर टीम अपने ग्रुप में बाकी तीन टीमों से एक-एक मैच खेलेगी. जीत पर 2 अंक, नो रिजल्ट पर 1 अंक और हार पर 0 अंक मिलते हैं. अगर अंक बराबर होते हैं तो नेट रन रेट (NRR) से फैसला होता है. यानी आसान भाषा में कहें तो नेट रन रेट का रोल भी काफी निर्णायक होने वाला है. अब सुपर-8 में ग्रुप 1 की स्थिति ग्रुप 1 में फिलहाल दक्षिण अफ्रीका पहले स्थान पर है. उसने अपना पहला मैच जीतकर 2 अंक हासिल किए हैं और उसका नेट रन रेट +3.800 तक पहुंच गया है. क्योंकि उसने टीम इंडिया को 76 रनों के बड़े अंतर से मात दी है. पहले बल्लेबाजी करते हुए उसने 188 रन बनाए और फिर भारत को 111 के स्कोर पर समेट दिया. अब भारत को अपने पहले मैच में हार का सामना करना पड़ा है, वो भी बुरे तरीके से, जिसके कारण वह फिलहाल चौथे स्थान पर है. भारत के 0 अंक हैं. लेकिन उससे ज्यादा बुरी खबर ये है कि उसका नेट रन रेट -3.800 हो गया है. यानी बहुत बुरी स्थिति में. वहीं, जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज ने अभी तक कोई मैच नहीं खेला है, इसलिए दोनों के 0-0 अंक हैं और नेट रन रेट 0.000 है. अब भारत के लिए क्या है मुश्किल इस ग्रुप से दो ही टीम का चयन सेमीफाइनल के लिए होना है. यानी भारत को अपने अगले दोनों मैच यानी जिम्बॉब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ बड़े अंतर से जीत हासिल करनी होगी. साथ ही उम्मीद करनी होगी की बाकी टीमों का रन रेट भी अच्छा न रहे. क्योंकि अगर तीन टीमें 2-2 जीत के साथ पहुंची तो फैसला रन रेट से होगा. ऐसे में भारत का ये खराब रन रेट उसे नुकसान पहुंचा सकता है.  सुपर-8 ग्रुप 2 की स्थिति ग्रुप 2 में इंग्लैंड ने जीत के साथ शुरुआत की है. 2 अंकों और +2.550 नेट रन रेट के साथ वह टॉप पर है. पाकिस्तान और न्यूजीलैंड का मैच बारिश के कारण बेनतीजा रहा, इसलिए दोनों को 1-1 अंक मिला है और उनका नेट रन रेट 0.000 है. श्रीलंका को अपने पहले मुकाबले में हार मिली और वह 0 अंक तथा -2.550 नेट रन रेट के साथ चौथे स्थान पर है. सेमीफाइनल और फाइनल का कार्यक्रम सुपर-8 के दोनों ग्रुप से टॉप-2 टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. पहला सेमीफाइनल 4 मार्च को खेला जाएगा (ग्रुप 1 की नंबर-1 टीम बनाम ग्रुप 2 की नंबर-2 टीम). दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को Wankhede Stadium में होगा (ग्रुप 2 की नंबर-1 टीम बनाम ग्रुप 1 की नंबर-2 टीम). फाइनल मुकाबला 8 मार्च को अहमदाबाद में प्रस्तावित है. हालांकि, यह तभी होगा जब पाकिस्तान फाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं करता.

मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री जैसे नवाचारों से बढ़ रही है गद्धों की संख्या

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज सोमवार को हलाली डेम क्षेत्र में लुप्तप्राय प्रजाति के 5 गिद्धों को प्राकृतिक आवास में मुक्त करेंगे। इनमें चार भारतीय गिद्ध (जिप्स इंडिकस) और एक सिनेरियस गिद्ध (एजिपीयस मोनाकस) शामिल हैं। उच्च परिशुद्धता वाले जीपीएस-जीएसएम उपग्रह ट्रांसमीटरों से सुसज्जित पाँच दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों को भोपाल स्थित गिद्ध संरक्षण प्रजनन केंद्र में व्यवस्थित अनुकूलन और अवलोकन अवधि के बाद मुक्त किया जा रहा है। टैगिंग प्रक्रिया सभी संबंधित संस्थाओं एवं वन विभाग के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में वाइल्डलाइफ एसओएस के वन्यजीव पशु चिकित्सक की देखरेख में हुई। यह पहल मध्यभारत के विकसित होते ‘गिद्ध परिदृश्य’ को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहाँ भारतीय गिद्ध सामान्यतः एक ही क्षेत्र में रहते हैं, वहीं सिनेरियस गिद्ध मध्य एशियाई फ्लाईवे के अंतर्गत लंबी दूरी का प्रवास करते हैं, जो 30 से अधिक देशों तक फैला विश्व का एक प्रमुख प्रवासी पक्षी गलियारा है। पक्षी संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मध्यप्रदेश वन विभाग ने डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के सहयोग से गिद्धों की गतिविधियों और निगरानी के लिए उपग्रह टेलीमेट्री कार्यक्रम प्रारंभ किया है। टेलीमेट्री से प्राप्त आंकड़ों के माध्यम से गिद्धों के भूदृश्य उपयोग, आवागमन पैटर्न और मानव-जनित दबावों के प्रति उनकी प्रतिक्रिया के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इससे प्रमुख पड़ाव स्थलों और भोजन क्षेत्रों की पहचान, संरक्षित एवं मानव-प्रधान क्षेत्रों में उनकी पारिस्थितिकी को समझने तथा बिजली के झटके, विषाक्तता और आवास क्षरण जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता मिल रही है। इस प्रक्रिया में संग्रहित वैज्ञानिक प्रमाण अधिक प्रभावी खतरा-निवारण रणनीतियाँ विकसित करने और सीमा-पार सहयोग सहित भूदृश्य स्तर पर संरक्षण योजनाओं को सशक्त बनाने में सहायक होंगे। मध्यप्रदेश में उपग्रह टेलीमेट्री से गिद्ध संरक्षण की एकीकृत डेटा-आधारित एवं भूदृश्य-स्तरीय संरक्षण का पारस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ है। इससे लुप्तप्राय गिद्ध प्रजातियों का संरक्षण होगा और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के प्रहरी के रूप में उनकी भूमिका भी दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित होगी। भारतीय परंपरा में गिद्धों को शक्ति और सम्मान का प्रतीक माना गया है। रामायण में उल्लेख है कि जटायु ने रावण से माता सीता की रक्षा के प्रयास में आत्मोत्सर्ग कर दिया। रामायण में ही उसके भाई सम्पाती की भी कथा है, जिसने अपने छोटे भाई जटायु को सूर्य की तपन से बचाते हुए बलिदान दे दिया था। पर्यावरण पारिस्थितिकी तंत्र में गिद्ध प्रकृति के सफाईकर्मी के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं, साथ ही बीमारियों के प्रसार को रोकने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। मध्यप्रदेश लंबे समय से देश में गिद्धों की समृद्ध आबादी का केंद्र रहा है। प्रदेश में भारतीय गिद्ध (लॉन्ग-बिल्ड वल्चर), सिनेरियस गिद्ध (ब्लैक वल्चर), मिस्र गिद्ध (व्हाइट स्कैवेंजेर वल्चर) और हिमालयन ग्रिफॉन जैसी प्रजातियाँ पाई जाती हैं। हाल ही में वल्चर एस्टिमेशन-2026 के पहले दिन दक्षिण पन्ना वन प्रभाग में एक हजार से अधिक गिद्धों का अवलोकन किया गया, जो हाल के वर्षों में सर्वाधिक संख्या है।  

साउथ अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद कप्तान सूर्या का गुस्सा, डगआट में सपोर्ट स्टाफ से भिड़े

 अहमदाबाद आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम को सुपर-8 मुकाबले में साउथ अफ्रीका के खिलाफ 76 रनों से करारी हार झेलनी पड़ी. इस हार के साथ ग्रुप-1 की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है और अब भारत के लिए अगले दोनों मैच 'करो या मरो' बन गए हैं. लीग स्टेज में लगातार चार जीत ने भले ही कमियों पर पर्दा डाल दिया था, लेकिन थोड़ा धीमी और काली मिट्टी वाली पिच पर भारतीय बल्लेबाजों की पोल खुल गई. टीम 188 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 18.5 ओवर में सिर्फ 111 रनों पर ढेर हो गई. जसप्रीत बुमराह ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 3 विकेट झटके, जिसने साउथ अफ्रीका को 187/7 पर रोकने में अहम भूमिका निभाई थी. शुरुआती ओवरों में उन्होंने दो विकेट लेकर प्रोटियाज को 20/3 कर दिया था. हालांकि, भारतीय बल्लेबाजों की नाकामी के चलते उनकी मेहनत बेकार चली गई. मुकाबले में साउथ अफ्रीका के लिए डेविड मिलर ने 35 गेंदों पर 63 रनों की आक्रामक पारी खेली. उन्हें युवा बल्लेबाज डेवाल्ड ब्रेविस (45 रन) और ट्रिस्टन स्टब्स (44*) का शानदार साथ मिला. भारतीय स्पिनर वरुण चक्रवर्ती को खास सफलता नहीं मिली और वे 4 ओवर में 47 रन दे बैठे. गंभीर की रणनीति काम नहीं आई मुकाबले में हार के बाद कप्तान सूर्यकुमार यादव काफी खफा दिखे. कप्तान सूर्या डगआउट में सपोर्ट स्टाफ के साथ लंबी बहस करते दिखे. इस मैच के लिए हेड कोच गौतम गंभीर के नेतृत्व में टीम मैनेजमेंट ने जो रणनीति बनाई थी, वो कारगर साबित नहीं हुई. ऐसे में सूर्या का गुस्सा होना स्वाभिवक था. सूर्या ने गंभीर से भी बात की, जिन्होंने गौर से उनकी बातों को सुना. रनचेज में भारत ने लगातार विकेट खोए. कप्तान एडेन मार्करम ने फॉर्म में चल रहे ईशान किशन (0 रन) को आउट कर भारत को शुरुआती झटका दिया. तिलक वर्मा (1 रन) का गलत शॉट चयन और डीआरएस की बर्बादी टीम पर भारी पड़ा. अभिषेक शर्मा (15 रन) भी लय में नहीं दिखे और मार्को जानसेन की धीमी गेंद पर आउट हो गए. कप्तान सूर्यकुमार यादव (18 रन) संघर्ष करते नजर आए. हार्दिक पंड्या (18 रन) और शिवम दुबे (42 रन) ने 35 रनों की साझेदारी जरूर की, लेकिन  साउथ अफ्रीका के गेंदबाज़ों की सटीक योजना के आगे टिक नहीं सके. मार्को जानसेन (4/22), केशव महाराज (3/24) और कॉर्बिन बॉश (2/12) ने मिलकर भारतीय बल्लेबाजी को तहस-नहस कर दिया. इस हार के बाद भारत के लिए जिम्बाब्वे (26 फरवरी) और वेस्टइंडीज (1 मार्च) के खिलाफ मुकाबले बेहद अहम हो गए हैं. सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए दोनों मैच जीतना जरूरी होगा. भारत की यह हार 2022 टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में इंग्लैंड से मिली हार के बाद पहली बड़ी पराजय है.अब देखना होगा कि टीम इस झटके से कैसे उबरती है.

भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में मप्र का दबदबा, 15 नेताओं को मिला अवसर

भोपाल भाजपा संगठन की राष्ट्रीय टीम में मध्य प्रदेश के कई चेहरे दिखाई दे सकते हैं। प्रदेश संगठन ने राज्य के ऐसे 15 नेताओं के नाम केंद्रीय नेतृत्व को भेजे हैं, जो अलग- अलग अंचलों से हैं और अभी सत्ता या संगठन के किसी पद पर नहीं हैं। भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की टीम का गठन होना है और अन्य मोर्चे भी गठित किए जाने हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने इस बारे में प्रदेश संगठन से सुझाव मांगे थे। वर्तमान में मध्य प्रदेश से सत्यनारायण जटिया (संसदीय बोर्ड सदस्य), ओम प्रकाश धुर्वे (राष्ट्रीय सचिव) और लाल सिंह आर्य (राष्ट्रीय अध्यक्ष, एससी मोर्चा) जैसे नेता राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पार्टी 2029 के लोकसभा चुनाव और संगठन की मजबूती को ध्यान में रखकर अनुभवी नेताओं के साथ-साथ युवा और महिला चेहरों को भी वरीयता देना चाहती है। पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में मध्य प्रदेश से कैलाश विजयवर्गीय सहित चार नेताओं को स्थान मिला था। उस दौरान कैलाश विजयवर्गीय राष्ट्रीय महासचिव थे।   बाद में वर्ष 2023 में वह राज्य में मंत्री बना दिए गए। पार्टी नेताओं का मानना है कि चूंकि पूर्व में राष्ट्रीय संगठन में एक ही समय में मध्य प्रदेश से दो-दो महासचिव थावरचंद गहलोत और नरेंद्र सिंह तोमर रहे हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि नितिन नवीन की टीम में भी मध्य प्रदेश का प्रभाव बढ़ सकता है। इस बार भी चार से पांच नेताओं को नितिन नवीन की टीम में स्थान मिलने की संभावना है। इसमें एक या दो महिलाएं भी हो सकती हैं। इसके साथ ही युवा नेताओं को भी अवसर मिल सकता है। बाकी अन्य को मोर्चा- प्रकोष्ठ में शामिल किया जा सकता है। दरअसल, मध्य प्रदेश हमेशा से ही भाजपा के लिए एक प्रयोगशाला की तरह रहा है। हिंदू महासभा हो या जनसंघ, दोनों की जड़ें मध्य प्रदेश में मजबूत रही हैं। यही कारण है कि भाजपा यहां लंबे समय से सत्ता में है। संगठन की मजबूती की दूसरी वजह यहां के कुशल संगठनकर्ता भी माने जा सकते हैं। जिनकी वजह से राष्ट्रीय संगठन के स्तर पर भी यहां के भाजपा कार्यकर्ताओं का दबदबा रहा है।

मध्य प्रदेश में खून की सुरक्षा पर बड़ा फैसला, अस्पतालों में लागू होगा ‘NAT’ टेस्ट

भोपाल प्रदेश के अस्पतालों में अब रोगियों को नैट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) मशीन से जांचा हुआ रक्त ही चढ़ाने के लिए ब्लड बैंक से दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने यह व्यवस्था पिछले वर्ष दिसंबर में सतना के जिला अस्पताल में थैलेसीमिया पीड़ित चार बच्चों को एचआइवी संक्रमित रक्त चढ़ाए जाने की घटना से सबक लेते हुए शुरू की है। इंदौर-भोपाल के शासकीय मेडिकल कालेज में पहले से यह मशीन लगी है। अब सभी संभागीय मुख्यालयों में नैट मशीनें स्थापित करने की तैयारी है। मशीन स्थापना और संचालन की कार्ययोजना बता दें कि नैट मशीनें सरकारी मेडिकल कालेजों या ज्यादा रक्त संग्रहण वाले जिला अस्पतालों में लगाई जाएंगी, जहां से रक्त अन्य अस्पतालों के ब्लड बैंकों में पहुंचाया जाएगा। मशीनें सरकार नहीं बल्कि निजी कंपनी लगाएंगी, इसके बदले में उन्हें प्रति टेस्ट के मान से भुगतान किया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा जिला अस्पताल में सभी ग्रुप का ब्लड उपलब्ध रहे, ताकि इमरजेंसी में भी नैट से बिना जांचे रक्त चढ़ाने की नौबत न आए।   रक्त में पांच बीमारियों की होगी सूक्ष्म जांच रक्तदान से मिलने वाले ब्लड में एचआइवी, हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी, मलेरिया और वीडीआरएल (यौन संक्रामक रोग) सहित पांच प्रकार की बीमारियों की जांच की जाती है। एचआइवी जांच कहीं रैपिड किट से तो कहीं एचआइवी का एक्लिया टेस्ट से की जाती है। एक्लिया टेस्ट में बीमारी आसानी से पकड़ में आ जाती है। सतना में एक्लिया की किट खत्म होने के कारण कुछ टेस्ट रैपिड किट से किए गए। नैट का लाभ यह है कि इसमें एचआइवी का विंडो पीरियड घटकर 15 दिन रह जाता है। विंडो पीरियड का लाभ और भविष्य की चुनौतियां विंडो पीरियड वह अवधि है, जिसमें बीमारी के विरुद्ध शरीर में एंटी बाडी नहीं बनने से वह पकड़ में नहीं आती। नई व्यवस्था में यह होगी चुनौती अधिकतर मामलों में स्वजन या परिचित द्वारा रक्तदान करने पर ही बदले में उसे ब्लड दिया जाता है। नैट से जांचा ब्लड ही रोगियों को उपलब्ध कराया जाए इसमें बड़ी चुनौती यह रहेगी कि ब्लड बैंक में सभी ब्लड ग्रुप का रक्त उपलब्ध रहे।

त्योहार में सफर आसान: होली को लेकर रेलवे ने चलाई विशेष ट्रेनें, जानें पूरा रूट और स्टॉपेज

बीना रेलवे ने होली पर यात्रियों की सुविधा एवं उनकी यात्रा मांग को पूरा करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों के लिए विशेष किराए पर स्पेशल ट्रेनें चलाने का निर्णय लिया गया है। इसी के तहत रेलवे ने एलटीटी-बनारस-एलटीटी, पुणे-गोरखपुर-पुणे एवं सीएसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी के बीच स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया है। रेलवे जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि 01073 एलटीटी-बनारस स्पेशल ट्रेन यात्रा मांग पर 25 एवं 26 फरवरी और होली के अवसर पर 4 एवं 5 मार्च को लोकमान्य तिलक टर्मिनस स्टेशन से दोपहर 12.15 बजे चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन रात 1.10 बजे बनारस स्टेशन पहुंचेगी। 01074 बनारस-एलटीटी स्पेशल ट्रेन 27 एवं 28 फरवरी एवं 6 एवं 7 मार्च को सुबह 6.35 बजे बनारस से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए दूसरे दिन शाम 4.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी। ट्रेन में एक एसी द्वितीय श्रेणी, 6 एसी तृतीय श्रेणी, 9 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी और 2 एसएलआरडी सहित कुल 22 कोच रहेंगे। ट्रेन दोनों दिशाओं में ठाणे, कल्याण, इगतपुरी, नासिक रोड, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, गोविंदपुरी जंक्शन, फतेहपुर, सूबेदारगंज (प्रयागराज) एवं वाराणसी स्टेशनों पर रुकेगी। पुणे-गोरखपुर-पुणे चलेगी 16-16 ट्रिप 01415 पुणे-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 21 से 28 फरवरी व 1 से 8 मार्च तक प्रतिदिन पुणे स्टेशन से सुबह 6.50 बजे चलेगी, जो बीना स्टेशन पर रुकते हुए दूसरे दिन शाम 4 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंचेगी। इसी प्रकार 01416 गोरखपुर-पुणे स्पेशल ट्रेन 22 फरवरी से 9 मार्च तक प्रतिदिन शाम 5.30 बजे गोरखपुर से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन 3.15 बजे पुणे स्टेशन पहुंचेगी। इस ट्रेन में 1 एसी द्वितीय श्रेणी, 5 एसी तृतीय श्रेणी, 6 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआरडी सहित कुल 18 कोच रहेंगे। यह स्टेशन पर दौंड कॉर्ड लाइन, अहिल्यानगर जंक्शन (अहमदनगर), कोपरगांव, मनमाड, भुसावल, खंडवा, इटारसी, रानी कमलापति, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर सेंट्रल, लखनऊ, गोंडा एवं बस्ती स्टेशनों पर रुकेगी। सीएसएमटी-गोरखपुर-सीएसएमटी के बीच चलेगी 16 ट्रिप स्पेशल ट्रेन 01079 सीएसएमटी-गोरखपुर स्पेशल ट्रेन 21 फरवरी से 8 मार्च तक प्रतिदिन सीएसएमटी स्टेशन से रात 10.30 बजे चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन सुबह 10 बजे गोरखपुर पहुंचेगी। इसी प्रकार 01080 गोरखपुर-सीएसएमटी स्पेशल ट्रेन 23 फरवरी से 10 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 2.30 बजे गोरखपुर से चलेगी, जो जंक्शन पर रुकते हुए तीसरे दिन रात 12.40 बजे सीएसएमटी पहुंचेगी। इस ट्रेन में एक एसी द्वितीय श्रेणी, 6 एसी तृतीय श्रेणी, 9 शयनयान श्रेणी, 4 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआरडी सहित कुल 22 कोच रहेंगे। यह ट्रेन दोनों तरफ से दादर, ठाणे, कल्याण, नासिक रोड, मनमाड़, जलगांव, भुसावल, खंडवा, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, कानपुर सेन्ट्रल, लखनऊ, गोंडा, बस्ती एवं खलीलाबाद स्टेशनों पर रुकेगी।

अब एक क्लिक में मिलेगा इलाज का पूरा रिकॉर्ड, BMHRC-हाइट्स एग्रीमेंट से पीड़ितों को बड़ी मदद

भोपाल भोपाल स्मारक अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र (BMHRC) में उपचार करा रहे गैस पीड़ितों और उनके आश्रितों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं अब और अधिक आधुनिक व सुगम होने जा रही हैं। अस्पताल में वर्षों पुराने मेडिकल रिकार्ड्स को अब पूरी तरह डिजिटल प्रारूप में बदला जाएगा। इसके लिए शनिवार को बीएमएचआरसी ने भारत सरकार के उपक्रम एचएलएल इन्फ्राटेक सर्विसेज लिमिटेड ((HITES) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। BMHRC की प्रभारी निदेशक डा. मनीषा श्रीवास्तव और हाइट्स के जोनल हेड प्रेम प्रकाश के बीच हुए इस समझौते के तहत मरीजों के पुराने रिकार्ड को स्कैन कर अस्पताल के 'हास्पिटल इन्फार्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम' (HIMS) से जोड़ा जाएगा। यह कार्य आगामी एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद मरीजों को भारी-भरकम फाइलें लेकर अस्पताल नहीं भटकना पड़ेगा।   सटीक इलाज और समय की बचत रिकार्ड डिजिटल होने से डाक्टरों को मरीज का पुराना उपचार इतिहास, पुरानी जांच रिपोर्ट और दवाओं का विवरण कंप्यूटर स्क्रीन पर ही मिल जाएगा। इससे न केवल इलाज में तेजी आएगी, बल्कि बार-बार होने वाली अनावश्यक जांचों से भी बचा जा सकेगा। आपात स्थिति में यह तकनीक जीवनरक्षक साबित होगी, क्योंकि मरीज की एलर्जी या पिछली सर्जरी की जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी। डिजिटलीकरण के फायदे     त्वरित निर्णय: डाक्टर स्क्रीन पर ही देख सकेंगे मरीज की संपूर्ण स्वास्थ्य कुंडली।     फाइलों से मुक्ति: कागजी दस्तावेजों के गुम होने या फटने का डर होगा खत्म।     समय की बचत: रजिस्ट्रेशन से लेकर उपचार तक की प्रक्रिया होगी पेपरलेस।     पारदर्शिता: जांच रिपोर्ट और दवाओं का पूरा विवरण सुरक्षित रूप से रहेगा उपलब्ध।

मुख्यमंत्री साय बोले – शिक्षा से जागरूकता, संगठन से मजबूत होता है समाज

रायपुर सशक्त समाज निर्माण में शिक्षा और संगठन की भूमिका अहम : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय आज बलौदा बाजार जिले के ग्राम चांपा में आयोजित छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय 80वें महाअधिवेशन में शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी एवं समाज सुधारक डॉ. खूबचंद बघेल की पुण्य तिथि पर दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समाज की विभूतियों को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री का गजमाला पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री  साय ने मनवा कुर्मी समाज को परिश्रमी, संगठित और उन्नत कृषक परंपरा वाला समाज बताते हुए कहा कि समाज का योगदान राज्य की प्रगति में महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने 80वें महाअधिवेशन की बधाई देते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मेल-मिलाप, समन्वय और सकारात्मक निर्णयों को बढ़ावा देते हैं, जिसका लाभ पूरे प्रदेश और देश को मिलता है। उन्होंने कहा कि राजस्व एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा के गृह ग्राम चांपा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शिक्षा सशक्त समाज निर्माण का सबसे मजबूत आधार है। उन्होंने समाज द्वारा बेटा-बेटी दोनों को शिक्षा से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षित समाज ही आत्मनिर्भर और प्रगतिशील समाज बनता है। उन्होंने महिला स्वरोजगार को बढ़ावा देने, युवाओं में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता और सामाजिक सुधार के प्रयासों को भी सराहनीय बताया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी की गारंटी को पूरा करने में पूरी प्रतिबद्धता से कार्य किया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास पूर्ण किए गए हैं। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 25 लाख 24 हजार किसानों से 141 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा गया है तथा होली से पूर्व किसानों को लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की अंतर राशि प्रदान की जाएगी। महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को अब तक 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में अब विकास की नई तस्वीर दिखाई दे रही है।उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री के संकल्प के अनुरूप मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में सरकार दृढ़ता से काम कर रही है। नियद नेल्लार योजना के माध्यम से लगभग 400 गांवों में विकास कार्यों को गति दी गई है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्राम नरदहा में सामुदायिक भवन निर्माण हेतु 50 लाख रुपये तथा बलौदा बाजार में सामुदायिक भवन के लिए 25 लाख रुपये की राशि प्रदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में पिछले दो वर्षों में उल्लेखनीय विकास हुआ है और किसानों, महिलाओं तथा युवाओं के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू की गई हैं। अधिवेशन में समाज के केंद्रीय अध्यक्ष  खोड़स राम वर्मा ने समाज द्वारा लिए गए सामाजिक सुधार के महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी। कार्यक्रम में राजिम विधायक  रोहित साहू सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी, महिलाएं, युवा और स्वजातीय बंधु उपस्थित थे।

वसुंधरा राजे अचानक भावुक हुईं और फिर छलक पड़े आंसू

झालावाड़/बकानी. राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे शनिवार को अपने निर्वाचन क्षेत्र झालावाड़ के दौरे पर थीं। बकानी के खोयरा गांव स्थित मुक्तेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद जब वे सांसद दुष्यंत सिंह की जनसंवाद पदयात्रा के तीसरे चरण के शुभारंभ समारोह के मंच पर पहुँची, तो एक अप्रत्याशित घटनाक्रम ने उन्हें भावुक कर दिया। कविता सुन मंच पर रो पड़ीं 'महारानी' समारोह के दौरान बकानी की एक युवती अदिति शर्मा ने वसुंधरा राजे के सम्मान में एक कविता का पाठ किया। इस कविता में राजे के माता-पिता (राजमाता विजयाराजे सिंधिया और जीवाजीराव सिंधिया), उनके दिवंगत भाई (माधवराव सिंधिया), उनके शासन करने के तरीके और उनकी जनकल्याणकारी योजनाओं का मार्मिक उल्लेख था। अपने माता-पिता और भाई का नाम सुनकर राजे स्वयं को रोक नहीं पाईं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। 'मैं आंसू रोक नहीं पाई' कार्यक्रम के बाद राजे ने इस वाकये का ज़िक्र सोशल मीडिया पोस्ट पर भी किया। इसमें उन्होंने लिखा, 'तीसरे चरण की इस पदयात्रा के अवसर पर अदिति शर्मा ने एक कविता पढ़ी, जिसमें मेरे संपूर्ण परिवार, मेरे शासन करने के तरीके और योजनाओं के बारे में उल्लेख था। माँ राजमाता विजय राजे सिंधिया जी, पिता श्रीमंत जीवाजी राव सिंधिया जी और भाई श्रीमंत माधव राव सिंधिया जी पर लिखी कविता सुन अपने आँसू रोक नहीं पाई। मेरे जीवन में इन तीनों के योगदान को मैं कभी नहीं भूल सकती।आज इनके बिना जीवन बहुत सूना लगता है। मेरे माता-पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं है। जब भी उनकी याद आती हैं, तब मैं लोगों से मिल रहे प्यार में उनको खोजने लगती हूँ और अहसास करती हूँ कि इन्हीं में मेरे खोए हुए परिवारजन है।' 'जनता का प्यार मिलेगा तो समय बदलेगा' भावुकता के बीच वसुंधरा राजे ने जनता को संबोधित करते हुए एक गहरा राजनीतिक संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी बहुत अच्छा समय होता है और कभी बहुत खराब। राजे ने जोर देकर कहा, "धन-दौलत ही सब कुछ नहीं होता, जनता का प्यार सबसे अनमोल है। अगर जनता का प्यार मिलेगा तो समय जरूर बदलेगा।" राजे का यह बयान उन अटकलों के बीच आया है जिसमें कहा जा रहा था कि चुनाव न होने के बावजूद इस यात्रा का क्या औचित्य है। राजे ने स्पष्ट किया कि वे इस यात्रा के माध्यम से कुछ लेने नहीं, बल्कि केवल जनता का प्यार और आशीर्वाद लेने आई हैं। किसानों के दर्द पर मरहम: फसल खराबे का मुद्दा जनसंवाद यात्रा के दौरान केवल भावनाएं ही नहीं, बल्कि किसानों की समस्याएं भी प्रमुखता से उठीं। पिछले दो दिनों में हुई तेज हवाओं और बेमौसम बारिश के कारण अफीम सहित अन्य फसलों को भारी नुकसान पहुँचा है। मुआवजे की मांग: किसानों ने राजे और सांसद दुष्यंत सिंह के सामने विशेष गिरदावरी और शीघ्र मुआवजे की मांग रखी। भरोसा: सांसद दुष्यंत सिंह ने किसानों को आश्वस्त किया कि वे सरकार से बात कर उचित मुआवजा दिलवाने का प्रयास करेंगे। झालावाड़: राजे का अभेद्य दुर्ग और परिवार पूर्व सीएम ने एक बार फिर दोहराया कि पूरा झालावाड़ जिला उनका परिवार है। उन्होंने कहा कि इस चार दिवसीय यात्रा के दौरान जो भी समस्याएं सामने आएंगी, उनका त्वरित समाधान किया जाएगा। इस अवसर पर विधायक गोविंद रानीपुरिया, पूर्व विधायक नरेंद्र नागर और जिलाध्यक्ष हर्षवर्धन शर्मा सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।