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चिकन नेक पर केंद्र सरकार का बड़ा कदम, 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर बनेगा

भारत की रणनीतिक नब्ज 'चिकन नेक' पर केंद्र सरकार का धमाकेदार प्लान: जमीन के नीचे बनेगा 40 किमी लंबा अंडरग्राउंड रेलवे कॉरिडोर!  सिलीगुड़ी  पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के पास स्थित 'चिकन नेक' – वह संकरी भूमि पट्टी जो भारत की शिराओं में सबसे संवेदनशील धमनी की तरह काम करती है। मात्र 20 किलोमीटर चौड़ी और 60 किलोमीटर लंबी यह पट्टी, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की सीमाओं से घिरी हुई, पूर्वोत्तर के आठ राज्यों – अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा – को बाकी भारत से जोड़ने वाला एकमात्र जमीनी गलियारा है। वर्षों से दुश्मन ताकतें इसी की कमजोरी को निशाना बनाती रहीं, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे अभेद्य किले में बदलने का मास्टरस्ट्रोक प्लान तैयार किया है। जी हां, केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट चर्चा के दौरान खुलासा किया कि 'चिकन नेक' के टिन माइल हाट और रंगापानी रेलवे स्टेशनों के बीच 40 किलोमीटर लंबा अंडरग्राउंड रेलवे टनल बनाया जाएगा। यह न केवल कनेक्टिविटी को मजबूत करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी अटल बना देगा!कल्पना कीजिए – पहाड़ों और जंगलों के बीच वह संकरा कॉरिडोर, जहां आज रेल लाइनें, हाईवे, तेल पाइपलाइन और कम्युनिकेशन नेटवर्क आपस में उलझे हुए हैं। भीड़भाड़, प्राकृतिक आपदाएं या दुश्मनी की साजिशें – सब कुछ यातायात को ठप कर सकती हैं। लेकिन अब यह सब भूमिगत हो जाएगा! नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के जीएम चेतन कुमार श्रीवास्तव ने साफ कहा, "यह अंडरग्राउंड लाइन सुरक्षा के लिहाज से अनिवार्य है।" प्राकृतिक विपत्तियों हो या मानवीय खतरों, यह टनल सबको झेल लेगी। यात्री ट्रेनें तेज रफ्तार से दौड़ेंगी, मालगाड़ियां बिना रुकावट पहुंचेंगी, और सबसे अहम – डिफेंस लॉजिस्टिक्स यानी सेना का हथियार-बारूद, सैनिकों की आवाजाही बिल्कुल सुरक्षित रहेगी। दुश्मन भले ही आसमान से निगाह रखे या जमीन पर साजिश रचे, लेकिन भूमिगत कॉरिडोर को छू भी न पाएंगे!यह प्लान सिर्फ टनल तक सीमित नहीं। मौजूदा रेल ट्रैक को चार-लाइन (फोर-लेन) में बदला जाएगा, ताकि ट्रैफिक जाम जैसी समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए। रेल मंत्री वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा, "नॉर्थ-ईस्ट को बाकी भारत से जोड़ने वाले इस 40 किमी स्ट्रैटेजिक कॉरिडोर पर अंडरग्राउंड रेल ट्रैक बिछाने की योजना है। इससे कनेक्टिविटी मजबूत और सुरक्षित होगी।" यह भारत की लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जो पूर्वोत्तर को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने के साथ-साथ सामरिक दृष्टि से अभेद्य बनाएगा। सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जो देश का सबसे व्यस्त और संवेदनशील ट्रांजिट जोन है, अब दुश्मनों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित होगा। भारत अब चिकन नेक को चिकन नेक नहीं, बल्कि 'स्टील नेक' बना रहा है – मजबूत, लचीला और अटल!इस ऐतिहासिक कदम से पूर्वोत्तर के लाखों लोग लाभान्वित होंगे। तेज ट्रेनें, सस्ता माल ढुलाई, पर्यटन में उछाल और निवेश का दौर – सब कुछ संभव हो जाएगा। केंद्र सरकार की यह दूरदृष्टि न केवल सीमाओं की रक्षा करेगी, बल्कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' के सपने को साकार करेगी। क्या आप तैयार हैं इस क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी बनने को?

योगी सरकार ने द गंगा सहकारी चीनी मिल के आधुनिकीकरण/विस्तारीकरण के लिए स्वीकृत किए हैं 261.91 करोड़ रुपये

सीएम योगी से मिले भाकियू प्रवक्ता, जताया आभार  योगी सरकार ने द गंगा सहकारी चीनी मिल के आधुनिकीकरण/विस्तारीकरण के लिए स्वीकृत किए हैं 261.91 करोड़ रुपये  भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा- यह निर्णय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों व चीनी उद्योग के लिए ऐतिहासिक  लखनऊ  भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। द गंगा सहकारी चीनी मिल मोरना (मुजफ्फरनगर) के आधुनिकीकरण/विस्तारीकरण के लिए 261.91 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने पर उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। मलिक ने कहा कि यह निर्णय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों और चीनी उद्योग के लिए ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात के दौरान धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि द गंगा सहकारी चीनी मिल के आधुनिकीकरण एवं क्षमता विस्तार के लिए आपकी अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा लिए गए ऐतिहासिक निर्णय पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) एवं क्षेत्र के लाखों गन्ना किसानों की ओर से आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस मिल की पेराई क्षमता को प्रथम चरण में 2500 TCD से बढ़ाकर 3500 TCD तथा भविष्य में 5000 TCD तक ले जाने की योजना और इसके लिए लगभग 262 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति देना स्पष्ट करता है कि आपकी सरकार किसानों की आय, समयबद्ध गन्ना भुगतान और आधुनिक कृषि आधारित उद्योगों के विकास को लेकर प्रतिबद्ध है। यह निर्णय न केवल मोरना क्षेत्र, बल्कि पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा। इससे पेराई में तेजी आएगी, किसानों को समय पर भुगतान होगा तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार व आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कदम न केवल इस मिल की उत्पादन क्षमता, दक्षता और तकनीकी स्तर को आधुनिक बनाएगा, बल्कि क्षेत्र के हजारों गन्ना किसानों की आय, रोजगार और आर्थिक सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।  मलिक ने मुख्यमंत्री से कहा कि आपकी दूरदर्शी सोच के कारण किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा तथा मिल की कार्यक्षमता बढ़ेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे तथा पर्यावरण अनुकूल तकनीक को बढ़ावा मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा समयबद्ध गन्ना मूल्य भुगतान, चीनी मिलों का आधुनिकीकरण, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, ग्रामीण अधोसंरचना का विकास और किसान-कल्याणकारी योजनाएं किसानों के मन में विश्वास और सुरक्षा की भावना को मजबूत करती हैं। उन्होंने आशा जताई कि सीएम के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश का गन्ना क्षेत्र निरंतर प्रगति करेगा।

मोहन सरकार का किसानों के लिए तोहफा, 12 हज़ार करोड़ रुपये अब किसानों के खाते में डालेंगी सरकार

भोपाल मध्य प्रदेश के किसानों के लिए सरकार ने राहत दी है। दरअसल धान किसानों के लिए सरकार आंशिक राहत लेकर आई है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में इस बार धान का बंपर उत्पादन हुआ जिसके कारण रिकार्ड खरीदी भी हुई। सीएम मोहन यादव ने कहा कि इस साल 51.74 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान उपार्जित की गई है । खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था । इससे  किसानों को इससे बड़ी राहत मिली। अब  राज्य सरकार, धान किसानों के खातों में कुल 12 हज़ार करोड़ से ज्यादा की राशि डालेगी, और सरकार अधिकतर राशि का भुगतान भी कर  चुकी है। सीएम मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को इसकी राशि उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है। किसानों को जल्द ही भुगतान हो इसके लिए तकनीक आधारित भुगतान प्रणाली लागू की गई है। समर्थन मूल्य में की गई वृद्धि का किसानों को खासा लाभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था, जो पिछले सत्र के एमएसपी से 69 रुपए अधिक है। पिछले खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 रुपए प्रति क्विंटल था। न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई इस वृद्धि का किसानों को खासा लाभ हुआ है। खरीफ सत्र में प्रदेश में कुल 8 लाख 59 हज़ार 822 धान उत्पादक किसानों का पंजीयन किया गया था। इनमें से 7 लाख 89 हज़ार 757 किसानों ने स्लॉट बुक कर धान उपार्जन प्रक्रिया में भाग लिया। इन किसानों में से 7 लाख 62 हज़ार 620 किसान (89 प्रतिशत) धान विक्रेता के रूप में उपार्जन केंद्रों पर पहुंचे। इस वर्ष धान उपार्जन के लिए प्रदेश में 1,436 उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए। सीजन में 51 लाख 74 हज़ार 792 मीट्रिक टन धान का उपार्जन किया गया। उपार्जित धान में से 48 लाख 38 हज़ार 637 मीट्रिक टन से अधिक धान का परिवहन भी पूरा कर लिया गया है। परिवहन किए गए धान में से 46 लाख 30 हज़ार 21 मीट्रिक टन धान गुणवत्ता परीक्षण के बाद स्वीकार किया जा चुका है। कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंकलित सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस सीजन में उपार्जित धान के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंकलित किया गया। बेची गई धान की यह पूरी राशि किसानों को दी जाएगी इस आंकलित मूल्य में से करीब 11 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे अंतरित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उपार्जन मूल्य से किसानों को आर्थिक संबल मिला है। समर्थन मूल्य में बढ़ौतरी करने से किसानों को मिला है लाभ सीएम मोहन यादव ने बताया कि खरीफ़ सीजन में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया था, जो पिछले सत्र के एमएसपी से 69 रुपए अधिक है। न्यूनतम समर्थन मूल्य में की गई इस वृद्धि का किसानों को खासा लाभ हुआ है। आपको बता दें कि  खरीफ सत्र में  कुल 8 लाख 59 हज़ार 822 धान उत्पादक किसानों का पंजीयन किया गया था। इनमें से 7 लाख 89 हज़ार 757 किसानों ने स्लॉट बुक कर धान उपार्जन प्रक्रिया में हिस्सा लिया था मोहन यादव ने कहा कि इस सीजन में उपार्जित धान के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य कुल 12 हज़ार 259 करोड़ रुपए आंकलित किया गया। अब बेची गई धान की यह पूरी राशि किसानों को ट्रांसफर की जाएगी। वही इस आंकलित मूल्य में से करीब 11 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे अंतरित किए जा चुके हैं।  लिहाजा किसानों के लिए ये बड़ी राहत मानी जा रही है।

एमपी के 8 शहरों में पारा 10 डिग्री से नीचे, राजगढ़ में 7 डिग्री सेल्सियस तापमान, 30 जिलों में कोहरा

भोपाल   मध्य प्रदेश एक बार फिर से घने कोहरे की आगोश में है। आज सुबह प्रदेश के 30 से अधिक जिलों में कहीं घना तो कहीं मध्यम कोहरा छाया रहा। जिससे विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई। एमपी में सर्द हवाओं का सिलसिला भी जारी है। बुधवार को दिन में भी ठंडी हवाएं चलती रहीं। जिसके कारण अधिकांश जिलों में दिन का पारा 25 डिग्री से नीचे दर्ज हुआ। प्रदेश में फिलहाल बारिश पर ब्रेक लग गया है। आज कहीं भी बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। लेकिन जल्द ही MP में फिर से बारिश लौटने की संभावना है। MP में कब होगी बारिश मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है, साथ ही साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम भी एक्टिव है। जिसका प्रभाव एमपी के मौसम पर देखने को मिलेगा। इसकी वजह से कई जिलों में बादल छाए रहने की संभावना है। पहाड़ों पर हो रही बारिश और बर्फबारी के कारण प्रदेश में सर्द हवाएं आ रही हैं। जिससे सुबह-शाम के साथ ही दिन में भी सर्दी का एहसास बना हुआ है। 8 फरवरी को एक नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिमी हिमालय रीजन में एक्टिव हो रहा है। जिसका प्रभाव फिर से एमपी में देखने को मिल सकता है। जिसके कारण 10 फरवरी को फिर से बारिश की संभावना जताई गई है। एमपी का सबसे ठंडा जिला एमपी में आज सुबह घने कोहरे के कारण ग्वालियर में विजिबिलिटी घट कर 50 मीटर से भी कम हो गई। वहीं दतिया और रीवा में 50 से 200 मीटर के बीच दृश्यता दर्ज की गई। रतलाम, उज्जैन, नौगांव, सीधी और दमोह में 500 मीटर से 1 किमी के बीच विजिबिलिटी रही। पिछले 24 घंटे में प्रदेश में सबसे ठंडा जिला राजगढ़ रहा, यहां का न्यूनतम तापमान 8.8 डिग्री सेल्सियस रहा। अन्य सभी जिलों का न्यूनतम पारा 10 डिग्री से ऊपर दर्ज हुआ। इस दौरान सबसे कम अधिकतम तापमान नौगांव और पृथ्वीपुर में रहा, यहां का अधिकतम तापमान 19.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। इस दौरान नर्मदापुर में सबसे अधिक अधिकतम पारा 31.5 डिग्री सेल्सियस रहा। 6 फरवरी- ग्वालियर, भिंड, दतिया, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर में घना कोहरा रहेगा। वहीं, भोपाल, गुना, अशोकनगर, इंदौर, सागर, दमोह, जबलपुर, कटनी, विदिशा, सीहोर, रायसेन समेत कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरे का असर बना रहेगा। 7 फरवरी- कई जिलों में हल्के से मध्यम कोहरा रहेगा। इस दिन बारिश का अलर्ट नहीं है। क्यों बना है ऐसा मौसम मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टरबेंस और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे। वहीं पहाड़ी इलाकों में हुई बर्फबारी के बाद मैदानी क्षेत्रों में सर्द हवाएं पहुंच रही हैं, जिससे ठंड और कोहरे की स्थिति बनी हुई है। इसके अलावा पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में 8 फरवरी से नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय होने जा रहा है, जिसका असर मध्यप्रदेश में भी दिखेगा। 10 फरवरी से प्रदेश के कुछ हिस्सों में मावठा गिरने की संभावना जताई गई है।

योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा

राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता 2025-26 के 40 विजेताओं का सम्मान, युवाओं के सपनों को मिली नई उड़ान योगी सरकार की पहल से युवा होंगे ग्लोबल स्किल्स के लिए तैयार, अब इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन में लेंगे हिस्सा कौशल, प्रतिस्पर्धा और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम, कौशल विकास मिशन के विशेष बूट कैंप से मिलेगी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता की तैयारी में मदद उत्तर प्रदेश बना देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य, कौशल विकास में रचा नया कीर्तिमान नॉर्थ रीजनल, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यूपी के युवा बढ़ाएंगे प्रदेश का गौरव लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को आत्मनिर्भर, रोजगारोन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने की दिशा में निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) द्वारा इंडिया स्किल्स कॉम्पीटिशन 2025-26 के अंतर्गत राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता के विजेताओं का भव्य सम्मान समारोह बुधवार को कौशल विकास मिशन मुख्यालय, लखनऊ में आयोजित किया गया। इस अवसर पर 20 विभिन्न स्किल ट्रेड्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कुल 40 विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं का सम्मान प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के मार्गदर्शन में आयोजित इस समारोह में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम एवं मिशन निदेशक पुलकित खरे ने विजेताओं को सम्मानित किया। प्रत्येक स्किल ट्रेड से दो विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने कौशल, समर्पण और परिश्रम से प्रदेश का नाम रोशन किया। युवाओं का कौशल निखारने को प्रतिबद्ध योगी सरकार प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम ने विजेता प्रतिभागियों से संवाद कर उनके प्रशिक्षण अनुभव, प्रतियोगिता यात्रा और भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली तथा उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को आधुनिक, रोजगारोन्मुख एवं वैश्विक मानकों के अनुरूप कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे आयोजनों से युवाओं में प्रतिस्पर्धात्मक भावना विकसित होती है और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे विजेता इस अवसर पर मिशन निदेशक पुलकित खरे ने कहा कि राज्य स्तरीय कौशल प्रतियोगिता युवाओं की प्रतिभा को पहचान दिलाने का सशक्त मंच है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि चयनित सभी विजेता प्रतिभागी लखनऊ में आयोजित विशेष बूट कैंप में भाग लेंगे, जहां उन्हें विशेषज्ञों द्वारा नॉर्थ रीजनल स्किल कॉम्पीटिशन की तैयारी कराई जाएगी। अपर मिशन निदेशक प्रिया सिंह ने कहा कि कौशल विकास युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है और मिशन गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रति दो वर्ष में होती है प्रतियोगिता उल्लेखनीय है कि वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता प्रत्येक दो वर्षों में आयोजित होती है। वर्ष 2024 में जहां कुल 7,472 प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2026 के लिए यह संख्या बढ़कर 1,09,249 हो गई है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक पंजीकरण वाला राज्य बन गया है। वर्ष 2024 में प्रदेश ने 10 स्किल्स में भागीदारी की थी, जबकि इस वर्ष 20 स्किल्स में सहभागिता कर प्रदेश ने कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इसके साथ ही, जहां पूर्व में प्रतियोगिता एक ही केंद्र पर आयोजित की जाती थी, वहीं इस वर्ष लखनऊ के 11 विभिन्न केंद्रों पर 1,270 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान मिशन की गतिविधियों को जन-जन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने के उद्देश्य से सोशल मीडिया सेल का शुभारंभ किया गया तथा गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण को और सुदृढ़ करने हेतु नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर आन्त्रोप्रेन्योरशिप एंड स्माल बिजनेस डेवलपमेंट (NIESBUD) के साथ एमओयू का हस्तांतरण भी किया गया। इस अवसर पर इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ITOT) के निदेशक डी.के. सिंह, NIESBUD नोएडा की डायरेक्टर शिवानी डे, संयुक्त निदेशक मयंक गंगवार, वित्त नियंत्रक संदीप कुमार, सहायक निदेशक डॉ. एम.के. सिंह एवं डॉ. पवित्रा टंडन, डीडीयू-जीकेवाई के सीओओ आशीष कुमार सहित मिशन के अधिकारी, कर्मचारी एवं विभिन्न जनपदों से आए अधिकारी उपस्थित रहे।

मुरैना में यूजीसी विरोध में बाजार बंद, 100 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात, 2 बजे के बाद खुलेंगी दुकानें

मुरैना  यूजीसी कानून के विरोध में सवर्ण समाज ने आज मुरैना बंद का ऐलान किया था, इसी के चलते आज मुरैना शहर के सभी प्रतिष्ठान बंद नजर आए। यह बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रहेगा। शादियां होने के कारण दोपहर 2 बजे से बाजार खोलने के लिए आंदोलन कर्ताओं और प्रशासन में बनी सहमति।  सवर्ण समाज की ओर से आज यूजीसी कानून का विरोध करते हुए मुरैना शहर का बाजार बंद कराया। सदर बाजार, हनुमान चौराहा, मिर्च बजरिया, मार्कण्डेश्वर बाजार, एम एस रोड, सिकरवारी बाजार, तेलीपाड़ा, नाला नंबर एक सभी मुख्य बाजार पूर्ण रूप से बंद दिखे। व्यापारियों ने भी इस बंद में खुल कर सहयोग करते हुए बाजार को बंद रखा। दोपहर 2 बजे तक रहेगा बंद सवर्ण समाज के द्वारा यूजीसी कानून का विरोध करते हुए बाजार बंद की घोषणा के बाद पुलिस प्रशासन ने कल आंदोलन कर्ताओं से बैठक की थी, जिसमें शादियों का सीजन देखते हुए बंद सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखने का निश्चय हुआ था। इस पर व्यापारियों ने भी सहमती दी थी। 100 से अधिक जवान अधिकारी तैनात सीएसपी दीपाली चन्दौरिया के अनुसार यूजीसी कानून के विरोध में मुरैना शहर बंद कराया गया है इस पर 100 पुलिस जवान अधिकारी शहर में चप्पे चप्पे पर मौजूद है । बज्र रिजर्व फोर्स किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए तैयार है । अभी यह सिर्फ संकेत सर्वण समाज सदस्य और ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश दंडोतिया ने बताया कि यूजीसी कानून के विरोध में सांकेतिक बंद है, सभी व्यापारियों का सहयोग मिल रहा है। स्वेच्छा से बंद में शामिल है। बुधवार को जिला प्रशासन की बैठक में भी हमसे और प्रशासनिक अधिकारियों से बहस हुई थी लेकिन हम अपनी बात पर अड़े थे। शादियां होने के कारण हमने दोपहर दो बजे के बाद व्यापारियों भाइयों को बाजार खोलने की सहमति भी दी है।

बीजापुर में सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में नक्सली कमांडर उधम सिंह ढेर

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ जारी है। पेद्दागेलूर के जंगल क्षेत्र में चल रही इस मुठभेड़ में नक्सली कमांडर उधम सिंह के मारे जाने की खबर सामने आई है। जानकारी के अनुसार, डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन के जवानों के साथ नक्सलियों की लगातार फायरिंग हो रही है। मुठभेड़ स्थल से एक ऑटोमेटिक AK-47 राइफल और एक शव बरामद किया गया है। मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बीजापुर एसपी डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि इलाके में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। फिलहाल पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर खंगाला जा रहा है, ताकि अन्य नक्सलियों की मौजूदगी की पुष्टि की जा सके। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है। विस्तृत जानकारी सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद जारी की जाएगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और सीआरपीएफ की कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम नक्सल विरोधी अभियान पर निकली थी। इसी दौरान नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसके बाद दोनों ओर से भीषण मुठभेड़ हुई। मुठभेड़ स्थल से एक ऑटोमेटिक AK-47 राइफल और एक नक्सली का शव बरामद किया गया है, जिसकी पहचान नक्सली कमांडर उधम सिंह के रूप में हुई है। बीजापुर में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बीजापुर एसपी डॉ. जितेन्द्र यादव ने बताया कि इलाके में सुरक्षा बलों का सर्च ऑपरेशन जारी है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है. फिलहाल पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर खंगाला जा रहा है, ताकि अन्य नक्सलियों की मौजूदगी की पुष्टि की जा सके. सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है. विस्तृत जानकारी सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद जारी की जाएगी. एसपी ने की मुठभेड़ की पुष्टि बीजापुर एसपी डॉ. जितेन्द्र यादव ने मुठभेड़ की पुष्टि करते हुए बताया कि इलाके में सुरक्षा बलों का सघन तलाशी अभियान चल रहा है। पूरे क्षेत्र को घेराबंदी कर खंगाला जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य नक्सली मौजूद न हो। एसपी ने कहा कि सर्च ऑपरेशन पूरा होने के बाद पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी साझा की जाएगी। सुरक्षाबलों की इस कार्रवाई को नक्सल विरोधी अभियान के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

Gold-Silver Price Crash: चांदी में भारी गिरावट, ₹24000 सस्ती, सोना भी ₹4500 टूटा

 नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों में बीते दो दिन के उछाल के बाद अचानक फिर से क्रैश (Gold-Silver Price Crash) देखने को मिला है. गुरुवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर दोनों कीमती धातुओं की कीमत ओपनिंग के साथ ही धड़ाम नजर आई. MCX पर चांदी का वायदा भाव एक झटके में 24,000 रुपये प्रति किलो तक कम (Silver Price Crash) हो गया, तो वहीं सोने की कीमत ने भी अचानक ही 4500 रुपये से ज्यादा का गोता लगा दिया और ये सस्ता (Gold Cheaper) हो गया.  चांदी की कीमत में फिर बड़ी गिरावट सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत में गुरुवार को आई बड़ी गिरावट के बारे में, तो एमसीएक्स पर बीते कारोबारी दिन 5 मार्च की एक्सपायरी वाली 1 Kg Silver Price 2,68,850 रुपये पर क्लोज हुआ था और जब वायदा कारोबार की शुरुआत हुई, तो ये एक झटके में गिरकर 2,44,654 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया. इस हिसाब से देखें, तो चांदी सीधे 24,196 रुपये तक सस्ती हो गई.  हाई से अभी कितनी सस्ती है Silver बीते महीने के आखिर में 29 जनवरी को चांदी की कीमत ने तूफानी रफ्तार से भागते हुए 4 लाख रुपये प्रति किलो का ऐतिहासिक स्तर पार किया था और 4,20,048 रुपये का नया लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था. लेकिन इसके बाद से ही सिल्वर प्राइस क्रैश (Silver Crash) होने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो बजट के बाद रुका नजर आया. लेकिन महज दो दिन के ब्रेक के बाद ये फिर तेजी से फिसली है. हाई से तुलना करें, तो फिलहाल वायदा चांदी 1,75,394 रुपये सस्ती मिल रही है.  Gold का भी चांदी जैसा हाल  अब बात करें, सोने की कीमत में आई गिरावट के बारे में, तो चांदी की तरह ये भी गुरुवार को खुलने के साथ ही क्रैश (Gold Rate Crash) हुआ है. बीते कारोबार दिन 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले 10 Gram 24 Karat Gold का रेट 1,53,046 रुपये पर क्लोज हुआ था और गुरुवार को खुलने के साथ ही ये गिरकर 1,48,455 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. इस हिसाब से ये 4,591 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया.  सोना अपने हाई से इतना सस्ता  चांदी की तरह गोल्ड रेट भी 29 जनवरी को अपने लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंचा था और तेज रफ्तार के साथ 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर पहुंच गया था और यहां से इसमें भी लगातार तेज गिरावट आई थी, जो बजट के एक दिन बाद तक जारी रही थी. बीते दो दिन में आया उछाल भी गुरुवार को साफ हो गया और अगर इस हाई लेवल से गोल्ड प्राइस क्रैश (Gold Price Crash) देखें, तो फिलहाल सोना 44,641 रुपये सस्ता मिल रहा है.

सस्ता और सरल किराया, सर्ज प्राइसिंग का खत्म! अमित शाह आज करेंगे ‘Bharat Taxi’ का उद्घाटन

 नई दिल्ली Bharat Taxi Cab Service Launch: कैब सर्विस के क्षेत्र में आज एक नया आगाज होने जा रहा है. आज केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह देश की पहली कोऑपरेटिव टैक्सी सर्विस 'भारत टैक्सी' का शुभारंभ करेंगे. ये नई कैब सर्विस सीधे तौर पर प्राइवेट कैब सर्विस प्रोवाइडर्स की मोनोपोली को सीधी चुनौती देगी. क्योंकि सरकार का दावा है कि, भारत टैक्सी में कैब ड्राइवर्स को उनके हक का पूरा पैसा मिलेगा. साथ ही यूजर्स को सर्ज प्राइसिंग और प्राइवेट कैब्स जैसी कंपनियों की मनमानी से भी छुटकारा मिलेगा. अमित शाह ने पिछले साल मार्च में लोकसभा में अपने भाषण में कहा था कि, “हम बहुत जल्द ही ओला और उबर जैसा एक सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म लाने वाले हैं. इस सहकारी टैक्सी प्लेटफॉर्म से होने वाला मुनाफा किसी धन्नासेठ के पास नहीं जाएगा. ये मुनाफा टैक्सी ड्राइवर के पास जाएगा.” आज देश की राजधानी दिल्ली में स्थित विज्ञान भवन में गृह मंत्री अमित शाह भारत टैक्सी का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन करेंगे. बता दें कि, भारत टैक्सी का पायलट प्रोजेक्ट पहले ही शुरू हो चुका है. दिल्ली-एनसीआर में कई कैब ड्राइवर्स इस ऐप बेस्ड सर्विस का प्रयोग कर रहे हैं. अब भारत टैक्सी के सॉफ्ट लॉंच से अब तक टॉप परफॉर्मेंस करने वाले सारथियों (कैब ड्राइवर्स) को कार्यक्रम के दौरान को सम्मानित किया जाएगा. इसके अलावा सारथियों को प्रमाणपत्र देने के साथ-साथ 5 लाख का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा और 5 लाख का पारिवारिक स्वास्थ्य बीमा प्रदान किया जाएगा. सरकार का मानना है कि, ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न से इंस्पायर्ड भारत टैक्सी सिटिजन-सेंट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा. तो आइये विस्तार से जानते हैं Bharta Taxi देश में मौजूद बाकी प्राइवेट कैब एग्रीग्रेटर्स से किस तरह से अलग होगा. ‘सारथी ही मालिक’  सबसे पहले बता दें कि, भारत टैक्सी के चालकों को ड्राइवर नहीं बल्कि सारथी कहा जाएगा. सरकार का कहना है कि, सारथी ही मालिक होगा. क्योंकि इस सर्विस के दौरान यूजर द्वारा दिए जाने वाले किराए का पूरा पैसा सीधे कैब चालक के खाते में जाएगा. जहां ओला-उबर जैसी कंपनियां राइड के बाद फेयर में से एक मोटा हिस्सा कमिशन के नाम पर काट लेती हैं, वहीं भारत टैक्सी सीधे तौर पर कैब चालकों को बड़ी राहत देगा. ऐसा आमतौर पर देखा जाता है कि, कैब चालक और कंपनियों के बीच फेयर और कमिशन को लेकर झंझट होती रहती है. सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा भारत टैक्सी में सर्ज प्राइसिंग से भी राहत मिलेगी. जहां प्राइवेट कैब एग्रीगेटर्स पीक ऑवर या खराब मौसम के समय हैवी रश के नाम पर मनमाना किराया वसूलते हैं, वहीं भारत टैक्सी में इस समस्या से भी निजात मिलेगी. जिसका सीधा फायदा आम ग्राहकों को मिलेगा. बीते 1 जुलाई से मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन (MVAG) 2025 के अनुसार, कैब एग्रीगेटर्स को अब पीक ट्रैफिक ऑवर के दौरान बेस फेयर से दोगुना तक चार्ज करने की अनुमति मिल गई है. जिसके बाद पीक-ऑवर में मोटी रकम वसूलने का खेल और बढ़ गया है. कैब, ऑटो और बाइक सर्विस भारत टैक्सी में यूजर्स को कैब, बाइक और ऑटो तीनों सुविधाओं का लाभ मिलेगा. इससे कम दूरी से लेकर लंबी यात्रा तक हर जरूरत के लिए एक ही प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा. यानी ग्राहक अपने बज़ट और जरूरत के अनुसार कार, ऑटो और यहां तक की बाइक राइड का भी चुनाव कर सकेंगे. सेफ्टी और सिक्योरिटी भारत टैक्सी में यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है. सभी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा, साथ ही ऐप में इमरजेंसी SOS बटन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप हिस्ट्री जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी, ताकि आप और आपके परिवार निश्चिंत होकर यात्रा कर सकें. इसके अलावा ऐप पर ही यूजर्स को किसी भी तरह की परेशानी होने पर हेल्पलाइन की भी सुविधा भी दी जा रही है. 3 लाख से ज्यादा ड्राइवर जानकारी के अनुसार भारत टैक्सी से अब तक 3 लाख से अधिक ड्राइवर जुड़ चुके हैं. और प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन 10,000 से अधिक राइड्स पूरी की जा रही हैं. पिछले महीने ये आंकड़ा 1.4 लाख ड्राइवर्स का था. इससे साफ है कि, समय के साथ भारत टैक्सी का प्रयोग बढ़ रहा है और ज्यादा से ज्यादा ड्राइवर्स इस सविर्स से जुड़ रहे हैं.  8 सरकारी संस्थाओं का साथ इस सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड को देश की 8 बड़ी सहकारी संस्थाओं के सहयोग से ऑपरेट किया जा रहा है. इनमें अमूल, इफको, कृभको, नाफेड, एनडीडीबी, एनसीईएल, एनसीडीसी और नाबार्ड शामिल हैं. कंपनी के बोर्ड में ड्राइवरों के दो निर्वाचित प्रतिनिधि भी शामिल हैं, जिससे ड्राइवरों के जरूरत की बातें या उनकी डिमांड सीधे सरकार तक पहुंचती है. कैसे डाउनलोड करें मोबाइल ऐप भारत टैक्सी का मोबाइल ऐप लाइव हो चुका है. इसकी बुकिंग सरकारी Bharat Taxi मोबाइल ऐप के जरिए की जा सकती है. इसका राइडर और ड्राइवर दोनों मोबाइल ऐप गूगल प्ले स्टोर और ऐप्पल ऐप स्टोर पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध है. यदि आपको कैब सर्विस के लिए राइड का लाभ उठाना है तो Rider App डाउनलोड करें. वहीं इस सेवा जुड़ने के इच्छुक ड्राइवरों को Driver App डाउनलोड करना होगा. यहां ध्यान रखना जरूर है कि, भारत टैक्सी वही ऐप डाउनलोड करें जो सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड द्वारा जारी किया गया है. Bharat Taxi के नाम से ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर कुछ और कैब सर्विस एप्लीकेशन मौजूद हैं. सही ऐप चुनने के लिए आप उपर दिखाए गए तस्वीर से मोबाइल ऐप के लोगो को मैच करवा सकते हैं.

चीन का महाप्रोजेक्ट: 242 मीटर लंबा अंतरिक्ष युद्धपोत, रोबोटिक जेट्स से होगी तैनाती

बीजिंग  चीन ने दुनिया के सामने एक ऐसी कल्पना पेश की है जिसे अब तक सिर्फ साइंस फिक्शन फिल्मों में ही देखा गया था. बीजिंग ने ‘लुआननियाओ’ नाम के एक विशाल अंतरिक्ष विमान वाहक (Space Aircraft Carrier) का खाका तैयार किया है. यह प्रोजेक्ट चीन के ‘नांतियानमेन’ या ‘साउथ हेवनली गेट’ मिशन का हिस्सा है. दावा किया जा रहा है कि यह भविष्य का युद्धपोत होगा. यह पृथ्वी के वायुमंडल की सीमा पर रहकर पूरे ग्रह पर नजर रख सकेगा. चीन के सरकारी मीडिया द्वारा जारी वीडियो के मुताबिक लुआननियाओ एक विशाल ग्रे रंग का त्रिकोणीय जहाज होगा. इसकी लंबाई 242 मीटर और चौड़ाई 684 मीटर बताई जा रही है. इसका वजन लगभग 1,20,000 टन होगा जो आज के किसी भी आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर से बहुत ज्यादा है. यह स्पेस कैरियर 88 ‘शुआन नू’ मानवरहित लड़ाकू विमानों को अपने साथ ले जाने में सक्षम होगा. ये जेट इतने एडवांस होंगे कि वे स्टील्थ तकनीक से लैस होकर हाइपरसोनिक मिसाइलें दाग सकेंगे. क्या चीन अंतरिक्ष में अमेरिका को मात देगा? डिफेंस एक्सपर्ट पीटर लेटन का कहना है कि अगर चीन इसे बनाने में सफल रहा तो यह दुनिया की हर डिफेंस सिस्टम को फेल कर देगा. यह विमान वाहक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और मौजूदा फाइटर जेट्स की पहुंच से बहुत ऊपर होगा. यह सीधे टारगेट के ऊपर जाकर हमला कर सकता है. इससे चीन को ताइवान और साउथ चाइना सी में अमेरिका के खिलाफ बड़ी बढ़त मिल सकती है. चीन अपनी रॉकेट और सैटेलाइट तकनीक पर भारी निवेश कर रहा है जो अमेरिका की चिंता बढ़ा रहा है. क्या यह सिर्फ एक चीनी प्रोपेगेंडा है? इतनी बड़ी योजना के बावजूद दुनिया भर के एक्सपर्ट्स इसे लेकर काफी संशय में हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इस जहाज को पृथ्वी की कक्षा में भेजने या हवा में टिकाए रखने के लिए जिस प्रोपल्शन सिस्टम और ईंधन की जरूरत है वह फिलहाल मौजूद नहीं है. इसे ऑर्बिट में भेजने के लिए चीन को एलन मस्क की स्पेसएक्स जैसे रियूजेबल रॉकेट चाहिए. चीन अभी ऐसी तकनीक विकसित करने से कम से कम 10 से 15 साल दूर है. कई लोग इसे चीन का एक ‘पब्लिसिटी स्टंट’ मान रहे हैं. साउथ हेवनली गेट प्रोजेक्ट क्या है? यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक जहाज तक सीमित नहीं है. इसमें ‘बैदी’ जैसे छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान भी शामिल हैं जो अंतरिक्ष के करीब जाकर ऑपरेट कर सकते हैं. चीन ने 2024 के विमानन मेले में इसका मॉडल भी दिखाया था. एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन ऐसी घोषणाएं अपनी जनता को प्रेरित करने और पड़ोसी देशों को अपनी ताकत दिखाने के लिए करता है. यह एक मनोवैज्ञानिक युद्ध का हिस्सा हो सकता है जिससे चीन खुद को दुनिया का सबसे एडवांस सैन्य पावर साबित करना चाहता है. हवा में ही खत्म हो जाएंगे दुश्मन के सारे रडार? चीन का यह फ्लाइंग  स्पेस रेस में चीन की मौजूदा स्थिति क्या है? भले ही लुआननियाओ अभी एक कल्पना जैसा लगे लेकिन चीन के हालिया मिशन हकीकत हैं. 2024 में चीन के ‘चांग-ई-6’ मिशन ने चंद्रमा के सबसे दूर वाले हिस्से से नमूने लाकर इतिहास रचा था. अब चीन ‘चांग-ई-7’ के जरिए चांद पर पानी खोजने की तैयारी में है. अमेरिका की रफ्तार जहां कुछ धीमी पड़ी है वहीं चीन लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है. लुआननियाओ का सपना साकार होने में भले ही 20-30 साल लगें लेकिन इसने भविष्य की जंग का खाका जरूर खींच दिया है.