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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर. श्याम बिहारी जायसवाल ने स्वास्थ्य सेवाओं को मिशन मोड में सुदृढ़ करने के दिए निर्देश नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित मुख्य चिकिसा एवं स्वास्थ्य अधिकारी व सिविल सर्जन की राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक के दूसरे दिन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत करने के लिए अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बीते दो वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, किंतु सरकार की प्राथमिकता अब भी यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ, वनांचल और जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम व्यक्ति तक समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचें। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों में 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से निरंतर सेवाएँ प्रदान की जा रही हैं। उन्होंने सभी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन यूनिटों की नियमित समीक्षा करने और लाभार्थियों से फीडबैक लेना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जनजातीय क्षेत्रों पर विशेष फोकस करते हुए उन्होंने प्रत्येक माह आवश्यक समीक्षा बैठक आयोजित करने के निर्देश भी दिए। आपातकालीन सेवाओं को लेकर मंत्री   जायसवाल ने 102 महतारी एक्सप्रेस, 108 संजीवनी एक्सप्रेस तथा 1099 से संबंधित शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार का दायित्व है और इसके लिए सभी स्तरों पर मिशन मोड में कार्य किया जाना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने प्रदेश के 5,000 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर उप-स्वास्थ्य केंद्रों को पूरी तरह क्रियाशील करने, पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने तथा अधोसंरचना सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएँ समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए। डायग्नोस्टिक सेवाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए मंत्री ने अस्पतालों में लैब टेक्नीशियन की उपलब्धता तथा जांचों की गुणवत्ता और सटीकता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही नए जांच उपकरणों की खरीदी कर सभी अस्पतालों में जांच सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही बाहर की दवाएँ लिखने वाले चिकित्सकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए मानव संसाधन को स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ बताते हुए   जायसवाल ने नए जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों और सिविल सर्जनों को भर्ती से संबंधित विज्ञापन एक सप्ताह के भीतर जारी करने के निर्देश दिए। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय डायलिसिस कार्यक्रम को एक महत्वाकांक्षी योजना बताते हुए उन्होंने प्रत्येक ब्लॉक स्तर पर डायलिसिस यूनिट स्थापित करने तथा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक जन औषधि केंद्रों के विस्तार पर विशेष जोर दिया। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के शासकीय अस्पताल किसी भी दृष्टि से निजी अस्पतालों से कमतर नहीं हैं । जिला अस्पतालों में बेहतर उपचार सुविधाओं के साथ-साथ उच्च स्तरीय स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। शासकीय अस्पतालों की छवि को और अधिक सशक्त बनाने को सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी बताते हुए उन्होंने सभी जिला अस्पतालों में अनिवार्य रूप से ब्लड बैंक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

आवास, पेंशन व स्वच्छता में रिकॉर्ड प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं को नई गति

विकास के मोर्चे पर उत्तर प्रदेश की बढ़त, कई योजनाओं में बना देश में नंबर वन  आवास, पेंशन व स्वच्छता में रिकॉर्ड प्रदर्शन से सामाजिक योजनाओं को नई गति कृषि, उद्योग व निवेश में अग्रणी भूमिका से बनी मजबूत अर्थव्यवस्था की तस्वीर इन्फ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी व ऊर्जा सुधारों से बदला प्रदेश का विकास परिदृश्य डिजिटल गवर्नेंस व ई-प्लेटफॉर्म के उपयोग में उत्तर प्रदेश की नेशनल लीडरशिप लखनऊ उत्तर प्रदेश ने केंद्र व राज्य की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के दम पर विकास के हर मोर्चे पर देश में मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश लगातार विभिन्न राष्ट्रीय योजनाओं में पहला स्थान हासिल कर रहा है। इससे शासन-प्रशासन की परिणाम आधारित कार्यशैली स्पष्ट रूप से सामने आई है। योगी सरकार में उत्तर प्रदेश ने योजनाओं को कागज से जमीन तक पहुंचाने का कार्य किया है। यही कारण है कि आवास,  कृषि,  उद्योग,  इन्फ्रास्ट्रक्चर,  ऊर्जा,  डिजिटल गवर्नेंस व शिक्षा जैसे क्षेत्रों में प्रदेश लगातार राष्ट्रीय स्तर पर अपनी सुदृढ़ उपस्थिति दर्ज करा रहा है। कारोबारी सहूलियत (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) के मामले में प्रदेश टॉप अचीवर्स स्टेट है। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण एवं शहरी’ के अंतर्गत आवास निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर रहा है। पिछले पौने नौ वर्षों में लगभग 62 लाख परिवारों को पक्के घर की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इससे गरीब व मध्यम वर्ग के जीवन स्तर में ठोस सुधार हुआ है। ‘अटल पेंशन योजना’ के अंतर्गत पंजीकरण के मामले में भी उत्तर प्रदेश ने देश में शीर्ष स्थान हासिल किया है। प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का दायरा तेजी से बढ़ा है। औद्योगिक विकास को प्राथमिकता देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने सूक्ष्म, लघु व मध्यम (एमएसएमई) उद्योगों को मजबूती दी है। देश में सर्वाधिक, 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयों की स्थापना उत्तर प्रदेश में हो चुकी है। इससे बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन हुआ है। सरकार का फोकस स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने पर रहा है। कृषि क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश लगातार अपनी अग्रणी भूमिका बनाए हुए है। गन्ना, चीनी, खाद्यान, आम, दूध व आलू के उत्पादन में प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। किसानों को कृषि निवेश पर मिलने वाली अनुदान राशि का भुगतान डीबीटी के माध्यम से किया जा रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई। इस व्यवस्था को लागू करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है। इन्फ्रास्ट्रक्चर व कनेक्टिविटी के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश में 7 एक्सप्रेस-वे और 04 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे क्रियाशील हैं। एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) निर्माणाधीन है। सड़क एवं हवाई संपर्क के विस्तार से निवेश व पर्यटन को नई गति मिली है। स्वच्छता व ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नए मानक स्थापित किए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण में प्रदेश का देश में पहला स्थान रहा है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत निःशुल्क गैस कनेक्शन वितरण में भी उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है। इससे गरीब परिवारों की रसोई में बड़ा बदलाव आया है।  डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व किया है। ई-मार्केटप्लेस जेम के माध्यम से देश में सर्वाधिक सरकारी खरीद करने वाला राज्य भी उत्तर प्रदेश है। एनपीएस ट्रेडर्स के अंतर्गत कामगारों के पंजीकरण में भी प्रदेश अग्रणी रहा है। इससे सरकारी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता व कार्य की गति बढ़ी है। शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्ययोजना विकसित करने में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्यों में शामिल है। कौशल विकास नीति को लागू करने में प्रदेश नंबर वन है। इसका उद्देश्य युवाओं को रोजगार के लिए बेहतर रूप से तैयार करना है। एथेनॉल उत्पादन एवं आपूर्ति मामले में भी उत्तर प्रदेश देश में पहले पायदान पर खड़ा है।

स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार

ग्रामीण भारत को संपत्ति अधिकारों का उपहार, एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण स्वामित्व योजना से गांव-गांव मजबूत हुए कानूनी अधिकार भूमि विवादों में कमी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला संबल लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए प्रदेश में अब तक एक करोड़ से अधिक घरौनियों का वितरण किया जा चुका है। यह पहल न केवल ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति पर कानूनी अधिकार प्रदान कर रही है, बल्कि दशकों से चले आ रहे भूमि विवादों के समाधान और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित हो रही है। ग्रामीण स्वामित्व को मिली कानूनी मजबूती स्वामित्व योजना के तहत गांवों की आबादी भूमि में रहने वाले परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिक प्रमाण उपलब्ध कराया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से अब तक 72,961 ग्रामों में प्रपत्र-10 (डिजिटाइज्ड) जारी किए जा चुके हैं, जो सर्वे योग्य ग्रामों का लगभग 80.59 प्रतिशत है। इससे ग्रामीणों को पहली बार अपने मकान और भूमि पर स्पष्ट कानूनी स्वामित्व प्राप्त हुआ है। यह दस्तावेज अब बैंक ऋण, सरकारी योजनाओं और अन्य वित्तीय सुविधाओं के लिए भी मान्य आधार बन गया है। घरौनी बनी आर्थिक सुरक्षा की कुंजी राजस्व विभाग द्वारा सहमति के आधार पर अब तक 1,14,43,688 घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनमें से 1,01,31,232 घरौनियों का वितरण ग्रामीण परिवारों को किया जा चुका है। घरौनी केवल स्वामित्व का प्रमाण नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसके जरिए ग्रामीण परिवार अब औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ रहे हैं, स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों के लिए ऋण ले पा रहे हैं तथा सामाजिक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भूमि विवादों में कमी, प्रशासनिक व्यवस्था सुदृढ़ स्वामित्व योजना के प्रभाव से गांवों में भूमि और मकान से जुड़े विवादों में उल्लेखनीय कमी देखी जा रही है। स्पष्ट रिकॉर्ड और डिजिटल दस्तावेजों के कारण फर्जी दावों और अवैध कब्जों पर प्रभावी रोक लगी है। इससे न केवल ग्रामीण स्तर पर शांति और विश्वास बढ़ा है, बल्कि न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होने की उम्मीद है। योगी सरकार की यह पहल सुशासन और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है। निरंतर जारी है वितरण प्रक्रिया सरकार द्वारा घरौनियों के वितरण की प्रक्रिया लगातार आगे बढ़ाई जा रही है। 18 जनवरी 2025 के बाद 13,12,456 नई घरौनियां तैयार की जा चुकी हैं, जिनका वितरण चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। आने वाले समय में लाखों और ग्रामीण परिवारों को संपत्ति स्वामित्व का लाभ मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र परिवार इस योजना से वंचित न रहे। ड्रोन तकनीक से सर्वे की संभावनाएं स्वामित्व योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1,10,344 अधिसूचित ग्रामों में से 90,530 ग्राम ऐसे हैं, जहां ड्रोन सर्वे कराया जाना तकनीकी रूप से संभव है। इन ग्रामों में आधुनिक तकनीक के माध्यम से सर्वे कर सटीक और पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किए जा रहे हैं। योगी सरकार की डिजिटल गवर्नेंस नीति के अनुरूप यह तकनीक भविष्य में ग्रामीण भूमि प्रबंधन को और अधिक सुदृढ़ बनाएगी। कुल मिलाकर, स्वामित्व योजना के माध्यम से योगी सरकार ने ग्रामीण समाज को संपत्ति अधिकार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सम्मान का मजबूत आधार प्रदान किया है, जो उत्तर प्रदेश को देश में भूमि सुधार और ग्रामीण सशक्तिकरण का अग्रणी राज्य बना रहा है।

योगी सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान

आरसीएस–उड़ान में यूपी बना ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ योगी सरकार की विमानन नीति को मिला राष्ट्रीय सम्मान CM योगी  के नेतृत्व में हवाई कनेक्टिविटी में ऐतिहासिक विस्तार, नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में यूपी देश में अव्वल 2016 की तुलना में 2025 में यूपी में हवाई यात्रियों की संख्या में हुई रिकॉर्ड बढ़ोतरी, घरेलू उड़ानों के विस्तार से छोटे शहरों को मिला राष्ट्रीय संपर्क एयर कार्गो में पांच गुना उछाल, एमएसएमई व निर्यात को मिले नए पंख, जेवर एयरपोर्ट सहित नए हवाई अड्डे यूपी को बना रहे विमानन हब ‘उड़े देश का आम नागरिक’ का सपना सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपी में हो रहा साकार लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूरदर्शी नेतृत्व व सक्रिय नीतियों का परिणाम है कि उत्तर प्रदेश को रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (आरसीएस-उड़ान) के तहत ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का राष्ट्रीय अवॉर्ड प्रदान किया गया है। यह सम्मान नॉन-प्रायोरिटी एरिया श्रेणी में दिया गया है, जिसमें देश के वे राज्य शामिल हैं, जो न तो पर्वतीय हैं और न ही उत्तर-पूर्व क्षेत्र में आते हैं। इस उपलब्धि ने उत्तर प्रदेश को देश के विमानन मानचित्र पर एक सशक्त और अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित किया है। योगी सरकार की नीति से बदला प्रदेश का विमानन परिदृश्य योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद प्रदेश में कनेक्टिविटी को विकास का आधार बनाया। हवाई अड्डों के आधुनिकीकरण, नए रनवे, नाइट लैंडिंग सुविधाएं व क्षेत्रीय उड़ानों को प्रोत्साहन देकर प्रदेश के छोटे शहरों को देश के प्रमुख महानगरों से जोड़ा गया। आरसीएस-उड़ान योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में उत्तर प्रदेश ने गैर-प्राथमिक राज्यों की श्रेणी में सबसे तेज प्रगति दर्ज की।  यात्री यातायात में 2.6 गुना वृद्धि उत्तर प्रदेश सिविल एविएशन के डायरेक्टर ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि योगी सरकार की नीतियों का असर यात्री आंकड़ों में भी साफ दिखाई देता है। वर्ष 2016 में प्रदेश में कुल 59.97 लाख हवाई यात्री थे। 2024 में यह संख्या 1.28 करोड़ से अधिक और 2025 तक यह संख्या बढ़कर 1.55 करोड़ से अधिक हो गई। बीते नौ वर्षों में प्रदेश में 9.98 प्रतिशत कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) से यात्री यातायात बढ़ा है, जो यह दर्शाता है कि हवाई यात्रा अब आम नागरिकों के लिए भी सुलभ होती जा रही है। यह ‘उड़ान-उड़े देश का आम नागरिक’ के मूल उद्देश्य को जमीन पर उतारने का प्रमाण है। घरेलू उड़ानों से मजबूत हुआ क्षेत्रीय संपर्क उन्होंने बताया कि प्रदेश में घरेलू उड़ानों की संख्या में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है। 2016 में घरेलू यात्रियों की संख्या 52.30 लाख थी, जो 2024 में 1.16 करोड़ से अधिक और 2025 में 1.41 करोड़ से अधिक पहुंच गई। इससे न केवल व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिला, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए। इसी तरह, इंटरनेशनल पैसेंजर्स की संख्या जो 2016 में 7.66 लाख थी वो 2024 में 12.63 लाख से अधिक और 2025 में 13.37 लाख से अधिक पहुंच गई।  एयर कार्गो में पांच गुना उछाल, अर्थव्यवस्था को बल योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश एयर कार्गो के क्षेत्र में भी तेजी से आगे बढ़ा है। 2016 में एयर कार्गो ट्रैफिक 5,895 मीट्रिक टन था, जो 2024 में 27,998 मीट्रिक टन और 2025 में बढ़कर 29,761 मीट्रिक टन हो गया। एयर कार्गो में इन 9 वर्षों में 17.58 प्रतिशत सीएजीआर से हुई वृद्धि ने प्रदेश को कृषि उत्पादों, एमएसएमई और निर्यात आधारित उद्योगों के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म दिया है। जेवर एयरपोर्ट और क्षेत्रीय हब की भूमिका नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (जेवर) सहित प्रदेश में विकसित हो रहे नए और क्षेत्रीय हवाई अड्डे उत्तर प्रदेश को देश का प्रमुख विमानन और लॉजिस्टिक्स हब बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर नागरिक तेज, सुरक्षित और सस्ती हवाई कनेक्टिविटी से जुड़े। ‘मोस्ट प्रोएक्टिव स्टेट’ का यह सम्मान योगी सरकार की इसी विकासोन्मुख सोच, मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रभावी क्रियान्वयन की राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता है, जो उत्तर प्रदेश को ‘नए भारत’ की उड़ान में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

ओबरा, अमरोहा, विधूना, कुरावली एवं नौगढ़ तहसील में हो रहा है राजस्व भवनों का निर्माण

राजस्व भवनों के निर्माण कार्य को मिली रफ्तार विभागीय आधारभूत संरचना की मजबूती के लिए वर्ष 2025-26 में 196.39 करोड़ रुपये की राशि हुई स्वीकृत ओबरा, अमरोहा, विधूना, कुरावली एवं नौगढ़ तहसील में हो रहा है राजस्व भवनों का निर्माण  गोरखपुर, मेरठ व संभल में कलेक्ट्रेट भवनों के निर्माण और मरम्मत का कार्य प्रगति पर राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए बनाये जा रहे हैं आवासीय परिसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक राजस्व विभाग की आधारभूत संरचना को मजबूती प्रदान करने के लिए राजस्व विभाग से जुड़े भवनों के निर्माण व मरम्मत का कार्य तेज गति से किया जा रहा है। इसके तहत प्रदेश के विभिन्न मंडलों, जनपदों व तहसीलों में चल रहे कार्यालयी एवं आवासीय भवनों के निर्माण और मरम्मत के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 196.39 करोड़ रुपये की धनराशि निर्गत की गई, जिसके माध्यम से तेज गति से निर्माण कार्य किये जा रहे हैं। इनके पूरा होने से एक ओर राजस्व विभाग के कार्य सुचारू रूप से चल सकेंगे, साथ ही प्रदेशवासियों को भी राजस्व संबंधी कार्यों के संचालन में सुविधा मिलेगी।  ओबरा, अमरोहा व नौगावां सादात में तहसील भवनों का हो रहा निर्माण राजस्व विभाग के कार्यों का सुचारू रूप से संचालन और विकास कार्यों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से प्रदेश के विभिन्न जनपदों और तहसीलों में राजस्व भवनों का निर्माण और मरम्मत की जा रही है। इसके तहत सोनभद्र जनपद में ओबरा, गाजियाबाद में लोनी, अमरोहा में अमरोहा व नौगावां सादात तहसील के अलावा जालौन में उरई तहसील के राजस्व भवनों का निर्माण प्रगति पर है। कार्यदायी संस्थाएं इनका निर्माण तेजगति से कर रही हैं। इसके साथ ही गोरखपुर, मेरठ व संभल में कलेक्ट्रेट भवनों की मरम्मत का कार्य भी चल रहा है। इसी क्रम में जनपद सिद्धार्थनगर की तहसील नौगढ़, औरैया की तहसील विधूना और मैनपुरी की तहसील कुरावली में भी राजस्व भवनों का निर्माण किया जा रहा है। जिनमें से कुछ का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है, जबकि शेष का जल्द ही पूरा हो जाएगा। ये कलेक्ट्रेट व राजस्व भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त होंगे, जहां एक ही छत के नीचे राजस्व संबंधी सभी तरह के कार्य किये जा सकेंगे।  महाराजगंज में बहुउद्देशीय ऑडिटोरियम हॉल के लिए धनराशि आवंटित   प्रदेश सरकार ने इस क्रम में कुछ नए व निर्माणाधीन कार्यों को भी वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इनमें महाराजगंज के जनपद मुख्यालय पर बहुउद्देशीय ऑडिटोरियम हॉल को विकसित करने के लिए धनराशि आवंटित की जा चुकी है, इसका निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। इसके साथ ही राजस्व विभाग के कर्मचारियों के आवासीय परिसरों का भी निर्माण व मरम्मत की जा रही है। जिस क्रम में जिलाधिकारी बाराबंकी के आवास की मरम्मत और अयोध्या में राजस्व अधिकारियों के लिए टाइप-4 आवासों के साथ बस्ती की तहसील हरैया में आवासीय भवनों के निर्माण के नए कार्य शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई अन्य निर्माण कार्यों के प्रस्तावों पर भी स्वीकृति की कार्यवाही तेज गति से चल रही है। इनमें मिर्जापुर में कलेक्ट्रेट का पुनर्निर्माण, कानपुर की सदर तहसील, चंदौली की पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर तहसील और गाजीपुर में कासिमाबाद व सेवरई तहसीलों के कार्यालय भवनों का निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। साथ ही मेरठ मंडल के आयुक्त कार्यालय में न्यायालय कक्ष और अमरोहा में अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) के न्यायालय कक्ष एवं कार्यालय भवन के निर्माण के प्रस्ताव भी दिये जा चुके हैं। इसी क्रम में अयोध्या, कानपुर, मुरादाबाद, ललितपुर, मुजफ्फरनगर, हरदोई, वाराणसी, आगरा व जौनपुर सहित कई जनपदों की तहसीलों में विभाग के कर्मचारियों के आवासों के निर्माण के प्रस्तावों पर भी स्वीकृति की प्रक्रिया चल रही है।

डॉ. यादव ने किया नोहलेश्वर महोत्सव के 5 दिवसीय आयोजन का शुभारंभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे 5 दिवसीय नोहलेश्वर महोत्सव का शुभारंभ नोहलेश्वर महोत्सव होगा भव्य और ऐतिहासिक : राज्य मंत्री  लोधी 11 से 15 फरवरी 2026 तक कला, संस्कृति और साहित्य की ख्यातनाम हस्तियां होंगी शामिल भोपाल संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सांस्कृतिक रूप से चरमोत्कर्ष पर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के इन प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए बुंदेलखंड के दमोह जिले में नोहटा स्थित नोहलेश्वर मंदिर परिसर में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला नोहलेश्वर महोत्सव इस वर्ष अधिक भव्यता के साथ मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 11 से 15 फरवरी 2026 तक चलने वाले इस 5 दिवसीय महोत्सव का शुभारंभ करेंगे। इस महोत्सव में कला, संस्कृति, साहित्य एवं भक्ति संगीत जगत की ख्यातनाम हस्तियां अपनी प्रस्तुतियां देंगी।   राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि बुंदेलखंड की धार्मिक आस्था के इस केंद्र पर होने जा रहे नोहलेश्वर महोत्सव में प्रसिद्ध गायक  कैलाश खेर जहां भक्ति गीत प्रस्तुत करेंगे, वहीं भगवान भोलेनाथ के शिव तांडव नृत्य, शास्त्रीय नृत्य, जय राम नृत्य नाटिका आदि मनभावन प्रस्तुतियां होगी। अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में जहां हरिओम पवार, जानी बैरागी जैसे राष्ट्रीय कवि रचनापाठ करेंगे। समापन समारोह में प्रसिद्ध भजन गायिका सु आशा वैष्णव प्रस्तुति देंगी। राज्य मंत्री  लोधी ने बताया कि संस्कृति विभाग द्वारा इस समूचे आयोजन को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां की जा रहीं हैं। इसमें यहाँ आने वाले प्रदेश और देश के श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो, स्थानीय प्रशासन भी इस आयोजन को और भव्यता देने के लिए पूरी तरह जुटा हुआ है।  राज्य मंत्री  लोधी ने कहा कि नोहलेश्वर महोत्सव की शुरुआत 2 वर्ष पूर्व की गई थी। इस वर्ष यह महोत्सव अपनी भव्यता और विशेषता के साथ प्रारंभ होने जा रहा है। मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड अपने गौरवशाली इतिहास और समृद्धशाली परंपराओं के लिए समूचे भारत में अपनी अलग पहचान रखता है। बुंदेलखंड की शौर्य गाथाएं एवं सांस्कृतिक कला कौशल का वर्णन देश के साहित्यकारों, कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से बखूबी किया है, यहाँ की पुरातन संस्कृति आज भी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने का कार्य करती है।  राज्य मंत्री  लोधी ने कहा कि हमारा प्रयास है कि नोहलेश्वर महोत्सव के माध्यम से प्रदेश और देश में बुंदेलखंड की विशेष पहचान बने। राज्य मंत्री  लोधी ने प्रदेश की जनता से इस आयोजन में शामिल होकर बुंदेलखंड की कला संस्कृति से रूबरू होने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन आपकी आस्था के साथ ही समूचे परिवार के साथ मनोरंजन का केंद्र भी होगा। महोत्सव में हॉट एयर बलून जैसी रोमांचक गतिविधियां भी उपलब्ध होंगी।  

मुख्यमंत्री ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

राष्ट्रपिता की पुण्य तिथि पर सीएम योगी ने बापू को किया नमन मुख्यमंत्री ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में गांधी प्रतिमा पर किया माल्यार्पण श्रद्धा से भरे वातावरण में मुख्यमंत्री ने कुछ क्षण मौन रहकर राष्ट्रपिता को दी श्रृद्धांजलि मुख्यमंत्री ने किया आमजन से बापू के आदर्शों को अपनाने का आह्वान लखनऊ  राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के अवसर पर शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के जीपीओ पार्क में स्थापित गांधी जी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। श्रद्धा व सम्मान के वातावरण में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बापू को नमन किया। इसके बाद कुछ क्षण मौन रहकर उन्होंने राष्ट्रपिता को स्मरण किया। मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर भी बापू को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए आमजन से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया।  भजनों से गूंजा कार्यक्रम स्थल श्रद्धांजलि समारोह के दौरान स्कूली बच्चों द्वारा महात्मा गांधी के प्रिय भजनों की प्रस्तुति दी गई। ‘रघुपति राघव राजाराम’ सहित अन्य भजनों की मधुर धुनों से जीपीओ पार्क गूंज उठा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एकाग्रता के साथ लगभग 15 मिनट तक बैठकर भजनों को सुना। इस दौरान उन्होंने न केवल बच्चों की प्रस्तुति की सराहना की, बल्कि गांधी प्रतिमा के समक्ष सभी स्कूली बच्चों के साथ फोटो भी खिंचाई। सत्य और अहिंसा का संदेश इससे पूर्व, मुख्यमंत्री ने अपने एक्स हैंडल पर बापू को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें शत-शत नमन। श्रद्धेय बापू का सत्यनिष्ठ आचरण, अहिंसा की उनकी अडिग साधना और मानवता के प्रति अनन्य करुणा, संपूर्ण विश्व को सदैव आलोकित करती रहेगी। आइए, बापू के आदर्शों को आत्मसात कर समृद्ध, न्यायपूर्ण और विकसित भारत के निर्माण में अपना श्रेष्ठ योगदान दें।' कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, विधान परिषद सदस्य महेंद्र सिंह, मुकेश शर्मा, रामचंद्र प्रधान, भाजपा के महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी आदि मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रपिता के चित्र व प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

नए भारत के लक्ष्य को मिले प्रगति पोर्टल से बल, CM साय बोले– मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस लागू

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश और प्रदेश सुशासन की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है। आज भारत विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। प्रधानमंत्री द्वारा निर्धारित विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह प्लेटफॉर्म सरकार की कथनी और करनी में समानता का सशक्त प्रमाण है तथा सुशासन की दिशा में एक प्रभावी उदाहरण प्रस्तुत करता है। मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में प्रगति पोर्टल के संबंध में पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रगति पोर्टल केवल देश की बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं की समीक्षा का माध्यम नहीं है, बल्कि यह नए भारत की नई कार्य संस्कृति का उत्कृष्ट उदाहरण है। यह प्लेटफॉर्म मिनिमम गवर्नमेंट-मैक्सिमम गवर्नेंस की कार्यशैली को सशक्त रूप से प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अपनाई गई पारदर्शी, तकनीक-आधारित और परिणामोन्मुखी शासन प्रणाली का प्रभाव आज आम नागरिक के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसी दिशा में वर्ष 2015 में प्रारंभ किया गया प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म शासन व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी पहल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र को विश्वभर में एक आदर्श प्रणाली के रूप में देखा जाता है। इसके पीछे केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल, समन्वय और सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रगति प्लेटफॉर्म केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए एक प्रभावी सेतु का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रगति का अर्थ- प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन है, अर्थात् योजनाओं की पूर्व तैयारी कर उनका समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना। यह प्लेटफॉर्म केवल निगरानी तक सीमित नहीं है, बल्कि शासन प्रणाली में जवाबदेही तय करने, पारदर्शिता बढ़ाने और कार्य संस्कृति में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि पूर्व में अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास तो हो जाता था, लेकिन उनके पूर्ण होने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं होती थी। कई निर्माण कार्य वर्षों तक लंबित रहते थे। योजनाओं में विलंब, प्रशासनिक अड़चनें और विभागीय समन्वय की कमी जैसी समस्याओं के समाधान के लिए प्रगति डिजिटल प्लेटफॉर्म को लागू किया गया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, जनधन योजना, जल जीवन मिशन तथा पीएम जनमन जैसी अनेक महत्वाकांक्षी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के पीछे स्पष्ट नीति और दृढ़ संकल्प निहित है। जब नीति और नियत दोनों सशक्त होती हैं, तब योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित किया जा सकता है। प्रगति प्लेटफॉर्म इसी सोच का व्यावहारिक उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति पोर्टल के माध्यम से प्रधानमंत्री स्वयं राज्यों के मुख्य सचिवों और केंद्र सरकार के सचिवों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करते हैं। अब तक 50 से अधिक उच्चस्तरीय प्रगति समीक्षा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिनके माध्यम से लंबित परियोजनाओं, कमजोर प्रदर्शन वाली योजनाओं और नागरिकों से जुड़ी शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया गया है। उन्होंने बताया कि अब तक प्रगति प्लेटफॉर्म के माध्यम से लगभग 85 लाख करोड़ रुपये की लागत वाली 3,300 से अधिक परियोजनाओं को गति दी गई है। इसके साथ ही एक देश-एक राशन कार्ड, प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम स्वनिधि और स्वच्छ भारत मिशन सहित 61 योजनाओं के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय सुधार किया गया है। बैंकिंग, बीमा, रेरा, जनधन योजना और मातृत्व वंदना सहित 36 क्षेत्रों में शिकायत निवारण व्यवस्था को भी प्रगति के माध्यम से सुदृढ़ किया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रगति के तहत 377 परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इन परियोजनाओं में पहचाने गए 3,162 मुद्दों में से 2,958 का समाधान किया गया। रेल्वे की ही बात करें तो 427 प्रोजेक्ट में 1568 मुद्दें सामने आए, इनमें भूमि अधिग्रहण, वन, बिजली, कानून व्यवस्था तथा निर्माण कार्य की मंजूरी से जुड़े विषय शामिल थे। जिनमें 1437 मुद्दें प्रगति प्लेटफार्म के जरिए हल किए गए। योजनाओं का क्रियान्वयन समय पर और व्यवस्थित तरीके से होता है तो पूंजीगत व्यय को सही दिशा मिलती है। अकेले रेल्वे मंत्रालय में पिछले दशक में पूंजीगत व्यय में 370 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि आज देश में प्रतिदिन बन रही सड़कों के निर्माण कार्य की गति तीन गुना अधिक हो गई है। एक दशक पहले प्रतिदिन 11.6 किलोमीटर सड़कें बनती थी, आज 34 किलोमीटर प्रतिदिन सड़क निर्माण हो रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 1463 परियोजनाओं में 2095 मुद्दें आए। जिनमें 1968 मुद्दों का समाधान किया गया। प्रगति के प्रयासों से 458 परियोजनाएं क्रियान्वयन के स्तर पर आ चुकी हैं। वहीं 937 पर काम चल रहा है। बिजली मंत्रालय की 416 परियोजनाओं में 885 मुद्दें सामने आए, जिनमें 803 का समाधान प्रगति व्यवस्था के जरिए किया गया। इनमें 237 परियोजनाएं क्रियान्वयन के स्तर पर आ चुकी हैं। 108 परियोजनाओं पर काम चल रहा है।

16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए गोवा सरकार की तैयारी, सोशल मीडिया पर प्रतिबंध जल्द लागू

पणजी मोबाइल और सोशल मीडिया बच्चों की जिंदगी का बड़ा हिस्सा बन चुके हैं। छोटे बच्चे भी घंटों Instagram, Facebook, YouTube और अन्य सोशल मीडिया ऐप्स पर समय बिता रहे हैं। इसी को देखते हुए अब गोवा सरकार एक बड़ा कदम उठाने की सोच रही है। गोवा सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाने पर विचार कर रही है। इस बात का संकेत खुद राज्य के मंत्री ने दिया है। उनका कहना है कि बच्चों को मोबाइल की लत, गलत कंटेंट और मानसिक दबाव से बचाना जरूरी है। सरकार का मानना है कि कम उम्र में सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के दिमाग और व्यवहार पर गलत असर डाल सकता है। इसी वजह से गोवा में इस तरह के नियम पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि अभी यह फैसला पूरी तरह लागू नहीं हुआ है, लेकिन इस खबर के सामने आते ही पूरे देश में चर्चा तेज हो गई है। माता-पिता, शिक्षक और सोशल मीडिया यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी राय दे रहे हैं। गोवा सरकार सोशल मीडिया पर रोक क्यों लगाना चाहती है? गोवा सरकार का कहना है कि आजकल बच्चे बहुत कम उम्र में ही मोबाइल और सोशल मीडिया के आदी हो रहे हैं। घंटों स्क्रीन देखने से उनकी आंखों, नींद और दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर कई बार गलत वीडियो, गलत बातें और गलत लोग भी मिल जाते हैं। बच्चे आसानी से इनके प्रभाव में आ जाते हैं। साइबर बुलिंग यानी ऑनलाइन परेशान करना भी एक बड़ी समस्या बन रही है। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार सोच रही है कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखा जाए। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया उठा चुका ऐसा कदम ऑस्ट्रेलिया जैसे देश ने पहले ही 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर सख्त नियम बना दिए हैं। वहां बच्चों को Instagram, Facebook और TikTok जैसे ऐप्स इस्तेमाल करने की मनाही है। सरकार का कहना है कि इससे बच्चों का बचपन सुरक्षित रहेगा और वे मोबाइल से ज्यादा किताबों, खेल और परिवार के साथ समय बिताएंगे।

राजकोष में बढ़ोतरी, जीएसटी में कमी: मध्य प्रदेश की वित्तीय तस्वीर

भोपाल मध्य प्रदेश के बजट का बड़ा आधार केंद्रीय करों में हिस्सा और राज्य के स्वयं के करों से आय होती है। केंद्रीय करों में भी जीएसटी बड़ा माध्यम है। पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26,000 करोड़ रुपये जीएसटी मिला था, जबकि इस बार दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये मिला है। इसमें तीन प्रतिशत की कमी है। वहीं, राज्य के करों की बात करें तो इसने राजकोष भरने का काम किया है। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट), आबकारी, पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के माध्यम से सरकार को 32,660 करोड़ रुपये मिले हैं, जो पिछले वर्ष इस अवधि में प्राप्त राजस्व से अधिक है। प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में एक लाख 11 हजार करोड़ और राज्य के करों से एक लाख नौ हजार करोड़ रुपये 31 मार्च, 2026 तक प्राप्त होने का अनुमान बजट में लगाया गया था। तीसरी तिमाही में देखें तो जीएसटी को छोड़कर राजस्व संग्रहण की स्थिति ठीक चल रही है। वित्त विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अभी जीएसटी में तीन प्रतिशत की कमी है। एक फरवरी को पेश होगा बजट एक फरवरी को आम बजट प्रस्तुत होना है, इसमें साफ हो जाएगा कि जीएसटी की दरों में संशोधन का कितना असर राजस्व संग्रहण पर पड़ा है। भारत सरकार 2026-27 के बजट के साथ-साथ 2025-26 का पुनरीक्षित अनुमान भी प्रस्तुत करेगी। इससे स्पष्ट होगा कि प्रदेश को केंद्रीय करों के हिस्से में कितनी राशि इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति में प्राप्त होगी। वहीं, अगले वित्तीय वर्ष में क्या स्थिति बनेगी। प्रदेश का अनुमान है कि इस वर्ष पांच हजार करोड़ रुपये तक जीएसटी का नुकसान हो सकता है। हालांकि, संतोष की बात यह है कि राज्य के टैक्स का संग्रहण लक्ष्य से अधिक चल रहा है। पेट्रोल, डीजल आदि से प्राप्त होने वाला वैट 14 हजार करोड़ रुपये दिसंबर तक प्राप्त हुआ है, जो गत वर्ष इसी अवधि में 13,500 करोड़ रुपये था। इसी तरह आबकारी से आय में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे अभी तक 10,500 करोड़ रुपये खजाने में आए हैं। पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क में 8,660 करोड़ रुपये मिले हैं, इसी मद में पिछले वर्ष 7,750 करोड़ रुपये मिले थे। करों में वृद्धि के आसार नहीं जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के पास कर लगाने के अवसर सीमित हो गए हैं। सरकार बिजली से लेकर जितने भी माध्यमों से टैक्स ले सकती है, वह लगाए जा चुके हैं। संभावना जताई जा रही है कि सरकार कर में वृद्धि के स्थान पर संग्रहण की व्यवस्था को और बेहतर बनाने पर जोर देगी।