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केंद्र सरकार की 5 लाख करोड़ रुपये की सौगात, एमपी में 101 प्रोजेक्ट्स से बदलेंगी सूरत और विकास

भोपाल  केंद्र में पीएम नरेंद्र मोदी और एमपी में सीएम मोहन यादव की बीजेपी की सरकारें हैं। देशभर में डबल इंजन की सरकारों के इस दौर में राज्य सरकार को खासा लाभ हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने यह तथ्य उजागर किया। उन्होंने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप की उपलब्धियां मीडिया से साझा करते हुए बताया कि प्रदेश में केंद्र सरकार के 101 प्रोजेक्ट के काम चल रहे हैं। इन विकास कार्यों से प्रदेश की तस्वीर बदल जाएगी। सीएम मोहन यादव ने कहा कि प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग ग्रुप (पीएमजी) और प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) प्लेटफार्म से देशभर में अटकी हुई निवेश परियोजनाओं को पुन: सक्रिय किया गया है। प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रोएक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन (प्रगति) पर प्रेजेंटेशन दिया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच परस्पर समन्वय ही हमारी सबसे शक्ति है। जब विभाग आपस में समन्वय से काम करते हैं, तो विकास की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। पहले सामान्यत: बड़ी योजनाएं कागजों पर तो बहुत भव्य दिखती थीं, लेकिन धरातल पर साकार होने से पहले ही विभागों के आपसी तालमेल की कमी के कारण निष्प्रभावी हो जाती थीं। पीएमजी और प्रगति पोर्टल से पुरानी प्रणाली को जड़ से खत्म कर असंभव दिखने वाली परियोजनाओं को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि "प्रगति" पोर्टल से देश के विकास में भू-गर्भ संपदा का दोहन देशहित में अधिक प्रभावी तरीके से होगा। भारत सरकार के अधिकारी इस पोर्टल से राज्य तथा अन्य मंत्रालयों में आने वाली प्रक्रियागत कठिनाइयों को समय रहते दूर कर लेंगे। केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर पिछली सरकारों ने ध्यान नहीं दिया गया अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में 3 नदी परियोजनाओं पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश को विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों से 209 बड़े प्रोजेक्ट्स की सौगात मिली। इनमें से 108 केंद्रीय विकास परियोजनाएं पूरी भी हो चुकी हैं। ये 2 लाख 61 हजार 340 करोड़ निवेश वाले प्रोजेक्ट हैं। सीएम मोहन यादव ने बताया कि प्रदेश में अभी 101 केंद्रीय प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। ये विकास प्रोजेक्ट 5 लाख 24 हजार 471 करोड़ रुपए से अधिक की लागत के हैं। इनमें रेल मंत्रालय के 14, सड़क परिवहन मंत्रालय के 13, विद्युत मंत्रालय के 5 और नवकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के भी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट हैं। केंद्र के सहयोग से राज्य सरकार वन्यजीव पर्यटन योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीते अपना घर बना चुके हैं। धार के पीएम मित्र पार्क से कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रेजेंटेशन दिया मुख्य सचिव अनुराग जैन ने प्रेजेंटेशन में बताया कि प्रगति प्लेटफार्म की शुरूआत 25 मार्च 2015 को हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभारंभ अवसर पर कहा था कि " आज पूरा विश्व भारत को बड़ी उत्सुकता से देख रहा है। ऐसे समय में यह अत्यंत आवश्यक है कि भारत की शासन-व्यवस्था और अधिक प्रभावी, और अधिक संवेदनशील बने। इसी दिशा में 'प्रगति पोर्टल' महत्वपूर्ण कदम है।" प्रगति की 50वीं बैठक 31 दिसम्बर 2025 को हुई। पीएमजी और "प्रगति" पोर्टल से बुनियादी ढांचा विकास परियोजना और नागरिक शिकायतों का तेजी से समाधान सुनिश्चित हुआ। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने मध्यप्रदेश में केंद्रीय परियोजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कुल 209 परियोजाएं पीएमजी पोर्टल की निगरानी में हैं। इसमें प्रमुख रूप से ऊर्जा, परिवहन, दूरसंचार, बिजली उत्पादन, सड़क और राजमार्ग, रेलवे, कोयला, तेल और गैस, मेट्रो रेल, नवकरणीय ऊर्जा एवं शहरी अवसंरचना की परियोजनाएं शामिल हैं। एमपी ने 97 प्रतिशत समस्याओं को हल किया पीएमजी समीक्षा में सामने आए केंद्रीय परियोजनाओं के संबंधित 322 मुद्दों में से राज्य सरकार ने 312 का समाधान किया। इसी प्रकार 'प्रगति पोर्टल' से 39 परियोजनाओं की समीक्षा की गई। इसमें 124 मुद्दे सामने आए जिनमें से 120 का समाधान किया गया। पीएमजी और प्रगति दोनों की समीक्षा में एमपी ने 97 प्रतिशत समस्याओं को हल किया। प्रदेश ऊर्जा और परिवहन केंद्र के रूप में उभरा है, जिसमें सड़क, रेलवे और विद्युत परियोजनाओं का प्रभुत्व है।

आज लाड़ली बहनों के खाते में 32वीं किस्त, सीएम मोहन यादव करेंगे डिजिटल ट्रांसफर

 नर्मदापुरम  मध्यप्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए आज 16 जनवरी की सुबह खुशखबरी होगी। लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त उनके खातों में ट्रांसफर की जाएगी। सीएम डॉ. मोहन यादव नर्मदापुरम के माखननगर दौरे पर रहेंगे और इस दौरान बहनों के खातों में 1500 रुपये सिंगल क्लिक के माध्यम से भेजे जाएंगे। यह राशि पहले 15 जनवरी को जारी होने वाली थी, लेकिन कार्यक्रम एक दिन के लिए स्थगित किया गया। सीएम डॉ.मोहन यादव करेंगे लोकार्पण और भूमिपूजन माखननगर के सांदीपनि स्कूल के पास खेल मैदान में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में सीएम डॉ.मोहन यादव उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा वे PWD गेस्ट हाउस का लोकार्पण करेंगे और कई अन्य विकास कार्यों का भूमिपूजन भी करेंगे। 31वीं किस्त कब जारी हुई थी मध्यप्रदेश के सीएम डॉ.मोहन यादव ने 1.26 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 31वीं किस्त के 1500 रुपये 9 दिसंबर को छतरपुर के राजनगर से ट्रांसफर किए थे। अब 32वीं किस्त माखननगर से जारी की जाएगी। लाड़ली बहनों को 3 हजार रुपये कब मिलेंगे? लाड़ली बहना योजना से अब तक 1 करोड़ 29 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। मध्यप्रदेश सरकार के अनुसार आने वाले वर्षों में यह राशि बढ़ाकर 2028 तक 3000 रुपये प्रति माह करने का लक्ष्य रखा गया है। हर महीने मिलते हैं 1500 रुपये मध्य प्रदेश सरकार इस योजना के तहत हर पात्र महिला को हर महीने 1500 रुपये देती है. शुरुआत में यह रकम 1000 रुपये थी, फिर 1250 रुपये की गई और अब दिसंबर 2025 से इसे बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया गया है. यानी एक साल में एक महिला को करीब 18000 रुपये की सीधी मदद मिल रही है. 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाओं को मिल रहा लाभ इस योजना से अभी 1 करोड़ 29 लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं. मतलब साफ है कि इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं को 32वीं किस्त का फायदा मिलेगा. सरकार का कहना है कि आने वाले सालों में इस रकम को और बढ़ाया जाएगा और 2028 तक इसे 3000 रुपये महीना करने का लक्ष्य है. लाडली बहना योजना क्या है ? बता दें कि लाडली बहना योजना की शुरुआत साल 2023 में की गई थी. इसका मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है, ताकि वे छोटे खर्चों के लिए किसी पर निर्भर न रहें. यह पैसा रोजमर्रा की जरूरतों, दवा, राशन और बच्चों की पढ़ाई में काफी मदद करता है. कौन महिलाएं योजना के लिए पात्र हैं? इस योजना का लाभ वही महिलाएं ले सकती हैं जो मध्य प्रदेश की निवासी हों. महिला विवाहित होनी चाहिए, जिसमें विधवा, तलाकशुदा और छोड़ी गई महिलाएं भी शामिल हैं. महिला की उम्र 21 साल से ज्यादा और 60 साल से कम होनी चाहिए. पैसा सीधे महिला के आधार लिंक बैंक खाते में भेजा जाता है. किन महिलाओं को नहीं मिलेगा पैसा?     अगर किसी महिला या उसके परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा. जिनके परिवार में कोई भी सदस्य इनकम टैक्स भरता है, उन्हें भी इस योजना से बाहर रखा गया है.      इसके अलावा जिनके परिवार में कोई सरकारी नौकरी करता है या पेंशन लेता है, उन्हें भी पैसा नहीं मिलेगा. आपके खाते में पैसा आएगा या नहीं, ऐसे करें चेक अगर आपको शक है कि आपका नाम लिस्ट में है या नहीं, तो इसे चेक करना बहुत आसान है.      इसके लिए आपको योजना की आधिकारिक वेबसाइट cmladlibahna.mp.gov.in पर जाना होगा.      वहां अंतिम सूची वाले विकल्प में अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें     कैप्चा भरें और ओटीपी डालते ही पूरी डिटेल लिस्ट सामने आ जाएगी. मैसेज नहीं आया तो घबराएं नहीं कई बार बैंक की तरफ से मैसेज देर से आता है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. आप अपने बैंक का बैलेंस मिनी स्टेटमेंट, मोबाइल बैंकिंग ऐप या *99# सर्विस से भी पैसे चेक कर सकती हैं. महिलाओं के लिए क्यों खासहै यह योजना अगर देखा जाए तो लाडली बहना योजना से हर महिला को महीने में 1500 रुपये मिलते हैं. यानी साल भर में यह रकम 18000 रुपये हो जाती है.आज के समय में जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, तब यह योजना महिलाओं के लिए राहत बनकर आई है. यह पैसा सीधे खाते में आता है और किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं होती, जिससे भरोसा भी बना रहता है. गांव और छोटे शहरों में यह पैसा घर के छोटे खर्चों के लिए बहुत बड़ा सहारा बन चुका है. कब शुरू हुई थी लाड़ली बहना योजना     मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना मई 2023 में शुरू की गई थी। योजना के उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना, परिवार में उनके निर्णय अधिकार को मजबूत करना तथा स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सतत सुधार सुनिश्चित करना है।     10 जून 2023 को योजना की पहली किस्त जारी की गई थी। योजना की शुरुआत में 1000 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती थी, जिसे अक्टूबर 2023 में बढ़ाकर 1,250 रुपये किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 से राशि में पुनः 250 रुपये की वृद्धि की गई।     इसके अतिरिक्त अगस्त 2023, 2024 व 2025 में रक्षाबंधन के मौके पर 250 रुपये की विशेष सहायता राशि भी बहनों को प्रदान की गई। वर्तमान में सामान्य हितग्राही महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह दिए जाते हैं। सामाजिक सुरक्षा पेंशन प्राप्त कर रही महिलाओं को 900 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं।     योजना की शुरुआत (जून 2023) से लेकर दिसंबर 2025 तक लगभग 48,632 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। योजना में किसे मिलता है लाभ पात्रता:     मध्य प्रदेश की स्थानीय निवासी हो।     विवाहित महिला के साथ निर्धन, विधवा, तलाकशुदा एवं परित्यक्ता महिलाएं भी शामिल हैं।     21 से 60 वर्ष तक की आयु की महिलाएं पात्रता के दायरे में आती हैं। अपात्र:     स्वयं/ परिवार की सम्मिलित रूप से स्वघोषित वार्षिक आय 2.5 लाख से अधिक हो या आयकरदाता हो।     ​जिनके पास संयुक्त रूप से 5 एकड़ से अधिक कृषि भूमि हो। ​जिनके परिवार के पास चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर … Read more

चुनौतियाँ तो बहुत, लेकिन भारत में है ताकत: वर्ल्ड बैंक और अब इस एजेंसी की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली इंडियन इकोनॉमी लगातार दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं (India Fastest Growing Economy) में बना हुआ है. देश की ही नहीं, बल्कि तमाम ग्लोबल एजेंसियों ने भारत की तेज रफ्तार का लोहा माना है. एक ही दिन में मोदी सरकार के लिए विदेश से दो गुड न्यूज आईं. पहले वर्ल्ड बैंक (World Bank) ने भारत की जीडीपी ग्रोथ (India GDP Growth) के अनुमान में तगड़ा इजाफा किया, तो उसे तुरंत बाद विदेश से एक और खुश करने वाली खबर डेलॉयट ने दी और कहा कि Indian Economy रुकने वाली नहीं है, तमाम चुनौतियों के बाद भी इसकी रफ्तार तेज रहेगी.  इस रफ्तार से दौड़ेगी भारत की इकोनॉमी Deloitte ने वित्त वर्ष 2026 में इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ रेट 7.5% से 7.8% रहने का अनुमान जताया है. एजेंसी ने कहा है कि मजबूत घरेलू डिमांज और सर्विस सेक्टर की गतिविधियों में मजबूती के चलते देश की रफ्तार तेज रहेगी.  डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन और ट्रंप टैरिफ की वजह से व्यापार में व्यवधान, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में नीतिगत बदलाव और अस्थिर कैश फ्लो समेत कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद FY26 की पहली छमाही में भारत नॉमिलन जीडीपी में 8% की ग्रोथ के साथ आर्थिक प्रदर्शन की दृष्टि से बेहतर बना हुआ है.  भारत पर भरोसा जताते हुए एजेंसी ने आगे कहा कि यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब भारत को रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और करेंसी में गिरावट समेत तमाम महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन घरेलू सुधारों और त्योहारी डिमांड ने पॉजिटिव आउटलुक को बल दिया है.  भारत की दनादन डील से राहत रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने नई फ्री ट्रेड डील्स (Free Trade Deals) के जरिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है. देश ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ समझौते किए हैं, जबकि इजराइल संग बातचीत शुरू ट्रेड और इन्वेस्टमेंट संबंधों का विस्तार किया है. डेलॉयट ने कहा कि बाहरी जोखिम अभी भी हाई हैं, लेकिन 2025-26 में इनका पूरा प्रभाव नहीं दिखेगा, हालांकि FY2026-27 में वैश्विक अनिश्चितताओं से ग्रोथ रेट में थोड़ी कमी आ सकती है और ये 6.6-6.9% रह सकती है.  World Bank ने भी दी खुशखबरी  डेलॉयट से पहले वर्ल्ड बैंक ने भी भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाते हुए (World Bank Rise India's GDP Growth Forecast) 7.2% कर दिया, इससे पहले जून 2025 में जताया गया अनुमान 6.3% था, जिससे ये 0.9 फीसदी ज्यादा है. विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इंडियन इकोनॉमी की रफ्तार पर अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव बेहद सीमित रहेगा.  विश्व बैंक ने अमेरिकी टैरिफ में वृद्धि (US Tariff Hike) के बावजूद मजबूत घरेलू डिमांड का हवाला देते हुए FY2026 के लिए ग्रोथ अनुमान बढ़ाया है. रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू मांग में उम्मीद से अधिक मजबूती और उपभोग के बेहतर रुझानों के चलते भारत पर अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी का असर कम रहेगा. सरकार द्वारा की गई टैक्स कटौती (Govt Tax Cut) और ग्रामीण आय में वृद्धि से घरेलू खपत में मजबूती आई है, जिसके चलते भारत का आउटलुक बेहतर नजर आ रहा है.   

चंबल से अरावली तक खनन माफिया का तांडव, राजस्थान और एमपी में लोग खौफ में, कानून नाकाम

श्योपुर/जयपुर देश में अवैध रेत खनन का जिन्न एक बार फिर पूरी ताकत से बाहर आ चुका है. राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में रेत माफिया का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि अब न सिर्फ आम लोग, बल्कि पुलिस और वन विभाग के अधिकारी भी सुरक्षित नहीं हैं.  जांच में सामने आया है कि बीजेपी शासित दोनों राज्यों में रेत माफिया खुलेआम दिनदहाड़े अवैध खनन और परिवहन कर रहा है. हालात इतने गंभीर हैं कि बीते एक हफ्ते में दो लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक वनकर्मी ड्यूटी पर तैनात था. कई जिलों में अधिकारी कार्रवाई करने से डर रहे हैं और स्थानीय लोग पर्यावरण तबाही को लेकर दहशत में जी रहे हैं. राजस्थान के धौलपुर जिले से सबसे चौंकाने वाला मामला सामने आया. यहां चंबल नदी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन रोकने गए वन रक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत को बजरी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली ने कुचल दिया. घटना 8 जनवरी की रात की है, जब वन विभाग की टीम चंबल वन्यजीव क्षेत्र में गश्त कर रही थी. ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक ने भागने के दौरान वनकर्मी को टक्कर मार दी. गंभीर हालत में उन्हें पहले करौली और फिर जयपुर रेफर किया गया, जहां पैर काटना पड़ा, लेकिन 10 जनवरी की रात उनकी मौत हो गई. वन विभाग के मुताबिक, आरोपी माफिया मौके से फरार हो गया था. बाद में पुलिस ने बजरी माफिया रामसेवक उर्फ चालू को गिरफ्तार किया. इसके बाद प्रशासन ने जेसीबी से अवैध रास्तों को खोदकर बंद किया, लेकिन सवाल यही है कि क्या ये कार्रवाई स्थायी है? अजमेर: अलर्ट मोड पर प्रशासन, सख्त चेतावनी धौलपुर की घटना के बाद अजमेर प्रशासन हरकत में आया. जिला कलेक्टर लोकबंधु ने अवैध खनन के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए. खनिज, पुलिस और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गईं. पुष्कर, केकड़ी और सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी की गई. कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर लाखों का जुर्माना लगाया गया और दोबारा पकड़े जाने वालों पर एफआईआर दर्ज की गई. प्रशासन का कहना है कि अब किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे उलट नजर आती है. अलवर: अरावली की पहाड़ियां हो रहीं खत्म अलवर जिले में अरावली की पहाड़ियों को रेत और पत्थर माफिया खोखला कर रहे हैं. राजगढ़ क्षेत्र के मूनपुर गांव में बालाजी मंदिर के पास खुलेआम पत्थर खनन चल रहा है. आजतक की टीम ने देखा कि सुबह होते ही ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खनन में जुट जाती हैं. भारी वाहन सड़कों से गुजरते हैं, लेकिन न पुलिस रोकती है और न वन विभाग. जब पुलिस ने पीछा किया तो माफिया ने एक घर की नींव तक तोड़ दी, जिससे तीन बकरियों की मौत हो गई. स्थानीय लोगों का कहना है कि माफिया को कानून का कोई डर नहीं है और पर्यावरण को भारी नुकसान हो रहा है. बारां: अवैध बजरी मंडी पर छापा बारां शहर में पुलिस ने अंबेडकर सर्किल के पास अवैध बजरी बाजार पर बड़ी कार्रवाई की. 12 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां पकड़ी गईं, जिनमें से 8 अवैध पाई गईं. हालांकि चार बिना रजिस्ट्रेशन वाली ट्रॉलियों को जांच के बाद छोड़ दिया गया, जिस पर सवाल उठ रहे हैं. गांव वालों का आरोप है कि खनन बस्ती से महज 100 मीटर दूर हो रहा है, ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आ गई हैं और शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप है. मध्य प्रदेश: रेत माफिया बनाम कानून श्योपुर: वन विभाग पर पथराव, मां-बेटे को कुचला राजस्थान के बाद अब मध्यप्रदेश की बात करते हैं, जहां श्योपुर जिले में चंबल अभयारण्य की टीम ने एक अवैध रेत से भरा डंपर पकड़ा. डंपर जब्त कर ले जाते वक्त माफिया ने पथराव कर दिया और वाहन छुड़ाने की कोशिश की. पांच लोगों पर केस दर्ज हुआ. इसी जिले के विजयपुर इलाके में तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने बाइक सवार बेटे को कुचल दिया, मां गंभीर रूप से घायल हो गई. आरोपी चालक फरार है और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है. रतलाम: पुलिस पर हमला, बीजेपी पार्षद गिरफ्तार रतलाम में अवैध परिवहन की सूचना पर पुलिस ने ट्रैक्टर-ट्रॉली रोकी. तभी 15 से ज्यादा बदमाश पहुंचे और पथराव शुरू कर दिया. ट्रॉली पलटने से एक पुलिसकर्मी दब गया. इस मामले में बीजेपी पार्षद जगदीश प्रजापत को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया. बाकी आरोपी फरार हैं और खबर लिखे जाने तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. मुरैना: चंबल में चौबीसों घंटे खनन मुरैना और भिंड चंबल क्षेत्र में अवैध रेत खनन का सबसे बड़ा गढ़ बने हुए हैं. दिन-रात ट्रैक्टर-ट्रॉलियां चंबल नदी से रेत निकालकर बेच रही हैं. खनिज विभाग की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है. अधिकारी कहते हैं कि शिकायत मिलने पर जांच होती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. जबलपुर: अफसरों को कुचलने की धमकी जबलपुर में अवैध खनन की जांच करने पहुंचे तहसीलदार और खनिज विभाग की टीम को माफिया ने ट्रक से कुचलने की धमकी दी. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. खनन कारोबारी रोहित जैन को गिरफ्तार किया गया, लेकिन सवाल यह है कि ऐसे लोग इतने बेखौफ कैसे हैं. सवाल वही: माफिया इतना ताकतवर क्यों? आजतक की इस जांच में साफ है कि अवैध रेत खनन अब सिर्फ पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था का बड़ा संकट बन चुका है. जब अफसरों की जान सुरक्षित नहीं, तो आम लोग कैसे सुरक्षित रहेंगे. सरकारें कार्रवाई के दावे कर रही हैं, लेकिन जब तक माफिया पर स्थायी और सख्त शिकंजा नहीं कसा जाता, तब तक चंबल, अरावली और नर्मदा यूं ही लुटती रहेंगी.  

तेजस मार्क-2 की उड़ान जून में, क्या भारत को अब राफेल की आवश्यकता नहीं रहेगी?

नई दिल्ली पिछले दिनों डीआरडीओ प्रमुख डॉ. समीर वी कामत ने एक बड़ी घोषणा की. कामत ने कहा कि देसी एडवांस फाइटर जेट तेजस मार्क-2 की पहली उड़ान इस साल जून-जुलाई में की जाएगी. यह स्वदेसी फाइटर जेट विकसित करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है. रिपोर्ट के मुताबिक इसी मार्च तक इस फाइटर जेट का प्रोटोटाइप तैयार हो जाएगा. इसके बाद उड़ान से पहले के तमाम ट्रायल किए जाएंगे. अगर सब कुछ निर्धारित योजना के मुताबिक चलता रहा तो 2029 से इस फाइटर जेट का मास प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. 2030 तक एयरफोर्स को इसकी डिलिवरी शुरू कर दी जाएगी. यानी 2030 तक भारत के पास अपना 4.5 जेन फाइटर जेट होगा. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भारत देसी फाइटर जेट के इतना करीब है तो फिर वह फ्रांस से 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद क्यों करना चाहता है? जबकि ये दोनों विमान 4.5 पीढ़ी के बताए जा रहे हैं. राफेल खरीद की योजना अभी तक की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा मंत्रालय में फ्रांस से 114 राफेल खरीदने के प्रस्ताव पर अंतिम चरम का विचार-विमर्श चल रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ ही दिनों के भीतर रक्षा मंत्रालय की उच्च स्तरीय बैठक होने वाली है. इसी बैठक में इस मेगा डील पर चर्चा होगी. इस डील की संभावित लागत 3.25 लाख करोड़ बताई जा रही है. भारतीय वायु सेना के प्रस्ताव पर रक्षा मंत्रालय की मुहर लगने के बाद यह मामला कैबिनेट के समक्ष जाएगा. फिर वहां से अंतिम मंजूरी मिलेगी. डील में क्या-क्या होने की संभावना संभावित डील के बारे में कहा जा रहा है कि 12 से 18 विमान सीधे फ्रांस के फ्लाइ-वे कंडीशन में आएंगे. बाकी के विमानों की निर्माण भारत में किया जाएगा. इसके लिए फ्रांसीसी कंपनी दसॉल्ट एविएशन और भारतीय कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम के बीच संयुक्त उपक्रम बनने की संभावना है. अगर यह डील हो जाती है तो भारत के पास कुल 176 राफेल लड़ाकू विमान हो जाएंगे. भारत पहले ही राफेल के दो स्क्वाड्रन खरीद चुका है. नौसेना ने भी 26 मरीन राफेल खरीदने का सौदा किया है. अगर यह डील अगले कुछ महीनों के दौरान हो जाती है तो इसकी भी डिलिवरी 2029 तक शुरू हो जाएगी.     तेजस मार्क-2 तैयार तो राफेल डील क्यों?     अब आते हैं इसी सवाल पर. भारतीय वायु सेना लड़ाकू विमानों की भारी कमी से जूझ रही है. उसके पास कम से कम 42 स्क्वाड्रन होने चाहिए लेकिन अभी वह करीब 30 स्क्वाड्रन से काम चला रही है. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. आने वाले समय में एयरफोर्स के कुछ और स्क्वाड्रन रिटायर होंगे. ऐसे में देश को भारी संख्या में लड़ाकू विमानों की जरूरत है. ऐसे में भारत को लड़ाकू विमान तो खरीदने ही होंगे. सब यह है कि उसे कौन से लड़ाकू विमान खरीदने चाहिए. दरअसल, देश को अलग-अलग मोर्चे और अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से तरह-तरह के लड़ाकू विमान चाहिए. तेजस मार्क-2 निश्चित तौर पर 4.5 पीढ़ी का फाइटर जेट है. राफेल भी 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन दोनों की क्षमताओं में जमीन आसमान का अंतर है. तेजस मार्क-2 एक हल्का जेट है जबकि राफेल की गिनती दुनिया के सबसे एडवांस जेट में होती है. वह कई मायने में पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स को टक्कर देता है. राफेल Vs तेजस मार्क-2 राफेल और तेजस मार्क-2 दोनों 4.5 पीढ़ी के फाइटर जेट हैं. लेकिन इनकी क्षमता, भूमिका और तकनीक में काफी अंतर है. इन पांच प्वाइंट्स से आप पूरी तरह स्पष्ट हो जाएंगे कि भारत क्यों राफेल खरीद रहा है. आखिर क्यों तेजस मार्क-2, राफेल की जगह नहीं ले सकता.     क्लास और वेट: राफेल एक मीडियम श्रेणी का मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है. इसमें दो इंजन लगे हैं, जो इसे लंबी दूरी के मिशन और भारी हथियार ले जाने में समक्ष बनाते हैं. तेजस मार्क-2 एक मीडियम वेट फाइटर जेट है. लेकिन इसमें केवल एक इंजन है. यह तेजस मार्क-1ए से बड़ा है. इसको मिराज-2000 की जगह लेने के लिए डिजाइन किया गया है. यह राफेल से बहुत कम हथियार ले जा सकता है.     इंजन और ताकत: राफेल में दो स्नेकमा एम88 इंजन हैं. इनका कुल थ्रस्ट लगभग 150kN है. जबकि तेजस मार्क-2 में एक इंजन है और उसका थ्रस्ट 98kN है. राफेल में दो इंजन होने से उसकी सर्वाइवेलिटी भी तेजस मार्क-2 की तुलना में काफी अधिक है.     हथियार क्षमता: राफेल लगभग 9500 किलो का हथियार ले जा सकता है. इसमें बेहद एडवांस मिटिओर बीवीआर मिसाइल और स्कैल्प क्रूज मिसाइल है. यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है. तेजस मार्क-2 में हथियार ले जाने की क्षमता 6500 किलो है. इसमें देसी अस्त्र मिसाइलें, ब्रह्मोस एनजी और तरह-तरह के स्मार्ट बम लगाए जाएंगे.     रडार और तकनीक: राफेल में दुश्मन की रडार से बचाने वाले RBE2 AESA रडार और स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सूट लगा है. जबकि तेजस मार्क-2 में उत्तम एईएसए रडार है. इसमें स्वदेसी वारफेयर सूट और आईआरएसटी सेंसर है.     कीमत: राफेल एक बहुत ही महंगा फाइटर जेट है. एक राफेल की अनुमानित कीमत 1600 से 2000 करोड़ रुपये के बीच है. जबकि तेजस मार्क-2 की कीमत 500 से 600 करोड़ रुपये है.  

अन्नदाता बने सशक्त: योगी सरकार के 9 वर्षों में बदली उत्तर प्रदेश की खेती की तस्वीर

लखनऊ उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर यकीन किया तो 2017 से पहले के खाद्यान्न संकट, कालाबाजारी और अराजकता से मुक्ति मिली और किसान पौने नौ वर्ष में ही समृद्धि के पथ पर अग्रसर हो गए। योगी मॉडल का ही असर है कि देश की कुल कृषि भूमि का महज 10 फीसदी हिस्सा रखने वाले उत्तर प्रदेश का राष्ट्रीय खाद्यान्न उत्पादन में योगदान 21 फीसदी हो चुका है। 2017 से पहले कृषि क्षेत्र में विकास दर सिंगल डिजिट पर टिकी थी, लेकिन योगी सरकार में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों में यह विकास दर पिछले तीन सालों में 14 फीसदी से अधिक रही। यूपी के किसान ‘खेत से खुशहाली’ तक पहुंचे हैं। डबल इंजन सरकार की नीतियों से उत्तर प्रदेश की खेती उत्पादकता के नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। कृषि क्षेत्र को लेकर सरकार की सोच और नीतियों ने उस तस्वीर को बदला, जिसमें किसान खुद को हाशिये पर महसूस करता था। 2017 में सत्ता संभालते ही योगी सरकार द्वारा सबसे पहले किसानों का 36 हजार करोड़ रुपये कर्ज माफ करने की बात हो या पहली बार वैज्ञानिकों द्वारा ‘लैब से निकल कर लैंड’ तक पहुंच कर विकसित कृषि संकल्प अभियान के जरिए उत्तर प्रदेश के 14170 गांवों में 23.30 लाख किसानों से संवाद साधने की, योगी युग में खेती सिर्फ जीविका का साधन नहीं, बल्कि विकास की धुरी बन गई है। खेती-किसानी को प्राथमिकता और पारदर्शी व्यवस्था के कारण पौने नौ वर्ष में यूपी की तस्वीर बदली। कृषि व्यवस्था सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि ज़मीनी बदलाव का माध्यम बनी। कभी कर्ज़, सिंचाई और भुगतान की परेशानियों से जूझने वाला किसान सरकार की प्राथमिकता के केंद्र में आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया कि किसान सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस सोच के साथ कृषि क्षेत्र में अनेक सुधार शुरू हुए। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर पारदर्शिता से फसल खरीद होने लगी। भुगतान व्यवस्था को समयबद्ध किया गया। किसान को उपज का उचित मूल्य मिलने लगा। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाया। नहरों के पुनर्जीवन, नलकूपों की संख्या में वृद्धि और मुफ्त/रियायती सिंचाई योजनाओं ने उत्पादन क्षमता बढ़ाई। सूखे और जल संकट वाले इलाकों में भी खेती सांस लेने लगी। 2017 के पहले जिस उत्तर प्रदेश में किसान आत्महत्या करने पर मजबूर था, वहां 2017 के बाद किसानों का सम्मान होने लगा। पीएम मोदी के मार्गदर्शन में एक क्लिक पर किसानों को सम्मान निधि मिलने लगी, जिसमें यूपी अग्रणी भूमिका में रहा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की जारी 21वीं किस्त तक उत्तर प्रदेश के किसानों को 94,668.58 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। दो करोड़ से अधिक किसानों को किसान पाठशाला के जरिए नवीन तकनीक व उन्नत खेती से जोड़ा गया। 16 लाख निजी ट्यूबवेल से जुड़े किसानों का ऋण माफ किया गया। सहकारिता के माध्यम से संचालित एलडीबी द्वारा किसानों को साढ़े 11 प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मिलता था, अब यह छह फीसदी पर मिलेगा। लखनऊ के अटारी में भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की स्मृति में सीड पार्क, बाराबंकी में टिश्यू कल्चर लैब के लिए 31 एकड़ भूमि तथा पीलीभीत में बासमती उत्पादन और प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना के लिए सात एकड़ जगह चिह्नित की गई। योगी सरकार ने गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में 30 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की। अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य 400 रुपए प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 390 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग 3,000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में चौथी बार गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा। 2017 के पहले तक किसानों का असंतोष अब विश्वास में बदला है। 2017 से अब तक 2.96 लाख करोड़ से अधिक का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान किया गया।

एक करोड़ 25 लाख से अधिक लाड़ली बहनों के खातों में आएंगे 1836 करोड़ रूपये

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव गुरुवार, 16 जनवरी को माखन नगर (बाबई), जिला नर्मदापुरम में आयोजित लाड़ली बहनों के राज्य स्तरीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना अंतर्गत प्रदेश की बहनों के खातों में राशि का अंतरण करेंगे। प्रदेश की लगभग 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार से अधिक पात्र बहनों के खातों में 1836 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अंतरित की जायेगी। साथ ही 29 लाख बहनों को गैस सिलेंडर रीफिलिंग के लिए 90 करोड़ से अधिक राशि का अंतरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण किया जायेगा। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की शुरुआत जून 2023 से की गई थी। योजना के अंतर्गत माह नवंबर 2025 से राशि में 250 रुपये की वृद्धि की गई है। अब पात्र हितग्राही महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। योजना में जून 2023 से दिसंबर 2025 तक मासिक आर्थिक सहायता की 31 किश्तों का नियमित रूप से अंतरण किया जा चुका है। जनवरी 2026 में योजना की 32वीं किश्त का लाड़ली बहनों के खातों में अंतरण किया जायेगा। योजना अंतर्गत अब तक जून 2023 से दिसंबर 2025 की अवधि में कुल 48 हजार 632 करोड़ 70 लाख रुपये की राशि हितग्राही महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है। जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान 38 हजार 635 करोड़ 89 लाख रुपये का अंतरण किया गया है। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और सम्मान सुनिश्चित किया गया है। आगामी समय में योजना की हितग्राही महिलाओं को विभिन्न रोजगार, स्वरोजगार एवं कौशल उन्नयन कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे, जिससे वे आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बन सकें।  

धामी सरकार का बड़ा कदम: यूसीसी में बदलाव, उपनल कर्मियों पर भी आया बड़ा निर्णय

देहरादून मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अध्यक्षता में आज बृहस्पतिवार को मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक में विभिन्न विभागों के 19 प्रस्ताव रखे गए। इसमें यूसीसी में संशोधन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है। वहीं, उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को भी मंजूरी मिल गई है। वहीं, उपनल कर्मचारियों के लिए भी समान वेतन को लेकर बड़ा निर्णय हुआ है। ये हुए फैसले     पेराई सत्र 2025-26 के लिए 270 करोड़ की शासकीय प्रतिभूति यानी स्टेट गारंटी को मंजूरी। अब चीनी मिलें ऋण ले सकेंगी।     चीनी मिलों के गन्ने के मूल्य को मंजूरी। 405 रुपये अगेती के मिलेंगे।     निर्वाचन विभाग में सेवा नियमावली को मंजूरी।     उत्तराखंड संस्कृत अकादमी का नाम उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम होगा।     यूकॉस्ट के तहत अल्मोड़ा व चंपावत के साइंस सेंटर के लिए 6-6 पद स्वीकृत किए गए।     2024-25 की ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट सदन में रखी जाएगी।     वन निगम की रिपोर्ट सदन में रखने पर मुहर।     बागवानी मिशन के तहत एंटी हेलनेट पर भारत सरकार की 50% के साथ अब राज्य से 25% अतिरिक्त मिलेंगे।     दून विवि में हिन्दू अध्ययन केंद्र के तहत 6 पदों (4 अकादमी,2 अन्य) को स्वीकृति मिली।     उपनल कर्मचारियों के लिए: पूर्व में चरणों में समान कार्य समान वेतन के 12 वर्ष के बजाय 10 वर्ष पूरे करने वालों को समान कार्य समान वेतन 7000 से 8000 कर्मचारियों को मिलेगा। 2018 से पूर्व के बाकी को भी अलग से मिलेगा लाभ। भविष्य में उपनल के माध्यम से भूतपूर्व सैनिकों के लिए पुनर्वास कार्य ही किए जाएंगे।     सतेंद्र कुमार बनाम सीबीआई के तहत एनडीपीएस, पॉक्सो, के तहत विशेष न्यायालय बनेंगे। 16 न्यायालय बनेंगे, जिसमें 144 पद स्वीकृत हैं। देहरादून हरिद्वार नैनीताल और उधमसिंह नगर में 7 एडीजी, 9 एसीजेएम स्तर के न्यायालय होंगे।     उत्तराखंड की विधानसभा के शीतकालीन सत्र के लिए सीएम को निर्णय के लिए अधिकृत किया गया।     खनन विभाग: नंधौर व अन्य नदियों में खनन का आदेश संशोधित किया गया है।     विभिन्न खेल प्रतियोगिता के लिए विधायक स्तर की चैंपियन ट्रॉफी और एक लाख, सांसद स्तर पर चैंपियनशिप ट्राफी और 2 लाख, राज्य स्तर पर 5 लाख और ट्रॉफी मिलेगी।     ब्रिडकुल रोपवे, टनल व कैविटी पार्किंग, ऑटोमेटेड या मेकैनिकल पार्किंग भी बनाएगा।     बीएनएस की धारा 330 में दो पक्षों के सहमत होने पर विशेषज्ञ की जरूरत नहीं है। उसका एक फॉरमेट बनाने के लिए नियमावली को मंजूरी।     यूसीसी में संशोधन को मंजूरी। अध्यादेश आएगा। जनवरी 2025 से पूर्व शादी वालों को छह माह के बजाय एक साल में कराना होगा विवाह पंजीकरण। रजिस्ट्रार जनरल अब अपर सचिव लेवल के अधिकारी होंगे। समय से काम न करने पर फाइन के बजाय पेनाल्टी किया गया।     उत्तराखंड पर्यटन की नियमावली को मंजूरी, होम स्टे योजना का लाभ स्थानीय को ही मिलेगा। अब इसके लिए स्थायी निवास जरूरी होगा। ब्रेड एन्ड ब्रेकफास्ट ही करा सकेंगे बाहरी राज्यों के लोग। होम स्टे जैसा कोई लाभ नहीं मिलेगा।      केदारनाथ धाम में एक पायलट प्रोजेक्ट बनेगा। इसमें गोबर व चीड़ की पत्तियों से बायो मास पैलेट बनेंगे। पर्यटन विभाग करेगा।  

BMC चुनाव: Exit Poll ने दिखाया बड़ा उलटफेर, उद्धव ठाकरे की शिवसेना को झटका

मुंबई महाराष्ट्र में मुंबई समेत राज्य की 29 नगर निगमों के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वोटिंग शाम 5.30 बजे खत्म हुई. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, कुल बीएमसी के 227 वार्ड में से बीजेपी गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं यूबीटी को 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं. महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित होंगे. महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित होंगे. महाराष्ट्र में मुंबई समेत राज्य की 29 नगर निगमों के लिए मतदान प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. वोटिंग शाम 5.30 बजे खत्म हुई. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, बीएमसी के कुल 227 वार्ड में से बीजेपी गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं यूबीटी को 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं. मुंबई के साथ-साथ ठाणे, नवी मुंबई, उल्हासनगर, कल्याण-डोंबिवली, भिवंडी-निजामपुर, मीरा-भायंदर, वसई-विरार, पनवेल, नासिक, मालेगाव, अहिल्यानगर, जलगाव, धुले, पुणे, पिंपरी-चिंचवड, सोलापुर, कोल्हापुर, इचलकरंजी, सांगली-मिराज-कुपवाड, छत्रपति संभाजीनगर, नांदेड़-वाघाला, परभणी, जालना, लातूर, अमरावती, अकोला, नागपुर और चंद्रपुर नगर निगमों में भी वोटिंग हुई. बृहन्मुंबई महानगरपालिका के 227 वार्डों के लिए इस बार 1,700 उम्मीदवार मैदान में थे. नतीजों की घोषणा कल यानी शुक्रवार को होगी. सुबह 10 बजे से वोटों की गिनती शुरू हो जाएगी.   मुंबई बीएमसी चुनाव के एग्जिट पोल नतीजों पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के प्रवक्ता सैयद जफर इस्लाम ने कहा कि ठाकरे परिवार अब महाराष्ट्र के लोगों के साथ वह कनेक्शन नहीं रखता, जो पहले कभी हुआ करता था. Axis My India के एग्जिट पोल के अनुसार, बीएमसी चुनाव में यूबीटी गठबंधन को 58 से 68 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं बीजेपी गठबंधन को 131 से 151 सीटें मिल सकती हैं.

आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान, साख बचाने के लिए सरकारी उपक्रम बेचने की मजबूरी

नई दिल्ली पाकिस्तान की सरकारी कंपनियों को राजनीतिक दखल, खराब शासन और अव्यवस्था की वजह से भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। एक पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि हालात ऐसे हैं कि सरकारी कंपनियां बहुत कम कीमतों पर प्रोडक्ट्स और सर्विस बेचने के लिए मजबूर हैं। पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार शासन में सुधार करने के बजाय, एक के बाद एक आने वाली सरकारें मुश्किल फैसले टालती रहती हैं। सरकारी कंपनियों को खराब परफॉर्मेंस, राजनीतिक हस्तक्षेप और कमजोर उत्तरदायित्व के बावजूद नियमित तौर पर बनाए रखा जाता है। जब वे भारी नुकसान और बहुत ज्यादा कर्ज जमा कर लेती हैं, तभी अचानक निजीकरण को हल मान लिया जाता है। यह पैटर्न सभी क्षेत्रों में एक जैसा दिखता है। व्यवसायिक मैनेजमेंट की जगह धीरे-धीरे राजनीतिक नियुक्ति ले लेती है, और कमर्शियल अनुशासन खत्म हो जाता है। सालों की अनदेखी और पब्लिक फंड डालने के बाद ऐसी कंपनियों को बेचने से नुकसान सामाजिक हो जाता है और फायदे प्राइवेट हो जाते हैं। पाकिस्तान में निजीकरण शायद ही कभी कोई जानबूझकर या अच्छी तरह से प्लान किया गया इकोनॉमिक रिफॉर्म रहा हो। पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (पीआईए) इस नाकामी को साफ तौर पर दिखाता है। कभी एक जानी-मानी क्षेत्रीय एयरलाइन, पीआईए को ज्यादा स्टाफ, राजनीतिक हस्तक्षेप और बिजनेस लॉजिक की कमी ने कमजोर कर दिया। एक के बाद एक सरकारों ने एयरलाइन को एक कमर्शियल एंटिटी के बजाय सिर्फ पैसे कमाने का जरिया माना। इसे चालू रखने के लिए अरबों रुपए खर्च किए गए, जबकि सर्विस की क्वालिटी खराब होती गई और प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई। पीआईए का निजीकरण किया जाना कोई रणनीतिक योजना नहीं थी। यह लंबे समय से चली आ रही गवर्नेंस की नाकामी को मानना ​​था। प्राइवेटाइजेशन के सपोर्टर अक्सर टेलीकॉम कंपनी पीटीसीएल को इस बात का सबूत बताते हैं कि प्राइवेट ओनरशिप से परफॉर्मेंस बेहतर होती है। असल में, प्राइवेटाइजेशन के बाद पीटीसीएल ने ऑपरेशनल और तकनीकी सुधार किए। नेटवर्क मॉडर्नाइजेशन और सर्विस का विस्तार हुआ। फिर भी यह उदाहरण पाकिस्तान के प्राइवेटाइजेशन के तरीकों में गहरी कमियों को भी सामने लाता है। सालों बाद भी, हजारों पुराने सरकारी कर्मचारी और पेंशनर पेंशन, सर्विस रेगुलराइजेशन, और प्राइवेटाइजेशन के बाद के अधिकारों को लेकर चल रहे केस में फंसे हुए हैं। ये अनसुलझे झगड़े बताते हैं कि कैसे इंसानी और कानूनी खर्चों को दूसरी चिंता माना गया। आर्टिकल में कहा गया है कि वे एक ऐसे प्रोसेस का खुलासा करते हैं जो इंस्टीट्यूशनल जिम्मेदारी को सुरक्षित रखने के बजाय लेनदेन को पूरा करने पर फोकस करता है। प्राइवेटाइजेशन से कंज्यूमर्स को अपने आप कम कीमतों का फायदा मिलता है, यह सोच गुमराह करने वाली है। पाकिस्तान का अपना अनुभव इस सोच को गलत साबित करता है। के-इलेक्ट्रिक इसका एक साफ उदाहरण है। प्राइवेटाइजेशन के बावजूद, बिजली के टैरिफ कम नहीं हुए हैं, बल्कि रिकॉर्ड लेवल तक बढ़ गए हैं।