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सीरिया में ऑपरेशन चलकर ISIS के ठिकानों पर US ने बरपाया कहर

न्यूयार्क. अमेरिका शनिवार की रात ईरान में इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के ठिकानों पर कहर बनकर टूट पड़ा। इसे तीम अमेरिकी नागरिकों की मौत के बदले के तौर पर देखा जा रहा है। अमेरिका के विदेश विभाग और सेंट्रल कमांड ने वीडियो जारी कर पूरी तस्वीर दुनिया के सामने रखी है। आपको बता दें कि यह कार्रवाई "ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक" का हिस्सा है, जिसे पिछले महीने अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले का बदला लेने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शुरू किया गया था। सेंट्रल कमांड द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को बेस से उड़ान भरते और सीरिया के विभिन्न हिस्सों में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो फुटेज में कई ठिकानों को हवाई हमलों में ध्वस्त होते दिखाया गया है। पलमायरा हमले का प्रतिशोध अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि ये हमले 13 दिसंबर 2025 को पलमायरा में हुए उस हमले का जवाब हैं, जिसमें एक ISIS आतंकवादी ने घात लगाकर हमला किया था। इस दुखद घटना में आयोवा नेशनल गार्ड के दो बहादुर सैनिक, एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार (25) और विलियम नथानिएल हॉवर्ड (29) शहीद हुए थे। एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की भी जान गई थी। दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद से सीरिया में अमेरिकी बलों पर यह पहला प्राणघातक हमला था। हम तुम्हें ढूंढ लेंगे और मार देंगे सेंट्रल कमांड ने वीडियो के साथ जारी बयान में आतंकियों को बेहद कड़ी चेतावनी दी है। सेना ने कहा, "हमारा संदेश बहुत मजबूत है। यदि आप हमारे योद्धाओं को नुकसान पहुंचाएंगे, तो हम आपको दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढ निकालेंगे और खत्म कर देंगे। आप न्याय से बचने के लिए कितनी भी कोशिश कर लें, सफल नहीं होंगे।" क्या है ऑपरेशन हॉकआई यह ऑपरेशन 19 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था, जब पहले चरण में मध्य सीरिया में करीब 70 ठिकानों को नष्ट किया गया था। इस अभियान में अमेरिका के साथ जॉर्डन की सेना भी सक्रिय रूप से शामिल है। शनिवार के इन हवाई हमलों से ठीक एक दिन पहले सीरियाई सुरक्षा बलों ने 'लेवेंट' क्षेत्र में ISIS के मुख्य सैन्य कमांडर को गिरफ्तार करने का दावा किया था। 2010 के दशक के मध्य में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर ISIS के कब्जे के बाद से ही अमेरिकी सेना वहां मौजूद है। वर्तमान में भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक सीरिया में तैनात हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक आतंकवाद को जड़ से खत्म करना और भविष्य के हमलों को रोकना है।

सहमति वाला प्यार अपराध नहीं, SC ने सुझाया ‘रोमियो-जूलियट’ क्लॉज

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाए गए POCSO अधिनियम के बढ़ते दुरुपयोग पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि यह कानून बच्चों की सुरक्षा के लिए एक पवित्र और नेक इरादे का प्रतीक है, लेकिन कई मामलों में यह बदले की भावना से इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि इन कानूनों का खासकर उन मामलों में तेजी से दुरुपयोग हो रहा है जहां किशोरों (टीनएजर्स) के बीच सहमति से बने रिश्तों को कठोर आपराधिक कार्रवाई के तहत लाया जा रहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार से इस समस्या पर गंभीरता से विचार करने और ऐसे मामलों में राहत देने के लिए 'रोमियो-जूलियट क्लॉज' लाने पर विचार करने को कहा है, ताकि वास्तविक किशोर जोड़ों को अनावश्यक आपराधिक मुकदमों से बचाया जा सके। न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले में दिए गए व्यापक निर्देशों को रद्द करते हुए केंद्र सरकार से ‘रोमियो-जूलियट क्लॉज’ शामिल करने पर विचार करने का सुझाव दिया है। यह क्लॉज उन वास्तविक किशोर संबंधों को कानून की कठोरता से बचाने का प्रावधान देगा, जहां दोनों पक्ष सहमति से रिश्ते में हों और उम्र में मामूली अंतर हो। क्या था इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला? शीर्ष अदालत की ये टिप्पणी उत्तर प्रदेश राज्य बनाम अनुरुद्ध मामले में आई, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने POCSO के एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए राज्यभर में लागू होने वाले कुछ निर्देश जारी किए थे। इनमें शामिल था कि हर POCSO मामले की जांच की शुरुआत में पीड़िता की उम्र का मेडिकल टेस्ट अनिवार्य रूप से कराया जाए और अदालतें स्कूल या जन्म प्रमाणपत्रों पर संदेह होने पर जमानतें खारिज कर सकती हैं। हाईकोर्ट की सीमाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत याचिका की सुनवाई करते समय अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर निर्देश जारी कर दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत के लिए सुनवाई में अदालत केवल आरोपी की रिहाई या निरोध पर फैसला कर सकती है, न कि जांच प्रक्रिया में बदलाव या सामान्य निर्देश जारी कर सकती है। यह संवैधानिक शक्तियों और वैधानिक शक्तियों का अनुचित मिश्रण है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जमानत अदालतें 'मिनी ट्रायल' नहीं कर सकतीं, न ही विवादित तथ्यों- जैसे उम्र पर अंतिम निर्णय दे सकती हैं। साथ ही, संसद द्वारा तय प्रक्रिया को दरकिनार कर कोई नया मानक भी निर्धारित नहीं किया जा सकता। सहमति वाले किशोर रिश्तों में पॉक्सो के दुरुपयोग पर चिंता हालांकि हाईकोर्ट के निर्देशों को खारिज करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़े सामाजिक और कानूनी संकट की ओर भी ध्यान दिलाया। अदालत ने कहा कि पॉक्सो कानून का उद्देश्य बच्चों को यौन शोषण और उत्पीड़न से बचाना है, लेकिन कई मामलों में इसका इस्तेमाल उन परिवारों द्वारा किया जा रहा है जो युवाओं के आपसी रिश्तों के खिलाफ हैं। कोर्ट ने कहा- पॉक्सो अधिनियम बच्चों की रक्षा के लिए बनाया गया एक अत्यंत पवित्र कानून है। लेकिन जब इस तरह के नेक उद्देश्य वाले कानून का बदले और निजी दुश्मनी के हथियार के रूप में इस्तेमाल होता है, तो न्याय की अवधारणा ही उलट जाती है। पीठ ने यह भी नोट किया कि देशभर की अदालतों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां लड़की की उम्र जानबूझकर 18 साल से कम दिखाई जाती है ताकि लड़के को पॉक्सो की कठोर धाराओं में फंसाया जा सके, जबकि रिश्ता सहमति से और उम्र में बहुत कम अंतर वाला होता है। असली पीड़ित और कानून के दुरुपयोग के बीच गहरी खाई सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पॉक्सो के दुरुपयोग से एक गहरी असमानता पैदा होती है। एक ओर वे बच्चे हैं जिन्हें वास्तव में संरक्षण की जरूरत है, लेकिन गरीबी, डर और सामाजिक कलंक के कारण वे न्याय व्यवस्था तक नहीं पहुंच पाते। दूसरी ओर, वे लोग हैं जो सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक संसाधनों के बल पर कानून का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं। केंद्र सरकार को भेजी गई प्रति, रोमियो–जूलियट क्लॉज का सुझाव इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले की प्रति केंद्रीय विधि सचिव को भेजने का निर्देश दिया और केंद्र सरकार से कहा कि वह पॉक्सो कानून के दुरुपयोग को रोकने के उपायों पर विचार करे। अदालत ने सुझाव दिया कि कई देशों की तरह भारत में भी रोमियो–जूलियट क्लॉज लाया जा सकता है, जिससे सहमति वाले, उम्र में नजदीक किशोर रिश्तों को आपराधिक कार्रवाई से बाहर रखा जा सके। रोमियो-जूलियट क्लॉज क्या है? यह एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जो कई देशों में लागू है। इसमें उम्र में मामूली अंतर (जैसे 2-4 साल) वाले किशोरों के बीच सहमति से बने रिश्तों को यौन अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाता है, ताकि उन्हें अनावश्यक रूप से आपराधिक न बनाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से इस तरह का क्लॉज POCSO में जोड़ने पर विचार करने को कहा है, साथ ही ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई का तंत्र बनाने का सुझाव दिया है जो कानून का बदले के लिए दुरुपयोग करते हैं। वकीलों की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी अदालत ने वकीलों की भूमिका पर भी जोर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ताओं को बिना सोचे-समझे ऐसे मामले दाखिल नहीं करने चाहिए, जहां साफ हो कि कानून का उपयोग बदले या दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। बार को एक फिल्टर की भूमिका निभानी चाहिए, ताकि सुरक्षा के लिए बने कानून किसी को नुकसान पहुंचाने का साधन न बनें। उम्र तय करने पर कानून की स्थिति उम्र निर्धारण के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का हवाला देते हुए कहा कि इसमें साफ क्रम तय है- पहले स्कूल या जन्म प्रमाण पत्र देखे जाएं। केवल तब, जब ऐसे दस्तावेज उपलब्ध न हों, मेडिकल जांच जैसे ऑसिफिकेशन टेस्ट का सहारा लिया जा सकता है। मेडिकल जांच हर मामले में अनिवार्य नहीं हो सकती। अन्य कानूनों के दुरुपयोग से तुलना सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह समस्या केवल पॉक्सो तक सीमित नहीं है। Section 498A IPC और दहेज निषेध अधिनियम जैसे कानूनों के दुरुपयोग में भी यही … Read more

पारा @2.9 डिग्री, खूब ठिठुर रही दिल्ली

नई दिल्ली. दिल्ली में ठंड का सितम जारी है। सुबह घना कोहरा और दिनभर चलने वाली शीतलहर लोगों को अंदर तक ठिठुरने पर मजबूर कर रही है। रविवार को भी दिल्ली की सबसे सर्द सुबह दर्ज की गई। न्यूनतम पारा 4.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। दिल्ली का आया नगर सबसे ठंडा रहा जहां न्यूबनतम पारा 2.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। राहत की उम्मीद लगाए दिल्लीवासियों को फिलहाल इसी कड़कड़ाती ठंड से जूझना पड़ेगा। मौसम विभाग ने शीतलहर का येलो अलर्ट भी जारी कर दिया है। सुबह कोहरे वाली दिल्ली में आज पालम, रिज और आयानगर जैसे क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 4.1 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। संभावना है कि शीतलहर की यह स्थिति कल भी जारी रहेगी। आज सुबह पालम एयरपोर्ट पर दृश्यता (visibility) 450 मीटर दर्ज की गई। वहीं सफदरजंग में दृश्यता 600 मीटर रही। शनिवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान गिरकर 5.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। इसके साथ ही शहर के कुछ हिस्सों में बारिश भी हुई। पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी भी दिल्ली के मौसम में बदलाव की जिम्मेदार है। स्टेशन अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) वर्षा (mm) सफदरजंग 20.2 4.8 000.0 पालम 16.2 3.0 000.0 लोधी रोड 20.0 4.6 000.0 रिज (Ridge) 20.0 3.7 000.0 आयानगर 19.0 2.9 000.0 आगे कैसा रहेगा मौसम? 12 जनवरी यानी सोमवार को भी शीतलहर का येलो अलर्ट घोषित किया गया है। इस दौरान न्यूनतमन तापमान 3-5 डिग्री तो वहीं अधिकतम 17-19 डिग्री तक रहेगा। मध्यम कोहरा भी सुबह के वक्त परेशान करक सकता है। 13 जनवरी से कोल्ड वेव से थोड़ी राहत मिल सकती है। 13 जनवरी से 16 जनवरी तक न्यूनतम तापमान 8 डिग्री तक जाएगा वहीं अधिकतम तापमान 20 डिग्री पर रहेगा। हल्के से मध्यम कोहरा परेशान कर सकता है। इस दौरान बारिश का अलर्ट नहीं है। कैसा है पलूशन का हाल? दिल्ली में वायु गुणवत्ता में कुछ सुधार देखा गया है और अब यह 'बहुत खराब' (very poor) श्रेणी से सुधरकर 'खराब' (poor) श्रेणी में आ गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 298 दर्ज किया गया। हालांकि औसत में सुधार हुआ है, लेकिन दिल्ली के कई इलाकों में अब भी AQI का स्तर 300 से ऊपर बना हुआ है।

मध्य प्रदेश में सरकारी बंगला खाली नहीं कर रहे अधिकारी और नेता, नोटिस से दी बेदखली की चेतावनी

 भोपाल मध्यप्रदेश में सत्ता तो बदल गई, लेकिन सरकारी बंगलों पर जमे रसूखदार अब तक अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं थे. अब मोहन सरकार ने साफ संदेश दे दिया है कि पद गया, तो बंगला भी छोड़ना पड़ेगा. नियम सबके लिए बराबर हैं, चाहे वह अपनी ही पार्टी का कितना बड़ा नेता क्यों न हो. पात्रता समाप्त होने के बावजूद सरकारी आवासों पर कब्जा जमाए पूर्व मंत्रियों, पूर्व सांसदों और आईएएस अफसरों के खिलाफ सरकार ने सख़्त रुख अपनाते हुए बंगला खाली करने के नोटिस भेजे हैं. संपदा संचालनालय ने ऐसे सभी नामों पर नोटिस जारी कर दिए हैं, जो सालों से नियमों को ताक पर रखकर सरकारी बंगलों का सुख भोग रहे थे. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वर्गीय प्रभात झा के परिवार को भोपाल के 74 बंगले क्षेत्र में स्थित बी-टाइप आवास खाली करने के लिए 13 जनवरी तक का नोटिस दिया गया है. नोटिस में दो टूक चेतावनी भी दी गयी है कि समय पर बंगला खाली नहीं हुआ, तो प्रशासन बल प्रयोग कर बेदखली करेगा.  सुधीर कुमार कोचर को दो साल पहले सरकार ने दमोह का कलेक्टर बनाया था। इसके लिए पहले वह मंत्रालय में पदस्थ थे। तब उन्हें भोपाल में शासकीय आवास आवंटित किया गया था, लेकिन अब तक उसे उन्होंने खाली नहीं किया है। जबकि, नियमानुसार अधिकतम छह माह वह इसे रख सकते थे। कोचर इस तरह नियम विरुद्ध तरीके से आवास रखने वाले एक मात्र अधिकारी नहीं हैं। उन जैसे कई अधिकारी हैं। यही स्थिति नेताओं की भी है, जिसमें दिवंगत भाजपा नेता प्रभात झा और पूर्व मंत्री रामपाल सिंह भी हैं। झा के स्वजन को नोटिस देकर सात दिनों में आवास खाली करने के लिए कहा गया है। संपदा संचालनालय के अधिकारियों का कहना है कि भोपाल में सरकारी आवासों की कमी बनी रहती है। इसका बड़ा कारण यह है कि जिन लोगों को एक बार आवास आवंटित हो जाते हैं, वे आसानी से खाली नहीं करते हैं। नियमानुसार अधिकारी का जब यहां से तबादला हो जाता है तो उसे आवास खाली कर देना चाहिए। इसके लिए अधिकतम छह माह का समय दिया जाता है। आमतौर पर इस अवधि में कम ही आवास रिक्त होते हैं, जबकि दूसरे अधिकारी स्थानांतरित होकर आ जाते हैं। इनके लिए आवास की व्यवस्था करने में परेशानी होती है। भोपाल के बाहर पदस्थ हैं, पर बंगला नहीं किया खाली जैसे दमोह कलेक्टर बनाकर सुधीर कुमार कोचर को भेजा गया पर उन्होंने अब तक आवास रिक्त नहीं किया। रत्नाकर झा भी भोपाल के बाहर पदस्थ हैं लेकिन आवास पर कब्जा बना हुआ है। महीप तेजस्वी राजगढ़ कलेक्टर हैं तो सुधीर कुमार शाही सेवानिवृत्त हो चुके हैं। अधिकारियों की तरह नेता भी हैं जो एक बार आवास आवंटित होने के बाद रिक्त नहीं करते हैं। भाजपा नेता प्रभात झा को 74 बंगले में आवास आवंटित हुआ था। उनके निधन के बाद अब भी कब्जा स्वजन के पास है। इसी तरह पूर्व मंत्री रामपाल सिंह विधानसभा चुनाव हार गए लेकिन शिवाजी नगर में आवास रखे हुए हैं। संगठन के कई नेता विधायकों के नाम पर बी और सी श्रेणी के आवास आवंटित कराकर रह रहे हैं। संपदा के सूत्रों का कहना है कि इनमें से कुछ नेताओं को नोटिस देकर आवास खाली करने के लिए कहा गया है। साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि यदि आवास खाली नहीं किए जाते हैं तो फिर बल प्रयोग किया जाएगा।

राफेल सौदे में नई रफ्तार, 114 विमानों की डील के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति दिल्ली में होंगे मौजूद

नई दिल्ली भारत का MRFA प्रोग्राम के तहत फाइटर जेट खरीदने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे संकेत मिले हैं, जिनके दम पर कहा जा रहा है कि 114 राफेल फाइटर जेट की डील जल्द फाइनल हो सकती है. दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस डील से देश की एयरोस्पेस की तस्वीर बदल जाएगी. इस डील के तहत भारत राफेल-F4 और राफेल-F5 खरीदेगा, जिसे सुपर राफेल डील भी कहा जाता है. इस डिफेंस डील के पीछे सबसे बड़ा डेवलपमेंट फ्रांसीसी राष्ट्रपति का भारत विजिट है.  फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपने प्रस्तावित भारत दौरे की खुद पुष्टि की है. उन्होंने कहा कि डिप्लोमैटिक कोर संबोधित करते हुए कहा कि इंडिया-AI इम्पैक्ट समिट-2026 में वे शामिल होंगे. यह समिट 19-20 फरवरी को दिल्ली में आयोजित किया जाएगा. इस समिट की घोषणा पीएम मोदी ने फ्रांस में की थी.   इमैनुएल आ रहे दिल्ली मैक्रों के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम व्यापारिक और रक्षा समझौते हो सकते हैं. इस दौरान सबसे अहम समझौता रक्षा समझौता होगा. जो भारत और फ्रांस के बीच G2G होगा. यानी सरकार से सरकार के बीच डील होगी. यह दुनिया की सबसे बड़ी डिफेंस डील बताई जा रही है, जो भारत और फ्रांस के बीच होने जा रही है. इस डील के तहत भारत 114 राफेल फाइटर जेट खरीदेगा. खास बात है कि यह डील भारत और फ्रांस की तरफ से फाइनल मानी जा रही है. हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. इसकी वजह भी भारत है. फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने तो सार्वजिक ने तौर पर डील की घोषणा कर दी थी.  भारत की तरफ से नहीं मिला AON बता दें कि पिछले दिनों फ्रांस के रक्षा मंत्रालय ने अपनी वेबसाइट पर डील से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक कर दिए थे. जिस पर भारत ने आपत्ति जताई तो फ्रांस ने दस्तावेजों को हटा लिया. वहीं भारत की बात करें तो यह डील अंतिम स्टेज में पहुंच चुकी है. डील संबंधित सभी शर्तों पर बातचीत हो चुकी है. इस प्रोजेक्ट में भारत की तरफ से MRFA और सरकार दोनों शामिल हैं. अभी तक MRFA प्रोजेक्ट में मुख्य भूमिका निभा रहा था. अब सिर्फ  Acceptance of Necessity (AoN) बाकी है.  G2G डील होगी फाइनल IAF से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, सरकार सीधे डसॉल्ट एविएशन से बातचीत करना चाह रही है.  इससे लंबे और जटिल MRFA टेंडर प्रोसेस को दरकिनार किया जा सकता है, जिसमें आमतौर पर 4–5 साल लग जाते हैं. वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी चाहते हैं कि यह सौदा पहले की तरह सरकार-से-सरकार (G2G) मॉडल पर हो, ताकि फाइटर स्क्वाड्रन की कमी को जल्दी पूरा किया जा सके. इस समय IAF की स्क्वाड्रन संख्या तय मानक से काफी कम है. अगले महीने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान इस डील को राजनीतिक स्तर पर बड़ा समर्थन मिलने की उम्मीद है. नागपुर बनेगा राफेल सिटी सूत्रों का कहना है कि 114 राफेल जेट्स का ऑर्डर लगभग तय माना जा रहा है और इनका निर्माण भारत में ही किया जाएगा. इसके लिए Dassault की सब्सिडियरी भारत में प्रोडक्शन लाइन लगाएगी. यह फैक्ट्री सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए ही नहीं, बल्कि भविष्य में राफेल के एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी काम कर सकती है.  राफेल का निर्माण नागपुर स्थित Dassault Reliance Aerospace Limited (DRAL) प्लांट में किया जा सकता है. हालांकि, इस जॉइंट वेंचर की संरचना में बड़ा बदलाव संभव है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, Dassault कंपनी अनिल अंबानी की Reliance Defence की हिस्सेदारी खरीदकर प्लांट का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में लेना चाहती है, जिसके लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी जरूरी होगी. मंजूरी मिलते ही प्लांट को फुल-स्केल फाइटर जेट प्रोडक्शन के लिए अपग्रेड किया जाएगा.

V2V टेक्नोलॉजी से सड़क पर आपस में बात करेंगी गाड़ियां, सरकार का हादसों को रोकने का प्लान

नई दिल्ली कल्पना कीजिए कि आप घने कोहरे में गाड़ी चला रहे हैं, सामने कुछ दिख नहीं रहा है, लेकिन आपकी कार आपको पहले ही बता दे कि आगे खड़ी गाड़ी कितनी दूर है. या पीछे से तेज रफ्तार वाहन आ रहा है और सिस्टम आपको अलर्ट कर दे. सरकार अब इसी तरह की एक ख़ास तकनीकी को वाहनों में देने की योजना पर काम कर रही है. भारत सरकार 2026 के अंत तक देश में व्हीकल-टू-व्हीकल यानी V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने की तैयारी में है. इसका सीधा मकसद है सड़कों पर हादसों की संख्या को कम करना और यात्रियों की जान बचाना है. क्या है V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी V2V टेक्नोलॉजी के तहत गाड़ियां आपस में सीधे बातचीत करेंगी. इसके लिए किसी मोबाइल नेटवर्क या इंटरनेट की जरूरत नहीं होगी. जब दो वाहन एक-दूसरे के ज्यादा करीब आएंगे तो सिस्टम तुरंत सिग्नल भेजेगा और ड्राइवर को अलर्ट कर देगा. इससे किसी भी संभावित टक्कर की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी और आप सेफ ड्राइविंग का आनंद ले सकेंगे. यह तकनीक खास तौर पर उन हादसों को रोकने में मदद करेगी, जो सड़कों पर खड़ी गाड़ियों और पीछे से तेज रफ्तार में आने वाले वाहनों के बीच होते हैं. सर्दियों में घने कोहरे के कारण होने वाले बड़े हादसों और कई गाड़ियों की टक्कर को भी यह सिस्टम रोक सकता है. जब विजिबिलिटी लगभग जीरो हो जाती है, तब यह टेक्नोलॉजी ड्राइवर के लिए तीसरी आंख का काम करेगी. नितिन गडकरी ने क्या कहा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्य परिवहन मंत्रियों के साथ हुई सालाना बैठक के बाद इस योजना की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में इस टेक्नोलॉजी पर विस्तार से चर्चा हुई है और इसे जल्द लागू किया जाएगा. उनके मुताबिक यह सिस्टम खास तौर पर पार्क की गई गाड़ियों और कोहरे में होने वाले हादसों को रोकने में बेहद कारगर साबित होगा. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी उमाशंकर ने इसे रोड सेफ्टी की दिशा में बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया के बहुत कम देशों में इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है. भारत में इसे लागू करना एक बड़ी उपलब्धि होगी. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत करीब 5000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. कैसी होगी यह टेक्नोलॉजी यह सिस्टम एक खास डिवाइस के जरिए काम करेगा, जो सिम कार्ड जैसी होगी और गाड़ी में लगाई जाएगी. यह डिवाइस आसपास मौजूद अन्य वाहनों से सिग्नल लेकर जानकारी साझा करेगी. ताकि सड़क पर मौजूद सभी वाहनों में कम्युनिकेशन सिस्टम डेवलप हो सके. हालांकि इस सिस्टम के एक्टिव होने के बाद चालक को इससे मिलने वाले किसी भी तरह के अलर्ट पर तुरंत रिएक्ट करना जरूरी होगा. कैसे मददगार होगी यह तकनीक यह टेक्नोलॉजी सुरक्षित दूरी बनाए रखने में मदद करेगी. साथ ही सड़क किनारे खड़ी या रुकी हुई गाड़ियों के बारे में भी ड्राइवर को चेतावनी देगी. यह सिस्टम 360 डिग्री काम करेगा. यानी आगे, पीछे और दोनों तरफ से आने वाले वाहनों के सिग्नल ड्राइवर तक पहुंचेंगे. क्या देने होंगे पैसे इस परियोजना की कुल लागत लगभग 5000 करोड़ रुपये आंकी गई है. उपभोक्ताओं से भी इसके लिए शुल्क लिया जाएगा, लेकिन इसकी कीमत अभी तय नहीं की गई है. इसके बारे में अभी आधिकारिक तौर पर कोई घोषणा भी नहीं की गई है. कब से लागू होगी तकनीक परिवहन मंत्रालय 2026 के अंत तक इस टेक्नोलॉजी को नोटिफाई करने की तैयारी में है. इसके बाद इसे चरणबद्ध तरीके से इसे सभी वाहनों में लागू किया जाएगा. शुरुआत में यह सिस्टम सिर्फ नई गाड़ियों में लगाया जाएगा. V2V सिस्टम एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम यानी ADAS के साथ मिलकर काम करेगा. अभी कुछ महंगी एसयूवी में इस तरह की तकनीक मौजूद है, लेकिन वह सेंसर पर आधारित है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन गाड़ियों को भी नए सिस्टम के हिसाब से अपडेट किया जाएगा. सरकारी अधिकारियों का मानना है कि V2V टेक्नोलॉजी आने वाले समय में सड़क हादसों को कम करने और ट्रैफिक सेफ्टी को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी. अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो 2026 के बाद भारतीय सड़कों पर गाड़ियां सिर्फ चलेंगी नहीं, बल्कि एक-दूसरे से बात भी करेंगी.  

ISRO का PSLV रॉकेट: 63 में से 60 सफल मिशन, अब नई उड़ान की ओर बढ़ेगा

 नई दिल्ली PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का वर्कहॉर्स (मुख्य काम करने वाला रॉकेट) इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह बहुत विश्वसनीय और बार-बार इस्तेमाल होने वाला रॉकेट है. यह 1993 से लगातार काम कर रहा है. विभिन्न प्रकार के सैटेलाइट्स (छोटे से बड़े, भारतीय और विदेशी) को सटीक ऑर्बिट में पहुंचाने में माहिर है. अगली लॉन्चिंग कौन सी और कब? अगली PSLV लॉन्च PSLV-C62 है, जो 12 जनवरी 2026 को सुबह 10:17 बजे IST श्रीहरिकोटा के फर्स्ट लॉन्च पैड से होगी. यह इसरो की 2026 की पहली ऑर्बिटल लॉन्च होगी. मुख्य पेलोड EOS-N1 (Anvesha) नामक हाइपरस्पेक्ट्रल अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (DRDO द्वारा विकसित) है. साथ में 18 अन्य को-पैसेंजर सैटेलाइट्स (भारतीय और अंतरराष्ट्रीय) जाएंगे. यह PSLV की 64वीं उड़ान होगी. यह लॉन्च PSLV-C61 की 2025 वाली असफलता के बाद वापसी का प्रतीक है. विश्वसनीयताः 94% से ज्यादा सफलता दर (कई दशकों में सिर्फ 2-3 असफलताएं). लचीलापनः अलग-अलग वेरिएंट (XL, QL, DL, CA) से 100 ग्राम से 1700 किग्रा तक पेलोड ले जा सकता है. मल्टी-सैटेलाइट लॉन्चः एक ही उड़ान में 100+ सैटेलाइट्स लॉन्च कर चुका है (2017 में 104 सैटेलाइट्स का विश्व रिकॉर्ड). महत्वपूर्ण मिशनः चंद्रयान-1, मंगलयान (Mangalyaan), आदित्य-L1, Astrosat जैसे बड़े मिशन इसी ने किए. यह ISRO की कॉमर्शियल लॉन्च सर्विस (NSIL के जरिए) का सबसे बड़ा आधार है, जिससे विदेशी सैटेलाइट्स लॉन्च करके भारत को कमाई और विश्वसनीयता मिलती है. PSLV की लॉन्चिंग कब शुरू हुई? PSLV की पहली लॉन्च 20 सितंबर 1993 को हुई थी (PSLV-D1). यह विकास चरण था. असफल रहा था. पहली सफल लॉन्च 15 अक्टूबर 1994 में हुई. अब तक कितनी सफल और असफल? जनवरी 2026 तक PSLV की कुल उड़ानें 63 (PSLV-C61 तक) हो चुकी हैं.       सफलः  60 (लगभग 95% सफलता दर).     असफलः 3 (पूर्ण या आंशिक). असफलताओं के कारण     1993 (PSLV-D1) — पहली विकास उड़ान, सॉफ्टवेयर और इंजन कंट्रोल में समस्या से रॉकेट नियंत्रण खो बैठा.     2017 (PSLV-C39/IRNSS-1H) — हीट शील्ड (फेयरिंग) अलग नहीं हुआ, सैटेलाइट ऑर्बिट में नहीं पहुंचा.     2025 (PSLV-C61/EOS-09) — तीसरे स्टेज में चैंबर प्रेशर गिरने से थ्रस्ट कम हुआ, सैटेलाइट ऑर्बिट में नहीं पहुंचा. संभावित कारण: नोजल या सॉलिड मोटर में तकनीकी खराबी (पूर्ण रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई). PSLV का भविष्य क्या है? PSLV का भविष्य बहुत उज्ज्वल है. यह अभी भी ISRO का सबसे भरोसेमंद रॉकेट है और आने वाले सालों में भी मुख्य रहेगा.       प्राइवेट सेक्टर का रोलः 2022 से PSLV का उत्पादन और ऑपरेशन प्राइवेट कंसोर्टियम (L&T, HAL आदि) को सौंपा जा रहा है. 2026 में पहली प्राइवेट PSLV लॉन्च संभावित है.     नई तकनीकः 3D प्रिंटेड पार्ट्स, बेहतर इंजन (जैसे PS4 में सुधार) से लागत कम और विश्वसनीयता बढ़ रही है.     भविष्य के मिशनः छोटे सैटेलाइट्स, कमर्शियल राइडशेयर, रिमोट सेंसिंग, नेविगेशन और अंतरिक्ष विज्ञान मिशन इसी पर निर्भर रहेंगे.     प्रतिस्पर्धाः SSLV और LVM3 जैसे नए रॉकेट्स आएंगे, लेकिन PSLV की सटीकता और कम लागत के कारण यह वर्कहॉर्स बना रहेगा. PSLV ने भारत को अंतरिक्ष में विश्वसनीयता दी है. आने वाले दशकों में भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. PSLV-C62 की सफलता इसकी मजबूती को फिर साबित करेगी. 

इंडियन नेवी ने हल्दिया में शुरू किया अपना नया बेस, बांग्लादेश-चीन पर रहेगी निगाह

 हल्दिया भारतीय नौसेना पश्चिम बंगाल के हल्दिया में एक नया नौसैनिक बेस स्थापित करने का काम शुरू कर रही है. यह बेस उत्तरी बंगाल की खाड़ी (Northern Bay of Bengal) में भारत की समुद्री मौजूदगी को काफी मजबूत करेगा. खासकर चीन की नौसेना की बढ़ती गतिविधियों, बांग्लादेश से समुद्री घुसपैठ और पाकिस्तान के साथ बदलते क्षेत्रीय हालात के बीच यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है. आइए जानते हैं यह बेस क्यों बन रहा है, इसमें क्या होगा, कौन से जहाज तैनात होंगे और इसका रणनीतिक महत्व क्या है. हल्दिया बेस का प्लान क्या है? स्थान और प्रकार: हल्दिया, कोलकाता से करीब 100 किमी दूर हुगली नदी पर स्थित है, जहां से बंगाल की खाड़ी में सीधा पहुंच है. यह बेस अभी तक नामित नहीं हुआ है. इसे नौसैनिक डिटैचमेंट (नौसैनिक चौकी) कहा जा रहा है. आकार: यह बड़ा कमांड नहीं होगा, बल्कि छोटा बेस होगा. इसमें करीब 100 अधिकारी और नाविक तैनात रहेंगे. निर्माण: मौजूदा हल्दिया डॉक कॉम्प्लेक्स (1970 से चल रहा) का इस्तेमाल किया जाएगा. शुरुआत में एक विशेष जेट्टी (जहाज बांधने की जगह) और शोर सपोर्ट सुविधाएं बनाई जाएंगी. इससे बेस जल्दी तैयार हो जाएगा, ज्यादा नई इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं पड़ेगी. लाभ: हुगली नदी से कोलकाता तक लंबा सफर बच जाएगा. बेस बंगाल की खाड़ी में तेजी से पहुंच सकेगा. कौन से जहाज तैनात होंगे? बेस मुख्य रूप से छोटे और तेज जहाजों के लिए होगा…  फास्ट इंटरसेप्टर क्राफ्ट्स (FICs): ये छोटे, तेज (45 नॉट्स तक स्पीड) जहाज हैं, जो मशीन गन से लैस हैं. ये 100 टन के करीब होते हैं और 10-12 लोग चला सकते हैं. न्यू वॉटर जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट्स (NWJFACs): ये 300 टन के जहाज हैं, जो 40-45 नॉट्स की स्पीड से चलते हैं. CRN-91 गन से लैस होंगे और नागास्त्र जैसे लूटरिंग मुनिशन (ड्रोन जैसी स्मार्ट मिसाइलें) से भी तैनात हो सकते हैं. ये निगरानी, हमला और सटीक स्ट्राइक के लिए हैं. खरीद: 2024 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 120 FICs और 31 NWJFACs की खरीद को मंजूरी दी थी. ये जहाज तटीय सुरक्षा, घुसपैठ रोकने, बंदरगाह सुरक्षा और स्पेशल ऑपरेशंस के लिए हैं. क्यों बन रहा है यह बेस? मुख्य कारण भारतीय नौसेना ने पूर्वी तट पर पहले से ही विशाखापत्तनम (ईस्टर्न नेवल कमांड) और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में बड़े बेस हैं. लेकिन उत्तरी बंगाल की खाड़ी में मजबूत मौजूदगी की जरूरत इसलिए है… चीन की बढ़ती गतिविधियां: पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) हिंद महासागर में ज्यादा सक्रिय हो रही है. बंगाल की खाड़ी में चीनी जहाजों की निगरानी जरूरी है. बांग्लादेश से समुद्री घुसपैठ: भारत-बांग्लादेश सीमा पर पानी के रास्ते से अवैध घुसपैठ बढ़ रही है. उथले पानी और घने समुद्री यातायात में तेज जहाज बहुत उपयोगी हैं. पाकिस्तान-बांग्लादेश रिश्ते: हाल के समय में दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध मजबूत हो रहे हैं. चीन बांग्लादेश को सबमरीन और बेस दे रहा है. यह बेस भारत के पूर्वी इलाके की सुरक्षा के लिए जरूरी है. समुद्री मार्गों की सुरक्षा: हल्दिया से मलक्का स्ट्रेट तक निगरानी आसान होगी, जो वैश्विक व्यापार का महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है. रणनीतिक महत्व     यह बेस भारत को बंगाल की खाड़ी में तेज प्रतिक्रिया (क्विक रिस्पॉन्स) देने की क्षमता देगा.     घुसपैठ, तस्करी, समुद्री डकैती और आपदा राहत में मदद मिलेगी.     क्षेत्र में भारत की प्रमुख सुरक्षा प्रदाता भूमिका मजबूत होगी.     पुरानी जमीन पहले से आवंटित थी, जो अब उपलब्ध हो गई है. इससे काम तेजी से शुरू हो सकेगा. हल्दिया बेस भारतीय नौसेना की पूर्वी तट पर विस्तार की योजना का हिस्सा है. छोटे लेकिन तेज जहाजों से यह बेस घुसपैठ रोकने, निगरानी बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान से जुड़े चुनौतियों के बीच यह कदम भारत की समुद्री सुरक्षा को नई ताकत देगा. 

रविवार को एमपी में 1100 ट्रैक्टरों के साथ सीएम मोहन यादव का किसान मेगा शो, जंबूरी मैदान में होगा सम्मेलन

भोपाल   मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में आज  11 जनवरी को सीएम मोहन यादव किसानों के बीच मेगा शो करेंगे। इस आयोजन में भोपाल और आसपास के एक दर्जन जिलों से करीब 1100 ट्रैक्टरों के साथ किसान राजधानी पहुंचेंगे। पहले चरण में भोपाल- इंदौर बायपास पर किसानों की विशाल रैली निकाली जाएगी, जिसमें सीएम मोहन यादव शामिल होंगे। इसके बाद जम्बूरी मैदान में किसान सम्मेलन आयोजित होगा, जहां मुख्यमंत्री कृषि वर्ष 2026 की औपचारिक घोषणा करेंगे। जंबूरी मैदान पर होगा किसानों का जुटान मप्र की मोहन सरकार इस साल 2026 को कृषि कल्याण वर्ष के तौर पर मना रही है। भोपाल के जंबूरी मैदान पर 11 जनवरी को एक बड़ा किसान सम्मेलन होगा। इस सम्मेलन में सीएम डॉ मोहन यादव कृषि कल्याण वर्ष 2026 की औपचारिक शुरुआत करेंगे। सीएम मोहन यादव का मेगा शो कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर से भोपाल-इंदौर बायपास स्थित एक निजी कॉलेज परिसर में उतरेंगे। यहां से वे सीधे किसानों की रैली में शामिल होंगे और ट्रैक्टर रैली के साथ जम्बूरी मैदान तक पहुंचेंगे। आयोजन स्थल तक मुख्यमंत्री का किसानों के साथ सड़कों पर उतरना सरकार की किसान केंद्रित नीति का बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश माना जा रहा है। यह इसलिए भी किया जा रहा है कि इस वर्ष किसानों और कृषि पर सरकार को पूर्व से ज्यादा फोकस होगा। रैली में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए किसान अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ हिस्सा लेंगे। ट्रैफिक प्रबंधन और सुरक्षा को लेकर प्रशासन विशेष इंतजाम कर रहा है ताकि शहर की यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो। सीएम बताएंगे कृषि वर्ष 2026 का रोडमैप जम्बूरी मैदान में होने वाले किसान सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कृषि वर्ष 2026 को लेकर सरकार की रूपरेखा प्रस्तुत कर सकते हैं। सम्मेलन में मुख्यमंत्री सरकार के आगामी तीन वर्षों के कृषि और कृषकों पर आधारित लक्ष्य भी सार्वजनिक कर सकते हैं। इन लक्ष्यों का मुख्य फोकस किसानों की आय में वृद्धि, आधुनिक कृषि तकनीकों के विस्तार, कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन पर रहेगा। सम्मेलन में प्राकृतिक खेती, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल विविधीकरण और मूल्य संवर्धन जैसे विषयों पर भी सरकार की योजनाओं का खाका रखा जा सकता। इस मौके पर मुख्यमंत्री किसानों से सीधा संवाद भी कर सकते हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ कहा है कि लक्ष्य सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाना, रोजगार सृजन और कृषि को ग्लोबल मार्केट से जोड़ना है। इसके लिए 3 साल का रोडमैप तय कर गतिविधियां चलाई जाएंगी। खेती से जुड़े सभी विभाग कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यानिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य और ऊर्जा आपसी समन्वय से काम करेंगे। ब्राजील-इजराइल तक ट्रेनिंग लेने जाएंगे किसान किसानों की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य और संभाग स्तर पर प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट कराई जाएंगी। सरकार किसानों को देश के उन्नत कृषि राज्यों के साथ-साथ इजराइल और ब्राजील जैसे देशों में आधुनिक खेती, पशुपालन और तकनीकी नवाचार देखने भेजेगी। किसानों की आय बढ़ाने का सीधा प्लान सरकार ने 2026 को कृषि वर्ष घोषित करते हुए साफ किया है कि हर योजना का अंतिम लक्ष्य किसानों की आमदनी बढ़ाना होगा। इसके लिए कृषि गतिविधियों को तीन साल के लक्ष्य के साथ संचालित किया जाएगा। खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित न रखकर बाजार, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट से जोड़ा जाएगा, ताकि किसान को उपज का बेहतर दाम मिल सके। मशीन, तकनीक और सिंचाई पर फोकस खेती की लागत घटाने और उत्पादन बढ़ाने के लिए कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। माइक्रो इरिगेशन सिस्टम को प्रोत्साहित कर पानी की बचत के साथ उपज बढ़ाने की योजना है। किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए एग्री स्टेक और डिजिटल कृषि को जमीनी स्तर पर लागू किया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 के प्रमुख उद्देश्य किसानों की आय में वृद्धि: खेती को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक आधारित रोजगार मॉडल में बदलना। कृषि आधारित उद्योगों का विकास: खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य पालन और उद्यानिकी को बढ़ावा देना। नवाचार और आधुनिक तकनीक: ड्रोन सेवाएं, हाइड्रोपोनिक्स, एग्री-स्टेक, किसान उत्पादक संगठन (FPO) प्रबंधन से युवाओं को जोड़कर रोजगार सृजन। प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग: मृदा स्वास्थ्य परीक्षण, पर्यावरण अनुकूल खेती और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित प्रयोग को प्रोत्साहन। 

625 KM लंबा ‘टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर’ बनेगा MP में, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और पन्ना को जोड़ने वाली सड़कें

 भोपाल टाइगर स्टेट' मध्यप्रदेश अब वन्यजीव प्रेमियों के लिए दुनिया का सबसे केंद्र बनेगा. राज्य सरकार पेंच से कान्हा, कान्हा से बांधवगढ़ और बांधवगढ़ से पन्ना को जोड़ने के लिए 625 किलोमीटर लंबे मार्गों को अपग्रेड करेगी. इस प्रोजेक्ट पर 5000 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दिल्ली-एनसीआर से मध्यप्रदेश की दूरी कम करने और औद्योगिक विकास के लिए कई मेगा प्रोजेक्ट्स का रोडमैप शेयर किया है. इसके तहत ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के लिए 12 हजार करोड़ रुपए की अटल पथ योजना उत्तरप्रदेश और दिल्ली-एनसीआर को जोड़ेगी. इससे मध्यप्रदेश से दिल्ली की दूरी घटकर मात्र 3 से 4 घंटे रह जाएगी. इसके अलावा, 9 हजार 716 करोड़ की लागत से बनने वाला भोपाल-जबलपुर ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे प्रदेश के दो बड़े केंद्रों को जोड़ेगा. इन सड़कों के विकास से मध्यप्रदेश की पहुंच बंदरगाहों तक आसान होगी, जिससे व्यापार और उद्योगों को रफ्तार मिलेगी. मुख्यमंत्री ने बताया कि विकास कार्यों में क्वालिटी और रफ्तार के लिए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ रोडमैप तैयार किया गया है. सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए अधिकांश सड़क परियोजनाओं को दिसंबर 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य है. खंडवा बायपास, जबलपुर रिंग रोड, इंदौर-हरदा और रीवा बायपास के कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. पड़ोसी राज्यों को सौगात श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल बसाहट के बाद अब राजस्थान और उत्तरप्रदेश के पर्यटकों की संख्या भी बढ़ी है. मुख्यमंत्री के अनुसार, भौगोलिक स्थिति के कारण यह टाइगर कॉरिडोर पड़ोसी राज्यों के पर्यटकों के लिए भी एक बड़ी सौगात साबित होगा.