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उत्तर प्रदेश में आज जारी होगी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट, तीन करोड़ नाम हो सकते हैं बाहर, घर बैठे ऐसे करें चेक

लखनऊ यूपी में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मंगलवार को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जाएगी. निर्वाचन आयोग दोपहर 3 बजे लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से पूरी प्रक्रिया से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक करेगा. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिणवा खुद मीडिया के सामने आकर मतदाता सूची में हुए बदलावों की जानकारी देंगे. ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के जारी होते ही प्रदेश के मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपना नाम देख सकेंगे. यह सूची आगामी चुनावों की तैयारी के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इसके जरिए साफ हो जाएगा कि किसका नाम मतदाता सूची में बना है और किसे दावे या आपत्ति दर्ज कराने की जरूरत पड़ेगी. निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अब तक कुल 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे. लेकिन SIR प्रक्रिया के बाद जो ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की जा रही है, उसमें करीब 12 करोड़ 55 लाख मतदाता ही शामिल होंगे. यानी लगभग 2 करोड़ 89 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं. किन वजहों से कटे नाम ? निर्वाचन आयोग के अनुसार, जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनमें मुख्य रूप से ये श्रेणियां शामिल हैं :  – जिनका निधन हो चुका है – स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाता, जो किसी अन्य जिले या राज्य में शिफ्ट हो चुके हैं – दो स्थानों पर पंजीकृत मतदाता, जिनका नाम एक से अधिक जगह दर्ज था – गणना प्रपत्र (Enumeration Form) न भरने वाले मतदाता – लंबे समय से अनुपस्थित मतदाता, जिनका दिए गए पते पर सत्यापन नहीं हो सका निर्वाचन आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को साफ और त्रुटिरहित बनाने के लिए इन नामों को हटाना आवश्यक था. 1 करोड़ मतदाताओं की नहीं हो सकी मैपिंग, भेजा जाएगा नोटिस इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा आंकड़ा सामने आया है. करीब 1 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं हो सकी है. ऐसे मतदाताओं को संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) की ओर से नोटिस भेजा जाएगा. नोटिस मिलने के बाद मतदाता को तय समयसीमा में अपनी पहचान और पते से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे. निर्वाचन आयोग ने इसके लिए 12 वैध दस्तावेजों की सूची पहले से तय कर रखी है, जिनमें से किसी एक की छायाप्रति हस्ताक्षर के साथ जमा करनी होगी. दस्तावेज सही पाए जाने पर नाम दोबारा मतदाता सूची में जोड़ा जा सकेगा. 6 फरवरी तक दर्ज करा सकते हैं दावे और आपत्तियां ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के साथ ही दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी. मतदाता आज से 6 फरवरी तक अपने नाम से जुड़ी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं या यदि नाम गलती से कट गया हो तो उसे जोड़ने का दावा कर सकते हैं. निर्वाचन आयोग के अनुसार यह तारीख तय की गई है :   दावे और आपत्तियां: आज से 6 फरवरी तक दावे-आपत्तियों का निस्तारण: 7 फरवरी से 27 फरवरी तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 6 मार्च को अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान हर दावे और आपत्ति की निष्पक्ष जांच की जाएगी. लखनऊ में सबसे ज्यादा नाम कटने की आशंका प्रदेश की राजधानी लखनऊ से जुड़े आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं. सूत्रों के अनुसार, राज्य में सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम लखनऊ जिले में कटे हैं. यहां करीब 12 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने की बात सामने आ रही है. जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार 4.57 लाख मतदाता दिए गए पते पर नहीं मिले वहीं 1.27 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है.  5.39 लाख मतदाता दूसरी विधानसभा या जिले में शिफ्ट हो चुके हैं जबकि कई मतदाताओं ने गणना प्रपत्र भरने से मना कर दिया.  इन सभी कारणों से उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं. 2003 की सूची बनी आधार निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं का नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया, या जिनके अभिभावकों का नाम उस सूची में शामिल था, उनके नाम सुरक्षित रखे गए हैं. ऐसे मतदाताओं की मैपिंग पहले ही पूरी कर ली गई है. इसके उलट, जिन मतदाताओं या उनके अभिभावकों का नाम 2003 की सूची में नहीं मिल पाया है, उन्हें नोटिस भेजकर दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा. वेबसाइट पर ऐसे करें नाम की जांच ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाता निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र, और मतदाता विवरण में से जरूरी जानकारी भरकर आसानी से देख सकेंगे. यदि किसी को नाम में त्रुटि या नाम गायब होने की शिकायत है, तो वह ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आपत्ति दर्ज करा सकता है. 3 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस, सभी की नजरें निर्वाचन आयोग पर पूरे मामले को लेकर आज दोपहर 3 बजे लखनऊ में निर्वाचन आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने जा रही है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा इस दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची के अंतिम आंकड़े, नाम कटने के कारण, आगे की प्रक्रिया और मतदाताओं के लिए जरूरी दिशा-निर्देश मीडिया के सामने रखेंगे. राजनीतिक दलों से लेकर आम मतदाताओं तक, सभी की नजरें इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हुई हैं. माना जा रहा है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के बाद प्रदेश की सियासत में भी हलचल तेज हो सकती है. अंतिम सूची पर टिकी नजर फिलहाल, आज जारी होने वाली ड्राफ्ट मतदाता सूची को अंतिम नहीं माना जाएगा. निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि दावे और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 6 मार्च को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. उसी सूची के आधार पर आगामी चुनावों की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.

CBI जांच में खुलासा- 1 करोड़ लेकर टामन गिरोह ने बना दिया डिप्टी कलेक्टर

रायपुर. राजधानी से लगभग 125 किलोमीटर दूर बारनवापारा के घने जंगलों में सीजीपीएससी भर्ती घोटाले की साजिश रची जा रही थी। सीबीआइ की अंतिम चार्जशीट में राजफाश हुआ है कि आयोग के पूर्व अध्यक्ष टामन सोनवानी ने 35 चयनित अभ्यर्थियों को जंगल के एक रिसार्ट में ठहराकर परीक्षा की विशेष तैयारी कराई। कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने इसमें सहयोग किया। इसी रिसार्ट के एक कमरे में प्रश्नपत्र लीक करने और चयन सूची तैयार करने की योजना बनाई गई। जांच में उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े अभ्यर्थियों का चयन किया गया। भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में सीजीपीएससी 2021 की परीक्षा 26 से 29 जुलाई को हुई थी। चार्जशीट में दावा किया गया है कि बारनवापारा के रिसार्ट में 11 से 24 मई 2022 के बीच 35 परीक्षार्थियों को ठहराया गया था। ये सभी कारोबारी, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े थे। इनकी बुकिंग राहुल हरपाल ने की थी। अभ्यर्थियों को राज्य सेवा परीक्षा का असली प्रश्न पत्र दिया गया और उन्हें कमरों में ही परीक्षा हल करने की व्यवस्था की गई। आरोपितों ने परीक्षा से लेकर चयन तक की प्रक्रिया के कई राज सीबीआइ के सामने उजागर किए हैं। विकास और उत्कर्ष चंद्राकर ने सीजीपीएससी मेंस का प्रश्नपत्र साल्वर को दिया। चार्जशीट में यह भी स्पष्ट हुआ कि पीएससी में चयन के लिए पद के अनुसार भारी-भरकम रेट तय थे, जैसे डिप्टी कलेक्टर बनने के लिए एक करोड़ रुपये।

छत्तीसगढ़ में महिला एवं बाल विकास योजनाओं से सशक्तिकरण की नई दिशा: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े

रायपुर : महिला एवं बाल विकास की योजनाओं से छत्तीसगढ़ में सशक्तिकरण की नई इबारत: मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े रायपुर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने आज संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि विगत दो वर्षों में छत्तीसगढ़ शासन ने महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक और ठोस बदलाव लाने के लिए ऐतिहासिक पहल की है। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को सम्मान, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करना है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से 69 लाख से अधिक महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिला है और अब तक 14 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उनके खातों में अंतरित की जा चुकी है। योजना का सामाजिक प्रभाव यह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब पारिवारिक और आर्थिक निर्णयों में स्वतंत्र भूमिका निभा रही हैं। वहीं प्रधानमंत्री मातृवंदना योजना के तहत 4.81 लाख महिलाओं को 237 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी गई है, जिससे छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान प्राप्त किया है। प्रेस वार्ता में मंत्री ने कहा कि राज्य में कुपोषण के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ी जा रही है। नवंबर 2023 की तुलना में नवंबर 2025 तक स्टंटिंग, वेस्टिंग और अंडरवेट बच्चों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है। 19 लाख से अधिक हितग्राहियों को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें महिला स्व सहायता समूहों की भागीदारी से पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण वितरण सुनिश्चित हुआ है। महिला सुरक्षा एवं संरक्षण के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181 और चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के माध्यम से हजारों महिलाओं और बच्चों को त्वरित सहायता प्रदान की गई है। बाल संरक्षण सेवाओं, दत्तक ग्रहण, फॉस्टर केयर और न्यायिक प्रकरणों के निराकरण में भी छत्तीसगढ़ अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों के उन्नयन, नई नियुक्तियों, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली और ई-भर्ती पोर्टल जैसी पहलों से विभागीय कार्यप्रणाली को सुदृढ़ किया गया है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत हजारों बेटियों के विवाह गरिमामय ढंग से संपन्न कराए गए हैं। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं छत्तीसगढ़ को एक सुरक्षित, सशक्त और समावेशी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं।

माघ मेला-2026 को लेकर रेलवे का बड़ा इंतजाम, प्रयाग स्टेशन पर कई ट्रेनों को अस्थायी ठहराव

इंदौर माघ मेला-2026 के अवसर पर यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उत्तर रेलवे द्वारा प्रयाग स्टेशन पर कुछ ट्रेनों को अस्थायी ठहराव प्रदान किया है। इस ठहराव में पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल से होकर गुजरने वाली कुछ ट्रेनें भी शामिल है। पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार इस अवधि के दौरान चार ट्रेनों को प्रयाग स्टेशन पर दो मिनट का अस्थायी ठहराव प्रदान किया है, जो कि तत्काल प्रभाव से 20 फरवरी 2026 तक प्रभावी रहेगा।   प्रयाग स्टेशन पर अस्थायी ठहराव वाली प्रमुख ट्रेनें : इंदौर-वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस आगमन 01:24 बजे/प्रस्थान 01:26 बजे, बांद्रा टर्मिनस-गाजीपुर सिटी एक्सप्रेस आगमन 01:58 बजे/प्रस्थान 02:00 बजे, गांधीनगर कैपिटल-वाराणसी सुपरफास्ट एक्सप्रेस आगमन 20:48 बजे/ प्रस्थान 20:50 बजे और ओखा-वाराणसी एक्सप्रेस आगमन 23:23 बजे/प्रस्थान 23:25 बजे रहेगा। इसके अतरिक्त अन्य कोई बदलाव नहीं किया गया हैं।  

क्रांति गौड़ के पिता की नौकरी फिर से बहाल, मुख्यमंत्री ने किया वादा पूरा

महिला क्रिकेटर क्रांति गौड़ के पिता की नौकरी हुई बहाल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्रांति गौड़ से किया वादा निभाया भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर संवेदनशील, मानवीय और प्रतिबद्ध नेतृत्व का परिचय देते हुए अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेटर व मध्यप्रदेश की प्रतिभावान खिलाड़ी क्रांति गौड़ से किए वादे को निभाते हुए उनके पिता श्री मुन्ना सिंह की वर्षों से निलंबित नौकरी को सोमवार को पुनः बहाल करवा दिया है। यह निर्णय न केवल एक परिवार के लिए राहत लेकर आया है बल्कि सरकार की संवेदनशीलता, खिलाड़ियों के प्रति सम्मान और न्यायप्रिय दृष्टिकोण का स्पष्ट उदाहरण है। गौरतलब है कि विगत दिनों महिला वनडे वर्ल्ड कप में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत के बाद आयोजित सम्मान समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रदेश की प्रतिभाशाली क्रिकेटर क्रांति गौड़ से उनके पिता की नौकरी बहाल करने का आश्वासन दिया था। जिसे उन्होंने नियमों के तहत निभाया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशानुसार पुलिस मुख्यालय द्वारा श्री मुन्ना सिंह को पुनः सेवा में बहाल कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि श्री मुन्ना सिंह, जो मध्यप्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे, वर्ष 2012 में चुनावी ड्यूटी के दौरान कथित लापरवाही के कारण निलंबित कर दिए गए थे। बीते 13 वर्षों से लंबित यह मामला अब मुख्यमंत्री की पहल से सकारात्मक समाधान तक पहुँचा है। क्रांति गौड़ का सपना हुआ साकार इस निर्णय से गौड़ परिवार को न केवल आर्थिक और सामाजिक संबल मिला है बल्कि क्रांति गौड़ का वह सपना भी साकार हुआ है, जिसमें वे अपने पिता को सम्मानपूर्वक पुलिस वर्दी में सेवानिवृत्त होते देखना चाहती थीं।  

2026 में मध्य प्रदेश के लिए बड़ी सौगातें, नए साल में युवाओं और किसानों को मिलेगा विशेष लाभ

भोपाल  नव वर्ष का उत्साह हर तरफ चरम पर है। इस बार साल 2026 विशेष महत्व रखने वाला है। किसानों की आय में बढ़ोतरी के लिए सरकार नई पहल शुरू करेगी। किसान कल्याण को देखते हुए ये वर्ष कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। इसके अंतर्गत किसान कल्याण के कई कार्यक्रम आयोजित होंगे। खेत और गांव को आगे बढ़ने के नए मौके सृजित किए जाएंगे।  वहीं, युवाओं की बात करें तो 40 हजार पदों पर पुलिस की नई भर्तियां होने की संभावना है। इससे प्रदेश की कानून व्यवस्था और सुरक्षा प्रणाली मजबूत होगी। तो चलिए यहां आपको क्रमश: बता रहे हैं क्या-क्या नई सौगातें मिलेंगी।  कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा कृषि वर्ष को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में एक बैठक में महत्वपूर्ण घोषणा की है। इस बैठक में सीएम ने कहा था कि वर्ष 2026 को मध्य प्रदेश में कृषि वर्ष के रूप में मनाया जाएगा। किसानों को लाभ पहुंचाना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता होगी। कृषि से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। प्रदेश में कृषि में नवाचार की व्यापक संभावनाएं हैं। धान की खेती को प्राथमिकता देते हुए, गेहूं, चना, दलहन, तिलहन और हॉर्टीकल्चर के क्षेत्रों में नवाचारों से किसानों को अवगत कराने के लिए उन्हें विभिन्न देशों का भ्रमण भी कराया जाएगा। कृषि वर्ष 2026 को ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ टैगलाइन के साथ मनाया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों की आय को दोगुने से अधिक बढ़ाना और कृषि को लाभकारी, टिकाऊ और तकनीक-आधारित रोजगार मॉडल में बदलना है। आत्मनिर्भर किसान, उन्नत खेती, बाजार से बेहतर जुड़ाव और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य और वानिकी जैसे क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर विकास मॉडल लागू किया जाएगा। इसके तहत प्राकृतिक खेती, डिजिटल सेवाएं, प्रसंस्करण और निर्यात उन्मुख कृषि के माध्यम से किसानों की शुद्ध आय बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण युवाओं के लिए ड्रोन सेवा, एफपीओ प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और हाइड्रोपोनिक्स जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तैयार किए जाएंगे। मध्य प्रदेश विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी नए साल 2026 की शुरुआत में कई खुशखबरी सामने आ रही हैं। पहली, विधानसभा पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस हो जाएगी। बजट सत्र में विधायकों को सभी जरूरी दस्तावेज़, प्रश्न-उत्तर और नोट्स टैबलेट पर उपलब्ध कराए जाएंगे। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा भी बजट प्रस्तुति टैबलेट के माध्यम से पेश करेंगे। सदन में हर विधायक की टेबल पर स्थायी टैबलेट लगाए जाएंगे, जिससे पूरी कार्यवाही बिना कागज के संचालित होगी। इसके साथ ही, मध्य प्रदेश की कैबिनेट भी ई-कैबिनेट होगी और बैठक का एजेंडा टैब पर भेजा जाएगा। नए साल में युवाओं को इन भर्तियां मिलेंगे नए अवसर एमपी में पुलिस में चालीस हजार भर्तियां की जाएंगी। एमपी पुलिस बोर्ड के द्वारा ये भर्तियां आयोजित होंगी। लेकिन इसका अभी तक कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन अभी तक जारी नहीं किया गया है। जबकि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सहायक प्रोफेसर भर्ती 2026 की अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती के अंतर्गत आयोग द्वारा विभिन्न विषयों में कुल 949 पदों पर नियमित नियुक्तियां की जाएंगी। इस भर्ती के लिए इच्छुक और पात्र अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी की जाएगी, जिसे उम्मीदवार एमपीपीएससी के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से पूरा कर पाएंगे। वहीं, मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने पूरे साल का भर्ती परीक्षा कैलेंडर जारी किया है. साल की शुरुआत में ग्रुप-1, ग्रुप-2 और ग्रुप-5 के तहत स्टाफ नर्स की संयुक्त भर्ती परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी होने की संभावना है.युवाओं के लिए यह बेहतर मौका हो सकता है। अधिक जानकारी के लिए ऑफिशियल वेबसाइट esb.mp.gov.in पर विजिट करें। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस को जल्द से जल्द मानव संसाधन उपलब्ध कराने के लिए घोषणा करते हुए कहा कि अब प्रदेश में मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड का गठन किया जाएगा। इससे पुलिस भर्तियों में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 के लिए स्वीकृत पदों की भर्ती मप्र पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा की जायेगी। आगामी वर्षों की भर्तियां 'पुलिस भर्ती बोर्ड' द्वारा की जायेंगी। पूर्व में  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा था कि पुलिस, जेल और नगर सेना एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी कोर्सेस में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियों में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिया जाएगा। पुलिस भर्ती पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष हमने 7,500 रिक्त पदों पर भर्ती की अनुमति दी है। पुलिस के करीब 22 हजार 500 पदों पर भर्ती होनी है। इसलिए अब हर साल 7,500-7,500 पदों पर भर्ती कर तीन साल में पुलिस विभाग के सभी रिक्त पद भर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी अब छठवें वेतनमान का पद पात्रतानुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिया जाएगा। गृह विभाग से जुड़ी सभी सेवाओं के आधुनिकीकरण एवं भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बहुत जल्द गृह एवं वित्त विभाग की संयुक्त बैठक कर सभी लंबित मसलों का समुचित समाधान निकाला जाएगा। MP: सरकार के 15 लाख कर्मचारियों की बल्लेबले दूसरी बड़ी खुशखबरी कर्मचारियों के लिए है। मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत राज्य सरकार अपने 15 लाख से अधिक कर्मचारियों और उनके परिवारों को कैशलेस हेल्थ कवरेज प्रदान करेगी। इस योजना में सामान्य बीमारी पर 5 लाख रुपये और गंभीर बीमारी या बड़े ऑपरेशन पर 10 लाख रुपये तक इलाज की सुविधा शामिल होगी। योजना स्थायी, अस्थायी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक वर्ग, सेवानिवृत्त कर्मचारी, नगर सैनिक, आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता समेत कुल लगभग 15 लाख लोगों के लिए लागू होगी। कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी या पेंशन से 250 से 1000 रुपये तक का अंशदान देंगे, जो सरकार के हिस्से के साथ मिलकर बीमा प्रीमियम में तब्दील होगा। वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों को इलाज का पूरा खर्च अपने जेब से करना पड़ता है … Read more

एमपी में पीएम स्वनिधि 2.0: स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगा ब्याज मुक्त लोन, बैंक लौटाएंगे काटी गई राशि

भोपाल   मध्यप्रदेश के लाखों स्ट्रीट वेंडर्स (रेहड़ी-पटरी वालों) के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री की पहल पर राज्य में 'पीएम स्वनिधि 2.0' के तहत लोन नियमों में बड़ा सुधार किया गया है। अब बैंकों की मनमानी पर लगाम लगेगी और हितग्राहियों को बिना किसी कटौती के पूरा लोन उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने 14 फीसदी की ब्याज दर पर सहमति देते हुए करोड़ों रुपये के रिफंड का रास्ता भी साफ कर दिया है। साथ ही समय पर लोन चुकाने वाले वेंडर्स को 50 हजार रुपए तक की अगली लोन लिमिट का लाभ मिलेगा। अब स्ट्रीट वेंडर्स को मिलेगी पूरी लोन राशि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'पीएम स्वनिधि योजना' को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश के छोटे व्यापारियों और रेहड़ी-पटरी वालों को बैंकों द्वारा ब्याज की रकम काटकर लोन देने की समस्या से मुक्ति मिलेगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के अनुसार, बैंकों ने पूर्व में हितग्राहियों के लोन से जो ब्याज की राशि काटी थी, उसे अब वापस लौटाया जाएगा। यह कुल राशि लगभग 120 करोड़ रुपए है। दरअसल, पीएम स्वनिधि योजना ऐसे छोटे स्ट्रीट वेंडर्स के लिए हैं, जिन्हें अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए छोटे लोन की जरूरत पड़ती है। योजना के तहत केंद्र 7 फीसदी ब्याज सब्सिडी देता है और बैंक का बाकी बचा ब्याज अनुदान मप्र सरकार देती है। हितग्राहियों को शून्य ब्याज पर पूरी रकम देने का प्रावधान है, लेकिन कुछ बैंक हितग्राहियों को ब्याज की रकम काटकर ये राशि दे रहे थे। सूत्र बताते हैं कि इसकी वजह से हितग्राहियों का योजना से मोहभंग हो रहा था। इसे देखते हुए राज्य सरकार की तरफ से वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा गया। मंत्रालय ने राज्य सरकार से अपर कैप लगाने की सहमति दे दी है यानी अब हितग्राहियों को 14 फीसदी ब्याज दर पर ही लोन मिलेगा और बैंक बिना ब्याज काटे ये राशि हितग्राहियों को देंगे।  14% ब्याज दर पर मिलेगा लोन दरअसल, केंद्र सरकार इस योजना में 7 प्रतिशत की ब्याज सब्सिडी देती है, जबकि शेष ब्याज का भुगतान मध्यप्रदेश सरकार करती है। प्रावधान के अनुसार, हितग्राहियों को यह लोन 'शून्य ब्याज' पर मिलना चाहिए। लेकिन बैंक अपनी सुरक्षा के लिए पहले ही ब्याज की रकम काटकर लोन दे रहे थे, जिससे छोटे व्यापारियों का नुकसान हो रहा था। अब राज्य सरकार ने वित्त मंत्रालय की सहमति से 14% ब्याज की 'अपर कैप' लगा दी है। इसका मतलब है कि अब बैंक बिना किसी कटौती के पूरी राशि वेंडर को देंगे और ब्याज का भुगतान सरकार करेगी। पीएम स्वनिधि योजना में एमपी नंबर-1 दरअसल, पूरे देश में प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश ने प्रथम स्थान हासिल किया है। सितंबर 2025 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश ने अब तक 13 लाख 46 हजार से अधिक रेहड़ी-पटरी वालों और छोटे व्यापारियों को इस योजना से जोड़कर रिकॉर्ड बनाया है। राज्य सरकार ने इन हितग्राहियों को 2 हजार 78 करोड़ रुपए का लोन वितरित किया है, साथ ही छोटे कारोबारियों को ब्याज के बोझ से मुक्त रखने के लिए अब तक 30 करोड़ रुपए की ब्याज सब्सिडी भी जारी की जा चुकी है, जो मध्यप्रदेश को इस कल्याणकारी योजना में देश का सिरमौर राज्य बनाती है। जानें क्यों बदला गया सिस्टम पीएम स्वनिधि योजना को रेहड़ी-पटरी वालों के लिए 'संजीवनी' माना जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर बैंकों द्वारा ब्याज की अग्रिम कटौती (Upfront Deduction) से वेंडर्स को पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद हितग्राही इस योजना से दूर हो रहे थे। इसी तकनीकी बाधा को दूर करने और योजना को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए 'स्वनिधि 2.0' वाले बदलाव किए गए हैं। योजना की 4 बड़ी ताकत 1. बिना गारंटी 'वर्किंग कैपिटल' का सहारा: कोविड-19 की मार झेलने वाले छोटे व्यापारियों के लिए यह योजना बिना किसी गारंटी के 'वर्किंग कैपिटल' (कार्यशील पूंजी) उपलब्ध कराती है। इसमें आपको किसी को जमानत देने या कागज गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती। 2. तीन किस्तों में मिलता है लाभ: योजना का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि जैसे-जैसे आपका कारोबार बढ़े, लोन की राशि भी बढ़ती जाए:     पहली किस्त: ₹10,000 (कारोबार शुरू करने के लिए)     दूसरी किस्त: ₹20,000 (पुराना लोन चुकाने पर पात्र)     तीसरी किस्त: ₹50,000 (समय पर भुगतान करने पर बड़ी मदद) 3. प्रभावी रूप से 'जीरो परसेंट' ब्याज: यह योजना छोटे व्यापारियों पर कर्ज का बोझ नहीं डालती। केंद्र सरकार लोन पर 7% की ब्याज सब्सिडी देती है। मध्यप्रदेश में इससे ऊपर का जितना भी ब्याज बैंक लगाता है, उसका पूरा भुगतान राज्य सरकार करती है। यानी हितग्राही के लिए यह कर्ज पूरी तरह ब्याज मुक्त है। 4. डिजिटल ट्रांजैक्शन पर 'कैशबैक' ईनाम: योजना सिर्फ कर्ज नहीं देती, बल्कि आधुनिक व्यापार से भी जोड़ती है। जो वेंडर्स डिजिटल पेमेंट (UPI/QR Code) का उपयोग करते हैं, उन्हें सरकार की ओर से ₹1200 सालाना तक का कैशबैक सीधे बैंक खाते में दिया जाता है। समय पर भुगतान और बड़े लाभ योजना की सबसे अच्छी शर्त यह है कि यदि कोई हितग्राही महज 3 महीने की समय सीमा में लोन की मूल राशि चुका देता है, तो वह तुरंत अगले बड़े लोन (20 हजार और फिर 50 हजार) के लिए पात्र हो जाता है। इससे न केवल उनकी क्रेडिट हिस्ट्री सुधरती है, बल्कि कारोबार के विस्तार के लिए बड़ी पूंजी भी सुनिश्चित होती है।    योजना में अब तक क्या हो रहा था योजना के तहत मध्य प्रदेश में 32 सरकारी और निजी बैंक लोन बांट रहे थे। नियम के अनुसार, बैंकों को हर तीन महीने में सरकार से ब्याज सब्सिडी की राशि का दावा (क्लेम) करना होता है, जिसे सरकार सीधे हितग्राही के लोन खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर करती है। लेकिन, ज्यादातर बैंक इस प्रक्रिया का पालन करने के बजाय एक आसान रास्ता अपना रहे थे:     ब्याज की एडवांस कटौती: बैंक हितग्राही को लोन देते समय ही ब्याज की अनुमानित राशि काटकर शेष रकम देते थे।     सब्सिडी क्लेम में देरी: वे सरकार से सब्सिडी का क्लेम 6 महीने या उससे भी अधिक समय के बाद करते थे। इस देरी के कारण कई बार हितग्राहियों के लोन … Read more

लाडली बहना योजना में नया अपडेट: कुछ महिलाओं के खाते में नहीं आएंगे पैसे, जानें क्या है पूरा मामला

भोपाल   मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना की अगली किस्त खाते में आने वाली है. इससे पहले योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जल्द ही योजना की राशि पात्र महिलाओं के खातों में सरकार की ओर से डाली जाएगी, लेकिन सभी महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिलेगा. कुछ लाभार्थियों के नाम सूची से हट सकते हैं और कई के पैसे खाते में अटक सकते हैं. जी हां… बैंक खाता, आधार लिंक या पात्रता से जुड़ी छोटी गलती भी परेशानी बन बहनों के लिए बन सकती है. इसलिए जरूरी है कि महिलाएं समय रहते अपनी जानकारी जांच लें, ताकि लाभ बिना रुकावट मिलता रहे. आइए आपको आगे की बात बताते हैं. जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे कर लें दरअसल, मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना के तहत जल्द ही महिलाओं के खातों में 1500 रुपये की राशि ट्रांसफर की जाएगी. सरकार ने इसकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं. तय तारीख के आसपास डीबीटी के माध्यम से पैसा सीधे लाभार्थी महिलाओं के बैंक खातों में भेजा जाएगा, जिससे उन्हें आर्थिक सहायता मिल सके. जिन महिलाओं के दस्तावेज पूरे नहीं हैं, जिनका बैंक खाता आधार से लिंक नहीं है या जो अब योजना की पात्रता में नहीं आतीं, उन्हें इस बार लाडली बहना योजना की राशि नहीं दी जाएगी. इसलिए जरूरी है कि सभी जरूरी दस्तावेज समय पर पूरे कर लिए जाएं.  मध्यप्रदेश की लाडली बहना योजना को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. जल्द ही लाभ ट्रांसफर होने वाला है, लेकिन सभी महिलाओं को इसका फायदा नहीं मिलेगा. कुछ बहनों के नाम लिस्ट से हट सकते हैं और कई के खाते में पैसा अटक सकता है .बैंक, आधार और पात्रता से जुड़ी छोटी सी गलती भारी पड़ सकती है.पूरी जानकारी पढ़ें और जानें कैसे सुनिश्चित करें कि आपका नाम लाभार्थी सूची में बना रहे.  बता दें कि इस योजना के लिए राशि हर महीने की 1 तारीख से 15 तारीख के बीच जारी की जाती है. इसलिए मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना की अगली किस्त (32वीं किस्त) 1 जनवरी से 15 जनवरी के बीच कभी भी जारी की जा सकती है. हालांकि पैसे जारी होने की सही तारीख की अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. बैंक खाता निष्क्रिय होने पर क्या होगा? जांच के दौरान यदि गलत जानकारी या अपात्रता पाई जाती है, तो महिलाओं का नाम योजना से हटाया जा सकता है और आगे भुगतान रोक दिया जाएगा. जिन बहनों का बैंक खाता निष्क्रिय है, आधार सीडिंग या एनपीसीआई लिंक नहीं है, उनके खाते में राशि अटक सकती है. महिलाएं अपने नजदीकी शिविर, पंचायत या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दस्तावेज और स्टेटस अपडेट करा सकती हैं. ऐसी महिलाओं के पैसा आएंगे खाते में महिलाएं अपना आधार-बैंक लिंक जरूर जांच लें, सभी दस्तावेज अपडेट रखें और योजना की पात्रता सुनिश्चित करें. जानकारी सही होने पर लाडली बहना योजना की 1500 रुपये की राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी.

8वें वेतन आयोग का ऐलान, कर्मचारियों के लिए बड़ी खुशखबरी—किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

भोपाल  देशभर के सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनर्स के बीच इन दिनों 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चा चरम पर है। केंद्र सरकार ने इसकी प्रक्रिया की शुरुआत पहले ही कर दी है, वहीं राज्यों में भी हलचल तेज हो गई है। नए साल पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बड़ा ऐलान करते हुए 8वें राज्य वेतन आयोग के गठन की घोषणा कर दी। इसके साथ ही असम यह फैसला लेने वाला देश का पहला राज्य बन गया। इस ऐलान के बाद अब मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में भी उम्मीदें बढ़ गई हैं। एमपी में तेज हुई हलचल, कर्मचारी संघ सक्रिय असम की पहल के बाद मध्यप्रदेश में भी 8वें वेतन आयोग को लेकर कवायद तेज हो गई है। राज्य कर्मचारी संघ ने इसे लेकर रणनीति बनानी शुरू कर दी है। कर्मचारियों को होने वाले संभावित लाभ का पूरा हिसाब-किताब तैयार करने की तैयारी चल रही है। राज्य कर्मचारी संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय अवस्थी और प्रवक्ता अनिल भार्गव ने बताया कि जल्द ही इस विषय पर विशेष बैठक बुलाई जाएगी।  8वें वेतन आयोग: जानें किस वर्ग को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा 8वां वेतन आयोग क्या है? सरकार हर 10 साल में वेतन आयोग का गठन करती है, ताकि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन व पेंशन की समीक्षा की जा सके। 8वां वेतन आयोग भी इसी उद्देश्य से बनाया गया है। इसके तहत सैलरी स्ट्रक्चर, भत्ते और पेंशन में संशोधन किया जाएगा, ताकि बढ़ती महंगाई का असर कर्मचारियों पर कम हो सके। कितने लोग होंगे लाभार्थी? इस वेतन आयोग से करीब 50 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी (रक्षा कर्मियों सहित) और लगभग 65 लाख पेंशनभोगी (रक्षा सेवानिवृत्तों सहित) लाभान्वित होंगे। यानी कुल मिलाकर करीब एक करोड़ लोग इस फैसले के दायरे में आएंगे। वेतन बढ़ोतरी कैसे तय होगी? 8वें वेतन आयोग में वेतन बढ़ोतरी का आधार फिटमेंट फैक्टर होगा। अभी सरकार ने इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक फिटमेंट फैक्टर 2.15 से लेकर 2.57 तक हो सकता है। फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, बेसिक सैलरी में उतनी ही ज्यादा बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के तौर पर, अगर फिटमेंट फैक्टर 2.15 रखा जाता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 38,700 रुपये हो सकती है। कितना बढ़ेगा वेतन? विशेषज्ञ करेंगे गणना कर्मचारी संघ के मुताबिक –  6वें और 7वें वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन किया जाएगा सभी संवर्ग, श्रेणी, वेतनमान और ग्रेड पे के आधार पर आकलन होगा वित्त विशेषज्ञों से चर्चा कर संभावित लाभ का खाका तैयार किया जाएगा इसके बाद निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संघ का प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री कार्यालय, सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों से भी मुलाकात करेगा। केंद्र सरकार का बड़ा कदम गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 3 नवंबर 2025 को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना देसाई कर रही हैं। केंद्र सरकार ने आयोग को 18 महीने में रिपोर्ट सौंपने का समय दिया है। अब सवाल यही—कब मिलेगा फायदा? असम की पहल के बाद उम्मीद की जा रही है कि अन्य राज्य भी जल्द बड़ा फैसला ले सकते हैं। अगर मध्यप्रदेश में भी 8वां वेतन आयोग लागू होता है, तो लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स को वेतन और पेंशन में बड़ा फायदा मिल सकता है। नजरें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं… कितना फायदा होगा, इसका करेंगे हिसाब किताब राज्य कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार 8 वें वेतनमान में कर्मचारियों, अधिकारियों को होनेवाले फायदे का पूरा हिसाब निकाला जाएगा। वित्त विशेषज्ञों से भी इस संबंध में बात करेंगे। इससे जो निचोड़ निकलेगा, राज्य सरकार को उसकी जानकारी देंगे। संघ के महामंत्री जितेंद्र सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य संजय अवस्थी और प्रवक्ता अनिल भार्गव के अनुसार जल्द ही इसके लिए बैठक बुलाई जाएगी। संभावित लाभ के आकलन के लिए कठिन कवायद राज्य कर्मचारी संघ का कहना है कि मध्यप्रदेश में 8 वें वेतन आयोग के लिए 6 वें और 7 वें वेतनमान का तुलनात्मक अध्ययन करेंगे। इसके साथ ही प्रदेश के सभी संवर्ग और श्रेणी के अधिकारियों, कर्मचारियों के वेतनमान और ग्रेड पे के हिसाब से 8 वें वेतनमान से संभावित लाभ का आकलन करेंगे।कर्मचारियों, विशेषज्ञों से चर्चा के बाद निष्कर्षो से राज्य सरकार को अवगत कराने ज्ञापन तैयार करेंगे। इसके साथ ही राज्य कर्मचारी संघ का प्रतिनिधिमंडल सीएम कार्यालय जाएगा। प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग के अधिकारियों को भी यह ज्ञापन दिया जाएगा।

बस्तर में माओवादी हिंसा की दिशा बदलने का वक्त, 60 लाख के इनामी माओवादी की हुई शिनाख्त

 जगदलपुर  बस्तर से लेकर तेलंगाना तक फैला माओवादी नेटवर्क अब निर्णायक रूप से टूट चुका है। दशकों से जारी लाल आतंक का ‘रिवर्स काउंटडाउन’ (उल्टी गिनती) शुरू हो गया है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा एजेंसियों का विश्वास है कि 26 जनवरी को इसकी घोषणा कर दी जाए।  तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख के मारे जाने के बाद बस्तर में संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है। पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष अब शीर्ष स्तर पर पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष है। 14 माओवादी शनिवार को सुकमा, बीजापुर में मारे गए थे। उधर, तेलंगाना में बारसे देवा ने अपने 20 साथियों के साथ समर्पण किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है। बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा। पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त वहीं सुकमा में बुर्कलंका और पामलूर इलाके में शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त हो गई है। सभी शवों को जिला मुख्यालय लाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंपा जाएगा। माओवादियों में डीवीसीएम वेट्टी मंगडू उर्फ मुक्का आठ लाख का इनामी, एसीएम माड़वी हितेश आठ लाख, सीवाईपीसी पोड़ियम जोगा 10 लाख, कोमरम बदरी, झितरू माड़वी, माड़वी मुक्का, मुचाकि मुन्नी, माड़वी जमली, पोड़ियम रोशनी ये सभी एसीएम जिन पर पांच लाख का इनाम घोषित था। इनके अलावा तामो नंदा, मड़कम रामा, मासे ये तीनों पार्टी के सदस्य थे और इन पर दो लाख का इनाम राशि घोषित था। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, एसएलआर राइफल, बीजीएल लांचर, 12 बोर हथियार, वायरलेस सेट, स्कैनर तथा बड़ी मात्रा में जिंदा राउंड बरामद किए गए हैं। हिंसा का भविष्य नहीं सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पत्रवार्ता में कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में निरंतर व निर्णायक प्रगति हो रही है। हिंसा का कोई भविष्य नहीं है और संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही बस्तर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने हिंसा के रास्ते पर चल रहे माओवादी कैडरों से समय रहते मुख्यधारा में लौटने और विकास के भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतत रणनीति और मजबूत खुफिया तंत्र का परिणाम है। पत्र में ग्रामीण को दी थी धमकी पत्रवार्ता में यह भी खुलासा हुआ कि घटनास्थल से एक धमकी भरा पत्र बरामद किया गया है, जिसमें माओवादियों ने मेहता ग्राम पंचायत के बालंगतोग गांव के एक ग्रामीण को पुलिस मुखबिर बताते हुए चेतावनी दी है। पत्र में जन अदालत में सजा देने और सुधार न होने पर कार्रवाई की धमकी का उल्लेख है। मोबाइल टावर एसपी ने कहा कि यह माओवादियों की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। 41 बड़ी घटनाओं में शामिल था मंगड़ू पुलिस के अनुसार कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू 41 बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है, जिनमें ताड़मेटला, बुर्कापाल, एर्राबोर राहत शिविर, दरभागुड़ा, कोताचेरू और मिनपा जैसी भीषण घटनाएं शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में जवान और नागरिक बलिदान हुए थे।